धर्मनिर्पेक्ष आतंकवादियों द्वारा रचे जा रहे हिन्दूविरोधी-देशविरोधी षडयन्त्रों को उजागर करने की कोशिश। हमारा मानना है कि भारत में कानून सांप्रदाय,जाति,भाषा,क्षेत्र,लिंग अधारित न बनाकर भारतीयों के लिए बनाए जाने चाहिए । अब वक्त आ गया है कि हिन्दूमिटाओ-हिन्दूभगाओ अभियान चलाने वाले भारतविरोधी धर्मनिर्पेक्ष आतंकवादियों को उनके समर्थकों सहित खत्म करने के लिए सब देशभक्तों द्वारा एकजुट होकर निर्णायक अभियान चलाया जाए।
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शनिवार, 25 दिसंबर 2010
GSAT-5P की असफलता का एंटोनिया CONECTION
आज दूरदर्शन के सरकारी चापलूस की भूमिका में चले जाने के कारण बहुत कम लोग दूरदर्शन के कार्यक्रम देखते हैं लेकिन आज भी आम व मजबूर लोगों के लिए दूरदर्शन , रेडियो के बाद सूचना का एकमात्र साधन है। हम भी दूर्दरशन के कार्यक्रम बहुत कम देखते हैं। लेकिन क्योंकि आज GSAT-5P के प्रक्षेपण का सीधा प्रसारण दूरदर्शन दिखा रहा था इसलिए हम दूरदर्शन के साथ चिपक कर बैठ गए।
GSAT-5P प्रक्षेपण कुछ मिनट के बाद ही विस्फोट के साथ असफल हो गया तो मन को बहुत दुख हुआ ।क्रोध भी आया कि जब रूस से लाया गया क्रायोजैनिक इंजन खराब था तो उसे वापस रूस को लौटाने के बजाए देश का 175 करोड़ रूपया बरबाद करना क्यों जरूरी समझा गया।क्रायोजैनिक तकनीक बहुत ही उच्चतकनीक है इस तकनीक पर आधारित इंजन में लीकेज का मतलब ही कार्यक्रम की असफलता की गारंटी है। लेकिन खैर जैसा अक्सर होता है अब बैसे ही इस कार्यक्रम में इस वेवकूफाना हरकत को छुपाने के प्रयास शुरू हो चुके होंगे।
इसके बाद जो हुआ वो और भी चौंकाने वाला था। जैसे ही निर्धारित समय पर GSAT-5P के असफल प्रक्षेपण के बाद सीधे प्रसारण का ये कार्यक्रम बन्द हुआ बैसे ही ईसाईयत का प्रचार-प्रसार शुरू हो गया । कुछ समय तक कुछ अंग्रेज लड़के–लड़कियां ईसाईयत के गुणगान के लिए वेसुरे गीत गाते रहे बाद में हमारे दूरदर्शन ने एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के देश में रोम से सीधा प्रसारण शुरू कर दिया ।
आप सब जानते हैं कि दूरदर्शन हम सब भारतीयों के खून-पसीने की कमाई के पैसे से चलता है।उस मेहनत से कमाए गए पैसे को एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के इसारे पर ईसाईयत के प्रचार प्रसार के लिए खर्च करना वेहद आपतिजनक है गुनाहकारों के विरूद्ध उचित समय पर कड़ी कार्यवाही होना अति आवस्यक है।
प्रक्षेपण की असफलता के एक-दम बाद ईसाईयत के प्रचार-प्रसार ने हमारे मन में कई संकायें पैदा कि । क्योंकि ये पहले से ही पता था कि क्रायोजैनिक इंजन खराब है तो भी उस खराब इंजन के साथ ही GSAT-5P के प्रक्षेपण निर्णय कहीं एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के प्रभाव में तो नहीं किया गया।
बहुत कम लोग जानते हैं कि रूस ईसाईयत के प्रचार-प्रसार के लिए अमेरिका से भी जयदा प्रतिबद्ध है व एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी को भारत में पलांट करने में रूस की ही खूफिया ऐजेंसी का हाथ था। पलांट करने का मकसद भी भारत में हिन्दूओं को अपदस्त कर ईसाईयों के हाथों में सता को पहुंचाना था ।आज सरकार की सर्वेसरवा एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी से लेकर रक्षामन्त्री एक के एन्टनी तक सब जगह ईसाई ही दिखाई दे रहे हैं।
यहां तक कि अगर इसाई के उपर भ्रष्टाचार के कितने भी बड़े आरोप क्यों न लगे हों उन्हें बड़ें पदों पर ऐंटोनिया की पकड़ मजबूत करने के लिए विठाया जा रहा है। आप पी जे थामस को ही ले लें जिसे दो पाक-साफ हिन्दूओं को दरकरार कर CVC प्रमुख बनाया गया वो भी विपक्ष की आपति के बाबजूद। बाद में इस भ्रष्ट की खबर माननीय न्यायालय ने लेकर ऐंटोनिया के हिन्दूविरोधी षडयन्त्र को जनता के सामने रखा।
एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी व उसका बेटा राहुल गंदगी किस हद तक हिन्दूओं के विरूद्ध हैं उसका सबसे बड़ा प्रमाण Wiki-leaks के उस रहसयोउधघाटन में मिला जिसमें बयाता गया कि किस तरह ये सपोला अमेरिका के राजदूत को हिन्दूओं के विरूद्ध भड़का रहा था।
अगर इस सपोले के अन्दर भारतीयों का खून होता तो ये ऐसी गद्दारी नहीं करता । हमें तो लगता है कि एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के ईसारे पर खराब क्रायोजैनिक इंजन का प्रयोग कर प्रक्षेपण की असफलता सुनिस्चित कर ईसाईयत का प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया गया।
क्योंकि आज इस मौके पर अधिकतर भारतीय दूरदर्शन देख रहे थे तो प्रक्षेपण का प्रसारण वीच में ही बन्द होने पर एकदम ईसाईयत का प्रसारण शुरू होने पर अधिकतम लोगों तक एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी का ईसाईयत का संदेश पहूंचा।
इस संदेश में पोप ने पहले तो ये इशु को भगवान का अबतार बताया व बाद में इशु को भगवान का वेटा कहकर संबोधित किया।मतलब खुद पोप ही इशु के वारे में भ्रमित हैं। उसके बाद पोप ने संसार के विभिन्न देशों में रह रहे ईसाईयों को वहां की सरकारों व समाजों के विरूद्ध लड़ाई छेड़ने के लिए उचित समय का इन्तजार करने के लिए कहा। मतलब पोप का ये भाषण न केवल शांति और भाई चारे के विरूद्ध था वल्कि साथ ही दुनिया में हिंसा बढ़ाने बाला भी था। ऐसे हिसंक भाषण का प्रचार-प्रसार शांतिप्रिए भारतीयों के पैसे से करना कहां तक उचित है?
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शुक्रवार, 3 दिसंबर 2010
सोनिया गांधी पी जे थोमस पर इतनी मेहरवान कर्यों?
एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी बौद्धिक गुलामों द्वारा बनाई गई एक ऐसी पहेली है जिसे हम अच्छी तरह सुलझा चुके हैं कोई कसर वाकी न रह जाए इसलिए कोई भी प्रमाण मिलने पर हम आपके सामने रखते हैं। अभी मामला है CVC की नियुक्ति से सबन्धित पहेली पर । पी जे थोमस के साथ प्रतिसपर्धा में ग्रामीण विकास सचिब राचन्द्रन व एक अन्य हिन्दू अधिकारी थे इन दोनों अधिकारियों की खासियत यह थी कि इन दोनों पर ही किसी भी घाटाले में सामिल होने का कोई आरोप नहीं था लेकिन दोनों की सबसे बड़ी कमजोरी थी इन दोनों का हिन्दू होना।चर्च ने एंटोनिया को भारत में ईसाई हितों वो भी विदेशी इसाईयों के हितों को आगे बढ़ाने के लिए ही भारत में पलांट किया है लेकिन नटवर सिंह जी ने तेल के बदले अनाज घोटाले में जुवान क्या खोली एंटोनिया का भारत के हिन्दूओं पर से विस्वास ही उठ गया है।
आपको याद होगा कि किस तरह तेल के बदले अनाज घाटाले के सामने आने पर नटबर सिंह जी ने ये बताकर सबको हिलाकर रखा दिया था कि इस घोटाले की शूत्रधार तो एंटोनिया है क्यों एंटोनिया ने ही इराक के राष्ट्रपति सदाम हुसैन को पत्र भेजा था जो कि इस घोटाले की शुरूआत थी। इस दिन से एंटोनिया ने मानो कसम उठा ली हो हिन्दूओं को चुन-चुन कर मालदार पदों से हटाकर उन पदों पर अपने सांप्रदाय से सबन्धित इसाईयों को विठाने की।
पी जे थोमस की सबसे बढ़ी खासियत थी उसका ईसाई होना । अन्यथा मनमोहन सिंह जैसा वयक्ति और चाहे कुछ भी करता लेकिन भ्रष्टाचारियों पर नजर रखने वाला भ्रष्टाचारी न चुनता।
आप सभी जानते हैं कि पी जे थोमस की सबसे बढ़ी पहचान है उसके द्वारा अन्जाम दिया गया केरल में पामोलिव तेल आयात घोटाला जिसमें अभी तक पी जे थोमस को आरोपमुक्त नहीं किया गया है । इसके अतिरिक्त 2G spectrum घोटाले में भी पी जे थोमस का नाम आ रहा है। इसी को लेकर माननीय सर्वोचन्यायावल ने भी कड़ी टिप्पणियां की हैं।
ऐसा नहीं कि इस ओर सरकार का ध्यान नहीं गया क्योंकि विपक्ष ने इसी आधार पर पी जे थोमस का विरोध किया था।लेकिन एंटोनिया की गुलाम मनमोहन सरकार क्या करती क्योंकि इस सरकार की आका चोरों व गद्दारों की सरदार एंटोनिया ही एक भ्रष्ट ईसाई को ही इस पद पर देखना चाहती थी।
आपको याद होगा कि किस तरह एंटोनिया ने हिन्दू प्रणव मुखरजी को हटाकर ईसाई एन्टनी को रक्षा मन्त्री बनाया ।तब से लेकर आज तक UPA सरकार लगातार सेना के साथ युद्ध रत है ।
आप सब जानते हैं किस तरह ये UPA सरकार जम्मू कशमीर में आतंकवादियों का साथ देकर सैनिकों का मनोबल तोड़ने की कोशिस कर रही है।
हिन्दू को हटाकर एक ईसाई को रक्षा मन्त्री बनाने के पीछे एंटोनिया का एकमात्र मकसद है रक्षा सौदों में मिलने वाले अरबों-खरबों डालर के कमीशन को डकार जाना ।
एंटोनिया को लगता है कि क्योंकि एंटनी अपने सांम्प्रदाए का है इसलिए एंटोनिया के घोटालों के वारे में वो किसी को नहीं बतायेंगे लेकिन एंटोनिया को याद रखना चाहिए कि एंटनी के अन्दर भी भगवान राम का ही खून बह रहा है कभी न कभी तो अपने रंग में आएगा ही।
आज अगर आप कांग्रेस व UPA सरकार के प्रमुख पदों पर नजर दौड़ायें तो आपको हर जगह गैर हिन्दूओं का बरचसव साफ नजर आएगा वो भी देश में 80% से अधिक हिन्दू जनसंखया होने के बाबजूद।
एंटोनिया आज पूरे जोर से हिन्दू हटाओ अभियान को आगे बड़ा रही है जो आगे चलकर एंटोनिया के खानदान के अन्त का प्रमुख कारण बनेगा।
सोमवार, 29 नवंबर 2010
आन्ध्र प्रदेश में उठा तुफान कुछ कहता है।
आप सब जानते हैं कि हम YSR रेड्डी के कतई प्रशंसक नहीं। कारण भी साफ है एक तो उन्होंने हिन्दू मत त्याग कर इसाई मत स्वीकार कर अपनी मौकापरसत सोच का प्रमाण दिया । दूसरे ईसाई हो जाने के बाद उन्होंने कई हिन्दूविरोधी-देशविरोधी कदम उठाए।
जिसके परिमामस्वारूप वो हिन्दूविरोधी-देशविरोधी विदेशी ताकतों को एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी से अधिक उपयोगी नजर आने लगे । क्योंकि चर्च ने ऐसे ही हिन्दूविरोधी-देशविरोधी कामों को करवाने के लिए एंटोनिया को चुना था लेकिन अब चर्च को लगने लगा कि एक विदेशी इसाई से भारतीय इसाई चर्च के भारतविरोधी कामों को अन्जाम देने के लिए जयादा उपयोगी है। लेकिन एंटोनिया जो कभी चर्च की कठपुतली मात्र थी अब एक दमदार खिलाड़ी बन चुकी है। YSR रेड्डी के तातकवर होने का खमियाजा उन्हें अपने प्राण देकर उठाना पड़ा। कुल मिलाकर जब आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाई. एस. राजशेखर रेड्डी के पुत्र और कांग्रेसी सांसद जगनमोहन रेड्डी ये आरोप लगाते हैं कि उनके पिता का कत्ल करवाया गया तो उनकी बात में न केबल दम नजरआता है वल्कि उनकी बात ही सच्चाई प्रतीत होती है। वाई. एस. राजशेखर रेड्डी जी का कत्ल इससे पहले कत्ल किए गए 6-6 भारतीयों के कत्ल के समान प्रतीत होता है।(अधिक जानकारी के लिए यहां पढ़ें )
हम वंसबाद के कट्टर विरोधी हैं । लेकिन जब कांग्रेस में वंशवाद के अधार पर ही उतराधिकारी तय किए जाते हैं तो फिर जगनमोहन रेड्डी के साथ ये वेइनसाफी क्यों? अगर वाई. एस. राजशेखर रेड्डी जी की मौत एक दुर्घटना होती तो कोई भी इस तरह जगनमोहन रेड्डी के रास्ते में रोड़े नहीं अटकाता जिस तरह अटकाए जा रहे हैं। आज आप हम सभी जानते हैं कि कांग्रेस में एंटोनिया के सिवाए किसी और में दम नहीं कि वो परिवारिक उतराधिकारियों के रास्ते में रोड़े अटका सके क्यों ऐसे किसी भी कदम को जोकर राहुल का विरोध माना जाएगा ।
अब प्रश्न यह उठता है कि एंटोनिया क्यों जगनमोहन रेड्डी के रास्ते में रोड़े अटका रहीं है?
