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मोदीराज लाओ

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भारत बचाओ
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मंगलवार, 21 जून 2011

कांग्रेस का हाथ भारतविरोधी चोरों गद्दारों आतंकवादियों के साथ...


2004 से भारत में इटालियन एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम एक ऐसी हिन्दूविरोधी-देशविरोधी सरकार सतासीन है जिसका एकमात्र शत्रु भारत और भारतीय संस्कृति है।

आज देश मे जो भी देशभक्ति को आगे वढ़ाने या फिर भ्रष्टाचार मिटाने की बात करता है वो एकदम इस चोरों और गद्दारों की सरकार के निशाने पर आ जाता है फिर वह चाहे स्वामी राम देव जी हों या फिर अन्ना हजारे जी या फिर RSS

आज देश में जो भी गद्दारी, चोरबजारी या फिर आतंकवाद को बढ़ाबा देकर भारत की तबाही को सुनिस्चित करने के लिए आगे बढ़ता है कांग्रेस नेतृत्व सरकार सहित उसके समर्थन व बचाब में किसी भी हद तक जाने के लिए त्यार हो जाता है
मामला चाहे लोकतन्त्र पर हमला करने वाले गद्दार मोहम्द अफजल का हो या फिर दिल्ली में शहीद मोहन चन्द शर्मा पर हमला करने वाले आजमगढ़ के आतंकवादियों का हो या फिर देशद्रोही कश्मीरी आतंकवादी गिलानी व उसकी समर्थक अरूंधिति राय का ही क्यों न हो....

हर जगह एक ही बात साबित होती है इटालियन एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम कांग्रेस का हाथ भारतविरोधी चोरों गद्दारों आतंकवादियों के साथ

शनिवार, 25 दिसंबर 2010

GSAT-5P की असफलता का एंटोनिया CONECTION




आज दूरदर्शन के सरकारी चापलूस की भूमिका में चले जाने के कारण बहुत कम लोग दूरदर्शन के कार्यक्रम देखते हैं लेकिन आज भी आम व मजबूर लोगों के लिए दूरदर्शन , रेडियो के बाद सूचना का एकमात्र साधन है। हम भी दूर्दरशन के कार्यक्रम बहुत कम देखते हैं। लेकिन क्योंकि आज GSAT-5P के प्रक्षेपण का सीधा प्रसारण दूरदर्शन दिखा रहा था इसलिए हम दूरदर्शन के साथ चिपक कर बैठ गए।


GSAT-5P प्रक्षेपण कुछ मिनट के बाद ही विस्फोट के साथ असफल हो गया तो मन को बहुत दुख हुआ ।क्रोध भी आया कि जब रूस से लाया गया क्रायोजैनिक इंजन खराब था तो उसे वापस रूस को लौटाने के बजाए देश का 175 करोड़ रूपया बरबाद करना क्यों जरूरी समझा गया।क्रायोजैनिक तकनीक बहुत ही उच्चतकनीक है इस तकनीक पर आधारित इंजन में लीकेज का मतलब ही कार्यक्रम की असफलता की गारंटी है। लेकिन खैर जैसा अक्सर होता है अब बैसे ही इस कार्यक्रम में इस वेवकूफाना हरकत को छुपाने के प्रयास शुरू हो चुके होंगे।


इसके बाद जो हुआ वो और भी चौंकाने वाला था। जैसे ही निर्धारित समय पर GSAT-5P के असफल प्रक्षेपण के बाद सीधे प्रसारण का ये कार्यक्रम बन्द हुआ बैसे ही ईसाईयत का प्रचार-प्रसार शुरू हो गया । कुछ समय तक कुछ अंग्रेज लड़के–लड़कियां ईसाईयत के गुणगान के लिए वेसुरे गीत गाते रहे बाद में हमारे दूरदर्शन ने एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के देश में रोम से सीधा प्रसारण शुरू कर दिया ।


आप सब जानते हैं कि दूरदर्शन हम सब भारतीयों के खून-पसीने की कमाई के पैसे से चलता है।उस मेहनत से कमाए गए पैसे को एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के इसारे पर ईसाईयत के प्रचार प्रसार के लिए खर्च करना वेहद आपतिजनक है गुनाहकारों के विरूद्ध उचित समय पर कड़ी कार्यवाही होना अति आवस्यक है।


