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मोदीराज लाओ

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भारत बचाओ

शुक्रवार, 14 मई 2010

मन ये सोचने पर मजबूर हो जाता है कि हिन्दू ये सब कैसे और क्यों सहन कर गए ?





अधिकतर देशद्रोही चैनल तो जिहादियों का समर्थन करने व हिन्दुओं को अपमानित करने में मुस्लिम जिहादी आतंकवादियों को भी पीछे छोड़ देते हैं ।


अगर हम 1945 तक हुए हिन्दुओं के नरसहारों को न भी लिखें तो भी इन मुस्लिम जिहादियों ने 1946 के बाद ही हिन्दुओं पर इतने जुल्म ढाये हैं कि इनके बारे में सोचते ही रौंगटे खड़े हो जाते हैं ।
मन ये सोचने पर मजबूर हो जाता है कि हिन्दू ये सब कैसे और क्यों सहन कर गए ?इतना कुछ हो जाने पर भी ये गिरोह जो खुद को सैकुलर कहता है इन जिहादियों का साथ क्यों दे रहा है ?





क्यों इस गिरोह को हिन्दुओं के कत्ल करवाने में फखर महसूस होता है विजय का एहसास होता है ?


क्यों और कैसे ये गिरोह हिन्दुओं के हुए हर नरसंहार के बाद जिहादियों के पक्ष में महौल बनाने पर उतारू हो जाता है ?


क्यों ये गिरोह हिन्दुओं को धोखा देकर उन्हें ही कत्ल करवाने में कामयाब जो जाता है ?


क्यों ये गिरोह हिन्दुओं के आक्रोश से बच जाता है ?


क्यों हिन्दू एकजुट होकर हिन्दुओं के कातिलों व उनके समर्थकों पर एक साथ हमला नहीं बोलते ?


हम शुरू करते हैं 1946 से जब कलकता में मुसलमानों द्वारा किए गए हमलों में 5000 हिन्दुओं का कत्ल किया गया ।


फिर नवम्बर में पूर्वी बंगाल के नौखली जिला में हिन्दुओं का नरसंहार किया गया सब के सब हिन्दुओं को वहां से भगा दिया गया उनकी सम्पति तबाह कर दी गई ।


विभाजन के दौरान कम से कम 20 लाख हिन्दू-सिखों का कत्ल सिर्फ वर्तमान पाकिस्तान में किया गया ।


सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1947-1951 तक जिहादी मुसलमानों द्वारा किए गये अत्याचारों के परिणामस्वरूप एक करोड़ हिन्दू-सिख भारत भागने पर मजबूर किए गए ।


इसमें चौंकाने वाला तथ्य ये है कि वर्तमान भारत में भी इस दौरान हिन्दुओं पर हमले किए गए और तब की सैकुलर सरकार तमाशा देखती रही जिहादियों की रक्षा में लगी रही हिन्दुओं को मरवाती रही ।


फरवरी 1950 में 10,000 हिन्दुओं का ढाका और बंगला देश(तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) के अन्य भागों में नरसंहार किया गया । उसके बाद के कुछ महीनों में लाखों हिन्दुओं को वहां से भगाया गया ।


1950-60 के बीच में 50 लाख हिन्दुओं को मुस्लिम जिहादियों द्वारा पूर्वी पाकिस्तान से भारत भगाया गया ।


1971 में पाकिस्तानी सेना ने बांगलादेश मुक्ति अंदोलन के दौरान 25 लाख हिन्दुओं का कत्ल किया । जिसके परिणामस्वरूप अधिकतर हिन्दू सुरक्षा की खोज में भारत भाग आये ।


उस वक्त की सरकार ने इन हिन्दुओं की रक्षा के लिए क्या कदम उठाए ? कोई नहीं । आखिरकार बांगलादेश बनवाने का दावा करने वाले इन लोगों ने क्यों हिन्दुओं को लावारिस छोड़कर मरने पर मजबूर किया ?


सिर्फ इसलिए कि हिन्दू कभी संगठित होकर गैर हिन्दुओं पर हमला नहीं करता या फिर इसलिए कि कभी एकजुट होकर संगठित वोट बैंक नहीं बनाता ?


