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मोदीराज लाओ

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मंगलवार, 23 अप्रैल 2013

वरना इस अराजकता के फलस्वारूप हथिरबन्द गृहयुद्ध के हालात तो लगातार बनते ही जा रहे हैं


समझ नहीं आता कि पुलिस को गाली देने वाले सेकुलर गद्दारों की टोली में देशभक्त भी कैसे सामिल हो गए? मित्रो हमारा मानना था कि देशभक्त संगठनों से जुड़े लोग जागरूक और समझदार हैं व सेकुलर गिरोह से जुड़े लोग या तो बोद्धिक गुलाम हैं या फिर भारत के दुशमनों के टुकड़ो पर पलने वाले परजीवी लेकिन दिल्ली में 5 वर्ष की मासूम वेटी पर हुई दरिन्दगी के बाद जिस तरह कुछ देशभक्त संगठनों से जुड़े लोग सड़कों पर उतरे वो भी सिर्फ पुलिस प्रमुख का इस्तीफा मांगने के लिए उससे सिद्ध हो गया कि देशभक्तों को भी अभी बहुत जागरूक करने की जरूर है। हम जानते हैं कि आप सब ये सोच रहे होंगे कि जब मासूम पर इतना जघन्य अपराध हुआ हो तो पुलिस प्रमुख का इस्तीफा मांगने में क्या हर्ज है ? आज देश की किसी भी छोटी से छोटी राजननीतिक पार्टी से जुड़ा हर वयक्ति जानता है कि पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति नेता लोग अपनी सुविधा अनुशार करते हैं और अगर गलती से भी किसी पुलिस वाले ने सच्चे अर्थों में कानून लागू किया तो उसकी शामत आ जाती है आपको याद होगा कि किस तरह महाराष्ट्र विधानसभा में गुंडो जो कि चुने हुए बिधायक हैं ने मिलकर पुलिस वाले की धुनाई की और कितनी ही बार किसी सतासीन नेता का चलान काटने पर चलान काटने वाले पुलिस के जवान की ऐसी की तैसी कर दी गई। आपको अच्छी तरह से याद होगा कि जिन भी पुलिस वालों ने इसलामिक आतंकवादियों को निर्दोश भारतीयों के जान-माल का नुकसान करने से पहले मार गिराया उनमें से अधिकतर पुलिस के जवान और अधिकारी सोनिया गाँधी व उसकी सलाहकार परिषद की कृपा से आज जेलों में यातनायें सहने को मजबूर हैं बटला हाऊस इन्कांटर तो आपको याद होगा ही जिसके बाद इसलामिक आतंकवादी के मरने पर सोनिया गाँदी सारी रात फूट-फूट कर रोती रही व अमर सिंह व दिगविजय सिंह ने अपने प्राणों की वाजी लगाने वाले जवान शहीद मोहन दन्द शर्मा जी को किस तरह अपमानित किया... जरा ध्यान से सोचो कि सोनिया गांधी की गुलाम सरकार के भ्रष्टाचार पर नकेल डालने की कोशिश करने वाले सेना प्रमुख को किस तरह अपमानित कर एक वर्ष पहले ही घर विठा दिया गया आज आतंकवादियों को मारने वाले कितने ही सैनिकों को उनके कमांडरों सहित जेलों में डाल दिया गया है पिर भी लोग ये उम्मीद करते हैं कि एक कांसटेवल या थानेदार जिसको सरकार न तो सीधी कार्यवाही करने की इजाजत देती है और न ही सीधी कार्यवाही करने के लिए पैसा वो कांसटेवल सबकुछ अपने आप कर लेगा... रही बात बच्ची पर बालाकार की तो इस पर भी गहराई से सोचने की बात ये है कि अगर पुलिस रिपोर्ट लिखते ही बच्ची के घर के आसपास के घरों में वेरोकटोक तलासी अभियान चलाती तो यही रवीश(Rubbish) जैस लोग पुलिस पर पिल पड़ते कि पुलिस वाले गुंडा गर्दी कर रहे हैं और ये जो मूर्ख लोग मिडीया के प्रोपगंडे से प्रभावित होकर मूर्खता करते हैं वही लोग पुलिस के विरूद्ध सड़कों पर उतर आते इसी विकाऊ मिडीया के उकसावे पर। देखो मित्रो अपना कहना बिलकुल सपष्ट है कि पुलिस तभी असरदार हो सकती है जब उसे खुली छूट हो अपनी कार्यवाही को अन्जाम देने की बरना ये सब पाखंड है का हिस्सा है पुलिस को गाली गलौच करना आप सब जानते हैं कि कुलदीप नैयर, रवीश,बर्खा दत्त, महेश भट्ट, तहलका जैसे दर्जनों ISI ऐजेंट हमेशा पुलिस को बदनाम करने के लिए त्यार रहते हैं ये कुछ नाम हैं वरना इनकी सूची बहुत लम्बी है ये तो ऐसे गद्दारों की किसमत अच्छी है कि हमारे जैसे लोग पुलिस में नहीं हैं वरना पुलिस को बदनाम कर भारतीयों की सुरक्षा को खतरे में डालने वाले ऐसे गद्दारों को हम कब के गोलियों सो भून चुके होते अगर आप सोच रहे हैं कि हमें पुलिस से तो हमें कोई हमदर्दी है तो आप पूरी तरह से गलत हैं क्योंकि हम भी पुलिस की ज्यादती का सिकार हो चुके हैं लेकिन हम अच्छी तरह जानते हैं कि उसमें ततकालीन सरकार के एक विधायक का हाथ था जो उसके लिए उगाही करने बाले चमचों के कहने पर वो करता गया जो उन चमचों ने कहा।... हम पुलिस के पक्ष में नहीं वल्कि आम भारतीयों की रक्षा हेतु ये सब लिख रहे हैं क्योंकि राजनीतिक हस्तक्षेप से जो अराजकता पैदा होती है उससे सबसे ज्यादा प्रभावित आम-गरीब व मद्यमबर्ग से जुड़े लोग ही होते हैं और वहीं सेकुलर गद्दारों के झूठे प्रौपेगंडे का शिकार होर भारतविरोधी सेकुलर गद्दारों को सता में लाते हैं फिर छाती-पीटते रहते हैं... बलातकार और दरिंदगी का सिर्फ एक गांधीनगर का ही मामल नहीं ऐसे ही लगभग दर्जनों मामले आज कल चर्चा में हैं और सब मामलों में एक बात सांझी है कि बालातकार व दरिंदगी करने वाले मोबाईल पर अशलील फिल्म(Blue Film) देख रहे थे ऐसी फिल्में देखने वालों में नवालिगों की बहुत बड़ी संख्या है अगर आपको नहीं जानकारी तो बता दें कि भारत के हर गली मुंहल्ले और गांव में पीने का पानी या विजली हो या न हो लेकिन नशा और ये अशलील फिल्में हर जगह उपलब्ध हैं और इसकी जानकारी नेताओं से लेकर हर प्रसासनिक अधिकारी को है लेकिन क्योंकि हर राजनितीक दल को इन बालातकारियों और नशैड़ियों के बोट चाहिए इसलिए पुलिस को कतई ये इजाजत नहीं कि वो इनके विरूद्ध कार्यवाही करे और इससे भी बड़ी रोचक बात ये हैं कि इन धन्दों को चलाने वाले अधिकतर या तो नेता हैं या फिर उनके रिस्तेदार या फिर उनके लिए उगाही करने वाले... रानी उर्फ गुड़िया के साथ दरिंदगी के बाद होना तो ये चाहिए था कि उस लड़के के मोबाईल में अशलील फिल्म लोड करने वाली कड़ियों का पता लगाकर व इस तरह की साईटें चलाने वालों व फिल्में या धारबाहिक बनाने वालों को इन दरिंदो के साथ एक चौराहे पर खड़ कर इस्लामिक तरीके से सजा दी जाती और उसे सभी चैनलों पर लाईब दिखाया जाता तो भारत की रग-रग को खोखला करने वाला ये सारा कारोवार रातोंरात खत्म हो जाता काश संघ ने संजय गाँधी की बात मान ली होती तो भारत आज इस तरह बरबाद न होता अभी भी वक्त है एक वार मोदी जी को चुनकर शांति से इस अराजकता को खत्म करवाने की कोशिश करके देख लो वरना इस अराजकता के फलस्वारूप हथिरबन्द गृहयुद्ध के हालात तो लगातार बनते ही जा रहे हैं अब आप ही बताओ कि इस अराजकता में कोई अपनी डयूटी सही से करे तो कैसे? अगर आपको अभी भी लगता है कि इस अराजकता के लिए सेकुलर गिरोह की जगह पुलिस ही जिम्मेदार है तो जी भर कर गाली निकालिए...

रविवार, 15 जनवरी 2012

दंगा करवाने की ओर काँग्रेस के बढ़ते कदम...संदर्भ दिगविजय सिंह के समर्थक द्वारा स्वामी राम देव जी पर हमला

आज भारत में जिस तरह कांग्रेस गद्दारी और चोरी की प्रतीक बन गई है ठीक उसी तरह स्वामी राम देव जी देशभक्ति और इमानदारी के सत्मभ बन चुके हैं।Ramdav ji
अब जब कांग्रेस को महसूस होने लगा है कि उसके द्वारा स्वामी राम देव जी को जान से मारने attack on SWamiव बदनाम करने का हर षडयन्त्र न केवल असफल हो चुका है वल्कि   कांग्रेस की भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी मानसिकता को भी जगजाहिर कर चुका है तो कांग्रेस एक ऐसे षडयन्त्र को अन्जाम देने की फिराक में है जिसके बल पर आज तक कांग्रेस भारत की राजनीति पर छाई रही है।
अगर आप कांग्रेस के इतिहास पर नजर डालें तो आप पायेंगे कि काँग्रेस ने आज तक हिन्दू-मुसलमान में दंगा करवाकर ही अपनी राजनीतिक हैसियत बचाकर रखने में सफलता हासिल की है।
2002 में इस्लामिक आतंकवादियों द्वारा रेलगाड़ी में आग लगाकरgodhra हिन्दूओं को जिन्दा जलाकरgodhra1 शुरू करवाया गया दंगा ही 2004 में NDA  को सता से बाहरकर काँग्रेस को सता में लाने का प्रमुख कारण बना। ध्यान रहे ट्रेन में आग लगाने वाली भीड़ का नेतृत्व कांग्रेस के पार्षद ही कर रहे थे ।
इसी दंगे को आधार बनाकर आज तक कांग्रेस  मुसलिम बहुल क्षेत्रों में कई चुनाब जीत चुकी है।
आज जब राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (RSS) Mohan-Bhagwat_0कांग्रेस की इस  दंगा करवाने की मानसिकता को समझ कर अपने संगठन में से प्रतिक्रियावादी तत्वों को दूर कर खुद को राष्ट्रीय एकता का बास्तविक शूत्रधार साबित कर चुका है तो कांग्रेस ने प्रखर राष्ट्रवाद के नए-नवेले संगठन भारत स्वाभिमान को अपने निशाने पर लेकर अपनी विभाजनकारी मानसिकता को आगे बढ़ाने की पूरी तैयारी कर ली है।
कांग्रेस अछ्छी तरह जानती है कि स्वामीराम देव जी के साथ हर देशभक्त मजबूती से खड़ा है चाहे वो हिन्दू-सिख-मुसलिम- ईसाई कोई भी हो।
कांग्रेस ये भी जानती है कि स्वामीरामदेव जी बटला हाऊस मुठभेड़ का विरोध कर  देशभक्त  वीर-जवानों का अपमान mcsकतई नहीं कर सकते।
काँग्रेस गुप्तचर संस्थाओं के माध्यम से ये भी जानती है कि आज मुसलमानों का बहुमत या तो आतंकवादी है या फिर  इस्लामिक आतंकवाद का समर्थक है।
इसीलिए बटला हाउस मुठभेड़ को फर्जी बताकर कांग्रेस एक तो देशभक्त वीर-जवानों को अपमानित कर आतंकवादियों के एकमुस्त बोट हासिल करने की फिराक में है, दूसरा देशभक्त मुसलमानों को जोकि पहले ही हासिए पर हैं को स्वामी रामदेव जी  से दूर करने की फिराक में है।  
कांग्रेस अच्छी तरह जानती है कि स्वामी रामदेव जी जी का काँग्रेस की गद्दारी और लूट पर हमला RSS के हमले से कहीं ज्यादा स्टीक और तीखा है।
जिस तरह आज तक काँग्रेस ने अपने मित्र इस्लमिक आतंकवादियों से हिन्दूओं पर हमला करवाकर  शुरूकरवाए  गए दंगों के लिए RSS को दोषी ठहराकर चुनाबी सफलतायें हासिल की हैं उसी तरह स्वामी रामदेव जी पर अपने मित्र इस्लामिक आतंकवादियों से हमला करवाकर देशभक्तों को प्रतिक्रिया के लिए मजबूर कर , परिणामस्वारूप शुरू हुए दंगों के लिए  भारतस्वाभिमान को दोषी ठहराकर चुनाबी सफलतायें हासिल करना चाहती है…    

