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मोदीराज लाओ

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शनिवार, 15 अक्टूबर 2011

A F Rehman और Raji Raouf, के दुष्प्रचार का खण्डन करने वाले डा. सुब्रमण्यम स्वामी जी के लेख “strategy to combat Islamic terrorism in India” का हिन्दी अनुवाद “भारत में इस्लामिक आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए रणनीति”




shubramanium Swami

खुले पृष्ठ ‘हिन्दू और मुसलिम परिपक्व हैं पर संघ परिवार नहीं।’ के लिेए एक खण्डन लेख।
द हिन्दु समाचार पत्र में में छपे उस अंश का ये खण्डन है जिसका शीर्षक है ‘हिन्दू और मुसलिम परिपक्व हैं पर संघ परिवार नहीं।’ (खुला पृष्ठ ,अगस्त 2011) जो कि खुद को मुसलमानों में उदारवादी सोच का प्रतिनिधि बताने वाले ए फैजुर रहमान द्वारा लिखा गया है।
यद्यपि रहमान द्वारा ये अंश पहले के एक अंश ‘हम मुसलमान परिपक्व हैं हम अलोचना सह सकते हैं’ (“खुला पृष्ठ”,अगस्त 7,2010 के संदर्भ में लिखा गया था। जो कि राजी रौफ द्वारा लिखा गया था क्योंकि राजी रऊफ ने मेरे द्वारा किसी अन्य समाचार पत्र में लिखित खुले पृष्ठ के वारे में दुष्प्रचार किया है इसलिए मेरे लिए ये जरूरी हो गया है कि मैं ‘द हिन्दु’ में रहमान द्वारा लिखित अंश का खण्डन करूं।
रहमान के अनुसार उदारवादी मुसलमान वो हैं जो उनके अनुसार मेरे द्वारा लिखित उत्तेजक लेखों पर प्रतिक्रिया नहीं करते। हालांकि रहमान ये बताने से चूक जाते हैं कि उदारवादी मुसलमानों की उन आतंकवादियों के प्रति क्या प्रतिक्रिया होनी चाहिए जो देश के विभिन्न हिस्सों में हजारों निर्दोष भारतीयों का कत्ल कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त रहमान ये भी नहीं बताते कि उदारवादी मुसलमानों की कशमीरघाटी में 60000 हिन्दूओं का कत्ल कर 500000 हिन्दूओं पर बरबर अत्याचार कर उन्हें अपने घर से बेघर करने वाले आतंकवादियों के प्रति क्या प्रतिक्रिया होनी चाहिए।
रहमान कहता है कि उदारवादी मुसलमान, आतंकवादी मुसलिम संस्थाओं द्वारा हथियार उठाकर डा. सुब्रमण्यम स्वामी सहित सब हिन्दूओं पर हमला करने “take up arms and to let all hell loose (sic).” के उकसावे पर अमल करने के बजाए इस बात से सन्तुष्ट हैं कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने मुझे(डा. सुब्रमण्यम स्वामी) को नोटिस भेजा है। विचार करने के लिए रहमान का धन्यवाद।
लेकिन रहमान की उदारवादी मुसलमान की अवधारणा मात्र एक दिखावा है क्योंकि इसका एकमात्र मकसद इस्लामिक आतंकवादियों द्वारा किए जा रहे बरबर अत्याचारों से लोगों का ध्यान हटाना है। रहमान मुसलिमों को ऐसा कोई उपाए(कदम) नहीं बताते जो उन्हें मौन स्वीकृति त्याग कर हिन्दूओं पर अत्याचार कर रहे जिहादी आतंकवादियों के विरूद्ध उठाना चाहिए। मुझे “बराबर समय सिद्धांत" के अनुसार ये कहने का पूरा अधिकार है कि इस्लामिक आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए मेरे द्वारा लिखे गए खुले पृष्ठ में मैंनें सही तथ्य दिए थे। मेरे कहने का अर्थ है कि आतंकवाद इस्लाम की कत्लोगारद की परम्परा को ही आगे बढ़ा रहा है खासकर जिहाद को।
