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मोदीराज लाओ

मोदीराज लाओ
भारत बचाओ
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शनिवार, 3 दिसंबर 2011

जिस राहुल विन्सी की उत्तपति ही FDI के परिणास्वारूप हुई हो वो भला FDI का विरोध कैसै कर सकता है?

हम भारतीय अक्कसर ऐसी मूर्खतायें करते हैं जिन्हें देखकर बिदेशी हमारे उपर फबतियां ही नहीं कसते बल्कि आपसी बातचीत में हमारा जमकर उपहास भी उड़ातें हैं।राहुल विन्सी का FDI पर ये ब्यान इसी का प्रमाण है।
अब जरा सचो कि जो व्यक्ति/गिरोह/संगठन/कांग्रेसी/राजनीतिक दल आज एक विदेशी एडवीज एंटोनिया अलविना माईनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम सरकार को केन्द्र में बनाए रखने के लिए सहयोग कर रहे हैं वही व्यक्ति/गिरोह/संगठन/कांग्रेसी/राजनीतिक दल किस मुँह से FDI का विरोध कर रहे हैं।
FDI का मतलब है प्रतय्क्ष विदेशी निवेश ।अब आप ही बताओ भला एडवीज एंटोनिया अलविना माईनो से बड़ा और सीधा बिदेशी निवेश और क्या हो सकता है? इस FDI का तो उत्पादन Half Indian राहुल विन्सी भी हमारे सामने है जिसे कैटरीना कैफ ही 50% Indian करार देती है जो खुद पूरी तरह से भारतीय नहीं है।
FDI से उत्पादन कोई समाज सेवा या फिर जन कल्याण के लिए नहीं किया जाता जैसा की जनमजात बौद्धिक गुलाम मनमोहन सिंह कह रहा है बल्कि उत्पादन किया जता है लाभ कमाने के लिए । क्योंकि निवेश विदेशी है तो लाभ भी तो विदेशों में ही जायगा । भारत में लाभ के नाम पर लूट मची हुई है अब आप एंटोनिया नामक FDI को देख लो किस तरह से कभी बोफोर्ष सौदे के नाम पर ,तो कभी CWG के नाम पर ,तो कभी तेल के बदले अनाज के नाम पर, तो कभी 2G +3G , तो कभी रैली के नाम पर भारत को लूट कर  सारा धन विदेशों में जमा करवा रही है।  आज भारत में जो नियम हैं उनके हिसाब से कोई भी कैसे भी जितना चाहे उतना भारत को लूट सकता है लेकिन कानून इन सब डकैतों की रक्षा करता है। इसीलिए 100 की चीज 1000 में बेचकर भोली-भाली जनता को लूटा जा रहा है। चिप्पस का मामला ही देख लो।  
जरा सोचो जिस भाजपा ने अपने कार्यकाल में एक विदेशी को भारतीय संसद में विपक्ष के नेता के रूप में मानयता देकर भारत की गुलामी का मार्ग खोला वही भाजपा भला आज किस मुंह से FDI का विरोध कर रही है। अगर भाजपा उस वक्त वाह-वाही के चक्कर में न पड़कर समझदारी से काम लेती और अपनी सरकारी ताकत का उपयोग कर इस विदेशी विषकन्या की कारगुजारियों पर तवरित जाँच करवाकर इसकी भारतविरोधी करतूतों का कच्चा चिट्ठा जनता के सामने रखती तो आज न तो देश गुलाम होता नही ही विदेशियों के हाथों इस तरह लुटता व न ही ये विदेशी विषकन्या Prevention of Communal And targeted Violence Bill-2011 जैसे कानून वनवाकर हिन्दूमिटाओ-हिन्दूभगाओ अभियान  को आगे बढ़ाने में सफल होती।
बैसे भी FDI का अर्थ है आर्थिक गुलामी जो कि आगे चलकर सामाजिक व शारीरिक गुलामी को जन्म देती है। लम्बे समय तक इस तरह की गुलामी का शिकार रहना बौद्धिक गुलामी को जन्म देता है। आज भारत अभी तक पूरी तरह से सैंकड़ो बर्षो की मुसलिम और ईसाई गुलामी के परिणामस्वारूप उपजी बौद्धिक गुलामी से पूरी तरह आजाद नहीं हुआ है। इस गुलामी के शिकार लोग ही बिके हुए सेकुलर गद्दारों का अक्कसर साथ देकर भारत से ऐसी ऐतिहासिक भूलें करवाने पर तुलें हैं जो आगे चलकर भारतीयों के रोजगार, मान-सम्मान-स्वाभिमान से लेकर जान-माल तक को खतरे में डाल रही हैं। चर्च के षडयन्त्रों का शिकार होकर एक विदेशी एडवीज एंटोनिया अलविना माईनो उर्फ सोनिया गांधी को भारत की राजनीतिक जमात द्वारा स्थापित करना व ISI से पैसे खाकर सेकुलर गद्दारों द्वारा, सेकुलर गद्दारों से, हिन्दूहित पर प्रहार करने के लिए तैयार कवाई गई सच्चर कमेटी व रंगनाथ मिश्रा कमेटी जैसी रिपोर्टें ऐसी ही ऐतिहासिक भूलें हैं।
हमारा मानना है कि जिस तरह से राजनीतिक जमात ने दलगत राजनीति से उपर उठकर Prevention of Communal And targeted Violence Bill-2011 व FDI जैसे भारतविरोधी कानूनों का विरोध किया उससे एक कदम आगे बढ़कर इन सब देशभक्तों को एकजुट होकर भारत को बिदेशी गुलामी से मुक्त करने के लिए पहले तो इस विदेशी विषकन्या की पकड़ से केन्द्र सरकार को मुक्त करवाना चाहिए व बाद में मिलकर भारत में ऐसे कड़े कानून बनाने चाहियें जिनसे ये सुनिश्चित किया जा सके कि भारत में ,सिर्फ भारतीय ही राजनीति कर सकें कोई विदेशी नहीं व भारत में रोजगार ,ब्यापार व आर्थिक संसाधनों पर सिर्फ भारतीयों का ही कब्जा रहे किसी बिदेशी का नहीं।
इसमें कोई शक नहीं कि इस वक्त सांसदों का बहुमत FDI के बिरोध में है लेकिन हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि अब अगला दौर खीद-फरोक्त का शुरू होगा जिसके पुरिणामस्वारूप बहुत से राजनीतिक दल व सांसद अपनी जेब भरने के बदले FDI के समर्थन में जा सकते हैं। ऐसे विकाऊ गद्दार सांसदों/दलों की पहचान कर उन्हें जनता के सामने वेनकाब करना चाहिए।
अभी तक सिर्फ इतना सपष्ट हुआ है कि सिर्फ कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व खासकर राहुल विन्सी, एंटोनिया व मनमोहन ही भारतविरोधियों के हाथों विके हुए हैं या फिर यूं कहें कि कुछ मुठीभर विकाऊ कांग्रेसियों को छोड़कर सब केसब सांसद भारतीयों के रोजगार को बचाने को मुद्दे पर एकजुट हैं।
रही बात Half Indian की तो आप ही बताओ जिसकी उत्तपति ही FDI के परिणास्वारूप हुई हो वो भला FDI का विरोध कैसै कर सकता है इसलिए वो ठीक ही कह रहा है कि उसके ,उसकी मां और विदेशियों के गुलामों के लिए FDI कोई मुद्द नहीं उनके लिए मुद्दा है फूट डालो और राज करो।
कुलमिलाकर FDI के बहाने एक बहुत अछ्छी शुरूआत हुई है जिसे सब देशभक्तों को मिलकर आगे बढ़ाना चाहिए।

