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मोदीराज लाओ

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भारत बचाओ
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शनिवार, 25 मई 2013

मित्रो अगर सरकार ने सैनिकों , सिपाहियों और आम जनता को इनसान माना होता तो आज नेताओं का इस तरह कत्ल न होता


मित्रो हमें बहुत दुख है कि बामपंथी आतंकवादियों के प्रखर विरोधी व देशभक्त नेता महेन्द्र कर्मा जी शहीद हो गए वो भी वामपंथी आतंकवादियों के हाथों ।जो वाकी लोग मारे गए उनमें से भी अधिकतर निर्दोष थे जिनका केन्द्र सरकार की आतंकवाद समर्थक नीतियों से कोई बास्ता नहीं था। लेकिन बामपंथी आतंकवादियों का ये कोई पहला हमला नहीं ...इससे पहले भी ये वामपंथी आतंकवादी दर्जनों हमले कर चुके हैं लेकिन इससे पहले इन आतंकवादियों के हाथों एक साथ इतने नेता कभी नहीं मारे गए...इससे पहले वामपंथी आतंकवादियों के हमलों में सबसे ज्यादा सुरक्षा बलों के जवान और आम लोग मारे गए
(अब तक हुए हमले:-17 जुलाई, 2007: करीब 800 हथियारबंद नक्सलियों ने दंतेवाड़ा में हमला किया। 25 मरे, 32 घायल हुए और 250 लोग लापता हो गए।-मार्च 2008 में सांसद बलीराम कश्यप के काफिले पर हमला ।-मार्च 2008 में वन मंत्री विक्रम उसेंडी के काफिले पर हमला।-जुलाई, 2009: राजनंदगांव में 28 सुरक्षाकर्मियों की सुरंग विस्फोट कराकर हत्या।-26 सितंबर, 2009: भाजपा सांसद बलिराम कश्यप की जगदलपुर में हत्या।-अप्रैल, 2010: माओवादियों ने 73 सीआरपीएफ जवानों की हत्या कर दी।-17 मई, 2010: नक्सली धमाके में 14 विशेष पुलिस अधिकारी समेत 35 लोग मारे गए।-अक्टूबर 2011 को विधायक डमरूधर पुजारी के निवास पर धावा ।-जुलाई, 2011 को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल के काफिले पर हमला ।-अक्टूबर, 2011: बस्तर में छह सुरक्षाकर्मियों की हत्या।-जुलाई, 2011: दंतेवाड़ा में 10 पुलिसकर्मियों की हत्या।-अगस्त, 2011: नक्सली हमले में 11 पुलिसकर्मी मारे गए।-जनवरी, 2012 में विधायक भीमा मंडावी के काफिले पर हमला ।-मई, 2012 में महिला बाल विकास मंत्री लता उसेंड़ी के बंगले में हमला ।-अप्रैल, 2012 में संसदीय सचिव महेश गागड़ा के काफिले पर हमला ।-नवंबर, 2012 में पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा के बुलेटफ्रूफ वाहन पर हमला।-12 मई, 2013: सुकमा में दूरदर्शन केंद्र पर हमला। चार जवान शहीद।) ......
अगर हम थोड़ा ध्यान से मुल्यांकन करें तो पायेंगे कि सुरक्षा बलों में भर्ती होने वाले अधिकतर जवान आम आम परिवारों से ही होते हैं ...यही बजह है कि युवराज और महारनी की गुलामी की मानसिकता बाले सेकुलर गद्दारों और मिडीया को ये हमले मामूली  हमले नजर आए ...वरना ऐसे कैसे हो सकता था कि मिडीया और सेकुलर गिरोह 73  जवानों को जिन्दा जलाने की घटना को सबसे बड़ा हमला कहने के बजाए ...12 नोताओं के मारे जाने को सबसे बड़ा हमला कहता...मित्रो अगर सरकार ने सैनिकों , सिपाहियों और आम जनता को इनसान माना होता तो आज नेताओं का इस तरह कत्ल न होता लेकिन बहुत दुख से कहना पड़ता है कि सेकुलर गिरोह ने देशभक्तों को हराने के लिए आतंकवादियों को ही अपना वोट बैंक मान लिया है इसीलिए तो इस गिरोह की सरकार 100000 निर्दोश देशभक्त जनता पर तो रात के अन्धेरे(4 जून रामलीला मैदान) में हमला करवा सकती है लेकिन देश के दुशमन आतंकवादियों के लिए इस सकार की हर तरह की ममता हिलोरे लेने लगती है...आपको याह होगा इसी सरकार के गृहमन्त्री ने भारतविरोधी वामपंथी और इसलामिक आतंकवादियों को अपना भाई बताया था...आपको याद होगा कि दिल्ली में आतंकवादियों को मारने के बाद शहीद होने वाले शहीद मोहनचन्द शर्मा को किस तरह अपमानित किया गया और किस तरह सलमान खुर्शीद के अनुशार मारे गए इसलामिक आतंकवादियों के लिए सोनिया गाँधी फूट-फूट कर रोई....इसी तरह लन्दन में हिथरो हबाई अड़्डे पर हमले के आरोप में पकड़े गए इसलामिक आतंकवादी की  मनमोहन सिंह को इतनी चिन्ता हुई कि उसे सारी रात नींद न आई...आम लोगों से गद्दारी यहीं रूक जाती तो गनीमत थी ...लेकिन देश से गद्दारी नहीं रूकी आपको याद होगा कि जब छतीसगढ़ सरकार ने वामपंथी आतंकवाद के मास्टर मांईड विनायक सेन को पकड़ा और उस पर देशद्रोह का मुकद्दमा चलाया तो सारे सेकुलर गिरोह ने एकजुट होकर उसको छुडवाने के लिए जोर लगा दिया और केन्द्र सरकार के सहयोग से उसे छुड़वाने में सफलता भी हासिल कर ली...मित्रो हद तो तब हो गई जब इस वामपंथी आतंकवादी विनायक सेन को सोनिया गांधी ने अपनी सलाहकार परिषद में सामिल कर लिया मतलब उस परिषद में जिसके ईसारे पर केन्द्र सरकार काम कर रही है अब जब सरकार ही आतंकवादियों के इसारे पर काम करेगी तो वो आतंकवादियो की तरह देशभक्त लोगों पर हमला वोलेगी और आतंकवादियों का बचाब करेगी ...वही हो रहा है आतंकवादियों के हमले में मारे गए कांग्रेसियों व उनके परिजनों की मुसीबतों के लिए आतंकवादियों को अपना मित्र बनाने वाली सोनिया गाँधी है न कि कोई और...आपको याद होगा कि जब गृहमन्त्री P Chidambaram वामपंथी आतंकवादियों से निपटने के लिए योजना लागू करने लगे तो किस तरह दिगविजय सिंह जैसे सोनिया गांधी के समर्थकों ने उनकी योजना की सार्वजनिक रूप से अलोचना कर उस पर दबाब बनाकर उसे रूकवा दिया ...इसी तरह राज्य सरकार द्वारा जब कभी भी आतंकवादियों के बिरूद्ध कार्यवाही की गई तो बजाए सरकार के साथ खड़े होने के सोनिया गांधी आतंकवादियों के साथ खड़ी हो गई...आप सबको पता होगा कि पिछले 9 वर्षों में जिस किसी ने भी आतंकवादियों को मारा या फिर आतंकवादियों के बिरूद्ध जुवान खोली वो सब आज जेल में हैं हैरानी की बात तो ये है कि आतंकवादियों को मारने वाले सैनिकों तक को न बख्सा गया...पुलिस की तो ताकत ही क्या है...और साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर जैसे लोगों जो आतंकवादियों के बिरूद्ध सिर्फ बोलते थे  तक को जेलों में बन्द कर दिया...आगे भी कोई आतंकवादियों भारतविरोधियों के बिरूद्ध न वोल सके इसका पक्का प्रबन्ध करने के लिए Communal Violence Act 2011 लाया गया...Encounter Specialists तक को न बख्सा गया...आज मोदी जी को छोड़कर सतापक्ष और विपक्ष में एक भी बड़ा नेता ऐसा नहीं जिसका खौफ आतंकवादियों को हो क्योंकि SAUDI ARBIA & US  से मिलने वाले DOLLAR  से मालामाल होकर सबकेसब नेता सेकुलर(भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी) हो लिए...अब तो लगता है चीन ने भी इनकी जेबें बरना शुरू कर दिया है ...मित्रो बुरा न मानना यही बास्तविकता है कि गाँधीबाद और धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में इन सब सेकुलर नेताओं ने भारत की समस्याओं को इस हद तक उलझा दिया है कि अब हालात गृहयुद्ध की तरफ तेजी से बढ़ते जा रहे हैं और अगर इन सेकुलर गद्दारों को न रोका गया तो सब भारतविरोधी आतंकवादी एकसाथ हमला वोलकर भारत में कुछ भी करने की ताकत हासिल कर चुके हैं इसका सबसे बड़ा प्रमाण है राहुल विन्शी का दोस्त अकबरूद्दीन ओबैसी जो बारबार खुलेआम कह रहा है कि हमारी पार्टी वेशक छोटी है लेकिन हमने पूरे भारत को बम धमाके तरके हिला दिया है और हम जब चाहें तब हिन्दूओं का कत्ल कर भारत को खत्म कर दें ..मजेदार बात ये कि इसके बाद भी ये आतंकवादी जेल में होने के बजाए अपनी विधानसभा और लोकसभा सदस्यता बरकरा रखते हुए खुलेआम घूम रहे हैं .....बैसे भी 16 लाख सेना वाली सरकार जिस आतंकवादी के साथ खड़ी हो जाए उस आतंकवादी को कौन हाथ डाल सकता है...मित्रो 16 लाख की सेना वाली ये सरकार जब आतंकवादियों के बिरद्ध खड़ी हो जाएगी तब आतंकवादियों और उनके समर्थकों का नमोनिसान तक वाकी न बचेगा...एकवार सच्चे देसभक्त को चुनकर तो देखो