आतंकवाद हिंसा का वो हथियार है जो अपने राजनीतिक व वैचारिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए संवैधानिक तरीके से चुनी गई सरकार और लोगों को भयभीत करने के लिए आम जनता को निशाना बनाता है।
संयुक्त राष्ट्र सुराक्षा परिषद ने 2004 में “अपराधिक कृत्य” से सबन्धित संकल्प संख्या 1566 में आतंकवाद को इस तरह परिभाषित किया है। आम जनता या लोगों के समूह में या विशेष व्यक्तियों , एक जनसंख्या समूह को दवाव में लाने या एक सरकार को वाध्य करने या अन्तरराष्ट्रीय संस्था को किसी काम को करने या न करने के लिए वाध्य करना।
इसलिए प्रत्येक सरकार का ये कर्तव्य है कि वह सामूहिक या अपने स्तर पर आतंकवादविरोधी ऐसे कड़े कदम उठाए जिससे कि भविष्य में होने वाले हमलों को रोका जा सके । सरकार का ये भी कर्तव्य है कि वो आतंकवादी गतिविधियों को अन्जाम देने वाले लोगों के विरूद्ध मुकद्दमा चलाकर सजा दें। इसके साथ ही आतंकवाद का मुकाबला करना मनावाधिकारों की रक्षा करने और बढ़ावा देने के लिए भी बड़ा खतरा पैदा करता है। इसलिए प्रत्येक देश से ये आहवान किया जाता है कि वे आतंकवाद का खात्मा और मानवाधिकारों की रक्षा करें।इन दोनों के बीच में रैखिक सबन्ध होने के बजाए अरैखिक सबन्ध है। अर्थात ये सत्य नहीं है कि हम मानवाधिकारों का जितना कम बचाव करेंगे आतंकवाद का मुकाबला करने में उतना ही अधिक सफल होंगे। इसका विलोम ये भी सत्य नहीं है कि हम आतंकवाद को जितनी कड़ाई से कुचलेंगे मानवाधिकारों का उतना ही कम पालन होगा। इसलिए हमें एक ऐसी रणनीति बनाकर अमल करने की जरूरत है जिसके अनुसार मानवाधिकरों की रक्षा करने के साथ-साथ मानवता विरोधी आतंकवाद को भी नेस्तनाबूद करने के लिए किए जाने वाले रक्षा उपायों में अनुकूलतम संयोजन किया जा सके। कम होते हुए लाभ का नियम इस प्रक्रिया पर लागू होता है। हमें उपरलिखित प्रक्रिया पर अमल करने की जरूरत है। इसलिए हमने जो लिखा उसका मकसद एक बहस शुरू करना था ना कि हमारे लिखे का कोई दुरूपयोग कर दुष्प्रचार करे जैसा कि रहमान ने किया।
रणनीति
आज मौलिक प्रश्न ये है कि क्योंकि हम भारत में जिहादी आतंकवादी हमलों से दुनिया में सबसे अधिक पीड़ित हैं इसलिए इस्लामिक आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए रणनीति कैसे बनाई जाए?
आतंकवाद से लड़ने के लिए हमारी रणनीति ऐसी नहीं होनी चाहिए जो भविष्य में और अधिक मुसकिलें पैदा न करे। जैसा कि 1989 में रूबिया सईद अपहरण कांड व कंधार में आई-सी—814 विमान अपहरण कांड के दौरान हुआ। ततकालीन NF और राजग सरकारों द्वार आतंवादियों से सौदेवाजी करने के परिणामस्वारूप भारत में आतंकवाद ने और खतरनाक स्वारूप ले लिया। कन्धार में यात्रियों और जहाज के कर्मचारियों के वदले में मौलाना अजहर,उमर कुरैसी और जरगर जैसे दुर्दांत आतंकवादियों को छोड़े जाने के परिणामस्वारूप छुड़ाए गए लोगों से हजारों गुना ज्यादा निर्दोष लोग आज तक मारे जा चुके हैं। इन तीनों कुख्यात आतंकवादियों ने पाकिस्तान पहुंचने के बाद नायकों की तरह अपनी भारतविरोधी आतंकवादी हमलों को आगे बढ़ाया। इन हमलों में 26/11 का मुम्बई हमला भी सामिल है।
