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मोदीराज लाओ

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रविवार, 15 जनवरी 2012

दंगा करवाने की ओर काँग्रेस के बढ़ते कदम...संदर्भ दिगविजय सिंह के समर्थक द्वारा स्वामी राम देव जी पर हमला

आज भारत में जिस तरह कांग्रेस गद्दारी और चोरी की प्रतीक बन गई है ठीक उसी तरह स्वामी राम देव जी देशभक्ति और इमानदारी के सत्मभ बन चुके हैं।Ramdav ji
अब जब कांग्रेस को महसूस होने लगा है कि उसके द्वारा स्वामी राम देव जी को जान से मारने attack on SWamiव बदनाम करने का हर षडयन्त्र न केवल असफल हो चुका है वल्कि   कांग्रेस की भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी मानसिकता को भी जगजाहिर कर चुका है तो कांग्रेस एक ऐसे षडयन्त्र को अन्जाम देने की फिराक में है जिसके बल पर आज तक कांग्रेस भारत की राजनीति पर छाई रही है।
अगर आप कांग्रेस के इतिहास पर नजर डालें तो आप पायेंगे कि काँग्रेस ने आज तक हिन्दू-मुसलमान में दंगा करवाकर ही अपनी राजनीतिक हैसियत बचाकर रखने में सफलता हासिल की है।
2002 में इस्लामिक आतंकवादियों द्वारा रेलगाड़ी में आग लगाकरgodhra हिन्दूओं को जिन्दा जलाकरgodhra1 शुरू करवाया गया दंगा ही 2004 में NDA  को सता से बाहरकर काँग्रेस को सता में लाने का प्रमुख कारण बना। ध्यान रहे ट्रेन में आग लगाने वाली भीड़ का नेतृत्व कांग्रेस के पार्षद ही कर रहे थे ।
इसी दंगे को आधार बनाकर आज तक कांग्रेस  मुसलिम बहुल क्षेत्रों में कई चुनाब जीत चुकी है।
आज जब राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (RSS) Mohan-Bhagwat_0कांग्रेस की इस  दंगा करवाने की मानसिकता को समझ कर अपने संगठन में से प्रतिक्रियावादी तत्वों को दूर कर खुद को राष्ट्रीय एकता का बास्तविक शूत्रधार साबित कर चुका है तो कांग्रेस ने प्रखर राष्ट्रवाद के नए-नवेले संगठन भारत स्वाभिमान को अपने निशाने पर लेकर अपनी विभाजनकारी मानसिकता को आगे बढ़ाने की पूरी तैयारी कर ली है।
कांग्रेस अछ्छी तरह जानती है कि स्वामीराम देव जी के साथ हर देशभक्त मजबूती से खड़ा है चाहे वो हिन्दू-सिख-मुसलिम- ईसाई कोई भी हो।
कांग्रेस ये भी जानती है कि स्वामीरामदेव जी बटला हाऊस मुठभेड़ का विरोध कर  देशभक्त  वीर-जवानों का अपमान mcsकतई नहीं कर सकते।
काँग्रेस गुप्तचर संस्थाओं के माध्यम से ये भी जानती है कि आज मुसलमानों का बहुमत या तो आतंकवादी है या फिर  इस्लामिक आतंकवाद का समर्थक है।
इसीलिए बटला हाउस मुठभेड़ को फर्जी बताकर कांग्रेस एक तो देशभक्त वीर-जवानों को अपमानित कर आतंकवादियों के एकमुस्त बोट हासिल करने की फिराक में है, दूसरा देशभक्त मुसलमानों को जोकि पहले ही हासिए पर हैं को स्वामी रामदेव जी  से दूर करने की फिराक में है।  
कांग्रेस अच्छी तरह जानती है कि स्वामी रामदेव जी जी का काँग्रेस की गद्दारी और लूट पर हमला RSS के हमले से कहीं ज्यादा स्टीक और तीखा है।
जिस तरह आज तक काँग्रेस ने अपने मित्र इस्लमिक आतंकवादियों से हिन्दूओं पर हमला करवाकर  शुरूकरवाए  गए दंगों के लिए RSS को दोषी ठहराकर चुनाबी सफलतायें हासिल की हैं उसी तरह स्वामी रामदेव जी पर अपने मित्र इस्लामिक आतंकवादियों से हमला करवाकर देशभक्तों को प्रतिक्रिया के लिए मजबूर कर , परिणामस्वारूप शुरू हुए दंगों के लिए  भारतस्वाभिमान को दोषी ठहराकर चुनाबी सफलतायें हासिल करना चाहती है…    

