आये दिन आतंकवादियों के पैरोकार क्यों पुलिस ही हर कार्यावाही पर प्रश्न चिन्ह लगाकर-बन्देमातरम् का विरोध कर-आतंकवादियों को निर्दोश बताकर-हिन्दूओं को सांप्रदायिक कहकर-हिन्दूओं के आस्थाकेन्द्रों का अपमान कर -हिन्दूओं की मानयताओं को अंधविस्वास बताकर आये दिन हमें नई से नई समस्या में फंसाकर आखिर हासिल करना क्या चाहते हैं? आओ हम बताते हैं
वैसे तो सारे संसार में मुस्लिम और गैरमुस्लिम की इस लड़ाई में दो चरण होते हैं एक दारूल हरब और दूसरा दारूल इस्लाम । दारूल हरब में गैरमुस्लिमों की सरकार होती है जिसे मुसलमान अपनी सरकार नहीं मानते व देशभक्ति से जुड़े हर कदम-हर कानून का विरोध करते हैं। सब मुसलमानों को जिहाद के लिए उकसाते हैं। ज्यादा बच्चे पैदा करने का वचन लेते हैं । गैरमुस्लिमों की बेटियों को भगाते हैं । इस जिहाद के आगे बढ़ाने के लिए गैरमुस्लिमों पर हमला बोल देते हैं । साथ ही इनका जो मुस्लिम नेतृत्व होता है वो बहुसंख्यकों की प्रतिक्रिया से बचने के लिए व मुस्लिम देशों का सहयोग लेने के लिए मुस्लिमों पर हो रहे काल्पनिक अत्याचार, मुस्लिमों के पिछड़ेपन का दुष्प्रचार करता है। कुरान और शरियत का बहाना लेकर मुसलमानों को उस देश की मुख्यधारा में शामिल होने से रोकता हैं। ये तब तक चलता है जब तक मुस्लिमों की आबादी बहुसंख्यकों को धूल चटाने के काबिल नहीं हो जाती है जैसे ही ये स्थिति आती है अन्तिम हमला शुरू हो जाता है। इस दारूल हरब को दारूल इस्लाम बनाकर गैर मुस्लिमों का सफाया कर दिया जाता है । एक मुस्लिम राष्ट्र अस्तित्व में आ जाता है धीरे-धीरे गैर मुस्लिमों की हर निशानी को मिटा दिया जाता है । जैसे अफगानीस्तान में हिन्दुओं की लगभग हर निशानी मिटा दी गई।वेमियान में बौध मूर्तियों को तोड़ा जाना इसकी अंतिम कड़ी थी । पाकिस्तान,बांगलादेश में भी हिन्दुओं और हिन्दुओं से जुड़ी हर निशानी को मिटाने का काम अपने अंतिम दौर में है।
परन्तु भारत में जिहाद की प्रक्रिया तीन चरणों में थोड़े से अलग तरीके से पूरी होती है पहले चरण में मुसलमान हिन्दुओं की पूजा पद्धति पर सवाल उठाते हैं ।कभी-कभी धार्मिक आयोजनों पर हमला बोलते हैं ।अल्पसंख्यक होने की दुहाई देकर अपनी इस्लामिक पहचान बनाये रखने पर जोर देते हैं । अपने आप को राष्ट्र की मुख्यधारा से दूर रखते हैं धीरे-धीरे हिन्दुओं के त्योहारों पर व अन्य मौकों पर तरह-तरह के बहाने लेकर हमला करते हैं। हमला करते वक्त इनको पता होता है कि मार पड़ेगी पर फिर भी जिहाद की योजना के अनुसार ये हमला करते हैं। परिणामस्वरूप मार पड़ने पर मुसलमानों पर हो रही ज्यादतियों व अपने द्वारा किए गये हमले को हिन्दुओं द्वारा किया गया हमला बताकर मुस्लिम देशों में प्रचार करते हैं । अधिक से अधिक बच्चे पैदा करते हैं। बच्चों को स्कूल के बजाए मस्जिदों व मदरसों में शिक्षा की जगह जिहाद पढ़ाते हैं। फिर अपनी गरीबी का रोना रोते हैं । सरकार व विदेशों से आर्थिक सहायता पाना शुरू करते हैं फिर जैसे-जैसे आबादी बढ़ती जाती है, इनकी आवाज अलगावादी होती जाती है ।अपने द्वारा किए गये हमलों के परिणामस्वरूप मारे गये जिहादियों को आम मुसलमान बताकर जिहाद को तीखा करते हैं। इस बीच मदरसों-मस्जिदों व घरों में अवैध हथियार गोला बारूद इकट्ठा करते रहते हैं कुछ क्षेत्रों में बम्ब विस्फोट करते हैं प्रतिक्रिया होती है फिर अल्पसंख्कों पर अत्याचार का रोना रोया जाता है ।
दूसरे चरण में इस्लाम की रक्षा व प्रचार प्रसार के नाम पर सैंकड़ों मुस्लिम संगठन सामने आ जाते हैं। हिन्दुविरोधी नेताओं, लेखकों व प्रचार-प्रसार के साधनों को खरीदा जाता है। उन्हें उन हिन्दुओं के साथ एकजुट किया जाता है, जो हिन्दुत्व को अपने स्वार्थ के रास्ते में रूकावट के रूप में देखते हैं। इस सब को नाम दिया जाता है, धर्मनिर्पेक्षता का मकसद बताया जाता है अल्पसंख्यकों की रक्षा का। इस बीच हिन्दुओं पर हमले तेज हो जाते हैं जगह- जगह हिन्दुबहुल क्षेत्रों व मन्दिरों में बम्ब विस्फोट हिन्दुओं के त्योहारों के आस पास या त्योहारों पर कर दहशत फैलाई जाती है ।
जब हिन्दूसमाज में क्रोध पैदा होने लगता है तो फिर धर्मनिर्पेक्षतावादियों व जिहादियों के गिरोह द्वारा मुसलमानों को अनपढ़ ,गरीब व हिन्दुओं द्वारा किए गये अत्याचारों का सताया हुआ बताकर धमाकों में मारे गये हिन्दुओं के कत्ल को सही ठहराया जाता है । हिन्दुओं के कत्ल का दोष हिन्दुओं पर ही डालने का षडयन्त्र रचा जाता है।
मुस्लिम जिहादी आतंकवादियों व उनके समर्थकों द्वारा रचे गये इस षड्यन्त्र के विरूद्ध हिन्दुओं को सचेत करने वालों व इन जिहादी हमलों के विरूद्ध खड़े होने वालों पर सांप्रदायिक कहकर हमला बोला जाता है । जिहादियों द्वारा फिर हिन्दुबहुल क्षेत्रों व मन्दिरों में हमले किए जाते हैं हिन्दू कहीं एकजुट होकर जिहादियों व इन के समर्थकों का सफाया न कर दें इसलिए बीच-बीच में हिन्दुओं को जाति,भाषा,क्षेत्र के आधार पर लड़ाए जाने का षड्यन्त्र रचा जाता है।
साथ में जिहादियों के तर्कों को अल्पसंख्यकवाद के नाम पर हिन्दुओं के मूल अधिकारों पर कैंची चलाकर मुसलमानों को विशेषाधिकार दिए जाते हैं। फिर जिहादियों द्वारा जगह- जगह हिन्दुबहुल क्षेत्रों व मन्दिरों में बम्बविस्फोट किये जाते हैं। फिर हिन्दुओं द्वारा इन हमलों के विरूद्ध आवाज उठाई जाती है। फिर आवाज उठाने वालों को सांप्रदायिक बताकर जागरूक हिन्दुओं को चिढ़ाया जाता है व बेसमझ हिन्दुओं को मूर्ख बनाने के लिए एक आधा मस्जिद के आस पास इस तरह बम्ब विस्फोट करवाकर हिन्दुओं में दो तरह का भ्रम पैदा किया जाता है। कि हमले सिर्फ मन्दिरों पर नहीं हो रहें हैं मस्जिदों पर भी हो रहे हैं दूसरा ये हमला हिन्दुओं ने किया है हिन्दू फिर छलावे में आ जाते हैं अपने-अपने काम में लग पड़ते हैं। ये धरमनिर्पेक्षों व जिहादियों का गिरोह साँप्रदायिक दंगों को रोकने के बहाने जिहादियों की रक्षा करने के नये-नये उपाय ढूँढता हैं। प्रायोजित कार्यक्रम कर हिन्दुओं की रक्षा में लगे संगठनों को बदनाम करने की कोशिश की जाती है। फिर जिहादियों द्वारा हिन्दुबहुल क्षेत्रों में हमले किए जाते हैं फिर इन हमलों को न्यायोचित ठहराने के लिए ये गिरोह जी जान लगा देता है फिर नये-नये बिके हुए गद्दार समाजिक कार्यकर्ता हिन्दुओं पर हमला बोलते हैं ये कार्यक्रम चलता रहता है जिहाद आगे बढ़ता रहता है ..........
फिर आता है तृतीय चरण जिसमें जिहादी और आम मुसलमान में फर्क खत्म हो जाता है । हिन्दुओं को हलाल कर, हिन्दुओं की मां बहन बेटी की आबरू लूटकर , हिन्दुओं को डराकर भगाकर जिहादियों द्वारा चिन्हित क्षेत्र को हिन्दुविहीन कर उसे बाकी देश से अलग होने का मात्र ऐलान बाकी रह जाता है। ध्यान रहे इस अन्तिम दौर में हलाल होने वाले वो हिन्दू होते हैं जो हिन्दुत्वनिष्ठ हिन्दुओं के कत्ल के वक्त जिहादियों का हर वक्त साथ देते हैं या ऐसे काम करते हैं जो जिहाद को आगे बढ़ाने मे सहायक होते हैं ।
अन्त में हम आपसे इतना ही जानना चाहेंगे कि क्या ये सच्चाई नहीं कि फिरदौस खान जी इसलाम का वो कालपनिक चेहरा है जो हम देखना चाहते हैं जिससे किसी को कोई दिक्कत नहीं हो सकती जबकि डा अनबर जमाल जिहादी आतंकवाद की जड़ इसलाम की असलियत है?
धर्मनिर्पेक्ष आतंकवादियों द्वारा रचे जा रहे हिन्दूविरोधी-देशविरोधी षडयन्त्रों को उजागर करने की कोशिश। हमारा मानना है कि भारत में कानून सांप्रदाय,जाति,भाषा,क्षेत्र,लिंग अधारित न बनाकर भारतीयों के लिए बनाए जाने चाहिए । अब वक्त आ गया है कि हिन्दूमिटाओ-हिन्दूभगाओ अभियान चलाने वाले भारतविरोधी धर्मनिर्पेक्ष आतंकवादियों को उनके समर्थकों सहित खत्म करने के लिए सब देशभक्तों द्वारा एकजुट होकर निर्णायक अभियान चलाया जाए।
शनिवार, 15 मई 2010
शुक्रवार, 14 मई 2010
मन ये सोचने पर मजबूर हो जाता है कि हिन्दू ये सब कैसे और क्यों सहन कर गए ?
अधिकतर देशद्रोही चैनल तो जिहादियों का समर्थन करने व हिन्दुओं को अपमानित करने में मुस्लिम जिहादी आतंकवादियों को भी पीछे छोड़ देते हैं ।
अगर हम 1945 तक हुए हिन्दुओं के नरसहारों को न भी लिखें तो भी इन मुस्लिम जिहादियों ने 1946 के बाद ही हिन्दुओं पर इतने जुल्म ढाये हैं कि इनके बारे में सोचते ही रौंगटे खड़े हो जाते हैं ।
मन ये सोचने पर मजबूर हो जाता है कि हिन्दू ये सब कैसे और क्यों सहन कर गए ?इतना कुछ हो जाने पर भी ये गिरोह जो खुद को सैकुलर कहता है इन जिहादियों का साथ क्यों दे रहा है ?
क्यों इस गिरोह को हिन्दुओं के कत्ल करवाने में फखर महसूस होता है विजय का एहसास होता है ?
क्यों और कैसे ये गिरोह हिन्दुओं के हुए हर नरसंहार के बाद जिहादियों के पक्ष में महौल बनाने पर उतारू हो जाता है ?
क्यों ये गिरोह हिन्दुओं को धोखा देकर उन्हें ही कत्ल करवाने में कामयाब जो जाता है ?
क्यों ये गिरोह हिन्दुओं के आक्रोश से बच जाता है ?
क्यों हिन्दू एकजुट होकर हिन्दुओं के कातिलों व उनके समर्थकों पर एक साथ हमला नहीं बोलते ?
हम शुरू करते हैं 1946 से जब कलकता में मुसलमानों द्वारा किए गए हमलों में 5000 हिन्दुओं का कत्ल किया गया ।
फिर नवम्बर में पूर्वी बंगाल के नौखली जिला में हिन्दुओं का नरसंहार किया गया सब के सब हिन्दुओं को वहां से भगा दिया गया उनकी सम्पति तबाह कर दी गई ।
विभाजन के दौरान कम से कम 20 लाख हिन्दू-सिखों का कत्ल सिर्फ वर्तमान पाकिस्तान में किया गया ।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1947-1951 तक जिहादी मुसलमानों द्वारा किए गये अत्याचारों के परिणामस्वरूप एक करोड़ हिन्दू-सिख भारत भागने पर मजबूर किए गए ।
इसमें चौंकाने वाला तथ्य ये है कि वर्तमान भारत में भी इस दौरान हिन्दुओं पर हमले किए गए और तब की सैकुलर सरकार तमाशा देखती रही जिहादियों की रक्षा में लगी रही हिन्दुओं को मरवाती रही ।
फरवरी 1950 में 10,000 हिन्दुओं का ढाका और बंगला देश(तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) के अन्य भागों में नरसंहार किया गया । उसके बाद के कुछ महीनों में लाखों हिन्दुओं को वहां से भगाया गया ।
1950-60 के बीच में 50 लाख हिन्दुओं को मुस्लिम जिहादियों द्वारा पूर्वी पाकिस्तान से भारत भगाया गया ।
1971 में पाकिस्तानी सेना ने बांगलादेश मुक्ति अंदोलन के दौरान 25 लाख हिन्दुओं का कत्ल किया । जिसके परिणामस्वरूप अधिकतर हिन्दू सुरक्षा की खोज में भारत भाग आये ।
उस वक्त की सरकार ने इन हिन्दुओं की रक्षा के लिए क्या कदम उठाए ? कोई नहीं । आखिरकार बांगलादेश बनवाने का दावा करने वाले इन लोगों ने क्यों हिन्दुओं को लावारिस छोड़कर मरने पर मजबूर किया ?
सिर्फ इसलिए कि हिन्दू कभी संगठित होकर गैर हिन्दुओं पर हमला नहीं करता या फिर इसलिए कि कभी एकजुट होकर संगठित वोट बैंक नहीं बनाता ?
1989 में बांगलादेश में सैंकड़ों मन्दिर गिराए गए ।
1947 से 2000 के बीच जिहादी हमलों में 6 लाख चकमा बनवासियों का नामोनिशान मिटा कर मुसलमानों ने उनकी जमीन पर कब्जा कर उनकी औरतों को जबरन मुसलमानों के साथ विवाह करने को बाध्य किया ।
जागो ! हिन्दू जागो !
लड़ाई से भागो मत एकजुट होकर लड़ों वरना मिटा दिए जाओगे इन मुस्लिम जिहादियों व इनके आका धर्मनिर्पेक्षतावादियों द्वारा ।
1947-48 में मुसलमानों ने कश्मीर के जिस हिस्से पर कब्जा किया(पी ओ के) वहां से सब हिन्दुओं का नामोनिशान मिटा दिया गया ।
1985 में अलकायदा की स्थापना के बाद भारत समेत सारे भारत में मुस्लिम जिहाद के एक नये दौर की शुरूआत हुई ।
1986 में कश्मीर में जिहादियों द्वारा हिन्दुओं पर एक तरफा हमले शुरू किए गए । जिहादियों ने एक को मारो एक का बलात्कार करो सैंकड़ों को भगाओ की नीति अपनाई । मुसलमानों ने मस्जिदों से लाउडस्पीकरों द्वारा जिहाद का प्रचार प्रसार किया । उर्दू प्रैस के द्वारा भी जिहाद का प्रचार प्रसार किया गया । जिहाद शुरू होते ही हिन्दुओं के पड़ोसी मुसलमान ही उनके शत्रु बन गए । मुसलमानों ने संगठित होकर हिन्दुओं को निशाना बनाना शुरू किया ।
जिहादियों की भीड़ इक्ट्ठी होकर हिन्दुओं के घर में जाती उन पर हर तरह के जुल्म करने के बाद उनको दूध पीते बच्चों सहित हलाल कर देती । यहाँ समाचार दिया जाता पाकिस्तानी आतंकवादियों ने ये सब कर दिया । लेकिन सच्चाई यही थी कि हिन्दुओं को हलाल करने वाले उनके पड़ोसी मुसलमान ही होते थे। जो हिन्दुओं को कत्ल करने के बाद अपने-अपने घरों में रहते थे ।
कश्मीर के अधिकतर पुलिसकर्मी व महबूबामुक्ती जैसे नेता इस्लाम के नाम पर इन जिहादियों का हर तरह से सहयोग करते थे अभी भी कर रहे हैं । कई बार तो बाप व भाईयों के हाथ पैर बांध कर उनके परिवार की औरतों की इज्जत लूटकर उसके फोटो खींच कर बाप और भाईयों को ये सब देखते हुए दिखाया जाता था । बाद में ये तसवीरें हिन्दुओं के घरों के सामने चिपका दी जाती थी । परिणाम जो भी हिन्दू इन तसवीरों को देखता वही अपने परिवार की औरतों की इज्जत की रक्षा की खातिर भाग खड़ा होता । और उसके पास रास्ता भी क्या था सिवाय हथियार उठाने या भागने के । हिन्दुओं ने हथियार उठाने के बजाए भागना बेहतर समझा । क्योंकि अगर वो हथियार उठाते तो ये सैकुलर नेता उन्हें अल्पसंख्यकों बोले तो मुसलमानों का शत्रु बताकर जेल में डाल देते फांसी पर लटका देते ।
हमें हैरानी होती है इन धर्मनिर्पेक्षता की बात करने वालों पर जो हिन्दुओं पर हुए अत्याचारों के बारे में देश-दुनिया को जागरूक करने वालों को आतंकवादी कहते हैं, साम्प्रदायिक कहते हैं और इन सब जुल्मों-सितम को राजनीति बताते है हिन्दुओं को गुमराह करते है । ये सब दुष्प्रचार सिर्फ जिहादी ही नहीं बल्कि जिहादियों के साथ-साथ इनके ठेकेदार धर्मनिर्पेक्षता के पर्दे में छुपे ये राक्षस भी करते हैं जो अपनों का खून बहता देखकर भी अपनी आत्मा की आवाज नहीं सुनते । न केवल इन जिहादी आतंकवादियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ते हैं पर सरकार भी बनाते हैं और सत्ता में आने के बाद जिहादियों के परिवारों का जिम्मा उठाते हैं । उनको हर तरह की मदद की जिम्मेवारी लेते हैं जिहादी आतंकवादियों के परिवारों को आर्थिक सहायता देते हैं । हिन्दुओं को अपने घरों से भागने पर मजबूर करते हैं । जिहादियों के विरूद्ध सेना द्वारा कार्यवाही शुरू होने पर जिहादियों के मानवाधिकारों का रोना रोते हैं मतलब हर हाल में जिहादियों का साथ देते हैं ।
अगर आप सोचते हैं कि हम कोई पुरानी बात कर रहे हैं तो आप गलत हैं। जो कुछ कश्मीर में हिन्दुओं के साथ किया गया वो ही सबकुछ अब जम्मू के मुस्लिमबहुल क्षेत्रों में दोहराय जाने की तैयारी हो चुकी है तैयारी ही क्यों उसकी तो शुरूआत भी हो चुकी है पिछले दिनों जब डोडा उधमपुर में मई 2006 में 36 हिन्दुओं का कत्ल किया गया तो इस नरसंहार में बच निकलने में सफल हुए हिन्दुओं ने बताया कि उन्हें ये देख कर हैरानी हुई कि जो मुस्लिम जिहादी हिन्दुओं को इस तरह कत्ल कर रहे थे वो इन हिन्दुओं के पड़ोसी मुसलमान ही थे । जम्मू के मुस्लिमबहुल क्षेत्रों में इसके अतिरिक्त भी कई नरसंहार हो चुके हैं ।
पिछले दिनों हिमाचल के साथ लगते जम्मू के एक गाँव में गांव वालों ने जब एक मुस्लिम जिहादी को मार गिराया तो वहां के मुस्लिम जिहादी मुख्यमन्त्री के इशारे पर पुलिस इन गांव वालों की जान के पीछे पड़ गई । बेचारे गाँव वालों ने हिमाचल के चम्बा में छुप कर जान बचाई ।
जरा आप सोचो जो गुलामनबी आजाद माननीय न्यायालय से फांसी की सजा प्राप्त अफजल को निर्दोष कहता है क्या वो हिन्दुओं द्वारा मार गिराय गए जिहादी को आतंकवादी मान सकता है ?
क्या आपको याद है कि 20-20 बिश्व कप में भारत द्वारा पाकिस्तान को हरा देने के बाद जम्मू विश्वविद्यालय में देशभक्त हिन्दुओं द्वारा इस जीत की खुशी में भारत माता की जय बुलाय जाने के बाद किस तरह इन हिन्दुओं की पिटाई विशवविद्यालय के जिहादी मुसलमानों ने की और किस तरह सरकार के इशारे पर बाद में पुलिस ने उन दुष्टों के विरूद्ध कार्यवाही करने के बजाए इन देशभक्तों को ही निशाना बनाया ?
1993 तक कश्मीर में अधिकतर मन्दिर तोड़ दिय गए । आज सारे का सारा कश्मीर हिन्दुविहीन कर दिया गया है और ये गिरोह बात करता है हिन्दू आतंकवाद की साँप्रदायिकता की । कोई शर्म इमान नाम की चीज है कि नहीं । तब कहां चला जाता है ये सैकुलर गिरोह जब हिन्दुओं के नरसंहार होते हैं । तब तो ये सारा गिरोह जिहादियों का साथ देता है हिन्दुओं के नरसंहार करने वालों को गुमराह मुसलमान बताकर उनको सजा से बचाने के नय-नय बहाने बनाता है जिहादियों के समर्थन में सड़कों पर उत्तरता है ।
आप जितने मर्जी कानून बना लो अब जिहादियों द्वारा हिन्दुओं को निहत्था मरने पर कोई बाध्य नहीं कर सकता । जो हमला करेगा वो मरेगा । यह हमारी नहीं सब हिन्दुओं के उस मन की आवाज है जो लाखों हलाल हो रहे हिन्दुओं की चीखें सुन कर अब और हिन्दुओं को इस तरह न मरने देने की कसम उठा चुके हैं । जिहादियों को उनके किए की सजा जरूर मिलेगी और ऐसी सजा मिलेगी कि उनका हर हिन्दू के कत्ल में साथ देने वाले धर्मनिर्पेक्षता के चोले में छुपे ये राक्षस भी नहीं बचेंगे ।
गुरुवार, 13 मई 2010
दो शब्द हिन्दू क्रांतिकारियों( देवेन्द्र और चन्द्रशेखर) के नाम
पुष्प कांटो में खिलते हैं,
दीप अंधेरों में जलते हैं
आज नहीं युगों से प्रहलाद,
पीड़ाओं में पलते हैं
भला यातनाओं के बल पर,
क्या कभी क्रांतिकारी रूकते हैं?
