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मोदीराज लाओ

मोदीराज लाओ
भारत बचाओ
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गुरुवार, 6 जून 2013

काँग्रेस और समाजवादी पार्टी हिन्दूओं का खून बहाने वालों को जेलों से छुड़वाकर व हिन्दूओं के बच्चों का हक छीनकर गैर हिन्दूओं को देकर हिन्दूओं से किस बात का बदला ले रहे हैं?


मित्रो आप सब देख रहे हैं कि हिन्दूओं पर जब भी कोई आंतकवादी हमला होता है तो सबके सब सेकुलर गद्दार और सेकुलर पार्टियां कत्ल किए गए हिन्दूओं के साथ खड़े होने के बजाए देशभक्त हिन्दूओं का खून बहाने वाले भारतविरोधी आतंकवादियों को निर्दोष,अनपढ़ सताया हुआ बताकर इन खूनियों को बचाने के काम में लग जाते हैं।
पहले तो ये सब मिलकर पुलिस पर दबाब बनाकर पुलिस को इन आतंकवादियों के बिरूद्ध कार्यवाही करने से रोकते हैं और अगर कहीं ये आतंकवादी सुरक्षाबलों के हाथ आ ही जायें तो ये पार्टियां इन आतंकवादियों खासकर इसलामिक आतंकवादियों को छोड़ने के काम में लग जाती है और हिन्दूओं को साफ सन्देश देती हैं कि हिन्दू मरते हैं तो मरें पर इन पार्टियों को हर हाल में  आतंकवादियों के साथ खड़ा होना है..
मित्रो इन पार्टियों की इस तरह की कार्यवाही जहां आतंकवादियों का हौसला बढ़ाती हैं वहीं दूसरी तरफ अपनी जान जोखिम में डालकर आतंकवादियों को पकड़ने वाले सुरक्षाबलों का हौसला भी तोड़ती हैं और हद तो तब हो जाती है जब आतंकवादियों की मददगार ये पार्टियां सैनिकों को आदेश देती हैं कि जब आतंकवादियों से लड़ने जाना है तो निहत्थे होकर जाना है साथ ही सुरक्षा बलों द्वार चलाई गई एक एक गोली का हिसाब मांगकर उन पर ये दबाब बनाती हैं कि आतंकवादियों को न मारा जाए परिमामस्वारूप आजकल आतंकवादियों से कही ज्यादा शंख्या में हमारी सेना के जवान मारे जा रहे हैं और जो काम एक गंटें में खत्म हो सकता है उसके लिए सैनिकों को की दिनों तक अपनी जान को जोखिम में डालना पड़ा रहा है...
आप सबको जानाकरी होगी ही कि आज जब हम ये समाचार लिख रहे हैं तो कशमीर घाटी में पिछले दो दिनों से इसलामिक आतंकवादियों और सेना के बीच में जंग चल रही है...
इसी वक्त उतर प्रदेश में माननीय न्यायलय समाजवादी पार्टी को इस बात के लिए कटघरे में खड़ा कर रहा है कि क्यों समाजबादी पार्टी विना कोर्ट में सुनबाई हुए वाराणसी में संक़मोचक मन्दिर में बमबिस्फोट करने वाले इसलामिक आतंकवादी को छोड़ने की जिद कर भारतीयों की सुरक्षा को खतरे में डाल रही है...
मित्रो अभी-अभी 8-8:30pm NDTV(Eng) पर इसी मुद्दे पर चर्चा हुई जिसमें एंकर निधी ने विलकुल सही ढंग से आतंकवादियों के मददगारों की खबर ली ...यहां पर ये सपष्ट देख गया कि इसलामिक आतंकवादी उमर फारूकी और मनु सिंघवी इस बात पर पूरी तरह से सहमत थे कि मुसलिम आतंकवादियों जिन्हें वो मासूम करार दे रहे थे को हर हाल में छोड़ा जाना चाहिए...
आपको याद होगा कि अभी हाल ही में प्रखर देशभक्त महेन्द्र कर्मा सहित 27 काँग्रेसियों का कत्ल बामपंथी आतंकवादियों ने किया और मजेदार बात ये है कि इन बामपंथी आतंकवादियों ने न तो मुसलामनों को मारा और न ही ईसाई अजीत जोगी के मित्रों को ...सिर्फ चुन-चुन कर हिन्दूओं को मौत के घाट उतारा गया....
इतने बड़े हमले के बाद भी ईसाई(?) दिगविजय सिंह ने इन खूनी बामपंथी आतंकवादियों को अपना भाई बताकर अपनी हिन्दूविरोधी-देशबिरोधी मानसिकता का परिचय दिया...
आप सबको याद होगा कि यह दिगविजय सिंह वही गद्दार है जिसने वटला हाऊस मुठभेड़ के बाद शहीद मोहन चन्द जी के साथ खड़ा होने के बजाए इसलामिक आतंकवादियों का साथ दिया और सलमान खुरशीद के अनुशार बटला हाऊस मुठभेड़ में मारे गए इसलामिक आतंकवादियों के लिए काँग्रेस अध्यक्षा एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो सारी रात फूट-फूट कर रोई ...इससे पहले मनमोहन सिंह भी हिथरो हबाई अड़्डे पर हमला करने वाले इसलामिक आतंकवादी के लिए सारी रात रोते रह चुके हैं...
आप सबको जानकारी होगी ही कि यही मनमोहन सिंह और एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो दो दो कमेटियां एक सच्चार कमेटी और दूसरी  कशमीर पर बना चुके हैं जिनका जिम्मा इन हिन्दूविरोधीयों ने ISI Agent Justice Rajender  Suchar और राधा कुमार जैसे भारतविरोधी दुशमनों को दिया... ISI Agent Justice Rajender  Suchar के नेतृत्व वाली सच्चर कमेरी का सहारा लेकर काँग्रेस हिन्दूओं के बच्चों के अधिकार छीनकर गैर हिन्दूओं को देने के लिए हर वक्त कोई न कोई षडयन्त्र अन्जाम दे रही है....
आप सबको याद होगा कि 2008 में मुम्मबई पर हुआ हमला ईसलामिक आतंकवादियों ने किया  लेकिन  काँग्रेस का कहना है कि ये हमला RSS यानिके हिन्दूओं ने किया और मजेदार बात ये है कि इस बात पर एक इसलामिक आतंकवादी ने एक पुस्तक लिखी जिसका विमोचन काँग्रेस के महासचिब ने किया...
मित्रो आपको ये भी जरूर जानकारी होगी ही कि अभी कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश में एक इसलामिक आतंकवादी की मौत लू लगने से हो गई जिसके लिए SP सरकार ने 42 पुलिस बालों को Suspend किया...इस आतंकवादी को आतंकवादियों की इस सरकार ने 6 लाख रूपए दिए जबकि आतंकवादियों द्वारा मारे गए 27 काँग्रेस से जुड़े हिन्दूओं के परिवारों को सिर्फ 5-5 लाख....
मित्रो आपको ये भी याद होगा ही कि उतर प्रदेश में मारे गए DSP जियाऊल हक के परिवार को  SP सरकार ने 25 लाख मुआबजा और परिवार के तीन सदस्यों को नौकरी मिडीया में लगातार कबरेज ...पिछले कल ही सहारनपुर में DSP का कत्ल हुआ जिसकी कोई बात नहीं कर रहा हम दावे से कह सकते हैं कि मरने वाला हिन्दू होगा और मारने वाला मुसलमान......
आप सबको इस बात की जरूर जानकारी होगी कि कशमीर घाटी में काँग्रेस इसलामिक आतंकवादियों को 3 लाख की FD दे रही है व मारे गए आतंकवादियों के परिवारों को पेंसन... प्रश्न सिर्फ इतना है कि
 काँग्रेस और समाजवादी पार्टी हिन्दूओं का खून बहाने वालों को जेलों से छुड़वाकर व हिन्दूओं के बच्चों का हक छीनकर गैर हिन्दूओं को देकर हिन्दूओं से किस बात का बदला ले रहे हैं? 

बुधवार, 24 अप्रैल 2013

भाजपा को अगर सच में सेकुलर बनना है तो उसे भी वही करना होगा जो Congress,SP,CPM,JDU TMC,NCP , NC, PDP कर रहे हैं वरना मोदी के अलाबा कोई और विकल्प नहीं...सन्दर्भ गोरखपुर धमाका


