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मोदीराज लाओ

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भारत बचाओ
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रविवार, 7 अगस्त 2011

जब कांग्रेसी नेता भारतीय संस्कृति के प्राण भगवान राम को ही नहीं मानते तो फिर कट्टर ईसाई के स्वास्थय लाभ के लिए मन्दिरों में पूजा-पाठ-यज्ञ के मायने क्या?

वेशक हिन्दू संस्कृति वोले तो भारतीय संस्कृति का दर्शन इतना विशाल है कि हिन्दूओं वोले तो भारतीयों ने दुनियाभर से भारत में आनेवाले गैर हिन्दूओं को अपने यहां उसी तरह जगह दी जिस तरह मां वच्चों को अपने आंचल में जगह देती है।


ये बात और है कि जैसे-जैसे इन गैर हिन्दूओं की जनसंख्या बढ़ी बैसे-बैसे इनकी दुष्टता सामने आने लगी ।अपनी नीच सोच के चलते ही इन गैर हिन्दूओं ने भारत को कई टुकड़ों में विभाजित करवा दिया।आज बचे-खुचे भारत में भी इन गैर हिन्दूओं ने हर तरफ कोहराम मचा रखा है।

जब से CIA ऐजेंट इटालियन एडवीज एंटोनियाअलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी ने 6-6 भारतीयों का कत्ल करवाकर कांग्रेस पार्टीपर कब्जा कर अपनी गुलाम सरकार भारत में बनवाई है तब से ये
कट्टर ईसाई देशभक्त हिन्दूओं को ठिकाने लगाने का कोई मौका नहीं चूक रही है।


अब ये भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी इसाई Prevention of Communal and Targeted Violence Bill- 2011  के नाम से एक ऐसा कानून बनाबाने की फिराक में है जिससे गैर हिन्दूओं को हिन्दूओं पर हमला करने के बाद कानूनी रूप से सजा मिलना लगभग असम्भव हो जाएगा।

फिर भी ये बौद्धिक गुलाम कॉंग्रेसी मन्दिरों मे जाकर इस भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी के स्वास्थयलाभ के लिए पूजा-अरचना व यज्ञ कर रहे हैं ताकि ये फिर से भारत आकर भारत के मूल निवासी हिन्दूओं को और नुकसान पहूंचा सके।

जब कांग्रेसियों ने भारतीय संसकृति के मूल को ही नकार दिया तो फिर ये सब करने का क्या औचित्य है?

अगर ये सब इस इटालियन अंग्रेज को खुश करने के लिए किया जा रहा है तो कांग्रेसियों को समझना चाहिए कि इस अंग्रेज को भारतीय संसकृति से इतनी नफरत है कि हो सकता है ये कांग्रेसी जो भारतीय संसकृति के अनुसार इस अंग्रेज के स्वास्थय लाभ की कामना कर रहे हैं इसके निशाने पर आ जायें।










शुक्रवार, 19 नवंबर 2010

सोनिया गांधी का मनमोहन सिंह पर जबरदस्त हमला।




आप और हम लगातार देख रहे हैं कि किस तरह एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो उर्फ सोनिया गांधी अपने गुलाम प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह के माध्यम से भारत को तबाह करने की चर्च की योजना को अन्जाम देती रही । लेकिन अब जब ऐसा लगने लगा कि ये गुलाम प्रधानमन्त्री एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो उर्फ सोनिया गांधी के लिए गद्दारी और चोरी करते-करते खुद ही चोर और गद्दार नजर आने लगा है तो इस इटालियन एंटोनिया ने बजाए उसका साथ दने के उस पर ही हमला वोल दिया।


बैसे USE AND THROW अंग्रेजों की पुरानी आदत है। भारत पर अपने कब्जे के दौरान अंग्रेजों ने अपनी इसी निती का प्रयोग कर बेबकूफ हिन्दूओं को लालच देकर उनसे अपने ही भाईयों के विरूद्ध युद्ध करवाए।जिनमें हजारों देशभक्त हिन्दू अपने इन गुलाम हिन्दू भाईयों की बजह से अंग्रेजों के अत्याचारों व हिंसा के सिकार बने।


आज विभाजित भारत में मनमोहन सिंह ने जयचन्द के मार्ग पर चल कर इस इटालियन अंग्रेज के कहने पर हर वो हिन्दूविरोदी-देशविरोधी कुकर्म अन्जाम दिया जो बरबर आतंकवादी मुगलों ने अन्जाम देने का साहस नहीं किया था।


