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मोदीराज लाओ

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भारत बचाओ
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रविवार, 25 दिसंबर 2011

मक्कार सेकुलर गद्दारो Happy Crishmiss कहने से पहले ईसाईयों के हिन्दूविरोधी-भारतविरोधी कुकर्मों का तो जरा संज्ञान ले लो…

harvesting_souls_of_india-79x100आप किस सांप्रदाय के साथ कैसे सबन्ध ऱखना चाहते हैं इस वारे में हिन्दू संसकृति किसी तरह का कोई प्रतिबन्ध नहीं लगाती लेकिन जिस तरह से मानबता के हत्यारे इसाई भारत को लहुलुहान करने के मकसद से भारत के मूल श्रीमद भगवत गीता पर प्रहार कर रहें हैं उसे देखते हुए जरूरी नहीं कि आप इन दुष्टों को बधाई दें।
http://samrastamunch.blogspot.com/2011/12/blog-post_24.html
अगर सिर्फ बात यहीं तक होती तो हम कहते कि चलो कहने-सुनने से क्या फर्क पड़ता है लेकिन बात इससे भी कहीं आगे की है। अगर विस्वास नहीं होता तो आप इसे पढ़कर निर्णय कर लें। यहां पढ़ें
कुछ वर्ष पहले हमने एक ईसाई से किसी तरह एक पुस्तक हासिल की जिसका शीर्षक है  “ और स्नातन पर्वत गिर गया”। मतलब ये ब्याभिचारी ईसाई भारत से स्नातन को हमेशा के लिए समाप्त करने के स्वपन देखने लग पड़े हैं जानते हो क्यों ? क्योंकि आप जैसे सेकुलर जाने अनजाने इन भारतविरोधी हिन्दूविरोधी  ईसाई मिसनरियों के ऐजेंट बन चुके हैं ।
आप सबको याद होगा कि किस तरह उड़ीसा में इन ईसाईयों ने बयोबृद्ध सन्त को मौत के घाट उतार ईसाई बहुल क्षेत्रों में दंगे भड़काकर सारे संसार में हिन्दूओं को बदनाम करने का पुरजोर प्रयत्न किया  जिसमें राहुल विन्सी से लेकर एडवीज एंटोनिया तक सबके सब भारतविरोधी- हिन्दूविरोधी सामिल थे। इसेस पहले ये धूर्त ऐसे ही हथकण्डे अपनाकर उतरपूर्व के अधिकतर हिस्सों से हिन्दूओं को खदेड़ चुके हैं।
क्या आपने कभी उन शहीदों के वारे में सोचा जो इन धूर्त  फिरंगियों की गोलियों का सिकार होकर जलियांवाला बाग में मारे गए?
क्या आपने कभी भारतीयों की आजादी को प्रयासरत उन क्रंतिकारियों के वारे में सोचा जिन पर इन अत्याचारियों ने अमानविय जुल्म ढाय?
क्या आपने उन बच्चों के वारे में आपने सोचा जिनका ईसाई पादरियों ने चर्च के अन्दर यौन शोषण कर उन्हें जिन्दगी शुरू होने से पहले ही  कभी न भरे जाने वाले जख्म दे दिए?
आज भी ये दुष्ट ईसाई सारे भारत में लोगों को लालच ,भय व अन्य ओछे हथकण्डे अपनाकर धर्मांतरण करवाकर मां को बच्चों से ,पत्नि को पति से व भाई को भाई से जुदा कर उनकी जिन्दगी में आग लगा रहे हैं।
अगर नहीं सोचा तो आगे से Happy Crishmiss कहने से पहले जरूर सोच लेना….

शनिवार, 3 दिसंबर 2011

जिस राहुल विन्सी की उत्तपति ही FDI के परिणास्वारूप हुई हो वो भला FDI का विरोध कैसै कर सकता है?

