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मोदीराज लाओ

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शनिवार, 25 मई 2013

मित्रो अगर सरकार ने सैनिकों , सिपाहियों और आम जनता को इनसान माना होता तो आज नेताओं का इस तरह कत्ल न होता


मित्रो हमें बहुत दुख है कि बामपंथी आतंकवादियों के प्रखर विरोधी व देशभक्त नेता महेन्द्र कर्मा जी शहीद हो गए वो भी वामपंथी आतंकवादियों के हाथों ।जो वाकी लोग मारे गए उनमें से भी अधिकतर निर्दोष थे जिनका केन्द्र सरकार की आतंकवाद समर्थक नीतियों से कोई बास्ता नहीं था। लेकिन बामपंथी आतंकवादियों का ये कोई पहला हमला नहीं ...इससे पहले भी ये वामपंथी आतंकवादी दर्जनों हमले कर चुके हैं लेकिन इससे पहले इन आतंकवादियों के हाथों एक साथ इतने नेता कभी नहीं मारे गए...इससे पहले वामपंथी आतंकवादियों के हमलों में सबसे ज्यादा सुरक्षा बलों के जवान और आम लोग मारे गए
(अब तक हुए हमले:-17 जुलाई, 2007: करीब 800 हथियारबंद नक्सलियों ने दंतेवाड़ा में हमला किया। 25 मरे, 32 घायल हुए और 250 लोग लापता हो गए।-मार्च 2008 में सांसद बलीराम कश्यप के काफिले पर हमला ।-मार्च 2008 में वन मंत्री विक्रम उसेंडी के काफिले पर हमला।-जुलाई, 2009: राजनंदगांव में 28 सुरक्षाकर्मियों की सुरंग विस्फोट कराकर हत्या।-26 सितंबर, 2009: भाजपा सांसद बलिराम कश्यप की जगदलपुर में हत्या।-अप्रैल, 2010: माओवादियों ने 73 सीआरपीएफ जवानों की हत्या कर दी।-17 मई, 2010: नक्सली धमाके में 14 विशेष पुलिस अधिकारी समेत 35 लोग मारे गए।-अक्टूबर 2011 को विधायक डमरूधर पुजारी के निवास पर धावा ।-जुलाई, 2011 को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल के काफिले पर हमला ।-अक्टूबर, 2011: बस्तर में छह सुरक्षाकर्मियों की हत्या।-जुलाई, 2011: दंतेवाड़ा में 10 पुलिसकर्मियों की हत्या।-अगस्त, 2011: नक्सली हमले में 11 पुलिसकर्मी मारे गए।-जनवरी, 2012 में विधायक भीमा मंडावी के काफिले पर हमला ।-मई, 2012 में महिला बाल विकास मंत्री लता उसेंड़ी के बंगले में हमला ।-अप्रैल, 2012 में संसदीय सचिव महेश गागड़ा के काफिले पर हमला ।-नवंबर, 2012 में पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा के बुलेटफ्रूफ वाहन पर हमला।-12 मई, 2013: सुकमा में दूरदर्शन केंद्र पर हमला। चार जवान शहीद।) ......
अगर हम थोड़ा ध्यान से मुल्यांकन करें तो पायेंगे कि सुरक्षा बलों में भर्ती होने वाले अधिकतर जवान आम आम परिवारों से ही होते हैं ...यही बजह है कि युवराज और महारनी की गुलामी की मानसिकता बाले सेकुलर गद्दारों और मिडीया को ये हमले मामूली  हमले नजर आए ...वरना ऐसे कैसे हो सकता था कि मिडीया और सेकुलर गिरोह 73  जवानों को जिन्दा जलाने की घटना को सबसे बड़ा हमला कहने के बजाए ...12 नोताओं के मारे जाने को सबसे बड़ा हमला कहता...मित्रो अगर सरकार ने सैनिकों , सिपाहियों और आम जनता को इनसान माना होता तो आज नेताओं का इस तरह कत्ल न होता लेकिन बहुत दुख से कहना पड़ता है कि सेकुलर गिरोह ने देशभक्तों को हराने के लिए आतंकवादियों को ही अपना वोट बैंक मान लिया है इसीलिए तो इस गिरोह की सरकार 100000 निर्दोश देशभक्त जनता पर तो रात के अन्धेरे(4 जून रामलीला मैदान) में हमला करवा सकती है लेकिन देश के दुशमन आतंकवादियों के लिए इस सकार की हर तरह की ममता हिलोरे लेने लगती है...आपको याह होगा इसी सरकार के गृहमन्त्री ने भारतविरोधी वामपंथी और इसलामिक आतंकवादियों को अपना भाई बताया था...आपको याद होगा कि दिल्ली में आतंकवादियों को मारने के बाद शहीद होने वाले शहीद मोहनचन्द शर्मा को किस तरह अपमानित किया गया और किस तरह सलमान खुर्शीद के अनुशार मारे गए इसलामिक आतंकवादियों के लिए सोनिया गाँधी फूट-फूट कर रोई....