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मोदीराज लाओ

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गुरुवार, 18 सितंबर 2014

न मोदी जी बदले हैं न बदलगें ....


 
मोदी जी की अलोचना करना और मोदी जी को बदनाम करना मोदीबिरोधियों का पैसा प्राप्त करने और प्रचार पाने का सबसे बड़ा साधन है इसलिए हम मोदीबिरोधियों द्वारा मोदी जी की अलोन का कभी जबाब नहीं देते ।

लेकिन आजकल कुछ ऐसा हो रहा है जिसका जबाब देना बहुत जरूरीही नहीं बल्कि मजबूरी बन गया है है क्योंकि अब बहुत से ऐसे लोग भी मोदी जी की अलोचना कर रहे हैं जो चुनाबों तक मोदी जी के सच्चे पक्के समर्थक थे और उनके समर्थन का सबसे बड़ा कारण था उनका ये भरोसा कि मोदी जी के प्रधानमन्त्री बनने पर न केबल हिन्दूओं पर सेकुलर पार्टियों के सहयोग से मुसलमानों और ईसाईयों द्वारा किए जा रहे अत्याचार बन्द होंगे बल्कि वल्कि इसलामिक आतंकवादियों को छुड़वाने के सेकुलर गद्दारों की सरकारों द्वारा जेलों में बन्द किए गए हिन्दूंओं की रिहाई भी होगी।

हिन्दूओं जख्मों पर नमक डालने काम न्यायालय का वो निर्णय करता है जिसमें भारतीयों के कातिल इटालियन सैनिक को इस आधार पर स्वादेश भेज दिया गया कि बो बीमार हैं लेकिन कैंसर से पीड़ित साध्यवी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को घर भेजने के लिए भारत की सेकुलर अदालतें त्यार नहीं....

मित्रो बिषयान्तर न करते हुए हम मोदी जी की अलोचना पर ही केन्द्रित करेंगे....

मित्रो क्या आप जानते हैं कि अमिका का राष्ट्रपति पद ग्रहण करने के लिए बाईबल की कसम उठाता है जो कि दुनिया को ये सन्देश देने के लिए काफी है कि अमेरिका के राष्ट्रपति का पहला काम चर्च(ईसाईयत) की रक्षा व प्रसार करना है।

ठीक इसी तरह मोदी जी द्वारा जापान के प्रधानमन्त्री को श्रीमदभगबत गीता प्रदान करना दुनिया को ये सन्देश देने के लिए काफी है कि मोदी जी का पहला काम भारतीय संस्कृति बोलो तो हिन्दूसंस्कृति की रक्षा करना है।

अब रही बात निर्दोष हिन्दूओं को जेलों से बाहर करने की तो कोई भी वयक्ति इस बात को समझ सकता है कि इन हिन्दूओं ने कोई गुनाह नहीं किया है इन्हें सेकुलर सरकार ने इटालियन अंग्रेज के ईसारे पर इसलामिक आतंकवादियों को छुड़बाने के लिए लों में डाला है तो फिर इन निर्दोषों को जेलों से छुड़वाने के लिए मोदी जी को हस्तक्षेप करने की क्या जरूरत है क्योंकि जब न इन्होंने कोई अपराध किया है न कोई इनके बिरूद्ध कोई प्रमाण है तो इनका छूटना तो निस्चित ही है जिस तरह स्वामी असीमानन्द जी के निर्दोश होने की बजह से उन्हें जमानत मिली इसी तरह बाकी लोगों को भी मिलेगी और बहुत से निर्दोष हिन्दूओं को जमानत मिल भी चुकी है।

हाँ मोदी जी को ये जरूर आदेश देना चाहिए कि इनके मामलों की सुनबाई यथाशीध्र पूरी की जाए और बो होगी भी....

अगर फिर भी सेकुलर अदालतें इन निर्दोष हिन्दूओं को जेलों से छोड़ने से मना करती हैं जो कि नहीं करेंगे तब न्यापालिका को सेकुलर गद्दारों से मुक्त करवाने के लिए प्यत्न करने चाहिए हिन्दूजागरम अभियान चलाकर....

आप लोगों को ऐसा लगेगा कि हमारी अदालतें निष्पक्ष हैं लेकिन ये बास्तबिकता से परे है बरना ये अदालतें ऐसे फैसले नहीं देती जिनके अनुसार कानून सिर्फ हिन्दूओं पर लागू हो गैर हिन्दूओं पर नहीं....

सब देशभक्तों को ये खुशी होनी चाहिए कि मोदी जी भारत के ऐसे पहले प्रधानमन्त्री हैं जिन्होंने दिन में 14-15 घंटे काम करते हुए भ्रष्टाचार पर पूर्ण बिराम लगाने के लिए हर तरह के कदम ठाए हैं ।

मित्रो हम सब को ये नहीं झूलना चाहिए कि किस तरह से मोदी जी ने सेकुलर पार्टियों से बदला चुकाया है सेकुलर राज्यपालों को हटाकर क्योंकि इन सेकुलर पार्टियों ने राज्यपालों को सिर्फ इसलिए हटाया था कि बो हिन्दुत्वनिष्ठ हैं।

हमें पूरा भरोसा है कि निर्दोष हिन्दूओं पर रामलीला मैदान में 4 जून को हमला करवाने बालों व निर्दोष हिन्दूओं को हिन्दू आतंकवादी कहकर जेलों में डलवाने बालों का हिसाब भी मोदी जी चुन-चुन कर पूरा करेंगे...

रही बात कशमीरघाटी में पानी में डूबे आतंकवादियों को मरने से बचाने की और आतंकवादियों और उनके समर्थकों को राहत देने की तो हम सबको ये द्यान रखना चाहिए कि इन तंकवादियों ने जितना खून हिन्दूओं का बहाया है उससे कहीं ज्यादा इन आतंकवादियों ने मुसलमानं का भी खून बहाया है इन तंकवादियों बहुत जल्द बहां की जनता ही दौड़ा-दौड़ा कर मारेगी ये आप लोग बहुत जल्द देंखेंगे कशमीर घाटी व देश क अन्य हिस्सों में होता हुआ बैसे भी शेर अपने शिकार को दौड़ा दौड़ा कर मारता है।

मित्रो एक बात याद रखना आज हमें पूरा भरोसा है कि मोदी जी दुनियाभर में हिन्दूओं के रक्षक के रूप में अपनी झूमिका अदा करेंगे लेकिन इसका मतलब कदापि ये नहीं कि हम ये चाहते हैं कि मी जी वाकी लोगों के साथ भेदभाव करें हम तो सिर्फ इतना चाहते हैं कि मोदी जी देसभर में एकसमान नागरिक संहिता लागू कर सब भारतीयों के लिए एक जैसे अबसर उपलब्ध करवायें….

कुल मिलाकर हमारा मानना है कि न मोदी जी बदले हैं न बदलगें ....मोदी जी देशभक्त थे हैं और रहेंगे

अगर आप भी ऐसा ही महसूस करते हैं तो याद करो सेकुलर गद्दारों द्वारा 50 वर्ष तक हिन्दूओं पर किए गए अत्याचारों और हिन्दूओं के साथ किए गए भेदभाव को और डट जाओ राज्यों के चुनाबों में मोदी जी को जितवाने के लिए ....दिलवाओ मोदी जी को राज्यसभा में बहुमत फिर देखो मोदी जी क्या कमाल करते हैं

 

  

गुरुवार, 12 दिसंबर 2013

बालातकार किया दरिंदे तरूणतेजपाल ने फँस गई भाजपा...


