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मोदीराज लाओ

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भारत बचाओ
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शुक्रवार, 9 दिसंबर 2011

विदेशों द्वारा Plant किए जा रहे इस विस्फोटक को कौन निष्क्रिए करेगा?---संदर्भ NGOs के माध्यम से धर्मांतरण, आतंकवाद, अलगाववाद, दाननबाधिकार, हिन्दूविरोध-देशविरोध व धर्मनिर्पेक्षता के लिए 50,000 करोड़ रूपए।


ngo8आज भारत में शायद ही कोई ऐसा नागरिक होगा जिसने आतंकवाद, धर्मांतरण, गैर - लाभकारी स्वैच्छिक संगठन, धर्मनिर्पेक्षता, अलगाववाद, मानबाधिकार, बुद्धिजीवि, हिन्दूविरोध-देशविरोध का नाम नहीं सुना होगा। लेकिन ऐसे बहुत ही कम होंगे जो ये जानते हों कि इन सब की जड़ में एक ही है और वो है विदेशी षडयन्त्र।
1947 में  लेड़ी माऊंटवेटन को हथियार बनाकर नेहरू का उपयोग कर भारत का विभाजन करवाने के बाद अंग्रेजों ने ये मान लिया कि उन्होंने एक हिन्दू राष्ट्र भारत को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया। लेकिन 70 का दशक आते-आते इन बिदेशियों को ये सपष्ट हो गया कि भारत एकवार फिर राख से उठ खड़ा हुआ। ये वही दशक है जब इन्दिरा गाँधी ने बिदेशी दबाब के आगे न झुकते हुए परमाणु बिस्फोट कर भारत को ताकतबर राष्ट्रों की पंक्ति में खड़ा कर दिया।
लेकिन ये बो वर्ष भी है जब विदेशी ताकतों ने ओछे हथकंडे अपनाकर इन्दिरा गांधी को भारत का संविधान बदलने पर मजबूर कर दिया। इन विदेशी ताकतों ने एक सोची समझी रणनिती के तहत हिन्दूओं को कमजोर करने के लिए पैसे व ताकत के बल पर भारतीय संविधान में धर्मनिर्पेक्षngo4 शब्द जुड़वा दिया जो कि भारत की सर्वधर्मसम्भाव की धारणा के विलकुल विपरीत है।
अगर आप भारत के हालात पर गहरी नजर डालेंगे तो पायेंगे कि भारत के संविधान में धर्मनिर्पेक्ष शब्द जुड़ने के साथ ही भारत में गैर - लाभकारी स्वैच्छिक संगठनों के नाम पर हिन्दूविरोधियों-भारतविरोधियों का एक ऐसा कुनबा तैयार होने लगा जिसने  भारत में अलगाववाद व आतंकवाद को जन्म देने के साथ-साथ धर्मांतरण की गति बढ़ाते हुए सेकुलर गद्दारों की एक ऐसी फौज खड़ी की जो आज खुलकर भारत की एकता और अखण्डता को ललकार रही है।
वेशक इन भारतविरोधियों की गतिविधियां 70 के दशक में शुरू हुईं लेकिन 90 के दशक में आर्थिक उदारीकरण ने इन भारतविरोधियों के लिए बलबर्धक का काम किया।उसके बाद तो इन गैर- लाभकारी स्वैच्छिक संगठनों को तो मानो पंख लग गए क्योंकि अब विदेशों से इन्हें पैसा मिलना विलकुल आसान भी हो गया और ज्यादा भी मिलने लगा।  इन गैर- लाभकारी स्वैच्छिक संगठनों को पंख लगने के साथ ही अलगाववाद, आतंकवाद, धर्मांतरण ,मानबाधिकारबाद और देशविरोध-हिन्दूविरोध को भी पंख ngo3लग गए।
कुल मिलाकर आज भारत में राष्ट्रबाद इतना कमजोर हो गया है कि एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम सरकार इन गैर- लाभकारी स्वैच्छिक संगठनों के सहयोग से भारत में सचर कमेटी रिपोर्ट, रंगनाथ मिश्रा कमेटी रिपोर्ट, 'Prevention of Communal and Targeted Violence Bill, 2011 जैसे षडयन्त्रों के माध्यम से भारत के मूल निवासियों मतलब हिन्दूओं को उनके मूल अधिकारों से भी वंचित करने का दुहसाहस कर रही है।
क्या आपने कभी सोचा कि ये सब किसके बल पर हो रहा है। ये सब हो रहा है बिदेशी ताकतों के बल पर । इन बिदेशी ताकतों ने अपने भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी षडयन्त्रों को अन्जाम देने के लिए भारत में कुल मिलाकर 23000 गैर- लाभकारी स्वैच्छिक गिरोहों