रविवार, 8 जनवरी 2012

करण थापर जी का कहना है कि भारतीय सेना गद्दार राजनीतिज्ञों से घृणा करती है…

हम बहुत वार पहले भी कह चुके हैं कि वर्तमान सरकार गद्दारी और चोरी के रास्त पर आगे वढ़ते हुए हर देशभक्त को अपना दुशमन मानने लग पड़ी है।
आज भारत में जो भी देशभक्ति की आबाज बुलन्द करता है वही सरकार को अपना असली शत्रु नजर आने लगता है-- देशभक्ति की आबाज बुलन्द करने वाला चाहे स्वामी राम देव हो या फिर अन्ना हजारे या फिर वापु आशा राम या फिर श्री-श्री रविशंकर या फिर राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ …सबके सब आज वर्तमान सरकार के निशाने पर सिर्फ इसलिए हैं क्योंकि इनमें से किसी ने इस चोरों और गद्दारों की सराकर को देश को लूटने से रोका है तो किसी ने इस सरकार को अमेरिका के इसारे पर धर्मांतरण को बढ़ाबा देने से राका है तो किसी ने इस सरकार को पैट्रो डालर के बदले भारतीयों के अधिकार छीन कर गैर भारतीयों को देने से रोका है --- और किसी ने इस सरकार को देश के गद्दारों द्वारा देश को लूट कर विदेशों में जमा करवाए गए काले धन को बापस लाने के लिए बाध्य करने की कोशिश की…इस काले धन में सबसे बड़ा हिस्सा इस सरकार को गुलाम वनाकर बैठी लुटेरों और गद्दारों की सरगना एडवीज अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी का है।
आज देशभक्तों के प्रति इस सरकार की घृणा इस हद तक बढ़ चुकी है कि अब इसे भारतीय सेना भी अपनी शत्रु नजर आने लगी है। अपनी इसी घृणा के चलते ,इस्लामिक आतंकवादियों की ट्रेनिंग सैंटर बन चुकी मस्जिदों की सूची देने वाले, लैपंटीनैंट कर्नल पुरोहित को इस सरकार ने जेल में डाल दिया।
इसी घृणा के चलते इस सरकार ने आते ही देश की रक्षा के लिए शहीद होने वाले जवानों के परिवारों  को मिलने वाली सहायता को कम कर दिया।
देशभक्तों से इसी गृणा के चलते इस गद्दारों की सरकार ने जम्मू-कशमीर में इस्लामिक आतंकवादियों को मारगिराने वाली पूरी बटालियन को ही उनके कमांडर सहित बर्खास्त कर दिया।
देशभक्तों से इसी घृणा के चलते इस सरकार ने सेना में फूट डलवाकर विभाजन करवाने के लिए सेना में सांप्रदायिक आधार पर गणना करवाने का आदेश दिया।
देशभक्तों से इसी घृणा के चलते इस सरकार ने  देशभक्त जवानों के कातिल अफजल की फांसी को मानीय सर्वोच न्यायालय के आदेश के बाजजूद आजतक रोककर रखा।
देशभक्तों से घृणा के परिमास्वारूप ही ये सरकार एक कर्मठ व प्रखर देशभक्त जनरल वी के सिंह जी को उनके तय समय से एक वर्ष पहले ही घर भेजने के षडयन्त्र कर रही है।
बजह साफ है क्योंकि जनरल वी के सिंह जी ने सरकार के दबाब के आगे न झुकते हुए सरकार द्वारा भारतीय सेना को कमजोर करने के लिए किए जा रहे षडयन्त्रों का डटकर विरोध किया है।
मामला चाहे भ्रष्टाचार विरोधी अन्दोलन का हो या फिर जम्मू कशमीर में भारतीय सेना के हाथ कमजोर कर आतंकवादियों को फायदा पंहूचाने का हो  ---हर जगह जनरल वी के सिंह जी ने देश का साथ दिया ।
अब ऐसा कैसे हो सकता है कि अन्तराष्ट्रीय इस्लामिक आतंकवादी ओसामाविन लादेन को ‘'जी’ व देशभक्त अन्दोलन के प्राण स्वामी रामदेव जी को ‘'ठग’ कहने वाली लुटेरों और गद्दारों की सरकार, जनरल वी के सिंह जैसे प्रखर देशभक्त को सेनाध्यक्ष जैसे ताकतवर पद पर रहने दे --क्या पता कब जनरल सरकार की गद्दारी से तंग आकर गद्दार राजनीतिज्ञों को अपने देशभक्त सैनिकों के हाथों उनके किए की सजा दिलवा दें…  VK Singh ji.jpg 1 
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मंगलवार, 18 अक्टूबर 2011

प्रशांत भूषण ने ISI को खुला समर्थन देकर टीम अन्ना को मरवा दिया?


आज देश के जो हलात हैं उनमें कोई भी अच्छा काम करना अगर असम्भव नहीं तो वेहद मुसकिल है। क्योंकि जैसे ही कोई देशभक्ति की बात करता है उसे मुसलिमविरोधी करारा देकर इस्लामिक आतंकवादियों के निसाने पर लाने की कोशिस की जाती।
जब तक वो किसी हमले का सिकार न हो तब तक उसे इतना बदनाम कर दिया जाता है कि लोगों को लगने लगता है कि उसके साथ जो हुआ वो सही है जिस तरह स्वामी रामदेव जी पर रात के अन्धेरे में जान से मारने के लिए हमला किया गया उससे हर आम आदमी का आक्रोशित होना स्वाभाविक था लेकिन सरकार ने कांग्रेस की नई-नवेली सहयोगी ISI के ऐजेंट धर्मनिर्पेक्षतावदी गद्दारों को करोड़ों रूपए देकर स्वामी जी, उनके सहयोगी व बालकृष्ण जी के विरूद्ध मिडीया में एक ऐसा अभियान चलाया जिसके परिमामस्वारूप लगने लगा मानो सारे अपराध स्वामी जी और उनके साथियों ने ही किए हों।
इसी तरह अन्ना जी को भी बदनाम करने के लिए हर तरह का हथकण्डा अपनाया गया।
इससे पहले RSS व मोदी को भी ऐसे ही हथकण्डो का उपयोग कर हर तरह से ठिकाने लगाने की कोशिस की गई ताकि देश में कोई भी इस्लामिक आतंकवाद के विरूद्ध आबाज न उठा सके ।
ये ऐसे षडयन्त्रों की ही सफलता है कि अग्निवेश जैसे लोग पहले स्वामी राम देव जी के अन्दोलन में घुसे बाद में ये अन्ना जी के अन्दोलन में घुसकर स्वामी जी और अन्ना जी को एक दूसरे से अलग रखने में सफल रहे।
ऐसे ही षडयन्त्रों ने अन्ना जी को प्रखर देशभक्त संगठन RSS से अन्दोलन को मिल रहे समर्थन को ठुकराने की बात करने पर मजबूर कर दिया।
भारतविरोधियों के ऐसे ही षडयन्त्र के परिणामस्वारूप ही उनके सहयोगी प्रशांत भूषण ने एक ऐसा भारतविरोधी ब्यान दिया जो पूरी तरह से ISI और पाकिस्तान के भारतविरोधी रूख का समर्थन करता है।जिसके परिमास्वारूप पूरी टीम अन्ना देशभक्तों के निशाने पर आ गई।
ऐसा नहीं कि प्रशांत भूषण ने ऐसा भारतविरोधी ब्यान पहलीवार दिया हो लेकिन इसवार योजना अनुसार इसका भारतविरोधी मिडीया का उपयोग कर तब तक प्रचार-प्रसार किया गया जब तक टीम अन्ना देशभक्तों के निशाने पर नहीं आ गई।
आज अगर कांग्रेस केजरीबाल पर हमला करवाने का साहस कर रही है तो ये ISI के ऐजेंट धर्मनिर्पेक्षतावदी गिरोह के उसी षडयन्त्र का परिणाम है जिसके अनुसार प्रशांत भूषण से ये पाकिस्तान समर्थक ब्यान दिलबाया गया।
अगर प्रशांतभूषण ने भारतविरोधी ब्यान देकर टीम अन्ना को देशभक्तों की निगाह में गिराया न होता तो किसमें दम था कि टीम अन्ना के किसी भी सदस्य को हाथ भी लगा पाता।
इसीलिए कहा गया है कि बुरी संगत से अकेले भले(पहले तो ऐसे गद्दारों को टीम में लेना ही नहीं चाहिए था अगर गलती से ले भी लिए थे तो पता चलते ही निकाल देने चाहिए थे अगर निकालने का दम नहीं था तो कम से कम उनकी कुटाई का तो विरोध न करते जिससे लोगों में किसी शंका का निर्माण न होता क्योंकि भ्रष्टाचार और गद्दारी की जननी कांग्रेस तो मौके की तलास में थी।)।आज नहीं तो कल केजरीवाल जी पर हुए हमले का सच सामने आएगा ही ।वेशक आज ये हमला कांग्रेस ने करवाया है लेकिन बहुत जल्दी हमें पता चल जाएगा कि इसमें अग्निवेश और प्रशांत भूषण की कितनी भूमिका है।