गुरुवार, 2 फ़रवरी 2012

चोरों और गद्दारों की सरगना की लूट पर चला माननीय सर्वोच्च न्यायलय का हथौड़ा…धड़ाम…धड़ाम…धड़ाम…

आओ सबसे पहले अपनी सेवा के अन्तिम दिन सेवा के बाद मिलने वाले किसी भी पद के लालच को त्याग कर न्याय व देशहित में फैसला सुनाने वाले Justice A K Gaungly जी को प्रणाम करते हुए A_K_GANGULY_1
आगे भरोसा रखें कि Justice G S Singhvi न्याय व देशहित की इस कड़ी को इसी तरह आगे बढ़ाते रहेंगे…G. S. Singhvi
आज देश में चोरों और गद्दारों की सरगना सोनिया गाँधी उर्फ एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो ,इसके सपोले राहुल विन्शी व इनके गुलामों द्वारा मचाई गई लूट और गद्दारी से   पैदा हुए अविश्वास के महौल में माननीय सर्वोच्च न्यायालय एक के बाद एक ऐसे फैसले सुना रहा है जो भारत की देशभक्त जनता में संयम पैदा करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं वरना तो आज देशभक्त जनता इस कदर आक्रोशित  है कि न जाने कब देश उस आग में झुलस जाए जिस आग में कभी नहीं झुलसा। मतलब कभी भी देश की जनता हथियार उठाकर इस भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी सरकार में व बाहर बैठे लुटेरों और गद्दारों को मौत के घाट उतारने पर मजबूर हो सकती है।
देशभक्त जनता में आक्रोश का सबसे बड़ा कारण है भारत की सत्ता पर काबिज भारतिरोधी-हिन्दूविरोधी लुटेरों की वो गैंग जो चोरी और गद्दारी करने के बाद देशभक्तों को झूठे मुक्द्दमों में फंसाकर न केवल बदनाम कर रही है वल्कि जेलों में डालकर यातनायें भी दे रही है।
मतलब चोरी और सीना जोरी की कहाबत इस इटालियन लुटेरी व इसके गुलामों पर पूरी तरह चरित्राथ होती है।आप सब जानते हैं कि इस लुटेरी की लूट के बिरूद्ध अन्दोलन खड़ा कर रहे डा. सुब्रामणम  स्वामी जी dr subraपर किस तरह भड़काऊ लेख लिखने का झूठा मामला दर्ज कर दिया गया  । जबकि इस लेख में सब भारतीयों को उनके खून के रिस्ते के आधार पर एकजुट कर भारत को अपना नहीं मानने वाले विदेशियों को अलग-थलग कर उनके लिए परमिट सिस्सटम लागू करने की बात कही गई है।  इसमें कहीं भी हिन्दू-सिख-मुसलिम-ईसाई के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया गया है। इसमें साफ कहा गया है कि जिनकी रगों में भारत का लहू दौड़ रहा है व जिनकी बफादारी भारत के प्रति है वो सब इस भारत के बराबर दर्जे के नागरिक हैं लेकिन जिनकी रगों में भारत का लहू नहीं दौड़ रहा है व जो फार्मभरकर नागरिकता प्राप्त कर इस देश को हिंसा ,आतंकवाद व अलगाववाद की आग में धकेल रहे हैं वो कतई यहां किसी भी अधिकार के काविल नहीं। अधिक जानकारी के लिए इस लेख का हिन्दी अनुबाद यहां पढ़ें।
यहँ हम डा. सुब्रामणियम स्वामी जी व उनके समर्थकों से अपील करते हैं कि वो सब डा. स्वामी जी की रक्षा के लिए हर सम्मभव प्रयास करें क्योंकि स्वामी जी पर कभी भी भारत की दुशमन सोनिया गाँधी उर्फ एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो व इसके गुलामों द्वारा कभी भी हमला करवाया जा सकता है जिस तरह कुछ महीने पहले दिल्ली में डा. स्वामी जी के घर पर करवाया गया था। यही सब कदम स्वामी रामदेव जी व उनके समर्थकों को भी उठाने की जरूरत है क्योंकि जो काँग्रेस 25 लाख देकर स्याही फैंकवा सकती है वही काँग्रस करोंड़ों रपए देकर स्वामी जी को कतल भी करवा सकती है..
आप अच्छी तरह से जानते हैं कि इस लुटेरी सोनिया गाँधी उर्फ एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो द्वारा देश को लूटकर विदेशों में जमा करवाय जा रहे कालेधन को राष्ट्रीय सम्पति घोषित करने की मांग उठाने वाले सन्त स्वामी रामदेब जी पर किस तरह इसी गुलाम सरकार ने NGO के वहाने  25 लाख रूपए देकर,  मुसलमान से स्याही फैंकवाकर स्वामी जीSwami ji.jpg3 की जुवान बन्द करने की कोशिश।
ये विलकुल बैसी ही घटना है जैसी उस वक्त घटी थी जब चर्च ने एक मुसलिम रसोयिए के माध्यम से प्रखर देशभक्त  लालबहादुर शास्त्री जी Lal Bhadur Shastri jiको जहर देकर मरवा दिया गया व उनका पोस्ट मार्टम तक नहीं होने दिया गया।ऐसा नहीं कि स्वामी जी पर भारत के दुशमनों का ये पहला हमला था । इससे पहले भी भारत की ही ताकत का प्रयोग कर इन लुटेरों और गद्दारों ने स्वामी जी को रामलीला मैदान में मरवाने की कोशिश की थी।
चर्च द्वारा सोनिया गाँधी उर्फ एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो को कांग्रेस अध्यक्ष बनाकर देश को गुलाम बनाने के लिए किए गए कतलयाम के वारे में यहां पढ़ें http://samrastamunch.blogspot.in/2010/09/6.html
उधर आप जान चुके हैं कि भ्रष्टाचार के विरूद्ध अन्दोलनरत रहने वाले अन्ना जी Anna jiको डाकटरों के माध्यम से गलत दबाईयां दिलवाकर चुनाबों के दौरान खामोश करने की किस तरह कोशिश की गई। अब कोशिश चुनाबों तक खामोश करने की थी या फिर हमेशा के लिए ये तो आप खुद समझ सकते हैं। आपकी जानकारी में होगा ही कि अन्ना जी को खामोश करने की कोशिश करने वाले को पदमभूषण नाम का सरकारी इनाम भी दे दिया गया। हैरानी की बात तो ये है कि उस औषधालय से बाहर आने के तीन दिन बाद ही आज अन्ना जी को दिल्ली के मेदांता औषधालय से स्वस्थ होने पर छुट्टी मिल गई।  जरा सोचो अगर स्वामी जी ने प्रश्न न खड़े किए होते और अन्ना जी उसी औषधालय मे ही रहते तो क्या होता..,
अभी हाल ही में सोनिया गाँधी को बिदेशी खतरा बताने वाली व मोदी जी को अपने सपथ समारोह में सामिल कर अपनी प्रखर देशभक्ति का परिचय देने वाली मुख्यमंन्त्री जयललिताJ jaylalita को उसी की सहयोगी शशिकला के माध्यम से धीमा जहर देकर मरवाने की कोशिश कर वहां पर चर्च ने इस इटालियन लुटेरी के अनुकूल सरकार बनबाने की असफल कोशिश की।चर्च किस, तरह इस्लामिक आतंकवाद समर्थकों को उपयोग कर मोदी जीModi ji को लगातार बदनाम करने की कोशिश कर रहा है उस सबसे तो आप परिचित ही हैं।

