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मोदीराज लाओ

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भारत बचाओ
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गुरुवार, 2 फ़रवरी 2012

चोरों और गद्दारों की सरगना की लूट पर चला माननीय सर्वोच्च न्यायलय का हथौड़ा…धड़ाम…धड़ाम…धड़ाम…

आओ सबसे पहले अपनी सेवा के अन्तिम दिन सेवा के बाद मिलने वाले किसी भी पद के लालच को त्याग कर न्याय व देशहित में फैसला सुनाने वाले Justice A K Gaungly जी को प्रणाम करते हुए A_K_GANGULY_1
आगे भरोसा रखें कि Justice G S Singhvi न्याय व देशहित की इस कड़ी को इसी तरह आगे बढ़ाते रहेंगे…G. S. Singhvi
आज देश में चोरों और गद्दारों की सरगना सोनिया गाँधी उर्फ एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो ,इसके सपोले राहुल विन्शी व इनके गुलामों द्वारा मचाई गई लूट और गद्दारी से   पैदा हुए अविश्वास के महौल में माननीय सर्वोच्च न्यायालय एक के बाद एक ऐसे फैसले सुना रहा है जो भारत की देशभक्त जनता में संयम पैदा करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं वरना तो आज देशभक्त जनता इस कदर आक्रोशित  है कि न जाने कब देश उस आग में झुलस जाए जिस आग में कभी नहीं झुलसा। मतलब कभी भी देश की जनता हथियार उठाकर इस भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी सरकार में व बाहर बैठे लुटेरों और गद्दारों को मौत के घाट उतारने पर मजबूर हो सकती है।
देशभक्त जनता में आक्रोश का सबसे बड़ा कारण है भारत की सत्ता पर काबिज भारतिरोधी-हिन्दूविरोधी लुटेरों की वो गैंग जो चोरी और गद्दारी करने के बाद देशभक्तों को झूठे मुक्द्दमों में फंसाकर न केवल बदनाम कर रही है वल्कि जेलों में डालकर यातनायें भी दे रही है।
मतलब चोरी और सीना जोरी की कहाबत इस इटालियन लुटेरी व इसके गुलामों पर पूरी तरह चरित्राथ होती है।आप सब जानते हैं कि इस लुटेरी की लूट के बिरूद्ध अन्दोलन खड़ा कर रहे डा. सुब्रामणम  स्वामी जी dr subraपर किस तरह भड़काऊ लेख लिखने का झूठा मामला दर्ज कर दिया गया  । जबकि इस लेख में सब भारतीयों को उनके खून के रिस्ते के आधार पर एकजुट कर भारत को अपना नहीं मानने वाले विदेशियों को अलग-थलग कर उनके लिए परमिट सिस्सटम लागू करने की बात कही गई है।  इसमें कहीं भी हिन्दू-सिख-मुसलिम-ईसाई के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया गया है। इसमें साफ कहा गया है कि जिनकी रगों में भारत का लहू दौड़ रहा है व जिनकी बफादारी भारत के प्रति है वो सब इस भारत के बराबर दर्जे के नागरिक हैं लेकिन जिनकी रगों में भारत का लहू नहीं दौड़ रहा है व जो फार्मभरकर नागरिकता प्राप्त कर इस देश को हिंसा ,आतंकवाद व अलगाववाद की आग में धकेल रहे हैं वो कतई यहां किसी भी अधिकार के काविल नहीं। अधिक जानकारी के लिए इस लेख का हिन्दी अनुबाद यहां पढ़ें।
यहँ हम डा. सुब्रामणियम स्वामी जी व उनके समर्थकों से अपील करते हैं कि वो सब डा. स्वामी जी की रक्षा के लिए हर सम्मभव प्रयास करें क्योंकि स्वामी जी पर कभी भी भारत की दुशमन सोनिया गाँधी उर्फ एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो व इसके गुलामों द्वारा कभी भी हमला करवाया जा सकता है जिस तरह कुछ महीने पहले दिल्ली में डा. स्वामी जी के घर पर करवाया गया था। यही सब कदम स्वामी रामदेव जी व उनके समर्थकों को भी उठाने की जरूरत है क्योंकि जो काँग्रेस 25 लाख देकर स्याही फैंकवा सकती है वही काँग्रस करोंड़ों रपए देकर स्वामी जी को कतल भी करवा सकती है..