मंगलवार, 11 अक्टूबर 2011

क्या पिछले 7 वर्षों के कुशासन से ये सिद्ध नहीं हो गया कि 2004 व 2009 में अडवाणी या भाजपा की नहीं वल्कि भारत की हार हुई थी?


आज देश में ऐसे गद्दारों की कमी नहीं जो ,इस्लामिक देशों से इस्लाम के

अधूरे काम को पूरा करने के लिए पाकिस्तान की ISI के माध्यम से मिल

रही खैरात व अमेरिका की खुफिया ऐजेंसियों CIA व FBI के माध्यय से

भारत में अंग्रोजों द्वारा सम्राज्यबाद में विकसित इसाईयत के ढांचे को सुदृढ़

करने के लिए मिल रहे टुकड़ों के बल पर हर उस देशभक्त को निशाना बना

रहे हैं जो भारत और भारतीय संस्कृति की बात करता हो ।

अडवाणी जी की यात्रा के शुरू होते ही ये गद्दार समाचार पत्रों व समाचार

चैनलों के माध्यमों का दुरूपयोग कर अडवाणी जी के साथ-साथ भारतीय

संस्कृति वोले तो हिन्दू संस्कृति को अपमानित करने के लिए तरह-तरह

का शब्द जाल बुनेंगे। ध्यान रहे हमें उन लोगों से कोई शिकायत नहीं जो

रचनात्मक अलोचना कर इस अन्दोलन को और ताकतवर बनाने का मार्ग

प्रशस्त करेंगे।

अडवाणी जी हमेशा ऐसे ही गद्दारों के निशाने पर हमेशा रहे हैं खासकर उस

वक्त तक जब तक कि उन्होंने जिन्ना जैसे आतंकवादी



advani
व एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी जैसी विषकन्या soniyaके वारे में कुछ नर्म शब्द कहकर ऐसे गद्दारों को