1989 में बांगलादेश में सैंकड़ों मन्दिर गिराए गए ।


1947 से 2000 के बीच जिहादी हमलों में 6 लाख चकमा बनवासियों का नामोनिशान मिटा कर मुसलमानों ने उनकी जमीन पर कब्जा कर उनकी औरतों को जबरन मुसलमानों के साथ विवाह करने को बाध्य किया ।


जागो ! हिन्दू जागो !


लड़ाई से भागो मत एकजुट होकर लड़ों वरना मिटा दिए जाओगे इन मुस्लिम जिहादियों व इनके आका धर्मनिर्पेक्षतावादियों द्वारा ।


1947-48 में मुसलमानों ने कश्मीर के जिस हिस्से पर कब्जा किया(पी ओ के) वहां से सब हिन्दुओं का नामोनिशान मिटा दिया गया ।


1985 में अलकायदा की स्थापना के बाद भारत समेत सारे भारत में मुस्लिम जिहाद के एक नये दौर की शुरूआत हुई ।


1986 में कश्मीर में जिहादियों द्वारा हिन्दुओं पर एक तरफा हमले शुरू किए गए । जिहादियों ने एक को मारो एक का बलात्कार करो सैंकड़ों को भगाओ की नीति अपनाई । मुसलमानों ने मस्जिदों से लाउडस्पीकरों द्वारा जिहाद का प्रचार प्रसार किया । उर्दू प्रैस के द्वारा भी जिहाद का प्रचार प्रसार किया गया । जिहाद शुरू होते ही हिन्दुओं के पड़ोसी मुसलमान ही उनके शत्रु बन गए । मुसलमानों ने संगठित होकर हिन्दुओं को निशाना बनाना शुरू किया ।


जिहादियों की भीड़ इक्ट्ठी होकर हिन्दुओं के घर में जाती उन पर हर तरह के जुल्म करने के बाद उनको दूध पीते बच्चों सहित हलाल कर देती । यहाँ समाचार दिया जाता पाकिस्तानी आतंकवादियों ने ये सब कर दिया । लेकिन सच्चाई यही थी कि हिन्दुओं को हलाल करने वाले उनके पड़ोसी मुसलमान ही होते थे। जो हिन्दुओं को कत्ल करने के बाद अपने-अपने घरों में रहते थे ।


कश्मीर के अधिकतर पुलिसकर्मी व महबूबामुक्ती जैसे नेता इस्लाम के नाम पर इन जिहादियों का हर तरह से सहयोग करते थे अभी भी कर रहे हैं । कई बार तो बाप व भाईयों के हाथ पैर बांध कर उनके परिवार की औरतों की इज्जत लूटकर उसके फोटो खींच कर बाप और भाईयों को ये सब देखते हुए दिखाया जाता था । बाद में ये तसवीरें हिन्दुओं के घरों के सामने चिपका दी जाती थी । परिणाम जो भी हिन्दू इन तसवीरों को देखता वही अपने परिवार की औरतों की इज्जत की रक्षा की खातिर भाग खड़ा होता । और उसके पास रास्ता भी क्या था सिवाय हथियार उठाने या भागने के । हिन्दुओं ने हथियार उठाने के बजाए भागना बेहतर समझा । क्योंकि अगर वो हथियार उठाते तो ये सैकुलर नेता उन्हें अल्पसंख्यकों बोले तो मुसलमानों का शत्रु बताकर जेल में डाल देते फांसी पर लटका देते ।


हमें हैरानी होती है इन धर्मनिर्पेक्षता की बात करने वालों पर जो हिन्दुओं पर हुए अत्याचारों के बारे में देश-दुनिया को जागरूक करने वालों को आतंकवादी कहते हैं, साम्प्रदायिक कहते हैं और इन सब जुल्मों-सितम को राजनीति बताते है हिन्दुओं को गुमराह करते है । ये सब दुष्प्रचार सिर्फ जिहादी ही नहीं बल्कि जिहादियों के साथ-साथ इनके ठेकेदार धर्मनिर्पेक्षता के पर्दे में छुपे ये राक्षस भी करते हैं जो अपनों का खून बहता देखकर भी अपनी आत्मा की आवाज नहीं सुनते । न केवल इन जिहादी आतंकवादियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ते हैं पर सरकार भी बनाते हैं और सत्ता में आने के बाद जिहादियों के परिवारों का जिम्मा उठाते हैं । उनको हर तरह की मदद की जिम्मेवारी लेते हैं जिहादी आतंकवादियों के परिवारों को आर्थिक सहायता देते हैं । हिन्दुओं को अपने घरों से भागने पर मजबूर करते हैं । जिहादियों के विरूद्ध सेना द्वारा कार्यवाही शुरू होने पर जिहादियों के मानवाधिकारों का रोना रोते हैं मतलब हर हाल में जिहादियों का साथ देते हैं ।