इसलिए हमें एक सपष्ट निती की जरूरत है मतलब एक उद्देश्यों को रेखांकित करने वाला सपष्ट घोषणा पत्र जिसमें कि इन उद्देश्यों की प्राथमिकताओं को सपष्टता से परिभाषित किया गया हो, इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए अपनाई जाने वाली रणनीति का खुलासा हो और इन उद्देश्य की पूर्ति के लिए जरूरी आर्थिक,मानवीय और संरचनात्मक संसाधनों को जुटाने की प्रतिबद्धता हो।
हम भारतवासियों में से अधिकतर को इस्लामिक आतंकवाद से मुकाबले के लिए प्रतिरोधक रणनीति की जरूरत है। टैलीविजन चैनलों पर बैठकर धर्मनिर्पेक्ष परजिवी सच्चे इस्लाम को मानबीय और शांतिप्रिए बताकर लोगों को वरगलाने की कोशिश तो कर सकते हैं। परन्तु ये सपष्ट है कि इन धर्मनिर्पेक्ष परजिवीयों में से किसी ने भी ने कुरान,सुरा और हदीश का अधिकारिक अनुवाद नहीं पढ़ा है। इसलिए इस्लाम की सही ब्याख्या करने की बात करने के बजाए, जो लोग खुद को उदारवादी कहते हैं उन्हें इस्लाम के एक ऐसे नए सुधारे हुए स्वारूप की रचना करनी चाहिए जो लोकतान्त्रिक मूल्यों के साथ तालमेल बिठाने का आग्रह करता हो।
इस्लाम में पैगंबर के शब्द अंतिम है।कोई भी सच्चा मुसलमान समस्या की जड़ इन आयतों से अपने आपको अलग नहीं कर सकता और न ही सच्चा मुसलमान ये कह सकता है कि वो समस्या की जड़ कुरान की इन आयतों में सुधार कर इन्हें फिर से लिखेगा। क्योंकि ऐसा करने पर उसे जान बचाने के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ेंगी।
हम हिन्दूओं की स्वभाव से धार्मिक उदारवादी होने की सर्विदित मान्यता प्राप्त परम्परा है। जब भारत 100% हिन्दू राष्ट्र था तब भी हिन्दूओं ने दुनिया के विभिन्न भागों में प्रताड़ित पारसियों,यहूदियों,सिरियाईयों,इसाईयों और ऐहसान फरामोस अरब के मुसलमानों को न केवल शरण दी बल्कि उनका पालन पोषण भी किया। आज ऐहसान फरामोस इस्लामिक आतंकवादियों द्वारा निशाना बनाए जा रहे हिन्दूओं को अपनी रक्षा के लिए एकजुट होकर खड़े होना होगा।
आज 21वीं शताब्दी में हिन्दूओं के लिए संगठित होकर खड़ा होने का क्या मतलब है? अपनी रक्षा के लिए खड़े होने से मेरा मतलब है कि प्रभावशाली प्रतिशोधात्मक कार्यवाही कर देश की रक्षा करने के मुद्दे पर सब हिन्दूओं में पूरी मानसिक स्पष्टता होनी चाहिए।
इस संगठित प्रतिशोधात्मक कार्यवाही में अन्य धार्मिक समूहों का तर्कपूर्ण सहयोग, भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने में लेना भी, इस प्रतिशोधात्मक कार्यवाही का हिस्सा है। इसलिए मैंनें इस बात की वकालत की कि मुसलमानों को, इस सच्चाई जो कि वैज्ञानिक डीएनए आनुवंशिक अध्ययन द्वारा सिद्ध हो चुकी है ,को स्वीकार कर लेना चाहिए कि हम सबके पूर्वज एक हैं और महान हिन्दू संस्कृति हम सब की सांझी विरासत है।
(डा. सुब्रमनियम स्वामी जी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।)

