Pages

मोदीराज लाओ

मोदीराज लाओ
भारत बचाओ
anti India terrorism लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
anti India terrorism लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 6 जून 2013

काँग्रेस और समाजवादी पार्टी हिन्दूओं का खून बहाने वालों को जेलों से छुड़वाकर व हिन्दूओं के बच्चों का हक छीनकर गैर हिन्दूओं को देकर हिन्दूओं से किस बात का बदला ले रहे हैं?


मित्रो आप सब देख रहे हैं कि हिन्दूओं पर जब भी कोई आंतकवादी हमला होता है तो सबके सब सेकुलर गद्दार और सेकुलर पार्टियां कत्ल किए गए हिन्दूओं के साथ खड़े होने के बजाए देशभक्त हिन्दूओं का खून बहाने वाले भारतविरोधी आतंकवादियों को निर्दोष,अनपढ़ सताया हुआ बताकर इन खूनियों को बचाने के काम में लग जाते हैं।
पहले तो ये सब मिलकर पुलिस पर दबाब बनाकर पुलिस को इन आतंकवादियों के बिरूद्ध कार्यवाही करने से रोकते हैं और अगर कहीं ये आतंकवादी सुरक्षाबलों के हाथ आ ही जायें तो ये पार्टियां इन आतंकवादियों खासकर इसलामिक आतंकवादियों को छोड़ने के काम में लग जाती है और हिन्दूओं को साफ सन्देश देती हैं कि हिन्दू मरते हैं तो मरें पर इन पार्टियों को हर हाल में  आतंकवादियों के साथ खड़ा होना है..
मित्रो इन पार्टियों की इस तरह की कार्यवाही जहां आतंकवादियों का हौसला बढ़ाती हैं वहीं दूसरी तरफ अपनी जान जोखिम में डालकर आतंकवादियों को पकड़ने वाले सुरक्षाबलों का हौसला भी तोड़ती हैं और हद तो तब हो जाती है जब आतंकवादियों की मददगार ये पार्टियां सैनिकों को आदेश देती हैं कि जब आतंकवादियों से लड़ने जाना है तो निहत्थे होकर जाना है साथ ही सुरक्षा बलों द्वार चलाई गई एक एक गोली का हिसाब मांगकर उन पर ये दबाब बनाती हैं कि आतंकवादियों को न मारा जाए परिमामस्वारूप आजकल आतंकवादियों से कही ज्यादा शंख्या में हमारी सेना के जवान मारे जा रहे हैं और जो काम एक गंटें में खत्म हो सकता है उसके लिए सैनिकों को की दिनों तक अपनी जान को जोखिम में डालना पड़ा रहा है...
आप सबको जानाकरी होगी ही कि आज जब हम ये समाचार लिख रहे हैं तो कशमीर घाटी में पिछले दो दिनों से इसलामिक आतंकवादियों और सेना के बीच में जंग चल रही है...
इसी वक्त उतर प्रदेश में माननीय न्यायलय समाजवादी पार्टी को इस बात के लिए कटघरे में खड़ा कर रहा है कि क्यों समाजबादी पार्टी विना कोर्ट में सुनबाई हुए वाराणसी में संक़मोचक मन्दिर में बमबिस्फोट करने वाले इसलामिक आतंकवादी को छोड़ने की जिद कर भारतीयों की सुरक्षा को खतरे में डाल रही है...
मित्रो अभी-अभी 8-8:30pm NDTV(Eng) पर इसी मुद्दे पर चर्चा हुई जिसमें एंकर निधी ने विलकुल सही ढंग से आतंकवादियों के मददगारों की खबर ली ...यहां पर ये सपष्ट देख गया कि इसलामिक आतंकवादी उमर फारूकी और मनु सिंघवी इस बात पर पूरी तरह से सहमत थे कि मुसलिम आतंकवादियों जिन्हें वो मासूम करार दे रहे थे को हर हाल में छोड़ा जाना चाहिए...
आपको याद होगा कि अभी हाल ही में प्रखर देशभक्त महेन्द्र कर्मा सहित 27 काँग्रेसियों का कत्ल बामपंथी आतंकवादियों ने किया और मजेदार बात ये है कि इन बामपंथी आतंकवादियों ने न तो मुसलामनों को मारा और न ही ईसाई अजीत जोगी के मित्रों को ...सिर्फ चुन-चुन कर हिन्दूओं को मौत के घाट उतारा गया....
इतने बड़े हमले के बाद भी ईसाई(?) दिगविजय सिंह ने इन खूनी बामपंथी आतंकवादियों को अपना भाई बताकर अपनी हिन्दूविरोधी-देशबिरोधी मानसिकता का परिचय दिया...
आप सबको याद होगा कि यह दिगविजय सिंह वही गद्दार है जिसने वटला हाऊस मुठभेड़ के बाद शहीद मोहन चन्द जी के साथ खड़ा होने के बजाए इसलामिक आतंकवादियों का साथ दिया और सलमान खुरशीद के अनुशार बटला हाऊस मुठभेड़ में मारे गए इसलामिक आतंकवादियों के लिए काँग्रेस अध्यक्षा एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो सारी रात फूट-फूट कर रोई ...इससे पहले मनमोहन सिंह भी हिथरो हबाई अड़्डे पर हमला करने वाले इसलामिक आतंकवादी के लिए सारी रात रोते रह चुके हैं...
आप सबको जानकारी होगी ही कि यही मनमोहन सिंह और एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो दो दो कमेटियां एक सच्चार कमेटी और दूसरी  कशमीर पर बना चुके हैं जिनका जिम्मा इन हिन्दूविरोधीयों ने ISI Agent Justice Rajender  Suchar और राधा कुमार जैसे भारतविरोधी दुशमनों को दिया... ISI Agent Justice Rajender  Suchar के नेतृत्व वाली सच्चर कमेरी का सहारा लेकर काँग्रेस हिन्दूओं के बच्चों के अधिकार छीनकर गैर हिन्दूओं को देने के लिए हर वक्त कोई न कोई षडयन्त्र अन्जाम दे रही है....
आप सबको याद होगा कि 2008 में मुम्मबई पर हुआ हमला ईसलामिक आतंकवादियों ने किया  लेकिन  काँग्रेस का कहना है कि ये हमला RSS यानिके हिन्दूओं ने किया और मजेदार बात ये है कि इस बात पर एक इसलामिक आतंकवादी ने एक पुस्तक लिखी जिसका विमोचन काँग्रेस के महासचिब ने किया...
मित्रो आपको ये भी जरूर जानकारी होगी ही कि अभी कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश में एक इसलामिक आतंकवादी की मौत लू लगने से हो गई जिसके लिए SP सरकार ने 42 पुलिस बालों को Suspend किया...इस आतंकवादी को आतंकवादियों की इस सरकार ने 6 लाख रूपए दिए जबकि आतंकवादियों द्वारा मारे गए 27 काँग्रेस से जुड़े हिन्दूओं के परिवारों को सिर्फ 5-5 लाख....
मित्रो आपको ये भी याद होगा ही कि उतर प्रदेश में मारे गए DSP जियाऊल हक के परिवार को  SP सरकार ने 25 लाख मुआबजा और परिवार के तीन सदस्यों को नौकरी मिडीया में लगातार कबरेज ...पिछले कल ही सहारनपुर में DSP का कत्ल हुआ जिसकी कोई बात नहीं कर रहा हम दावे से कह सकते हैं कि मरने वाला हिन्दू होगा और मारने वाला मुसलमान......
आप सबको इस बात की जरूर जानकारी होगी कि कशमीर घाटी में काँग्रेस इसलामिक आतंकवादियों को 3 लाख की FD दे रही है व मारे गए आतंकवादियों के परिवारों को पेंसन... प्रश्न सिर्फ इतना है कि
 काँग्रेस और समाजवादी पार्टी हिन्दूओं का खून बहाने वालों को जेलों से छुड़वाकर व हिन्दूओं के बच्चों का हक छीनकर गैर हिन्दूओं को देकर हिन्दूओं से किस बात का बदला ले रहे हैं? 