प्रक्षेपण की असफलता के एक-दम बाद ईसाईयत के प्रचार-प्रसार ने हमारे मन में कई संकायें पैदा कि । क्योंकि ये पहले से ही पता था कि क्रायोजैनिक इंजन खराब है तो भी उस खराब इंजन के साथ ही GSAT-5P के प्रक्षेपण निर्णय कहीं एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के प्रभाव में तो नहीं किया गया।


बहुत कम लोग जानते हैं कि रूस ईसाईयत के प्रचार-प्रसार के लिए अमेरिका से भी जयदा प्रतिबद्ध है व एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी को भारत में पलांट करने में रूस की ही खूफिया ऐजेंसी का हाथ था। पलांट करने का मकसद भी भारत में हिन्दूओं को अपदस्त कर ईसाईयों के हाथों में सता को पहुंचाना था ।आज सरकार की सर्वेसरवा एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी से लेकर रक्षामन्त्री एक के एन्टनी तक सब जगह ईसाई ही दिखाई दे रहे हैं।


यहां तक कि अगर इसाई के उपर भ्रष्टाचार के कितने भी बड़े आरोप क्यों न लगे हों उन्हें बड़ें पदों पर ऐंटोनिया की पकड़ मजबूत करने के लिए विठाया जा रहा है। आप पी जे थामस को ही ले लें जिसे दो पाक-साफ हिन्दूओं को दरकरार कर CVC प्रमुख बनाया गया वो भी विपक्ष की आपति के बाबजूद। बाद में इस भ्रष्ट की खबर माननीय न्यायालय ने लेकर ऐंटोनिया के हिन्दूविरोधी षडयन्त्र को जनता के सामने रखा।


एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी व उसका बेटा राहुल गंदगी किस हद तक हिन्दूओं के विरूद्ध हैं उसका सबसे बड़ा प्रमाण Wiki-leaks के उस रहसयोउधघाटन में मिला जिसमें बयाता गया कि किस तरह ये सपोला अमेरिका के राजदूत को हिन्दूओं के विरूद्ध भड़का रहा था।


अगर इस सपोले के अन्दर भारतीयों का खून होता तो ये ऐसी गद्दारी नहीं करता । हमें तो लगता है कि एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के ईसारे पर खराब क्रायोजैनिक इंजन का प्रयोग कर प्रक्षेपण की असफलता सुनिस्चित कर ईसाईयत का प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया गया।


क्योंकि आज इस मौके पर अधिकतर भारतीय दूरदर्शन देख रहे थे तो प्रक्षेपण का प्रसारण वीच में ही बन्द होने पर एकदम ईसाईयत का प्रसारण शुरू होने पर अधिकतम लोगों तक एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी का ईसाईयत का संदेश पहूंचा।


इस संदेश में पोप ने पहले तो ये इशु को भगवान का अबतार बताया व बाद में इशु को भगवान का वेटा कहकर संबोधित किया।मतलब खुद पोप ही इशु के वारे में भ्रमित हैं। उसके बाद पोप ने संसार के विभिन्न देशों में रह रहे ईसाईयों को वहां की सरकारों व समाजों के विरूद्ध लड़ाई छेड़ने के लिए उचित समय का इन्तजार करने के लिए कहा। मतलब पोप का ये भाषण न केवल शांति और भाई चारे के विरूद्ध था वल्कि साथ ही दुनिया में हिंसा बढ़ाने बाला भी था। ऐसे हिसंक भाषण का प्रचार-प्रसार शांतिप्रिए भारतीयों के पैसे से करना कहां तक उचित है?