मित्रों आज घर आते ही IBN7 पर समाचार सुना कि उत्तर प्रदेश की समाजवादी सरकार ने SDM को आदेश दिए हैं कि वो कोर्ट में जाकर हलफ़नामा दें कि गोरखपुर में बम विस्फोट कर दर्जनों परिवारों का कातिल निर्दोष है मतलब समाजवादी पार्टी(SP) वही कर रही है जो काँग्रेस(Congress) की सरकार ने दिल्ली में आतंकवादी हमले के दोश में पकड़े गए केमिकल इंजीनियर को ये कहते छोड़ दिया था कि इतना पढ़ा लिखा शांतिप्रिय कौम का जेहादी किसी का कत्ल नहीं कर सकता और बाद में उसी केमिकल इंजीनियर ने दिल्ली में धनतेरस के दिन बम हमले कर सैंकड़ो निर्दोश भारतीयों का कत्ल कर व हजारों को घायल कर अपनी शांतिप्रिय कौम का सही परिचय सब सेकुलर हिन्दूओं को करवाया...ऐसा नहीं कि सिर्फ Congress और SP ही ये सब कर रहे हैं इससे पहले कोयमबटूकर में सैंकड़ो निर्दोस हिन्दूओं का कत्ल करने वाले मदनी को भी केरल विधान सभा में वामपंथियों(CPM) व काँग्रेस द्वारा मिलकर कानून बनाकर छोड़ा जा चुका है जिसे बाद में बंगलौर में हुए बम हमलों के लिए गिर्फतार किया कर्नाटक की भाजपा सरकार ने जिसकी बजह से आज सारा सेकुलर गिरोह कर्नाटक की भाजपा सरकार को उखाड़ फैंकने पर तुला हुआ है जिसमें सेकुलर मिड़ीया खासकर NDTV अपनी खास भूमिका निभा रहा है क्योंकि उसे मोदी जी व भाजपा को बदनाम करने के लिए केन्द्र सरकार से 200 करोड़ का पैकेज मिला है । रही बात JDU की तो JDU भी शांतिप्रिय कौम से जुड़े आतंकवादियों की मदद करने में किसी भी तरह से पीछे नहीं है जब मुमबई में 50000 शांतिप्रिय जिहादियों ने हर तरफ दंगा फैलाकर महिला पुलिस वालों को आपना सिकार बनाया व भारत के लिए लड़ रहे व शहीद हुए सैनिकों को सम्मान देने के लिेए बनाई गई अमर जवान ज्योति को लात मारकर तोड़कर भारत के रक्षकों के प्रति इस शांतिप्रिय कौम ने अपनी भारतविरोधी मानसिकता को जगजाहिर किया तो JDU दंगा फैलाकर अमर जवान ज्योति को तोडने वाले जिहादियों के साथ खड़ा नजर आया और बिहार के सेकुलर मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने मुम्बई पुलिस को धमकी दी कि अगर अमर जवान ज्योति को तोड़ने वाले आतंकवादी को पकडने की कोशिश की गई तो मुंमबई पुलिस के अधिकारियों को पकडकर जेल में डाल दिया जाएगा गनीमत है कि नितीश ने जिन्दगी और मौत के वीच झूल रही मासूम के आरोपी बालतकारी परवेज खान को पकडने का विरोध नहीं किया...भाजपा भी धीर-धीरे अपने कदम सैकुलर होने की ओर बढ़ा रही है भाजपा ने कर्नाटक में मदरसों व मसजिदों के माध्यम से जिहादियों को आतंकवाद की शिक्षा देने वाले मौलवियों को केरल और वंगाल की तर्ज पर पगार(सेलरी) देना शुरू की।इससे पहले अटल विहारी बाजपेयी 2003 में लाखों उर्दू और अरबी शिक्षक रखने की घोषणा कर पहले ही भाजपा को देसभक्ति का कठिन मार्ग छोड़कर गद्दारी के आसासन मार्ग पर आगे बढ़ा चुके हैं परिणाम सबके सामने है भाजपा लगातार दो चुनाब हार चुकी है और मोदी जी के मामले पर मोदी के बजाए JDU के साथ खड़ा होकर तीसरा चुनाब हारने की पुरजोर कोशिश कर रही है हमारा आकलन है कि अगर मोदी जी को आगे किए विना भाजपा ने सेकुलर मतलब भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी ऐजेडे के साथ चुनाब लड़ा तो भाजपा 100 का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाएगी और मोदी के नेतृत्व में देशभक्ति के ऐजेंडे के साथ चुनाब लडा तो 300 का आँकड़ा भी पार कर सकती है आगर किसी को सन्देह हो तो हमारे से शर्त लगा ले। मित्रो अपनी सोच विलकुल सपष्ट है कि सबकेसब मुसलमान आतंकवादी नहीं और न ही आतंकवादियों के समर्थक हैं लेकिन पिछले 1000 वर्ष के गुलामी काल से लेकर आजतक आम देसभक्त मुसलमान (वो मुसलमान जिसे आज भी याद है कि किस तरह बिदेशी आक्रमणकारी इसलामिक आतंकवादियों ने उनके पूर्बजों पर जुल्म ढाकर उनकी मां-बहन-बहू-बेटियों की इज्जत आबरू लूटकर उन्हें जबरदस्ती खून खराबे जुल्मोज्यादती की प्रतीक अरबी टोपी पहनाई थी ) को हमेशा ओबैसी, जाकिर नाइक जैसे आतंकवादियों की गुलामी में ही जीना पड़ा है परिणामस्वारूप भारत में बहुत कम ऐसे मुसलमान हैं जो अपना फैसला खुद कर सकते हैं जबतक इन मुसलमानों को उन मदरसों और मसजिदों जिनपर आतंकवादियों का कब्जा है से मुक्त नहीं करवाया जाता तबतक भाजपा को वही करना होगा जो Congress, SP, CPM, JDU, TMC,NCP , NC, PDP जैसी भारतविरोधी-हिन्दूविोधी पार्टियां कर रही हैं मतलब भाजपा को भी इसलामिक आतंकवादियों के हाथों मरवाकर हिन्दूओं को मारने वाले मुसलमानों को जेलों से छोड़कर उनकी जगह निर्दोश हिन्दूओं, साधु सन्तो, भारतीय सेना के जवानों और पुलिस के जवानों और अधिकारियों को जेलों में डालकर मुसलमानों को ये सन्देश देना होगा कि भाजपा भी हर हाल में भारतविरोधी आतंकवादियों के साथ है जैसा कि काँग्रेस नें मक्का मसजिद ,मालेगांव ,मडगांव और समझौता एक्सप्रैस में हमले करने वाले मुसलमानों को जेलों से छोड़कर उनकी जगह निर्दोश हिन्दूओं ,भारतीय सेना के जवानों और पुलिस के जवानों और अधिकारियों को जेलों में डालकर हिन्दू आतंकवाद-हिन्दू आतंकवाद चिल्लाना शुरू किया अगर भाजपा हिन्दूओं और भारत के साथ यही गद्दारी करने को त्यार है तभी बो सच्चे अर्थों में सेकुलर कहलवा सकती है और मुसलमानों के वोट हासिल कर सकती है वरना भाजपा के पास एक ही रास्ता है कि वो मोदी जी के नेतृत्व में चुनाब लड़ने की घोषणा कर सब भारतीयों खासकर हिन्दूओं को सुरक्षा की गारंटी देते हुए ये वायदा करे कि सेकुलर गद्दारों को सता से बाहर करने के बाद भारत में कानून सबके उपर समान रूप से लागू किया जाएगा किसी के साथ भी हिन्दू राष्ट्र भारत में जाति-भाषा-क्षेत्र-सांप्रदाय-लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा वरना न भारत बचेगा न भाजपा सिर्फ भारत में भारतविरोधी आतंकवादी और उनके समर्थक ही रहेंगे व राज करेंगे ठीक कशमीर घाटी की तरह...

रविवार, 15 जनवरी 2012

OBC हिन्दू का 9% हिस्सा काटकर मुसलमानों को देने की शर्मनाक व खतरनाक घोषणा…

हमने सुना था कि चुनाब अचार संहिता नाम की भी कोई बंदिश होती है जो सरकार को चुनाबों के दैरान लोकलुभावनी घोषणायें करने से रोकती है लेकिन सरकार द्वारा चुनाबों की घोषणा की आहट से लेकर आज तक लिए जा रहे देशविरोधी फैसले ये दरसाने को काफी हैं कि सरकार फूट डालो और राज करो की नीति को आगे बढ़ाने के लिए किसी भी हद तक गिर सकती है।
आप देख सकते हैं कि किस तरह काँग्रेस सरकार ने चुनाबों से ठीक पहले OBC हिन्दू का 4.5% हिस्सा काटकर मुसलमानों को देने की विभाजनकारी घोषणा कर  OBC हिन्दूओं को नुकसान पहुंचाया। हमें उम्मीद थी कि सारे देश में सब हिन्दू मिलकर कांग्रेस के इस हिन्दूविरोधी- देशविरोधी विभाजनकारी फैसले का जमकर विरोध कर सरकार को ये गैर-संवैधानिक फैसला वापस लेने पर बाध्य कर देंगे । लेकिन ऐसा नहीं हो सका । हिन्दूओं ने अपनी मूर्खता का प्रमाण दते हुए विना किसी विरोध के सरकार को अपना हिन्दूविरोधी फैसला आगे बढ़ाने का अबसर दे दिया।
अपनी इस हिन्दूविरोधी-देशविरोधी असंबैधानिक सफलता से उत्साहित काँग्रेस  सरकार ने अपनी हिन्दूविरोधी-देशविरोधी नीति को आगे बढ़ाते हुए घोषणा कर दी कि चुनाबों के बाद सरकार हिन्दूओं का 9% हिस्सा काटकर इस्लामिक आतंकवादियों को भारत के विभाजन के इनाम के रूप में मुसलमानों को दे देगी।
एक बात तो निश्चित है कि ये हिस्सा SC/OBC/GC में से किसी न किसी के हिस्से से काटा जाएगा।
अब वक्त आ गया है कि सब हिन्दू वाकी सब मसले किनारे कर, मिलकर इस बात पर विचार करें कि 1947 में भारत को तीन हिस्सों में बाँटने वाली काँग्रेस ने पहले ही पूर्वी(बंगलादेश) और पश्चिमी(पाकिस्तान) भारत में 100% आरक्षण मुसलमानों को देकर हिन्दूओं के बच्चों को इन क्षत्रों में उनके मूल अधिकारों से बंचित कर रखा है अगर इसी तरह मध्य भारत(India) में भी हिन्दूओं के  अधिकार छीनकर मुसलमानों को दे दिए गए तो हिन्दूओं की आने वाली पीढ़ियां कहां से अपने बच्चों का भरण-पोषण कर पायेंगेी?
आओ मेरे प्यारे हिन्दूओ दाने-दाने को मोहताज होने से पहले समय रहते कांग्रेस की इस हिन्दूविरोधी-भारतविरोधी मानसिकता का आने वाले चुनाबों मे करारा जबाब देकर हिन्दूसमर्थक दलों को सफल बनाकर अपनी ताकत का परिचय दें।

दंगा करवाने की ओर काँग्रेस के बढ़ते कदम...संदर्भ दिगविजय सिंह के समर्थक द्वारा स्वामी राम देव जी पर हमला

