(यह कोई लेख नहीं पर एक पुस्तक नकली धरेमनिर्पेक्षता के वो अंश हैं जो इस जिन्दा जख्म की नायिका का विरोध करने वालों की न केवल हकीकत बयान करते हैं पर उनसे शांतिप्रिय भारतीयों को पैदा हुए खतरे को भी उजागर करते हैं )
यह वही गिरोह है जिसके नेतृत्व में सारे भारत में वन्देमातरम् का गान करने का फैसला किया गया लेकिन मुठीभर देशद्रोही मुस्लिम आतंकवादियों द्वारा वन्देमातरम् का विरोध इस आधार पर किए जाने पर कि वन्देमातरम् का गान उनकी जिहादी मानसिकता के विरूद्ध है। इस गिरोह की सरकार ने वन्देमातरम् गाने का फैसला वापिस लेते हुए यह कह दिया कि जिसको गाना है वो गाए जिसको नहीं गाना है वो न गाए।
• इस फैसले से एक तो राष्ट्रगीत का अपमान किया गया !
• दूसरे देशद्रोही मुस्लिम आतंकवादियों का हौंसला बढ़ाया गया !
• तीसरा आम मुसलमान को वन्देमातरम् का विरोधी घोषित कर दिया !
• जब ये देशविरोधी मानसिकता वाले देशद्रोही परिवार नियोजन जैसे कार्यक्रमों का विरोध करते हैं और अधिक से अधिक बच्चे पैदा कर देश के इस्लामीकरण की बात करते हैं तो ये सैकुलर गिरोह आम देशभक्त मुसलमान को परिवार नियोजन जैसे कार्यक्रमों के लाभ बताकर उसके साथ खड़ा होने के बजाए जिहादी मानसिकता वाले देशद्रोहियों का साथ देता है और परिवार नियोजन जैसे कार्यक्रमों का विरोध करता है।
परिवार नियोजन का समर्थन करने वालों को सांप्रदायिक कहकर आम देशभक्त मुसलमानों को डराकर जिहादी मानसिकता वाले देशद्रोहियों का साथ देने के लिए मजबूर करता है फिर मुसलमानों की गरीबी का ढिंढोरा पीटने के लिए सच्चर कमेटी बनाता है
अब इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी सैकुलर गिरोह को कौन समझाये कि बिना परिवार नियोजन के विकास सम्भव नहीं।
• चौथा मुठीभर अलगावबादी मानसिकता वाले सिरफिरों द्वारा वन्देमातरम् व परिवार नियोजन के विरोध को सब मुसलमानों की राय बताकर सब के सब मुसलमानों पर देशद्रोही होने का लैबल चिपका दिया ।
अब आप ही सोचो कि यह गिरोह देशद्रोही मुस्लिम आतंकवादियों का समर्थक है या आम देशभक्त मुसलमान का ?
हमारे विचार में यह गिरोह सिर्फ देशद्रोही मुस्लिम आतंकवादियों का समर्थक है न कि आम देशभक्त मुसलमान का क्योंकि यह गिरोह हर तरह से आम देशभक्त मुसलमान का नुकसान ही कर रहा है।
एक तरफ यह देशद्रोही गिरोह मुहम्मद अफजल, सोराबुदीन व आतिफ जैसे देशद्रोही मुस्लिम आतंकवादियों का समर्थन कर आम देशभक्त मुसलमानों के बच्चों को साफ संदेश दे रहा है कि तुम आतंकवादी बनो सारा सैकुलर बोले तो देशद्रोही गिरोह आपका सुरक्षा कवच बनकर खड़ा है !
दूसरी तरफ बहुत सी मस्जिदों व मदरसों पर इस अलगावबादी मानसिकता वाले आतंकवादियों के कब्जे की वजह से इस्लाम में ब्यापत बुराईयों को समाप्त करने के बजाए उल्टा उनका समर्थन कर इन बुराईयों को बढाबा देकर आम देशभक्त मुसलमानों के बच्चों व देश को एक ऐसे गर्त में धकेलता चला जा रहा है जिसका परिणाम अफगानिस्तान व पाकिस्तान के कबाइली इलाकों जैसी जाहलिएत है न कि जन्नत जो कि ये जिहादी मानसिकता वाले आतंकवादी इस गिरोह की सहायता से प्रचारित कर रहे हैं।
अगर इस सेकुलर गिरोह का ये आतंकवाद प्रेम व हिन्दूविरोध इसी तरह जारी रहा तो वो दिन दूर नहीं जब भारत में भी अफगानीस्तान जैसे हालात वन जायेंगे और हर जगह तालिबान ही नजर आयेंगे।
अगर इन्हें आम मुसलमान की चिन्ता होती तो ये अल्पसंख्यकवाद व धर्मनिर्पेक्षता के बहाने देशद्रोही मुस्लिम जिहादी आतंकवादियों का समर्थन कर व शान्तिप्रिय हिन्दुओं और उनके राष्ट्रवादी संगठनों का खौफ दिखाकर आम मुसलमान को राष्ट्र की मुख्यधारा से काटने का यूँ प्रयत्न न करते बल्कि इस सत्य का एहसास करवाते कि वेशक दोनों की पूजा-पद्धति अलग-अलग है पर दोनों के पूर्वज एक ही हैं ।
क्योंकि आक्रमणकारी जिहादियों के साथ तो कुछ गिनेचुने जिहादी ही आए थे। आम मुसलमान वो परावर्तित हिन्दू हैं जो औरंगजेब और बाबर जैसे राक्षसों के अत्याचारों से तंग आकर इस्लाम अपनाने को मजबूर हुए और इस सैकुलर गिरोह की भारतीय संस्कृति विरोधी फूट डालो और राज करो के देशद्रोही षड्यन्त्रों की वजह से आज तक मजबूर हैं वरना इन मुठीभर देशद्रोही मुस्लिम आतंकवादियों में कहाँ इतना दम था कि इन आम देशभक्त मुसलमानों की आवाज को इस तरह दबाकर रखते और इनके होनहार बच्चों को आतंकवाद की उस अंधेरी गली में धकेलते जिसके रास्ते सीधे जहन्नुम में खुलते हैं ।
आम देशभक्त मुसलमान न तो जिहादी है,न आतंकी है, न ही कट्टर और न ही औरंगजेब और बाबर जैसे राक्षसों की संतान। ये तो भगवान राम की उस संतान की तरह है जो मन्दिर जाती है फर्क सिर्फ इतना है कि इसकी पूजा पद्धति थोड़ी अलग है । सारा मामला जयचंद के वंशज इस देशद्रोही गिरोह व औरंगजेब और बाबर जैसे राक्षसों की संतानों इन मुठ्ठीभर देशद्रोही मुस्लिम जिहादी आतंकवादियों के द्वारा उलझाया हुआ है।
अगर आपको लगता है कि मामला इतना सीधा नहीं है तो जरा इस बात की ओर ध्यान दो ।
हम दावे के साथ कह सकते हैं कि जिन हिन्दुओं व राष्ट्रवादी संगठनों का नाम लेकर आम देशभक्त मुसलमानों को डराया व उकसाया जाता है उनमें से किसी को भी अपने इन मुस्लिम भाईयों के मस्जिद जाने पर कोई आपत्ति नहीं है और न ही इन मुस्लिम भाईयों को हिन्दुओं के मन्दिर जाने या मूर्तिपूजा करने पर कोई आपत्ति हो सकती है।
लेकिन औरंगजेब और बाबर जैसे राक्षसों की संतानों को व इस देशद्रोही सैकुलर गिरोह को, हिन्दुओं के मन्दिर जाने, मूर्तिपूजा करने और यहाँ तक कि हिन्दुओं के आस्तिक होने पर ही घोर आपत्ति है तभी तो यह गिरोह एक तरफ माननीय सर्वोच्चन्यायालय में सपथपत्र देकर घोषणा करता है कि भगवान राम हुए ही नहीं और दूसरी तरफ इनके लाडले देशद्रोही मुस्लिम जिहादी आतंकवादी मन्दिरों में बम्ब विस्फोट करते हैं ।
यह सैकुलर गिरोह यह भूल जाता है कि ये सबकुछ तबतक चल रहा है जब तक हिन्दू इनकी असलिएत से अनभिज्ञ है व अपने शान्तिप्रिय स्वभाव को नहीं छोड़ता लेकिन अब इनकी असलिएत बड़ी तेज गति से बेनकाब हो रही है और हिन्दू समझ रहा है कि जो शहीद मोहनचन्द शर्मा जी के बलिदान का अपमान कर रहे हैं वो भला देशभक्त कैसे हो सकते हैं ? जो देश के लिए प्राण जोखिम में डालकर देशद्रोहियों को पकड़ने व मारगिराने वाले सैनिकों व पुलिस के जवानों को शक की निगाह से देखते हैं उनकी शहीदी का अपमान करते हैं व देशद्रोही मुस्लिम जिहादी आतंकवादियों का समर्थन करते हैं उनके समर्थन में रैलियां धरने प्रदर्शन जुलूस निकालते हैं इनकी खातिर कोर्ट पहुंचते हैं कोर्ट को गुमराह करने का जोर-शोर से प्रयास करते हैं फिर फैसला सत्य और न्याय के पक्ष में आने पर माननीय सर्वोच्चन्यायालय तक का अपमान करते हैं व आदेश नहीं मानते व माननीय सर्वोच्चन्यायालय तक को अपनी सीमा में रहने और इनके देशविरोधी कामों में हस्ताक्षेप न करने की धमकी तक दे डालते हैं । मानो ये सब काफी न हो तो इनके समर्थन से पलने वाले आतंकवादी न्यायालय परिसर,पुलिस व सेना के शिविरों और गाड़ियों में बम्ब विस्फोट कर डालते हैं मानो कि के कह रहे हों जब संइयां भय सरकार तो फिर डर काहे का ।
यही वजह है कि जब भी हम हिन्दू बोलते हैं तो उसका अभिप्राय उन सभी भारतीयों से है जो भारत भूमि को सच्चे मन से अपनी मातृभूमि मानते हैं भारतीय संस्कृति को अपनी संस्कृति मानते हैं भारत के शत्रु को अपना शत्रु मानते हैं फिर वो चाहे पूजा के लिए मन्दिर या गुरूद्वारा या मस्जिद या गिरजाघर कहीं भी जाएं या फिर कहीं भी न जाएं या फिर सब जगह जाएं उसके देशभक्त भारतीय अर्थात हिन्दू होने पर कोई फर्क नहीं पड़ता । इस हिन्दू को एक दूसरे की पूजा पद्धति पर कोई आपत्ति नहीं होती ।
आप जरा सोचो कंधार काबुल जो कभी भारत था अफगानिस्तान बनकर गृहयुद्ध का शिकार क्यों है ? सिंध , ब्लूचीस्तान, कराची, लाहौर, ढाका जो 60 वर्ष पहले भारत था आज आन्तरिक मार-काट का शिकार क्यों है ? लोग वही हैं, जमीन वही है, सब कुछ वही है बस फर्क पड़ा तो इतना कि वो खुद को हिन्दू नहीं मानते ।
हम बाहर की बात क्यों करें जरा भारत को ही ध्यान से देखें कि कहां-कहां अलगाववाद है, हिंसा है, दंगा है, अशांति है सिर्फ वहां पर जहां-जहां खुद को हिन्दू न मानने वालों की संख्या प्रभावशाली है जैसे कि कश्मीरघाटी,आसाम,गोधरा, कंधमाल,मऊ, उत्तर-पूर्व के कई हिस्से। देश में और भी कई स्थान ऐसे हैं जहां खुद को हिन्दू न मानने वाले अकसर हिन्दुओं पर हमला करते रहते हैं और यह सैकुलर गिरोह हमलावरों के समर्थन में हिन्दुओं व उनके संगठनों को सांप्रदायिक, कातिल,गुंडा प्रचारित कर बदनाम करने के लिए विश्वव्यापी अभियान चलाता रहता है
यह मूर्खों का गिरोह इतना भी सोचने का कष्ट नहीं करता कि अगर हिन्दुओं व उनके संगठनों को ही इस्लाम या ईसाईयत मिटाओ अभियान चलाना हो तो वो हिन्दुबहुल क्षेत्रों मे शुरू करें और सारे भारत में एक साथ चलाएं न कि उन क्षेत्रों में जहां इस्लाम या ईसाईयत को मानने वाले या तो बहुसंख्यक बन गय हैं या बहुसंख्यक बनने के कगार पर पहुंच गए हों जबकि सच्चाई यह है कि हिन्दुओं व उनके संगठनों को इस्लाम या ईसाईयत से कोई समस्या नहीं ।
समस्या है तो उन देशद्रोहियों से है जो इस्लाम के बहाने जिहादी मानसिकता का प्रचार-प्रसार व समर्थन करते हैं व खुद को औरंगजेब और बाबर जैसे नरभक्षीयों की संतान कहलवाने में गर्व महसूस करते हैं या सेवा के नाम पर ईसाईयत के प्रचार-प्रसार के बहाने हिन्दूधर्म की निंदा कर हिन्दूधर्म विरोधी महौल बनाकर छल-कपट से जबरन धर्माँतरण को बढ़ावा देते हैं व धर्माँतरण का विरोध करने वाले परम पूजनीय स्वामी लक्ष्मणानन्द सरस्वती जी जैसे देशभक्त समाजसेवकों और सन्तों का कत्ल करते हैं ।
इस देशद्रोही गिरोह को हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि खुद को औरंगजेब और बाबर जैसे नरभक्षियों की संतान कहलवाने वाले इन मुठ्ठीभर देशद्रोही मुस्लिम आतंकवादियों व धर्माँतरण करवाने वालों के लिए इस देश में न कोई जगह है और न ही कोई जगह हो सकती है फिर भी इस गिरोह को अगर विषय स्पष्ट नहीं तो हम इनके सामने वो सच्चाई रखने का प्रयास करेंगे जिसे आज हर देशभक्त महसूस करता है पर कहने से बचता है शायद इस उम्मीद में कि मानवता के शत्रु अपने आप मानवता को लहूलुहान करना छोड़ देंगे पर वो यह भूल जाता है कि राक्षस के मुँह अगर एक बार खून लग जाए तो वह तब तक नहीं रूकता जब तक सामने वाला खत्म न हो जाए या फिर इस राक्षस को खत्म न कर दिया जाए । हमारे विचार में भारत से अब इस राक्षस को मिटा देने का वक्त आ चुका है !
