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मोदीराज लाओ

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भारत बचाओ
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रविवार, 15 जनवरी 2012

OBC हिन्दू का 9% हिस्सा काटकर मुसलमानों को देने की शर्मनाक व खतरनाक घोषणा…

हमने सुना था कि चुनाब अचार संहिता नाम की भी कोई बंदिश होती है जो सरकार को चुनाबों के दैरान लोकलुभावनी घोषणायें करने से रोकती है लेकिन सरकार द्वारा चुनाबों की घोषणा की आहट से लेकर आज तक लिए जा रहे देशविरोधी फैसले ये दरसाने को काफी हैं कि सरकार फूट डालो और राज करो की नीति को आगे बढ़ाने के लिए किसी भी हद तक गिर सकती है।
आप देख सकते हैं कि किस तरह काँग्रेस सरकार ने चुनाबों से ठीक पहले OBC हिन्दू का 4.5% हिस्सा काटकर मुसलमानों को देने की विभाजनकारी घोषणा कर  OBC हिन्दूओं को नुकसान पहुंचाया। हमें उम्मीद थी कि सारे देश में सब हिन्दू मिलकर कांग्रेस के इस हिन्दूविरोधी- देशविरोधी विभाजनकारी फैसले का जमकर विरोध कर सरकार को ये गैर-संवैधानिक फैसला वापस लेने पर बाध्य कर देंगे । लेकिन ऐसा नहीं हो सका । हिन्दूओं ने अपनी मूर्खता का प्रमाण दते हुए विना किसी विरोध के सरकार को अपना हिन्दूविरोधी फैसला आगे बढ़ाने का अबसर दे दिया।
अपनी इस हिन्दूविरोधी-देशविरोधी असंबैधानिक सफलता से उत्साहित काँग्रेस  सरकार ने अपनी हिन्दूविरोधी-देशविरोधी नीति को आगे बढ़ाते हुए घोषणा कर दी कि चुनाबों के बाद सरकार हिन्दूओं का 9% हिस्सा काटकर इस्लामिक आतंकवादियों को भारत के विभाजन के इनाम के रूप में मुसलमानों को दे देगी।
एक बात तो निश्चित है कि ये हिस्सा SC/OBC/GC में से किसी न किसी के हिस्से से काटा जाएगा।
अब वक्त आ गया है कि सब हिन्दू वाकी सब मसले किनारे कर, मिलकर इस बात पर विचार करें कि 1947 में भारत को तीन हिस्सों में बाँटने वाली काँग्रेस ने पहले ही पूर्वी(बंगलादेश) और पश्चिमी(पाकिस्तान) भारत में 100% आरक्षण मुसलमानों को देकर हिन्दूओं के बच्चों को इन क्षत्रों में उनके मूल अधिकारों से बंचित कर रखा है अगर इसी तरह मध्य भारत(India) में भी हिन्दूओं के  अधिकार छीनकर मुसलमानों को दे दिए गए तो हिन्दूओं की आने वाली पीढ़ियां कहां से अपने बच्चों का भरण-पोषण कर पायेंगेी?
आओ मेरे प्यारे हिन्दूओ दाने-दाने को मोहताज होने से पहले समय रहते कांग्रेस की इस हिन्दूविरोधी-भारतविरोधी मानसिकता का आने वाले चुनाबों मे करारा जबाब देकर हिन्दूसमर्थक दलों को सफल बनाकर अपनी ताकत का परिचय दें।

मंगलवार, 15 नवंबर 2011

राहुल को भला शर्म क्यों न आए?

