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मोदीराज लाओ

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भारत बचाओ
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गुरुवार, 23 दिसंबर 2010

सोनिया गांधी के देश में वम धमाका...


जी हां आज एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के देश इटली के रोम में स्विस दूतावास के बाहर पार्सल वम धमाका हुआ जिसमें एक व्यक्ति मारा गया।


इस वम धमाके से सबन्धित स्थान एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी से खास रिस्ता रखते हैं।


रोम में उस चर्च का मुख्यालया है जिसने एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो को भारत में हिन्दूओं को बदनाम कर ईसाईयत का वोलवाला करने के लिए भारत में एक षडयन्त्र के तहत पलांट किया। अब इस षडयन्त्र के प्रमाण जगजाहिर होने लगे हैं।


स्विटजरलैंड में वो बैंक है जिसमें एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की भारत से लूटी हुई अपार धन सम्पदा भरी पड़ी है। इस सम्पदा में वोफोर्स दलाली कांड, इराक में अनाज के बदले तेल कार्यक्रम में लूटा गया धन,CWG घोटाले में चोरी किया गया धन, 2G spectrum में डकारा गया पैसा इसके अतिरिक्त पचासों छोटे बड़े घोटालों में भारत से लूटा गया माल भरा पड़ा है।


क्योंकि एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी का धन स्विस बैंक में भरा पड़ा है इसीलिए सोनिया गांधी के गुलाम प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह ने जर्मनी द्वारा सविस बैंक में काला धन रखने वालों की सूची आफर करने के बाबजूद सूची लेने से मना कर दिया था।


इस चोरों की सरदार का गुलाम प्रधानमन्त्री अपनी आका का धन कैसे भारत लौटने दे सकता था । आखिरकार गद्दार गुलाम जो ठहरा। अब आप जमझ ही गए होंगे कि हमें इस समाचार ने क्यों आकर्षित किया।










सोमवार, 20 दिसंबर 2010

देशभक्त और गद्दार का अन्तर आप खुद महसूस कर लो।


कौन कहता है कि भारत में देशभक्त सिर्फ संघ या हिन्दू संगठनों में ही मलते हैं। इसमें कोई शक नहीं कि आज अधिकतर देशभक्त हिन्दूसंगठनों के साथ संगठित होते जा रहे हैं इसी बजह से इन संगठनों में देशभक्तों की अधिकता देखी जा रही है।लेकिन ये भी उतना ही सही है कि हिन्दू संगठनों के अथक प्रयत्नों के बाबजूद देशभक्त पूरे देश में हर संगठन में अभी भी मौजूद हैं वेशक कीं इनकी शंख्या कहीं कम है तो कहीं ज्यादा है।


इन्ही विखरे पड़े देशभक्तों ने गद्दारों के नाक में संगठित देशभक्तों से ज्यादा दम किया हुआ है। आप कहेंगे कि कैसे पता लगायेंगो कौन देशभक्त है और कौन गद्दार । आप अखवार कि ये दो कटिंग पढ़ लो ।आप अपने आप कहने को मजबूर होंगे कि इस गद्दार ने तो हद ही कर दी।


ये रही पहली कटिंग इसमें एक देशभक्त अमेरिका के अधिकारी को भारत पर पाकिस्तानी हमले के वारे में बताकर आतंकवादी पाकिस्तान की पोल खोलने की कोशिश कर रहा है।



ये रही दूसरी कटिंग इसमें एक गद्दार अमेरिकी अधिकारी को समझा रहा है कि भारत को खतरा पाकिस्तानी जिहादी आतंकवादियों से नहीं वल्कि हिन्दूओं से है।मतलब विदेशी अंग्रेज एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की कुलाद राहुल गंदगी जिस पत्र में खा रहा है उसी में छेद कर रहा है।






इसीलिए तो मोदी जी तो अब जाकर ये समझ में आया कि अमेरिका को भारत के खिलाफ व पाकिस्ताने के समर्थन भड़ाकने वाला जयचन्द कौन है।











शनिवार, 18 दिसंबर 2010

आतंकवादियों को अपना भाई कहने वाले गृहमन्त्री की आका गद्दारों की सरदार सोनिया गांधी निकली।

आप और हम सभी जानते हैं कि मुसलिम आतंकवाद को हर तरह से सरकारी समर्थन का दौर गृहमंन्त्री शिवराज सिंह पाटिल के कार्यकाल के दौरान शुरू हुआ । इसी कार्यकाल में हिन्दू आतंकवाद की काल्पनिक अबधारणा घड़ कर हिन्दूओं को बदनाम करने की कोशिश शुरू हुई। आप और हम जितना शिवराज सिंह को जानते हैं उनकी हिन्दूओं से कोई निजी दुशमनी नहीं थी। फिर किसके इसारे पर उसने इन सब हिन्दूविरोधी-देशविरोधी कुकर्मों को अन्जाम दिया।

एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के कहने पर इस बौद्धिक गुलाम गृहमन्त्री ने इन हिन्दूविरोधी-देशविरोधी षडयन्त्रों को अन्जाम दिया ।अब ये बात wiki leaks के उस रहसयोधघाटन से और पुख्ता हो गई जिसमों ये कहा गया कि इन सब कुकर्मों के बाबजूद इस गुलाम का बचाब करने वाली सोनिया गांधी थी।

जागो मरे भाईयो-बहनों अब तो जागो

रविवार, 12 दिसंबर 2010

देर आए दुरूस्त आए----UPA सरकार ने माना कि पूर्व RSS प्रमुख सुदर्शन जी ठीक कह रहे थे।

 
नीरा राडिया विदेशी ऐजेंट है ऐसा माननीय न्यायालय में केन्द्र की UPA सरकार ने सवीकार किया है। अभी तक जो तथ्य सामने आए हैं उनके अनुसार नीरा राडिया विदेशी ताकतों व कम्पनियों के ईसारे पर यह तय करती थी कि कौन किस विभाग का मन्त्री होगा। एक बात तो साफ है कि ये काम नीरा राडिया खुद करने की ताकत नहीं रखती ।

प्रश्न सीधा सा है कि आज की तारीख में देश में ऐसा कौन सा वयक्ति है जो सरकार में राष्ट्रपति,प्रधानमन्त्री ,मन्त्री व उनके विभाग तय करने की ताकत रखता है। जबाब भी सीधा है कि ये सब काम आज की तारीक में एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी ही कर रही हैं। इसका अर्थ ये हुआ कि नीरा राडिया ये काम सोनिया गांधी से करवा रही थी।मतलब नीरा राडिया और सोनिया गांधी मिलकर विदेशी ऐजटों के रूप में काम कर रही थीं।


आज जो बात सरकार ने खुद कोर्ट में सवीकार की व जिसके प्रमाण हजारों टेपों में भरे पड़े हैं यही बात तो पूर्व RSS प्रमुख सुदर्शन जी ने की थी। कुल मिलाकर केन्द्र सरकार ने कान सीधे न पकड़कर घुमाकर पकड़ा है पर इस सबका एक ही सार है और वो ये है कि एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी विदेशी ऐजेंट है। अन्त में हम तो इतना ही कहेंगे कि देर आए दुरूसत आए वेशक अधुरा आए....