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मोदीराज लाओ

मोदीराज लाओ
भारत बचाओ

सोमवार, 17 मई 2010

आप ही बताओ हम अपना ये दुखड़ा आपके पास नहीं तो किसके पास रोयें....इस बुरे वक्त में आप हमारा साथ न दोगे तो कौन देगा..साथ नहीं देना है तो न दो ....पर इतना तो बता दो कि इस हिंसा का सिकार होने वालों की खता क्या है?




जी हां ये हमारा लेख नहीं वो दर्द है जो हम किसी को नहीं बता सकते . लोग समझते हैं हम लेख लिख रहे हैं पर सच्चाई ये हैं कि वो सच्चाई है जो हमें दिन-रात उस दर्द का एहसास करवा रही है जिसका क्या पता आपको कभी एहसास होगा भी या नहीं।धर्म-जाति-भाषा जैसे मुद्दों से हमारा दूर का भी कोई बास्ता नहीं।हमारी शिक्षा-दीक्षा भी उसी मैकाले के सिसटम में हुइ है जिसमें आपकी ।हम भी आपकी तरह मस्त मलंग जीवन जी रहे थे कि तभी हमारा सामना कुछ ऐसी घटनाओं से हुआ जिन्होंने हमें देश पर बढ़ रहे इसलामिक हमले के खतरनाक षडयन्त्रों व परिणामों का एहसास करवा दिया। जो हमने महसूस किया वो लिख रहे हैं इस पर आपकी प्रतिक्रिया ही ये तय करेगी कि हमें भविष्य में अपना दर्द आपसे वतांये कि नहीं ।धैर्य से पढ़ना विशलेसण करना अगर आपको लगे कि देश में ये सब योजनाबध तरीके से हो रहा है तो समाधान वताना रोकने का अगर झूठ लगे तो कारण सहित समझाना क्या झूठ है ?


वैसे तो सारे संसार में मुस्लिम और गैरमुस्लिम की इस लड़ाई में दो चरण होते हैं एक दारूल हरब और दूसरा दारूल इस्लाम । दारूल हरब में गैरमुस्लिमों की सरकार होती है जिसे मुसलमान अपनी सरकार नहीं मानते व देशभक्ति से जुड़े हर कदम-हर कानून का विरोध करते हैं। सब मुसलमानों को जिहाद के लिए उकसाते हैं। ज्यादा बच्चे पैदा करने का वचन लेते हैं । गैरमुस्लिमों की बेटियों को भगाते हैं । इस जिहाद के आगे बढ़ाने के लिए गैरमुस्लिमों पर हमला बोल देते हैं । साथ ही इनका जो मुस्लिम नेतृत्व होता है वो बहुसंख्यकों की प्रतिक्रिया से बचने के लिए व मुस्लिम देशों का सहयोग लेने के लिए मुस्लिमों पर हो रहे काल्पनिक अत्याचार, मुस्लिमों के पिछड़ेपन का दुष्प्रचार करता है। कुरान और शरियत का बहाना लेकर मुसलमानों को उस देश की मुख्यधारा में शामिल होने से रोकता हैं। ये तब तक चलता है जब तक मुस्लिमों की आबादी बहुसंख्यकों को धूल चटाने के काबिल नहीं हो जाती है जैसे ही ये स्थिति आती है अन्तिम हमला शुरू हो जाता है। इस दारूल हरब को दारूल इस्लाम बनाकर गैर मुस्लिमों का सफाया कर दिया जाता है । एक मुस्लिम राष्ट्र अस्तित्व में आ जाता है धीरे-धीरे गैर मुस्लिमों की हर निशानी को मिटा दिया जाता है । जैसे अफगानीस्तान में हिन्दुओं की लगभग हर निशानी मिटा दी गई।वेमियान में बौध मूर्तियों को तोड़ा जाना इसकी अंतिम कड़ी थी । पाकिस्तान,बांगलादेश में भी हिन्दुओं और हिन्दुओं से जुड़ी हर निशानी को मिटाने का काम अपने अंतिम दौर में है।


परन्तु भारत में जिहाद की प्रक्रिया तीन चरणों में थोड़े से अलग तरीके से पूरी होती है पहले चरण में मुसलमान हिन्दुओं की पूजा पद्धति पर सवाल उठाते हैं ।कभी-कभी धार्मिक आयोजनों पर हमला बोलते हैं ।अल्पसंख्यक होने की दुहाई देकर अपनी इस्लामिक पहचान बनाये रखने पर जोर देते हैं । अपने आप को राष्ट्र की मुख्यधारा से दूर रखते हैं धीरे-धीरे हिन्दुओं के त्योहारों पर व अन्य मौकों पर तरह-तरह के बहाने लेकर हमला करते हैं। हमला करते वक्त इनको पता होता है कि मार पड़ेगी पर फिर भी जिहाद की योजना के अनुसार ये हमला करते हैं। परिणामस्वरूप मार पड़ने पर मुसलमानों पर हो रही ज्यादतियों व अपने द्वारा किए गये हमले को हिन्दुओं द्वारा किया गया हमला बताकर मुस्लिम देशों में प्रचार करते हैं । अधिक से अधिक बच्चे पैदा करते हैं। बच्चों को स्कूल के बजाए मस्जिदों व मदरसों में शिक्षा की जगह जिहाद पढ़ाते हैं। फिर अपनी गरीबी का रोना रोते हैं । सरकार व विदेशों से आर्थिक सहायता पाना शुरू करते हैं फिर जैसे-जैसे आबादी बढ़ती जाती है, इनकी आवाज अलगावादी होती जाती है ।अपने द्वारा किए गये हमलों के परिणामस्वरूप मारे गये जिहादियों को आम मुसलमान बताकर जिहाद को तीखा करते हैं। इस बीच मदरसों-मस्जिदों व घरों में अवैध हथियार गोला बारूद इकट्ठा करते रहते हैं कुछ क्षेत्रों में बम्ब विस्फोट करते हैं प्रतिक्रिया होती है फिर अल्पसंख्कों पर अत्याचार का रोना रोया जाता है ।