दीप अंधेरों में जलते हैं
आज नहीं युगों से प्रहलाद,
पीड़ाओं में पलते हैं
भला यातनाओं के बल पर,
क्या कभी क्रांतिकारी रूकते हैं?
क्या आप उस अंग्रेज का नाम जानते हैं जिसे नवीन जिंदल,वीरभद्रसिंह व सत्यब्रत चतुर्वेदी जी ने भारतीय असमिता की रक्षा की खातिर तमाचा मारा?(छोटा सा प्रश्न)
आज जब कांग्रेस हिन्दूविरोध और गद्दारी की सारी हदें पार कर चुकी है तब भी ऐसे बहादुर लोग हैं जो समय-समय पर गद्दार-हिन्दूविरोधी कांग्रेसियों को उनकी औकात दिखा देते हैं वेशक ये देसभक्त इसके परिणामस्वारूप गद्दारों की सरदार.... के गुस्से का सिकार बनते हैं।
गोत्र हिन्दु समाज के एक बड़े हिस्से की समाजिक बयाबस्था का आधार है।गोत्र को मानने वालों की जनशंखया पोप को मानने वालों की जनशंख्या से कहीं अधिक है फिर पोप की मृत्यु पर भारत में तीन दिन तक शोक रखने वाला सेकुलर गिरोह हिन्दूओं की इस परम्परा को जबरदस्ती मिटाने की कोशिस कर रहा है जिसमें उसकी प्रेणास्त्रोत इटालियन अंग्रेज है क्योंकि अंग्रेजों की संसकृति पशुओं से मिलती-जुलती है इसलिए हीनता की भावना की सिकार ये अंग्रेज हिन्दूओं की हर उस परमपरा को खत्म कर देना चाहती है जो हिन्दूओं को सभ्यतम समाज का दर्जा दिलवाती है।इसीवीच नवीन जिंदल जी ने सच्चाई का समर्थन कर इस अंग्रेज के मुंह पर एक ऐसा तमाचा मारा जिसकी धमक ये अंग्रेज कई दिनों तक महसूस करेगी। वेशक इसके परिणासवारूप नवीन जिंदल जी पर दबाब बनाया जा रहा है।
ऐसा ही कुछ सत्यब्रत चतुर्वेदी जी ने तब किया था जब उन्होंने शहीद मोहनचन्द शर्मा का अपमान करने वाले अमर सिंह को गद्दार कहा था बासतब में अमर सिंह वो कर रहे थे जो ये अंग्रेज करवा रही थी प्रमाण है आज गद्दार अमर सिंह का ही काम गद्दार दिगविजय सिंह कर रहे हैं इसी अंग्रेज का सरेआम नाम लेकर और इसी की कृपा से महासचिब पद पर बरकरार हैं। परन्तु देशभक्ति की बात करने केपरिणाम सवारूप इस अंगेर्ज ने सत्याव्रत चतुर्वेदी जीको पार्टी के प्रवक्ता पद से हटा दिया था।
इस अंग्रेज को एक तमाचा तब भी पड़ा था जब बीरभद्र सिंह जी ने हिमाचल में इस अंग्रज के इसारे पर चलाए जा रहे धर्मांतरण अभियान पर धर्म सवातन्त्रता विधेयक पारित कर नकेल कस दी थी परिणामसवारूप बीरभद्र सिंह जी को योजनबद्ध तरीके से चुनाब हरवारकर नेताविपक्ष तक नहीं बनने दिया गया था।
तो बताओ क्या है उस अंग्रेज का असली नाम ?
ये बौद्धिक आतंकवाद न जाने और कितनों की जान लेगा?
आतंकवाद तो कुछ लोगों की जान लेने की ताकत रखता है वो भी बहुत आतंकवादियों की जान देने के बाद। लेकिन बौद्धिक आतंकवाद एक ऐसा सस्त्र है जिसकी तुलना हम सिर्फ प्रमाणु हथियारों से लैस आतंकवाद के सिवाय किसी और तरह के आतंकवाद से नहीं कर सकते।बौद्धिक आतंकवाद का जो हमला भारत पर आज से लगभग 20 वर्ष पहले शुरू हुआ वो आज अपने पूरे शबाब पर है। बौद्धिक आतंकवाद पूंजीवादियों ब्याभिचारियों, नसैड़ियों,आतंकवादियों के मददगारों व अंडरबर्ड से जुड़े शातिर अपराधियों व उनके मददगार राजनैतिक लोगों का एक ऐसा नैक्सस है जो भारत में सेकुलर गिरोह के नाम से जाना जाता है। इस गिरोह का एकमात्र उद्देश्य मानबता की आधार सत्मभ भारतीय संसकृति को भारत से उखाड़ फैंकना है। इस गिरोह की सफलता का अनुमान आप इसी बात से लगा सकते हैं कि भारतीय संस्कृति को जितना नुकसान लगभग 500 बर्ष के मुसलमानों के गुलामीकाल व 300 बर्ष के ईसाईयों के गुलामीकाल में हुआ उससे कहीं ज्यादा नुकसान ये सेकुलर गिरोह पिछले 25 बर्षों में भारत को पहुंचा चुका है। अब तो हालात ऐसे हो गए हैं कि मिडीया पर इस गिरोह की पकड़ को देखते हुए बड़े से बड़ा सुधारवादी नेता या भारतीय संसकृति का सच्चा पक्का सांस्कृतिक योधा भी इस गिरोह द्वारा भारत के आस्था केन्द्रों व परम्मपराओं पर बोले जा रहे हमले का विरोध करने का साहस नहीं जुटा पा रहा है।
हम जानते हैं कि भारत गांव में बसता है और गांव की जिन्दगी का आधार है गोत्र। बेशक गोत्र पर आप समाज मे ज्यादा चर्चा नहीं सुनते लेकिन गोत्र ही वो शूत्र है जो एक गांव को भाईचारे का स्वारूप देकर उसे एक परिवारिक इकाई बनाता है।गोत्र के अन्दर शादी की बात तो दूर लोग कोई अबैध सबन्ध तक गोत्र के अन्दर बनाने से बचते हैं। इसी गोत्र की बजह से बच्चियां गांव के अन्दर विना किसी डर या संकेच के कहीं भी आ जा सकती हैं खेल सकती हैं घूम सकती हैं।किसी तरह की कोई दहशत नहीं कोई बन्दिश नहीं।आज तक भारत में कोई भी एक भारतीय ऐसा नहीं मिलता जो गोत्र में शादी न होने की बजह से कुवारा ही रह गया हो ।
फिर ऐसी क्या मजबूरी है कि कि आशुतोष राणा जैसे बौद्धिक आतंकवादी गोत्र पर अपने ही चैनल में अपने ही द्वारा वुलाए गए लोगों के वीच में चर्चा करते हुए आपा खोकर ऐसी बात कर जाते हैं जो शायद देश का बड़े से बड़ा खुंखार आतंकवादी भी बोलने से पहले सौ बार सोचे।
हम दावे से कह सकते हैं कि लगातार भारतीय संसकृति पर हमला वोलने वाले विजय चतुर्वेदी,संदीप चौधरी,एच के दुआ जैसे लोगों का भारत के हित से दूर-दूर तक कोई बास्ता नहीं।
हमारी जानकारी के अनुशार जिस तरह ISI अपने मुसलिम आतंकवादी गिरोहं द्वारा लम्बे समय तक बम बिसफोट न करने पर बौखला कर उनको यथाशीघ्र हमला कर भारत को सुलगाने के आदेश करते हुए ऐसा न करने पर उनको परिणाम भुगतने की चेतावनी जारी कर दबाब बनाती है ठीक उसी तरह भारत के वो शत्रु जिन्होंने भारतीय संस्कृति को तबाह और बरबाद करने के लिए अपने चैनल भारत में खोले हैं व यहां के परजीवियों को भारी रकम देकर खरीदा है ने लगातार सांस्कृतिक मूल्यों पर हमला वोलकर भारत को सुलगाय रखने की योजना बना रखी है ऐसा न होता देखकर इन परजिवीयों पर चाबुक चला देते हैं बस चाबुक चलते ही ये टुकड़मार भारतीय परमपराओं पर भौंकना सुरू कर देते हैं ।
ये मूर्ख इतना भी नहीं जानते कि जब भारत न रहेगा तो इन्हें कोई टुकड़ा क्यों डालेगा? टुकड़ा तभी तक डाला जा रहा है जब तक भारत है और भारत तब तक है जब तक भारतीय मानब मूल्य हैं।
देखा नहीं कि सेकुलर गिरोह के मित्र मुसलिम आतंकवादियों ने पहले हिन्दूत्वनिष्ठ हिन्दूओं को निशाना बनाया देशबक्तों के कत्म होते ही इन आतंकवादियों ने सेकुलर गिरोह से जुड़े हिन्दूओं को भी मौत के घाट उतार दिया।चलो हम तो बुरे हैं क्योंकि हम हिन्दूत्व की बात करते हैं पर सेकुलर हिन्दू तो हमेशा आतंकवादियों के नाम की ही मला जपते हैं उन्हें बचाने के नित नय बहाने डूंढते हैं उन्हें क्यों मार-भगा दिया इन मुसलिम आतंवादियों ने?
हम मानते हैं कि प्यार पर किसी का कोई बस नहीं होता पर विनब्याही को मां बना कर जिम्मेदारी से भाग खड़े होने को प्यार नहीं कहते। ना ही खुलेआम पशुओं की तरह वासना पूर्ती करने व कपड़े न पहनने को आधुनिकता कहते हैं।
हम मानते हैं कि जाति के आधार किसी के साथ किसी तरह को कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए पर जबरदस्ती अन्तरजातीय विबाह थोपने की जिद क्यों? होने चाहिए अच्छी बात है पर जबदस्ती करने से क्या फायदा ? आखिरकार जिन्दगी कोई फिल्म तो है नहीं कि तीन घंटे के वाद नई शुरू हो जायेगी।
हमारे सम्पर्क में ऐसे कितने ही मुसलमान हैं जो हिन्दू बनना चाहते हैं पर हम उन्हें सिर्फ इसलिए हिन्दू नहीं बनाते कि कल को उनके बच्चों के रिस्तों का क्या होगा ? जिन लोगों ने अन्तरजातिय विवाह या फिर प्रेमविबाह किए हैं वो आज मैटरो पोलिटन शहरों में तो रह सकते हैं पर गांव में उनको अच्छी निगाह से नहीं देख जाता ? आप क्या कर लेंगे उनका कुछ नहीं सिर्फ सटूडियो में बैठकर कुतों की तरह भौंकने से आप अपनी बात हर किसी पर नहीं थोप सकते।
समाज में लगातार बढ़ रहे बयाभिचार ,हिंसा, नशेवाजी व भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदार वो कंजर हैं जो सटूडियों में बैठकर,फिल्में बनाकर लेख-लिखकर मानब की कमजोरियों को महिमामंडित कर आनेवाली नस्लों को गुमराह करने का कुकर्म कर रहे हैं।इन हरामजादों के बच्चे तो गाड़ियों में बैठकर सुरक्षागार्डों के साय में सुरक्षित हैं पर इन्हें क्या पता कि आज भी गांव में गरीब की बेटी को 3-7 किलोमीटर तर पैदल यात्रा करनी पड़ती है सुनसान जगह पर अपने घर में विना बाप के साय के अकेला रहना पड़ता है क्योंकि बाप को रोटी कमानी होती है वहां न कोई पुलिस है न कोई सुरक्षा गार्ड सिर्फ संसकार उनकी रक्षा करता है।
हम इन दुष्टों से जानना चाहते हैं कि अगर उन्हें मानबता की वाकई चिन्ता है तो चलाओ अभियान कशमीर घाटी से विस्थापित हुए लाखों लोगों को उनके घर बसाने का।बनाओ दबाब भारत सरकार पर देश में जाति-सांप्रदाय-क्षेत्र-भाषा –लिंग आधाराति सब कानूनों को निरस्त कर भारतीय के लिए कानून बनाने का।दिखाओ दिनरात गुरूनानक देब जी के उन बचनों को जिनमें उन्होंने जात-पात से बाहर निकलने का रास्ता दिखाया।दिखाओ स्वामीविवेकानन्द जी की कृतियों को जो मानब जीबन को कमियों से दूर करने की राह दिखाती हैं।दिखाओ लोगों को सन्त रविदास जी की जीबनी जो खुदवाखुद मनाब-समानता को आगे बढ़ाती है। पर नहीं इन भारत विरोधियों को तो सिर्फ बौद्धिक आतंकवाद फैलान है । अगर इस मिडीया पर यथाशीघ्र रोक नलगाई गई तो न जाने विदेशियों के इसारे पर चलाया जा रहा ये बौद्धिक आतंकवाद और कितने लोगों की जान ले लेगा ?
हम जानते हैं कि भारत गांव में बसता है और गांव की जिन्दगी का आधार है गोत्र। बेशक गोत्र पर आप समाज मे ज्यादा चर्चा नहीं सुनते लेकिन गोत्र ही वो शूत्र है जो एक गांव को भाईचारे का स्वारूप देकर उसे एक परिवारिक इकाई बनाता है।गोत्र के अन्दर शादी की बात तो दूर लोग कोई अबैध सबन्ध तक गोत्र के अन्दर बनाने से बचते हैं। इसी गोत्र की बजह से बच्चियां गांव के अन्दर विना किसी डर या संकेच के कहीं भी आ जा सकती हैं खेल सकती हैं घूम सकती हैं।किसी तरह की कोई दहशत नहीं कोई बन्दिश नहीं।आज तक भारत में कोई भी एक भारतीय ऐसा नहीं मिलता जो गोत्र में शादी न होने की बजह से कुवारा ही रह गया हो ।
फिर ऐसी क्या मजबूरी है कि कि आशुतोष राणा जैसे बौद्धिक आतंकवादी गोत्र पर अपने ही चैनल में अपने ही द्वारा वुलाए गए लोगों के वीच में चर्चा करते हुए आपा खोकर ऐसी बात कर जाते हैं जो शायद देश का बड़े से बड़ा खुंखार आतंकवादी भी बोलने से पहले सौ बार सोचे।
हम दावे से कह सकते हैं कि लगातार भारतीय संसकृति पर हमला वोलने वाले विजय चतुर्वेदी,संदीप चौधरी,एच के दुआ जैसे लोगों का भारत के हित से दूर-दूर तक कोई बास्ता नहीं।
हमारी जानकारी के अनुशार जिस तरह ISI अपने मुसलिम आतंकवादी गिरोहं द्वारा लम्बे समय तक बम बिसफोट न करने पर बौखला कर उनको यथाशीघ्र हमला कर भारत को सुलगाने के आदेश करते हुए ऐसा न करने पर उनको परिणाम भुगतने की चेतावनी जारी कर दबाब बनाती है ठीक उसी तरह भारत के वो शत्रु जिन्होंने भारतीय संस्कृति को तबाह और बरबाद करने के लिए अपने चैनल भारत में खोले हैं व यहां के परजीवियों को भारी रकम देकर खरीदा है ने लगातार सांस्कृतिक मूल्यों पर हमला वोलकर भारत को सुलगाय रखने की योजना बना रखी है ऐसा न होता देखकर इन परजिवीयों पर चाबुक चला देते हैं बस चाबुक चलते ही ये टुकड़मार भारतीय परमपराओं पर भौंकना सुरू कर देते हैं ।
ये मूर्ख इतना भी नहीं जानते कि जब भारत न रहेगा तो इन्हें कोई टुकड़ा क्यों डालेगा? टुकड़ा तभी तक डाला जा रहा है जब तक भारत है और भारत तब तक है जब तक भारतीय मानब मूल्य हैं।
देखा नहीं कि सेकुलर गिरोह के मित्र मुसलिम आतंकवादियों ने पहले हिन्दूत्वनिष्ठ हिन्दूओं को निशाना बनाया देशबक्तों के कत्म होते ही इन आतंकवादियों ने सेकुलर गिरोह से जुड़े हिन्दूओं को भी मौत के घाट उतार दिया।चलो हम तो बुरे हैं क्योंकि हम हिन्दूत्व की बात करते हैं पर सेकुलर हिन्दू तो हमेशा आतंकवादियों के नाम की ही मला जपते हैं उन्हें बचाने के नित नय बहाने डूंढते हैं उन्हें क्यों मार-भगा दिया इन मुसलिम आतंवादियों ने?
हम मानते हैं कि प्यार पर किसी का कोई बस नहीं होता पर विनब्याही को मां बना कर जिम्मेदारी से भाग खड़े होने को प्यार नहीं कहते। ना ही खुलेआम पशुओं की तरह वासना पूर्ती करने व कपड़े न पहनने को आधुनिकता कहते हैं।
हम मानते हैं कि जाति के आधार किसी के साथ किसी तरह को कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए पर जबरदस्ती अन्तरजातीय विबाह थोपने की जिद क्यों? होने चाहिए अच्छी बात है पर जबदस्ती करने से क्या फायदा ? आखिरकार जिन्दगी कोई फिल्म तो है नहीं कि तीन घंटे के वाद नई शुरू हो जायेगी।
हमारे सम्पर्क में ऐसे कितने ही मुसलमान हैं जो हिन्दू बनना चाहते हैं पर हम उन्हें सिर्फ इसलिए हिन्दू नहीं बनाते कि कल को उनके बच्चों के रिस्तों का क्या होगा ? जिन लोगों ने अन्तरजातिय विवाह या फिर प्रेमविबाह किए हैं वो आज मैटरो पोलिटन शहरों में तो रह सकते हैं पर गांव में उनको अच्छी निगाह से नहीं देख जाता ? आप क्या कर लेंगे उनका कुछ नहीं सिर्फ सटूडियो में बैठकर कुतों की तरह भौंकने से आप अपनी बात हर किसी पर नहीं थोप सकते।
समाज में लगातार बढ़ रहे बयाभिचार ,हिंसा, नशेवाजी व भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदार वो कंजर हैं जो सटूडियों में बैठकर,फिल्में बनाकर लेख-लिखकर मानब की कमजोरियों को महिमामंडित कर आनेवाली नस्लों को गुमराह करने का कुकर्म कर रहे हैं।इन हरामजादों के बच्चे तो गाड़ियों में बैठकर सुरक्षागार्डों के साय में सुरक्षित हैं पर इन्हें क्या पता कि आज भी गांव में गरीब की बेटी को 3-7 किलोमीटर तर पैदल यात्रा करनी पड़ती है सुनसान जगह पर अपने घर में विना बाप के साय के अकेला रहना पड़ता है क्योंकि बाप को रोटी कमानी होती है वहां न कोई पुलिस है न कोई सुरक्षा गार्ड सिर्फ संसकार उनकी रक्षा करता है।
हम इन दुष्टों से जानना चाहते हैं कि अगर उन्हें मानबता की वाकई चिन्ता है तो चलाओ अभियान कशमीर घाटी से विस्थापित हुए लाखों लोगों को उनके घर बसाने का।बनाओ दबाब भारत सरकार पर देश में जाति-सांप्रदाय-क्षेत्र-भाषा –लिंग आधाराति सब कानूनों को निरस्त कर भारतीय के लिए कानून बनाने का।दिखाओ दिनरात गुरूनानक देब जी के उन बचनों को जिनमें उन्होंने जात-पात से बाहर निकलने का रास्ता दिखाया।दिखाओ स्वामीविवेकानन्द जी की कृतियों को जो मानब जीबन को कमियों से दूर करने की राह दिखाती हैं।दिखाओ लोगों को सन्त रविदास जी की जीबनी जो खुदवाखुद मनाब-समानता को आगे बढ़ाती है। पर नहीं इन भारत विरोधियों को तो सिर्फ बौद्धिक आतंकवाद फैलान है । अगर इस मिडीया पर यथाशीघ्र रोक नलगाई गई तो न जाने विदेशियों के इसारे पर चलाया जा रहा ये बौद्धिक आतंकवाद और कितने लोगों की जान ले लेगा ?
बुधवार, 12 मई 2010
जो कल तक हम कह रहे थे आज भाजपा ने भी कह ही दिया कल हर देशभक्त कहेगा
आप जानते हैं कि राजनितिक दलों व मिडीया पर हमारा विस्वास उतना ही है जितना गद्दारों का हमारे उपर। परन्तु जब भी कोई राजनितिक दल देशहित की बात चाहे अनचाहे या जाने अनजाने कर जाता है तो हम उसका समर्थन करने से अपने आप को रोक नहीं पाते।हमारे समर्थन करने या न करकने से कोई फर्क नहीं पड़ता इसलिए हम उस बात को अपने मित्रों व जागरूकर पाठकों तक पहुंचाकर मानसिक शांति महसूस करते हैं अगर इन विषयों पर हमें अपने पाठकों का समर्थन या फिर तर्कपूर्ण आलोचना मिल जाए तो हमें नयी ताकत का एहसास होता है।
आज हम बात कर रहे हैं भाजपा नेता के उस बयान की जिसमें बैंकिया नायडू जी ने कहा है कि UPA सरकार पाक समर्थक मुसलिम आतंकवादियों व चीन समर्थक माओवादी आतंकवादियों की सरकार है ।अगर थोड़े शब्दों में इसे सपष्ट किया जाये तो हमारे विचार से इसका वही अर्थ निकलाता है जो हम लगातार समझाने की कोशिस कर रहे हैं।
ये सरकार सेकुलर गिरोह की है सेकुलर गिरोह हिन्दूविरोधी व भारत विरोधी है ये गिरोह हर उस बात का समर्थन करता है जो भारत के शत्रु कहते या करते हैं ।आप कहेंगे कि आरोप कोई भी लगा सकता है प्रमाण क्या है ?