हम सब जानते हैं कि भारत में तथाकथित सेकुलर दार्शनिक और राजनितीज्ञ धर्मनिर्पेक्षता का चोला अपने अनैतिक व भारत विरोधी कुकर्मों को छुपाने के लिए ओड़ते हैं तरूण तेजपाल ऐसे ही सेकुलर गिरोह का एक पिल्ला है जिसने भारत के इतिहास की सबसे अधिक विकाशोउन्मुख व देशभक्त सरकार को अस्थिर करने के लिए भारत के भीतरी व विदेशी शत्रुओं से पैसे लेकर काल्पनिक रक्षा सौदे दिखाकर  भारत की जनता को इस हद तक गुमराह करने में सफलता हासिल की कि लोगों ने इस सरकार के प्रमुख घटक भाजपा को अगले दो चुनाबों में लगातार हरा दिया। अब जब इस गद्दार की असलियत धीरे –धीरे जनता के सामने आ रही है तो पता चल रहा है कि इसे काँग्रेस सरकारों से करोड़ों नहीं वल्कि अरबों रूपय की सहायता मिली विज्ञापन व दान के नाम पर...अकेले कपिल सिवल ने ही एक ही किस्त मैं इस भारतविरोधी पत्रिका तहलका के लिए पाँच लाख रूपए दान किए ...आप सब जानते हैं कि ये वही कपिल सिबल है जिसने लुटेरों द्वारा भारत से लूटकर बिदेशों में जमा करवाए गए काले धन को भारतीयों की सम्मपति घोषित करने की मांग करने वाले स्वामीरामदेब जी व उनके लाखों समर्थकों पर आधी रात को ही हमला करवा दिया मतलब कपिल सिबल द्वारा भारत विरोधी पत्रिका तहलका को पाँच लाख का दान देना व भारत समर्थक  प्रखरदेशभक्त स्वामीरामदेव पर हमला करवाना इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि तहलका पत्रिका भारतीयों के हितों की रक्षा की नौटंकी करते हुए देश के दुशमनों के लिए काम कर रही थी क्योंकि इस पत्रिका द्वारा करवाए गए झूठे स्टिंग के कारण भारत की सेना के लिए साजोसमान खरीदने की प्रक्रिया लगभग 10 वर्ष देरी से चल रही है।

मित्रो तहलका पत्रिका ने भाजपा के पहले दलित अध्य़क्ष को पैसे लेते हुए ऐसे दिखाया मानो इससे से पहले भाजपा या काँग्रेस के किसी अध्यक्ष ने कभी किसी  से कोई पैसे न लिए हों ...आप और हम सब जानते हैं कि पार्टियों द्वारा चुनाब का खर्चा चलाने के लिए लगभग हर किसी से दान लिया जाता है और जो दान देते हैं उनके काम इन पार्टियों को करने पड़ते हैं और इस कुरीति के जन्मदाता भी काँग्रेस के नैहरू-गाँधी ही हैं कोई और नहीं...लेकिन तहलका ने काँग्रोस के इसारे पर इस दलित अध्यक्ष को बदनाम कर भाजपा द्वारा दलितों को आगे बढाने के लिए किए जा रहे इमानदार प्रयत्न को पीछे धकेल दिया....

आप सब जानते हैं कि काँग्रेस के पहले दलित अधयक्ष को इटालियन इसाई एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गाँधी ने धक्के मार कर अध्यक्ष के पद से हटाकर सब दलितों को अपमानित किया था । दलितों के इसी अपमान से क्रोधित होकर भाजपा ने एक दलित को अध्यक्ष बनाकर दलितों का अपमान करने वाली काँग्रेस के मुंह पर जोरदार तमाचा मारा था लेकिन तहलका के एक झूठ ने भाजपा द्वारा हिन्दूएकता के लिए किए जा रहे इमानदार प्रयास को जोरदार क्षति पहुंचाई।

मित्रो इससे पहले भी भाजपा ने ही हिन्दू एकता की खातिर दलित मायावती को भारत के सबसे बड़े राज्य उतर प्रदेश का मुख्यमन्त्री बनाकर हिन्दू एकता का इमानदार प्रयत्न किया है जो कि हिन्दूओं में नजदीकियां बढाने में कुछ हद तक सफल रहा।

2014 चुनाब के लिए भाजपा द्वारा हिन्दूएकता की इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए भारत के सबसे बड़े सम्बैधानिक पद के लिए दलित मोदी जी का नाम आगे करना एक ऐसा मील का पत्थर है जो हिन्दू समाज के साथ-साथ भारत की दशा-दिशा बदलने का दम रखता है इसी कारण भाजपा का ये कदम दलालों के भारतविरोधी सेकुलर गिरोह को रास नहीं आ रहा इसीलिए मोदी जी को बदनाम करने के लिए बैसे ही झूठ फैलाए जा रहे हैं जैसे झूठ तहलका के माध्यम से 2003-04 में बाजपेयी सरकार को बदनाम करने के लिए फैलाए गए थे।

गुजरात में पिता के कहने पर लड़की की रक्षा के लिए उसको सुरक्षा क्वच प्रदान करने का मामला सेकुलर गद्दारों द्वारा असभ्यता की सारी सीमायें लांघते हुए मोदी जी को लांछित करने के लिए लगातार गलत तरीके से उठाया जा रहा है । सच कहें तो हमें हौरानी हो रही है ये सोचकर कि इन सेकुलर गद्दारों ने आज तक मोदी के वारे में गुजरात दंगों के बहाने जितने भी झूठ फैलाए हैं उन सबका जनता पर उल्टा असर हुआ है और जनता ने और जोरदार तरीके से मोदी जी का साथ दिया है फिर भी ये मूर्ख इस तरह का घिनौना षडयन्त्र करने से बाज नहीं आ रहे। इन भारतविरोधियों को ये अच्छी तरह समझ आ जाना चाहिए कि मोदी जी के वारे में ये जितने झूठ फैलायेंगे मोदी जी उतने ही जोरदार तरीके से भारत की पावन धरती से इन गद्दारों का नमोनिशान मिटायेंगे......

 इस लड़ाई में भारतविरोधियों द्वारा किस तरह से षडयन्त्र रचे जा रहे हैं उसका सबसे बड़ा प्रमाण है तहलका के मालिक तरूणतेजपाल द्वारा अपनी वेटी की सहेली व तहलका की कर्मचारी से बालातकार का मामला...जैसे ही साहसी लड़की ने तरूणतेजपाल द्वारा कि गई दरिंदगी का विरोध किया लगभग सारे सेकुलर मिडिया ने मामले को दबाने की इस घिनौनी हरकत में तहलका का हरसम्भव साथ दिया और जब मामले को दबाने में असफलता हाथ लगी तो ऐसी कहानियां चलाने की कोशिश की जिससे लगने लगा माने वालातकार तहलका के मालिक ने नहीं व्लकि भाजपा ने किया हो....सबसे पहले विजय जौली को घेरा गया क्योंकि विजय जौली ने पीड़ित लड़की को न्याय से वंचित करने की कोशिश करने वाली सोमा चौधरी के घर प्रदर्शन करवाया...सब सेकुलर पार्टियों और चैनलों ने विजय जौली को महिला विरोधी करा दिया लेकिन तरूण तेजपाल को मानबता विरोधी कहने में इनकी मुँह पर ताला लगा रहा फिर सेकुलर सरकार ने मीनाक्षी लेखी का फोन हैक कर उसे महिलाविरोधी करार दिलवा दिया....इतने से काम नहीं चला तो और कई कहानियां चलाकर ऐसा महौन बनाया गया जैसे अपराध तरूण तेजपाल व सोमा चौधरी ने नहीं वल्कि पीड़िता को न्याय दिलवाने की मांग उठाने वाले लोगों ने किया .....जिस तरह इस मसले में अपराधी को पीड़ित और पीड़िता को अपराधी की तरह पेश करने की कोशिश की गई उसी तरह भ्रष्ट और बिभाजनकारी  सेकुलर गद्दारों को इमानदार व एकतावादी दिखाने के लिए सच में इमानदार व एकतावादी देशभक्त संगठनों को भ्रष्ट और वेइमान साबित करने की कोशिश हरदम इन सेकुलर गद्दारों द्वारा की जाती है और वेचारी भोली भाली जनता इन लुटेरे सेकुलर गद्दारों द्वारा फैलाए गए झूठों का सिकार होकर अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारकर इनका काम आसान करती रही है लेकिन मोदी उस जादू का नाम है जिसने इन गद्दारों के हर षडयन्त्र को असफल किया है और 2014 में भी करेंगे