दूसरे चरण में इस्लाम की रक्षा व प्रचार प्रसार के नाम पर सैंकड़ों मुस्लिम संगठन((जैसे इसलामिक रिलीफ आर्गनीजेशन,इस्लामिक मूबमैंट,लस्कर-ए- तोयवा,जैस-ए-मुहम्मद,तहरीक-ए-फुरकान,अल बदर,जमीयत-अल-मुजाहीदीन,अलकायदा,हरकत-उल-मुजाहीदीन,अल कायदा,देबबन्द, हरकत-उल-अंसार, हरकत-उल-जेहादे-इसलामी,हिज्ब-ल मुजाहीदीन,जम्मू एंड कसमीर इसलामिक फ्रंट,सिमी,दीनदार अंजुमन,अल्हा टायरस,हुरियत कानफ्रैंर्स ....सूची बहुत लम्बी है) सामने आ जाते हैं। हिन्दुविरोधी नेताओं, लेखकों व प्रचार-प्रसार के साधनों को खरीदा जाता है। उन्हें उन हिन्दुओं के साथ एकजुट किया जाता है, जो हिन्दुत्व को अपने स्वार्थ के रास्ते में रूकावट के रूप में देखते हैं। इस सब को नाम दिया जाता है, धर्मनिर्पेक्षता का मकसद बताया जाता है अल्पसंख्यकों की रक्षा का। इस बीच हिन्दुओं पर हमले तेज हो जाते हैं जगह- जगह हिन्दुबहुल क्षेत्रों व मन्दिरों में बम्ब विस्फोट हिन्दुओं के त्योहारों के आस पास या त्योहारों पर कर दहशत फैलाई जाती है ।


जब हिन्दूसमाज में क्रोध पैदा होने लगता है तो फिर धर्मनिर्पेक्षतावादियों व जिहादियों के गिरोह द्वारा मुसलमानों को अनपढ़ ,गरीब व हिन्दुओं द्वारा किए गये अत्याचारों का सताया हुआ बताकर धमाकों में मारे गये हिन्दुओं के कत्ल को सही ठहराया जाता है । हिन्दुओं के कत्ल का दोष हिन्दुओं पर ही डालने का षडयन्त्र रचा जाता है।


मुस्लिम जिहादी आतंकवादियों व उनके समर्थकों द्वारा रचे गये इस षड्यन्त्र के विरूद्ध हिन्दुओं को सचेत करने वालों व इन जिहादी हमलों के विरूद्ध खड़े होने वालों पर सांप्रदायिक कहकर हमला बोला जाता है । जिहादियों द्वारा फिर हिन्दुबहुल क्षेत्रों व मन्दिरों में हमले किए जाते हैं हिन्दू कहीं एकजुट होकर जिहादियों व इन के समर्थकों का सफाया न कर दें इसलिए बीच-बीच में हिन्दुओं को जाति,भाषा,क्षेत्र के आधार पर लड़ाए जाने का षड्यन्त्र रचा जाता है।


साथ में जिहादियों के तर्कों को अल्पसंख्यकवाद के नाम पर हिन्दुओं के मूल अधिकारों पर कैंची चलाकर मुसलमानों को विशेषाधिकार दिए जाते हैं। फिर जिहादियों द्वारा जगह- जगह हिन्दुबहुल क्षेत्रों व मन्दिरों में बम्बविस्फोट किये जाते हैं। फिर हिन्दुओं द्वारा इन हमलों के विरूद्ध आवाज उठाई जाती है। फिर आवाज उठाने वालों को सांप्रदायिक बताकर जागरूक हिन्दुओं को चिढ़ाया जाता है व बेसमझ हिन्दुओं को मूर्ख बनाने के लिए एक आधा मस्जिद के आस पास इस तरह बम्ब विस्फोट करवाकर हिन्दुओं में दो तरह का भ्रम पैदा किया जाता है। कि हमले सिर्फ मन्दिरों पर नहीं हो रहें हैं मस्जिदों पर भी हो रहे हैं दूसरा ये हमला हिन्दुओं ने किया है हिन्दू फिर छलावे में आ जाते हैं अपने-अपने काम में लग पड़ते हैं। ये धरमनिर्पेक्षों व जिहादियों का गिरोह साँप्रदायिक दंगों को रोकने के बहाने जिहादियों की रक्षा करने के नये-नये उपाय ढूँढता हैं। प्रायोजित कार्यक्रम कर हिन्दुओं की रक्षा में लगे संगठनों को बदनाम करने की कोशिश की जाती है। फिर जिहादियों द्वारा हिन्दुबहुल क्षेत्रों में हमले किए जाते हैं फिर इन हमलों को न्यायोचित ठहराने के लिए ये गिरोह जी जान लगा देता है फिर नये-नये बिके हुए गद्दार समाजिक कार्यकर्ता हिन्दुओं पर हमला बोलते हैं ये कार्यक्रम चलता रहता है जिहाद आगे बढ़ता रहता है ..........