धर्मनिर्पेक्ष आतंकवादियों द्वारा रचे जा रहे हिन्दूविरोधी-देशविरोधी षडयन्त्रों को उजागर करने की कोशिश। हमारा मानना है कि भारत में कानून सांप्रदाय,जाति,भाषा,क्षेत्र,लिंग अधारित न बनाकर भारतीयों के लिए बनाए जाने चाहिए । अब वक्त आ गया है कि हिन्दूमिटाओ-हिन्दूभगाओ अभियान चलाने वाले भारतविरोधी धर्मनिर्पेक्ष आतंकवादियों को उनके समर्थकों सहित खत्म करने के लिए सब देशभक्तों द्वारा एकजुट होकर निर्णायक अभियान चलाया जाए।
रविवार, 11 अप्रैल 2010
शनिवार, 10 अप्रैल 2010
क्या sex को प्यार का नाम देना प्यार को बदनाम करने जैसा अपराध नहीं ?
आज हम भारत में अपने चारों ओर जब नजर दौड़ाते हैं, तो एक संघर्ष हर तरफ नजर आता है। यह संघर्ष है राष्ट्रवादी बनाम सेकुलरवादी सोच का । इस संघर्ष के बारे में अपना पक्ष स्पष्ट करने से पहले हमें मानव और पशु के बीच का अन्तर अच्छी तरह से समझना होगा।
हमारे विचार में मानव और पशु के बीच सबसे बड़ा अन्तर यह है कि मानव समाज में रहता है और सामाजिक नियमों का पालन करता है जबकि पशु के लिए सामाजिक नियम कोई माइने नहीं रखते ।
क्योंकि मानव समाज में रहता है इसलिए सामाजिक नियमों का पालन करते हुए जीवन यापन करना मानव की सबसे बड़ी विशेषता है ।
प्रश्न पैदा होता है कि सामाजिक नियम क्या हैं ? ये नियम कौन बनाता है ? क्यों बनाता है?
सामाजिक नियम वह कानून हैं जो समाज अपने नागरिकों के सफल जीवनयापन के लिए स्वयं तय करता है। ये कानून मानव के लिए वे मूल्य निर्धारित करते हैं जो मानव को व्यवस्थित व मर्यादित जीवन जीने का स्वाभाविक वातावरण उपलब्ध करवाते हैं । ये सामाजिक नियम मनुष्य को शोषण से बचाते हुए सभ्य जीवन जीने का अवसर प्रदान करते हैं। कोई भी समाज तब तक प्रगति नहीं कर सकता जब तक वह व्यवस्थित न हो । वेशक इन सामाजिक नियमों का पालन करने के लिए मनुष्य को व्यक्तिगत आज़ादी त्याग कर समाज द्वारा निर्धारित अचार संहिता का पालन करना पड़ता है । कई बार तो यह अचार संहिता मानव के जीवन को इस हद तक प्रभावित करती है कि मानव इससे पलायन करने की कुचेष्ठा कर बैठता है । अगर ये कुचेष्ठा बड़े स्तर पर हो तो यह एक नई सामाजिक व्यवस्था को जन्म दे सकती है लेकिन इस नई व्यवस्था में भी नये सामाजिक नियम मानव जीवन को नियन्त्रित करते हैं । यहां बेशक पहले की तुलना में कम बन्धन होते हैं लेकिन इन बन्धनों के विना समाज नहीं बन सकता। क्योंकि बिना सामाजिक नियमों के चलने वाला समूह भीड़ तो बना सकता है पर समाज नहीं। समाज ही तो मानव को पशुओं से अलग करता है। कुल मिलाकर हम कह सकते हैं कि सामाजिक नियम मानव जीवन का वो गहना है जिसका त्याग करने पर मानव जीवन के अस्तित्व की कल्पना भी नहीं की जा सकती ।
अगर हम मानव इतिहास पर नजर दौड़ायें तो संसार में प्रमुख रूप से तीन समाजों का प्रभुत्व नजर आता है परन्तु ये तीनों समाज एक ही समाज से निकले हुए प्रतीत होते हैं। हिन्दु समाज संसार का प्राचीनतम व सभ्यतम् समाज है । इसाई समाज दूसरे व मुस्लिम समाज तीसरे नम्बर पर नजर आता है।
आज से लगभग 2000 वर्ष पहले न ईसाईयत थी न इस्लाम था सिर्फ हिन्दुत्व था । साधारण हिन्दु राजा विक्रमादित्य व अशोक महान लगभग 2050 वर्ष पहले हुए जबकि ईसाईयों के धार्मिक गुरू ईशु भी उस वक्त पैदा नहीं हुए थे । उस वक्त ईस्लाम के होने का तो प्रश्न ही पैदा नहीं होता क्योंकि इस्लाम तो आज से लगभग 1500 वर्ष पहले अस्तित्व में आया । भगवान श्रीकृष्ण जी का अबतार आज से लगभग 5000 वर्ष पहले हुआ । भगवान श्री राम, ब्रहमा-विष्णु-महेश जी के अबतार के समय के बारे में पता लगाना वर्तमान मानव के बश की बात ही नहीं है।
श्रृष्टि के निर्माण से लेकर आज तक एक विचार जो निरंतर चलता आ रहा है उसी का नाम सनातन है। यही सनातन मानव जीवन को सुखद व द्वेशमुक्त करता रहता है। यही वो सनातन है जिसके अपने आंचल से निकली ईसाईयत व इसलाम ने ही सनातन को समाप्त करने के लिए अनगिनत प्रयास किए लेकिन इनका कोई प्रयास सनातन की सात्विक व परोपकारी प्रवृत्ति के परिणामस्वरूप सफल न हो पाया। हजारों बर्षों के बर्बर हमलों व षडयन्त्रों के बाबजूद आज भी ऐसा प्रतीत होता है कि सनातन से निकले ईसाईयत व ईसलाम वापस सनातन में समाने को आतुर हैं ।
सनातन का ही सुसंगठित स्वरूप हिन्दुत्व है हिन्दुत्व ही आज भारत में सब लोगों को शांति और भाईचारे से जीने का रास्ता दिखा रहा है। ईसाईयत और ईसलाम की सम्राज्यबादी हमलाबर सोच के परिणामस्वरूप हिन्दुत्व का भी सैनिकीकरण करने की जरूरत महसूस की जाने लगी है और कुछ हद तक हिन्दुत्व का सैनिकीकरण हो भी चुका है। साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर व लेफ्टीनेंट कर्नल जैसे क्रांतिकारी इसी सैनिकीकरण की उपज हैं।
अगर ईसाईयत और ईस्लाम का भरतीय संस्कृति और सभ्यता पर हमला इसी तरह जारी रहा तो हो सकता है हिन्दुत्व को कुछ समय के लिए अपनी सर्वधर्मसम्भाव की प्रवृति से उस समय तक समझौता करना पड़े जब तक इन हमलाबारों का ऋषियों मुनियों की पुण्यभूमि भारत से समूल नाश न कर दिया जाए। बेशक उदारता व शांति ही हिन्दुत्व के आधारस्तम्भ हैं लेकिन जब हिन्दुत्व ही न बचेगा तो ये सब चीजें बेमानी हो जायेंगी। अतः सर्वधर्मसम्भाव, उदारता व शांति को बनाए रखने के लिए हिन्दुत्व का बचाब अत्यन्त आवश्यक है।
अपने इस उदेश्य की पूर्ति के लिए अगर कुछ समय तक हिन्दुत्व के इन आधार स्तम्भों से समझौता कर इन आक्रमणकारियों के हमलों का इन्हीं की भाषा में उतर देकर मानवता की रक्षा की खातिर हिन्दुत्व के सैनिकीकरण को बढ़ाबा देकर भारतीय सभ्यता और संस्कृति की रक्षा की जा सके तो इस में बुराई भी क्या है ?
जो हिन्दु हिन्दुत्व के सैनिकीकरण की अबधारणा से सहमत नहीं हैं उन्हें जरा भारत के मानचित्र को सामने रखकर यह विचार करना चाहिए कि जिन हिस्सों में हिन्दुओं की जनसंख्या कम होती जा रही है वो हिस्से आतंकवाद,हिंसा और दंगों के शिकार क्यों हैं ? जहां हिन्दुओं की जनसंख्या निर्णायक स्थिति में है वहां कयों दंगा नहीं होता ? कयों हिंसा नहीं होती ? कयों सर्वधर्मसम्भाव वना रहता है ?क्यों मुसलमान परिवार नियोजन, वन्देमातरम् का विरोध करते हैं ? क्यों ईसाई हर तरह के विघटनकारी मार्ग अपनाकर धर्मांतरण पर जोर देते हैं ?