सोमवार, 5 सितंबर 2011

उमर अबदुल्ला के प्रश्नों का सही उत्तर क्या हो सकता है ?

बैसे तो अबदुल्ला परिबार की गद्दारी से हर देशभक्त परिचित है। लेकिन आज आतंकवादियों की फांसी को सांप्रदायिक रंग देने की जो घिनौनी हरकत इस गद्दार ने की है उसका उसी की भाषा में उतर देना जरूरी है।
सबसे पहले तो तमिलनाडु की विधान सभा की तुलना जम्मू-कशमीर की विधानसभा से करना ही गलत है क्योंकि एक तो जम्मू-कशमीर विधानसभा भारतविरोधी आतंकवादियों से भरी पड़ी है जबकि तमिलनाडु की विधानसभा में ऐसी कोई स्थिति नहीं है।
दूसरा जम्मू-कशमीर की विधानसभा में आतंकवादियों का बर्चस्व वानए रखने के लिए अबदुल्ला खानदान ने नैहरू खानदान की सहायता से जम्मू संभाग के लोगों को उनके हक से वंचित रखने के लिए जानबूझ कर जम्मू-संभाग में विधानसभा सीटों को कम रखा है । जबकि तमिलनाडु विधान सभा में ऐसी कोई गड़बड़ नहीं है।
जम्मू-कशमीर विधानसभा में बैठे आतंकवादियों ने सरकारी तन्त्र का प्रयोग कर कशमीरघाटी में हिन्दू-मिटाओ हिन्दू भगाओ अभियान चलाकर न केवल 60000 हिन्दूओं का कत्ल किया वल्कि 500000 हिन्दूओं को वेघर भी किया। मां-बहन वेटियों की इज्जत आबरू से खिलबाढ़ किया से अलग। अब आप ही बताओ कि कातिल राक्षसों से भरी पड़ी जम्मू-कशमीर विधानसभा की तुलना तमिलनाडु की विधानसभा से कैसे की जा सकती है?
राजीब गांधी पर हमला करने वालों की तुलना लोकतन्त्र के मन्दिर पर हमला करने वाले भारतविरोधी आतंकवादी से करना किसी भी तरह से जायज नहीं ठहराया जा सकता।
राजीब गांधी का कत्ल किसने किया ये अभी पूरी तरह सपष्ट नहीं है क्योंकि  एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी ने पहले राजीब गांधी के कत्ल का आरोप DMK पर लगाकर सरकार केन्द्र सरकार गिरा दी बाद 2004 में इसी एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी ने इसी DMK के साथ मिलकर सरकार बना ली।
जिस क्वात्रोची पर चर्च के इसारे पर वालासिंघम के माध्यम से LTTE प्रमुख प्रभाकरण को राजीब गांधी के कत्ल की सुपारी देने के आरोप लगे वही क्वात्रोची आज भी एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी का परिबारिक मित्र है जिसके लिए एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो कुछ भी कर गुजरने के लिए तैयार है।
अब जिन लोगों को फांसी की सजा सुनबाई गई उनमें से एक की सजा खुद एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो माफ कर चुकी तो स्वभाविक रूप से वाकी मुरूगन,स्नाथन व पेरारीवालन भी माफी की उमीद तो कर ही सकते हैं।
दूसरी तरफ मोहम्द अफजल खुद चीख-चीख कर कह रहा है कि कशमीरघाटी को काफिरों वोले तो हिन्दूओं से मुक्त करवाने के लिए उसने लोकतन्त्र के मन्दिर पर हमला किया। इतना ही नहीं उसके समर्थक मुसलिम आतंकवादी लगातार भारत को लहूलुहान करने की धमकियां दे रहे हैं जिनमें उमर-अबदुल्ला व गुलामनबी आजाद भी सामिल हैं। अगर इस राक्षस को फांसी नहीं दी जाती है तो इन आतंकवादियों के हौसले और बुलंद होंगे परिमास्वारूप भारत पर इनके हमले बढ जायेंगे।
हां एक बात जरूर है कि ये हमला अकेले मोहम्द अफजल ने नहीं किया था इसके साथ कुछ और लोग भी थे जैसे कि आतंकवादी  प्रोफैसर जिलानी व उसके अन्य भारतविरोधी आतंकवादी साथी। आतंकवादी प्रोफैसर जिलानी जैसे गद्दारों को कुलदीप नैयर जैसे पत्रकारों ने क्यों बचाया(कहीं ISI ऐजेन्ट मुहम्द फाई के आदेश पर तो नहीं) इन प्रश्नों का उतर भी देश की जनता को जानने का पूरा हक है।
मोहम्द अफजल के हमले में सुरक्षावलों के जवान मारे गय जबकि दूसरे हमले में एक नेता व उसके कुछ प्रशंसक मारे गय। दोनों में बहुत फर्क है ये नेता भारत पर भारतविरोधी कांग्रेस वोले तो  नैहरू खानदान का शासन बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा था जबकि सुरक्षावलों के जवान देश की अस्मिता की रक्षा के लिए संघर्ष करते हुए मारे गय।
ऐसा नहीं कि उमर अबदुल्ला पहली बार गद्दारी कर रहा है इससे पहले भी ये आतंकवादी सैनिकों पर हमला करने वाले अपने साथी 1200 मुसलिम आतंकवादियों पर से केश वापिस लेकर उन्हें सैनिकों पर हमला करने खुली छूट दे चुका है। हमला करते वक्त सैनिकों के हाथों मारे जाने पर अपने इन आतंकवादी साथियों का हौसला बानाए रखने के लिए पांच-पांच लाख रूपए की आर्थिक सहायता भी दे चुका है।
इतना ही नहीं ये आतंकवादी केन्द्र सरकार में बैठे अपने आतंकवादी मददगारों की सहायता से सैनिकों पर तरह-तरह के प्रतिबन्ध लगवाने में भी समर्थ रहा है।
अब आप खुद फैसला करो कि जिस राज्य का मुख्यमन्त्री गद्दार उमर अबदुल्ला जैसा आतंकवादी हो क्या वहां कभी शांति हो सकती है ?

रविवार, 28 अगस्त 2011

अन्ना जी से गद्दारी कर आखिरकार भारतविरोधी आतंकवादियों के दलालों ने अपनी असलियत दिखा ही दी?