फिर आता है तृतीय चरण जिसमें जिहादी और आम मुसलमान में फर्क खत्म हो जाता है । हिन्दुओं को हलाल कर, हिन्दुओं की मां बहन बेटी की आबरू लूटकर , हिन्दुओं को डराकर भगाकर जिहादियों द्वारा चिन्हित क्षेत्र को हिन्दुविहीन कर उसे बाकी देश से अलग होने का मात्र ऐलान बाकी रह जाता है। ध्यान रहे इस अन्तिम दौर में हलाल होने वाले वो हिन्दू होते हैं जो हिन्दुत्वनिष्ठ हिन्दुओं के कत्ल के वक्त जिहादियों का हर वक्त साथ देते हैं या ऐसे काम करते हैं जो जिहाद को आगे बढ़ाने मे सहायक होते हैं ।


28 टिप्‍पणियां:

honesty project democracy ने कहा…

हमारे ख्याल से इन साडी समस्याओं का कारण अशिक्षा,भूखमरी और सामाजिक असंतुलन तथा इन वोट के लोभी नेताओं का स्वार्थ आधारित तिकरम ही है / इसे तो अब आज के स्वतंत्रता सेनानी जो जान की परवाह न करें ,ऐसे लोग ही एकजुट होकर ठीक कर सकते हैं / आइये कुछ मिलजुलकर प्रयास करें / इस पोस्ट को पढ़िए और इंसानियत की हर संभव मदद कीजिये http://jantakifir.blogspot.com/2010/05/blog-post_17.html

Mithilesh dubey ने कहा…

आप सच लिखते हैं और हम आपके साथ हमेशा बनाये रखेंगे ।

aarya ने कहा…

सादर वन्दे !
हम साथ हैं बंधू, जैसे सच को मिटाया नहीं जा सकता वैसे ही सच बोलने वाले को रोका नहीं जा सकता, आप जारी रहे........
रत्नेश त्रिपाठी

L.R.Gandhi ने कहा…

देश में आज ३,५०,००० मदरसों में दारुल इस्लाम का ही पाठ पढ़ाया जा रहा है। अरब देशों से बेहीसाब पैसा आ रहा है, इस लिए इन्हें सरकार की मदरसों के अधुनिकर्ण की योजना भी स्वीकार नहीं । पाक में महज ११००० मदरसे हैं और हर साल १०००० जेहादी तैयार होते हैं। अब तो अमेरिका के पत्रकार भी इस तथ्य को मानने लगे हैं। एक दूसरा पहलू भी है; विश्व में इस्लामिक आतंक से मुसलमानों को ही सबसे अधिक नुक्सान हुआ है। २० साल इरान इराक युद्ध में ६ लाख मरे और ७ लाख ज़ख़्मी, सभी मुस्लिम थे। शिया -सुन्नी एक दूजे के खून के पियासे हैं। पाक सैनिकों ने पूर्वी पाक (बंगला देश) में २० लाख मुस्लिमों का वध किया था,जिस पर ७/२००२ में मुशर्रफ ने महज़ खेद प्रकट किया।

सुनील दत्त ने कहा…

गांधी जी आप ठीक कह रहे हैं पर अगर सरकार चाहे तो क्या नहीं कर सकती पर जब सरकार भी दारूल इसलाम की अबधारणा को आतंकवादियों की फांसी रोकर समर्थन देने लगे तब क्या करें?

फ़िरदौस ख़ान ने कहा…

सुनील जी,
इन सारी समस्याओं की जड़ वह शिक्षा है, जो ख़ुद को 'श्रेष्ठ' और दूसरों को 'तुच्छ' समझने की मानसकिता पैदा करती है...
आप सूफ़ी संतों को देखिये...सूफ़ियों ने कट्टरवाद को कभी पसंद नहीं किया...
हम ख़ुद मुल्लाओं की बातों को तरजीह नहीं देते...
हमें सूफ़ीवाद पसंद है...
हालांकि 'कुछ लोग' सूफ़ियों को काफ़िर मानते हैं...
उनका यहां तक कहना है कि सूफ़ियों ने ही इस्लाम का बड़ा गर्क़ किया है...

यह सच है कि आज दुनियाभर में इस्लाम के नाम पर दहशत को बढ़ावा दिया जा रहा है... और यह बेहद अफ़सोस और शर्म की बात है... हम इसके ख़िलाफ़ हैं...

सुनील दत्त ने कहा…

आपसे सहमत हैं जी

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

Main iske liye hinduo ko Doshee maantaa hoon, kyonki inkee hee wahaj se ye 15-20 % log poore desh ko Dominate kar rahe hai.