हम भारतीय अक्कसर भावनाओं में बहकर बहुत सी ऐसी गलतियां कर जाते हैं जिनके परिणाम हमें अपना खून बहाकर –इज्जत आबरू लुटवाकर भुगतने पड़ते हैं।
वेशक आप समझेंगे कि हम राजीब गांधी की उस भावनात्मक गलती की बात कर रहे हैं जिसके परिणाम स्वारूप वो इटालियन विषकन्या के फेर में पड़कर चर्च द्वारा रचे गए एक ऐसे षडयन्त्र का सिकार हो गए जिसकी कीमत उन्हें पहले तो अपना मान सम्मान खोकर(चर्च के सहयोग से सोनिया व क्वात्रोची द्वारा अन्जाम दिए गए बोफोर्स कांड) व बाद में अपने प्राण देकर चुकानी पड़ी।
लेकिन ये गलती तो राजीब गांधी की व्यक्तिगत गलती थी। अगर भारतीय भावनाओं में न बहते तो उनकी इस व्यक्तिगत गलती को राष्ट्रीय गलती न बनने देते। क्योंकि भारत में लोकतन्त्र है इसलिए अगर भारतीय भावनाओं में न बहते तो चुनाबों में विदेशी को आगेकर चुनाब लड़ने वाली पार्टी से सबन्धित प्रत्यासियों की जमानत जब्त करवा देते।चर्च को अपने आप पता चल जाता कि उसके षडयन्त्र भारत में सफल होने वाले नहीं लेकिन ऐसा हो न सका।
अगर जम्मू कशमीर में मुसलमानों को ईसाई बनाने बाले पादरियों को पकड़ कर जेल में डाला जा सकता है तो फिर भला क्यों सारे देश में हिन्दूओं को ईसाई बनाने में लगे पादरियों को जेल में नहीं डाला जा सकता।
ये हमारी भावनात्मक गलतियों का ही परिणाम है जिन लोगों(मुसलमानों और इसाईयों को ) को हमने अपना जैसा मानकर अपने देश भारत में शरण दी उन्हीं मुसलमानों ने हमें पहले अफगानीस्तान,फिर पाकिस्तान, बंगलादेश और अब कशमीर घाटी से बाहर निकाल दिया वो भी पूरी तरह लूटकर कर व आसाम और केरल से भारतीयों को वेदखल करने का संघर्ष जोरों पर है। मुसलमानों की ही तरह ईसाईयों ने भी हमें अपने बहुमत वाले उतर पूर्वी राज्यों से वेदखल कर दिया।
फिर आज हम देश के हर कोने में मुसलमानों और ईसाईयों के बरबर हमलों से प्रताड़ित अपने सगे हिन्दूों के साथ खड़े होने के बजाए इन आततायियों की बगल में खड़े हैं। क्यों , क्योंकि हिन्दी मिडीया,विके हुए नेता,पत्रकार,फिल्मकार अरब देशों से मिलने वाले पैट्रो डालर व युरोपियन देशों से मिलने बाले यु एस डालर के बल पर हमें समझा रहे हैं कि क्योंकि ये अल्पशंख्यक हैं इसलिए वेचारे हैं ,सेना ,हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों के सताए हुए हैं इसलिए हमें