शुक्रवार, 24 दिसंबर 2010

छापेमारी की नौटंकी---भ्रष्टाचार छुपाने का नया हथकंडा





घोटालों को रोकने के लिए एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम सरकार प्रयत्न कर रही है ऐसा दिखाने के लिए छापेमारी व पूछताछ की नौटंकी को अन्जाम दिया जा रहा है। अब गद्दारों के सेकुलर गिरोह को कौन समझाए कि ये जो जनता है ये सब जानती है।


हम सब जानते हैं कि CWG घोटाला सितम्वर 2010 में पूरी तरह से उजागर हो चुका था। ये भी जनता के सामने आ चुका था कि इस घोटाले को प्रधानमन्त्री व गद्दारों की सरदार एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के नेतृत्व में किन लोगों ने अन्जाम दिया । जनता उस वक्त कार्यवाही होती देखना चाहती थी लेकिन ऐसा हुआ नहीं ।


क्योंकि आज सरकार जिन लोगों के यहां छापे मारी कर रही है वो तो घोटाले की छोटी मछलियां हैं वड़ी मछली तो एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी है जिसकी सरकार गुलाम है । क्या सरकार में इतना दम है कि, अब जबकि स्थिति सपष्ट होती जा रही है कि सोनिया गांधी की संलिप्तता के कारण ही घोटालों की जांच में देरी कर जांच को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है ।इन हालात में सरकार चोरों की सरदार के यहां सीधी कार्यवाही करे । ऐसा हो नहीं सकता कि गुलाम सरकार अपनी आका की चोरबजारी को उजागर होने दे चाहे इसके लिए संसदीय लोकतन्त्र ही क्यों न खतरे में पड़ जाए ।


CWG घोटाले से भी ज्यादा रूचीकर तो 2G SPECTRUM घोटाला बन गया है । इस घोटाले में देश का 1,76,000 करोड़ रूपया लूटा गया है इस लूट को सरकार के सामने आए हुए वर्षों हो गए। आप सोचो कि जब चोरों को वर्षों पहले पता हो कि उनकी चोरी पकड़ी जा चुकी है तो क्या वो इतने लम्बे समय तक प्रमाणों को तवाह नहीं कर देंगे।


2G SPECTRUM घोटाले में तो किसने कितना हिस्सा खाया ये भी सामने आ चुका है


A Raja 10% + Krunanidhi 30% + SONIYA GANDHI,s SISTERS (30%+30%)=60% TOTAL =100%


अब जांच हो रही है A Raja से जिसने 10% खाया है । जिन लोगों ने इस घोटाले का 90% खाया है वो लोग मजे कर रहे हैं और भाषण दे रहे हैं भ्रष्टाचार को समाप्त करने पर।


अब आप खुद सोचो कि एक तो जांच को होने नहीं दिया गया लम्बे समय तक रोक कर अब हो भी रही है तो सिर्फ उन लोगों से जो मोहरे मात्र है विसात विछाने वाले मजे कर रहे हैं अगली लूट की योजना बना रहे हैं आओ मिलकर लूटेरों को वनकाब करें।










रविवार, 14 नवंबर 2010

अलकायदा के मददगारों को आप आतंकवादी नहीं तो और क्या कहेंगे?




आप देख रहे हैं कि किस तरह एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो की गुलाम UPA सरकार एक के वाद एक ऐसे कदम उठाती जा रही है जिनसे इस बात में कोई सन्देह नहीं रह जाता कि ये सरकार हिन्दूरोधी-देशविरोधी आतंकवादियों की सरकार है।


आप देख रहे हैं कि वर्षों से ये कांग्रेसी दाऊद इबरहाहीम जैसे मुसलिम आतंकवादियों की मदद कर न्हें कानून से बचा रही है ।


इतनी ही नहीं यही धर्मनिर्पेक्ष गिरोह कशमीरघाटी को भारत से अलग करने के लिए लगातार षडयन्त्र करने वाले वाले जिलानी,गिलानी व यासीन मलिक जैसे मुसलिम आतंकवादियों की भी मदद करता चला आ रहा है।


अब तो इस धर्मनिरपेक्ष गिरोह की UPA सरकार ने सारी हदें लांघते हुए अलकायदा जैसे आतंकवादी गिरोह की भी मदद करना शुरू कर दी ।



उम्मीद है कि इस समाचार को पढ़ने के बाद आप भी यही कहेंगे कि य़े सेकुलर गिरोह की UPA सरकार आतंकवादियों की सरकार है । इस सरकार के कर्ताधर्ता राजनितिज्ञ नहीं वल्कि कातिल आतंकवादी कहलाने लायक हैं। इन आतंकवादियों का समूलनाश भारत को बचाने के लिए जरूरी है।


शुक्रवार, 12 नवंबर 2010

क्या आप जानते हैं कि बौद्धिक गुलाम क्यों धरना प्रदर्शन कर रहे हैं?