इसी वक्त भारत के विशिष्ट नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष जी. माधवन नायरG Madhban nair व उनके सहयोगी विज्ञानिकों को भी काली सूची में डालकर अपमानित कर वाकी विज्ञानिकों को निरूत्साहित करने का षडयन्त्र अमल में लाया गया। बजह यहां भी साफ है कि इन विज्ञानिकों ने इस लुटेरी द्वारा अपने गुलाम प्रधानमन्त्री के माध्यम से देवास-एंट्रिक्स सौदे के नाम पर मचाई गई लूट को दुनिया के सामने लाकर इस लुटेरी के भारतविरोधी ष़डयन्त्र को वेनकाब कर दिया। आपको याद होगा कि अमेरिका जो कि भारतीय विज्ञानिकों द्वारा की जा रही खोजों से घृणा करता है वो अक्कसर विज्ञानिक क्षेत्र में भारत के विकाश को रोकने के लिए ऐसे कदम उठाता रहा है वही काम ये इटालियन अंग्रेज के गुलाम भी कर रहे हैं। भारतविरोधी सरकार के इस कदम से दुखी होकर माधवन जी ने कहा, “मैं वर्तमान सरकार के अंतर्गत किसी भी संगठन , पद या समिति के लिए काम नहीं करना चाहता, लेकिन यह अन्यायपूर्ण है। किसी निरंकुश और सैन्य शासन में भी काली सूची में डाले गये लोगों को एक मौका दिया जाता है, लेकिन मुझे तो यह मौका भी नहीं दिया गया है। मैं सकते में हूँ।”Scientists
उधर कशमीर में इस्लामिक आतंकवादियों व उतरपूर्व में ईसाई आतंकवादियों  को भारतीय सैनिकों पर हमला करने की सुविधा देने के लिए इस विषकन्या की गुलाम सरकार द्वारा AFSPA हटाकर  सेना को कमजोर करने के लिए की जा रही कोशिशों का पूरी तरह विरोध करने वाले सेनाध्यक्ष वी के सिंह जीVks ji को एक वर्ष पहले ही पद से मुक्त कर आनेवाले सेनाध्यक्षों पर इस विदेशी की गुलामी करने के लिए दबाब बनाने के लिए षडयन्त्र रचा गया ।जिसपर मानीय न्यायालय कल सुनवाई करेगा। भगवान करे ये भारतविरोधी सरकार माननीय न्यायलय को भ्रमित करने में सफल न हो और माननीय न्यायलय सरकार द्वारा अपनाई जा रही भारतविरोधी नीति को एकवार फिर वेनकाब करने में सफल हो।
अपने दिल पर हाथ रखकर सोचो कि भारत की ऐसी कोन सी संवैधानिक संस्था है जिस पर इस सरकार ने हमला नहीं किया मामला चाहे CAG(After 2g Scandal) से जुड़ा हो या चुनाब आयोग(After ban on 4.5 reservation  ) से या फिर भारतीय सेना(After Support to AFSPA) से या फिर संविधान (Constitution bans reservation on religion basis)से या फिर माननीय सर्वोच्च न्यायल (Whenever forced govt to corect antinational policies)से या AIIMSDr P venugopal या फिर किसी और संवैधानिक संस्था से ,जिस भी संवैधानिक संस्था ने इस भारतविरोधी सरकार को लूट और गद्दारी से रोका है उसी संस्था पर इस गुलाम सरकार ने हमला वोल दिया है..
इसी तरह अपनी तार्किक बुद्धि पर जोर देकर सोचो कि ऐसा कौन सा देशभक्त वयक्ति या संगठन है जिसने इस सरकार के बुरे कामों पर अंगुली उठाई हो और सरकार ने उसे बदनाम करने या फिर फंसाने के लिए सरकारी संस्थाओं का दुरूपयोग न किया हो। 
अन्त मे ये भी सोच लो कि क्या कभी आपने किसी देसबक्त सरकार को अपनी ही संवैदानिक सेनाओं से लगातार युद्दरत रहते हुए देख है अगर नहीं तो सोचो ऐसा क्यों हो रहा है?
क्योंकि आज एक इटालियन अंग्रेज  सोनिया गाँधी उर्फ एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो  गुलाम राष्ट्रपति,गुलाम प्रधनमन्त्री,गुलाम गृह व रक्षामन्त्री के बाद हर संवैधानिक संस्था पर अपना गुलाम विठाकर भारत के मूल निवासियों को उनके अधिकारों से वंचित कर भारत को बर्बाद करना चाहती है क्या आप ऐसे ही ये सब होने देंगे या फिर इस लुटेरों की सरगना को देशभकक्तों के साथ मिलकर सबक सिखाने के लिए जरूरी कदम उठायेंगे….