आप अच्छी तरह से जानते हैं कि इस लुटेरी सोनिया गाँधी उर्फ एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो द्वारा देश को लूटकर विदेशों में जमा करवाय जा रहे कालेधन को राष्ट्रीय सम्पति घोषित करने की मांग उठाने वाले सन्त स्वामी रामदेब जी पर किस तरह इसी गुलाम सरकार ने NGO के वहाने  25 लाख रूपए देकर,  मुसलमान से स्याही फैंकवाकर स्वामी जीSwami ji.jpg3 की जुवान बन्द करने की कोशिश।
ये विलकुल बैसी ही घटना है जैसी उस वक्त घटी थी जब चर्च ने एक मुसलिम रसोयिए के माध्यम से प्रखर देशभक्त  लालबहादुर शास्त्री जी Lal Bhadur Shastri jiको जहर देकर मरवा दिया गया व उनका पोस्ट मार्टम तक नहीं होने दिया गया।ऐसा नहीं कि स्वामी जी पर भारत के दुशमनों का ये पहला हमला था । इससे पहले भी भारत की ही ताकत का प्रयोग कर इन लुटेरों और गद्दारों ने स्वामी जी को रामलीला मैदान में मरवाने की कोशिश की थी।
चर्च द्वारा सोनिया गाँधी उर्फ एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो को कांग्रेस अध्यक्ष बनाकर देश को गुलाम बनाने के लिए किए गए कतलयाम के वारे में यहां पढ़ें http://samrastamunch.blogspot.in/2010/09/6.html
उधर आप जान चुके हैं कि भ्रष्टाचार के विरूद्ध अन्दोलनरत रहने वाले अन्ना जी Anna jiको डाकटरों के माध्यम से गलत दबाईयां दिलवाकर चुनाबों के दौरान खामोश करने की किस तरह कोशिश की गई। अब कोशिश चुनाबों तक खामोश करने की थी या फिर हमेशा के लिए ये तो आप खुद समझ सकते हैं। आपकी जानकारी में होगा ही कि अन्ना जी को खामोश करने की कोशिश करने वाले को पदमभूषण नाम का सरकारी इनाम भी दे दिया गया। हैरानी की बात तो ये है कि उस औषधालय से बाहर आने के तीन दिन बाद ही आज अन्ना जी को दिल्ली के मेदांता औषधालय से स्वस्थ होने पर छुट्टी मिल गई।  जरा सोचो अगर स्वामी जी ने प्रश्न न खड़े किए होते और अन्ना जी उसी औषधालय मे ही रहते तो क्या होता..,
अभी हाल ही में सोनिया गाँधी को बिदेशी खतरा बताने वाली व मोदी जी को अपने सपथ समारोह में सामिल कर अपनी प्रखर देशभक्ति का परिचय देने वाली मुख्यमंन्त्री जयललिताJ jaylalita को उसी की सहयोगी शशिकला के माध्यम से धीमा जहर देकर मरवाने की कोशिश कर वहां पर चर्च ने इस इटालियन लुटेरी के अनुकूल सरकार बनबाने की असफल कोशिश की।चर्च किस, तरह इस्लामिक आतंकवाद समर्थकों को उपयोग कर मोदी जीModi ji को लगातार बदनाम करने की कोशिश कर रहा है उस सबसे तो आप परिचित ही हैं।

इसी वक्त भारत के विशिष्ट नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष जी. माधवन नायरG Madhban nair व उनके सहयोगी विज्ञानिकों को भी काली सूची में डालकर अपमानित कर वाकी विज्ञानिकों को निरूत्साहित करने का षडयन्त्र अमल में लाया गया। बजह यहां भी साफ है कि इन विज्ञानिकों ने इस लुटेरी द्वारा अपने गुलाम प्रधानमन्त्री के माध्यम से देवास-एंट्रिक्स सौदे के नाम पर मचाई गई लूट को दुनिया के सामने लाकर इस लुटेरी के भारतविरोधी ष़डयन्त्र को वेनकाब कर दिया। आपको