शनिवार, 15 अक्टूबर 2011

A F Rehman और Raji Raouf, के दुष्प्रचार का खण्डन करने वाले डा. सुब्रमण्यम स्वामी जी के लेख “strategy to combat Islamic terrorism in India” का हिन्दी अनुवाद “भारत में इस्लामिक आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए रणनीति”




shubramanium Swami

खुले पृष्ठ ‘हिन्दू और मुसलिम परिपक्व हैं पर संघ परिवार नहीं।’ के लिेए एक खण्डन लेख।
द हिन्दु समाचार पत्र में में छपे उस अंश का ये खण्डन है जिसका शीर्षक है ‘हिन्दू और मुसलिम परिपक्व हैं पर संघ परिवार नहीं।’ (खुला पृष्ठ ,अगस्त 2011) जो कि खुद को मुसलमानों में उदारवादी सोच का प्रतिनिधि बताने वाले ए फैजुर रहमान द्वारा लिखा गया है।
यद्यपि रहमान द्वारा ये अंश पहले के एक अंश ‘हम मुसलमान परिपक्व हैं हम अलोचना सह सकते हैं’ (“खुला पृष्ठ”,अगस्त 7,2010 के संदर्भ में लिखा गया था। जो कि राजी रौफ द्वारा लिखा गया था क्योंकि राजी रऊफ ने मेरे द्वारा किसी अन्य समाचार पत्र में लिखित खुले पृष्ठ के वारे में दुष्प्रचार किया है इसलिए मेरे लिए ये जरूरी हो गया है कि मैं ‘द हिन्दु’ में रहमान द्वारा लिखित अंश का खण्डन करूं।
रहमान के अनुसार उदारवादी मुसलमान वो हैं जो उनके अनुसार मेरे द्वारा लिखित उत्तेजक लेखों पर प्रतिक्रिया नहीं करते। हालांकि रहमान ये बताने से चूक जाते हैं कि उदारवादी मुसलमानों की उन आतंकवादियों के प्रति क्या प्रतिक्रिया होनी चाहिए जो देश के विभिन्न हिस्सों में हजारों निर्दोष भारतीयों का कत्ल कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त रहमान ये भी नहीं बताते कि उदारवादी मुसलमानों की कशमीरघाटी में 60000 हिन्दूओं का कत्ल कर 500000 हिन्दूओं पर बरबर अत्याचार कर उन्हें अपने घर से बेघर करने वाले आतंकवादियों के प्रति क्या प्रतिक्रिया होनी चाहिए।
रहमान कहता है कि उदारवादी मुसलमान, आतंकवादी मुसलिम संस्थाओं द्वारा हथियार उठाकर डा. सुब्रमण्यम स्वामी सहित सब हिन्दूओं पर हमला करने “take up arms and to let all hell loose (sic).” के उकसावे पर अमल करने के बजाए इस बात से सन्तुष्ट हैं कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने मुझे(डा. सुब्रमण्यम स्वामी) को नोटिस भेजा है। विचार करने के लिए रहमान का धन्यवाद।
लेकिन रहमान की उदारवादी मुसलमान की अवधारणा मात्र एक दिखावा है क्योंकि इसका एकमात्र मकसद इस्लामिक आतंकवादियों द्वारा किए जा रहे बरबर अत्याचारों से लोगों का ध्यान हटाना है। रहमान मुसलिमों को ऐसा कोई उपाए(कदम) नहीं बताते जो उन्हें मौन स्वीकृति त्याग कर हिन्दूओं पर अत्याचार कर रहे जिहादी आतंकवादियों के विरूद्ध उठाना चाहिए। मुझे “बराबर समय सिद्धांत" के अनुसार ये कहने का पूरा अधिकार है कि इस्लामिक आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए मेरे द्वारा लिखे गए खुले पृष्ठ में मैंनें सही तथ्य दिए थे। मेरे कहने का अर्थ है कि आतंकवाद इस्लाम की कत्लोगारद की परम्परा को ही आगे बढ़ा रहा है खासकर जिहाद को।
आतंकवाद हिंसा का वो हथियार है जो अपने राजनीतिक व वैचारिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए संवैधानिक तरीके से चुनी गई सरकार और लोगों को भयभीत करने के लिए आम जनता को निशाना बनाता है।
संयुक्त राष्ट्र सुराक्षा परिषद ने 2004 में “अपराधिक कृत्य” से सबन्धित संकल्प संख्या 1566 में आतंकवाद को इस तरह परिभाषित किया है। आम जनता या लोगों के समूह में या विशेष व्यक्तियों , एक जनसंख्या समूह को दवाव में लाने या एक सरकार को वाध्य करने या अन्तरराष्ट्रीय संस्था को किसी काम को करने या न करने के लिए वाध्य करना।
इसलिए प्रत्येक सरकार का ये कर्तव्य है कि वह सामूहिक या अपने स्तर पर आतंकवादविरोधी ऐसे कड़े कदम उठाए जिससे कि भविष्य में होने वाले हमलों को रोका जा सके । सरकार का ये भी कर्तव्य है कि वो आतंकवादी गतिविधियों को अन्जाम देने वाले लोगों के विरूद्ध मुकद्दमा चलाकर सजा दें। इसके साथ ही आतंकवाद का मुकाबला करना मनावाधिकारों की रक्षा करने और बढ़ावा देने के लिए भी बड़ा खतरा पैदा करता है। इसलिए प्रत्येक देश से ये आहवान किया जाता है कि वे आतंकवाद का खात्मा और मानवाधिकारों की रक्षा करें।इन दोनों के बीच में रैखिक सबन्ध होने के बजाए अरैखिक सबन्ध है। अर्थात ये सत्य नहीं है कि हम मानवाधिकारों का जितना कम बचाव करेंगे आतंकवाद का मुकाबला करने में उतना ही अधिक सफल होंगे। इसका विलोम ये भी सत्य नहीं है कि हम आतंकवाद को जितनी कड़ाई से कुचलेंगे मानवाधिकारों का उतना ही कम पालन होगा। इसलिए हमें एक ऐसी रणनीति बनाकर अमल करने की जरूरत है जिसके अनुसार मानवाधिकरों की रक्षा करने के साथ-साथ मानवता विरोधी आतंकवाद को भी नेस्तनाबूद करने के लिए किए जाने वाले रक्षा उपायों में अनुकूलतम संयोजन किया जा सके। कम होते हुए लाभ का नियम इस प्रक्रिया पर लागू होता है। हमें उपरलिखित प्रक्रिया पर अमल करने की जरूरत है। इसलिए हमने जो लिखा उसका मकसद एक बहस शुरू करना था ना कि हमारे लिखे का कोई दुरूपयोग कर दुष्प्रचार करे जैसा कि रहमान ने किया।
रणनीति
आज मौलिक प्रश्न ये है कि क्योंकि हम भारत में जिहादी आतंकवादी हमलों से दुनिया में सबसे अधिक पीड़ित हैं इसलिए इस्लामिक आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए रणनीति कैसे बनाई जाए?
आतंकवाद से लड़ने के लिए हमारी रणनीति ऐसी नहीं होनी चाहिए जो भविष्य में और अधिक मुसकिलें पैदा न करे। जैसा कि 1989 में रूबिया सईद अपहरण कांड व कंधार में आई-सी—814 विमान अपहरण कांड के दौरान हुआ। ततकालीन NF और राजग सरकारों द्वार आतंवादियों से सौदेवाजी करने के परिणामस्वारूप भारत में आतंकवाद ने और खतरनाक स्वारूप ले लिया। कन्धार में यात्रियों और जहाज के कर्मचारियों के वदले में मौलाना अजहर,उमर कुरैसी और जरगर जैसे दुर्दांत आतंकवादियों को छोड़े जाने के परिणामस्वारूप छुड़ाए गए लोगों से हजारों गुना ज्यादा निर्दोष लोग आज तक मारे जा चुके हैं। इन तीनों कुख्यात आतंकवादियों ने पाकिस्तान पहुंचने के बाद नायकों की तरह अपनी भारतविरोधी आतंकवादी हमलों को आगे बढ़ाया। इन हमलों में 26/11 का मुम्बई हमला भी सामिल है।
इसलिए हमें एक सपष्ट निती की जरूरत है मतलब एक उद्देश्यों को रेखांकित करने वाला सपष्ट घोषणा पत्र जिसमें कि इन उद्देश्यों की प्राथमिकताओं को सपष्टता से परिभाषित किया गया हो, इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए अपनाई जाने वाली रणनीति का खुलासा हो और इन उद्देश्य की पूर्ति के लिए जरूरी आर्थिक,मानवीय और संरचनात्मक संसाधनों को जुटाने की प्रतिबद्धता हो।
हम भारतवासियों में से अधिकतर को इस्लामिक आतंकवाद से मुकाबले के लिए प्रतिरोधक रणनीति की जरूरत है। टैलीविजन चैनलों पर बैठकर धर्मनिर्पेक्ष परजिवी सच्चे इस्लाम को मानबीय और शांतिप्रिए बताकर लोगों को वरगलाने की कोशिश तो कर सकते हैं। परन्तु ये सपष्ट है कि इन धर्मनिर्पेक्ष परजिवीयों में से किसी ने भी ने कुरान,सुरा और हदीश का अधिकारिक अनुवाद नहीं पढ़ा है। इसलिए इस्लाम की सही ब्याख्या करने की बात करने के बजाए, जो लोग खुद को उदारवादी कहते हैं उन्हें इस्लाम के एक ऐसे नए सुधारे हुए स्वारूप की रचना करनी चाहिए जो लोकतान्त्रिक मूल्यों के साथ तालमेल बिठाने का आग्रह करता हो।
इस्लाम में पैगंबर के शब्द अंतिम है।कोई भी सच्चा मुसलमान समस्या की जड़ इन आयतों से अपने आपको अलग नहीं कर सकता और न ही सच्चा मुसलमान ये कह सकता है कि वो समस्या की जड़ कुरान की इन आयतों में सुधार कर इन्हें फिर से लिखेगा। क्योंकि ऐसा करने पर उसे जान बचाने के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ेंगी।
हम हिन्दूओं की स्वभाव से धार्मिक उदारवादी होने की सर्विदित मान्यता प्राप्त परम्परा है। जब भारत 100% हिन्दू राष्ट्र था तब भी हिन्दूओं ने दुनिया के विभिन्न भागों में प्रताड़ित पारसियों,यहूदियों,सिरियाईयों,इसाईयों और ऐहसान फरामोस अरब के मुसलमानों को न केवल शरण दी बल्कि उनका पालन पोषण भी किया। आज ऐहसान फरामोस इस्लामिक आतंकवादियों द्वारा निशाना बनाए जा रहे हिन्दूओं को अपनी रक्षा के लिए एकजुट होकर खड़े होना होगा।
आज 21वीं शताब्दी में हिन्दूओं के लिए संगठित होकर खड़ा होने का क्या मतलब है? अपनी रक्षा के लिए खड़े होने से मेरा मतलब है कि प्रभावशाली प्रतिशोधात्मक कार्यवाही कर देश की रक्षा करने के मुद्दे पर सब हिन्दूओं में पूरी मानसिक स्पष्टता होनी चाहिए।
इस संगठित प्रतिशोधात्मक कार्यवाही में अन्य धार्मिक समूहों का तर्कपूर्ण सहयोग, भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने में लेना भी, इस प्रतिशोधात्मक कार्यवाही का हिस्सा है। इसलिए मैंनें इस बात की वकालत की कि मुसलमानों को, इस सच्चाई जो कि वैज्ञानिक डीएनए आनुवंशिक अध्ययन द्वारा सिद्ध हो चुकी है ,को स्वीकार कर लेना चाहिए कि हम सबके पूर्वज एक हैं और महान हिन्दू संस्कृति हम सब की सांझी विरासत है।
(डा. सुब्रमनियम स्वामी जी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।)

सोमवार, 3 अक्टूबर 2011

दिगविजय सिंह को समझना चाहिए कि बुरे काम का अन्जाम बुरा ही होता है…


दिगविजय सिंह कह रहा है कि वह देशभक्त है और उसका अपमान किया जा रहा है जिससे उसके परिबार व मित्रों को कष्ट हो रहा है ।इस कष्ट से बचने के लिए उसने कोर्ट में केश दर्ज करवा दिया है। इसमें कोई सन्देह नहीं कि जो लोग दिगविजय से प्यार करते हैं वो लोग ऐसे चित्रोंDigi को देखकर जरूर दुखी हुए होंगे।
ये चित्र सही हैं या गलत इस बात का फैसला करने के लिए हमें दिगविजय सिंह द्वारा अपमानित किए गए संगठनों, सन्तों व सुरक्षाबलों के करोड़ों देशभक्त समर्थकों के कष्टों को भी समझना होगा।
दिगविजय द्वारा प्रताड़ित किए गए देशभक्तों की संख्या इतनी अधिक है कि अगर दिगविजय ऐसे लाखों केस भी दर्ज करवा दे तो भी इन प्रताड़ित देशभक्तों के आक्रोश से बचना अगर नामुमकिन नहीं तो असम्भव जरूर है।
दिगविजय के मित्रों को भगवान से प्रार्थना करनी चाहिए कि ये मानसिक रूप से प्रताड़ित देशभक्त सिर्फ अपनी कलम से ही अपने आक्रोश और क्षोभ को शान्त कर ले वरना दिगविजय द्वारा दिए गए बोल बचन तो ऐसे हैं कि कोई भी कम संयम वाला देशभक्त अपना आपा खोकर दिगविजय द्वारा दी जा रही मानसिक प्रताड़ना से मुक्ति पाने के लिए कोई भी extreme कदम तक उठा सकता है जिसमें आत्मवलिदान से लेकर प्रताड़ित करने वाले से छुटकारा तक कुछ भी हो सकता है।
दीगविजय ने कहा
“ स्वामी राम देब को पत्तथर बान्ध कर तबतक पानी में डुवोए रखना चाहिए जब तक उनके प्राण न निकल जायें”
देशभक्त कहते हैं कि “भारतीय संस्कृति के ध्वजबाहक स्वामी राम देब जी जैसे प्रखर देशभक्त का अपमान करने वाले पापी को इतने डुकड़ों में विभाजित कर देना चाहिए कि उन टुकड़ों को चील-कऊए भी चोंच से उठाने में संकोच करें।”
दिगविजय ने कहा “स्वामी रामदेव ठग था ठग है और ठग रहेगा”
देशभक्त कहते हैं “दिगविजय गद्दार था गद्दार है और गद्दार रहेगा”
अपनी सिकायत में दिगविजय खुद को देशभक्त बताता है ।
हम आपसे जानना चाहते हैं कि “क्या कोई देशभक्त ,अपने जीवन का वलिदान देकर देशवासियों की रक्षा के लिए आतंकवादियो का अन्त सुनिस्चित करने वाले ,शहीद मोहन चन्द शर्मा की शहीदी का अपमान कर  सकता है? ”
लेकिन दिगविजय ने आजमगढ़ के गांव संजरपुर का दौरा कर बटला हाउस मुठभेड़ में मारे गए आतिफ व साजिद नामक आतंकवादियों को न केवल निर्दोश बताया पर साथ ही उनके गोलीवारी में मारे जाने के तरीके पर प्रश्न खड़े कर अपनी गद्दारी की मानसिकता को सबके सामने उजागर कर दिया।
अगर शहीदों का अपमान करने वालों को देशभक्त कहेंगे तो भला गद्दार किसे कहेंगे?
दिगविजय की आधारहीन बातों से तंग अगर अन्ना anna hajare ji2जी हजारे जैसा मंझा  हुआ बुजुर्ग व्यक्ति दिगविजय को पागलखाने भेजने की सिफारिस करता है तो भला आप उस नौजवान से क्या उम्मीद करेंगे जो परमपूजनीय स्वामी राम देव जीRam Dev ji (2) के नेतृत्व में कालेधन को भारत बापस लाने के लिए प्रतिबद्ध है जो स्वामी जी को अपना गुरू,मार्गदर्शक व नेता सबकुछ मानता है।
अगर वो ऐसा चित्रDigi1 बनाकर अपना आक्रोश निकालता है तो दिगविजय को केश करने के बजाए अपनी जुवान पर लुगाम लगाने की कोसिस करनी चाहिए ताकि कोई नौजवान दिगविजय के बकवास से तंग आकर कोई ऐसा कदम न उठा बैठे जिससे दिगविजय के साथ-साथ उस नौजवान का जीवन भी दांव पर लगा जाए।
एकदिन दिगविजय  देशभक्तों के संगठन RSS को बमों की फैक्ट्री करार दे देते हैं । जो बात आज तक भारत की कट्टर दुशमन ISI या फिर अमेरिका की खुफिया ऐजेंसी FBI या पिर पिछले 6 वर्षों से RSS को फंसाने व बदनाम करने के लिए लगाई गई CBI जैसी गुप्तचर संस्था ने नहीं कही वो बात दिगविजय कहे तो फिर भला RSS से जुड़ा देशभक्त क्या करे ?
कोर्ट में जाए या फिर चित्र Digi4बनाकर अपमान का बदला अपमान से ले या पिर कलम उठाकर अपने आक्रोश को शब्दों के बाण चलाकर शान्त करे।
आओ जरा अब दिगविजय के असली चरित्र को पहचानें…
ये दिगविजय वो शैतान है जो भारत के इतिहास के सबसे बड़े आतंकवादी हमले जो मुम्बई पर हुआ था को RSS के बहाने हिन्दूओं द्वारा किया गया हमला बताता है ये हमला वो हमला है जिसे खुद  कांग्रेस की सरकार व अमेरिका पाकिस्तान द्वरा किया गया हमला बताते हैं जो हेडली की गिर्फतारी के बाद  अमेरिकी न्यायालय में भी साबित होने के करीब पहुंच गया है व कसाब की गिफ्तारी के बाद भारतीय न्यायलय में साबित हो चुका है।
अब आप बताओ दिगविजय देश के साथ इससे बड़ी और क्या गद्दारी कर सकता है?

ये दिगविजय वो दिगविजय है जो मानबता के शत्रु ओसामाविन लादेन Ladenको ओसामा जी कहकर भारत के मुसलमानों को आतंकवाद के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए उकसाता है ,उस ओसामाविन लादेन को जिसे कोई समझदार मुसलमान भी जी कहना पसंद नहीं करता। आप जरा सोचो कि अगर मुसलमानों के बच्चे ऐसे लोगों के उकसावे में आकर देश में आतंकवाद को बढ़ाबा देते हैं तो भला भारत के दुशमनों के अलाबा और कौन खुश हो सकता है?
ये दिगविजय, जो शान्तिप्रिए हिन्दूओं को आतंकवादी कहकर अपमानित करता है , आतंकवादियों के घर जाकर शहीदों के वलिदान पर प्रश्न उठाकर सुरक्षाबलों का मनोबल तोड़ता है ,सन्तों को ठग कहता है कत्ल करने की धमकी देकर डराता है अपने समर्थकों को उकसाता है,RSS को बमों की फैक्ट्री बताता है व मानबता के दुशमन आतंकवादी ओसामविन लादेन को जी कहकर अपना आदर्श बताता है ।
आप ही बताओ कि इस दिगविजय के काल्पनिक आरोपों व अपशब्दों से प्रताड़ित और आक्रोशित देशभक्त इसके साथ कैसा बर्ताब करें?

शनिवार, 10 सितंबर 2011

ऐसा लगा मानो भारत का नहीं पाकिस्तान का प्रधानमन्त्री बोल रहा हो।

कांग्रेस ने पहले देश के सबसे बड़े देशभक्त संगठन RSS को मुसलिम विरोधी करार देकर RSS द्वारा भारत के नागरिकों के वीच भावनात्मक एकता पैदा करने के लिए उन्हें उनके खून के रिस्तों को याद करवाने के लिए किए जा रहे प्रयत्नों को अबरूद्ध करने की कोशिश की। जिसमें कांग्रेस काफी हद तक मुसलमानों के मन में RSS के प्रति संदेह की भावना पैदा करने में सफल रही। क्योंकि कांग्रेस के इस प्रयत्न को भारत के दुस्मनों द्वारा नियन्त्रित मिडीया का भरपूर साथ मिला। इस मिडीय ने ISI द्वारा प्रयोजित पत्रकारों व गौतम नबलखा जैसे दानवाधिकारवादियों के माध्यम से  कांग्रेस के देशविरोधी-हिन्दूविरोधी षडयन्त्रों को आम भारतीयों के मुंह से कहलवाने का भरपूर प्रयास किया जिसका खुलासा अमेरिका में आतंकवादी गुलामनवीफई की गिरफतारी के बाद हुआ।
भारत की खुशनसीबी देखिए कि जिस वक्त कांग्रेस ने मुसलिम आतंकवादियों को हथियार बनाकर अपना पूरा जोर RSS को ठिकाने लगाने में लगाया हुआ था ठीक उसी वक्त देश को भावनात्मक एकता के शूत्र में बांधने के लिए एक ऐसी आबाज उठी जिसने RSS से एक कदम आगे बढ़कर ब्यबस्था परिवर्तन का नारा देकर आज तक चली आ रही गुलामी की सब जंजीरों को तोड़कर एक ताकतबर भारत के निर्माण की बात आगे बड़ाई। ये आबाज   RSS से  भी बुलन्द व सपष्ट सुनाई दी। पहले तो कांग्रेस ने इस आबाज को RSS के विरूद्ध प्रयोग करने के लिए षडयन्त्र रचे लेकिन जब देखा कि जिस तरह खून-खून को पुकारता है उसी तरह इस आबाज ने भी संघ को पुकारा और दोनों आबाजें भारत मां की सेवा में एक होती दिखीं तो कांग्रेस ने इस आबाज को कुचलने के लिए इसे भी मुसलिम-विरोधी करार देकर देश की सब सुरक्षा ऐजेंसियों को स्वामी जी को पंसाने व बदनाम करने के काम में लगा  दिया। ये आबाज है स्वामी राम देव जी की। ये वो आबाज है जो बहुत जल्द कांग्रेस के असली भारतविरोधी चरित्र को जनता के सामने वेनकाब कर देगी।
भारतविरोधी  कांग्रेस ने जब अपना पूरा जोर  RSS और सवामी जी को कुचलने के लिए लगाया हुआ था तभी एक और आबाज उठी जिसने भारत की आजादी की दूसरी लड़ाई का विगुल बजा दिया। इस आबाज में वेसक किसी संगठन की ताकत नहीं थी लेकिन इस आबाज में वो बात थी जो हर स्वाभिमानी देशभक्त भारतीय के सीधे दिल तक जा पहूंची। यहां भी कांग्रेस ने पहले तो अपने ऐजेंट अग्निवेश जैसे भारतविरोधियों को पलांट कर इस आबाज को भी भारत वोले तो RSS के विरूद्ध मोड़ने की कोशिश की । फिर इनका चरित्र हनन करने की और फिर अपनी ऐजेंट अरूणा राय को आगे कर इस आबाज को कमजोर करने की कोशिस की।जब कोई षडयन्त्र कामयाब  न हो सका तो इसे भी मुसलिम विरोधी करार देकर इसे अमेरिका का ऐजेंट बताकर देश की ऐजेंसियों को इस आबाज को बुलन्द करने में जुटे देसभक्तों को बदनाम करने में लगा दिया।
जब JJ Singh जी सेना प्रमुख थे तो इसी कांग्रेस ने सेना को भी मुसलिम विरोधी करार देकर सेना में मुसलमानों की गिनती की बात उठाकर भारतीय सेना को विभाजित करने की असफल कोशिस की। अगर JJ Singh जी ढटकर विरोध न करते तो जरा सोचो इन गद्दारों की योजना क्या थी?
आज तो प्रधानमन्त्री ने प्रधानमन्त्री पद की सारी गरिमा को ताक पर रखकर सभी सुरक्षाबलों को मुसलमानों के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रसित बताकर सबके सब देशभक्त जवानों को मुसलिमविरोधी करार दे दिया। इसकी बातों को सुनकर ऐसा लगा मानो भारत का नहीं पाकिस्तान का प्रधानमन्त्री बोल रहा हो। ये भारतविरोधी आतंकवाद समर्थक मनमोहन खान यहीं रूक जाता तो गनीमत थी इस आतंकवादी ने एक कदम आगे बढ़क यहां तक कह दिया कि बम धमाका होने की स्थिति में सिर्फ मुसलमानों को न पकड़ों। अब इस गद्दार को कौन समझाए कि जब दुनियाभर में आतंकवाद मुसलमान पैला रहें तो तो मुसलमान ही पकड़ें जा रहे हैं पिर ये कौन सा न्याय है कि भारत में आतंकवादी घटनाओं को मुसलमान अंजाम देते और उन्हें न पकड़ा जाए।
ऐसे ही भारतविरोधी आतंकवाद समर्थक गद्दार नेताओं की हिन्दूविरोधी सोच के परिमामस्वारूप मुसलिम आतंकवादी कशमीरघाटी व देश के अन्य हिस्सों में हिन्दूमिटाओ-हिन्दूभगाओ अभियान को सफलता पूर्वक अन्जाम देने में सफल हो रहे हैं और हमारे 20 लाख जवान कुछ नहीं कर पा रहे हैं। आज ऐसे ही गद्दार नेताओं के कारण 20 लाख जवानों द्वारा देशभक्त भारतीयों की रक्षा करना तो दूर उल्टा ये अपनी रक्षा करने में भी सफल नहीं हो पा रहे हैं। हां ऐसे गद्दार नेताओ के आदेशों का पालन कर अफजल-जिलानी-गिलानी-कसाब-उमर जैसे भारतविरोधी आतंकवादियों की रक्षा के लिए अपना खून पसीना बहाकर जरूर सफल हो रहे हैं।
मामला यहां भी नहीं रूका इससे आगे जाकर इस गद्दार ने अपनी विदेशी आका एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी व इस अंग्रेज के भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी गद्दारों द्वारा पाकिस्तान में वने ईशनिंदा कानून के नकसेकदम पर  तैयार किया गया एक ऐसा कानून (Prevention of Communal and Targeted Violence Bill- 2011)सुझाया जिसके अनुसार किसी मुसलमान या ईसाई आतंकवादी द्वारा किया गया हिन्दू का कत्ल या हिन्दू की मां-बहन का बालात्कार या फिर हिन्दू की आस्था पर प्रहार कोई अपराध नहीं है लेकिन किसी हिन्दू द्वारा Self Defence की गई कोई भी कार्यवाही जघन्य अपराध है।

रविवार, 28 अगस्त 2011

अन्ना जी से गद्दारी कर आखिरकार भारतविरोधी आतंकवादियों के दलालों ने अपनी असलियत दिखा ही दी?

हम आपको शुरू से ही बता रहे हैं कि देश में चल रहे अधिकतर NGOs भारत के शत्रुओं के इसारे पर भारतविरोधी षडयन्त्रों को धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में छुपकर अन्जाम देते हैं। जिसके समय-समय पर प्रमाण सामने आते रहते हैं।
सच कहें तो अग्निवेश जैसे आतंकवादियों के मददगार का अन्ना जी-केजरीवल जी जैसे प्रखर देशभक्तों के साथ एक मंच पर आना हमारे लिए एक चौंकाने वाली घटना थी। इससे पहले जब अग्निवेश जी हमें स्वामी राम देव जी जैसे प्रखर देसभक्त के साथ दिखे तब भी हमें लगा कि ये क्या हो रहा है। मन में प्रश्न खड़े होने लगे कि कहीं ये व इसके मित्र देशहित के लिए किए जा रहे अन्दोलनों के साथ खुद को जोड़कर अपने देशविरोधी–हिन्दूविरोधी कार्यों को आगे बढ़ाने की फिराक में तो नहीं हैं?
फिर भी हमने अपने मन को समझाया कि अगर भारतविरोधियों के लिए काम करने वाला भारतीय व इसके मित्र अगर भारत के सबसे बढ़े शत्रुओं में से एक भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए काम करने की ओर अग्रसर हैं तो भला इसमें क्या बुराई है ? जब हम  लाखों हिन्दूओं का कत्ल कर करोंड़ों हिन्दूओं को वेघर कर भारत का विभाजन करवाने वाले धर्मनिर्पेक्षतावादियों व अलगावबादी मुसलमानों को इस देश में बरदाश कर रहे हैं तो  इन जैसे बौद्धिक गुलाम हिन्दूओं को इस नेक अन्दोलन में बरदाश करने में भला क्या हरज है?
बस एक ही डर सताता रहा कि कहीं ये टीम अन्ना जी से भीतरघात कर इस अन्दोलन को कमजोर न कर दे क्योंकि बाहर के शत्रु से लड़ना आसान होता है लेकिन अन्दर के शत्रु से निपटना बहुत मुस्किल ।
अब खबरें आ रही हैं कि अन्दोलन के दौरान अग्निवेश ने फोन पर सरकार को अन्दोलनकारियों पर हमला करने के लिए उकसाया वो भी उस वक्त जब सरकार जनता व विपक्ष के दबाब में अन्ना जी की बात मानने के लिए मजबूर हो चुकी थी। अब आप ही बताओ कि इस नाजुक वक्त में अनदोलनकारियों के विरूद्ध एक विदेशी अंग्रेज  एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम सरकार को भड़काने से वड़ी गद्दारी भला और क्या हो सकती है? मानो अपनी असलित दिखाने के लिए इतना काफी न हो अब अग्निवेश ने अन्दोलनकारियों को पागल हाथी करार दिया है।
ऐसा नहीं कि गद्दारी सिर्फ अग्निवेश ने ही की है इससे पहले इस देशहित से जुड़े अन्दोलन को कमजोर करने के लिए कल तक अन्ना जी के साथ दिखने वाली  अरूणा राय ने भी अपनी आका विदेशी अंग्रेज एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के इसारे पर जनलोकपालविल के रास्ते में रूकावटें पैदा करने के लिए अपना आधा-अधूरा जोकपाल विल मिडीया में उछालकर कमेटी के पास रख दिया व मिडीया में अपने नजदीकियों को अन्दोलनकारियों के विरोध में वोलने के काम में लगा दिया।
जरा सोचो जो सरकार व NGOs हर वक्त आम  लोगों के हित के लिए काम करने के वहाने हर भारतविरोधी आतंकवादी को आम-गरीब आदमी बताकर आतंकवादियों को कड़ी कार्यवाही से बचाने के लिए प्रतिबद्ध दिखते हैं वो ही सरकार व NGOs किस तरह आम गरीब लोगों  के सच्चे हित के लिए चल रहे अन्दोलन को मिलजुलकर किस तरह कमजोर करने में दिन-रात एक किए हुए थे।
जरा सोचो कि ये अन्दोलन देशभक्त क्रांतिकारियों व आम जनता के बजाए अगर इन गद्दारों के समर्थकों पर निर्भर होता तो क्या होता?
मजेदारबात तो ये हैं कि देश से गद्दारी की लत के सिकार हो चुके NGOs अपने साथियों से भी गद्दारी करने से खुद को नहीं रोक सके । प्रशांत भूषण जैसे लोग कल तक भारतविरोधियों की इन्हीं NGOs के साथ मिलजुलकर काम कर रहे थे।  हमें नहीं लगता कि इस देशहित से जुड़े अन्दोलन से इन NGOs की गद्दारी के बाद  भी कोई देशभक्त इन देशविरोधी-हिन्दूविरोधी NGOs को मुंह लगायगा या इनपे भरोसा कर पाएगा।
क्या आपको नहीं लगता कि देशहित वो भी खासकर दबे-कुचले-गरीब हित या य़ूं कहें कि देश के अन्तिम आदमी के हित से जुड़े इस अन्दोलन का विरोध कर धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में छुपकर भारतविरोध में काम करने वाले  भारतविरोधी आतंकवादियों के दलालों ने अपनी असलियत दिखा ही ?

गुरुवार, 25 अगस्त 2011

जो संविधान भ्रष्टाचार और आतंकवाद को खत्म करने के रास्ते में बाधा बने और गरीबों को गोली से उड़ाने की इजाजजत दे उस संविधान को जलाकर राख कर देना चाहिए।

Ninjaआज जब भी भ्रष्टाचार और आतंकवाद के विरूद्ध कढ़े कदम उठाने की बात चलती है तो अक्सर संविधान की दुहाई दी जाती है। संविधान में क्या क्या लिखा है इसे पूरी तरह तो हमने नहीं पढ़ा लेकिन  जो हम अनुभव कर रहे हैं उसमें ये पा रहे हैं कि जब भी किसी भारतविरोधी आतंकवादी को कढ़ी सजा देने की बात चले तो आतंकवादी का बचाब संविधान की दुहाई देकर किया जाता है दूसरी तरफ जब किसान-वनवासी या फिर आम देशभक्त जनता अपने अधिकारों को लिए शांतिपूर्वक अनसन-धरना प्रदर्शन करें तो अक्कसर सरकारें उनपर गोली-वारी करवाकर उन्हें मौत के घाट उतार देती हैं।
मामला चाहे 4 जून की रात को रामलीला मैदान में कालेधन के विरूद्ध संघर्ष कर रहे देशभक्तों पर आधी रात को हमले का हो Publicया फिर महाराष्ट्र में पानी की खातिर संघर्ष कर रहे किसानों का हो या फिर देश के विभिन्न हिस्सों में बनों पर अपने अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे वनवासियोंVillagers का हो । हर जगह यही देखने को मिलता है कि उन सब का कत्ल करने का अधिकार संविधान सरकारों को  देता है।
आप देख लो कि किस तरह लोकतन्त्र के मन्दिर पर हमला करने वाले मानबता के कातिल को संविधान का हवाला देकर जिन्दा रखने की कोशिसें की जा रही हैं जो पिछले कई वर्षों से सफलतापू्वक जारी हैं।
आज जब अन्ना हजारे जी Anna jiभ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए सख्त कानून की बात कर रहे हैं तब भी कहा जा रहा है कि संविधान भ्रष्टाचार रोकने के लिए जन लोकपाल जैसे कड़े कानून बनाने की इजाजत नहीं देता।
बैसे भी ये संविधान वो संविधान नहीं है जो 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था। इस संविधान को सरकारों ने अपनी सुविधानुसार एक-दो वार नहीं वल्कि सैंकड़ों वार बदला है।
जब संविधान बना था तब हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्षता जैसी कोई ब्याबस्था संविधान में नहीं थी। देश के दुशमनों ने संविधान को तोड़मरोड़कर इस देशविरोधी-हिन्दूविरोधी षडयन्त्र को संविधान का हिस्सा बनाया। जिसके परिणामस्वारूप आज इमाम बुखारी जैसे भारतविरोधी आतंकवादी वन्देमातरम् और भारत माता की जय जैसे देशभक्ति के उदघोषों को सांप्रदायिक करार देकर विना किसी खौफ के जिन्दा रह रहे हैं।
हद तो देखो कि जिस अन्दोलन से अग्निवेश Agniveshजैसे लोग (जो देशभक्त ताकतों खासकर हिन्दुत्वनिष्ठ ताकतों व हिन्दूओं को कोशने का कोई मौका नहीं छोड़ते जो अकसर मुसलिम व माओवादी आतंकवादियों के बचाब के लिए लड़ते हुए नजर आते हैं) जुड़े हुए हैं उस अन्दोलन को अगर ये मुसलिम गद्दार सांप्रदायिक करार दे रहे हैं तो आप कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि कल जब ये गद्दार और ताकतवर हो जायेंगे तो सारे के सारे हिन्दूओं को ही सांप्रदायिक करार देकर भारत को ही सांप्रदायिक ठहराकर  गद्दारों के लिए एक और विभाजन की मांग नहीं करेंगे। 
बैसे अगर आप के मन में थोड़ी भी मानबता वाकी है तो आप  महसूस कर सकते हैं कि भारत के जिस हिस्से कशमीर घाटी में इन मुसलिम गद्दारों की संख्या अधिक हो गई उस हिस्से में इन राक्षसों ने किस तरह सेकुलर गिरोह की सहायता से हिन्दूमिटाओ-हिन्दूभगाओ अभियान चलाकर 60000 हिन्दूओं का कत्ल कर 500000 हिन्दूओं को वेघर कर दिया जो आज अपने ही देश में दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं(सरकारों के पास भारतीय सैनिकों पर हमला करने वाले मुसलिम आतंकवादियों को देने के लिए 5-5 लाख रूपए तो हैं पर इनके लिए कुछ नहीं)।
जो सेकुलर गद्दार गुजरात में मुसलिम हमले की प्रतिक्रियस्वारूप मारे गए 1000 मुसलमानों(अच्छा होता न मुसलमान हमला करते न ये मारे जाते) के लिए  दिन रात TV पर छाती पीटते रहते हैं क्या आपने इन गद्दारों को कभी मारे गय हजारों हिन्दूओं व वेघर हुए लाखों हिन्दूओं की पीड़ा पर कभी वोलते हुए देखा। नहीं न क्यों ? क्योंकि धर्मनिर्पेक्ष शब्द संविधान में जुड़ने के बाद सब गद्दारों को हिन्दूओं का कत्लयाम करने का मानो लाइसैंस(Learning Lisence) मिल गया हो। जिसे पक्का करने के लिए Prevention of Communal and Targeted Violence Bill- 2011 लाया जा रहा है ताकि भारतविरोधी आतंकवादियों को देशभक्तों का सफाया करने में कोई समस्या पेश न आए। मारे व उजाड़े गय हिन्दूओं का मुद्दा उठाना तो दूर जो हिन्दूओं की पीड़ा को व्यक्त करने की कोशिश भी करे उसे ये सेकुलर गद्दार एकदम से सांप्रदायिक करार दे देते हैं जिस तरह आज इस भ्रष्टाचार विरोधी अन्दोलन को सांप्रदायिक करार  दिया जा रहा है।
ये सब किया जा रहा है इस संविधान के नाम का सहारा लेकर।
हमारे विचार में अब वक्त आ गया है कि इस संविधान को जो कि भ्रष्टाचारियों व गद्दारों की ढाल वन चुका है उसे आग लगाकर हमेशा के लिए खत्म कर दिया जाए व देश में एक ऐसा संविधान बनाया जाए जो भारतीयों के लिए हो न कि हिन्दू-मुसलिम या ईसाई के लिए।

सोमवार, 22 अगस्त 2011

जरा सोचो किस आधार पर कांग्रेस देशभक्तों को खुलेआम ललकार रही है ? संदर्भ संसद में बाहरी हाथ स्वीकार नहीं

Secret telling smileहमने कई बार लिखा कि कांग्रेस की मानसिकता भारतविरोधी है इसके कई प्रमाण भी हमने आपको दिए। लेकिन अब तो कांग्रेस के नेता खुले तौर पर भारतीय आम जनता को बाहरी वोले तो विदेशी करार दे रहे हैं।
आपने देखा कि जब स्वामी राम देब जी ने भारत के 400 लाख करोड़ रूपए  जो कि देश के गद्दारों ने लूटकर विदेशी बैंकों मे जमा करवाए हैं को भारत वापस लाने की मांग की तो कांग्रेस ने स्वामी राम देव जी को हमेशा के लिए खामोश कर देने के मकसद से रात के अन्धेरे में जब स्वामी राम देव जी व हजारों देशभक्त दिनभर भारतमात के लूटे गय धन को वापिस लाने के लिए संघर्ष करने के बाद सो रहे थे तब एक विदेशी अंग्रेज एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम कांग्रेस सरकार ने हमला करवा दिया।attack on SWami
इस दौरान संसार के सबसे खतरनाक मानबताविरोधी आतंकवादी ओसामाविन लादेन को ओसामा जी कहने वाली कांग्रेस ने स्वामीरामदेब जी को ठग,  लुटेरा, कायर जैसे शब्दों का प्रयोग कर अपमानित करने का प्रयत्न किया।
38000 करोड़ रूपए की टैक्स, चोरी करने वाले आतंकवादियों के financer हसन अली का बचाब करने वाली कांग्रेस ने भारतीयता व आयुर्वेद के प्रचारक व पोषक स्वामी राम देब जी पर न केवल Money Laundering Act लगाने की धमकियां दी वल्कि केन्द्र सरकार की सब की सब ऐजेंसियों को स्वामी राम देब जी के पीछे लगा दिया जब कुछ न मिला तो अमेरिका की ईसाई खुफिया FBI की मदद लेकर स्वामी राम देव जी को फंसाने व बदनाम करने की कोशिश की गई व की जा रही है।
इतने षडयन्त्र करने के बाद भी जब कांग्रेस के हाथ कुछ ठोश नहीं लगा तो एक विदेशी अंग्रेज एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम कांग्रेस ने भारत में जन्मे स्वामी रामदेब जी के दांय हाथ आयुर्वेद के वैज्ञानिक आचार्या वालकृष्ण जी को विदेशी करार देकर सारी सरकारी ऐजेंसियों को उनके पीछे लगा दिया।Acharaya ji
अब जब अन्ना जी ने कांग्रेस की चोरबजारी के विरूद्ध मोर्चा खोला तो कांग्रेस ने इस देशभक्त के लिए भी गुंडो-मवालियों जैसी भाषा का प्रयोग करते हुए अपमानित करने की कोशिश में उपर से नीचे तक भ्रष्ट करार दे देते हुए उनकी सेना की नौकरी पर भी सवाल खड़े कर  दिए।जिसे सेना ने सरकार के दबाब में न आते हुए सिरे से खारिज करते हुए ये बताया कि अन्ना जी की सेना में नौकरी में कोई भी दाग नहीं है वल्कि उन्हें पांच-पांच मैडल भी मिले हैं। anna hajare ji2
इन सब षडयन्त्रों में मुंह की खाने के बाद भी कांग्रेस ने एक कदम और आगे बढ़ाते हुए अन्ना जी के इस अन्दोलन के पीछे विदेशी हाथ बताकर जनता को गुमराह करने की कोशिश की। कांग्रेस का ईसारा ईसाई अमेरिका की ओर था ।इससे पहले कांग्रेस अन्ना हजारे के पीछे RSS का हाथ बता चुकी थी। इन दोनों आरोंपो का एक ही मकसद था कि RSS व USA का नाम आने के बाद आतंकवादी मुसलमान  व उनके समर्थक अन्ना हजारे के अन्दोलन के विरोध में कूद पड़ें और देश में दंगा-फसाद की चुनौता को बहाना बनाकर विदेशी अंग्रेज एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम कांग्रेस को देशभक्तों के इस अन्दोलन को कुचलने का मौका मिल जाए।
कांग्रेस की फूट डालो और राज करो की इसी निती को सफल बनाने के लिए NDTV ने चर्चा के माध्यम से देशभक्तों के इस अन्दोलन को सिर्फ स्वर्णों के मध्यम बर्ग का अन्दोलन बताकर इस अन्दोलन को गरीबविरोधी-दलित विरोधी व मुसलिमविरोधी  करार देने की कोशिश की जिसमें NDTV ने ISI ऐजेंट परजीवियों का सहार लिया।
कांग्रेस के इस फूट डालो और राज करो के षडयन्त्र को आगे बढ़ाने के लिए Star News ने भी पूरा जोर लगाया।
इन सब षडयन्त्रों से भी काम न बना तो कांग्रेस ने देशभक्त जनता के इस अन्दोलन के विरोध में सब सांसदों को खड़ा करने के लिए संसद के मानसम्मान का नारा देते हुए सब सांसदों को बाहरी हस्तक्षेप(भारतीय जनता) के विरूद्ध एकजुट होने की अपील की।
soniyaजरा सोचो कि जिस कांग्रेस को इटालियन अंग्रेज एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलामी करने में कोई आपति नहीं वो गुलाम कांग्रेस भारतीय जनता को विदेशी कहकर किसके दम पर भारतीयों का अपमान कर खुद को विदेशीयों का ऐजेंट साबित कर सब देशभक्तों को चुनौती दे रही है कि अगर दम है तो उखाड़ लो जो उखाड़ सकते हो?
इस अहंकार का आधार एक ही है कांग्रेस जानती है कि उसने विदेशीयों के इसारे पर देश में कानून सांप्रदाय-जाति-क्षेत्र-भाषा आधारित बनाकर फूट-डालो और राज करो का जो षडयन्त्र रचा है वो हर हाल में सफल होगा क्योंकि भारतीयों के पास इस षडयन्त्र का अभी तक कोई तोड़ नहीं।
क्या आपके पास कोई तोड़ है?

गुरुवार, 4 अगस्त 2011

Half Indian(Rahul Gandhi) व गद्दार कांग्रेसियों का भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी दुशप्रचार Christian USA को प्रभावित करने में सफल रहा…


वोट पाने के लिए राजनीतिक दलों द्वारा एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाना कोई बुरी बात नहीं । लेकिन कांग्रेस द्वारा RSS के बहाने हिन्दूओं व भारत के विरूद्ध किया जा रहा दुशप्रचार देशद्रोह व गद्दारी की हर सीमा को पार कर चुका है।

 जिस तरह देशभक्ति व स्वादेशी की भावना से संचालित RSS ने 0% INDIAN मतलब Italian एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी का भारत का प्रधानमन्त्री वनना लगभग नामुमकिन बना दिया उससे जले-भुने चर्च ने एडवीज व उसकी कुलाद  Half Indian(Rahul Gandhi) के साथ मिलकर एक ऐसी योजना बनाई जिसमें मुसलमानों (आज वेशक मुसलमान खुश हो रहे हैं लेकिन आगे चलकर बहुत पछतायेंगे)को हथियार वनाकर RSS को आतंकवादी संगठन घोषित कर भारत में उठने वाली देशभक्ति की हर आबाज को हमेशा के लिए कुचल देना प्रमुख है।

चर्च का RSS पर इस तरह आगबबूला होना कोई आसामान्य घटना नहीं क्योंकि चर्च ने अपनी एजेन्ट एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी  को भारत के सबसे बड़े राजनितिक दल का प्रमुख बनाने के लिए 6-6 लोगों का कत्ल करवाया था। ये वो लोग थे जिनके जिन्दा रहते चर्च की ऐजेंट का भारत का सताधारी पार्टी का सर्वेसर्वा बनना लगभग नामुमकिन था।(अधिक जानकारी के लिए यहां पढ़ें)


अब आप सोचो कि जिस चर्च ने इतने षडयन्त्र कर अपनी ऐजेंट को यहां तक पहुंचाया था उसी को RSS ने जिस तरह से रोक दिया क्या चर्च इसकी कीमत चुकाए विना RSS को यूं ही छोड़ देगा तो यह कभी सम्भव नहीं।

अमेरिका, जिसके राष्ट्रपति का पहला काम चर्च की रक्षा करना मतलब चर्च की योजनाओं को आगे बढ़ाना है, के इसारे पर चिदंवरम दिन-रात एक कर RSS को आतंकवादी सिद्ध करने के लिए एक के बाद एक निर्दोष हिन्दूओं को जेल में डालकर(वेशक अभी तक उनमें से एक पर भी आरोप सिद्द नहीं हुआ उल्टा अदालतों ने पाया कि ये लोग निर्दोष हैं) भगवा आतंकवाद-भगवा आतंकवाद चिलाकर  भारत को आतंकवादी देश करार दे रहे हैं तो ये एक लम्बी योजना का हिस्सा है।

इस योजना पर UPA बढ़े आराम से आगे बढ़ रहा था उसे लगता था कि RSS को बदनाम कर देने के साथ ही देश में कोई भी अब देशभक्ति की दिशा में आगे बढ़ने का साहस नहीं करेगा लेकिन स्वामी राम देव जी के नेतृत्व में भारतस्वाभिमान ने  UPA के इस भ्रम के तोड़ा ही नहीं वल्कि चकनाचूर भी कर दिया। स्वामी जी के इस काम में अन्ना जी ने भी हाथ बंटाया ।इसीलिए तो कांग्रेस इन्हें RSS के बता रहे हैं। बात फंसती देखकर चोरों और गद्दारों की सरदार इटालियन व उसकी Half Indian कुलाद ने अमेरिका से सीधे हस्तक्षेप की गुहार लगाई

इसी योजना को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका ने ये घोषणा की है
 अब तो जागो मेरे देसभक्त भाईयो वरना कहीं ऐसा न हो कि हालात वहां तक पहंच जांयें जहां आपके जागने पर भी बात न बन पाए.....

मंगलवार, 21 जून 2011

कांग्रेस का हाथ भारतविरोधी चोरों गद्दारों आतंकवादियों के साथ...


2004 से भारत में इटालियन एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम एक ऐसी हिन्दूविरोधी-देशविरोधी सरकार सतासीन है जिसका एकमात्र शत्रु भारत और भारतीय संस्कृति है।

आज देश मे जो भी देशभक्ति को आगे वढ़ाने या फिर भ्रष्टाचार मिटाने की बात करता है वो एकदम इस चोरों और गद्दारों की सरकार के निशाने पर आ जाता है फिर वह चाहे स्वामी राम देव जी हों या फिर अन्ना हजारे जी या फिर RSS ।

आज देश में जो भी गद्दारी, चोरबजारी या फिर आतंकवाद को बढ़ाबा देकर भारत की तबाही को सुनिस्चित करने के लिए आगे बढ़ता है कांग्रेस नेतृत्व सरकार सहित उसके समर्थन व बचाब में किसी भी हद तक जाने के लिए त्यार हो जाता है
मामला चाहे लोकतन्त्र पर हमला करने वाले गद्दार मोहम्द अफजल का हो या फिर दिल्ली में शहीद मोहन चन्द शर्मा पर हमला करने वाले आजमगढ़ के आतंकवादियों का हो या फिर देशद्रोही कश्मीरी आतंकवादी गिलानी व उसकी समर्थक अरूंधिति राय का ही क्यों न हो....

हर जगह एक ही बात साबित होती है इटालियन एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम कांग्रेस का हाथ भारतविरोधी चोरों गद्दारों आतंकवादियों के साथ

शनिवार, 25 दिसंबर 2010

GSAT-5P की असफलता का एंटोनिया CONECTION




आज दूरदर्शन के सरकारी चापलूस की भूमिका में चले जाने के कारण बहुत कम लोग दूरदर्शन के कार्यक्रम देखते हैं लेकिन आज भी आम व मजबूर लोगों के लिए दूरदर्शन , रेडियो के बाद सूचना का एकमात्र साधन है। हम भी दूर्दरशन के कार्यक्रम बहुत कम देखते हैं। लेकिन क्योंकि आज GSAT-5P के प्रक्षेपण का सीधा प्रसारण दूरदर्शन दिखा रहा था इसलिए हम दूरदर्शन के साथ चिपक कर बैठ गए।


GSAT-5P प्रक्षेपण कुछ मिनट के बाद ही विस्फोट के साथ असफल हो गया तो मन को बहुत दुख हुआ ।क्रोध भी आया कि जब रूस से लाया गया क्रायोजैनिक इंजन खराब था तो उसे वापस रूस को लौटाने के बजाए देश का 175 करोड़ रूपया बरबाद करना क्यों जरूरी समझा गया।क्रायोजैनिक तकनीक बहुत ही उच्चतकनीक है इस तकनीक पर आधारित इंजन में लीकेज का मतलब ही कार्यक्रम की असफलता की गारंटी है। लेकिन खैर जैसा अक्सर होता है अब बैसे ही इस कार्यक्रम में इस वेवकूफाना हरकत को छुपाने के प्रयास शुरू हो चुके होंगे।


इसके बाद जो हुआ वो और भी चौंकाने वाला था। जैसे ही निर्धारित समय पर GSAT-5P के असफल प्रक्षेपण के बाद सीधे प्रसारण का ये कार्यक्रम बन्द हुआ बैसे ही ईसाईयत का प्रचार-प्रसार शुरू हो गया । कुछ समय तक कुछ अंग्रेज लड़के–लड़कियां ईसाईयत के गुणगान के लिए वेसुरे गीत गाते रहे बाद में हमारे दूरदर्शन ने एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के देश में रोम से सीधा प्रसारण शुरू कर दिया ।


आप सब जानते हैं कि दूरदर्शन हम सब भारतीयों के खून-पसीने की कमाई के पैसे से चलता है।उस मेहनत से कमाए गए पैसे को एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के इसारे पर ईसाईयत के प्रचार प्रसार के लिए खर्च करना वेहद आपतिजनक है गुनाहकारों के विरूद्ध उचित समय पर कड़ी कार्यवाही होना अति आवस्यक है।


प्रक्षेपण की असफलता के एक-दम बाद ईसाईयत के प्रचार-प्रसार ने हमारे मन में कई संकायें पैदा कि । क्योंकि ये पहले से ही पता था कि क्रायोजैनिक इंजन खराब है तो भी उस खराब इंजन के साथ ही GSAT-5P के प्रक्षेपण निर्णय कहीं एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के प्रभाव में तो नहीं किया गया।


बहुत कम लोग जानते हैं कि रूस ईसाईयत के प्रचार-प्रसार के लिए अमेरिका से भी जयदा प्रतिबद्ध है व एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी को भारत में पलांट करने में रूस की ही खूफिया ऐजेंसी का हाथ था। पलांट करने का मकसद भी भारत में हिन्दूओं को अपदस्त कर ईसाईयों के हाथों में सता को पहुंचाना था ।आज सरकार की सर्वेसरवा एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी से लेकर रक्षामन्त्री एक के एन्टनी तक सब जगह ईसाई ही दिखाई दे रहे हैं।


यहां तक कि अगर इसाई के उपर भ्रष्टाचार के कितने भी बड़े आरोप क्यों न लगे हों उन्हें बड़ें पदों पर ऐंटोनिया की पकड़ मजबूत करने के लिए विठाया जा रहा है। आप पी जे थामस को ही ले लें जिसे दो पाक-साफ हिन्दूओं को दरकरार कर CVC प्रमुख बनाया गया वो भी विपक्ष की आपति के बाबजूद। बाद में इस भ्रष्ट की खबर माननीय न्यायालय ने लेकर ऐंटोनिया के हिन्दूविरोधी षडयन्त्र को जनता के सामने रखा।


एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी व उसका बेटा राहुल गंदगी किस हद तक हिन्दूओं के विरूद्ध हैं उसका सबसे बड़ा प्रमाण Wiki-leaks के उस रहसयोउधघाटन में मिला जिसमें बयाता गया कि किस तरह ये सपोला अमेरिका के राजदूत को हिन्दूओं के विरूद्ध भड़का रहा था।


अगर इस सपोले के अन्दर भारतीयों का खून होता तो ये ऐसी गद्दारी नहीं करता । हमें तो लगता है कि एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के ईसारे पर खराब क्रायोजैनिक इंजन का प्रयोग कर प्रक्षेपण की असफलता सुनिस्चित कर ईसाईयत का प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया गया।


क्योंकि आज इस मौके पर अधिकतर भारतीय दूरदर्शन देख रहे थे तो प्रक्षेपण का प्रसारण वीच में ही बन्द होने पर एकदम ईसाईयत का प्रसारण शुरू होने पर अधिकतम लोगों तक एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी का ईसाईयत का संदेश पहूंचा।


इस संदेश में पोप ने पहले तो ये इशु को भगवान का अबतार बताया व बाद में इशु को भगवान का वेटा कहकर संबोधित किया।मतलब खुद पोप ही इशु के वारे में भ्रमित हैं। उसके बाद पोप ने संसार के विभिन्न देशों में रह रहे ईसाईयों को वहां की सरकारों व समाजों के विरूद्ध लड़ाई छेड़ने के लिए उचित समय का इन्तजार करने के लिए कहा। मतलब पोप का ये भाषण न केवल शांति और भाई चारे के विरूद्ध था वल्कि साथ ही दुनिया में हिंसा बढ़ाने बाला भी था। ऐसे हिसंक भाषण का प्रचार-प्रसार शांतिप्रिए भारतीयों के पैसे से करना कहां तक उचित है?






सोमवार, 20 दिसंबर 2010

देशभक्त और गद्दार का अन्तर आप खुद महसूस कर लो।


कौन कहता है कि भारत में देशभक्त सिर्फ संघ या हिन्दू संगठनों में ही मलते हैं। इसमें कोई शक नहीं कि आज अधिकतर देशभक्त हिन्दूसंगठनों के साथ संगठित होते जा रहे हैं इसी बजह से इन संगठनों में देशभक्तों की अधिकता देखी जा रही है।लेकिन ये भी उतना ही सही है कि हिन्दू संगठनों के अथक प्रयत्नों के बाबजूद देशभक्त पूरे देश में हर संगठन में अभी भी मौजूद हैं वेशक कीं इनकी शंख्या कहीं कम है तो कहीं ज्यादा है।


इन्ही विखरे पड़े देशभक्तों ने गद्दारों के नाक में संगठित देशभक्तों से ज्यादा दम किया हुआ है। आप कहेंगे कि कैसे पता लगायेंगो कौन देशभक्त है और कौन गद्दार । आप अखवार कि ये दो कटिंग पढ़ लो ।आप अपने आप कहने को मजबूर होंगे कि इस गद्दार ने तो हद ही कर दी।


ये रही पहली कटिंग इसमें एक देशभक्त अमेरिका के अधिकारी को भारत पर पाकिस्तानी हमले के वारे में बताकर आतंकवादी पाकिस्तान की पोल खोलने की कोशिश कर रहा है।



ये रही दूसरी कटिंग इसमें एक गद्दार अमेरिकी अधिकारी को समझा रहा है कि भारत को खतरा पाकिस्तानी जिहादी आतंकवादियों से नहीं वल्कि हिन्दूओं से है।मतलब विदेशी अंग्रेज एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की कुलाद राहुल गंदगी जिस पत्र में खा रहा है उसी में छेद कर रहा है।






इसीलिए तो मोदी जी तो अब जाकर ये समझ में आया कि अमेरिका को भारत के खिलाफ व पाकिस्ताने के समर्थन भड़ाकने वाला जयचन्द कौन है।











मंगलवार, 2 नवंबर 2010

क्या आप भी मानते हैं कि RSS कायरों का संगठन है ?

अयोध्या में हिन्दूमहासभा ने RSS पर कायरों का संगठन होने का आरोप लगाने के साथ-साथ यह भी कहा कि संघ आतंकवाद कैसे फैला सकता है ।

हमारा मानना है कि संघ के वारे में जो छवि हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह द्वारा बनाई जाती है उससे प्रभावित होकर कई उग्र हिन्दू संघ में प्रवेश कर जाते हैं जब वो संघ के अन्दर काम करते हैं तो स्थिति विलकुल विपरीत मिलती है। इस स्थिति में कोई भी उग्र हिन्दू अपना आपा खो सकता है( लगता है कि ये आरोप ऐसे ही हिन्दू ने लगाया है) । क्योंकि संघ के वारे में मिडीया में सुनने से लगता है कि संघ क्रांतिकारी संगठन है लेकिन बास्तब में संघ का क्रांति से दूर-दूर तक कोई बास्ता नहीं ।संघ के संविधान की पहली पंक्ति में लिखा है कि संघ समाजिक और सांसकृतिक संगठन है जबकि दूसरी पंक्ति में लिखा है है कि संघ में हिसंक या देशविरोधी प्रवृति से ग्रर्सित व्यक्ति के लिए कोई जगह नहीं। बस ये जो हिंसक शब्द है यही सारी समस्या की जड़ है।

संघ में हमारा प्रवेश तब हुआ जब हम गणित में सनात्कोतर पढ़ाइ के दौरान हास्टल में बांमपंथी हिंसा के सिकार बने। इस बामपंथी हमले का सामना करने में संघ ने हमारा साथ दिया।

हमें लगा कि हिन्दूक्रांति के काम को आगे बढ़ाने के लिए संघ हमें सहायता प्रदान करेगा । लेकिन धीरे-धीरे हमें लगा कि मुसलिम आतंकवादियों की हिंसा की प्रतिक्रियास्वारूप हमारे मन में मुसलमानों के प्रति जो आग भरी थी वो शांत होने लगी। हमने धैर्य बनाए रखा लेकिन अपने हर सम्मभव प्रयत्न के बाबजूद हम संघ के अधिकारियों को अपनी प्रतिक्रियावादी हिंसा की निती के वारे में विश्वास में न ले सके ।

अन्त में हमने संघ के अधिकारियों के सामने सीधी बात ऱखी कि अगर कशमीरघाटी या किसी और मुसलिम बहुल क्षेत्र में या फिर मुसलिम आतंकवादी हमले में अगर 10 हिन्दू मारे जाते हैं तो हमें 20 मुसलमानों का कत्ल सुनिश्चित करना चाहिए। बस फिर क्या था संघ के एक अधिकारी ने हमें पूछा कि ये सब कब रूकेगा हमने कहा कि हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के बाद। फिर अधिकारी ने आगे प्रश्न किया कि क्या गारंटी है कि हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के बाद जिन को कत्ल की आदत पड़ जाएगी वो खुद को हिंसा से रोकने में समर्थ होंगे । इस बात को समझाने के लिए उन्होंने पाकिस्तान व अफगानीस्थान में रहने वाले मुसलमानों का उधाहरण दिया। उन्होंने हमें समझाने की कोशिश की कि किस तरह उन मुसलमानों ने हिन्दूओं के खत्म हो जाने के बाद मुसलमानों पर ही हमले शुरू किए जो आज तक जारी हैं। आगे हमें उस अधिकारी ने समझाने की कोशिश की, कि किस तरह ये मुसलिम भी अपने ही भाई हैं। इनका और हमारा खून एक है।

इस तरह हमें समझ आ गया कि RSS में हमारी दाल नहीं गलने वाली फिर कुछ समय के लिए हमने किसी को ये बात नहीं बताई लेकिन धीरे-धीरे हमें एहसास हुआ कि RSS ने अपने आप ही हमें बाहर का रास्ता दिखा दिया ।

हालांकि आपको हैरानी होगी कि किसी ने हमें संघ से बाहर निकले को नहीं कहा न ही इस बात की सूचना दी कि हमें संघ से बाहर कर दिया गया है। हमें जिला कार्यकारणी से निकालकर संघ की जिम्मेवारी से मुक्त कर दिया गया वो भी हमें विना यह ऐहसास करवाए कि अब हम संघ के सदस्य नहीं हैं।

इसके बाद हमने अन्य संगठनों से सम्पर्क करने की कोशिश की जो आज तक जारी है। ऐसा नहीं कि संघ के कार्यों पर हमारा विस्वास नहीं लेकिन हमें लगता है कि संघ की शांतिप्रिय निती आज के हालात में हिन्दूहित-देशहित की रक्षा नहीं कर सकती। आज जरूरत है ईंट का जबाब पत्तथर से देने की क्योंकि राक्षसों का मुकावला विना राक्षस बने नहीं किया जा सकता। वेशक संघ क्रांतिकारी संगठन नहीं फिर भी हम मानते हैं कि संघ कायरों का संगठन कभी नहीं कहला सकता।

धारा के विपरीत जिस तरह संघ राष्ट्रवाद के साथ चट्टान की तरह खड़ा है वो साहस गद्दारों के राज में कोई कायर नहीं दिखा सकता।वेशक संघ की रितीनिती से हम सहमत नहीं फिर भई हमें लगता है कि संघ कार्य भी अपने समाज के अन्दर जरूरी है।

हिन्दू महासभा को समझना चाहिए कि संघ पर हमला करने के बजाए उसे खुद आगे बढ़कर जेलों में बन्द 30 निर्दोष हिन्दूओं की रक्षा के लिए कदम उठाने चाहिए ताकि हमारे जैसे उग्र हिन्दू ,हिन्दूमहसभा के बैनर तले देशविरोधी हिन्दू विरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह के हंमलों का जबाब उसी की भाषा में उसे दे सकें।

मंगलवार, 26 अक्टूबर 2010

कांग्रेस का हाथ गद्दारों के साथ !


सच कहें तो गद्दारों की इस पार्टी में सुधार की अब कोई उम्मीद नजर नहीं आती। हमारा मानना था कि निचले सतर पर कॉंग्रेस में वेहद देशभक्त कार्यकरता हैं जिसका प्रभाब पहली पंक्ति के हिन्दूविरोधी-देशविरोधी नेताओं पर एक न एक दिन जरूर पढ़ेगा ।


लेकिन लगता है कि विदेशी इसाई मिसनरी विषकन्या के कांग्रेस पर कब्जे के बाद ऐसा होना लगभग नामुकिन सा हो गया है। जिस गद्दारी की शुरूआत इस भारत विरोधी की गुलाम सरकार ने 2004 में अर्धसैनिकबलों के जबानों को शहीद होने पर मिलने वाले पैसे में कटौती के साथ की वो अब गद्दारी का सतर इस हद तक पहुंच गया है कि भारतीय सैनिकों पर हमले करने बाले पत्तथरबाज आतंकवादियों को UPA सरकार ने पांच-पांच लाख देकर अपनी गद्दारी का प्रमाण देश के सामने रखा।


2004 में अर्धसैनिक बलों के शहीद जवानों के परिबार बालों को मिलने वाली राशि में कटौती करते वक्त कुतर्क दिया गया कि सरकार के पास पैसे नहीं हैं लेकिन आतंकवादियों को देने के लिए सरकार के पास पैसों की कोई कमी नहीं ये इस फैसले से सिद्ध होता है।


लोग कह रहे हैं कि इस विदेशी की कुलाद ने भारत समर्थक RSS की तुलना भारतविरोधी आतंकवादी गिरोह SIMI से कर दी हम पूछते हैं कि इस विदेशी की गुलाम जिस सरकार ने आतंकवादियों को मारने वाले सैनिकों पर केश दर्ज किए ,यहां तक कि पूरी की परी बटालियन को कटघरे में खड़ा कर दिया उस बिदेशी की कुलाद देशभक्त संगठन के वारे में और कह भी क्या सकती है?


सच्चाई यह है कि सेना किसी भी सरकार की ताकत होती है और सेना द्वारा देशहित में उठाए गए हर कदम की कोई भी देशभक्त सरकार समर्थन करती ही है लेकिन यहां मामला दूसरा है।


क्योंकि यह विदेशी इटालियन है इसे भारत की सेना परायी लगती है अपनी नहीं क्योंकि इसकी अपनी सेना तो इटालिन व युरोपियन सेना है । शायद इसीलिए ये विदेशी हर वक्त अपनी गुलाम सरकार पर भारतीय सेना को कमजोर करने वाले कदम उठाने का दबाब बनाती है। इसी दबाब की बजह से आज तक गुजरात से लेकर कशमीर घाटी तक सुरक्षाबलों के दर्जनों जवान जेलों में डाले जा चुके हैं व सैंकड़ों पर मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं।


अब जिसे, भारतीय सेना जो कि सरकार के इसारे पर ही हर काम करती है सिवाय देश की रक्षा के --- से ही डर लगता हो ---जिसे ये सेना अपनी दुशमन लगती हो ----भल उसे प्रधानमंत्री बनने से रोकने वाले देसभक्त संगठन क्या कभी अपने लगेंगे--- नहीं न ।


ऐसे में सोचने वाला विषय यह है कि जिस विदेशी के निशाने पर भारतीय सेना है उसके निशाने पर भला देशभक्त संगठन क्यों नहीं होंगे ?


क्या आपको याद नहीं कि किस तरह पोटा हटवाकर इस भारत विरोधी इसाई ने भारत विरोधी आतंकवादियों की मदद की।मजेदारबात तो यह है कि इस विदेशी का तो भारतीय सर्वोच न्यायालय तक पर भरोसा नहीं बरना ऐसे कैसे हो सकता था कि देश पर हमला करने का जघन्य अपराध कतरने वाला आतंकवादी अफजल आज तक जिन्दा रहता ? वो भी तब जब माननीय न्यायालय ने इस भारतविरोधी आतंकवादी की फांसी की तारीख 19 नम्मवर 2006 तय की हो और आज 19 नम्मवर 2010 आने वाला हो।


अब आप सोचो कि भारतीय सेना व सर्वोच न्यायलय क्या सिर्फ RSS के हैं या फिर सारे देश के ? क्या ये दोनों संघ के इसारे पर काम करते हैं या फिर भारत सरकार के इसारे पर ?


जब इस विदेशी ने इन दोनों ही समानन्नीय संस्थाओं को बदनाम करने के लिए बार-बार सराकर पर दबाब बनाया हो व सरकार ने वार-बार इस दबाब के आगे झुककर इन दोनों ही संस्थाओं का अपमान किया हो तो फिर आप कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि इस विदेशी के दबाब में ये सरकार किसी भी देशभक्त संगठन को बदनाम करने में कोई कसर वाकी छोड़ेगी ?


आज स्वामीराम देब जी हर भारतीय चाहे वो अमीर हो या गरीब को दिन-रात एक कर स्वस्थ जिन्दगी जीने का तरीका बताने के साथ-साथ भारतीयों को भारतीय संस्कृति का हर वो पहलू याद करवा रहे हैं जिसे वो विदेशी आक्रमणकारियों के गुलामीकाल के दौरान ही यातनाओं के परिणामस्वारूप भुला चुके थे।


आज स्वामीराम देब संसार की एक सबसे बड़े भारतीय संगठन के प्रमुख हैं लेकिन क्या इस विदेशी की गुलाम सरकार ने उन्हें Z+ सुरक्षा पलब्ध करवाई नहीं न क्यों ?


सिर्फ इसलिए क्योंकि जिस स्वामीरामदेब जी का नाम सुनने पर हर देसभक्त भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है वही रामदेब इस विदेशी को कभी अपना नहीं लगता ?


आज भारत के इसके जैसे कितने ही शत्रु ऐसे हैं जिन्हें इस विदेशी की गुलाम सरकार देशभक्त भारतीयों की खून-पसीने की कमाई से सुरक्षा उपलब्ध करवाकर इनकी हिन्दू क्रांतिकारियों से रक्षा कर रही है ?


लेकिन गद्दारों की सरदार कब तक खैर मनाएगी एक न एक दिन ये सब गद्दार देशभक्त भारतीयों के हाथों अपने कुकर्मों का अन्जाम हर हाल में भुक्तेंगे ही...