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मोदीराज लाओ

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बुधवार, 18 दिसंबर 2013

अपने भक्तों के बापू आशा राम बनाम सेकुलर गद्दारों के आदर्श तैहलका के मालिक तरूण तेजपाल...इतना भेदभाव क्यों?


मित्रो पहले तो ये सपष्ट कर दें कि न तो  हम आशा राम जी के समर्थक हैं और न ही तहलका के मालिक तरूण तेजपाल के । दोनों का अपना अलग-अलग भूतकाल है दोनों का अपना-अपना बजूद है।

आशा राम ठहरे कथाबचक और तरूण तेजपाल ठहरा महिलाओं के अधिकारों और इमानदारी का तथाकथित रखवाला ।

आशा राम ठहरे इटालियन अंग्रेज के कट्टर बिरोधी और तरूण तेजपाल ठहरा इस अंग्रेज के टुकड़ों पर पलने वाला सपोला।

आशा राम के जीवन पर कितने भी लांछन सरकारों द्वारा क्यों न लगाए गए हों पर आसाराम जी का सामाजिक जीवन हमेशा समाज को सही दिशा देने का प्यत्न करता हुआ प्रतीत होता है दूसरी तरफ सेकुलर गद्दार और मिडीया अपने चहेते सेकुलर तरूण तेजपाल को कितना भी सर आँखों पर रखे पर तरूण तेजपाल का सामाजिक जीवन नशे, दुराचार, बयभिचार और षडयन्त्रों से भरपूर नजर आता है।

आशा राम ने बहुत पैसा बनाया लेकिन इस पैसे को बनाने के लिए आशा राम ने देश से गद्दारी नहीं की जबकि तरूण तेजपाल ने पैसा बनाने के लिए देश के दुशमनों के साथ हाथ मिलाकर भारत में एक विदेशी की गुलाम सरकार बनाने में मदद कर देश के साथ बहुत बड़ी गद्दारी की। एक तरफ जहां आशा राम ने अपने अन्दर कमजोरियां होते हुए भी समाज को सही दिशा देने की कोशिश की वहीं तरूण तेजपाल ने खुद नशे, ब्यभिचार और लूट में सामिल होने के साथ-साथ समाज को  भी उसी दिशा में ले जाने की कोशिश की और दुराचार के अनुकूल महौल बनाने में अपनी पूरी ताकत लगाई।

आशा राम पर छेड़छाड़ का आरोप लगते ही मडीया ने लगभग तीन महीने लगातार आशा राम को बदनाम करने के लिए सेकिलर गद्दारों से पैसा लेकर काल्पनिक कहानियं बनाकर उनके बिरूद्ध समाज में घृणा का बाताबरण बनाने का भरपूर प्रयास किया वहीं तरूण तेजपाल पर बालातकार का संगीन आरोप लगने के बाभी सेकुलर गद्दारों और मिडीया ने उसे नेक सेकुलर इनसान साबित करने का भरपूर प्रयास किया कहांनिया चलाने का तो प्रशन ही पैदा नहीं होता।

जहां आशा राम पर लगे छेड़छाड़ के आरोप को बालातकार बताने की भरपूर कोशिश की गई वहीं तेजपाल पर लगे बालाताकर के आरोप को आपसी मन मुटाब कहकर दबाने की भरपूर कोशिश की गई।

जहां आशा राम पर लगे आरोप के बाद उसकी बेटी और पत्नी को बदनामकर फंसाने की भरपूर कोशिश सेकुलर गद्दारों और मिडीया ने वहीं तरूण तेजपाल दारा अपनी बेटी की सहेली से बालातकार करने के बाबजूद उसके परिवार के उपर एक शब्द कहने की कोई भी कोशिश सेकुलर गद्दारों द्वारा नहीं की गई(करनी भी नहीं चाहिए लेकिन आशा राम के परिवार पर क्यों?)।    

आशा राम पर आरोप लगने के साथ ही हरामी सेकुलर गद्दारों द्वारा उनकी सम्मपति और वयक्तिगत जीवन के बारे में इतनी घृणा फैलाई गई कि सेकुलर सरकारों व बोद्धिक गुलामों ने प्रभाव में आकर  उनकी सम्मपतियों पर हमले शुरू कर दिए जबकि तरूण तेजपाल द्वारा दामिनी पर हुई दरिंदगी के जैसी ही दरिंदगी साबित हो जाने के बाबजूद सेकुलर गद्दारों और सेकुलर सरकारों व उनके पालतु मिडीया ने इस दरिंदे के बिरूद्ध न तो कोई घृणा का बाताबरण बनाया और नहीं कोई कार्यवाही करने की जहमत उठाई इस दरिंदे द्वारा बनाय गए ऐशो आराम के अड्डों पर आज भई  नशे से लेकर जुए औऱ वेशयवृति तक के हर तरह के गैर कानूनी ब आसामाजिक कुकर्म यथाबत जारी हैं।

आशाराम पर लगे आरोपों के कई महीने बीत जाने के बाद आज भी उनको बदनाम कर उनके प्रति घृणा पैदा के का कुकर्म यथाबत जारी है जबकि दरिंदे तरूण तेजपाल पर सेकुलर गद्दारों की खामोशी यथाबत जारी है।

मन में एक ही पर्श्न पैदा होता है कि आशा राम पर तो एक आरोप मात्र है तो भी आशाराम , उसकी बेटी, उसकी पत्नी उसके भक्त सबके सब को बदनाम कर उनके बिरूद्ध घृणा का बातबारण का निर्माण कर उनकी जिन्दगी को तबाह कर देने का षडयन्त्र आखिरकार इन सेकुलर गद्दारों द्वारा क्यों किया गया? जबकि दरिंदे तरण तेजपाल और तरूण तेजपाल की दरिंदगी पर पर्दा डालने का अपराध करने वाली सोमा चौधरी को हर तरह से बचाने का प्रयत्न सेकुलर गद्दारों द्वारा क्यों किया गया ?