याद होगा कि अमेरिका जो कि भारतीय विज्ञानिकों द्वारा की जा रही खोजों से घृणा करता है वो अक्कसर विज्ञानिक क्षेत्र में भारत के विकाश को रोकने के लिए ऐसे कदम उठाता रहा है वही काम ये इटालियन अंग्रेज के गुलाम भी कर रहे हैं। भारतविरोधी सरकार के इस कदम से दुखी होकर माधवन जी ने कहा, “मैं वर्तमान सरकार के अंतर्गत किसी भी संगठन , पद या समिति के लिए काम नहीं करना चाहता, लेकिन यह अन्यायपूर्ण है। किसी निरंकुश और सैन्य शासन में भी काली सूची में डाले गये लोगों को एक मौका दिया जाता है, लेकिन मुझे तो यह मौका भी नहीं दिया गया है। मैं सकते में हूँ।”Scientists
उधर कशमीर में इस्लामिक आतंकवादियों व उतरपूर्व में ईसाई आतंकवादियों  को भारतीय सैनिकों पर हमला करने की सुविधा देने के लिए इस विषकन्या की गुलाम सरकार द्वारा AFSPA हटाकर  सेना को कमजोर करने के लिए की जा रही कोशिशों का पूरी तरह विरोध करने वाले सेनाध्यक्ष वी के सिंह जीVks ji को एक वर्ष पहले ही पद से मुक्त कर आनेवाले सेनाध्यक्षों पर इस विदेशी की गुलामी करने के लिए दबाब बनाने के लिए षडयन्त्र रचा गया ।जिसपर मानीय न्यायालय कल सुनवाई करेगा। भगवान करे ये भारतविरोधी सरकार माननीय न्यायलय को भ्रमित करने में सफल न हो और माननीय न्यायलय सरकार द्वारा अपनाई जा रही भारतविरोधी नीति को एकवार फिर वेनकाब करने में सफल हो।
अपने दिल पर हाथ रखकर सोचो कि भारत की ऐसी कोन सी संवैधानिक संस्था है जिस पर इस सरकार ने हमला नहीं किया मामला चाहे CAG(After 2g Scandal) से जुड़ा हो या चुनाब आयोग(After ban on 4.5 reservation  ) से या फिर भारतीय सेना(After Support to AFSPA) से या फिर संविधान (Constitution bans reservation on religion basis)से या फिर माननीय सर्वोच्च न्यायल (Whenever forced govt to corect antinational policies)से या AIIMSDr P venugopal या फिर किसी और संवैधानिक संस्था से ,जिस भी संवैधानिक संस्था ने इस भारतविरोधी सरकार को लूट और गद्दारी से रोका है उसी संस्था पर इस गुलाम सरकार ने हमला वोल दिया है..
इसी तरह अपनी तार्किक बुद्धि पर जोर देकर सोचो कि ऐसा कौन सा देशभक्त वयक्ति या संगठन है जिसने इस सरकार के बुरे कामों पर अंगुली उठाई हो और सरकार ने उसे बदनाम करने या फिर फंसाने के लिए सरकारी संस्थाओं का दुरूपयोग न किया हो। 
अन्त मे ये भी सोच लो कि क्या कभी आपने किसी देसबक्त सरकार को अपनी ही संवैदानिक सेनाओं से लगातार युद्दरत रहते हुए देख है अगर नहीं तो सोचो ऐसा क्यों हो रहा है?
क्योंकि आज एक इटालियन अंग्रेज  सोनिया गाँधी उर्फ एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो  गुलाम राष्ट्रपति,गुलाम प्रधनमन्त्री,गुलाम गृह व रक्षामन्त्री के बाद हर संवैधानिक संस्था पर अपना गुलाम विठाकर भारत के मूल निवासियों को उनके अधिकारों से वंचित कर भारत को बर्बाद करना चाहती है क्या आप ऐसे ही ये सब होने देंगे या फिर इस लुटेरों की सरगना को देशभकक्तों के साथ मिलकर सबक सिखाने के लिए जरूरी कदम उठायेंगे….

