अभी-अभी दिल्ली सर्वोचन्यायालय परिसर में स्थित प्रशांत भूषण के कमरे में ही उनकी पिटाई
समाचार आया है। प्रशांत भूषण ने खुद बताया कि पिटाई करने वाले
नौजवान इस बात से नाराज थे कि प्रशांत भूषण ने कशमीर के मसले पर
ISI मतलब पाकिस्तान के रूख का समर्थन किया है।
इससे पहले भी कई बार प्रशांत भूषण इस्लामिक आतंकवादियों के रूख
इतना ही नहीं प्रशांत भूषण अकसर माओवादी कातिलों के समर्थन में भी
खुलकर खड़े नजर आते हैं।
वेशक इस बात के लिए तो आप प्रशांत भूषण को पागलपन के हद तक
बहादुर कह सकते हैं कि भारत में रहकर भारत की ही जड़ों को खोदने वाले
कुकर्म करने के बावजूद खुद को अन्ना जी के भ्रष्टाचार मिटाओ अन्दोलन
से जोड़कर भारत का हितैशी सिद्ध करने का दुहसाहस करने का दम रखते हैं।
फिर भी हम कहेंगे कि अगर प्रशांत भूषण की पिटाई भारतविरोधी कुकर्मों
के लिए हुई है तो किसी भी तरह गलत नहीं ठहराया जा सकता चाहे पिटाई
किसी ने भी की हो लेकिन अगर पिटाई सरकार ने उनके भ्रष्टाचारविरोधी
अन्दोलन से जुड़ने के कारण करवाई है तो इस पिटाई की जितनी भी निन्दा की जाए कम है।
प्रशांत भूषण की पिटाई अगर देशभक्तों ने की है तो सबसे बड़ी चिन्ता का
विषय ये है कि जिन वकीलों पर देश में कानून के आधार पर न्याय करवाने
की जिम्मेदारी है उन्हीं वकीलों ने सिर्फ इसलिए कि पिटने वाला एक
वकील था जो अकसर भारत विरोधी आतंकवादियों की सहायता के लिए
तत्पर रहता है के बदले में प्रशांत के भारतविरोधी रबैए से दुखी युवक के
नाक-मुंह से खून तक निकाल दिया जब कि उन युबकों ने प्रशांत को एक
भी चोट ऐसी नहीं पहुंचाई जिससे कि उनके शरीर को गम्भीर नुकसान हो।
इस घटना के बाद हम दावे से कह सकते हैं कि वो युवक सिर्फ अपना
विरोध दर्ज करवाने के लिए ही आए थे लेकिन प्रशांत, जो कि देशभक्तों से
नफरत की हद तक शत्रुता रखता है ,ने खुद को अपने गढ़ में पाकर उन
युवकों के सामने अपने भारतविरोधी रूख को दोहराकर उनको लड़ाई करने
के लिए उकसाया।
परिणामस्वारूप गद्दारी वाले कुकर्मों की बजह से लोगों के अन्दर पनप रहे
क्रोध को शांत करने के लिए खुद को प्रताड़ित बताकर( जिस काम में
आतंकवादियों के ये मददगार विशेषज्ञता हासिल कर चुके हैं) एक तो लोगों
का क्रोध शांत किया जाए दूसरा भारतविरोधियों की आँखों में हीरो बनकर
और आगे बढ़ा जाए ताकि शायद कोई भारतविरोधी किसी ऐसे इनाम से
नवाज दें जो अकसर भारतविरोधियों को ही दिए जाते हैं
इसीलिए हम ये लेख लिख रहे थे
अन्ना जी सावधान कहीं आपकी टीम में मौजूद
आतंकवादियों के मददगार आपकी मेहनत पर पानी न फेर दें!