मित्रो गहन विचार करने के बाद  यही कारण नजर आते हैं

1)पहला ये कि आसा राम सेकुलर गद्दारी हमेशा पोल खोलते रहे  जबकि तरूण तेजपाल सेकुलर गद्दार का अपना चहेता है।

2) आशा राम ने वयक्गत कमजोरिया होते हुए भी समाज को भारतीय संस्कृति का अनुशरण करने का रास्ता दिखाया वही रास्ता जिससे दुराचारी , ब्याभिचारी और नसैड़ी सेकुलर गद्दार नफरत करते हैं  और तरूण तेजपाल क्योंकि खुद   दुराचारी , ब्याभिचारी और नसैड़ी है इसीलिए सेकुलर गद्दार औरकार इसे पसन्द करते हैं।

3)आशा राम बिदेशी नेता, विदेशी सोच, बिदेशी मिडीया , बिदेशी बस्तुओं का विधीरो रहा है जबकि तरूण तेजपाल खुद भारत के बिदेशी शत्रुओं का ऐजेंट रहा  है और इस मामले में सेकुलर सरकारों और सेकुलर गद्दार उसके साथ हैं।

4) आशा राम र्चच द्वारा किए जा रहे धर्मांतरण व अन्य भारतविधी षडयन्त्रों के हमेशा बिरोधी रहे हैं जबकि तरूण तेजपाल और सेकुलर मिडीया व सेकुलर सरकारें पूरी तरह चर्च के इसारे पर काम करती हैं।

5)बापू आशा राम ने हिन्दूओं को आतंकवादी कहे जाने के बिरूद्ध  अन्य सन्तों के साथ मिलकर सेकुलर गद्दारों , सेकुलर सरकारों, सेकुलर मिडीया के बिरूध पानीपत की तीसरी लड़ाई की घोषणा की ।

अगर सेकुलर गद्दारों ने पाकिसतानी आतंकवादियों से मिलकर हेमंत करकरे को न मरवाया होता तो इसी तीसरी लड़ाई में petro dollar & Us dollar पर पलने वाले सेकुलर गद्दारों , सेकुलर पार्टियों और सेकुलर मिडीया का आज तक नमोनिशान मिट गया होता...         

मंगलवार, 11 अक्टूबर 2011

क्या पिछले 7 वर्षों के कुशासन से ये सिद्ध नहीं हो गया कि 2004 व 2009 में अडवाणी या भाजपा की नहीं वल्कि भारत की हार हुई थी?


आज देश में ऐसे गद्दारों की कमी नहीं जो ,इस्लामिक देशों से इस्लाम के

अधूरे काम को पूरा करने के लिए पाकिस्तान की ISI के माध्यम से मिल

रही खैरात व अमेरिका की खुफिया ऐजेंसियों CIA व FBI के माध्यय से

भारत में अंग्रोजों द्वारा सम्राज्यबाद में विकसित इसाईयत के ढांचे को सुदृढ़

करने के लिए मिल रहे टुकड़ों के बल पर हर उस देशभक्त को निशाना बना

रहे हैं जो भारत और भारतीय संस्कृति की बात करता हो ।

अडवाणी जी की यात्रा के शुरू होते ही ये गद्दार समाचार पत्रों व समाचार

चैनलों के माध्यमों का दुरूपयोग कर अडवाणी जी के साथ-साथ भारतीय

संस्कृति वोले तो हिन्दू संस्कृति को अपमानित करने के लिए तरह-तरह

का शब्द जाल बुनेंगे। ध्यान रहे हमें उन लोगों से कोई शिकायत नहीं जो

रचनात्मक अलोचना कर इस अन्दोलन को और ताकतवर बनाने का मार्ग

प्रशस्त करेंगे।

अडवाणी जी हमेशा ऐसे ही गद्दारों के निशाने पर हमेशा रहे हैं खासकर उस

वक्त तक जब तक कि उन्होंने जिन्ना जैसे आतंकवादी



advani
व एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी जैसी विषकन्या soniyaके वारे में कुछ नर्म शब्द कहकर ऐसे गद्दारों को

ये सन्देश नहीं दे दिया कि वो अब उन गद्दारों का उस तरह विरोध नहीं

करते जिस तरह का विरोध हिन्दुत्वनिष्ठ देशभक्त संगठन करते हैं।

कुलमिलाकर अडवाणी जी ने इस तरह के वयान देकर अपनी सारी

जिन्दगी समर्पित कर हिन्दुत्व को आगे बढ़ाने व भारत मां की सेवा करने

के लिए इन गद्दारों पर हमला कर जो प्रसिद्धि व विश्वसनियता हासिल की

थी उस पर पानी फेर दिया।

एक तरह से कहें तो अडवाणी जी ने हिन्दुत्व से अपना सीधा नता तोड़

लिया या यूं कहें कि हिन्दूओं ने अडवाणी जी द्वारा लगातार लगभग 4

दशकों तक समर्पण भाव से हिन्दूहित के लिए काम करने के बाबजूद

एकवार भी भाजपा को एकजूट होकर वोट न डालकर अडवाणी जी को

हिन्दूत्व से नाता तोड़ने के लिए मजबूर कर दिया।

अगर इन कुछ अपबादों को छोड़ दें तो अडवाणी जी के मुकाबले ठहरने

वाला देश में आज एक भी नेता नहीं है।

इमानदारी ये वो अडवाणी जी हैं जिन्नहोंने हबाला काण्ड में नाम उछाले

जाने के बाद संसद की सदस्यता तक त्याग दी। अडवाणी जी संसद में तब

तक नहीं गए जब तक कि उनपर लगे आरोप झूठे साबित नहीं हो गए।

आपको ये नहीं भूलना चाहिए कि अडवाणी जी के 4 दशकों से अधिक के

राजनीतिक जीवन में एकवार भी कोई भ्रष्टाचार का आरोप लगना तो दूर

किसी विरोधी द्वारा उनकी तरफ अंगुली उठाने तक नहीं उठाई गई आज

तक। जब उठाने की कोशिश भी हुई तो अडवाणी जी ने संसद के बाहर का

रास्ता अपनाकर उस षडयन्त्र को असफल कर दिया।
त्याग देश का हर वो नागरिक जो उस वक्त होश सम्भाल चुका था अच्छी