शनिवार, 15 अक्टूबर 2011

A F Rehman और Raji Raouf, के दुष्प्रचार का खण्डन करने वाले डा. सुब्रमण्यम स्वामी जी के लेख “strategy to combat Islamic terrorism in India” का हिन्दी अनुवाद “भारत में इस्लामिक आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए रणनीति”




shubramanium Swami

खुले पृष्ठ ‘हिन्दू और मुसलिम परिपक्व हैं पर संघ परिवार नहीं।’ के लिेए एक खण्डन लेख।
द हिन्दु समाचार पत्र में में छपे उस अंश का ये खण्डन है जिसका शीर्षक है ‘हिन्दू और मुसलिम परिपक्व हैं पर संघ परिवार नहीं।’ (खुला पृष्ठ ,अगस्त 2011) जो कि खुद को मुसलमानों में उदारवादी सोच का प्रतिनिधि बताने वाले ए फैजुर रहमान द्वारा लिखा गया है।
यद्यपि रहमान द्वारा ये अंश पहले के एक अंश ‘हम मुसलमान परिपक्व हैं हम अलोचना सह सकते हैं’ (“खुला पृष्ठ”,अगस्त 7,2010 के संदर्भ में लिखा गया था। जो कि राजी रौफ द्वारा लिखा गया था क्योंकि राजी रऊफ ने मेरे द्वारा किसी अन्य समाचार पत्र में लिखित खुले पृष्ठ के वारे में दुष्प्रचार किया है इसलिए मेरे लिए ये जरूरी हो गया है कि मैं ‘द हिन्दु’ में रहमान द्वारा लिखित अंश का खण्डन करूं।
रहमान के अनुसार उदारवादी मुसलमान वो हैं जो उनके अनुसार मेरे द्वारा लिखित उत्तेजक लेखों पर प्रतिक्रिया नहीं करते। हालांकि रहमान ये बताने से चूक जाते हैं कि उदारवादी मुसलमानों की उन आतंकवादियों के प्रति क्या प्रतिक्रिया होनी चाहिए जो देश के विभिन्न हिस्सों में हजारों निर्दोष भारतीयों का कत्ल कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त रहमान ये भी नहीं बताते कि उदारवादी मुसलमानों की कशमीरघाटी में 60000 हिन्दूओं का कत्ल कर 500000 हिन्दूओं पर बरबर अत्याचार कर उन्हें अपने घर से बेघर करने वाले आतंकवादियों के प्रति क्या प्रतिक्रिया होनी चाहिए।
रहमान कहता है कि उदारवादी मुसलमान, आतंकवादी मुसलिम संस्थाओं द्वारा हथियार उठाकर डा. सुब्रमण्यम स्वामी सहित सब हिन्दूओं पर हमला करने “take up arms and to let all hell loose (sic).” के उकसावे पर अमल करने के बजाए इस बात से सन्तुष्ट हैं कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने मुझे(डा. सुब्रमण्यम स्वामी) को नोटिस भेजा है। विचार करने के लिए रहमान का धन्यवाद।