ये सब ऐसे प्रश्न हैं जिनका सरल और सपष्ट उतर यह है कि ईसायत और ईस्लाम राजनीतिक विचारधारायें हैं न कि धार्मिक । इन दोनों विचारधाराओं का एकमात्र मकसद अपनी राजनीतिक सोच का प्रचार-प्रसार है न कि मानवता की भलाई। अपनी विचारधारा के प्रचार प्रसार के लिए ये दोनों किसी भी हद तक गिर सकते है ।इस्लाम का प्रमुख हथियार है हिंसा और ईसाईयत का प्रमुख हथियार है छल कपट और हिंसा। दूसरी तरफ हिन्दुत्व एक जीबन पद्धति है जिसका प्रमुख हथियार है सरवधर्मसम्भाव। हिन्दुत्व का एकमात्र उदेश्य मानवजीबन को लोभ-लालच, राग-द्वेश, बाजारबाद से दूर रख कर आत्मबल के सहारे शुख-शांति, भाईचारे के मार्ग पर आगे बढ़ाना है।
इतिहास इस बात का साक्षी है कि हिन्दुत्व के प्रचार-प्रसार के लिए कभी किसी पर हमला नहीं किया गया पर ये भी उतना ही सत्य है कि जिसने भी मानव मूल्यों को खतरे मे डाला है उसको कभी बख्शा भी नहीं गया है चाहे बो किसी भी संप्रदाय से सबन्ध रखता हो।
आज भारत में ईसाई व मुसलिम आतंकवादियों की समर्थक सेकुलर सोच ने भारत के समक्ष एक नई चुनौती पैदा की है। ब्यापारबाद से प्रभावित इस सेकुलर सोच का एकमात्र उदेश्य मानव मुल्यों को नष्ट कर एक ऐसा समाज निर्मित करना है जो अचार व्यबहार में पशुतुल्य हो।
आओ जरा इस सेकुलर सोच के विचार का विशलेशण करें कि ये सेकुलरवादी जिस व्यवस्था की बकालत कर रहे हैं वो मानव जीवन को खतरे में डालती है या फिर मानव मुल्यों को बढ़ाबा देती है।
सेकुलर सोच को मानने बाले अपने आप को माडर्न कहते हैं।अपने माडर्न होने की सबसे बड़ी पहचान बताते हैं कम से कम कपड़े पहनना।इन्हें कपड़े न डालने में भी कोई बुराई नहीं दिखती। कुल मिलाकर ये कहते हैं कि जो जितने कम कपड़े पहनता है बो उतना अधिक माडर्न है। अब जरा बिचार करो कि क्या हमारे पशु कपड़े पहनते हैं ? नहीं न । हम कह सकते हैं कि अगर कपड़े न पहनना आधुनिकता है फिर तो हमारे पशु सबसे अधिक माडर्न है ! कुल मिलाकर ये सेकुलरताबादी मानव को पशु बनाने पर उतारू हैं क्योंकि समाज में कपड़े पहन कर विचरण करना मानव की पहचान है और नंगे रहना पशु की। ये सेकुलरतावादी जिस तरह नंगेपन को बढ़ाबा दे रहे हैं उससे से तो यही प्रतीत होता है कि इन्हें पशुतुल्य जीबन जीने में ज्यादा रूची है बजाय मानव जीबन जीने के ।
रह-रहकर एक विषय जो इन सेकुलरतावादियों ने बार-बार उठाया है वो है एक ही गोत्र या एक ही गांव में शादी की नई परंम्परा स्थापित करना। जो भी भारत से परिचित है वो ये अच्छी तरह जानता है कि भारत गांव में बसता है। गांव में बसने बाले भारत के अपने रिति-रिबाज है अपनी परम्परांयें हैं अधिकतर परम्परांयें वैज्ञानिक व तर्कसंगत है । इन्ही परम्परांओं में से एक परंम्परा है एक ही गांव या गोत्र में शादी न करने की। आज विज्ञान भी इस निषकर्श पर पहुंचा है कि मानव अपनी नजदीकी रिस्तेदारी में शादी न करे तो बच्चे स्वस्थ और बुद्धिमान पैदा होंगे । हमारे ऋषियों-मुनियों या यूं कह लो पूर्बजों ने भी सात पीड़ियों तक एक गोत्र में शादी न करने का नियम बनाया जो कि मानव जीबन के हित में है व तर्कसंगत है।अगर गांव बाले इस नियम को मानने पर जोर देते हैं तो इन सेकुलरताबादियों के पेट में दर्द कयों पड़ता है ? वैसे भी ये होते कौन हैं समाज द्वारा अपने सदस्यों की भलाई के लिए बनाय गए नियमों का विरोध करने बाले। वैसे भी लोकतन्त्र का तकाजा यही है कि जिसके साथ बहुमत है वही सत्य है।
इन सेकुलरतावादियों की जानकारी के लिए हम बता दें कि अधिकतर गांव में, गांव का हर लड़का गांव की हर लड़की को बहन की तरह मानता है। मां-बहन, बाप-बेटी के रिस्तों की बजह से ही गांव की कोई भी लड़की या महिला अपने आप को असुरक्षित महसूस नहीं करती है।आजादी से जीबन जीने में समर्थ होती है कहीं भी आ-जा सकती है खेल सकती है। हो सकता है ये भाई बहन की बात सेकुलरता बादियों को समझ न आये। बैसे भी अगर आप पशुओं के किसी गांव में चले जांयें ओर उन्हें ये बात समझायें तो उनको भी ये बात समझ नहीं आयेगी। क्योंकि ये भाई-बहन का रिस्ता सिर्फ मानव जीबन का अमुल्य गहना है न कि पशुओं के जीबन का ।
अभी हाल ही में पब संस्कृति की बात चली तो भी इस सेकुलर गिरोह ने ब्यभिचार और नशेबाजी के अड्डे बन चुके पबों का विरोध करने बालों का असंसदीय भाषा में विरोध किया। हम ये जानना चाहते हैं कि पबों में ऐसा क्या है जो उनका समर्थन किया जाये। कौन माता-पिता चांहेंगे कि उनके बच्चे नशा करें व शादी से पहले गैरों के साथ एसी जगहों पर जांयें जो कि ब्याभिचार के लिए बदनाम हो चुकी हैं।बैसे भी यह बात किसी से छुपी हुई नहीं है कि भारत में इस पब संस्कृति के पांब पसार लेने के बाद भारत का हाल भी उस अमेरिका की तरह होगा जहां लगभग हर स्कूल के बाहर प्रसूती गृह की जरूरत पड़ती है। कौन नहीं जानता कि बच्चा गिराने की प्रक्रिया में सबसे ज्यादा नुकशान लड़की को ही उठाना पड़ता है। फिर पब संस्कृति के विरोधियों को महिलाविरोधी प्रचारित करना कहां तक ठीक है । लेकिन इन सेकुलरतावादियों की पशुतुल्य सोच इस बात को अच्छी तरह समझती है कि भारतीय संस्कृति को नष्ट किए बिना इनकी दुकान लम्बे समय तक नहीं चल सकती। आज ये तो एक प्रचलन सा बनता जा रहा है कि नबालिग व निर्धन लड़कीयों को बहला फुसलाकर प्यार का झांसा देकर अपनी बासना की पूर्ती करने के बाद सारी जिंदगी दर-दर की ठोकरें खाने के लिए अकेला छोड़ दिया जाता है। कुल मिलाकर इस पब संस्कृति में अगर किसी का सबसे अधिक नुकशान है तो लड़कियों का । अतः महिलाओं की भलाई के लिए पब संस्कृति को जड़-मूल से समाप्त किया जाना अतयन्त आवश्यक है।इस संस्कृति का समर्थन सिर्फ वो लोग कर सकते हैं जो या तो ब्याभिचारी हैं या फिर नशेबाज। कौन नहीं जानता कि ये सेकुलरताबादी घर में अपनी पत्नी को प्रताड़ित करते हैं व पबों में जाकर गरीब लड़कीयों के शोषण की भूमिका त्यार करते हैं। कुल मिलाकर ये पब संस्कृति महिलाओं को कई तरह से नुकशान पहुंचाती है।
इसी सेकुलर सोच का गुलाम हर ब्यक्ति चाहता है कि उसकी महिला मित्र हो, जो हर जगह उसके साथ घूमे व विना शादी के उसकी बासना की पूर्ति करती रहे ।जरा इन सेकुलरताबादियों से पूछो कि क्या वो अपनी मां-बहन-बेटी-बहू या पत्नी को पुरूष मित्र के साथ वो सब करने की छूट देगें जो ये अपनी महिला मित्र के साथ करना चाहते हैं। सेकुलरता बादियों के बारे में तो बो ही बता सकते हैं पर अधिकतर भारतीय ऐसा करना तो दूर सोचना भी पाप मानते हैं। फिर महिला मित्र आयेगी कहां से क्योंकि कोई भी लड़की या महिला किसी न किसी की तो मां-बहन-बेटी-बहू या पत्नी होगी। कुल मिलाकर इस सोच का समर्थन सिर्फ पशुतुल्य जीबन के शौकीन ही कर सकते हैं मानवजीबन में विश्वास करने बाले भारतीय नहीं।
इन तथाकथकथित सेकुलरों को ये समझना चाहिए कि निजी जीबन में कौन क्या पहन रहा है इससे हमारा कोई बास्ता नहीं लेकिन जब समाज की बात आती है तो हर किसी को सामाजिक मर्यादायों का पालन करना चाहिए।जो सामाजिक मर्यादाओं का पालन नहीं कर सकते उन्हें उन देशों में चले जाना चाहिए जहां मानव मूल्यों की जगह पशु मूल्यों ने ले ली है।क्योंकि जिस तरह ये सेकुलर गिरोह लगातार मानव मूल्यों का विरोध कर पशु संस्कृति का निर्माण करने पर जोर दे रहा है वो आगे चल कर मानव जीवन को ही खतरे में डाल सकती है।
मानव जीवन की सबसे बड़ी खासियत है आने बाली पीड़ी को सभ्य संस्कार व अचार व्यवहार का पालन करने के लिए प्रेरित करना। बच्चों के लिए एक ऐसा बाताबरण देना जिसमें उनका चहुंमुखी विकास समभव हो सके। इस चहुंमुखी विकास का सबसे बड़ा अधार उपलब्ध करबाते हैं बच्चों के माता-पिता ।
ये सेकुलरतावादी जिस तरह से माता-पिता के अधिकारों पर बार-बार सवाल उठाकर बच्चों को माता-पिता पर विश्वास न करने के लिए उकसा रहे हैं । माता-पिता को बच्चों के शत्रु के रूप में प्रस्तुत करने का षडयन्त्र रच रहें। माता-पिता की छवी को लगातार खराब करने का दुस्साहस कर रहे हैं। इनका ये षडयन्त्र पूरे मानव जीबन को खतरे में डाल देगा।क्योंकि अगर बच्चों का माता-पिता के उपर ही भरोसा न रहेगा तो फिर बो किसी पर भी भरोसा नहीं करेंगे। परिणामस्वरूप बच्चे किसी की बात नहीं मानेंगे और अपना बंटाधार कर लेंगे।
भारतीय समाज में जिस विषय पर इन सेकुलरताबादियों ने सबसे बड़ा बखेड़ा खड़ा किया है वो है वासनापूर्ति करने के तरीकों पर भारतीय समाज द्वारा बनाय गए मर्यादित नियम।इस विषय पर आगे बढ़ने से पहले प्रेम और ब्याभिचार में अन्तर करना परमावस्यक है।
प्यार मानव के लिए भगवान द्वारा दिया गया सबसे बड़ा बरदान है ।प्यार के विना किसी भी रिस्ते की कल्पना करना अस्मभव है। अगर हम ये कहें कि प्यार के विना मानव जीबन की कल्पना भी नहीं की जा सकती तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। प्यार ही वो सूत्र है जिसने सदियों से भारतीय समाज को मुस्लिमों और ईसाईयों के हिंसक हमलों के बाबजूद शांति के मार्ग से भटकने नहीं दिया है। ये प्यार और आस्था ही है जो आज भी हिन्दु समाज को भौतिकबाद व बजारू सोच से बचाकर सुखमय और प्रेममय जीबन जीने को प्रेरित कर रही है। भारतीय जीबन पद्धति में माता-पिता-पुत्र-पुत्री जैसे सब रिस्तों का अधार ही प्यार है।
सेकुलर सोच ने सैक्स को प्यार का नाम देकर प्यार के महत्व को जो ठेश पहुंचाई है उसे शब्दों में ब्यक्त करना अस्मभव नहीं तो कम से कम मुस्किल जरूर है।सैक्स विल्कुल ब्यक्तिगत विषय है लेकिन सेकुरतावादियों ने सैक्स का ही बजारीकरण कर दिया ।सैक्स को भारत में सैक्स के नाम से बेचना मुश्किल था इसलिए इन दुष्टों ने सैक्स को प्यार का नाम देकर बेचने का षडयन्त्र रचा ।परिणामस्वरूप ये सैक्स बेचने में तो कामयाब हो गए लेकिन इनके कुकर्मों ने अलौकिकता के प्रतीक प्रेम को बदनाम कर दिया।
अगर आप ध्यान से इन सेकुसरतावादियों के क्रियाकलाप को देखें तो ऐसा प्रतीत होता है कि ये दुष्ट मनुष्य को विलकुल बैसे ही खुलमखुला सैक्स करते देखना चाहते हैं जैसे पशुओं को करते देखा जा सकता है मतलब कुलमिलाकर ये मनब को पशु बनाकर ही दम लेंगे। लेकिन हम दाबे के साथ कह सकते हैं कि भारतीय समाज ऐसी पशुप्रवृति की पैरवी करने बाले दुष्टों को न कभी स्वीकार करेगा न इनके षडयन्त्रों को सफल होने देगा।
ये सेकुलतावादी कहते हैं कि सैक्स करेंगे, लेकिन जिसके साथ सैक्स करेंगे जरूरी नहीं उसी से सादी भी की जाए।बस यही है समस्या की जड़ ।ये अपनी बासना की पूर्ति को प्यार का नाम देते हैं और जिससे ये प्यार करते हैं उसके साथ जीवन जीने से मना कर देते हैं। कौन नहीं जानता कि मानव जिससे प्यार करता है उसके साथ वो हरपल रहना चाहता है और जिसके साथ वो हर पल रहना चाहता है उसके साथ जीवन भर रहने में आपति क्यों ? अब आप खुद सोचो कि जो लोग प्यार करने का दावा कर रहे हैं क्या वो वाक्य ही प्यार कर रहे हैं या अपनी बासना की पूर्ति करने के लिए प्यार के नाम का सहारा ले रहे हैं !