सुनील दत्त ने कहा…

गोदियाल जी इसमें कोई शक नहीं कि इसके लिए खुद को सेकुलर कहने वाले हिन्दू वाकी सब से ज्यादा दोशी हैं पर गोदियाल जी आप इस बात से भी सहमत होंगे कि संचार क्रांति के इस युग में गद्दारों व विदेसी मालिकों की पकड़ में चल रहा मिडीया किसी भी देशद्रोह की बात को कुछ इस तरह परोसता है कि आम आदमी की तो छोड़ो अच्छे पढ़े लिखे लोग भी धोखा खाये जा रहे हैं

kunwarji's ने कहा…

आपका ये लेख गहन विश्लेषण और सच्चे अनुभवों को दिखा रहा है!एक बात सुनी थी,मनुष्य खुद भुगत कर ही सीखता है!पर आज-कल नजारा उल्टा हुआ जाता है!वो स्वयं देख रहा है,भुगत भी रहा है,फिर ना जाने भविष्य के किस फायदे के चक्कर में वो वर्तमान को भी गर्त में पहुंचा रहा है!

लेकिन थोड़ी शान्ति ये देखकर है कि आप जैसे अकेले नहीं आज भी छोड़े गए!बहुत है साथ देने के लिए!एक दिन वो भी जुड़ेंगे जो अभी मुह मोड़े खड़े है.........

कुंवर जी,

kunwarji's ने कहा…

फिरदौस जी ने सही कहा!शिक्षा का ही दोष सर्वप्रथम है!चाहे वो किताबो से मिले या घरवालो से!

ये व्यवस्था बदलनी होगी......

कुंवर जी,

बेनामी ने कहा…

(1) "Musrik jahan kahin bhi mile unhe katal kar dena,unki ghaat me chhup kar baithe rahana,unhe tab tak yaatana dena jab tak musalman na ban jaye" -Sura touba-9:5,"Agar kaafiron se mukabala ho to unki gardane kaat dena,unhe buri tarah kuchal dena,fir unhe bandhan me jakad lena,yadi we firouti de den to un par ahasaan karna,taaki we fir hatiyaar na utha sake",Sura muhammad-47:14,"Tum hamesha apni sankhya aur taakat ikatthi karte raho,jinke baare me tum nahin jaanate,samajh lo we bhi tumhare dusman hi hain,allah ki raah me tum jo bhi kharch karoge,uskaa badla jaroor milega",Sura an faal-8:60,"Tumhe jo bhi loot me maal mile,ganimat mile,use halaal samajh kar khao,aur apne pariwar ko khilao",Sura an faal-8:60,"Jo loundi tumhare kabje me aaye,yaa hisse me aaye,tum usse sambhog kar lo,yah tumhare liye waidh hai,jinko tumne maal dekar kharida hai,unke saath jiwan kaa aanand uthaao,isse tum par koi gunaah nahin hoga",Sura an nisa-4:3 aur 4:24,"Hamne tumhare liye we auraten aur loundian halaal kar di hain,jinko allah ne tumhe loot me diya ho",Sura al ajhaab-33:50. Itne spast aur saaf saaf aadesh quran me tumhe dikhai nahin deta to tum sabse awwal darje ke andhe nahin ho to kya ho?

बेनामी ने कहा…

(2)Tumne puchha,twin tower hamle ke baad ab tak America me attack kyon nahin hua,to ye sawaal hi karke tumne fir saabit kar diya ki tum kitne bade andhe ho,are bhai mere,wo ekmatra kaaran hai,twin tower hamle ke baad America kaa khunkhaar rawaiya,3000 ke badle 3 lakh se bhi jyada doshi nirdosh musalmaano ki hatya,ye bhi tumhe dikhai nahin diya kya?Tumhare andhepan par mujhe daya aa rahi hai,bhai mere quran se lekar upar jo maine thode se udaharan diye,aise aise khatarnaak aayaton se quran bhara pada hai,kewal aur kewal jinke kaaran,jinse prerit hokar duniyaa me musalmaan is tarah ke bhayanak kaarnaame karte hain,aur gair muslimon ki jindagi to tabah karte hi hain,muslimon kaa bhi sarwanaash karte hain,ye ab tak tumhe samajh me nahin aaya to tum yaa tum musalmaano se bade andhe aur koun ho saktaa hai?