हम आपको शुरू से ही बता रहे हैं कि देश में चल रहे अधिकतर NGOs भारत के शत्रुओं के इसारे पर भारतविरोधी षडयन्त्रों को धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में छुपकर अन्जाम देते हैं। जिसके समय-समय पर प्रमाण सामने आते रहते हैं।
सच कहें तो अग्निवेश जैसे आतंकवादियों के मददगार का अन्ना जी-केजरीवल जी जैसे प्रखर देशभक्तों के साथ एक मंच पर आना हमारे लिए एक चौंकाने वाली घटना थी। इससे पहले जब अग्निवेश जी हमें स्वामी राम देव जी जैसे प्रखर देसभक्त के साथ दिखे तब भी हमें लगा कि ये क्या हो रहा है। मन में प्रश्न खड़े होने लगे कि कहीं ये व इसके मित्र देशहित के लिए किए जा रहे अन्दोलनों के साथ खुद को जोड़कर अपने देशविरोधी–हिन्दूविरोधी कार्यों को आगे बढ़ाने की फिराक में तो नहीं हैं?
फिर भी हमने अपने मन को समझाया कि अगर भारतविरोधियों के लिए काम करने वाला भारतीय व इसके मित्र अगर भारत के सबसे बढ़े शत्रुओं में से एक भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए काम करने की ओर अग्रसर हैं तो भला इसमें क्या बुराई है ? जब हम  लाखों हिन्दूओं का कत्ल कर करोंड़ों हिन्दूओं को वेघर कर भारत का विभाजन करवाने वाले धर्मनिर्पेक्षतावादियों व अलगावबादी मुसलमानों को इस देश में बरदाश कर रहे हैं तो  इन जैसे बौद्धिक गुलाम हिन्दूओं को इस नेक अन्दोलन में बरदाश करने में भला क्या हरज है?
बस एक ही डर सताता रहा कि कहीं ये टीम अन्ना जी से भीतरघात कर इस अन्दोलन को कमजोर न कर दे क्योंकि बाहर के शत्रु से लड़ना आसान होता है लेकिन अन्दर के शत्रु से निपटना बहुत मुस्किल ।
अब खबरें आ रही हैं कि अन्दोलन के दौरान अग्निवेश ने फोन पर सरकार को अन्दोलनकारियों पर हमला करने के लिए उकसाया वो भी उस वक्त जब सरकार जनता व विपक्ष के दबाब में अन्ना जी की बात मानने के लिए मजबूर हो चुकी थी। अब आप ही बताओ कि इस नाजुक वक्त में अनदोलनकारियों के विरूद्ध एक विदेशी अंग्रेज  एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम सरकार को भड़काने से वड़ी गद्दारी भला और क्या हो सकती है? मानो अपनी असलित दिखाने के लिए इतना काफी न हो अब अग्निवेश ने अन्दोलनकारियों को पागल हाथी करार दिया है।
ऐसा नहीं कि गद्दारी सिर्फ अग्निवेश ने ही की है इससे पहले इस देशहित से जुड़े अन्दोलन को कमजोर करने के लिए कल तक अन्ना जी के साथ दिखने वाली  अरूणा राय ने भी अपनी आका विदेशी अंग्रेज एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी के इसारे पर जनलोकपालविल के रास्ते में रूकावटें पैदा करने के लिए अपना आधा-अधूरा जोकपाल विल मिडीया में उछालकर कमेटी के पास रख दिया व मिडीया में अपने नजदीकियों को अन्दोलनकारियों के विरोध में वोलने के काम में लगा दिया।
जरा सोचो जो सरकार व NGOs हर वक्त आम  लोगों के हित के लिए काम करने के वहाने हर भारतविरोधी आतंकवादी को आम-गरीब आदमी बताकर आतंकवादियों को कड़ी कार्यवाही से बचाने के लिए प्रतिबद्ध दिखते हैं वो ही सरकार व NGOs किस तरह आम गरीब लोगों  के सच्चे हित के लिए चल रहे अन्दोलन को मिलजुलकर किस तरह कमजोर करने में दिन-रात एक किए हुए थे।
जरा सोचो कि ये अन्दोलन देशभक्त क्रांतिकारियों व आम जनता के बजाए अगर इन गद्दारों के समर्थकों पर निर्भर होता तो क्या होता?
मजेदारबात तो ये हैं कि देश से गद्दारी की लत के सिकार हो चुके NGOs अपने साथियों से भी गद्दारी करने से खुद को नहीं रोक सके । प्रशांत भूषण जैसे लोग कल तक भारतविरोधियों की इन्हीं NGOs के साथ मिलजुलकर काम कर रहे थे।  हमें नहीं लगता कि इस देशहित से जुड़े अन्दोलन से इन NGOs की गद्दारी के बाद  भी कोई देशभक्त इन देशविरोधी-हिन्दूविरोधी NGOs को मुंह लगायगा या इनपे भरोसा कर पाएगा।
क्या आपको नहीं लगता कि देशहित वो भी खासकर दबे-कुचले-गरीब हित या य़ूं कहें कि देश के अन्तिम आदमी के हित से जुड़े इस अन्दोलन का विरोध कर धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में छुपकर भारतविरोध में काम करने वाले  भारतविरोधी आतंकवादियों के दलालों ने अपनी असलियत दिखा ही ?