इसी तरह लन्दन में हिथरो हबाई अड़्डे पर हमले के आरोप में पकड़े गए इसलामिक आतंकवादी की  मनमोहन सिंह को इतनी चिन्ता हुई कि उसे सारी रात नींद न आई...आम लोगों से गद्दारी यहीं रूक जाती तो गनीमत थी ...लेकिन देश से गद्दारी नहीं रूकी आपको याद होगा कि जब छतीसगढ़ सरकार ने वामपंथी आतंकवाद के मास्टर मांईड विनायक सेन को पकड़ा और उस पर देशद्रोह का मुकद्दमा चलाया तो सारे सेकुलर गिरोह ने एकजुट होकर उसको छुडवाने के लिए जोर लगा दिया और केन्द्र सरकार के सहयोग से उसे छुड़वाने में सफलता भी हासिल कर ली...मित्रो हद तो तब हो गई जब इस वामपंथी आतंकवादी विनायक सेन को सोनिया गांधी ने अपनी सलाहकार परिषद में सामिल कर लिया मतलब उस परिषद में जिसके ईसारे पर केन्द्र सरकार काम कर रही है अब जब सरकार ही आतंकवादियों के इसारे पर काम करेगी तो वो आतंकवादियो की तरह देशभक्त लोगों पर हमला वोलेगी और आतंकवादियों का बचाब करेगी ...वही हो रहा है आतंकवादियों के हमले में मारे गए कांग्रेसियों व उनके परिजनों की मुसीबतों के लिए आतंकवादियों को अपना मित्र बनाने वाली सोनिया गाँधी है न कि कोई और...आपको याद होगा कि जब गृहमन्त्री P Chidambaram वामपंथी आतंकवादियों से निपटने के लिए योजना लागू करने लगे तो किस तरह दिगविजय सिंह जैसे सोनिया गांधी के समर्थकों ने उनकी योजना की सार्वजनिक रूप से अलोचना कर उस पर दबाब बनाकर उसे रूकवा दिया ...इसी तरह राज्य सरकार द्वारा जब कभी भी आतंकवादियों के बिरूद्ध कार्यवाही की गई तो बजाए सरकार के साथ खड़े होने के सोनिया गांधी आतंकवादियों के साथ खड़ी हो गई...आप सबको पता होगा कि पिछले 9 वर्षों में जिस किसी ने भी आतंकवादियों को मारा या फिर आतंकवादियों के बिरूद्ध जुवान खोली वो सब आज जेल में हैं हैरानी की बात तो ये है कि आतंकवादियों को मारने वाले सैनिकों तक को न बख्सा गया...पुलिस की तो ताकत ही क्या है...और साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर जैसे लोगों जो आतंकवादियों के बिरूद्ध सिर्फ बोलते थे  तक को जेलों में बन्द कर दिया...आगे भी कोई आतंकवादियों भारतविरोधियों के बिरूद्ध न वोल सके इसका पक्का प्रबन्ध करने के लिए Communal Violence Act 2011 लाया गया...Encounter Specialists तक को न बख्सा गया...आज मोदी जी को छोड़कर सतापक्ष और विपक्ष में एक भी बड़ा नेता ऐसा नहीं जिसका खौफ आतंकवादियों को हो क्योंकि SAUDI ARBIA & US  से मिलने वाले DOLLAR  से मालामाल होकर सबकेसब नेता सेकुलर(भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी) हो लिए...अब तो लगता है चीन ने भी इनकी जेबें बरना शुरू कर दिया है ...मित्रो बुरा न मानना यही बास्तविकता है कि गाँधीबाद और धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में इन सब सेकुलर नेताओं ने भारत की समस्याओं को इस हद तक उलझा दिया है कि अब हालात गृहयुद्ध की तरफ तेजी से बढ़ते जा रहे हैं और अगर इन सेकुलर गद्दारों को न रोका गया तो सब भारतविरोधी आतंकवादी एकसाथ हमला वोलकर भारत में कुछ भी करने की ताकत हासिल कर चुके हैं इसका सबसे बड़ा प्रमाण है राहुल विन्शी का दोस्त अकबरूद्दीन ओबैसी जो बारबार खुलेआम कह रहा है कि हमारी पार्टी वेशक छोटी है लेकिन हमने पूरे भारत को बम धमाके तरके हिला दिया है और हम जब चाहें तब हिन्दूओं का कत्ल कर भारत को खत्म कर दें ..मजेदार बात ये कि इसके बाद भी ये आतंकवादी जेल में होने के बजाए अपनी विधानसभा और लोकसभा सदस्यता बरकरा रखते हुए खुलेआम घूम रहे हैं .....बैसे भी 16 लाख सेना वाली सरकार जिस आतंकवादी के साथ खड़ी हो जाए उस आतंकवादी को कौन हाथ डाल सकता है...मित्रो 16 लाख की सेना वाली ये सरकार जब आतंकवादियों के बिरद्ध खड़ी हो जाएगी तब आतंकवादियों और उनके समर्थकों का नमोनिसान तक वाकी न बचेगा...एकवार सच्चे देसभक्त को चुनकर तो देखो