लेकिन रहमान की उदारवादी मुसलमान की अवधारणा मात्र एक दिखावा है क्योंकि इसका एकमात्र मकसद इस्लामिक आतंकवादियों द्वारा किए जा रहे बरबर अत्याचारों से लोगों का ध्यान हटाना है। रहमान मुसलिमों को ऐसा कोई उपाए(कदम) नहीं बताते जो उन्हें मौन स्वीकृति त्याग कर हिन्दूओं पर अत्याचार कर रहे जिहादी आतंकवादियों के विरूद्ध उठाना चाहिए। मुझे “बराबर समय सिद्धांत" के अनुसार ये कहने का पूरा अधिकार है कि इस्लामिक आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए मेरे द्वारा लिखे गए खुले पृष्ठ में मैंनें सही तथ्य दिए थे। मेरे कहने का अर्थ है कि आतंकवाद इस्लाम की कत्लोगारद की परम्परा को ही आगे बढ़ा रहा है खासकर जिहाद को।
आतंकवाद हिंसा का वो हथियार है जो अपने राजनीतिक व वैचारिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए संवैधानिक तरीके से चुनी गई सरकार और लोगों को भयभीत करने के लिए आम जनता को निशाना बनाता है।
संयुक्त राष्ट्र सुराक्षा परिषद ने 2004 में “अपराधिक कृत्य” से सबन्धित संकल्प संख्या 1566 में आतंकवाद को इस तरह परिभाषित किया है। आम जनता या लोगों के समूह में या विशेष व्यक्तियों , एक जनसंख्या समूह को दवाव में लाने या एक सरकार को वाध्य करने या अन्तरराष्ट्रीय संस्था को किसी काम को करने या न करने के लिए वाध्य करना।
इसलिए प्रत्येक सरकार का ये कर्तव्य है कि वह सामूहिक या अपने स्तर पर आतंकवादविरोधी ऐसे कड़े कदम उठाए जिससे कि भविष्य में होने वाले हमलों को रोका जा सके । सरकार का ये भी कर्तव्य है कि वो आतंकवादी गतिविधियों को अन्जाम देने वाले लोगों के विरूद्ध मुकद्दमा चलाकर सजा दें। इसके साथ ही आतंकवाद का मुकाबला करना मनावाधिकारों की रक्षा करने और बढ़ावा देने के लिए भी बड़ा खतरा पैदा करता है। इसलिए प्रत्येक देश से ये आहवान किया जाता है कि वे आतंकवाद का खात्मा और मानवाधिकारों की रक्षा करें।इन दोनों के बीच में रैखिक सबन्ध होने के बजाए अरैखिक सबन्ध है। अर्थात ये सत्य नहीं है कि हम मानवाधिकारों का जितना कम बचाव करेंगे आतंकवाद का मुकाबला करने में उतना ही अधिक सफल होंगे। इसका विलोम ये भी सत्य नहीं है कि हम आतंकवाद को जितनी कड़ाई से कुचलेंगे मानवाधिकारों का उतना ही कम पालन होगा। इसलिए हमें एक ऐसी रणनीति बनाकर अमल करने की जरूरत है जिसके अनुसार मानवाधिकरों की रक्षा करने के साथ-साथ मानवता विरोधी आतंकवाद को भी नेस्तनाबूद करने के लिए किए जाने वाले रक्षा उपायों में अनुकूलतम संयोजन किया जा सके। कम होते हुए लाभ का नियम इस प्रक्रिया पर लागू होता है। हमें उपरलिखित प्रक्रिया पर अमल करने की जरूरत है। इसलिए हमने जो लिखा उसका मकसद एक बहस शुरू करना था ना कि हमारे लिखे का कोई दुरूपयोग कर दुष्प्रचार करे जैसा कि रहमान ने किया।
रणनीति
आज मौलिक प्रश्न ये है कि क्योंकि हम भारत में जिहादी आतंकवादी हमलों से दुनिया में सबसे अधिक पीड़ित हैं इसलिए इस्लामिक आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए रणनीति कैसे बनाई जाए?