10-11-10 को आपने देखा कि किस तरह देशभक्तों की संस्था RSS ने शांति से अपनी बात लोगों तक पहूंचाने का प्रयत्न किया। विना किसी हिंसा,अगजनी या हमले के । आज आप देख रहे हैं कि किस तरह एक फासीवादी हिन्दूविरोधी-देशविरोधी इटालियन अंग्रेज एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम कांग्रेस हिंसा ,अगजनी व धमकियां देकर उस सच्चाई को छुपाना चाहते है जिस सच्चाई का हर देशभक्त भारतीय तक पहंचना बहुत जरूरी है। ये वो सच्चाई है जो भारत को इस भारतविरोधी से आजादी दिलवाने में सहायक सिद्ध होगी ।


इस सच्चाई के वारे में आज हम खुद लिखने बजाए आपको मेल से प्राप्त जानकारी दे रहे हैं इसे आप संयम व धैर्य से पढकर खुद सोचें कि क्या आप इस अंग्रेज को जानते भी हैं या नहीं?





"आप सोनिया गाँधी को कितना जानते हैं" की पहली कडी़, अंग्रेजी में इसके


मूल लेखक हैं एस.गुरुमूर्ति और यह लेख दिनांक १७ अप्रैल २००४ को "द न्यू


इंडियन एक्सप्रेस" में - अनमास्किंग सोनिया गाँधी- शीर्षक से प्रकाशित


हुआ था ।


। भारत की खुफ़िया एजेंसी "रॉ", जिसका गठन सन १९६८ में हुआ, ने विभिन्न


देशों की गुप्तचर एजेंसियों जैसे अमेरिका की सीआईए, रूस की केजीबी,


इसराईल की मोस्साद और फ़्रांस तथा जर्मनी में अपने पेशेगत संपर्क बढाये


और एक नेटवर्क खडा़ किया । इन खुफ़िया एजेंसियों के अपने-अपने सूत्र थे


और वे आतंकवाद, घुसपैठ और चीन के खतरे के बारे में सूचनायें आदान-प्रदान


करने में सक्षम थीं । लेकिन "रॉ" ने इटली की खुफ़िया एजेंसियों से इस


प्रकार का कोई सहयोग या गठजोड़ नहीं किया था, क्योंकि "रॉ" के वरिष्ठ


जासूसों का मानना था कि इटालियन खुफ़िया एजेंसियाँ भरोसे के काबिल नहीं


हैं और उनकी सूचनायें देने की क्षमता पर भी उन्हें संदेह था ।


सक्रिय राजनीति में राजीव गाँधी का प्रवेश हुआ १९८० में संजय की मौत के


बाद । "रॉ" की नियमित "ब्रीफ़िंग" में राजीव गाँधी भी भाग लेने लगे थे


("ब्रीफ़िंग" कहते हैं उस संक्षिप्त बैठक को जिसमें रॉ या सीबीआई या


पुलिस या कोई और सरकारी संस्था प्रधानमन्त्री या गृहमंत्री को अपनी


रिपोर्ट देती है), जबकि राजीव गाँधी सरकार में किसी पद पर नहीं थे, तब वे


सिर्फ़ काँग्रेस महासचिव थे । राजीव गाँधी चाहते थे कि अरुण नेहरू और


अरुण सिंह भी रॉ की इन बैठकों में शामिल हों । रॉ के कुछ वरिष्ठ


अधिकारियों ने दबी जुबान में इस बात का विरोध किया था चूँकि राजीव गाँधी


किसी अधिकृत पद पर नहीं थे, लेकिन इंदिरा गाँधी ने रॉ से उन्हें इसकी


अनुमति देने को कह दिया था, फ़िर भी रॉ ने इंदिरा जी को स्पष्ट कर दिया


था कि इन लोगों के नाम इस ब्रीफ़िंग के रिकॉर्ड में नहीं आएंगे । उन


बैठकों के दौरान राजीव गाँधी सतत रॉ पर दबाव डालते रहते कि वे इटालियन


खुफ़िया एजेंसियों से भी गठजोड़ करें, राजीव गाँधी ऐसा क्यों चाहते थे ?