अब आप सोचेंगे कि वो प्यार कर रहे हैं या सैक्स, हमें क्या समस्या है, हमें कोई समस्या नहीं। लेकिन समस्या तब हो रही है जब समाचार चैनलों पर समाचारों की जगह ब्यभिचार परोसा जा रहा है। कला और संस्कृति के प्रचार-प्रसार के नाम पर चल रही फिल्मी दुनिया में भी जमकर पशुप्रवृति को परोसा जा रहा है। सामाजिक नियमों का पालन करने बालों के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग किया जा रहा है । पशु-तुल्य कर्म करने बालों और ऐसे कर्म का समर्थन करने बालों को आदर्श के रूप में पेश करने की कोशिश की जा रही है।
एक साधारण सी बात यह है कि बच्चे का जन्म होने के बाद के 25 वर्ष तक बच्चे का शारीरिक व बौद्धिक विकाश होता है ये भारतीय जीवन दर्शन का आधारभूत पहलू रहा है अब तो विज्ञान ने भी इस बात को स्वीकार कर लिया है कि मानव के शारीरिक विकाश को 22 वर्ष लगते हैं ।जिन अंगो का विकाश 22 वर्ष की आयु में पूरा होता है उन्हें ताकतबर होने के लिए अगर अगले तीन वर्ष का समय और दे दिया जाए तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। कुलमिलाकर भारतीय दर्शनशास्त्र व विज्ञान दोनों ही ये स्वीकार करते हैं कि 25 वर्ष की आयु तक मानव शरीर का विकाश पूरा होता है।मानव जीवन के पहले 25 वर्ष मानव को शारीरिक विकाश व ज्ञानार्जन के साथ-साथ अपनी सारी जिन्दगी सुखचैन से जीने के लिए दो वक्त की रोटी का प्रबन्ध करना होता है।
अब ये सेकुलर गिरोह क्या चाह रहा है कि बच्चा पढ़ाई-लिखाई शारीरिक विकाश व दो वक्त की रोटी का प्रबन्ध करने के प्रयत्न छोड़ कर इनके बताए रास्ते पर चलते हुए सिर्फ सैक्स पर अपना सारा ध्यान केन्द्रित करे। अब इस मूर्खों के सेकुलर गिरोह को कौन समझाए कि अगर बच्चा 25 वर्ष तक सैक्स न भी करे तो भी अगले 25 वर्ष सैक्स करने के लिए काफी हैं लेकिन अगर इन 25 वर्षो में यदि वो पढ़ाई-लिखाई,प्रशिक्षण न करे तो अगले 25 बर्षों में ये सब सम्भव नहीं। कुल मिलाकर हम कह सकते हैं कि बच्चे को चाहिए कि वो शुरू के 25 वर्षों में सैक्स वगैरह के सब टांटे छोड़कर सिर्फ अपने कैरियर पर ध्यान केन्द्रित करे ताकि आने वाली जिन्दगी के 25 वर्षों में वो आन्नद से जी सके।रही बात इन सेकुलरतावादियों की तो ये सेकुलरतावादी पिछले जमाने के राक्षसों का आधुनिक नाम है इनसे सचेत रहना अतिआवश्यक है क्योंकि मानव को सदमार्ग से भटकाना ही इन राक्षसों का मूल उद्देश्य था है और रहेगा।
एक तरफ ये सेकुलरतावादी मानव को खुले सैक्स के सिए उकसा रहे हैं दूसरी तरफ लोगों द्वारा अपनी बहुमूल्य कमाई से टैक्स में दिए गय धन में से ऐडस रोकने के नाम पर अरबों रूपय खर्च कर रहे हैं ।अब इनको कौन समझाये कि लोगों को भारतीय जीवन मूल्य अपनाने के लिए प्रेरित करने व भारतीय जीवन मूल्यों का प्रचार-प्रसार ही सैक्स सबन्धी संक्रामक रोगों का सुक्ष्म, सरल व विश्वसनीय उपाय है। वैसे भी ऐडस जैसी वीमारी का विकास ही इन सेकुलरतावादियों द्वारा जानवरों से सैक्स करने के परिणामस्वरूप हुआ है।अरे मूर्खो मानवता को इतना भयानक रोग देने के बाद भी तुम लोग पागलों की तरह खुले सैक्स की बात कर रहे हो।
अभी ऐडस का कोई विश्वसनीय उपाय मानव ढूंढ नहीं पाया है और इन सेकुलरतावादियों ने ऐडस के खुले प्रसार के लिए होमोसैक्स की बात करना शुरू कर दिया है। हम मानते हैं कि होमोसैक्स मानसिक रोग है और ऐसे रोगियों को दवाई व मनोविज्ञानिक उचार की अत्यन्त आवश्यकता है ये कहते हैं कि होमोसैक्स सेकुलरता वादियों की जरूरत है व मनोविज्ञानिक वीमारी नहीं है।इनका कहना है कि होमोसैकस भी सैक्स की तरह ही प्राकृतिक है।हम इनको बताना चाहते हैं कि सैक्स का मूल उद्देश्य प्रजनन है जिसका एकमात्र रास्ता है पति-पत्नी के बीच सैक्स सबन्ध । अगर होमोसैक्स प्राकृतिक है तो ये सेकुलरताबादी होमोसैक्स से बच्चा पैदा करके दिखा दें हम भी मान लेंगे कि जो ये मूर्ख कह रहे हैं वो सत्य है।परन्तु सच्चाई यही है कि होमोसैक्स मनोवैज्ञानिक विमारी है इसके रोगियों को उपचार उपलब्ध करवाकर प्राकृतिक जीवन जीने के लिए प्रेरित करना ही हमारा कर्तब्य है न कि होमोसैक्स का समर्थन कर उसे बढ़ाबा देना।
बास्तब में सेकुलरताबादी गिरोह हर वक्त अपना सारा ध्यान मानवमूल्यों को तोड़ने पर इसलिए भी केन्द्रित करते हैं क्योंकि ये मनोरोगों के शिकार हो चुके हैं ।जब इनका सामना आम सभ्य इनसान से होता है तो इनके अन्दर हीन भावना पैदा होती है। इस हीन भाबना से मुक्ति पाने के लिए ये सारे समाज को ही कटघरे में खड़ा करने का असम्भव प्रयास करते हैं। अपनी मनोवैज्ञानिक विमारियों का प्रचार-प्रसार कर अपने जैसे मानसिक रोगियों की संख्याबढ़ाकर अपने नये शिकार तयार करते हैं कुलमिलाकर हम कहसकते हैं कि सेकुलरताबादी वो दुष्ट हैं जिनका शरीर देखने में तो मानव जैसा दिखता है पर इनका दिमाग राक्षसों की तरह काम करता है ।क्योंकि वेसमझ से वेसमझ व्यक्ति भी इस बात को अच्छी तरह जानता है कि कहीं अज्ञानबश या धोखे से भी हम किसी बुरी आदत का शिकार हो जांयें तो हमें इस वुरी आदत को अपने आप समाप्त करने का प्रयत्न करना चाहिए ।अगर हम इस बुरी आदत को समाप्त न भी कर पांयें ते हमें कम से कम इसका प्रचार-प्रसार नहीं करना चाहिए।
भारत गांवों में बसता है यहां हर जगह पुलिस उपलब्ध करबाना किसी के बस की बात नहीं।अभी तो इन सेकुलरताबादियों का असर कुछ गिने-चुने सहरी क्षेत्रों में ही हुआ है जहां से हर रोज बालात्कार ,छेड़-छाड़,आत्महत्या व सैक्स के लिए घरबार,मां-बाप,पति-पत्नी सब छोड़कर भागने के समाचार आम बात हो गई है। ये सेकुलर सोच अभी कुछ क्षेत्रों तक सीमित होने के बाबजूद न जाने कितने घर उजाड़ चुकी है कितने कत्ल करवा चुकी है कितने ही बच्चों को तवाह और बर्वाद कर चुकी है लाखों बच्चे इस सेकुलर सोच का शिकार होकर नशे के आदी होकर अपने निजी जीवन व परिवार की खुशियों को आग लगा चुके हैं। कुछ पल के लिए कल्पना करो कि ये सेकुलर सोच अगर सारे भारत में फैल जाए तो हिंसा, नसा और ब्याभिचार किस हद तक बढ़ जायेगा।
परिणामस्वरूप न मानव बचेगा न मानव जीवन, चारों तरफ सिर्फ राक्षस नजर आयेंगे। हर तरफ हिंसा का बोलबाला होगा ।मां-बहन-बेटी नाम का कोई रिस्ता न बचेगा।हर गली, हर मुहल्ला , हर घर वेश्यवृति का अड्डा नजर आयगा।जिस तरह हम आज गली, मुहले,चौराहे पर कुतों को सैक्स करते देखते हैं इसी तरह ये सेकुलरताबादी हर गली मुहले चौराहे पर खुलम-खुला सैक्स करते नजर आयेंगे। पाठशालाओं में मानव मूल्यों की जगह सैक्स के शूत्र पढ़ाये जायेंगे।अध्यापक इन शूत्रों के परैक्टीकल करबाते हुए ब्यस्त नजर आयेंगे। न कोई माता नकोई पिता नकोई बच्चा न कोई धर्म सब एक समान एक जैसे सब के सब धर्मनिर्पेक्ष बोले तो राक्षस। जब शरीर सैक्स करने में असमर्थ होगा तो ये नशा कर सैक्स करने की कोशिश करेंगे ।धीरे-धीरे ये नशे के आदी हो जायेंगे ।नशे के लिए पैसा जुटाने के लिए एक दूसरे का खून करेंगे।मां-बहन-बेटी को बेचेंगे।सब रिस्ते टूटेंगे। जब नशे के बाबजूद ये नपुंसक हो जायेंगे तो फिर ये अपने सहयोगी पर तेजाब डालकर उसे जलाते नजर आयेंगे।अंत में ये जिन्दगी से हताश होकर आत्महत्या का मार्ग अपनायेंगे।
हम तो बस इतना ही कहेंगे कि इन सैकुलतावादियों को रोकना अत्यन्त आवश्यक है।अगर इन्हें आज न रोका गया तो इतिहास हमें कभी माफ नहीं करेगा क्योंकि ये किसी भी रूप में तालिवानों से अधिक खतरनाक हैं और तालिबान का ही बदला हुआ स्वरूप हैं। अभी इनकी ताकत कम है इसलिए ये फिल्मों,धाराबाहिकों ,समाचारपत्रों व समाचार चैनलों के माध्यम से अपनी सोच का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं।कल यदि इनकी शंख्या बढ़ गयी तो यो लोग सभ्य समाज को तहस-नहस कर देंगे।
सेकुलरतावादियों की इस पाश्विक सोच का सबसे बुरा असर गरीबों व निम्न मध्य बर्ग के बच्चों पर पड़ रहा है।ये बच्चे ऐसे परिबारों से सबन्ध रखते हैं जो दो बक्त की रोटी के लिए मोहताज हैं। इन सेकुलरताबादियों के दुस्प्रचार का शिकार होकर ये बच्चे अपनी आजीविका का प्रबन्ध करने के प्रयत्न करने के बजाय सैक्स व नशा करने के लिए दर-दर की ठोकरें खाते नजर आते हैं।
सेकुलरताबादियों की ये भ्रमित सोच न इन बच्चों का ध्यान पढ़ाई में लगने देती है न किसी काम धन्धे में।न इन बच्चों को अपने मां-बाप की समाजिक स्थिति की चिन्ता होती है न आर्थिक स्थिति की। क्योंकि माता-पिता अपने बच्चों को बुरी आदतों से दूर रखने के लिए डांट-फटकार से लेकर पिटाई तक हर तरह के प्रयत्न करते हैं इसलिए इन बच्चों को सेकुलरताबादियों के बताए अनुसार अपने शत्रु नजर आते हैं।
ये बच्चे इस दुस्प्रचार का शिकार होकर अपने माता-पिता से दूर होते चले जाते हैं।ये बच्चे जाने-अनजाने नशा माफियों के चुंगल में फंस जाते हैं क्योंकि ये नशामाफिया इन बच्चों को न केबल नशा उपलब्ध करबाता है बल्कि सेकुलरताबादी विचारों का प्रयोग कर ये समझाने में भी कामयाब हो जाता है कि नशा और ब्यभिचार ही जिन्दगी के असली मायने हैं।
जब तक इन बच्चों को ये समझ आता है कि ये आधुनिकता के चक्कर में पढ़कर अपना जीबन तबाह कर रहे हैं तब तक इन बच्चों के पास बचाने के लिए बचा ही कुछ नहीं होता है।लड़कियां कोठे पर पहुंचाई जा चुकी होती हैं व लड़के नशेबाज बन चुके होते हैं कमोबेश मजबूरी में यही इनकी नियती बन जाती है।
फिर ये बच्चे कभी सरकार को कोशते नजर आते हैं तो कभी समाज तो कभी माता-पिता को। परन्तु बास्तब में अपनी बरबादी के लिए ये बच्चे खुद ही जिम्मेबार होते हैं क्योंकि सीधे या टैलीविजन व पत्रिकाओं के माध्यम से सेकुलरताबादियों की फूड़ सोच को अपनाकर अपनी जिन्दगी का बेड़ागर्क ये बच्चे अपने आप करते हैं।
आगे चलकर यही बच्चे सेकुलरताबादी,नक्सलबादी व माओबादी बनते हैं । यही बच्चे इन सेकुलरताबादियों का थिंकटैंक बनते हैं । यही बच्चे फिर समाचार चैनलों में बैठकर माता-पिता जैसे पबित्र रिस्तों को बदनाम करते नजर आते हैं।अब आप खुद समझ सकते हैं कि क्यों ये सेकुलरताबादी हर वक्त देश-समाज,मां-बाप व भारतीय संस्कृति को कोशते नजर आते हैं।
हमारे विचार में मानव और पशु के बीच सबसे बड़ा अन्तर यह है कि मानव समाज में रहता है और सामाजिक नियमों का पालन करता है जबकि पशु के लिए सामाजिक नियम कोई माइने नहीं रखते ।
क्योंकि मानव समाज में रहता है इसलिए सामाजिक नियमों का पालन करते हुए जीवन यापन करना मानव की सबसे बड़ी विशेषता है ।
प्रश्न पैदा होता है कि सामाजिक नियम क्या हैं ? ये नियम कौन बनाता है ? क्यों बनाता है?
