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मोदीराज लाओ

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भारत बचाओ
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बुधवार, 7 सितंबर 2011

Take on remand SAR Gilani &Umar Abdulla to solve High court attack case


हमें नहीं लगता कि भारतविरोधी अबदुल्ला खानदान के इस सपोले Umar abdulaका कोई परिचय करवाने या इसके भारतविरोधी कुकर्मों पर किसी विस्तृत लेख की जरूरत है। आप सब देख रहे हैं कि पिछले कुछ दिनों से किस तरह ये सपोला तमिलनाडु विधानसभा के फैसले की आड़ लेकर लगातार मुसलिम आतंकवादियों को भारत पर हमला करने के लिए उकसाने में लगा हुआ था ।जिसका परिणाम आज हम सबको दिल्ली उच्च न्यायालय में हुए धमाके में मारे गए व घायल हुए निर्दोष भारतीयों के कत्ल के रूप में देखने को मिला।
उमर अबदुल्ला आतंकवादियों से हमले करवाने के लिए महौल बनाने में में कितना शातिर है इसका प्रमाण कशमीर घाटी में भी कई बार देखने को मिल चुका है जिसके कुछ प्रमाण इस लिंक पर हैं।

वेशक ये धमाके करने के लिए महौल उमर अबदुल्ला ने बनाया लेकिन इन हमलों को दिल्ली में अन्जाम देने वाला कोई और नहीं वल्कि मोहम्द अफजल का वो साथी है जो संसद भवन पर हमले का भी mastermind  है।afzal guru
जी हां हम बात कर रहे हैं भारत विरोधी आतंकवादी SAR Geelani की जो दिल्ली university में अरवी पढ़ाने के बहाने भारतविरोधी आतंकवादी पैदा करने में मसरूफ है।
इस आतंकवादी ने अभी कुछ दिन पहले ही NDTV पर एक चर्चा के दौरान धमकी दी थी कि मोहम्मद अफजल की फांसी अगर माफ नहीं की गई तो सारे भारत में बम धमाके कर भारतीयों का लहू बहाया जाएगा। इस आतंकवादी ने न केवल धमकी दी थी पर साथ ही आतंकवाद विरोधी बिट्टा जी को हमलों की धमकी देकर अफजल के विरूद्ध चुप रहने के लिए धमकाया भी था। अगर दिल्ली पुलिस चाहे तो NDTV से इस कार्यक्रम की recoding लेकर देखने के बाद खुद तय कर सकती है कि इसकी धमकी में कितनी सच्चाई थी।
कुल मुलाकर अगर केन्द्र सरकार सच में इस केश को हल करना चाहती है तो सिर्फ इन दोनों को पकड़कर दिल्ली पुलिस को रिमांड पर दे दे । सारी सच्चाई कुछ ही घंटों में देश के सामने होगी।
अगर उमर अबदुल्ला क्योंकि एक तो राहुल का मित्र है दूसरा मुख्यमन्त्री भी है को रिमांड पर देना मुस्किल है तो कम से कम आतंकी प्रफैसर SAR Gilani को तो रिमांड पर लिया ही जा सकता है ।
हम दाबे के साथ कह सकते हैं कि सिर्फ SAR Gilani ही सारी सच्चाई उगलने के लिए काफी है बस जरूरत है तो उसे रिमांड पर लेकर ढंग से सेकने की।

सोमवार, 5 सितंबर 2011

उमर अबदुल्ला के प्रश्नों का सही उत्तर क्या हो सकता है ?