हम भारतीय अक्कसर ऐसी मूर्खतायें करते हैं जिन्हें देखकर बिदेशी हमारे उपर फबतियां ही नहीं कसते बल्कि आपसी बातचीत में हमारा जमकर उपहास भी उड़ातें हैं।राहुल विन्सी का FDI पर ये ब्यान इसी का प्रमाण है।
अब जरा सचो कि जो व्यक्ति/गिरोह/संगठन/कांग्रेसी/राजनीतिक दल आज एक विदेशी एडवीज एंटोनिया अलविना माईनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम सरकार को केन्द्र में बनाए रखने के लिए सहयोग कर रहे हैं वही व्यक्ति/गिरोह/संगठन/कांग्रेसी/राजनीतिक दल किस मुँह से FDI का विरोध कर रहे हैं।
FDI का मतलब है प्रतय्क्ष विदेशी निवेश ।अब आप ही बताओ भला एडवीज एंटोनिया अलविना माईनो से बड़ा और सीधा बिदेशी निवेश और क्या हो सकता है? इस FDI का तो उत्पादन Half Indian राहुल विन्सी भी हमारे सामने है जिसे कैटरीना कैफ ही 50% Indian करार देती है जो खुद पूरी तरह से भारतीय नहीं है।
FDI से उत्पादन कोई समाज सेवा या फिर जन कल्याण के लिए नहीं किया जाता जैसा की जनमजात बौद्धिक गुलाम मनमोहन सिंह कह रहा है बल्कि उत्पादन किया जता है लाभ कमाने के लिए । क्योंकि निवेश विदेशी है तो लाभ भी तो विदेशों में ही जायगा । भारत में लाभ के नाम पर लूट मची हुई है अब आप एंटोनिया नामक FDI को देख लो किस तरह से कभी बोफोर्ष सौदे के नाम पर ,तो कभी CWG के नाम पर ,तो कभी तेल के बदले अनाज के नाम पर, तो कभी 2G +3G , तो कभी रैली के नाम पर भारत को लूट कर  सारा धन विदेशों में जमा करवा रही है।  आज भारत में जो नियम हैं उनके हिसाब से कोई भी कैसे भी जितना चाहे उतना भारत को लूट सकता है लेकिन कानून इन सब डकैतों की रक्षा करता है। इसीलिए 100 की चीज 1000 में बेचकर भोली-भाली जनता को लूटा जा रहा है। चिप्पस का मामला ही देख लो।  
जरा सोचो जिस भाजपा ने अपने कार्यकाल में एक विदेशी को भारतीय संसद में विपक्ष के नेता के रूप में मानयता देकर भारत की गुलामी का मार्ग खोला वही भाजपा भला आज किस मुंह से FDI का विरोध कर रही है। अगर भाजपा उस वक्त वाह-वाही के चक्कर में न पड़कर समझदारी से काम लेती और अपनी सरकारी ताकत का उपयोग कर इस विदेशी विषकन्या की कारगुजारियों पर तवरित जाँच करवाकर इसकी भारतविरोधी करतूतों का कच्चा चिट्ठा जनता के सामने रखती तो आज न तो देश गुलाम होता नही ही विदेशियों के हाथों इस तरह लुटता व न ही ये विदेशी विषकन्या Prevention of Communal And targeted Violence Bill-2011 जैसे कानून वनवाकर हिन्दूमिटाओ-हिन्दूभगाओ अभियान  को आगे बढ़ाने में सफल होती।
