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मोदीराज लाओ

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मंगलवार, 18 अक्टूबर 2011

प्रशांत भूषण ने ISI को खुला समर्थन देकर टीम अन्ना को मरवा दिया?


आज देश के जो हलात हैं उनमें कोई भी अच्छा काम करना अगर असम्भव नहीं तो वेहद मुसकिल है। क्योंकि जैसे ही कोई देशभक्ति की बात करता है उसे मुसलिमविरोधी करारा देकर इस्लामिक आतंकवादियों के निसाने पर लाने की कोशिस की जाती।
जब तक वो किसी हमले का सिकार न हो तब तक उसे इतना बदनाम कर दिया जाता है कि लोगों को लगने लगता है कि उसके साथ जो हुआ वो सही है जिस तरह स्वामी रामदेव जी पर रात के अन्धेरे में जान से मारने के लिए हमला किया गया उससे हर आम आदमी का आक्रोशित होना स्वाभाविक था लेकिन सरकार ने कांग्रेस की नई-नवेली सहयोगी ISI के ऐजेंट धर्मनिर्पेक्षतावदी गद्दारों को करोड़ों रूपए देकर स्वामी जी, उनके सहयोगी व बालकृष्ण जी के विरूद्ध मिडीया में एक ऐसा अभियान चलाया जिसके परिमामस्वारूप लगने लगा मानो सारे अपराध स्वामी जी और उनके साथियों ने ही किए हों।
इसी तरह अन्ना जी को भी बदनाम करने के लिए हर तरह का हथकण्डा अपनाया गया।
इससे पहले RSS व मोदी को भी ऐसे ही हथकण्डो का उपयोग कर हर तरह से ठिकाने लगाने की कोशिस की गई ताकि देश में कोई भी इस्लामिक आतंकवाद के विरूद्ध आबाज न उठा सके ।
ये ऐसे षडयन्त्रों की ही सफलता है कि अग्निवेश जैसे लोग पहले स्वामी राम देव जी के अन्दोलन में घुसे बाद में ये अन्ना जी के अन्दोलन में घुसकर स्वामी जी और अन्ना जी को एक दूसरे से अलग रखने में सफल रहे।
ऐसे ही षडयन्त्रों ने अन्ना जी को प्रखर देशभक्त संगठन RSS से अन्दोलन को मिल रहे समर्थन को ठुकराने की बात करने पर मजबूर कर दिया।
भारतविरोधियों के ऐसे ही षडयन्त्र के परिणामस्वारूप ही उनके सहयोगी प्रशांत भूषण ने एक ऐसा भारतविरोधी ब्यान दिया जो पूरी तरह से ISI और पाकिस्तान के भारतविरोधी रूख का समर्थन करता है।जिसके परिमास्वारूप पूरी टीम अन्ना देशभक्तों के निशाने पर आ गई।
ऐसा नहीं कि प्रशांत भूषण ने ऐसा भारतविरोधी ब्यान पहलीवार दिया हो लेकिन इसवार योजना अनुसार इसका भारतविरोधी मिडीया का उपयोग कर तब तक प्रचार-प्रसार किया गया जब तक टीम अन्ना देशभक्तों के निशाने पर नहीं आ गई।
आज अगर कांग्रेस केजरीबाल पर हमला करवाने का साहस कर रही है तो ये ISI के ऐजेंट धर्मनिर्पेक्षतावदी गिरोह के उसी षडयन्त्र का परिणाम है जिसके अनुसार प्रशांत भूषण से ये पाकिस्तान समर्थक ब्यान दिलबाया गया।
अगर प्रशांतभूषण ने भारतविरोधी ब्यान देकर टीम अन्ना को देशभक्तों की निगाह में गिराया न होता तो किसमें दम था कि टीम अन्ना के किसी भी सदस्य को हाथ भी लगा पाता।
इसीलिए कहा गया है कि बुरी संगत से अकेले भले(पहले तो ऐसे गद्दारों को टीम में लेना ही नहीं चाहिए था अगर गलती से ले भी लिए थे तो पता चलते ही निकाल देने चाहिए थे अगर निकालने का दम नहीं था तो कम से कम उनकी कुटाई का तो विरोध न करते जिससे लोगों में किसी शंका का निर्माण न होता क्योंकि भ्रष्टाचार और गद्दारी की जननी कांग्रेस तो मौके की तलास में थी।)।आज नहीं तो कल केजरीवाल जी पर हुए हमले का सच सामने आएगा ही ।वेशक आज ये हमला कांग्रेस ने करवाया है लेकिन बहुत जल्दी हमें पता चल जाएगा कि इसमें अग्निवेश और प्रशांत भूषण की कितनी भूमिका है।

क्या अन्ना जी दो नावों पर पैर रखकर नैया पार लगाने की सोच रहे हैं?