शनिवार, 25 मई 2013

मित्रो अगर सरकार ने सैनिकों , सिपाहियों और आम जनता को इनसान माना होता तो आज नेताओं का इस तरह कत्ल न होता


मित्रो हमें बहुत दुख है कि बामपंथी आतंकवादियों के प्रखर विरोधी व देशभक्त नेता महेन्द्र कर्मा जी शहीद हो गए वो भी वामपंथी आतंकवादियों के हाथों ।जो वाकी लोग मारे गए उनमें से भी अधिकतर निर्दोष थे जिनका केन्द्र सरकार की आतंकवाद समर्थक नीतियों से कोई बास्ता नहीं था। लेकिन बामपंथी आतंकवादियों का ये कोई पहला हमला नहीं ...इससे पहले भी ये वामपंथी आतंकवादी दर्जनों हमले कर चुके हैं लेकिन इससे पहले इन आतंकवादियों के हाथों एक साथ इतने नेता कभी नहीं मारे गए...इससे पहले वामपंथी आतंकवादियों के हमलों में सबसे ज्यादा सुरक्षा बलों के जवान और आम लोग मारे गए
(अब तक हुए हमले:-17 जुलाई, 2007: करीब 800 हथियारबंद नक्सलियों ने दंतेवाड़ा में हमला किया। 25 मरे, 32 घायल हुए और 250 लोग लापता हो गए।-मार्च 2008 में सांसद बलीराम कश्यप के काफिले पर हमला ।-मार्च 2008 में वन मंत्री विक्रम उसेंडी के काफिले पर हमला।-जुलाई, 2009: राजनंदगांव में 28 सुरक्षाकर्मियों की सुरंग विस्फोट कराकर हत्या।-26 सितंबर, 2009: भाजपा सांसद बलिराम कश्यप की जगदलपुर में हत्या।-अप्रैल, 2010: माओवादियों ने 73 सीआरपीएफ जवानों की हत्या कर दी।-17 मई, 2010: नक्सली धमाके में 14 विशेष पुलिस अधिकारी समेत 35 लोग मारे गए।-अक्टूबर 2011 को विधायक डमरूधर पुजारी के निवास पर धावा ।-जुलाई, 2011 को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल के काफिले पर हमला ।-अक्टूबर, 2011: बस्तर में छह सुरक्षाकर्मियों की हत्या।-जुलाई, 2011: दंतेवाड़ा में 10 पुलिसकर्मियों की हत्या।-अगस्त, 2011: नक्सली हमले में 11 पुलिसकर्मी मारे गए।-जनवरी, 2012 में विधायक भीमा मंडावी के काफिले पर हमला ।-मई, 2012 में महिला बाल विकास मंत्री लता उसेंड़ी के बंगले में हमला ।-अप्रैल, 2012 में संसदीय सचिव महेश गागड़ा के काफिले पर हमला ।-नवंबर, 2012 में पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा के बुलेटफ्रूफ वाहन पर हमला।-12 मई, 2013: सुकमा में दूरदर्शन केंद्र पर हमला। चार जवान शहीद।) ......
अगर हम थोड़ा ध्यान से मुल्यांकन करें तो पायेंगे कि सुरक्षा बलों में भर्ती होने वाले अधिकतर जवान आम आम परिवारों से ही होते हैं ...यही बजह है कि युवराज और महारनी की गुलामी की मानसिकता बाले सेकुलर गद्दारों और मिडीया को ये हमले मामूली  हमले नजर आए ...वरना ऐसे कैसे हो सकता था कि मिडीया और सेकुलर गिरोह 73  जवानों को जिन्दा जलाने की घटना को सबसे बड़ा हमला कहने के बजाए ...12 नोताओं के मारे जाने को सबसे बड़ा हमला कहता...मित्रो अगर सरकार ने सैनिकों , सिपाहियों और आम जनता को इनसान माना होता तो आज नेताओं का इस तरह कत्ल न होता लेकिन बहुत दुख से कहना पड़ता है कि सेकुलर गिरोह ने देशभक्तों को हराने के लिए आतंकवादियों को ही अपना वोट बैंक मान लिया है इसीलिए तो इस गिरोह की सरकार 100000 निर्दोश देशभक्त जनता पर तो रात के अन्धेरे(4 जून रामलीला मैदान) में हमला करवा सकती है लेकिन देश के दुशमन आतंकवादियों के लिए इस सकार की हर तरह की ममता हिलोरे लेने लगती है...आपको याह होगा इसी सरकार के गृहमन्त्री ने भारतविरोधी वामपंथी और इसलामिक आतंकवादियों को अपना भाई बताया था...आपको याद होगा कि दिल्ली में आतंकवादियों को मारने के बाद शहीद होने वाले शहीद मोहनचन्द शर्मा को किस तरह अपमानित किया गया और किस तरह सलमान खुर्शीद के अनुशार मारे गए इसलामिक आतंकवादियों के लिए सोनिया गाँधी फूट-फूट कर रोई....इसी तरह लन्दन में हिथरो हबाई अड़्डे पर हमले के आरोप में पकड़े गए इसलामिक आतंकवादी की  मनमोहन सिंह को इतनी चिन्ता हुई कि उसे सारी रात नींद न आई...आम लोगों से गद्दारी यहीं रूक जाती तो गनीमत थी ...लेकिन देश से गद्दारी नहीं रूकी आपको याद होगा कि जब छतीसगढ़ सरकार ने वामपंथी आतंकवाद के मास्टर मांईड विनायक सेन को पकड़ा और उस पर देशद्रोह का मुकद्दमा चलाया तो सारे सेकुलर गिरोह ने एकजुट होकर उसको छुडवाने के लिए जोर लगा दिया और केन्द्र सरकार के सहयोग से उसे छुड़वाने में सफलता भी हासिल कर ली...मित्रो हद तो तब हो गई जब इस वामपंथी आतंकवादी विनायक सेन को सोनिया गांधी ने अपनी सलाहकार परिषद में सामिल कर लिया मतलब उस परिषद में जिसके ईसारे पर केन्द्र सरकार काम कर रही है अब जब सरकार ही आतंकवादियों के इसारे पर काम करेगी तो वो आतंकवादियो की तरह देशभक्त लोगों पर हमला वोलेगी और आतंकवादियों का बचाब करेगी ...वही हो रहा है आतंकवादियों के हमले में मारे गए कांग्रेसियों व उनके परिजनों की मुसीबतों के लिए आतंकवादियों को अपना मित्र बनाने वाली सोनिया गाँधी है न कि कोई और...आपको याद होगा कि जब गृहमन्त्री P Chidambaram वामपंथी आतंकवादियों से निपटने के लिए योजना लागू करने लगे तो किस तरह दिगविजय सिंह जैसे सोनिया गांधी के समर्थकों ने उनकी योजना की सार्वजनिक रूप से अलोचना कर उस पर दबाब बनाकर उसे रूकवा दिया ...इसी तरह राज्य सरकार द्वारा जब कभी भी आतंकवादियों के बिरूद्ध कार्यवाही की गई तो बजाए सरकार के साथ खड़े होने के सोनिया गांधी आतंकवादियों के साथ खड़ी हो गई...आप सबको पता होगा कि पिछले 9 वर्षों में जिस किसी ने भी आतंकवादियों को मारा या फिर आतंकवादियों के बिरूद्ध जुवान खोली वो सब आज जेल में हैं हैरानी की बात तो ये है कि आतंकवादियों को मारने वाले सैनिकों तक को न बख्सा गया...पुलिस की तो ताकत ही क्या है...और साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर जैसे लोगों जो आतंकवादियों के बिरूद्ध सिर्फ बोलते थे  तक को जेलों में बन्द कर दिया...आगे भी कोई आतंकवादियों भारतविरोधियों के बिरूद्ध न वोल सके इसका पक्का प्रबन्ध करने के लिए Communal Violence Act 2011 लाया गया...Encounter Specialists तक को न बख्सा गया...आज मोदी जी को छोड़कर सतापक्ष और विपक्ष में एक भी बड़ा नेता ऐसा नहीं जिसका खौफ आतंकवादियों को हो क्योंकि SAUDI ARBIA & US  से मिलने वाले DOLLAR  से मालामाल होकर सबकेसब नेता सेकुलर(भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी) हो लिए...अब तो लगता है चीन ने भी इनकी जेबें बरना शुरू कर दिया है ...मित्रो बुरा न मानना यही बास्तविकता है कि गाँधीबाद और धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में इन सब सेकुलर नेताओं ने भारत की समस्याओं को इस हद तक उलझा दिया है कि अब हालात गृहयुद्ध की तरफ तेजी से बढ़ते जा रहे हैं और अगर इन सेकुलर गद्दारों को न रोका गया तो सब भारतविरोधी आतंकवादी एकसाथ हमला वोलकर भारत में कुछ भी करने की ताकत हासिल कर चुके हैं इसका सबसे बड़ा प्रमाण है राहुल विन्शी का दोस्त अकबरूद्दीन ओबैसी जो बारबार खुलेआम कह रहा है कि हमारी पार्टी वेशक छोटी है लेकिन हमने पूरे भारत को बम धमाके तरके हिला दिया है और हम जब चाहें तब हिन्दूओं का कत्ल कर भारत को खत्म कर दें ..मजेदार बात ये कि इसके बाद भी ये आतंकवादी जेल में होने के बजाए अपनी विधानसभा और लोकसभा सदस्यता बरकरा रखते हुए खुलेआम घूम रहे हैं .....बैसे भी 16 लाख सेना वाली सरकार जिस आतंकवादी के साथ खड़ी हो जाए उस आतंकवादी को कौन हाथ डाल सकता है...मित्रो 16 लाख की सेना वाली ये सरकार जब आतंकवादियों के बिरद्ध खड़ी हो जाएगी तब आतंकवादियों और उनके समर्थकों का नमोनिसान तक वाकी न बचेगा...एकवार सच्चे देसभक्त को चुनकर तो देखो