ये सन्देश नहीं दे दिया कि वो अब उन गद्दारों का उस तरह विरोध नहीं

करते जिस तरह का विरोध हिन्दुत्वनिष्ठ देशभक्त संगठन करते हैं।

कुलमिलाकर अडवाणी जी ने इस तरह के वयान देकर अपनी सारी

जिन्दगी समर्पित कर हिन्दुत्व को आगे बढ़ाने व भारत मां की सेवा करने

के लिए इन गद्दारों पर हमला कर जो प्रसिद्धि व विश्वसनियता हासिल की

थी उस पर पानी फेर दिया।

एक तरह से कहें तो अडवाणी जी ने हिन्दुत्व से अपना सीधा नता तोड़

लिया या यूं कहें कि हिन्दूओं ने अडवाणी जी द्वारा लगातार लगभग 4

दशकों तक समर्पण भाव से हिन्दूहित के लिए काम करने के बाबजूद

एकवार भी भाजपा को एकजूट होकर वोट न डालकर अडवाणी जी को

हिन्दूत्व से नाता तोड़ने के लिए मजबूर कर दिया।

अगर इन कुछ अपबादों को छोड़ दें तो अडवाणी जी के मुकाबले ठहरने

वाला देश में आज एक भी नेता नहीं है।

इमानदारी ये वो अडवाणी जी हैं जिन्नहोंने हबाला काण्ड में नाम उछाले

जाने के बाद संसद की सदस्यता तक त्याग दी। अडवाणी जी संसद में तब

तक नहीं गए जब तक कि उनपर लगे आरोप झूठे साबित नहीं हो गए।

आपको ये नहीं भूलना चाहिए कि अडवाणी जी के 4 दशकों से अधिक के

राजनीतिक जीवन में एकवार भी कोई भ्रष्टाचार का आरोप लगना तो दूर

किसी विरोधी द्वारा उनकी तरफ अंगुली उठाने तक नहीं उठाई गई आज

तक। जब उठाने की कोशिश भी हुई तो अडवाणी जी ने संसद के बाहर का

रास्ता अपनाकर उस षडयन्त्र को असफल कर दिया।
त्याग देश का हर वो नागरिक जो उस वक्त होश सम्भाल चुका था अच्छी

तरह जानता है कि अयोध्या में मर्यादापुर्षोतम भगवान श्री राम जी का

भव्य मन्दिर बनाने के लिए निकाली गई यात्रा के बाद अडवाणी जी देश की

राजनीति पर पूरी तरह छा चुके थे लेकि जब प्रधानमन्त्री बनने की बारी

आई तो उन्होंने सबसे पहले अटल जी का नाम आगे कर बढ़ों का सम्मान

करने की हिन्दूसंस्कृति की रीत को निभाते हुए ऐसे त्याग को अन्जाम

दिया जो 20 वीं शताब्दी के शुरू से चली आ रही विभाजनकारी राजनीति में

आज तक देखने को नहीं मिला।
भाईचारे की भावना विदेशियों के टुकड़ों पर पलने वाले गद्दार लाख

मना करें पर सच्चाई यही है कि इस्लामिक आतंकवादियों और लुटेरे

ईसाईयों की गुलामी के दौर में हुए बरबर अत्याचारों व अपमानों के

परिणामस्वारूप भारत की संसकृति के मूलाधार सर्वधर्मसम्भाव व हिन्दू

एकता के सिद्धांत को भुला चुका हिन्दू अडवाणी जी की यात्रा के बाद

एकवार फिर भारतीय संस्क़ति को सुदृढ़ करने के अपने मूल काम में लग

गया। वेशक आज अडवाणी जी हिन्दुत्व से अलग हो चुके हैं लेकिन ये बात

हिन्दूओं को कभी नहीं भूलनी चाहिए कि अगर आज हिन्दू राजनीतिक रूप

से विधर्मियों के हमलों का उचित प्रत्युतर देने की ओर आगे बढ़ रहा है तो

इसमें अडवाणी जी की भी अहम भूमिका रही है।

ये अडवाणी जी ही हैं जिन्होंने हिन्दूओं को समझाया कि विधर्मियों के

अत्याचारों के परिमामस्वारूप इस्लाम या इसाईयत अपना चुके कमजोर

भारतीयों के पूर्बज भी हिन्दू ही हैं इसलिए वो भी हिन्दू हैं हमे उनसे नफरत

करने के बजाए उन्हें अपने घर बापस लाकर विधर्मियों के षडयन्त्रों को

नाकाम करना है।
ये अडवाणी जी ही हैं जिन्होंने सवरी माता के जूठे वेर खाने वाले

मर्यादापुर्षोतम भगवान श्री जी के नाम को आगे बढ़ाकर छुआछूत करने

वाले मूर्ख हिन्दूओं को अपने वंचित भाईयों को गले लगाने के लिए प्रेरित

किया।
अगर आप अडवाणी जी द्वारा सृजित व संचित नए नेताओं की पंक्ति देखें तो

पांयेंगे कि उस पंक्ति में हर वर्ण-हर तपके-गांव व शाहर हर जगह के नेता हैं।
अडवाणी जी ने प्रेम-भाईचारे का सन्देश शब्दों के बजाए अपने कर्म से दिया।
परिवार के बजाए संगठन को महत्व एक तो आज देश में

अडवाणी जी के कद का एक तो कोई नेता है ही नहीं पर अगर कोई खुद को

अडवाणी जी के सामने खड़ा करना भी चाहे तो नहीं कर सकता। अडवाणी

जी अपने कद के देश में एकमात्र ऐसे नेता हैं जिन्होंने अपनी सारी जिन्दगी

में परिवार के बजाए संगठन को महत्व दिया।

आज भी आप देख सकते हैं कि अडवाणी जी के परिवार का एक भी सदस्य

अडवाणी जी के कन्धे पर सवार होकर अपनी ही पार्टी के वाकी बरिष्ठ व

कर्मठ नेताओं को कुचल कर आगे बढ़ने का दुहसाहस नहीं कर रहा है न ही

आज तक किया है। जैसा कि प्राय वाकी सभी पार्टियों व भाजपा के भी कई

नेताओं के परिवारों द्वारा किया जा रहा है। सुना है कि गुलाम कांग्रेसियों को

परिवार तो परिवार पर नैहरू परिवार के पालतु जीव-जन्तुओं का भी मान

सम्मान करना पड़ता है।
देश की सर्वोचता अडवाणी जी के किसी भी कर्म के मूल में आप पायेंगे