सोमवार, 3 अक्टूबर 2011

दिगविजय सिंह को समझना चाहिए कि बुरे काम का अन्जाम बुरा ही होता है…


दिगविजय सिंह कह रहा है कि वह देशभक्त है और उसका अपमान किया जा रहा है जिससे उसके परिबार व मित्रों को कष्ट हो रहा है ।इस कष्ट से बचने के लिए उसने कोर्ट में केश दर्ज करवा दिया है। इसमें कोई सन्देह नहीं कि जो लोग दिगविजय से प्यार करते हैं वो लोग ऐसे चित्रोंDigi को देखकर जरूर दुखी हुए होंगे।
ये चित्र सही हैं या गलत इस बात का फैसला करने के लिए हमें दिगविजय सिंह द्वारा अपमानित किए गए संगठनों, सन्तों व सुरक्षाबलों के करोड़ों देशभक्त समर्थकों के कष्टों को भी समझना होगा।
दिगविजय द्वारा प्रताड़ित किए गए देशभक्तों की संख्या इतनी अधिक है कि अगर दिगविजय ऐसे लाखों केस भी दर्ज करवा दे तो भी इन प्रताड़ित देशभक्तों के आक्रोश से बचना अगर नामुमकिन नहीं तो असम्भव जरूर है।
दिगविजय के मित्रों को भगवान से प्रार्थना करनी चाहिए कि ये मानसिक रूप से प्रताड़ित देशभक्त सिर्फ अपनी कलम से ही अपने आक्रोश और क्षोभ को शान्त कर ले वरना दिगविजय द्वारा दिए गए बोल बचन तो ऐसे हैं कि कोई भी कम संयम वाला देशभक्त अपना आपा खोकर दिगविजय द्वारा दी जा रही मानसिक प्रताड़ना से मुक्ति पाने के लिए कोई भी extreme कदम तक उठा सकता है जिसमें आत्मवलिदान से लेकर प्रताड़ित करने वाले से छुटकारा तक कुछ भी हो सकता है।
दीगविजय ने कहा
“ स्वामी राम देब को पत्तथर बान्ध कर तबतक पानी में डुवोए रखना चाहिए जब तक उनके प्राण न निकल जायें”
देशभक्त कहते हैं कि “भारतीय संस्कृति के ध्वजबाहक स्वामी राम देब जी जैसे प्रखर देशभक्त का अपमान करने वाले पापी को इतने डुकड़ों में विभाजित कर देना चाहिए कि उन टुकड़ों को चील-कऊए भी चोंच से उठाने में संकोच करें।”
दिगविजय ने कहा “स्वामी रामदेव ठग था ठग है और ठग रहेगा”
देशभक्त कहते हैं “दिगविजय गद्दार था गद्दार है और गद्दार रहेगा”
अपनी सिकायत में दिगविजय खुद को देशभक्त बताता है ।
हम आपसे जानना चाहते हैं कि “क्या कोई देशभक्त ,अपने जीवन का वलिदान देकर देशवासियों की रक्षा के लिए आतंकवादियो का अन्त सुनिस्चित करने वाले ,शहीद मोहन चन्द शर्मा की शहीदी का अपमान कर  सकता है? ”
लेकिन दिगविजय ने आजमगढ़ के गांव संजरपुर का दौरा कर बटला हाउस मुठभेड़ में मारे गए आतिफ व साजिद नामक आतंकवादियों को न केवल निर्दोश बताया पर साथ ही उनके गोलीवारी में मारे जाने के तरीके पर प्रश्न खड़े कर अपनी गद्दारी की मानसिकता को सबके सामने उजागर कर दिया।
अगर शहीदों का अपमान करने वालों को देशभक्त कहेंगे तो भला गद्दार किसे कहेंगे?
दिगविजय की आधारहीन बातों से तंग अगर अन्ना anna hajare ji2जी हजारे जैसा मंझा  हुआ बुजुर्ग व्यक्ति दिगविजय को पागलखाने भेजने की सिफारिस करता है तो भला आप उस नौजवान से क्या उम्मीद करेंगे जो परमपूजनीय स्वामी राम देव जीRam Dev ji (2) के नेतृत्व में कालेधन को भारत बापस लाने के लिए प्रतिबद्ध है जो स्वामी जी को अपना गुरू,मार्गदर्शक व नेता सबकुछ मानता है।
अगर वो ऐसा चित्रDigi1 बनाकर अपना आक्रोश निकालता है तो दिगविजय को केश करने के बजाए अपनी जुवान पर लुगाम लगाने की कोसिस करनी चाहिए ताकि कोई नौजवान दिगविजय के बकवास से तंग आकर कोई ऐसा कदम न उठा बैठे जिससे दिगविजय के साथ-साथ उस नौजवान का जीवन भी दांव पर लगा जाए।
एकदिन दिगविजय  देशभक्तों के संगठन RSS को बमों की फैक्ट्री करार दे देते हैं । जो बात आज तक भारत की कट्टर दुशमन ISI या फिर अमेरिका की खुफिया ऐजेंसी FBI या पिर पिछले 6 वर्षों से RSS को फंसाने व बदनाम करने के लिए लगाई गई CBI जैसी गुप्तचर संस्था ने नहीं कही वो बात दिगविजय कहे तो फिर भला RSS से जुड़ा देशभक्त क्या करे ?
कोर्ट में जाए या फिर चित्र Digi4बनाकर अपमान का बदला अपमान से ले या पिर कलम उठाकर अपने आक्रोश को शब्दों के बाण चलाकर शान्त करे।
आओ जरा अब दिगविजय के असली चरित्र को पहचानें…
ये दिगविजय वो शैतान है जो भारत के इतिहास के सबसे बड़े आतंकवादी हमले जो मुम्बई पर हुआ था को RSS के बहाने हिन्दूओं द्वारा किया गया हमला बताता है ये हमला वो हमला है जिसे खुद  कांग्रेस की सरकार व अमेरिका पाकिस्तान द्वरा किया गया हमला बताते हैं जो हेडली की गिर्फतारी के बाद  अमेरिकी न्यायालय में भी साबित होने के करीब पहुंच गया है व कसाब की गिफ्तारी के बाद भारतीय न्यायलय में साबित हो चुका है।
अब आप बताओ दिगविजय देश के साथ इससे बड़ी और क्या गद्दारी कर सकता है?