कहां से शुरू करें।


1)भारत के इतिहास में पहलीवार इस गुलाम की सरकार ने कोर्ट में हलफनामा देकर मर्यादा पुर्षोत्तम भगवान श्रीराम के अस्तिव को नकारने का पाप किया।


2)निर्दोष साध्वी व सैनिक को जेल में बन्द कर हिन्दू आतंकवाद की काल्पनिक अबधारणा को जन्म देने की कोशिश की। इस पर आगे बढ़कर इस गुलाम की सरकार ने आज दर्जनों हिन्दू नौजवानों को झूठे आरोप लगाकर जेलों में वन्द करने का अभियान चलाया हुआ है।


3)इस गुलाम ने भारतीय सेना में सांप्रदायिक आधार पर गिनती करवाने की शर्मनाक कोशिस कर सेना को सांप्रदायिक आधार पर विभाजित करने का षडयन्त्र किया।


4) माननीय न्यायालय द्वारा सुनवाई गई मुसलिम आतंकवादी अफजल की फांसी को लगातार चार वर्ष तक रोककर गद्दारी का एक न्या आयाम स्थापित किया।


5)आतंकवाद विरोधी कानून पोटा हटाकर चार वर्षों तक न्या कानून न बनाकर मुसलिम आतंकवादियों को खुली छूट देकर अपनी देशविरोधी-हिन्दूविरोधी सोच का एक बहुत बड़ा प्रमाण दिया।


6)आतंकवादियों को मार-गिराने वाले सुरक्षावलों के जवानों को जेलों में डालकर इस गुलाम की सरकार ने अपनी गुलाम मानसिकता को उजागर किया।हद तो तब हो गई जब सेना की एक पूरी बटालियन पर ही केश दर्ज कर दिया गया।


ऐसे दर्जनों काम हैं जो एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो उर्फ सोनिया गांधी के गुलाम प्रधानमन्त्री ने अपनी इस आका के इसारे पर अन्जाम दिए।


हां देश के साथ सबसे बढ़ी गद्दारी व एंटोनिया के प्रति बफादरी का प्रमाण इस गुलाम ने तब दिया जब इसने इस इटालियन अंग्रेज एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो उर्फ सोनिया गांधी के इटालियन मित्र क्वात्रोची के लन्दन में जब्त धन को छुड़वाकर उसके उपर भारत में चल रहे सब मुकद्दमे समाप्त करवा दिए।


देश से इन सब गद्दारियों व एंटोनिया के प्रति इन सब बफादारियों का सिला मनमोहन सिंह को एंटोनिया द्वारा मनमोहन सरकार को महाभ्रष्ट व कमजोर बताकर दिया गया।


एंटनिया ने कहा कि वेशक आर्थिक प्रगति हुई है लेकिन सराकर भर्ष्टाचार के दल-दल में पूरी तरह डूब चुकी है। इस अंग्रेज ने आगे कहा कि हमें एक ताकतवर सरकार की जरूरत है। मतलब मनमोहन सिंह गुलाम के दिन पूरे हो चुके हैं।


अभी ताजा मामला है DMK को लिखित ग्रांटी देकर भर्ष्टाचार की खुली छूट देने का ।क्योंकि DMk के साथ सबन्ध एक राजनीतिक फैसला है व आज तक 100% राजनैतिक फैसले एंटोनिया ने ही किए हैं । तो जनता समझ रही है कि गारंटी मनमोहन ने एंटोनिया के आदेश पर ही दी है । मतलब इस 1,76,000 करोड़ के घोटाले में एंटोनिया का ही हाथ है।


जनता को इस सच्चाई से दूर रखने के लिए ही इस अंग्रेज ने मनमोहन सिंह पर हमलावोल कर खुद को पाक-साफ करार देने की असफल कोशिस की है। आपको याद होगा कि CWG घोटाने में भी हजारों करोड़ रूपए जारी करने के लिए भी PMO का ही नाम समाने आया था।


मनमोहन वेशक गुलाम है,कमजोर है लालची है पर चोर तो नहीं है। बैसे भी जो प्रधानमन्त्री एक चपड़ासी तक खुद नहीं रख सकता वो भला तने बड़े फैसले कैसे कर सकता है?