कि उन्होंने हमेशा देश को सर्वोपरि माना है। यही बजह है कि आज चोरों

और गद्दारों की सरकार के देशविरोधी कुकर्मों और षडयन्त्रों को देखकर

आज देश में अगर कोई सबसे अधिक दुखी है तो वो अडवाणी जी हैं।

इसीलिए वो अपनी व लोगं पीड़ा सांझी करने के लिए रथयात्रा निकाल कर

आम लोगों के बीच जा रहे हैं।
जो सोचा-समझा वही कहा और जो कहा वही किया
हमारे विचार में अडवाणी जी की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि उन्होंने

आज तक अन्तरात्मा के विरूद्ध जाकर न कुछ कहा है न माना है न किया है।
आज तक अडवाणी जी ने अपने या संगठन के हित की खातिर देशहित के

विरूद्ध कुछ नहीं किया।

आज वेशक वो हमें देशभक्त हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों से दूरी बनाते हुए प्रतीत

हों पर हमें विश्वास रखना चाहिए कि अडवाणी जी हिन्दुत्वविरोधी-

देशविरोधी लोगों के साथ सम्पर्क बनाकर उन्हें हिन्दुत्व के पाले में लेकर

आयेंगे न कि खुद उनकी हिन्दूविरोधी–देशविरोधी मानसिकता का सिकार

हो जायेंगे।
जरा सोचो इतने महान ,त्यागशील प्रखर देशभक्त की जगह एक विदेशी एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के गुलाम मनमोहन सिंह को प्रधानमन्त्री बनाकर देश ने क्या खोया और क्या पाया?
2004-2009 में अडवाणी नहीं देश हारा

हम अच्छी तरह जानते और समझते हैं कि देश के हारने की बात कहना वो

भी सिर्फ एक व्यक्ति को उपर उठाने किए किसी अपराध से कम नहीं।

लेकिन अगर आप इस चोरों और गद्दारों से भरी पड़ी हिन्दूविरोधी-

देशविरोधी सरकार के भारतविरोधी कुकर्मों पर बिस्तार ने नजर दौड़ायेंगे

तो पायेंगे कि वाकई 2004 में इस विदेशी एडवीज एंटोनिया अलवीना

माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम सरकार का सता में आना भाजपा या

अडवाणी की हार नहीं बल्कि देश की हार है।

किसी भी सरकार द्वारा थोड़ी बहुत गलतियां करना चाहे वो किसी भी क्षेत्र से

जुड़ी हों स्वाभाविक है लेकिन जब सरकार देश की ही जड़ खोदने में लग

जाए तो आप उसे गलतियां नहीं देशविरोधी षडयन्त्र कहेंगे।
· कोर्ट में रामसेतु से जुड़े मामले में मर्यादापुर्षोतम भगवान श्री राम के अस्तित्व को नकारना।
· 2004 में सता में आते ही पोटा समाप्त कर न्या आतंकवाद विरोधी कानून

न बनाकर आतंकवादियों को भारतीयों के कत्लयाम की खुली छूट देना।

· 2004 में सता में आते ही अर्धसैनिक बलों के जवानों के, आतंकवादियों से

लड़ते हुए शहीद हो जाने पर, उनके परिबार को मिलने वाली विशेष आर्थिक

सहायता को, आर्थिक तंगी का हबाला देकर बन्द करना व बाद में

सुरक्षाबलों के हाथों मारे जाने वाले आतंकवादियों के परिवारों को लाखों

रूपए की सहयता देना।
· सेना में हिन्दू-मुसलिम की गिनती करने के आदेश देकर सेना को सांप्रदायिक आधार पर विभाजित करने का षडयन्त्र।

· देश के संसाधनों का संप्रदायिक आधार पर विभाजन करने के

साथ-साथ बच्चों तक की छात्रवृतियों का सांप्रदायिक आधार पर विभाजन कर देना।
· इस्लमिक आतंकवादियों द्वारा किए गए हमलों के लिए देशजागरण के

काम में लगे साधु-सन्तों-साधवियों व देश की रक्षा मे लगे सैनिकों को

जेल में डालकर इस्लामिक आतंकवादियों को बचाने के लिए संसार में

भारतीय संस्कृति को बदनाम करने का षडयन्त्र।

· सन्तों को ठग व ओसामा विन लादेन जैसे इस्लामिक आतंकवादी को जी

कहकर मुसलमानों के बच्चों को आतंकवादी बनने के लिए व हिन्दूओं के

बच्चों का सन्त न बनने के लिए संकेत देना।
· सारे देश में वन्देमातरम् का गान करने का आदेश देकर मुठीभर