बैसे तो अबदुल्ला परिबार की गद्दारी से हर देशभक्त परिचित है। लेकिन आज आतंकवादियों की फांसी को सांप्रदायिक रंग देने की जो घिनौनी हरकत इस गद्दार ने की है उसका उसी की भाषा में उतर देना जरूरी है।
सबसे पहले तो तमिलनाडु की विधान सभा की तुलना जम्मू-कशमीर की विधानसभा से करना ही गलत है क्योंकि एक तो जम्मू-कशमीर विधानसभा भारतविरोधी आतंकवादियों से भरी पड़ी है जबकि तमिलनाडु की विधानसभा में ऐसी कोई स्थिति नहीं है।
दूसरा जम्मू-कशमीर की विधानसभा में आतंकवादियों का बर्चस्व वानए रखने के लिए अबदुल्ला खानदान ने नैहरू खानदान की सहायता से जम्मू संभाग के लोगों को उनके हक से वंचित रखने के लिए जानबूझ कर जम्मू-संभाग में विधानसभा सीटों को कम रखा है । जबकि तमिलनाडु विधान सभा में ऐसी कोई गड़बड़ नहीं है।
जम्मू-कशमीर विधानसभा में बैठे आतंकवादियों ने सरकारी तन्त्र का प्रयोग कर कशमीरघाटी में हिन्दू-मिटाओ हिन्दू भगाओ अभियान चलाकर न केवल 60000 हिन्दूओं का कत्ल किया वल्कि 500000 हिन्दूओं को वेघर भी किया। मां-बहन वेटियों की इज्जत आबरू से खिलबाढ़ किया से अलग। अब आप ही बताओ कि कातिल राक्षसों से भरी पड़ी जम्मू-कशमीर विधानसभा की तुलना तमिलनाडु की विधानसभा से कैसे की जा सकती है?
राजीब गांधी पर हमला करने वालों की तुलना लोकतन्त्र के मन्दिर पर हमला करने वाले भारतविरोधी आतंकवादी से करना किसी भी तरह से जायज नहीं ठहराया जा सकता।
राजीब गांधी का कत्ल किसने किया ये अभी पूरी तरह सपष्ट नहीं है क्योंकि  एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी ने पहले राजीब गांधी के कत्ल का आरोप DMK पर लगाकर सरकार केन्द्र सरकार गिरा दी बाद 2004 में इसी एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी ने इसी DMK के साथ मिलकर सरकार बना ली।
जिस क्वात्रोची पर चर्च के इसारे पर वालासिंघम के माध्यम से LTTE प्रमुख प्रभाकरण को राजीब गांधी के कत्ल की सुपारी देने के आरोप लगे वही क्वात्रोची आज भी एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी का परिबारिक मित्र है जिसके लिए एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो कुछ भी कर गुजरने के लिए तैयार है।
अब जिन लोगों को फांसी की सजा सुनबाई गई उनमें से एक की सजा खुद एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो माफ कर चुकी तो स्वभाविक रूप से वाकी मुरूगन,स्नाथन व पेरारीवालन भी माफी की उमीद तो कर ही सकते हैं।
दूसरी तरफ मोहम्द अफजल खुद चीख-चीख कर कह रहा है कि कशमीरघाटी को काफिरों वोले तो हिन्दूओं से मुक्त करवाने के लिए उसने लोकतन्त्र के मन्दिर पर हमला किया। इतना ही नहीं उसके समर्थक मुसलिम आतंकवादी लगातार भारत को लहूलुहान करने की धमकियां दे रहे हैं जिनमें उमर-अबदुल्ला व गुलामनबी आजाद भी सामिल हैं। अगर इस राक्षस को फांसी नहीं दी जाती है तो इन आतंकवादियों के हौसले और बुलंद होंगे परिमास्वारूप भारत पर इनके हमले बढ जायेंगे।
हां एक बात जरूर है कि ये हमला अकेले मोहम्द अफजल ने नहीं किया था इसके साथ कुछ और लोग भी थे जैसे कि आतंकवादी  प्रोफैसर जिलानी व उसके अन्य भारतविरोधी आतंकवादी साथी। आतंकवादी प्रोफैसर जिलानी जैसे गद्दारों को कुलदीप नैयर जैसे पत्रकारों ने क्यों बचाया(कहीं ISI ऐजेन्ट मुहम्द फाई के आदेश पर तो नहीं) इन प्रश्नों का उतर भी देश की जनता को जानने का पूरा हक है।
मोहम्द अफजल के हमले में सुरक्षावलों के जवान मारे गय जबकि दूसरे हमले में एक नेता व उसके कुछ प्रशंसक मारे गय। दोनों में बहुत फर्क है ये नेता भारत पर भारतविरोधी कांग्रेस वोले तो  नैहरू खानदान का शासन बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा था जबकि सुरक्षावलों के जवान देश की अस्मिता की रक्षा के लिए संघर्ष करते हुए मारे गय।
ऐसा नहीं कि उमर अबदुल्ला पहली बार गद्दारी कर रहा है इससे पहले भी ये आतंकवादी सैनिकों पर हमला करने वाले अपने साथी 1200 मुसलिम आतंकवादियों पर से केश वापिस लेकर उन्हें सैनिकों पर हमला करने खुली छूट दे चुका है। हमला करते वक्त सैनिकों के हाथों मारे जाने पर अपने इन आतंकवादी साथियों का हौसला बानाए रखने के लिए पांच-पांच लाख रूपए की आर्थिक सहायता भी दे चुका है।
इतना ही नहीं ये आतंकवादी केन्द्र सरकार में बैठे अपने आतंकवादी मददगारों की सहायता से सैनिकों पर तरह-तरह के प्रतिबन्ध लगवाने में भी समर्थ रहा है।
अब आप खुद फैसला करो कि जिस राज्य का मुख्यमन्त्री गद्दार उमर अबदुल्ला जैसा आतंकवादी हो क्या वहां कभी शांति हो सकती है ?