इन पर दया आ रही है परिणास्वारूप हम इन शातिर आक्रमणकारियों के साथ खड़े होकर अपने सगे हिन्दूओं को मरबा रहे हैं क्योंकि मारे जाने वाले व प्रताड़ित हिन्दूओं के वारे में हमें समझाने-बताने वाला कोई नहीं। कुछ मुठीभर लोग अगर बताने की कोशिश करते भी हैं तो हम शांति भंग होने का हबाला देकर उन्हें चुप करवा देते हैं।
ये क्या ये हमारी भावनात्मक गलती नहीं कि जिस विषकन्या एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी को हमने अपनी बहु समझकर सिर आंखों पर विठाने के साथ-साथ भारत के सिंहासन पर बैठाया वही विषकन्या आज सचरकमेटी रिपोर्ट, रंगनाथ मिश्रा कमेटी रिपोर्ट, 'Prevention of Communal and Targeted Violence Bill, 2011 जैसे षडयन्त्रों के माध्यम से हमें ठिकाने लगाने के लिए दिन-रात भारत के शत्रुओं के साथ मिलकर काम कर रही है।
अब आप राहुलRahul_Gandhi-18 को ही देख लीजिए जो चिल्ला-चिला कर कह रहा है कि उसे भारतीय-हिन्दूस्तानी होने पर शर्म आती है मतलब बो भारतीय नहीं कहलाना चाहता। बैसे वो भारतीय है भी नहीं। आप उसे 25% भारतीय कह सकते हैं क्योंकि उसकी माम इटालियन है व दादा भी तो पूरी तरह भारतीय नहीं।
फिर भी सोचने वाली बात ये है कि क्यों उसे भारतीय संस्कृति से इतनी नफरत है?
असल में इसकी रगों में वो इटालियन खून दौड़ रहा है जिस देश का प्रधानमन्त्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी अपने ही देश की लड़कियों-महिलाओं को माफिया की सहायता से खरीदकर या उठवाकर उनकी मंडी सजाता है।लेकिन फिर इटली खासकर चर्च की राजधानी रोम की जनता तक उसका विरोध  नहीं करती और भारत में इस तरह की बात तक करने पर लोग मरने-मारने पर उतारू हो जाते हैं ।
अब ऐसे ब्याभिचारी व बरबर माफियाओं के देश इटली से सबन्ध रखने वाला राहुल विन्सी भला भारत में घुटन क्यों न महसूस करे। उपर से चर्च द्वारा तैयार की गई विषकन्या द्वारा भरा गया भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी जहर।
इन सब हालात में अब आप ही बताओ कि जिसकी रगों में ब्याभिचारी व बरबर माफियाओं के देश इटली का खून दौड़ रहा हो उसे भारत जैसे महान देश में शर्म क्यों न आए?
पहचानो इस भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी को और ठान लो कि हम  और भावनात्मक गलतियां नहीं करेंगे… 