इस्लामिक आतंकवादियों के कहने पर आदेश को वापस लेकर मुसलमानों

के बच्चों को आतंकवादियों की बात मानने पर मजबूर करना व सारे

मुसलमानों को बन्देमातरम् का विरोधी प्रचारित कर देशभक्त मुसलमानों

का अपमान करना।
· महाराष्ट्र सहित सारे देश में अंडरबर्ड का मुकाबला करने वाले सार्प सूटरों

को जेलों में डालकर गुण्डो को आम जनता को धमकाकर लूटने व जनता

पर अत्याचार करने की खुलीछूट देना।
· सोराबुद्दीन,इशरत जहां जैसे आतंकवादियों को मार गिराने वाले जवानों

को जेलों मे डालकर आतंकवादियों को न मारनें के लिए जवानों पर

दबाबा बनाना व आम जनता पर आतंकवादी हमले करने के लिए खुली
छूट देना।
· आतंकवादियों को निर्दोष बताकर शहीद मोहन चन्द शर्मा के बलिदान का

अपमान कर आतंकवादियों का हौसला बढ़ाना व सुरक्षाबलों के जवानों का

हौसला तोड़ना।
· दिल्ली में भारत को तोड़ने की बात करने वाले गिलानी व अरूंधति राय को

खुली छूट देना ,कातिल माओवादी सेन को अपना सलाहकार बनाना व

देशभक्ति की बात करने वाले स्वामी रामदेव व उनके समर्थकों पर गोले

बरसाना।
· अफजल की फांसी को मानीय न्यायालय की फटकार और हमले में शहीद हुए परिवारों के विरोध के बाबजूद आज तक रोके रखना व

देशभक्त हिन्दूसंगठनों के कार्यकर्ताओं और समर्थकों को जेलों में डालना व फांसी पर लटकाने के ,षडयन्त्र रचना।
·
आदर्श,CWG,2G,3G,S-Band ,कशमीर में सेना की भूमि बेचने,

जैसे घोटालों के माध्यम से देश को लूटना और लूट का विरोध करने वालों

को जेल में डालना ,उनका अपमान करना ,उनके विरूद्ध जांच बैठैाकर

सरकारी ऐजेंसियों का दुरूपयोग करना।
· कालेधन को भारत बापस लाने के लिए अभियान चलाने वाले स्वामी

रामदेब व उनके समर्थकों को धमकाकर व प्रताड़ित कर गद्दारों द्वारा लुटे

गए धन को बापस लाने के लिए उठने वाली हर आबाज को कुचलने का

प्रयत्न करना।
· भ्रष्टाचार के विरूद्ध आबाज उठाने वाले अन्ना हजारे जी को

अपमानित करना ,उनको धोखा देना व जेल भेजकर लोगों को भ्रष्टाचार के विरूद्ध आबाज न उठाने के लिए धमकाना।

· इस्लामिक आतंकवादी मदनी को छुड़ाने के लिए कानून बनबाना व उसे इलाज के लिए मंहगे औषधालय में भर्ती करवाना और साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को जबर्दस्ती आतंकवादी कहकर जेल में डालना व जरूरी इलाज तक उपलब्ध न करवाना।
· एक विदेशी एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की

गुलाम सरकार बनबाकर शहीद भगत सिह जैसे लाखों शहीदों द्वारा

विदेशियों से सता छीन कर भारतीयों के हाथ में देने के लिए किए गए

बलिदानों का अपमान कर उनकी आत्मा को लहुलुहान करना।
· शर्म-अलशेख में गुलाम प्रधान्मन्त्री ने अपनी मन्दबुद्धि का

परिचय देते हुए पाकिस्तान के साथ एक ऐसे घोषणा पत्र पर अपनी

सहमति दे दी जो पाकिस्तान में आतंकवाद के लिए भारत को दोषी
ठहराती है।
· इस्लामिक देशों के इसारे व आर्थिक बल पर वर्षों से लाखों

भारतीयों का खून बहाने वाले आतंकवादियों की सरणगाह व प्रशिक्षण

स्थल पाकिस्तान को आतंकवाद का पीड़ित बताकर पाकिस्तान को

भारतीयों का खून बहाना जारी रखने के लिए समर्थन देना।
· सरकार के मन्त्री द्वारा मुम्बई पर हुए भारत के इतिहास के

सबसे बड़े इस्लामिक आतंकवादी हमले को हिन्दूओं द्वारा किया गया

बताना क्योंकि हमले में मारे जाने वालों में वो व्यक्ति भी सामिल था जो

सरकारी दबाब में आकर मुसलिम आतंकवादियों द्वारा किए गए हमलों के

लिए हिन्दूओं को फंसा रहा था। बाद में सरकार चला रही कांग्रेस पार्टी के

महासचिब द्वारा आतंकवादियों के समर्थक द्वारा इस हमले के लिए RSS को

दोषी ठहराने वाली पुस्तक का विमोचन कर आतंकवादियों को खुला

समर्थन देना।
· आम लोगों को मरने के लिए मजबूर करने की हद तक अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए मंहगाई को आसमान तक पहुंचा देना।

क्या आपने कभी सोचा कि जिनके घर से न तो सरकारी नौकर है न ही कोइ दुकानदार वो भला जिन्दगी कैसे जी रहे होंगे?
अब आप खुद सोच लो कि इस सबसे अडवाणी जी advani.jpg1को क्या निजी नुकसान हुआ ? कोई नहीं?