या क्या वे इतने अनुभवी थे कि उन्हें इटालियन एजेंसियों के महत्व का पता


भी चल गया था ? ऐसा कुछ नहीं था, इसके पीछे एकमात्र कारण थी सोनिया गाँधी


। राजीव गाँधी ने सोनिया से सन १९६८ में विवाह किया था, और हालांकि रॉ


मानती थी कि इटली की एजेंसी से गठजोड़ सिवाय पैसे और समय की बर्बादी के


अलावा कुछ नहीं है, राजीव लगातार दबाव बनाये रहे । अन्ततः दस वर्षों से


भी अधिक समय के पश्चात रॉ ने इटली की खुफ़िया संस्था से गठजोड़ कर लिया ।


क्या आप जानते हैं कि रॉ और इटली के जासूसों की पहली आधिकारिक मीटिंग की


व्यवस्था किसने की ? जी हाँ, सोनिया गाँधी ने । सीधी सी बात यह है कि वह


इटली के जासूसों के निरन्तर सम्पर्क में थीं । एक मासूम गृहिणी, जो


राजनैतिक और प्रशासनिक मामलों से अलिप्त हो और उसके इटालियन खुफ़िया


एजेन्सियों के गहरे सम्बन्ध हों यह सोचने वाली बात है, वह भी तब जबकि


उन्होंने भारत की नागरिकता नहीं ली थी (वह उन्होंने बहुत बाद में ली) ।


प्रधानमंत्री के घर में रहते हुए, जबकि राजीव खुद सरकार में नहीं थे । हो


सकता है कि रॉ इसी कारण से इटली की खुफ़िया एजेंसी से गठजोड़ करने मे


कतरा रहा हो, क्योंकि ऐसे किसी भी सहयोग के बाद उन जासूसों की पहुँच


सिर्फ़ रॉ तक न रहकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक हो सकती थी ।