मंगलवार, 8 नवंबर 2011

ईद कहो या बकरईद मकसद तो एक ही है---हिंसा---कत्लोगारद---अराजकता---


हम कई बार हैरान होते हैं ये देखकर कि जब कातिल अल्लाह के नाम पर कतलयाम idमचा रहे होते हैं तो कुछ परजीवि इस कत्लयाम को कभी वकर ईद तो कभी ईद के नाम पर जायज ठहराने के भरपूर प्रयत्न करने में लगे रहते हैं।दानबता की हर हद तो तब पार हो जाती है जब मिडीया में बैठे ISI ऐजेंट, हिंसा से भरपूर इन खूनी बारदातों को शांति और भाईचारे का जसन करार दे देते हैं।
हम मानते हैं कि कोई भी जीब कैसे जिन्दगी जीता है इसमें हस्तक्षेप का हमें कोई हक नहीं लेकिन जब ये जीब हिंसक हो जाए और अपने देश में बैठे धर्मनिरपेक्ष गद्दार इस जीब द्वारा किए जा रहे कत्लोगारद को जायज ठहराकर मानबता को लहूलुहान करने पर उतारू हों तो सब शांतिप्रिय लोगों का ये फर्ज बन जाता है कि इन्सान के वेष में छिपे इन राक्षसों को वेनकाब कर इस धरा को इन राक्षसों से मुक्त करने के उपायों पर विचार करे।
मजेदार बात तो ये है कि राक्षसों के जिन राहुल विन्सी जैसे मददगारों को इस कत्लयाम में अमन-चैन, प्रेम भाईचारा नजर आता है उन्हीं गद्दारों को भारतीय संस्कृति का हर पहलू सांप्रदायिक दिखने लगता है परिमामस्वारूप उन्हें भारतीय होने पर कभी शर्म आती है तो कभी दुख होता है।
वेशक कुछ लोगों को ऐसा लगेगा कि क्योंकि भारत में इन राक्षसों से हिन्दूओं को खतरा है इसलिए हम इनके खात्मे की बात कर रहे हैं। लेकिन ये आधा सत्य है क्योंकि इसमें कोई सन्देह नहीं कि जिस तरह इन राक्षसों ने कतल्याम के बल पर गांधी जैसे व्यक्ति को भारत का विभाजन स्वीकार करने पर विवश किया, जिस तरह न कातिलों ने कशमीर घाटी में हजारों हिन्दूओं का कत्लयाम किया, जिस तरह ये कातिल देशभर में बम्ब हमले व दंगा फसाद कर हिन्दूओं का कत्लयाम कर रहे हैं उस सबको देखते हुए ये कहना विलकुल सही है कि भारत में हिन्दूओं को इन राक्षसों से खतरा है।
लेकिन आम मुसलमान जिसने हाल ही में मतलब पिछले 300-500 वर्ष में इस्लाम अपनाने के बाबजूद मानबता का दामन नहीं छोड़ा है वो भी इन राक्षसों के निसाने पर उसी तरह है जिस तरह हिन्दू व ईसाई हैं। अगर आपको लगता है कि हम गलत कह रहे हैं तो आप उन इस्लामिक देशों पर एक निगाह डालो जिनकी लगभग 100% अबादी मुसलमान है उसके बाबजूद ये राक्षस इन इस्लामिक देशों में मस्जिदों, मदरसों व भीड़भाड़ वाले क्षत्रों में बम्म हमले कर इन नए-नवेले मुसलमानों का खून बहा रहे हैं।
अगर ये हमले इस्लाम को आगे बढ़ाने के लिए किए जा रहे हैं तो इन राक्षसों द्वारा मस्जिदों में बम्म बिस्फोट करने का कोई औचित्य नजर नहीं आता वो भी वहां जहां 100% अबादी मुसलमानों की ही है। क्योंकि जहां इन राक्षसों के साथ हिन्दू या ईसाई रहते हैं वहां तो ये राक्षस मस्जिदों में बम विस्फोट कर उसका दोष गैर मुसलमानों पर दे देते हैं जैसे कि इन राक्षसों के हाथों विक चुकी केन्द्र सरकार ने इन राक्षसों द्वारा मस्जिदों में किए गए बम हमलों का दोष हिन्दूओं के सिर डालकर देशभक्तों को जेल में बन्द कर दिया लेकिन 100% मुसलिम अबादी में तो ऐसा भी कोई बहाना काम नहीं कर सकता है।
हमारे विचार में ये राक्षस जिस भी अल्लाह का नाम लेते हैं वो जरूर कोई शैतान होगा वरना ये कैसे हो सकता है कि अल्लाह अपनी ही सन्तति का खून बहाकर खुश हो। यही नहीं ये राक्षश मां-वहन-वेटी-बहु जैसै पवित्र रिस्तों को भी नापाक कर अपने राक्षश होने का प्रमाण दुनिया के सामने रख रहे हैं। आओ मिलकर इन राक्षसों के इस दुनिया से सफाए के लिए जरूरी कदम उठाने का प्रण कर मानबता की रक्षा के लिए धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ें।

गुरुवार, 13 अक्टूबर 2011

ये गांधीवाद नहीं आतंकवाद है---संदर्भ---इन्द्रवर्मा को लहुलूहान करने वाले गांधीवादियों की पिटाई कितनी उचित?


हम सर्वथा लड़ाई के विरूद्ध हैं खासकर अपने ही देशवासियों के बीच में
लेकिन खुद को गांधीवादी कहने वालों ने इस देश को इतना लहुलूहान कर दिया है कि अब तो इस लड़ाई का समर्थन करने का मन करता है।
1947 में इन गांधीवादियों ने गांधी की पीठ के पीछे छुप कर भारत के तीन-तीन विभाजन करवाकर करोंड़ों हिन्दूओं को अत्याचारी इस्लमिक आतंकवादियों के हाथों बेआवरू होकर तड़प-तड़प कर मरने को छोड़ दिया।
आज जब किसी भी गद्दार को किसी भारतविरोधी षडयन्त्र को अनजाम देना होता है तो वो गांधीवाद की लंगोटी का नकाब ओड़ लेता है।
अभी हाल ही में आपने देखा कि किस तरह 50000 से अधिक देशभक्तों पर इन गांधीवादियों ने लाठियां ,गोलियां चलवाकर शहीद राजवाला जी के प्राणों की आहुती ले ली। इनका बस चलता तो ये गांधीवादी रामलीला मैदान को स्वामी रामदेव जी सहित हजारों देशभक्तों का शमशानघाट बना देते। इनकी गांधीवादी हिंसक मानसिकता का प्रमाण तब भी मिला जब गांधीवादियों ने स्वामीराम देव जी को पत्थर बांध पानी में तब तक डुवोए रखने की बात की जब तक उनके अन्दर प्राण शेष हैं मतलब स्वामी राम देव जी का कत्ल करने की मनसा रखते हैं ये गांधीवादी।
हमें समझ नहीं आ रहा कि ये कैसा गांधीवाद है जो हर वक्त भारतविरोधी आतंकवादियों के हाथों आम देशभक्त निर्दोष जनता का खून बहता देखकर खुश होता है और इन कातिल आतंकवादियों को हर तरह की सजा से बचाने के लिए आए दिन नए-नए बहाने बनाता है तिकड़म लड़ाता।
ये कौन सा गांधीवाद है जो भारत को विभाजित करवाकर विभाजन की विषबेल को फिर से भारत में रखने की मांग उठाकर आज इस विषबेल के पूरे भारत में फैल जाने के बाद भारतीयों का खून बहता देखकर इठलाता है ।
ये कौन सा गांधीवाद है जो भारत के तीन-तीन विभाजन करवाकर पाकिस्तान और बंगलादेश में हर चीज पर पहला अधिकार मुसलिम आतंकवादियों को देकर भारत में भी पहला अधिकार मुसलिम आतंकवादियों को ही देने की मांग उठाता ।
ये कौन सा गांधीवाद है जो भारत को 1000 वर्ष तक गुलाम बनाकर उनका शोषण करने वाले मुसलमानों और ईसाईयों के बच्चों को पाठशाला में प्रवेश करते ही हजारों रूपए की सहायता की देता है और हिन्दूओं के बच्चों द्वारा 80% अंक लेने के बावजूद उन्हें इस तरह की किसी सहायता की गारंटी नहीं देता।
हैरानी तो इस बात की है कि जिन ईसाईयों का आज भी भारत के शिक्षा ढांचे पर अंग्रेजों के साम्राज्यवाद के काल से चला आ रहा कब्जा है उन ईसाईयों को शोषित हिन्दू बच्चों से आगे बड़ाने की वकालत ये भारतविरोधी गांधीवाद करता है।
जिन मुसलमानों ने भारत पर अपने अत्याचारी कब्जे के दौरान हिन्दूओं से जिन्दा रहने के बदले में जजिया कर लिया जो आज भी वन्देमातरम् का विरोध कर खुद को गैर भारतीय बताने पर जोर देते हैं उन मुसलमानों के बच्चों को ये गांधीवाद इन मुसलमानों के अत्याचारी कब्जे के द्वारा प्रताड़ित और शोषित हिन्दूओं के बच्चों का हक छीन कर देने की वकालत ये गांधीवाद करता है।
गांधीवाद की वकालत करने वाले कितने गांधीवादी हैं ये तो आपने कल उस वक्त देख ही लिया होगा जब इन गांधीवादियों ने इन्द्र वर्मा जो कि प्रशांत भूषण की गद्दारी का विरोध कर रहा था को अपने कब्जे में लेकर किस तरह नोकीली चीजें चुभोकर लहुलूहान किया क्योंकि इनका गांधीवाद देशभक्तों का खून बहाकर आगे बढ़ता है।
उस युवक को देखो जो प्रशांत भूषण के भारतविरोधी कुकर्म से पूरी तरह आक्रोशित होने के बावजूद प्रशांत भूषण को कोई ऐसी चोट नहीं पहुंचाता जो उनको शारीरिक नुकसान करती ।
ऐसी ही हरकत इन गांदीवादियों की आपने तब भी देखी होगी जब स्वामी रामदेव जी को कांग्रेस द्वारा गाली-गलौच व अपमानित करने से आक्रोशित एक युवक ने कांग्रेसी प्रवक्ता को जूता सिर्फ दिखाया मारा नहीं वो इस प्रवक्ता(जनरदन द्विवेदी) के इतना नजदीक था कि अगर चाहता तो मार भी सकता था लेकिन बाद में गांधीवादी कांग्रेस के चापलूस गांधीवादी पत्रकारों और गांधीवादी दिगविजय सिंह ने उसे मार-मार कर लहुलूहान कर दिया।
ये कैसा गांधीवाद है जो भारत के सन्तों को ठग और दुनियाभर के कुख्यात इस्लामिक आतंकवादी ओसामविन लादेन को जी कहता है।
ये कैसा गाधीवाद है जो भारत के आम लोगों का धन लूट कर विदेशी बैंकों में जमाकरवाकर भारत को कमजोर करने की जड़ बन जाता है। विरोध करने वालों पर जुल्म ढाहता है
हे भगवान ये कैसा गांधीवाद है जो अफजल जैसे दुर्दाँत आतंकवादी की फांसी को तो वर्षों तक रोकर समाप्त करने की वकालत करता है लेकिन निर्दोष साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को नजायज तरीके से कब्जे में रखकर प्रताडित करने में ही आनन्दित महसूस नहीं करता बल्कि उसे जबरदस्ती फांसी पर चढ़ाने के लिए सुरक्षाबलों पर दबाव बनाने का हर सम्भव प्रयास करता है।
ये कैसा गांधीवाद है जो एक विदेशी के सामने सिर्फ इसलिए नतमस्तक हो जाता है क्योंकि वो अपने नाम के पीछे गांधी लगा लेती है और फिर सारे भारत को उसके हबाले छोड़कर उसे तूटने की खुली छूट देने की वकालत करता है लेकिन अपने ही देश के आर एस एस और भारत स्वाभिमान जैसे देशभक्त संगठनों को कुचलने के लिए हर सम्भव प्रयास करता है।
आओ प्रण करें कि ये गांधीवाद जो भारत को समाप्त करने पर तुला है उस गांधीवाद को हम ही मिलकर समाप्त करने का बीड़ा उठायें ऐसे ही गांधीवादी तरके अपनाकर।
चलते-चलते
मिडीया दुष्प्रचार कर रहा है कि आज अन्ना समर्थकों पर हमला हुआ लेकिन सच्चाई यह है कि हमला अन्ना समर्थकों पर नहीं बल्कि पाकिस्तान समर्थकों पर हुआ है क्योंकि प्रशांत भूषण का विरोध इसलिए नहीं हो रहा कि वो अन्ना जी के साथ क्यों हैं बल्कि इसलिए हो रहा है क्योंकि वो गांधीवाद की लंगोटी ओड़कर भारत के एक और विभाजन की मांग का समर्थन कर रहे हैं जो कि अन्ना जी कभी नहीं कर सकते।
आज जिन लोंगों की पिटाई हुई वो लोग वहां पर भारतविरोधी प्रशांत भूषण के विरूद्ध हो रही नारेबाजी का विरोध कर रहे ते मतलब प्रशांत भूषण के कुकर्म का समर्थन।
हमारे विचार में जो भी भारत के अस्तित्व को खतरा बनने की कोशिश करता है उसके साथ जो भी बुरे से बुरा किया जा सकता है किया जाना चाहिए क्योंकि ये गांधीवाद नहीं भारतविरोध-हिन्दूविरोध-देशविरोध ही नहीं बल्कि मानवता का विरोधी आतंकवाद है…

बुधवार, 12 अक्टूबर 2011

कशमीर पर ISI की भाषा बोलने वाले प्रशांत भूषण की पिटाई को क्या गलत ठहराया जा सकता है?