आज भारत में जिस तरह कांग्रेस गद्दारी और चोरी की प्रतीक बन गई है ठीक उसी तरह स्वामी राम देव जी देशभक्ति और इमानदारी के सत्मभ बन चुके हैं।Ramdav ji
अब जब कांग्रेस को महसूस होने लगा है कि उसके द्वारा स्वामी राम देव जी को जान से मारने attack on SWamiव बदनाम करने का हर षडयन्त्र न केवल असफल हो चुका है वल्कि   कांग्रेस की भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी मानसिकता को भी जगजाहिर कर चुका है तो कांग्रेस एक ऐसे षडयन्त्र को अन्जाम देने की फिराक में है जिसके बल पर आज तक कांग्रेस भारत की राजनीति पर छाई रही है।
अगर आप कांग्रेस के इतिहास पर नजर डालें तो आप पायेंगे कि काँग्रेस ने आज तक हिन्दू-मुसलमान में दंगा करवाकर ही अपनी राजनीतिक हैसियत बचाकर रखने में सफलता हासिल की है।
2002 में इस्लामिक आतंकवादियों द्वारा रेलगाड़ी में आग लगाकरgodhra हिन्दूओं को जिन्दा जलाकरgodhra1 शुरू करवाया गया दंगा ही 2004 में NDA  को सता से बाहरकर काँग्रेस को सता में लाने का प्रमुख कारण बना। ध्यान रहे ट्रेन में आग लगाने वाली भीड़ का नेतृत्व कांग्रेस के पार्षद ही कर रहे थे ।
इसी दंगे को आधार बनाकर आज तक कांग्रेस  मुसलिम बहुल क्षेत्रों में कई चुनाब जीत चुकी है।
आज जब राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (RSS) Mohan-Bhagwat_0कांग्रेस की इस  दंगा करवाने की मानसिकता को समझ कर अपने संगठन में से प्रतिक्रियावादी तत्वों को दूर कर खुद को राष्ट्रीय एकता का बास्तविक शूत्रधार साबित कर चुका है तो कांग्रेस ने प्रखर राष्ट्रवाद के नए-नवेले संगठन भारत स्वाभिमान को अपने निशाने पर लेकर अपनी विभाजनकारी मानसिकता को आगे बढ़ाने की पूरी तैयारी कर ली है।
कांग्रेस अछ्छी तरह जानती है कि स्वामीराम देव जी के साथ हर देशभक्त मजबूती से खड़ा है चाहे वो हिन्दू-सिख-मुसलिम- ईसाई कोई भी हो।
कांग्रेस ये भी जानती है कि स्वामीरामदेव जी बटला हाऊस मुठभेड़ का विरोध कर  देशभक्त  वीर-जवानों का अपमान mcsकतई नहीं कर सकते।
काँग्रेस गुप्तचर संस्थाओं के माध्यम से ये भी जानती है कि आज मुसलमानों का बहुमत या तो आतंकवादी है या फिर  इस्लामिक आतंकवाद का समर्थक है।
इसीलिए बटला हाउस मुठभेड़ को फर्जी बताकर कांग्रेस एक तो देशभक्त वीर-जवानों को अपमानित कर आतंकवादियों के एकमुस्त बोट हासिल करने की फिराक में है, दूसरा देशभक्त मुसलमानों को जोकि पहले ही हासिए पर हैं को स्वामी रामदेव जी  से दूर करने की फिराक में है।  
कांग्रेस अच्छी तरह जानती है कि स्वामी रामदेव जी जी का काँग्रेस की गद्दारी और लूट पर हमला RSS के हमले से कहीं ज्यादा स्टीक और तीखा है।
जिस तरह आज तक काँग्रेस ने अपने मित्र इस्लमिक आतंकवादियों से हिन्दूओं पर हमला करवाकर  शुरूकरवाए  गए दंगों के लिए RSS को दोषी ठहराकर चुनाबी सफलतायें हासिल की हैं उसी तरह स्वामी रामदेव जी पर अपने मित्र इस्लामिक आतंकवादियों से हमला करवाकर देशभक्तों को प्रतिक्रिया के लिए मजबूर कर , परिणामस्वारूप शुरू हुए दंगों के लिए  भारतस्वाभिमान को दोषी ठहराकर चुनाबी सफलतायें हासिल करना चाहती है…    

शनिवार, 24 दिसंबर 2011

चोरों-लुटेरों और गद्दारों की भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी सरकार का असर अब रूस में भी।

bhabat geeeta 2जैसा  कि आप सब जानते हैं कि रूस के साइबेरिया प्रांत के तोमसक शहर में चर्च ने स्थानीय न्यायालय में भारत की प्राण श्रीमद भगवत गीता पर प्रतिबन्ध लगाने के लिए न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लिया है।दुनिया भर में गैर ईसाईयों का खून बहाने वाले, चर्चों में बच्चों का यौन शोषण करने वाले, नारी को उपभोग की बस्तु मानकर उसको प्रताड़ित करने वाले व गैर ईसाईयों को ईसाई वनाने मतलब धर्मांतरण के लिए हर तरह के मानबीय मूल्य का खून करने वाले चर्च ने न्यायालय में मानबता की रक्षा की गारंटी श्रीमद भगवत गीता को उग्रवादी सहित्य बताया है ।Bhagbat Geeta.jpg 1
चर्च द्वारा की गई इस घिनौनी हरकत का हमें क्या जबाब देना चाहिए इसपर चर्चा तो हम अगले लेख में करेंगे लेकिन आज हम उन सेकुलर गद्दारों (कुछ सेकुलर गद्दारों की सच्चाई यहां पढ़ें।) की चर्चा करेंगे जिनके भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी कुकर्मों की बजह से भारत को ये दिन देखने पड़ रहे हैं।
हम सब जानते हैं कि किस तरह भारतविरोधी ताकतों ने  चर्च की ऐजेंट एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी को भारत में plant कर भारत को तबाह करने का षडयन्त्र रचा । आप इस बात से भी परिचित हैं कि किस तरह 2004 से भारत में इस  विदेशी ऐजेंट की गुलाम सरकार एक के बाद एक ऐसा काम कर रही है जिससे हिन्दूओं को कमजोर व बदनाम किया जा सके।
जहां एक तरफ ये चोरों की सरगना एंटोनिया भारत को लूट कर सारा धन विदेशों में जमा करवाकर भारत को आर्थिक रूप से कमजोर कर रही हैं वहीं दूसरी तरफ इसकी गुलाम सरकार एक तो चोरों के बिरूद्ध आबाज उठाने वाले स्वामी राम देब जी व अन्ना जी जैसे देशभक्तों पर जुल्म ढा रही है वहीं दूसरी तरफ हिन्दूओं के अधिकारों को छीनकर गैर हिन्दूओं के हबाले कर हिन्दूओं के बच्चों के पेट पर लात मार रही है।
इतने से भी जब  इस भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी  सरकार का मन नहीं भर रहा है तो  संसार को शांति का पाठ पढ़ाने वाले हिन्दूओं को ही ये सरकार आतंकवादी करार देकर असली आतंकवादियों को बचाने का काम कर रही है।Bhagbat Geeta
जहां एक तरफ ये भारतविरोधी सरकार भारतविरोधी आतंकवादियों को जेलों से छोड़कर उन्हें लाखों रूपए दे रही है वहीं दूसरी तरफ ये हिन्दूविरोधी सरकार निर्दोष हिन्दूओं व सैनिकों को विना किसी प्रमाण के जेलों में रखकर न केवल उन्हें प्रताड़ित कर रही है वल्कि  हिन्दूओं को  उग्रवादी करार देकर सारे संसार में बदनाम भी कर रही है।
इस बिदेशी की गुलाम भारतविरोधी –हिदूविरोधी सरकार के दुष्प्रचार का ही परिणाम है कि आज रूस में भारत की प्राण श्रीमद भगवत गीता को उग्रवादी सहित्य करार देकर उस पर प्रंतिबन्ध की तैयारी है।

मंगलवार, 6 दिसंबर 2011

चर्चा इधर-उधर की


देखो तो जरा अपने कुकर्मों से डरकर कौन भाग रहा है…
pjb 6d11-2

लगता है इस्लामिक आतंकवादियों की समर्थक सरकार को भी समझ आने लग पड़ा है कि ये इस्लामिक आतंकवाद सेकुलर गद्दारों को भी ज्यादा दिन जिंदा नहीं रहने देगा….

pjb 6d11 5pjb 6d11
pjb 6d11 3
इस्लामिक आतंकवादी ,परमपूजनीय भगवत गीता जंयती मनाने बालों पर हमला कर सकते हैं
pjb 6d11
सेकुलर गद्दार इसे शांति और भाईचारे का त्यौहार कहते हैं अगर दूध पीते बच्चों का खून बहाने में  इन भारतविरोधियों को शांति नजर आती तो क्यों न इनका खून बहाकर इन्हे हमेशा के लिए शांत कर दिया जाए?
moharam
सोचने से कुछ नहीं होगा जरूत है इन देशभक्त संगठनों के साथ मिलकर हिन्दूमिटाओ-हिन्दूभगाओ  अभियान चलाने वाली खून खरावे की जड़ अरबी संस्कृति व उनके समर्थक सेकुलर गद्दारों को भारत की पबित्र धरती से हमेशा के लिए खत्म कर देना।
communal Violence Act

रविवार, 27 नवंबर 2011

अन्ना जी ने क्यों कहा “बस एक ही थप्पड़ मारा”