गुरुवार, 25 अगस्त 2011

जो संविधान भ्रष्टाचार और आतंकवाद को खत्म करने के रास्ते में बाधा बने और गरीबों को गोली से उड़ाने की इजाजजत दे उस संविधान को जलाकर राख कर देना चाहिए।

Ninjaआज जब भी भ्रष्टाचार और आतंकवाद के विरूद्ध कढ़े कदम उठाने की बात चलती है तो अक्सर संविधान की दुहाई दी जाती है। संविधान में क्या क्या लिखा है इसे पूरी तरह तो हमने नहीं पढ़ा लेकिन  जो हम अनुभव कर रहे हैं उसमें ये पा रहे हैं कि जब भी किसी भारतविरोधी आतंकवादी को कढ़ी सजा देने की बात चले तो आतंकवादी का बचाब संविधान की दुहाई देकर किया जाता है दूसरी तरफ जब किसान-वनवासी या फिर आम देशभक्त जनता अपने अधिकारों को लिए शांतिपूर्वक अनसन-धरना प्रदर्शन करें तो अक्कसर सरकारें उनपर गोली-वारी करवाकर उन्हें मौत के घाट उतार देती हैं।
मामला चाहे 4 जून की रात को रामलीला मैदान में कालेधन के विरूद्ध संघर्ष कर रहे देशभक्तों पर आधी रात को हमले का हो Publicया फिर महाराष्ट्र में पानी की खातिर संघर्ष कर रहे किसानों का हो या फिर देश के विभिन्न हिस्सों में बनों पर अपने अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे वनवासियोंVillagers का हो । हर जगह यही देखने को मिलता है कि उन सब का कत्ल करने का अधिकार संविधान सरकारों को  देता है।
आप देख लो कि किस तरह लोकतन्त्र के मन्दिर पर हमला करने वाले मानबता के कातिल को संविधान का हवाला देकर जिन्दा रखने की कोशिसें की जा रही हैं जो पिछले कई वर्षों से सफलतापू्वक जारी हैं।
आज जब अन्ना हजारे जी Anna jiभ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए सख्त कानून की बात कर रहे हैं तब भी कहा जा रहा है कि संविधान भ्रष्टाचार रोकने के लिए जन लोकपाल जैसे कड़े कानून बनाने की इजाजत नहीं देता।
बैसे भी ये संविधान वो संविधान नहीं है जो 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था। इस संविधान को सरकारों ने अपनी सुविधानुसार एक-दो वार नहीं वल्कि सैंकड़ों वार बदला है।
जब संविधान बना था तब हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्षता जैसी कोई ब्याबस्था संविधान में नहीं थी। देश के दुशमनों ने संविधान को तोड़मरोड़कर इस देशविरोधी-हिन्दूविरोधी षडयन्त्र को संविधान का हिस्सा बनाया। जिसके परिणामस्वारूप आज इमाम बुखारी जैसे भारतविरोधी आतंकवादी वन्देमातरम् और भारत माता की जय जैसे देशभक्ति के उदघोषों को सांप्रदायिक करार देकर विना किसी खौफ के जिन्दा रह रहे हैं।
हद तो देखो कि जिस अन्दोलन से अग्निवेश Agniveshजैसे लोग (जो देशभक्त ताकतों खासकर हिन्दुत्वनिष्ठ ताकतों व हिन्दूओं को कोशने का कोई मौका नहीं छोड़ते जो अकसर मुसलिम व माओवादी आतंकवादियों के बचाब के लिए लड़ते हुए नजर आते हैं) जुड़े हुए हैं उस अन्दोलन को अगर ये मुसलिम गद्दार सांप्रदायिक करार दे रहे हैं तो आप कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि कल जब ये गद्दार और ताकतवर हो जायेंगे तो सारे के सारे हिन्दूओं को ही सांप्रदायिक करार देकर भारत को ही सांप्रदायिक ठहराकर  गद्दारों के लिए एक और विभाजन की मांग नहीं करेंगे। 
बैसे अगर आप के मन में थोड़ी भी मानबता वाकी है तो आप  महसूस कर सकते हैं कि भारत के जिस हिस्से कशमीर घाटी में इन मुसलिम गद्दारों की संख्या अधिक हो गई उस हिस्से में इन राक्षसों ने किस तरह सेकुलर गिरोह की सहायता से हिन्दूमिटाओ-हिन्दूभगाओ अभियान चलाकर 60000 हिन्दूओं का कत्ल कर 500000 हिन्दूओं को वेघर कर दिया जो आज अपने ही देश में दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं(सरकारों के पास भारतीय सैनिकों पर हमला करने वाले मुसलिम आतंकवादियों को देने के लिए 5-5 लाख रूपए तो हैं पर इनके लिए कुछ नहीं)।
जो सेकुलर गद्दार गुजरात में मुसलिम हमले की प्रतिक्रियस्वारूप मारे गए 1000 मुसलमानों(अच्छा होता न मुसलमान हमला करते न ये मारे जाते) के लिए  दिन रात TV पर छाती पीटते रहते हैं क्या आपने इन गद्दारों को कभी मारे गय हजारों हिन्दूओं व वेघर हुए लाखों हिन्दूओं की पीड़ा पर कभी वोलते हुए देखा। नहीं न क्यों ? क्योंकि धर्मनिर्पेक्ष शब्द संविधान में जुड़ने के बाद सब गद्दारों को हिन्दूओं का कत्लयाम करने का मानो लाइसैंस(Learning Lisence) मिल गया हो। जिसे पक्का करने के लिए Prevention of Communal and Targeted Violence Bill- 2011 लाया जा रहा है ताकि भारतविरोधी आतंकवादियों को देशभक्तों का सफाया करने में कोई समस्या पेश न आए। मारे व उजाड़े गय हिन्दूओं का मुद्दा उठाना तो दूर जो हिन्दूओं की पीड़ा को व्यक्त करने की कोशिश भी करे उसे ये सेकुलर गद्दार एकदम से सांप्रदायिक करार दे देते हैं जिस तरह आज इस भ्रष्टाचार विरोधी अन्दोलन को सांप्रदायिक करार  दिया जा रहा है।
ये सब किया जा रहा है इस संविधान के नाम का सहारा लेकर।
हमारे विचार में अब वक्त आ गया है कि इस संविधान को जो कि भ्रष्टाचारियों व गद्दारों की ढाल वन चुका है उसे आग लगाकर हमेशा के लिए खत्म कर दिया जाए व देश में एक ऐसा संविधान बनाया जाए जो भारतीयों के लिए हो न कि हिन्दू-मुसलिम या ईसाई के लिए।