अभी-अभी दिल्ली सर्वोचन्यायालय परिसर में स्थित प्रशांत भूषण के कमरे में ही उनकी पिटाई prasant.jpg1.jpg6किए जाने का

समाचार आया है। प्रशांत भूषण ने खुद बताया कि पिटाई करने वाले

नौजवान इस बात से नाराज थे कि प्रशांत भूषण ने कशमीर के मसले पर

ISI मतलब पाकिस्तान के रूख का समर्थन किया है।

इससे पहले भी कई बार प्रशांत भूषण इस्लामिक आतंकवादियों के रूख k9का अनुसरण करते हुए सुरक्षा बलों पर हमला बोल चुके हैं।
इतना ही नहीं प्रशांत भूषण अकसर माओवादी कातिलों के समर्थन में भी

खुलकर खड़े नजर आते हैं।

वेशक इस बात के लिए तो आप प्रशांत भूषण को पागलपन के हद तक

बहादुर कह सकते हैं कि भारत में रहकर भारत की ही जड़ों को खोदने वाले

कुकर्म करने के बावजूद खुद को अन्ना जी के भ्रष्टाचार मिटाओ अन्दोलन

से जोड़कर भारत का हितैशी सिद्ध करने का दुहसाहस करने का दम रखते हैं।
फिर भी हम कहेंगे कि अगर प्रशांत भूषण की पिटाई भारतविरोधी कुकर्मों

के लिए हुई है तो किसी भी तरह गलत नहीं ठहराया जा सकता चाहे पिटाई

किसी ने भी की हो लेकिन अगर पिटाई सरकार ने उनके भ्रष्टाचारविरोधी

अन्दोलन से जुड़ने के कारण करवाई है तो इस पिटाई की जितनी भी निन्दा की जाए कम है।

प्रशांत भूषण की पिटाई अगर देशभक्तों ने की है तो सबसे बड़ी चिन्ता का

विषय ये है कि जिन वकीलों पर देश में कानून के आधार पर न्याय करवाने

की जिम्मेदारी है उन्हीं वकीलों ने सिर्फ इसलिए कि पिटने वाला एक

वकील था जो अकसर भारत विरोधी आतंकवादियों की सहायता के लिए

तत्पर रहता है के बदले में प्रशांत के भारतविरोधी रबैए से दुखी युवक के

नाक-मुंह से खून तक निकाल दिया जब कि उन युबकों ने प्रशांत को एक

भी चोट ऐसी नहीं पहुंचाई जिससे कि उनके शरीर को गम्भीर नुकसान हो।

इस घटना के बाद हम दावे से कह सकते हैं कि वो युवक सिर्फ अपना

विरोध दर्ज करवाने के लिए ही आए थे लेकिन प्रशांत, जो कि देशभक्तों से

नफरत की हद तक शत्रुता रखता है ,ने खुद को अपने गढ़ में पाकर उन

युवकों के सामने अपने भारतविरोधी रूख को दोहराकर उनको लड़ाई करने

के लिए उकसाया।
परिणामस्वारूप गद्दारी वाले कुकर्मों की बजह से लोगों के अन्दर पनप रहे

क्रोध को शांत करने के लिए खुद को प्रताड़ित बताकर( जिस काम में

आतंकवादियों के ये मददगार विशेषज्ञता हासिल कर चुके हैं) एक तो लोगों

का क्रोध शांत किया जाए दूसरा भारतविरोधियों की आँखों में हीरो बनकर

और आगे बढ़ा जाए ताकि शायद कोई भारतविरोधी किसी ऐसे इनाम से

नवाज दें जो अकसर भारतविरोधियों को ही दिए जाते हैं
इसीलिए हम ये लेख लिख रहे थे

अन्ना जी सावधान कहीं आपकी टीम में मौजूद

आतंकवादियों के मददगार आपकी मेहनत पर पानी न फेर दें!

लेकिन पूरा होने से पहले ही ये घटना घट गई।

इसमे कोई सन्देह नहीं कि आज भ्रष्टाचार हम सबकी जिन्दगी में जहर

घोल रहा है। हम कांग्रेस द्वारा बिछाए गए चोरी और गद्दारी के जाल में उसी

तरह उलझ गए हैं जिस तरह कांग्रेस द्वारा बिछाए गए फूट चालो और राज

करो के जाल में उलझे हैं। इस सबसे हम बाहर निकलने के लिए छटपटा

रहे हैं। ऐसे में जो भी इस जाल से बाहर निकालने की आश जगाता है हम

उसे अपना मानने लगते हैं। लेकिन हमें ये ध्यान ऱखना होगा कि कहीं

भारतविरोधी कांग्रेस के जाल से बाहर निकलते-निकलते हम हमारे अपने

भारतीयों के कातिल इस्लामिक और माओवादी आतंकवादियों  के जाल में

न फंस जायें।
हम हर तरह से अन्ना जी द्वारा चलाए जा रहे भ्रष्टाचार मिटाओ अभियान

के पक्ष में हैं लेकिन जब तक टीम अन्ना से आतंकवादियों के मददगार

अग्निवेश की ही तरह प्रशान्तभूषण को हटा नहीं दिया जाता तब तक टीम

अन्ना पर आँख बन्द कर भरोसा नहीं किया जा सकता।

आप सोच रहे होंगे कि प्रशान्त ने देश से ऐसी कैन सी गद्दारी की है जो हम

प्रशान्त भूषण को सन्देह की निगाह से देख रहे हैं।

सबसे पहली बात ये कि प्रशान्त भूषण हमेशा उन लोगों के साथ रहे हैं जो

भारत माता की जय और वन्देमातरम् का विरोध करते हैं मतलब भारत

की अखण्डता के बरखलाफ हैं। ये पहली बार है कि भारत माता की जय

और वन्देमातरम् का उदघोष करने वाले लोगों के साथ प्रशान्त भूषण दिखे

बेशक फिर भी भारत माता की जय या वन्देमातरम का एक बार भी नारा

नहीं लगाया। अगर आपने ये उदघोष लगाते हुए कभी देखा हो तो हमें जरूर बताना।
हमें लगा कि अगर एक व्यक्ति हमेशा गद्दारों का साथ देने के बाद आज

देशभक्तों के साथ आने की कोशिश कर अपने पाप का प्रयश्चित कर कर रहा

है तो उस पर अंगुली नहीं उठानी चाहिए ।लेकिन जैसे ही अन्दोलन समाप्त

हुआ ये व्यक्ति फिर से जम्मू कशमीर में जाकर हमारे सुरक्षाबलों के विरूद्ध

जहर उगलने लग पड़ा।
ऐसा नहीं कि इसने ऐसा पहली बार किया है इससे पहले भी ,जब

इस्लामिक देशों द्वारा पाकिस्तान के माध्यम से फैंके गए टुकड़ों के बल पर

हमारे सैनिकों पर पत्थरवाजी को हथियार बनाकर हमला sopore 2करने वाले आतंकवादियों और सुरक्षबलों में से किसी एक का साथ देने का मौका आया था तो इसने इन आतंकवादियोंINDIA_KASHMIR_POLIC_135876e को निर्दोष कहकर आतंकवादियों के प्रति अपनी देशविरोधी मानसिकता का प्रमाण दे दिया था। (R-L) Prashant Bhushan, Yogendra Yadva, Sunil, president, Samajwadi Jan Parishad प्रशांत भूषण अपहरण जैसे संगीन मामलों के आरोपी इस्लामिक अपराधियों के समर्थन में।
prasant   alina sen प्रशान्त भूषण देश से गद्दारी के आरोप में जेल जा चुके माओवादी कातिलों के मददगारों का समर्थन करता हुआ।
prasant   arundhati roy प्रशांतभूषण कशमीर पर पाकिस्तान के रूख का समर्थन करने वाली आतंकवादियों की मददगार अपनी सहयोगी अरूंधती राय के साथ।
आगे देखो ये दोनों आतंकवादियों के मददगार अकसर एक दिखेंगे दोनों

आतंकवादियों से भारत को लहुलूहान करवाने के मुद्दे पर एक राय जो रखते हैं।
prasant   arundhati roy.jpg1prasant   arundhati roy.jpg1.jpg2
prasant in meeting in hydrabadप्रशांत भूषण भ्रष्टाचारविरोधी कार्यक्रम में पहुचने पर।


prasant.3jpgप्रशांत भूषण माओवादी कातिल विनायक सेन के समर्थन मेंprasant.4jpgप्रसांत भूषण सोराबुद्दीन,इशरत जहां जैसे इस्लामिक आतंकवादियों के समर्थन में।prasant 7 प्रशांत भूषण माओवादी सरगना लिंगा के समर्थन में।
मेरे भाई इतना ही होता तो गनीमत थी अब आप अगले चित्र में देखेंगे उस

गौतम नबलखा को जो जो अमेरिका में भारत को बदनाम कर बर्बाद करने

के काम में लगे ISI ऐजेंट गुलामनबी फई का मित्र ही नहीं बल्कि सहयोगी

भी है।मजेदार बात ये है कि इस गद्दार के साथ प्रशांत भूषण की खास सहयोगी अरूंधती राय भी हैg6    g1 अब आप सोचेंगे कि KAC क्या है ये भारतविरोधी गद्दारों के सहयोग से ISI ऐजेंट गुलामनबी फई द्वारा चलाई

गई वो संस्था है जिसका एक मात्र मकसद मिडीया(print &

Electronic) में अपने  ISI ऐजेंटों के सहयोग से देशभक्त संगठनों को

बदनाम कर इसलामिक आतंकवादियों के अनुकूल महौल बनाकर भारत को

लहूलुहान करना  है …
आप आप खुद सोच लो कि इन भारतविरोधियों की कुटाई कितनी सही या

कितनी गलत है या फिर आप खुद फैसला कर लो कि अगर इन गद्दारों में

से कोई आपके हथे चढ़ जाए तो उसके साथ क्या बर्ताब करना चाहिए?