रविवार, 8 जनवरी 2012

करण थापर जी का कहना है कि भारतीय सेना गद्दार राजनीतिज्ञों से घृणा करती है…

हम बहुत वार पहले भी कह चुके हैं कि वर्तमान सरकार गद्दारी और चोरी के रास्त पर आगे वढ़ते हुए हर देशभक्त को अपना दुशमन मानने लग पड़ी है।
आज भारत में जो भी देशभक्ति की आबाज बुलन्द करता है वही सरकार को अपना असली शत्रु नजर आने लगता है-- देशभक्ति की आबाज बुलन्द करने वाला चाहे स्वामी राम देव हो या फिर अन्ना हजारे या फिर वापु आशा राम या फिर श्री-श्री रविशंकर या फिर राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ …सबके सब आज वर्तमान सरकार के निशाने पर सिर्फ इसलिए हैं क्योंकि इनमें से किसी ने इस चोरों और गद्दारों की सराकर को देश को लूटने से रोका है तो किसी ने इस सरकार को अमेरिका के इसारे पर धर्मांतरण को बढ़ाबा देने से राका है तो किसी ने इस सरकार को पैट्रो डालर के बदले भारतीयों के अधिकार छीन कर गैर भारतीयों को देने से रोका है --- और किसी ने इस सरकार को देश के गद्दारों द्वारा देश को लूट कर विदेशों में जमा करवाए गए काले धन को बापस लाने के लिए बाध्य करने की कोशिश की…इस काले धन में सबसे बड़ा हिस्सा इस सरकार को गुलाम वनाकर बैठी लुटेरों और गद्दारों की सरगना एडवीज अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी का है।
आज देशभक्तों के प्रति इस सरकार की घृणा इस हद तक बढ़ चुकी है कि अब इसे भारतीय सेना भी अपनी शत्रु नजर आने लगी है। अपनी इसी घृणा के चलते ,इस्लामिक आतंकवादियों की ट्रेनिंग सैंटर बन चुकी मस्जिदों की सूची देने वाले, लैपंटीनैंट कर्नल पुरोहित को इस सरकार ने जेल में डाल दिया।
इसी घृणा के चलते इस सरकार ने आते ही देश की रक्षा के लिए शहीद होने वाले जवानों के परिवारों  को मिलने वाली सहायता को कम कर दिया।
देशभक्तों से इसी गृणा के चलते इस गद्दारों की सरकार ने जम्मू-कशमीर में इस्लामिक आतंकवादियों को मारगिराने वाली पूरी बटालियन को ही उनके कमांडर सहित बर्खास्त कर दिया।
देशभक्तों से इसी घृणा के चलते इस सरकार ने सेना में फूट डलवाकर विभाजन करवाने के लिए सेना में सांप्रदायिक आधार पर गणना करवाने का आदेश दिया।
देशभक्तों से इसी घृणा के चलते इस सरकार ने  देशभक्त जवानों के कातिल अफजल की फांसी को मानीय सर्वोच न्यायालय के आदेश के बाजजूद आजतक रोककर रखा।
देशभक्तों से घृणा के परिमास्वारूप ही ये सरकार एक कर्मठ व प्रखर देशभक्त जनरल वी के सिंह जी को उनके तय समय से एक वर्ष पहले ही घर भेजने के षडयन्त्र कर रही है।
बजह साफ है क्योंकि जनरल वी के सिंह जी ने सरकार के दबाब के आगे न झुकते हुए सरकार द्वारा भारतीय सेना को कमजोर करने के लिए किए जा रहे षडयन्त्रों का डटकर विरोध किया है।
मामला चाहे भ्रष्टाचार विरोधी अन्दोलन का हो या फिर जम्मू कशमीर में भारतीय सेना के हाथ कमजोर कर आतंकवादियों को फायदा पंहूचाने का हो  ---हर जगह जनरल वी के सिंह जी ने देश का साथ दिया ।
अब ऐसा कैसे हो सकता है कि अन्तराष्ट्रीय इस्लामिक आतंकवादी ओसामाविन लादेन को ‘'जी’ व देशभक्त अन्दोलन के प्राण स्वामी रामदेव जी को ‘'ठग’ कहने वाली लुटेरों और गद्दारों की सरकार, जनरल वी के सिंह जैसे प्रखर देशभक्त को सेनाध्यक्ष जैसे ताकतवर पद पर रहने दे --क्या पता कब जनरल सरकार की गद्दारी से तंग आकर गद्दार राजनीतिज्ञों को अपने देशभक्त सैनिकों के हाथों उनके किए की सजा दिलवा दें…  VK Singh ji.jpg 1 
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शनिवार, 24 दिसंबर 2011

चोरों-लुटेरों और गद्दारों की भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी सरकार का असर अब रूस में भी।