सोमवार, 14 नवंबर 2011

भिखारी और लुटेरी भारत की जनता नहीं वल्कि तेरी मां व वो अंग्रेज हैं जिनका खून तेरी रगों में दौड़ रहा है।

उत्तर प्रदेश में चुनाब की आहट सुनते ही कांग्रेस ने अपने पिटारे से एक के बाद एक विभाजनकारी षडयन्त्रों को बाहर निकालना सुरू कर दिया है। हम कईबार लिख चुके हैं कि कांग्रेस चुनाबों से पहले ऐसे विभानकारी मुद्दे उठाएगी जिससे कि भ्रष्टाचार व कालेधन जैसे जनहित से जुड़े सरोकार कहीं दूर-दूर तक नजर नहीं आयेंगे। हाफ अंग्रेज राहुल विन्सी का आज का ब्यान इसी का हिस्सा है।
इतिहास इस बात का साक्षी है कि कांग्रेस अगर अंग्रेजों व उससे पहले मुसलमानों द्वारा अपनाई गई भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी विभाजनकारी नीतियों को आगे न बढ़ाती तो 40 के दशक में में भारत से हर क्षेत्र में पिछड़ने वाला चीन आज भारत से कहीं पीछे होता व उसकी भारत को आँखें दिखाने की हिमत तक न होती. उल्टा आज बंगलादेश व पाकिस्तान जैसे मच्छर भी भारत को आंख दिखाकर व आतंकवाद के माध्यम से भारतीयों का खून बहाकर भारत को ललकार रहे हैं । ।
कांग्रेस खासकर गांधी-नैहरू खानदान की फूट डालो और राज करो की नीति का ही ये दुष्परिणाम है कि पहले तो भारत का तीन-तीन हिस्सों में विभाजन हुआ और अब भारत फिर उसी दोहराहे पर आ खड़ा हुआ है जिसपर जिन्ना-नैहरू-लेडी माउंटवेटन के वक्त था। फर्क सिर्फ इतना है कि आज नैहरू की भूमिका में राहुल विन्सी है व जिन्ना की भूमिका में मनमोहन सिंह व लेडी माउंटवेटन की भूमिका में राहुल विन्सी की इटालियन ममी एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी है ।थोड़ा सा फर्क ये भी है कि लेडी माऊंटवेटन ने एक अनैतिक सबन्ध के चलते भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी षडयन्त्रों को अन्जाम दिया जबकि माइनो ये सब एक नैतिक सबन्ध का दुरूपयोग कर अन्जाम दे रही है।
आज राहुल अगर वार-वार भारतविरोधी -हिन्दूविरोधी प्रलाप कर रहा है----कभी कहता है कि उसे भारतीय होने पर शर्म आती है ----कभी कहता है कि उसे खेद है कि वो हिन्दुस्तानी है---कभी देशभक्त संगठनों व हिन्दूओं के विरूद्ध अमेरिकी अधिकारियों को उकसाता है---कभी मुमबई में जाकर उतर भारतीयों व मुंमबईकरों के बीच झगड़ा पैदा करने की कोशिश करता है ---कभी विहारियों को मुमबईकरों के विरूद्ध भड़काता है---कभी उतर भारतीयों को दलित नेत्री मायावती के बिरूद्ध भड़काता है---यो ये कमी राजीब गांधी के खून की नहीं वल्कि इस विषकन्या के द्वारा चर्च का दुरूपयोग कर एक मासूम बच्चे के अन्दर भारत-भारतीयों खासकर देशभक्त हिन्दूओं के विरूध भरे गए जहर का कुप्रभाव है।
किसी ने ठीक ही कहा है कि बच्चे का पहला अध्यापक उसकी मां है जिस बच्चे की मां ही एक भारतविरोधी विषकन्या हो उसे भारतीय होने पर गर्व भला कैसे हो सकता है?
ये विषकन्या द्वारा भरे गए उसी जहर का असर है जिसके असर के कारण राहुल विन्सी ने उतर-भारतीयों द्वारा खून-पसीना बहाकर भारत के विकास में योगदान कर कमाई जा रही मेहनत की रोटी को भीख करार दे दिया। इस वेवकूफ को कौन समझाए कि भिखारी और लुटेरी भारत की जनता नहीं वल्कि इसकी मां व वो अंग्रेज हैं जिनका खून तेरी रगों में दौड़ रहा है।