तरह जानता है कि अयोध्या में मर्यादापुर्षोतम भगवान श्री राम जी का

भव्य मन्दिर बनाने के लिए निकाली गई यात्रा के बाद अडवाणी जी देश की

राजनीति पर पूरी तरह छा चुके थे लेकि जब प्रधानमन्त्री बनने की बारी

आई तो उन्होंने सबसे पहले अटल जी का नाम आगे कर बढ़ों का सम्मान

करने की हिन्दूसंस्कृति की रीत को निभाते हुए ऐसे त्याग को अन्जाम

दिया जो 20 वीं शताब्दी के शुरू से चली आ रही विभाजनकारी राजनीति में

आज तक देखने को नहीं मिला।
भाईचारे की भावना विदेशियों के टुकड़ों पर पलने वाले गद्दार लाख

मना करें पर सच्चाई यही है कि इस्लामिक आतंकवादियों और लुटेरे

ईसाईयों की गुलामी के दौर में हुए बरबर अत्याचारों व अपमानों के

परिणामस्वारूप भारत की संसकृति के मूलाधार सर्वधर्मसम्भाव व हिन्दू

एकता के सिद्धांत को भुला चुका हिन्दू अडवाणी जी की यात्रा के बाद

एकवार फिर भारतीय संस्क़ति को सुदृढ़ करने के अपने मूल काम में लग

गया। वेशक आज अडवाणी जी हिन्दुत्व से अलग हो चुके हैं लेकिन ये बात

हिन्दूओं को कभी नहीं भूलनी चाहिए कि अगर आज हिन्दू राजनीतिक रूप

से विधर्मियों के हमलों का उचित प्रत्युतर देने की ओर आगे बढ़ रहा है तो

इसमें अडवाणी जी की भी अहम भूमिका रही है।

ये अडवाणी जी ही हैं जिन्होंने हिन्दूओं को समझाया कि विधर्मियों के

अत्याचारों के परिमामस्वारूप इस्लाम या इसाईयत अपना चुके कमजोर

भारतीयों के पूर्बज भी हिन्दू ही हैं इसलिए वो भी हिन्दू हैं हमे उनसे नफरत

करने के बजाए उन्हें अपने घर बापस लाकर विधर्मियों के षडयन्त्रों को

नाकाम करना है।
ये अडवाणी जी ही हैं जिन्होंने सवरी माता के जूठे वेर खाने वाले

मर्यादापुर्षोतम भगवान श्री जी के नाम को आगे बढ़ाकर छुआछूत करने

वाले मूर्ख हिन्दूओं को अपने वंचित भाईयों को गले लगाने के लिए प्रेरित

किया।
अगर आप अडवाणी जी द्वारा सृजित व संचित नए नेताओं की पंक्ति देखें तो

पांयेंगे कि उस पंक्ति में हर वर्ण-हर तपके-गांव व शाहर हर जगह के नेता हैं।
अडवाणी जी ने प्रेम-भाईचारे का सन्देश शब्दों के बजाए अपने कर्म से दिया।
परिवार के बजाए संगठन को महत्व एक तो आज देश में

अडवाणी जी के कद का एक तो कोई नेता है ही नहीं पर अगर कोई खुद को

अडवाणी जी के सामने खड़ा करना भी चाहे तो नहीं कर सकता। अडवाणी

जी अपने कद के देश में एकमात्र ऐसे नेता हैं जिन्होंने अपनी सारी जिन्दगी

में परिवार के बजाए संगठन को महत्व दिया।

आज भी आप देख सकते हैं कि अडवाणी जी के परिवार का एक भी सदस्य

अडवाणी जी के कन्धे पर सवार होकर अपनी ही पार्टी के वाकी बरिष्ठ व

कर्मठ नेताओं को कुचल कर आगे बढ़ने का दुहसाहस नहीं कर रहा है न ही

आज तक किया है। जैसा कि प्राय वाकी सभी पार्टियों व भाजपा के भी कई

नेताओं के परिवारों द्वारा किया जा रहा है। सुना है कि गुलाम कांग्रेसियों को

परिवार तो परिवार पर नैहरू परिवार के पालतु जीव-जन्तुओं का भी मान

सम्मान करना पड़ता है।
देश की सर्वोचता अडवाणी जी के किसी भी कर्म के मूल में आप पायेंगे

कि उन्होंने हमेशा देश को सर्वोपरि माना है। यही बजह है कि आज चोरों

और गद्दारों की सरकार के देशविरोधी कुकर्मों और षडयन्त्रों को देखकर

आज देश में अगर कोई सबसे अधिक दुखी है तो वो अडवाणी जी हैं।

इसीलिए वो अपनी व लोगं पीड़ा सांझी करने के लिए रथयात्रा निकाल कर

आम लोगों के बीच जा रहे हैं।
जो सोचा-समझा वही कहा और जो कहा वही किया
हमारे विचार में अडवाणी जी की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि उन्होंने

आज तक अन्तरात्मा के विरूद्ध जाकर न कुछ कहा है न माना है न किया है।
आज तक अडवाणी जी ने अपने या संगठन के हित की खातिर देशहित के

विरूद्ध कुछ नहीं किया।

आज वेशक वो हमें देशभक्त हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों से दूरी बनाते हुए प्रतीत

