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मोदीराज लाओ

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रविवार, 15 जनवरी 2012

OBC हिन्दू का 9% हिस्सा काटकर मुसलमानों को देने की शर्मनाक व खतरनाक घोषणा…

हमने सुना था कि चुनाब अचार संहिता नाम की भी कोई बंदिश होती है जो सरकार को चुनाबों के दैरान लोकलुभावनी घोषणायें करने से रोकती है लेकिन सरकार द्वारा चुनाबों की घोषणा की आहट से लेकर आज तक लिए जा रहे देशविरोधी फैसले ये दरसाने को काफी हैं कि सरकार फूट डालो और राज करो की नीति को आगे बढ़ाने के लिए किसी भी हद तक गिर सकती है।
आप देख सकते हैं कि किस तरह काँग्रेस सरकार ने चुनाबों से ठीक पहले OBC हिन्दू का 4.5% हिस्सा काटकर मुसलमानों को देने की विभाजनकारी घोषणा कर  OBC हिन्दूओं को नुकसान पहुंचाया। हमें उम्मीद थी कि सारे देश में सब हिन्दू मिलकर कांग्रेस के इस हिन्दूविरोधी- देशविरोधी विभाजनकारी फैसले का जमकर विरोध कर सरकार को ये गैर-संवैधानिक फैसला वापस लेने पर बाध्य कर देंगे । लेकिन ऐसा नहीं हो सका । हिन्दूओं ने अपनी मूर्खता का प्रमाण दते हुए विना किसी विरोध के सरकार को अपना हिन्दूविरोधी फैसला आगे बढ़ाने का अबसर दे दिया।
अपनी इस हिन्दूविरोधी-देशविरोधी असंबैधानिक सफलता से उत्साहित काँग्रेस  सरकार ने अपनी हिन्दूविरोधी-देशविरोधी नीति को आगे बढ़ाते हुए घोषणा कर दी कि चुनाबों के बाद सरकार हिन्दूओं का 9% हिस्सा काटकर इस्लामिक आतंकवादियों को भारत के विभाजन के इनाम के रूप में मुसलमानों को दे देगी।
एक बात तो निश्चित है कि ये हिस्सा SC/OBC/GC में से किसी न किसी के हिस्से से काटा जाएगा।
अब वक्त आ गया है कि सब हिन्दू वाकी सब मसले किनारे कर, मिलकर इस बात पर विचार करें कि 1947 में भारत को तीन हिस्सों में बाँटने वाली काँग्रेस ने पहले ही पूर्वी(बंगलादेश) और पश्चिमी(पाकिस्तान) भारत में 100% आरक्षण मुसलमानों को देकर हिन्दूओं के बच्चों को इन क्षत्रों में उनके मूल अधिकारों से बंचित कर रखा है अगर इसी तरह मध्य भारत(India) में भी हिन्दूओं के  अधिकार छीनकर मुसलमानों को दे दिए गए तो हिन्दूओं की आने वाली पीढ़ियां कहां से अपने बच्चों का भरण-पोषण कर पायेंगेी?
आओ मेरे प्यारे हिन्दूओ दाने-दाने को मोहताज होने से पहले समय रहते कांग्रेस की इस हिन्दूविरोधी-भारतविरोधी मानसिकता का आने वाले चुनाबों मे करारा जबाब देकर हिन्दूसमर्थक दलों को सफल बनाकर अपनी ताकत का परिचय दें।

गुरुवार, 22 दिसंबर 2011

मुसलिम आरक्षण के विना आप लोकपाल के वारे में सोच भी कैसे सकते हैं?

