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मोदीराज लाओ

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भारत बचाओ
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शनिवार, 25 मई 2013

मित्रो अगर सरकार ने सैनिकों , सिपाहियों और आम जनता को इनसान माना होता तो आज नेताओं का इस तरह कत्ल न होता


मित्रो हमें बहुत दुख है कि बामपंथी आतंकवादियों के प्रखर विरोधी व देशभक्त नेता महेन्द्र कर्मा जी शहीद हो गए वो भी वामपंथी आतंकवादियों के हाथों ।जो वाकी लोग मारे गए उनमें से भी अधिकतर निर्दोष थे जिनका केन्द्र सरकार की आतंकवाद समर्थक नीतियों से कोई बास्ता नहीं था। लेकिन बामपंथी आतंकवादियों का ये कोई पहला हमला नहीं ...इससे पहले भी ये वामपंथी आतंकवादी दर्जनों हमले कर चुके हैं लेकिन इससे पहले इन आतंकवादियों के हाथों एक साथ इतने नेता कभी नहीं मारे गए...इससे पहले वामपंथी आतंकवादियों के हमलों में सबसे ज्यादा सुरक्षा बलों के जवान और आम लोग मारे गए
(अब तक हुए हमले:-17 जुलाई, 2007: करीब 800 हथियारबंद नक्सलियों ने दंतेवाड़ा में हमला किया। 25 मरे, 32 घायल हुए और 250 लोग लापता हो गए।-मार्च 2008 में सांसद बलीराम कश्यप के काफिले पर हमला -मार्च 2008 में वन मंत्री विक्रम उसेंडी के काफिले पर हमला।-जुलाई, 2009: राजनंदगांव में 28 सुरक्षाकर्मियों की सुरंग विस्फोट कराकर हत्या।-26 सितंबर, 2009: भाजपा सांसद बलिराम कश्यप की जगदलपुर में हत्या।-अप्रैल, 2010: माओवादियों ने 73 सीआरपीएफ जवानों की हत्या कर दी।-17 मई, 2010: नक्सली धमाके में 14 विशेष पुलिस अधिकारी समेत 35 लोग मारे गए।-अक्टूबर 2011 को विधायक डमरूधर पुजारी के निवास पर धावा -जुलाई, 2011 को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल के काफिले पर हमला -अक्टूबर, 2011: बस्तर में छह सुरक्षाकर्मियों की हत्या।-जुलाई, 2011: दंतेवाड़ा में 10 पुलिसकर्मियों की हत्या।-अगस्त, 2011: नक्सली हमले में 11 पुलिसकर्मी मारे गए।-जनवरी, 2012 में विधायक भीमा मंडावी के काफिले पर हमला -मई, 2012 में महिला बाल विकास मंत्री लता उसेंड़ी के बंगले में हमला -अप्रैल, 2012 में संसदीय सचिव महेश गागड़ा के काफिले पर हमला -नवंबर, 2012 में पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा के बुलेटफ्रूफ वाहन पर हमला।-12 मई, 2013: सुकमा में दूरदर्शन केंद्र पर हमला। चार जवान शहीद।) ......
अगर हम थोड़ा ध्यान से मुल्यांकन करें तो पायेंगे कि सुरक्षा बलों में भर्ती होने वाले अधिकतर जवान आम आम परिवारों से ही होते हैं ...यही बजह है कि युवराज और महारनी की गुलामी की मानसिकता बाले सेकुलर गद्दारों और मिडीया को ये हमले मामूली  हमले नजर आए ...वरना ऐसे कैसे हो सकता था कि मिडीया और सेकुलर गिरोह 73  जवानों को जिन्दा जलाने की घटना को सबसे बड़ा हमला कहने के बजाए ...12 नोताओं के मारे जाने को सबसे बड़ा हमला कहता...मित्रो अगर सरकार ने सैनिकों , सिपाहियों और आम जनता को इनसान माना होता तो आज नेताओं का इस तरह कत्ल न होता लेकिन बहुत दुख से कहना पड़ता है कि सेकुलर गिरोह ने देशभक्तों को हराने के लिए आतंकवादियों को ही अपना वोट बैंक मान लिया है इसीलिए तो इस गिरोह की सरकार 100000 निर्दोश देशभक्त जनता पर तो रात के अन्धेरे(4 जून रामलीला मैदान) में हमला करवा सकती है लेकिन देश के दुशमन आतंकवादियों के लिए इस सकार की हर तरह की ममता हिलोरे लेने लगती है...आपको याह होगा इसी सरकार के गृहमन्त्री ने भारतविरोधी वामपंथी और इसलामिक आतंकवादियों को अपना भाई बताया था...आपको याद होगा कि दिल्ली में आतंकवादियों को मारने के बाद शहीद होने वाले शहीद मोहनचन्द शर्मा को किस तरह अपमानित किया गया और किस तरह सलमान खुर्शीद के अनुशार मारे गए इसलामिक आतंकवादियों के लिए सोनिया गाँधी फूट-फूट कर रोई....