सामाजिक नियम वह कानून हैं जो समाज अपने नागरिकों के सफल जीवनयापन के लिए स्वयं तय करता है। ये कानून मानव के लिए वे मूल्य निर्धारित करते हैं जो मानव को व्यवस्थित व मर्यादित जीवन जीने का स्वाभाविक वातावरण उपलब्ध करवाते हैं । ये सामाजिक नियम मनुष्य को शोषण से बचाते हुए सभ्य जीवन जीने का अवसर प्रदान करते हैं। कोई भी समाज तब तक प्रगति नहीं कर सकता जब तक वह व्यवस्थित न हो । वेशक इन सामाजिक नियमों का पालन करने के लिए मनुष्य को व्यक्तिगत आज़ादी त्याग कर समाज द्वारा निर्धारित अचार संहिता का पालन करना पड़ता है । कई बार तो यह अचार संहिता मानव के जीवन को इस हद तक प्रभावित करती है कि मानव इससे पलायन करने की कुचेष्ठा कर बैठता है । अगर ये कुचेष्ठा बड़े स्तर पर हो तो यह एक नई सामाजिक व्यवस्था को जन्म दे सकती है लेकिन इस नई व्यवस्था में भी नये सामाजिक नियम मानव जीवन को नियन्त्रित करते हैं । यहां बेशक पहले की तुलना में कम बन्धन होते हैं लेकिन इन बन्धनों के विना समाज नहीं बन सकता। क्योंकि बिना सामाजिक नियमों के चलने वाला समूह भीड़ तो बना सकता है पर समाज नहीं। समाज ही तो मानव को पशुओं से अलग करता है। कुल मिलाकर हम कह सकते हैं कि सामाजिक नियम मानव जीवन का वो गहना है जिसका त्याग करने पर मानव जीवन के अस्तित्व की कल्पना भी नहीं की जा सकती ।
अगर हम मानव इतिहास पर नजर दौड़ायें तो संसार में प्रमुख रूप से तीन समाजों का प्रभुत्व नजर आता है परन्तु ये तीनों समाज एक ही समाज से निकले हुए प्रतीत होते हैं। हिन्दु समाज संसार का प्राचीनतम व सभ्यतम् समाज है । इसाई समाज दूसरे व मुस्लिम समाज तीसरे नम्बर पर नजर आता है।
आज से लगभग 2000 वर्ष पहले न ईसाईयत थी न इस्लाम था सिर्फ हिन्दुत्व था । साधारण हिन्दु राजा विक्रमादित्य व अशोक महान लगभग 2050 वर्ष पहले हुए जबकि ईसाईयों के धार्मिक गुरू ईशु भी उस वक्त पैदा नहीं हुए थे । उस वक्त ईस्लाम के होने का तो प्रश्न ही पैदा नहीं होता क्योंकि इस्लाम तो आज से लगभग 1500 वर्ष पहले अस्तित्व में आया । भगवान श्रीकृष्ण जी का अबतार आज से लगभग 5000 वर्ष पहले हुआ । भगवान श्री राम, ब्रहमा-विष्णु-महेश जी के अबतार के समय के बारे में पता लगाना वर्तमान मानव के बश की बात ही नहीं है।
श्रृष्टि के निर्माण से लेकर आज तक एक विचार जो निरंतर चलता आ रहा है उसी का नाम सनातन है। यही सनातन मानव जीवन को सुखद व द्वेशमुक्त करता रहता है। यही वो सनातन है जिसके अपने आंचल से निकली ईसाईयत व इसलाम ने ही सनातन को समाप्त करने के लिए अनगिनत प्रयास किए लेकिन इनका कोई प्रयास सनातन की सात्विक व परोपकारी प्रवृत्ति के परिणामस्वरूप सफल न हो पाया। हजारों बर्षों के बर्बर हमलों व षडयन्त्रों के बाबजूद आज भी ऐसा प्रतीत होता है कि सनातन से निकले ईसाईयत व ईसलाम वापस सनातन में समाने को आतुर हैं ।
सनातन का ही सुसंगठित स्वरूप हिन्दुत्व है हिन्दुत्व ही आज भारत में सब लोगों को शांति और भाईचारे से जीने का रास्ता दिखा रहा है। ईसाईयत और ईसलाम की सम्राज्यबादी हमलाबर सोच के परिणामस्वरूप हिन्दुत्व का भी सैनिकीकरण करने की जरूरत महसूस की जाने लगी है और कुछ हद तक हिन्दुत्व का सैनिकीकरण हो भी चुका है। साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर व लेफ्टीनेंट कर्नल जैसे क्रांतिकारी इसी सैनिकीकरण की उपज हैं।
अगर ईसाईयत और ईस्लाम का भरतीय संस्कृति और सभ्यता पर हमला इसी तरह जारी रहा तो हो सकता है हिन्दुत्व को कुछ समय के लिए अपनी सर्वधर्मसम्भाव की प्रवृति से उस समय तक समझौता करना पड़े जब तक इन हमलाबारों का ऋषियों मुनियों की पुण्यभूमि भारत से समूल नाश न कर दिया जाए। बेशक उदारता व शांति ही हिन्दुत्व के आधारस्तम्भ हैं लेकिन जब हिन्दुत्व ही न बचेगा तो ये सब चीजें बेमानी हो जायेंगी। अतः सर्वधर्मसम्भाव, उदारता व शांति को बनाए रखने के लिए हिन्दुत्व का बचाब अत्यन्त आवश्यक है।
अपने इस उदेश्य की पूर्ति के लिए अगर कुछ समय तक हिन्दुत्व के इन आधार स्तम्भों से समझौता कर इन आक्रमणकारियों के हमलों का इन्हीं की भाषा में उतर देकर मानवता की रक्षा की खातिर हिन्दुत्व के सैनिकीकरण को बढ़ाबा देकर भारतीय सभ्यता और संस्कृति की रक्षा की जा सके तो इस में बुराई भी क्या है ?
जो हिन्दु हिन्दुत्व के सैनिकीकरण की अबधारणा से सहमत नहीं हैं उन्हें जरा भारत के मानचित्र को सामने रखकर यह विचार करना चाहिए कि जिन हिस्सों में हिन्दुओं की जनसंख्या कम होती जा रही है वो हिस्से आतंकवाद,हिंसा और दंगों के शिकार क्यों हैं ? जहां हिन्दुओं की जनसंख्या निर्णायक स्थिति में है वहां कयों दंगा नहीं होता ? कयों हिंसा नहीं होती ? कयों सर्वधर्मसम्भाव वना रहता है ?क्यों मुसलमान परिवार नियोजन, वन्देमातरम् का विरोध करते हैं ? क्यों ईसाई हर तरह के विघटनकारी मार्ग अपनाकर धर्मांतरण पर जोर देते हैं ?
ये सब ऐसे प्रश्न हैं जिनका सरल और सपष्ट उतर यह है कि ईसायत और ईस्लाम राजनीतिक विचारधारायें हैं न कि धार्मिक । इन दोनों विचारधाराओं का एकमात्र मकसद अपनी राजनीतिक सोच का प्रचार-प्रसार है न कि मानवता की भलाई। अपनी विचारधारा के प्रचार प्रसार के लिए ये दोनों किसी भी हद तक गिर सकते है ।इस्लाम का प्रमुख हथियार है हिंसा और ईसाईयत का प्रमुख हथियार है छल कपट और हिंसा। दूसरी तरफ हिन्दुत्व एक जीबन पद्धति है जिसका प्रमुख हथियार है सरवधर्मसम्भाव। हिन्दुत्व का एकमात्र उदेश्य मानवजीबन को लोभ-लालच, राग-द्वेश, बाजारबाद से दूर रख कर आत्मबल के सहारे शुख-शांति, भाईचारे के मार्ग पर आगे बढ़ाना है।
इतिहास इस बात का साक्षी है कि हिन्दुत्व के प्रचार-प्रसार के लिए कभी किसी पर हमला नहीं किया गया पर ये भी उतना ही सत्य है कि जिसने भी मानव मूल्यों को खतरे मे डाला है उसको कभी बख्शा भी नहीं गया है चाहे बो किसी भी संप्रदाय से सबन्ध रखता हो।
आज भारत में ईसाई व मुसलिम आतंकवादियों की समर्थक सेकुलर सोच ने भारत के समक्ष एक नई चुनौती पैदा की है। ब्यापारबाद से प्रभावित इस सेकुलर सोच का एकमात्र उदेश्य मानव मुल्यों को नष्ट कर एक ऐसा समाज निर्मित करना है जो अचार व्यबहार में पशुतुल्य हो।
आओ जरा इस सेकुलर सोच के विचार का विशलेशण करें कि ये सेकुलरवादी जिस व्यवस्था की बकालत कर रहे हैं वो मानव जीवन को खतरे में डालती है या फिर मानव मुल्यों को बढ़ाबा देती है।
सेकुलर सोच को मानने बाले अपने आप को माडर्न कहते हैं।अपने माडर्न होने की सबसे बड़ी पहचान बताते हैं कम से कम कपड़े पहनना।इन्हें कपड़े न डालने में भी कोई बुराई नहीं दिखती। कुल मिलाकर ये कहते हैं कि जो जितने कम कपड़े पहनता है बो उतना अधिक माडर्न है। अब जरा बिचार करो कि क्या हमारे पशु कपड़े पहनते हैं ? नहीं न । हम कह सकते हैं कि अगर कपड़े न पहनना आधुनिकता है फिर तो हमारे पशु सबसे अधिक माडर्न है ! कुल मिलाकर ये सेकुलरताबादी मानव को पशु बनाने पर उतारू हैं क्योंकि समाज में कपड़े पहन कर विचरण करना मानव की पहचान है और नंगे रहना पशु की। ये सेकुलरतावादी जिस तरह नंगेपन को बढ़ाबा दे रहे हैं उससे से तो यही प्रतीत होता है कि इन्हें पशुतुल्य जीबन जीने में ज्यादा रूची है बजाय मानव जीबन जीने के ।
रह-रहकर एक विषय जो इन सेकुलरतावादियों ने बार-बार उठाया है वो है एक ही गोत्र या एक ही गांव में शादी की नई परंम्परा स्थापित करना। जो भी भारत से परिचित है वो ये अच्छी तरह जानता है कि भारत गांव में बसता है। गांव में बसने बाले भारत के अपने रिति-रिबाज है अपनी परम्परांयें हैं अधिकतर परम्परांयें वैज्ञानिक व तर्कसंगत है । इन्ही परम्परांओं में से एक परंम्परा है एक ही गांव या गोत्र में शादी न करने की। आज विज्ञान भी इस निषकर्श पर पहुंचा है कि मानव अपनी नजदीकी रिस्तेदारी में शादी न करे तो बच्चे स्वस्थ और बुद्धिमान पैदा होंगे । हमारे ऋषियों-मुनियों या यूं कह लो पूर्बजों ने भी सात पीड़ियों तक एक गोत्र में शादी न करने का नियम बनाया जो कि मानव जीबन के हित में है व तर्कसंगत है।अगर गांव बाले इस नियम को मानने पर जोर देते हैं तो इन सेकुलरताबादियों के पेट में दर्द कयों पड़ता है ? वैसे भी ये होते कौन हैं समाज द्वारा अपने सदस्यों की भलाई के लिए बनाय गए नियमों का विरोध करने बाले। वैसे भी लोकतन्त्र का तकाजा यही है कि जिसके साथ बहुमत है वही सत्य है।