सबसे पहले तो अब ये निस्चित हो जाना चाहिए कि जो खुद को जन प्रतिनीधि व नेता कहते नहीं थकते उन्हें क्या कहा जाना चाहिए?
जनप्रतिनिधि या नेता या अभिनेता(लालु जैसे) या (हर काम के बदले समीशन)भाई या गुण्डा(दिगविजय सिंह,मनोज तिवारी) मबाली(स्वामी जी पर हमला) या लुटेरा(राजा ,चिदंमबरम) या हफ्ता ) बसूल करने वाला या फिर (गरीबों की मां-बहन की इज्जत का लुटेरा) (भंवरी देवी जैसे हजारों लाखों केस,) ब्याभिचारी या या हत्यारे आम जनता के  फिर सबकुछ।
जबतक आपलोग इस बात को सपष्ट नहीं करते तब तक हम आपकी सुबिधा के लिए इन्हें सेकुलर गद्दार  ही कहेंगे।
अब आते हैं असली मुद्दे पर ।
हरविंदर सिंह जी द्वारा शरदपवार को थपड़  जड़ने का समाचार जैसे ही अन्ना जी को मिला अन्ना जी के मुंह से यकायक यही निकला “बस एक ही थप्पड़ मारा”
सोचने वाला विषय यह है कि ऐसा क्या हुआ है जिसकी बजह से हर देशभक्त  सेकुलर गद्दारों की कुटाई से खुश तो हो रहा है लेकिन संतुष्ट नहीं। हर देशभक्त क्यों चाहता है कि इनको अधिक से अधिक शारीरिक और मानसिक व भौतिक नुकशान होना जरूरी है?
होना तो यह चाहिए था कि जनप्रतिनिधि को नुकशान होने पर हर देशभक्तों को तकलीफ होती लेकिन हो उल्टा रहा है हर देशभक्त इन सेकुलर गद्दारों का विनाश चाहता है क्यों ?
बास्तब में ये जन प्रतिनिधि आज भारत की जनता के बजाए जबाबदेह होने के बजाए खुद को अमेरिका व साऊदी अरब के प्रति ज्यदा जबाबदेह मानने  लगे हैं। इसलिए जब भी कभी किसी भारतीय को नुकसान होता है तो इन सेकुलर गद्दारों को लगता ही नहीं कि ये नुकशान इनका भी है परिमामस्वारूप भारतीयों  को नहीं लगता कि ये भारतीयों के प्रतिनीधि हैं ।
इसके कई कारण है
  1. सबसेबड़ा कारण तो सेकुलर गद्दारों को साऊदी अरब से मिलने वाला Patro-Dollar ( जिसके बदले ये भारत में इस्लामिक आतंकवादियों का हर हालात में बचाब करते हैं बहाना चाहे मानबाधिकारों का हो संबिधान का या फिर कोई और)  व अमेरिका से मिलने वाला US-Dollar (जिसके बदले में ये भारत में धर्मांतरण का समर्थन करने के साथ-साथ ईसाई आतंकवादियों का बचाब करते हैं व बहुराष्ट्रीय कम्पनीयों के हाथों देश की सम्पदा को कौड़ियों के भाव बेचते हैं।)
  2. इनमें से अधिकातर(प्रभाबशाली) की पढ़ाई-लिखाई  बिदेशों में हुई है इसलिए ये भारतीयों की तरह सोचने के बजाए विदेशियों की ही तरह सोचते हैं जिस तरह से बिदेशी मुसलमान व इसाई भारतीयों को लूटने के लिए नीतियां बनाते थे बैसी ही वल्कि उससे भी खतरनाक नीतियां ये लोग बना रहे हैं। जैसे कि सचरकमेटी रिपोर्ट, रंगनाथ मिश्रा कमेटी रिपोर्ट, 'Prevention of Communal and Targeted Violence Bill, 2011' सिर्फ गैर हिन्दूओं(SC,ST,OBC किसी के लिए भी नहीं) के लिए छात्रवृति इत्यादि-इत्यादि। इन सब नितीयों का एक ही मकसद है भारत के मूल निवासियों के हक छीन कर अरबी व रोमन संसकृति को समर्पित लोगों को देना।
  3. हमारे विचार में BJP,SP, BSP, JDU, JD(s),  AIDMK, RC ,LD,JD, CPM, CPI व BJD जैसी सबकी सब क्षेत्रीय पार्टीयां कांग्रेस की बिछाई फूट डालो और राज करो की  एक ऐसी बिसात का सिकार हुईं जिसके परिमास्वारूप ये सबकी सब पार्टीयां अपने उन्हीं लोगों के अधिकारों को कुचलती चली गीईं जो लोग इनको समर्थन करते हैं मतलब सबकी सब पार्टियां भारतविरोध की एक ऐसी राह पर निकल पड़ी जिसमें इनका कोई दोष नहीं सिवाए इसके कि इन पार्टियों ने हालात से मुकाबला करने के बजाए हालात से समझौता कर कांग्रेस की वही राह पकड़ जिसका मकसद है हिन्दूओं को कुचल कर भारत को तबाह और बरबाद करना है। थपड़ पर इन सब पार्टियों की एकजुटता  इसी विकृत मानसिकता का प्रमाण है।अगर इनमें से एक भी पार्टी हरविंदर जी जैसे लोगों को बुलाकर सम्मानित करे तो आम जनता को लगेगा कि कोई उनके साथ भी है और आगे नेताओं को खतरा भी कम होता जाएगा । ऐसे मामलों पर जितनी ये पार्टियों एकजुटता दिखायेंगी उतना ही आम आदमी और आक्रोशित होगा।
  4. खुद कांग्रेस बिदेशियों (अंग्रेजों व मुगलों)की बिछई एक ऐसी भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी मानसिकता की शिकार हुई जिसका एकमात्र उद्देश्य था भारत के मूलनिवासियों के अधिकारों को छीन कर गैर भारतीयों के हबाले करना व भारत की सम्पदा को लूटकर इन्हीं विदेशीयों के मूल स्थानों पर पहुंचाना। कांग्रेस की स्थापना एक विदेशी द्वारा करने से लेकर आज तक कांग्रेस की कमान जब भी सम्भव हुआ भारतीयों के बजाए विदेशियों के हाथों में ही रही । इन विदेशियों ने कांग्रेस की कमान अपने हाथ में लेकर इसका  उपयोग जमकर अपनी नस्ल के लोगों के हितों को आगे बढ़ाने के लिए किया जैसे कि आज एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो कर रही है। ऐसा नहीं कि आज कांग्रेस में देशभक्तों की कमी है लेकिन सबके सब आज राष्ट्र हित को तिलांजली देकर निजहित व परिबारहित को साधने में बयस्त हैं।
  5. इन सब कारणों से भी बड़ा कारण है  इन सेकुलर गद्दारों द्वारा जनता से जुड़े हर मुद्दे पर जनता के बिरोध में जाना। देश की सारी जनता चाहती है कि मंहगाई व भ्रष्टाचार  पर सरकार गिरे लेकिन ये सेकुलर गद्दार नहीं चाहते कि ये सरकार गिरे क्योंकि इनको लगता है कि बिदेशियों के इसारों पर नाचने वाली ऐसी सरकार फिर से नहीं बन सकती इसलिए इस सरकार के माध्यम से जनता को मतलब भारत को जितना लूट लिया जाए –भारत के मूल निवासियों को जितना कमजोर कर लिया जाए उतना काफी है।
सिर्फ यही नहीं आज देश में जो भी शांतिप्रिए तरीके से अपनी बात कहने की कोशिश करता है उसे मूर्ख व कमजोर समझकर चोरों और गद्दारों की सरकार कुचलती जाती है वाकी विपक्ष जुवानी जमा-घटाने से आगे बढ़कर सरकार के बिरूद्ध किसी निर्णायक लड़ाई की शुरूआत तक नहीं करता परिणामस्वारूप जनता पिसती जाती है पिसने से जनता का क्रोध बड़ता जाता है कौन जाने कल कोई सिरफिरा जिसकी पहुंच बारूद तक बन जाए सारी की सारी पार्लियामैंट को बारूद से उड़ा दे।
क्या इन सेकुलर गद्दारों में से किसी ने सोचा कि मुम्बई हमला करने वाले षडयन्त्रकारी को PM ने शांतिदूत बताकर भारत में इस्लामिक आतंकवादियों के हाथों मारे जा चुके लाखों शहीदों के करोंड़ों परिजनों व शुभचिंतकों के जख्मों पर नमक छिड़का तो इन पीड़ितों के मन से जो बददुआ निकली वो इन सेकुलर गद्दारों को तबाह करने की ताकत रखती है। इस चोरों और गद्दारों की सरकार द्वारा शहीदों व देशभक्तों के जख्मों पर नमक छिड़कने की मानों प्रवृति ही बन गई है।
इन आतंकवादियों के प्रतिनीधि नेताओं के कुकर्मों की बजह से ही अन्ना जी को कहना पड़ता है कि “बस एक ही थप्पड़ मारा”

गुरुवार, 24 नवंबर 2011

नेता का थप्पड़ सही और जनता का गलत ऐसा कैसे हो सकता है ?

सच कहें तो आज जब  एक आक्रोशित युबक हरविेंदर harbinderने मंहगाई से तंग आ चुकी आम जनता की भावनाओं मे बहकर  इस्लामिक आतंकवादी दाऊदइबराहीम के पोषक व रक्षक सरदपबार को थपड़ जड़ा तो हमें लगा कि उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था क्योंकि अब थपड़ मारने का वक्त नहीं रह गया।
अब तो वो वक्त आ चुका है जब देशभक्तों को थपड़ और लोकतांत्रिक विरोध के सब तरीके छोड़कर कुछ ऐसा कना चाहिए कि एक युबक के जेल जाने के साथ ही एक दर्जन गद्दारों का अन्त सुनिश्चित बनाया जा सके।
क्योंकि  भारतविरोधी नेताओं को थपड़ पड़ते ही सबके सब राजनीतिज्ञ मिडीया व दानाबधिकारवादी एकजुट होकर युबाओं द्वारा चलाए जा रहे अन्दोलनों  को कुचलने के नए-नए रास्ते तलासने लग पड़ते हैं। लेकिन जैसे ही आम जनता पर ये नेता नीतिगत या सारीरिक थपड़ जड़ते हैं तो ये सबके सब सेकुलर गद्दार खामोश हो जाते हैं।
आप अच्छी तरह से जानते हैं कि किस तरह गांधीबादी गुण्डों ने चतर्वेदी को सिर्फ चप्पल दिखाने वाले साहसी युबक की बरबर पिटाई की। आपने ये भी देखा कि उत्तर प्रदेश में Half Indian को काले झंडे दिखा रहे नौजवानों को किस वेहरमी से इन गांधीवादी गुण्डों ने सबके सामने पीटा और अपने प्रभाव का दुरूपयोग कर अपनी गिरफ्तारी पर रोक भी लगवा ली।
अगर आज भारत में कानून का शासन चल रहा होता तो वेशक आक्रोशित युबक जेलों मे जाते लेकिन साथी ही ये भातविरोधी गांधीवादी आतंकवादी भी अपने किए कुकर्मों की सजा भुक्तते ।
जब तक भारत में कानून के अनुशार सासन नहीं चलता है तब तक युबकों के पास अपना आक्रोश दिखाने का कोई लोकतान्त्रिक मार्ग कैसे हो सकता है?
कुल मिलाकर जो कोई भी इस नौजवान द्वारा जड़े गए इस जोरदार थपड़ का विरोध कर रहे हैं वो कृप्या एक बार जरूर ये सोच लें कि अगर आक्रोसित नौजवान द्वार जड़ा गया ये थपड़ ठीक नहीं तो देश को लूट रही सताधारी पार्टी के गांधीवादी गुण्डों द्वारा नौजवानों को मारे जा रहे थपड़ कैसे ठीक हो सकते हैं?