प्रमाण हैं इस सरकार के कुकर्म जो चीख-चीख कर कह रहे हैं कि ये सरकार भारत के शत्रुओं के हाथों बिक चुकी है।
• सांसदभवन पर हमले वाले मामले में माननीय सर्वोच न्यायलय ने आज से लगबग 4बर्ष पहले देश के गद्दार पाक समर्थक मुसलिम आतंकवादी अफजल को सजा सुनवाई थी ।जिस पर सरकार ने आज तक अमल न कर पाक समर्थक आतंकवादियों को सपष्ट संदेश दिया कि आप भारत पर खुल कर हमला करो यहां की अदालतें आपका कुछ नहीं विगाड़ सकती ।
• मुंमबई पर हमला भारत में रहने वाले गद्दारों की मदद के विना सम्मभव नहीं था ऐसा आपको कोई भी सुरक्षा मामलों का जानकार बता देगा ।इस सरकार ने कम से कम एक बर्ष तक देश की जनता से झूठ वोला कि कोई भारतीय नागरिक इस हमले में सामिल नहीं था। लेकिन बाद में सरकार ने ये सवीकार किया कि दो भारतीय मुसलमान सबाऊदीन और मुर्तजा इस हमले में सामिल थे।हमारे विचार में सरकार ने सिर्फ दो मुसलमानों के सामिल होने की बात सवीकार की जबकि इस हमले में सरकार का एक मन्त्री अबदुल रहमान अंतुले खुद सामिल था ।सारे हमले को उसी के घर से अंजाम दिया गया जोकि उसने कैमरे के सामने तब सवीकार किया जब उसने देश को बताया कि मुसलिम आतंकवादी हेमंत करकरे को मारने नहीं आये थे। लेकिन सरकार ने अपने मन्त्री के विरूद्ध कार्यावाही करने के बजाए उसके पाकसमर्थक ब्यानों का समर्थन किया।अन्त में मुमबई हमले में सामिल दोनों गद्दारों को सरकार ने बचाकर भारतीय मुसलमानों को आतंकवादियों का समर्थन करने का खुला निमंत्रण दिया।
• मुंमबई हमले में सेकुलर कलाकर महेश भट्ट का बेटा सामिल था इसका सपष्ट प्रमाण मिलने पर भी न उस गद्दार को पुलिस रिमांड पर लेकर फिल्म इंडसट्री के वाकी गद्दारों के नाम नहीं उगलवाये गए न ही उसके विरूद्ध कोई कार्यवाही अमल में लाई गई क्यों?
• बटला हाउस मुठभेड़ पर पहले गद्दार अमर सिंह बाद में कांग्रेस महासचिब दिगविजय सिंह ने खुलकर गद्दारों का साथ दिया उनके विरूद्ध सरकार ने आज तक कोई कार्यवाही नहीं की क्यों?
• बटला हाऊस मुठभेड़ में सामिल आतंकवादियों को भगाने में कांग्रेस के पूर्व बिधायक अबदुल सत्तार व समाजवादी पार्टी के विधायक अबु हाजमी ने सहायता की उनपर भी सरकार ने कोई कार्यवाही नहीं की क्यों?
• सर्मअलसेख में प्रधानमन्त्री ने भारतीय हित की बात करने के बजाए पाकिस्तान के हित की बात कर अपनी सरकार के भारत विरोधी होने का सपष्ट प्रमाण दिया।
• नेपाल में माओवादी आतंकवादियों से लड़ रही भारत समर्थक नेपाली सेना को इस सरकार ने हथियारों की सपलाई बंद कर चीन समर्थक माओवादी आतंकवादियों को नेपाल पर कब्जा कर भारत पर हमले तेज करने का खुला निमंत्रण दिया बताओ जरा क्या कोई देशभक्त सरकार ऐसा कर सकती है?
• भगवान राम के अस्तित्व को माननीय न्यायालय में हलफनामा देकर नकारने वाली इस सरकार ने रोम में पोप की मृत्यु पर भारत में तीन दिन का शोक रखा क्यों?
• केरल में विळेष कानून बनाकर कोयंमबटूर में हमला करने वाले पाक समर्थक आतंकवादी को जेल से छुड़वाया क्या ये देश से गद्दारी नहीं?
• माननीय न्यायायलय ने जब असाम में इस सरकार द्वारा बनाए गए बंगलादेशी घुसपैठियों को लाभ पहुंचाने वाले कानून को निरस्त किया तो गद्दारों की इस सरकार ने फिर से घुसपैठियों की मदद के लिए बैसा ही कानून बना डाला। क्या कोई देशभक्त सरकार न्यायलय के आदेश के बाबजूद ऐसा भारतविरोधी कानून बनाती?
• मानीय न्यायालय ने जब गद्दारों की पोल खोलने वाले ब्रेन मैंपिग से सबन्धित टैस्टों पर रोक लगा दी तो क्या इस सरकार ने इस रोक को हटवाने के लिए बैसी ततपरता दिखाई जैसी असाम में घुसपैठियों को लाभ पहुंचाने के लिए दिखई थी?
• जब उतर प्रदेश के माननीय हाईकोर्ट ने सरकार द्वारा संविधान का उलंघन कर मुसलमानों को अलगावादी देश साऊदी अरब जाने के लिए दी जाने वाली सबसिडी पर रोक लगाई तो क्यों इस सेकुलर सरकार ने मक्कामदीना जाकर अलगावबाद की शिक्षा लेने वाले मुसलमानों को सबसिडी देने की जिद की? वो भी तब जब ये सरकार खुद को सेकुलर कहती है।
• संविधान द्वारा धर्मआधारित आरक्षण पर रोक है तो फिर क्यों सेकुलर गिरोह की सरकार ने आंध्रप्रदेश में धर्म के आधार पर मुसलमानों को आरक्षण देने की कोशिश की इस कोशिस पर माननीय न्यायलय ने दो वार रोक लगी पिर भी इस सांप्रदायिक सरकार ने धर्म के आधार पर आरक्षण दिया क्यों?
• अब क्यों सारे देश में धर्म के आधार आरक्षण देकर दोवारा संविधान का कत्ल करने की साजिश की जा रही है?
आप खुद ये निर्णय करो कि जो सरकार न संविधान को माने न माननीय न्यायलय को माने वो गद्दारों की नहीं तो किसकी है?
आज हम बात कर रहे हैं भाजपा नेता के उस बयान की जिसमें बैंकिया नायडू जी ने कहा है कि UPA सरकार पाक समर्थक मुसलिम आतंकवादियों व चीन समर्थक माओवादी आतंकवादियों की सरकार है ।अगर थोड़े शब्दों में इसे सपष्ट किया जाये तो हमारे विचार से इसका वही अर्थ निकलाता है जो हम लगातार समझाने की कोशिस कर रहे हैं।
ये सरकार सेकुलर गिरोह की है सेकुलर गिरोह हिन्दूविरोधी व भारत विरोधी है ये गिरोह हर उस बात का समर्थन करता है जो भारत के शत्रु कहते या करते हैं ।आप कहेंगे कि आरोप कोई भी लगा सकता है प्रमाण क्या है ?
प्रमाण हैं इस सरकार के कुकर्म जो चीख-चीख कर कह रहे हैं कि ये सरकार भारत के शत्रुओं के हाथों बिक चुकी है।
• सांसदभवन पर हमले वाले मामले में माननीय सर्वोच न्यायलय ने आज से लगबग 4बर्ष पहले देश के गद्दार पाक समर्थक मुसलिम आतंकवादी अफजल को सजा सुनवाई थी ।जिस पर सरकार ने आज तक अमल न कर पाक समर्थक आतंकवादियों को सपष्ट संदेश दिया कि आप भारत पर खुल कर हमला करो यहां की अदालतें आपका कुछ नहीं विगाड़ सकती ।
• मुंमबई पर हमला भारत में रहने वाले गद्दारों की मदद के विना सम्मभव नहीं था ऐसा आपको कोई भी सुरक्षा मामलों का जानकार बता देगा ।इस सरकार ने कम से कम एक बर्ष तक देश की जनता से झूठ वोला कि कोई भारतीय नागरिक इस हमले में सामिल नहीं था। लेकिन बाद में सरकार ने ये सवीकार किया कि दो भारतीय मुसलमान सबाऊदीन और मुर्तजा इस हमले में सामिल थे।हमारे विचार में सरकार ने सिर्फ दो मुसलमानों के सामिल होने की बात सवीकार की जबकि इस हमले में सरकार का एक मन्त्री अबदुल रहमान अंतुले खुद सामिल था ।सारे हमले को उसी के घर से अंजाम दिया गया जोकि उसने कैमरे के सामने तब सवीकार किया जब उसने देश को बताया कि मुसलिम आतंकवादी हेमंत करकरे को मारने नहीं आये थे। लेकिन सरकार ने अपने मन्त्री के विरूद्ध कार्यावाही करने के बजाए उसके पाकसमर्थक ब्यानों का समर्थन किया।अन्त में मुमबई हमले में सामिल दोनों गद्दारों को सरकार ने बचाकर भारतीय मुसलमानों को आतंकवादियों का समर्थन करने का खुला निमंत्रण दिया।
• मुंमबई हमले में सेकुलर कलाकर महेश भट्ट का बेटा सामिल था इसका सपष्ट प्रमाण मिलने पर भी न उस गद्दार को पुलिस रिमांड पर लेकर फिल्म इंडसट्री के वाकी गद्दारों के नाम नहीं उगलवाये गए न ही उसके विरूद्ध कोई कार्यवाही अमल में लाई गई क्यों?
• बटला हाउस मुठभेड़ पर पहले गद्दार अमर सिंह बाद में कांग्रेस महासचिब दिगविजय सिंह ने खुलकर गद्दारों का साथ दिया उनके विरूद्ध सरकार ने आज तक कोई कार्यवाही नहीं की क्यों?
• बटला हाऊस मुठभेड़ में सामिल आतंकवादियों को भगाने में कांग्रेस के पूर्व बिधायक अबदुल सत्तार व समाजवादी पार्टी के विधायक अबु हाजमी ने सहायता की उनपर भी सरकार ने कोई कार्यवाही नहीं की क्यों?
• सर्मअलसेख में प्रधानमन्त्री ने भारतीय हित की बात करने के बजाए पाकिस्तान के हित की बात कर अपनी सरकार के भारत विरोधी होने का सपष्ट प्रमाण दिया।
• नेपाल में माओवादी आतंकवादियों से लड़ रही भारत समर्थक नेपाली सेना को इस सरकार ने हथियारों की सपलाई बंद कर चीन समर्थक माओवादी आतंकवादियों को नेपाल पर कब्जा कर भारत पर हमले तेज करने का खुला निमंत्रण दिया बताओ जरा क्या कोई देशभक्त सरकार ऐसा कर सकती है?
• भगवान राम के अस्तित्व को माननीय न्यायालय में हलफनामा देकर नकारने वाली इस सरकार ने रोम में पोप की मृत्यु पर भारत में तीन दिन का शोक रखा क्यों?
• केरल में विळेष कानून बनाकर कोयंमबटूर में हमला करने वाले पाक समर्थक आतंकवादी को जेल से छुड़वाया क्या ये देश से गद्दारी नहीं?
• माननीय न्यायायलय ने जब असाम में इस सरकार द्वारा बनाए गए बंगलादेशी घुसपैठियों को लाभ पहुंचाने वाले कानून को निरस्त किया तो गद्दारों की इस सरकार ने फिर से घुसपैठियों की मदद के लिए बैसा ही कानून बना डाला। क्या कोई देशभक्त सरकार न्यायलय के आदेश के बाबजूद ऐसा भारतविरोधी कानून बनाती?
• मानीय न्यायालय ने जब गद्दारों की पोल खोलने वाले ब्रेन मैंपिग से सबन्धित टैस्टों पर रोक लगा दी तो क्या इस सरकार ने इस रोक को हटवाने के लिए बैसी ततपरता दिखाई जैसी असाम में घुसपैठियों को लाभ पहुंचाने के लिए दिखई थी?
• जब उतर प्रदेश के माननीय हाईकोर्ट ने सरकार द्वारा संविधान का उलंघन कर मुसलमानों को अलगावादी देश साऊदी अरब जाने के लिए दी जाने वाली सबसिडी पर रोक लगाई तो क्यों इस सेकुलर सरकार ने मक्कामदीना जाकर अलगावबाद की शिक्षा लेने वाले मुसलमानों को सबसिडी देने की जिद की? वो भी तब जब ये सरकार खुद को सेकुलर कहती है।
• संविधान द्वारा धर्मआधारित आरक्षण पर रोक है तो फिर क्यों सेकुलर गिरोह की सरकार ने आंध्रप्रदेश में धर्म के आधार पर मुसलमानों को आरक्षण देने की कोशिश की इस कोशिस पर माननीय न्यायलय ने दो वार रोक लगी पिर भी इस सांप्रदायिक सरकार ने धर्म के आधार पर आरक्षण दिया क्यों?
• अब क्यों सारे देश में धर्म के आधार आरक्षण देकर दोवारा संविधान का कत्ल करने की साजिश की जा रही है?
आप खुद ये निर्णय करो कि जो सरकार न संविधान को माने न माननीय न्यायलय को माने वो गद्दारों की नहीं तो किसकी है?
मंगलवार, 11 मई 2010
भारतीय संसकृति व सुरक्षा बलों पर हमला करने वाले बाबर और औरंगजेब के बंसजों के नाम खुला संदेश
आप जानते हैं कि हम सुरक्षा बलों व भारतीय संसकृति और सभ्यता के आस्था के केन्द्रों का अपमान करने वाले किसी भी ब्यक्ति को पसंद नहीं करते उन्हीं में से आप हैं ।जिस दिन हमने आपके भगवान राम- माता शीता व सुरक्षाबलों का अपमान करने वाले लेख पढ़े उस दिन मन में आया कि कुछ दिन के लिए हम भी आप जैसे तरीके अपनाकर आपके आस्था के कन्द्रों पर प्रहार करें लेकिन बहुत जल्दी हमें समझ में आ गया कि हम उस सतर तक नहीं गिर सकते जिस सतर पर जाकर आपके आस्था के केन्द्रों का अपमान किया जा सके। अगर हम उस सतर तक गिर भी जाते तो भी हमें हिन्दूओं का उस तरह समर्थन नहीं मिलता जिस तरह आपको आप जैसे मुसलमानों व सेकुलर हिन्दूओं का मिलता है। आप हमें कुछ कहते न कहते ये सेकुलर हिन्दू ही हमारी जान के पीछे हाथ धो कर पड़ जाते क्योंकि इन सेकुलर हिन्दूओं ने भारत से मानबता की आधार भारतीय संस्कृति को जड़ से मिटाने की कशम जो उठा रखी है उपर से आप ठहरे अल्पसंख्यक आपको बहुसंख्यकों बोले तो हिन्दूओं पर हर तरह से हमला कर उन्हें जलील करने के सब अधिकार सेकुलर गिरोह की हिन्दूविरोधी-देशविरोधी सरकार देती है ।
आप लोगों ने अकेले कशमीर घाटी में 600000 हिन्दूओं का कत्ल कर 500000 हिन्दूओं को वेघर कर दिया जो आज दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं वो भी देश में 80% से अधिक हिन्दू होने के बाबजूद।आपने दो-दो महीने तक के बच्चों तक को हलाल कर दिया। हमने क्या कर लिया आपका कुछ नहीं। अगर हम कशमीर मे हुए हिन्दूओं के कत्ल की बात भी करते हैं तो हमें सांप्रदायिक कहकर गाली निकाली जाती है।ज्यादा वोलने पर हमारे सिर मुसलिम आतंकवादियों द्वारा किए गए हमलों का जुर्म डालकर जेल में डाल दिया जाता है। कोइ हमारे मनाबाधिकारों की बात नहीं करता कोई नहीं कहता कि कशमीर में क्योंकि मुसलिम आतंकवादियों के समर्थकों की सरकार है इसलिए हिन्दूओं की हत्याओं से जुड़े मामलों की सुनवाई कशमीर से बाहर की जानी चाहिए। जम्मू कशमीर में हिन्दूओं को निशाना बना कर किए गय बम हमलों के दोषियों को निचली अदालतों द्वारा छोड़ दिया जाता है कोई मानबधिकार कार्याकर्ता उन फैसलों के विरूद्ध आबाज तक नहीं उठाता क्योंकि हिन्दुओं की कोई ऐसी संस्थ नहीं जो उनकी जेबें भर सके । उठाये भी क्यों आपको हिन्दूओं पर हमला करने का हर अधिकार जो प्राप्त है।
दूसरी तरफ आप देखो गुजरात में 58 हिन्दूओं को डिब्बे में जिन्दा जला देते हैं संसद चल रही होती है एक स्वर में हिन्दूओं पर हुए हमले की निंदा करने के बजाए कह दिया जाता है कि हिन्दूओं को मर्यादापुर्षोतम भगवान श्री राम के जन्म स्थल अयोध्या नहीं जान चाहिए था। क्योंकि वो धार्मिक यात्रा पर गए इसलिए मुसलमानों ने उन्हें जलाया ।परिणामस्वारूप हिन्दू गुस्से में पागल होकर प्रदर्शन करते हैं जिनपर पहले से त्यार बैठे मुसलमानों द्वारा हमला बोल दिया जाता है परिणामस्वारूप लगभग 900 मुसलमान और 600 हिन्दू मारे जाते हैं। आज तक आप का मददगार सेकुलर गिरोह मिडीया चैनलों सहित हिन्दूओं पर हमला वोले हुए हैं बार-बार सिर्फ मुसलामानों के कत्ल की जांच की मांग उठाकर मारे गए हिन्दूओं की बात न कर हिन्दुंओं की छाती पर लगातार मूंग दला जाता है वो भी तब जब ये कहकर कि गुजरात में क्योंकि हिन्दूओं के प्रति समर्पित सरकार है इसलिए सब मामलों की जांच मुसलिम आतंकवादियों के समर्थक सेकुलर गिरोह शासित राजय में होनी चाहिए। मुद्दे की चर्मसीमा देखिय कि ये मांग मान ली जाती है मामले गुजरात से बाहर ले जाए चुके हैं फिर SIT बनाई जाती है फिर उस पर प्रश्न खड़े किए जाते हैं उसके अधिकारियों को हटा दिया जाता है क्योंकि उनके पास मुसलिम आतंकवाद समर्थक सर्टीफिकेट नहीं था । फिर देखिए सेकुलर गिरोह द्वारा माननीय सर्वोचन्यायालय द्वारा बनाये गय आयोग को नजरअंदाज कर एक मुसलिम आतंकवाद समर्थक आयोग बनाकर मुसलमानों द्वारा जलाए गए हिन्दूओं के लिए हिन्दूओं को ही दोषी करार दिलबा दिया जाता है।
बताओ हमने किसी का क्या कर लिया करें भी तो किसके बल पर। आप देख रहे हैं कि किस तरह कशमीर से गुजरात तक मुसलिम आतंकवादियों से लोहा लेने वाले सुरक्षाबलों के जबानों को पुरस्कार के रूप में में जेलों डालकर यातनायें दी जा रही हैं। अब आप बताओ कि जब मुसलिम आतंकवादियों को मारने वाले जवान ही इस भारत में सुरक्षित नहीं तो फिर हम आपका क्या कर लेंगे ।
आप जो चाहें सो करें हम आपका कुछ नहीं विगाड़ सकते क्योंकि हर सेकुलर हिन्दू भारत को मिटाने के इस प्रयास में आपके साथ है लगे रहिए तब तक जब तक ये हिन्दूस्थान एक और पाकिस्तान या अफगानीस्थान नहीं बन जाता।
सोमवार, 10 मई 2010
कुंबर जी दुख तो इसी बात का है कि बलागरस ने भी इस मामले में वही किया जो सेकुलर गिरोह
कुंबर जी दुख तो इसी बात का है कि बलाग जगत के परजिवीयों ने भी इस मामले में वही किया जो सेकुलर गिरोह कर रहा है भारतीय संसकृति को नुकसान पहुंचाने के लिए। जब हमने इन बलागरस का विरोध किया इन्हें अधर्म के ठेकेदार कहकर तो इन्होंने हमारा बहिसकार शुरू कर दिया। दुख की बात तो यह है कि जब हमने भारतीय संस्कृति व सुरक्षा बलों को हर वक्त गाली गलौच करने वाले जानवरों का बहिसकार करने को कहा था जिनका बहिसकार करने का कहा बाद में फिरदौस जी ने भी समर्थन किया तब ऐसा वो कर न सके । खैर आपने टिप्पणी की उसके लिए धन्याबाद। आप खुद देखो कि निरूपमा के केश को इन परजीवियों ने किस हद तक उलझा दिया है।
अब उस मुद्दे पर आते हैं जिस पर हम बलाग जगत की प्रतिक्रिया का पिछले कई दिनों से इन्तजार कर रहे हैं।
प्यार के वारे में हमारा विचार था कि
Love is slow poison
Poison can take our live
Life is nothing but bunch of emotions
Emotions are meaningless without the emotion of love
हम समझते थे कि प्यार में प्राणी सर्वस्व नयौछाबर करने का दमखम रखता है लेकिन जो स्वारूप आज देखने को मिलता है उसे देखकर मन घबरा जाता है पहले शिमला में होटल में MBA के छात्र ने प्रेमिका का कत्ल शिर्फ संका के आधार पर कर दिया अब प्रियभांशु ने प्रेमिका को गर्भवती कर दगा दे दिया ऐसे कितने ही किस्से हैं जो चीख –चीख कर कह रहे हैं कि इन पढ़े लिखे लोगों ने एक तरह से प्यार में भी मिलाबट कर सैक्स को ही प्यार का नाम दे दिया इन्हीं के लिए हम ये कबिता लिख रहे हैं...