अगर नुकशान हुआ तो देश की आम देशभक्त जनता का जो चोरों और

गद्दारों के 7वर्ष के कुशासन के बाद आज न तो पेट भर खाना खा सकते

हैं ,न खुद को सुरक्षित महूसस कर सकते हैं और न हीं दुनिया के सामने

सिर उठाकर कह सकते हैं कि हम भारतीय हैं क्योंकि इस सरकार ने भारत

को भ्रष्टाचार,मंहगाई और आतंकवाद के लिए सारी दुनिया में बदनाम कर

दिया।
कुल मिलाकर ये हार भारत की है न कि किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति की नहीं।

मंगलवार, 21 जून 2011

कांग्रेस का हाथ भारतविरोधी चोरों गद्दारों आतंकवादियों के साथ...


2004 से भारत में इटालियन एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम एक ऐसी हिन्दूविरोधी-देशविरोधी सरकार सतासीन है जिसका एकमात्र शत्रु भारत और भारतीय संस्कृति है।

आज देश मे जो भी देशभक्ति को आगे वढ़ाने या फिर भ्रष्टाचार मिटाने की बात करता है वो एकदम इस चोरों और गद्दारों की सरकार के निशाने पर आ जाता है फिर वह चाहे स्वामी राम देव जी हों या फिर अन्ना हजारे जी या फिर RSS ।

आज देश में जो भी गद्दारी, चोरबजारी या फिर आतंकवाद को बढ़ाबा देकर भारत की तबाही को सुनिस्चित करने के लिए आगे बढ़ता है कांग्रेस नेतृत्व सरकार सहित उसके समर्थन व बचाब में किसी भी हद तक जाने के लिए त्यार हो जाता है
मामला चाहे लोकतन्त्र पर हमला करने वाले गद्दार मोहम्द अफजल का हो या फिर दिल्ली में शहीद मोहन चन्द शर्मा पर हमला करने वाले आजमगढ़ के आतंकवादियों का हो या फिर देशद्रोही कश्मीरी आतंकवादी गिलानी व उसकी समर्थक अरूंधिति राय का ही क्यों न हो....

हर जगह एक ही बात साबित होती है इटालियन एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम कांग्रेस का हाथ भारतविरोधी चोरों गद्दारों आतंकवादियों के साथ

शनिवार, 25 दिसंबर 2010

GSAT-5P की असफलता का एंटोनिया CONECTION




आज दूरदर्शन के सरकारी चापलूस की भूमिका में चले जाने के कारण बहुत कम लोग दूरदर्शन के कार्यक्रम देखते हैं लेकिन आज भी आम व मजबूर लोगों के लिए दूरदर्शन , रेडियो के बाद सूचना का एकमात्र साधन है। हम भी दूर्दरशन के कार्यक्रम बहुत कम देखते हैं। लेकिन क्योंकि आज GSAT-5P के प्रक्षेपण का सीधा प्रसारण दूरदर्शन दिखा रहा था इसलिए हम दूरदर्शन के साथ चिपक कर बैठ गए।


GSAT-5P प्रक्षेपण कुछ मिनट के बाद ही विस्फोट के साथ असफल हो गया तो मन को बहुत दुख हुआ ।क्रोध भी आया कि जब रूस से लाया गया क्रायोजैनिक इंजन खराब था तो उसे वापस रूस को लौटाने के बजाए देश का 175 करोड़ रूपया बरबाद करना क्यों जरूरी समझा गया।क्रायोजैनिक तकनीक बहुत ही उच्चतकनीक है इस तकनीक पर आधारित इंजन में लीकेज का मतलब ही कार्यक्रम की असफलता की गारंटी है। लेकिन खैर जैसा अक्सर होता है अब बैसे ही इस कार्यक्रम में इस वेवकूफाना हरकत को छुपाने के प्रयास शुरू हो चुके होंगे।


इसके बाद जो हुआ वो और भी चौंकाने वाला था। जैसे ही निर्धारित समय पर GSAT-5P के असफल प्रक्षेपण के बाद सीधे प्रसारण का ये कार्यक्रम बन्द हुआ बैसे ही ईसाईयत का प्रचार-प्रसार शुरू हो गया । कुछ समय तक कुछ अंग्रेज लड़के–लड़कियां ईसाईयत के गुणगान के लिए वेसुरे गीत गाते रहे बाद में हमारे दूरदर्शन ने एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के देश में रोम से सीधा प्रसारण शुरू कर दिया ।


आप सब जानते हैं कि दूरदर्शन हम सब भारतीयों के खून-पसीने की कमाई के पैसे से चलता है।उस मेहनत से कमाए गए पैसे को एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के इसारे पर ईसाईयत के प्रचार प्रसार के लिए खर्च करना वेहद आपतिजनक है गुनाहकारों के विरूद्ध उचित समय पर कड़ी कार्यवाही होना अति आवस्यक है।