बैसे भी FDI का अर्थ है आर्थिक गुलामी जो कि आगे चलकर सामाजिक व शारीरिक गुलामी को जन्म देती है। लम्बे समय तक इस तरह की गुलामी का शिकार रहना बौद्धिक गुलामी को जन्म देता है। आज भारत अभी तक पूरी तरह से सैंकड़ो बर्षो की मुसलिम और ईसाई गुलामी के परिणामस्वारूप उपजी बौद्धिक गुलामी से पूरी तरह आजाद नहीं हुआ है। इस गुलामी के शिकार लोग ही बिके हुए सेकुलर गद्दारों का अक्कसर साथ देकर भारत से ऐसी ऐतिहासिक भूलें करवाने पर तुलें हैं जो आगे चलकर भारतीयों के रोजगार, मान-सम्मान-स्वाभिमान से लेकर जान-माल तक को खतरे में डाल रही हैं। चर्च के षडयन्त्रों का शिकार होकर एक विदेशी एडवीज एंटोनिया अलविना माईनो उर्फ सोनिया गांधी को भारत की राजनीतिक जमात द्वारा स्थापित करना व ISI से पैसे खाकर सेकुलर गद्दारों द्वारा, सेकुलर गद्दारों से, हिन्दूहित पर प्रहार करने के लिए तैयार कवाई गई सच्चर कमेटी व रंगनाथ मिश्रा कमेटी जैसी रिपोर्टें ऐसी ही ऐतिहासिक भूलें हैं।
हमारा मानना है कि जिस तरह से राजनीतिक जमात ने दलगत राजनीति से उपर उठकर Prevention of Communal And targeted Violence Bill-2011 व FDI जैसे भारतविरोधी कानूनों का विरोध किया उससे एक कदम आगे बढ़कर इन सब देशभक्तों को एकजुट होकर भारत को बिदेशी गुलामी से मुक्त करने के लिए पहले तो इस विदेशी विषकन्या की पकड़ से केन्द्र सरकार को मुक्त करवाना चाहिए व बाद में मिलकर भारत में ऐसे कड़े कानून बनाने चाहियें जिनसे ये सुनिश्चित किया जा सके कि भारत में ,सिर्फ भारतीय ही राजनीति कर सकें कोई विदेशी नहीं व भारत में रोजगार ,ब्यापार व आर्थिक संसाधनों पर सिर्फ भारतीयों का ही कब्जा रहे किसी बिदेशी का नहीं।
इसमें कोई शक नहीं कि इस वक्त सांसदों का बहुमत FDI के बिरोध में है लेकिन हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि अब अगला दौर खीद-फरोक्त का शुरू होगा जिसके पुरिणामस्वारूप बहुत से राजनीतिक दल व सांसद अपनी जेब भरने के बदले FDI के समर्थन में जा सकते हैं। ऐसे विकाऊ गद्दार सांसदों/दलों की पहचान कर उन्हें जनता के सामने वेनकाब करना चाहिए।
अभी तक सिर्फ इतना सपष्ट हुआ है कि सिर्फ कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व खासकर राहुल विन्सी, एंटोनिया व मनमोहन ही भारतविरोधियों के हाथों विके हुए हैं या फिर यूं कहें कि कुछ मुठीभर विकाऊ कांग्रेसियों को छोड़कर सब केसब सांसद भारतीयों के रोजगार को बचाने को मुद्दे पर एकजुट हैं।
रही बात Half Indian की तो आप ही बताओ जिसकी उत्तपति ही FDI के परिणास्वारूप हुई हो वो भला FDI का विरोध कैसै कर सकता है इसलिए वो ठीक ही कह रहा है कि उसके ,उसकी मां और विदेशियों के गुलामों के लिए FDI कोई मुद्द नहीं उनके लिए मुद्दा है फूट डालो और राज करो।
कुलमिलाकर FDI के बहाने एक बहुत अछ्छी शुरूआत हुई है जिसे सब देशभक्तों को मिलकर आगे बढ़ाना चाहिए।