इसी तरह लन्दन में हिथरो हबाई अड़्डे पर हमले के आरोप में पकड़े गए इसलामिक आतंकवादी की  मनमोहन सिंह को इतनी चिन्ता हुई कि उसे सारी रात नींद न आई...आम लोगों से गद्दारी यहीं रूक जाती तो गनीमत थी ...लेकिन देश से गद्दारी नहीं रूकी आपको याद होगा कि जब छतीसगढ़ सरकार ने वामपंथी आतंकवाद के मास्टर मांईड विनायक सेन को पकड़ा और उस पर देशद्रोह का मुकद्दमा चलाया तो सारे सेकुलर गिरोह ने एकजुट होकर उसको छुडवाने के लिए जोर लगा दिया और केन्द्र सरकार के सहयोग से उसे छुड़वाने में सफलता भी हासिल कर ली...मित्रो हद तो तब हो गई जब इस वामपंथी आतंकवादी विनायक सेन को सोनिया गांधी ने अपनी सलाहकार परिषद में सामिल कर लिया मतलब उस परिषद में जिसके ईसारे पर केन्द्र सरकार काम कर रही है अब जब सरकार ही आतंकवादियों के इसारे पर काम करेगी तो वो आतंकवादियो की तरह देशभक्त लोगों पर हमला वोलेगी और आतंकवादियों का बचाब करेगी ...वही हो रहा है आतंकवादियों के हमले में मारे गए कांग्रेसियों व उनके परिजनों की मुसीबतों के लिए आतंकवादियों को अपना मित्र बनाने वाली सोनिया गाँधी है न कि कोई और...आपको याद होगा कि जब गृहमन्त्री P Chidambaram वामपंथी आतंकवादियों से निपटने के लिए योजना लागू करने लगे तो किस तरह दिगविजय सिंह जैसे सोनिया गांधी के समर्थकों ने उनकी योजना की सार्वजनिक रूप से अलोचना कर उस पर दबाब बनाकर उसे रूकवा दिया ...इसी तरह राज्य सरकार द्वारा जब कभी भी आतंकवादियों के बिरूद्ध कार्यवाही की गई तो बजाए सरकार के साथ खड़े होने के सोनिया गांधी आतंकवादियों के साथ खड़ी हो गई...आप सबको पता होगा कि पिछले 9 वर्षों में जिस किसी ने भी आतंकवादियों को मारा या फिर आतंकवादियों के बिरूद्ध जुवान खोली वो सब आज जेल में हैं हैरानी की बात तो ये है कि आतंकवादियों को मारने वाले सैनिकों तक को न बख्सा गया...पुलिस की तो ताकत ही क्या है...और साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर जैसे लोगों जो आतंकवादियों के बिरूद्ध सिर्फ बोलते थे  तक को जेलों में बन्द कर दिया...आगे भी कोई आतंकवादियों भारतविरोधियों के बिरूद्ध न वोल सके इसका पक्का प्रबन्ध करने के लिए Communal Violence Act 2011 लाया गया...Encounter Specialists तक को न बख्सा गया...आज मोदी जी को छोड़कर सतापक्ष और विपक्ष में एक भी बड़ा नेता ऐसा नहीं जिसका खौफ आतंकवादियों को हो क्योंकि SAUDI ARBIA & US  से मिलने वाले DOLLAR  से मालामाल होकर सबकेसब नेता सेकुलर(भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी) हो लिए...अब तो लगता है चीन ने भी इनकी जेबें बरना शुरू कर दिया है ...मित्रो बुरा न मानना यही बास्तविकता है कि गाँधीबाद और धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में इन सब सेकुलर नेताओं ने भारत की समस्याओं को इस हद तक उलझा दिया है कि अब हालात गृहयुद्ध की तरफ तेजी से बढ़ते जा रहे हैं और अगर इन सेकुलर गद्दारों को न रोका गया तो सब भारतविरोधी आतंकवादी एकसाथ हमला वोलकर भारत में कुछ भी करने की ताकत हासिल कर चुके हैं इसका सबसे बड़ा प्रमाण है राहुल विन्शी का दोस्त अकबरूद्दीन ओबैसी जो बारबार खुलेआम कह रहा है कि हमारी पार्टी वेशक छोटी है लेकिन हमने पूरे भारत को बम धमाके तरके हिला दिया है और हम जब चाहें तब हिन्दूओं का कत्ल कर भारत को खत्म कर दें ..मजेदार बात ये कि इसके बाद भी ये आतंकवादी जेल में होने के बजाए अपनी विधानसभा और लोकसभा सदस्यता बरकरा रखते हुए खुलेआम घूम रहे हैं .....बैसे भी 16 लाख सेना वाली सरकार जिस आतंकवादी के साथ खड़ी हो जाए उस आतंकवादी को कौन हाथ डाल सकता है...मित्रो 16 लाख की सेना वाली ये सरकार जब आतंकवादियों के बिरद्ध खड़ी हो जाएगी तब आतंकवादियों और उनके समर्थकों का नमोनिसान तक वाकी न बचेगा...एकवार सच्चे देसभक्त को चुनकर तो देखो