जो Sex को जो प्यार का नाम दे देते हैं वही तो अपनी मासूक को सबकी निगाह में गिराह देते हैं।
मासूक तो आसिक की आन वान शान होती है पर जीवन भर साथ निभाने की बात ही तो Sex को प्यार का नाम देने वालों के जी का जंजाल होती है।।
मासूक तो आसिक की निगाहों में मन तन में सारा जहान होती है पर प्यार को Sex का नाम देने वालों के लिए तो वो सिर्फ शारीरिक शोषण की खान होती है।
मासूक पर आसिक तो जान देते हैं पर प्यार को Sex का नाम देने वाले ही तो उसको शादी का लालच देकर शादी से पहले गर्भवती बनाकर जीते जी मार देते हैं।।
Sex को जो प्यार का नाम देते हैं वही तो भीख को दहेज के नाम से मांग लेते है रिश्पत को सिर्फ लेन देन कहकर चोरबजारी को व्यापार कहकर वेशर्मी से अंजाम दे देते हैं।
हम पूछतें हैं इन प्यार के दुशमनों से कि अगर Sex ही प्यार है तो फिर क्यों न ये प्यार की जगह Sex की बात कर खुद को प्रेमी कहने के बजाए ब्याभिचारी या बलात्कारी कहकर सच्चाई को मान लेते हैं।।
ये वही हैं जो आटे में रेत और भूसा मिला देते हैं मिर्चों में लाल रेत और दालों में पत्थर मिलाकर भोली-भाली जनता को वेवकूफ बना देते हैं ये वही हैं जो Sex को जो प्यार का नाम दे देते हैं।
हल्दी में ये पीला रंग मिलाकर पकड़े जाने पर इसे व्यापार कहकर अपनी झूठी शान बचा लेते हैं। ये वही हैं जो Sex को जो प्यार का नाम दे देते हैं।।
ये वही हैं जो पुलिस में भर्ती होकर भी चोर का साथ देते हैं मीडिया में बैठकर ये आतंकवादियों को हीरो बना देते हैं ।
कुलमिलाकर Sex को जो प्यार का नाम देते हैं वही हर तरह के भ्रष्टाचार को अंजाम दे देते हैं।।
ये वही हैं जो PWD में नौकरी लगने पर सीमेंट निर्माण में लगाने के बजाए बाजार में बेचकर लोगों की जान ले लेते हैं। ये वही हैं जो Sex को जो प्यार का नाम दे देते हैं।
डाक्टर बन कर कमीशन के बदले घटिया दवाई खिलाकर खुद को भगवान मानने वालों को मौत की नींद सुला देते हैं ये वही हैं जो Sex को प्यार का नाम दे देते हैं।।
Sex को जो प्यार का नाम देते हैं वही तो अध्यापक बनकर बच्चों को संस्कृति व आत्मउत्थान की जगह ब्याभिचार और आत्मगलानि का पाठ पढ़ा देते हैं।
Sex को जो प्यार का नाम देते हैं वही तो चंद टुकड़ों के बदले देश के दुशमनों के हाथों बिककर अपने हमवतनों को मौत की नींद सुला देते हैं।।
Sex को जो प्यार का नाम देते हैं वही तो जिन्दगीभर मां-बाप की सेवा की जगह मां-बाप को वृद्धा आश्रम में छोड़कर Mother Day और Father Day की नई रीत चलाकर अपनी मक्कारी छुपा लेते हैं।
ये वही हैं Sex को जो प्यार का नाम देकर बिनब्याही को मां बनाकर उसे जीते जी मार देते हैं।।
ये वही हैं जो लूट-खसूट का पाठ लेन-देन के नाम से।
भीख का पाठ दहेज के नाम से।।
देशद्रोह का पाठ मजबूरी व गरीबी के नाम से।।।
शिक्षा के बहाने पढ़ा देते हैं ।।।।
ये वही हैं जो Sex को प्यार का नाम देकर बिनब्याही को मां बनाकर उसे जीते जी मार देते हैं।
ये वही हैं जो देशद्रोह को धर्मनिर्पेक्षता का नाम देकर देश में गद्दारी की एक नई रीत चला देते हैं ये वही हैं जो Sex को जो प्यार का नाम दे देते हैं।।
आओ मिलकर इन इन मक्कारों का पर्दाफाश कर प्यार को प्यार ही रखकर फिर से प्यार की प्यारी सी रीत को बहाल इन Sex को प्यार का नाम देने वाले मानबता के इन शत्रुओं का शमूल नास करें
अब उस मुद्दे पर आते हैं जिस पर हम बलाग जगत की प्रतिक्रिया का पिछले कई दिनों से इन्तजार कर रहे हैं।
प्यार के वारे में हमारा विचार था कि
Love is slow poison
Poison can take our live
Life is nothing but bunch of emotions
Emotions are meaningless without the emotion of love
हम समझते थे कि प्यार में प्राणी सर्वस्व नयौछाबर करने का दमखम रखता है लेकिन जो स्वारूप आज देखने को मिलता है उसे देखकर मन घबरा जाता है पहले शिमला में होटल में MBA के छात्र ने प्रेमिका का कत्ल शिर्फ संका के आधार पर कर दिया अब प्रियभांशु ने प्रेमिका को गर्भवती कर दगा दे दिया ऐसे कितने ही किस्से हैं जो चीख –चीख कर कह रहे हैं कि इन पढ़े लिखे लोगों ने एक तरह से प्यार में भी मिलाबट कर सैक्स को ही प्यार का नाम दे दिया इन्हीं के लिए हम ये कबिता लिख रहे हैं...
जो Sex को जो प्यार का नाम दे देते हैं वही तो अपनी मासूक को सबकी निगाह में गिराह देते हैं।
मासूक तो आसिक की आन वान शान होती है पर जीवन भर साथ निभाने की बात ही तो Sex को प्यार का नाम देने वालों के जी का जंजाल होती है।।
मासूक तो आसिक की निगाहों में मन तन में सारा जहान होती है पर प्यार को Sex का नाम देने वालों के लिए तो वो सिर्फ शारीरिक शोषण की खान होती है।
मासूक पर आसिक तो जान देते हैं पर प्यार को Sex का नाम देने वाले ही तो उसको शादी का लालच देकर शादी से पहले गर्भवती बनाकर जीते जी मार देते हैं।।
Sex को जो प्यार का नाम देते हैं वही तो भीख को दहेज के नाम से मांग लेते है रिश्पत को सिर्फ लेन देन कहकर चोरबजारी को व्यापार कहकर वेशर्मी से अंजाम दे देते हैं।
हम पूछतें हैं इन प्यार के दुशमनों से कि अगर Sex ही प्यार है तो फिर क्यों न ये प्यार की जगह Sex की बात कर खुद को प्रेमी कहने के बजाए ब्याभिचारी या बलात्कारी कहकर सच्चाई को मान लेते हैं।।
ये वही हैं जो आटे में रेत और भूसा मिला देते हैं मिर्चों में लाल रेत और दालों में पत्थर मिलाकर भोली-भाली जनता को वेवकूफ बना देते हैं ये वही हैं जो Sex को जो प्यार का नाम दे देते हैं।
हल्दी में ये पीला रंग मिलाकर पकड़े जाने पर इसे व्यापार कहकर अपनी झूठी शान बचा लेते हैं। ये वही हैं जो Sex को जो प्यार का नाम दे देते हैं।।
ये वही हैं जो पुलिस में भर्ती होकर भी चोर का साथ देते हैं मीडिया में बैठकर ये आतंकवादियों को हीरो बना देते हैं ।
कुलमिलाकर Sex को जो प्यार का नाम देते हैं वही हर तरह के भ्रष्टाचार को अंजाम दे देते हैं।।
ये वही हैं जो PWD में नौकरी लगने पर सीमेंट निर्माण में लगाने के बजाए बाजार में बेचकर लोगों की जान ले लेते हैं। ये वही हैं जो Sex को जो प्यार का नाम दे देते हैं।
डाक्टर बन कर कमीशन के बदले घटिया दवाई खिलाकर खुद को भगवान मानने वालों को मौत की नींद सुला देते हैं ये वही हैं जो Sex को प्यार का नाम दे देते हैं।।
Sex को जो प्यार का नाम देते हैं वही तो अध्यापक बनकर बच्चों को संस्कृति व आत्मउत्थान की जगह ब्याभिचार और आत्मगलानि का पाठ पढ़ा देते हैं।
Sex को जो प्यार का नाम देते हैं वही तो चंद टुकड़ों के बदले देश के दुशमनों के हाथों बिककर अपने हमवतनों को मौत की नींद सुला देते हैं।।
Sex को जो प्यार का नाम देते हैं वही तो जिन्दगीभर मां-बाप की सेवा की जगह मां-बाप को वृद्धा आश्रम में छोड़कर Mother Day और Father Day की नई रीत चलाकर अपनी मक्कारी छुपा लेते हैं।
ये वही हैं Sex को जो प्यार का नाम देकर बिनब्याही को मां बनाकर उसे जीते जी मार देते हैं।।
ये वही हैं जो लूट-खसूट का पाठ लेन-देन के नाम से।
भीख का पाठ दहेज के नाम से।।
देशद्रोह का पाठ मजबूरी व गरीबी के नाम से।।।
शिक्षा के बहाने पढ़ा देते हैं ।।।।
ये वही हैं जो Sex को प्यार का नाम देकर बिनब्याही को मां बनाकर उसे जीते जी मार देते हैं।
ये वही हैं जो देशद्रोह को धर्मनिर्पेक्षता का नाम देकर देश में गद्दारी की एक नई रीत चला देते हैं ये वही हैं जो Sex को जो प्यार का नाम दे देते हैं।।
आओ मिलकर इन इन मक्कारों का पर्दाफाश कर प्यार को प्यार ही रखकर फिर से प्यार की प्यारी सी रीत को बहाल इन Sex को प्यार का नाम देने वाले मानबता के इन शत्रुओं का शमूल नास करें
रविवार, 9 मई 2010
कबिता....आग का दरिया है डूब के जाना पर हर हाल में अपने प्रियतम को पाना है का बदला स्वारूप
प्यार के वारे में हमारा विचार था कि
Love is slow poison
Poison can take our live
Life is nothing but bunch of emotions
Emotions are meaningless without the emotion of love
हम समझते थे कि प्यार में प्राणी सर्वस्व नयौछाबर करने का दमखम रखता है लेकिन जो स्वारूप आज देखने को मिलता है उसे देखकर मन घबरा जाता है पहले शिमला में होटल में MBA के छात्र ने प्रेमिका का कत्ल शिर्फ संका के आधार पर कर दिया अब प्रियभांशु ने प्रेमिका को गर्भवती कर दगा दे दिया ऐसे कितने ही किस्से हैं जो चीख –चीख कर कह रहे हैं कि इन पढ़े लिखे लोगों ने एक तरह से प्यार में भी मिलाबट कर सैक्स को ही प्यार का नाम दे दिया इन्हीं के लिए हम ये कबिता लिख रहे हैं...
जो Sex को जो प्यार का नाम दे देते हैं वही तो अपनी मासूक को सबकी निगाह में गिराह देते हैं।
मासूक तो आसिक की आन वान शान होती है पर जीवन भर साथ निभाने की बात ही तो Sex को प्यार का नाम देने वालों के जी का जंजाल होती है।।
मासूक तो आसिक की निगाहों में मन तन में सारा जहान होती है पर प्यार को Sex का नाम देने वालों के लिए तो वो सिर्फ शारीरिक शोषण की खान होती है।
मासूक पर आसिक तो जान देते हैं पर प्यार को Sex का नाम देने वाले ही तो उसको शादी का लालच देकर शादी से पहले गर्भवती बनाकर जीते जी मार देते हैं।।
Sex को जो प्यार का नाम देते हैं वही तो भीख को दहेज के नाम से मांग लेते है रिश्पत को सिर्फ लेन देन कहकर चोरबजारी को व्यापार कहकर वेशर्मी से अंजाम दे देते हैं।
हम पूछतें हैं इन प्यार के दुशमनों से कि अगर Sex ही प्यार है तो फिर क्यों न ये प्यार की जगह Sex की बात कर खुद को प्रेमी कहने के बजाए ब्याभिचारी या बलात्कारी कहकर सच्चाई को मान लेते हैं।।
ये वही हैं जो आटे में रेत और भूसा मिला देते हैं मिर्चों में लाल रेत और दालों में पत्थर मिलाकर भोली-भाली जनता को वेवकूफ बना देते हैं ये वही हैं जो Sex को जो प्यार का नाम दे देते हैं।
हल्दी में ये पीला रंग मिलाकर पकड़े जाने पर इसे व्यापार कहकर अपनी झूठी शान बचा लेते हैं। ये वही हैं जो Sex को जो प्यार का नाम दे देते हैं।।
ये वही हैं जो पुलिस में भर्ती होकर भी चोर का साथ देते हैं मीडिया में बैठकर ये आतंकवादियों को हीरो बना देते हैं ।
कुलमिलाकर Sex को जो प्यार का नाम देते हैं वही हर तरह के भ्रष्टाचार को अंजाम दे देते हैं।।
ये वही हैं जो PWD में नौकरी लगने पर सीमेंट निर्माण में लगाने के बजाए बाजार में बेचकर लोगों की जान ले लेते हैं। ये वही हैं जो Sex को जो प्यार का नाम दे देते हैं।
डाक्टर बन कर कमीशन के बदले घटिया दवाई खिलाकर खुद को भगवान मानने वालों को मौत की नींद सुला देते हैं ये वही हैं जो Sex को प्यार का नाम दे देते हैं।।
Sex को जो प्यार का नाम देते हैं वही तो अध्यापक बनकर बच्चों को संस्कृति व आत्मउत्थान की जगह ब्याभिचार और आत्मगलानि का पाठ पढ़ा देते हैं।
Sex को जो प्यार का नाम देते हैं वही तो चंद टुकड़ों के बदले देश के दुशमनों के हाथों बिककर अपने हमवतनों को मौत की नींद सुला देते हैं।।
Sex को जो प्यार का नाम देते हैं वही तो जिन्दगीभर मां-बाप की सेवा की जगह मां-बाप को वृद्धा आश्रम में छोड़कर Mother Day और Father Day की नई रीत चलाकर अपनी मक्कारी छुपा लेते हैं।
ये वही हैं Sex को जो प्यार का नाम देकर बिनब्याही को मां बनाकर उसे जीते जी मार देते हैं।।
ये वही हैं जो लूट-खसूट का पाठ लेन-देन के नाम से।
भीख का पाठ दहेज के नाम से।।
देशद्रोह का पाठ मजबूरी व गरीबी के नाम से।।।
शिक्षा के बहाने पढ़ा देते हैं ।।।।
ये वही हैं जो Sex को प्यार का नाम देकर बिनब्याही को मां बनाकर उसे जीते जी मार देते हैं।
ये वही हैं जो देशद्रोह को धर्मनिर्पेक्षता का नाम देकर देश में गद्दारी की एक नई रीत चला देते हैं ये वही हैं जो Sex को जो प्यार का नाम दे देते हैं।।
आओ मिलकर इन इन मक्कारों का पर्दाफाश कर प्यार को प्यार ही रखकर फिर से प्यार की प्यारी सी रीत को बहाल इन Sex को प्यार का नाम देने वाले मानबता के इन शत्रुओं का शमूल नास करें
आग का दरिया है डूब के जाना पर हर हाल में अपने प्रियतम को तडपाना है...
शनिवार, 8 मई 2010
गद्दारी में हिन्दू-मुसलिम-इसाई का मिटता फर्क यह कहने को मजबूर करता है कि भारतविरोधी को उसके कर्म से पहचानो सांप्रदाय से नहीं।
जबसे फोन टैपिंग का समाचार आया है तब से बहुत से लोग हाय-तौवा मचा रहे हैं ।हमारी राय में सुरक्षा बलों को भारत में रहने वाले हर ब्यक्ति का फोन टैप करने का अधिकार होना चाहिए।क्योंकि देश में सेकुलर गिरोह ने गद्दारों की एक ऐसी भीड़ खड़ी कर दी है जिसके रहते देश को सुरक्षित रखना एक बड़ी चुनौती बन गई है। बेशक आज देश में सेकुलर गिरोह की सरकार है लेकिन फोन टैपिंग देशभक्त सरकार के आने पर गद्दारों के लाईब फर्दाफास का एक बढ़ा हथियार बन सकता है। वेशक फोन टैपिंग निजी जिंदगी को खतरे में डालती है पर निजी जिन्दगी तभी है जब तक देश है अगर देश नहीं तो क्या निजी जिन्दगी ।विस्वास नहीं होता तो देख लो अफगानीस्तान-बंगलादेश के हालात।
अगर हम उन नेताओं की बात करें जिनके फोन नियन्त्रित किए गय तो आप देखेंगे कि इनमें से अधिकतर संदिगध है।सीता राम यचुरी माओवादी आतंकवादियों का ठेकेदार।मुलायम सिंह यादब पाक समर्थक आतंकवादियों का ठेकेदार।दिगविजय सिंह माओवादी व पाक समर्थक दोनों तरह के आतंकवादियों का ठेकेदार। सतीस कुमार की पार्टी का रूख भी माओवादी आतंकवादियों के मामले मे संदेह के घेरे में है।शिवानन्द तिवारी ने तो खुलकर माओवादी आतंकवादियों का समर्थन तक कर दिया था।
हमारे विचार में किसी भी देसभक्त को दूरभाष नियन्त्र से परेसानी नहीं हो सकती है।हां इस बात पर जरूर मतभेद जरूर हो सकते हैं कि फोन नियन्त्रण का अधिकार किसके पास रहना चाहिए । हमारी पक्की राय है कि फोन नियन्त्रण का अधिरकार हर हालात में भारतीय सेना के पास ही रहना चाहिए। सेना के पास यह अधिकार होने से किसी को की परेसानी क्यों हो सकती है क्योंकि देश के किसी भी हिस्से में अशांति का सामना करने के लिए सैनिक ही तो निकलते हैं इसलिए वो कभी नहीं चाहेंगे कि देश की सीमा के भीतर कोई गद्दार जिंदा रहे।नेताओं का क्या भरोसा कब कीसी और एंटोनिया को देश में लाकर उस विषकन्या के सामने सारे राज उगल दें। फोन टैपिंग का समाचार आते ही कुछ लोगों ने शोर मचाना शुरू कर दिया है कि मुसलमानों के फोन नियन्त्रित हो रहे हैं ।क्यों भाई क्या मुसलमानों को गद्दारी की खूली छूट मिलनी चाहिए।आतंकवाद के विरूद्ध जैसे ही किसी कानून की बात आती है तो शोर मचा दिया जाता है कि ये कानून मुसलमानों के विरूद्ध है अरे भई आप ये क्यों मानते हो कि सबके सब गद्दार मुसलमान ही हैं क्या राहुल भट,दिगविजय सिंह ,अमर सिंह,संजय दत्त मुसलमान हैं ?अपनी सोच को दुरूस्त करो ।गद्दार को उसके कर्म से पहचानो सांप्रदाय से नहीं।
अगर हम उन नेताओं की बात करें जिनके फोन नियन्त्रित किए गय तो आप देखेंगे कि इनमें से अधिकतर संदिगध है।सीता राम यचुरी माओवादी आतंकवादियों का ठेकेदार।मुलायम सिंह यादब पाक समर्थक आतंकवादियों का ठेकेदार।दिगविजय सिंह माओवादी व पाक समर्थक दोनों तरह के आतंकवादियों का ठेकेदार। सतीस कुमार की पार्टी का रूख भी माओवादी आतंकवादियों के मामले मे संदेह के घेरे में है।शिवानन्द तिवारी ने तो खुलकर माओवादी आतंकवादियों का समर्थन तक कर दिया था।
हमारे विचार में किसी भी देसभक्त को दूरभाष नियन्त्र से परेसानी नहीं हो सकती है।हां इस बात पर जरूर मतभेद जरूर हो सकते हैं कि फोन नियन्त्रण का अधिकार किसके पास रहना चाहिए । हमारी पक्की राय है कि फोन नियन्त्रण का अधिरकार हर हालात में भारतीय सेना के पास ही रहना चाहिए। सेना के पास यह अधिकार होने से किसी को की परेसानी क्यों हो सकती है क्योंकि देश के किसी भी हिस्से में अशांति का सामना करने के लिए सैनिक ही तो निकलते हैं इसलिए वो कभी नहीं चाहेंगे कि देश की सीमा के भीतर कोई गद्दार जिंदा रहे।नेताओं का क्या भरोसा कब कीसी और एंटोनिया को देश में लाकर उस विषकन्या के सामने सारे राज उगल दें। फोन टैपिंग का समाचार आते ही कुछ लोगों ने शोर मचाना शुरू कर दिया है कि मुसलमानों के फोन नियन्त्रित हो रहे हैं ।क्यों भाई क्या मुसलमानों को गद्दारी की खूली छूट मिलनी चाहिए।आतंकवाद के विरूद्ध जैसे ही किसी कानून की बात आती है तो शोर मचा दिया जाता है कि ये कानून मुसलमानों के विरूद्ध है अरे भई आप ये क्यों मानते हो कि सबके सब गद्दार मुसलमान ही हैं क्या राहुल भट,दिगविजय सिंह ,अमर सिंह,संजय दत्त मुसलमान हैं ?अपनी सोच को दुरूस्त करो ।गद्दार को उसके कर्म से पहचानो सांप्रदाय से नहीं।
अब अमेरिका तय करेगा कि भारत में कौन देशभक्त और कौन गद्दार
हम एक लम्बे समय से कह रहे हैं कि सेकुलर गिरोह की सरकार भारत के सुरक्षा हितों को विदेशी ताकतों के इसारे पर नुकसान पहंचा रही है जिसके प्रमाण हम आपको दे रहे हैं । इसी कड़ी में एक और प्रमाण सामने आया है कि अमेरिका ने भारत को बताया कि अंडेमान में तैनात भरत का एक सैनिक अधिकारी गद्दार है अब प्रश्न ये उठता है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि ये अधिकारी अमेरिकी खुखिया ऐजेंसीयों को वो सूचनायें देने से मना तो नहीं कर रहा था जो अमेरिका चाहता है।हम अच्छी तरह जानते हैं कि अमेरिका एक ऐसा ईसाई देश है जो अपने राष्ट्र के हित व ईसाईत के प्रचार-प्रसार के लिए कुछ भी कर सकता है ऐसे में कैसे विस्वास किया जा सकता है कि जो अमेरिका कह रहा है वो भारत के हित में है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि ये अमेरिका ही है जिसने पाकिस्तान को धन व हथियार देकर भारत से लड़ने के काविल बनाया है ये वो अमेरिका है जिसने जिहादी आतंकवादियों की फौज खड़ी की अपने देश के हित साधने के लिए अब उन्हे मार व मरवा रहा है। ऐसे में अमेरिका के इसारों पर भारत सरकार के चलने का मतलब है देशहित के साथ खिलवाड़।आपको याद होगा कि अमेरिका के इसारे पर ही लैफ्टीनैंट कर्नल पुरोहित जी को जेल में डाल कर हिन्दू क्रांतिकारियों की झूठी परिकलपना खड़ी करने का षडयन्त्र किया गया है जिसके लिए सरकार पिछले दो वर्ष से एक ऐसे भंवर में फंसी हुई नजर आ रही है जो उसके गले की फांस बन गया है क्योंकि सेकुलर गिरोह की सरकार ने विना सबूत के अमेरिकी इसारे पर हिन्दूओं को जेल में डाल कर अपने लिए एक ऐसी समस्या खड़ी कर ली है जो भविष्य में कभी भी एक बड़े गृह युद्ध का रूप ले सकती है क्योंकि सरकार के पास इन हिन्दूओं के विरूद्द एक भी प्रमाण नहीं है इसकी पुष्टी मकोका कोर्ट कर चुका है जिस दिन हिन्दूओं के सबर का बांध टूट गया उस दिन क्या होगा ये तो भविष्य ही तय करेगा।भारत में अमेरिका के हस्तक्षेप के प्रमाण तब भी मिले थे जब भारतीय कसटम अधिकारियों ने मुंबई हबाई अड्डे पर FBI के अधिकारियों को अबैध रूप से भारत में लाये जा रहे जासूसी उपकरणों के साथ पकड़ा था।अमोरिका की असलियत तब भी सामने आई जब ये पाया गया कि अमेरिकी जासूस ने मुंबई पर हमला करवाने में भूमिका निभई थी अमेरिका की बदनियती का पर्दाफास तब भी हुआ था जब उसने भारत के सुरक्षा अधिकारियों को हेडली से बातचीत करने से रोक दिया था। अभी हाल ही में अमेरिका ने भारत की सरकार पर दबाब बनाकर एक ऐसा परमाणु जिम्मेवारी सबन्धित बिल पास करवाने की कोशिस की (अभी भी जारी है) जो भारतीयों की सुरक्षा को खतरे में डालने की खुली छूट अमेरिकी कंमपनीयों को देता है वो भी विना कीसी भरपाई के जोखिम से मुक्त। कुल मिलाकर हम अमेरिका से सहयोग के विरोधी नहीं लेकिन सुरक्षा अधिकारियों की देशभक्ति का सर्टीफिकेट अमेरिका जारी करे ये देश की सुरक्षा के साथ गद्दारी के समान होगा।
कहां हैं अधर्म के ठेकेदार?....... शर्मनाम की कोई चीज है तो चुलुभर पानी में डूबमरो...