इन सेकुलरतावादियों की जानकारी के लिए हम बता दें कि अधिकतर गांव में, गांव का हर लड़का गांव की हर लड़की को बहन की तरह मानता है। मां-बहन, बाप-बेटी के रिस्तों की बजह से ही गांव की कोई भी लड़की या महिला अपने आप को असुरक्षित महसूस नहीं करती है।आजादी से जीबन जीने में समर्थ होती है कहीं भी आ-जा सकती है खेल सकती है। हो सकता है ये भाई बहन की बात सेकुलरता बादियों को समझ न आये। बैसे भी अगर आप पशुओं के किसी गांव में चले जांयें ओर उन्हें ये बात समझायें तो उनको भी ये बात समझ नहीं आयेगी। क्योंकि ये भाई-बहन का रिस्ता सिर्फ मानव जीबन का अमुल्य गहना है न कि पशुओं के जीबन का ।
अभी हाल ही में पब संस्कृति की बात चली तो भी इस सेकुलर गिरोह ने ब्यभिचार और नशेबाजी के अड्डे बन चुके पबों का विरोध करने बालों का असंसदीय भाषा में विरोध किया। हम ये जानना चाहते हैं कि पबों में ऐसा क्या है जो उनका समर्थन किया जाये। कौन माता-पिता चांहेंगे कि उनके बच्चे नशा करें व शादी से पहले गैरों के साथ एसी जगहों पर जांयें जो कि ब्याभिचार के लिए बदनाम हो चुकी हैं।बैसे भी यह बात किसी से छुपी हुई नहीं है कि भारत में इस पब संस्कृति के पांब पसार लेने के बाद भारत का हाल भी उस अमेरिका की तरह होगा जहां लगभग हर स्कूल के बाहर प्रसूती गृह की जरूरत पड़ती है। कौन नहीं जानता कि बच्चा गिराने की प्रक्रिया में सबसे ज्यादा नुकशान लड़की को ही उठाना पड़ता है। फिर पब संस्कृति के विरोधियों को महिलाविरोधी प्रचारित करना कहां तक ठीक है । लेकिन इन सेकुलरतावादियों की पशुतुल्य सोच इस बात को अच्छी तरह समझती है कि भारतीय संस्कृति को नष्ट किए बिना इनकी दुकान लम्बे समय तक नहीं चल सकती। आज ये तो एक प्रचलन सा बनता जा रहा है कि नबालिग व निर्धन लड़कीयों को बहला फुसलाकर प्यार का झांसा देकर अपनी बासना की पूर्ती करने के बाद सारी जिंदगी दर-दर की ठोकरें खाने के लिए अकेला छोड़ दिया जाता है। कुल मिलाकर इस पब संस्कृति में अगर किसी का सबसे अधिक नुकशान है तो लड़कियों का । अतः महिलाओं की भलाई के लिए पब संस्कृति को जड़-मूल से समाप्त किया जाना अतयन्त आवश्यक है।इस संस्कृति का समर्थन सिर्फ वो लोग कर सकते हैं जो या तो ब्याभिचारी हैं या फिर नशेबाज। कौन नहीं जानता कि ये सेकुलरताबादी घर में अपनी पत्नी को प्रताड़ित करते हैं व पबों में जाकर गरीब लड़कीयों के शोषण की भूमिका त्यार करते हैं। कुल मिलाकर ये पब संस्कृति महिलाओं को कई तरह से नुकशान पहुंचाती है।
इसी सेकुलर सोच का गुलाम हर ब्यक्ति चाहता है कि उसकी महिला मित्र हो, जो हर जगह उसके साथ घूमे व विना शादी के उसकी बासना की पूर्ति करती रहे ।जरा इन सेकुलरताबादियों से पूछो कि क्या वो अपनी मां-बहन-बेटी-बहू या पत्नी को पुरूष मित्र के साथ वो सब करने की छूट देगें जो ये अपनी महिला मित्र के साथ करना चाहते हैं। सेकुलरता बादियों के बारे में तो बो ही बता सकते हैं पर अधिकतर भारतीय ऐसा करना तो दूर सोचना भी पाप मानते हैं। फिर महिला मित्र आयेगी कहां से क्योंकि कोई भी लड़की या महिला किसी न किसी की तो मां-बहन-बेटी-बहू या पत्नी होगी। कुल मिलाकर इस सोच का समर्थन सिर्फ पशुतुल्य जीबन के शौकीन ही कर सकते हैं मानवजीबन में विश्वास करने बाले भारतीय नहीं।
इन तथाकथकथित सेकुलरों को ये समझना चाहिए कि निजी जीबन में कौन क्या पहन रहा है इससे हमारा कोई बास्ता नहीं लेकिन जब समाज की बात आती है तो हर किसी को सामाजिक मर्यादायों का पालन करना चाहिए।जो सामाजिक मर्यादाओं का पालन नहीं कर सकते उन्हें उन देशों में चले जाना चाहिए जहां मानव मूल्यों की जगह पशु मूल्यों ने ले ली है।क्योंकि जिस तरह ये सेकुलर गिरोह लगातार मानव मूल्यों का विरोध कर पशु संस्कृति का निर्माण करने पर जोर दे रहा है वो आगे चल कर मानव जीवन को ही खतरे में डाल सकती है।
मानव जीवन की सबसे बड़ी खासियत है आने बाली पीड़ी को सभ्य संस्कार व अचार व्यवहार का पालन करने के लिए प्रेरित करना। बच्चों के लिए एक ऐसा बाताबरण देना जिसमें उनका चहुंमुखी विकास समभव हो सके। इस चहुंमुखी विकास का सबसे बड़ा अधार उपलब्ध करबाते हैं बच्चों के माता-पिता ।
ये सेकुलरतावादी जिस तरह से माता-पिता के अधिकारों पर बार-बार सवाल उठाकर बच्चों को माता-पिता पर विश्वास न करने के लिए उकसा रहे हैं । माता-पिता को बच्चों के शत्रु के रूप में प्रस्तुत करने का षडयन्त्र रच रहें। माता-पिता की छवी को लगातार खराब करने का दुस्साहस कर रहे हैं। इनका ये षडयन्त्र पूरे मानव जीबन को खतरे में डाल देगा।क्योंकि अगर बच्चों का माता-पिता के उपर ही भरोसा न रहेगा तो फिर बो किसी पर भी भरोसा नहीं करेंगे। परिणामस्वरूप बच्चे किसी की बात नहीं मानेंगे और अपना बंटाधार कर लेंगे।
भारतीय समाज में जिस विषय पर इन सेकुलरताबादियों ने सबसे बड़ा बखेड़ा खड़ा किया है वो है वासनापूर्ति करने के तरीकों पर भारतीय समाज द्वारा बनाय गए मर्यादित नियम।इस विषय पर आगे बढ़ने से पहले प्रेम और ब्याभिचार में अन्तर करना परमावस्यक है।
प्यार मानव के लिए भगवान द्वारा दिया गया सबसे बड़ा बरदान है ।प्यार के विना किसी भी रिस्ते की कल्पना करना अस्मभव है। अगर हम ये कहें कि प्यार के विना मानव जीबन की कल्पना भी नहीं की जा सकती तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। प्यार ही वो सूत्र है जिसने सदियों से भारतीय समाज को मुस्लिमों और ईसाईयों के हिंसक हमलों के बाबजूद शांति के मार्ग से भटकने नहीं दिया है। ये प्यार और आस्था ही है जो आज भी हिन्दु समाज को भौतिकबाद व बजारू सोच से बचाकर सुखमय और प्रेममय जीबन जीने को प्रेरित कर रही है। भारतीय जीबन पद्धति में माता-पिता-पुत्र-पुत्री जैसे सब रिस्तों का अधार ही प्यार है।
सेकुलर सोच ने सैक्स को प्यार का नाम देकर प्यार के महत्व को जो ठेश पहुंचाई है उसे शब्दों में ब्यक्त करना अस्मभव नहीं तो कम से कम मुस्किल जरूर है।सैक्स विल्कुल ब्यक्तिगत विषय है लेकिन सेकुरतावादियों ने सैक्स का ही बजारीकरण कर दिया ।सैक्स को भारत में सैक्स के नाम से बेचना मुश्किल था इसलिए इन दुष्टों ने सैक्स को प्यार का नाम देकर बेचने का षडयन्त्र रचा ।परिणामस्वरूप ये सैक्स बेचने में तो कामयाब हो गए लेकिन इनके कुकर्मों ने अलौकिकता के प्रतीक प्रेम को बदनाम कर दिया।
अगर आप ध्यान से इन सेकुसरतावादियों के क्रियाकलाप को देखें तो ऐसा प्रतीत होता है कि ये दुष्ट मनुष्य को विलकुल बैसे ही खुलमखुला सैक्स करते देखना चाहते हैं जैसे पशुओं को करते देखा जा सकता है मतलब कुलमिलाकर ये मनब को पशु बनाकर ही दम लेंगे। लेकिन हम दाबे के साथ कह सकते हैं कि भारतीय समाज ऐसी पशुप्रवृति की पैरवी करने बाले दुष्टों को न कभी स्वीकार करेगा न इनके षडयन्त्रों को सफल होने देगा।
ये सेकुलतावादी कहते हैं कि सैक्स करेंगे, लेकिन जिसके साथ सैक्स करेंगे जरूरी नहीं उसी से सादी भी की जाए।बस यही है समस्या की जड़ ।ये अपनी बासना की पूर्ति को प्यार का नाम देते हैं और जिससे ये प्यार करते हैं उसके साथ जीवन जीने से मना कर देते हैं। कौन नहीं जानता कि मानव जिससे प्यार करता है उसके साथ वो हरपल रहना चाहता है और जिसके साथ वो हर पल रहना चाहता है उसके साथ जीवन भर रहने में आपति क्यों ? अब आप खुद सोचो कि जो लोग प्यार करने का दावा कर रहे हैं क्या वो वाक्य ही प्यार कर रहे हैं या अपनी बासना की पूर्ति करने के लिए प्यार के नाम का सहारा ले रहे हैं !