bhabat geeeta 2जैसा  कि आप सब जानते हैं कि रूस के साइबेरिया प्रांत के तोमसक शहर में चर्च ने स्थानीय न्यायालय में भारत की प्राण श्रीमद भगवत गीता पर प्रतिबन्ध लगाने के लिए न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लिया है।दुनिया भर में गैर ईसाईयों का खून बहाने वाले, चर्चों में बच्चों का यौन शोषण करने वाले, नारी को उपभोग की बस्तु मानकर उसको प्रताड़ित करने वाले व गैर ईसाईयों को ईसाई वनाने मतलब धर्मांतरण के लिए हर तरह के मानबीय मूल्य का खून करने वाले चर्च ने न्यायालय में मानबता की रक्षा की गारंटी श्रीमद भगवत गीता को उग्रवादी सहित्य बताया है ।Bhagbat Geeta.jpg 1
चर्च द्वारा की गई इस घिनौनी हरकत का हमें क्या जबाब देना चाहिए इसपर चर्चा तो हम अगले लेख में करेंगे लेकिन आज हम उन सेकुलर गद्दारों (कुछ सेकुलर गद्दारों की सच्चाई यहां पढ़ें।) की चर्चा करेंगे जिनके भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी कुकर्मों की बजह से भारत को ये दिन देखने पड़ रहे हैं।
हम सब जानते हैं कि किस तरह भारतविरोधी ताकतों ने  चर्च की ऐजेंट एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी को भारत में plant कर भारत को तबाह करने का षडयन्त्र रचा । आप इस बात से भी परिचित हैं कि किस तरह 2004 से भारत में इस  विदेशी ऐजेंट की गुलाम सरकार एक के बाद एक ऐसा काम कर रही है जिससे हिन्दूओं को कमजोर व बदनाम किया जा सके।
जहां एक तरफ ये चोरों की सरगना एंटोनिया भारत को लूट कर सारा धन विदेशों में जमा करवाकर भारत को आर्थिक रूप से कमजोर कर रही हैं वहीं दूसरी तरफ इसकी गुलाम सरकार एक तो चोरों के बिरूद्ध आबाज उठाने वाले स्वामी राम देब जी व अन्ना जी जैसे देशभक्तों पर जुल्म ढा रही है वहीं दूसरी तरफ हिन्दूओं के अधिकारों को छीनकर गैर हिन्दूओं के हबाले कर हिन्दूओं के बच्चों के पेट पर लात मार रही है।
इतने से भी जब  इस भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी  सरकार का मन नहीं भर रहा है तो  संसार को शांति का पाठ पढ़ाने वाले हिन्दूओं को ही ये सरकार आतंकवादी करार देकर असली आतंकवादियों को बचाने का काम कर रही है।Bhagbat Geeta
जहां एक तरफ ये भारतविरोधी सरकार भारतविरोधी आतंकवादियों को जेलों से छोड़कर उन्हें लाखों रूपए दे रही है वहीं दूसरी तरफ ये हिन्दूविरोधी सरकार निर्दोष हिन्दूओं व सैनिकों को विना किसी प्रमाण के जेलों में रखकर न केवल उन्हें प्रताड़ित कर रही है वल्कि  हिन्दूओं को  उग्रवादी करार देकर सारे संसार में बदनाम भी कर रही है।
इस बिदेशी की गुलाम भारतविरोधी –हिदूविरोधी सरकार के दुष्प्रचार का ही परिणाम है कि आज रूस में भारत की प्राण श्रीमद भगवत गीता को उग्रवादी सहित्य करार देकर उस पर प्रंतिबन्ध की तैयारी है।

गुरुवार, 22 दिसंबर 2011

मुसलिम आरक्षण के विना आप लोकपाल के वारे में सोच भी कैसे सकते हैं?

आज हमारे बहुत से भ्रष्टाचार विरोधी भारतीय सिर पर हाथ रखकर रो रहे हैं कि उन्होंने किससे पंगा ले लिया है। कुमार विस्वास जी की स्थिति को देखकर तो ऐसा ही लगता है।इन भ्र्ष्टाचार विरोधियों ने वो ख्वाब देखा है जिसकी कल्पना आज तक किसी ने भी नहीं की थी। इन भ्रष्टाचार विरोधियों ने सोचा कि आज तक कांग्रेस द्वारा जाति-सांप्रदाय- भाषा-क्षेत्र-के आधार विभाजित भारतीयों को वो  भ्रष्टाचार के मुद्दे पर एक साथ लाकर पहले मुगलों, फिर अंग्रेजों और  अब काँग्रेस द्वारा संचालित फूट डालो और राज करो के षडयन्त्र को हमेशा के लिए खत्म कर देंगे।
लेकिन आज काँग्रेस ने  फूट डालो और राज करो का वो दांव खेला जिसका इन भ्रष्टाचारविरोधियों के पास अभी तक कोई तोड़ नहीं दिखता।
जो मिडीया कल तक लोकपाल पर चर्चा को वेचैन था वही मिडीया आज इस्लामिक आरक्षण पर जमकर बहस करवा रहा है क्योंकि सरकार ने काले धन से संचालित मिडीया को भी जोकपाल विल की परिधि में रखा है। मिडीया की इस दुखती रग को छूने का जिम्मा एंटोनिया ने सौंपा था लालू प्रसाद यादब को ।जिसे लालू ने बखूबी निभाया भी।
यही नहीं लालू ने सब भ्रष्ट सांसदों का समर्थन उन्हें व सब लुटेरों की सरगना एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो को होने का दाबा भी किया।
कुल मिलाकर आज जब भारत में ISI  +KGB + CIA के ऐजंट मिलकर सरकार चला रहे हों तो हमारी खोपड़ी में ये नहीं बैठता कि कोई भी समझदार व्यक्ति ऐसी भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी सरकार से भारत हित की उम्मीद भला कैसे कर सकता है?
इन भ्रष्टाचारविरोधियों के नेताओं स्वामी जी व अन्ना जी को सोचना चाहिए कि इन्होंने किस आधार पर भ्रष्टाचार व गद्दारी की जननी कांग्रेस से ऐसी उम्मीद कर डाली जो अन्तोत्वगत्व कांग्रेस के ही बिनाश का कारण बन सकती है।
क्या अन्ना जी व स्वामी जी को नहीं पता कि आज के प्रधानमन्त्री वही कर रहे हैं जो उन्हें बिदेशी विषकन्या एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो से आदेश मिल रहे हैं।
चलो मान लेते हैं कि ये सरकार  KGB + CIA की बातें ताकतबर देशों के दबाब में मान रही है लेकिन अगर ये सरकार गद्दारों की नहीं तो फिर ये पाकिस्तान जैसे बिफल इस्लामिक रिपबलिक की ऐजेंसी ISI के इसारे पर क्यों काम कर रही है?
अभी हाल ही में अमेरिका में पकड़े गए ISI सरगना गुलामनबी फई ने अमेरीकी कोर्ट में इस सरकार के कई मन्त्रियों के साथ सबन्ध होने की बात कबूली है। यही नही आरेप हरीश खरे पर भी लगे हैं हरीश खरे प्रधानमन्त्री के मिडीया सलाहकार हैं। वेशक हरीश खरे ने ISI के साथ किसी भी तरह के सबन्ध होने से मना किया है । बैसे हम भी अभी तक हरीश खरे के विरूद्ध कोई प्रमाण नहीं ढूंढ पाए हैं लेकिन अगर FBI की जांच में हरीश खरे का नाम आया है तो इसे नकारा भी नहीं जा सकता ।
हरीश खरे के निजी तौर पर सबन्ध हों या न हों इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्यों वो जिस प्रधानमन्त्री के मिडीया सलाहकार हैं वो ही भारतविरोधी ISI ऐजेंट की तरह काम कर रहा है।
ISI के आदेश पर ISI ऐजेंट राजेन्द्र सच्चर को सचर कमेटी का अध्यक्ष बनाकर ISI के देशविरोधी-हिन्दूविरोधी षडयन्त्रों को वैधानिक दर्जा दिलवाने के लिए रिपोर्ट तैयार करवाना, (अधिक जानकारी के लिए यहां पढ़ें)  ISI के आदेश पर दलीप पांडगौंकर+राधा कुमार जैसे ISI ऐजेंटों को कशमीर पर ISI के षडयन्त्रों को बैधानिक दर्जा दिलवाने के लिए कमेटी का सदस्य बनाना, शर्म अलसेख में पाकिस्तान के साथ एक ऐसे घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करना जिसके अनुसार भारत को पाकिस्तान के बलूचीस्तान में आतंकवाद के लिए दोषी ठहराया गया ,भारत के संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का,मुसलिम बहुल जिलों के विकाश की बात कर मुसलमानों को अपनी जनसंख्य बढ़ाने को उकसाना,सुरक्षाबलों को आतंकवादी घटना के बाद इस्लामिक आतंकवादियों के विरूद्ध कार्यवाही न करने को कहना,पाठशाला में प्रवेश लेने पर मिलने वाली छात्रवृति को सिर्फ गैर हिन्दूओं तक सीमित करना यहां तक कि SC,ST,OBC के बच्चों को भी वन्चित करना, हिथरो हबाई अडडे पर बम धमाका करने वाले इस्लामिक आतंकवादी के पकड़े जाने पर प्रधानमन्त्री को नींद नहीं आना और रामलीला मैदान में निर्दोष देशभक्तों पर हमला करवाना व उसे जायज ठहराना, CBI का दुरूपयोग कर इसरत जहां व सोराबुद्दीन जैसे दुर्दांत आतंकवादियों को मार गिराने वाले जवानों को जेलों में ढलवाना , सांप्रदायिक हिंसा विल के माध्यम से मुसलमानों व मुसलिम आतंकवादियों के हर अपराध के लिए हिन्दूओं को दोषी ठहराने का षडयन्त्र रचना,सेना को सांप्रदायिक आधार पर बांटने का षडयन्त्र रचना जैसे कुकर्म कोई देशभक्त भारतीय तो कर नहीं सकता न ही करवा सकता है ऐसे भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी काम तो भारत का शत्रु यानी ISI ऐजेंट ही कर/करवा सकता है। (हम अच्छी तरह जानते हैं कि मनमोहन में इतना साहस नहीं कि वो देश से इतनी बढ़ी गद्दारी करे जिसके परिणामस्वारूप देश का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है लेकिन प्रधानमन्त्री बने रहने के लालच में एक विदेशी विषकन्या के इसारे पर भारत का सर्वनाश करने के षडयन्त्र रचने के अपराध से इस भारतविरोधी को मुक्त नहीं किया जा सकता।)
अब आप ही बताओ ऐसे हालात में  मुसलिम आरक्षण के विना आप लोकपाल के वारे में सोच भी कैसे सकते हैं?

