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मोदीराज लाओ

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मंगलवार, 26 अक्टूबर 2010

कांग्रेस का हाथ गद्दारों के साथ !


सच कहें तो गद्दारों की इस पार्टी में सुधार की अब कोई उम्मीद नजर नहीं आती। हमारा मानना था कि निचले सतर पर कॉंग्रेस में वेहद देशभक्त कार्यकरता हैं जिसका प्रभाब पहली पंक्ति के हिन्दूविरोधी-देशविरोधी नेताओं पर एक न एक दिन जरूर पढ़ेगा ।


लेकिन लगता है कि विदेशी इसाई मिसनरी विषकन्या के कांग्रेस पर कब्जे के बाद ऐसा होना लगभग नामुकिन सा हो गया है। जिस गद्दारी की शुरूआत इस भारत विरोधी की गुलाम सरकार ने 2004 में अर्धसैनिकबलों के जबानों को शहीद होने पर मिलने वाले पैसे में कटौती के साथ की वो अब गद्दारी का सतर इस हद तक पहुंच गया है कि भारतीय सैनिकों पर हमले करने बाले पत्तथरबाज आतंकवादियों को UPA सरकार ने पांच-पांच लाख देकर अपनी गद्दारी का प्रमाण देश के सामने रखा।


2004 में अर्धसैनिक बलों के शहीद जवानों के परिबार बालों को मिलने वाली राशि में कटौती करते वक्त कुतर्क दिया गया कि सरकार के पास पैसे नहीं हैं लेकिन आतंकवादियों को देने के लिए सरकार के पास पैसों की कोई कमी नहीं ये इस फैसले से सिद्ध होता है।


लोग कह रहे हैं कि इस विदेशी की कुलाद ने भारत समर्थक RSS की तुलना भारतविरोधी आतंकवादी गिरोह SIMI से कर दी हम पूछते हैं कि इस विदेशी की गुलाम जिस सरकार ने आतंकवादियों को मारने वाले सैनिकों पर केश दर्ज किए ,यहां तक कि पूरी की परी बटालियन को कटघरे में खड़ा कर दिया उस बिदेशी की कुलाद देशभक्त संगठन के वारे में और कह भी क्या सकती है?


सच्चाई यह है कि सेना किसी भी सरकार की ताकत होती है और सेना द्वारा देशहित में उठाए गए हर कदम की कोई भी देशभक्त सरकार समर्थन करती ही है लेकिन यहां मामला दूसरा है।


क्योंकि यह विदेशी इटालियन है इसे भारत की सेना परायी लगती है अपनी नहीं क्योंकि इसकी अपनी सेना तो इटालिन व युरोपियन सेना है । शायद इसीलिए ये विदेशी हर वक्त अपनी गुलाम सरकार पर भारतीय सेना को कमजोर करने वाले कदम उठाने का दबाब बनाती है। इसी दबाब की बजह से आज तक गुजरात से लेकर कशमीर घाटी तक सुरक्षाबलों के दर्जनों जवान जेलों में डाले जा चुके हैं व सैंकड़ों पर मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं।


अब जिसे, भारतीय सेना जो कि सरकार के इसारे पर ही हर काम करती है सिवाय देश की रक्षा के --- से ही डर लगता हो ---जिसे ये सेना अपनी दुशमन लगती हो ----भल उसे प्रधानमंत्री बनने से रोकने वाले देसभक्त संगठन क्या कभी अपने लगेंगे--- नहीं न ।


ऐसे में सोचने वाला विषय यह है कि जिस विदेशी के निशाने पर भारतीय सेना है उसके निशाने पर भला देशभक्त संगठन क्यों नहीं होंगे ?


क्या आपको याद नहीं कि किस तरह पोटा हटवाकर इस भारत विरोधी इसाई ने भारत विरोधी आतंकवादियों की मदद की।मजेदारबात तो यह है कि इस विदेशी का तो भारतीय सर्वोच न्यायालय तक पर भरोसा नहीं बरना ऐसे कैसे हो सकता था कि देश पर हमला करने का जघन्य अपराध कतरने वाला आतंकवादी अफजल आज तक जिन्दा रहता ? वो भी तब जब माननीय न्यायालय ने इस भारतविरोधी आतंकवादी की फांसी की तारीख 19 नम्मवर 2006 तय की हो और आज 19 नम्मवर 2010 आने वाला हो।


अब आप सोचो कि भारतीय सेना व सर्वोच न्यायलय क्या सिर्फ RSS के हैं या फिर सारे देश के ? क्या ये दोनों संघ के इसारे पर काम करते हैं या फिर भारत सरकार के इसारे पर ?