चलो कारण कोई भी हो पर एक बात पक्की है कि जगमोहन में दम है विरोध करने व अपने हक की लड़ाई लड़ने का। हमें ये जानकर बहुत खुशी हुई कि जगनमोहन रेड्डी ने एंटोनिया व राहुल की वो सच्चाई जनता के सामने रखी जिन्हें वाकी डरपोक हिन्दूविरोधी-देशविरोधी चैनल रखने के वारे में सोच तक नहीं सकते। इस नाते जगनमोहन रेड्डी बधाई व शुभकामनाओं के पात्र हैं। वेशक उनके पिता ने कुछ हिन्दूविरोधी-देशविरोधी कदम उठाए थे लेकिन कुलमिलाकर उनके पिता एक अच्छे इनसान थे।भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे । हम भगवान से यही प्रार्थना करेंगे कि अगर जगनमोहन रेड्डी की लड़ाई देशहित की लड़ाई है तो उन्हें जरूर सफलता मिले वरना जो भगवान करेंगे सही ही करेंगे।
रविवार, 28 नवंबर 2010
एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी एक परिचय
सोनिया गांधी का वास्तविक नाम एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो है। एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो का जन्म 9 दिसम्बर 1946 को इटली के कौंटरा मैनी नामक स्थान पर हुआ। कौंटरा मैनी इटली के बैनीटो क्षेत्र के बीसंजा से 30 कि.मी. की दूरी पर लुसियाना शहर के पास है। एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो के पिता का नाम मिस्टर सटीफैनो था । सटीफैनो फासीवादी सैनिक थे। इनकी माता का नाम पाओला माईनो था। एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो की परवरिश एक कैथोलिक परिवार में टुरिन नाम के कस्वे के पास औरवेशानो में हुई। एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो की पढ़ाई-लिखाई कैथोलिक स्कूल में हुई।
आगे हम खुद न लिखकर मेल से प्राप्त जानकारी आप तक पहुंचा रहे हैं आशा है कि ये जानकारी आपको भी इस विदेशी के कुछ रहसयों से अबगत करवाएगी।
सोनिया गाँधी भारत की प्रधानमंत्री बनने के योग्य हैं या नहीं, इस प्रश्न का "धर्मनिरपेक्षता", या "हिन्दू राष्ट्रवाद" या "भारत की बहुलवादी संस्कृति" से कोई लेना-देना नहीं है। इसका पूरी तरह से नाता इस बात से है कि उनका जन्म इटली में हुआ, लेकिन यही एक बात नहीं है, सबसे पहली बात तो यह कि देश के सबसे महत्वपूर्ण पद पर आसीन कराने के लिये कैसे उन पर भरोसा किया जाये। सन १९९८ में एक रैली में उन्होंने कहा था कि "अपनी आखिरी साँस तक मैं भारतीय हूँ", बहुत ही उच्च विचार है, लेकिन तथ्यों के आधार पर यह बेहद खोखला ठहरता है। अब चूँकि वे देश के एक खास परिवार से हैं और प्रधानमंत्री पद के लिये बेहद आतुर हैं (जी हाँ) तब वे एक सामाजिक व्यक्तित्व बन जाती हैं और उनके बारे में जानने का हक सभी को है (१४ मई २००४ तक वे प्रधानमंत्री बनने के लिये जी-तोड़ कोशिश करती रहीं, यहाँ तक कि एक बार तो पूर्ण समर्थन ना होने के बावजूद वे दावा पेश करने चल पडी़ थीं, लेकिन १४ मई २००४ को राष्ट्रपति कलाम साहब द्वारा कुछ "असुविधाजनक" प्रश्न पूछ लिये जाने के बाद यकायक १७ मई आते-आते उनमे वैराग्य भावना जागृत हो गई और वे खामख्वाह "त्याग" और "बलिदान" (?) की प्रतिमूर्ति बना दी गईं - कलाम साहब को दूसरा कार्यकाल न मिलने के पीछे यह एक बडी़ वजह है, ठीक वैसे ही जैसे सोनिया ने प्रणब मुखर्जी को राष्ट्रपति इसलिये नहीं बनवाया, क्योंकि इंदिरा गाँधी की मृत्यु के बाद राजीव के प्रधानमंत्री बनने का उन्होंने विरोध किया था... और अब एक तरफ़ कठपुतली प्रधानमंत्री और जी-हुजूर राष्ट्रपति दूसरी तरफ़ होने के बाद अगले चुनावों के पश्चात सोनिया को प्रधानमंत्री बनने से कौन रोक सकता है?)बहरहाल... सोनिया गाँधी उर्फ़ माइनो भले ही आखिरी साँस तक भारतीय होने का दावा करती रहें, भारत की भोली-भाली (?) जनता को इन्दिरा स्टाइल में,सिर पर पल्ला ओढ़ कर "नामास्खार" आदि दो चार हिन्दी शब्द बोल लें, लेकिन यह सच्चाई है कि सन १९८४ तक उन्होंने इटली की नागरिकता और पासपोर्ट नहीं छोडा़ था (शायद कभी जरूरत पड़ जाये) । राजीव और सोनिया का विवाह हुआ था सन १९६८ में,भारत के नागरिकता कानूनों के मुताबिक (जो कानून भाजपा या कम्युनिस्टों ने नहीं बल्कि कांग्रेसियों ने ही सन १९५० में बनाये) सोनिया को पाँच वर्ष के भीतर भारत की नागरिकता ग्रहण कर लेना चाहिये था अर्थात सन १९७४ तक, लेकिन यह काम उन्होंने किया दस साल बाद...यह कोई नजरअंदाज कर दिये जाने वाली बात नहीं है। इन पन्द्रह वर्षों में दो मौके ऐसे आये जब सोनिया अपने आप को भारतीय(!)साबित कर सकती थीं। पहला मौका आया था सन १९७१ में जब पाकिस्तान से युद्ध हुआ (बांग्लादेश को तभी मुक्त करवाया गया था), उस वक्त आपातकालीन आदेशों के तहत इंडियन एयरलाइंस के सभी पायलटों की छुट्टियाँ रद्द कर दी गईं थीं, ताकि आवश्यकता पड़ने पर सेना को किसी भी तरह की रसद आदि पहुँचाई जा सके । सिर्फ़ एक पायलट को इससे छूट दी गई थी, जी हाँ राजीव गाँधी, जो उस वक्त भी एक पूर्णकालिक पायलट थे । जब सारे भारतीय पायलट अपनी मातृभूमि की सेवा में लगे थे तब सोनिया अपने पति और दोनों बच्चों के साथ इटली की सुरम्य वादियों में थीं, वे वहाँ से तभी लौटीं, जब जनरल नियाजी ने समर्पण के कागजों पर दस्तखत कर दिये। दूसरा मौका आया सन १९७७ में जब यह खबर आई कि इंदिरा गाँधी चुनाव हार गईं हैं और शायद जनता पार्टी सरकार उनको गिरफ़्तार करे और उन्हें परेशान करे। "माईनो" मैडम ने तत्काल अपना सामान बाँधा और अपने दोनों बच्चों सहित दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित इटालियन दूतावास में जा छिपीं। इंदिरा गाँधी, संजय गाँधी और एक और बहू मेनका के संयुक्त प्रयासों और मान-मनौव्वल के बाद वे घर वापस लौटीं। १९८४ में भी भारतीय नागरिकता ग्रहण करना उनकी मजबूरी इसलिये थी कि राजीव गाँधी के लिये यह बडी़ शर्म और असुविधा की स्थिति होती कि एक भारतीय प्रधानमंत्री की पत्नी इटली की नागरिक है ? भारत की नागरिकता लेने की दिनांक भारतीय जनता से बडी़ ही सफ़ाई से छिपाई गई। भारत का कानून अमेरिका, जर्मनी, फ़िनलैंड, थाईलैंड या सिंगापुर आदि देशों जैसा नहीं है जिसमें वहाँ पैदा हुआ व्यक्ति ही उच्च पदों पर बैठ सकता है। भारत के संविधान में यह प्रावधान इसलिये नहीं है कि इसे बनाने वाले "धर्मनिरपेक्ष नेताओं" ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि आजादी के साठ वर्ष के भीतर ही कोई विदेशी मूल का व्यक्ति प्रधानमंत्री पद का दावेदार बन जायेगा। लेकिन कलाम साहब ने आसानी से धोखा नहीं खाया और उनसे सवाल कर लिये (प्रतिभा ताई कितने सवाल कर पाती हैं यह देखना बाकी है)। संविधान के मुताबिक सोनिया प्रधानमंत्री पद की दावेदार बन सकती हैं, जैसे कि मैं या कोई और। लेकिन भारत के नागरिकता कानून के मुताबिक व्यक्ति तीन तरीकों से भारत का नागरिक हो सकता