गुरुवार, 27 अक्टूबर 2011

मोदी जी के प्रधानमन्त्री बनने पर इन गद्दारों का क्या होगा?-----संदर्भ Fai+ ISI+KAC+Secular Traitors

न तो ये उदारवादी हैं न धर्मनिर्पेक्षतावादी न ही मानवाधिकारवादी ये तो ISI द्वारा खरीदे गए वो भारतविरोधी ऐजेंट हैं। इन्हें आप चाहे जो भी कहो उदारवादी, धर्मनिर्पेक्षतावादी, मानवाधिकारवादी या भारतविरोधियों-हिन्दूविरोधियों-मानवताविरोधियों के लिए लाभदायक मूर्ख या फिर गद्दार लेकिन भारत व मानवता को बचाने के लिए, आतंकवादियों के मददगार इन ISI के भारतविरोधी ऐजेंटों का खात्मा बहुत जरूरी है।
बरसात के मौसम में भारत में एक तुफान खड़ा हो रहा था क्योंकि जुलाई 2011 में FBI ने अमेरिका में ISI द्वारा संचालित गिरोह Kashmir American Council (KAC) के माध्यम से पाकिस्तान सरकार और ISI के भारत विरोधी षडयन्त्रों को अन्जाम देने के लिए काम करने वाले KAC के सरगना गुलामनवी फई
clip_image002clip_image004को इसलिए गिरफ्तार किया था क्योंकि वो भारतीय धर्मनिर्पेक्षतावदियों की ही तरह अमेरिकी सिनेटरों को भी भारतविरोधी काम करवाने के लिए खरीद ऱहा था । KAC के सरगना के भारत के बहुत से भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी धर्मनिर्पेक्षतावादियों के साथ सबन्ध सामने आ रहे हैं। भारत के देशभक्त संगठनों और सुरक्षाबलों को बदनाम कर व भारतीयों का खून बहाकर भारत को अस्थिर करने का जो काम ISI ने सयद गुलाम नवी फई को सौंपा था उस काम को सयद गुलाम नवी फई भारत के इन गद्दार धर्मनिर्पेक्षतावादियों/ उधारवादियों/ दानबाधिकारवादियों के सहयोग से अन्जाम दे रहा था।
क्योंकि FBI से प्राप्त इस सूची में अधिकतर उन इस्लामिक आतंकवाद समर्थक गद्दारों के नाम हैं जो भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी सरकार व मिडीया(ELECTRONIC +PRINT) की आँखों के तारे हैं इसलिए इन दोंनों ने मिलकर इस तुफान को दबा दिया । लेकिन हम भी तब तक चुप नहीं बैठने वाले जब तक इन गद्दारों के हिन्दूविरोधी-देशविरोधी कुकर्मों को आम जनता तक नहीं पहुंचा देते।
FBI के गुप्तचर साराह वैब तिंडेन ने कोर्ट में दिए गए दस्तावेजों में बताया "मैं मानता हूं कि सयद गुलाम नवी फई ने पाकिस्तान सरकार से लगभग 5,00,000 से 7,00,000 अमेरिकी डालर प्रति वर्ष प्राप्त किए।“ हलफनामे के अनुशार दुष्प्रचार को वार-वार दोहराने और शब्दशः प्रसार के लिए फई द्वारा दिए गए व्यक्तव्यों में से 80% उसे पाकिस्तान के जासूसी संगठन ISI द्वारा दिए गए थे। “KAC के वाकी बचे 20% सन्देश सयद गुलाम नवी फई के वो विचार हैं जिन्हें पहले से ही ISI की सवीकृति मिली हुई थी। पर वो ISI द्वारा नहीं दिए गए । ”
FBI के अनुसार डा. सयद गुलाम नवी फई एक पेड ऐजेंट है जिसे ISI में अबदुल्ला के नाम से जाना जाता है । फई के डिप्टी ब्रिगेडियर जाबेद अजीज खान,ब्रिगेडियर सोहेल महमूद और लैप्टीनैंट कर्नल तौकीर बट्ट हैं। FBI के अनुसार ISI ब्रसल में अबदुल मजीद द्वारा संचालित त्रेमबू का कशमीर और लंदन में नाजीर एहमद द्वारा संचालित शालों का कशमीर नाम के दो और भारतविरोधी गिरोहों को भी भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी षडयन्त्रों को अन्जाम देने के लिए चलाती है।
1995 में सयद गुलाम नवी फई ने ISI के एक बरिष्ठ अधिकारी को लिखा कि आप जानते हैं कि अब हमें साथ में काम करते हुए 10 वर्ष से अधिक हो गए हैं।(अगर आकंड़ों के हिसाब से देखें तो फई 1985 ले लेकर गिरफ्तारी तक इस्लामिक आतंकवादी गतिविधियों को भारत में अन्जाम देने व भारतविरोधी महौल वनाने के षडयन्त्रों को अन्जाम दे रहा था। 1985-86 वही वर्ष है जब संसार में इस्लामिक आतंकवादियों ने अलकायदा की स्थापना की व ISI ने अपने इन धर्मनिर्पेक्षतावादी सहयोगियों की मदद से कश्मीर घाटी में अल्लहा टाईगरस जैसे दर्जनों इस्लामिक आतंकवादी गिरोहों की ।
ये वही वर्ष है जब कश्मीर घाटी में हिन्दूओं का कतलयाम शुरू हुआ परिणामस्वारूप 1985-86 से 2006 तक 60000 हिन्दूओं का कत्ल किया गया व लगभग 500000 हिन्दूओं को वेआबरू कर वेघर किया गया। कुलमिलाकर हिन्दूमिटाओ-हिन्दूभगाओ अभियान चलाकर कशमीरघाटी को हिन्दूविहीन कर दिया गया ।अधिक जानकारी के लिए यहां पढ़ें।) clip_image006
1995 में सयद गुलाम नवी फई ISI के एक बरिष्ठ अधिकारी को आगे लिखते हैं कि इतने लम्बे समय से मैंने आपके और आपसे पहले आए अन्य लोगों के साथ बहुत मिलजुल कर काम किया है। हमने बहुत अधिक समय, उर्जा,प्रतिबद्धता के साथ अपने भारतविरोधी उद्देश्यों को रणनिती और योजना बनाकर अन्जाम दिया है। पाकिस्तानी अधिकारी सयद गुलाम नवी फई का बजट बढ़ाकर उसे बताते गए कि उसे क्या करना है और उसे किस-किस को खरीद कर भारतविरोधी षडयन्त्रों को अन्जाम देने में लगाना है।
J&K पुलिस के महानिदेशक कुलदीप खोड़ा ने पत्रकारों को बताया “सयद गुलाम नवी फई का नाम पहले भी बहुत से भारतविरोधी षडयन्त्रों में आता रहा है जैसे कि अमेरिका ने पहले ही बता दिया था कि ISI के बजट को भारतविरोधी गतिविधियों खासकर जम्मू कशमीर में अन्जाम देने के लिए लगाया जा रहा है।”