बुधवार, 21 दिसंबर 2011

Networking Sites पर पावंदी की ओर सरकार के बढ़ते कदम…

जैसा कि आप सब जानते ही हैं कि आजकल कांग्रेस के कुछ गुलाम मानसिकता के सिकार नेता अपनी आका एटवीज एंटोनिया अलवीना माइनो व इस्लामिक आतंकवादी हजरत मोहम्द की असलियत को ब्यान करती तसवीरों को लेकर इतने बौखला गए हैं कि इस बौखलाहट में वो भूल चुके हैं कि उनके द्वारा किया जा रहा Networking Sites का विरोध उनको नय उबरते तालिवानियों  के रूप में सारे संसार के सामने ला रहा है।
यह वही कांग्रेस है जो भारतीय संस्सकृति के हर अपमान को अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का नाम देकर हमेशा ईसाई व इस्लामिक भारतविरोधियों के समर्थन में खड़ी नजर आई।
बैसे कांग्रेस के भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी रबैए को देखते हुए किसी को हैरानी नहीं होनी चाहिए लेकिन हमें फिर भी उस वक्त बहुत हैरानी हुई जब मानबता के कातिल आतंकवादी ओसामाविन लादेन को ओसामा जी कहने वाली कांग्रेस ने भारतीय संस्कृति के ध्वजबाहक व सचे सन्त स्वामी रामदेव जी को ठग कहकर अपमानित किया और भ्र्ष्टाचार के घोर विरोधी अन्ना जी को नीचे से उपर तक आपतिजनक शब्दों  में भ्रष्ट बताकर अपमानित किया।
तब इन गुलाम कांग्रेसियों को ये होश नहीं आया कि इन जांबाजों के करोड़ों समर्थकों की भावनाओं को ठेश पहुंच सकती है।
लेकिन लुटेरों और गद्दारों की सरगना व उसके गुलाम का नाम आते ही इन्हें भावनाओं का ख्याल सता रहा है।
ऐसा नहीं कि इनकी भावनाओं को लहुलुहान करने के लिए हमारे पास शब्दों या फिर विषयों की कमी है लेकिन हम ये सोच कर कि हम भी इनकी तरह अगर तर्क की जगह कुतर्क  का ही सहारा लेंगें तो हमारे विचारशील पाठक हमें बख्सेंगे नहीं।
खैर ज्यादा विषयांतर न करते हुए हम उस विषय पर आ रहे हैं जिसने हमें ये गर्मागरम लेख लिखने पर मजबूर किया। अभी-अभी हमने ZEE NEWS सहित अनेक चैनलों पर ये समाचार सुना कि दिल्ली के रोहणी कोर्ट ने सभी  Networking Sites को धार्मिक भावनाओं को ठेश पहुंचाने वाली हर प्राकर की सामग्री को हटाने का आदेश दिया है।
क्योंकि यह आदेश हर किसी की धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखने के इरादे से दिया गया है इसलिए हमारे पास माननीय न्यायलय का समर्थन करने के अलावा कोई और मार्ग नहीं है।
लेकिन हमें ये भी ध्यान में रखना चाहिए कि कई वार सरकारें अपनी मनमानी चलाने के लिए वकीलों व जजों को दबाब में लाकर अपना गंदा खेल आगे बढ़ाने के लिए माननीय न्यायलय का दुरूपयोग करती हैं।
अगर ये आदेश इसी गंदे खेल का हिस्सा है तब तो हमें सचेत होकर इसका विरोध करना चाहिए लेकिन अगर ये मनबता के की रक्षा के लिए दिया गया है तो इसका अध्ययन करने की जरूरत है।
हमारे विचार में भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी PRINT व ELECTRONIC MEDIA के विकल्प के रूप में उभरती Networking Sites को अभी किसी भी तरह की रोक-टोक से मुक्त रखा जाना चाहिए ता3कि हमारे जैसे आम लोग भी अपनी प्रतिक्रिया ताकतवर लोगों तक पहुंचा सकें।हम अच्छी तरह जानते हैं कि सबकीसब Networking Sites सिर्फ ईसाईयों द्वारा ही चलाई जा रही हैं।
लेकिन अपनी चोरी और गद्दरी का पर्दाफास होने से बौखलाए कांग्रेसी कोई भी हथकण्डा अपनाकर इन को अपने इसारे पर चलाने के लिए मतलब  इनको भी भारतविरोधी बनाने के लिए प्रयासरत है।
आओ मिलकर Networking Sites की आजादी सुनिस्चित करें वरना सरकार का हर कदम Networking Sites पर पावंदी की ओर आगे बड़ रहा।

बुधवार, 7 दिसंबर 2011

Mr Sibal अगर भारत माता को Nude दिखाना ठीक तो फिर सोनिया गांधी को Nude दिखाना गलत कैसे?