शुक्रवार, 9 दिसंबर 2011

विदेशों द्वारा Plant किए जा रहे इस विस्फोटक को कौन निष्क्रिए करेगा?---संदर्भ NGOs के माध्यम से धर्मांतरण, आतंकवाद, अलगाववाद, दाननबाधिकार, हिन्दूविरोध-देशविरोध व धर्मनिर्पेक्षता के लिए 50,000 करोड़ रूपए।


ngo8आज भारत में शायद ही कोई ऐसा नागरिक होगा जिसने आतंकवाद, धर्मांतरण, गैर - लाभकारी स्वैच्छिक संगठन, धर्मनिर्पेक्षता, अलगाववाद, मानबाधिकार, बुद्धिजीवि, हिन्दूविरोध-देशविरोध का नाम नहीं सुना होगा। लेकिन ऐसे बहुत ही कम होंगे जो ये जानते हों कि इन सब की जड़ में एक ही है और वो है विदेशी षडयन्त्र।
1947 में  लेड़ी माऊंटवेटन को हथियार बनाकर नेहरू का उपयोग कर भारत का विभाजन करवाने के बाद अंग्रेजों ने ये मान लिया कि उन्होंने एक हिन्दू राष्ट्र भारत को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया। लेकिन 70 का दशक आते-आते इन बिदेशियों को ये सपष्ट हो गया कि भारत एकवार फिर राख से उठ खड़ा हुआ। ये वही दशक है जब इन्दिरा गाँधी ने बिदेशी दबाब के आगे न झुकते हुए परमाणु बिस्फोट कर भारत को ताकतबर राष्ट्रों की पंक्ति में खड़ा कर दिया।
लेकिन ये बो वर्ष भी है जब विदेशी ताकतों ने ओछे हथकंडे अपनाकर इन्दिरा गांधी को भारत का संविधान बदलने पर मजबूर कर दिया। इन विदेशी ताकतों ने एक सोची समझी रणनिती के तहत हिन्दूओं को कमजोर करने के लिए पैसे व ताकत के बल पर भारतीय संविधान में धर्मनिर्पेक्षngo4 शब्द जुड़वा दिया जो कि भारत की सर्वधर्मसम्भाव की धारणा के विलकुल विपरीत है।
अगर आप भारत के हालात पर गहरी नजर डालेंगे तो पायेंगे कि भारत के संविधान में धर्मनिर्पेक्ष शब्द जुड़ने के साथ ही भारत में गैर - लाभकारी स्वैच्छिक संगठनों के नाम पर हिन्दूविरोधियों-भारतविरोधियों का एक ऐसा कुनबा तैयार होने लगा जिसने  भारत में अलगाववाद व आतंकवाद को जन्म देने के साथ-साथ धर्मांतरण की गति बढ़ाते हुए सेकुलर गद्दारों की एक ऐसी फौज खड़ी की जो आज खुलकर भारत की एकता और अखण्डता को ललकार रही है।
वेशक इन भारतविरोधियों की गतिविधियां 70 के दशक में शुरू हुईं लेकिन 90 के दशक में आर्थिक उदारीकरण ने इन भारतविरोधियों के लिए बलबर्धक का काम किया।उसके बाद तो इन गैर- लाभकारी स्वैच्छिक संगठनों को तो मानो पंख लग गए क्योंकि अब विदेशों से इन्हें पैसा मिलना विलकुल आसान भी हो गया और ज्यादा भी मिलने लगा।  इन गैर- लाभकारी स्वैच्छिक संगठनों को पंख लगने के साथ ही अलगाववाद, आतंकवाद, धर्मांतरण ,मानबाधिकारबाद और देशविरोध-हिन्दूविरोध को भी पंख ngo3लग गए।
कुल मिलाकर आज भारत में राष्ट्रबाद इतना कमजोर हो गया है कि एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम सरकार इन गैर- लाभकारी स्वैच्छिक संगठनों के सहयोग से भारत में सचर कमेटी रिपोर्ट, रंगनाथ मिश्रा कमेटी रिपोर्ट, 'Prevention of Communal and Targeted Violence Bill, 2011 जैसे षडयन्त्रों के माध्यम से भारत के मूल निवासियों मतलब हिन्दूओं को उनके मूल अधिकारों से भी वंचित करने का दुहसाहस कर रही है।
क्या आपने कभी सोचा कि ये सब किसके बल पर हो रहा है। ये सब हो रहा है बिदेशी ताकतों के बल पर । इन बिदेशी ताकतों ने अपने भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी षडयन्त्रों को अन्जाम देने के लिए भारत में कुल मिलाकर 23000 गैर- लाभकारी स्वैच्छिक गिरोहों
http://www.onlinenews.com.pk/details.php?id=186705 का निर्माण किया हुआ है जिन्हें  पिछले  पांच वर्षों में ही 50,000 करोड़ से अधिक रूपए मिल चुके हैं भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी षडयन्त्रों को अन्जाम देने के लिए।
इसमें सिर्फ US,UK,Nitherland, Italy जैसे ईसाई देशों से धर्मांतरण व आतंकवाद के माध्यम से भारत के इसाईकरण के लिए प्राप्त हो रहा पैसा ही सामिल है जबकि इस्लामिक आतंकवाद समर्थक केन्द्र सरकार ने साऊदी अरब जैसे इस्लामिक देशों से मदरसों , मस्जिदों व आतंकवाद के माध्यम से भारत के इसलामीकरण के लिए दिए जा रहे पैसे के वारे में कोई जानकारी अभी तक उपलब्ध नहीं करवाई है। जिस दिन वो जानकारी आपके सामने आएगी याकीन मानो आपके पैरों तले जमीन नहीं रहेगी।ngo2
अगर आप इन गैर- लाभकारी स्वैच्छिक गिरोहों में उन संगठनों को भी जोड़ लें जिनका नियन्त्रण सीधे चर्च के हाथ में है व उन गिरोहों को भी जिनका सीधे इस्लामिक देशों के हाथों में है तो ये शंख्या  करोड़ों में पहुंच जाती है व इन गिरोहों को मिलने वाला धन भी अरबों रूपए हो जाता है।
अगर आपको ये आंकड़े जानकर हैरानी हो रही है तो हम आपको बताते चलें कि जो सरकार हमेशा इन भारतविरोधी गिरोहों की मददगार रही है उसी के अनुसार भारत में इन गिरोहों की शंख्या 20 लाख से अधिक है व ये गिरोह भारत में आतंकवादियों के मददगार हैं। इसलिए केन्द्र सरकार का गृह विभाग इन भारतविरोधी गिरोहों की जांच करवा रहा ।
 http://www.hindustantimes.com/News-Feed/newdelhi/MHA-eye-on-NGOs-funding-terrorists/Article1-779211.aspx
वेशक ये जांच आज कुछ गैर- लाभकारी स्वैच्छिक संगठनों के भ्रष्टाचार विरोधी अन्दोलनngo6 में कूदने की बजह से करवाई जा रही है, लेकिन इस सच्चाई को तो नहीं नकारा जा सकता कि भारत के अधिकतर टैलीविजन चैनल,पत्रकार ,समाचार पत्र व  गैर- लाभकारी स्वैच्छिक संगठनों जिसमें मनबाधिकार संगठन व अल्पसंख्यक अधिकार संगठन भी सामिल है, विदेशों के इसारे पर भारतविरोधी महौल बनाने में जुटे हुए हैं। अगर आपको भरोसा नहीं होता इन सेकुलर गद्दारों की सच्चाई यहां पढ़ें।
ऐसा नहीं कि सब के सब गैर- लाभकारी स्वैच्छिक संगठन भारतविरोधी हैं
http://www.freemalaysiatoday.com/2011/12/09/ngos-want-indian-as-malacca-cm/
लेकिन क्योंकि इनमें से अधिकतर भारतविरोधी हैं इसलिए अब ये आम धारणा बनती जा रही है कि सबके सब गैर- लाभकारी स्वैच्छिक संगठन कहीं न कहीं विदेशियों के इसारे पर भारत को अस्थिर करने की दिन-रात कोशिस कर रहे हैं वो भी चन्द टुकड़ों के लालच में आकर।
गौतम नबलखा ,तीसता शीतलबाड़,कुलदीप नैयर,राजेन्द्र गोपाल सच्चर,राधा कमार, अग्निवेश, प्रशांत भूषण,मनमोहन सिंह जैसे भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी विदेशियों के पैसे पर पलने वाले वो गद्दार हैं जो भारत को तहस-नहस करने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं।
अब वक्त आ गया है कि सबके सब बलागर ऐसे एक-एक गद्दार पर निगाह रखकर इन सब भारतविरोधियों का कच्छा चिट्ठा खोलकर NGO नामक विस्फोटक को समय रहते निशक्रिए करें वरना वो दिन दूर नहीं जब ये NGO भारत में गृह युद्ध का कारण बनेंगे।ngo1
आओ मिलकर इस खतरे के बारे में अपने देशवासियों को जागरूक करें।

रविवार, 28 अगस्त 2011

अन्ना जी से गद्दारी कर आखिरकार भारतविरोधी आतंकवादियों के दलालों ने अपनी असलियत दिखा ही दी?