जब इस विदेशी ने इन दोनों ही समानन्नीय संस्थाओं को बदनाम करने के लिए बार-बार सराकर पर दबाब बनाया हो व सरकार ने वार-बार इस दबाब के आगे झुककर इन दोनों ही संस्थाओं का अपमान किया हो तो फिर आप कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि इस विदेशी के दबाब में ये सरकार किसी भी देशभक्त संगठन को बदनाम करने में कोई कसर वाकी छोड़ेगी ?


आज स्वामीराम देब जी हर भारतीय चाहे वो अमीर हो या गरीब को दिन-रात एक कर स्वस्थ जिन्दगी जीने का तरीका बताने के साथ-साथ भारतीयों को भारतीय संस्कृति का हर वो पहलू याद करवा रहे हैं जिसे वो विदेशी आक्रमणकारियों के गुलामीकाल के दौरान ही यातनाओं के परिणामस्वारूप भुला चुके थे।


आज स्वामीराम देब संसार की एक सबसे बड़े भारतीय संगठन के प्रमुख हैं लेकिन क्या इस विदेशी की गुलाम सरकार ने उन्हें Z+ सुरक्षा पलब्ध करवाई नहीं न क्यों ?


सिर्फ इसलिए क्योंकि जिस स्वामीरामदेब जी का नाम सुनने पर हर देसभक्त भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है वही रामदेब इस विदेशी को कभी अपना नहीं लगता ?


आज भारत के इसके जैसे कितने ही शत्रु ऐसे हैं जिन्हें इस विदेशी की गुलाम सरकार देशभक्त भारतीयों की खून-पसीने की कमाई से सुरक्षा उपलब्ध करवाकर इनकी हिन्दू क्रांतिकारियों से रक्षा कर रही है ?


लेकिन गद्दारों की सरदार कब तक खैर मनाएगी एक न एक दिन ये सब गद्दार देशभक्त भारतीयों के हाथों अपने कुकर्मों का अन्जाम हर हाल में भुक्तेंगे ही...






शनिवार, 23 अक्टूबर 2010

इन्द्रेश ही क्यों हिन्दू क्रांतिकारियों के सबन्ध तो डा. अबदुल कलाम जी से भी थे?

 डा. अबदुल कलाम जी भारत के राष्ट्रभक्त क्रांतिकारियों के कितने नजदीक थे इसका प्रमाण तो ये फोटो है।




फोटो में डा. अबदुल कलाम हिन्दू क्रांतिकारी दयानन्द पांडे जी के साथ देश के दुशमनों को समाप्त करने पर गहन विचार विमर्श कर रहे हैं। इन देश के दुशमनों में वांमपंथी आतंकवादियों, मुसलिम आतंकवादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों के साथ-साथ सेकुलर गद्दार भी सामिल हैं ।


रही बात इन्द्रेश जी के हिन्दू क्रांतिकारियों के साथ सबन्धों की तो आज देश का हर वो नागरिक जो भारत माता को अपनी मां मानता है इन क्रांतिकतारियों के साथ है क्योंकि अब वक्त आ गया है कि हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह को उसी की भाषा में जबाब दिया जाए।

 भारत को अपनी मां मानने वाले देशभक्त मुसलमान भी हिन्दू क्रांतिकारियों के साथ हैं।


ये विलकुल सत्य है कि इन्द्रेश जी RSS के पदा अधिकारी हैं ठीक उसी तरह जिस तरह डा. अबदुल कलाम जी इन क्रांतिकारियों से मुलाकात के वक्त देश के राष्टपति थे ।जब देश का प्रथम नागरिक ही इन क्रांतिकतारियों का समर्थक था तो फिर वाकी जनता भला क्यों इन हिन्दू क्रांतिकारियों का समर्थन नहीं करेगी?