अगर आप सोचते हैं कि हम कोई पुरानी बात कर रहे हैं तो आप गलत हैं। जो कुछ कश्मीर में हिन्दुओं के साथ किया गया वो ही सबकुछ अब जम्मू के मुस्लिमबहुल क्षेत्रों में दोहराय जाने की तैयारी हो चुकी है तैयारी ही क्यों उसकी तो शुरूआत भी हो चुकी है पिछले दिनों जब डोडा उधमपुर में मई 2006 में 36 हिन्दुओं का कत्ल किया गया तो इस नरसंहार में बच निकलने में सफल हुए हिन्दुओं ने बताया कि उन्हें ये देख कर हैरानी हुई कि जो मुस्लिम जिहादी हिन्दुओं को इस तरह कत्ल कर रहे थे वो इन हिन्दुओं के पड़ोसी मुसलमान ही थे । जम्मू के मुस्लिमबहुल क्षेत्रों में इसके अतिरिक्त भी कई नरसंहार हो चुके हैं ।


पिछले दिनों हिमाचल के साथ लगते जम्मू के एक गाँव में गांव वालों ने जब एक मुस्लिम जिहादी को मार गिराया तो वहां के मुस्लिम जिहादी मुख्यमन्त्री के इशारे पर पुलिस इन गांव वालों की जान के पीछे पड़ गई । बेचारे गाँव वालों ने हिमाचल के चम्बा में छुप कर जान बचाई ।


जरा आप सोचो जो गुलामनबी आजाद माननीय न्यायालय से फांसी की सजा प्राप्त अफजल को निर्दोष कहता है क्या वो हिन्दुओं द्वारा मार गिराय गए जिहादी को आतंकवादी मान सकता है ?


क्या आपको याद है कि 20-20 बिश्व कप में भारत द्वारा पाकिस्तान को हरा देने के बाद जम्मू विश्वविद्यालय में देशभक्त हिन्दुओं द्वारा इस जीत की खुशी में भारत माता की जय बुलाय जाने के बाद किस तरह इन हिन्दुओं की पिटाई विशवविद्यालय के जिहादी मुसलमानों ने की और किस तरह सरकार के इशारे पर बाद में पुलिस ने उन दुष्टों के विरूद्ध कार्यवाही करने के बजाए इन देशभक्तों को ही निशाना बनाया ?


1993 तक कश्मीर में अधिकतर मन्दिर तोड़ दिय गए । आज सारे का सारा कश्मीर हिन्दुविहीन कर दिया गया है और ये गिरोह बात करता है हिन्दू आतंकवाद की साँप्रदायिकता की । कोई शर्म इमान नाम की चीज है कि नहीं । तब कहां चला जाता है ये सैकुलर गिरोह जब हिन्दुओं के नरसंहार होते हैं । तब तो ये सारा गिरोह जिहादियों का साथ देता है हिन्दुओं के नरसंहार करने वालों को गुमराह मुसलमान बताकर उनको सजा से बचाने के नय-नय बहाने बनाता है जिहादियों के समर्थन में सड़कों पर उत्तरता है ।


आप जितने मर्जी कानून बना लो अब जिहादियों द्वारा हिन्दुओं को निहत्था मरने पर कोई बाध्य नहीं कर सकता । जो हमला करेगा वो मरेगा । यह हमारी नहीं सब हिन्दुओं के उस मन की आवाज है जो लाखों हलाल हो रहे हिन्दुओं की चीखें सुन कर अब और हिन्दुओं को इस तरह न मरने देने की कसम उठा चुके हैं । जिहादियों को उनके किए की सजा जरूर मिलेगी और ऐसी सजा मिलेगी कि उनका हर हिन्दू के कत्ल में साथ देने वाले धर्मनिर्पेक्षता के चोले में छुपे ये राक्षस भी नहीं बचेंगे ।






23 टिप्‍पणियां:

kunwarji's ने कहा…

हिन्दू बेचारा नहीं है,उनको बेचारा जान सहम जाता है,

विनाश देखा है कई बार उसने,इसीलिए उन पर रहम खाता है,

अपनी बलि देकर भी शांत हो जाए माहौल,ये सोच मरता जाता है,

ना कुरेदो उसकी आत्मा को,भड़का तो तांडव भी वो मचाता है!