मंगलवार, 8 नवंबर 2011

ईद कहो या बकरईद मकसद तो एक ही है---हिंसा---कत्लोगारद---अराजकता---


हम कई बार हैरान होते हैं ये देखकर कि जब कातिल अल्लाह के नाम पर कतलयाम idमचा रहे होते हैं तो कुछ परजीवि इस कत्लयाम को कभी वकर ईद तो कभी ईद के नाम पर जायज ठहराने के भरपूर प्रयत्न करने में लगे रहते हैं।दानबता की हर हद तो तब पार हो जाती है जब मिडीया में बैठे ISI ऐजेंट, हिंसा से भरपूर इन खूनी बारदातों को शांति और भाईचारे का जसन करार दे देते हैं।
हम मानते हैं कि कोई भी जीब कैसे जिन्दगी जीता है इसमें हस्तक्षेप का हमें कोई हक नहीं लेकिन जब ये जीब हिंसक हो जाए और अपने देश में बैठे धर्मनिरपेक्ष गद्दार इस जीब द्वारा किए जा रहे कत्लोगारद को जायज ठहराकर मानबता को लहूलुहान करने पर उतारू हों तो सब शांतिप्रिय लोगों का ये फर्ज बन जाता है कि इन्सान के वेष में छिपे इन राक्षसों को वेनकाब कर इस धरा को इन राक्षसों से मुक्त करने के उपायों पर विचार करे।
मजेदार बात तो ये है कि राक्षसों के जिन राहुल विन्सी जैसे मददगारों को इस कत्लयाम में अमन-चैन, प्रेम भाईचारा नजर आता है उन्हीं गद्दारों को भारतीय संस्कृति का हर पहलू सांप्रदायिक दिखने लगता है परिमामस्वारूप उन्हें भारतीय होने पर कभी शर्म आती है तो कभी दुख होता है।
वेशक कुछ लोगों को ऐसा लगेगा कि क्योंकि भारत में इन राक्षसों से हिन्दूओं को खतरा है इसलिए हम इनके खात्मे की बात कर रहे हैं। लेकिन ये आधा सत्य है क्योंकि इसमें कोई सन्देह नहीं कि जिस तरह इन राक्षसों ने कतल्याम के बल पर गांधी जैसे व्यक्ति को भारत का विभाजन स्वीकार करने पर विवश किया, जिस तरह न कातिलों ने कशमीर घाटी में हजारों हिन्दूओं का कत्लयाम किया, जिस तरह ये कातिल देशभर में बम्ब हमले व दंगा फसाद कर हिन्दूओं का कत्लयाम कर रहे हैं उस सबको देखते हुए ये कहना विलकुल सही है कि भारत में हिन्दूओं को इन राक्षसों से खतरा है।
लेकिन आम मुसलमान जिसने हाल ही में मतलब पिछले 300-500 वर्ष में इस्लाम अपनाने के बाबजूद मानबता का दामन नहीं छोड़ा है वो भी इन राक्षसों के निसाने पर उसी तरह है जिस तरह हिन्दू व ईसाई हैं। अगर आपको लगता है कि हम गलत कह रहे हैं तो आप उन इस्लामिक देशों पर एक निगाह डालो जिनकी लगभग 100% अबादी मुसलमान है उसके बाबजूद ये राक्षस इन इस्लामिक देशों में मस्जिदों, मदरसों व भीड़भाड़ वाले क्षत्रों में बम्म हमले कर इन नए-नवेले मुसलमानों का खून बहा रहे हैं।
अगर ये हमले इस्लाम को आगे बढ़ाने के लिए किए जा रहे हैं तो इन राक्षसों द्वारा मस्जिदों में बम्म बिस्फोट करने का कोई औचित्य नजर नहीं आता वो भी वहां जहां 100% अबादी मुसलमानों की ही है। क्योंकि जहां इन राक्षसों के साथ हिन्दू या ईसाई रहते हैं वहां तो ये राक्षस मस्जिदों में बम विस्फोट कर उसका दोष गैर मुसलमानों पर दे देते हैं जैसे कि इन राक्षसों के हाथों विक चुकी केन्द्र सरकार ने इन राक्षसों द्वारा मस्जिदों में किए गए बम हमलों का दोष हिन्दूओं के सिर डालकर देशभक्तों को जेल में बन्द कर दिया लेकिन 100% मुसलिम अबादी में तो ऐसा भी कोई बहाना काम नहीं कर सकता है।
हमारे विचार में ये राक्षस जिस भी अल्लाह का नाम लेते हैं वो जरूर कोई शैतान होगा वरना ये कैसे हो सकता है कि अल्लाह अपनी ही सन्तति का खून बहाकर खुश हो। यही नहीं ये राक्षश मां-वहन-वेटी-बहु जैसै पवित्र रिस्तों को भी नापाक कर अपने राक्षश होने का प्रमाण दुनिया के सामने रख रहे हैं। आओ मिलकर इन राक्षसों के इस दुनिया से सफाए के लिए जरूरी कदम उठाने का प्रण कर मानबता की रक्षा के लिए धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ें।

बुधवार, 12 अक्टूबर 2011

कशमीर पर ISI की भाषा बोलने वाले प्रशांत भूषण की पिटाई को क्या गलत ठहराया जा सकता है?