है, पहला जन्म से, दूसरा रजिस्ट्रेशन से, और तीसरा प्राकृतिक कारणों (भारतीय से विवाह के बाद पाँच वर्ष तक लगातार भारत में रहने पर) । इस प्रकार मैं और सोनिया गाँधी,दोनों भारतीय नागरिक हैं, लेकिन मैं जन्म से भारत का नागरिक हूँ और मुझसे यह कोई नहीं छीन सकता, जबकि सोनिया के मामले में उनका रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है। वे भले ही लाख दावा करें कि वे भारतीय बहू हैं, लेकिन उनका नागरिकता रजिस्ट्रेशन भारत के नागरिकता कानून की धारा १० के तहत तीन उपधाराओं के कारण रद्द किया जा सकता है (अ) उन्होंने नागरिकता का रजिस्ट्रेशन धोखाधडी़ या कोई तथ्य छुपाकर हासिल किया हो, (ब) वह नागरिक भारत के संविधान के प्रति बेईमान हो, या (स) रजिस्टर्ड नागरिक युद्धकाल के दौरान दुश्मन देश के साथ किसी भी प्रकार के सम्पर्क में रहा हो । (इन मुद्दों पर डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी काफ़ी काम कर चुके हैं और अपनी पुस्तक में उन्होंने इसका उल्लेख भी किया है, जो आप पायेंगे इन अनुवादों के "तीसरे भाग" में)। राष्ट्रपति कलाम साहब के दिमाग में एक और बात निश्चित ही चल रही होगी, वह यह कि इटली के कानूनों के मुताबिक वहाँ का कोई भी नागरिक दोहरी नागरिकता रख सकता है, भारत के कानून में ऐसा नहीं है, और अब तक यह बात सार्वजनिक नहीं हुई है कि सोनिया ने अपना इटली वाला पासपोर्ट और नागरिकता कब छोडी़ ? ऐसे में वह भारत की प्रधानमंत्री बनने के साथ-साथ इटली की भी प्रधानमंत्री बनने की दावेदार हो सकती हैं। अन्त में एक और मुद्दा, अमेरिका के संविधान के अनुसार सर्वोच्च पद पर आसीन होने वाले व्यक्ति को अंग्रेजी आना चाहिये, अमेरिका के प्रति वफ़ादार हो तथा अमेरिकी संविधान और शासन व्यवस्था का जानकार हो। भारत का संविधान भी लगभग मिलता-जुलता ही है, लेकिन सोनिया किसी भी भारतीय भाषा में निपुण नहीं हैं (अंग्रेजी में भी), उनकी भारत के प्रति वफ़ादारी भी मात्र बाईस-तेईस साल पुरानी ही है, और उन्हें भारतीय संविधान और इतिहास की कितनी जानकारी है यह तो सभी जानते हैं। जब कोई नया प्रधानमंत्री बनता है तो भारत सरकार का पत्र सूचना ब्यूरो (पीआईबी) उनका बायो-डाटा और अन्य जानकारियाँ एक पैम्फ़लेट में जारी करता है। आज तक उस पैम्फ़लेट को किसी ने भी ध्यान से नहीं पढा़, क्योंकि जो भी प्रधानमंत्री बना उसके बारे में जनता, प्रेस और यहाँ तक कि छुटभैये नेता तक नख-शिख जानते हैं। यदि (भगवान न करे) सोनिया प्रधानमंत्री पद पर आसीन हुईं तो पीआईबी के उस विस्तृत पैम्फ़लेट को पढ़ना बेहद दिलचस्प होगा। आखिर भारतीयों को यह जानना ही होगा कि सोनिया का जन्म दरअसल कहाँ हुआ? उनके माता-पिता का नाम क्या है और उनका इतिहास क्या है? वे किस स्कूल में पढीं? किस भाषा में वे अपने को सहज पाती हैं? उनका मनपसन्द खाना कौन सा है? हिन्दी फ़िल्मों का कौन सा गायक उन्हें अच्छा लगता है? किस भारतीय कवि की कवितायें उन्हें लुभाती हैं? क्या भारत के प्रधानमंत्री के बारे में इतना भी नहीं जानना चाहिये!
(प्रस्तुत लेख सुश्री कंचन गुप्ता द्वारा दिनांक २३ अप्रैल १९९९ को रेडिफ़.कॉम पर लिखा गया है, बेहद मामूली फ़ेरबदल और कुछ भाषाई जरूरतों के मुताबिक इसे संकलित, संपादित और अनुवादित कर हमारे मित्र
महाजाल पर सुरेश चिपलूनकर (Suresh Chiplunkar)
जी ने इसे लोगों को भेजा। मित्रों जनजागरण का यह महाअभियान जारी रहे, अंग्रेजी में लिखा हुआ अधिकतर आम लोगों ने नहीं पढा़ होगा इसलिये सभी का यह कर्तव्य बनता है कि महाजाल पर स्थित यह सामग्री हिन्दी पाठकों को भी सुलभ हो, इसलिये इस लेख की लिंक को अपने इष्टमित्रों तक अवश्य पहुँचायें, क्योंकि हो सकता है कि कल को हम एक विदेशी द्वारा शासित होने को अभिशप्त हो जायें !
शुक्रवार, 12 नवंबर 2010
क्या आप जानते हैं कि बौद्धिक गुलाम क्यों धरना प्रदर्शन कर रहे हैं?
10-11-10 को आपने देखा कि किस तरह देशभक्तों की संस्था RSS ने शांति से अपनी बात लोगों तक पहूंचाने का प्रयत्न किया। विना किसी हिंसा,अगजनी या हमले के । आज आप देख रहे हैं कि किस तरह एक फासीवादी हिन्दूविरोधी-देशविरोधी इटालियन अंग्रेज एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम कांग्रेस हिंसा ,अगजनी व धमकियां देकर उस सच्चाई को छुपाना चाहते है जिस सच्चाई का हर देशभक्त भारतीय तक पहंचना बहुत जरूरी है। ये वो सच्चाई है जो भारत को इस भारतविरोधी से आजादी दिलवाने में सहायक सिद्ध होगी ।
इस सच्चाई के वारे में आज हम खुद लिखने बजाए आपको मेल से प्राप्त जानकारी दे रहे हैं इसे आप संयम व धैर्य से पढकर खुद सोचें कि क्या आप इस अंग्रेज को जानते भी हैं या नहीं?
"आप सोनिया गाँधी को कितना जानते हैं" की पहली कडी़, अंग्रेजी में इसके
मूल लेखक हैं एस.गुरुमूर्ति और यह लेख दिनांक १७ अप्रैल २००४ को "द न्यू
इंडियन एक्सप्रेस" में - अनमास्किंग सोनिया गाँधी- शीर्षक से प्रकाशित
हुआ था ।
। भारत की खुफ़िया एजेंसी "रॉ", जिसका गठन सन १९६८ में हुआ, ने विभिन्न
देशों की गुप्तचर एजेंसियों जैसे अमेरिका की सीआईए, रूस की केजीबी,
इसराईल की मोस्साद और फ़्रांस तथा जर्मनी में अपने पेशेगत संपर्क बढाये
और एक नेटवर्क खडा़ किया । इन खुफ़िया एजेंसियों के अपने-अपने सूत्र थे
और वे आतंकवाद, घुसपैठ और चीन के खतरे के बारे में सूचनायें आदान-प्रदान
करने में सक्षम थीं । लेकिन "रॉ" ने इटली की खुफ़िया एजेंसियों से इस
प्रकार का कोई सहयोग या गठजोड़ नहीं किया था, क्योंकि "रॉ" के वरिष्ठ
जासूसों का मानना था कि इटालियन खुफ़िया एजेंसियाँ भरोसे के काबिल नहीं
हैं और उनकी सूचनायें देने की क्षमता पर भी उन्हें संदेह था ।
सक्रिय राजनीति में राजीव गाँधी का प्रवेश हुआ १९८० में संजय की मौत के
बाद । "रॉ" की नियमित "ब्रीफ़िंग" में राजीव गाँधी भी भाग लेने लगे थे
("ब्रीफ़िंग" कहते हैं उस संक्षिप्त बैठक को जिसमें रॉ या सीबीआई या
पुलिस या कोई और सरकारी संस्था प्रधानमन्त्री या गृहमंत्री को अपनी
रिपोर्ट देती है), जबकि राजीव गाँधी सरकार में किसी पद पर नहीं थे, तब वे
सिर्फ़ काँग्रेस महासचिव थे । राजीव गाँधी चाहते थे कि अरुण नेहरू और
अरुण सिंह भी रॉ की इन बैठकों में शामिल हों । रॉ के कुछ वरिष्ठ
अधिकारियों ने दबी जुबान में इस बात का विरोध किया था चूँकि राजीव गाँधी
किसी अधिकृत पद पर नहीं थे, लेकिन इंदिरा गाँधी ने रॉ से उन्हें इसकी
अनुमति देने को कह दिया था, फ़िर भी रॉ ने इंदिरा जी को स्पष्ट कर दिया
था कि इन लोगों के नाम इस ब्रीफ़िंग के रिकॉर्ड में नहीं आएंगे । उन
बैठकों के दौरान राजीव गाँधी सतत रॉ पर दबाव डालते रहते कि वे इटालियन
खुफ़िया एजेंसियों से भी गठजोड़ करें, राजीव गाँधी ऐसा क्यों चाहते थे ?