बेनामी ने कहा…

(3)May islaam ki aalochana aur wastawikta bata raha hun,iskaa matlab ye nahin ki main America ki tarafdaari kar raha hun,wo bhi insaaniyat kaa barabar kaa dusman hai,use chahiye duniyaa me hathiyaar bechkar besumaar doulat,taaki duniyaa me hathiyaar banaane aur bechne me wo hamesha awwal rahe,isiliye wo Russia ko sahan nahin kar paata,jo uska sabse bada pratidwandi hai,wo to Russia ko jad se khatam ho jaana dekhna chahta hai,isiliye usne Afganistaan me Russia ke khilaaf osama ko paida kiya,par wo is sachchai ko bhul gaya ki jo dusron ke ghar aag lagata hai wahi aag ekdin uske apne hi ghar ko jala deta hai,aur twin tower attack ke roop me wahi hua,Taaj attack ke pichche saara sadyantra Pakistaan aur ISLAAM kaa hai,ye to prove ho chuka hai,Michel Hedley kewal iske dwara apna ullu sidha karne wala thaa,aur kuchch nahin,wo main sadyantrakaari nahin thha,ye bhi prove ho chuka hai.Saddam ko iraque me khoj nikaalna isliye sambaw hua ki Saddam ki soch kattarwadi wichardhara se thoda hatakar tarakkipasand wichardhara thaa,usne mahilaon ko padhne,service karne,sadharan bhesh bhusa pahananne ki chhut de rakhi thhi( jiske falswarup Saddam ke samay Iraqui mahilayen behad sukhi thhi)jiske kaaran kattarwaadi musalmaano ke najar me Saddam islaam kaa dusman banata jaa raha thha,we kisi bhi surat me saddam kaa khatma chahte thhe,unhike parochch samarthan aur sahayog se America Saddam ko khoj nikaala,par Laden ke maamle me bilkul ultaa hai,chunki laden aaj kaa sabse bada kattar musalmaan hai,isiliye saare kattarwadi Pakistani muslim use bachane me,chchupane me lage hue hain,wo to America ke dar se chuhe ki tarah chhipta fir raha hai,aur Pakistaan kaa dogla charitra aur chehra saari duniyaa ko pata chal chuka hai ki ek taraf wo America se milne wali bhikh ke chalte wo America kaa dost hone kaa naatak kar raha hai,dusri taraf America ke sabse bade dusman ko apne yahan chchupate fir raha hai. (Copied from old post)

बेनामी ने कहा…

(4)Kyaa Islaam kaa mool charitra aur uddeshya bilkul saaf nahin hai ki duniyaa me loot, jabardakhal aur adhikaar jamaanne kaa sabse nisthur,amaanaviya,sabse bhayankar krur ladaku banaane kaa ek jaghanya khuni science ke siwa aur kuchch bhi nahi hai!Iske har pahalu ko parakh kar dekho,kahin se bhi ye dharm najar nahin aata,balki islaam hi to duniyaa kaa sabse bada ADHARM hai,Muhammad kewal naamkaa ek insaan thha,dimaag se aaj tak kaa sabse khunkhar nirdai,khuni,balatkaari,lutera thaa,usne puri duniyaa me adhikaar jamaane kaa sapna dekhaa,jiske liye ek bahut badi sena ki jarurat thi,usne socha itne bade sena ko tankhwah dena bahut badi samasya hogi , dusri baat kewal tankhwah ke liye uske sainik ladne marne ke liye taiyar nahi honge,kyon na koi aisi tarkib nikaali jaye jisase kisiko bhi tankhwah bhi dene ki jarurat nahi padegi aur ek puri kaum hi bhayanak krur hatyara sena ban jaye aur puri duniya me loot,hatya aur balatkaar karke puri duniya me fail jaye !!! Tab usne badi chalaki se duniyaa ke sabse khatarnaak KHUNI philosophy KURAN kaa nirmaan kiyaa,aur badi chalaki se is khuni philosophy ko MAJHAB kaa jaama pahanaaya aur likha jo bhi uske philosophy ko maanenge unhe 72 hooro aur sabhi indriya sukh dene wale suwidhaon se yukt JANNAT nasib hoga ,jisse saare arab ke ghor agyaani lutere jangli kabile wale iske prati aakarsit jaldi ho sake,lekin main aim uske philosophy ko maanne wale har ek byakti ko awwal darje kaa khuni ladaku banaana,jo badi nirmamta se bekasuron ki hatya kar sake,tabhi to aise beraham khunion ko lekar wo duniyaa ko fatah kar sakega,isliye sabse pahala usne niyam banaya musalmaano ko binaa muchch ke daadhi rakhna aniwaryahai,iske pichhe uske do uddesya thhe,ek to koi bhi insaan binaa muchch ke lambi dadhi rakhe to wo shakal se khunkhar jallad dikhne lagtaa hai,dusra uddesya,musalmano ka wo binaa muchcho kaa lambi dadhi wala khunkhar chehra hi unka parmanent identity ban gaya,taaki uske sab ladake kewal chehre se hi ek dusre ko pahachan le ki ye muhammad kaa aadami ( khuni )hai.

बेनामी ने कहा…

(5)Fir usne apne khuni science waala dimaag lagaya apne ladaako ko dimaagi taur par hi gair musalmano ko apna dusman maanane wala kaise banaya jaye? To iske liye usne apna khuni dimaag lagaya ki duniyaa ke lagbhag lagbhag sabhi log kisi na kisi rup me murtion ki pooja karte hain( yahan ek baat batana bahut jaruri hai,ki Waidik Dharm me Ishwar ek hi maana gaya hai,parantu kyonki har manushya ki prakriti,sochne kaa tarikaa,apni abhiruchi ek samaan nahin hoti,isiliye apne apne priya roop me we ishwar ki kalpana karke uskaa kewal pratirup banakar us kewal ek ishwar ki hi aradhana karne laga,wedon me kahin bhi murty pooja kaa ullekh nahin hai,lekin isme koi dosh bhi to nahi hain?Hajaron warso se hindu isi tarah us ek parmatma kaa badi shanti se aradhana karta aaya,aur saari duniyaa jaanati hai ki hindu sanskriti kitna samridhdh,kitna unnat,kitna sukhi thha,kitna bada gyan kaa bhandaar inke paas thha aur ab bhi hai,kitnaa dhan doulat inke paas thha jise saari duniyaa me sone ki chiriya kaha jaata thha,par kabhi hindu sanskriti ne ye nahi kaha jo hamari wichardhara ko nahi maanata wo hamaara dusman hai,use nirmamta se maara jaana chahiye,kyonki hindu dharm ke mul me hi ahinsa hai)christian log bhi isha masih ke murti ki aradhana karte hain,to muhammad ne ye tarikaa dhund nikaala ki murti pooja ko apne philosophy me shakhti se nisedh kar diya jaye to mere saare ladaaku dilodimaag se har murti pujak ko apnaa kattar dusman samajhne lagenge,tabhi to we nirmamta se unki hatya karenge.