शनिवार, 3 दिसंबर 2011

जिस राहुल विन्सी की उत्तपति ही FDI के परिणास्वारूप हुई हो वो भला FDI का विरोध कैसै कर सकता है?

हम भारतीय अक्कसर ऐसी मूर्खतायें करते हैं जिन्हें देखकर बिदेशी हमारे उपर फबतियां ही नहीं कसते बल्कि आपसी बातचीत में हमारा जमकर उपहास भी उड़ातें हैं।राहुल विन्सी का FDI पर ये ब्यान इसी का प्रमाण है।
अब जरा सचो कि जो व्यक्ति/गिरोह/संगठन/कांग्रेसी/राजनीतिक दल आज एक विदेशी एडवीज एंटोनिया अलविना माईनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम सरकार को केन्द्र में बनाए रखने के लिए सहयोग कर रहे हैं वही व्यक्ति/गिरोह/संगठन/कांग्रेसी/राजनीतिक दल किस मुँह से FDI का विरोध कर रहे हैं।
FDI का मतलब है प्रतय्क्ष विदेशी निवेश ।अब आप ही बताओ भला एडवीज एंटोनिया अलविना माईनो से बड़ा और सीधा बिदेशी निवेश और क्या हो सकता है? इस FDI का तो उत्पादन Half Indian राहुल विन्सी भी हमारे सामने है जिसे कैटरीना कैफ ही 50% Indian करार देती है जो खुद पूरी तरह से भारतीय नहीं है।
FDI से उत्पादन कोई समाज सेवा या फिर जन कल्याण के लिए नहीं किया जाता जैसा की जनमजात बौद्धिक गुलाम मनमोहन सिंह कह रहा है बल्कि उत्पादन किया जता है लाभ कमाने के लिए । क्योंकि निवेश विदेशी है तो लाभ भी तो विदेशों में ही जायगा । भारत में लाभ के नाम पर लूट मची हुई है अब आप एंटोनिया नामक FDI को देख लो किस तरह से कभी बोफोर्ष सौदे के नाम पर ,तो कभी CWG के नाम पर ,तो कभी तेल के बदले अनाज के नाम पर, तो कभी 2G +3G , तो कभी रैली के नाम पर भारत को लूट कर  सारा धन विदेशों में जमा करवा रही है।  आज भारत में जो नियम हैं उनके हिसाब से कोई भी कैसे भी जितना चाहे उतना भारत को लूट सकता है लेकिन कानून इन सब डकैतों की रक्षा करता है। इसीलिए 100 की चीज 1000 में बेचकर भोली-भाली जनता को लूटा जा रहा है। चिप्पस का मामला ही देख लो।  
जरा सोचो जिस भाजपा ने अपने कार्यकाल में एक विदेशी को भारतीय संसद में विपक्ष के नेता के रूप में मानयता देकर भारत की गुलामी का मार्ग खोला वही भाजपा भला आज किस मुंह से FDI का विरोध कर रही है। अगर भाजपा उस वक्त वाह-वाही के चक्कर में न पड़कर समझदारी से काम लेती और अपनी सरकारी ताकत का उपयोग कर इस विदेशी विषकन्या की कारगुजारियों पर तवरित जाँच करवाकर इसकी भारतविरोधी करतूतों का कच्चा चिट्ठा जनता के सामने रखती तो आज न तो देश गुलाम होता नही ही विदेशियों के हाथों इस तरह लुटता व न ही ये विदेशी विषकन्या Prevention of Communal And targeted Violence Bill-2011 जैसे कानून वनवाकर हिन्दूमिटाओ-हिन्दूभगाओ अभियान  को आगे बढ़ाने में सफल होती।