या क्या वे इतने अनुभवी थे कि उन्हें इटालियन एजेंसियों के महत्व का पता
भी चल गया था ? ऐसा कुछ नहीं था, इसके पीछे एकमात्र कारण थी सोनिया गाँधी
। राजीव गाँधी ने सोनिया से सन १९६८ में विवाह किया था, और हालांकि रॉ
मानती थी कि इटली की एजेंसी से गठजोड़ सिवाय पैसे और समय की बर्बादी के
अलावा कुछ नहीं है, राजीव लगातार दबाव बनाये रहे । अन्ततः दस वर्षों से
भी अधिक समय के पश्चात रॉ ने इटली की खुफ़िया संस्था से गठजोड़ कर लिया ।
क्या आप जानते हैं कि रॉ और इटली के जासूसों की पहली आधिकारिक मीटिंग की
व्यवस्था किसने की ? जी हाँ, सोनिया गाँधी ने । सीधी सी बात यह है कि वह
इटली के जासूसों के निरन्तर सम्पर्क में थीं । एक मासूम गृहिणी, जो
राजनैतिक और प्रशासनिक मामलों से अलिप्त हो और उसके इटालियन खुफ़िया
एजेन्सियों के गहरे सम्बन्ध हों यह सोचने वाली बात है, वह भी तब जबकि
उन्होंने भारत की नागरिकता नहीं ली थी (वह उन्होंने बहुत बाद में ली) ।
प्रधानमंत्री के घर में रहते हुए, जबकि राजीव खुद सरकार में नहीं थे । हो
सकता है कि रॉ इसी कारण से इटली की खुफ़िया एजेंसी से गठजोड़ करने मे
कतरा रहा हो, क्योंकि ऐसे किसी भी सहयोग के बाद उन जासूसों की पहुँच
सिर्फ़ रॉ तक न रहकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक हो सकती थी ।
जब पंजाब में आतंकवाद चरम पर था तब सुरक्षा अधिकारियों ने इंदिरा गाँधी
को बुलेटप्रूफ़ कार में चलने की सलाह दी, इंदिरा गाँधी ने अम्बेसेडर
कारों को बुलेटप्रूफ़ बनवाने के लिये कहा, उस वक्त भारत में बुलेटप्रूफ़
कारें नहीं बनती थीं इसलिये एक जर्मन कम्पनी को कारों को बुलेटप्रूफ़
बनाने का ठेका दिया गया । जानना चाहते हैं उस ठेके का बिचौलिया कौन था,
वाल्टर विंसी, सोनिया गाँधी की बहन अनुष्का का पति ! रॉ को हमेशा यह शक
था कि उसे इसमें कमीशन मिला था, लेकिन कमीशन से भी गंभीर बात यह थी कि
इतना महत्वपूर्ण सुरक्षा सम्बन्धी कार्य उसके मार्फ़त दिया गया । इटली का
प्रभाव सोनिया दिल्ली तक लाने में कामयाब रही थीं, जबकि इंदिरा गाँधी
जीवित थीं । दो साल बाद १९८६ में ये वही वाल्टर विंसी महाशय थे जिन्हें
एसपीजी को इटालियन सुरक्षा एजेंसियों द्वारा प्रशिक्षण दिये जाने का ठेका
मिला, और आश्चर्य की बात यह कि इस सौदे के लिये उन्होंने नगद भुगतान की
मांग की और वह सरकारी तौर पर किया भी गया । यह नगद भुगतान पहले एक रॉ
अधिकारी के हाथों जिनेवा (स्विटजरलैण्ड) पहुँचाया गया लेकिन वाल्टर विंसी
ने जिनेवा में पैसा लेने से मना कर दिया और रॉ के अधिकारी से कहा कि वह
ये पैसा मिलान (इटली) में चाहता है, विंसी ने उस अधिकारी को कहा कि वह
स्विस और इटली के कस्टम से उन्हें आराम से निकलवा देगा और यह "कैश" चेक
नहीं किया जायेगा । रॉ के उस अधिकारी ने उसकी बात नहीं मानी और अंततः वह
भुगतान इटली में भारतीय दूतावास के जरिये किया गया । इस नगद भुगतान के
बारे में तत्कालीन कैबिनेट सचिव बी.जी.देशमुख ने अपनी हालिया किताब में
उल्लेख किया है, हालांकि वह तथाकथित ट्रेनिंग घोर असफ़ल रही और सारा पैसा
लगभग व्यर्थ चला गया । इटली के जो सुरक्षा अधिकारी भारतीय एसपीजी कमांडो
को प्रशिक्षण देने आये थे उनका रवैया जवानों के प्रति बेहद रूखा था, एक
जवान को तो उस दौरान थप्पड़ भी मारा गया । रॉ अधिकारियों ने यह बात राजीव
गाँधी को बताई और कहा कि इस व्यवहार से सुरक्षा बलों के मनोबल पर विपरीत
प्रभाव पड़ रहा है और उनकी खुद की सुरक्षा व्यवस्था भी ऐसे में खतरे में
पड़ सकती है, घबराये हुए राजीव ने तत्काल वह ट्रेनिंग रुकवा दी,लेकिन वह
ट्रेनिंग का ठेका लेने वाले विंसी को तब तक भुगतान किया जा चुका था ।
राजीव गाँधी की हत्या के बाद तो सोनिया गाँधी पूरी तरह से इटालियन और
पश्चिमी सुरक्षा अधिकारियों पर भरोसा करने लगीं, खासकर उस वक्त जब राहुल
और प्रियंका यूरोप घूमने जाते थे । सन १९८५ में जब राजीव सपरिवार फ़्रांस
गये थे तब रॉ का एक अधिकारी जो फ़्रेंच बोलना जानता था, उनके साथ भेजा
गया था, ताकि फ़्रेंच सुरक्षा अधिकारियों से तालमेल बनाया जा सके । लियोन
(फ़्रांस) में उस वक्त एसपीजी अधिकारियों में हड़कम्प मच गया जब पता चला
कि राहुल और प्रियंका गुम हो गये हैं । भारतीय सुरक्षा अधिकारियों को
विंसी ने बताया कि चिंता की कोई बात नहीं है, दोनों बच्चे जोस वाल्डेमारो
के साथ हैं जो कि सोनिया की एक और बहन नादिया के पति हैं । विंसी ने
उन्हें यह भी कहा कि वे वाल्डेमारो के साथ स्पेन चले जायेंगे जहाँ
स्पेनिश अधिकारी उनकी सुरक्षा संभाल लेंगे । भारतीय सुरक्षा अधिकारी यह
जानकर अचंभित रह गये कि न केवल स्पेनिश बल्कि इटालियन सुरक्षा अधिकारी
उनके स्पेन जाने के कार्यक्रम के बारे में जानते थे । जाहिर है कि एक तो
सोनिया गाँधी तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के अहसानों के तले दबना
नहीं चाहती थीं, और वे भारतीय सुरक्षा एजेंसियों पर विश्वास नहीं करती
थीं । इसका एक और सबूत इससे भी मिलता है कि एक बार सन १९८६ में जिनेवा
स्थित रॉ के अधिकारी को वहाँ के पुलिस कमिश्नर जैक कुन्जी़ ने बताया कि
जिनेवा से दो वीआईपी बच्चे इटली सुरक्षित पहुँच चुके हैं, खिसियाये हुए
रॉ अधिकारी को तो इस बारे में कुछ मालूम ही नहीं था । जिनेवा का पुलिस
कमिश्नर उस रॉ अधिकारी का मित्र था, लेकिन यह अलग से बताने की जरूरत नहीं
थी कि वे वीआईपी बच्चे कौन थे । वे कार से वाल्टर विंसी के साथ जिनेवा
आये थे और स्विस पुलिस तथा इटालियन अधिकारी निरन्तर सम्पर्क में थे जबकि
रॉ अधिकारी को सिरे से कोई सूचना ही नहीं थी, है ना हास्यास्पद लेकिन
चिंताजनक... उस स्विस पुलिस कमिश्नर ने ताना मारते हुए कहा कि "तुम्हारे
प्रधानमंत्री की पत्नी तुम पर विश्वास नहीं करती और उनके बच्चों की
सुरक्षा के लिये इटालियन एजेंसी से सहयोग करती है" । बुरी तरह से अपमानित
रॉ के अधिकारी ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों से इसकी शिकायत की, लेकिन कुछ
नहीं हुआ । अंतरराष्ट्रीय खुफ़िया एजेंसियों के गुट में तेजी से यह बात
फ़ैल गई थी कि सोनिया गाँधी भारतीय अधिकारियों, भारतीय सुरक्षा और भारतीय
दूतावासों पर बिलकुल भरोसा नहीं करती हैं, और यह निश्चित ही भारत की छवि
खराब करने वाली बात थी । राजीव की हत्या के बाद तो उनके विदेश प्रवास के
बारे में विदेशी सुरक्षा एजेंसियाँ, एसपीजी से अधिक सूचनायें पा जाती थी
और भारतीय पुलिस और रॉ उनका मुँह देखते रहते थे । (ओट्टावियो क्वात्रोची
के बार-बार मक्खन की तरह हाथ से फ़िसल जाने का कारण समझ में आया ?) उनके
निजी सचिव विंसेंट जॉर्ज सीधे पश्चिमी सुरक्षा अधिकारियों के सम्पर्क में
रहते थे, रॉ अधिकारियों ने इसकी शिकायत नरसिम्हा राव से की थी, लेकिन
जैसी की उनकी आदत (?) थी वे मौन साध कर बैठ गये ।
संक्षेप में तात्पर्य यह कि, जब एक गृहिणी होते हुए भी वे गंभीर सुरक्षा
मामलों में अपने परिवार वालों को ठेका दिलवा सकती हैं, राजीव गाँधी और
इंदिरा गाँधी के जीवित रहते रॉ को इटालियन जासूसों से सहयोग करने को कह
सकती हैं, सत्ता में ना रहते हुए भी भारतीय सुरक्षा अधिकारियों पर
अविश्वास दिखा सकती हैं, तो अब जबकि सारी सत्ता और ताकत उनके हाथों मे
है, वे क्या-क्या कर सकती हैं, बल्कि क्या नहीं कर सकती । हालांकि "मैं
भारत की बहू हूँ" और "मेरे खून की अंतिम बूँद भी भारत के काम आयेगी" आदि
वे यदा-कदा बोलती रहती हैं, लेकिन यह असली सोनिया नहीं है । समूचा
पश्चिमी जगत, जो कि जरूरी नहीं कि भारत का मित्र ही हो, उनके बारे में सब
कुछ जानता है, लेकिन हम भारतीय लोग सोनिया के बारे में कितना जानते हैं ?
मंगलवार, 14 सितंबर 2010
जब आक्रमणकारी मुसलमानों व ईसाईयों को आरक्षण दिया जा सकता है तो फिर जाटों को क्यों नहीं?