बेनामी ने कहा…

(6) Isiliye usne murtipooja ko haram bata diya aur kaha ki allah ek hai,are jis param satya ko hajaron saal pahale se hindu sanskriti maanati aai hai ki param pita parmaatma ek hi hain parantu unke hajaron roop hain,jis tarah ek insaan kahin par kreta( kharidne waala) hai,kahin par wikretaa (bechne waala),kisikaa beta hai to kisikaa baap,kisikaa bhai,kisikaa dost,kisika pati kisika chacha kisika bhatija, kisikaa mama to kisika bhanja hai,ye uske alag alag roop hain,par hai to wahi ek insaan,usi tarah Ishwar sabkaa rachayita ek hi hai,wo har jagah byapta hain,unhe isaani aankho se dekha nahin jaa saktaa,unhe anubhut kiya jaa saktaa hai nispaap jiwan jikar,har prani matra ki sewa karke,is tarah ke mahaan uchcha wichardhara jis sanstriti ke mool me hai,use ek arabi khuni, lutera,balatkari kya batayega ki ishwar ek hai?Ye to suraj ko diya dikhane wali jaisi baat ho gayi?Uske pichche uski ek hi shaitaani chaal thi ki uske saare ladakon ko gair muslimon kaa kattar dimaagi dusman isi tarike se banaya jaa sakta hai.

बेनामी ने कहा…

(7)Iske baad usne socha ki uske hatyare giroh ke har sadasya kaa dimaag bhayankar nisthur,nirdayi ho iske liye kya kiya jaye? Iske liye usne jo bhayanak tarika dhund nikaala wo duniyaa me aaj tak kaa sabse krur,sabse nirmam,sabse bada paap bankar raha gaya hai aur wo hai "JABAH",usne niyam bana diya ki har muslim ko kisi bhi jaanwar kaa gost khane ke liye use jabah karke maarna hoga,iske pichche uske khuni dimaag ke science ko tumne kabhi samajhne ki kosish ki hai ek andhe ki tarah is sabse gande philosophy ko follow karne ke bajay?Jabki uske khuni dimaag kaa uddeshya bilkul saaf hai,parantu tum musalmaano ke dimaag me parat dar parat itna mota kaai jam gaya hai ki tumlogon ko bilkul saaf saaf chijen bhi dikhai yaa samajh me nahin aati.To suno,us mahapaapi muhammad dwara 1400 saalon se uske anuyayiyon tum saare musalmaano se duniyaa kaa bhayankar se bhi bhayankar gunah "JABAH"kyon karwaya jaa raha hai????? Nirdosh,nispaap abala jaanwaron ko 1400 saalon se jabah ke naam par gale ko aadha kaatkar tadap tadap kar bhayanak se bhi bhayanak mout kyon maara jaa raha hai?????

बेनामी ने कहा…

(8)Jab har muslim ke ghar me jaanwaron ko jabah karke tadap tadap kar marne ke liye chchor diya jayega to us ghar kaa sabse chchota bachcha bhi apni aankhon ke saamne ye bhayanak mout kaa drishya dekhega,is krur niyam ko laagu karne kaa asal target to wo bachcha hai,jo aage chalkar islaam kaa ek bhayankar,nirdayi,kathor,nirma m hatyara banega,tabhi to wo Mohammad ke fatah ke liye,islaam ke fatah ke liye nirmamta se gair muslimon kaa katal karega!Wo chchota bachcha ye bhayankar najaara apni aankhon ke saamne deh dekh kar bada hoga to uske dimaag ki granthiyan,nervous sustem itna kathor ho jayega ki aage chalkar kisi kaa bhi htya kar dena uske liye baye haat kaa khel hoga,use kisiko bhi krurata se hatya karne me kisi bhi tarah ki koi hichkichahat nahin hogi,tabhi to aise aise das khuni muslim 100 gair muslimon ko asani se katal karenge kyonki har gair muslim khuni dimag wala nahi hota,aur khud ko muhammad kaa anuyayi kahane wale mere agyani dost,tum kahate ho ki Islaam mahan hai, shanti kaa paigaam dene wala majhab hai,isi ek jabah ke krur niyam ke kaaran duniyaa me sabse jyada hatya aaj bhi musalmaan hi karte hain!