आप सबने देखा होगा कि किस तरह भारत माता और हिन्दू देवी देबताओं के पतिजनक चित्र बनाने वाले MFHussain का कांग्रेसी नेताओं ने ये कहकर समर्थन व बचाब किया कि हिन्दूओं की आस्था से खिलवाड़ कर हिन्दूओं की भावनाओं पर चोट करना अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता है। sibal 1.jpg6
जब  सच्चा अरबी होने के नाते  MFHussain ने एक गैर इस्लामिक देश भारत के बजाए एक इस्लामिक देश को अपनी अंतिम सांस लेने के बाद मृत देह को दफनाने के लिए चुना तो कांग्रेसियों ने आसमान सिर पर उठा लिया और MFHussain द्वारा बनाई गई आपतिजनक paintings से आहत भारतीयों खासकर हिन्दूओं को sibal 1इसके लिए जिम्मेदार ठहराकर हिन्दूओं को तालिवीनी तक करार दे दिया ।
लेकिन आज वहीं कांग्रेसी कह रहे हैं कि सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह की आपतिजनक तसवीरें Internet पर नहीं दिखाई जानी चाहिए। मतलब एक अंग्रेज और उसका गुलामsibal 1.jpg 9 इन कांग्रेसियों के लिए भारत मां से बड़े है।
हम समझ सकते हैं कि जब भावनायें आहत होती हैं तो कितनी तकलीफ झेलनी पड़ती है लेकिन इन कांग्रेसियों को भी समझना चाहिएsibal 1.jpg4.jpg 5 कि भावनायें सिर्फ मुसलमानों , ईसाईयों, और कांग्रसियों की ही नहीं होती हैं। हम भारतीयों वोले तो हिन्दूओं की भी कुछ भावनायें हैं। अगर आप उनका ख्याल रखेंगे तो हम भी आपको निराश नहीं करेंगे।
हम भारतीय वोले तो हिन्दू मर्यादा पुरषोत्तम भगवान श्री राम जी को भारतीय संस्कृति का आधार मानकर उनकी न केवल पूजा ही करते हैं वल्कि उनके मान सम्मान के लिए अपना सर्वस्व नयौछावर करने का दमखम रखते हैं लेकिन  Mr Sibal आप और आपकी पार्टी उनके अस्तित्व को नकारने का अमर्यादित आचरण करती है क्या तब आपने सोचा कि किसी की धार्मिक भावनायें आहत हो रही हैं?
जब आपकी पार्टी और आप जैसे लोगों ने एक ही सांस में MFHussain द्वारा किए गए हिन्दूओं की भावनाओं से खिलवाड़ को अभिव्यक्ति की आजादी व  डच पत्रकार द्वार बनाए गए  मोहम्मद के कारटून को भावनाओं से खिलवाड़ करार देकर ये जताने की कोशिश की कि गैर हिन्दूओं की भावनायें, भावनायें  और हिन्दूओं की भावनायें अपराध तब आपको समझना चाहिए था कि करोड़ों हिन्दूओं को जो पीड़ा होगी उसके क्या परिणाम निकलेंगे?
Mr Sibal हमें नहीं पता कि इनमें से कौन सी तसवीर की आप बात कर रहे हैं लेकिन आप जिस भी तसवीर की बात कर रहे हैं वो तसवीर भारत माता व हिन्दू देवी-देबताओं की MFHussain द्वारा बनाई गई तसवीरों से ज्यादा आपतिजनक नहीं है। sibal 1.jpg2sibal 1.jpg7sibal 1.jpg4sibal 1.jpg8sibal 1.jpg7

फिर भी हम समझ सकते हैं कि आपको अपना पद वनाए रखने के लिए व आगे बढ़ने के लिए इस इटालियन अंग्रेज एडवीज एंटोनिया अलविना माईनो sibal 1.jpg10की चापलूसी करने के लिए ये सब कहना जरूरी व मजबूरी है लेकिन एक भारतीय होने के नाते अपने देश भारत को इस अंग्रेज के संकजे से मुक्त करवाना हमारी भी मजबूरी है।
भगवान का शुक्र करो कि अभी हम सिर्फ बातों से ही जबाब दे रहे हैं वरना आप लोग जिस तरह के हिन्दूविरोधी-भारतविरोधी षडयन्त्र रच रहे हैं उनके परिणामस्वारूप तो आपको बारूद से उड़ाना भी गलत न होगा लेकिन अभी तक हम अपने अहिंसा के संसकार से बंधे हुए हैं जिससे आजाद करवाने के लिए आपने दिन रात एक किया हुआ है ।भगवान करे आपकी दिल्ली इच्छा पूरी करते हुए देशभक्त भारतीय आपसे हथियारों से ही निपटें ताकि कांग्रेस की  देश से गद्दारी की इस परम्परा से हमेशा के लिए मुक्ती पाई जा सके।
अभी भी वक्त है भारविरोधियों-हिन्दूविरोधियों के पास भारतीयों की भावनाओं को समझकर उनका मान-सम्मान करने का वरना वो वक्त दूर नहीं जिस दिन इस तरह के चित्र बनाकार अपना क्रोध शांत करने वाले देशभक्त भारत के शत्रुओं पर बम्म गिराकर अपना क्रोध शांत करेंगे ।

रविवार, 27 नवंबर 2011

अन्ना जी ने क्यों कहा “बस एक ही थप्पड़ मारा”