ISI द्वारा संचालित गिरोह KAC के सरगना सयद गुलाम नवी फई को कांग्रेस पर वार्षिक कशमीर शान्ति समेलन की आड़ में भारतविरोध-हिन्दूविरोध में अग्रणी राजनीतिज्ञों ,परजीवियों, दानवाधिकारवादियों और अलगाववादियों के लिए सम्मेलन आयोजित करने के लिए बहुत अच्छी तरह जाना जाता है। बैसे तो ये भारत और पाकिस्तान की आजाद आबाज होने की आड़ लेता था लेकिन न्याय विभाग ने बताया कि समेलन में कौन से विन्दूओं को उठाना है ये ISI द्वारा ही बताया जाता था व कौन-कौन वक्ता वोलेंगे इसकी स्विकृति भी ISI द्वारा ही प्रदान की जाती थी।
अब भारतीयों के लिए महत्वपूर्ण बात ये है कि कौन-कौन गद्दार भारत में ISI द्वारा संचालित आतंकवादी गतिविधियों को अनजाम देने के लिए सयद गुलाम नवी फई के भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी षडयन्त्रों को अनजाम देने के लिए भारत के सुरक्षाबलों और देशभक्तों को बदनाम करन के लिए काम कर रहे थे। ये वही गद्दार हैं जिनकी मदद से इस्लामिक आतंकवादी व धर्मांतरण के ठेकेदार अपने भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी षडयन्त्रों को अन्जाम देकर सुरक्षाबलों व हिन्दूओं का कत्लयाम कर उन्हें ही अपराधी बताने में सफल रहे। ये ISI से प्राप्त पैसे का ही असर है कि भारत में मुसलमानों द्वारा हिन्दूओं पर हमला कर शुरू किए गए सांप्रदायिक दंगों के लिए भी इन ISI ऐजेंटों ने हिन्दूओं व सुरक्षाबलों को दोषी ठहराकर भारत की छवि दुनिया में खराब करने के षडयन्त्र रचे।(अधिक जानकारी के लिए यहां पढ़ें।)
आओ पहले उन गद्दार उदारवादियों और धर्मनिर्पेक्षतावादियों की ये सूची देखें जिन्हें या तो सयद गुलाम नवी फई के साथ अकसर देखा गया या फिर जिन्हें भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी सम्मेलनों मे बुलाया गया । आप इन परजीवियों पर सयद गुलाम नवी फई के आर्थिक प्रभाव का अनुमान इसी बात से लगा सकते हैं कि इस ISI के ऐजेंट के बुलावे पर जो गद्दार ISI द्वारा आयोजित इन सम्मेलनों में न जा सके वो इस भारतविरोधी षडयन्त्रकारी को इसके भारतविरोधी षडयन्त्रों को समर्थन देने के लिए कभी POK में मिले या फिर आतंकवादियों के किसी और ठिकाने पर।
क्योंकि ये धर्मनिर्पेक्षतावादी ISI से सवीकृति मिलने के बाद भारतविरोधी सम्मेलनों में गए या फिर इन्हें बुलाया गया या फिर ये सयद गुलाम नवी फई जैसे ISI के बड़े सरगना से मिले, सिर्फ इस आधार पर इन्हें आतंकवादी करार देना जायज नहीं ठहराया सकता है ।
इससे भी बड़ा प्रमाण इनके बिरूद्ध ये है कि इन लोगों ने भारत में लगातार सुरक्षावलविरोधी-भारतीयसंस्कृतिविरोधी–देशविरोधी–हिन्दूविरोधी–मानबताविरोधी एक ऐसा बाताबरण बनाने के लिए दिन-रात मेहनत की जो कि इस्लामिक आतंकवादियों के पूरी तरह अनुकूल हो ।
इन गद्दारों ने न केवल इस्लामिक आतंकवादियों के अनुकूल बाताबरण बनाया बल्कि भारतीयों का खून बहाने वाले इन मानबता के हत्यारों को हिन्दूओं व सुरक्षावलों द्वारा सताया हुआ,अनपढ़,गरीब और निर्दोष बताकर इनके द्वारा हिन्दूओं पर किए गए हर जुर्म के लिए हिन्दूओं,सुरक्षावलों,देशभक्त संगठनों को दोषी ठहराकर सारी दुनिया में भारत के विरूद्ध दुष्प्रचार किया जो कि गुलामनवी फई और पाकिस्तान की सरकार का इनको अमेरिकी डालर देने के बदले आदेश था। अपने इस मकसद को पूरा करने के लिए इन गद्दारों ने मिडीया(Electroni+Print) का जमकर उपयोग किया। सांप्रदायिक हिंसा बिल 2011 भारत के शत्रुओं के ईसारे पर इन विदेशी ऐजेंटों द्वारा रचे जा रहे भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी षडयन्त्रों का ताजा उधाहरण है। (अधिक जानकारी के लिए यहां पढ़ें।)
क्योंकि भारत के शत्रुओं का साथ देते रंगे हाथों पकड़े जाने पर ये गद्दार कह रहे हैं कि न गद्दारों को ये पता नहीं था कि गुलामनवी फई KAC के माध्यम से ISI के भारतविरोधी षडयन्त्रों को अन्जाम देने के लिए काम कर रहा था। इसलिए अब हम आपके सामने इन गद्दार धर्मनिर्पेक्षतावादियों की, ISI द्वारा संचालित KAC मे भाग लेने की फोटो के साथ एक-एक KAC का बैनर भी दिखा रहे हैं, जो कि इस बात को सपष्ट करता है ,कि ये गद्दार न केवल ये जानते थे कि KAC भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी है, बल्कि ये KAC के भारतविरोधी दुष्प्रचार का समर्थन करने के साथ-साथ इस्लामिक आतंकवाद को बढ़ावा देकर भारतीयों का खून वहाने व भारत का विभाजन करवाने के KAC के षडयन्त्र को आगे भी बढ़ा रहे थे ।जिसके बदले में इन गद्दारों को KAC द्वारा उसी तरह पैसा दिया जा रहा था जैसे अमेरिकी सिनेटरों को दिया गया।
1) Injustice Rajinder Sachar( भारतीय मुसलमानों पर सचर कमेटी रिपोर्ट लिखने वाला
अन्यायमूर्ति
राजेन्द्र सचर) clip_image008clip_image010