हम आपको शुरू से ही बता रहे हैं कि देश में चल रहे अधिकतर NGOs भारत के शत्रुओं के इसारे पर भारतविरोधी षडयन्त्रों को धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में छुपकर अन्जाम देते हैं। जिसके समय-समय पर प्रमाण सामने आते रहते हैं।
सच कहें तो अग्निवेश जैसे आतंकवादियों के मददगार का अन्ना जी-केजरीवल जी जैसे प्रखर देशभक्तों के साथ एक मंच पर आना हमारे लिए एक चौंकाने वाली घटना थी। इससे पहले जब अग्निवेश जी हमें स्वामी राम देव जी जैसे प्रखर देसभक्त के साथ दिखे तब भी हमें लगा कि ये क्या हो रहा है। मन में प्रश्न खड़े होने लगे कि कहीं ये व इसके मित्र देशहित के लिए किए जा रहे अन्दोलनों के साथ खुद को जोड़कर अपने देशविरोधी–हिन्दूविरोधी कार्यों को आगे बढ़ाने की फिराक में तो नहीं हैं?
फिर भी हमने अपने मन को समझाया कि अगर भारतविरोधियों के लिए काम करने वाला भारतीय व इसके मित्र अगर भारत के सबसे बढ़े शत्रुओं में से एक भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए काम करने की ओर अग्रसर हैं तो भला इसमें क्या बुराई है ? जब हम  लाखों हिन्दूओं का कत्ल कर करोंड़ों हिन्दूओं को वेघर कर भारत का विभाजन करवाने वाले धर्मनिर्पेक्षतावादियों व अलगावबादी मुसलमानों को इस देश में बरदाश कर रहे हैं तो  इन जैसे बौद्धिक गुलाम हिन्दूओं को इस नेक अन्दोलन में बरदाश करने में भला क्या हरज है?
बस एक ही डर सताता रहा कि कहीं ये टीम अन्ना जी से भीतरघात कर इस अन्दोलन को कमजोर न कर दे क्योंकि बाहर के शत्रु से लड़ना आसान होता है लेकिन अन्दर के शत्रु से निपटना बहुत मुस्किल ।
अब खबरें आ रही हैं कि अन्दोलन के दौरान अग्निवेश ने फोन पर सरकार को अन्दोलनकारियों पर हमला करने के लिए उकसाया वो भी उस वक्त जब सरकार जनता व विपक्ष के दबाब में अन्ना जी की बात मानने के लिए मजबूर हो चुकी थी। अब आप ही बताओ कि इस नाजुक वक्त में अनदोलनकारियों के विरूद्ध एक विदेशी अंग्रेज  एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम सरकार को भड़काने से वड़ी गद्दारी भला और क्या हो सकती है? मानो अपनी असलित दिखाने के लिए इतना काफी न हो अब अग्निवेश ने अन्दोलनकारियों को पागल हाथी करार दिया है।
ऐसा नहीं कि गद्दारी सिर्फ अग्निवेश ने ही की है इससे पहले इस देशहित से जुड़े अन्दोलन को कमजोर करने के लिए कल तक अन्ना जी के साथ दिखने वाली  अरूणा राय ने भी अपनी आका विदेशी अंग्रेज एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के इसारे पर जनलोकपालविल के रास्ते में रूकावटें पैदा करने के लिए अपना आधा-अधूरा जोकपाल विल मिडीया में उछालकर कमेटी के पास रख दिया व मिडीया में अपने नजदीकियों को अन्दोलनकारियों के विरोध में वोलने के काम में लगा दिया।
जरा सोचो जो सरकार व NGOs हर वक्त आम  लोगों के हित के लिए काम करने के वहाने हर भारतविरोधी आतंकवादी को आम-गरीब आदमी बताकर आतंकवादियों को कड़ी कार्यवाही से बचाने के लिए प्रतिबद्ध दिखते हैं वो ही सरकार व NGOs किस तरह आम गरीब लोगों  के सच्चे हित के लिए चल रहे अन्दोलन को मिलजुलकर किस तरह कमजोर करने में दिन-रात एक किए हुए थे।
जरा सोचो कि ये अन्दोलन देशभक्त क्रांतिकारियों व आम जनता के बजाए अगर इन गद्दारों के समर्थकों पर निर्भर होता तो क्या होता?
मजेदारबात तो ये हैं कि देश से गद्दारी की लत के सिकार हो चुके NGOs अपने साथियों से भी गद्दारी करने से खुद को नहीं रोक सके । प्रशांत भूषण जैसे लोग कल तक भारतविरोधियों की इन्हीं NGOs के साथ मिलजुलकर काम कर रहे थे।  हमें नहीं लगता कि इस देशहित से जुड़े अन्दोलन से इन NGOs की गद्दारी के बाद  भी कोई देशभक्त इन देशविरोधी-हिन्दूविरोधी NGOs को मुंह लगायगा या इनपे भरोसा कर पाएगा।
क्या आपको नहीं लगता कि देशहित वो भी खासकर दबे-कुचले-गरीब हित या य़ूं कहें कि देश के अन्तिम आदमी के हित से जुड़े इस अन्दोलन का विरोध कर धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में छुपकर भारतविरोध में काम करने वाले  भारतविरोधी आतंकवादियों के दलालों ने अपनी असलियत दिखा ही ?

गुरुवार, 25 अगस्त 2011

जो संविधान भ्रष्टाचार और आतंकवाद को खत्म करने के रास्ते में बाधा बने और गरीबों को गोली से उड़ाने की इजाजजत दे उस संविधान को जलाकर राख कर देना चाहिए।