प्रक्षेपण की असफलता के एक-दम बाद ईसाईयत के प्रचार-प्रसार ने हमारे मन में कई संकायें पैदा कि । क्योंकि ये पहले से ही पता था कि क्रायोजैनिक इंजन खराब है तो भी उस खराब इंजन के साथ ही GSAT-5P के प्रक्षेपण निर्णय कहीं एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के प्रभाव में तो नहीं किया गया।


बहुत कम लोग जानते हैं कि रूस ईसाईयत के प्रचार-प्रसार के लिए अमेरिका से भी जयदा प्रतिबद्ध है व एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी को भारत में पलांट करने में रूस की ही खूफिया ऐजेंसी का हाथ था। पलांट करने का मकसद भी भारत में हिन्दूओं को अपदस्त कर ईसाईयों के हाथों में सता को पहुंचाना था ।आज सरकार की सर्वेसरवा एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी से लेकर रक्षामन्त्री एक के एन्टनी तक सब जगह ईसाई ही दिखाई दे रहे हैं।


यहां तक कि अगर इसाई के उपर भ्रष्टाचार के कितने भी बड़े आरोप क्यों न लगे हों उन्हें बड़ें पदों पर ऐंटोनिया की पकड़ मजबूत करने के लिए विठाया जा रहा है। आप पी जे थामस को ही ले लें जिसे दो पाक-साफ हिन्दूओं को दरकरार कर CVC प्रमुख बनाया गया वो भी विपक्ष की आपति के बाबजूद। बाद में इस भ्रष्ट की खबर माननीय न्यायालय ने लेकर ऐंटोनिया के हिन्दूविरोधी षडयन्त्र को जनता के सामने रखा।


एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी व उसका बेटा राहुल गंदगी किस हद तक हिन्दूओं के विरूद्ध हैं उसका सबसे बड़ा प्रमाण Wiki-leaks के उस रहसयोउधघाटन में मिला जिसमें बयाता गया कि किस तरह ये सपोला अमेरिका के राजदूत को हिन्दूओं के विरूद्ध भड़का रहा था।


अगर इस सपोले के अन्दर भारतीयों का खून होता तो ये ऐसी गद्दारी नहीं करता । हमें तो लगता है कि एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के ईसारे पर खराब क्रायोजैनिक इंजन का प्रयोग कर प्रक्षेपण की असफलता सुनिस्चित कर ईसाईयत का प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया गया।


क्योंकि आज इस मौके पर अधिकतर भारतीय दूरदर्शन देख रहे थे तो प्रक्षेपण का प्रसारण वीच में ही बन्द होने पर एकदम ईसाईयत का प्रसारण शुरू होने पर अधिकतम लोगों तक एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी का ईसाईयत का संदेश पहूंचा।


इस संदेश में पोप ने पहले तो ये इशु को भगवान का अबतार बताया व बाद में इशु को भगवान का वेटा कहकर संबोधित किया।मतलब खुद पोप ही इशु के वारे में भ्रमित हैं। उसके बाद पोप ने संसार के विभिन्न देशों में रह रहे ईसाईयों को वहां की सरकारों व समाजों के विरूद्ध लड़ाई छेड़ने के लिए उचित समय का इन्तजार करने के लिए कहा। मतलब पोप का ये भाषण न केवल शांति और भाई चारे के विरूद्ध था वल्कि साथ ही दुनिया में हिंसा बढ़ाने बाला भी था। ऐसे हिसंक भाषण का प्रचार-प्रसार शांतिप्रिए भारतीयों के पैसे से करना कहां तक उचित है?






शुक्रवार, 24 दिसंबर 2010

छापेमारी की नौटंकी---भ्रष्टाचार छुपाने का नया हथकंडा





घोटालों को रोकने के लिए एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम सरकार प्रयत्न कर रही है ऐसा दिखाने के लिए छापेमारी व पूछताछ की नौटंकी को अन्जाम दिया जा रहा है। अब गद्दारों के सेकुलर गिरोह को कौन समझाए कि ये जो जनता है ये सब जानती है।


हम सब जानते हैं कि CWG घोटाला सितम्वर 2010 में पूरी तरह से उजागर हो चुका था। ये भी जनता के सामने आ चुका था कि इस घोटाले को प्रधानमन्त्री व गद्दारों की सरदार एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के नेतृत्व में किन लोगों ने अन्जाम दिया । जनता उस वक्त कार्यवाही होती देखना चाहती थी लेकिन ऐसा हुआ नहीं ।


क्योंकि आज सरकार जिन लोगों के यहां छापे मारी कर रही है वो तो घोटाले की छोटी मछलियां हैं वड़ी मछली तो एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी है जिसकी सरकार गुलाम है । क्या सरकार में इतना दम है कि, अब जबकि स्थिति सपष्ट होती जा रही है कि सोनिया गांधी की संलिप्तता के कारण ही घोटालों की जांच में देरी कर जांच को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है ।इन हालात में सरकार चोरों की सरदार के यहां सीधी कार्यवाही करे । ऐसा हो नहीं सकता कि गुलाम सरकार अपनी आका की चोरबजारी को उजागर होने दे चाहे इसके लिए संसदीय लोकतन्त्र ही क्यों न खतरे में पड़ जाए ।