मंगलवार, 15 नवंबर 2011

राहुल को भला शर्म क्यों न आए?

हम भारतीय अक्कसर भावनाओं में बहकर बहुत सी ऐसी गलतियां कर जाते हैं जिनके परिणाम हमें अपना खून बहाकर –इज्जत आबरू लुटवाकर भुगतने पड़ते हैं।
वेशक आप समझेंगे कि हम राजीब गांधी की उस भावनात्मक गलती की बात कर रहे हैं जिसके परिणाम स्वारूप वो इटालियन विषकन्या के फेर में पड़कर चर्च द्वारा रचे गए एक ऐसे षडयन्त्र का सिकार हो गए जिसकी कीमत उन्हें पहले तो अपना मान सम्मान खोकर(चर्च के सहयोग से सोनिया व क्वात्रोची द्वारा अन्जाम दिए गए बोफोर्स कांड) व बाद में अपने प्राण देकर चुकानी पड़ी।
लेकिन ये गलती तो राजीब गांधी की व्यक्तिगत गलती थी। अगर भारतीय भावनाओं में न बहते तो उनकी इस व्यक्तिगत गलती को राष्ट्रीय गलती न बनने देते। क्योंकि भारत में लोकतन्त्र है इसलिए अगर भारतीय भावनाओं में न बहते तो चुनाबों में विदेशी को आगेकर चुनाब लड़ने वाली पार्टी से सबन्धित प्रत्यासियों की जमानत जब्त करवा देते।चर्च को अपने आप पता चल जाता कि उसके षडयन्त्र भारत में सफल होने वाले नहीं लेकिन ऐसा हो न सका।
अगर जम्मू कशमीर में मुसलमानों को ईसाई बनाने बाले पादरियों को पकड़ कर जेल में डाला जा सकता है तो फिर भला क्यों सारे देश में हिन्दूओं को ईसाई बनाने में लगे पादरियों को जेल में नहीं डाला जा सकता।
ये हमारी भावनात्मक गलतियों का ही परिणाम है जिन लोगों(मुसलमानों और इसाईयों को ) को हमने अपना जैसा मानकर अपने देश भारत में शरण दी उन्हीं मुसलमानों ने हमें पहले अफगानीस्तान,फिर पाकिस्तान, बंगलादेश और अब कशमीर घाटी से बाहर निकाल दिया वो भी पूरी तरह लूटकर कर व आसाम और केरल से भारतीयों को वेदखल करने का संघर्ष जोरों पर है। मुसलमानों की ही तरह ईसाईयों ने भी हमें अपने बहुमत वाले उतर पूर्वी राज्यों से वेदखल कर दिया।
फिर आज हम देश के हर कोने में मुसलमानों और ईसाईयों के बरबर हमलों से प्रताड़ित अपने सगे हिन्दूों के साथ खड़े होने के बजाए इन आततायियों की बगल में खड़े हैं। क्यों , क्योंकि हिन्दी मिडीया,विके हुए नेता,पत्रकार,फिल्मकार अरब देशों से मिलने वाले पैट्रो डालर व युरोपियन देशों से मिलने बाले यु एस डालर के बल पर हमें समझा रहे हैं कि क्योंकि ये अल्पशंख्यक हैं इसलिए वेचारे हैं ,सेना ,हिन्दूओं व हिन्दू संगठनों के सताए हुए हैं इसलिए हमें इन पर दया आ रही है परिणास्वारूप हम इन शातिर आक्रमणकारियों के साथ खड़े होकर अपने सगे हिन्दूओं को मरबा रहे हैं क्योंकि मारे जाने वाले व प्रताड़ित हिन्दूओं के वारे में हमें समझाने-बताने वाला कोई नहीं। कुछ मुठीभर लोग अगर बताने की कोशिश करते भी हैं तो हम शांति भंग होने का हबाला देकर उन्हें चुप करवा देते हैं।
ये क्या ये हमारी भावनात्मक गलती नहीं कि जिस विषकन्या एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी को हमने अपनी बहु समझकर सिर आंखों पर विठाने के साथ-साथ भारत के सिंहासन पर बैठाया वही विषकन्या आज सचरकमेटी रिपोर्ट, रंगनाथ मिश्रा कमेटी रिपोर्ट, 'Prevention of Communal and Targeted Violence Bill, 2011 जैसे षडयन्त्रों के माध्यम से हमें ठिकाने लगाने के लिए दिन-रात भारत के शत्रुओं के साथ मिलकर काम कर रही है।
अब आप राहुलRahul_Gandhi-18 को ही देख लीजिए जो चिल्ला-चिला कर कह रहा है कि उसे भारतीय-हिन्दूस्तानी होने पर शर्म आती है मतलब बो भारतीय नहीं कहलाना चाहता। बैसे वो भारतीय है भी नहीं। आप उसे 25% भारतीय कह सकते हैं क्योंकि उसकी माम इटालियन है व दादा भी तो पूरी तरह भारतीय नहीं।
फिर भी सोचने वाली बात ये है कि क्यों उसे भारतीय संस्कृति से इतनी नफरत है?
असल में इसकी रगों में वो इटालियन खून दौड़ रहा है जिस देश का प्रधानमन्त्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी अपने ही देश की लड़कियों-महिलाओं को माफिया की सहायता से खरीदकर या उठवाकर उनकी मंडी सजाता है।लेकिन फिर इटली खासकर चर्च की राजधानी रोम की जनता तक उसका विरोध  नहीं करती और भारत में इस तरह की बात तक करने पर लोग मरने-मारने पर उतारू हो जाते हैं ।
अब ऐसे ब्याभिचारी व बरबर माफियाओं के देश इटली से सबन्ध रखने वाला राहुल विन्सी भला भारत में घुटन क्यों न महसूस करे। उपर से चर्च द्वारा तैयार की गई विषकन्या द्वारा भरा गया भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी जहर।
इन सब हालात में अब आप ही बताओ कि जिसकी रगों में ब्याभिचारी व बरबर माफियाओं के देश इटली का खून दौड़ रहा हो उसे भारत जैसे महान देश में शर्म क्यों न आए?
पहचानो इस भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी को और ठान लो कि हम  और भावनात्मक गलतियां नहीं करेंगे… 