बेनामी ने कहा…

( 9 )Ab ek bahut hi important sawal kisike bhi dimaag me upaj saktaa hai wo ye ki Islaam me suar ke gost ko haraam ghosit karne ke pichche kya kaaran hai?To wo to bilkul saaf hai,jyada dimaag lagane ki jarurat bhi nahin,suar ko jabah karna aasan kaam nahin hai,itihaas batata hai ki muhammad ke pahale kaa arab waasi gai (cow),oont(camel)aur suar kaa maans samaan rup se khate thhe,muhammad ne dekha ki agar suar kaa maans muslim log khate rahenge,to suar ko jabah karne ki kathinai ke kaaran musalmaan ise bina jabah ke hi khaane lagenge,isse to muhammad ke jabah waala sadyantra to bilkul fail ho jayega! Isiliye usne ye tarqib nikaali,suar ke mans ko hi haraam ghosit kar diya,par machchli(fish)ke baare me?Machchli ke maamle me to muhammad ki chaal bikul fail ho jaati hai? Suwar ko khana chhodkar muslim dusre har jaanwaron kaa gost khaa sakte hain,par yadi machchli ko bhi haraam ghosit kar de to fir muslimo ke liye ise maanana asambhaw ho jayega,we muhammad ki baat nahin maanenge,tab to jabah wala formula to fail ho jayega hi sath hi sath muhammad ko musalman tahjib dena band kar denge?To usne machchli ko jabah ke daayare se hi baahar kar diya,is tarah kaa saitaani aur dhurt dimaag kaa pisach wo muhammad tha! Hindustaan me jitne bhi apraadh hote hain,ek chrime survey ke dwara paaya gaya hai ki saare apradhik maamlo kaa 73% musalmaan hi karte hain,aakhir kyon? Kyonki muhammad kaa quran hi unhe prerana aur khuli chchut deta hai ki tum gair muslimon ko luto aur hatya,balatkar karo , us loot ke maal kaa 5th hissa rasoolkaa hai,isiliye musalmaan be roktok apradh karte hain,jaise ki apradh karna,khun karna, balatkar karna unkaa janmsiddh adhikaar

बेनामी ने कहा…

(10)Uske baad ek se badhkar ek krur aayaten us paapi muhammad ne apne khuni kitaab me likh daali,taaki har ladaku kaa dimaag bilkul andha ho jaye,jaise-"Allah ne imaan waalon ke pran kharid rakhe hain,isiliye we ladai me katal karte hain,aur katal hote hain,allah ne unke liye jannat kaa pakka wada kiya hai,allah ke siwa kaun hai jo aisa wada kar sake?"-Sura an tauba-9:111,"Yadi kisine islaam lene ke baad kufra kiya,yaani wapas apna dharm swikaar kiya to usko bhari yaatna do",-Sura an nahal-16:106,Gair muslimon se lute huye maal ke panchwan hissa allah aur uske rasool kaa!!!!!!!!!!kya tumhe in saaf saaf hatya aur loot ke aadeshon kaa maane samajh me nahin aata? Aise aise behude,betuke wicharon se lais hokar 99%muslim yuwak is ahankaar se bhare hote hain ki ham hi duniyaa ke sreshtha hain,hamara islaam sabse mahaan hai,un bewkufon ko kya pata ki saikro jawan khubsurat hooron se bhari huyi jis jannat kaa jhootha khwab dikhakar unhe itna bada bewkoof banakar sentimental blckmailing kiya hai us mahapaapi,agyani,krur muhammad ne,tum musalmaano ko gahare kuye kaa medhak banaakar chchod diyaa hai,us kuyen se nikalkar bahar kaa ujaala dekhne par manahi lagaa di hai,isi wajah se kewal andhe hokar apne galat philosophy ko mahaan bataye jaa rahe ho,kabhi hindu dharm ke mahaan wichardhara ko padne jaanane kaa koi awasar bhi tumhe naa mile uski byawasthaa us paaji muhammad ne kar di hai,wo to kitna bada agyani thha ye apne aap saabit ho jaata hai,wo dharti ko gol nahin chapti samajhta thha,uskaa manana thha ki prithiwi sthir hai,suraj iska chakkar lagata hai,taaron ko us agyani ne chaand se chchota kaha.Islaam me sangit ko pratibandhit karne kaa kaaran bhi wahihai,kahin sangit se prabhawit hokar koi musalmaan khuni se insaan na ban jaye,ye jagjahir hai ki muhammad ke is manaahi ko naa maanate huye bahut saare muslim bade bade sangityangya hue,aur we log kabhi kisikaa khun nahin baha sakkte.Islaam ke maanane walon me jo bade widwan,artist,yaa scientist bane ye kisi islaam ke mahananta wahanata ke kaaran nahin,ye to kewal HEREDITY kaa maamla hai,jitne bhi muslim bade bade artist yaa scientist bane we yaa to bharat ke hain yaa Pakistaan ke,kisi Arab desh ke nahin,iskaa kaaran kya hai?Bharatiya aur Pakistaani musalmaano ke saare purwaj hindu thhe,ye pratibhaa hindu sanskriti ki den hai,ye to kewal heredity ke jariye unko mili hai,islaam ke kaaran nahi,ye science kaa param satya hai ki heredity ko koi badal nahin saktaa,wo kisi majhab ko maane yaa na maane,uske khoon me chhipi huyi pratibha bahar ayegi hi.