हों पर हमें विश्वास रखना चाहिए कि अडवाणी जी हिन्दुत्वविरोधी-

देशविरोधी लोगों के साथ सम्पर्क बनाकर उन्हें हिन्दुत्व के पाले में लेकर

आयेंगे न कि खुद उनकी हिन्दूविरोधी–देशविरोधी मानसिकता का सिकार

हो जायेंगे।
जरा सोचो इतने महान ,त्यागशील प्रखर देशभक्त की जगह एक विदेशी एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के गुलाम मनमोहन सिंह को प्रधानमन्त्री बनाकर देश ने क्या खोया और क्या पाया?
2004-2009 में अडवाणी नहीं देश हारा

हम अच्छी तरह जानते और समझते हैं कि देश के हारने की बात कहना वो

भी सिर्फ एक व्यक्ति को उपर उठाने किए किसी अपराध से कम नहीं।

लेकिन अगर आप इस चोरों और गद्दारों से भरी पड़ी हिन्दूविरोधी-

देशविरोधी सरकार के भारतविरोधी कुकर्मों पर बिस्तार ने नजर दौड़ायेंगे

तो पायेंगे कि वाकई 2004 में इस विदेशी एडवीज एंटोनिया अलवीना

माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम सरकार का सता में आना भाजपा या

अडवाणी की हार नहीं बल्कि देश की हार है।

किसी भी सरकार द्वारा थोड़ी बहुत गलतियां करना चाहे वो किसी भी क्षेत्र से

जुड़ी हों स्वाभाविक है लेकिन जब सरकार देश की ही जड़ खोदने में लग

जाए तो आप उसे गलतियां नहीं देशविरोधी षडयन्त्र कहेंगे।
· कोर्ट में रामसेतु से जुड़े मामले में मर्यादापुर्षोतम भगवान श्री राम के अस्तित्व को नकारना।
· 2004 में सता में आते ही पोटा समाप्त कर न्या आतंकवाद विरोधी कानून

न बनाकर आतंकवादियों को भारतीयों के कत्लयाम की खुली छूट देना।

· 2004 में सता में आते ही अर्धसैनिक बलों के जवानों के, आतंकवादियों से

लड़ते हुए शहीद हो जाने पर, उनके परिबार को मिलने वाली विशेष आर्थिक

सहायता को, आर्थिक तंगी का हबाला देकर बन्द करना व बाद में

सुरक्षाबलों के हाथों मारे जाने वाले आतंकवादियों के परिवारों को लाखों

रूपए की सहयता देना।
· सेना में हिन्दू-मुसलिम की गिनती करने के आदेश देकर सेना को सांप्रदायिक आधार पर विभाजित करने का षडयन्त्र।

· देश के संसाधनों का संप्रदायिक आधार पर विभाजन करने के

साथ-साथ बच्चों तक की छात्रवृतियों का सांप्रदायिक आधार पर विभाजन कर देना।
· इस्लमिक आतंकवादियों द्वारा किए गए हमलों के लिए देशजागरण के

काम में लगे साधु-सन्तों-साधवियों व देश की रक्षा मे लगे सैनिकों को

जेल में डालकर इस्लामिक आतंकवादियों को बचाने के लिए संसार में

भारतीय संस्कृति को बदनाम करने का षडयन्त्र।

· सन्तों को ठग व ओसामा विन लादेन जैसे इस्लामिक आतंकवादी को जी

कहकर मुसलमानों के बच्चों को आतंकवादी बनने के लिए व हिन्दूओं के

बच्चों का सन्त न बनने के लिए संकेत देना।
· सारे देश में वन्देमातरम् का गान करने का आदेश देकर मुठीभर

इस्लामिक आतंकवादियों के कहने पर आदेश को वापस लेकर मुसलमानों

के बच्चों को आतंकवादियों की बात मानने पर मजबूर करना व सारे

मुसलमानों को बन्देमातरम् का विरोधी प्रचारित कर देशभक्त मुसलमानों

का अपमान करना।
· महाराष्ट्र सहित सारे देश में अंडरबर्ड का मुकाबला करने वाले सार्प सूटरों

को जेलों में डालकर गुण्डो को आम जनता को धमकाकर लूटने व जनता

पर अत्याचार करने की खुलीछूट देना।
· सोराबुद्दीन,इशरत जहां जैसे आतंकवादियों को मार गिराने वाले जवानों

को जेलों मे डालकर आतंकवादियों को न मारनें के लिए जवानों पर

दबाबा बनाना व आम जनता पर आतंकवादी हमले करने के लिए खुली
छूट देना।
· आतंकवादियों को निर्दोष बताकर शहीद मोहन चन्द शर्मा के बलिदान का

अपमान कर आतंकवादियों का हौसला बढ़ाना व सुरक्षाबलों के जवानों का

हौसला तोड़ना।
· दिल्ली में भारत को तोड़ने की बात करने वाले गिलानी व अरूंधति राय को

खुली छूट देना ,कातिल माओवादी सेन को अपना सलाहकार बनाना व

देशभक्ति की बात करने वाले स्वामी रामदेव व उनके समर्थकों पर गोले

बरसाना।
· अफजल की फांसी को मानीय न्यायालय की फटकार और हमले में शहीद हुए परिवारों के विरोध के बाबजूद आज तक रोके रखना व

देशभक्त हिन्दूसंगठनों के कार्यकर्ताओं और समर्थकों को जेलों में डालना व फांसी पर लटकाने के ,षडयन्त्र रचना।
·
आदर्श,CWG,2G,3G,S-Band ,कशमीर में सेना की भूमि बेचने,

जैसे घोटालों के माध्यम से देश को लूटना और लूट का विरोध करने वालों

को जेल में डालना ,उनका अपमान करना ,उनके विरूद्ध जांच बैठैाकर

सरकारी ऐजेंसियों का दुरूपयोग करना।
· कालेधन को भारत बापस लाने के लिए अभियान चलाने वाले स्वामी