Ninjaआज जब भी भ्रष्टाचार और आतंकवाद के विरूद्ध कढ़े कदम उठाने की बात चलती है तो अक्सर संविधान की दुहाई दी जाती है। संविधान में क्या क्या लिखा है इसे पूरी तरह तो हमने नहीं पढ़ा लेकिन  जो हम अनुभव कर रहे हैं उसमें ये पा रहे हैं कि जब भी किसी भारतविरोधी आतंकवादी को कढ़ी सजा देने की बात चले तो आतंकवादी का बचाब संविधान की दुहाई देकर किया जाता है दूसरी तरफ जब किसान-वनवासी या फिर आम देशभक्त जनता अपने अधिकारों को लिए शांतिपूर्वक अनसन-धरना प्रदर्शन करें तो अक्कसर सरकारें उनपर गोली-वारी करवाकर उन्हें मौत के घाट उतार देती हैं।
मामला चाहे 4 जून की रात को रामलीला मैदान में कालेधन के विरूद्ध संघर्ष कर रहे देशभक्तों पर आधी रात को हमले का हो Publicया फिर महाराष्ट्र में पानी की खातिर संघर्ष कर रहे किसानों का हो या फिर देश के विभिन्न हिस्सों में बनों पर अपने अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे वनवासियोंVillagers का हो । हर जगह यही देखने को मिलता है कि उन सब का कत्ल करने का अधिकार संविधान सरकारों को  देता है।
आप देख लो कि किस तरह लोकतन्त्र के मन्दिर पर हमला करने वाले मानबता के कातिल को संविधान का हवाला देकर जिन्दा रखने की कोशिसें की जा रही हैं जो पिछले कई वर्षों से सफलतापू्वक जारी हैं।
आज जब अन्ना हजारे जी Anna jiभ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए सख्त कानून की बात कर रहे हैं तब भी कहा जा रहा है कि संविधान भ्रष्टाचार रोकने के लिए जन लोकपाल जैसे कड़े कानून बनाने की इजाजत नहीं देता।
बैसे भी ये संविधान वो संविधान नहीं है जो 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था। इस संविधान को सरकारों ने अपनी सुविधानुसार एक-दो वार नहीं वल्कि सैंकड़ों वार बदला है।
जब संविधान बना था तब हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्षता जैसी कोई ब्याबस्था संविधान में नहीं थी। देश के दुशमनों ने संविधान को तोड़मरोड़कर इस देशविरोधी-हिन्दूविरोधी षडयन्त्र को संविधान का हिस्सा बनाया। जिसके परिणामस्वारूप आज इमाम बुखारी जैसे भारतविरोधी आतंकवादी वन्देमातरम् और भारत माता की जय जैसे देशभक्ति के उदघोषों को सांप्रदायिक करार देकर विना किसी खौफ के जिन्दा रह रहे हैं।
हद तो देखो कि जिस अन्दोलन से अग्निवेश Agniveshजैसे लोग (जो देशभक्त ताकतों खासकर हिन्दुत्वनिष्ठ ताकतों व हिन्दूओं को कोशने का कोई मौका नहीं छोड़ते जो अकसर मुसलिम व माओवादी आतंकवादियों के बचाब के लिए लड़ते हुए नजर आते हैं) जुड़े हुए हैं उस अन्दोलन को अगर ये मुसलिम गद्दार सांप्रदायिक करार दे रहे हैं तो आप कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि कल जब ये गद्दार और ताकतवर हो जायेंगे तो सारे के सारे हिन्दूओं को ही सांप्रदायिक करार देकर भारत को ही सांप्रदायिक ठहराकर  गद्दारों के लिए एक और विभाजन की मांग नहीं करेंगे। 
बैसे अगर आप के मन में थोड़ी भी मानबता वाकी है तो आप  महसूस कर सकते हैं कि भारत के जिस हिस्से कशमीर घाटी में इन मुसलिम गद्दारों की संख्या अधिक हो गई उस हिस्से में इन राक्षसों ने किस तरह सेकुलर गिरोह की सहायता से हिन्दूमिटाओ-हिन्दूभगाओ अभियान चलाकर 60000 हिन्दूओं का कत्ल कर 500000 हिन्दूओं को वेघर कर दिया जो आज अपने ही देश में दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं(सरकारों के पास भारतीय सैनिकों पर हमला करने वाले मुसलिम आतंकवादियों को देने के लिए 5-5 लाख रूपए तो हैं पर इनके लिए कुछ नहीं)।
जो सेकुलर गद्दार गुजरात में मुसलिम हमले की प्रतिक्रियस्वारूप मारे गए 1000 मुसलमानों(अच्छा होता न मुसलमान हमला करते न ये मारे जाते) के लिए  दिन रात TV पर छाती पीटते रहते हैं क्या आपने इन गद्दारों को कभी मारे गय हजारों हिन्दूओं व वेघर हुए लाखों हिन्दूओं की पीड़ा पर कभी वोलते हुए देखा। नहीं न क्यों ? क्योंकि धर्मनिर्पेक्ष शब्द संविधान में जुड़ने के बाद सब गद्दारों को हिन्दूओं का कत्लयाम करने का मानो लाइसैंस(Learning Lisence) मिल गया हो। जिसे पक्का करने के लिए Prevention of Communal and Targeted Violence Bill- 2011 लाया जा रहा है ताकि भारतविरोधी आतंकवादियों को देशभक्तों का सफाया करने में कोई समस्या पेश न आए। मारे व उजाड़े गय हिन्दूओं का मुद्दा उठाना तो दूर जो हिन्दूओं की पीड़ा को व्यक्त करने की कोशिश भी करे उसे ये सेकुलर गद्दार एकदम से सांप्रदायिक करार दे देते हैं जिस तरह आज इस भ्रष्टाचार विरोधी अन्दोलन को सांप्रदायिक करार  दिया जा रहा है।
ये सब किया जा रहा है इस संविधान के नाम का सहारा लेकर।
हमारे विचार में अब वक्त आ गया है कि इस संविधान को जो कि भ्रष्टाचारियों व गद्दारों की ढाल वन चुका है उसे आग लगाकर हमेशा के लिए खत्म कर दिया जाए व देश में एक ऐसा संविधान बनाया जाए जो भारतीयों के लिए हो न कि हिन्दू-मुसलिम या ईसाई के लिए।

सोमवार, 29 नवंबर 2010

आन्ध्र प्रदेश में उठा तुफान कुछ कहता है।


आप सब जानते हैं कि हम YSR रेड्डी के कतई प्रशंसक नहीं। कारण भी साफ है एक तो उन्होंने हिन्दू मत त्याग कर इसाई मत स्वीकार कर अपनी मौकापरसत सोच का प्रमाण दिया । दूसरे ईसाई हो जाने के बाद उन्होंने कई हिन्दूविरोधी-देशविरोधी कदम उठाए।


जिसके परिमामस्वारूप वो हिन्दूविरोधी-देशविरोधी विदेशी ताकतों को एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी से अधिक उपयोगी नजर आने लगे । क्योंकि चर्च ने ऐसे ही हिन्दूविरोधी-देशविरोधी कामों को करवाने के लिए एंटोनिया को चुना था लेकिन अब चर्च को लगने लगा कि एक विदेशी इसाई से भारतीय इसाई चर्च के भारतविरोधी कामों को अन्जाम देने के लिए जयादा उपयोगी है। लेकिन एंटोनिया जो कभी चर्च की कठपुतली मात्र थी अब एक दमदार खिलाड़ी बन चुकी है। YSR रेड्डी के तातकवर होने का खमियाजा उन्हें अपने प्राण देकर उठाना पड़ा। कुल मिलाकर जब आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाई. एस. राजशेखर रेड्डी के पुत्र और कांग्रेसी सांसद जगनमोहन रेड्डी ये आरोप लगाते हैं कि उनके पिता का कत्ल करवाया गया तो उनकी बात में न केबल दम नजरआता है वल्कि उनकी बात ही सच्चाई प्रतीत होती है। वाई. एस. राजशेखर रेड्डी जी का कत्ल इससे पहले कत्ल किए गए 6-6 भारतीयों के कत्ल के समान प्रतीत होता है।(अधिक जानकारी के लिए यहां पढ़ें )


हम वंसबाद के कट्टर विरोधी हैं । लेकिन जब कांग्रेस में वंशवाद के अधार पर ही उतराधिकारी तय किए जाते हैं तो फिर जगनमोहन रेड्डी के साथ ये वेइनसाफी क्यों? अगर वाई. एस. राजशेखर रेड्डी जी की मौत एक दुर्घटना होती तो कोई भी इस तरह जगनमोहन रेड्डी के रास्ते में रोड़े नहीं अटकाता जिस तरह अटकाए जा रहे हैं। आज आप हम सभी जानते हैं कि कांग्रेस में एंटोनिया के सिवाए किसी और में दम नहीं कि वो परिवारिक उतराधिकारियों के रास्ते में रोड़े अटका सके क्यों ऐसे किसी भी कदम को जोकर राहुल का विरोध माना जाएगा ।


अब प्रश्न यह उठता है कि एंटोनिया क्यों जगनमोहन रेड्डी के रास्ते में रोड़े अटका रहीं है?