बेनामी ने कहा…

(11)Muhammad ke banaye kitne niyam aaj swatah bemaani aur betuki hokar rah gai hai,jaise sangit ki manaahi,par saare musalmaan bade chaw se sangit sunte bhi hain,gaate bajaate bhi hain,usi tarah islaam me chitra banaana,apna chitra banwana bhi gunaah hai,par aaj ye kitni bemaani ho gayihai ye sabko pata hai,laakhon karoron muslimon kaa to sangit,photo studio hi roji rojgaar kaa jariyaa hai,aaj agar muslim Kewal muhammad ki maane to saare musalmaan bilkul andhakaar yug me chale jayenge,us muhammad ne duniyaa ke saare muslimon ko duniyaa kaa no.1 dogla banaakar chchod diya hai,ye tumne kabhi sochkar dekha hai?Jin gair muslimon ko muhammad ne kaafir bolnaa sikhaaya,unhi gair muslimo ke ijaad kiye huye saari sukh suwidhaon ki chijon kaa muslim istmaal karte hain,in saamano ke binaa tumhara ek din bhi jinaa muskil ho jayega,yahan tak ki jin loud speakers se tum masjidon se ajaan dete ho wo loud speaker bhi gair muslimo kaa ijaad kiyaa hua hai,aaj jo arab wasi saan aur soukat ki jindagi ji rahe hain kya wo islaam ki den hai?Ye tum bakhubi jaanante ho ki wo bhi gair muslimon ki den hai,petrol,diesel,natural gas ye sab gair muslimon ki ijaad hai,jin plane,bus,car,motorcycle me wo tel istamaal hota hai we sabhi gair muslimon ki hi ijaad kiye huye hain,sharm aani chahiye tum musalmaano ko,tum unhe hi kaafir kahate ho,sorry mai bhul gaya thha sharm naam ki koi gunjaais to chchodi hi nahin tum musalmaano ke liye tumhare us mahaan agyani nabi ne,jis din arab ke tel bhandaar khatam ho jayenge inkaa asali lutera HEREDITY bahar aa jayega,tum muhammad naam ke us paapi ke blackmailing ke shikaar huye ho is baat ko samajhne ki bhi akal tumme nahin hai.

बेनामी ने कहा…

(12) Par hamesha ke liye insaano ko bewkuf aur andhaa banaakar rakha nahi jaasakta,aaj musalmaano me bahut badi sankhya me log khaskar nawyuwak aur nawyuwatiyan islam ke bhayankar khuni ,gande aur winaashkaari asli chehre ko apne vivek aur buddhi se bhali bhanti samajh aur jaankar bahut teji se wiraat sankhya me islam ko tyag kar Hindu, Boudh, aur Isai dharm apna rahe hain, ye duniyaa me shanti sthapana ke liye aur shaitaan islam ke khatme kaa bahut hi achcha paigam hai,isi sachchai ko ujaagar karne wale in do web links ko har musalman ko jarur padhna chahiye http://www.faithfreedom.org/testimonials.htm http://barenakedislam.wordpress.com/category/...

बेनामी ने कहा…

AS SALAMO ALYKUM(APP SALAMAT RAHE)
SURU KARTAHU ALLAH KE NAME SE JO NEHAYAT HE MAHAR BAN OR BARKAT WALA HE
CORODO DURUD OR SALAM HO MUHAMMAD RAHAMATAL LIL ALMEN PAR (TAMA AM JAHA KE MASEHA PAR)

amit yadav ने कहा…

islam kitni bhi koshish kyun na karen duniya me kohram lane ki per yaad rakhen duniya me rakshson ka ant jarur hota hai kahin aisa na ho sabko mitane ki koshish me islam ka hi naam duniya se mit jaye

tanisq kumar ने कहा…

Sufism he sachchha Islam hai

Faraz Ansari ने कहा…

एक सवाल बस
दुनिया का सबसे पहला हिन्दू कौन था
मैं नही जनता की दुनिया का सबसे पहला मुसलमान कौन था शायद मुझमे इल्म की कमी है
पर इतनी संवेदंसील बात करने वाले आप सभी को तो ये मालूम होगा की
सबसे पहला हिन्दू कौन था
सबसे पहला मुसलमान कौन था
सबसे पहला क्रिस्टियन कौन था
सबसे पहला सिया कौन था
सबसे पहला सुन्नी कौन था
सबसे पहला पंडित कौन था
सबसे पहला चमार कौन था

इतिहास तो काफी पढा हमने पर वो नही पढ़ पए जो हमे जोड़ कर रख सकता था.

Faraz Ansari ने कहा…

एक सवाल बस
दुनिया का सबसे पहला हिन्दू कौन था
मैं नही जनता की दुनिया का सबसे पहला मुसलमान कौन था शायद मुझमे इल्म की कमी है
पर इतनी संवेदंसील बात करने वाले आप सभी को तो ये मालूम होगा की
सबसे पहला हिन्दू कौन था
सबसे पहला मुसलमान कौन था
सबसे पहला क्रिस्टियन कौन था
सबसे पहला सिया कौन था
सबसे पहला सुन्नी कौन था
सबसे पहला पंडित कौन था
सबसे पहला चमार कौन था

इतिहास तो काफी पढा हमने पर वो नही पढ़ पए जो हमे जोड़ कर रख सकता था.