कुंवर जी,

सुनील दत्त ने कहा…

कुंबर जी ये गद्दार उसी तांडब के लिए मजबूर कर रहे हैं

बेनामी ने कहा…
इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.
बेनामी ने कहा…
इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.
इस्लाम की दुनिया ने कहा…

great post n i agree with u

बुरके वाली ने कहा…

nice posssssssssssst

Momin ने कहा…

momin ko bhi samajhne ki kosish karo. jehadiyon ke javab men jehadi mat bano.
momin

सुनील दत्त ने कहा…

ये दोनों टिपणीयां हमने इसलिए हटायी क्योंकि इनमें एक महान समाज सेबक सुरेश चिपलूकर जी को गलत ढंग से निशाना बनाया गया था।
@momin लोहे को काटने के लिए कम से कम लोहा तो बनना ही पड़ेगा डायमंड बन जाओ तो और भी अच्छा

नरेश चन्द्र बोहरा ने कहा…

यह सच है कि इस्लाम धर्म को मुसलमान खुद ही नहीं समझा सके हैं. इस्लाम में जो भी अच्छा लिखा है उसे मुल्लाओं और मौलवीयों ने कभी अपने अनुयायीयों को नहीं समझाया. केवल कट्टरता का पाठ ही पढ़ाया है. पूरे विश्व में आतंकवाद यही धर्म फैला रहा है. हर देश इस समस्या से जूझ रहा है. भारत भी इस समस्या से अब अछूता नहीं है बल्कि सर्वाधिक प्रभावित देशों में से एक है. आतंकवाद से हर धर्म के लोग प्रभावित है. मैं यहाँ माध्यम वर्ग और गरीब लोगों की बात कर रहा हूँ. इस तबके के लोगों का कोई धर्म नहीं है और यही वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित होता है. कोई भी तरह का दंगा हो यही तबका सबसे ज्यादा प्रभावित होता है. इस तबके में से ही हिन्दू मरते हैं और मुसलमान मरते हैं. कभी कोई नेता नहीं मरता. कभी कोई मुल्ला या पंडित नहीं मरता. आग लगाकर ये सभी अदृश्य हो जाते हैं और गरीब तथा असहाय लोगों को मरने के लिए छोड़ जाते हैं. कोई धर्म खराब नहीं होता.अच्छा और बुरा उसे माननेवाले बनाते हैं. अधिकाँश आतंकवादी मुसलमान है लेकिन सभी मुसलमान आतंकवादी नहीं है.
जरुरत है सभी अच्छे और समझदार लोगों के एक होकर आतंकवादीयों से मुकाबला करने की. हर धर्म मानवता का सन्देश देता है. किसी धर्म ने यह नहीं कहा कि खून-खराबा करो.
जहाँ तक आज तक के खुलासे का सवाल है इसे एक अलग ढंग से समझने की जरुरत है. ये वो ही इंसान है जिसका जिक्र मैंने पहले भी किया था. इस तरह के व्यक्ति किसी को भी नुकसान ही पहुंचाएंगे. इनके लिए कोई धर्म नहीं है. ऐसे लोग खुद को धर्म का ठेकेदार बताते हैं लेकिन वो सब कुछ करते हैं जो हमारे धर्म ने कभी नहीं कहा. हमारे धर्म ने कभी यह नहीं कहा की औरतोंको बाल पकड़कर मारीये. उनके पेट में लातें मारीये. ये इंसान नहीं है बल्कि इंसानीयत के नाम पर कलंक है और कुछ नहीं है.हिन्दू को जागृत किजीये लेकिन ऐसे लोगों की सहायत से कतई नहीं. जागृति विचारों की हो. हर समस्या शान्ति से सुलझती है. जब इंसान उग्र होता है तो सही-गलत का भान नहीं रहता है. गांधीजी ने इसी से हमें आजादी दिलाई है. लेकिन यह भी सच है की आतंकवाद को इससे नहीं निपटा जा सकता. कम से कम आज के वक्त में जब इंसान अपनी सहनशीलता खोता जा रहा है. इस समस्या से जिस तरह के पी एस गिल ने पंजाब में निपटा था वही तरीका अपनाया जाना चाहिये. आप में और मुझ में एक ही अंतर है. आप हिन्दू को जागृत करने की बात करते हो और मैं इंसानों को जागृत करने की.