आज भारत के हालात दिन प्रतिदिन बद से बदतर होते जा रहे हैं ।धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की केन्द्र सरकार फूट डालो और राज करो के षडयन्त्र को पूरी वेशर्मी से आगे बढ़ा रही है।
एक तरफ ये सरकार आतंकवादियों का खुला साथ दे रही है तो दूसरी तरफ हिन्दूओं को आपस में लड़ाने का कोई मौका नहीं चूक रही है। ये देश का दुर्भागय ही है कि जो काम देश के शत्रुओं का है वही काम खुद देश की सरकार अन्जाम दे रही है।
सरकार का काम होता है समाज के अन्दर समरसता व एकता के लिए काम करना पर ये सरकार भारतीय संस्कृति के हर उस एकता सूत्र पर हमला वोल रही है जो एकता सूत्र सदियों से भारत को समरसता के पास में बांधे हुए था।
आज हम सिर्फ आरक्षण की बात करते हैं । आरक्षण की ब्यबस्था हिन्दू समाज में विकास की दौड़ में पीछे रह चुके अपने वंचित भाईयों को आगे बढ़ने का मौका देने के लिए सिर्फ 10 वर्ष के लिए की गई थी।इन 10 वर्षों में सरकार से उमीद थी कि वो सराकरी तानानवाना कुछ इस तरह से बुनेगी कि जाति अधारित भेदभाव के लिए कोई जगह न रहे । लेकिन सरकार ने आरक्षण को धीरे-धीरे हिन्दूओं को आपस में लड़वाने के लिए हथियार की तरह प्रयोग कर वोट बैंक निती में बदल डाला । परिणाम स्वारूप आज कभी एक जाति तो कभी दूसरी जाति आरक्षण के लिए हथियार उठाती हुई प्रतीत होती है।
धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की गद्दारी की इन्तहां देखो कि ये गिरोह आक्रमणकारी मुसलमानों व ईसाईयों को तो आरक्षण देने के लिए संविधान व माननीय सर्वोच न्यायालय तक का उलंघन करने को तैयार है पर देश की रक्षा की रीढ़ देसभक्त जाटों को आरक्षण देने में इस गिरोह को तकलीफ महसूस हो रही है।
हमारे विचार में आरक्षण किसी समस्या का समाधान नहीं वल्कि खुद एक समस्या है ।
लेकिन जब देश से हर मोड़ पर गद्दारी करने वाले मुसलमानों व लुटेरे ईसाईयों को आरक्षण देने की गद्दारी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह कर रहा है तो इन आक्रमणकारियों को आरक्षण मिलने से पहले देश के हर गरीब हिन्दू , चाहे वो किसी भी जाति का हो को आरक्षण मिलना चाहिए।
हम तो सब हिन्दूओं से अपील करेंगे कि देश के साधनों पर आक्रमणकारियों के पहले हक की बात करने वाले गद्दारों को पहचानकर ऐसे गद्दारों का नमोनिसान मिटाने के प्रयत्न सब देसभक्त हिन्दूओं को एकजुट होकर करने चाहिए विना ये सोचे कि ये गद्दार कौन से सांप्रदाय—जाति-क्षेत्र या राजनीतिक दल से सबन्धित है।
क्योंकि आज मुद्दा जाटों के आरक्षण का है इसलिए हमारे विचार में सरकार को विना कोई समय गंवाय जाटों को आरक्षण दे देना चाहिए।
साथ ही हम अन्दोलनकारी जाटों से भी ये विनती करते है अन्दोलन के दौरान ये सुनिस्चत करें कि हिन्दू-हिन्दू से न उलझे न ही प्रदर्शनकारी अपने ही सैनिकों व पुलिसवलों से उलझें क्योंकि देश का दुशमन ये सेकुलरगिरोह यही तो चाहता है कि हम आपस में लड़कर कमजोर हों ताकि आक्रमणकारी मुसलमान व ईसाई फिर से हमें गुलाम बना सकें।
शनिवार, 21 अगस्त 2010
NGOs के माध्यम से चर्च के भारत-विरोधी षड्यन्त्र-1
विश्वभर में ईसाईयत के इतिहास में द्वितीय विश्वयुद्ध से एक नए पतन का सूत्रपात हुआ।युद्ध के अन्त में चर्च ने व्याकुलता से देखा कि अमेरिका के नेतृत्व में पशचमी ईसाई ताकतें विजयी हुई लेकिन 16वीं शताब्दी से बढ़ते जा रहे उपनिवेशवाद व साम्राज्यवाद संवेग रूक गया व क्षीण होना शुरू हो गया।जिसके निम्न परिणाम हुए।।।
1. राजा व प्रजा दोनों के ईसाई होने के बाबजूद यूरोप व रूस और उसकी कठपुतली सरकारों से चर्च का नियन्त्रण समाप्त हो गया। 1949 में इसी समूह में चीन भी शआमिल होगया जिससे चर्च को और धक्का लगा।
2. विश्व युद्ध के दौरान अन्दर से कमजोर होने व आजाद हिन्द सेना के डर से ईसाई सम्राज्यवाद को भारत से भी हटना पड़ा परिणामस्वारूप एशियाई व अप्रीकी देशों में स्वतन्त्रता अन्दोलनों ने जोर पकड़ा व बहुत से देश स्वतन्त्र राज्य बन गए।
3. विदेशी उपनिवेशवादियों और दमनकारियों का पोषक होने के कारण शासन की समाप्ति के साथ ही चर्च पर हमले होने शुरू हुए।चीन की देशभक्त सरकार ने अपने यहां से 1950-51 तक सब ईसाई मिशनरियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया।
4. भारत में बेशक ईसाईयों के चाटुकार नेहरू जैसे नेता चर्च के प्रभाव को बचाने का हर सम्भव प्रयास कर रहे थे पर जनता में इतना रोष था कि लोगों ने कुतों के नाम तक ईसाई रखने शुरू कर दिए। इसी प्रकार लगभग सब नवस्वतन्त्र देशों में धर्मांतरण की संम्भावनायें क्षीण होती चली गईं।
5. विश्वयुद्ध के पश्चात चर्च को अपने केन्द्रस्थल यूरोप और अमेरिका में अयन्त गम्भीर संकट का सामना करना पड़ा।औद्योगिक क्रांति के परिणामस्वारूप इन देशों में अति भौतिकवादी व सुविधाभोगी समाज की रचना हुई जिसकी चर्च में कोई आस्था नहीं थी। क्योंकि चर्च ने हमेशा एक राजनीतिक संस्था के रूप में काम किया है इसलिए आध्यातमिकता के अभाव के कारण नई पीढी की चर्च में कोई रूचि नहीं थी।बेशक शासनाध्यक्ष द्वारा बाईबल की शपथ लेने के बाबजूद जनता व चर्च में गृहयुद्ध जैसी स्थिति थी।USA व अफ्रीकी देशों में काले लोगों की शक्ति बढ़ रही थी। काले इसाई लोगों व गोरे इसाई लोगों के बीच संघर्ष तीव्र हो रहा था।क्यूवा में फ्रिडेल कास्त्रो की क्रांति की सफलता के कारण अन्य अप्रीकी देशों में भी गोरिला युद्ध को बढ़ावा मिल रहा था। ऐसे में चर्च के सामने प्रश्न खड़ा हुआ कि भ्रष्ट तानशाहों का साथ दिया जाए या फिर बहुसंख्यक काले लोगों के संघर्ष में साथ दिया जाय। इससे पहले कि चर्च कोई निर्णय लेता कुछ विशप दक्षिणी अमेरिका में काले लोगों के पक्ष में संघर्ष में कूद पड़े और मुक्तियुद्द के प्रेरक बने।1960 में ब्राजील में जनजागरण करने वाले पालो प्रेरे नाम के पादरी को वहां की सरकार ने 1964 में नजरबन्द कर 1968 में देशनिकाला दे दिया।1971 में उसे WCC (WORLD COUNCIL OF CHURCHES)का परामर्शदाता चर्च ने नियुक्त किया।
इसी पोलो प्रेरो नाम के पादरी ने मार्कसवाद तथा चर्च दोनों का घोलमेल किया। यह पादरी एक स्थान पर लिखता है कि “मैं ब्राजील की गन्दी बस्तियों में मार्क्श के कारण नहीं अपितु ईसा के कारण आया। बस्ती के लोगों ने मुझसे कहा, कि जाइए “ मार्क्स को जानिए” उनकी जिद ने मुझे मार्क्स के पास भेजा।अब में सहज रूप से दोनों को जानता हूं।”
सोमवार, 12 जुलाई 2010
ये कौन हैं जो आतंकवादी मुसलमानों व मुसलिम संगठनों को निर्दोश और निर्दोश हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों को आतंकवादी सिद्ध करने के लिए एक के बाद एक षडयन्त्र रचे जा रहे हैं?
हम आपके सामने कुछ ऐसे तथ्य रखने जा रहे हैं जो आपको सायद उस हकीकत का सामना करवा सकें जिस हकीकत का सामना देशभक्त भारतीय सेना,हिन्दू व हिन्दू संगठन कर रहे हैं।
अगर हम भारत को आज वैचारिक व राजनीतिक आधार पर समझना चाहें तो कुल मिलाकर दो विचारधारायें उभर कर सामने आती हैं।
एक विचारधारा है सर्वधर्मसव्भाव व सांस्कृतिक राष्ट्रवाद में विश्वास रखने वाली भारतसमर्थक हिन्दूत्वनिष्ठ विचारधारा व दूसरी विचारधारा है भारतविरेधी-हिन्दूविरोधी धर्मनिर्पेक्षतावादी विचारधारा मतलब सैकुलर गिरोह की विचारधारा।
हिन्दूत्वनिष्ठ विचारधारा भारत को सांस्कृतिक समानता के आधार पर एकजुट कर अलगाववादियों को अलग-अलग कर भारत को आगे ले जाना चाहती है जबकि सेकुलर गिरोह की विचराधारा भारत को धर्मविहीन-हिन्दूविहीन कर धर्मनिर्पक्षता के नाम पर भारत को इसलामी व ईसाई टुकड़ों में विभाजित कर भारत की सांस्कृतिक धरोहर को नष्ट कर आगे और खण्ड-खण्ड करने में विश्वास रखती है।
हिन्दूत्वनिष्ठ विचारधारा को आगे बढ़ाने का माध्यम है भारत को जोड़ने वाली सांसकृतिक कड़ियों पर जोर देकर हिन्दूएकता को प्रवल कर भारतीयों को संगठित करना जबकि सेकुलर गिरोह का जोर है हिन्दुओं को जात-पात के आधार लड़वाकर हिन्दू समाज को और विभाजित कर मुसलिम व इसाई आतंकवाद को बढ़ावा देकर भारतीयों को आपस में लड़वाकर भारत के शत्रुओं को ताकतवर बनाना।
आज भारत के अधिकतर संचार साधनों पर सेकुलर गिरोह की पकड़ मजबूत होने के कारण देश में एक ऐसा महौल बना दिया गया है जिसमें हिन्दूत्वनिष्ठ संगठनों द्वारा देशहित में कही गई या की गई हर बात को इस तरह से पेश किया जाता है मानों हिन्दूत्वनिष्ठ संगठन व भारतीय सेना ही देश की सब समस्याओं की जड़ है जबकि सच्चाई यह है कि भारत विरोधी पाक समर्थक मुसलिम आतंकवादियों, चीन समर्थक माओवादी आतंकवादियों व रोम समर्थक ईसाई आतंकवादियों ने देश के विभिन्न हिस्सों में देसभक्तों का जीना दुशवार किया हुआ है।
मिडीया की सहायता से सेकुलर गिरोह भारतविरोधी आतंकवादियों द्वारा हिन्दूओं व देश पर किए गए हर हमले को या तो दबाने की कोशिश करता है या फिर आतंकवादियों द्वारा किए गए हमले का दोश एक योजना के तहत देशभक्त भारतीय सेना, हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों पर मढ़ने की कोशिश की जाती है।
पिछले कुछ दिनों से ऐसे प्रमाण मिल रहे हैं कि सेकुलर गिरोह ने अपने देशविरोधी-हिन्दूविरोधी अभियानों की सफलता से उतसाहित होकर अब सीधे देश के सुरक्षाकव्च मतलब भारतीय सेना पर हमले तेज कर सैनिकों को बदनाम करना शुरू कर दिया है।
हमारा मानना है कि झूठ के पाँव नहीं होते झूठ चाहे कितने भी जोर से क्यों न कहा जाए अन्त में तो झूठ व पाप को तो हारना ही है क्योंकि प्रकृति का विधान ही ऐसा है जिसमें जीत तो सत्य और धर्म की ही होती है।
प्रकृति के इसी विधान के अनुरूप पापिओं व अधर्मियों के सेकुलर गिरोह द्वारा देसभक्त हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों के वारे में फैलाए जा रहे झूठों का एक के एक पर्दाफास होता जा रहा है।
सेकलर गिरोह का झूठ-चर्चों पर हमले हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों ने किए थे...
वर्ष 2000 में गुजरात व केन्द्र में BJP की सरकार थी । उन्हीं दिनों गुजरात, उड़ीसा, आन्ध्रप्रदेश व कर्नाटक के कई चर्चों में एक के वाद एक बमबलास्ट हुए। सेकुलर गिरोह ने न आब देखा न ताब बस सीधे शोर मचा दिया कि संघ परिवार मतलब हिन्दूत्वनिष्ठ संगठनों ने अल्पसंख्यकों मतलब ईसाईयों और मुसलमानों को मिटाने के अपने अभियान को अंजाम देना शुरू कर दिया है।
देश के हर समाचार चैनल व समाचार पत्र ने मनघड़ंत कहानियां बनाकर हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों को बदनाम कर सारे संसार में भारत की छवि को धूमिल किया। हिन्दूओं को कातिल और अत्याचारी के रूप में पेश किया। संघपरिवार व हिन्दू संगठनों ने लाख कहा कि इन हमलों से उनका कोइ लेना–देना नहीं लेकिन सेकुलर गिरोह ने एक न सुनी बस शोर मचा दिया हिन्दू व हिन्दूओं के संगठन कातिल हैं अत्याचारी है ईसाईयों का नरसंहार कर रहे हैं। विदेशों से भी भारत सरकार को हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों पर नकेल कश कर अलपसंख्यकों की रक्षा करने के आदेश मिलने लगे ।चारों तरफ हाहाकार मचा दी गई।
तभी एक ऐसी घटना घटी जिसने सबको चौंका दिया।
आन्ध्रप्रदेश में दीनदार अन्जुमन के कुछ लोग गिरफ्तार किए गए जिन्होंने ने ये कबूल किया कि चर्चों में विस्फोट मुसलिम आतंकवादियों ने किए हैं ।क्योंकि चन्द्बाबाबू नायडू खुद सेकुलर गिरोह का हिस्सा थे इसलिए पकड़ें गए लोगों के कबूलनामे पर प्रश्न उठाना मुस्किल था फिर भी सेकुलर गिरोह ने अपनी योजना अनुशार हिन्दूओं और हिन्दू संगठनों को टारगेट करना जारी रखा।
सेकुलर गिरोह के सारे दुशप्रचार के बाद माननीय न्यायालय का ये फैसला पढ़ो....