पूरी सूची बहुत जल्द।

शुक्रवार, 7 अक्टूबर 2011

सुब्रमण्यम स्वामी जी द्वरा लिखित लेख ‘How to wipe out Islamic terror?’का हिन्दी अनुबाद---इस्लामिक आतंकवाद को कैसे नेस्तनाबूद किया जाए?



shubramanium Swamiजुलाई 13,2011 को मुसलिम आतंकवादियों द्वारा किए गए बम धमाकों के बाद हिन्दूओं को निर्णायक रूप से अपनी अन्तरात्मा को झकझोरने की जरूरत है। भारत का विनाश करने के लिए, मुसलिम आतंकवादियों द्वारा हिन्दूओं का हलाल तरीके से आए दिन खून बहाया जाना, हिन्दूओं द्वारा स्वीकार नहीं किया जा सकता।
आतंकवाद गैर कानूनी तरीके से ताकत के दुरूपयोग का वो हथियार है, जिससे आम जनता को भयभीत कर, उसे आतंकवादियों की इच्छा के विपरीत काम करने से रोकने व आतंकवादियों की नजाजय मांगो को समर्थन देने के लिए मजबूर करने के लिए उपयोग किया जाता है
भारत में हर महीने लगभग 40 आतंकवादी हमले होते हैं।इसीलिए हाल ही में अमेरिका के ‘आतंकवाद विरोधी केन्द्र’ के प्रकाशन ‘A Chronology of International Terrorism ’ में बताया गया है कि आज तक जितने आतंकवादी हमले भारत पर हुए हैं उतने आतंकवादी हमले दुनिया के किसी भी देश ने नहीं झेले हैं।
वेशक प्रधानमन्त्री माओवादी हिंसा को देश के लिए सबसे बड़ा खतरा बतायें लेकिन मेरा मानना है कि आज इस्लामिक आतंकवाद देश के लिए सबसे गम्भीर खतरा है।अगर बर्तमान गृहमन्त्री, प्रधानमन्त्री और UPA अध्यक्ष को आज हटा दिया जाए तो माओवादी हिंसा को एक महीन में उसी तरह समाप्त किया जा सकता है जिस तरह मैंने 1991 में बरिष्ठ मन्त्री के पद पर रहते हुए तमिलनाडु में LTTE व MGR ने 1980 में नक्सलवादियों को किया।मुसलिम आतंकवाद देश के लिए एक अलग तरह का खतरा है।
मुसलिम आतंकवाद हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्यों है? इसके वारे में 2012 के बाद किसी के मन में कोई शंका नहीं रहेगी। 2012 में तालिवान पाकिस्तान पर कब्जा कर लेंगे व अमेरिका अफगानिस्तान छोड़ कर भाग जाएगा। उसके बाद इस्लाम अपने अधूरे काम को पूरा करने के लिए हिन्दूत्व से सीधी लड़ाई लड़ेगा। अलकायदा का नया सरगना, जो कि ओसामाविन लादेन का उताधिकारी है पहले ही घोषणा कर चुका है कि मुसलिम आतंकवादियों का सबसे बड़ा लक्ष्य भारत है न कि अमेरिका।
कट्टरपंथी मुसलमान हिन्दूबहुल भारत को ‘इस्लामी विजय का एक अधूरा अध्याय’ मानते हैं। हमें यह ध्यान में रखना चाहिए कि दुनिया के वाकी सभी वो देश, जिन पर इस्लाम ने विजय प्राप्त की , इस्लामी आक्रमण के दो दशकों के भीतर 100% इस्लाम में परिवर्तित हो गए। भारत एक अपबाद है । 800 वर्षों के अत्याचारी  बरबर मुसलिम शासन के बाद भी अविभाजित भारत में 75% हिन्दू अबादी थी। कट्टरपंथी मुसलमानों को यही बात आज तक सता रही है कि मुसलमानों द्वारा किए गए वेहिसाब जुल्मों के बाबजूद वो मुसलिम आतंकवादी हिन्दूओं का मनोबल तोड़ने में क्यों सफल न हो पाए।
हर दंगे के बाद नियुक्त किए गए जांच आयोगों की रिपोर्टों के अधार पर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि 1947 से लेकर आज तक जितने भी हिन्दू-मुसलिम दंगे हुए हैं उन सबकी शुरूआत कट्टरपंथी मुसलमानों द्वारा ही की गई---यहां तक कि गुजरात दंगों की शुरूआत भी कट्टरपंथी मुसलमानों द्वारा गोधरा में 56 हिन्दू महिलाओं और बच्चों को जिन्दा जलाकर की गई।
आज की परिभाषा के अनुसार मुसलिम आतंकवादियों द्वारा किए गए ये सबके सब हमले आतंकवादी गतिविधियां हैं। वेशक भारत में मुसलमान अल्पसंख्यक हैं लेकिन फिर भी कट्टरपंथी हिंसक मुसलमान हिन्दूओं पर जानलेवा हमले करने का दुशसाहस करते हैं। भारत के अन्य मुसलमान इन हमलों को या तो मौन स्वीकृति देते हैं या फिर इनमें कूद पड़ते हैं या फिर हिन्दूओं के मारे जाने का तमाशा देखते हैं। भारत में अत्याचारी बाबर से लेकर कातिल औरंगजेब तक और औरंगजेब से लेकर आज तक हिन्दूओं का कत्लयाम ही मुसलमानों का ईतिहास है। हिन्दूओं पर मुसलिम आतंकवादियों द्वारा किए जाने हमलों के प्रति उदासीन रहने में ,भूतकाल में दारा सिकोह व वर्तमान में एम जे अकबर व सलमान हैदर जैसे लोग, जो मुसलिम आतंकवाद के विरूद्ध खुलकर वोलने से नहीं डरते हैं,अपबाद हैं
कट्टरपंथी मुसलमानों द्वारा किए जाने वाले हमलों के लिए हिन्दू ही दोशी हैं।
कट्टरपंथी मुसलमानों द्वारा हिन्दूओं को निशाना बनाए जाने के लिए मैं मुसलमानों के बजाए हिन्दूओं को ही दोष देता हूं। में इन हमलों का दोष उन हिन्दूओं को देता हूं जिन्होंने सनातन धर्म में बाताई गई आत्मा और पतमात्मा की अबधारणा को चरम पर ले जाते हुए खुद को अपने आप तक सीमित कर लिया। लाखों हिन्दू विना किसी सरकारी सहयोग के अपने आप को व्यबस्थित कर कुम्भ मेले में ईकट्ठे हो सकते हैं ,लेकिन मेले के बाद ये सब हिन्दू कशमीर,मऊ, मेल्विशरम और मलप्पुरम व अन्य विधर्मियों के बहुमत वाले इलाकों में हिन्दूमिटाओ-हिन्दूभगाओ अभियान के तहत मुसलमानों द्वारा निशाना बनाए जा रहे हिन्दूओं की पीड़ा से वेखबर,हमले के शिकार हिन्दूओं की सहायता के लिए विना कोई संगठित कदम उठाए घर की ओर लौट जाते हैं।
उधाहरण के लिए अगर आधे हिन्दू भी जाति ,भाषा व क्षेत्र के विभाजनों से उपर उठकर बोट करें तो एक सच्चे हिन्दू राजनीतिक दल को दो तिहाई बहुमत मिलेगा।
आज धर्मनिर्पेक्षतावादी ,उग्र हिन्दूओं द्वारा मुसलमानों व अन्य अल्पसंख्यकों पर किए गए छुट-पुट हमलों की बात करते हैं। लेकिन इन में से अधिकतर हमले कांग्रेस सरकारों द्वारा नियोजित रूप से करवाए गए, न कि संगठित हिन्दूओं द्वारा। जबकि ISI व पाकिस्तान की सेना द्वारा प्रयोजित व नियोजित हमलों को छोड़ दें तो मुसलमानों द्वारा किए गए अधिकतर हमले गैर राज्य उपद्रवियों द्वारा किए गए।
कट्टरपंथी मुसलमान हिन्दूओं को निरूत्साहित करने के लिए हिन्दूओं को निशाना बनाकर हमले करते हैं ताकि हिन्दू अपने उन अधिकारों को छोड़ दें जो कि उन्हें नहीं छोड़ने चाहिए। इन हमलों का मूल उद्देशय भारतीय संस्कृति को कमजोर कर अन्त में भारत को समाप्त करना है। ये 1000 वर्ष से लड़े जा रहे हिन्दूविरोधी-भारतविरोधी युद्ध का वो अधूरा उद्देश्य है जिसकी बात ओसामाविन लादेन अक्कसर करता है।असल में मुसलिम आतंकवाद वही हथियार है जिसका उपयोग सुहरावर्दी और जिन्ना द्वारा 1946 में हिन्दूओं को पाकिस्तान बनाने की मांग मानने को मजबूर करने के लिए वंगाल में किया गया। कांग्रेस पार्टी ने हिन्दूओं का प्रतिनिधि बनकर मुसलिम आतंकवाद के आगे घुटने टेकते हुए देश के भारत का 25% हिस्सा धर्मनिर्पेक्ष थाली में सजाकर मुसलिम आतंकवादी जिन्ना के हबाले कर दिया। अब ये मुसलमान वाकी बचे 75% हिस्से पर आतंकवाद को हथियार बनाकर कब्जा करना चाहते हैं।
हिन्दूविरोधी ताकतें

हम ये नहीं कहते कि इस्लाम को छोड़कर किसी और ने हिन्दूओं
को निसाना नहीं बनाया।आजादी के बाद के 6 दशकों में अंग्रेजो के
सम्राज्यबाद से प्रभावित इ वी रामास्वामी के नेतृत्व वाले,द्रविड़यन
अन्दोलन ने तर्कशीलता के नाम पर हिन्दू धर्म को तर्कहीन करार
देने की कोशिश की और हिन्दू धर्म का प्रचार करने वाले पुजारियों
को आतंकित कर हिन्दू धर्म का प्रचार करने से रोकने की कुचेष्ठा
की।