अब आप सोचेंगे कि वो प्यार कर रहे हैं या सैक्स, हमें क्या समस्या है, हमें कोई समस्या नहीं। लेकिन समस्या तब हो रही है जब समाचार चैनलों पर समाचारों की जगह ब्यभिचार परोसा जा रहा है। कला और संस्कृति के प्रचार-प्रसार के नाम पर चल रही फिल्मी दुनिया में भी जमकर पशुप्रवृति को परोसा जा रहा है। सामाजिक नियमों का पालन करने बालों के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग किया जा रहा है । पशु-तुल्य कर्म करने बालों और ऐसे कर्म का समर्थन करने बालों को आदर्श के रूप में पेश करने की कोशिश की जा रही है।
एक साधारण सी बात यह है कि बच्चे का जन्म होने के बाद के 25 वर्ष तक बच्चे का शारीरिक व बौद्धिक विकाश होता है ये भारतीय जीवन दर्शन का आधारभूत पहलू रहा है अब तो विज्ञान ने भी इस बात को स्वीकार कर लिया है कि मानव के शारीरिक विकाश को 22 वर्ष लगते हैं ।जिन अंगो का विकाश 22 वर्ष की आयु में पूरा होता है उन्हें ताकतबर होने के लिए अगर अगले तीन वर्ष का समय और दे दिया जाए तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। कुलमिलाकर भारतीय दर्शनशास्त्र व विज्ञान दोनों ही ये स्वीकार करते हैं कि 25 वर्ष की आयु तक मानव शरीर का विकाश पूरा होता है।मानव जीवन के पहले 25 वर्ष मानव को शारीरिक विकाश व ज्ञानार्जन के साथ-साथ अपनी सारी जिन्दगी सुखचैन से जीने के लिए दो वक्त की रोटी का प्रबन्ध करना होता है।
अब ये सेकुलर गिरोह क्या चाह रहा है कि बच्चा पढ़ाई-लिखाई शारीरिक विकाश व दो वक्त की रोटी का प्रबन्ध करने के प्रयत्न छोड़ कर इनके बताए रास्ते पर चलते हुए सिर्फ सैक्स पर अपना सारा ध्यान केन्द्रित करे। अब इस मूर्खों के सेकुलर गिरोह को कौन समझाए कि अगर बच्चा 25 वर्ष तक सैक्स न भी करे तो भी अगले 25 वर्ष सैक्स करने के लिए काफी हैं लेकिन अगर इन 25 वर्षो में यदि वो पढ़ाई-लिखाई,प्रशिक्षण न करे तो अगले 25 बर्षों में ये सब सम्भव नहीं। कुल मिलाकर हम कह सकते हैं कि बच्चे को चाहिए कि वो शुरू के 25 वर्षों में सैक्स वगैरह के सब टांटे छोड़कर सिर्फ अपने कैरियर पर ध्यान केन्द्रित करे ताकि आने वाली जिन्दगी के 25 वर्षों में वो आन्नद से जी सके।रही बात इन सेकुलरतावादियों की तो ये सेकुलरतावादी पिछले जमाने के राक्षसों का आधुनिक नाम है इनसे सचेत रहना अतिआवश्यक है क्योंकि मानव को सदमार्ग से भटकाना ही इन राक्षसों का मूल उद्देश्य था है और रहेगा।
एक तरफ ये सेकुलरतावादी मानव को खुले सैक्स के सिए उकसा रहे हैं दूसरी तरफ लोगों द्वारा अपनी बहुमूल्य कमाई से टैक्स में दिए गय धन में से ऐडस रोकने के नाम पर अरबों रूपय खर्च कर रहे हैं ।अब इनको कौन समझाये कि लोगों को भारतीय जीवन मूल्य अपनाने के लिए प्रेरित करने व भारतीय जीवन मूल्यों का प्रचार-प्रसार ही सैक्स सबन्धी संक्रामक रोगों का सुक्ष्म, सरल व विश्वसनीय उपाय है। वैसे भी ऐडस जैसी वीमारी का विकास ही इन सेकुलरतावादियों द्वारा जानवरों से सैक्स करने के परिणामस्वरूप हुआ है।अरे मूर्खो मानवता को इतना भयानक रोग देने के बाद भी तुम लोग पागलों की तरह खुले सैक्स की बात कर रहे हो।
अभी ऐडस का कोई विश्वसनीय उपाय मानव ढूंढ नहीं पाया है और इन सेकुलरतावादियों ने ऐडस के खुले प्रसार के लिए होमोसैक्स की बात करना शुरू कर दिया है। हम मानते हैं कि होमोसैक्स मानसिक रोग है और ऐसे रोगियों को दवाई व मनोविज्ञानिक उचार की अत्यन्त आवश्यकता है ये कहते हैं कि होमोसैक्स सेकुलरता वादियों की जरूरत है व मनोविज्ञानिक वीमारी नहीं है।इनका कहना है कि होमोसैकस भी सैक्स की तरह ही प्राकृतिक है।हम इनको बताना चाहते हैं कि सैक्स का मूल उद्देश्य प्रजनन है जिसका एकमात्र रास्ता है पति-पत्नी के बीच सैक्स सबन्ध । अगर होमोसैक्स प्राकृतिक है तो ये सेकुलरताबादी होमोसैक्स से बच्चा पैदा करके दिखा दें हम भी मान लेंगे कि जो ये मूर्ख कह रहे हैं वो सत्य है।परन्तु सच्चाई यही है कि होमोसैक्स मनोवैज्ञानिक विमारी है इसके रोगियों को उपचार उपलब्ध करवाकर प्राकृतिक जीवन जीने के लिए प्रेरित करना ही हमारा कर्तब्य है न कि होमोसैक्स का समर्थन कर उसे बढ़ाबा देना।
बास्तब में सेकुलरताबादी गिरोह हर वक्त अपना सारा ध्यान मानवमूल्यों को तोड़ने पर इसलिए भी केन्द्रित करते हैं क्योंकि ये मनोरोगों के शिकार हो चुके हैं ।जब इनका सामना आम सभ्य इनसान से होता है तो इनके अन्दर हीन भावना पैदा होती है। इस हीन भाबना से मुक्ति पाने के लिए ये सारे समाज को ही कटघरे में खड़ा करने का असम्भव प्रयास करते हैं। अपनी मनोवैज्ञानिक विमारियों का प्रचार-प्रसार कर अपने जैसे मानसिक रोगियों की संख्याबढ़ाकर अपने नये शिकार तयार करते हैं कुलमिलाकर हम कहसकते हैं कि सेकुलरताबादी वो दुष्ट हैं जिनका शरीर देखने में तो मानव जैसा दिखता है पर इनका दिमाग राक्षसों की तरह काम करता है ।क्योंकि वेसमझ से वेसमझ व्यक्ति भी इस बात को अच्छी तरह जानता है कि कहीं अज्ञानबश या धोखे से भी हम किसी बुरी आदत का शिकार हो जांयें तो हमें इस वुरी आदत को अपने आप समाप्त करने का प्रयत्न करना चाहिए ।अगर हम इस बुरी आदत को समाप्त न भी कर पांयें ते हमें कम से कम इसका प्रचार-प्रसार नहीं करना चाहिए।
भारत गांवों में बसता है यहां हर जगह पुलिस उपलब्ध करबाना किसी के बस की बात नहीं।अभी तो इन सेकुलरताबादियों का असर कुछ गिने-चुने सहरी क्षेत्रों में ही हुआ है जहां से हर रोज बालात्कार ,छेड़-छाड़,आत्महत्या व सैक्स के लिए घरबार,मां-बाप,पति-पत्नी सब छोड़कर भागने के समाचार आम बात हो गई है। ये सेकुलर सोच अभी कुछ क्षेत्रों तक सीमित होने के बाबजूद न जाने कितने घर उजाड़ चुकी है कितने कत्ल करवा चुकी है कितने ही बच्चों को तवाह और बर्वाद कर चुकी है लाखों बच्चे इस सेकुलर सोच का शिकार होकर नशे के आदी होकर अपने निजी जीवन व परिवार की खुशियों को आग लगा चुके हैं। कुछ पल के लिए कल्पना करो कि ये सेकुलर सोच अगर सारे भारत में फैल जाए तो हिंसा, नसा और ब्याभिचार किस हद तक बढ़ जायेगा।
परिणामस्वरूप न मानव बचेगा न मानव जीवन, चारों तरफ सिर्फ राक्षस नजर आयेंगे। हर तरफ हिंसा का बोलबाला होगा ।मां-बहन-बेटी नाम का कोई रिस्ता न बचेगा।हर गली, हर मुहल्ला , हर घर वेश्यवृति का अड्डा नजर आयगा।जिस तरह हम आज गली, मुहले,चौराहे पर कुतों को सैक्स करते देखते हैं इसी तरह ये सेकुलरताबादी हर गली मुहले चौराहे पर खुलम-खुला सैक्स करते नजर आयेंगे। पाठशालाओं में मानव मूल्यों की जगह सैक्स के शूत्र पढ़ाये जायेंगे।अध्यापक इन शूत्रों के परैक्टीकल करबाते हुए ब्यस्त नजर आयेंगे। न कोई माता नकोई पिता नकोई बच्चा न कोई धर्म सब एक समान एक जैसे सब के सब धर्मनिर्पेक्ष बोले तो राक्षस। जब शरीर सैक्स करने में असमर्थ होगा तो ये नशा कर सैक्स करने की कोशिश करेंगे ।धीरे-धीरे ये नशे के आदी हो जायेंगे ।नशे के लिए पैसा जुटाने के लिए एक दूसरे का खून करेंगे।मां-बहन-बेटी को बेचेंगे।सब रिस्ते टूटेंगे। जब नशे के बाबजूद ये नपुंसक हो जायेंगे तो फिर ये अपने सहयोगी पर तेजाब डालकर उसे जलाते नजर आयेंगे।अंत में ये जिन्दगी से हताश होकर आत्महत्या का मार्ग अपनायेंगे।
हम तो बस इतना ही कहेंगे कि इन सैकुलतावादियों को रोकना अत्यन्त आवश्यक है।अगर इन्हें आज न रोका गया तो इतिहास हमें कभी माफ नहीं करेगा क्योंकि ये किसी भी रूप में तालिवानों से अधिक खतरनाक हैं और तालिबान का ही बदला हुआ स्वरूप हैं। अभी इनकी ताकत कम है इसलिए ये फिल्मों,धाराबाहिकों ,समाचारपत्रों व समाचार चैनलों के माध्यम से अपनी सोच का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं।कल यदि इनकी शंख्या बढ़ गयी तो यो लोग सभ्य समाज को तहस-नहस कर देंगे।
सेकुलरतावादियों की इस पाश्विक सोच का सबसे बुरा असर गरीबों व निम्न मध्य बर्ग के बच्चों पर पड़ रहा है।ये बच्चे ऐसे परिबारों से सबन्ध रखते हैं जो दो बक्त की रोटी के लिए मोहताज हैं। इन सेकुलरताबादियों के दुस्प्रचार का शिकार होकर ये बच्चे अपनी आजीविका का प्रबन्ध करने के प्रयत्न करने के बजाय सैक्स व नशा करने के लिए दर-दर की ठोकरें खाते नजर आते हैं।
सेकुलरताबादियों की ये भ्रमित सोच न इन बच्चों का ध्यान पढ़ाई में लगने देती है न किसी काम धन्धे में।न इन बच्चों को अपने मां-बाप की समाजिक स्थिति की चिन्ता होती है न आर्थिक स्थिति की। क्योंकि माता-पिता अपने बच्चों को बुरी आदतों से दूर रखने के लिए डांट-फटकार से लेकर पिटाई तक हर तरह के प्रयत्न करते हैं इसलिए इन बच्चों को सेकुलरताबादियों के बताए अनुसार अपने शत्रु नजर आते हैं।
ये बच्चे इस दुस्प्रचार का शिकार होकर अपने माता-पिता से दूर होते चले जाते हैं।ये बच्चे जाने-अनजाने नशा माफियों के चुंगल में फंस जाते हैं क्योंकि ये नशामाफिया इन बच्चों को न केबल नशा उपलब्ध करबाता है बल्कि सेकुलरताबादी विचारों का प्रयोग कर ये समझाने में भी कामयाब हो जाता है कि नशा और ब्यभिचार ही जिन्दगी के असली मायने हैं।
जब तक इन बच्चों को ये समझ आता है कि ये आधुनिकता के चक्कर में पढ़कर अपना जीबन तबाह कर रहे हैं तब तक इन बच्चों के पास बचाने के लिए बचा ही कुछ नहीं होता है।लड़कियां कोठे पर पहुंचाई जा चुकी होती हैं व लड़के नशेबाज बन चुके होते हैं कमोबेश मजबूरी में यही इनकी नियती बन जाती है।
फिर ये बच्चे कभी सरकार को कोशते नजर आते हैं तो कभी समाज तो कभी माता-पिता को। परन्तु बास्तब में अपनी बरबादी के लिए ये बच्चे खुद ही जिम्मेबार होते हैं क्योंकि सीधे या टैलीविजन व पत्रिकाओं के माध्यम से सेकुलरताबादियों की फूड़ सोच को अपनाकर अपनी जिन्दगी का बेड़ागर्क ये बच्चे अपने आप करते हैं।