रामदेब व उनके समर्थकों को धमकाकर व प्रताड़ित कर गद्दारों द्वारा लुटे

गए धन को बापस लाने के लिए उठने वाली हर आबाज को कुचलने का

प्रयत्न करना।
· भ्रष्टाचार के विरूद्ध आबाज उठाने वाले अन्ना हजारे जी को

अपमानित करना ,उनको धोखा देना व जेल भेजकर लोगों को भ्रष्टाचार के विरूद्ध आबाज न उठाने के लिए धमकाना।

· इस्लामिक आतंकवादी मदनी को छुड़ाने के लिए कानून बनबाना व उसे इलाज के लिए मंहगे औषधालय में भर्ती करवाना और साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को जबर्दस्ती आतंकवादी कहकर जेल में डालना व जरूरी इलाज तक उपलब्ध न करवाना।
· एक विदेशी एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की

गुलाम सरकार बनबाकर शहीद भगत सिह जैसे लाखों शहीदों द्वारा

विदेशियों से सता छीन कर भारतीयों के हाथ में देने के लिए किए गए

बलिदानों का अपमान कर उनकी आत्मा को लहुलुहान करना।
· शर्म-अलशेख में गुलाम प्रधान्मन्त्री ने अपनी मन्दबुद्धि का

परिचय देते हुए पाकिस्तान के साथ एक ऐसे घोषणा पत्र पर अपनी

सहमति दे दी जो पाकिस्तान में आतंकवाद के लिए भारत को दोषी
ठहराती है।
· इस्लामिक देशों के इसारे व आर्थिक बल पर वर्षों से लाखों

भारतीयों का खून बहाने वाले आतंकवादियों की सरणगाह व प्रशिक्षण

स्थल पाकिस्तान को आतंकवाद का पीड़ित बताकर पाकिस्तान को

भारतीयों का खून बहाना जारी रखने के लिए समर्थन देना।
· सरकार के मन्त्री द्वारा मुम्बई पर हुए भारत के इतिहास के

सबसे बड़े इस्लामिक आतंकवादी हमले को हिन्दूओं द्वारा किया गया

बताना क्योंकि हमले में मारे जाने वालों में वो व्यक्ति भी सामिल था जो

सरकारी दबाब में आकर मुसलिम आतंकवादियों द्वारा किए गए हमलों के

लिए हिन्दूओं को फंसा रहा था। बाद में सरकार चला रही कांग्रेस पार्टी के

महासचिब द्वारा आतंकवादियों के समर्थक द्वारा इस हमले के लिए RSS को

दोषी ठहराने वाली पुस्तक का विमोचन कर आतंकवादियों को खुला

समर्थन देना।
· आम लोगों को मरने के लिए मजबूर करने की हद तक अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए मंहगाई को आसमान तक पहुंचा देना।

क्या आपने कभी सोचा कि जिनके घर से न तो सरकारी नौकर है न ही कोइ दुकानदार वो भला जिन्दगी कैसे जी रहे होंगे?
अब आप खुद सोच लो कि इस सबसे अडवाणी जी advani.jpg1को क्या निजी नुकसान हुआ ? कोई नहीं?

अगर नुकशान हुआ तो देश की आम देशभक्त जनता का जो चोरों और

गद्दारों के 7वर्ष के कुशासन के बाद आज न तो पेट भर खाना खा सकते

हैं ,न खुद को सुरक्षित महूसस कर सकते हैं और न हीं दुनिया के सामने

सिर उठाकर कह सकते हैं कि हम भारतीय हैं क्योंकि इस सरकार ने भारत

को भ्रष्टाचार,मंहगाई और आतंकवाद के लिए सारी दुनिया में बदनाम कर

दिया।
कुल मिलाकर ये हार भारत की है न कि किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति की नहीं।

शनिवार, 25 दिसंबर 2010

GSAT-5P की असफलता का एंटोनिया CONECTION




आज दूरदर्शन के सरकारी चापलूस की भूमिका में चले जाने के कारण बहुत कम लोग दूरदर्शन के कार्यक्रम देखते हैं लेकिन आज भी आम व मजबूर लोगों के लिए दूरदर्शन , रेडियो के बाद सूचना का एकमात्र साधन है। हम भी दूर्दरशन के कार्यक्रम बहुत कम देखते हैं। लेकिन क्योंकि आज GSAT-5P के प्रक्षेपण का सीधा प्रसारण दूरदर्शन दिखा रहा था इसलिए हम दूरदर्शन के साथ चिपक कर बैठ गए।


GSAT-5P प्रक्षेपण कुछ मिनट के बाद ही विस्फोट के साथ असफल हो गया तो मन को बहुत दुख हुआ ।क्रोध भी आया कि जब रूस से लाया गया क्रायोजैनिक इंजन खराब था तो उसे वापस रूस को लौटाने के बजाए देश का 175 करोड़ रूपया बरबाद करना क्यों जरूरी समझा गया।क्रायोजैनिक तकनीक बहुत ही उच्चतकनीक है इस तकनीक पर आधारित इंजन में लीकेज का मतलब ही कार्यक्रम की असफलता की गारंटी है। लेकिन खैर जैसा अक्सर होता है अब बैसे ही इस कार्यक्रम में इस वेवकूफाना हरकत को छुपाने के प्रयास शुरू हो चुके होंगे।


इसके बाद जो हुआ वो और भी चौंकाने वाला था। जैसे ही निर्धारित समय पर GSAT-5P के असफल प्रक्षेपण के बाद सीधे प्रसारण का ये कार्यक्रम बन्द हुआ बैसे ही ईसाईयत का प्रचार-प्रसार शुरू हो गया । कुछ समय तक कुछ अंग्रेज लड़के–लड़कियां ईसाईयत के गुणगान के लिए वेसुरे गीत गाते रहे बाद में हमारे दूरदर्शन ने एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के देश में रोम से सीधा प्रसारण शुरू कर दिया ।