आंदोलन के संगठनात्मक हाथ, द्रविड़ कझगम (डी के) ने 50 वर्ष तक इसलिए राबण की पूजा की ताकि हिन्दूओं द्वारा भगवान राम की अराधना करने का उपहास उड़ाया जा सके व माता सीता के अपहरण को जायज ठहराकर हिन्दूओं को अपमानित किया जा सके। लेकिन जैसे ही द्रविड़ कझगम (DK) को ये पता चला कि रावण एक ब्राह्मण भगवान होने के साथ-साथ शिव का एक पवित्र भक्त भी था,तो इसने राबण की पूजा करनी बन्द कर दी।रामायण के अपमान की इस नीचता को छोड़ने के बाद DK ने अब उस भारत विरोधी LTTE का समर्थन करना शुरू कर दिया जिसने श्रीलंका में तमिल–हिन्दू नेताओं को मारने में विशेसज्ञता हासिल कर ली है। वेशक अब LTTE के नाश के बाद DK अनाथ हो गई है।
गृह-युद्ध की स्थिति
1960 के दशक में ईसाई मिशनरियों ने नागा लोगों को भारत के विरूद्ध भड़काया। जिसके परिणामस्वारूप अब नागा भी भारत से नागालैंड को अलग करवाकर भारत को और विभाजित करना चाहते हैं।
1980 के दशक में विदेश में प्रक्षिक्षण प्राप्त भारतविरोधी ईसाई आतंकवादियों ने मणिपुर में हिन्दूओं को निशाना बनाया। ईसाई आतंकवादियों द्वारा मणिपुर में रहने वाले लोगों को धमकी दी गई कि या तो भारत का विरोध करो या फिर मरने के लिए तैयार हो जाओ।
1986 से खासकर 1990 के दशक में कशमीर में इस्लामिक आतंकवादियों ने हिन्दूओं को निशाना बनाकर उनकी मां-बहन-वेटियों को अपनानित करने के साथ-साथ हिन्दूओं का बड़े पैमाने पर कत्लयाम कर उन्हें कशमीर घाटी छोड़ने को मजबूर किया।
अब बड़े स्तर पर इस बात को माना जाने लगा है कि मुसलिम आतंकवादी हिन्दूओं को निशाना बनाकर हमले कर रहे हैं व भारत के मुसलमान इन हमलों को मौन स्वीकृति दे रहे हैं। मुसलिम आतंकवादियों के विदेशी संरक्षक अब आतंकवादी हमलों को कुछ इस तरह का अन्जाम दे रहे हैं ताकि मुसलमानों को हिन्दूओं के विरूद्ध राष्ट्रीय स्तर पर लड़ाया जा सके जिससे भारत में सर्विया और वोसनिया की तरह गृह युद्ध छेड़ा जा सके ।
मुसलमानों को 'उदारवादियों' और 'चरमपंथियों में विभाजित नहीं किया जा सकता है क्योंकि जब भी चरमपंथी मुसलमानों के विरूद्ध कदम उठाए जाते हैं तब तथाकथित उदारवादी उनकी ढ़ाल बनकर खड़े हो जाते हैं। पाकिस्तान की असैन्य सरकार ने पतंगवाजी पर सिर्फ इसलिए प्रतिबन्ध लगा दिया क्योंकि तालिवान पतंगवाजी को हिन्दूओं का खेल मानते हैं। मलेशिया और कजाकिस्तान की उदारबादी सरकारें हिन्दू-मन्दिरों को गिरा रहीं हैं।
*सामूहिक प्रतिक्रिया *
इसलिए भारत में आतंकवाद से निपटने के लिए, भारतविरोधी इस्लामिक आतंकवाद के हाल के इतिहास से हमें सबसे पहला सबक ये सीखने की जरूरत है कि आतंकवाद के निशाने पर हिंदू हैं और भारत के मुसलमानों को धीमी प्रतिक्रियाशील प्रक्रिया के द्वारा आतंकवादी बनने के लिए क्रमादेशित किया जा रहा है ताकि वो हिन्दूओं के विरूद्ध आत्मघाती हमले करने पर अमादा हो जायें। हिंदू मानस को कमजोर करने और गृहयुद्ध का डर पैदा करने के लिए इन आतंकवादी हमलों को अन्जाम दिया जा रहा है।
और इसलिए क्योंकि आतंकवादियों के निशाने पर हिन्दू हैं, हिन्दूओं को हिन्दूओं के रूप में ही भारतविरोधी आतंकवादियों के विरूद्ध संगठित होकर जबाबी कार्यवाही करनी चाहिए ताकि कोई हिन्दू खुद को अलग थलग या लालचार महसूस न करे। हिन्दू को इसलिए आतंकवाद से मुंह नहीं फेर लेना चाहिए कि अभी तक उसके परिवार का कोई सदस्य इस आतंकवाद का सिकार नहीं हुआ है।
आज अगर एक हिन्दू सिर्फ इसलिए मारा जाता है क्योंकि वह हिन्दू ता तो यह सब हिन्दूओं की नैतिक मौत है। ये विराट हिन्दू का एक जरूरी और आबश्यक मानसिक रवैया है।( विराट हिन्दू की अबधारणा की अधिक जानकारी के लिए मेरी ‘Hindus Under Siege: The Way Out Haranand, 2006).’ देखें।
इसलिए हमें मुसलिम आतंकवाद का सामना करने के लिए हिन्दू के नाते सामूहिक मानसिकता की जरूरत है। इस जबाबी कार्यवाही में भारत के मुसलमान भी हमारे साथ आ सकते हैं अगर वो सच में हिन्दूओं के कत्लयाम के विरूद्ध हैं तो। मैं नहीं मानता कि भारतीय मुसलमान हिन्दूओं पर हो रहे अत्याचारों के विरूद्ध तब तक हमारे साथ आयेंगे जब तक वो इस सच्चाई को स्वीकार नहीं करते कि वेशक वो आज मुसलिम हैं लेकिन उनके पूर्वज भी हिन्दू ही हैं।
अपने पूर्वजों के वारे में इस सच्चाई को स्वीकार करना मुसलमानों के लिए आसान नहीं है क्योंकि मुसलिम मुल्हा इसका इसलिए विरोध करेंगे क्योंकि इस सच्चाई को स्वीकारने के बाद एक तो भारतीय मुसलमानों में इस्लाम से मिली आत्मघाती कट्टरता कमजोर हो जाएगी और दूसरा इस सच्चाई को जानने व स्वीकारने के बाद उनकी हिन्दू धर्म में घर बापसी की सम्भावनायें बढ़ जायेंगी। कहीं भारतीय मुसलमान इस सच्चाई को स्वीकार न कर लें इसीलिए मुसलमानों के धार्मिक नेता हर हाल में काफिर बोले तो हिन्दूओं के विरूद्ध हिंसा और नफरत का प्रचार प्रसार करते रहते हैं।(उधाहरण के लिए आप कुरान के अध्याय 8 की आयत 12 पढ़ सकते हैं।) इस्लामिक आतंकवादी संस्था सिमी(SIMI) पहले ही यह घोषणा कर चुकी है कि भारत दारूल हरब है और SIMI इसे दारूल इस्लाम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत का दारूल हरब होना, मुसलमानों को हिन्दूओं का कत्लयाम करने ,हिन्दूओं के मान सम्मान को ठेस पहुंचाने ,हिन्दूओं की मां-बहन-बेटियों की इज्जत आबरू के साथ खिलबाड़ करने के साथ साथ उन्हें हिन्दूओं के प्रति हर तरह के नैतिक बन्धनों से मुक्त करता है क्योंकि मुसलमानों को कुरान व हदीस में दारूल हरब को दारूल इस्लाम बनाने के लिए ये सब करने का आदेश दिया गया है।
बृहद हिन्दू समाज
परन्तु फिर भी अगर कोई मुसलमान इस बात को स्वीकार करता है कि उसके पूर्बज हिन्दू हैं तो हम उसे बृहद हिन्दू समाज बोले तो हिन्दूस्तान के अंग के रूप में स्वीकार कर सकते हैं।भारत अर्थात इंडिया अर्थात हिन्दुस्तान हिन्दूओं और अन्य जिनके पूर्बज हिन्दू हैं उन सबका देश है। यहां तक कि भारत में रहने वाले पारसियों और यहूदियों के पूर्बज भी हिन्दू ही थे। अन्य जो भारत से अपना खून का रिस्ता होने की बात को अस्वीकार करते हैं या फिर जिनका भारत से खून का रिस्ता है ही नहीं या फिर वो दिदेशी जो मात्र पंजीकरण की बजह से भारतीय नागरिक बने हैं वो भारत में रह तो सकते हैं लेकिन उन्हें बोट डालने का अधिकार नहीं दिया जा सकता (मतलब वो चुने हुए प्रतिनिधि नहीं हो सकते)।
इसलिए आतंकबाद का मुकाबला करने बालीनीतिपर अमल करने से पहले हर और प्रतेक हिन्दू का प्रतिबद्ध और बिराट हिन्दू बनना जरूरी है। किसी भी व्यक्ति को बिराट हिन्दू बनने के लिए एक हिन्दू मानसिकता रखना मतलब उसकी एक ऐसी मानसिकता होना जरूरी है जो व्यक्तिगत और राष्ट्रीय चरित्र के अन्तर को समझ सके।
बिराट हिन्दू होने के लिए किसी हिन्दू का पबित्र, इमानदार और पढ़ा-लिखा होना ही काफी नहीं है।ये सब व्यक्तिगत चरित्र के अंग हैं। राष्ट्रीय चरित्र वो मानसिकता है जो सक्रिय व पूरी ताकत से देश की पबित्रता और अखण्डता के लिए प्रतिबद्ध रहती है।उधाहरण के लिए मनमोहन सिंह(प्रधानमन्त्री) का व्यक्तिगत चरित्र तो ठीक दिखता है परन्तु अर्द्ध साक्षर सोनिया गांधी की एक रबर स्टैंप की तरह काम करते हुए हर राष्ट्रीय मुद्दे पर घुटने टेक देने की वजह से ये साबित हो चुका है कि उसका कोई राष्ट्रीय चरित्र नहीं है।
भारत में आतंकवाद से निपटने के लिए, भारतविरोधी इस्लामिक आतंकवाद के हाल के इतिहास से हमें दूसरा सबक ये सीखना चाहिए कि क्योंकि आतंकवादियों का उदेश्य हिन्दूओं का मनोबल तोड़ना और हिन्दू संस्कृति को समाप्त करने के लिए भारत के हिन्दू आधार को तबाह करना है इसलिए हमें आतंकवादियों के आगे न तो हथियार डालने चाहिए और न ही आतंकवादियों की किसी भी मांग को मानना चाहिए। आतंकवाद से लड़ने की किसी भी नीति का मूल आधार यही होना चाहिए कि हम आतंकवादियों की किसी भी मांग को किसी भी हालात में नहीं मानेंगे।हमारे हाल के इतिहास में इसनीतिपर विलकुल भी अमल नहीं किया गया। जबसे हमने 1947 में मुसलिम आतंकवादियों के दबाब में पाकिस्तान बनाने की मांग को स्वीकार किया है तब से हम दबाब में बार-बार आतंकवादियों के आगे घुकने टेक देते हैं।
आतंकवादियों के सामने घुटने टेकने की घटनायें।
1989 में मुफ्ती मुहम्द सैयद की वेटी रूविया को आतंकवादियों से मुक्त करवाने के लिए वी पी सिंह सरकार द्वारा भारतीय जेलों से पांच आतंकवादियों को छोड़ दिया गया।
इस घटना ने अपराधियों को कशमीरी अलगाववादियों व उनके समर्थकों की आँखों में नायक बना दिया ।क्योंकि इन अपराधियों ने हिन्दूओं की सरकार को घुटने टेकने पर मजबूर कर देने में सफलता हासिल की थी।रूविया को छुड़ाने के लिए आतंकवादियों के आगे घुटने टेकना जरूरी नहीं था।
भारत के आधुनिक इतिहास में आतंकवादियों के आगे घुटने टेकने की सबसे शर्मनाक घटना तब घटी जब 1999 में आतंकवादियों ने भारतीय विमान सेवा की उड़ान IC-814 को अगवा कर कन्धार पहुंचा दिया। सरकार ने न्यायालय से आज्ञा लिए विना ही तीन आतंकवादियों को छोड़ दिया। मानो देश को शर्मशार करने के लिए इतना ही काफी न हो आतंकवादियों को पाकिस्तान में धकेलने के बजाए, उनके साथ एक बिशेष अतिथी जैसा बर्ताव करते हुए प्रधानमन्त्री के विमान में विठाकर एक बरिष्ठ मन्त्री द्वारा कन्धार पहुंचाया गया।
ये तीनों आतंकवादी कन्धार में छोड़े जाने के बाद वापिस पाकिस्तान गए। पाकिस्तान जाकर इन तीनों आतंकवादियों ने हिन्दूओं को कत्ल करने के लिए तीन अलग-अलग आतंकवादी संगठन बनाए।मुहम्दहजर जिसे ततकालीन सुरक्षा सलाहकार ब्रजेस मिश्र ने मेमना बताया था ने छोड़े जाने के बाद लश्करे तैयावा की कमान सम्भाली ।लश्करे तैयवा वह गिरोह है जिसने श्रीनगर से लेकर बंगलौर तक हिन्दूओं को लहुलुहान करने के लिए बार-बार हमलों को अन्जाम दिया। अजहर ने मध्य 2000 से लेकर अब तक 2000 से अधिक हिन्दूओं का खून बहाया।यही अजहर दिसम्बर 13, 2001 में संसदभवन पर हुए हमले के लिए भी जिम्मेदार है। तीसरा आतंकवादी जरगर अल-मुझाहिदीन-जंगान की स्थापना करने के बाद आजकल डोडा और जम्मू में हिन्दूओं का खून बहा रहा है।