A special court, hearing cases related to serial bomb blasts in churches in Karnataka, Andhra Pradesh, Maharashtra and Goa in 2000, has convicted 23 people belonging to Deendar Channabasaveshwara Anjuman group. Of the 27 accused who were tried, four were acquitted. Special Court Judge SM Shivana Gowdar
who convicted the 23 in Bangalore on Friday, is yet to pronounce the quantum of punishment in the case which has been adjourned till December 3.
BANGALORE, India, December 3, 2008--A court in southern India has handed death sentences to 11 people convicted of bombing churches in three states in 2000
In addition to the death sentences, the court in Bangalore, capital of Karnataka state, 2,060 kilometers south of New Delhi, also sentenced 12 others involved in the blasts to life imprisonment on Nov. 29.
The explosions damaged the churches, but the only deaths were of two people suspected of involvement in the bombings. The convicted are members of a Muslim sect, Deendar Anjuman (organization for duty).
इस फैसले के अनुशार चर्चों में बम्मविस्फोट मुसलिम संगठन दीनदार अंजुमन ने करवाए थे। ये हमले करने के जुर्म में पकड़े गए 27 लोगों में से 4 को छोड़ दिया गया व 11 को फांसी की सजा सुनवाई गई तथा 12 को उम्रकैद की सजा सुनवाई गई।
अब सोचने वाला विषय ये है कि जिन लोगों ने हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों के वारे में अफवाहें फैलाकर संसार में भारत व हिन्दूओं की छवि खराब करने की कोशिश की ये कौन लोग हैं?
बास्तब में ये वो लोग हैं जो मुसलिम देशों से पैसे लेकर हिन्दू मुसलिम एकता(The group, now banned, was founded in 1924 in Karnataka to unite Muslims and Hindus, but that aim later changed and members began to work for the Islamization of India through violent activities, the prosecution reportedly told the special court. Police intelligence reports say the sect has some 12,000 followers in villages of Karnataka and neighboring Andhra Pradesh.)
के नाम पर हिन्दूओं की बर्बादी सुनिस्चित करने के लिए मुलिम आतंकवादियों की ढाल के रूप में काम करते हैं।मुसलिम देशों से मिलने वाले टुकड़ों के बदले ये लोग मुसलमानों द्वारा किए गए हर नरसंहार का दोश हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों पर डालने का हर सम्मभव प्रयास करते हैं।
सेकलर गिरोह का झूठ-इशरत जहां निर्दोष थी
वर्ष 2004 में गुजरात में पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में लश्करे तैयवा के चार खूंखार फिदाय़ीन मारे गए।
इन चार में से एक लड़की थी जिसका नाम था इसरत जहां।
इस इनकांटर के कुछ ही घंटे बाद समाचार चैनलों व समाचार पत्रों ने समचार चलाने शुरू कर दिए कि ये मुठबेड़ फर्जी थी।
http://www.hindilok.com/ishrat-jahan-fake-encounter-creates-question-prasun.html
बैसे भी सेकुलर गिरोह हर मुलिम आतंकवादी को निर्दोष ही मानता है क्योंकि दोनों का मकसद एक ही है वो है हिन्दूओं का नरसंहार । ये कुछ घंटे भी शायद इसलिए लग गए क्योंकि झूठा समाचार चलाने के लिए इन सेकुलर गद्दारों को कितने पैसे मिलेंगे ये तय होनें में कुछ वक्त लगा होगा।
सौदा तय होते ही समाचार चैनलों ने जंगली कुतों की तरह हिन्दूओं पर भौंकना शुरू कर दिया ।हिन्दूओं व पुलिस को वरबर अत्याचारी सिद्ध करने के लिए तरह तरह की कहानियां प्रसारित की गई।
ये बात अलग है कि मुठबभेड़ के कुछ ही दिनों के अन्दर लश्करे तैयवा ने खुद ये सवीकार कर लिया कि इसरत जहां लश्करे तैयवा की आत्मघाती आतंकवादी थी। Shortly after the 2004 encounter, LeT claimed that Ishrat was its fidayeen through its Lahore-based mouthpiece 'Ghazwa Times'.
इसी वीच मुंबई ATS ने भी अपनी रिपोर्ट में ये खुलासा कर दिया कि इसरत जहां लश्करे तैयवा की आत्मघाती आतंकवादी थी ।
लेकिन सेकुलर गिरोह कहां मानने वाला था उसने तो मुसलिम देशों से मिले पैसे को हलाल करना था हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों को बदनाम कर। इस वार सेकुलर गिरोह ने केन्द्र सरकार के साथ मिलकर नई रणनिती बनाई । इस रणनिती के अनुसार पहले इसरत जहां के परिवार वालों को समाने लाकर उनका रोना-धोना
दिखाया गया बाद में उनसे कोर्ट में केश करवा दिया गया ।
ठीक उसी समय जब कोर्ट में केश करवाया गया लश्करे तैयवा ने भी अपने पिछले बयान से पलटते हुए इसरतजहां का अपना सदस्य होने से इनकार कर दिया। However in 2007, LeT, which was then rechristened as Jamaat-ud-Dawa (JuD), disowned her and issued an apology to Ishrat's family for describing her as a LeT cadre.
ये इस बात का प्रमाण था कि सेकुलर गिरोह व मुसलिम आतंकवादियों के वीच किस तरह के गहरे रिस्ते हें।
मान ,मर्यादा व विस्वास की सब हदें तब पार हो गयीं जब एक जज पी सी तमांग ने भी सेकुलर गिरोह के भारतविरोधी दुशप्रचार का सिकार होकर इसरत जहां को निर्दोश करार दे दिया।( तमांग की आख्या में कहा गया है कि इसरत जहां और उसके साथ मारे गये उसके तमाम साथी निर्दोष थे तथा गुजरात पुलिस ने कथित आतंकियों को मुम्बई से पकडकर लाई, दो दिनों तक अवैध पुलिस अभिरक्षण में रखी और फिर उसे मार कर मुठभेड दिखा दिया गया। न्यायमूर्ति तमांग की आख्या कहता है कि गुजरात पुलिस ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि कुछ अधिकारियों को मुख्यमंत्री के सामने अपना कद उंचा करना था)
http://www.pravakta.com/?p=3663 ( पढ़ें)
बस फिर क्या था कांग्रेस ने खुलकर मोदी को मौत का सौदागर व आतंकवादी इसरत जहां को मासूम निर्दोष प्रचारित करना शुरू कर दिया। कांग्रेस की वेशर्मी व गद्दारी का सबसे बढ़ा प्रमाण उस वक्त सामने आया जब ये पता चला कि ततकालीन कांग्रेस सरकार नमे खुद माननीय न्यायलय में हलफनामा देकर ये सवीकार किया था कि इसरत जहां लश्करे तैयवा की आत्मघाती आतंकवादी थी।
लेकिन कांग्रेस जानती है कि हिन्दू वेवकूफ हैं वो कहां इतनी गहराई में जाकर कांग्रेस की गद्दारी का पर्दाफास करने की कोशिस करेंगे। इसलिए मुसलिम आतंकवादियों को खुश करने के लिए आतंकवादी का साथ देना शुरू कर दिया कांग्रेस के नेतृत्व में सारे सेकुलर गिरोह ने।
ऐसा नहीं कि इससे पहले कांग्रेस ने इस आतंकवादी का साथ नहीं दिया था। 2000 में इसरत जहां के जनाजे में कांग्रेस व समाजवादी पार्टी के हजारों कार्यकर्ता सामिल हुए ते।
ततकाली महाराष्ट्र सरकार ने इस आतंकवादी के परिवार को हरजाने के नाम पर आर्थिक मदद भी की थी।
यह वही कांग्रस है जिसने 2004 में सता में आते ही आतंकवादियों से लड़ाई के दौरान शहीद होने वाले अर्धसैनिक बसों को मिलने वाली आर्थिक सहायता ये कहकर कम कर दी थी कि सरकार के पास पैसे नहीं हैं।
http://samrastamunch.spaces.live.com/Blog/cns!1552E561935CF20F!532.entry (पढ़े)
आज जबकि NIA के सामने मुसलिम आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली ये सवीकार कर चुका है इसरत जहां लश्करे तैयवा की आत्मघाती आतंकवादी थी तब आप समझ सकते हैं कि कौन सही है और कौन गलत।
क्या ये सारी बातें इस बात का प्रमाण नहीं कि इसरत जहां द्वारा मोदी को मारने की योजना की जानकारी सेकुलर गिरोह व कांग्रेस को थी ।जानकारी ही नहीं वल्कि सेकुलर गिरोह का समर्थन भी इसरत जहां को प्राप्त था।
ऐसा नहीं कि ये सेकुलर गिरोह का एकमात्र झूठ है जिका पर्दाफास हुआ है। सैंकड़ों ऐसे झूठ हैं जो सेकुलर गिरोह ने हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों को बदनाम करने के लिए फैलाए और बाद में उन झूठों का परदाफस हुआ।
ऐसा नहीं कि अब इस गिरोह ने झूठ फैलाने वन्द कर दिए हें।
आपको याद होगा कि जब 2001 में ततकालीन गृहमन्त्री लालकृष्ण अडवानी जी ने सिमी(SIMI) को आतंकवादी संगठन घोषित किया तो समाजवादी पार्टी के नेतृत्व में कांग्रेस सहित सभी सेकुलरगिरोह के सदस्यों ने अडवानी जी को मुसलिम विरोधी करार दिया। कौन सही था कौन गलत इसका प्रमाण आगे चलकर तब मिला जब SIMI ने दर्जनों बम्मविस्फोट कर हजारों वेगुनाह हिन्दूओं का कत्ल कर लाखों को नुकसान पहुंचाया।
आपको वो भी याद होगा कि जब गोधरा में 2000 मुसलमानों की भीड़ ने ट्रेन में आग लगाकर 58 हिन्दूओं को जिन्दा जला दिया । हिन्दूओं से सहानुभूति जताना तो दूर कांग्रेस सरकार ने बैनर्जी नामक भ्रष्ट जज से झूठी रिपोर्ट तैयार करवाकर ये कहलवा दिया कि आग हिन्दूओं ने खुद लगावाई थी।
ये सब सेकुलर गद्दारों ने तब किया जब माननीय नयायालय द्वारा नानवटी आयोग के माध्यम से जांच जारी थी।अब आप खुद सोचो कि सेकुलर गिरेह किस हद तक मुसलिम आतंकवादियों का साथ देकर हिन्दूओं का नरसंहार करवाने पर तुला है।
सेकलर गिरोह द्वारा आतंकवादियों को दिए जा रहे खुले समर्थन का ही परिणाम है कि कशमीर घाटी में 60000 हिन्दूओं का कत्ल कर 500000 हिन्दूओं को वेघर कर दर-दर की ठोकरें खाने पर मजबूर कर दिया गया।