http://www.onlinenews.com.pk/details.php?id=186705 का निर्माण किया हुआ है जिन्हें  पिछले  पांच वर्षों में ही 50,000 करोड़ से अधिक रूपए मिल चुके हैं भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी षडयन्त्रों को अन्जाम देने के लिए।
इसमें सिर्फ US,UK,Nitherland, Italy जैसे ईसाई देशों से धर्मांतरण व आतंकवाद के माध्यम से भारत के इसाईकरण के लिए प्राप्त हो रहा पैसा ही सामिल है जबकि इस्लामिक आतंकवाद समर्थक केन्द्र सरकार ने साऊदी अरब जैसे इस्लामिक देशों से मदरसों , मस्जिदों व आतंकवाद के माध्यम से भारत के इसलामीकरण के लिए दिए जा रहे पैसे के वारे में कोई जानकारी अभी तक उपलब्ध नहीं करवाई है। जिस दिन वो जानकारी आपके सामने आएगी याकीन मानो आपके पैरों तले जमीन नहीं रहेगी।ngo2
अगर आप इन गैर- लाभकारी स्वैच्छिक गिरोहों में उन संगठनों को भी जोड़ लें जिनका नियन्त्रण सीधे चर्च के हाथ में है व उन गिरोहों को भी जिनका सीधे इस्लामिक देशों के हाथों में है तो ये शंख्या  करोड़ों में पहुंच जाती है व इन गिरोहों को मिलने वाला धन भी अरबों रूपए हो जाता है।
अगर आपको ये आंकड़े जानकर हैरानी हो रही है तो हम आपको बताते चलें कि जो सरकार हमेशा इन भारतविरोधी गिरोहों की मददगार रही है उसी के अनुसार भारत में इन गिरोहों की शंख्या 20 लाख से अधिक है व ये गिरोह भारत में आतंकवादियों के मददगार हैं। इसलिए केन्द्र सरकार का गृह विभाग इन भारतविरोधी गिरोहों की जांच करवा रहा ।
 http://www.hindustantimes.com/News-Feed/newdelhi/MHA-eye-on-NGOs-funding-terrorists/Article1-779211.aspx
वेशक ये जांच आज कुछ गैर- लाभकारी स्वैच्छिक संगठनों के भ्रष्टाचार विरोधी अन्दोलनngo6 में कूदने की बजह से करवाई जा रही है, लेकिन इस सच्चाई को तो नहीं नकारा जा सकता कि भारत के अधिकतर टैलीविजन चैनल,पत्रकार ,समाचार पत्र व  गैर- लाभकारी स्वैच्छिक संगठनों जिसमें मनबाधिकार संगठन व अल्पसंख्यक अधिकार संगठन भी सामिल है, विदेशों के इसारे पर भारतविरोधी महौल बनाने में जुटे हुए हैं। अगर आपको भरोसा नहीं होता इन सेकुलर गद्दारों की सच्चाई यहां पढ़ें।
ऐसा नहीं कि सब के सब गैर- लाभकारी स्वैच्छिक संगठन भारतविरोधी हैं
http://www.freemalaysiatoday.com/2011/12/09/ngos-want-indian-as-malacca-cm/
लेकिन क्योंकि इनमें से अधिकतर भारतविरोधी हैं इसलिए अब ये आम धारणा बनती जा रही है कि सबके सब गैर- लाभकारी स्वैच्छिक संगठन कहीं न कहीं विदेशियों के इसारे पर भारत को अस्थिर करने की दिन-रात कोशिस कर रहे हैं वो भी चन्द टुकड़ों के लालच में आकर।
गौतम नबलखा ,तीसता शीतलबाड़,कुलदीप नैयर,राजेन्द्र गोपाल सच्चर,राधा कमार, अग्निवेश, प्रशांत भूषण,मनमोहन सिंह जैसे भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी विदेशियों के पैसे पर पलने वाले वो गद्दार हैं जो भारत को तहस-नहस करने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं।
अब वक्त आ गया है कि सबके सब बलागर ऐसे एक-एक गद्दार पर निगाह रखकर इन सब भारतविरोधियों का कच्छा चिट्ठा खोलकर NGO नामक विस्फोटक को समय रहते निशक्रिए करें वरना वो दिन दूर नहीं जब ये NGO भारत में गृह युद्ध का कारण बनेंगे।ngo1
आओ मिलकर इस खतरे के बारे में अपने देशवासियों को जागरूक करें।