कन्धरा में की गई ये मुर्खता हमें के सबक देती है कि हमें कभी भी, किसी भी हालात में आतंकवादियों के आगे घुटने नहीं टेकने चाहिए। अगर आप आतंकवादियों के आगे घुटने टेकते हैं तो आप घुटने टेक कर बचाए गए हिन्दूओं से कहीं ज्यादा हिन्दूओं का कत्ल करवायेंगे। इसलिए आतंकवादियों से किसी भी तरह की सौदेबाजी पर लगाम लगाकर ,आतंकवादियों के सर्वनाश के लिए आगे बढ़ना चाहिए।
सच का सामना
भारत में आतंकवाद से निपटने के लिए, भारतविरोधी इस्लामिक आतंकवाद के हाल के इतिहास से हमें तीसरा सबक ये सीखना चाहिए कि आतंकवादी घटना कितनी भी छोटी या कम महत्व क्यों न हो देश को जबाबी कार्यवाही हर हाल में करनी चाहिए---आतंकवादी घटना के बराबर या फिर विनम्र कार्यवाही नहीं वल्कि आतंकवादियों और उनके समर्थकों को सबक सिखाने के लिए पूर्ण कार्यवाही।
उधाहरण के लिए अय़ोध्या पर किया गया आतंकवादी हमला वेशक बड़ा हमला नहीं था लेकिन हमें आतंकवादियों के हमले पर जबाबी कार्यवाही करते हुए अयोध्य में एक भव्य राम मन्दिर का पुनरनिर्माण करना चाहिए था।
ये कलियुग है इसलिए हिन्दू विरोधी आतंकवादियों व उनके समर्थकों के प्रति किसी भी सातविक प्रतिक्रिया के लिए कोई जगह नहीं है। हिन्दू धर्म में आपाकलीन धर्म का प्रावधान है जिसपर हमें आज के हालात में अमल करना चाहिए। ये हमारे लिए सच्चाई का सामना करने का वक्त है। एक सभ्यता के रूप में अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए या तो हमें हिन्दू के रूप में संगठित होकर हिंसक व अत्याचारी इस्लामिक आतंकवादी हमले का मुकावला करना चाहिए या फिर परसियन,वेवीलोनियन और मिश्र की सभ्यता की तरह नष्ट होने के लिए तैयार हो जाना चाहिए। ये सभ्यतायें अत्याचारी इस्लामिक आतंकवादी हमले का संगठित होकर मुकावला करने में असमर्थ रहीं इसलिए इनका सर्वनाश हो गया। हमें शाम, दाम, दण्ड, भेद नियम का पालन करते हुए हर हाल में अत्याचारी इस्लामिक आतंकवाद का सर्वनाश सुनिश्चित करना चाहिए वरना ये राक्षश हमें समाप्त करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
गरीबी आतंकवाद का कोई कारक नहीं
भारत में इस्लामिक आतंकवादियों को प्रेरणा कहां से मिलती है? बहुत से लोग हिन्दूओं को ये सलाह देते हैं कि मुसलिम आतंकवादियों पर जबाबी हमले करने के बजाए आतंकवाद के मूल कारण को खत्म करें। ये लोग मूल कारण भी बताते हैं।
निर्दोष हिन्दूओं का खून बहाने वाले आतंकवादियों के लिए हर तरह की सहानुभूति रखने वाले खूनी उदारवादी हमे बताते हैं कि आतंकवाद के पनपने व बढ़ने का कारण अनपढ़ता, गरीबी, शोषण और भेदभाव है। ये तथाकथित उदारबादी कुतर्क देते हैं कि इन आतंकवादियों का खात्मा करने पर जोर देने के बजाए आतंकवाद के इन चार कारणों को खत्म किया जाए। इन चार कारणों के समाप्त होते ही आतंकवाद खत्म हो जाएगा। इन प्रशनों का उतर देने से पहले ये समझ लेना बहुत जरूरी है कि मुझें नहीं लगता ये कातिल उदारवादी या खूनी बुद्धिजीवी भारत के प्रति बफादार हैं। ये हर व्यक्ति की भावनात्मक ताकत को खत्म कर उसे जिन्दा मुर्दा बना देना चाहते हैं। मतलब मजबूरी को ये हिन्दूओं की मानसिकता का अंग बना देना चाहते हैं। इस तरह की हीन भावना के साथ कोई भी देश य़ा समाज लम्बे समय तक जीवित नहीं रह सकता।
ये कहना बकवास है कि जो आतंकवादी आज तक हमले कर लाखों हिन्दूओं का खून बहा चुके हैं वो गरीब हैं।उधाहरण के लिए दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवादी ओसामा विन लादेन अरबपति है।खनिज तेल से वेहिसाब पैसा कमाने वाले अमीर देश मुसलिम आतंकवादियों को संरक्षण और आर्थिक मदद पहुंचाते हैं। ब्रिटेन में आतंकवादी हमलों को अन्जाम देने के दोषी सबके सब आतंकवादी साधन सम्पन मुसलमान हैं।
मुसलिम आतंकवादी अनपढ़ भी नहीं हैं। आतंकवादियों के अधिकतर सरगना डाकटर,चार्टड एकौंटैंट(CA),एम बी ए(MBA) और अध्यापक हैं। उधाहरण के लिए दिल्ली में धनतेरस के दिन सैंकड़ों हिन्दूओं का कतल करने वाला आतंकवादी रसायन विज्ञान में सनातकोतर है व टायम सुकेयर पर हमले का असफल प्रयास करने वाला आतंकवादी सहजाद MBA है वो भी अमेरिका के एक उच्चस्तरीय विश्वविद्यालय से।
उसका सबन्ध पाकिस्तान के एक अमीर परिबार से है। निश्चित तौर पर उसने अपने ही देश पाकिस्तान में किसी भी तरह का भेदभाव नहीं सहा।11 सित्मबर,2001 को जिन 9 लोगों के गिरोह ने चार हबाई जहाजों को अगवा कर World Trade Towers सहित अन्य जगहों को निशाना बनाया निश्चित तौर पर उनके साथ भी अमेरिका में किसी तरह का भेदभाव या शोषण नहीं हुआ था। इसलिए ये कहना कि आतंकवाद गरीब आतंकवादियों की देन है पूरी से मूर्खतापूर्ण है।
अगर हम बांमपंथी उदारवादी कुतर्क को मान भी लें तो क्या बामपंथी इस बात से सहमत हैं कि मुसलिम देशों में प्रताड़ित सबके सब गैर मुसलमानों को आतंकवादी बनकर मुसलमानों का कत्ल करना चाहिए। कशमीर घाटी जहां पर मुसलमान बहुमत में हैं वहां पर घारा 370 लगाकर बहुसंख्यक मुसलमानों को विशेषाधिकार दिए गए हैं व अल्पसंखयक हिन्दूओं का कत्लयाम किया गया ,हिन्दूओं की मां-बहन वेटियों के साथ बालातकार किए गए, अन्त में उन्हें वहां से जगा दिया गया।वो अपने ही देश में वेघर होकर दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं तो क्या ये उदारबादी उनके द्वारा मुसलमानों के विरूद्ध हथियार उठाने पर उनका बैसा ही साथ देंगे जैसा वो आज तक हिन्दूओं का कत्ल करने वाले मुसलिम आतंकवादियों का देते आए हैं?
यह कहना कि क्योंकि आतंकवादी मरने-मारने को तैयार हैं,वे अपना विवेक खो चुके हैं,उनका कोई घरबार नहीं है इसलिए उनका कत्ल नहीं किया जाना चाहिए। आतंकवादियों के सरगनाओं की इस आतंकवाद रूपी पागलपन में भी एक सोची समझी रणनीति और योजना है जिसके लिए उन्होंने निश्चित राजनीतिक उद्देश्य चुने हैं। इसलिए हमें आतंकवादियों को कुचलने के साथ-साथ एक ऐसी रणनीति पर अमल करना है जो आतंकवादियों के उद्देश्यों को पूरी तरह से विफल कर दे। ऐसी रणनीति कैसे बनाई जा सकती है। राबर्ट टरैगर और देशीसलाबा(Robert Trager and Dessislava Zagorcheva) ने शोध पत्र आतंकवाद का मुकाबला((‘Deterring Terrorism’ International Security, vol 30, No 3, Winter 2005/06, pp 87-123) में आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए रणनीति बनाने के लिए समान्य सिद्धांत बताए हैं।
सामरिक योजना
अगर मुसलिम समाज आतंकवादियों के इन उद्देश्यों को गैरइस्लामिक घोषित कर इनकी निंदा और विरोध नहीं करता है तो इन सिद्धांतों का उपयोग कर मैं इस्लामिक आतंकवादियों के राजनैतिक उदेश्यों को असफल करने के लिए निम्नलिखित सामरिकनीतिका समर्थन करता हूं।
षडयन्त्र-1 :-कशमीर पर भारत को आतंकित करना।
रणनीति-1:- धारा 370 समाप्त कर,भूतपूर्व सैनिकों को कशमीर घाटी में बसाना। कशमीरी हिन्दूओं के लिए पुनन कशमीर का निर्माण करना,बलूचियों और सिंधियों को आजादी के लिए सहायता देना।
षडयन्त्र-2:- हमारे मन्दिरों में बम धमाके कर भक्तों का कत्ल करना।
रणनिति-2:- जैसे को तैसानीति अपनाते हुए काशी विश्वानाथ मन्दिर परिसर सहित 300 अन्य जगहों से मसजिदों को हटाना।
षडयन्त्र :-3 भारत को दारूल इस्लाम बनाना ।
रणनिति-3:- भारत में एक समान नागरिक संहिता लागू करना,पढ़ाई के लिए संस्कृत को अनिवार्या बनाना,वन्देमातरम् का गान जरूरी करना और भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित कर सिर्फ उन्हीं गैर हिन्दूओं को बोट का अधिकार देना जो गर्व से ये स्वीकार करें कि उनके पूर्बज हिन्दू हैं। भारत का हिन्दूस्तान(हिन्दूओं और उन गैर हिन्दूओं का देश जिनके पूर्बज हिन्दू हैं) के रूप में पुन : नामकरण करना।
षडयन्त्र-4 अवैध आप्रवास, धर्मांतरण, और परिवार नियोजन को अपनाने से इनकार द्वारा भारत की जनसांख्यिकी बदलें.
रणनिति-4:- देश में एक ऐसा राष्ट्रीय नियम लागू करें जिसके अनुसार हिन्दू धर्म से किसी भी अन्य धर्म में धर्मांतरण करना बर्जित हो। किसी भी अन्य धर्म से हिन्दू धर्म में घर वापसी इसमें प्रतिबन्धित नहीं होनी चाहिए। गैर हिन्दूओं द्वारा अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी जाति में घर वापसी करने का स्वागत करें बशर्ते वे अनशासन का पालन करने को तैयार हों। भारत में रहने वाले अबैध वंगलादेशियों की शंख्या के अनुशार बंगलादेश की जमीन पर कब्जा कर लिया जाए। आज की संख्या के अनुसार सिलहट से खुलना तक के उतर का एक-तिहाई भारत को अबैध रूप से भारत में रह रहे बंगलादेशियों को बसाने के लिए अपने कब्जे में ले लेना चाहिए।
षडयन्त्र-5 हिन्दूओं के अन्दर आत्मगलानी का बोध पैदा करने व उन्हें आत्म समर्पण के लिए मजबूर करने के मकसद से मस्जिदों, मदरसों और चर्चों में अश्लील लेखन और उपदेश के माध्यम से हिंदू धर्म को बदनाम करना।
रणनिति-5:- हिन्दू मानसिकता के विकाश का प्रचार-प्रसार करें( मेरी नई पुस्तक ‘हिंदुत्व और राष्ट्रीय पुनर्जागरण’ Haranand, 2010 देखें।)
समाधान का समय
भारत इस तरह की रणनीति अपनाकर सिर्फ पांच बर्षो में अपनी आतंकवाद की समस्या का समाधान निकाल सकता है परन्तु इसके लिए हमें आतंकवाद द्वारा सिखाए गए उपरलिखित चार सबक हर समय याद रखने होंगे और राष्ट्र की रक्षा के लिए साहसिक,जोखिम भरे व कठोर कदम उठाने के लिए हिन्दू मानसिकता का निर्माण करना होगा।यदि यहूदियों को गैस चैंबरों में जलाए जाने के लिए मिमयाते हुए जाने वाले मेमनों से ज्वलंत शेर में सिर्फ 10 वर्ष में बदला जा सकता है तो हिन्दूओं के लिए तो उनसे कहीं वेहतर हालात (आज भी हम भारत का 83 प्रतिशत हैं) में ये काम सिर्फ पांच वर्ष में करना किसी भी तरह से मुशकिल नहीं है।
परम्पूजनीय गुरूगोविन्द सिंह जी द्वारा हमें पहले ही रास्ता दिखा दिया गया है कि किस तरह सिर्फ पांच निडर लोग आध्यात्मिक मार्गदर्शन में सारे समाज को बदल सकते हैं।यहां तक कि अगर आधे हिन्दू मतदाता भी संगठित होकर हिन्दू के रूप में, इमानदारी से हिंदू एजेंडा के लिए प्रतिबद्ध पार्टी को,बोट डालने के लिए प्रोतसाहित किए जा सकें तब भी हम परिवर्तन के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर सकते हैं। और अंततः सच्चाई के इस क्षण में एक लोकतांत्रिक हिंदुस्तान में यही आतंकवाद से लड़ने की रणनीति में निम्नतम जरूरत है।