मतलब CWG घोटाला भी PMO के माध्यम से ऐंटोनिया ने ही अन्जाम दिया। मुम्बई के आदर्श सोसायटी घोटाले में इसी अंग्रेज के बेटे के चहेते मुख्यमन्त्री का नाम सामने आया वही मुख्यमन्त्री जिसे इस अंग्रेज ने अपनी रैली के लिए 200 करोड़ रूपए देने को मजबूर किया। अनाज के बदले तेल कार्यक्रम में भी घोटाले के लिए चिट्टठी इसी अंग्रेज ने नटवर सिंह के पास दी थी।


अब चोरों और गद्दारों की सरदार एडवीज एंटोनिया अलवीना माईनो उर्फ सोनिया गांधी मनमोहन पर हमला कर ये जता रही है कि इन सब घोटालों में इसका अपना कोई हाथ नहीं। बैसे इस अंग्रेज को याद रखना चाहिए कि वेशक हिन्दू थोड़े समय के लिए भावुक होकर मूर्ख बन जायें लेकिन आगे चलकर वो अच्छी तरह समझ जाते हैं कि उनका असली शत्रु कौन है और जब वो शत्रु को पहचान लेते हैं तो उसका नमोनिशान मिटाकर ही दम लेते हैं। हमारे विचार में ऐटोनिया को मनमोहन पर हमला करने के बजाए खुद इटली जाकर छुपने की तैयारी कर लेनी चाहिए ।






गुरुवार, 4 नवंबर 2010

आओ दिपावली के शुभ अवसर पर हिन्दू एकता के लिए अथक प्रयास करने की कशम उठायें।

आज हिन्दू समाज के सामने कई चुनौतियां हैं । इन सब चुनौतियों का एकमात्र समाधान है हिन्दू एकता। हिन्दू एकता से हमारा अभिप्राय है कि सब हिन्दू उंच-नीच ,छुआ-छूत, अमीरी-गरीबी की सब दिवारों को तोड़कर सिर्फ ये याद रखें कि हम सब हिन्दू हैं हम सब एक हैं। बैसे भी अगर हिन्दू अपने पूर्वजों की ओर नजर दौड़ायें तो पायेंगे कि हम सब एक ही परमपिता परमातमा की सन्तान हैं। हम सबका खून एक है। वेशक मुसलिम आतंकवादियों व धर्मांतरण के ठेकेदार इसाईयों के षडयन्त्रो का सिकार होकर हम आपस में कुछ इस तरह उलझ गए कि हमने मूर्खता की हद तक पाखंड अपने सिर पर ओड़ कर इन आक्रमणकारियों के हिन्दूविरोधी-देशविरोधी षडयन्त्रों को सफल होने में सहायाता तक कर डाली। आज भी हमारे देश में एसे दुष्टों की कमी नहीं जो हिन्दूओं को विभाजित रखने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं। इन सब विभाजनकारियों को हमारा एकमात्र जबाब हो सकता है पूर्ण समरसता को साकार कर हिन्दू एकता के मार्ग पर आगे को बढ़ना। हमें याद रखना चाहिए कि हिन्दूओं के अन्दर गुलामीकाल से पहले किसी भी तरह की छुआछूत नहीं थी अगर होती तो समाज में जो स्वारूप समाजिक कार्यक्रमों में देखने को हमें आज भी मिलता है वो कभी भी अस्तित्व में नहीं आ सकता था।
http://samrastamunch.blogspot.com/2009/01/blog-post_9926.html

बुधवार, 22 सितंबर 2010

क्या UPA के नेतृत्व में धर्मनिर्पेक्ष गिरोह अयोध्या में अनर्थ करवाने की तैयारी में है?


भगवान करे कि जो हमें समझ आ रहा है वो पूरी तरह गलत हो। आज देश में जो हालात हैं चारों तरफ प्राकृतिक आपदा और हिंसा एक तरफ वामपंथी आतंकवादियों द्वारा व दूसरी तरफ मुसलिम आतंकवादियों द्वारा। इस दोनों तरह के भारतविरोधी आतंकवाद को UPA के नेतृत्व में धर्मनिर्पेक्ष गिरोह का समर्थन।


जो धर्मनिर्पेक्ष गिरोह गिरोह पिछले 4 वर्ष से मुसलिम आतंकवादी अफजल की फांसी रोके हुए है माननीय सर्वोच न्यायालय द्वारा पैसला करने के बाद भी वार-वार चेताय जाने के बाबजूद।


जो गिरोह मुम्बई पर हुए आतंकवादी हमले के अपराधी मुसलमानों को बचाने का प्रयत्न कर रहा है।


जो गिरोह वामपंथी आतंकवादियों द्वारा सैंकड़ों वेगुनाह सैनिकों व हजारों निहत्थे आम लोगों के कत्ल के बाबजूद इन आतंकवादियों का साथ दे रहा है----कभी राहुल गांधी तो कभी ममता बनर्जी तो कभी दिगविजय सिह तो कभी चिदमबरम तो कभी एंटोनिया इन आतंकवादियों के साथ खड़ी नजर आ रही है।