मंगलवार, 15 नवंबर 2011

राहुल को भला शर्म क्यों न आए?

हम भारतीय अक्कसर भावनाओं में बहकर बहुत सी ऐसी गलतियां कर जाते हैं जिनके परिणाम हमें अपना खून बहाकर –इज्जत आबरू लुटवाकर भुगतने पड़ते हैं।
वेशक आप समझेंगे कि हम राजीब गांधी की उस भावनात्मक गलती की बात कर रहे हैं जिसके परिणाम स्वारूप वो इटालियन विषकन्या के फेर में पड़कर चर्च द्वारा रचे गए एक ऐसे षडयन्त्र का सिकार हो गए जिसकी कीमत उन्हें पहले तो अपना मान सम्मान खोकर(चर्च के सहयोग से सोनिया व क्वात्रोची द्वारा अन्जाम दिए गए बोफोर्स कांड) व बाद में अपने प्राण देकर चुकानी पड़ी।
लेकिन ये गलती तो राजीब गांधी की व्यक्तिगत गलती थी। अगर भारतीय भावनाओं में न बहते तो उनकी इस व्यक्तिगत गलती को राष्ट्रीय गलती न बनने देते। क्योंकि भारत में लोकतन्त्र है इसलिए अगर भारतीय भावनाओं में न बहते तो चुनाबों में विदेशी को आगेकर चुनाब लड़ने वाली पार्टी से सबन्धित प्रत्यासियों की जमानत जब्त करवा देते।चर्च को अपने आप पता चल जाता कि उसके षडयन्त्र भारत में सफल होने वाले नहीं लेकिन ऐसा हो न सका।
अगर जम्मू कशमीर में मुसलमानों को ईसाई बनाने बाले पादरियों को पकड़ कर जेल में डाला जा सकता है तो फिर भला क्यों सारे देश में हिन्दूओं को ईसाई बनाने में लगे पादरियों को जेल में नहीं डाला जा सकता।
ये हमारी भावनात्मक गलतियों का ही परिणाम है जिन लोगों(मुसलमानों और इसाईयों को ) को हमने अपना जैसा मानकर अपने देश भारत में शरण दी उन्हीं मुसलमानों ने हमें पहले अफगानीस्तान,फिर पाकिस्तान, बंगलादेश और अब कशमीर घाटी से बाहर निकाल दिया वो भी पूरी तरह लूटकर कर व आसाम और केरल से भारतीयों को वेदखल करने का संघर्ष जोरों पर है। मुसलमानों की ही तरह ईसाईयों ने भी हमें अपने बहुमत वाले उतर पूर्वी राज्यों से वेदखल कर दिया।
फिर आज हम देश के हर कोने में मुसलमानों और ईसाईयों के बरबर हमलों से प्रताड़ित अपने सगे हिन्दूों के साथ खड़े होने के बजाए इन आततायियों की बगल में खड़े हैं। क्यों , क्योंकि हिन्दी मिडीया,विके हुए नेता,पत्रकार,फिल्मकार अरब देशों से मिलने वाले पैट्रो डालर व युरोपियन देशों से मिलने बाले यु एस डालर के बल पर हमें समझा रहे हैं कि क्योंकि ये अल्पशंख्यक हैं इसलिए वेचारे हैं ,सेना ,हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों के सताए हुए हैं इसलिए हमें इन पर दया आ रही है परिणास्वारूप हम इन शातिर आक्रमणकारियों के साथ खड़े होकर अपने सगे हिन्दूओं को मरबा रहे हैं क्योंकि मारे जाने वाले व प्रताड़ित हिन्दूओं के वारे में हमें समझाने-बताने वाला कोई नहीं। कुछ मुठीभर लोग अगर बताने की कोशिश करते भी हैं तो हम शांति भंग होने का हबाला देकर उन्हें चुप करवा देते हैं।