आप सब जानते हैं कि दूरदर्शन हम सब भारतीयों के खून-पसीने की कमाई के पैसे से चलता है।उस मेहनत से कमाए गए पैसे को एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के इसारे पर ईसाईयत के प्रचार प्रसार के लिए खर्च करना वेहद आपतिजनक है गुनाहकारों के विरूद्ध उचित समय पर कड़ी कार्यवाही होना अति आवस्यक है।


प्रक्षेपण की असफलता के एक-दम बाद ईसाईयत के प्रचार-प्रसार ने हमारे मन में कई संकायें पैदा कि । क्योंकि ये पहले से ही पता था कि क्रायोजैनिक इंजन खराब है तो भी उस खराब इंजन के साथ ही GSAT-5P के प्रक्षेपण निर्णय कहीं एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के प्रभाव में तो नहीं किया गया।


बहुत कम लोग जानते हैं कि रूस ईसाईयत के प्रचार-प्रसार के लिए अमेरिका से भी जयदा प्रतिबद्ध है व एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी को भारत में पलांट करने में रूस की ही खूफिया ऐजेंसी का हाथ था। पलांट करने का मकसद भी भारत में हिन्दूओं को अपदस्त कर ईसाईयों के हाथों में सता को पहुंचाना था ।आज सरकार की सर्वेसरवा एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी से लेकर रक्षामन्त्री एक के एन्टनी तक सब जगह ईसाई ही दिखाई दे रहे हैं।


यहां तक कि अगर इसाई के उपर भ्रष्टाचार के कितने भी बड़े आरोप क्यों न लगे हों उन्हें बड़ें पदों पर ऐंटोनिया की पकड़ मजबूत करने के लिए विठाया जा रहा है। आप पी जे थामस को ही ले लें जिसे दो पाक-साफ हिन्दूओं को दरकरार कर CVC प्रमुख बनाया गया वो भी विपक्ष की आपति के बाबजूद। बाद में इस भ्रष्ट की खबर माननीय न्यायालय ने लेकर ऐंटोनिया के हिन्दूविरोधी षडयन्त्र को जनता के सामने रखा।


एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी व उसका बेटा राहुल गंदगी किस हद तक हिन्दूओं के विरूद्ध हैं उसका सबसे बड़ा प्रमाण Wiki-leaks के उस रहसयोउधघाटन में मिला जिसमें बयाता गया कि किस तरह ये सपोला अमेरिका के राजदूत को हिन्दूओं के विरूद्ध भड़का रहा था।


अगर इस सपोले के अन्दर भारतीयों का खून होता तो ये ऐसी गद्दारी नहीं करता । हमें तो लगता है कि एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के ईसारे पर खराब क्रायोजैनिक इंजन का प्रयोग कर प्रक्षेपण की असफलता सुनिस्चित कर ईसाईयत का प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया गया।


क्योंकि आज इस मौके पर अधिकतर भारतीय दूरदर्शन देख रहे थे तो प्रक्षेपण का प्रसारण वीच में ही बन्द होने पर एकदम ईसाईयत का प्रसारण शुरू होने पर अधिकतम लोगों तक एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी का ईसाईयत का संदेश पहूंचा।


इस संदेश में पोप ने पहले तो ये इशु को भगवान का अबतार बताया व बाद में इशु को भगवान का वेटा कहकर संबोधित किया।मतलब खुद पोप ही इशु के वारे में भ्रमित हैं। उसके बाद पोप ने संसार के विभिन्न देशों में रह रहे ईसाईयों को वहां की सरकारों व समाजों के विरूद्ध लड़ाई छेड़ने के लिए उचित समय का इन्तजार करने के लिए कहा। मतलब पोप का ये भाषण न केवल शांति और भाई चारे के विरूद्ध था वल्कि साथ ही दुनिया में हिंसा बढ़ाने बाला भी था। ऐसे हिसंक भाषण का प्रचार-प्रसार शांतिप्रिए भारतीयों के पैसे से करना कहां तक उचित है?






रविवार, 26 सितंबर 2010

भारतविरोधी UPA सरकार की गद्दार मुसलमानों को भारतीय सेना पर हमले करने की खुली छूट!

UPA के नेतृत्व में हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह लगातार भारतविरोधा आतंकवादियों का साथ दे रहा है । आप सब जानते हैं कि खुद सरकार कह चुकी है कि सैनिकों पर पत्थरों से हमाला करने वाले मुसलमान पाकिसतान समर्थक आतंकवादी हैं जो जिहादी आतंकवादी गिरोह लशकरे तैयवा के इसारे पर सैनिकों पर हमला वोल रहे हैं।
http://samrastamunch.blogspot.com/2010/07/blog-post_09.html

अब इस हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की UPA सरकार ने घोषणा की है कि मसजिदों व मदरसों में योजना बनाकर सैनिकों पर हमला करने वाले प्रत्येक पत्थरवाज के परिवार को 5 लाख रूपए दिए जायेंगे ताकि इन पत्थरबाजों के परिवारों का भारतीय सेना पर हमला करने का हौसला बना रहे ।साथ ही जिन मुसलमानों ने अभी तक भारतीय सैनिकों पर पत्थरवाजी नहीं की थी उन्हें भी प्रेरणा लेकर ये 5 पांच लाख प्राप्त करने के लिए अपने बच्चों को पाठशाला भेजने के बजाए सैनिकों पर हमले करने में लगा देना चाहिए।( ध्यान रहे कि ये वही सरकार है जिने 2004 में सता में आते ही अर्धसैनिक बलों के जवानों के देश की रक्षा की खातिर शहीद हो जाने पर मिलने वाली सहायता यह कहकर कम कर दी कि सरकार के पास पैसा नहीं मतलब देशभक्तों के लिए पैसा कम है पर गद्दारों के लिए कोई कमी नहीं)