सेकुलर गिरोह के आतंकवादियों को खुले समर्थन के परिणामसवारूप ही आसाम में बंगलादेशी मुसलिम आतंकवादियों ने जड़े जमाकर हिन्दूओं को उजाड़ना सुरू कर दिया।
सेकुलर गिरोह के आतंकवादियों को खुले समर्थन के परिणास्वारूप ही हिन्दूओं का कत्ल व जबरदस्ती धर्मांतरण कर उतर-पूर्व के कई राज्यों में इसाईयों की जनसंख्या 98% तक जा पहूंची।
आतंकवादियों को खुले समर्थन के परिणास्वारूप ही आज माओवादी आतंकवादी सारे देश में कोहराम मचा रहे हें। कुल मिलाकर भारत के अधिकतर राज्य आतंकवाद प्रभावित है।
सेकुलर गिरोह का हौसला अब इतना बढ़ गया है कि उसने सीधे सेना को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। जिसका विबरण हम अपने पिछले लेखों में दे चुके हैं।
आप सब जानते हैं कि किस तरह मुसलिम आतंकवादियों द्वारा किए गए हमलों का दोष हिन्दूओं के सिर डालने के लिए लैप्टीनैंट कर्नल पुरोहित ,साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर सहित कुल 27 हिन्दूओं को विभिन्न जेलों में डालकर यातनायें दी जा रही हैं व मुसलिम आतंकवादियें की मददगार केन्द्र सरकार द्वारा हिन्दू आतंकवाद-हिन्दू आतंकवाद चिला चिलाकर हिन्दूओं को झूठे मामलों में फंसाकर देशभक्त हिन्दूओं को आतंकवादी के रूप में बदनाम करने की कोशिस की जा रही है जिसका परदाफास उस वक्त हुआ जब माननीय न्यायालय ने हिन्दूओं पर झूठे केश दर्ज कर लगवाया गया मकोका यह कहकर हटा दिया कि लगाए गए आरोप अधारहीन हैं।
कांग्रेस की वेशर्मी का एक और प्रमाण आपके सामने है कि पुणे बम्मविस्फोट के आरोपी( जो पहले भी अबैध रूप से हथियार रखने का दोशी पाया जा चुका है) को एक पखवाड़ें के अन्दर छोड़ दिया गया जबकि दूसरी तरफ माननीय न्यायलय द्वारा आरोप अधारहीन बताने के बाबजूद पिछले 2 बर्ष से हिन्दूओं को जबरदस्ती जेल में रखा गया है।
हमें उम्मीद ही नहीं पूरा विस्वास है कि वो वक्त बहुत जल्दी आएग जब जागरूक हिन्दूओं की मेहनत से बौद्धिक गुलाम हिन्दू सेकुलर गिरोह की असलियत पहचानकर जागरूक होकर सेकुलर गिरोह के मकड़जदाल में फंसे हिन्दूओं को जागरूक कर देश से आतंकवादियों व आतंकवादियों के समर्थकों का नमोनिशान मिटा देंगे।
अगर हम भारत को आज वैचारिक व राजनीतिक आधार पर समझना चाहें तो कुल मिलाकर दो विचारधारायें उभर कर सामने आती हैं।
एक विचारधारा है सर्वधर्मसव्भाव व सांस्कृतिक राष्ट्रवाद में विश्वास रखने वाली भारतसमर्थक हिन्दूत्वनिष्ठ विचारधारा व दूसरी विचारधारा है भारतविरेधी-हिन्दूविरोधी धर्मनिर्पेक्षतावादी विचारधारा मतलब सैकुलर गिरोह की विचारधारा।
हिन्दूत्वनिष्ठ विचारधारा भारत को सांस्कृतिक समानता के आधार पर एकजुट कर अलगाववादियों को अलग-अलग कर भारत को आगे ले जाना चाहती है जबकि सेकुलर गिरोह की विचराधारा भारत को धर्मविहीन-हिन्दूविहीन कर धर्मनिर्पक्षता के नाम पर भारत को इसलामी व ईसाई टुकड़ों में विभाजित कर भारत की सांस्कृतिक धरोहर को नष्ट कर आगे और खण्ड-खण्ड करने में विश्वास रखती है।
हिन्दूत्वनिष्ठ विचारधारा को आगे बढ़ाने का माध्यम है भारत को जोड़ने वाली सांसकृतिक कड़ियों पर जोर देकर हिन्दूएकता को प्रवल कर भारतीयों को संगठित करना जबकि सेकुलर गिरोह का जोर है हिन्दुओं को जात-पात के आधार लड़वाकर हिन्दू समाज को और विभाजित कर मुसलिम व इसाई आतंकवाद को बढ़ावा देकर भारतीयों को आपस में लड़वाकर भारत के शत्रुओं को ताकतवर बनाना।
आज भारत के अधिकतर संचार साधनों पर सेकुलर गिरोह की पकड़ मजबूत होने के कारण देश में एक ऐसा महौल बना दिया गया है जिसमें हिन्दूत्वनिष्ठ संगठनों द्वारा देशहित में कही गई या की गई हर बात को इस तरह से पेश किया जाता है मानों हिन्दूत्वनिष्ठ संगठन व भारतीय सेना ही देश की सब समस्याओं की जड़ है जबकि सच्चाई यह है कि भारत विरोधी पाक समर्थक मुसलिम आतंकवादियों, चीन समर्थक माओवादी आतंकवादियों व रोम समर्थक ईसाई आतंकवादियों ने देश के विभिन्न हिस्सों में देसभक्तों का जीना दुशवार किया हुआ है।
मिडीया की सहायता से सेकुलर गिरोह भारतविरोधी आतंकवादियों द्वारा हिन्दूओं व देश पर किए गए हर हमले को या तो दबाने की कोशिश करता है या फिर आतंकवादियों द्वारा किए गए हमले का दोश एक योजना के तहत देशभक्त भारतीय सेना, हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों पर मढ़ने की कोशिश की जाती है।
पिछले कुछ दिनों से ऐसे प्रमाण मिल रहे हैं कि सेकुलर गिरोह ने अपने देशविरोधी-हिन्दूविरोधी अभियानों की सफलता से उतसाहित होकर अब सीधे देश के सुरक्षाकव्च मतलब भारतीय सेना पर हमले तेज कर सैनिकों को बदनाम करना शुरू कर दिया है।
हमारा मानना है कि झूठ के पाँव नहीं होते झूठ चाहे कितने भी जोर से क्यों न कहा जाए अन्त में तो झूठ व पाप को तो हारना ही है क्योंकि प्रकृति का विधान ही ऐसा है जिसमें जीत तो सत्य और धर्म की ही होती है।
प्रकृति के इसी विधान के अनुरूप पापिओं व अधर्मियों के सेकुलर गिरोह द्वारा देसभक्त हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों के वारे में फैलाए जा रहे झूठों का एक के एक पर्दाफास होता जा रहा है।
सेकलर गिरोह का झूठ-चर्चों पर हमले हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों ने किए थे...
वर्ष 2000 में गुजरात व केन्द्र में BJP की सरकार थी । उन्हीं दिनों गुजरात, उड़ीसा, आन्ध्रप्रदेश व कर्नाटक के कई चर्चों में एक के वाद एक बमबलास्ट हुए। सेकुलर गिरोह ने न आब देखा न ताब बस सीधे शोर मचा दिया कि संघ परिवार मतलब हिन्दूत्वनिष्ठ संगठनों ने अल्पसंख्यकों मतलब ईसाईयों और मुसलमानों को मिटाने के अपने अभियान को अंजाम देना शुरू कर दिया है।
देश के हर समाचार चैनल व समाचार पत्र ने मनघड़ंत कहानियां बनाकर हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों को बदनाम कर सारे संसार में भारत की छवि को धूमिल किया। हिन्दूओं को कातिल और अत्याचारी के रूप में पेश किया। संघपरिवार व हिन्दू संगठनों ने लाख कहा कि इन हमलों से उनका कोइ लेना–देना नहीं लेकिन सेकुलर गिरोह ने एक न सुनी बस शोर मचा दिया हिन्दू व हिन्दूओं के संगठन कातिल हैं अत्याचारी है ईसाईयों का नरसंहार कर रहे हैं। विदेशों से भी भारत सरकार को हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों पर नकेल कश कर अलपसंख्यकों की रक्षा करने के आदेश मिलने लगे ।चारों तरफ हाहाकार मचा दी गई।
तभी एक ऐसी घटना घटी जिसने सबको चौंका दिया।
आन्ध्रप्रदेश में दीनदार अन्जुमन के कुछ लोग गिरफ्तार किए गए जिन्होंने ने ये कबूल किया कि चर्चों में विस्फोट मुसलिम आतंकवादियों ने किए हैं ।क्योंकि चन्द्बाबाबू नायडू खुद सेकुलर गिरोह का हिस्सा थे इसलिए पकड़ें गए लोगों के कबूलनामे पर प्रश्न उठाना मुस्किल था फिर भी सेकुलर गिरोह ने अपनी योजना अनुशार हिन्दूओं और हिन्दू संगठनों को टारगेट करना जारी रखा।
सेकुलर गिरोह के सारे दुशप्रचार के बाद माननीय न्यायालय का ये फैसला पढ़ो....
A special court, hearing cases related to serial bomb blasts in churches in Karnataka, Andhra Pradesh, Maharashtra and Goa in 2000, has convicted 23 people belonging to Deendar Channabasaveshwara Anjuman group. Of the 27 accused who were tried, four were acquitted. Special Court Judge SM Shivana Gowdar
who convicted the 23 in Bangalore on Friday, is yet to pronounce the quantum of punishment in the case which has been adjourned till December 3.
BANGALORE, India, December 3, 2008--A court in southern India has handed death sentences to 11 people convicted of bombing churches in three states in 2000
In addition to the death sentences, the court in Bangalore, capital of Karnataka state, 2,060 kilometers south of New Delhi, also sentenced 12 others involved in the blasts to life imprisonment on Nov. 29.
The explosions damaged the churches, but the only deaths were of two people suspected of involvement in the bombings. The convicted are members of a Muslim sect, Deendar Anjuman (organization for duty).
इस फैसले के अनुशार चर्चों में बम्मविस्फोट मुसलिम संगठन दीनदार अंजुमन ने करवाए थे। ये हमले करने के जुर्म में पकड़े गए 27 लोगों में से 4 को छोड़ दिया गया व 11 को फांसी की सजा सुनवाई गई तथा 12 को उम्रकैद की सजा सुनवाई गई।
अब सोचने वाला विषय ये है कि जिन लोगों ने हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों के वारे में अफवाहें फैलाकर संसार में भारत व हिन्दूओं की छवि खराब करने की कोशिश की ये कौन लोग हैं?
बास्तब में ये वो लोग हैं जो मुसलिम देशों से पैसे लेकर हिन्दू मुसलिम एकता(The group, now banned, was founded in 1924 in Karnataka to unite Muslims and Hindus, but that aim later changed and members began to work for the Islamization of India through violent activities, the prosecution reportedly told the special court. Police intelligence reports say the sect has some 12,000 followers in villages of Karnataka and neighboring Andhra Pradesh.)