ये क्या ये हमारी भावनात्मक गलती नहीं कि जिस विषकन्या एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी को हमने अपनी बहु समझकर सिर आंखों पर विठाने के साथ-साथ भारत के सिंहासन पर बैठाया वही विषकन्या आज सचरकमेटी रिपोर्ट, रंगनाथ मिश्रा कमेटी रिपोर्ट, 'Prevention of Communal and Targeted Violence Bill, 2011 जैसे षडयन्त्रों के माध्यम से हमें ठिकाने लगाने के लिए दिन-रात भारत के शत्रुओं के साथ मिलकर काम कर रही है।
अब आप राहुलRahul_Gandhi-18 को ही देख लीजिए जो चिल्ला-चिला कर कह रहा है कि उसे भारतीय-हिन्दूस्तानी होने पर शर्म आती है मतलब बो भारतीय नहीं कहलाना चाहता। बैसे वो भारतीय है भी नहीं। आप उसे 25% भारतीय कह सकते हैं क्योंकि उसकी माम इटालियन है व दादा भी तो पूरी तरह भारतीय नहीं।
फिर भी सोचने वाली बात ये है कि क्यों उसे भारतीय संस्कृति से इतनी नफरत है?
असल में इसकी रगों में वो इटालियन खून दौड़ रहा है जिस देश का प्रधानमन्त्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी अपने ही देश की लड़कियों-महिलाओं को माफिया की सहायता से खरीदकर या उठवाकर उनकी मंडी सजाता है।लेकिन फिर इटली खासकर चर्च की राजधानी रोम की जनता तक उसका विरोध  नहीं करती और भारत में इस तरह की बात तक करने पर लोग मरने-मारने पर उतारू हो जाते हैं ।
अब ऐसे ब्याभिचारी व बरबर माफियाओं के देश इटली से सबन्ध रखने वाला राहुल विन्सी भला भारत में घुटन क्यों न महसूस करे। उपर से चर्च द्वारा तैयार की गई विषकन्या द्वारा भरा गया भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी जहर।
इन सब हालात में अब आप ही बताओ कि जिसकी रगों में ब्याभिचारी व बरबर माफियाओं के देश इटली का खून दौड़ रहा हो उसे भारत जैसे महान देश में शर्म क्यों न आए?
पहचानो इस भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी को और ठान लो कि हम  और भावनात्मक गलतियां नहीं करेंगे… 

सोमवार, 14 नवंबर 2011

भिखारी और लुटेरी भारत की जनता नहीं वल्कि तेरी मां व वो अंग्रेज हैं जिनका खून तेरी रगों में दौड़ रहा है।