सबसे पहले तो हम भगवान से प्रार्थना करेंगे कि निरूपमा की आत्मा को शांति प्रदान कर उसके परिवार वालों को निरूपमा की आसमयिक मौत के सदमे व अधर्म के ठेकेदारों के हमले को सहने की ताकत प्रदान करें। इसके साथ ही हम भगवान से ये प्रार्थना भी करेंगे कि जिन दुष्टों ने जानबूझकर बालात्कारी हत्यारे को बचाने के लिए प्रशासन को गुमराह करने की कोशिश की उन सब को सदबुद्धि दें ताकि वे अपने जैसे ब्याभिचारी जानवर के जूल्मों की शिकार किसी और निरूपमा को न्याय से महरूम रखने का ऐसा घोर षडयन्त्र दोबारा न करें।
सबसे पहले हम उन परिस्थितिजनय सबूतों की बात करते हैं जो इस बात के सपष्ट प्रमाण हैं कि प्रियभांसु ने निरूपमा को शादी का ललाच देकर उसका लम्बे समय तक शारीरिक व मानसिक शोषण किया ।इस शोषण के परिणामस्वारूप गर्भवती हुई निरूपमा से शादी तो दूर बल्कि इस शातिर अपराधी ने उसे सहारा तक देने से इनकार कर दिया। निरूपमा को अपने परिवार से प्यार का झांसा देकर दूर करने वाले इस दुष्ट से धोखा खाकर जब निरूपमा इस संसार से चली गई तो इस ब्लातकारी पत्रकार ने अपने साथी ब्याभिचारी पत्रकरों व पत्रकार अध्यापकों की सहायता से जाति को हथियार बनाकर पुलिस, प्रशासन व जनता को गुमराह करने की नौटंकी शुरू कर दी ।
ये लगभग बैसी ही नौटंकी थी जैसी किसी भी आतंकवादी हमले के बाद ये अपराधी मानसिकता से ग्रसित पत्रकार आतंकवादियों को कभी गरीब तो कभी अनपढ़ बताकर आतंकवादियों का बचाब करते हैं अगर आतंकवादी मुठभेड़ में मारे जायें तो उनके बच्चों को दिखाकर बताते नहीं थकते कि देखो अगर ये आतंकवादी नहीं मरता तो इसके बच्चे डाक्टर बनते या इंजिनियर बनते । कुलमिलाकर कोशिश जनता की सहानुभूति बटोरकर आतंकवादियो को बचाना व अपनी जान को जोखिम में डालकर जनता की रक्षा के लिए लड़ रहे सुरक्षा बलों के प्रति जनता के मन में अविस्वास पैदा करना।
लेकिन आज तो अपराधी मानसिकता से ग्रसित इन नीच पत्रकारों ने हद ही कर दी एक बालातकारी को जनता के सामने प्रेमी के रूप में पेश कर । इस तथाकथित प्रेमी की वेशर्मी देखो कि एक विन ब्याही लड़की को गर्भवती बनाकर मरने को अकेला छोड़ देने के वाद उसकी मौत को भुनाकर खुद को हीरो बनाने के लिए खुद ही कभी एक मिडीया चैनल तो कभी दूसरे मिडीया चैनल पर जाकर निरूपमा व मां-बाप की इज्जत को तार-तार करने में जुट गया ।
हमें तो हैरानी तब हुई जब IBN7 पर देवेन्द्र और चन्दन जी के वीच जाति को लेकर हो रही बहस के दौरान ये दुष्ट दांत निकाल रहा था वो भी तब जब अभी निरूपमा के इस दुनिया से गए तीन दिन भी नहीं हुए हैं। कैसा प्यार है कि प्रेमिका की मौत को तीन दिन से पहले ही सबकुछ भूल गया ये राक्षस अपनी प्रेमिका की जगहसाई कराने में जुट गया ये ब्याभिचारी पत्रकार खुद को जातिबाद का शिकार बताने में फख्र महसूस करने लग पड़ा ये धोखेवाज। हद तो तब हुई जब एक और ब्याभिचारी पत्रकार खुद को एसे बलातकारियों का गुरू बताते हुए ये जताने लगा कि किस तरह इन लोगों ने निरूपमा के दिमाग से जातिवाद को निकाल कर उसे इस बहसी के साथ प्रेम करने के लिए मजबूर किया खुद इस बलातकारी ने कहा कि शुरू- शुरू में उसके दिमाग में जाति की बात थी जो बाद में दूर कर दी गई मतलब इस बयाभिचारी व इसके अपराधी मानसिकता से ग्रस्त साथियों ने निरूपमा को सिर्फ इसलिए टारगेट किया क्योंकि वो अलग जाती की थी बाद में उसके गर्भवती बनने पर उससे खुद को अलग कर मरने के लिए अकेला छोड़कर सबूतों को मिटाकर खुद को हीरो बनाने की त्यारी जोर-शोर से शुरू कर दी।
• अब हम बात करते हैं उन सबूतों की जिन्होंने पुलिस को इस बलातकारी के द्वारा निरूपमा को आत्महत्या के लिए बजबूर करने की बात पर विस्वास करने का आधार दिया।
• सबसे पहला सबूत ये कि जब ये अपने व निरूपमा के परिवार की सहमति के विना निरूपमा के साथ रहकर उसे गर्भवती बना सकता था तो इसने कोर्ट जाकर शादी क्यों नहीं की?
• क्यों इसने कोर्ट जाकर शादी करने के बजाए खुद को निरूपमा से दूर करने की कोशिश की?
• निरूपमा गर्भवती है ये प्रियभांसु को जानकारी नहीं थी सिर्फ कोई पागल ही मान सकता है ये जानकारी उसे अच्छी तरह से थी।
• आत्महत्या से पहले निरूपमा ने 56 SMS इस बालातकारी को किए जिन में से एक को छोड़ कर सब इस बयाभिचारी ने हटा दिए क्यों क्योंकि वो 55 SMS इस दरिंदे द्वारा निरूपमा पर किए गय अत्याचारों का सपष्ट प्रमाण थे ।
• अपने विरूद्ध सबूतों को मिटाने की इसी कड़ी को जारी रखते हुए इस दरिंदे ने निरूपमा की डायरियों को उसके कमरे से चुरा लिया।
• अपने अपराध की इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए इस दरिंदे ने निरूपमा के लैपटौप को भी उसके घर से चुराकर उसके साथ भी छेड-छाड़ की सबूतों को मिटाने के लिए।
• सबसे बढ़ी बात यह कि जब निरूमपा की मृत्यु झारखंड के कोडरमा में हुई तो इस दुष्ट को सबसे पहले कैसे प्राप्त हुई ।हमारे विचार में निरूपमा ने SMS के माध्यम से इसे अपने द्वारा आत्महत्या करने की जानकारी दी थी।इसी जानकारी के आधार पर इसने अपने साथी बयाभिचारी पत्रकारों के माध्यम से DIG,SP स्तर के अधिकारियों के माध्यम से पुलिस के निचले स्तर के अधिकारियों व डाकटरों पर दबाब बनाकर इस आत्महत्या के मामले को हत्या का मामला बनाकर निरूपमा की माता को फंसाने की कोशिश की क्योंकि बाकी निरूपमा के जिन रिस्तेदारों पर शक किया गया था या किया जा सकता था वो सब किसी भी तरह से हत्या के वक्त निरूपमा के घर पर नहीं थे नही हो सकते थे क्योंकि उनकी काल डिटेलस ने सारा मामला साफ कर दिया है जबकि इस दरिंदे प्रियभांसु की काल डिटेलस ने ये साफ कर दिया है कि मौत के लिए सिर्फ यही दरिंदा जिम्मेदार था।
अन्त में हम ये उम्मीद करते हैं कि बलागजगत के जिन पत्रकारों ने अज्ञानबस या जल्दवाजी में विना किसी पूर्वाग्रह के इस दरिंदे बालातकारी को बचाने में सहायक हो सकने वाले लेख लिखे थे वो खुद आगे आकर माफी मांगकर अपने निष्पक्ष होने का प्रमाण अपने पाठकों के सामने रखें।
जिन अधर्म के ठेकेदारों ने जानबूझकर इस घटना को सहारा बनाकर धर्म को निशाना बनाने की कोशिश की उनके लिए यही उचित रहेगा कि वो चुलुभर पानी में डूब मरें...
बुधवार, 5 मई 2010
SEX को प्यार का नाम देकर बालातकार करने वालों के कुकर्मों को देखकर तो शायद हीर-रांजा,लैला-मजनू व सोनी-महिवाल की रूह भी कांप जाती होगी?
कल बलागवाणी पर अपना ध्यान अचानक एक नाम पर गया जो की जगह-जगह लिखा पाया गया। फिर अचानक अपनी निगाह एक ऐसे लेख पर पड़ी जो एक नेक महिला द्वारा लिखा प्रतीत हुआ। फिर हमने जानने की कोशिश की कि आखिर मामला क्या है।
सब जगह जाकर पता चला कि एक पत्रकार ने एक लड़की के साथ बलातकार कर उसे गर्भबती बनाकर अपने माता पिता को अपने गर्भ का बास्ता देकर उनकी छाती पर मूंग दलने भेज दिया।
क्योंकि बालातकारी एक पत्रकार था इसलिय मिडीया से जुड़े लोगों ने इस बालातकार को प्यार का चोला पहनाने की भरपूर कोशिश करते हुए लड़की की मौत के लिए इस बालातकारी को जिम्मेबार ठहराने के बजाय लड़की के माता पिता को कटघरे में खड़ा करने का भरपूर प्रयास किया जो अभी जी जारी है। इन में से कुछ चैनलों ने तो एक खुशहाल परिबार की बरबादी पर को अपनी आय वोले को TRP बढ़ाने का जरिया ही बना लिया ।इनकी वेशर्मी देखो कि जिस बलातकारी के विरूद्द FIR दर्ज करवाकर जेल में डलवाने की कोशिश होनी चाहिए थी उसी कातिल को ये चैनल प्रेमी बताकर पेश कर रहे थे ।
अब मानबता के सत्रु इन दुष्टों को कौन समझाए कि प्यार वो एहसास है जिसमें शारीरिक शोषण की कतई जरूरत महसूस नहीं होती ।प्यार देने का नाम है लेने का नहीं । जो ब्यक्ति अपने मां-बाद से प्यार नहीं कर सकता वो भला दूसरे से क्या प्यार करेगा ।आप बताओ जिस मां ने इन बच्चों को अपनी कोख में रखकर अपने खून से जिन्दा रखकर इनकी हर शुख-सुविधा का ख्याल रखकर इन्हें पाल पोस कर बढ़ा किया।अपने से ज्यादा आगे बढ़ाने के लिए अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा इनकी शिक्षा पर खर्च किया ।उन मां-बाप की सारी जिंदगी की कमाई गई मान-मर्यादा को जिस तरह से इस दुष्ट ने मिडीया में बैठकर उछाला क्या कोई प्यार करने वाला इस तरह से उछाल सकता है ?
हम बात कर रहे हैं इसी दुष्ट के मां-बाप की ।जाओ जाकर उन्हें पूछो कि उनके बेटे के इस कुकर्म से उनका सिर गर्व से उंचा हुआ है या फिर शर्म से झुक गया है। प्रश्न साधारण सा है कि अगर इस दुष्ट को उस लड़की से प्यार था तो फिर गर्भ कैसे ठहर गया। अगर गर्भ ठहर गया तो इस ब्यक्ति ने कोर्ट में जाकर शादी क्यों नहीं कर ली।क्योंकि जब मां-बाप की इजाजत के विना ये समाजिक मर्यादाओं को पार करने का मादा रखता है तो फिर शादी करने का मादा क्यों नहीं। आज हम कह रहे हैं कि अगर इस दुष्ट को सजा नहीं हुइ तो घात लगाय बैठे इस जैसे लाखों बयाभिचारी लड़कियों को अपनी काम वासना की पूर्ति का खेल बनाकर उन्हें आतमहत्या करने पर मजबूर करेंगे।
जिस तरह ये पशु SEX को ही अलौकिक प्यार का प्रायवाची बनाने पर तुले हैं उसे देखकर तो हीर-रांजा,लैला-मजनू व सोनी-महिवाल की रूह भी कांप जाती होगी ।हमारे विचार में अगर ये दुष्ट उस लड़की से सच में प्यार करता होता तो न ये सारीरिक सबन्ध बनाकर उसे गर्भवती करता क्योंकि प्यार में तो प्रेमी प्रेमिका की सुरक्षा के लिए अपने प्राण तक देने से नहीं चूकता तो शारीरिक सबन्धों से खुद को रोकना कौन सी बढ़ी बात है।अगर ये वेसमझी में हुआ था तो भी ये इसके पास कोर्ट में जाकर शादी करने का रास्ता था। हम जानते हैं कि कोई लड़की कितनी भी बहादुर क्यों नहो इस तरह की स्थिति पैदा होने पर उसे एक पक्के साथी की जरूरत होती है लेकिन परीक्षा की इस घड़ी में जिस तरह इस दुष्ट ने उसे अकेला छोड़ा उसेस तो यही साबित होता है कि इसका एकमात्र मकसगद वासना की पूर्ति है न कि कोई प्यार की भावना।
अगर विना किसी समाजिक व परिबारिक जिम्मेवारी के SEX करने को प्यार कहते हैं तब तो ये कहना पड़ेगा कि सबके सब जानबर एक दूसरे से प्यार ही तो करते हैं क्योंकि उन्हे SEX करने के लिए किसी शादी या समाजिक मर्यादा की दरकार नहीं होती न हीं बच्चे पैदा करने पर कोई परिबारिक जिम्मेवारी भी बहन नहीं करनी पड़ती है। कितनी अजीब बात है कि सभ्य समाज की सब मर्यादाओं को तार-तार कर पशुप्रबृति के अनुशरण को आधुनिकता का नाम देकर जायज ठहराने की कोशिस की जाती है। लगातार बदन पर कम होते कपड़ों पर आपति उठने पर कम कपड़े महनने को भी आधुनिकता कहा जाता है अगर कम कपड़े पहनना या कपड़े न पहनना आधुनिकता है तब तो हमारे पशु सबसे ज्यादा आधुनिक हैं क्योंकि वो तो कभी भी कहीं भी किसी भी मौसम में कपड़े नीं पहनते हैं वाह क्या आधुनिकता है अरे सीधे क्यों नहीं कहते कि तुम्हें पशु बनना है सीधे कहो पशुओं को कौन रोक सकता है न कोई समाज न कोई धर्म न कोई मर्यादा।
हमारी निगाह में यही बजह है कि ये आधुनिक लोग गर्भ धारण करने के वाद ये निश्चत करवा लेते हैं कि पैदा होने वाला बच्चा लड़का है या लड़की और लड़की होने पर उसका कत्ल करवा देते हैं क्योंकि इन्हे दूसरों की इज्जत से जो खेलना होता है।
इन पशुओं को हर समाजिक मर्यादा अपनी बासना की पूर्ति का रोड़ा दिखने लगती है। तभी तो ये लोग गांव के जीबन के आधर सतम्भ गोत्र पर भी हाय तौवा मचाते हैं क्योंकि इन पशुओं को अपनी काम-वासना की पूर्ति के रास्ते में कोई रूकाबट सहन नहीं इन्हे पशुओं की तरह विना किसी मर्यादा या जिम्मेवारी के अपना सिकार चाहिए। लोगों से सुना था पढ़े-लिखे लोग बेबकूफ होते हैं आज सरयाम देख रहे हैं कि पढ़े लिखे सिर्फ वेवकूफ नहीं पर निरे पशु होते हैं। अब इन पशुओं को कौन समझाये कि समाज में जिस तरह से आर्थिक विषमता बढ़ रही है उसमें गरीब ब्यक्ति की मां-बहन-बेटी-पत्नी की सुरक्षा की गारंटी ये मान मर्यादायें ही हैं बरना गांव के ही सो कालड पढ़े लिखे पशु गांव की हर मां-बहन-वेटी-पत्नी को अपनी बासनाओं का सिकार बना दें । वेचारे गरीब प्रशासन से किसी न्याय की तो कोई उम्मीद कर नहीं सकते। क्योंकि प्राशासन पर भी ऐसे ही पशुओं की पकड़ है ये पशु कुछ की इज्जत से खुद खिलवाड़ करेंगे तो कुछ को प्रसासनिक व राजनैतिक आकाओं को सौंप देंगे। हाल ही में हिमाचल में एक प्रसासनिक अधिकारी कुछ इसी तरह की अबस्था में पकड़ा गया है।
आप बताओ कि इन जानवरों को कौन समझाये कि समाजिक मर्यादाओं के टूटने पर सबसे ज्यादा शोषण महिलाओं का ही होता है। हम कितने ही ऐसे पढेलिखे लोगों को जानकते हैं जिन्होंने अनकों महिलाओं(उनकी पत्नी को मिलाकर) को गर्भबती बनाकर उनका गर्भपात करवाकर उन्हें अपंग बना दिया।
अरे भाई मानबता की खातिर रोक सकते हो तो रोक लो इन आधुनिक पशुओं को बरना ये लोग मानब को दानब बनाकर ही दम लेंगे।
अन्त में हमारे विचार में प्यार करना कोई अपराधत नहीं लेकिन जिसके मन में प्यार नाम का अंश भी मौजूद है वो सबसे पहले खुद को जन्म देने वाली मां से प्यार करेगा और जो अपनी मां से प्यार करेगा वो ऐसा कुछ नहीं करेगा जो उसकी मां या दूसरे की मां को शर्मशार करे । जो अपनी मां से प्यार नहीं करता वो भला किसी दूसरे से क्या प्यार करेगा। हम तो उस मां को जानते हैं जिनका सारा संसार उनके बच्चे होते हैं जिनकी जिन्दगी का सबसे बढ़ी जिम्मेवारी व खुशी अपने बच्चे की शादी होती है ।अन्त में इतना ही कहेंगे कि जो मां से प्यार नहीं करता वो भला किसी और से क्या प्यार करेगा ?
सब जगह जाकर पता चला कि एक पत्रकार ने एक लड़की के साथ बलातकार कर उसे गर्भबती बनाकर अपने माता पिता को अपने गर्भ का बास्ता देकर उनकी छाती पर मूंग दलने भेज दिया।
क्योंकि बालातकारी एक पत्रकार था इसलिय मिडीया से जुड़े लोगों ने इस बालातकार को प्यार का चोला पहनाने की भरपूर कोशिश करते हुए लड़की की मौत के लिए इस बालातकारी को जिम्मेबार ठहराने के बजाय लड़की के माता पिता को कटघरे में खड़ा करने का भरपूर प्रयास किया जो अभी जी जारी है। इन में से कुछ चैनलों ने तो एक खुशहाल परिबार की बरबादी पर को अपनी आय वोले को TRP बढ़ाने का जरिया ही बना लिया ।इनकी वेशर्मी देखो कि जिस बलातकारी के विरूद्द FIR दर्ज करवाकर जेल में डलवाने की कोशिश होनी चाहिए थी उसी कातिल को ये चैनल प्रेमी बताकर पेश कर रहे थे ।
अब मानबता के सत्रु इन दुष्टों को कौन समझाए कि प्यार वो एहसास है जिसमें शारीरिक शोषण की कतई जरूरत महसूस नहीं होती ।प्यार देने का नाम है लेने का नहीं । जो ब्यक्ति अपने मां-बाद से प्यार नहीं कर सकता वो भला दूसरे से क्या प्यार करेगा ।आप बताओ जिस मां ने इन बच्चों को अपनी कोख में रखकर अपने खून से जिन्दा रखकर इनकी हर शुख-सुविधा का ख्याल रखकर इन्हें पाल पोस कर बढ़ा किया।अपने से ज्यादा आगे बढ़ाने के लिए अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा इनकी शिक्षा पर खर्च किया ।उन मां-बाप की सारी जिंदगी की कमाई गई मान-मर्यादा को जिस तरह से इस दुष्ट ने मिडीया में बैठकर उछाला क्या कोई प्यार करने वाला इस तरह से उछाल सकता है ?