प्रदीप वर्मा ने कहा…

हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा

"अनूप जी और ज्ञानदत्त जी दबे हुए संस्कार ऐसे ही बाहर निकल आते हैं" वाली पोस्ट के बाद ब्लॉगवाणी तिलमिलाई!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

जिसने संवेदनशील ब्लोगों को नहीं निकाला उसने इस अनोखे ब्लोग को घबड़ाकर ब्लोगवाणि से निकाल दिया!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

आज की पोस्ट देखनी है तो आगे पढ़ें

सुनील दत्त ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
नरेश चन्द्र बोहरा ने कहा…
इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.
सुनील दत्त ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
सुनील दत्त ने कहा…

सबसे पहले तो आपकी टिप्पणी पर जल्दवाजी में टिपणी के लिए क्षमा प्रार्थी

नरेश जी हम आपसे इस हद तक सहमत हैं कि मुसलिम आतंकवाद ने सारे संसार के नाक में दम किया हुआ है और भारत मुसलिम आतंकवाद से सबसे अधिक नुकसान झेल चुका है रही बात मुसलमानों के इसलाम को ना समझने की तो हमारे विचार मे यह आपकी और हमारी भूल है मुसलमान इसलाम को ठीक से समझते हैं इसीलिए कुरान व हदीश में बताए रास्ते पर चलते हुए गैर मुसलमानों के अस्तित्व को मिटाने का भरपूर प्रयास करते हैं
अगर गांधी जी ने शांति से आजादी दिलवाई थी तो फिर जो इतने सारे लोग शहीद हुए शहीद भगत सिंह,शहीद चन्द्रशेखर जैसे महान क्रांतिकारियों के साथ मिलकर उनका क्या ?
हमारे विचार में आपने भी प्रतिक्रिया हमारी तरह जलदवाजी में लिखी थी
हमने अपनी भूल सुधार ली आधी रात को उठकर आशा है आप भी सुधार लेंगे शुबह उठकर।
अन्त में हम यही कहेंगे कि जो इनसान है वही हिन्दू है जो इनसान नहीं वो काहे का हिन्दू
लेकिन इतना जरूर है कि लोहे को लोहा ही काट सकता है
आसा है आप समझेंगे कि ये ब्लाग सिर्फ कटाक्ष के लिए नहीं दिल से अपने आप को राष्ट् के शत्रुओं को मिटाने के लिए समर्पित करने के लिए प्रतिबद्धता जताने के लिए है।अगर आपको जानकारी है कि किस तरह इन जिहादियों ने कशमीर में 2-6 वर्ष तक के बच्चों को हलाल कर दिया व इसलाम न अपनाने वाली महिलाओं को गाड़ियों पीछे बांधकर कत्ल कर दिया तो छोड़ो ये फालतू के if And donts and commit yourself to eradicate these violent animals
अगर जानकारी नहीं है तो हमारी पुस्तक नकली धर्मनिर्पेक्षता का अन्तिम हिस्सा हिन्दू-मिटाओ हिन्दू भगाओ अभियान पढ़ों
उसके वाद इन जिहादी आतंकवादियों की पैरवी या विरोध का फैसला करो
दोतरफा बात हमें पसंद नहीं

संजय बेंगाणी ने कहा…

बहुत बाद से शुरू किया है. कत्लेआम तो मुगल काल से चालू है.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

बोहरा जी के लिये कुछ नहीं कहूंगा.. लेकिन यह मानसिकता ही इस्लामी आतंकवादियों का परोक्ष पोषण कर रही है... इस मानसिकता से भी खतरा है...

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

बात वही है कि घटिया और जयचंद ठूस-ठूस के बहरे पड़े है वरना तीन-तीन गुलामियाँ क्यों झेलते ?