उत्तर प्रदेश में चुनाब की आहट सुनते ही कांग्रेस ने अपने पिटारे से एक के बाद एक विभाजनकारी षडयन्त्रों को बाहर निकालना सुरू कर दिया है। हम कईबार लिख चुके हैं कि कांग्रेस चुनाबों से पहले ऐसे विभानकारी मुद्दे उठाएगी जिससे कि भ्रष्टाचार व कालेधन जैसे जनहित से जुड़े सरोकार कहीं दूर-दूर तक नजर नहीं आयेंगे। हाफ अंग्रेज राहुल विन्सी का आज का ब्यान इसी का हिस्सा है।
इतिहास इस बात का साक्षी है कि कांग्रेस अगर अंग्रेजों व उससे पहले मुसलमानों द्वारा अपनाई गई भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी विभाजनकारी नीतियों को आगे न बढ़ाती तो 40 के दशक में में भारत से हर क्षेत्र में पिछड़ने वाला चीन आज भारत से कहीं पीछे होता व उसकी भारत को आँखें दिखाने की हिमत तक न होती. उल्टा आज बंगलादेश व पाकिस्तान जैसे मच्छर भी भारत को आंख दिखाकर व आतंकवाद के माध्यम से भारतीयों का खून बहाकर भारत को ललकार रहे हैं । ।
कांग्रेस खासकर गांधी-नैहरू खानदान की फूट डालो और राज करो की नीति का ही ये दुष्परिणाम है कि पहले तो भारत का तीन-तीन हिस्सों में विभाजन हुआ और अब भारत फिर उसी दोहराहे पर आ खड़ा हुआ है जिसपर जिन्ना-नैहरू-लेडी माउंटवेटन के वक्त था। फर्क सिर्फ इतना है कि आज नैहरू की भूमिका में राहुल विन्सी है व जिन्ना की भूमिका में मनमोहन सिंह व लेडी माउंटवेटन की भूमिका में राहुल विन्सी की इटालियन ममी एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी है ।थोड़ा सा फर्क ये भी है कि लेडी माऊंटवेटन ने एक अनैतिक सबन्ध के चलते भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी षडयन्त्रों को अन्जाम दिया जबकि माइनो ये सब एक नैतिक सबन्ध का दुरूपयोग कर अन्जाम दे रही है।
आज राहुल अगर वार-वार भारतविरोधी -हिन्दूविरोधी प्रलाप कर रहा है----कभी कहता है कि उसे भारतीय होने पर शर्म आती है ----कभी कहता है कि उसे खेद है कि वो हिन्दुस्तानी है---कभी देशभक्त संगठनों व हिन्दूओं के विरूद्ध अमेरिकी अधिकारियों को उकसाता है---कभी मुमबई में जाकर उतर भारतीयों व मुंमबईकरों के बीच झगड़ा पैदा करने की कोशिश करता है ---कभी विहारियों को मुमबईकरों के विरूद्ध भड़काता है---कभी उतर भारतीयों को दलित नेत्री मायावती के बिरूद्ध भड़काता है---यो ये कमी राजीब गांधी के खून की नहीं वल्कि इस विषकन्या के द्वारा चर्च का दुरूपयोग कर एक मासूम बच्चे के अन्दर भारत-भारतीयों खासकर देशभक्त हिन्दूओं के विरूध भरे गए जहर का कुप्रभाव है।
किसी ने ठीक ही कहा है कि बच्चे का पहला अध्यापक उसकी मां है जिस बच्चे की मां ही एक भारतविरोधी विषकन्या हो उसे भारतीय होने पर गर्व भला कैसे हो सकता है?
ये विषकन्या द्वारा भरे गए उसी जहर का असर है जिसके असर के कारण राहुल विन्सी ने उतर-भारतीयों द्वारा खून-पसीना बहाकर भारत के विकास में योगदान कर कमाई जा रही मेहनत की रोटी को भीख करार दे दिया। इस वेवकूफ को कौन समझाए कि भिखारी और लुटेरी भारत की जनता नहीं वल्कि इसकी मां व वो अंग्रेज हैं जिनका खून तेरी रगों में दौड़ रहा है।