आज हमारे बहुत से भ्रष्टाचार विरोधी भारतीय सिर पर हाथ रखकर रो रहे हैं कि उन्होंने किससे पंगा ले लिया है। कुमार विस्वास जी की स्थिति को देखकर तो ऐसा ही लगता है।इन भ्र्ष्टाचार विरोधियों ने वो ख्वाब देखा है जिसकी कल्पना आज तक किसी ने भी नहीं की थी। इन भ्रष्टाचार विरोधियों ने सोचा कि आज तक कांग्रेस द्वारा जाति-सांप्रदाय- भाषा-क्षेत्र-के आधार विभाजित भारतीयों को वो  भ्रष्टाचार के मुद्दे पर एक साथ लाकर पहले मुगलों, फिर अंग्रेजों और  अब काँग्रेस द्वारा संचालित फूट डालो और राज करो के षडयन्त्र को हमेशा के लिए खत्म कर देंगे।
लेकिन आज काँग्रेस ने  फूट डालो और राज करो का वो दांव खेला जिसका इन भ्रष्टाचारविरोधियों के पास अभी तक कोई तोड़ नहीं दिखता।
जो मिडीया कल तक लोकपाल पर चर्चा को वेचैन था वही मिडीया आज इस्लामिक आरक्षण पर जमकर बहस करवा रहा है क्योंकि सरकार ने काले धन से संचालित मिडीया को भी जोकपाल विल की परिधि में रखा है। मिडीया की इस दुखती रग को छूने का जिम्मा एंटोनिया ने सौंपा था लालू प्रसाद यादब को ।जिसे लालू ने बखूबी निभाया भी।
यही नहीं लालू ने सब भ्रष्ट सांसदों का समर्थन उन्हें व सब लुटेरों की सरगना एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो को होने का दाबा भी किया।
कुल मिलाकर आज जब भारत में ISI  +KGB + CIA के ऐजंट मिलकर सरकार चला रहे हों तो हमारी खोपड़ी में ये नहीं बैठता कि कोई भी समझदार व्यक्ति ऐसी भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी सरकार से भारत हित की उम्मीद भला कैसे कर सकता है?
इन भ्रष्टाचारविरोधियों के नेताओं स्वामी जी व अन्ना जी को सोचना चाहिए कि इन्होंने किस आधार पर भ्रष्टाचार व गद्दारी की जननी कांग्रेस से ऐसी उम्मीद कर डाली जो अन्तोत्वगत्व कांग्रेस के ही बिनाश का कारण बन सकती है।
क्या अन्ना जी व स्वामी जी को नहीं पता कि आज के प्रधानमन्त्री वही कर रहे हैं जो उन्हें बिदेशी विषकन्या एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो से आदेश मिल रहे हैं।
चलो मान लेते हैं कि ये सरकार  KGB + CIA की बातें ताकतबर देशों के दबाब में मान रही है लेकिन अगर ये सरकार गद्दारों की नहीं तो फिर ये पाकिस्तान जैसे बिफल इस्लामिक रिपबलिक की ऐजेंसी ISI के इसारे पर क्यों काम कर रही है?
अभी हाल ही में अमेरिका में पकड़े गए ISI सरगना गुलामनबी फई ने अमेरीकी कोर्ट में इस सरकार के कई मन्त्रियों के साथ सबन्ध होने की बात कबूली है। यही नही आरेप हरीश खरे पर भी लगे हैं हरीश खरे प्रधानमन्त्री के मिडीया सलाहकार हैं। वेशक हरीश खरे ने ISI के साथ किसी भी तरह के सबन्ध होने से मना किया है । बैसे हम भी अभी तक हरीश खरे के विरूद्ध कोई प्रमाण नहीं ढूंढ पाए हैं लेकिन अगर FBI की जांच में हरीश खरे का नाम आया है तो इसे नकारा भी नहीं जा सकता ।