सोमवार, 3 अक्टूबर 2011

दिगविजय सिंह को समझना चाहिए कि बुरे काम का अन्जाम बुरा ही होता है…


दिगविजय सिंह कह रहा है कि वह देशभक्त है और उसका अपमान किया जा रहा है जिससे उसके परिबार व मित्रों को कष्ट हो रहा है ।इस कष्ट से बचने के लिए उसने कोर्ट में केश दर्ज करवा दिया है। इसमें कोई सन्देह नहीं कि जो लोग दिगविजय से प्यार करते हैं वो लोग ऐसे चित्रोंDigi को देखकर जरूर दुखी हुए होंगे।
ये चित्र सही हैं या गलत इस बात का फैसला करने के लिए हमें दिगविजय सिंह द्वारा अपमानित किए गए संगठनों, सन्तों व सुरक्षाबलों के करोड़ों देशभक्त समर्थकों के कष्टों को भी समझना होगा।
दिगविजय द्वारा प्रताड़ित किए गए देशभक्तों की संख्या इतनी अधिक है कि अगर दिगविजय ऐसे लाखों केस भी दर्ज करवा दे तो भी इन प्रताड़ित देशभक्तों के आक्रोश से बचना अगर नामुमकिन नहीं तो असम्भव जरूर है।
दिगविजय के मित्रों को भगवान से प्रार्थना करनी चाहिए कि ये मानसिक रूप से प्रताड़ित देशभक्त सिर्फ अपनी कलम से ही अपने आक्रोश और क्षोभ को शान्त कर ले वरना दिगविजय द्वारा दिए गए बोल बचन तो ऐसे हैं कि कोई भी कम संयम वाला देशभक्त अपना आपा खोकर दिगविजय द्वारा दी जा रही मानसिक प्रताड़ना से मुक्ति पाने के लिए कोई भी extreme कदम तक उठा सकता है जिसमें आत्मवलिदान से लेकर प्रताड़ित करने वाले से छुटकारा तक कुछ भी हो सकता है।
दीगविजय ने कहा
“ स्वामी राम देब को पत्तथर बान्ध कर तबतक पानी में डुवोए रखना चाहिए जब तक उनके प्राण न निकल जायें”
देशभक्त कहते हैं कि “भारतीय संस्कृति के ध्वजबाहक स्वामी राम देब जी जैसे प्रखर देशभक्त का अपमान करने वाले पापी को इतने डुकड़ों में विभाजित कर देना चाहिए कि उन टुकड़ों को चील-कऊए भी चोंच से उठाने में संकोच करें।”
दिगविजय ने कहा “स्वामी रामदेव ठग था ठग है और ठग रहेगा”
देशभक्त कहते हैं “दिगविजय गद्दार था गद्दार है और गद्दार रहेगा”
अपनी सिकायत में दिगविजय खुद को देशभक्त बताता है ।
हम आपसे जानना चाहते हैं कि “क्या कोई देशभक्त ,अपने जीवन का वलिदान देकर देशवासियों की रक्षा के लिए आतंकवादियो का अन्त सुनिस्चित करने वाले ,शहीद मोहन चन्द शर्मा की शहीदी का अपमान कर  सकता है? ”
लेकिन दिगविजय ने आजमगढ़ के गांव संजरपुर का दौरा कर बटला हाउस मुठभेड़ में मारे गए आतिफ व साजिद नामक आतंकवादियों को न केवल निर्दोश बताया पर साथ ही उनके गोलीवारी में मारे जाने के तरीके पर प्रश्न खड़े कर अपनी गद्दारी की मानसिकता को सबके सामने उजागर कर दिया।
अगर शहीदों का अपमान करने वालों को देशभक्त कहेंगे तो भला गद्दार किसे कहेंगे?
दिगविजय की आधारहीन बातों से तंग अगर अन्ना anna hajare ji2जी हजारे जैसा मंझा  हुआ बुजुर्ग व्यक्ति दिगविजय को पागलखाने भेजने की सिफारिस करता है तो भला आप उस नौजवान से क्या उम्मीद करेंगे जो परमपूजनीय स्वामी राम देव जीRam Dev ji (2) के नेतृत्व में कालेधन को भारत बापस लाने के लिए प्रतिबद्ध है जो स्वामी जी को अपना गुरू,मार्गदर्शक व नेता सबकुछ मानता है।
अगर वो ऐसा चित्रDigi1 बनाकर अपना आक्रोश निकालता है तो दिगविजय को केश करने के बजाए अपनी जुवान पर लुगाम लगाने की कोसिस करनी चाहिए ताकि कोई नौजवान दिगविजय के बकवास से तंग आकर कोई ऐसा कदम न उठा बैठे जिससे दिगविजय के साथ-साथ उस नौजवान का जीवन भी दांव पर लगा जाए।
एकदिन दिगविजय  देशभक्तों के संगठन RSS को बमों की फैक्ट्री करार दे देते हैं । जो बात आज तक भारत की कट्टर दुशमन ISI या फिर अमेरिका की खुफिया ऐजेंसी FBI या पिर पिछले 6 वर्षों से RSS को फंसाने व बदनाम करने के लिए लगाई गई CBI जैसी गुप्तचर संस्था ने नहीं कही वो बात दिगविजय कहे तो फिर भला RSS से जुड़ा देशभक्त क्या करे ?
कोर्ट में जाए या फिर चित्र Digi4बनाकर अपमान का बदला अपमान से ले या पिर कलम उठाकर अपने आक्रोश को शब्दों के बाण चलाकर शान्त करे।
आओ जरा अब दिगविजय के असली चरित्र को पहचानें…
ये दिगविजय वो शैतान है जो भारत के इतिहास के सबसे बड़े आतंकवादी हमले जो मुम्बई पर हुआ था को RSS के बहाने हिन्दूओं द्वारा किया गया हमला बताता है ये हमला वो हमला है जिसे खुद  कांग्रेस की सरकार व अमेरिका पाकिस्तान द्वरा किया गया हमला बताते हैं जो हेडली की गिर्फतारी के बाद  अमेरिकी न्यायालय में भी साबित होने के करीब पहुंच गया है व कसाब की गिफ्तारी के बाद भारतीय न्यायलय में साबित हो चुका है।
अब आप बताओ दिगविजय देश के साथ इससे बड़ी और क्या गद्दारी कर सकता है?