सबसे पहले तो अब ये निस्चित हो जाना चाहिए कि जो खुद को जन प्रतिनीधि व नेता कहते नहीं थकते उन्हें क्या कहा जाना चाहिए?
जनप्रतिनिधि या नेता या अभिनेता(लालु जैसे) या (हर काम के बदले समीशन)भाई या गुण्डा(दिगविजय सिंह,मनोज तिवारी) मबाली(स्वामी जी पर हमला) या लुटेरा(राजा ,चिदंमबरम) या हफ्ता ) बसूल करने वाला या फिर (गरीबों की मां-बहन की इज्जत का लुटेरा) (भंवरी देवी जैसे हजारों लाखों केस,) ब्याभिचारी या या हत्यारे आम जनता के  फिर सबकुछ।
जबतक आपलोग इस बात को सपष्ट नहीं करते तब तक हम आपकी सुबिधा के लिए इन्हें सेकुलर गद्दार  ही कहेंगे।
अब आते हैं असली मुद्दे पर ।
हरविंदर सिंह जी द्वारा शरदपवार को थपड़  जड़ने का समाचार जैसे ही अन्ना जी को मिला अन्ना जी के मुंह से यकायक यही निकला “बस एक ही थप्पड़ मारा”
सोचने वाला विषय यह है कि ऐसा क्या हुआ है जिसकी बजह से हर देशभक्त  सेकुलर गद्दारों की कुटाई से खुश तो हो रहा है लेकिन संतुष्ट नहीं। हर देशभक्त क्यों चाहता है कि इनको अधिक से अधिक शारीरिक और मानसिक व भौतिक नुकशान होना जरूरी है?
होना तो यह चाहिए था कि जनप्रतिनिधि को नुकशान होने पर हर देशभक्तों को तकलीफ होती लेकिन हो उल्टा रहा है हर देशभक्त इन सेकुलर गद्दारों का विनाश चाहता है क्यों ?
बास्तब में ये जन प्रतिनिधि आज भारत की जनता के बजाए जबाबदेह होने के बजाए खुद को अमेरिका व साऊदी अरब के प्रति ज्यदा जबाबदेह मानने  लगे हैं। इसलिए जब भी कभी किसी भारतीय को नुकसान होता है तो इन सेकुलर गद्दारों को लगता ही नहीं कि ये नुकशान इनका भी है परिमामस्वारूप भारतीयों  को नहीं लगता कि ये भारतीयों के प्रतिनीधि हैं ।
इसके कई कारण है
  1. सबसेबड़ा कारण तो सेकुलर गद्दारों को साऊदी अरब से मिलने वाला Patro-Dollar ( जिसके बदले ये भारत में इस्लामिक आतंकवादियों का हर हालात में बचाब करते हैं बहाना चाहे मानबाधिकारों का हो संबिधान का या फिर कोई और)  व अमेरिका से मिलने वाला US-Dollar (जिसके बदले में ये भारत में धर्मांतरण का समर्थन करने के साथ-साथ ईसाई आतंकवादियों का बचाब करते हैं व बहुराष्ट्रीय कम्पनीयों के हाथों देश की सम्पदा को कौड़ियों के भाव बेचते हैं।)
  2. इनमें से अधिकातर(प्रभाबशाली) की पढ़ाई-लिखाई  बिदेशों में हुई है इसलिए ये भारतीयों की तरह सोचने के बजाए विदेशियों की ही तरह सोचते हैं जिस तरह से बिदेशी मुसलमान व इसाई भारतीयों को लूटने के लिए नीतियां बनाते थे बैसी ही वल्कि उससे भी खतरनाक नीतियां ये लोग बना रहे हैं। जैसे कि सचरकमेटी रिपोर्ट, रंगनाथ मिश्रा कमेटी रिपोर्ट, 'Prevention of Communal and Targeted Violence Bill, 2011' सिर्फ गैर हिन्दूओं(SC,ST,OBC किसी के लिए भी नहीं) के लिए छात्रवृति इत्यादि-इत्यादि। इन सब नितीयों का एक ही मकसद है भारत के मूल निवासियों के हक छीन कर अरबी व रोमन संसकृति को समर्पित लोगों को देना।
  3. हमारे विचार में BJP,SP, BSP, JDU, JD(s),  AIDMK, RC ,LD,JD, CPM, CPI व BJD जैसी सबकी सब क्षेत्रीय पार्टीयां कांग्रेस की बिछाई फूट डालो और राज करो की  एक ऐसी बिसात का सिकार हुईं जिसके परिमास्वारूप ये सबकी सब पार्टीयां अपने उन्हीं लोगों के अधिकारों को कुचलती चली गीईं जो लोग इनको समर्थन करते हैं मतलब सबकी सब पार्टियां भारतविरोध की एक ऐसी राह पर निकल पड़ी जिसमें इनका कोई दोष नहीं सिवाए इसके कि इन पार्टियों ने हालात से मुकाबला करने के बजाए हालात से समझौता कर कांग्रेस की वही राह पकड़ जिसका मकसद है हिन्दूओं को कुचल कर भारत को तबाह और बरबाद करना है। थपड़ पर इन सब पार्टियों की एकजुटता  इसी विकृत मानसिकता का प्रमाण है।अगर इनमें से एक भी पार्टी हरविंदर जी जैसे लोगों को बुलाकर सम्मानित करे तो आम जनता को लगेगा कि कोई उनके साथ भी है और आगे नेताओं को खतरा भी कम होता जाएगा । ऐसे मामलों पर जितनी ये पार्टियों एकजुटता दिखायेंगी उतना ही आम आदमी और आक्रोशित होगा।
  4. खुद कांग्रेस बिदेशियों (अंग्रेजों व मुगलों)की बिछई एक ऐसी भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी मानसिकता की शिकार हुई जिसका एकमात्र उद्देश्य था भारत के मूलनिवासियों के अधिकारों को छीन कर गैर भारतीयों के हबाले करना व भारत की सम्पदा को लूटकर इन्हीं विदेशीयों के मूल स्थानों पर पहुंचाना। कांग्रेस की स्थापना एक विदेशी द्वारा करने से लेकर आज तक कांग्रेस की कमान जब भी सम्भव हुआ भारतीयों के बजाए विदेशियों के हाथों में ही रही । इन विदेशियों ने कांग्रेस की कमान अपने हाथ में लेकर इसका  उपयोग जमकर अपनी नस्ल के लोगों के हितों को आगे बढ़ाने के लिए किया जैसे कि आज एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो कर रही है। ऐसा नहीं कि आज कांग्रेस में देशभक्तों की कमी है लेकिन सबके सब आज राष्ट्र हित को तिलांजली देकर निजहित व परिबारहित को साधने में बयस्त हैं।
  5. इन सब कारणों से भी बड़ा कारण है  इन सेकुलर गद्दारों द्वारा जनता से जुड़े हर मुद्दे पर जनता के बिरोध में जाना। देश की सारी जनता चाहती है कि मंहगाई व भ्रष्टाचार  पर सरकार गिरे लेकिन ये सेकुलर गद्दार नहीं चाहते कि ये सरकार गिरे क्योंकि इनको लगता है कि बिदेशियों के इसारों पर नाचने वाली ऐसी सरकार फिर से नहीं बन सकती इसलिए इस सरकार के माध्यम से जनता को मतलब भारत को जितना लूट लिया जाए –भारत के मूल निवासियों को जितना कमजोर कर लिया जाए उतना काफी है।
सिर्फ यही नहीं आज देश में जो भी शांतिप्रिए तरीके से अपनी बात कहने की कोशिश करता है उसे मूर्ख व कमजोर समझकर चोरों और गद्दारों की सरकार कुचलती जाती है वाकी विपक्ष जुवानी जमा-घटाने से आगे बढ़कर सरकार के बिरूद्ध किसी निर्णायक लड़ाई की शुरूआत तक नहीं करता परिणामस्वारूप जनता पिसती जाती है पिसने से जनता का क्रोध बड़ता जाता है कौन जाने कल कोई सिरफिरा जिसकी पहुंच बारूद तक बन जाए सारी की सारी पार्लियामैंट को बारूद से उड़ा दे।
क्या इन सेकुलर गद्दारों में से किसी ने सोचा कि मुम्बई हमला करने वाले षडयन्त्रकारी को PM ने शांतिदूत बताकर भारत में इस्लामिक आतंकवादियों के हाथों मारे जा चुके लाखों शहीदों के करोंड़ों परिजनों व शुभचिंतकों के जख्मों पर नमक छिड़का तो इन पीड़ितों के मन से जो बददुआ निकली वो इन सेकुलर गद्दारों को तबाह करने की ताकत रखती है। इस चोरों और गद्दारों की सरकार द्वारा शहीदों व देशभक्तों के जख्मों पर नमक छिड़कने की मानों प्रवृति ही बन गई है।
इन आतंकवादियों के प्रतिनीधि नेताओं के कुकर्मों की बजह से ही अन्ना जी को कहना पड़ता है कि “बस एक ही थप्पड़ मारा”