सुनील दत्त ने कहा…

संजय जी विस्तार से हमने अपनी पुस्तक नकली धर्मनिर्पेक्षता के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की है जरूर पढ़ें।

फ़िरदौस ख़ान ने कहा…

हिन्दुस्तान का 'धर्मनिरपेक्ष' होना ही मुल्क के लिए ख़तरनाक साबित हो रहा है...

सुनील दत्त ने कहा…

फिरदौस जी आप सह कह रही हैं अगर देश को हिन्दु राष्ट्र घोषित कर कानून भारतीय के लिए बनाए जाते तो देश को ये हालात नहीं देखने पड़ते।
अगर बास्तविक रूप से धर्मनिर्पेक्षता का पालन किया जाता मतलब कानून जाति-भाषा-क्षेत्र-सांप्रदाय के आधार पर न बनाकर भरतीयों के लइए बनाए जाते तो भी हमें ये दिन नहीं देखने पड़ते
इस नकली धर्मनिर्पेङक्षता ने देश को गृहयुद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया है

फ़िरदौस ख़ान ने कहा…

सुनील जी,
हम इंसानियत में यक़ीन रखने वाले हैं...इसलिए हमें काफ़िर कहा जाता है...

सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार ने 'देवबंद' को इतनी छूट ही क्यों दे रखी है कि वह 'हिन्दुस्तानी क़ानून' की धज्जियां उड़ाते हुए 'वाहियात' फ़तवे जारी करता रहता है... क्या देवबंद हिन्दुस्तानी क़ानून से ऊपर है...?

अगर जल्द ही हमारी सरकार ने कोई गंभीर क़दम नहीं उठाया तो हिन्दुस्तान को 'तालिबान' बनने में देर नहीं लगेगी...

हैरत की बात है कि 'कुछ लोग' रहते तो हिन्दुस्तान में हैं... यहीं का अन्न-जल ग्रहण कर ज़िंदा रहते हैं...फिर इसी देश की संस्कृति का अपमान करते हैं... देवी-देवताओं के बारे में अपशब्द बोलते हैं... इस देश के क़ानून को मानने से साफ़ इनकार करते हैं और अरब के 'जंगली क़ानून' के गुण गाते हैं...

एक लड़ाई हिन्दुस्तानी की आज़ादी के लिए लड़ी गई थी... देश को 'देशद्रोहियों' से मुक्त कराने के लिए अभी एक और संघर्ष की ज़रूरत है...
इसके लिए ज़रूरी है कि देश से 'दो विधान' की व्यवस्था को ख़त्म कर 'समान नागरिक संहिता' लागू की जाए...
जो लोग 'समान नागरिक संहिता' का विरोध करें उन्हें 'तालिबान' भेज दिया जाए... ताकि वो भी सुख से रह लें और इस मुल्क में भी चैन-अमन का माहौल क़ायम रहे...

bharat ने कहा…

निम्न हिन्दू जातीय वीर हे जो की राष्ट्र की 16 % जनसख्या हे. हिन्सू मुस्लिम दंगो में हिन्दुओंकी ढल बनकर लड़ते हे पैर हम हिन्दू भाई ही उनके खिलाफ बकवास करते है. इसलिए हिन्दू एक नहीं हे. किसी उच्च हिन्दू लड़की की शादी निम्न जाती वाले से हो जाये तो उछ वर्ण को दिक्कत होने लगाती हे और मर्डर तक कर दिया जाता पर इन्ही कई उच्च हिन्दुओं की लडकिय मुस्लिमो से शादी करके साम्प्रदायिक सद्भाव का दावा करते है थू है ...
बिना निम्न जातियों के समर्थन के हिंदुत्व का मुद्दा शुन्य होगा . अभी भी ये सोला प्रतिशत हे जोकि मुस्लिमो से ज्यादा ही है . इन्हें सम्मान दो और एकता बढाओ बाद में मुस्लिमो से राजनितिक और गेर राजनितिक लड़ना

बेनामी ने कहा…

ye hindu virodhiyo ke pas ka trk he ki antr jatiy vivah kuo nahi hot uska jvab :(1)aj ke jmane me jb ki prem vivah hi asfl ho rhe hain to kya garenti ke ye safal ho jaynge......... . (2).antr jatiy vivah bhartiy sanskriti ki koi phchan nhi he isliye aam hindu chahe kisi bhi jati ka ho use shhjtase swikar nhi kr pata.