आतंकवाद से लड़ने के लिए हमारी रणनीति ऐसी नहीं होनी चाहिए जो भविष्य में और अधिक मुसकिलें पैदा न करे। जैसा कि 1989 में रूबिया सईद अपहरण कांड व कंधार में आई-सी—814 विमान अपहरण कांड के दौरान हुआ। ततकालीन NF और राजग सरकारों द्वार आतंवादियों से सौदेवाजी करने के परिणामस्वारूप भारत में आतंकवाद ने और खतरनाक स्वारूप ले लिया। कन्धार में यात्रियों और जहाज के कर्मचारियों के वदले में मौलाना अजहर,उमर कुरैसी और जरगर जैसे दुर्दांत आतंकवादियों को छोड़े जाने के परिणामस्वारूप छुड़ाए गए लोगों से हजारों गुना ज्यादा निर्दोष लोग आज तक मारे जा चुके हैं। इन तीनों कुख्यात आतंकवादियों ने पाकिस्तान पहुंचने के बाद नायकों की तरह अपनी भारतविरोधी आतंकवादी हमलों को आगे बढ़ाया। इन हमलों में 26/11 का मुम्बई हमला भी सामिल है।
इसलिए हमें एक सपष्ट निती की जरूरत है मतलब एक उद्देश्यों को रेखांकित करने वाला सपष्ट घोषणा पत्र जिसमें कि इन उद्देश्यों की प्राथमिकताओं को सपष्टता से परिभाषित किया गया हो, इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए अपनाई जाने वाली रणनीति का खुलासा हो और इन उद्देश्य की पूर्ति के लिए जरूरी आर्थिक,मानवीय और संरचनात्मक संसाधनों को जुटाने की प्रतिबद्धता हो।
हम भारतवासियों में से अधिकतर को इस्लामिक आतंकवाद से मुकाबले के लिए प्रतिरोधक रणनीति की जरूरत है। टैलीविजन चैनलों पर बैठकर धर्मनिर्पेक्ष परजिवी सच्चे इस्लाम को मानबीय और शांतिप्रिए बताकर लोगों को वरगलाने की कोशिश तो कर सकते हैं। परन्तु ये सपष्ट है कि इन धर्मनिर्पेक्ष परजिवीयों में से किसी ने भी ने कुरान,सुरा और हदीश का अधिकारिक अनुवाद नहीं पढ़ा है। इसलिए इस्लाम की सही ब्याख्या करने की बात करने के बजाए, जो लोग खुद को उदारवादी कहते हैं उन्हें इस्लाम के एक ऐसे नए सुधारे हुए स्वारूप की रचना करनी चाहिए जो लोकतान्त्रिक मूल्यों के साथ तालमेल बिठाने का आग्रह करता हो।
इस्लाम में पैगंबर के शब्द अंतिम है।कोई भी सच्चा मुसलमान समस्या की जड़ इन आयतों से अपने आपको अलग नहीं कर सकता और न ही सच्चा मुसलमान ये कह सकता है कि वो समस्या की जड़ कुरान की इन आयतों में सुधार कर इन्हें फिर से लिखेगा। क्योंकि ऐसा करने पर उसे जान बचाने के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ेंगी।
हम हिन्दूओं की स्वभाव से धार्मिक उदारवादी होने की सर्विदित मान्यता प्राप्त परम्परा है। जब भारत 100% हिन्दू राष्ट्र था तब भी हिन्दूओं ने दुनिया के विभिन्न भागों में प्रताड़ित पारसियों,यहूदियों,सिरियाईयों,इसाईयों और ऐहसान फरामोस अरब के मुसलमानों को न केवल शरण दी बल्कि उनका पालन पोषण भी किया। आज ऐहसान फरामोस इस्लामिक आतंकवादियों द्वारा निशाना बनाए जा रहे हिन्दूओं को अपनी रक्षा के लिए एकजुट होकर खड़े होना होगा।
आज 21वीं शताब्दी में हिन्दूओं के लिए संगठित होकर खड़ा होने का क्या मतलब है? अपनी रक्षा के लिए खड़े होने से मेरा मतलब है कि प्रभावशाली प्रतिशोधात्मक कार्यवाही कर देश की रक्षा करने के मुद्दे पर सब हिन्दूओं में पूरी मानसिक स्पष्टता होनी चाहिए।
इस संगठित प्रतिशोधात्मक कार्यवाही में अन्य धार्मिक समूहों का तर्कपूर्ण सहयोग, भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने में लेना भी, इस प्रतिशोधात्मक कार्यवाही का हिस्सा है। इसलिए मैंनें इस बात की वकालत की कि मुसलमानों को, इस सच्चाई जो कि वैज्ञानिक डीएनए आनुवंशिक अध्ययन द्वारा सिद्ध हो चुकी है ,को स्वीकार कर लेना चाहिए कि हम सबके पूर्वज एक हैं और महान हिन्दू संस्कृति हम सब की सांझी विरासत है।
(डा. सुब्रमनियम स्वामी जी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।)