हम बात कर रहे हैं इसी दुष्ट के मां-बाप की ।जाओ जाकर उन्हें पूछो कि उनके बेटे के इस कुकर्म से उनका सिर गर्व से उंचा हुआ है या फिर शर्म से झुक गया है। प्रश्न साधारण सा है कि अगर इस दुष्ट को उस लड़की से प्यार था तो फिर गर्भ कैसे ठहर गया। अगर गर्भ ठहर गया तो इस ब्यक्ति ने कोर्ट में जाकर शादी क्यों नहीं कर ली।क्योंकि जब मां-बाप की इजाजत के विना ये समाजिक मर्यादाओं को पार करने का मादा रखता है तो फिर शादी करने का मादा क्यों नहीं। आज हम कह रहे हैं कि अगर इस दुष्ट को सजा नहीं हुइ तो घात लगाय बैठे इस जैसे लाखों बयाभिचारी लड़कियों को अपनी काम वासना की पूर्ति का खेल बनाकर उन्हें आतमहत्या करने पर मजबूर करेंगे।
जिस तरह ये पशु SEX को ही अलौकिक प्यार का प्रायवाची बनाने पर तुले हैं उसे देखकर तो हीर-रांजा,लैला-मजनू व सोनी-महिवाल की रूह भी कांप जाती होगी ।हमारे विचार में अगर ये दुष्ट उस लड़की से सच में प्यार करता होता तो न ये सारीरिक सबन्ध बनाकर उसे गर्भवती करता क्योंकि प्यार में तो प्रेमी प्रेमिका की सुरक्षा के लिए अपने प्राण तक देने से नहीं चूकता तो शारीरिक सबन्धों से खुद को रोकना कौन सी बढ़ी बात है।अगर ये वेसमझी में हुआ था तो भी ये इसके पास कोर्ट में जाकर शादी करने का रास्ता था। हम जानते हैं कि कोई लड़की कितनी भी बहादुर क्यों नहो इस तरह की स्थिति पैदा होने पर उसे एक पक्के साथी की जरूरत होती है लेकिन परीक्षा की इस घड़ी में जिस तरह इस दुष्ट ने उसे अकेला छोड़ा उसेस तो यही साबित होता है कि इसका एकमात्र मकसगद वासना की पूर्ति है न कि कोई प्यार की भावना।
अगर विना किसी समाजिक व परिबारिक जिम्मेवारी के SEX करने को प्यार कहते हैं तब तो ये कहना पड़ेगा कि सबके सब जानबर एक दूसरे से प्यार ही तो करते हैं क्योंकि उन्हे SEX करने के लिए किसी शादी या समाजिक मर्यादा की दरकार नहीं होती न हीं बच्चे पैदा करने पर कोई परिबारिक जिम्मेवारी भी बहन नहीं करनी पड़ती है। कितनी अजीब बात है कि सभ्य समाज की सब मर्यादाओं को तार-तार कर पशुप्रबृति के अनुशरण को आधुनिकता का नाम देकर जायज ठहराने की कोशिस की जाती है। लगातार बदन पर कम होते कपड़ों पर आपति उठने पर कम कपड़े महनने को भी आधुनिकता कहा जाता है अगर कम कपड़े पहनना या कपड़े न पहनना आधुनिकता है तब तो हमारे पशु सबसे ज्यादा आधुनिक हैं क्योंकि वो तो कभी भी कहीं भी किसी भी मौसम में कपड़े नीं पहनते हैं वाह क्या आधुनिकता है अरे सीधे क्यों नहीं कहते कि तुम्हें पशु बनना है सीधे कहो पशुओं को कौन रोक सकता है न कोई समाज न कोई धर्म न कोई मर्यादा।
हमारी निगाह में यही बजह है कि ये आधुनिक लोग गर्भ धारण करने के वाद ये निश्चत करवा लेते हैं कि पैदा होने वाला बच्चा लड़का है या लड़की और लड़की होने पर उसका कत्ल करवा देते हैं क्योंकि इन्हे दूसरों की इज्जत से जो खेलना होता है।
इन पशुओं को हर समाजिक मर्यादा अपनी बासना की पूर्ति का रोड़ा दिखने लगती है। तभी तो ये लोग गांव के जीबन के आधर सतम्भ गोत्र पर भी हाय तौवा मचाते हैं क्योंकि इन पशुओं को अपनी काम-वासना की पूर्ति के रास्ते में कोई रूकाबट सहन नहीं इन्हे पशुओं की तरह विना किसी मर्यादा या जिम्मेवारी के अपना सिकार चाहिए। लोगों से सुना था पढ़े-लिखे लोग बेबकूफ होते हैं आज सरयाम देख रहे हैं कि पढ़े लिखे सिर्फ वेवकूफ नहीं पर निरे पशु होते हैं। अब इन पशुओं को कौन समझाये कि समाज में जिस तरह से आर्थिक विषमता बढ़ रही है उसमें गरीब ब्यक्ति की मां-बहन-बेटी-पत्नी की सुरक्षा की गारंटी ये मान मर्यादायें ही हैं बरना गांव के ही सो कालड पढ़े लिखे पशु गांव की हर मां-बहन-वेटी-पत्नी को अपनी बासनाओं का सिकार बना दें । वेचारे गरीब प्रशासन से किसी न्याय की तो कोई उम्मीद कर नहीं सकते। क्योंकि प्राशासन पर भी ऐसे ही पशुओं की पकड़ है ये पशु कुछ की इज्जत से खुद खिलवाड़ करेंगे तो कुछ को प्रसासनिक व राजनैतिक आकाओं को सौंप देंगे। हाल ही में हिमाचल में एक प्रसासनिक अधिकारी कुछ इसी तरह की अबस्था में पकड़ा गया है।
आप बताओ कि इन जानवरों को कौन समझाये कि समाजिक मर्यादाओं के टूटने पर सबसे ज्यादा शोषण महिलाओं का ही होता है। हम कितने ही ऐसे पढेलिखे लोगों को जानकते हैं जिन्होंने अनकों महिलाओं(उनकी पत्नी को मिलाकर) को गर्भबती बनाकर उनका गर्भपात करवाकर उन्हें अपंग बना दिया।
अरे भाई मानबता की खातिर रोक सकते हो तो रोक लो इन आधुनिक पशुओं को बरना ये लोग मानब को दानब बनाकर ही दम लेंगे।
अन्त में हमारे विचार में प्यार करना कोई अपराधत नहीं लेकिन जिसके मन में प्यार नाम का अंश भी मौजूद है वो सबसे पहले खुद को जन्म देने वाली मां से प्यार करेगा और जो अपनी मां से प्यार करेगा वो ऐसा कुछ नहीं करेगा जो उसकी मां या दूसरे की मां को शर्मशार करे । जो अपनी मां से प्यार नहीं करता वो भला किसी दूसरे से क्या प्यार करेगा। हम तो उस मां को जानते हैं जिनका सारा संसार उनके बच्चे होते हैं जिनकी जिन्दगी का सबसे बढ़ी जिम्मेवारी व खुशी अपने बच्चे की शादी होती है ।अन्त में इतना ही कहेंगे कि जो मां से प्यार नहीं करता वो भला किसी और से क्या प्यार करेगा ?
मंगलवार, 4 मई 2010
सुरेश चिपलूनकर जी क्या कोई बता सकता है कि जब हमला हिन्दूओं ने किया था बदला लेने के लिए तो सजा मुसलमान को क्यों?
हमें हैरानी होती है ये देखकर कि जो दिगविजय सिंह शहीद मोहन शर्मा के कातिल के घर जाकर उस कातिल को कलीनचिट देकर सुरक्षाबलों व दिल्ली सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहा था वो गद्दार आज कह रहा है कि अजमेर,हैदराबाद ,मालेगांव व समझौता एकसप्रैस हमले हिन्दूओं ने किए थे। यह वही गद्दार है जिसने हाल ही में माओवादी आतंकवादीयों द्वारा मारे गय शहीदों की चिता की आग ठण्डी होने से पहले ही माओवादी आतंकवादियों का बचाब करने के लिए गृहमन्त्री पर हमला बोल दिया। खैर अगर हम इन गद्दारों की हर गद्दारी पर पर लिखने लगे तो समय व उर्जा दोनों की बर्वादी होगी इसलिए हम आज बात करेंगे उन झूठों की जो ये सेकुलर गिरोह लगतार पैलाय चला जा रहा है।
आप सबको याद होगा कि जब मुंबई पर हमला हो रहा था तब किस तरह इस सेकुलर गिरोह ने ये कहना शुरू कर दिय़ा था कि ये हमला हिन्दूओं ने किया है साथ ही भारतीय संसकृति व हिन्दूओं के दुसमन मिडीया चैनलों ने सेकुलर गिरोह की बात को सिद्ध करने के लिए आतंकवादियों के हाथों में बन्धे कंगन भी दिखाना शुरू कर दिए थे।मतलब अगर कसाब जिन्दा न पकड़ा जाता तो ये पक्का था कि आज तक RSS जैसे शांतिप्रिय संगठनों के हजारों कार्यकरता जेलों मे भरे जा चुके होते मुंबई पर हमला करने के जुल्म में ।
हमले के दौरान हेमंत करकरे के शहीद हो जाने पर सेकुलर गिरोह की सरकार के मन्त्री अबदुल रहमान अंतुले ने सबके सामने ये कहकर कि ये आतंकवादी हेमंत करकरे को मारने नहीं आये थे एक तरह से ये सवीकार कर लिया था कि भारत पर आतंकवादी हमले सेकुलर गिरोह अपने हिसाब से करवाता है जिसमें ये पहले ही फिक्स कर दिया जाता है कि किसे मारना है और किसे नहीं।
मतलब हिन्दूबहुल क्षेत्रों में हमले सेकुलर गिरोह के नेताओं के आदेशानुशार किए जाते हैं यहां यह दोहराने की आबसयकता है कि 1993 में BSE पर हमला सेकुलर नेता सुनील दत्त के घर को केन्द्र बनाकर किया गया।2001 का सांसदभबन हमला सेकुलर JNU को आधार बनाकर किया गया। 2008 का मुंबई हमला अबदुल रहमान अंतुले के घर को केन्द्र बनाकर किया गया।जिसमें सेकुलर महेशभट के बेटे ने सक्रिय भूमिका निभाई। समाजबादी पार्टी के विधायक आतंकवादी अबु हाजमी व कांग्रेस के पूर्व विधायक आतंकवादी नेता अबदुल सतार ने अपने सहयोगी आतंकवादी को छुपाने व बचाने में सक्रिय भूमिका निभाई।
जरा सोचो कि जब साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर जेल में है तो फिर राहुलभट्ट, अबुहाजमी, अबदुल रहमान अंतुले, अबदुलसत्तार,यासीन मलिक,गिलानी ,दिगविजय सिंह जैसे भारत के सत्रु क्यों जेल में नहीं ? सिर्फ इसलिय कि इनके प्रयासों से मारे जाने वाले अधिकतर हिन्दू थे और साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के प्रयासों से मारे जाने वाले सिमी के आतंकवादी।
अगर आपको याद नहीं तो हम आपको याद करवा देते हैं कि जब देसभर में पाकसमर्थक आतंकवादी हिन्दूबहुल क्षेत्रों में लगातार बम्मविस्फोट कर हिन्दूओं का खून बहा रहे थे तथा देश के अधिकतर लोग ये प्रश्न कर रहे थे कि ये हमले सिर्फ मन्दिरों व हिन्दूओं को निशाना बनाकर क्यों किए जा रहे हैं तभी अचानक हिन्दूओं की एकता को तार-तार करने के लिए मस्जिदों में हमले शुरू हो गय कभी दिल्ली की जामा मस्जिद में तो कभी मालेगगांव में तो कभी हैदराबाद व अजमेर में।इन हमलों का फायदा उठाकर सेकुलर गिरोह ने बौद्धिक गुलाम हिन्दूओं को बहलाना शुरू कर दिया कि देखो हमले सिर्फ हिन्दूओं पर नहीं हो रहे मुसलमानों पर भी हो रहे हैं ।कुछ ही दिनों में आतंकवाद के विरूद्ध संगठित हो रहे हिन्दूओं की एकता एकवार फिर तार-तार हो गई और फिर देश के गद्दार आतंकवादी जनता के आक्रोश का सामना करने से बच गय।
जब हिन्दूओं को फंसाने का सिलसिला शुरू हुआ तो पहले कहा गया कि साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर जी मास्टर मांइड है फिर कहा गया कर्नल पुरोहित जी मास्टर मांइड हैं फिर दयानन्द पांडे जी ,फिर राम जी...(अधिक प्रमाणिक जानकारी के लिए हिन्दू क्रांति की शुरूआत या फिर सरकारी षडयन्त्र जरूर पढ़ें)और अब मास्टर मांइड आसीमानन्द जी।
एक सांस में कहते हैं कि बम्म विस्फोट करने वाले हिन्दू RSS प्रमुख को मारना चाहते हैं फिर कहते हैं नहीं-नहीं ये क्रांतिकारी RSS के ही हैं तभी आबाज निकलती है कि ये अभिनव भारत के हैं शुरूआत राष्ट्रचेतनामंच से की जाती है ।ऐसा नहीं कि सेकुलर गिरोह झूठ बोलना नहीं जानता पर इस मामले का परिणाम इस सेकुलर गिरोह से जुड़े गद्दारों को अपनी मौत के रूप में दिखता है इसलिए हर वार जवान बदलती है इसीलिए तो कहा गया है कि झूठ के पांव नहीं होते ।
कुल मिलाकर एक काल्पनिक कहानी खड़ी करने का एक गंभीर षडयन्त्र। वेचारे देवेन्द्र जी व चन्द्रशेखर जी समाजिक संवेदना के कारण वाकी क्रंतिकारियों के साथ सेकुलर गिरोह के षडयन्त्रों का सिकार हो रहे हैं। आगे-आगे देखो कि और कितने लोग इस भारत के दुसमन सेकुलर गिरोह के सिकार होते हैं।
हम तो सिर्फ इतना जानते हैं कि जब विदेशी मुगल राक्षसों का शासन था तब और जब विदेशी अत्याचारी अंग्रेजों का सासन था तब भी और आज जब विदेशी एंटोनिया की गुलाम सरकार का सासन है तब भी निसाने पर देशभक्त हिन्दू ही हैं।
जरा सोचो जो सरकार आतंकवादी सोराबुद्दीन को खत्म करने वाले IPS अधिकारियों को प्रताड़ित करने के लिए जेल में डाल सकती है जो सरकार कशमीरघाटी में अपनी जान पर खेल कर देश की रक्षा के प्रति समर्पित सैनिकों को आतंकवादियों को मारने के बदले में बहां की उस पुलिस के हवाले कर सकती है जो आतंकवादियों से भरी पड़ी है वो सरकार देशभक्त हिन्दू संगठनों से जुड़े लोगों को क्यों जेल में नहीं डालेगी । यही तो वो षडयन्त्र हैं जो इस गद्दारों की सरकार को जनता के सामने वेनकाब करेंगे।
अन्त में हमें तो बस तना ही कहना है कि देखना है कि जोर कितना बाजुए कातिल में है देवेन्द्र एक नहीं करोड़ों में हैं देखते हैं कितने देवेन्द्रों का सामना ये सेकुलर गिरोह कर पाता है...
सेकुलर गिरोह ने कहा था मुंमबई हमला हिन्दूओं ने किया है सजा कसाब को सुनाई जा रही है कितनी विचित्र घटना है ये पर जरा सोचो कि अगर कसाब जिन्दा हाथ न आया होता तो?
हम ये मानते हैं कि किसी भी वेगुनाह की जान हमारी बजह से नहीं जानी चाहिए लेकिन उतनी ही प्रमाणिकता से हम ये भी मानते हैं कि मानब सभयता के लिए खतरा बनने वाले हैवानों व उनकी आने वाली पिढ़ीयों का नमो निशान बीज सहित हर हाल में मिटा देना चाहिए। इसलिए नहीं कि उनका मरना जरूरी है पर इसलिए कि जो लोग-समाज-मानवता उनके निशाने पर है उस समाज व मानवता की रक्षा जरूरी है।
सच कहें तो जिस दिन हिन्दू अनयाय अत्याचार से मुक्ति पाने के लिए संगठित होकर हथियार उठा लेगा उस दिन सबसे आगे व पहले गोला-बारूद हथियार उठाये सबसे आगे हम चलेंगे वो भी तब तक जब तक आतंक-गद्दारी-नमकहरामी का आधार बन चुके इस सेकुलर गिरोह का नमोनिशान नहीं मिटा दिया जाता लेकिन अफसोस अभी तक ऐसा हो न सका। फिर भी हर आतचंकवादी हमले के बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाले सेकुलर गिरोह की हर चाल हिन्दूओं को फांसने की क्यों ?
अन्त में प्रश्न यही पैदा होता है कि जब हमला हिन्दूओं ने किया था बदला लेने के लिए तो सजा मुसलमान को क्यों?
आप सबको याद होगा कि जब मुंबई पर हमला हो रहा था तब किस तरह इस सेकुलर गिरोह ने ये कहना शुरू कर दिय़ा था कि ये हमला हिन्दूओं ने किया है साथ ही भारतीय संसकृति व हिन्दूओं के दुसमन मिडीया चैनलों ने सेकुलर गिरोह की बात को सिद्ध करने के लिए आतंकवादियों के हाथों में बन्धे कंगन भी दिखाना शुरू कर दिए थे।मतलब अगर कसाब जिन्दा न पकड़ा जाता तो ये पक्का था कि आज तक RSS जैसे शांतिप्रिय संगठनों के हजारों कार्यकरता जेलों मे भरे जा चुके होते मुंबई पर हमला करने के जुल्म में ।
हमले के दौरान हेमंत करकरे के शहीद हो जाने पर सेकुलर गिरोह की सरकार के मन्त्री अबदुल रहमान अंतुले ने सबके सामने ये कहकर कि ये आतंकवादी हेमंत करकरे को मारने नहीं आये थे एक तरह से ये सवीकार कर लिया था कि भारत पर आतंकवादी हमले सेकुलर गिरोह अपने हिसाब से करवाता है जिसमें ये पहले ही फिक्स कर दिया जाता है कि किसे मारना है और किसे नहीं।
मतलब हिन्दूबहुल क्षेत्रों में हमले सेकुलर गिरोह के नेताओं के आदेशानुशार किए जाते हैं यहां यह दोहराने की आबसयकता है कि 1993 में BSE पर हमला सेकुलर नेता सुनील दत्त के घर को केन्द्र बनाकर किया गया।2001 का सांसदभबन हमला सेकुलर JNU को आधार बनाकर किया गया। 2008 का मुंबई हमला अबदुल रहमान अंतुले के घर को केन्द्र बनाकर किया गया।जिसमें सेकुलर महेशभट के बेटे ने सक्रिय भूमिका निभाई। समाजबादी पार्टी के विधायक आतंकवादी अबु हाजमी व कांग्रेस के पूर्व विधायक आतंकवादी नेता अबदुल सतार ने अपने सहयोगी आतंकवादी को छुपाने व बचाने में सक्रिय भूमिका निभाई।
जरा सोचो कि जब साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर जेल में है तो फिर राहुलभट्ट, अबुहाजमी, अबदुल रहमान अंतुले, अबदुलसत्तार,यासीन मलिक,गिलानी ,दिगविजय सिंह जैसे भारत के सत्रु क्यों जेल में नहीं ? सिर्फ इसलिय कि इनके प्रयासों से मारे जाने वाले अधिकतर हिन्दू थे और साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के प्रयासों से मारे जाने वाले सिमी के आतंकवादी।
अगर आपको याद नहीं तो हम आपको याद करवा देते हैं कि जब देसभर में पाकसमर्थक आतंकवादी हिन्दूबहुल क्षेत्रों में लगातार बम्मविस्फोट कर हिन्दूओं का खून बहा रहे थे तथा देश के अधिकतर लोग ये प्रश्न कर रहे थे कि ये हमले सिर्फ मन्दिरों व हिन्दूओं को निशाना बनाकर क्यों किए जा रहे हैं तभी अचानक हिन्दूओं की एकता को तार-तार करने के लिए मस्जिदों में हमले शुरू हो गय कभी दिल्ली की जामा मस्जिद में तो कभी मालेगगांव में तो कभी हैदराबाद व अजमेर में।इन हमलों का फायदा उठाकर सेकुलर गिरोह ने बौद्धिक गुलाम हिन्दूओं को बहलाना शुरू कर दिया कि देखो हमले सिर्फ हिन्दूओं पर नहीं हो रहे मुसलमानों पर भी हो रहे हैं ।कुछ ही दिनों में आतंकवाद के विरूद्ध संगठित हो रहे हिन्दूओं की एकता एकवार फिर तार-तार हो गई और फिर देश के गद्दार आतंकवादी जनता के आक्रोश का सामना करने से बच गय।
जब हिन्दूओं को फंसाने का सिलसिला शुरू हुआ तो पहले कहा गया कि साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर जी मास्टर मांइड है फिर कहा गया कर्नल पुरोहित जी मास्टर मांइड हैं फिर दयानन्द पांडे जी ,फिर राम जी...(अधिक प्रमाणिक जानकारी के लिए हिन्दू क्रांति की शुरूआत या फिर सरकारी षडयन्त्र जरूर पढ़ें)और अब मास्टर मांइड आसीमानन्द जी।
एक सांस में कहते हैं कि बम्म विस्फोट करने वाले हिन्दू RSS प्रमुख को मारना चाहते हैं फिर कहते हैं नहीं-नहीं ये क्रांतिकारी RSS के ही हैं तभी आबाज निकलती है कि ये अभिनव भारत के हैं शुरूआत राष्ट्रचेतनामंच से की जाती है ।ऐसा नहीं कि सेकुलर गिरोह झूठ बोलना नहीं जानता पर इस मामले का परिणाम इस सेकुलर गिरोह से जुड़े गद्दारों को अपनी मौत के रूप में दिखता है इसलिए हर वार जवान बदलती है इसीलिए तो कहा गया है कि झूठ के पांव नहीं होते ।
कुल मिलाकर एक काल्पनिक कहानी खड़ी करने का एक गंभीर षडयन्त्र। वेचारे देवेन्द्र जी व चन्द्रशेखर जी समाजिक संवेदना के कारण वाकी क्रंतिकारियों के साथ सेकुलर गिरोह के षडयन्त्रों का सिकार हो रहे हैं। आगे-आगे देखो कि और कितने लोग इस भारत के दुसमन सेकुलर गिरोह के सिकार होते हैं।
हम तो सिर्फ इतना जानते हैं कि जब विदेशी मुगल राक्षसों का शासन था तब और जब विदेशी अत्याचारी अंग्रेजों का सासन था तब भी और आज जब विदेशी एंटोनिया की गुलाम सरकार का सासन है तब भी निसाने पर देशभक्त हिन्दू ही हैं।
जरा सोचो जो सरकार आतंकवादी सोराबुद्दीन को खत्म करने वाले IPS अधिकारियों को प्रताड़ित करने के लिए जेल में डाल सकती है जो सरकार कशमीरघाटी में अपनी जान पर खेल कर देश की रक्षा के प्रति समर्पित सैनिकों को आतंकवादियों को मारने के बदले में बहां की उस पुलिस के हवाले कर सकती है जो आतंकवादियों से भरी पड़ी है वो सरकार देशभक्त हिन्दू संगठनों से जुड़े लोगों को क्यों जेल में नहीं डालेगी । यही तो वो षडयन्त्र हैं जो इस गद्दारों की सरकार को जनता के सामने वेनकाब करेंगे।
अन्त में हमें तो बस तना ही कहना है कि देखना है कि जोर कितना बाजुए कातिल में है देवेन्द्र एक नहीं करोड़ों में हैं देखते हैं कितने देवेन्द्रों का सामना ये सेकुलर गिरोह कर पाता है...
सेकुलर गिरोह ने कहा था मुंमबई हमला हिन्दूओं ने किया है सजा कसाब को सुनाई जा रही है कितनी विचित्र घटना है ये पर जरा सोचो कि अगर कसाब जिन्दा हाथ न आया होता तो?
हम ये मानते हैं कि किसी भी वेगुनाह की जान हमारी बजह से नहीं जानी चाहिए लेकिन उतनी ही प्रमाणिकता से हम ये भी मानते हैं कि मानब सभयता के लिए खतरा बनने वाले हैवानों व उनकी आने वाली पिढ़ीयों का नमो निशान बीज सहित हर हाल में मिटा देना चाहिए। इसलिए नहीं कि उनका मरना जरूरी है पर इसलिए कि जो लोग-समाज-मानवता उनके निशाने पर है उस समाज व मानवता की रक्षा जरूरी है।
सच कहें तो जिस दिन हिन्दू अनयाय अत्याचार से मुक्ति पाने के लिए संगठित होकर हथियार उठा लेगा उस दिन सबसे आगे व पहले गोला-बारूद हथियार उठाये सबसे आगे हम चलेंगे वो भी तब तक जब तक आतंक-गद्दारी-नमकहरामी का आधार बन चुके इस सेकुलर गिरोह का नमोनिशान नहीं मिटा दिया जाता लेकिन अफसोस अभी तक ऐसा हो न सका। फिर भी हर आतचंकवादी हमले के बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाले सेकुलर गिरोह की हर चाल हिन्दूओं को फांसने की क्यों ?