हरीश खरे के निजी तौर पर सबन्ध हों या न हों इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्यों वो जिस प्रधानमन्त्री के मिडीया सलाहकार हैं वो ही भारतविरोधी ISI ऐजेंट की तरह काम कर रहा है।
ISI के आदेश पर ISI ऐजेंट राजेन्द्र सच्चर को सचर कमेटी का अध्यक्ष बनाकर ISI के देशविरोधी-हिन्दूविरोधी षडयन्त्रों को वैधानिक दर्जा दिलवाने के लिए रिपोर्ट तैयार करवाना, (अधिक जानकारी के लिए यहां पढ़ें)  ISI के आदेश पर दलीप पांडगौंकर+राधा कुमार जैसे ISI ऐजेंटों को कशमीर पर ISI के षडयन्त्रों को बैधानिक दर्जा दिलवाने के लिए कमेटी का सदस्य बनाना, शर्म अलसेख में पाकिस्तान के साथ एक ऐसे घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करना जिसके अनुसार भारत को पाकिस्तान के बलूचीस्तान में आतंकवाद के लिए दोषी ठहराया गया ,भारत के संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का,मुसलिम बहुल जिलों के विकाश की बात कर मुसलमानों को अपनी जनसंख्य बढ़ाने को उकसाना,सुरक्षाबलों को आतंकवादी घटना के बाद इस्लामिक आतंकवादियों के विरूद्ध कार्यवाही न करने को कहना,पाठशाला में प्रवेश लेने पर मिलने वाली छात्रवृति को सिर्फ गैर हिन्दूओं तक सीमित करना यहां तक कि SC,ST,OBC के बच्चों को भी वन्चित करना, हिथरो हबाई अडडे पर बम धमाका करने वाले इस्लामिक आतंकवादी के पकड़े जाने पर प्रधानमन्त्री को नींद नहीं आना और रामलीला मैदान में निर्दोष देशभक्तों पर हमला करवाना व उसे जायज ठहराना, CBI का दुरूपयोग कर इसरत जहां व सोराबुद्दीन जैसे दुर्दांत आतंकवादियों को मार गिराने वाले जवानों को जेलों में ढलवाना , सांप्रदायिक हिंसा विल के माध्यम से मुसलमानों व मुसलिम आतंकवादियों के हर अपराध के लिए हिन्दूओं को दोषी ठहराने का षडयन्त्र रचना,सेना को सांप्रदायिक आधार पर बांटने का षडयन्त्र रचना जैसे कुकर्म कोई देशभक्त भारतीय तो कर नहीं सकता न ही करवा सकता है ऐसे भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी काम तो भारत का शत्रु यानी ISI ऐजेंट ही कर/करवा सकता है। (हम अच्छी तरह जानते हैं कि मनमोहन में इतना साहस नहीं कि वो देश से इतनी बढ़ी गद्दारी करे जिसके परिणामस्वारूप देश का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है लेकिन प्रधानमन्त्री बने रहने के लालच में एक विदेशी विषकन्या के इसारे पर भारत का सर्वनाश करने के षडयन्त्र रचने के अपराध से इस भारतविरोधी को मुक्त नहीं किया जा सकता।)
अब आप ही बताओ ऐसे हालात में  मुसलिम आरक्षण के विना आप लोकपाल के वारे में सोच भी कैसे सकते हैं?