1. अन्यायमूर्ति राजेन्द्र सच्चर:- जिसने विभाजनकारी सच्चर कमेटी रिपोर्ट के माध्यम से मुसलमानों द्वारा किए गए हर अपराध/गलती के लिए हिन्दूओं को दोषी ठहराकर व हिन्दूओं के गरीब बच्चों के अधिकार छीनकर मुसलमानों को देने की बकालत कर ISI से प्राप्त माल का कर्ज चुकाया।आपको ये जानना ज्यादा जरूरी है कि ISI के इस ऐजेंट को देशविरोधी-हिन्दूविरोधी सरकार ने सच्चर कमेटी का प्रमुख बनाकर किस तरह पाकिस्तान की जरूरतों के अनुरूप रिपोर्ट तैयार करवाई। जब बाढ़ ही खेत को खाने लगे तो भला कोई क्या करे। ये रिपोर्ट भी गुलाम नवी फई ने जसटिस राजेन्दर सचर से उसी तरह लिखवाई जिस तरह वो अमेरिका के अधिकारियों को पैसे देकर पाकिस्तान के लिए समर्थन जुटा रहा था।
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2. कुलदीप नैयर :- पत्रकार के नकाब में छुपा वो ISI ऐजेंट है जिसने आज तक पाकिस्तान द्वारा पोषित आतंकवाद का खुलेतौर पर समर्थन किया है। ये वो भारविरोधी ISI ऐजेंट है जिसने भारत को clip_image014
clip_image016clip_image018बदनाम करने के लिए ISI के इसारे पर गुजरात की घटनाओं को तोड़मरोड़ कर पेश करने के लिए दर्जनों लेख लिख डाले लेकिन कश्मीर में मारे गएहजारों व वेघर किए गए लाखों हिन्दूओं के वारे में लिखने के लिए इसकी हमेशा वोलती बन्द रही सिर्फ इसलिए ताकि ISI का ऐजेंडा गुलाम नबी फई की योजनानुसार आगे बड़ सके।आखिर भारत के शत्रु का कर्ज जो चुकाना था।
ये इस्लामिक आतंकवादियों का वो मददगार है जिसने संसद भवन हमले के मुख्य आरोपी ISIऐजेंट अरबी के प्रोफैसर गिलानी(SAR Gillani) clip_image020को छुड़वाने के लिए पूरी ताकत से अभियान चलाकर सरकार में बैठे अपने सहयोगियों की सहायता से सफलता हासिल की।
30 जुलाई 2010 को गुलाम नवी फई द्वारा जारी समाचार विज्ञपति के अुनसार कुलदीप नैयर द्वारा किए गए भारतविरोधी दुष्प्रचार से ISI इतनी प्रभावित थी कि उसे पाकिस्तान के अमेरिका में राजदूत के साथ 29-30 जुलाई को हुए सम्मेलन के बाद भारतविरोधी प्रसताब लिखने के लिए चुना गया।
वहां पारित प्रस्ताब ये है “ वासिंगटन घोषणा पत्र के अनुसार सभी भाग लेने वालों ने कशमीर मे घोर मानबाधिकार के बढ़ते मामलों पर चिन्ता प्रकट करते हुए भारत सरकार से ये मांग की कि कशमीर से सेना हटा ली जाए व निष्पक्ष कमीशान वनाकर जांच करवाई जाए ”
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Dileep Padgaonkar+Radha Kumar (केन्द्र सरकार द्वारा कशमीर पर आतंकवादियों के पक्ष में महौल बनाने के लिए नियुक्त किए गए तीन लोगों में से दो।)clip_image022clip_image024
1. दलीप पांडगौंकर+राधा कुमार :- ये भारत सरकार के प्रिय ISI ऐजेंट हैं जिसे सरकार ने ISI के इसारे पर कश्मीर समस्या को और उलझाने के लिए ISI के प्रतिनिधि के तौर पर नियुक्त किया है इसीलिए तो ये अलगाववादियों के साथ मुलाकात करने के वाद अलगाववादियों द्वारा सुझाए गए अलगावादी सुझावों को ही आगे बढ़ाते दिखते हैं। ISI के इसारे पर इन ISI ऐजेंटों की भारतविरोधी कमेटी जम्मू के लोगों खासकर हिन्दूओं व कश्मीर से विस्थापित हिन्दूओं से बात करने के लिए आनाकानी करती है। ऐसी भारतविरोधी पाकिस्तान समर्थक कमेटी क्या रिपोर्ट देगी उसका अनुमान आप खुद ही लगा सकते हैं।
इस रिपोर्ट की जो बातें छन-छन कर बाहर आ रही हैं उसमें वही बातें हैं जो अकसर अलगाववादी करते हैं मतलब इन ISI ऐजेंटों ने अपने आकाओं का कर्ज चुका दिया।
जरा सोचो कि इस्लामिक आतंकवादियों की मददगार जिस केन्द्र सरकार ने सयद गुलाम नवी फई के कहने पर ISI ऐजेंटों को ही कश्मीर पर वनी कमेटी में नियुक्त कर दिया वो भला देश को अन्दर से कमजोर करने के लिए और क्या-क्या नहीं कर रहे होगी ? जैसे कि इस्लामिक आतंकवादियों के हमलों का दोष हिन्दूओं के सिर मढ़ना,सेना को सांप्रदाय के आधार विभाजित करने के षडयन्त्र करना, आतंकवादियों के विरूद्ध कार्यवाही करने वाले सुरक्षावलों के जवानों को जेलों में डालना , आतंकवादियों को मननीय न्यायालय द्वारा दी गई सजा को रोकना, हलफनामा देकर मर्यादापुर्षोत्म भगवान श्री राम जी के अस्तित्व को नकारना, देशभक्ति का काम करने वाले अन्ना जी ,स्वामी राम देव जी जैसे व्यक्तियों व RSS जैसे देशभक्त संगठनों के विरूद्ध षडयन्त्र करना व उनको सरकारी संस्थाओं का दुरूपयोग कर प्रताड़ित करना,बच्चों को प्रवेश लेने पर मिलने वाली छात्रवृति को सिर्फ गैर हिन्दूओं तक सीमित करना मतलब हिन्दूओं के बच्चों को वंचित करना आदि-आदि .....
4 Radha Kumar
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Gautam Navlakha (Editor, Economic & Political Weekly, New Delhi)clip_image030
5 गौतम नबलखा :- ये वो भारतविरोधी आतंकवादी है जो मुम्बई पर हुए हमले से पहले अक्कसर TV चैनलों पर आतंकवादियों का पक्ष लेकर सुरक्षावलों व देशभक्तों को दोषी ठहराता देखा जा सकता था। अभी हाल ही में श्रीनगर में सुरक्षावलों द्वारा रोका गया था। आजकल ये भूमिगत होकर clip_image032भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी षडयन्त्रों को अन्जाम दे रहा है। ये वो गद्दार है जिसे आपने अकसर टैलीविजन चैनलों पर सुरक्षा बलों, देशभक्त संगठनों ,नागरिकों को अपमानित करते हुए व इस्लामिक आतंकवादियों को पीड़ित,निर्दोष,अनपढ़ बताकर उनके पक्ष में महौल बनाते हुए देखा है। बैसे ISI ने सयद गुलाम नवी फई को ऐसा ही भारतविरोधी हिन्दूविरोधी महौल बनाने के लिए नियुक्त किया था और गौतम नबलखा उसी काम को आगे बड़ा रहा है। ये गौतम नबलखा अरूंधिति राय clip_image034का नजदीकी है जो कि clip_image036प्रशांत भूषण की नजदीकी है। प्रशांत भूषण अग्निवेश का साथी है।अग्निवेश clip_image038आतंकवादी जिलानी का मित्र है।clip_image040