अन्त में प्रश्न यही पैदा होता है कि जब हमला हिन्दूओं ने किया था बदला लेने के लिए तो सजा मुसलमान को क्यों?
सोमवार, 3 मई 2010
देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है ?
हम ये मानते हैं कि किसी भी वेगुनाह की जान हमारी बजह से नहीं जानी चाहिए लेकिन उतनी ही प्रमाणिकता से हम ये भी मानते हैं कि मानब सभयता के लिए खतरा बनने वाले हैवानों व उनकी आने वाली पिढ़ीयों का नमो निशान बीज सहित हर हाल में मिटा देना चाहिए। इसलिए नहीं कि उनका मरना जरूरी है पर इसलिए कि जो लोग-समाज-मानवता उनके निशाने पर है उस समाज व मानवता की रक्षा जरूरी है।
सच कहें तो जिस दिन हिन्दू अनयाय अत्याचार से मुक्ति पाने के लिए संगठित होकर हथियार उठा लेगा उस दिन सबसे आगे व पहले गोला-बारूद हथियार उठाये सबसे आगे हम चलेंगे वो भी तब तक जब तक आतंक-गद्दारी-नमकहरामी का आधार बन चुके इस सेकुलर गिरोह का नमोनिशान नहीं मिटा दिया जाता लेकिन अफसोस अभी तक ऐसा हो न सका। फिर भी हर आतचंकवादी हमले के बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाले सेकुलर गिरोह की हर चाल हिन्दूओं को फांसने की क्यों ?
हमें हैरानी होती है ये देखकर कि जो दिगविजय सिंह शहीद मोहन शर्मा के कातिल के घर जाकर उस कातिल को कलीनचिट देकर सुरक्षाबलों व दिल्ली सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहा था वो गद्दार आज कह रहा है कि अजमेर,हैदराबाद ,मालेगांव व समझौता एकसप्रैस हमले हिन्दूओं ने किए थे। यह वही गद्दार है जिसने हाल ही में माओवादी आतंकवादीयों द्वारा मारे गय शहीदों की चिता की आग ठण्डी होने से पहले ही माओवादी आतंकवादियों का बचाब करने के लिए गृहमन्त्री पर हमला बोल दिया। खैर अगर हम इन गद्दारों की हर गद्दारी पर पर लिखने लगे तो समय व उर्जा दोनों की बर्वादी होगी इसलिए हम आज बात करेंगे उन झूठों की जो ये सेकुलर गिरोह लगतार पैलाय चला जा रहा है।
आप सबको याद होगा कि जब मुंबई पर हमला हो रहा था तब किस तरह इस सेकुलर गिरोह ने ये कहना शुरू कर दिय़ा था कि ये हमला हिन्दूओं ने किया है साथ ही भारतीय संसकृति व हिन्दूओं के दुसमन मिडीया चैनलों ने सेकुलर गिरोह की बात को सिद्ध करने के लिए आतंकवादियों के हाथों में बन्धे कंगन भी दिखाना शुरू कर दिए थे।मतलब अगर कसाब जिन्दा न पकड़ा जाता तो ये पक्का था कि आज तक RSS जैसे शांतिप्रिय संगठनों के हजारों कार्यकरता जेलों मे भरे जा चुके होते मुंबई पर हमला करने के जुल्म में ।
हमले के दौरान हेमंत करकरे के शहीद हो जाने पर सेकुलर गिरोह की सरकार के मन्त्री अबदुल रहमान अंतुले ने सबके सामने ये कहकर कि ये आतंकवादी हेमंत करकरे को मारने नहीं आये थे एक तरह से ये सवीकार कर लिया था कि भारत पर आतंकवादी हमले सेकुलर गिरोह अपने हिसाब से करवाता है जिसमें ये पहले ही फिक्स कर दिया जाता है कि किसे मारना है और किसे नहीं।
मतलब हिन्दूबहुल क्षेत्रों में हमले सेकुलर गिरोह के नेताओं के आदेशानुशार किए जाते हैं यहां यह दोहराने की आबसयकता है कि 1993 में BSE पर हमला सेकुलर नेता सुनील दत्त के घर को केन्द्र बनाकर किया गया।2001 का सांसदभबन हमला सेकुलर JNU को आधार बनाकर किया गया। 2008 का मुंबई हमला अबदुल रहमान अंतुले के घर को केन्द्र बनाकर किया गया।जिसमें सेकुलर महेशभट के बेटे ने सक्रिय भूमिका निभाई। समाजबादी पार्टी के विधायक आतंकवादी अबु हाजमी व कांग्रेस के पूर्व विधायक आतंकवादी नेता अबदुल सतार ने अपने सहयोगी आतंकवादी को छुपाने व बचाने में सक्रिय भूमिका निभाई।
जरा सोचो कि जब साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर जेल में है तो फिर राहुलभट्ट, अबुहाजमी, अबदुल रहमान अंतुले, अबदुलसत्तार,यासीन मलिक,गिलानी ,दिगविजय सिंह जैसे भारत के सत्रु क्यों जेल में नहीं ? सिर्फ इसलिय कि इनके प्रयासों से मारे जाने वाले अधिकतर हिन्दू थे और साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के प्रयासों से मारे जाने वाले सिमी के आतंकवादी।
अगर आपको याद नहीं तो हम आपको याद करवा देते हैं कि जब देसभर में पाकसमर्थक आतंकवादी हिन्दूबहुल क्षेत्रों में लगातार बम्मविस्फोट कर हिन्दूओं का खून बहा रहे थे तथा देश के अधिकतर लोग ये प्रश्न कर रहे थे कि ये हमले सिर्फ मन्दिरों व हिन्दूओं को निशाना बनाकर क्यों किए जा रहे हैं तभी अचानक हिन्दूओं की एकता को तार-तार करने के लिए मस्जिदों में हमले शुरू हो गय कभी दिल्ली की जामा मस्जिद में तो कभी मालेगगांव में तो कभी हैदराबाद व अजमेर में।इन हमलों का फायदा उठाकर सेकुलर गिरोह ने बौद्धिक गुलाम हिन्दूओं को बहलाना शुरू कर दिया कि देखो हमले सिर्फ हिन्दूओं पर नहीं हो रहे मुसलमानों पर भी हो रहे हैं ।कुछ ही दिनों में आतंकवाद के विरूद्ध संगठित हो रहे हिन्दूओं की एकता एकवार फिर तार-तार हो गई और फिर देश के गद्दार आतंकवादी जनता के आक्रोश का सामना करने से बच गय।
जब हिन्दूओं को फंसाने का सिलसिला शुरू हुआ तो पहले कहा गया कि साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर जी मास्टर मांइड है फिर कहा गया कर्नल पुरोहित जी मास्टर मांइड हैं फिर दयानन्द पांडे जी ,फिर राम जी...(अधिक प्रमाणिक जानकारी के लिए हिन्दू क्रांति की शुरूआत या फिर सरकारी षडयन्त्र जरूर पढ़ें)और अब मास्टर मांइड आसीमानन्द जी।
एक सांस में कहते हैं कि बम्म विस्फोट करने वाले हिन्दू RSS प्रमुख को मारना चाहते हैं फिर कहते हैं नहीं-नहीं ये क्रांतिकारी RSS के ही हैं तभी आबाज निकलती है कि ये अभिनव भारत के हैं शुरूआत राष्ट्रचेतनामंच से की जाती है ।ऐसा नहीं कि सेकुलर गिरोह झूठ बोलना नहीं जानता पर इस मामले का परिणाम इस सेकुलर गिरोह से जुड़े गद्दारों को अपनी मौत के रूप में दिखता है इसलिए हर वार जवान बदलती है इसीलिए तो कहा गया है कि झूठ के पांव नहीं होते ।
कुल मिलाकर एक काल्पनिक कहानी खड़ी करने का एक गंभीर षडयन्त्र। वेचारे देवेन्द्र जी व चन्द्रशेखर जी समाजिक संवेदना के कारण वाकी क्रंतिकारियों के साथ सेकुलर गिरोह के षडयन्त्रों का सिकार हो रहे हैं। आगे-आगे देखो कि और कितने लोग इस भारत के दुसमन सेकुलर गिरोह के सिकार होते हैं।
हम तो सिर्फ इतना जानते हैं कि जब विदेशी मुगल राक्षसों का शासन था तब और जब विदेशी अत्याचारी अंग्रेजों का सासन था तब भी और आज जब विदेशी एंटोनिया की गुलाम सरकार का सासन है तब भी निसाने पर देशभक्त हिन्दू ही हैं।
जरा सोचो जो सरकार आतंकवादी सोराबुद्दीन को खत्म करने वाले IPS अधिकारियों को प्रताड़ित करने के लिए जेल में डाल सकती है जो सरकार कशमीरघाटी में अपनी जान पर खेल कर देश की रक्षा के प्रति समर्पित सैनिकों को आतंकवादियों को मारने के बदले में बहां की उस पुलिस के हवाले कर सकती है जो आतंकवादियों से भरी पड़ी है वो सरकार देशभक्त हिन्दू संगठनों से जुड़े लोगों को क्यों जेल में नहीं डालेगी । यही तो वो षडयन्त्र हैं जो इस गद्दारों की सरकार को जनता के सामने वेनकाब करेंगे।
अन्त में हमें तो बस तना ही कहना है कि देखना है कि जोर कितना बाजुए कातिल में है देवेन्द्र एक नहीं करोड़ों में हैं देखते हैं कितने देवेन्द्रों का सामना ये सेकुलर गिरोह कर पाता है...
सेकुलर गिरोह ने कहा था मुंमबई हमला हिन्दूओं ने किया है सजा कसाब को सुनाई जा रही है कितनी विचित्र घटना है ये पर जरा सोचो कि अगर कसाब जिन्दा हाथ न आया होता तो?
सच कहें तो जिस दिन हिन्दू अनयाय अत्याचार से मुक्ति पाने के लिए संगठित होकर हथियार उठा लेगा उस दिन सबसे आगे व पहले गोला-बारूद हथियार उठाये सबसे आगे हम चलेंगे वो भी तब तक जब तक आतंक-गद्दारी-नमकहरामी का आधार बन चुके इस सेकुलर गिरोह का नमोनिशान नहीं मिटा दिया जाता लेकिन अफसोस अभी तक ऐसा हो न सका। फिर भी हर आतचंकवादी हमले के बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाले सेकुलर गिरोह की हर चाल हिन्दूओं को फांसने की क्यों ?
हमें हैरानी होती है ये देखकर कि जो दिगविजय सिंह शहीद मोहन शर्मा के कातिल के घर जाकर उस कातिल को कलीनचिट देकर सुरक्षाबलों व दिल्ली सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहा था वो गद्दार आज कह रहा है कि अजमेर,हैदराबाद ,मालेगांव व समझौता एकसप्रैस हमले हिन्दूओं ने किए थे। यह वही गद्दार है जिसने हाल ही में माओवादी आतंकवादीयों द्वारा मारे गय शहीदों की चिता की आग ठण्डी होने से पहले ही माओवादी आतंकवादियों का बचाब करने के लिए गृहमन्त्री पर हमला बोल दिया। खैर अगर हम इन गद्दारों की हर गद्दारी पर पर लिखने लगे तो समय व उर्जा दोनों की बर्वादी होगी इसलिए हम आज बात करेंगे उन झूठों की जो ये सेकुलर गिरोह लगतार पैलाय चला जा रहा है।
आप सबको याद होगा कि जब मुंबई पर हमला हो रहा था तब किस तरह इस सेकुलर गिरोह ने ये कहना शुरू कर दिय़ा था कि ये हमला हिन्दूओं ने किया है साथ ही भारतीय संसकृति व हिन्दूओं के दुसमन मिडीया चैनलों ने सेकुलर गिरोह की बात को सिद्ध करने के लिए आतंकवादियों के हाथों में बन्धे कंगन भी दिखाना शुरू कर दिए थे।मतलब अगर कसाब जिन्दा न पकड़ा जाता तो ये पक्का था कि आज तक RSS जैसे शांतिप्रिय संगठनों के हजारों कार्यकरता जेलों मे भरे जा चुके होते मुंबई पर हमला करने के जुल्म में ।
हमले के दौरान हेमंत करकरे के शहीद हो जाने पर सेकुलर गिरोह की सरकार के मन्त्री अबदुल रहमान अंतुले ने सबके सामने ये कहकर कि ये आतंकवादी हेमंत करकरे को मारने नहीं आये थे एक तरह से ये सवीकार कर लिया था कि भारत पर आतंकवादी हमले सेकुलर गिरोह अपने हिसाब से करवाता है जिसमें ये पहले ही फिक्स कर दिया जाता है कि किसे मारना है और किसे नहीं।
मतलब हिन्दूबहुल क्षेत्रों में हमले सेकुलर गिरोह के नेताओं के आदेशानुशार किए जाते हैं यहां यह दोहराने की आबसयकता है कि 1993 में BSE पर हमला सेकुलर नेता सुनील दत्त के घर को केन्द्र बनाकर किया गया।2001 का सांसदभबन हमला सेकुलर JNU को आधार बनाकर किया गया। 2008 का मुंबई हमला अबदुल रहमान अंतुले के घर को केन्द्र बनाकर किया गया।जिसमें सेकुलर महेशभट के बेटे ने सक्रिय भूमिका निभाई। समाजबादी पार्टी के विधायक आतंकवादी अबु हाजमी व कांग्रेस के पूर्व विधायक आतंकवादी नेता अबदुल सतार ने अपने सहयोगी आतंकवादी को छुपाने व बचाने में सक्रिय भूमिका निभाई।
जरा सोचो कि जब साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर जेल में है तो फिर राहुलभट्ट, अबुहाजमी, अबदुल रहमान अंतुले, अबदुलसत्तार,यासीन मलिक,गिलानी ,दिगविजय सिंह जैसे भारत के सत्रु क्यों जेल में नहीं ? सिर्फ इसलिय कि इनके प्रयासों से मारे जाने वाले अधिकतर हिन्दू थे और साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के प्रयासों से मारे जाने वाले सिमी के आतंकवादी।
अगर आपको याद नहीं तो हम आपको याद करवा देते हैं कि जब देसभर में पाकसमर्थक आतंकवादी हिन्दूबहुल क्षेत्रों में लगातार बम्मविस्फोट कर हिन्दूओं का खून बहा रहे थे तथा देश के अधिकतर लोग ये प्रश्न कर रहे थे कि ये हमले सिर्फ मन्दिरों व हिन्दूओं को निशाना बनाकर क्यों किए जा रहे हैं तभी अचानक हिन्दूओं की एकता को तार-तार करने के लिए मस्जिदों में हमले शुरू हो गय कभी दिल्ली की जामा मस्जिद में तो कभी मालेगगांव में तो कभी हैदराबाद व अजमेर में।इन हमलों का फायदा उठाकर सेकुलर गिरोह ने बौद्धिक गुलाम हिन्दूओं को बहलाना शुरू कर दिया कि देखो हमले सिर्फ हिन्दूओं पर नहीं हो रहे मुसलमानों पर भी हो रहे हैं ।कुछ ही दिनों में आतंकवाद के विरूद्ध संगठित हो रहे हिन्दूओं की एकता एकवार फिर तार-तार हो गई और फिर देश के गद्दार आतंकवादी जनता के आक्रोश का सामना करने से बच गय।
जब हिन्दूओं को फंसाने का सिलसिला शुरू हुआ तो पहले कहा गया कि साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर जी मास्टर मांइड है फिर कहा गया कर्नल पुरोहित जी मास्टर मांइड हैं फिर दयानन्द पांडे जी ,फिर राम जी...(अधिक प्रमाणिक जानकारी के लिए हिन्दू क्रांति की शुरूआत या फिर सरकारी षडयन्त्र जरूर पढ़ें)और अब मास्टर मांइड आसीमानन्द जी।
एक सांस में कहते हैं कि बम्म विस्फोट करने वाले हिन्दू RSS प्रमुख को मारना चाहते हैं फिर कहते हैं नहीं-नहीं ये क्रांतिकारी RSS के ही हैं तभी आबाज निकलती है कि ये अभिनव भारत के हैं शुरूआत राष्ट्रचेतनामंच से की जाती है ।ऐसा नहीं कि सेकुलर गिरोह झूठ बोलना नहीं जानता पर इस मामले का परिणाम इस सेकुलर गिरोह से जुड़े गद्दारों को अपनी मौत के रूप में दिखता है इसलिए हर वार जवान बदलती है इसीलिए तो कहा गया है कि झूठ के पांव नहीं होते ।
कुल मिलाकर एक काल्पनिक कहानी खड़ी करने का एक गंभीर षडयन्त्र। वेचारे देवेन्द्र जी व चन्द्रशेखर जी समाजिक संवेदना के कारण वाकी क्रंतिकारियों के साथ सेकुलर गिरोह के षडयन्त्रों का सिकार हो रहे हैं। आगे-आगे देखो कि और कितने लोग इस भारत के दुसमन सेकुलर गिरोह के सिकार होते हैं।
हम तो सिर्फ इतना जानते हैं कि जब विदेशी मुगल राक्षसों का शासन था तब और जब विदेशी अत्याचारी अंग्रेजों का सासन था तब भी और आज जब विदेशी एंटोनिया की गुलाम सरकार का सासन है तब भी निसाने पर देशभक्त हिन्दू ही हैं।
जरा सोचो जो सरकार आतंकवादी सोराबुद्दीन को खत्म करने वाले IPS अधिकारियों को प्रताड़ित करने के लिए जेल में डाल सकती है जो सरकार कशमीरघाटी में अपनी जान पर खेल कर देश की रक्षा के प्रति समर्पित सैनिकों को आतंकवादियों को मारने के बदले में बहां की उस पुलिस के हवाले कर सकती है जो आतंकवादियों से भरी पड़ी है वो सरकार देशभक्त हिन्दू संगठनों से जुड़े लोगों को क्यों जेल में नहीं डालेगी । यही तो वो षडयन्त्र हैं जो इस गद्दारों की सरकार को जनता के सामने वेनकाब करेंगे।
अन्त में हमें तो बस तना ही कहना है कि देखना है कि जोर कितना बाजुए कातिल में है देवेन्द्र एक नहीं करोड़ों में हैं देखते हैं कितने देवेन्द्रों का सामना ये सेकुलर गिरोह कर पाता है...
सेकुलर गिरोह ने कहा था मुंमबई हमला हिन्दूओं ने किया है सजा कसाब को सुनाई जा रही है कितनी विचित्र घटना है ये पर जरा सोचो कि अगर कसाब जिन्दा हाथ न आया होता तो?
रविवार, 2 मई 2010
IBN7 कैसे मजबूर हुआ ये कहने पर कि लब-जिहाद के निशाने पर हिन्दू और ईसाई लड़कियां?