चलो कारण कोई भी हो पर एक बात पक्की है कि जगमोहन में दम है विरोध करने व अपने हक की लड़ाई लड़ने का। हमें ये जानकर बहुत खुशी हुई कि जगनमोहन रेड्डी ने एंटोनिया व राहुल की वो सच्चाई जनता के सामने रखी जिन्हें वाकी डरपोक हिन्दूविरोधी-देशविरोधी चैनल रखने के वारे में सोच तक नहीं सकते। इस नाते जगनमोहन रेड्डी बधाई व शुभकामनाओं के पात्र हैं। वेशक उनके पिता ने कुछ हिन्दूविरोधी-देशविरोधी कदम उठाए थे लेकिन कुलमिलाकर उनके पिता एक अच्छे इनसान थे।भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे । हम भगवान से यही प्रार्थना करेंगे कि अगर जगनमोहन रेड्डी की लड़ाई देशहित की लड़ाई है तो उन्हें जरूर सफलता मिले वरना जो भगवान करेंगे सही ही करेंगे।






रविवार, 26 सितंबर 2010

भारतविरोधी UPA सरकार की गद्दार मुसलमानों को भारतीय सेना पर हमले करने की खुली छूट!

UPA के नेतृत्व में हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह लगातार भारतविरोधा आतंकवादियों का साथ दे रहा है । आप सब जानते हैं कि खुद सरकार कह चुकी है कि सैनिकों पर पत्थरों से हमाला करने वाले मुसलमान पाकिसतान समर्थक आतंकवादी हैं जो जिहादी आतंकवादी गिरोह लशकरे तैयवा के इसारे पर सैनिकों पर हमला वोल रहे हैं।
http://samrastamunch.blogspot.com/2010/07/blog-post_09.html

अब इस हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की UPA सरकार ने घोषणा की है कि मसजिदों व मदरसों में योजना बनाकर सैनिकों पर हमला करने वाले प्रत्येक पत्थरवाज के परिवार को 5 लाख रूपए दिए जायेंगे ताकि इन पत्थरबाजों के परिवारों का भारतीय सेना पर हमला करने का हौसला बना रहे ।साथ ही जिन मुसलमानों ने अभी तक भारतीय सैनिकों पर पत्थरवाजी नहीं की थी उन्हें भी प्रेरणा लेकर ये 5 पांच लाख प्राप्त करने के लिए अपने बच्चों को पाठशाला भेजने के बजाए सैनिकों पर हमले करने में लगा देना चाहिए।( ध्यान रहे कि ये वही सरकार है जिने 2004 में सता में आते ही अर्धसैनिक बलों के जवानों के देश की रक्षा की खातिर शहीद हो जाने पर मिलने वाली सहायता यह कहकर कम कर दी कि सरकार के पास पैसा नहीं मतलब देशभक्तों के लिए पैसा कम है पर गद्दारों के लिए कोई कमी नहीं)

इन पत्थरबाज गद्दार मुसलमानों पर मेहरवान होते हुए हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की UPA सरकार ने कहा कि जो पत्थरबाज देशभक्त सैनिकों का कत्ल करने की कोशिश में पकड़कर जेलों में डाले जा चुके हैं उन्हें भी रिहा कर दिया जाएगा ताकि पत्तवारबाजों की संख्या कम न हो सके।

हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की UPA सरकार ने इससे भी आगे जाते हुए मुसलमानों द्वारा सैनिकों पर किए गए हमलों व श्रीनगर में फहराए गए पाकिस्तानी झंडे जैसी हरकतों से खुश होकर इन गद्दारों को 10000000( 100 करोंड़) का इनाम देने की घोषणा की।

ये मुसलिम आतंकवादी कशमीर में अपनी स्थिति मजबूत कर सकें ताकि इन्हें भारत से अलग होकर पाकिस्तान के साथ मिलने में आसानी रहे इसके लिए हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की UPA सरकार ने भारतीय सैनिकों को आतंकवादियों द्वारा बताए गए स्थानों से हटाने की भी घोषणा की।

सरकार ने बायदा किया कि सैनिकों द्वारा आत्मरक्षा व देश की रक्षा के लिए प्रयोग किए ज रहे AFSPA को भी शीघ्र हटा दिया जाएगा।

ध्यान रहे कि 11 जून से शुरू हुए इन गद्दार मुसलमानों के हमलों में सैंकड़ों सैनिक घायल हो चुके हैं व दर्जनों सैनिक शहीद हो चुके हैं।

हमें यह भी ध्यान रकना चाहिए कि 11 जून को मुसलमानों के हमले शुरू होने का कारण यह था कि हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की UPA सरकार ने जिहादी आतंकवाद समर्थक उमर अबदुल्ला के कहने पर कशमीर से हजारों सैनिकों को उन स्थानों से हटा लिया था जहां पर आतंकवादियों को खदेड़कर भारत का नियन्त्रण स्थापित करने के लिए सैंकड़ों सैनिकों ने अपनी कुर्वानी दी थी। पर इस हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की UPA सरकार ने आतंकवादियों को फायदा पहंचाने के लिए शांति स्थापित करने के नाम पर वहां से हजारों सैनिकों को हटाकर उन क्षेत्रों को फिर से आतंकवादी मुसलमानों के हबाले कर दिया।

समझो मेरे प्यारे देशभक्त हिन्दूओं वरना वो दिन दूर नहीं जब इस हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की UPA सरकार की मदद से सारा भारत एकवार फिर इन मुसलिम आतंकवादीयों के कब्जे में चला जाएगा।

हमें आज यह प्रण करना चाहिए कि अगर कसमीर पर भारत का नियन्त्रण कंम करने की कोशिसें इसी तरह आगे बढ़ेंगी तो हर हाल में हम एक-एक मुसलिम आतंकवादी को चुन-चुन कर तब तक मारेंगे जब तक सारा भारत ,भारतविरोधी आतंकवादियों से मुक्त न हीं हो जाता।

http://samrastamunch.blogspot.com/2010/07/blog-post_12.html

मंगलवार, 21 सितंबर 2010

जामा मसजिद क्षेत्र में किए गय हमले के निशाने पर कौन था ?

19-09-10 को एकवार फिर दिल्ली पर हमला किया गया। हमला होने के कुछ ही क्षण बाद खुद को ISI का ऐजेंट बताने वाले खानदान ने से सबन्धित इमाम ने सीघे –सीधे इस हमले का आरोप हिन्दूओं के सिर मढ़ने की कोशिश की।

इस ISI का ऐजेंट का कहना था कि क्योंकि इस हमले के निशाने पर जामा मसजिद थी इसलिए ये हमला इंडियन मुझाहीद्दीन(IM) का नहीं हो सकता---मतलब इंडियन मुझाहीद्दीन(IM) का काम सिर्फ हिन्दूओं और मन्दिरों पर हमले करना है न कि मस्जिदों पर।