इन पत्थरबाज गद्दार मुसलमानों पर मेहरवान होते हुए हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की UPA सरकार ने कहा कि जो पत्थरबाज देशभक्त सैनिकों का कत्ल करने की कोशिश में पकड़कर जेलों में डाले जा चुके हैं उन्हें भी रिहा कर दिया जाएगा ताकि पत्तवारबाजों की संख्या कम न हो सके।

हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की UPA सरकार ने इससे भी आगे जाते हुए मुसलमानों द्वारा सैनिकों पर किए गए हमलों व श्रीनगर में फहराए गए पाकिस्तानी झंडे जैसी हरकतों से खुश होकर इन गद्दारों को 10000000( 100 करोंड़) का इनाम देने की घोषणा की।

ये मुसलिम आतंकवादी कशमीर में अपनी स्थिति मजबूत कर सकें ताकि इन्हें भारत से अलग होकर पाकिस्तान के साथ मिलने में आसानी रहे इसके लिए हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की UPA सरकार ने भारतीय सैनिकों को आतंकवादियों द्वारा बताए गए स्थानों से हटाने की भी घोषणा की।

सरकार ने बायदा किया कि सैनिकों द्वारा आत्मरक्षा व देश की रक्षा के लिए प्रयोग किए ज रहे AFSPA को भी शीघ्र हटा दिया जाएगा।

ध्यान रहे कि 11 जून से शुरू हुए इन गद्दार मुसलमानों के हमलों में सैंकड़ों सैनिक घायल हो चुके हैं व दर्जनों सैनिक शहीद हो चुके हैं।

हमें यह भी ध्यान रकना चाहिए कि 11 जून को मुसलमानों के हमले शुरू होने का कारण यह था कि हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की UPA सरकार ने जिहादी आतंकवाद समर्थक उमर अबदुल्ला के कहने पर कशमीर से हजारों सैनिकों को उन स्थानों से हटा लिया था जहां पर आतंकवादियों को खदेड़कर भारत का नियन्त्रण स्थापित करने के लिए सैंकड़ों सैनिकों ने अपनी कुर्वानी दी थी। पर इस हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की UPA सरकार ने आतंकवादियों को फायदा पहंचाने के लिए शांति स्थापित करने के नाम पर वहां से हजारों सैनिकों को हटाकर उन क्षेत्रों को फिर से आतंकवादी मुसलमानों के हबाले कर दिया।

समझो मेरे प्यारे देशभक्त हिन्दूओं वरना वो दिन दूर नहीं जब इस हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की UPA सरकार की मदद से सारा भारत एकवार फिर इन मुसलिम आतंकवादीयों के कब्जे में चला जाएगा।

हमें आज यह प्रण करना चाहिए कि अगर कसमीर पर भारत का नियन्त्रण कंम करने की कोशिसें इसी तरह आगे बढ़ेंगी तो हर हाल में हम एक-एक मुसलिम आतंकवादी को चुन-चुन कर तब तक मारेंगे जब तक सारा भारत ,भारतविरोधी आतंकवादियों से मुक्त न हीं हो जाता।

http://samrastamunch.blogspot.com/2010/07/blog-post_12.html

शनिवार, 21 अगस्त 2010

NGOs के माध्यम से चर्च के भारत-विरोधी षड्यन्त्र-1




विश्वभर में ईसाईयत के इतिहास में द्वितीय विश्वयुद्ध से एक नए पतन का सूत्रपात हुआ।युद्ध के अन्त में चर्च ने व्याकुलता से देखा कि अमेरिका के नेतृत्व में पशचमी ईसाई ताकतें विजयी हुई लेकिन 16वीं शताब्दी से बढ़ते जा रहे उपनिवेशवाद व साम्राज्यवाद संवेग रूक गया व क्षीण होना शुरू हो गया।जिसके निम्न परिणाम हुए।।।


1. राजा व प्रजा दोनों के ईसाई होने के बाबजूद यूरोप व रूस और उसकी कठपुतली सरकारों से चर्च का नियन्त्रण समाप्त हो गया। 1949 में इसी समूह में चीन भी शआमिल होगया जिससे चर्च को और धक्का लगा।


2. विश्व युद्ध के दौरान अन्दर से कमजोर होने व आजाद हिन्द सेना के डर से ईसाई सम्राज्यवाद को भारत से भी हटना पड़ा परिणामस्वारूप एशियाई व अप्रीकी देशों में स्वतन्त्रता अन्दोलनों ने जोर पकड़ा व बहुत से देश स्वतन्त्र राज्य बन गए।


3. विदेशी उपनिवेशवादियों और दमनकारियों का पोषक होने के कारण शासन की समाप्ति के साथ ही चर्च पर हमले होने शुरू हुए।चीन की देशभक्त सरकार ने अपने यहां से 1950-51 तक सब ईसाई मिशनरियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया।


4. भारत में बेशक ईसाईयों के चाटुकार नेहरू जैसे नेता चर्च के प्रभाव को बचाने का हर सम्भव प्रयास कर रहे थे पर जनता में इतना रोष था कि लोगों ने कुतों के नाम तक ईसाई रखने शुरू कर दिए। इसी प्रकार लगभग सब नवस्वतन्त्र देशों में धर्मांतरण की संम्भावनायें क्षीण होती चली गईं।