CWG घोटाले से भी ज्यादा रूचीकर तो 2G SPECTRUM घोटाला बन गया है । इस घोटाले में देश का 1,76,000 करोड़ रूपया लूटा गया है इस लूट को सरकार के सामने आए हुए वर्षों हो गए। आप सोचो कि जब चोरों को वर्षों पहले पता हो कि उनकी चोरी पकड़ी जा चुकी है तो क्या वो इतने लम्बे समय तक प्रमाणों को तवाह नहीं कर देंगे।


2G SPECTRUM घोटाले में तो किसने कितना हिस्सा खाया ये भी सामने आ चुका है


A Raja 10% + Krunanidhi 30% + SONIYA GANDHI,s SISTERS (30%+30%)=60% TOTAL =100%


अब जांच हो रही है A Raja से जिसने 10% खाया है । जिन लोगों ने इस घोटाले का 90% खाया है वो लोग मजे कर रहे हैं और भाषण दे रहे हैं भ्रष्टाचार को समाप्त करने पर।


अब आप खुद सोचो कि एक तो जांच को होने नहीं दिया गया लम्बे समय तक रोक कर अब हो भी रही है तो सिर्फ उन लोगों से जो मोहरे मात्र है विसात विछाने वाले मजे कर रहे हैं अगली लूट की योजना बना रहे हैं आओ मिलकर लूटेरों को वनकाब करें।










गुरुवार, 23 दिसंबर 2010

सोनिया गांधी के देश में वम धमाका...


जी हां आज एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के देश इटली के रोम में स्विस दूतावास के बाहर पार्सल वम धमाका हुआ जिसमें एक व्यक्ति मारा गया।


इस वम धमाके से सबन्धित स्थान एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी से खास रिस्ता रखते हैं।


रोम में उस चर्च का मुख्यालया है जिसने एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो को भारत में हिन्दूओं को बदनाम कर ईसाईयत का वोलवाला करने के लिए भारत में एक षडयन्त्र के तहत पलांट किया। अब इस षडयन्त्र के प्रमाण जगजाहिर होने लगे हैं।


स्विटजरलैंड में वो बैंक है जिसमें एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की भारत से लूटी हुई अपार धन सम्पदा भरी पड़ी है। इस सम्पदा में वोफोर्स दलाली कांड, इराक में अनाज के बदले तेल कार्यक्रम में लूटा गया धन,CWG घोटाले में चोरी किया गया धन, 2G spectrum में डकारा गया पैसा इसके अतिरिक्त पचासों छोटे बड़े घोटालों में भारत से लूटा गया माल भरा पड़ा है।


क्योंकि एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी का धन स्विस बैंक में भरा पड़ा है इसीलिए सोनिया गांधी के गुलाम प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह ने जर्मनी द्वारा सविस बैंक में काला धन रखने वालों की सूची आफर करने के बाबजूद सूची लेने से मना कर दिया था।


इस चोरों की सरदार का गुलाम प्रधानमन्त्री अपनी आका का धन कैसे भारत लौटने दे सकता था । आखिरकार गद्दार गुलाम जो ठहरा। अब आप जमझ ही गए होंगे कि हमें इस समाचार ने क्यों आकर्षित किया।










रविवार, 12 दिसंबर 2010

देर आए दुरूस्त आए----UPA सरकार ने माना कि पूर्व RSS प्रमुख सुदर्शन जी ठीक कह रहे थे।

 
नीरा राडिया विदेशी ऐजेंट है ऐसा माननीय न्यायालय में केन्द्र की UPA सरकार ने सवीकार किया है। अभी तक जो तथ्य सामने आए हैं उनके अनुसार नीरा राडिया विदेशी ताकतों व कम्पनियों के ईसारे पर यह तय करती थी कि कौन किस विभाग का मन्त्री होगा। एक बात तो साफ है कि ये काम नीरा राडिया खुद करने की ताकत नहीं रखती ।

प्रश्न सीधा सा है कि आज की तारीख में देश में ऐसा कौन सा वयक्ति है जो सरकार में राष्ट्रपति,प्रधानमन्त्री ,मन्त्री व उनके विभाग तय करने की ताकत रखता है। जबाब भी सीधा है कि ये सब काम आज की तारीक में एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी ही कर रही हैं। इसका अर्थ ये हुआ कि नीरा राडिया ये काम सोनिया गांधी से करवा रही थी।मतलब नीरा राडिया और सोनिया गांधी मिलकर विदेशी ऐजटों के रूप में काम कर रही थीं।


आज जो बात सरकार ने खुद कोर्ट में सवीकार की व जिसके प्रमाण हजारों टेपों में भरे पड़े हैं यही बात तो पूर्व RSS प्रमुख सुदर्शन जी ने की थी। कुल मिलाकर केन्द्र सरकार ने कान सीधे न पकड़कर घुमाकर पकड़ा है पर इस सबका एक ही सार है और वो ये है कि एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी विदेशी ऐजेंट है। अन्त में हम तो इतना ही कहेंगे कि देर आए दुरूसत आए वेशक अधुरा आए....