मंगलवार, 8 नवंबर 2011

ईद कहो या बकरईद मकसद तो एक ही है---हिंसा---कत्लोगारद---अराजकता---


हम कई बार हैरान होते हैं ये देखकर कि जब कातिल अल्लाह के नाम पर कतलयाम idमचा रहे होते हैं तो कुछ परजीवि इस कत्लयाम को कभी वकर ईद तो कभी ईद के नाम पर जायज ठहराने के भरपूर प्रयत्न करने में लगे रहते हैं।दानबता की हर हद तो तब पार हो जाती है जब मिडीया में बैठे ISI ऐजेंट, हिंसा से भरपूर इन खूनी बारदातों को शांति और भाईचारे का जसन करार दे देते हैं।
हम मानते हैं कि कोई भी जीब कैसे जिन्दगी जीता है इसमें हस्तक्षेप का हमें कोई हक नहीं लेकिन जब ये जीब हिंसक हो जाए और अपने देश में बैठे धर्मनिरपेक्ष गद्दार इस जीब द्वारा किए जा रहे कत्लोगारद को जायज ठहराकर मानबता को लहूलुहान करने पर उतारू हों तो सब शांतिप्रिय लोगों का ये फर्ज बन जाता है कि इन्सान के वेष में छिपे इन राक्षसों को वेनकाब कर इस धरा को इन राक्षसों से मुक्त करने के उपायों पर विचार करे।
मजेदार बात तो ये है कि राक्षसों के जिन राहुल विन्सी जैसे मददगारों को इस कत्लयाम में अमन-चैन, प्रेम भाईचारा नजर आता है उन्हीं गद्दारों को भारतीय संस्कृति का हर पहलू सांप्रदायिक दिखने लगता है परिमामस्वारूप उन्हें भारतीय होने पर कभी शर्म आती है तो कभी दुख होता है।
वेशक कुछ लोगों को ऐसा लगेगा कि क्योंकि भारत में इन राक्षसों से हिन्दूओं को खतरा है इसलिए हम इनके खात्मे की बात कर रहे हैं। लेकिन ये आधा सत्य है क्योंकि इसमें कोई सन्देह नहीं कि जिस तरह इन राक्षसों ने कतल्याम के बल पर गांधी जैसे व्यक्ति को भारत का विभाजन स्वीकार करने पर विवश किया, जिस तरह न कातिलों ने कशमीर घाटी में हजारों हिन्दूओं का कत्लयाम किया, जिस तरह ये कातिल देशभर में बम्ब हमले व दंगा फसाद कर हिन्दूओं का कत्लयाम कर रहे हैं उस सबको देखते हुए ये कहना विलकुल सही है कि भारत में हिन्दूओं को इन राक्षसों से खतरा है।
लेकिन आम मुसलमान जिसने हाल ही में मतलब पिछले 300-500 वर्ष में इस्लाम अपनाने के बाबजूद मानबता का दामन नहीं छोड़ा है वो भी इन राक्षसों के निसाने पर उसी तरह है जिस तरह हिन्दू व ईसाई हैं। अगर आपको लगता है कि हम गलत कह रहे हैं तो आप उन इस्लामिक देशों पर एक निगाह डालो जिनकी लगभग 100% अबादी मुसलमान है उसके बाबजूद ये राक्षस इन इस्लामिक देशों में मस्जिदों, मदरसों व भीड़भाड़ वाले क्षत्रों में बम्म हमले कर इन नए-नवेले मुसलमानों का खून बहा रहे हैं।
अगर ये हमले इस्लाम को आगे बढ़ाने के लिए किए जा रहे हैं तो इन राक्षसों द्वारा मस्जिदों में बम्म बिस्फोट करने का कोई औचित्य नजर नहीं आता वो भी वहां जहां 100% अबादी मुसलमानों की ही है। क्योंकि जहां इन राक्षसों के साथ हिन्दू या ईसाई रहते हैं वहां तो ये राक्षस मस्जिदों में बम विस्फोट कर उसका दोष गैर मुसलमानों पर दे देते हैं जैसे कि इन राक्षसों के हाथों विक चुकी केन्द्र सरकार ने इन राक्षसों द्वारा मस्जिदों में किए गए बम हमलों का दोष हिन्दूओं के सिर डालकर देशभक्तों को जेल में बन्द कर दिया लेकिन 100% मुसलिम अबादी में तो ऐसा भी कोई बहाना काम नहीं कर सकता है।
हमारे विचार में ये राक्षस जिस भी अल्लाह का नाम लेते हैं वो जरूर कोई शैतान होगा वरना ये कैसे हो सकता है कि अल्लाह अपनी ही सन्तति का खून बहाकर खुश हो। यही नहीं ये राक्षश मां-वहन-वेटी-बहु जैसै पवित्र रिस्तों को भी नापाक कर अपने राक्षश होने का प्रमाण दुनिया के सामने रख रहे हैं। आओ मिलकर इन राक्षसों के इस दुनिया से सफाए के लिए जरूरी कदम उठाने का प्रण कर मानबता की रक्षा के लिए धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ें।

मंगलवार, 18 अक्टूबर 2011

प्रशांत भूषण ने ISI को खुला समर्थन देकर टीम अन्ना को मरवा दिया?


आज देश के जो हलात हैं उनमें कोई भी अच्छा काम करना अगर असम्भव नहीं तो वेहद मुसकिल है। क्योंकि जैसे ही कोई देशभक्ति की बात करता है उसे मुसलिमविरोधी करारा देकर इस्लामिक आतंकवादियों के निसाने पर लाने की कोशिस की जाती।
जब तक वो किसी हमले का सिकार न हो तब तक उसे इतना बदनाम कर दिया जाता है कि लोगों को लगने लगता है कि उसके साथ जो हुआ वो सही है जिस तरह स्वामी रामदेव जी पर रात के अन्धेरे में जान से मारने के लिए हमला किया गया उससे हर आम आदमी का आक्रोशित होना स्वाभाविक था लेकिन सरकार ने कांग्रेस की नई-नवेली सहयोगी ISI के ऐजेंट धर्मनिर्पेक्षतावदी गद्दारों को करोड़ों रूपए देकर स्वामी जी, उनके सहयोगी व बालकृष्ण जी के विरूद्ध मिडीया में एक ऐसा अभियान चलाया जिसके परिमामस्वारूप लगने लगा मानो सारे अपराध स्वामी जी और उनके साथियों ने ही किए हों।
इसी तरह अन्ना जी को भी बदनाम करने के लिए हर तरह का हथकण्डा अपनाया गया।
इससे पहले RSS व मोदी को भी ऐसे ही हथकण्डो का उपयोग कर हर तरह से ठिकाने लगाने की कोशिस की गई ताकि देश में कोई भी इस्लामिक आतंकवाद के विरूद्ध आबाज न उठा सके ।
ये ऐसे षडयन्त्रों की ही सफलता है कि अग्निवेश जैसे लोग पहले स्वामी राम देव जी के अन्दोलन में घुसे बाद में ये अन्ना जी के अन्दोलन में घुसकर स्वामी जी और अन्ना जी को एक दूसरे से अलग रखने में सफल रहे।
ऐसे ही षडयन्त्रों ने अन्ना जी को प्रखर देशभक्त संगठन RSS से अन्दोलन को मिल रहे समर्थन को ठुकराने की बात करने पर मजबूर कर दिया।
भारतविरोधियों के ऐसे ही षडयन्त्र के परिणामस्वारूप ही उनके सहयोगी प्रशांत भूषण ने एक ऐसा भारतविरोधी ब्यान दिया जो पूरी तरह से ISI और पाकिस्तान के भारतविरोधी रूख का समर्थन करता है।जिसके परिमास्वारूप पूरी टीम अन्ना देशभक्तों के निशाने पर आ गई।
ऐसा नहीं कि प्रशांत भूषण ने ऐसा भारतविरोधी ब्यान पहलीवार दिया हो लेकिन इसवार योजना अनुसार इसका भारतविरोधी मिडीया का उपयोग कर तब तक प्रचार-प्रसार किया गया जब तक टीम अन्ना देशभक्तों के निशाने पर नहीं आ गई।
आज अगर कांग्रेस केजरीबाल पर हमला करवाने का साहस कर रही है तो ये ISI के ऐजेंट धर्मनिर्पेक्षतावदी गिरोह के उसी षडयन्त्र का परिणाम है जिसके अनुसार प्रशांत भूषण से ये पाकिस्तान समर्थक ब्यान दिलबाया गया।
अगर प्रशांतभूषण ने भारतविरोधी ब्यान देकर टीम अन्ना को देशभक्तों की निगाह में गिराया न होता तो किसमें दम था कि टीम अन्ना के किसी भी सदस्य को हाथ भी लगा पाता।
इसीलिए कहा गया है कि बुरी संगत से अकेले भले(पहले तो ऐसे गद्दारों को टीम में लेना ही नहीं चाहिए था अगर गलती से ले भी लिए थे तो पता चलते ही निकाल देने चाहिए थे अगर निकालने का दम नहीं था तो कम से कम उनकी कुटाई का तो विरोध न करते जिससे लोगों में किसी शंका का निर्माण न होता क्योंकि भ्रष्टाचार और गद्दारी की जननी कांग्रेस तो मौके की तलास में थी।)।आज नहीं तो कल केजरीवाल जी पर हुए हमले का सच सामने आएगा ही ।वेशक आज ये हमला कांग्रेस ने करवाया है लेकिन बहुत जल्दी हमें पता चल जाएगा कि इसमें अग्निवेश और प्रशांत भूषण की कितनी भूमिका है।

क्या अन्ना जी दो नावों पर पैर रखकर नैया पार लगाने की सोच रहे हैं?

जिस तरह से अन्ना जी भारत माता की जय और वन्देमातरम् का उदघोष कर भ्रष्टाचार मिटाने की मुहिम चला रहे हैं उसे देखकर कोई भी देशभक्त अन्ना जी की ओर स्वभाविक रूप से ही दौड़ा चला आएगा।फिर वो चाहे किसी भी संगठन से क्यों न जुड़ा हो। ऐसे में अन्ना जी द्वारा RSS व भारत स्वाभिमान जैसे देशभक्त संगठनों से दूरी बनाना और देशद्रोहियों के लिए काम करने वाले अग्निवेश और प्रशांत भूषण को साथ रखना संदेह ही नहीं वल्कि गंभीर प्रश्न भी पैदा करता है।
वेशक भारतविरोधियों-हिन्दूविरोधियों के ऐजेंट अग्निवेश को बाहर का रास्ता दिया गया है लेकिन उसे बाहर का रास्ता इसलिए नहीं दिखाया गया क्योंकि वो भारत के विरूद्ध काम कर रहा था वल्कि इसलिए क्योंकि वो टीम अन्ना के विरूद्ध काम कर रहा था। मतलब टीम अन्ना का हित अन्ना जी के लिए भारत के हित से ज्यादा महत्व रखता है।
दूसरी तर्फ प्रशांत भूषण जो कि अग्निवेश की ही तरह भारत के शत्रुओं के हाथों में खेल रहा है को अन्ना जी वेशक लताड़ लगा रहे हैं लेकिन आतंकवादियों के इस साथी को अपनी टीम से बाहर करने की जिम्मेदारी उस टीम पर डाल रहे हैं जिस टीम में न जानें अग्निवेश और प्रशांत भूषण जैसे कितने ही ISI और वांमपंथी आतंकवादियों के प्यादे भरे पड़े हैं।
कुल मिलाकार ऐसा लग रहा है कि अन्ना जी गद्दारों और देशभक्तों को साथ रखकर एक ऐसा तानावान बुनने के चक्कर में जिससे कि अन्दोलन को इस्लामिक आतंकवादियों और बामपंथी कातिलों का समर्थन मिलने के साथ-साथ देशभक्तों का सहयोग भी मिल सके।
वरना अगर अन्ना जी को सिर्फ प्रखर देशभक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ना होता तो पहले तो अग्निवेस व प्रशांत ,जिनका पेशा ही आतंकवादियों का साथ देना है जैसे भारतविरोधियों को अपने साथ लेते ही नहीं और आगर उनमें सुधार की उम्मीद से उन्हे साथ ले ही लिया था तो उनके द्वारा ISI व पाकिस्तान की भाषा वोलने पर एक सैंकेड भी अपने साथ नहीं रखते।
अब वक्त आ गया है कि अन्ना जी साहस दिखाकर देशभक्तों और धर्मनिर्पेक्षतावादी गद्दारों में से किसी एक को चुनने का साहस दिखाकर अपनी असली मानसिकता का प्रमाण अपने समर्थकों और विरोधियों के सामने रखें।
वरना वो दिन दूर नहीं जब धर्मनिर्पेक्षतावदी गद्दार भारतविरोधी काम कर अन्ना जी के आज तक के वेदाग जीवन पर गद्दारी का ऐसा कलंक लगायेंगे जिसे आने वाली पीढ़ियां कभी माफ नहीं कर पायेंगी।
बैसे भी अन्ना जी आप बढ़े हैं हमारे से ज्यादा दुनिया को समझते हैं आपको ये कभी नहीं भूलना चाहिए कि दो नावों पर सवार होने वाला हमेशा मझधार में ही ढूबा है।
भगवान करे आप अपने मौन ब्रत के दौरान आपसे अनजाने में हुए गलतियों का समाधान देकर अपने देशभक्त समर्थकों को और निरूतसाहित नहीं करेंगे क्योंकि आज देशभक्त नागरिकों व संगठनों को धर्मनिर्पेक्षतावादी ISI ऐजेंटों द्वारा इतने जख्म दिए जा चुके हैं कि वो अब और जख्म बरदाश करने की स्थिति में नहीं हैं। कभी भी-कहीं से भी सम्पूर्ण क्रांति का ज्वालामुखी फूट सकता है।