रविवार, 14 नवंबर 2010

अलकायदा के मददगारों को आप आतंकवादी नहीं तो और क्या कहेंगे?




आप देख रहे हैं कि किस तरह एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो की गुलाम UPA सरकार एक के वाद एक ऐसे कदम उठाती जा रही है जिनसे इस बात में कोई सन्देह नहीं रह जाता कि ये सरकार हिन्दूरोधी-देशविरोधी आतंकवादियों की सरकार है।


आप देख रहे हैं कि वर्षों से ये कांग्रेसी दाऊद इबरहाहीम जैसे मुसलिम आतंकवादियों की मदद कर न्हें कानून से बचा रही है ।


इतनी ही नहीं यही धर्मनिर्पेक्ष गिरोह कशमीरघाटी को भारत से अलग करने के लिए लगातार षडयन्त्र करने वाले वाले जिलानी,गिलानी व यासीन मलिक जैसे मुसलिम आतंकवादियों की भी मदद करता चला आ रहा है।


अब तो इस धर्मनिरपेक्ष गिरोह की UPA सरकार ने सारी हदें लांघते हुए अलकायदा जैसे आतंकवादी गिरोह की भी मदद करना शुरू कर दी ।



उम्मीद है कि इस समाचार को पढ़ने के बाद आप भी यही कहेंगे कि य़े सेकुलर गिरोह की UPA सरकार आतंकवादियों की सरकार है । इस सरकार के कर्ताधर्ता राजनितिज्ञ नहीं वल्कि कातिल आतंकवादी कहलाने लायक हैं। इन आतंकवादियों का समूलनाश भारत को बचाने के लिए जरूरी है।


रविवार, 26 सितंबर 2010

भारतविरोधी UPA सरकार की गद्दार मुसलमानों को भारतीय सेना पर हमले करने की खुली छूट!