रविवार, 27 नवंबर 2011

अन्ना जी ने क्यों कहा “बस एक ही थप्पड़ मारा”


सबसे पहले तो अब ये निस्चित हो जाना चाहिए कि जो खुद को जन प्रतिनीधि व नेता कहते नहीं थकते उन्हें क्या कहा जाना चाहिए?
जनप्रतिनिधि या नेता या अभिनेता(लालु जैसे) या (हर काम के बदले समीशन)भाई या गुण्डा(दिगविजय सिंह,मनोज तिवारी) मबाली(स्वामी जी पर हमला) या लुटेरा(राजा ,चिदंमबरम) या हफ्ता ) बसूल करने वाला या फिर (गरीबों की मां-बहन की इज्जत का लुटेरा) (भंवरी देवी जैसे हजारों लाखों केस,) ब्याभिचारी या या हत्यारे आम जनता के  फिर सबकुछ।
जबतक आपलोग इस बात को सपष्ट नहीं करते तब तक हम आपकी सुबिधा के लिए इन्हें सेकुलर गद्दार  ही कहेंगे।
अब आते हैं असली मुद्दे पर ।
हरविंदर सिंह जी द्वारा शरदपवार को थपड़  जड़ने का समाचार जैसे ही अन्ना जी को मिला अन्ना जी के मुंह से यकायक यही निकला “बस एक ही थप्पड़ मारा”
सोचने वाला विषय यह है कि ऐसा क्या हुआ है जिसकी बजह से हर देशभक्त  सेकुलर गद्दारों की कुटाई से खुश तो हो रहा है लेकिन संतुष्ट नहीं। हर देशभक्त क्यों चाहता है कि इनको अधिक से अधिक शारीरिक और मानसिक व भौतिक नुकशान होना जरूरी है?
होना तो यह चाहिए था कि जनप्रतिनिधि को नुकशान होने पर हर देशभक्तों को तकलीफ होती लेकिन हो उल्टा रहा है हर देशभक्त इन सेकुलर गद्दारों का विनाश चाहता है क्यों ?
बास्तब में ये जन प्रतिनिधि आज भारत की जनता के बजाए जबाबदेह होने के बजाए खुद को अमेरिका व साऊदी अरब के प्रति ज्यदा जबाबदेह मानने  लगे हैं। इसलिए जब भी कभी किसी भारतीय को नुकसान होता है तो इन सेकुलर गद्दारों को लगता ही नहीं कि ये नुकशान इनका भी है परिमामस्वारूप भारतीयों  को नहीं लगता कि ये भारतीयों के प्रतिनीधि हैं ।
इसके कई कारण है
  1. सबसेबड़ा कारण तो सेकुलर गद्दारों को साऊदी अरब से मिलने वाला Patro-Dollar ( जिसके बदले ये भारत में इस्लामिक आतंकवादियों का हर हालात में बचाब करते हैं बहाना चाहे मानबाधिकारों का हो संबिधान का या फिर कोई और)  व अमेरिका से मिलने वाला US-Dollar (जिसके बदले में ये भारत में धर्मांतरण का समर्थन करने के साथ-साथ ईसाई आतंकवादियों का बचाब करते हैं व बहुराष्ट्रीय कम्पनीयों के हाथों देश की सम्पदा को कौड़ियों के भाव बेचते हैं।)
  2. इनमें से अधिकातर(प्रभाबशाली) की पढ़ाई-लिखाई  बिदेशों में हुई है इसलिए ये भारतीयों की तरह सोचने के बजाए विदेशियों की ही तरह सोचते हैं जिस तरह से बिदेशी मुसलमान व इसाई भारतीयों को लूटने के लिए नीतियां बनाते थे बैसी ही वल्कि उससे भी खतरनाक नीतियां ये लोग बना रहे हैं। जैसे कि सचरकमेटी रिपोर्ट, रंगनाथ मिश्रा कमेटी रिपोर्ट, 'Prevention of Communal and Targeted Violence Bill, 2011' सिर्फ गैर हिन्दूओं(SC,ST,OBC किसी के लिए भी नहीं) के लिए छात्रवृति इत्यादि-इत्यादि। इन सब नितीयों का एक ही मकसद है भारत के मूल निवासियों के हक छीन कर अरबी व रोमन संसकृति को समर्पित लोगों को देना।