ISI का ऐजेंट की इस बात को मान लिया जाए कि मुसलिम आतंकवादी मस्जिद पर हमला नहीं कर सकते तब तो ये मानना पड़ेगा कि आज तक पाकिस्तान में मस्जिदों पर जितने भी हमले हुए वो मुसलिम जिहादी आतंकवादियों ने नहीं किए। जबकि हर तर्कशील वयक्ति इस बात को अच्छी तरह जानता है कि जब कुता पागल हो जाता है फिर वो अपना पराया नहीं देखता। खैर ISI के ऐजेंट इमाम को ये बात समझाना गधे के सिर पर सींग उगाने समान है।

अब हम बात करते हैं इस आतंकवादी हमले के असली निशाने की। इस जिहादी आतंकवादी हमले का असली निशाना थे जामा मसजिद के चारों ओर तैनात सुरक्षाबलों के जवान। वो जवान जो आतंकवादियों से जामा मस्जिद की रक्षा के लिए तैनात किए गए हैं लेकिन सरकार को कौन जमझाए कि आतंकवादियों व उनके समर्थकों को आतंकवादियों से कोई खतरा नहीं होता। जो जवान इनकी रक्षा के लए खड़े किए गए हैं वही जवान इन आतंकवादियों को जामा मसजिद को अपनी पनाहगाह के तौर पर प्रयोग करने में बाधा प्रतीत हो रहे हैं। इसीलिए कार बम के निशाने पर पास की पुलिस चौकी थी न कि जामा मसजिद। इसी तरह गोली-वारी के निशाने पर भी गेट नम्वर 3 पर तैनात सुरक्षा कर्मी थे ये तो सौभाग्य से सैलानियों की बस बीच में आ गई।

आतंकवादियों को उसी वक्त पकड़ा जा सकता था यदि पूरे जामा मसजिद क्षेत्र का तलासी अभियान चलाया जा सकता तो। पर यदि ऐसे किया जाता तो कांग्रेस का बोट-बैंक खतरे में पड़ जाता इसीलिए इस जिहादी आतंकवादी हमले को कांग्रेस ने सिरे से नकारने की कोशिस की।

ऐसा नहीं कि इंडियन मुझाहीद्दीन(IM) का ये हमला कोई पहला हमला हो इससे पहले भी इंडियन मुझाहीद्दीन(IM) भारत पर कई हमलों को अंजाम दे चुका है।
http://www.mid-day.com/news/2010/sep/200910-Delhi-Indian-Mujahideen-terrorist-Jama-Masjid-Attack.htm
लैफ्टीनैंट कर्नल पुरोहित ने INTELIGENCE OFFICER की DUTY का निर्वाह करते हुए इसी इंडियन मुझाहीद्दीन(IM) से जुड़े 300 आतंकवादियों की सूची महाराष्ट्र सरकार को देने की गलती की थी । परिणाम सबके सामने हैं इंडियन मुझाहीद्दीन(IM) के आतंकवादी तो खुलेआम अपनी कार्यवाहियों को अंजाम दे रहे हैं पर देश के बफादार सैनिक को जेल में डालकर प्रताड़ित किया जा रहा है।

इंडियन मुझाहीद्दीन(IM) को जिस तरह का सरंक्षण देने की गलती कांग्रेस ने की है न जाने उसकी कितनी कीमत देश को चुकानी पड़ेगी पर कांग्रेस को इससे क्या फर्क पड़ता है इसकी आका तो वोरिया-विसतर उठाकर इटली भाग जाएगी पर भारतीय कहां जायेंगे?

हम तो सरकार से यही कह सकते हैं कि विना कोई समय गंवाए आतंकवादियों के प्रति हमदर्दी छोड़कर उनसे कढ़ाई से निपटे वरना कहीं एसा न हो कि ये काम खुद देश के नागरिकतों को अंजाम देना पड़े फिर न आतंकवादी बचेंगे न इन्हें पनाह व संरक्षण देने वाले । सबके सब मौत के घट उतार दिए जायेंगे।

शुक्रवार, 17 सितंबर 2010

21 सितम्बर को गद्दार मुसलमानों द्वारा सेना के कैंप्पों पर हमला करने की खुली चुनौती!

धर्मनिर्पेक्ष गिरोह द्वारा संचालित भारत-विरोधी UPA सरकार की मुसलिम आतंकवाद समर्थक नितीयों के परिणामस्वारूप आज मुसलमान आतंकवादियों के हौसले इस कदर बढ़ गए हैं कि अब वो सेना को खुली चुनौती देने लगे हैं।

ऐसा नहीं कि मुसलिम आतंकवादियों के पास सेना को चुनौती देने की ताकत आ गई है लेकिन कहाबत है कि जब संइया भय सरदार तो डर काहे का। आतंकवादी अच्छी तरह जानते हैं कि UPA की केन्द्र सरकार व राज्य सरकारों के कर्ता धर्ता खुद गद्दार हैं तो भला वो फिर क्यों गद्दारों के विरूद्ध कोई कड़ी कार्यवाही सेना को करने देंगे।
 http://samrastamunch.blogspot.com/2010/07/blog-post_09.html

आप सब इस बात से परिचित हैं कि किस तरह 25 जून को दो मुसलिम आतंकवादियों का खात्मा कर रहे बहादुर सैनिकों पर मुसलिम आतंकवादियों ने जानलेवा हमला कर सेना के वाहन को आग के हवाले कर दिया।

गद्दार उमर अबदुल्ला ने मुसलिम आतंकवादियों को इस तरह के हमलों से वाज आने की चेतावनी देने के बजाए आतंकवादियों का पक्ष लेना शुरू कर दिया। इनकी गद्दारी की हद तो तब पार हो गई जब भारतविरोधी केन्द्र सरकार व राज्य सरकार ने मिलकर सेना की एक पूरी बटालियन पर मुकद्दामा दर्ज कर आतंकवादियों का हौंसला बढ़ाने की एक अप्रत्यासित कार्यवाही को अंजाम दिया। मानो अपनी गद्दारी को साबित करने के लिए इतना काफी न हो इसीलिए अपने कमीनेपन का परिचय देते हुए उमर अबदुल्ला ने आतंकवादियों के हमलों में भारी जानमाल का नुकसान उठाने के बाबजूद अपना धैर्य न खोने वाली सेना पर वेलगाम होने का निराधार आरोप जड़ दिया http://samrastamunch.blogspot.com/2010/07/blog-post.html
वो भी सिर्फ इसलिए ताकि मुसलिम आकतंकवादीयों को पूरा भरोसा हो जाए कि UPA की भारतविरोधी केन्द्र सरकार व राज्य सरकार हर हाल में अलगाववादी मुसलमानों के साथ है।

आज कशमीरघाटी ही भारत में एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जहां मुसलमानों की आबादी हिन्दूओं से ज्यादा है । परिणाम सबके सामने हैं हिन्दूओं को कत्ल कर उन्हें घरों से उजाड़ दिया वो भी मुसलिम आतंकवादियों के सहयोगी सेकुलर गिरोह की सहायाता से। आज जरूरत है हिन्दूओं को कशमीरघाटी की घटानओं से सबक लेकर देशभर में मुसलिम आतंकवादियों के हमलों से खुद को सुरक्षित रखने के उपाय खोजने की।