UPA के नेतृत्व में हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह लगातार भारतविरोधा आतंकवादियों का साथ दे रहा है । आप सब जानते हैं कि खुद सरकार कह चुकी है कि सैनिकों पर पत्थरों से हमाला करने वाले मुसलमान पाकिसतान समर्थक आतंकवादी हैं जो जिहादी आतंकवादी गिरोह लशकरे तैयवा के इसारे पर सैनिकों पर हमला वोल रहे हैं।
http://samrastamunch.blogspot.com/2010/07/blog-post_09.html

अब इस हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की UPA सरकार ने घोषणा की है कि मसजिदों व मदरसों में योजना बनाकर सैनिकों पर हमला करने वाले प्रत्येक पत्थरवाज के परिवार को 5 लाख रूपए दिए जायेंगे ताकि इन पत्थरबाजों के परिवारों का भारतीय सेना पर हमला करने का हौसला बना रहे ।साथ ही जिन मुसलमानों ने अभी तक भारतीय सैनिकों पर पत्थरवाजी नहीं की थी उन्हें भी प्रेरणा लेकर ये 5 पांच लाख प्राप्त करने के लिए अपने बच्चों को पाठशाला भेजने के बजाए सैनिकों पर हमले करने में लगा देना चाहिए।( ध्यान रहे कि ये वही सरकार है जिने 2004 में सता में आते ही अर्धसैनिक बलों के जवानों के देश की रक्षा की खातिर शहीद हो जाने पर मिलने वाली सहायता यह कहकर कम कर दी कि सरकार के पास पैसा नहीं मतलब देशभक्तों के लिए पैसा कम है पर गद्दारों के लिए कोई कमी नहीं)

इन पत्थरबाज गद्दार मुसलमानों पर मेहरवान होते हुए हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की UPA सरकार ने कहा कि जो पत्थरबाज देशभक्त सैनिकों का कत्ल करने की कोशिश में पकड़कर जेलों में डाले जा चुके हैं उन्हें भी रिहा कर दिया जाएगा ताकि पत्तवारबाजों की संख्या कम न हो सके।

हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की UPA सरकार ने इससे भी आगे जाते हुए मुसलमानों द्वारा सैनिकों पर किए गए हमलों व श्रीनगर में फहराए गए पाकिस्तानी झंडे जैसी हरकतों से खुश होकर इन गद्दारों को 10000000( 100 करोंड़) का इनाम देने की घोषणा की।

ये मुसलिम आतंकवादी कशमीर में अपनी स्थिति मजबूत कर सकें ताकि इन्हें भारत से अलग होकर पाकिस्तान के साथ मिलने में आसानी रहे इसके लिए हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की UPA सरकार ने भारतीय सैनिकों को आतंकवादियों द्वारा बताए गए स्थानों से हटाने की भी घोषणा की।

सरकार ने बायदा किया कि सैनिकों द्वारा आत्मरक्षा व देश की रक्षा के लिए प्रयोग किए ज रहे AFSPA को भी शीघ्र हटा दिया जाएगा।

ध्यान रहे कि 11 जून से शुरू हुए इन गद्दार मुसलमानों के हमलों में सैंकड़ों सैनिक घायल हो चुके हैं व दर्जनों सैनिक शहीद हो चुके हैं।

हमें यह भी ध्यान रकना चाहिए कि 11 जून को मुसलमानों के हमले शुरू होने का कारण यह था कि हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की UPA सरकार ने जिहादी आतंकवाद समर्थक उमर अबदुल्ला के कहने पर कशमीर से हजारों सैनिकों को उन स्थानों से हटा लिया था जहां पर आतंकवादियों को खदेड़कर भारत का नियन्त्रण स्थापित करने के लिए सैंकड़ों सैनिकों ने अपनी कुर्वानी दी थी। पर इस हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की UPA सरकार ने आतंकवादियों को फायदा पहंचाने के लिए शांति स्थापित करने के नाम पर वहां से हजारों सैनिकों को हटाकर उन क्षेत्रों को फिर से आतंकवादी मुसलमानों के हबाले कर दिया।

समझो मेरे प्यारे देशभक्त हिन्दूओं वरना वो दिन दूर नहीं जब इस हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह की UPA सरकार की मदद से सारा भारत एकवार फिर इन मुसलिम आतंकवादीयों के कब्जे में चला जाएगा।

हमें आज यह प्रण करना चाहिए कि अगर कसमीर पर भारत का नियन्त्रण कंम करने की कोशिसें इसी तरह आगे बढ़ेंगी तो हर हाल में हम एक-एक मुसलिम आतंकवादी को चुन-चुन कर तब तक मारेंगे जब तक सारा भारत ,भारतविरोधी आतंकवादियों से मुक्त न हीं हो जाता।

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