  3. हमारे विचार में BJP,SP, BSP, JDU, JD(s),  AIDMK, RC ,LD,JD, CPM, CPI व BJD जैसी सबकी सब क्षेत्रीय पार्टीयां कांग्रेस की बिछाई फूट डालो और राज करो की  एक ऐसी बिसात का सिकार हुईं जिसके परिमास्वारूप ये सबकी सब पार्टीयां अपने उन्हीं लोगों के अधिकारों को कुचलती चली गीईं जो लोग इनको समर्थन करते हैं मतलब सबकी सब पार्टियां भारतविरोध की एक ऐसी राह पर निकल पड़ी जिसमें इनका कोई दोष नहीं सिवाए इसके कि इन पार्टियों ने हालात से मुकाबला करने के बजाए हालात से समझौता कर कांग्रेस की वही राह पकड़ जिसका मकसद है हिन्दूओं को कुचल कर भारत को तबाह और बरबाद करना है। थपड़ पर इन सब पार्टियों की एकजुटता  इसी विकृत मानसिकता का प्रमाण है।अगर इनमें से एक भी पार्टी हरविंदर जी जैसे लोगों को बुलाकर सम्मानित करे तो आम जनता को लगेगा कि कोई उनके साथ भी है और आगे नेताओं को खतरा भी कम होता जाएगा । ऐसे मामलों पर जितनी ये पार्टियों एकजुटता दिखायेंगी उतना ही आम आदमी और आक्रोशित होगा।
  4. खुद कांग्रेस बिदेशियों (अंग्रेजों व मुगलों)की बिछई एक ऐसी भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी मानसिकता की शिकार हुई जिसका एकमात्र उद्देश्य था भारत के मूलनिवासियों के अधिकारों को छीन कर गैर भारतीयों के हबाले करना व भारत की सम्पदा को लूटकर इन्हीं विदेशीयों के मूल स्थानों पर पहुंचाना। कांग्रेस की स्थापना एक विदेशी द्वारा करने से लेकर आज तक कांग्रेस की कमान जब भी सम्भव हुआ भारतीयों के बजाए विदेशियों के हाथों में ही रही । इन विदेशियों ने कांग्रेस की कमान अपने हाथ में लेकर इसका  उपयोग जमकर अपनी नस्ल के लोगों के हितों को आगे बढ़ाने के लिए किया जैसे कि आज एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो कर रही है। ऐसा नहीं कि आज कांग्रेस में देशभक्तों की कमी है लेकिन सबके सब आज राष्ट्र हित को तिलांजली देकर निजहित व परिबारहित को साधने में बयस्त हैं।
  5. इन सब कारणों से भी बड़ा कारण है  इन सेकुलर गद्दारों द्वारा जनता से जुड़े हर मुद्दे पर जनता के बिरोध में जाना। देश की सारी जनता चाहती है कि मंहगाई व भ्रष्टाचार  पर सरकार गिरे लेकिन ये सेकुलर गद्दार नहीं चाहते कि ये सरकार गिरे क्योंकि इनको लगता है कि बिदेशियों के इसारों पर नाचने वाली ऐसी सरकार फिर से नहीं बन सकती इसलिए इस सरकार के माध्यम से जनता को मतलब भारत को जितना लूट लिया जाए –भारत के मूल निवासियों को जितना कमजोर कर लिया जाए उतना काफी है।
सिर्फ यही नहीं आज देश में जो भी शांतिप्रिए तरीके से अपनी बात कहने की कोशिश करता है उसे मूर्ख व कमजोर समझकर चोरों और गद्दारों की सरकार कुचलती जाती है वाकी विपक्ष जुवानी जमा-घटाने से आगे बढ़कर सरकार के बिरूद्ध किसी निर्णायक लड़ाई की शुरूआत तक नहीं करता परिणामस्वारूप जनता पिसती जाती है पिसने से जनता का क्रोध बड़ता जाता है कौन जाने कल कोई सिरफिरा जिसकी पहुंच बारूद तक बन जाए सारी की सारी पार्लियामैंट को बारूद से उड़ा दे।
क्या इन सेकुलर गद्दारों में से किसी ने सोचा कि मुम्बई हमला करने वाले षडयन्त्रकारी को PM ने शांतिदूत बताकर भारत में इस्लामिक आतंकवादियों के हाथों मारे जा चुके लाखों शहीदों के करोंड़ों परिजनों व शुभचिंतकों के जख्मों पर नमक छिड़का तो इन पीड़ितों के मन से जो बददुआ निकली वो इन सेकुलर गद्दारों को तबाह करने की ताकत रखती है। इस चोरों और गद्दारों की सरकार द्वारा शहीदों व देशभक्तों के जख्मों पर नमक छिड़कने की मानों प्रवृति ही बन गई है।
इन आतंकवादियों के प्रतिनीधि नेताओं के कुकर्मों की बजह से ही अन्ना जी को कहना पड़ता है कि “बस एक ही थप्पड़ मारा”