ISI में गौतमनबलखा भी वही स्थान रखता है जो कुलदीप नैयर का है।
अब आप समझ सकते हैं कि प्रशांत भूषण ने पाकिस्तान समर्थक ब्यान क्यों दिया था और क्यों अग्निवेश व अंधति राय हमेशा सुरक्षाबलों और देशभक्तों के विरूद्ध जहर उगलते हैं।
Ms. Harinder Baweja Editor News, Tehelka( पहले दिल्ली में इंडिया टुडे (India Today) की सहायक सप्पादक रह चुकी है।
2. clip_image042तरूण जे तेजपाल द्वारा संचालित तहलका भारत में एक जाना माना नाम है। ये clip_image044
तब सुर्खियों में आया जब इसने ततकालीन NDA सरकार द्वारा काल्पनिक सौदों में भ्रष्टाचार का काल्पनिक मुद्दा उछालकर उसे बदनाम कर भारत में एक भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी आतंकवाद समर्थक वर्तमान सरकार बनवाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। आज भी तहलका लगातार देशभक्त हिन्दू संगठनों को बदनाम करने और मुसलिम आतंकवादियों का बचाब करने के दुष्प्रचार को लगातार आगे बढ़ाकर भारत के शत्रुओं की लगातार मदद कर रहा है। है।तहलका न केवल हिन्दू संगठनों,सुरक्षाबलों को बदनाम कर रहा है बल्कि अन्ना जी के भ्रष्टाचारविरोधी अन्दोलन को भी कमजोर करने की कोशिस कर रहा है। कुलमिलाकर तहलका देशहित में होने या किए जाने वाले किसी भी काम के विरूद्ध दुष्प्रचार कर ISI से प्राप्त हो रहे पैसे का कर्ज चुका रहा है।
Rita Manchanda clip_image046
5)रीता मानचन्दा :- : दक्षिण एशिया मे दानवाधिकार गिरोह की कार्यकारी अध्यक्ष (SAFHR) व भारत-पाकिस्तान शांति के लिए महिला संघर्ष के नाम पर ISI के भारतविरोधी षडयन्त्रों को आगे बढ़ाने वाली स्थानीय सहयोगी। इसके अतिरिक्त अनेक ऐसे संगठनों में काम कर रही हैं जिनका एक मात्र मकसद इस्लामिक आतंकवादियों द्वार किए जा रहे मानबताविरोधी कुकर्मों के लिए सुरक्षाबलों व हिन्दू संगठनों को दोषी ठहराकर इस्लामिक आतंकवादियों के पक्ष में महौल बनाना है।
6)Mr. Siddharth Varadarajan The Hindu
भारतीय संस्कृति,सुरक्षाबलों ,हिन्दूओं clip_image048
clip_image050व देशभक्त संगठनों के विरूद्ध जहर उगलना सिद्धार्थ बर्धराजन की पुरानी आदत है जो आज तक चली आ रही है क्योंकि इसे ISI व अन्य भारतविरोधियों से मिले पैसे का कर्ज जो चुकाना है।
7)Prof Kamal Mitra Chenoy, chairperson of JNU’s Centre for Comparative Politics clip_image052clip_image054
कमल चिनाय दानवाधिकार बादी ।
8)Prof. (Dr.) Angana Chatterji Scholar-activist,& Political Theoryclip_image056clip_image058
अंजना चैटर्जी :- Professor, Social & Cultural Anthropology, California Institute of Integral Studies and Co-Convener, International People’s Tribunal
9) Mr. Tapan Bose Filmmaker
10)Mr. T. Kumar Amnesty International
11)Pandit Jatinder Bakhshi President, J&K Forum for Peace & Reconciliationclip_image060clip_image062जितेन्द्र बख्शी :- president of J&K Forum for Peace and Reconciliation.
12) Praful Bidwai, noted columnist,
प्रफुल विदवई समाचार पत्रों में कालम लिखने वाला जाना माना नाम।
13)
वेद भूषण कशमीर टाइमस का संपादक।
14) प्रोफैसर जी आर मलिक :- कन्द्रीय विश्वविद्यालय कश्मीर में अंग्रेजी विभाग का प्रमुख।
15) -हरीश खरे :- हरीश खरे प्रधानमन्त्री के मिडीया सलाहकार हैं। वेशक हरीश खरे ने ISI के साथ किसी भी तरह के सबन्ध होने से मना किया है ।बैसे हम भी अभी तक हरीश खरे के विरूद्ध कोई प्रमाण नहीं ढूंढ पाए हैं लेकिन अगर FBI की जांच में हरीश खरे का नाम आया है तो इसे नकारा भी नहीं जा सकता । हरीश खरे के गुलाम नवी फई के साथ कैसे सबन्ध थे के वारे में अगर आपकतो कोई प्माण मिले तो हमें भी बताना।
हरीश खरे के निजी तौर पर सबन्ध हों या न हों इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्यों वो जिस प्रधानमन्त्री के मिडीया सलाहकार हैं वो ही भारतविरोधी ISI ऐजेंट की तरह काम कर रहा है। ISI  के आदेश पर ISI  ऐजेंट राजेन्द्र सच्चर को सचर कमेटी का अध्यक्ष बनाकर ISI के देशविरोधी-हिन्दूविरोधी षडयन्त्रों को वैधानिक दर्जा दिलवाने के लिए  रिपोर्ट तैयार करवाना, ISI  के आदेश पर दलीप पांडगौंकर+राधा कुमार जैसे ISI  ऐजेंटों को कशमीर पर ISI के षडयन्त्रों को बैधानिक दर्जा दिलवाने के लिए कमेटी का सदस्य बनाना, शर्म अलसेख में पाकिस्तान के साथ एक ऐसे घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करना जिसके अनुसार भारत को पाकिस्तान के बलूचीस्तान में आतंकवाद के लिए दोषी ठहराया गया ,भारत के संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का,मुसलिम बहुल जिलों के विकाश की बात कर मुसलमानों को अपनी जनसंख्य बढ़ाने को उकसाना,सुरक्षाबलों को आतंकवादी घटना के बाद इस्लामिक आतंकवादियों के