शनिवार, 25 दिसंबर 2010

GSAT-5P की असफलता का एंटोनिया CONECTION




आज दूरदर्शन के सरकारी चापलूस की भूमिका में चले जाने के कारण बहुत कम लोग दूरदर्शन के कार्यक्रम देखते हैं लेकिन आज भी आम व मजबूर लोगों के लिए दूरदर्शन , रेडियो के बाद सूचना का एकमात्र साधन है। हम भी दूर्दरशन के कार्यक्रम बहुत कम देखते हैं। लेकिन क्योंकि आज GSAT-5P के प्रक्षेपण का सीधा प्रसारण दूरदर्शन दिखा रहा था इसलिए हम दूरदर्शन के साथ चिपक कर बैठ गए।


GSAT-5P प्रक्षेपण कुछ मिनट के बाद ही विस्फोट के साथ असफल हो गया तो मन को बहुत दुख हुआ ।क्रोध भी आया कि जब रूस से लाया गया क्रायोजैनिक इंजन खराब था तो उसे वापस रूस को लौटाने के बजाए देश का 175 करोड़ रूपया बरबाद करना क्यों जरूरी समझा गया।क्रायोजैनिक तकनीक बहुत ही उच्चतकनीक है इस तकनीक पर आधारित इंजन में लीकेज का मतलब ही कार्यक्रम की असफलता की गारंटी है। लेकिन खैर जैसा अक्सर होता है अब बैसे ही इस कार्यक्रम में इस वेवकूफाना हरकत को छुपाने के प्रयास शुरू हो चुके होंगे।


इसके बाद जो हुआ वो और भी चौंकाने वाला था। जैसे ही निर्धारित समय पर GSAT-5P के असफल प्रक्षेपण के बाद सीधे प्रसारण का ये कार्यक्रम बन्द हुआ बैसे ही ईसाईयत का प्रचार-प्रसार शुरू हो गया । कुछ समय तक कुछ अंग्रेज लड़के–लड़कियां ईसाईयत के गुणगान के लिए वेसुरे गीत गाते रहे बाद में हमारे दूरदर्शन ने एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के देश में रोम से सीधा प्रसारण शुरू कर दिया ।


आप सब जानते हैं कि दूरदर्शन हम सब भारतीयों के खून-पसीने की कमाई के पैसे से चलता है।उस मेहनत से कमाए गए पैसे को एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के इसारे पर ईसाईयत के प्रचार प्रसार के लिए खर्च करना वेहद आपतिजनक है गुनाहकारों के विरूद्ध उचित समय पर कड़ी कार्यवाही होना अति आवस्यक है।


प्रक्षेपण की असफलता के एक-दम बाद ईसाईयत के प्रचार-प्रसार ने हमारे मन में कई संकायें पैदा कि । क्योंकि ये पहले से ही पता था कि क्रायोजैनिक इंजन खराब है तो भी उस खराब इंजन के साथ ही GSAT-5P के प्रक्षेपण निर्णय कहीं एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के प्रभाव में तो नहीं किया गया।


बहुत कम लोग जानते हैं कि रूस ईसाईयत के प्रचार-प्रसार के लिए अमेरिका से भी जयदा प्रतिबद्ध है व एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी को भारत में पलांट करने में रूस की ही खूफिया ऐजेंसी का हाथ था। पलांट करने का मकसद भी भारत में हिन्दूओं को अपदस्त कर ईसाईयों के हाथों में सता को पहुंचाना था ।आज सरकार की सर्वेसरवा एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी से लेकर रक्षामन्त्री एक के एन्टनी तक सब जगह ईसाई ही दिखाई दे रहे हैं।


यहां तक कि अगर इसाई के उपर भ्रष्टाचार के कितने भी बड़े आरोप क्यों न लगे हों उन्हें बड़ें पदों पर ऐंटोनिया की पकड़ मजबूत करने के लिए विठाया जा रहा है। आप पी जे थामस को ही ले लें जिसे दो पाक-साफ हिन्दूओं को दरकरार कर CVC प्रमुख बनाया गया वो भी विपक्ष की आपति के बाबजूद। बाद में इस भ्रष्ट की खबर माननीय न्यायालय ने लेकर ऐंटोनिया के हिन्दूविरोधी षडयन्त्र को जनता के सामने रखा।


एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी व उसका बेटा राहुल गंदगी किस हद तक हिन्दूओं के विरूद्ध हैं उसका सबसे बड़ा प्रमाण Wiki-leaks के उस रहसयोउधघाटन में मिला जिसमें बयाता गया कि किस तरह ये सपोला अमेरिका के राजदूत को हिन्दूओं के विरूद्ध भड़का रहा था।


अगर इस सपोले के अन्दर भारतीयों का खून होता तो ये ऐसी गद्दारी नहीं करता । हमें तो लगता है कि एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के ईसारे पर खराब क्रायोजैनिक इंजन का प्रयोग कर प्रक्षेपण की असफलता सुनिस्चित कर ईसाईयत का प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया गया।


क्योंकि आज इस मौके पर अधिकतर भारतीय दूरदर्शन देख रहे थे तो प्रक्षेपण का प्रसारण वीच में ही बन्द होने पर एकदम ईसाईयत का प्रसारण शुरू होने पर अधिकतम लोगों तक एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी का ईसाईयत का संदेश पहूंचा।


इस संदेश में पोप ने पहले तो ये इशु को भगवान का अबतार बताया व बाद में इशु को भगवान का वेटा कहकर संबोधित किया।मतलब खुद पोप ही इशु के वारे में भ्रमित हैं। उसके बाद पोप ने संसार के विभिन्न देशों में रह रहे ईसाईयों को वहां की सरकारों व समाजों के विरूद्ध लड़ाई छेड़ने के लिए उचित समय का इन्तजार करने के लिए कहा। मतलब पोप का ये भाषण न केवल शांति और भाई चारे के विरूद्ध था वल्कि साथ ही दुनिया में हिंसा बढ़ाने बाला भी था। ऐसे हिसंक भाषण का प्रचार-प्रसार शांतिप्रिए भारतीयों के पैसे से करना कहां तक उचित है?






गुरुवार, 23 दिसंबर 2010

सोनिया गांधी के देश में वम धमाका...


जी हां आज एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के देश इटली के रोम में स्विस दूतावास के बाहर पार्सल वम धमाका हुआ जिसमें एक व्यक्ति मारा गया।


इस वम धमाके से सबन्धित स्थान एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी से खास रिस्ता रखते हैं।


रोम में उस चर्च का मुख्यालया है जिसने एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो को भारत में हिन्दूओं को बदनाम कर ईसाईयत का वोलवाला करने के लिए भारत में एक षडयन्त्र के तहत पलांट किया। अब इस षडयन्त्र के प्रमाण जगजाहिर होने लगे हैं।


स्विटजरलैंड में वो बैंक है जिसमें एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की भारत से लूटी हुई अपार धन सम्पदा भरी पड़ी है। इस सम्पदा में वोफोर्स दलाली कांड, इराक में अनाज के बदले तेल कार्यक्रम में लूटा गया धन,CWG घोटाले में चोरी किया गया धन, 2G spectrum में डकारा गया पैसा इसके अतिरिक्त पचासों छोटे बड़े घोटालों में भारत से लूटा गया माल भरा पड़ा है।


क्योंकि एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी का धन स्विस बैंक में भरा पड़ा है इसीलिए सोनिया गांधी के गुलाम प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह ने जर्मनी द्वारा सविस बैंक में काला धन रखने वालों की सूची आफर करने के बाबजूद सूची लेने से मना कर दिया था।


इस चोरों की सरदार का गुलाम प्रधानमन्त्री अपनी आका का धन कैसे भारत लौटने दे सकता था । आखिरकार गद्दार गुलाम जो ठहरा। अब आप जमझ ही गए होंगे कि हमें इस समाचार ने क्यों आकर्षित किया।