शनिवार, 15 अक्टूबर 2011

A F Rehman और Raji Raouf, के दुष्प्रचार का खण्डन करने वाले डा. सुब्रमण्यम स्वामी जी के लेख “strategy to combat Islamic terrorism in India” का हिन्दी अनुवाद “भारत में इस्लामिक आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए रणनीति”




shubramanium Swami

खुले पृष्ठ ‘हिन्दू और मुसलिम परिपक्व हैं पर संघ परिवार नहीं।’ के लिेए एक खण्डन लेख।
द हिन्दु समाचार पत्र में में छपे उस अंश का ये खण्डन है जिसका शीर्षक है ‘हिन्दू और मुसलिम परिपक्व हैं पर संघ परिवार नहीं।’ (खुला पृष्ठ ,अगस्त 2011) जो कि खुद को मुसलमानों में उदारवादी सोच का प्रतिनिधि बताने वाले ए फैजुर रहमान द्वारा लिखा गया है।
यद्यपि रहमान द्वारा ये अंश पहले के एक अंश ‘हम मुसलमान परिपक्व हैं हम अलोचना सह सकते हैं’ (“खुला पृष्ठ”,अगस्त 7,2010 के संदर्भ में लिखा गया था। जो कि राजी रौफ द्वारा लिखा गया था क्योंकि राजी रऊफ ने मेरे द्वारा किसी अन्य समाचार पत्र में लिखित खुले पृष्ठ के वारे में दुष्प्रचार किया है इसलिए मेरे लिए ये जरूरी हो गया है कि मैं ‘द हिन्दु’ में रहमान द्वारा लिखित अंश का खण्डन करूं।
रहमान के अनुसार उदारवादी मुसलमान वो हैं जो उनके अनुसार मेरे द्वारा लिखित उत्तेजक लेखों पर प्रतिक्रिया नहीं करते। हालांकि रहमान ये बताने से चूक जाते हैं कि उदारवादी मुसलमानों की उन आतंकवादियों के प्रति क्या प्रतिक्रिया होनी चाहिए जो देश के विभिन्न हिस्सों में हजारों निर्दोष भारतीयों का कत्ल कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त रहमान ये भी नहीं बताते कि उदारवादी मुसलमानों की कशमीरघाटी में 60000 हिन्दूओं का कत्ल कर 500000 हिन्दूओं पर बरबर अत्याचार कर उन्हें अपने घर से बेघर करने वाले आतंकवादियों के प्रति क्या प्रतिक्रिया होनी चाहिए।
रहमान कहता है कि उदारवादी मुसलमान, आतंकवादी मुसलिम संस्थाओं द्वारा हथियार उठाकर डा. सुब्रमण्यम स्वामी सहित सब हिन्दूओं पर हमला करने “take up arms and to let all hell loose (sic).” के उकसावे पर अमल करने के बजाए इस बात से सन्तुष्ट हैं कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने मुझे(डा. सुब्रमण्यम स्वामी) को नोटिस भेजा है। विचार करने के लिए रहमान का धन्यवाद।
लेकिन रहमान की उदारवादी मुसलमान की अवधारणा मात्र एक दिखावा है क्योंकि इसका एकमात्र मकसद इस्लामिक आतंकवादियों द्वारा किए जा रहे बरबर अत्याचारों से लोगों का ध्यान हटाना है। रहमान मुसलिमों को ऐसा कोई उपाए(कदम) नहीं बताते जो उन्हें मौन स्वीकृति त्याग कर हिन्दूओं पर अत्याचार कर रहे जिहादी आतंकवादियों के विरूद्ध उठाना चाहिए। मुझे “बराबर समय सिद्धांत" के अनुसार ये कहने का पूरा अधिकार है कि इस्लामिक आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए मेरे द्वारा लिखे गए खुले पृष्ठ में मैंनें सही तथ्य दिए थे। मेरे कहने का अर्थ है कि आतंकवाद इस्लाम की कत्लोगारद की परम्परा को ही आगे बढ़ा रहा है खासकर जिहाद को।
आतंकवाद हिंसा का वो हथियार है जो अपने राजनीतिक व वैचारिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए संवैधानिक तरीके से चुनी गई सरकार और लोगों को भयभीत करने के लिए आम जनता को निशाना बनाता है।
संयुक्त राष्ट्र सुराक्षा परिषद ने 2004 में “अपराधिक कृत्य” से सबन्धित संकल्प संख्या 1566 में आतंकवाद को इस तरह परिभाषित किया है। आम जनता या लोगों के समूह में या विशेष व्यक्तियों , एक जनसंख्या समूह को दवाव में लाने या एक सरकार को वाध्य करने या अन्तरराष्ट्रीय संस्था को किसी काम को करने या न करने के लिए वाध्य करना।
इसलिए प्रत्येक सरकार का ये कर्तव्य है कि वह सामूहिक या अपने स्तर पर आतंकवादविरोधी ऐसे कड़े कदम उठाए जिससे कि भविष्य में होने वाले हमलों को रोका जा सके । सरकार का ये भी कर्तव्य है कि वो आतंकवादी गतिविधियों को अन्जाम देने वाले लोगों के विरूद्ध मुकद्दमा चलाकर सजा दें। इसके साथ ही आतंकवाद का मुकाबला करना मनावाधिकारों की रक्षा करने और बढ़ावा देने के लिए भी बड़ा खतरा पैदा करता है। इसलिए प्रत्येक देश से ये आहवान किया जाता है कि वे आतंकवाद का खात्मा और मानवाधिकारों की रक्षा करें।इन दोनों के बीच में रैखिक सबन्ध होने के बजाए अरैखिक सबन्ध है। अर्थात ये सत्य नहीं है कि हम मानवाधिकारों का जितना कम बचाव करेंगे आतंकवाद का मुकाबला करने में उतना ही अधिक सफल होंगे। इसका विलोम ये भी सत्य नहीं है कि हम आतंकवाद को जितनी कड़ाई से कुचलेंगे मानवाधिकारों का उतना ही कम पालन होगा। इसलिए हमें एक ऐसी रणनीति बनाकर अमल करने की जरूरत है जिसके अनुसार मानवाधिकरों की रक्षा करने के साथ-साथ मानवता विरोधी आतंकवाद को भी नेस्तनाबूद करने के लिए किए जाने वाले रक्षा उपायों में अनुकूलतम संयोजन किया जा सके। कम होते हुए लाभ का नियम इस प्रक्रिया पर लागू होता है। हमें उपरलिखित प्रक्रिया पर अमल करने की जरूरत है। इसलिए हमने जो लिखा उसका मकसद एक बहस शुरू करना था ना कि हमारे लिखे का कोई दुरूपयोग कर दुष्प्रचार करे जैसा कि रहमान ने किया।
रणनीति
आज मौलिक प्रश्न ये है कि क्योंकि हम भारत में जिहादी आतंकवादी हमलों से दुनिया में सबसे अधिक पीड़ित हैं इसलिए इस्लामिक आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए रणनीति कैसे बनाई जाए?
आतंकवाद से लड़ने के लिए हमारी रणनीति ऐसी नहीं होनी चाहिए जो भविष्य में और अधिक मुसकिलें पैदा न करे। जैसा कि 1989 में रूबिया सईद अपहरण कांड व कंधार में आई-सी—814 विमान अपहरण कांड के दौरान हुआ। ततकालीन NF और राजग सरकारों द्वार आतंवादियों से सौदेवाजी करने के परिणामस्वारूप भारत में आतंकवाद ने और खतरनाक स्वारूप ले लिया। कन्धार में यात्रियों और जहाज के कर्मचारियों के वदले में मौलाना अजहर,उमर कुरैसी और जरगर जैसे दुर्दांत आतंकवादियों को छोड़े जाने के परिणामस्वारूप छुड़ाए गए लोगों से हजारों गुना ज्यादा निर्दोष लोग आज तक मारे जा चुके हैं। इन तीनों कुख्यात आतंकवादियों ने पाकिस्तान पहुंचने के बाद नायकों की तरह अपनी भारतविरोधी आतंकवादी हमलों को आगे बढ़ाया। इन हमलों में 26/11 का मुम्बई हमला भी सामिल है।
इसलिए हमें एक सपष्ट निती की जरूरत है मतलब एक उद्देश्यों को रेखांकित करने वाला सपष्ट घोषणा पत्र जिसमें कि इन उद्देश्यों की प्राथमिकताओं को सपष्टता से परिभाषित किया गया हो, इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए अपनाई जाने वाली रणनीति का खुलासा हो और इन उद्देश्य की पूर्ति के लिए जरूरी आर्थिक,मानवीय और संरचनात्मक संसाधनों को जुटाने की प्रतिबद्धता हो।
हम भारतवासियों में से अधिकतर को इस्लामिक आतंकवाद से मुकाबले के लिए प्रतिरोधक रणनीति की जरूरत है। टैलीविजन चैनलों पर बैठकर धर्मनिर्पेक्ष परजिवी सच्चे इस्लाम को मानबीय और शांतिप्रिए बताकर लोगों को वरगलाने की कोशिश तो कर सकते हैं। परन्तु ये सपष्ट है कि इन धर्मनिर्पेक्ष परजिवीयों में से किसी ने भी ने कुरान,सुरा और हदीश का अधिकारिक अनुवाद नहीं पढ़ा है। इसलिए इस्लाम की सही ब्याख्या करने की बात करने के बजाए, जो लोग खुद को उदारवादी कहते हैं उन्हें इस्लाम के एक ऐसे नए सुधारे हुए स्वारूप की रचना करनी चाहिए जो लोकतान्त्रिक मूल्यों के साथ तालमेल बिठाने का आग्रह करता हो।
इस्लाम में पैगंबर के शब्द अंतिम है।कोई भी सच्चा मुसलमान समस्या की जड़ इन आयतों से अपने आपको अलग नहीं कर सकता और न ही सच्चा मुसलमान ये कह सकता है कि वो समस्या की जड़ कुरान की इन आयतों में सुधार कर इन्हें फिर से लिखेगा। क्योंकि ऐसा करने पर उसे जान बचाने के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ेंगी।
हम हिन्दूओं की स्वभाव से धार्मिक उदारवादी होने की सर्विदित मान्यता प्राप्त परम्परा है। जब भारत 100% हिन्दू राष्ट्र था तब भी हिन्दूओं ने दुनिया के विभिन्न भागों में प्रताड़ित पारसियों,यहूदियों,सिरियाईयों,इसाईयों और ऐहसान फरामोस अरब के मुसलमानों को न केवल शरण दी बल्कि उनका पालन पोषण भी किया। आज ऐहसान फरामोस इस्लामिक आतंकवादियों द्वारा निशाना बनाए जा रहे हिन्दूओं को अपनी रक्षा के लिए एकजुट होकर खड़े होना होगा।
आज 21वीं शताब्दी में हिन्दूओं के लिए संगठित होकर खड़ा होने का क्या मतलब है? अपनी रक्षा के लिए खड़े होने से मेरा मतलब है कि प्रभावशाली प्रतिशोधात्मक कार्यवाही कर देश की रक्षा करने के मुद्दे पर सब हिन्दूओं में पूरी मानसिक स्पष्टता होनी चाहिए।
इस संगठित प्रतिशोधात्मक कार्यवाही में अन्य धार्मिक समूहों का तर्कपूर्ण सहयोग, भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने में लेना भी, इस प्रतिशोधात्मक कार्यवाही का हिस्सा है। इसलिए मैंनें इस बात की वकालत की कि मुसलमानों को, इस सच्चाई जो कि वैज्ञानिक डीएनए आनुवंशिक अध्ययन द्वारा सिद्ध हो चुकी है ,को स्वीकार कर लेना चाहिए कि हम सबके पूर्वज एक हैं और महान हिन्दू संस्कृति हम सब की सांझी विरासत है।
(डा. सुब्रमनियम स्वामी जी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।)