के नाम पर हिन्दूओं की बर्बादी सुनिस्चित करने के लिए मुलिम आतंकवादियों की ढाल के रूप में काम करते हैं।मुसलिम देशों से मिलने वाले टुकड़ों के बदले ये लोग मुसलमानों द्वारा किए गए हर नरसंहार का दोश हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों पर डालने का हर सम्मभव प्रयास करते हैं।
सेकलर गिरोह का झूठ-इशरत जहां निर्दोष थी
वर्ष 2004 में गुजरात में पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में लश्करे तैयवा के चार खूंखार फिदाय़ीन मारे गए।
इन चार में से एक लड़की थी जिसका नाम था इसरत जहां।
इस इनकांटर के कुछ ही घंटे बाद समाचार चैनलों व समाचार पत्रों ने समचार चलाने शुरू कर दिए कि ये मुठबेड़ फर्जी थी।
http://www.hindilok.com/ishrat-jahan-fake-encounter-creates-question-prasun.html
बैसे भी सेकुलर गिरोह हर मुलिम आतंकवादी को निर्दोष ही मानता है क्योंकि दोनों का मकसद एक ही है वो है हिन्दूओं का नरसंहार । ये कुछ घंटे भी शायद इसलिए लग गए क्योंकि झूठा समाचार चलाने के लिए इन सेकुलर गद्दारों को कितने पैसे मिलेंगे ये तय होनें में कुछ वक्त लगा होगा।
सौदा तय होते ही समाचार चैनलों ने जंगली कुतों की तरह हिन्दूओं पर भौंकना शुरू कर दिया ।हिन्दूओं व पुलिस को वरबर अत्याचारी सिद्ध करने के लिए तरह तरह की कहानियां प्रसारित की गई।
ये बात अलग है कि मुठबभेड़ के कुछ ही दिनों के अन्दर लश्करे तैयवा ने खुद ये सवीकार कर लिया कि इसरत जहां लश्करे तैयवा की आत्मघाती आतंकवादी थी। Shortly after the 2004 encounter, LeT claimed that Ishrat was its fidayeen through its Lahore-based mouthpiece 'Ghazwa Times'.
इसी वीच मुंबई ATS ने भी अपनी रिपोर्ट में ये खुलासा कर दिया कि इसरत जहां लश्करे तैयवा की आत्मघाती आतंकवादी थी ।
लेकिन सेकुलर गिरोह कहां मानने वाला था उसने तो मुसलिम देशों से मिले पैसे को हलाल करना था हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों को बदनाम कर। इस वार सेकुलर गिरोह ने केन्द्र सरकार के साथ मिलकर नई रणनिती बनाई । इस रणनिती के अनुसार पहले इसरत जहां के परिवार वालों को समाने लाकर उनका रोना-धोना
दिखाया गया बाद में उनसे कोर्ट में केश करवा दिया गया ।
ठीक उसी समय जब कोर्ट में केश करवाया गया लश्करे तैयवा ने भी अपने पिछले बयान से पलटते हुए इसरतजहां का अपना सदस्य होने से इनकार कर दिया। However in 2007, LeT, which was then rechristened as Jamaat-ud-Dawa (JuD), disowned her and issued an apology to Ishrat's family for describing her as a LeT cadre.
ये इस बात का प्रमाण था कि सेकुलर गिरोह व मुसलिम आतंकवादियों के वीच किस तरह के गहरे रिस्ते हें।
मान ,मर्यादा व विस्वास की सब हदें तब पार हो गयीं जब एक जज पी सी तमांग ने भी सेकुलर गिरोह के भारतविरोधी दुशप्रचार का सिकार होकर इसरत जहां को निर्दोश करार दे दिया।( तमांग की आख्या में कहा गया है कि इसरत जहां और उसके साथ मारे गये उसके तमाम साथी निर्दोष थे तथा गुजरात पुलिस ने कथित आतंकियों को मुम्बई से पकडकर लाई, दो दिनों तक अवैध पुलिस अभिरक्षण में रखी और फिर उसे मार कर मुठभेड दिखा दिया गया। न्यायमूर्ति तमांग की आख्या कहता है कि गुजरात पुलिस ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि कुछ अधिकारियों को मुख्यमंत्री के सामने अपना कद उंचा करना था)
http://www.pravakta.com/?p=3663 ( पढ़ें)
बस फिर क्या था कांग्रेस ने खुलकर मोदी को मौत का सौदागर व आतंकवादी इसरत जहां को मासूम निर्दोष प्रचारित करना शुरू कर दिया। कांग्रेस की वेशर्मी व गद्दारी का सबसे बढ़ा प्रमाण उस वक्त सामने आया जब ये पता चला कि ततकालीन कांग्रेस सरकार नमे खुद माननीय न्यायलय में हलफनामा देकर ये सवीकार किया था कि इसरत जहां लश्करे तैयवा की आत्मघाती आतंकवादी थी।
लेकिन कांग्रेस जानती है कि हिन्दू वेवकूफ हैं वो कहां इतनी गहराई में जाकर कांग्रेस की गद्दारी का पर्दाफास करने की कोशिस करेंगे। इसलिए मुसलिम आतंकवादियों को खुश करने के लिए आतंकवादी का साथ देना शुरू कर दिया कांग्रेस के नेतृत्व में सारे सेकुलर गिरोह ने।
ऐसा नहीं कि इससे पहले कांग्रेस ने इस आतंकवादी का साथ नहीं दिया था। 2000 में इसरत जहां के जनाजे में कांग्रेस व समाजवादी पार्टी के हजारों कार्यकर्ता सामिल हुए ते।
ततकाली महाराष्ट्र सरकार ने इस आतंकवादी के परिवार को हरजाने के नाम पर आर्थिक मदद भी की थी।
यह वही कांग्रस है जिसने 2004 में सता में आते ही आतंकवादियों से लड़ाई के दौरान शहीद होने वाले अर्धसैनिक बसों को मिलने वाली आर्थिक सहायता ये कहकर कम कर दी थी कि सरकार के पास पैसे नहीं हैं।
http://samrastamunch.spaces.live.com/Blog/cns!1552E561935CF20F!532.entry (पढ़े)
आज जबकि NIA के सामने मुसलिम आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली ये सवीकार कर चुका है इसरत जहां लश्करे तैयवा की आत्मघाती आतंकवादी थी तब आप समझ सकते हैं कि कौन सही है और कौन गलत।
क्या ये सारी बातें इस बात का प्रमाण नहीं कि इसरत जहां द्वारा मोदी को मारने की योजना की जानकारी सेकुलर गिरोह व कांग्रेस को थी ।जानकारी ही नहीं वल्कि सेकुलर गिरोह का समर्थन भी इसरत जहां को प्राप्त था।
ऐसा नहीं कि ये सेकुलर गिरोह का एकमात्र झूठ है जिका पर्दाफास हुआ है। सैंकड़ों ऐसे झूठ हैं जो सेकुलर गिरोह ने हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों को बदनाम करने के लिए फैलाए और बाद में उन झूठों का परदाफस हुआ।
ऐसा नहीं कि अब इस गिरोह ने झूठ फैलाने वन्द कर दिए हें।
आपको याद होगा कि जब 2001 में ततकालीन गृहमन्त्री लालकृष्ण अडवानी जी ने सिमी(SIMI) को आतंकवादी संगठन घोषित किया तो समाजवादी पार्टी के नेतृत्व में कांग्रेस सहित सभी सेकुलरगिरोह के सदस्यों ने अडवानी जी को मुसलिम विरोधी करार दिया। कौन सही था कौन गलत इसका प्रमाण आगे चलकर तब मिला जब SIMI ने दर्जनों बम्मविस्फोट कर हजारों वेगुनाह हिन्दूओं का कत्ल कर लाखों को नुकसान पहुंचाया।
आपको वो भी याद होगा कि जब गोधरा में 2000 मुसलमानों की भीड़ ने ट्रेन में आग लगाकर 58 हिन्दूओं को जिन्दा जला दिया । हिन्दूओं से सहानुभूति जताना तो दूर कांग्रेस सरकार ने बैनर्जी नामक भ्रष्ट जज से झूठी रिपोर्ट तैयार करवाकर ये कहलवा दिया कि आग हिन्दूओं ने खुद लगावाई थी।
ये सब सेकुलर गद्दारों ने तब किया जब माननीय नयायालय द्वारा नानवटी आयोग के माध्यम से जांच जारी थी।अब आप खुद सोचो कि सेकुलर गिरेह किस हद तक मुसलिम आतंकवादियों का साथ देकर हिन्दूओं का नरसंहार करवाने पर तुला है।
सेकलर गिरोह द्वारा आतंकवादियों को दिए जा रहे खुले समर्थन का ही परिणाम है कि कशमीर घाटी में 60000 हिन्दूओं का कत्ल कर 500000 हिन्दूओं को वेघर कर दर-दर की ठोकरें खाने पर मजबूर कर दिया गया।
सेकुलर गिरोह के आतंकवादियों को खुले समर्थन के परिणामसवारूप ही आसाम में बंगलादेशी मुसलिम आतंकवादियों ने जड़े जमाकर हिन्दूओं को उजाड़ना सुरू कर दिया।
सेकुलर गिरोह के आतंकवादियों को खुले समर्थन के परिणास्वारूप ही हिन्दूओं का कत्ल व जबरदस्ती धर्मांतरण कर उतर-पूर्व के कई राज्यों में इसाईयों की जनसंख्या 98% तक जा पहूंची।
आतंकवादियों को खुले समर्थन के परिणास्वारूप ही आज माओवादी आतंकवादी सारे देश में कोहराम मचा रहे हें। कुल मिलाकर भारत के अधिकतर राज्य आतंकवाद प्रभावित है।
सेकुलर गिरोह का हौसला अब इतना बढ़ गया है कि उसने सीधे सेना को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। जिसका विबरण हम अपने पिछले लेखों में दे चुके हैं।
आप सब जानते हैं कि किस तरह मुसलिम आतंकवादियों द्वारा किए गए हमलों का दोष हिन्दूओं के सिर डालने के लिए लैप्टीनैंट कर्नल पुरोहित ,साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर सहित कुल 27 हिन्दूओं को विभिन्न जेलों में डालकर यातनायें दी जा रही हैं व मुसलिम आतंकवादियें की मददगार केन्द्र सरकार द्वारा हिन्दू आतंकवाद-हिन्दू आतंकवाद चिला चिलाकर हिन्दूओं को झूठे मामलों में फंसाकर देशभक्त हिन्दूओं को आतंकवादी के रूप में बदनाम करने की कोशिस की जा रही है जिसका परदाफास उस वक्त हुआ जब माननीय न्यायालय ने हिन्दूओं पर झूठे केश दर्ज कर लगवाया गया मकोका यह कहकर हटा दिया कि लगाए गए आरोप अधारहीन हैं।
कांग्रेस की वेशर्मी का एक और प्रमाण आपके सामने है कि पुणे बम्मविस्फोट के आरोपी( जो पहले भी अबैध रूप से हथियार रखने का दोशी पाया जा चुका है) को एक पखवाड़ें के अन्दर छोड़ दिया गया जबकि दूसरी तरफ माननीय न्यायलय द्वारा आरोप अधारहीन बताने के बाबजूद पिछले 2 बर्ष से हिन्दूओं को जबरदस्ती जेल में रखा गया है।
हमें उम्मीद ही नहीं पूरा विस्वास है कि वो वक्त बहुत जल्दी आएग जब जागरूक हिन्दूओं की मेहनत से बौद्धिक गुलाम हिन्दू सेकुलर गिरोह की असलियत पहचानकर जागरूक होकर सेकुलर गिरोह के मकड़जदाल में फंसे हिन्दूओं को जागरूक कर देश से आतंकवादियों व आतंकवादियों के समर्थकों का नमोनिशान मिटा देंगे।
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