जिस तरह से अन्ना जी भारत माता की जय और वन्देमातरम् का उदघोष कर भ्रष्टाचार मिटाने की मुहिम चला रहे हैं उसे देखकर कोई भी देशभक्त अन्ना जी की ओर स्वभाविक रूप से ही दौड़ा चला आएगा।फिर वो चाहे किसी भी संगठन से क्यों न जुड़ा हो। ऐसे में अन्ना जी द्वारा RSS व भारत स्वाभिमान जैसे देशभक्त संगठनों से दूरी बनाना और देशद्रोहियों के लिए काम करने वाले अग्निवेश और प्रशांत भूषण को साथ रखना संदेह ही नहीं वल्कि गंभीर प्रश्न भी पैदा करता है।
वेशक भारतविरोधियों-हिन्दूविरोधियों के ऐजेंट अग्निवेश को बाहर का रास्ता दिया गया है लेकिन उसे बाहर का रास्ता इसलिए नहीं दिखाया गया क्योंकि वो भारत के विरूद्ध काम कर रहा था वल्कि इसलिए क्योंकि वो टीम अन्ना के विरूद्ध काम कर रहा था। मतलब टीम अन्ना का हित अन्ना जी के लिए भारत के हित से ज्यादा महत्व रखता है।
दूसरी तर्फ प्रशांत भूषण जो कि अग्निवेश की ही तरह भारत के शत्रुओं के हाथों में खेल रहा है को अन्ना जी वेशक लताड़ लगा रहे हैं लेकिन आतंकवादियों के इस साथी को अपनी टीम से बाहर करने की जिम्मेदारी उस टीम पर डाल रहे हैं जिस टीम में न जानें अग्निवेश और प्रशांत भूषण जैसे कितने ही ISI और वांमपंथी आतंकवादियों के प्यादे भरे पड़े हैं।
कुल मिलाकार ऐसा लग रहा है कि अन्ना जी गद्दारों और देशभक्तों को साथ रखकर एक ऐसा तानावान बुनने के चक्कर में जिससे कि अन्दोलन को इस्लामिक आतंकवादियों और बामपंथी कातिलों का समर्थन मिलने के साथ-साथ देशभक्तों का सहयोग भी मिल सके।
वरना अगर अन्ना जी को सिर्फ प्रखर देशभक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ना होता तो पहले तो अग्निवेस व प्रशांत ,जिनका पेशा ही आतंकवादियों का साथ देना है जैसे भारतविरोधियों को अपने साथ लेते ही नहीं और आगर उनमें सुधार की उम्मीद से उन्हे साथ ले ही लिया था तो उनके द्वारा ISI व पाकिस्तान की भाषा वोलने पर एक सैंकेड भी अपने साथ नहीं रखते।
अब वक्त आ गया है कि अन्ना जी साहस दिखाकर देशभक्तों और धर्मनिर्पेक्षतावादी गद्दारों में से किसी एक को चुनने का साहस दिखाकर अपनी असली मानसिकता का प्रमाण अपने समर्थकों और विरोधियों के सामने रखें।
वरना वो दिन दूर नहीं जब धर्मनिर्पेक्षतावदी गद्दार भारतविरोधी काम कर अन्ना जी के आज तक के वेदाग जीवन पर गद्दारी का ऐसा कलंक लगायेंगे जिसे आने वाली पीढ़ियां कभी माफ नहीं कर पायेंगी।
बैसे भी अन्ना जी आप बढ़े हैं हमारे से ज्यादा दुनिया को समझते हैं आपको ये कभी नहीं भूलना चाहिए कि दो नावों पर सवार होने वाला हमेशा मझधार में ही ढूबा है।
भगवान करे आप अपने मौन ब्रत के दौरान आपसे अनजाने में हुए गलतियों का समाधान देकर अपने देशभक्त समर्थकों को और निरूतसाहित नहीं करेंगे क्योंकि आज देशभक्त नागरिकों व संगठनों को धर्मनिर्पेक्षतावादी ISI ऐजेंटों द्वारा इतने जख्म दिए जा चुके हैं कि वो अब और जख्म बरदाश करने की स्थिति में नहीं हैं। कभी भी-कहीं से भी सम्पूर्ण क्रांति का ज्वालामुखी फूट सकता है।