गुरुवार, 13 अक्टूबर 2011

ये गांधीवाद नहीं आतंकवाद है---संदर्भ---इन्द्रवर्मा को लहुलूहान करने वाले गांधीवादियों की पिटाई कितनी उचित?


हम सर्वथा लड़ाई के विरूद्ध हैं खासकर अपने ही देशवासियों के बीच में
लेकिन खुद को गांधीवादी कहने वालों ने इस देश को इतना लहुलूहान कर दिया है कि अब तो इस लड़ाई का समर्थन करने का मन करता है।
1947 में इन गांधीवादियों ने गांधी की पीठ के पीछे छुप कर भारत के तीन-तीन विभाजन करवाकर करोंड़ों हिन्दूओं को अत्याचारी इस्लमिक आतंकवादियों के हाथों बेआवरू होकर तड़प-तड़प कर मरने को छोड़ दिया।
आज जब किसी भी गद्दार को किसी भारतविरोधी षडयन्त्र को अनजाम देना होता है तो वो गांधीवाद की लंगोटी का नकाब ओड़ लेता है।
अभी हाल ही में आपने देखा कि किस तरह 50000 से अधिक देशभक्तों पर इन गांधीवादियों ने लाठियां ,गोलियां चलवाकर शहीद राजवाला जी के प्राणों की आहुती ले ली। इनका बस चलता तो ये गांधीवादी रामलीला मैदान को स्वामी रामदेव जी सहित हजारों देशभक्तों का शमशानघाट बना देते। इनकी गांधीवादी हिंसक मानसिकता का प्रमाण तब भी मिला जब गांधीवादियों ने स्वामीराम देव जी को पत्थर बांध पानी में तब तक डुवोए रखने की बात की जब तक उनके अन्दर प्राण शेष हैं मतलब स्वामी राम देव जी का कत्ल करने की मनसा रखते हैं ये गांधीवादी।
हमें समझ नहीं आ रहा कि ये कैसा गांधीवाद है जो हर वक्त भारतविरोधी आतंकवादियों के हाथों आम देशभक्त निर्दोष जनता का खून बहता देखकर खुश होता है और इन कातिल आतंकवादियों को हर तरह की सजा से बचाने के लिए आए दिन नए-नए बहाने बनाता है तिकड़म लड़ाता।
ये कौन सा गांधीवाद है जो भारत को विभाजित करवाकर विभाजन की विषबेल को फिर से भारत में रखने की मांग उठाकर आज इस विषबेल के पूरे भारत में फैल जाने के बाद भारतीयों का खून बहता देखकर इठलाता है ।
ये कौन सा गांधीवाद है जो भारत के तीन-तीन विभाजन करवाकर पाकिस्तान और बंगलादेश में हर चीज पर पहला अधिकार मुसलिम आतंकवादियों को देकर भारत में भी पहला अधिकार मुसलिम आतंकवादियों को ही देने की मांग उठाता ।
ये कौन सा गांधीवाद है जो भारत को 1000 वर्ष तक गुलाम बनाकर उनका शोषण करने वाले मुसलमानों और ईसाईयों के बच्चों को पाठशाला में प्रवेश करते ही हजारों रूपए की सहायता की देता है और हिन्दूओं के बच्चों द्वारा 80% अंक लेने के बावजूद उन्हें इस तरह की किसी सहायता की गारंटी नहीं देता।
हैरानी तो इस बात की है कि जिन ईसाईयों का आज भी भारत के शिक्षा ढांचे पर अंग्रेजों के साम्राज्यवाद के काल से चला आ रहा कब्जा है उन ईसाईयों को शोषित हिन्दू बच्चों से आगे बड़ाने की वकालत ये भारतविरोधी गांधीवाद करता है।
जिन मुसलमानों ने भारत पर अपने अत्याचारी कब्जे के दौरान हिन्दूओं से जिन्दा रहने के बदले में जजिया कर लिया जो आज भी वन्देमातरम् का विरोध कर खुद को गैर भारतीय बताने पर जोर देते हैं उन मुसलमानों के बच्चों को ये गांधीवाद इन मुसलमानों के अत्याचारी कब्जे के द्वारा प्रताड़ित और शोषित हिन्दूओं के बच्चों का हक छीन कर देने की वकालत ये गांधीवाद करता है।
गांधीवाद की वकालत करने वाले कितने गांधीवादी हैं ये तो आपने कल उस वक्त देख ही लिया होगा जब इन गांधीवादियों ने इन्द्र वर्मा जो कि प्रशांत भूषण की गद्दारी का विरोध कर रहा था को अपने कब्जे में लेकर किस तरह नोकीली चीजें चुभोकर लहुलूहान किया क्योंकि इनका गांधीवाद देशभक्तों का खून बहाकर आगे बढ़ता है।
उस युवक को देखो जो प्रशांत भूषण के भारतविरोधी कुकर्म से पूरी तरह आक्रोशित होने के बावजूद प्रशांत भूषण को कोई ऐसी चोट नहीं पहुंचाता जो उनको शारीरिक नुकसान करती ।
ऐसी ही हरकत इन गांदीवादियों की आपने तब भी देखी होगी जब स्वामी रामदेव जी को कांग्रेस द्वारा गाली-गलौच व अपमानित करने से आक्रोशित एक युवक ने कांग्रेसी प्रवक्ता को जूता सिर्फ दिखाया मारा नहीं वो इस प्रवक्ता(जनरदन द्विवेदी) के इतना नजदीक था कि अगर चाहता तो मार भी सकता था लेकिन बाद में गांधीवादी कांग्रेस के चापलूस गांधीवादी पत्रकारों और गांधीवादी दिगविजय सिंह ने उसे मार-मार कर लहुलूहान कर दिया।
ये कैसा गांधीवाद है जो भारत के सन्तों को ठग और दुनियाभर के कुख्यात इस्लामिक आतंकवादी ओसामविन लादेन को जी कहता है।
ये कैसा गाधीवाद है जो भारत के आम लोगों का धन लूट कर विदेशी बैंकों में जमाकरवाकर भारत को कमजोर करने की जड़ बन जाता है। विरोध करने वालों पर जुल्म ढाहता है
हे भगवान ये कैसा गांधीवाद है जो अफजल जैसे दुर्दाँत आतंकवादी की फांसी को तो वर्षों तक रोकर समाप्त करने की वकालत करता है लेकिन निर्दोष साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को नजायज तरीके से कब्जे में रखकर प्रताडित करने में ही आनन्दित महसूस नहीं करता बल्कि उसे जबरदस्ती फांसी पर चढ़ाने के लिए सुरक्षाबलों पर दबाव बनाने का हर सम्भव प्रयास करता है।
ये कैसा गांधीवाद है जो एक विदेशी के सामने सिर्फ इसलिए नतमस्तक हो जाता है क्योंकि वो अपने नाम के पीछे गांधी लगा लेती है और फिर सारे भारत को उसके हबाले छोड़कर उसे तूटने की खुली छूट देने की वकालत करता है लेकिन अपने ही देश के आर एस एस और भारत स्वाभिमान जैसे देशभक्त संगठनों को कुचलने के लिए हर सम्भव प्रयास करता है।
आओ प्रण करें कि ये गांधीवाद जो भारत को समाप्त करने पर तुला है उस गांधीवाद को हम ही मिलकर समाप्त करने का बीड़ा उठायें ऐसे ही गांधीवादी तरके अपनाकर।
चलते-चलते
मिडीया दुष्प्रचार कर रहा है कि आज अन्ना समर्थकों पर हमला हुआ लेकिन सच्चाई यह है कि हमला अन्ना समर्थकों पर नहीं बल्कि पाकिस्तान समर्थकों पर हुआ है क्योंकि प्रशांत भूषण का विरोध इसलिए नहीं हो रहा कि वो अन्ना जी के साथ क्यों हैं बल्कि इसलिए हो रहा है क्योंकि वो गांधीवाद की लंगोटी ओड़कर भारत के एक और विभाजन की मांग का समर्थन कर रहे हैं जो कि अन्ना जी कभी नहीं कर सकते।
आज जिन लोंगों की पिटाई हुई वो लोग वहां पर भारतविरोधी प्रशांत भूषण के विरूद्ध हो रही नारेबाजी का विरोध कर रहे ते मतलब प्रशांत भूषण के कुकर्म का समर्थन।
हमारे विचार में जो भी भारत के अस्तित्व को खतरा बनने की कोशिश करता है उसके साथ जो भी बुरे से बुरा किया जा सकता है किया जाना चाहिए क्योंकि ये गांधीवाद नहीं भारतविरोध-हिन्दूविरोध-देशविरोध ही नहीं बल्कि मानवता का विरोधी आतंकवाद है…

बुधवार, 12 अक्टूबर 2011

कशमीर पर ISI की भाषा बोलने वाले प्रशांत भूषण की पिटाई को क्या गलत ठहराया जा सकता है?