ये दिगविजय वो दिगविजय है जो मानबता के शत्रु ओसामाविन लादेन Ladenको ओसामा जी कहकर भारत के मुसलमानों को आतंकवाद के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए उकसाता है ,उस ओसामाविन लादेन को जिसे कोई समझदार मुसलमान भी जी कहना पसंद नहीं करता। आप जरा सोचो कि अगर मुसलमानों के बच्चे ऐसे लोगों के उकसावे में आकर देश में आतंकवाद को बढ़ाबा देते हैं तो भला भारत के दुशमनों के अलाबा और कौन खुश हो सकता है?
ये दिगविजय, जो शान्तिप्रिए हिन्दूओं को आतंकवादी कहकर अपमानित करता है , आतंकवादियों के घर जाकर शहीदों के वलिदान पर प्रश्न उठाकर सुरक्षाबलों का मनोबल तोड़ता है ,सन्तों को ठग कहता है कत्ल करने की धमकी देकर डराता है अपने समर्थकों को उकसाता है,RSS को बमों की फैक्ट्री बताता है व मानबता के दुशमन आतंकवादी ओसामविन लादेन को जी कहकर अपना आदर्श बताता है ।
आप ही बताओ कि इस दिगविजय के काल्पनिक आरोपों व अपशब्दों से प्रताड़ित और आक्रोशित देशभक्त इसके साथ कैसा बर्ताब करें?

सोमवार, 5 सितंबर 2011

उमर अबदुल्ला के प्रश्नों का सही उत्तर क्या हो सकता है ?

बैसे तो अबदुल्ला परिबार की गद्दारी से हर देशभक्त परिचित है। लेकिन आज आतंकवादियों की फांसी को सांप्रदायिक रंग देने की जो घिनौनी हरकत इस गद्दार ने की है उसका उसी की भाषा में उतर देना जरूरी है।
सबसे पहले तो तमिलनाडु की विधान सभा की तुलना जम्मू-कशमीर की विधानसभा से करना ही गलत है क्योंकि एक तो जम्मू-कशमीर विधानसभा भारतविरोधी आतंकवादियों से भरी पड़ी है जबकि तमिलनाडु की विधानसभा में ऐसी कोई स्थिति नहीं है।
दूसरा जम्मू-कशमीर की विधानसभा में आतंकवादियों का बर्चस्व वानए रखने के लिए अबदुल्ला खानदान ने नैहरू खानदान की सहायता से जम्मू संभाग के लोगों को उनके हक से वंचित रखने के लिए जानबूझ कर जम्मू-संभाग में विधानसभा सीटों को कम रखा है । जबकि तमिलनाडु विधान सभा में ऐसी कोई गड़बड़ नहीं है।
जम्मू-कशमीर विधानसभा में बैठे आतंकवादियों ने सरकारी तन्त्र का प्रयोग कर कशमीरघाटी में हिन्दू-मिटाओ हिन्दू भगाओ अभियान चलाकर न केवल 60000 हिन्दूओं का कत्ल किया वल्कि 500000 हिन्दूओं को वेघर भी किया। मां-बहन वेटियों की इज्जत आबरू से खिलबाढ़ किया से अलग। अब आप ही बताओ कि कातिल राक्षसों से भरी पड़ी जम्मू-कशमीर विधानसभा की तुलना तमिलनाडु की विधानसभा से कैसे की जा सकती है?
राजीब गांधी पर हमला करने वालों की तुलना लोकतन्त्र के मन्दिर पर हमला करने वाले भारतविरोधी आतंकवादी से करना किसी भी तरह से जायज नहीं ठहराया जा सकता।
राजीब गांधी का कत्ल किसने किया ये अभी पूरी तरह सपष्ट नहीं है क्योंकि  एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी ने पहले राजीब गांधी के कत्ल का आरोप DMK पर लगाकर सरकार केन्द्र सरकार गिरा दी बाद 2004 में इसी एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी ने इसी DMK के साथ मिलकर सरकार बना ली।
जिस क्वात्रोची पर चर्च के इसारे पर वालासिंघम के माध्यम से LTTE प्रमुख प्रभाकरण को राजीब गांधी के कत्ल की सुपारी देने के आरोप लगे वही क्वात्रोची आज भी एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी का परिबारिक मित्र है जिसके लिए एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो कुछ भी कर गुजरने के लिए तैयार है।
अब जिन लोगों को फांसी की सजा सुनबाई गई उनमें से एक की सजा खुद एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो माफ कर चुकी तो स्वभाविक रूप से वाकी मुरूगन,स्नाथन व पेरारीवालन भी माफी की उमीद तो कर ही सकते हैं।
दूसरी तरफ मोहम्द अफजल खुद चीख-चीख कर कह रहा है कि कशमीरघाटी को काफिरों वोले तो हिन्दूओं से मुक्त करवाने के लिए उसने लोकतन्त्र के मन्दिर पर हमला किया। इतना ही नहीं उसके समर्थक मुसलिम आतंकवादी लगातार भारत को लहूलुहान करने की धमकियां दे रहे हैं जिनमें उमर-अबदुल्ला व गुलामनबी आजाद भी सामिल हैं। अगर इस राक्षस को फांसी नहीं दी जाती है तो इन आतंकवादियों के हौसले और बुलंद होंगे परिमास्वारूप भारत पर इनके हमले बढ जायेंगे।
हां एक बात जरूर है कि ये हमला अकेले मोहम्द अफजल ने नहीं किया था इसके साथ कुछ और लोग भी थे जैसे कि आतंकवादी  प्रोफैसर जिलानी व उसके अन्य भारतविरोधी आतंकवादी साथी। आतंकवादी प्रोफैसर जिलानी जैसे गद्दारों को कुलदीप नैयर जैसे पत्रकारों ने क्यों बचाया(कहीं ISI ऐजेन्ट मुहम्द फाई के आदेश पर तो नहीं) इन प्रश्नों का उतर भी देश की जनता को जानने का पूरा हक है।
मोहम्द अफजल के हमले में सुरक्षावलों के जवान मारे गय जबकि दूसरे हमले में एक नेता व उसके कुछ प्रशंसक मारे गय। दोनों में बहुत फर्क है ये नेता भारत पर भारतविरोधी कांग्रेस वोले तो  नैहरू खानदान का शासन बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा था जबकि सुरक्षावलों के जवान देश की अस्मिता की रक्षा के लिए संघर्ष करते हुए मारे गय।
ऐसा नहीं कि उमर अबदुल्ला पहली बार गद्दारी कर रहा है इससे पहले भी ये आतंकवादी सैनिकों पर हमला करने वाले अपने साथी 1200 मुसलिम आतंकवादियों पर से केश वापिस लेकर उन्हें सैनिकों पर हमला करने खुली छूट दे चुका है। हमला करते वक्त सैनिकों के हाथों मारे जाने पर अपने इन आतंकवादी साथियों का हौसला बानाए रखने के लिए पांच-पांच लाख रूपए की आर्थिक सहायता भी दे चुका है।
इतना ही नहीं ये आतंकवादी केन्द्र सरकार में बैठे अपने आतंकवादी मददगारों की सहायता से सैनिकों पर तरह-तरह के प्रतिबन्ध लगवाने में भी समर्थ रहा है।
अब आप खुद फैसला करो कि जिस राज्य का मुख्यमन्त्री गद्दार उमर अबदुल्ला जैसा आतंकवादी हो क्या वहां कभी शांति हो सकती है ?