हमारे विचार में हिन्दूओं को सबसे पहले अभिनव भारत जैसे हिन्दूएकता व रक्षा को समर्पित संगठनों के साथ मजबूती से खड़ा होकर उनके हाथ मजबूत कर खुद भी आत्मरक्षा की ट्रेनिंग लेकर अपनी व अपने वतन की रक्षा की खातिर किसी भी हमले का समाना करने के लिए तैयार रहने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर आतंकवादी मुसलमानों की पहचानकर उनका खात्मा सुनिश्चित करना।

आज जो आतंकवादी मुसलमान खुलेआम सेना पर हमलों की चुनौति दे रहे हैं ऐसा नहीं कि इससे पहले ये मुसलिम आतंकवादी सैनिकों पर हमले नहीं कर रहे थे ।आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आज भी भारत में हर रोज औसतन 11 सौनिकों का कत्ल भारतविरोधी आतंकवादियों द्वारा किया जाता है। इसमें से 9 सैनिक मुसलिम आतंकवादियों के हमलों में शहीद होते हैं। मुसलिम आतंकवादजियों के होथों कत्ल हो चुके हिन्दूओं की संख्या लाखों में पहुंच चुकी है। अब जरूरत है राक्षस को उसी की भाषा में करारा जबाब देने की।

जागो हिन्दूओं और तैयार हो जाओ सैनिकों पर हमला करने वालों पर हमला करने के लिए। सैनिकों पर हमला करनेवालों का कत्ल देशभक्ति है। क्योंकि देश के नागरिक का ये फर्ज है कि जरूरत पड़ने पर अपनी रक्षा को समर्पित पर हमला होने के सथिति में हमलावर का नमोनिशान मिटाकर देश धर्म का पालन कर अपनी आने वाली पिढ़ियों के लिए मिशाल कायम करना।

हम देश के सैनिकों से सिर्फ यही कहेंगे कि दुशमन द्वारा अपने कैंप्पों पर आंख उठाने से पहले ही दुशमन का कत्ल कर उसे गद्दारी का अनजाम दिखा दिया जाए।हम बेसवरी से 21 सितम्बर का इन्तजार करेंगे जिस दिन आतंकवदी मुसलमानों की हार व हमारे देसभक्त सैनिकों की जीत सुनिशचित है।

अन्त में हम सैनिकों से यही कहेंगे के आज देश का हर देशभक्त नागरिक आपसे सिर्फ यही उम्मीद करता है कि दुशमनों की पैरवी करने वाले हर गद्दार को आप चौराहे पर खड़ा कर गोली से उड़ा दें फिर ये पैरवी करने वाला चाहे नेता हो या मानवाधिकारवादी या फिर कोई नौकरशाह।

मंगलवार, 14 सितंबर 2010

जब आक्रमणकारी मुसलमानों व ईसाईयों को आरक्षण दिया जा सकता है तो फिर जाटों को क्यों नहीं?



आज भारत के हालात दिन प्रतिदिन बद से बदतर होते जा रहे हैं ।धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की केन्द्र सरकार फूट डालो और राज करो के षडयन्त्र को पूरी वेशर्मी से आगे बढ़ा रही है।


एक तरफ ये सरकार आतंकवादियों का खुला साथ दे रही है तो दूसरी तरफ हिन्दूओं को आपस में लड़ाने का कोई मौका नहीं चूक रही है। ये देश का दुर्भागय ही है कि जो काम देश के शत्रुओं का है वही काम खुद देश की सरकार अन्जाम दे रही है।


सरकार का काम होता है समाज के अन्दर समरसता व एकता के लिए काम करना पर ये सरकार भारतीय संस्कृति के हर उस एकता सूत्र पर हमला वोल रही है जो एकता सूत्र सदियों से भारत को समरसता के पास में बांधे हुए था।


आज हम सिर्फ आरक्षण की बात करते हैं । आरक्षण की ब्यबस्था हिन्दू समाज में विकास की दौड़ में पीछे रह चुके अपने वंचित भाईयों को आगे बढ़ने का मौका देने के लिए सिर्फ 10 वर्ष के लिए की गई थी।इन 10 वर्षों में सरकार से उमीद थी कि वो सराकरी तानानवाना कुछ इस तरह से बुनेगी कि जाति अधारित भेदभाव के लिए कोई जगह न रहे । लेकिन सरकार ने आरक्षण को धीरे-धीरे हिन्दूओं को आपस में लड़वाने के लिए हथियार की तरह प्रयोग कर वोट बैंक निती में बदल डाला । परिणाम स्वारूप आज कभी एक जाति तो कभी दूसरी जाति आरक्षण के लिए हथियार उठाती हुई प्रतीत होती है।


धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की गद्दारी की इन्तहां देखो कि ये गिरोह आक्रमणकारी मुसलमानों व ईसाईयों को तो आरक्षण देने के लिए संविधान व माननीय सर्वोच न्यायालय तक का उलंघन करने को तैयार है पर देश की रक्षा की रीढ़ देसभक्त जाटों को आरक्षण देने में इस गिरोह को तकलीफ महसूस हो रही है।


हमारे विचार में आरक्षण किसी समस्या का समाधान नहीं वल्कि खुद एक समस्या है ।


लेकिन जब देश से हर मोड़ पर गद्दारी करने वाले मुसलमानों व लुटेरे ईसाईयों को आरक्षण देने की गद्दारी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह कर रहा है तो इन आक्रमणकारियों को आरक्षण मिलने से पहले देश के हर गरीब हिन्दू , चाहे वो किसी भी जाति का हो को आरक्षण मिलना चाहिए।


हम तो सब हिन्दूओं से अपील करेंगे कि देश के साधनों पर आक्रमणकारियों के पहले हक की बात करने वाले गद्दारों को पहचानकर ऐसे गद्दारों का नमोनिसान मिटाने के प्रयत्न सब देसभक्त हिन्दूओं को एकजुट होकर करने चाहिए विना ये सोचे कि ये गद्दार कौन से सांप्रदाय—जाति-क्षेत्र या राजनीतिक दल से सबन्धित है।


क्योंकि आज मुद्दा जाटों के आरक्षण का है इसलिए हमारे विचार में सरकार को विना कोई समय गंवाय जाटों को आरक्षण दे देना चाहिए।


साथ ही हम अन्दोलनकारी जाटों से भी ये विनती करते है अन्दोलन के दौरान ये सुनिस्चत करें कि हिन्दू-हिन्दू से न उलझे न ही प्रदर्शनकारी अपने ही सैनिकों व पुलिसवलों से उलझें क्योंकि देश का दुशमन ये सेकुलरगिरोह यही तो चाहता है कि हम आपस में लड़कर कमजोर हों ताकि आक्रमणकारी मुसलमान व ईसाई फिर से हमें गुलाम बना सकें।