अभी-अभी दिल्ली सर्वोचन्यायालय परिसर में स्थित प्रशांत भूषण के कमरे में ही उनकी पिटाई prasant.jpg1.jpg6किए जाने का

समाचार आया है। प्रशांत भूषण ने खुद बताया कि पिटाई करने वाले

नौजवान इस बात से नाराज थे कि प्रशांत भूषण ने कशमीर के मसले पर

ISI मतलब पाकिस्तान के रूख का समर्थन किया है।

इससे पहले भी कई बार प्रशांत भूषण इस्लामिक आतंकवादियों के रूख k9का अनुसरण करते हुए सुरक्षा बलों पर हमला बोल चुके हैं।
इतना ही नहीं प्रशांत भूषण अकसर माओवादी कातिलों के समर्थन में भी

खुलकर खड़े नजर आते हैं।

वेशक इस बात के लिए तो आप प्रशांत भूषण को पागलपन के हद तक

बहादुर कह सकते हैं कि भारत में रहकर भारत की ही जड़ों को खोदने वाले

कुकर्म करने के बावजूद खुद को अन्ना जी के भ्रष्टाचार मिटाओ अन्दोलन

से जोड़कर भारत का हितैशी सिद्ध करने का दुहसाहस करने का दम रखते हैं।
फिर भी हम कहेंगे कि अगर प्रशांत भूषण की पिटाई भारतविरोधी कुकर्मों

के लिए हुई है तो किसी भी तरह गलत नहीं ठहराया जा सकता चाहे पिटाई

किसी ने भी की हो लेकिन अगर पिटाई सरकार ने उनके भ्रष्टाचारविरोधी

अन्दोलन से जुड़ने के कारण करवाई है तो इस पिटाई की जितनी भी निन्दा की जाए कम है।

प्रशांत भूषण की पिटाई अगर देशभक्तों ने की है तो सबसे बड़ी चिन्ता का

विषय ये है कि जिन वकीलों पर देश में कानून के आधार पर न्याय करवाने

की जिम्मेदारी है उन्हीं वकीलों ने सिर्फ इसलिए कि पिटने वाला एक

वकील था जो अकसर भारत विरोधी आतंकवादियों की सहायता के लिए

तत्पर रहता है के बदले में प्रशांत के भारतविरोधी रबैए से दुखी युवक के

नाक-मुंह से खून तक निकाल दिया जब कि उन युबकों ने प्रशांत को एक

भी चोट ऐसी नहीं पहुंचाई जिससे कि उनके शरीर को गम्भीर नुकसान हो।

इस घटना के बाद हम दावे से कह सकते हैं कि वो युवक सिर्फ अपना

विरोध दर्ज करवाने के लिए ही आए थे लेकिन प्रशांत, जो कि देशभक्तों से

नफरत की हद तक शत्रुता रखता है ,ने खुद को अपने गढ़ में पाकर उन

युवकों के सामने अपने भारतविरोधी रूख को दोहराकर उनको लड़ाई करने

के लिए उकसाया।
परिणामस्वारूप गद्दारी वाले कुकर्मों की बजह से लोगों के अन्दर पनप रहे

क्रोध को शांत करने के लिए खुद को प्रताड़ित बताकर( जिस काम में

आतंकवादियों के ये मददगार विशेषज्ञता हासिल कर चुके हैं) एक तो लोगों

का क्रोध शांत किया जाए दूसरा भारतविरोधियों की आँखों में हीरो बनकर

और आगे बढ़ा जाए ताकि शायद कोई भारतविरोधी किसी ऐसे इनाम से

नवाज दें जो अकसर भारतविरोधियों को ही दिए जाते हैं
इसीलिए हम ये लेख लिख रहे थे

अन्ना जी सावधान कहीं आपकी टीम में मौजूद

आतंकवादियों के मददगार आपकी मेहनत पर पानी न फेर दें!