लेकिन पूरा होने से पहले ही ये घटना घट गई।
इसमे कोई सन्देह नहीं कि आज भ्रष्टाचार हम सबकी जिन्दगी में जहर
घोल रहा है। हम कांग्रेस द्वारा बिछाए गए चोरी और गद्दारी के जाल में उसी
तरह उलझ गए हैं जिस तरह कांग्रेस द्वारा बिछाए गए फूट चालो और राज
करो के जाल में उलझे हैं। इस सबसे हम बाहर निकलने के लिए छटपटा
रहे हैं। ऐसे में जो भी इस जाल से बाहर निकालने की आश जगाता है हम
उसे अपना मानने लगते हैं। लेकिन हमें ये ध्यान ऱखना होगा कि कहीं
भारतविरोधी कांग्रेस के जाल से बाहर निकलते-निकलते हम हमारे अपने
भारतीयों के कातिल इस्लामिक और माओवादी आतंकवादियों के जाल में
न फंस जायें।
हम हर तरह से अन्ना जी द्वारा चलाए जा रहे भ्रष्टाचार मिटाओ अभियान
के पक्ष में हैं लेकिन जब तक टीम अन्ना से आतंकवादियों के मददगार
अग्निवेश की ही तरह प्रशान्तभूषण को हटा नहीं दिया जाता तब तक टीम
अन्ना पर आँख बन्द कर भरोसा नहीं किया जा सकता।
आप सोच रहे होंगे कि प्रशान्त ने देश से ऐसी कैन सी गद्दारी की है जो हम
प्रशान्त भूषण को सन्देह की निगाह से देख रहे हैं।
सबसे पहली बात ये कि प्रशान्त भूषण हमेशा उन लोगों के साथ रहे हैं जो
भारत माता की जय और वन्देमातरम् का विरोध करते हैं मतलब भारत
की अखण्डता के बरखलाफ हैं। ये पहली बार है कि भारत माता की जय
और वन्देमातरम् का उदघोष करने वाले लोगों के साथ प्रशान्त भूषण दिखे
बेशक फिर भी भारत माता की जय या वन्देमातरम का एक बार भी नारा
नहीं लगाया। अगर आपने ये उदघोष लगाते हुए कभी देखा हो तो हमें जरूर बताना।
हमें लगा कि अगर एक व्यक्ति हमेशा गद्दारों का साथ देने के बाद आज
देशभक्तों के साथ आने की कोशिश कर अपने पाप का प्रयश्चित कर कर रहा
है तो उस पर अंगुली नहीं उठानी चाहिए ।लेकिन जैसे ही अन्दोलन समाप्त
हुआ ये व्यक्ति फिर से जम्मू कशमीर में जाकर हमारे सुरक्षाबलों के विरूद्ध
जहर उगलने लग पड़ा।
ऐसा नहीं कि इसने ऐसा पहली बार किया है इससे पहले भी ,जब
इस्लामिक देशों द्वारा पाकिस्तान के माध्यम से फैंके गए टुकड़ों के बल पर
हमारे सैनिकों पर पत्थरवाजी को हथियार बनाकर हमला
आगे देखो ये दोनों आतंकवादियों के मददगार अकसर एक दिखेंगे दोनों
आतंकवादियों से भारत को लहुलूहान करवाने के मुद्दे पर एक राय जो रखते हैं।
मेरे भाई इतना ही होता तो गनीमत थी अब आप अगले चित्र में देखेंगे उस
गौतम नबलखा को जो जो अमेरिका में भारत को बदनाम कर बर्बाद करने
के काम में लगे ISI ऐजेंट गुलामनबी फई का मित्र ही नहीं बल्कि सहयोगी
भी है।मजेदार बात ये है कि इस गद्दार के साथ प्रशांत भूषण की खास सहयोगी अरूंधती राय भी है
गई वो संस्था है जिसका एक मात्र मकसद मिडीया(print &
Electronic) में अपने ISI ऐजेंटों के सहयोग से देशभक्त संगठनों को
बदनाम कर इसलामिक आतंकवादियों के अनुकूल महौल बनाकर भारत को
लहूलुहान करना है …
आप आप खुद सोच लो कि इन भारतविरोधियों की कुटाई कितनी सही या
कितनी गलत है या फिर आप खुद फैसला कर लो कि अगर इन गद्दारों में
से कोई आपके हथे चढ़ जाए तो उसके साथ क्या बर्ताब करना चाहिए?
पूरी सूची बहुत जल्द।