जब पंजाब में आतंकवाद चरम पर था तब सुरक्षा अधिकारियों ने इंदिरा गाँधी


को बुलेटप्रूफ़ कार में चलने की सलाह दी, इंदिरा गाँधी ने अम्बेसेडर


कारों को बुलेटप्रूफ़ बनवाने के लिये कहा, उस वक्त भारत में बुलेटप्रूफ़


कारें नहीं बनती थीं इसलिये एक जर्मन कम्पनी को कारों को बुलेटप्रूफ़


बनाने का ठेका दिया गया । जानना चाहते हैं उस ठेके का बिचौलिया कौन था,


वाल्टर विंसी, सोनिया गाँधी की बहन अनुष्का का पति ! रॉ को हमेशा यह शक


था कि उसे इसमें कमीशन मिला था, लेकिन कमीशन से भी गंभीर बात यह थी कि


इतना महत्वपूर्ण सुरक्षा सम्बन्धी कार्य उसके मार्फ़त दिया गया । इटली का


प्रभाव सोनिया दिल्ली तक लाने में कामयाब रही थीं, जबकि इंदिरा गाँधी


जीवित थीं । दो साल बाद १९८६ में ये वही वाल्टर विंसी महाशय थे जिन्हें


एसपीजी को इटालियन सुरक्षा एजेंसियों द्वारा प्रशिक्षण दिये जाने का ठेका


मिला, और आश्चर्य की बात यह कि इस सौदे के लिये उन्होंने नगद भुगतान की


मांग की और वह सरकारी तौर पर किया भी गया । यह नगद भुगतान पहले एक रॉ


अधिकारी के हाथों जिनेवा (स्विटजरलैण्ड) पहुँचाया गया लेकिन वाल्टर विंसी


ने जिनेवा में पैसा लेने से मना कर दिया और रॉ के अधिकारी से कहा कि वह


ये पैसा मिलान (इटली) में चाहता है, विंसी ने उस अधिकारी को कहा कि वह


स्विस और इटली के कस्टम से उन्हें आराम से निकलवा देगा और यह "कैश" चेक


नहीं किया जायेगा । रॉ के उस अधिकारी ने उसकी बात नहीं मानी और अंततः वह


भुगतान इटली में भारतीय दूतावास के जरिये किया गया । इस नगद भुगतान के


बारे में तत्कालीन कैबिनेट सचिव बी.जी.देशमुख ने अपनी हालिया किताब में


उल्लेख किया है, हालांकि वह तथाकथित ट्रेनिंग घोर असफ़ल रही और सारा पैसा


लगभग व्यर्थ चला गया । इटली के जो सुरक्षा अधिकारी भारतीय एसपीजी कमांडो


को प्रशिक्षण देने आये थे उनका रवैया जवानों के प्रति बेहद रूखा था, एक


जवान को तो उस दौरान थप्पड़ भी मारा गया । रॉ अधिकारियों ने यह बात राजीव


गाँधी को बताई और कहा कि इस व्यवहार से सुरक्षा बलों के मनोबल पर विपरीत


प्रभाव पड़ रहा है और उनकी खुद की सुरक्षा व्यवस्था भी ऐसे में खतरे में


पड़ सकती है, घबराये हुए राजीव ने तत्काल वह ट्रेनिंग रुकवा दी,लेकिन वह


ट्रेनिंग का ठेका लेने वाले विंसी को तब तक भुगतान किया जा चुका था ।


राजीव गाँधी की हत्या के बाद तो सोनिया गाँधी पूरी तरह से इटालियन और


पश्चिमी सुरक्षा अधिकारियों पर भरोसा करने लगीं, खासकर उस वक्त जब राहुल


और प्रियंका यूरोप घूमने जाते थे । सन १९८५ में जब राजीव सपरिवार फ़्रांस


गये थे तब रॉ का एक अधिकारी जो फ़्रेंच बोलना जानता था, उनके साथ भेजा


गया था, ताकि फ़्रेंच सुरक्षा अधिकारियों से तालमेल बनाया जा सके । लियोन


(फ़्रांस) में उस वक्त एसपीजी अधिकारियों में हड़कम्प मच गया जब पता चला


कि राहुल और प्रियंका गुम हो गये हैं । भारतीय सुरक्षा अधिकारियों को


विंसी ने बताया कि चिंता की कोई बात नहीं है, दोनों बच्चे जोस वाल्डेमारो


के साथ हैं जो कि सोनिया की एक और बहन नादिया के पति हैं । विंसी ने


उन्हें यह भी कहा कि वे वाल्डेमारो के साथ स्पेन चले जायेंगे जहाँ


स्पेनिश अधिकारी उनकी सुरक्षा संभाल लेंगे । भारतीय सुरक्षा अधिकारी यह


जानकर अचंभित रह गये कि न केवल स्पेनिश बल्कि इटालियन सुरक्षा अधिकारी


उनके स्पेन जाने के कार्यक्रम के बारे में जानते थे । जाहिर है कि एक तो


सोनिया गाँधी तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के अहसानों के तले दबना


नहीं चाहती थीं, और वे भारतीय सुरक्षा एजेंसियों पर विश्वास नहीं करती


थीं । इसका एक और सबूत इससे भी मिलता है कि एक बार सन १९८६ में जिनेवा


स्थित रॉ के अधिकारी को वहाँ के पुलिस कमिश्नर जैक कुन्जी़ ने बताया कि


जिनेवा से दो वीआईपी बच्चे इटली सुरक्षित पहुँच चुके हैं, खिसियाये हुए


रॉ अधिकारी को तो इस बारे में कुछ मालूम ही नहीं था । जिनेवा का पुलिस


कमिश्नर उस रॉ अधिकारी का मित्र था, लेकिन यह अलग से बताने की जरूरत नहीं


थी कि वे वीआईपी बच्चे कौन थे । वे कार से वाल्टर विंसी के साथ जिनेवा


आये थे और स्विस पुलिस तथा इटालियन अधिकारी निरन्तर सम्पर्क में थे जबकि


रॉ अधिकारी को सिरे से कोई सूचना ही नहीं थी, है ना हास्यास्पद लेकिन


चिंताजनक... उस स्विस पुलिस कमिश्नर ने ताना मारते हुए कहा कि "तुम्हारे


प्रधानमंत्री की पत्नी तुम पर विश्वास नहीं करती और उनके बच्चों की


सुरक्षा के लिये इटालियन एजेंसी से सहयोग करती है" । बुरी तरह से अपमानित


रॉ के अधिकारी ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों से इसकी शिकायत की, लेकिन कुछ