लेकिन पूरा होने से पहले ही ये घटना घट गई।

इसमे कोई सन्देह नहीं कि आज भ्रष्टाचार हम सबकी जिन्दगी में जहर

घोल रहा है। हम कांग्रेस द्वारा बिछाए गए चोरी और गद्दारी के जाल में उसी

तरह उलझ गए हैं जिस तरह कांग्रेस द्वारा बिछाए गए फूट चालो और राज

करो के जाल में उलझे हैं। इस सबसे हम बाहर निकलने के लिए छटपटा

रहे हैं। ऐसे में जो भी इस जाल से बाहर निकालने की आश जगाता है हम

उसे अपना मानने लगते हैं। लेकिन हमें ये ध्यान ऱखना होगा कि कहीं

भारतविरोधी कांग्रेस के जाल से बाहर निकलते-निकलते हम हमारे अपने

भारतीयों के कातिल इस्लामिक और माओवादी आतंकवादियों  के जाल में

न फंस जायें।
हम हर तरह से अन्ना जी द्वारा चलाए जा रहे भ्रष्टाचार मिटाओ अभियान

के पक्ष में हैं लेकिन जब तक टीम अन्ना से आतंकवादियों के मददगार

अग्निवेश की ही तरह प्रशान्तभूषण को हटा नहीं दिया जाता तब तक टीम

अन्ना पर आँख बन्द कर भरोसा नहीं किया जा सकता।

आप सोच रहे होंगे कि प्रशान्त ने देश से ऐसी कैन सी गद्दारी की है जो हम

प्रशान्त भूषण को सन्देह की निगाह से देख रहे हैं।

सबसे पहली बात ये कि प्रशान्त भूषण हमेशा उन लोगों के साथ रहे हैं जो

भारत माता की जय और वन्देमातरम् का विरोध करते हैं मतलब भारत

की अखण्डता के बरखलाफ हैं। ये पहली बार है कि भारत माता की जय

और वन्देमातरम् का उदघोष करने वाले लोगों के साथ प्रशान्त भूषण दिखे

बेशक फिर भी भारत माता की जय या वन्देमातरम का एक बार भी नारा

नहीं लगाया। अगर आपने ये उदघोष लगाते हुए कभी देखा हो तो हमें जरूर बताना।
हमें लगा कि अगर एक व्यक्ति हमेशा गद्दारों का साथ देने के बाद आज

देशभक्तों के साथ आने की कोशिश कर अपने पाप का प्रयश्चित कर कर रहा

है तो उस पर अंगुली नहीं उठानी चाहिए ।लेकिन जैसे ही अन्दोलन समाप्त

हुआ ये व्यक्ति फिर से जम्मू कशमीर में जाकर हमारे सुरक्षाबलों के विरूद्ध

जहर उगलने लग पड़ा।
ऐसा नहीं कि इसने ऐसा पहली बार किया है इससे पहले भी ,जब

इस्लामिक देशों द्वारा पाकिस्तान के माध्यम से फैंके गए टुकड़ों के बल पर

हमारे सैनिकों पर पत्थरवाजी को हथियार बनाकर हमला sopore 2करने वाले आतंकवादियों और सुरक्षबलों में से किसी एक का साथ देने का मौका आया था तो इसने इन आतंकवादियोंINDIA_KASHMIR_POLIC_135876e को निर्दोष कहकर आतंकवादियों के प्रति अपनी देशविरोधी मानसिकता का प्रमाण दे दिया था। (R-L) Prashant Bhushan, Yogendra Yadva, Sunil, president, Samajwadi Jan Parishad प्रशांत भूषण अपहरण जैसे संगीन मामलों के आरोपी इस्लामिक अपराधियों के समर्थन में।
prasant   alina sen प्रशान्त भूषण देश से गद्दारी के आरोप में जेल जा चुके माओवादी कातिलों के मददगारों का समर्थन करता हुआ।
prasant   arundhati roy प्रशांतभूषण कशमीर पर पाकिस्तान के रूख का समर्थन करने वाली आतंकवादियों की मददगार अपनी सहयोगी अरूंधती राय के साथ।
आगे देखो ये दोनों आतंकवादियों के मददगार अकसर एक दिखेंगे दोनों