बैसे भी FDI का अर्थ है आर्थिक गुलामी जो कि आगे चलकर सामाजिक व शारीरिक गुलामी को जन्म देती है। लम्बे समय तक इस तरह की गुलामी का शिकार रहना बौद्धिक गुलामी को जन्म देता है। आज भारत अभी तक पूरी तरह से सैंकड़ो बर्षो की मुसलिम और ईसाई गुलामी के परिणामस्वारूप उपजी बौद्धिक गुलामी से पूरी तरह आजाद नहीं हुआ है। इस गुलामी के शिकार लोग ही बिके हुए सेकुलर गद्दारों का अक्कसर साथ देकर भारत से ऐसी ऐतिहासिक भूलें करवाने पर तुलें हैं जो आगे चलकर भारतीयों के रोजगार, मान-सम्मान-स्वाभिमान से लेकर जान-माल तक को खतरे में डाल रही हैं। चर्च के षडयन्त्रों का शिकार होकर एक विदेशी एडवीज एंटोनिया अलविना माईनो उर्फ सोनिया गांधी को भारत की राजनीतिक जमात द्वारा स्थापित करना व ISI से पैसे खाकर सेकुलर गद्दारों द्वारा, सेकुलर गद्दारों से, हिन्दूहित पर प्रहार करने के लिए तैयार कवाई गई सच्चर कमेटी व रंगनाथ मिश्रा कमेटी जैसी रिपोर्टें ऐसी ही ऐतिहासिक भूलें हैं।
हमारा मानना है कि जिस तरह से राजनीतिक जमात ने दलगत राजनीति से उपर उठकर Prevention of Communal And targeted Violence Bill-2011 व FDI जैसे भारतविरोधी कानूनों का विरोध किया उससे एक कदम आगे बढ़कर इन सब देशभक्तों को एकजुट होकर भारत को बिदेशी गुलामी से मुक्त करने के लिए पहले तो इस विदेशी विषकन्या की पकड़ से केन्द्र सरकार को मुक्त करवाना चाहिए व बाद में मिलकर भारत में ऐसे कड़े कानून बनाने चाहियें जिनसे ये सुनिश्चित किया जा सके कि भारत में ,सिर्फ भारतीय ही राजनीति कर सकें कोई विदेशी नहीं व भारत में रोजगार ,ब्यापार व आर्थिक संसाधनों पर सिर्फ भारतीयों का ही कब्जा रहे किसी बिदेशी का नहीं।
इसमें कोई शक नहीं कि इस वक्त सांसदों का बहुमत FDI के बिरोध में है लेकिन हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि अब अगला दौर खीद-फरोक्त का शुरू होगा जिसके पुरिणामस्वारूप बहुत से राजनीतिक दल व सांसद अपनी जेब भरने के बदले FDI के समर्थन में जा सकते हैं। ऐसे विकाऊ गद्दार सांसदों/दलों की पहचान कर उन्हें जनता के सामने वेनकाब करना चाहिए।
अभी तक सिर्फ इतना सपष्ट हुआ है कि सिर्फ कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व खासकर राहुल विन्सी, एंटोनिया व मनमोहन ही भारतविरोधियों के हाथों विके हुए हैं या फिर यूं कहें कि कुछ मुठीभर विकाऊ कांग्रेसियों को छोड़कर सब केसब सांसद भारतीयों के रोजगार को बचाने को मुद्दे पर एकजुट हैं।
रही बात Half Indian की तो आप ही बताओ जिसकी उत्तपति ही FDI के परिणास्वारूप हुई हो वो भला FDI का विरोध कैसै कर सकता है इसलिए वो ठीक ही कह रहा है कि उसके ,उसकी मां और विदेशियों के गुलामों के लिए FDI कोई मुद्द नहीं उनके लिए मुद्दा है फूट डालो और राज करो।
कुलमिलाकर FDI के बहाने एक बहुत अछ्छी शुरूआत हुई है जिसे सब देशभक्तों को मिलकर आगे बढ़ाना चाहिए।