नहीं हुआ । अंतरराष्ट्रीय खुफ़िया एजेंसियों के गुट में तेजी से यह बात


फ़ैल गई थी कि सोनिया गाँधी भारतीय अधिकारियों, भारतीय सुरक्षा और भारतीय


दूतावासों पर बिलकुल भरोसा नहीं करती हैं, और यह निश्चित ही भारत की छवि


खराब करने वाली बात थी । राजीव की हत्या के बाद तो उनके विदेश प्रवास के


बारे में विदेशी सुरक्षा एजेंसियाँ, एसपीजी से अधिक सूचनायें पा जाती थी


और भारतीय पुलिस और रॉ उनका मुँह देखते रहते थे । (ओट्टावियो क्वात्रोची


के बार-बार मक्खन की तरह हाथ से फ़िसल जाने का कारण समझ में आया ?) उनके


निजी सचिव विंसेंट जॉर्ज सीधे पश्चिमी सुरक्षा अधिकारियों के सम्पर्क में


रहते थे, रॉ अधिकारियों ने इसकी शिकायत नरसिम्हा राव से की थी, लेकिन


जैसी की उनकी आदत (?) थी वे मौन साध कर बैठ गये ।


संक्षेप में तात्पर्य यह कि, जब एक गृहिणी होते हुए भी वे गंभीर सुरक्षा


मामलों में अपने परिवार वालों को ठेका दिलवा सकती हैं, राजीव गाँधी और


इंदिरा गाँधी के जीवित रहते रॉ को इटालियन जासूसों से सहयोग करने को कह


सकती हैं, सत्ता में ना रहते हुए भी भारतीय सुरक्षा अधिकारियों पर


अविश्वास दिखा सकती हैं, तो अब जबकि सारी सत्ता और ताकत उनके हाथों मे


है, वे क्या-क्या कर सकती हैं, बल्कि क्या नहीं कर सकती । हालांकि "मैं


भारत की बहू हूँ" और "मेरे खून की अंतिम बूँद भी भारत के काम आयेगी" आदि


वे यदा-कदा बोलती रहती हैं, लेकिन यह असली सोनिया नहीं है । समूचा


पश्चिमी जगत, जो कि जरूरी नहीं कि भारत का मित्र ही हो, उनके बारे में सब


कुछ जानता है, लेकिन हम भारतीय लोग सोनिया के बारे में कितना जानते हैं ?







शनिवार, 30 अक्टूबर 2010

चोरों और गद्दारों की UPA सरकार पर माननीय न्यायालय का दे दना-दन!


सत्यमेव जायते भारतीय संसकृति का आधार सतम्भ है। जिसका आभास माननीय न्यायालय के 29-10-2010 को आए फैसलों से होता है। सच कहें तो सराकरी तन्त्र के पिछले कुछ समय से चले आ रहे हिन्दूविरोधी-देशविरोधी रूख की बजह से अब शांति से न्याय मिलने की सम्भवना से ही देशभक्त हिन्दूओं का विशवास उठने लगा है। लेकिन गाहे–वगाहे माननीय न्यायालय हिन्दूओं के अन्दर एक उम्मीद जगाता रहा है। वही आशा की किरण पिछले कल आए फैसलों में भी देखने को मिली है। आओ इन फैसलों के बारे में जानें...