आतंकवादियों से भारत को लहुलूहान करवाने के मुद्दे पर एक राय जो रखते हैं।
prasant   arundhati roy.jpg1prasant   arundhati roy.jpg1.jpg2
prasant in meeting in hydrabadप्रशांत भूषण भ्रष्टाचारविरोधी कार्यक्रम में पहुचने पर।


prasant.3jpgप्रशांत भूषण माओवादी कातिल विनायक सेन के समर्थन मेंprasant.4jpgप्रसांत भूषण सोराबुद्दीन,इशरत जहां जैसे इस्लामिक आतंकवादियों के समर्थन में।prasant 7 प्रशांत भूषण माओवादी सरगना लिंगा के समर्थन में।
मेरे भाई इतना ही होता तो गनीमत थी अब आप अगले चित्र में देखेंगे उस

गौतम नबलखा को जो जो अमेरिका में भारत को बदनाम कर बर्बाद करने

के काम में लगे ISI ऐजेंट गुलामनबी फई का मित्र ही नहीं बल्कि सहयोगी

भी है।मजेदार बात ये है कि इस गद्दार के साथ प्रशांत भूषण की खास सहयोगी अरूंधती राय भी हैg6    g1 अब आप सोचेंगे कि KAC क्या है ये भारतविरोधी गद्दारों के सहयोग से ISI ऐजेंट गुलामनबी फई द्वारा चलाई

गई वो संस्था है जिसका एक मात्र मकसद मिडीया(print &

Electronic) में अपने  ISI ऐजेंटों के सहयोग से देशभक्त संगठनों को

बदनाम कर इसलामिक आतंकवादियों के अनुकूल महौल बनाकर भारत को

लहूलुहान करना  है …
आप आप खुद सोच लो कि इन भारतविरोधियों की कुटाई कितनी सही या

कितनी गलत है या फिर आप खुद फैसला कर लो कि अगर इन गद्दारों में

से कोई आपके हथे चढ़ जाए तो उसके साथ क्या बर्ताब करना चाहिए?

पूरी सूची बहुत जल्द।

मंगलवार, 20 सितंबर 2011

कानून मन्त्री द्वारा आतंकवादियों के समर्थन में हाथ उठाना कितना जायज?

जो मुसलिम आतंकवाद भारत को लहूलुहान कर अफगानीस्थान(9वीं शताब्दी) पाकिस्तान ,बंगलादेश जैसे हिस्सों में विभाजित कर चुका है और अब फिर भारत को विभाजित करने के लिए लगातार लहुलुहान कर रहा है उसी मुसलिम आतंकवाद को इजरायल के विरूद्ध बढ़ाबा देने के लिए भारत के कानून मन्त्री द्वारा हाथ उठाना कितना जायज है?Khursheed
जब भारत सेकुलर देश है तो एक सांप्रदायिक देश के निर्माण के लिए हाथ उठाना वो भी अन्य सांप्रदायिक देशों के साथ, क्या देश से गद्दारी करने से कुछ कम कहा जा सकता है?
क्या ये भारत की धरती का मुसलिम आतंकवाद को बढ़ाबा देने के लिए दुरूपयोग नहीं?
जरा सोचो जो मुसलिम आतंकवाद हिन्दूमिटाओ-हिन्दूभगाओ अभियान चलाकर अकेले कशमीरघाटी में ही भारत के 60000 निर्दोष नागरिकों का खून बहा चुका है व पांच लाख से अधिक को वेघर कर चुका है और देशभर मे  आए दिन हिन्दूबहुल क्षेत्रों में हमले कर भारत को लहूलुहान कर रहा है उस आतंकवाद के साथ जब भारतविरोधी केन्द्र सरकार खुद खड़ी हो तो भला  इस आतंकवाद को रोकेगा कौन?
मुसलिम आतंकवाद समर्थक ऐसी सरकार को हम देशविरोधी-हिन्दूविरोधी नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे?