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मोदीराज लाओ

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भारत बचाओ

रविवार, 28 अगस्त 2011

अन्ना जी से गद्दारी कर आखिरकार भारतविरोधी आतंकवादियों के दलालों ने अपनी असलियत दिखा ही दी?

हम आपको शुरू से ही बता रहे हैं कि देश में चल रहे अधिकतर NGOs भारत के शत्रुओं के इसारे पर भारतविरोधी षडयन्त्रों को धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में छुपकर अन्जाम देते हैं। जिसके समय-समय पर प्रमाण सामने आते रहते हैं।
सच कहें तो अग्निवेश जैसे आतंकवादियों के मददगार का अन्ना जी-केजरीवल जी जैसे प्रखर देशभक्तों के साथ एक मंच पर आना हमारे लिए एक चौंकाने वाली घटना थी। इससे पहले जब अग्निवेश जी हमें स्वामी राम देव जी जैसे प्रखर देसभक्त के साथ दिखे तब भी हमें लगा कि ये क्या हो रहा है। मन में प्रश्न खड़े होने लगे कि कहीं ये व इसके मित्र देशहित के लिए किए जा रहे अन्दोलनों के साथ खुद को जोड़कर अपने देशविरोधी–हिन्दूविरोधी कार्यों को आगे बढ़ाने की फिराक में तो नहीं हैं?
फिर भी हमने अपने मन को समझाया कि अगर भारतविरोधियों के लिए काम करने वाला भारतीय व इसके मित्र अगर भारत के सबसे बढ़े शत्रुओं में से एक भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए काम करने की ओर अग्रसर हैं तो भला इसमें क्या बुराई है ? जब हम  लाखों हिन्दूओं का कत्ल कर करोंड़ों हिन्दूओं को वेघर कर भारत का विभाजन करवाने वाले धर्मनिर्पेक्षतावादियों व अलगावबादी मुसलमानों को इस देश में बरदाश कर रहे हैं तो  इन जैसे बौद्धिक गुलाम हिन्दूओं को इस नेक अन्दोलन में बरदाश करने में भला क्या हरज है?
बस एक ही डर सताता रहा कि कहीं ये टीम अन्ना जी से भीतरघात कर इस अन्दोलन को कमजोर न कर दे क्योंकि बाहर के शत्रु से लड़ना आसान होता है लेकिन अन्दर के शत्रु से निपटना बहुत मुस्किल ।
अब खबरें आ रही हैं कि अन्दोलन के दौरान अग्निवेश ने फोन पर सरकार को अन्दोलनकारियों पर हमला करने के लिए उकसाया वो भी उस वक्त जब सरकार जनता व विपक्ष के दबाब में अन्ना जी की बात मानने के लिए मजबूर हो चुकी थी। अब आप ही बताओ कि इस नाजुक वक्त में अनदोलनकारियों के विरूद्ध एक विदेशी अंग्रेज  एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम सरकार को भड़काने से वड़ी गद्दारी भला और क्या हो सकती है? मानो अपनी असलित दिखाने के लिए इतना काफी न हो अब अग्निवेश ने अन्दोलनकारियों को पागल हाथी करार दिया है।
ऐसा नहीं कि गद्दारी सिर्फ अग्निवेश ने ही की है इससे पहले इस देशहित से जुड़े अन्दोलन को कमजोर करने के लिए कल तक अन्ना जी के साथ दिखने वाली  अरूणा राय ने भी अपनी आका विदेशी अंग्रेज एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के इसारे पर जनलोकपालविल के रास्ते में रूकावटें पैदा करने के लिए अपना आधा-अधूरा जोकपाल विल मिडीया में उछालकर कमेटी के पास रख दिया व मिडीया में अपने नजदीकियों को अन्दोलनकारियों के विरोध में वोलने के काम में लगा दिया।
जरा सोचो जो सरकार व NGOs हर वक्त आम  लोगों के हित के लिए काम करने के वहाने हर भारतविरोधी आतंकवादी को आम-गरीब आदमी बताकर आतंकवादियों को कड़ी कार्यवाही से बचाने के लिए प्रतिबद्ध दिखते हैं वो ही सरकार व NGOs किस तरह आम गरीब लोगों  के सच्चे हित के लिए चल रहे अन्दोलन को मिलजुलकर किस तरह कमजोर करने में दिन-रात एक किए हुए थे।
जरा सोचो कि ये अन्दोलन देशभक्त क्रांतिकारियों व आम जनता के बजाए अगर इन गद्दारों के समर्थकों पर निर्भर होता तो क्या होता?
मजेदारबात तो ये हैं कि देश से गद्दारी की लत के सिकार हो चुके NGOs अपने साथियों से भी गद्दारी करने से खुद को नहीं रोक सके । प्रशांत भूषण जैसे लोग कल तक भारतविरोधियों की इन्हीं NGOs के साथ मिलजुलकर काम कर रहे थे।  हमें नहीं लगता कि इस देशहित से जुड़े अन्दोलन से इन NGOs की गद्दारी के बाद  भी कोई देशभक्त इन देशविरोधी-हिन्दूविरोधी NGOs को मुंह लगायगा या इनपे भरोसा कर पाएगा।
क्या आपको नहीं लगता कि देशहित वो भी खासकर दबे-कुचले-गरीब हित या य़ूं कहें कि देश के अन्तिम आदमी के हित से जुड़े इस अन्दोलन का विरोध कर धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में छुपकर भारतविरोध में काम करने वाले  भारतविरोधी आतंकवादियों के दलालों ने अपनी असलियत दिखा ही ?

2 टिप्‍पणियां:

दीर्घतमा ने कहा…

baba ramdew ke rashtrabadi andolan ko samapt karne hetu NGO ke logo ne soniya ke इशारे पर अन्ना को दिल्ली में लाकर baitha diya aj bhi anna unke hi changul mai.

बेनामी ने कहा…

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