ये दिगविजय वो दिगविजय है जो मानबता के शत्रु ओसामाविन लादेन Ladenको ओसामा जी कहकर भारत के मुसलमानों को आतंकवाद के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए उकसाता है ,उस ओसामाविन लादेन को जिसे कोई समझदार मुसलमान भी जी कहना पसंद नहीं करता। आप जरा सोचो कि अगर मुसलमानों के बच्चे ऐसे लोगों के उकसावे में आकर देश में आतंकवाद को बढ़ाबा देते हैं तो भला भारत के दुशमनों के अलाबा और कौन खुश हो सकता है?
ये दिगविजय, जो शान्तिप्रिए हिन्दूओं को आतंकवादी कहकर अपमानित करता है , आतंकवादियों के घर जाकर शहीदों के वलिदान पर प्रश्न उठाकर सुरक्षाबलों का मनोबल तोड़ता है ,सन्तों को ठग कहता है कत्ल करने की धमकी देकर डराता है अपने समर्थकों को उकसाता है,RSS को बमों की फैक्ट्री बताता है व मानबता के दुशमन आतंकवादी ओसामविन लादेन को जी कहकर अपना आदर्श बताता है ।
आप ही बताओ कि इस दिगविजय के काल्पनिक आरोपों व अपशब्दों से प्रताड़ित और आक्रोशित देशभक्त इसके साथ कैसा बर्ताब करें?