हम उस वक्त दंग रह गये जब हम ने देखा कि विदेशीयों से पैसा पाकर हिन्दूओं पर भौंकने वाला चैनल लब-जिहाद पर कार्याक्रम कर रहा है वो भी दो घंटे का वो भी लगातार दो दिन तक। सच कहूं तो हमें अपने कानों व आंखों पर विस्वास तक न हुआ । हम ये सोचने पर मजबूर हो गय कि ऐसा कैसे हो सकता है कि देश के दुस्मनों के हाथों विक चैनल रातों-रात देसभक्तों द्वारा पिछले कई बर्षों से सही जा रही असहनीय पीढ़ा पर इतना बढ़ा कार्यक्रम दिखा रहा है वो भी लगातार दो दिन।खैर सारी उपापोह के वाद हमने निर्णय किया कि हम ये कार्यक्रम देखेंगे । जब हमने कार्यक्रम देखना शुरू किया तो हम दंग रह गय कि जिन मुसलिम जिहादी आतंकवादियों का हर वक्त प्रचार-प्रसार किया जाता था जिनको वेचारा दिखाया जाता था उन्ही आतंकवादियों को आज IBN7 राक्षस कहकर पुकार रहा था बता रहा था कि किस तरह हिन्दू लड़कियों को अपने जाल में फंसाने के लिए मुसलिम आतंकवादी लड़कियों के महाविद्यालयों व होसटलों के आसपास मंहगी गाड़ियों व बाइकों पर तब तक चक्कर काटते रहते हैं जब तक कोई गैर हिन्दू लड़की उनके जाल में न फंस जाये। आगे इस चैनल पर बताया जा रहा था कि गैरमुसलिम लड़कियों को ये आतंकवादी लड़के अपने जाल में फंसाकर सबसे पहले मस्जिद में ले जाकर कलमा पढ़ाते थे जो कलमा पढ़ने मतलब मुसलमान बनने को त्यार नहीं होती है उसे तरह –तरह के अमानविय यातनायें देकर मुसलमान बनने पर मजबूर किया जाता और जो त्यार हो जाती उससे पहले झूठी शादी रचाई जाती ।इस झूठी शादी के वाद उसे फांसने वाला आतंकवादी उसके साथ हमविस्तर होता और फिर अपनी हबस पूरी करने के वाद ये जानवर उस लड़की को अपने दूसरे साथियों के हबाले कर देता ।इस तरह एक पवित्र हिन्दू लड़की को अपबित्र कर उसके फोटो खींचकर व फिल्म बनाकर उसे बलैकमेल किया जाता ।उस लड़की को उसके परिबार की इज्जत का बास्ता देकर ये बताया जाता कि तेरे साथ जो होना था वो हो चुका अगर तू अपने माता-पिता भाई-बहनों को और सर्मशार होने से बचाना चाहती है तो मुसलमानों द्वारा हिन्दूओं के विरूद्ध चलाये जारहे जिहाद में सहयोग कर बरना हम आपके वारे में सबको बता देंगे। इस तरह एक हिन्दू लड़की को लब-जिहाद में फंसाकर आतंकवादी बना दिया जाता है। आज भी ये काम जोर सोर से चल रहा है । IBN7 द्वारा ऐसे लब-जिहाद की सिकार लड़कियों की शंख्या हजारों में बताई गई। अब प्रसन ये पैदा होता है कि जिस लब जिहाद के विरूद्ध देसभक्त-हिन्दू संगठन बर्षों से आबाज उठा रहे थे उसी आबाज को IBN7 ने क्यों आगे बढ़ाया । क्योंकि यह वही चैनल है जो जिहादियों द्वारा हिन्दू लड़कीयों को भगाये जाने पर उसके विरूद्ध आबाज ठाने वाले हिन्दू संगठनें को कभी तालिवान कहता तो कभी आतंकवादी ।लेकिन इस चैनल ने ये प्रोग्राम कर जनता के सामने ये सिद्ध कर दिया कि लब-जिहाद के विरूद्ध आबाज उठाने वाले सही हैं व उनका विरोध करने वाले हिन्दूओं की आन-वान-शान के दुसमन।
इस प्रस्न का जबाब तब मिला जब IBN7 ने बताया कि किस तरह केरल में इसाई लड़कियों को भी लब-जिहाद का सिकार बनाया जा रहा है। हद तो तब हो गई जब एक इसाई लड़की को लब जिहाद का सिकार बनाने वाले मुलमानों ने उस लड़की के परिवार पर ही हमला कर दिया।
बैसे तो ये लब जिहाद सारे भारत के मुसलिम बहुल क्षेत्रों में चलाया जा रहा है लेकिन ये मामाला केरल राज्य का है ।
जब लब जिहाद के समर्थकों ने इस ईसाई परिबार पर हमला किया तब ये परिबार प्रसासन के पास सिकायत लेकर गया । उस परिवार से पहले दर्जनों हिन्दू लड़किया जो लब-जिहादियों के चुंगल से भागने में सफल रही थी वो भी सरकार के पास अपनी रक्षा की गुहार लगा चुकी थीं ।लब जिहाद की सिकार लड़कियां न्याय के लिए पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवा चुकीं थी लेकिन क्योंकि ये लड़कियां हिन्दूओं की थीं इसलिए ये मामला सरकार व मिडीया के लिए कोई मायने नहीं रखता था बरना ऐसा कैसे हो सकता था कि जो लब-जिहाद हजारों हिन्दू लड़कियों की जिन्दगी बर्बाद कर चुका हो उस लब जिहाद के विरूद्ध आबाज उठाने वाले हिन्दू संगठनों का साथ देने के बजाय सेकुलर गिरोह –मिडीया व सरकार लब जिहादियों का साथ देते।
असली बात ये है कि ये लब-जिहाद सेकुलर गिरोह की सहायता से चलाया जा रहा है । आप सोचेंगे कि ये हम कह रहे हैं नहीं जी ये बात खुद IBN7 ने कही जिसकी पुस्टी बाद में माननीय न्यायलय ने भी की।
हुआ यूं कि जब ये लब जिहाद की सिकार लड़की का परिबार जब सरकार के पास पहुंचा न्याय पाने के लिए तो सरकार ने लब जिहादियों के विरूद्ध कार्यवाही करने से मना कर दिया।आप तो जानते हैं कि वेसक कुछ पैसा इन चानलों को मुसलिम आतंकवादियों से भी मिलता है पर इन चैनलों के वास्तविक मालिक तो धर्मांतरण के ठेकेदार इसाई ही है और ईसाई लड़की ही लब जिहाद का सिकार हो मतलब जो दूसरों को धर्मभ्रष्ट कर इसाई बनाते हैं उनके सांप्रदाय से सबन्धित लड़की ही धर्मांतरण का सिकार हो जाये ये वो कैसे बरदास कर सकते थे बस फिर क्या था कि इस चैनल ने इसारा पाते ही लबजिहादियों की असलियत जनता के सामने उधेड़ कर रख दी।
आगे चलकर जो हुआ वो और भी शर्मसार कर देने वाला है।
अब सरकार पर दबाब बनाया गया लब जिहादियों के विरूद्ध कार्यवाही करने के लिए लेकिन केरल की सेकुलर सरकार अपने मुसलिम आतंकवादी साथियों को किसी भी कीमत पर नराज करने को त्यार नहीं हुई। धयान रहे ये वही सरकार है जिसने 1998 में अडवानी जी की सभा में बमविस्फोट करने वाले पाकसमर्थक आतंकवादी मदनी को विधानसभा में कानून पारित कर हिन्दूओं पर आतंकवादी हमले करने की खुली छूट दे दी। जब सरकार ने कुछ नहीं किया तो लब-जिहाद की सिकार इस लड़की का केश केरल हाई कोर्ट में पहुंचा जहां लब जिहाद की सिकार दर्जनों लड़कियों के मामले पहले से ही लंबित चल रहे थे। आपको याद रखना चाहिए कि ये वही केरल हाईकोर्ट है जिसमें मनमोहन खान की सरकार ने 100% सरकारी बकील मुसलिम नियुक्त किए ताकि लब जिहादियों को अपने कुकर्मों को आगे बढ़ाने में किसी मुसीबत का सामना न करना पड़े।
आगे क्या हुआ आप खुद पढ़ो माननीय कोर्ट की हताशा
• Court stays proceedings against accused in 'Love Jihad' case:
The Kerala High Court stayed further proceedings against two accused in a case
relating to 'Love Jihad', an organisation allegedly involved in converting
girls from other religions to Islam after enticing them to marry Muslim boys.
The two accused -- Shanshah and Sirajuddin, facing charges of forcing the girls
belonging to Hindu and Christian religions to convert to Islam -- had sought
quashing of the chargesheet against them in a lower court.
• Passing the order, Justice M Shashidharan Nambiar said the conduct of the
investigating officer shocked the judicial conscience. Under section 162 of
CrPC, no statement made by any person to the police officer in the course of
investigation is signed by the person making it.
The action of the police officer "is a flagrant violation of mandatory
provisions of the code," the court said, adding it cannot be believed that
the police officer was ignorant of the provisions.
• The court also directed the Assistant Commissioner of Cantonment police station,
Thiruvananthapuram, to file an affidavit by December 23 stating under what
circumstances statement of the two women victims (of Love Jihad) was recorded
under Section 161 of CrPC. [end of report]
• The Police submitted frivolous reports so
that the Love Jihadis would go scot-free. In future, Kerala Police would refuse
to recognise parents' complaints of their daughters' being trapped and
kidnapped by Love Jihadis, citing this ruling. They might even book the parents
for trying to create communal disharmony, now. Money works with Kerala Police
and bureaucracy easier than in any other part of the country.
हमारे बहुत से मित्र अब कहेंगे कि ये सेकुलर गिरोह की नहीं पुलिस की चूक है पर देश का हर समझदार ब्यक्ति जानता है कि पुलिस के कर्मचारी मजूबर होते हैं वो सब करने के लिए जो सरकार चाहती है क्योंकि सरकार सेकुलर गिरोह की है और सेकुलर गिरोह मुसलिम आतंकवादियों के विना अधूरा है इसलिए सेकुलर गिरोह की सरकार ने पुलिस को लब-जिहादियों के विरूद्ध कार्यावाही करने से रोक दिया । अब आप बताओ कि जो लाखों परिबार इन लबजिहादियों व सेकुलर गिरोह की मिलीभक्त से त्रसत हैं कल को वो हथियार उठाकर इन लब जिहादियों व इन लब जिहादियों के गढ़ बन चुके मदरसों व मस्जिदों को उड़ा दें व सेकुलर गिरोह से जुड़े गद्दारों को गोली मार दें तो हम उन बहादुरों को क्रांतिकारी क्यों न कहें और क्रांतिकारी न कहें तो क्या इन क्रांतिकतारियों का विरोध कर लब जिहादियों को अपनी इजजत आबरू मान सम्मान जान माल से खिलबाड़ करने की कुली छूट दे दें। हम तो समझते हैं कि अब देशभक्तों के पास सिर्फ एक ही रास्ता बचा है वो है देशभक्त क्रांतिकारियों का हर हाल में साथ देना क्योंकि पाक समर्थक आतंकवादियों के साथी सेकुलर गिरोह का साथ देने का मतलब है देश-धर्म-मानबता से गद्दारी ।
इस प्रस्न का जबाब तब मिला जब IBN7 ने बताया कि किस तरह केरल में इसाई लड़कियों को भी लब-जिहाद का सिकार बनाया जा रहा है। हद तो तब हो गई जब एक इसाई लड़की को लब जिहाद का सिकार बनाने वाले मुलमानों ने उस लड़की के परिवार पर ही हमला कर दिया।
बैसे तो ये लब जिहाद सारे भारत के मुसलिम बहुल क्षेत्रों में चलाया जा रहा है लेकिन ये मामाला केरल राज्य का है ।
जब लब जिहाद के समर्थकों ने इस ईसाई परिबार पर हमला किया तब ये परिबार प्रसासन के पास सिकायत लेकर गया । उस परिवार से पहले दर्जनों हिन्दू लड़किया जो लब-जिहादियों के चुंगल से भागने में सफल रही थी वो भी सरकार के पास अपनी रक्षा की गुहार लगा चुकी थीं ।लब जिहाद की सिकार लड़कियां न्याय के लिए पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवा चुकीं थी लेकिन क्योंकि ये लड़कियां हिन्दूओं की थीं इसलिए ये मामला सरकार व मिडीया के लिए कोई मायने नहीं रखता था बरना ऐसा कैसे हो सकता था कि जो लब-जिहाद हजारों हिन्दू लड़कियों की जिन्दगी बर्बाद कर चुका हो उस लब जिहाद के विरूद्ध आबाज उठाने वाले हिन्दू संगठनों का साथ देने के बजाय सेकुलर गिरोह –मिडीया व सरकार लब जिहादियों का साथ देते।
असली बात ये है कि ये लब-जिहाद सेकुलर गिरोह की सहायता से चलाया जा रहा है । आप सोचेंगे कि ये हम कह रहे हैं नहीं जी ये बात खुद IBN7 ने कही जिसकी पुस्टी बाद में माननीय न्यायलय ने भी की।
हुआ यूं कि जब ये लब जिहाद की सिकार लड़की का परिबार जब सरकार के पास पहुंचा न्याय पाने के लिए तो सरकार ने लब जिहादियों के विरूद्ध कार्यवाही करने से मना कर दिया।आप तो जानते हैं कि वेसक कुछ पैसा इन चानलों को मुसलिम आतंकवादियों से भी मिलता है पर इन चैनलों के वास्तविक मालिक तो धर्मांतरण के ठेकेदार इसाई ही है और ईसाई लड़की ही लब जिहाद का सिकार हो मतलब जो दूसरों को धर्मभ्रष्ट कर इसाई बनाते हैं उनके सांप्रदाय से सबन्धित लड़की ही धर्मांतरण का सिकार हो जाये ये वो कैसे बरदास कर सकते थे बस फिर क्या था कि इस चैनल ने इसारा पाते ही लबजिहादियों की असलियत जनता के सामने उधेड़ कर रख दी।
आगे चलकर जो हुआ वो और भी शर्मसार कर देने वाला है।
अब सरकार पर दबाब बनाया गया लब जिहादियों के विरूद्ध कार्यवाही करने के लिए लेकिन केरल की सेकुलर सरकार अपने मुसलिम आतंकवादी साथियों को किसी भी कीमत पर नराज करने को त्यार नहीं हुई। धयान रहे ये वही सरकार है जिसने 1998 में अडवानी जी की सभा में बमविस्फोट करने वाले पाकसमर्थक आतंकवादी मदनी को विधानसभा में कानून पारित कर हिन्दूओं पर आतंकवादी हमले करने की खुली छूट दे दी। जब सरकार ने कुछ नहीं किया तो लब-जिहाद की सिकार इस लड़की का केश केरल हाई कोर्ट में पहुंचा जहां लब जिहाद की सिकार दर्जनों लड़कियों के मामले पहले से ही लंबित चल रहे थे। आपको याद रखना चाहिए कि ये वही केरल हाईकोर्ट है जिसमें मनमोहन खान की सरकार ने 100% सरकारी बकील मुसलिम नियुक्त किए ताकि लब जिहादियों को अपने कुकर्मों को आगे बढ़ाने में किसी मुसीबत का सामना न करना पड़े।
आगे क्या हुआ आप खुद पढ़ो माननीय कोर्ट की हताशा
• Court stays proceedings against accused in 'Love Jihad' case:
The Kerala High Court stayed further proceedings against two accused in a case
relating to 'Love Jihad', an organisation allegedly involved in converting
girls from other religions to Islam after enticing them to marry Muslim boys.
The two accused -- Shanshah and Sirajuddin, facing charges of forcing the girls
belonging to Hindu and Christian religions to convert to Islam -- had sought
quashing of the chargesheet against them in a lower court.
• Passing the order, Justice M Shashidharan Nambiar said the conduct of the
investigating officer shocked the judicial conscience. Under section 162 of
CrPC, no statement made by any person to the police officer in the course of
investigation is signed by the person making it.
The action of the police officer "is a flagrant violation of mandatory
provisions of the code," the court said, adding it cannot be believed that
the police officer was ignorant of the provisions.
• The court also directed the Assistant Commissioner of Cantonment police station,
Thiruvananthapuram, to file an affidavit by December 23 stating under what
circumstances statement of the two women victims (of Love Jihad) was recorded
under Section 161 of CrPC. [end of report]
• The Police submitted frivolous reports so
that the Love Jihadis would go scot-free. In future, Kerala Police would refuse
to recognise parents' complaints of their daughters' being trapped and
kidnapped by Love Jihadis, citing this ruling. They might even book the parents
for trying to create communal disharmony, now. Money works with Kerala Police
and bureaucracy easier than in any other part of the country.
हमारे बहुत से मित्र अब कहेंगे कि ये सेकुलर गिरोह की नहीं पुलिस की चूक है पर देश का हर समझदार ब्यक्ति जानता है कि पुलिस के कर्मचारी मजूबर होते हैं वो सब करने के लिए जो सरकार चाहती है क्योंकि सरकार सेकुलर गिरोह की है और सेकुलर गिरोह मुसलिम आतंकवादियों के विना अधूरा है इसलिए सेकुलर गिरोह की सरकार ने पुलिस को लब-जिहादियों के विरूद्ध कार्यावाही करने से रोक दिया । अब आप बताओ कि जो लाखों परिबार इन लबजिहादियों व सेकुलर गिरोह की मिलीभक्त से त्रसत हैं कल को वो हथियार उठाकर इन लब जिहादियों व इन लब जिहादियों के गढ़ बन चुके मदरसों व मस्जिदों को उड़ा दें व सेकुलर गिरोह से जुड़े गद्दारों को गोली मार दें तो हम उन बहादुरों को क्रांतिकारी क्यों न कहें और क्रांतिकारी न कहें तो क्या इन क्रांतिकतारियों का विरोध कर लब जिहादियों को अपनी इजजत आबरू मान सम्मान जान माल से खिलबाड़ करने की कुली छूट दे दें। हम तो समझते हैं कि अब देशभक्तों के पास सिर्फ एक ही रास्ता बचा है वो है देशभक्त क्रांतिकारियों का हर हाल में साथ देना क्योंकि पाक समर्थक आतंकवादियों के साथी सेकुलर गिरोह का साथ देने का मतलब है देश-धर्म-मानबता से गद्दारी ।
शनिवार, 1 मई 2010
भारत के विरूद्ध फैलायए गये Honey Trap बोले तो विषकन्याजाल का सबसे बढ़ा शिकार कौन?
भारत के कोमोडोर सुखविन्द्र सिंह के रूसी विषकन्या के जाल में फंसने की घटना ने भारतीयों को ट्रैप करने के लिए भारतविरोधियों द्वारा महिलाओं का उपयोग करने की पुरानी परम्परा को एकबार फिर लाईम-लाईट में ला खड़ा किया ।
कौन नहीं जानता कि वर्तमान भारत वोले तो इंडिया के प्रथम प्रधानमन्त्री नैहरू एक अंग्रेज अधिकारी की पत्नी लेडी मांऊटवेटन के जाल
में इस हद तक फंसे थे कि उन्होंने भारत का प्रधानमन्त्री रहते हुए वो सब किया जो अंग्रेजों ने चाहा ।चाहे वो धर्म के आधार पर भारत के विभाजन को स्वीकार करने के लिए गांधी जी को मजबूर करने का मामला हो या फिर विभाजन के बाद लौहपुरूष सरदार बलभ भाई पटेल जी के हर देशहित में दिए गय सुझाब को नजरअंदाज कर कशमीर के मामले को UNO में लो जाकर भारत को नुकसान पहंचाने की घटना हो। कौन भूल सकता है कि माननीय पटेल जी के वार-वार रोकने के बाबजूद नैहरू ने अंग्रेजों के इसारे पर पाकिस्तान के कब्जे वाले कशमीर को आजाद कशमीर कहकर सारी दुनिया के सामने भारत को जलील करने का दुससाहस किया था। नैहरू जी की रूस यात्रा के दौरान उनके एक अधिकारी के रूसी महिला के चुंगल में फंसे होने की बात को हंसकर नजरअंदाज कर दिया था क्योंकि वो जानते थे कि उस अधिकारी की गद्दारी की ओर देश का ध्यान जाने पर उनके अपने भारतविरोधी कुकर्म भी चर्चा का केन्द्रविन्दु बन सकते हैं।
आप जरा सोचो कि अगर बासतब में एंटोनिया राजीब जी के प्रेम में दीवानी थी तो फिर कवात्रोची कौन है? उसका राजीब जी के घर में क्या काम ? अगर एंटोनिया का क्वात्रोची से की सबन्ध नहीं तो फिर वोफोर्स दलालीकांड में इंगलैंड में जब्त क्वात्रोची के पैसे को निकलवाने में इतनी छटमटाहट क्यों ? क्यों टिठी लिखने या फैक्स भेजने के बजाय ततकालीन कानूनमन्त्री हंसराजभारद्वाज को लन्दन भेजा गया? वोफोर्स दलालीकांड में क्वात्रोची के विरूद्ध चल रहे मामलों को चुनाब से ठीक पहले खत्म करने की हड़बड़ाहट क्यों ? राजीब जी से प्यार था तो फिर राजीब जी की कातिल नलिनी की तरफ दोस्ती का हाथ क्यों ? हमेशा राजीब जी के साथ रहने वाली उनके कत्ल के दिन उनके साथ क्यों नहीं? अधिक जानकारी के लिए एंटोनियो के हिन्दूविरोधी षडयन्त्र पढ़ें जो इसी बलाग पर उपलब्ध हैं। कुल मिलाकर हमारे परिस्थितिजनक प्रमाणों के आधार राजीब जी विषकन्या के सबसे बढ़े सिकार थे जिसकी कीमत उन्हें अपने प्राण देकर चुकानी पड़ी तथा भारत को अपनी सम्प्रभुता खोकर ।हमारे विचार मे इसी Honey Trap के परिणामस्वारूप ये 1947 के वाद पहलीवार है कि देश का प्रधानमन्त्री और राष्ट्रपति एक विदेशी के गुलाम हैं...
आओ मिलकर भारत की सम्प्रभुता को बचाने के लिए संघर्ष करें।
कौन नहीं जानता कि वर्तमान भारत वोले तो इंडिया के प्रथम प्रधानमन्त्री नैहरू एक अंग्रेज अधिकारी की पत्नी लेडी मांऊटवेटन के जाल
में इस हद तक फंसे थे कि उन्होंने भारत का प्रधानमन्त्री रहते हुए वो सब किया जो अंग्रेजों ने चाहा ।चाहे वो धर्म के आधार पर भारत के विभाजन को स्वीकार करने के लिए गांधी जी को मजबूर करने का मामला हो या फिर विभाजन के बाद लौहपुरूष सरदार बलभ भाई पटेल जी के हर देशहित में दिए गय सुझाब को नजरअंदाज कर कशमीर के मामले को UNO में लो जाकर भारत को नुकसान पहंचाने की घटना हो। कौन भूल सकता है कि माननीय पटेल जी के वार-वार रोकने के बाबजूद नैहरू ने अंग्रेजों के इसारे पर पाकिस्तान के कब्जे वाले कशमीर को आजाद कशमीर कहकर सारी दुनिया के सामने भारत को जलील करने का दुससाहस किया था। नैहरू जी की रूस यात्रा के दौरान उनके एक अधिकारी के रूसी महिला के चुंगल में फंसे होने की बात को हंसकर नजरअंदाज कर दिया था क्योंकि वो जानते थे कि उस अधिकारी की गद्दारी की ओर देश का ध्यान जाने पर उनके अपने भारतविरोधी कुकर्म भी चर्चा का केन्द्रविन्दु बन सकते हैं।
(एंटोनिया रूस में)
रूस द्वारा भारतीयों को महिलाओं के चक्कर में फंसाकर उनका दुरूपयोग करने का सबसे बढ़ा भारतविरोधी कदम उस वक्त सामने आया जब इंगलैंड में पढ़ रहे भोले-भाले राजीब गांधी जी को एंटोनियो माईनो मारियो के माध्यम से ट्रैप किया गया। अधिक जानकारी के लिए श्री सुबरामणियम स्वामी जी द्वारा 2004 में राष्ट्रपति जी को सौंपी गई चिठी को पढ़ें ।अगर आपके पास उपलब्ध न हो तो अपना Email पता हमें दें हम आपको भेज देंगे।आपको खुदवाखुद पता चल जायेगा कि किस तरह राजीब जी एंमटोनियो माईनो मारियो के चुंगल में फंसाये गय व किस तरह एंटोनियो ने एक ऐसे Honey Trap को सफलतापूर्वक अन्जाम दिया जिसे भारत के विरूद्ध सबसे बढ़ा षडयन्त्र कहा जा सकता है।आप जरा सोचो कि अगर बासतब में एंटोनिया राजीब जी के प्रेम में दीवानी थी तो फिर कवात्रोची कौन है? उसका राजीब जी के घर में क्या काम ? अगर एंटोनिया का क्वात्रोची से की सबन्ध नहीं तो फिर वोफोर्स दलालीकांड में इंगलैंड में जब्त क्वात्रोची के पैसे को निकलवाने में इतनी छटमटाहट क्यों ? क्यों टिठी लिखने या फैक्स भेजने के बजाय ततकालीन कानूनमन्त्री हंसराजभारद्वाज को लन्दन भेजा गया? वोफोर्स दलालीकांड में क्वात्रोची के विरूद्ध चल रहे मामलों को चुनाब से ठीक पहले खत्म करने की हड़बड़ाहट क्यों ? राजीब जी से प्यार था तो फिर राजीब जी की कातिल नलिनी की तरफ दोस्ती का हाथ क्यों ? हमेशा राजीब जी के साथ रहने वाली उनके कत्ल के दिन उनके साथ क्यों नहीं? अधिक जानकारी के लिए एंटोनियो के हिन्दूविरोधी षडयन्त्र पढ़ें जो इसी बलाग पर उपलब्ध हैं। कुल मिलाकर हमारे परिस्थितिजनक प्रमाणों के आधार राजीब जी विषकन्या के सबसे बढ़े सिकार थे जिसकी कीमत उन्हें अपने प्राण देकर चुकानी पड़ी तथा भारत को अपनी सम्प्रभुता खोकर ।हमारे विचार मे इसी Honey Trap के परिणामस्वारूप ये 1947 के वाद पहलीवार है कि देश का प्रधानमन्त्री और राष्ट्रपति एक विदेशी के गुलाम हैं...
आओ मिलकर भारत की सम्प्रभुता को बचाने के लिए संघर्ष करें।
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