अभी-अभी दिल्ली सर्वोचन्यायालय परिसर में स्थित प्रशांत भूषण के कमरे में ही उनकी पिटाई prasant.jpg1.jpg6किए जाने का

समाचार आया है। प्रशांत भूषण ने खुद बताया कि पिटाई करने वाले

नौजवान इस बात से नाराज थे कि प्रशांत भूषण ने कशमीर के मसले पर

ISI मतलब पाकिस्तान के रूख का समर्थन किया है।

इससे पहले भी कई बार प्रशांत भूषण इस्लामिक आतंकवादियों के रूख k9का अनुसरण करते हुए सुरक्षा बलों पर हमला बोल चुके हैं।
इतना ही नहीं प्रशांत भूषण अकसर माओवादी कातिलों के समर्थन में भी

खुलकर खड़े नजर आते हैं।

वेशक इस बात के लिए तो आप प्रशांत भूषण को पागलपन के हद तक

बहादुर कह सकते हैं कि भारत में रहकर भारत की ही जड़ों को खोदने वाले

कुकर्म करने के बावजूद खुद को अन्ना जी के भ्रष्टाचार मिटाओ अन्दोलन

से जोड़कर भारत का हितैशी सिद्ध करने का दुहसाहस करने का दम रखते हैं।
फिर भी हम कहेंगे कि अगर प्रशांत भूषण की पिटाई भारतविरोधी कुकर्मों

के लिए हुई है तो किसी भी तरह गलत नहीं ठहराया जा सकता चाहे पिटाई

किसी ने भी की हो लेकिन अगर पिटाई सरकार ने उनके भ्रष्टाचारविरोधी

अन्दोलन से जुड़ने के कारण करवाई है तो इस पिटाई की जितनी भी निन्दा की जाए कम है।

प्रशांत भूषण की पिटाई अगर देशभक्तों ने की है तो सबसे बड़ी चिन्ता का

विषय ये है कि जिन वकीलों पर देश में कानून के आधार पर न्याय करवाने

की जिम्मेदारी है उन्हीं वकीलों ने सिर्फ इसलिए कि पिटने वाला एक

वकील था जो अकसर भारत विरोधी आतंकवादियों की सहायता के लिए

तत्पर रहता है के बदले में प्रशांत के भारतविरोधी रबैए से दुखी युवक के

नाक-मुंह से खून तक निकाल दिया जब कि उन युबकों ने प्रशांत को एक

भी चोट ऐसी नहीं पहुंचाई जिससे कि उनके शरीर को गम्भीर नुकसान हो।

इस घटना के बाद हम दावे से कह सकते हैं कि वो युवक सिर्फ अपना

विरोध दर्ज करवाने के लिए ही आए थे लेकिन प्रशांत, जो कि देशभक्तों से

नफरत की हद तक शत्रुता रखता है ,ने खुद को अपने गढ़ में पाकर उन

युवकों के सामने अपने भारतविरोधी रूख को दोहराकर उनको लड़ाई करने

के लिए उकसाया।
परिणामस्वारूप गद्दारी वाले कुकर्मों की बजह से लोगों के अन्दर पनप रहे

क्रोध को शांत करने के लिए खुद को प्रताड़ित बताकर( जिस काम में

आतंकवादियों के ये मददगार विशेषज्ञता हासिल कर चुके हैं) एक तो लोगों

का क्रोध शांत किया जाए दूसरा भारतविरोधियों की आँखों में हीरो बनकर

और आगे बढ़ा जाए ताकि शायद कोई भारतविरोधी किसी ऐसे इनाम से

नवाज दें जो अकसर भारतविरोधियों को ही दिए जाते हैं
इसीलिए हम ये लेख लिख रहे थे

अन्ना जी सावधान कहीं आपकी टीम में मौजूद

आतंकवादियों के मददगार आपकी मेहनत पर पानी न फेर दें!

लेकिन पूरा होने से पहले ही ये घटना घट गई।

इसमे कोई सन्देह नहीं कि आज भ्रष्टाचार हम सबकी जिन्दगी में जहर

घोल रहा है। हम कांग्रेस द्वारा बिछाए गए चोरी और गद्दारी के जाल में उसी

तरह उलझ गए हैं जिस तरह कांग्रेस द्वारा बिछाए गए फूट चालो और राज

करो के जाल में उलझे हैं। इस सबसे हम बाहर निकलने के लिए छटपटा

रहे हैं। ऐसे में जो भी इस जाल से बाहर निकालने की आश जगाता है हम

उसे अपना मानने लगते हैं। लेकिन हमें ये ध्यान ऱखना होगा कि कहीं

भारतविरोधी कांग्रेस के जाल से बाहर निकलते-निकलते हम हमारे अपने

भारतीयों के कातिल इस्लामिक और माओवादी आतंकवादियों  के जाल में

न फंस जायें।
हम हर तरह से अन्ना जी द्वारा चलाए जा रहे भ्रष्टाचार मिटाओ अभियान

के पक्ष में हैं लेकिन जब तक टीम अन्ना से आतंकवादियों के मददगार

अग्निवेश की ही तरह प्रशान्तभूषण को हटा नहीं दिया जाता तब तक टीम

अन्ना पर आँख बन्द कर भरोसा नहीं किया जा सकता।

आप सोच रहे होंगे कि प्रशान्त ने देश से ऐसी कैन सी गद्दारी की है जो हम

प्रशान्त भूषण को सन्देह की निगाह से देख रहे हैं।

सबसे पहली बात ये कि प्रशान्त भूषण हमेशा उन लोगों के साथ रहे हैं जो

भारत माता की जय और वन्देमातरम् का विरोध करते हैं मतलब भारत

की अखण्डता के बरखलाफ हैं। ये पहली बार है कि भारत माता की जय

और वन्देमातरम् का उदघोष करने वाले लोगों के साथ प्रशान्त भूषण दिखे

बेशक फिर भी भारत माता की जय या वन्देमातरम का एक बार भी नारा

नहीं लगाया। अगर आपने ये उदघोष लगाते हुए कभी देखा हो तो हमें जरूर बताना।
हमें लगा कि अगर एक व्यक्ति हमेशा गद्दारों का साथ देने के बाद आज

देशभक्तों के साथ आने की कोशिश कर अपने पाप का प्रयश्चित कर कर रहा

है तो उस पर अंगुली नहीं उठानी चाहिए ।लेकिन जैसे ही अन्दोलन समाप्त

हुआ ये व्यक्ति फिर से जम्मू कशमीर में जाकर हमारे सुरक्षाबलों के विरूद्ध

जहर उगलने लग पड़ा।
ऐसा नहीं कि इसने ऐसा पहली बार किया है इससे पहले भी ,जब

इस्लामिक देशों द्वारा पाकिस्तान के माध्यम से फैंके गए टुकड़ों के बल पर

हमारे सैनिकों पर पत्थरवाजी को हथियार बनाकर हमला sopore 2करने वाले आतंकवादियों और सुरक्षबलों में से किसी एक का साथ देने का मौका आया था तो इसने इन आतंकवादियोंINDIA_KASHMIR_POLIC_135876e को निर्दोष कहकर आतंकवादियों के प्रति अपनी देशविरोधी मानसिकता का प्रमाण दे दिया था। (R-L) Prashant Bhushan, Yogendra Yadva, Sunil, president, Samajwadi Jan Parishad प्रशांत भूषण अपहरण जैसे संगीन मामलों के आरोपी इस्लामिक अपराधियों के समर्थन में।
prasant   alina sen प्रशान्त भूषण देश से गद्दारी के आरोप में जेल जा चुके माओवादी कातिलों के मददगारों का समर्थन करता हुआ।
prasant   arundhati roy प्रशांतभूषण कशमीर पर पाकिस्तान के रूख का समर्थन करने वाली आतंकवादियों की मददगार अपनी सहयोगी अरूंधती राय के साथ।
आगे देखो ये दोनों आतंकवादियों के मददगार अकसर एक दिखेंगे दोनों

आतंकवादियों से भारत को लहुलूहान करवाने के मुद्दे पर एक राय जो रखते हैं।
prasant   arundhati roy.jpg1prasant   arundhati roy.jpg1.jpg2
prasant in meeting in hydrabadप्रशांत भूषण भ्रष्टाचारविरोधी कार्यक्रम में पहुचने पर।


prasant.3jpgप्रशांत भूषण माओवादी कातिल विनायक सेन के समर्थन मेंprasant.4jpgप्रसांत भूषण सोराबुद्दीन,इशरत जहां जैसे इस्लामिक आतंकवादियों के समर्थन में।prasant 7 प्रशांत भूषण माओवादी सरगना लिंगा के समर्थन में।
मेरे भाई इतना ही होता तो गनीमत थी अब आप अगले चित्र में देखेंगे उस

गौतम नबलखा को जो जो अमेरिका में भारत को बदनाम कर बर्बाद करने

के काम में लगे ISI ऐजेंट गुलामनबी फई का मित्र ही नहीं बल्कि सहयोगी

भी है।मजेदार बात ये है कि इस गद्दार के साथ प्रशांत भूषण की खास सहयोगी अरूंधती राय भी हैg6    g1 अब आप सोचेंगे कि KAC क्या है ये भारतविरोधी गद्दारों के सहयोग से ISI ऐजेंट गुलामनबी फई द्वारा चलाई

गई वो संस्था है जिसका एक मात्र मकसद मिडीया(print &

Electronic) में अपने  ISI ऐजेंटों के सहयोग से देशभक्त संगठनों को

बदनाम कर इसलामिक आतंकवादियों के अनुकूल महौल बनाकर भारत को

लहूलुहान करना  है …
आप आप खुद सोच लो कि इन भारतविरोधियों की कुटाई कितनी सही या

कितनी गलत है या फिर आप खुद फैसला कर लो कि अगर इन गद्दारों में

से कोई आपके हथे चढ़ जाए तो उसके साथ क्या बर्ताब करना चाहिए?

पूरी सूची बहुत जल्द।