1) UPA सरकार ने 2G Spectrums (http://samrastamunch.blogspot.com/2010/05/2g-spectrums.html)आबंटन में 50,000 करोड़ रूपए से अधिक डकार लिए। जिसकी पिछले एक वर्ष से CBI जांच कर रही है लेकिन एक वर्ष में CBI ने सरकार व मन्त्री की जांच को आगे बढ़ाने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाए हैं ।माननीय न्यायलय ने इस पर CBI व सरकार को जमकर लताड़ लगाई। माननीय न्यायालय ने कहा कि जिस मन्त्री मतलब A Raja पर हजारों करोड़ रूपए डकारने का आरोप है वही मन्त्री आज तक अपने पद पर कैसे है। न्यायलय ने आगे कहा कि जब जिसकी जांच होनी है व जिस विभाग में जांच होनी है वही उसी भिभाग के मुखिया के पद पर बैठा हुआ हो तो निष्पक्ष जांच कैसे सम्भव है? ये टिपणी मनमोहन सिंह की चोरबजारी को उजागर करने के लिए काफी है। इस टिप्पणी से सिद्ध होता है कि मनमोहन सिंह जिसे कभी इमानदार माना जाता था आज प्रधानमन्त्री की डमी कुर्सी के लालच में इस हद तक गिर चुका है कि उसे किसी भी चोर-बजारी से कोई परहेज नहीं बसर्ते इस चोर बजारी से उसकी आका एंटोनिया उर्फ सोनिया को फायदा पहंचता हो व उसका अपना पद बरकरार रहता हो।


2) कर्नाटक में BJP की सरकार को गिराने के लिए एंटोनिया का गुलाम हंस राज भारद्वाज किस हद तक गिरा हुआ है उस पर भी माननीय न्यायलय ने फैसला दिया । फैसले में माननीय न्यायालय ने कर्नाटक विधानसभा स्पीकर के उस निर्णय को सही ठहराया जसमें CONGRESS व JDS के जाल में फंसकर BJP सरकार से समर्थन वापस लेने वाले विधायकों को अयोग्य करार दिया गया था।


हमें यहां यह जानना जरूरी है कि ये हंसराज भारद्वाज वही है जिसने कानून मन्त्री रहते एंटोनिया के इटालियन यार कवात्रोची(http://jagohondujago.blogspot.com/2009/04/blog-post_28.html) के लंदन में जब्त पैसे को निकलवाने व इस देश के शत्रु पर चल रहे वोफोर्स दलाली कांड सौदे से सबन्धित केशों को समाप्त करावने में सहायता की थी। मतलब कर्नाटक सराकर को गिराने की कोशिस इटालियन अंग्रेज कर रही है। एक बजह साफ है कि इस कर्नाटक सरकार ने पिछले दिनों मुसलिम आतंकवादियों की धर-पकड़ की थी।








3) जिन अमित शाह जी को आतंकवादी सोराबूद्दीन का नमोनिशान मिटाने से दुखी होकर CBI ने अपनी हिरासत में रखा था। जिसकी जमानत को CBI कोर्ट ने वार-वार असवीकार किया था उसी अमित शाह जी को माननीय उच्च न्यायलय ने जमानत देकर CBI व कांग्रेस की हिन्दूविरोधी-देशविरोधी निती का पर्दाफास कर दिया। कांग्रेस किस हद तक आतंकवादियों का हौसला बढ़ाने में जुटी है उसका सबसे बढ़ा प्रमाण है कि अगले ही दिन मतलब आज माननीय सर्वोचन्यायालय में अमित शाह जी की जमानत रद्द करने की अर्जी दे डाली जिसे मानीय सर्वोच न्यायलय ने असवीकार कर दिया।


यहां हमें ये याद रखना जरूरी है कि सोराबूद्दीन वही आतंकवादी है जिसके घर से 12AK47 व दर्जनों हैंडगर्नेड मिले थे। बैसे जो कांग्रेस अफजल जैसे आतंकवादी की फांसी माननीय न्यायालय के आदेश के बाबजूद रोक सकती है उसके लिए दर्जनों पुलिस अधिकारियों व जवानों को जेलों में बन्द करना कोई नई बात नहीं।


अन्त में हम सबको ये जानान जरूरी है कि ANTONIO की गुलाम  UPA सरकार की देश के साथ गद्दारी की दास्तां इतनी लम्बी है जिसे एक लेख या किताब में समा पाना असम्भव है। लेकिन हम भी तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक इस चोरों व गद्दारों की UPA सरकार की सरदार इटालिय अंग्रेज से इस देश को मुक्त नहीं करवा लिया जाता।