रही कार्यवाही की बात तो सच्चाई यह है कि 7-8वीं सताब्दी में मुसलिम आतंकवादियों के भारत पर आक्रमण से लेकर अंग्रजों के आक्रमण के दौरान व बाद में काले अंग्रेजों के सासनकाल में भी देशभक्त हिन्दूओं को सताया जाता रहा।


धर्मनिर्पेक्ष गिरोह के सहयोग से हिन्दूबहुल क्षेत्रों व मन्दिरों पर लगातार हमले होते रहे। लेकिन आज तक इन धर्मनिर्पेक्ष गद्दारों व इनके पाले हुए भारतविरोधी आतंकवादियों के विरूद्ध आज तक कोई सीधी कार्यवाही नहीं की गई उल्टा इनको पांच-पांच लाख रूपए इनाम देकर सैनिकों व देशभक्तों पर हमलों के लिए उकसाया जाता रहा।


अब वक्त आ गया है कि इन भारतविरोधी आतंकवादियों के विरूद्ध सीधी कार्यवाही कर भारत को इन भारत विरोधी धर्मनिर्पेक्ष आतंकवादियों से मुक्त करवाया जाए।आओ मिलकर आगे बढ़ें।


ओउम






शनिवार, 12 जून 2010

उल्टा आदमखोर चोर कोतवाल को डांटे

हमारा आपको अखबार पढ़ाने या फिर कोई कहानी सुनाने का कोईइरादा नहीं।बस इरादा है तो आपको सच्चाई का साक्षातकार करवाने का ।
आपको हमने बताया कि किस तरह UPA सरकार ने आतंकवादियों को फायदा पहुंचाने के लिए सेना,पुलिस व देसभक्तों पर हमला किया उन्हें पकड़कर जेल   मेंडाल दिया।कशमीर  घाटी में तो सेना की एक पूरी बटालियन पर ही केश दर्ज कर आतंकवादियों को सेना व आम लोगों पर हमला करने के खुले संकेत दे दिए गए।
सेकुलर गिरोह जिसे फर्जी मुठभेड़ करार दे रहा है वो खुंखार आतंकवादियों की सीधी लड़ाई में मारे जाने का मामला हैषलेकिन जिन्हें माननीय सर्वोच न्यायालय द्वारा फांसी की सजा प्राप्त आतंकवादी निर्दोष नजर आता है भला उन्हें मुठभेड़ में मारे गए आतंकवादी क्यों निर्दोष  नजर नहीं आयेंगे?
हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि आदमखोर सेकुलर गिरोह व कांग्रेस के ऐसे ही षडयन्त्रों के परिणामस्वारूप पहले 1947 में धर्म के आधार  पर भारत का विभाजन हुआ जिसके दौरान करोंड़ों निर्दोष हिन्दूओं का कत्ल हुआ व बाद में कशमीरघाटी में हजारों  हिन्दूओं का कत्ल कर लाखों को वेघर कर दिया गया




अब जब ये पूरी तरह से शाफ हो चुका है कि हजारों लोगों के कातिल व लाखों की विमारी का कारण बने ऐंडरसन को भगाने वाला कोई और नहीं राजीब गांधी है तो आदमखोर कांग्रेस ने न्यायपालिका को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। बैसे बमारा मामनना है कि अगर एंटोनिया का नार्कोटैस्ट करवाकर पता लगाया जाए तो बोफोर्स दलाली रकांड की तरह इस मामले में भी एंटोनिया का ही भारत विरोधी षडयन्त्र सामने आएगा।
विरपामोईली जैसे लोग वो गुलाम हैं जो अपनी कुर्सी वजेब के लिए किसी कि भी पैरवी कर सकते हैं।
अब आप प्रमाण देखिए और साथ में पढ़िए विरपामोईली का बयान
नई दिल्ली/बंगलूरू। भोपाल गैस पीड़तों को न्याय नहीं मिलने के मामले में कानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने शनिवार को सरकार का बचाव करते हुए सारा दोष न्यायपालिका पर मढ़ दिया।








 
 
 
 
 
 
 
हमने आपको THE RED SAREE  पर अपनी समीक्षा में बताया था कि ये पुस्तक  एंटोनिया उर्फ Edvige Antonia Albina Maino उर्फ सोनिया गांधी के प्रति सहानुभूति तैयार करने के मकसद से एंटोनिया के किसी मित्र व कांग्रेस की मिलीभक्त से लिखी गई है व इसे अधिक से अधिक लोगों को पढ़ाने के लिए प्रयोजित बखेड़ा खड़ा करने की कोशिस की जा रही है जिसकी पुस्टी अब खुद मोरो ने भी कर दी है।
 
 
 



 


अब आप खुद ही यह तय  करो कि    ये सब मामले मिलकर
 उलटा चोर(देशरोधी-हिन्दूविरोधी कांग्रेस)
कोतवाल  सेना ,न्यायपालिका,देसभक्तों व देशभक्त संगठनों) को डांटे(पर दोशारोपण करे)......

वाली कहाबत को ही चरितरार्थ नहीं करते हैं......