5. विश्वयुद्ध के पश्चात चर्च को अपने केन्द्रस्थल यूरोप और अमेरिका में अयन्त गम्भीर संकट का सामना करना पड़ा।औद्योगिक क्रांति के परिणामस्वारूप इन देशों में अति भौतिकवादी व सुविधाभोगी समाज की रचना हुई जिसकी चर्च में कोई आस्था नहीं थी। क्योंकि चर्च ने हमेशा एक राजनीतिक संस्था के रूप में काम किया है इसलिए आध्यातमिकता के अभाव के कारण नई पीढी की चर्च में कोई रूचि नहीं थी।बेशक शासनाध्यक्ष द्वारा बाईबल की शपथ लेने के बाबजूद जनता व चर्च में गृहयुद्ध जैसी स्थिति थी।USA व अफ्रीकी देशों में काले लोगों की शक्ति बढ़ रही थी। काले इसाई लोगों व गोरे इसाई लोगों के बीच संघर्ष तीव्र हो रहा था।क्यूवा में फ्रिडेल कास्त्रो की क्रांति की सफलता के कारण अन्य अप्रीकी देशों में भी गोरिला युद्ध को बढ़ावा मिल रहा था। ऐसे में चर्च के सामने प्रश्न खड़ा हुआ कि भ्रष्ट तानशाहों का साथ दिया जाए या फिर बहुसंख्यक काले लोगों के संघर्ष में साथ दिया जाय। इससे पहले कि चर्च कोई निर्णय लेता कुछ विशप दक्षिणी अमेरिका में काले लोगों के पक्ष में संघर्ष में कूद पड़े और मुक्तियुद्द के प्रेरक बने।1960 में ब्राजील में जनजागरण करने वाले पालो प्रेरे नाम के पादरी को वहां की सरकार ने 1964 में नजरबन्द कर 1968 में देशनिकाला दे दिया।1971 में उसे WCC (WORLD COUNCIL OF CHURCHES)का परामर्शदाता चर्च ने नियुक्त किया।


इसी पोलो प्रेरो नाम के पादरी ने मार्कसवाद तथा चर्च दोनों का घोलमेल किया। यह पादरी एक स्थान पर लिखता है कि “मैं ब्राजील की गन्दी बस्तियों में मार्क्श के कारण नहीं अपितु ईसा के कारण आया। बस्ती के लोगों ने मुझसे कहा, कि जाइए “ मार्क्स को जानिए” उनकी जिद ने मुझे मार्क्स के पास भेजा।अब में सहज रूप से दोनों को जानता हूं।”

गुरुवार, 12 अगस्त 2010

क्या आतंकवादियों का समर्थन करने वाले नेताओं व छदम मानवाधिकारवादीयों को खुलेआम गोली से नहीं उड़ा देना चाहिए?

आज भारत में लोकतन्त्र का अर्थ हो गया है वेसमझ जनता द्वारा, गद्दारों की फूट चालो राज करो के षडयन्त्रों का सिकार होकर देशविरोधियों के हाथ मजबूत कर आतंकवादियों व देश के दुशमनों के लिए के लिए साशन ।अगर हम भारत के वर्तमान हालात का गहराई से अध्ययन करें तो सिर्फ एक बात उभर कर सामने आती है कि भारत के भीड़तन्त्र के चारों सत्मभ किसी न किसी रूप में देश के दुश्मन आतंकवादियों व अपराधियों को फायदा पहुंचाने के औजार बन गए हैं।


इस भीड़तन्त्र के चौथे सतम्भ मीडिया का एकमात्र काम बन गया है देश के शत्रुओं के अनुकूल बाताबरण बनाना, देसभक्तों को खलनायक के रूप में प्रसतुत करना व इसके बदले में देश के शत्रुओं से मोटी रकम प्राप्त करना।


इस भीड़तन्त्र के प्रमुख सत्मभ संसद के रहनुमाओं का काम बन गया है अपराधियों के बचाब के लिए कानून बनाना ब देश के शत्रुओं के पक्ष में बयानबाजी करना।


लोकतन्त्र की रक्षा के लिए एक मात्र उमीद न्यायापालिक भी धीरे-धीरे मिडीया व संसद के मार्ग पर आगे बढ़ते हुए गद्दारों के हाथों विकती नजर आ रही है ।


आतंकवादी इशरत जहां व सोराबूद्दीन के मामले न्यायपालिका की देश से गद्दारी के सबसे बड़े उधाहरण हैं। न्यायपालिका भारतीय जनमानस की भावना व रितीरिवाज के प्रति कितनी संवेदनहीन है इसका सबसे बढ़ा उधाहरण है Live In relationship में अदालत द्वारा भगवान श्री कृष्ण जी का नमा उछालना विना ये सोचे समझे कि एतिहासिक तथ्य इसके विलकुल विपरीत हैं।


आज जब देश के सामने माओवादी आतंकवाद मुसलिम आतंकवाद के वाद सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरा है उस वक्त केन्द्र सरकार के ,ममता बैनर्जी जैसे मन्त्रियों व दिगविजय सिंह जैसे मानबताविरोधी नेताओं द्वारा खुलेआम माओवादी आतंकवादियों का समर्थन करना इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि आज देश व आमजनता से गद्दारी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह से सबन्धित नेताओं की आदत बन चुका है।


हमारे विचार में माओवादी आतंकवादी संगठन PCPA के साथ मेघा पाटेकर व अग्नीवेश द्वारा मंच सांझा करना धर्मनिर्पेक्ष मानवाधिकारवादियों व देश के शत्रुओं के हिसंक गठजोड़ का विलकुल सपष्ट उधारण है।


हमार विचार में आज जो भी व्यक्ति भारतविरोधी आतंकवादियों का पक्ष लेता है, चाहे वो कितने भी उंचे पद पर क्यों न हो को खुलेआम गोली से मार डालना चाहिए वरना देश के आम नागरिक को अपने जीवनयापन के लिए आतंकवादियों का मोहताज होना पड़ेगा जो किसी भी तरह से सवीकार नहीं किया जा सकता।