सोचने का विषय सिर्फ इतना है कि जो धर्मनिर्पेक्ष गिरोह भारत विरोधी आतंकवादियों का हर तरह से बचाब कर रहा है वही गिरोह देशभक्त हिन्दूओं व भारत की आस्था के केन्द्र भगवा को आतंकवादी कहकर बदनाम करने की पुरजोर कोशिश कर रहा है।


क्या वो गिरोह सब प्रमाण मौजूद होने के बाबजूद माननीय न्यायालय को अपना पैसला मर्यादा पुर्षोत्तम भगवान श्रीराम के समर्थन में सुनाने देगा?


ध्यान रखना होगा कि यह उसी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की सरकार है जिसने मर्यादा पुर्षोत्तम भगवान श्रीराम द्वारा निर्मित राम सेतु को तोड़ने के लिए माननीय न्यायालय में लिखकर दिया कि भगवान राम हुए ही नहीं।ये हिन्दू विरोधी गिरोह यहीं नही रूका इसने आगे बढ़कर इस गिरोह ने कहा कि पबित्र रामायण एक काल्पनिक पुस्तक है।


क्या ऐसा सम्भव है कि जो धर्मनिर्पेक्ष गिरोह भगवान राम के अस्तित्व तक को मानने के लिए तैयार न हो वही गिरोह मर्यादा पुर्षोत्तम भगवान श्रीराम के भव्य मन्दिर निर्माण के पक्ष में दिए जाने वाले किसी भी फैसले की सम्भावना पैदा होने पर खामोस रहे ?


हमें नहीं लगता कि ये गिरोह माननीय न्यायालय के काम में हिन्दूओं की आस्था के विरूद्ध हस्तक्षेप न करे।


हमें यह भी याद रखना होगा कि यह वही गिरोह है जिसने बाबा अमरनाथ यात्रा के लिए आबंटित भूमि को हिन्दूओं को नीचा दिखाने के लिए बापिस ले लिया।


यह वही गिरोह है जो मुसलमानों की एक आह तक नहीं सुन सकता पर हिन्दूओं द्वारा 70 दिन तक अपने बाबा भोले नाथ के समर्थन में चलाय जा रहे अन्दोलन व कई हिन्दूओं की शहीदी के बाबजूद इस गिरोह के कान पर जूं तक न रेंगी।


कुल मिलाकर ये हिन्दूविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह हिन्दूओं की आस्था व पीड़ा के प्रति न केवल संवेदनहीन है पर उससे कहीं आगे जाकर इस गिरोह को हिन्दूओं की आस्था के केन्द्रों पर प्रहार कर हिन्दूओं को पीड़ा पहूंचाने में आनन्द का अनुभव होता है।


अब इस गिरोह की सरकार के सता में रहते कोई फैसला हिन्दूओं को राहत पहूंचाने के पक्ष में आए ऐसा कैसे हो सकता है?


हमें हैरानी तो इस बात की भी हो रही है कि जिन मुसलमानों ने आज तक माननीय न्यायालय के किसी भी आदेश के नहीं माना वही इस मामले में आदेश मानने की कसमें उठा रहे हैं।


जहां हिन्दू पक्ष भविष्य में किसी भी तरह के द्वेष से बचने के लिए समझौते की बात कर रहा है वहीं मुसलिम पक्ष समझौता करने के किसी भी मूढ़ में नजर नहीं आता कारण साफ है।


मुसलिम पक्ष जानता है कि वेशक प्रमाण हिन्दूओं की आस्था के पक्ष में हों लेकिन सता में बैठे लोग तो पूरी तरह से हिन्दू विरोधी है वो हर हाल में फैसला मर्यादा पुर्षोत्तम भगवान श्रीराम के मन्दिर के विरूद्ध करवाकर हिंसा और अत्याचार के प्रायवाची आक्रमणकारी बाबर को एकवार फिर विजयी बनायेंगे आखिर जयचंद के वंशज जो ठहरे ।


अन्त में हम एकवार फिर भगवान से यही प्रार्थना करेंगे कि जो हमें समझ आ रहा है वो पूरी तरह से गलत हो ।


आओ मिलकर भगवान से प्रार्थना करें कि धर्मनिर्पेक्ष गिरोह किसी तरह से जजों से हिन्दूओं के हित के विरूद्ध काम करवाने के अपने किसी भी षडयन्त्र में सफल न हो।