सोमवार, 14 नवंबर 2011

भिखारी और लुटेरी भारत की जनता नहीं वल्कि तेरी मां व वो अंग्रेज हैं जिनका खून तेरी रगों में दौड़ रहा है।

उत्तर प्रदेश में चुनाब की आहट सुनते ही कांग्रेस ने अपने पिटारे से एक के बाद एक विभाजनकारी षडयन्त्रों को बाहर निकालना सुरू कर दिया है। हम कईबार लिख चुके हैं कि कांग्रेस चुनाबों से पहले ऐसे विभानकारी मुद्दे उठाएगी जिससे कि भ्रष्टाचार व कालेधन जैसे जनहित से जुड़े सरोकार कहीं दूर-दूर तक नजर नहीं आयेंगे। हाफ अंग्रेज राहुल विन्सी का आज का ब्यान इसी का हिस्सा है।
इतिहास इस बात का साक्षी है कि कांग्रेस अगर अंग्रेजों व उससे पहले मुसलमानों द्वारा अपनाई गई भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी विभाजनकारी नीतियों को आगे न बढ़ाती तो 40 के दशक में में भारत से हर क्षेत्र में पिछड़ने वाला चीन आज भारत से कहीं पीछे होता व उसकी भारत को आँखें दिखाने की हिमत तक न होती. उल्टा आज बंगलादेश व पाकिस्तान जैसे मच्छर भी भारत को आंख दिखाकर व आतंकवाद के माध्यम से भारतीयों का खून बहाकर भारत को ललकार रहे हैं । ।
कांग्रेस खासकर गांधी-नैहरू खानदान की फूट डालो और राज करो की नीति का ही ये दुष्परिणाम है कि पहले तो भारत का तीन-तीन हिस्सों में विभाजन हुआ और अब भारत फिर उसी दोहराहे पर आ खड़ा हुआ है जिसपर जिन्ना-नैहरू-लेडी माउंटवेटन के वक्त था। फर्क सिर्फ इतना है कि आज नैहरू की भूमिका में राहुल विन्सी है व जिन्ना की भूमिका में मनमोहन सिंह व लेडी माउंटवेटन की भूमिका में राहुल विन्सी की इटालियन ममी एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी है ।थोड़ा सा फर्क ये भी है कि लेडी माऊंटवेटन ने एक अनैतिक सबन्ध के चलते भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी षडयन्त्रों को अन्जाम दिया जबकि माइनो ये सब एक नैतिक सबन्ध का दुरूपयोग कर अन्जाम दे रही है।
आज राहुल अगर वार-वार भारतविरोधी -हिन्दूविरोधी प्रलाप कर रहा है----कभी कहता है कि उसे भारतीय होने पर शर्म आती है ----कभी कहता है कि उसे खेद है कि वो हिन्दुस्तानी है---कभी देशभक्त संगठनों व हिन्दूओं के विरूद्ध अमेरिकी अधिकारियों को उकसाता है---कभी मुमबई में जाकर उतर भारतीयों व मुंमबईकरों के बीच झगड़ा पैदा करने की कोशिश करता है ---कभी विहारियों को मुमबईकरों के विरूद्ध भड़काता है---कभी उतर भारतीयों को दलित नेत्री मायावती के बिरूद्ध भड़काता है---यो ये कमी राजीब गांधी के खून की नहीं वल्कि इस विषकन्या के द्वारा चर्च का दुरूपयोग कर एक मासूम बच्चे के अन्दर भारत-भारतीयों खासकर देशभक्त हिन्दूओं के विरूध भरे गए जहर का कुप्रभाव है।
किसी ने ठीक ही कहा है कि बच्चे का पहला अध्यापक उसकी मां है जिस बच्चे की मां ही एक भारतविरोधी विषकन्या हो उसे भारतीय होने पर गर्व भला कैसे हो सकता है?
ये विषकन्या द्वारा भरे गए उसी जहर का असर है जिसके असर के कारण राहुल विन्सी ने उतर-भारतीयों द्वारा खून-पसीना बहाकर भारत के विकास में योगदान कर कमाई जा रही मेहनत की रोटी को भीख करार दे दिया। इस वेवकूफ को कौन समझाए कि भिखारी और लुटेरी भारत की जनता नहीं वल्कि इसकी मां व वो अंग्रेज हैं जिनका खून तेरी रगों में दौड़ रहा है।