विरूद्ध कार्यवाही न करने को कहना,पाठशाला में प्रवेश लेने पर मिलने वाली छात्रवृति को सिर्फ गैर हिन्दूओं तक सीमित करना यहां तक कि SC,ST,OBC के बच्चों को भी वन्चित करना, हिथरो हबाई अडडे पर बम धमाका करने वाले इस्लामिक आतंकवादी के पकड़े जाने पर प्रधानमन्त्री को नींद नहीं आना और रामलीला मैदान में निर्दोष देशभक्तों पर हमला करवाना व उसे जायज ठहराना, CBI का दुरूपयोग कर इसरत जहां व सोराबुद्दीन जैसे दुर्दांत आतंकवादियों को मार गिराने वाले जवानों को जेलों में ढलवाना , सांप्रदायिक हिंसा विल के माध्यम से मुसलमानों व मुसलिम आतंकवादियों के हर अपराध के लिए हिन्दूओं को दोषी ठहराने का षडयन्त्र रचना,सेना को सांप्रदायिक आधार पर बांटने का षडयन्त्र रचना जैसे कुकर्म कोई देशभक्त भारतीय तो कर नहीं सकता न ही करवा सकता है ऐसे भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी काम तो भारत का शत्रु यानी ISI ऐजेंट ही कर/करवा सकता है। (हम अच्छी तरह जानते हैं कि मनमोहन में इतना साहस नहीं कि वो देश से इतनी बढ़ी गद्दारी करे जिसके परिणामस्वारूप देश का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है लेकिन प्रधानमन्त्री बने रहने के लालच में एक विदेशी विषकन्या के इसारे पर भारत का सर्वनाश करने के षडयन्त्र रचने के अपराध से इस भारतविरोधी को मुक्त नहीं किया जा सकता।)
ऐसा नहीं कि सिर्फ ये 15 लोग ही ISI ऐजेंट हैं इनके अतिरिक्त महेश भट्ट,जावेद अख्तर,अग्निवेश,अरूधति राय,दिगविजय,अबु हाजमी,राहुल भट्ट,उमर अबदुल्ला जैसे जानेमाने सैंकड़ों भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी देशभर में इस्लामिक आतंकवादियों का साथ देकर भारत को कमजोर करने का काम कर ISI षडयन्त्रों का अन्जाम दे रहे हैं। जनका समय रहते अगर खात्मा नहीं किया गया तो वो दिन दूर नहीं जिस दिन कशमीर घाटी की ही तरह सारे भारत से हिन्दूओं के मार-काट कर उजाड़ दिया जाएगा।   
http://www.daily.pk/kashmir-conference-at-the-capitol-hill-on-july-31st-and-august-1st-2008-3671/
ये उन प्रसिद्ध गद्दार भारतीय उदारवादी धर्मनिर्पेक्षतावादी ISI ऐजेंटों की सूची है जो ISI के गिरोह KAC प्रमुख सयद गुलाम नवी फई के साथ मिलकर ISI के भारतविरोधी षडयन्त्रों को अन्जाम देने के लिए हर मामले में चौधरी बनते फिरते हैं चाहे मामला धर्मनिर्पेक्षता का हो या कशमीर का या भ्रष्टाचार का या फिर सांप्रदायिकता का या फिर सोनिया गांधी या नरेन्द्र मोदी का।
वासिंगटन टाईमस ने 19 जुलाई 2011 को ये समाचार दिया कि मंगलवार को FBI के गुप्तचरों ने गुलामनवी फई को गिफ्तार कर लिया। सयद गुलाम नवी फई पाकिस्तान की सरकार और सैनिक गुप्तचर संस्थाओं से लाखों डालर लेकर अमेरिका के चुने हुए अधिकारियों व भारत के धर्मनिर्पेक्षतावादियों को घूंस देकर इस बात के लिए तैयार करता था कि वो दक्षिण ऐशिया में भारत को कशमीर से बाहर धकेलने में मदद करें। सयद गुलाम नवी फई को इसलिए गिरफ्तार नहीं किया गया क्योंकि वो भारत का विभाजन करवाकर कशमीर को अलग करवाने के लिए काम कर रहा था क्योंकि अमेरिका के कानून के अनुसार भारतविरोध कोई अपराध नहीं है लेकिन उसे इसलिए गिरफ्तार किया गया क्योंकि वो ISI के पैसे का उपयोग कर अमेरिकी अधिकारियों को पाकिस्तान के पक्ष में काम करने के लिए खरीदने की कोशिश कर रहा था।
वेशक एक भूतपूर्व संपादक ने मातृभूमि से गद्दारी करने वाले इन घरकुदाल भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी धर्मनिर्पेक्षतावादियों/उधारवादियों/दानवाधिकारवादियों को, firstpost.com. पर लिखे गए अपने लेख में भारत के शत्रुओं के लिए लाभदायक मूर्ख कहा हो लेकिन इन गद्दारों द्वारा पिछले 25 वर्षों से चलाए जा रहे हिन्दूमिटाओ-हिन्दूभगाओ अभियान के माध्यम से वहाए गए निर्दोष भारतीयों खासकर सुरक्षाबलों और हिन्दूओं के खून के लिए सिर्फ मूर्ख या गद्दार कहकर छोड़ना कोई विकल्प नहीं हैं ।देश के इन दुश्मनों का जिन्दा रहना राष्ट्रहित में नहीं है ।क्योंकि फांसी देना या न देना सरकार के हाथ में है उस सरकार के हाथ में है जो खुद ISI agent की तरह काम कर रही है।
इसलिए देशभक्त नौजवानों को चाहिए कि इन गद्दारों के साथ वही करें जो शहीद भगत सिंह,राजगुरू और चन्द्र शेखर आजाद ने देशभक्तलाजपतराय जी का कत्ल करने वाले भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी सैंडर्स के साथ किया व शहीद उधम सिंह जी ने जलियांवाला बाग में नरसंहार को अंजाम देने वाले ,भारतविरोधियों-हिन्दूविरोधियों के साथ किया था।
परन्तु उससे पहले ये जरूरी है कि प्रशांत भूषण की तरह इन गद्दारों की बुद्धि को भी कम से कम पांच-सात वार सार्वजनिक कुटाई से ठिकाने लाने की जरूर कोशिश करनी चाहिए। लेकिन इससे भी ज्यादा जरूरी ये है कि हर देशभक्त भारतीय खासकर हिन्दू इन ISI ऐजटों द्वारा इस्लामिक आतंकवादियों के माध्यम से ISI के इसारे पर बहाए गए भारतीयों खासकर हिन्दूओं व सुरक्षावलों के खून की जानकारी को जन-जन तक खासकर गांव तक पहुंचाने की कोशिश करें वाकी काम हमारे विचार में जनता अपने आप कर देगी।