आगे चलकर यही बच्चे सेकुलरताबादी,नक्सलबादी व माओबादी बनते हैं । यही बच्चे इन सेकुलरताबादियों का थिंकटैंक बनते हैं । यही बच्चे फिर समाचार चैनलों में बैठकर माता-पिता जैसे पबित्र रिस्तों को बदनाम करते नजर आते हैं।अब आप खुद समझ सकते हैं कि क्यों ये सेकुलरताबादी हर वक्त देश-समाज,मां-बाप व भारतीय संस्कृति को कोशते नजर आते हैं।
आज NDTV $ IBN7 ने दिल खुश कर दिया।आज जो इन चैनलों ने किया वो अगर ये हर रोज लगातार करें तो हत्यारों का पता नहीं चलेगा कि कब समाप्त हो गय( गद्दार आतंकवादियों के समर्थक ब्लागर जरूर पढें बरना ताऊमर इस लेख को न पढ़ने पर पछतायेंगे)।
आज पहली बार NDTV $ IBN7 ने अपने चर्चा के कार्यक्रम(9बजे खत्म हुआ) देशहित की मानसिकता से किए।पहले ये चैनल एक देशभक्त को बुलाकर चार-चार गद्दारों से लड़ाते थे अन्त में देशभक्त की ऐसी की तैसी फेरने के लिए इन गद्दारों के साथ एंकर भी देशभक्त पर डूट पड़ता था। आज इसके ठीक विपरीत इन चैनलों ने एक गद्दार (NDTV पर गद्दार हिमांशु $ IBN7 पर गद्दार निलाप ) को बुलाकर उसकी औकात व असलियत जनता के सामने उधेड़ कर रख दी । इस चर्चा में जनरल बख्शी जी ने वो बात कह दी जो हमारी पुस्तक नकली धर्मनिर्पेक्षता का सार है उन्होंने कहा कि देश में एक ऐसा गिरोह बन चुका है जो लगातकार देशहित में लिए गय निर्णयों का विरोध कर देशभक्त लोगों व सैनिकों को हतोतसाहित करने का काम कर रहा है। अगर सैनिक देश के दुशमनों को मार डालते हैं तो कहते हैं क्यों मारा अगर असफल होते हैं तो कहते हैं क्यों नहीं मारा।
अपने देशहित विरोधी बयानों द्वारा हमारी आओं में खटने वाले मनीष तिवारी ने भी आज देशहित की बात कर हमारा मन जीत लिया । उन्होंने गद्दार हिमांसु द्वारा बार-बार माओवादी आतंकवादियों द्वारा की जा रही हिंसा का समर्थन व सुरक्षावलों पर मनघड़ंत आरोप लगाने पर सीधा कहा कि तुम खुलकर वोलो कि तुम आतंकवादियों के प्रवक्त हो ।आज से हम उमीद करेंगे कि सामचार चैनल जब भी चर्चा परिचर्चा आयोजित करें तो अपना नजरिया यही रखें कि आतंकवादियों द्वारा की जा रही हिंसा का समर्थन करने वाले का परिचय आतंकवादियों के प्रवक्ता के रूप में करवाया जाय न कि समाजिक/मानवाधिकार कार्यकरता के रूप में।( दोनों एंकर अभिज्ञान जी व संदीप जी) बधाई के पात्र हैं।
अगर देशहित को ध्यान में रखकर सरकार व चैनल आचरण करें तो हम दावे से कह सकते हैं कि हिंसा प्रति हिंसा मारे जाने वाले गरीब लोगों की शंख्या में अकल्पनीय कमी आयेगी।
जनरल साहब ने ये भी बताया कि इस गिरोह के दुशप्रचार के परिणाम स्वारूप सरकार द्वारा सेना पर लगाय गय अंकुशों से शैनिकों के शहीद होने की शंख्या बहुत अधिक बढ़ गयी है। आज सैनिक जब भी आपरेसन में जाता है तो वह दुविधा में होता है कि क्या करे क्या न करे ।क्योंकि अगर किया तो संदेह जताया जायगा।शहीद भी हो गया तो भी लड़ाई को फर्जी करार दे दिया जायेगा।
ब्लागर जगत में हिमांशु और निलाप जैसे बहुत से आतंकवादियों के समर्थक लगातार सुरक्षावलों को बदनाम करने के लिए उन पर मनघड़ंत आरोप लगा रहे हैं व आतंकवादियों का समर्थन कर रहे हैं उनको हम साबधान करना चाहते हैं कि उनके विरूद्ध कार्यवाही करवाने की बयबस्था हम खुद करेंगे। आज के वाद जो भी आतंकवादियों का समर्थन करेगा वो परिणाम भुक्तेगा। परिणाम इतना भयानक होगा जिसकी गद्दार कल्पना भी नहीं कतर सकते । फिर न कहना मौका नहीं दिया था सुधरने का।
गद्दारो सावधान आगे खतरा है
अपने देशहित विरोधी बयानों द्वारा हमारी आओं में खटने वाले मनीष तिवारी ने भी आज देशहित की बात कर हमारा मन जीत लिया । उन्होंने गद्दार हिमांसु द्वारा बार-बार माओवादी आतंकवादियों द्वारा की जा रही हिंसा का समर्थन व सुरक्षावलों पर मनघड़ंत आरोप लगाने पर सीधा कहा कि तुम खुलकर वोलो कि तुम आतंकवादियों के प्रवक्त हो ।आज से हम उमीद करेंगे कि सामचार चैनल जब भी चर्चा परिचर्चा आयोजित करें तो अपना नजरिया यही रखें कि आतंकवादियों द्वारा की जा रही हिंसा का समर्थन करने वाले का परिचय आतंकवादियों के प्रवक्ता के रूप में करवाया जाय न कि समाजिक/मानवाधिकार कार्यकरता के रूप में।( दोनों एंकर अभिज्ञान जी व संदीप जी) बधाई के पात्र हैं।
अगर देशहित को ध्यान में रखकर सरकार व चैनल आचरण करें तो हम दावे से कह सकते हैं कि हिंसा प्रति हिंसा मारे जाने वाले गरीब लोगों की शंख्या में अकल्पनीय कमी आयेगी।
जनरल साहब ने ये भी बताया कि इस गिरोह के दुशप्रचार के परिणाम स्वारूप सरकार द्वारा सेना पर लगाय गय अंकुशों से शैनिकों के शहीद होने की शंख्या बहुत अधिक बढ़ गयी है। आज सैनिक जब भी आपरेसन में जाता है तो वह दुविधा में होता है कि क्या करे क्या न करे ।क्योंकि अगर किया तो संदेह जताया जायगा।शहीद भी हो गया तो भी लड़ाई को फर्जी करार दे दिया जायेगा।
ब्लागर जगत में हिमांशु और निलाप जैसे बहुत से आतंकवादियों के समर्थक लगातार सुरक्षावलों को बदनाम करने के लिए उन पर मनघड़ंत आरोप लगा रहे हैं व आतंकवादियों का समर्थन कर रहे हैं उनको हम साबधान करना चाहते हैं कि उनके विरूद्ध कार्यवाही करवाने की बयबस्था हम खुद करेंगे। आज के वाद जो भी आतंकवादियों का समर्थन करेगा वो परिणाम भुक्तेगा। परिणाम इतना भयानक होगा जिसकी गद्दार कल्पना भी नहीं कतर सकते । फिर न कहना मौका नहीं दिया था सुधरने का।
गद्दारो सावधान आगे खतरा है
इस सेकुलर दुल्हे ने तो सेकुलर गिरोह की तो वोलती ही बन्द कतर दी ।
कुछ भी करेगा कुछ भी कहेगा पर कभी गलती मानेगा नहीं यही पहचान है पाकिस्तान की सारी दुनिया में । आपको यह बताने की जरूरत नहीं कि पाकिस्तान आतंकवाद के मुद्दे पर हमेशा झूठ बोलता आया है । पाकिस्तान का निर्माण ही झूठ और नफरत की बुनियाद पर हुआ था ।आज भी उसी बुनियाद पर आगे बढ़ रहा है। पाकिस्तान के करता-धरता झूठ वोलते हैं मुसलिम आतंकवादियों को बचाने के लिए । उनके इस झूठ को हर वक्त सहारा मिलता है भारत के सेकुलर गिरोह से।जब यह गिरोह ये कहता है कि पाकिस्तान भी आतंकवाद का पिड़ीत है।
लेकिन अब क्या करेगा ये सेकुलर गिरोह।
इस खान ने ते पहले पत्नी को महा-आपा बता दिया । फिर जिसे महा-आपा बतया उसे तालाक दे दिया । अब अबु का नाम ही बदल लिया। यही परिणाम होता है चार-चार शादियां करने का बच्चों को अपने वाप का नाम तक नहीं पता होता। यही परिणाम होता है चार-चार शादियां करने का बच्चों को अपने वाप का नाम तक नहीं पता होता। जिनको अपने वाप का नाम तक पता नहीं वो गैरकानूनी काम ही करेंगे ये काम चाहे आतंकवाद फैलाने का हो या फिर मैच फिक्सिंग का या फिर जाली कारंसी का या फिर नशे का कारोवार या फिर नकली घी बनाने का सब जगह ऐसे ही बच्चे पकड़े जाते हैं जिन्हें अपने वाप का नाम तक नहीं पता । इसीलिए हम तो कहते हैं इन बच्चों की जिन्दगी को नर्क बनने से रोकने किए व इनके द्वारा दूसरों की जिन्दगी को नरक न बनने देन के लिए ये चार-चार शादियों करने का पाप वन्द होन चाहिए ये हराम है पर हमारी सुनेगा कौन हम सांप्रदायिक जो ठहरे। ठीक ही कहा था मुहम्मद अली जिन्ना ने कि अरब की संस्कृति को मानने वाले भारतीयों के साथ नहीं रह सकते । चलो देखते हैं कि अब सेकुलर गिरोह क्या सपष्टीकरण लेकर सामने आता है।
सेकुलर गिरोह जानता है कि भारत के देशभक्त लोग पाकिस्तान समर्थक मुसलिम आतंकवादियों द्वारा किए जा रहे हमलों के कारण पाकिस्तन से चिड़े हुए हैं वो निश्चित तौर पर एक भारतीय की शादी का पाकिस्तान में निकाह पसन्द नहीं करेंगे । इसलिए इस सेकुलर गिरोह ने सानिया के निजी मामले को इतनी तूल दी कि देशभक्त तो क्या उनके समर्थ भी उससे चिड़ गए आफटर आल भारतीय जो ठहरे।
पर इस सेकुलर दुल्हे ने तो सेकुलर गिरोह की वोलती ही बन्द कर दी।
शुक्रवार, 9 अप्रैल 2010
हर वक्त भारतविरोधी हत्यारों का पक्ष लेने वाले इन आस्तीन के सांपो का क्या करें ?
आप सब देख रहे हैं कि भारत में एक गिरोह ऐसा पैदा हो गया है जिसका एकमात्र उदेशय शांतिप्रिय-देशभक्त भारतीयों को लहूलुहान करने वाले आतंकवादियो को सही ठहराना है। ये आतंकवादी चाहे चीन समर्थक वामपंथी आतंकवादी हों या फिर पाक समर्थक मुसलिम आतंकवादी या फिर रोम समर्थक ईसाई आतंकवादी। इन आतंकवादियों द्वारा जब भी भारत की असमिता पर प्रहार किया जाता है तो ये गिरोह सक्रियता से ये सुनिश्चित करने में लग जाता है कि न तो भारतीयों को इन आतंकवादियों की गद्दारी का पता चले न सरकार इनके विरूद्ध कोई निर्णायक कार्यवादी कर पाये। परिणामस्वारूप भारत में देश के दुश्मन इन आतंकवादियों द्वरा की जा रही हिंसा लगातार बढ़ती जा रही है। इन आतंकवादियों के विरूद्ध कार्यावाही तो दूर की बात कोई देशभक्त संगठन इनकी गद्दारी को उजागर करने वाला ब्यान तक नहीं दे सकता क्योंकि जैसे ही कोई देशभक्त संगठन या सरकारी अधिकारी इन आतंकवादियों के विरूद्ध कोई जनता को जागरूक करने वाला ब्यान देता है तभी इन आतंकवादियों के समर्थकों का यह गिरोह सक्रिय होकर उस ब्यान देने वाले देशभक्त को घेरना शुरू कर देते हैं।
इस गिरोह के इसारे पर समाचार चैनल चर्चा-परिचर्चा आयोजित करते हैं ।जिसमें एक देशभक्त को घेरने के लिए तीन-चार लोग इस गिरोह से सबन्ध रखने वाले बुलाए जाते हैं। इस गिरोह के लोग वारी-वारी से भारतीय संस्कृति, देशभक्त संगठनों व सुरक्षावलों पर आरोप लगाते हैं फिर वारी आती है उस एक देशभक्त द्वरा आरोपों का जबाब देने की तो ये सब इस गिरोह से जुड़े लोग एंकर सहित उस पर टूट पड़ते हैं उस देशभक्त( वेचारे जी पार्थसार्थी जी) को अपना पक्ष तक ठीक से रखने का मौका नहीं दिया जाता ।अन्त में एंकर द्वरा निष्कर्ष निकाल दिया जाता है कि आतंकवादी जो भी कर रहे हैं ठीक कर रहे हैं सरकार को उनके विरूद्ध कार्यवाही करने के बजाए उनका विरोध करने वाले संगठनों पर कार्यावाही करनी चाहिए व ये सुनिश्चित करना चाहिए कि सुरक्षावलों पर इतने प्रतिबन्ध लगा दिए जायें कि चाहे जितने मर्जी जवान शहीद हो जायें पर आतंकवादियों पर आंच न आने पाये।
दुख के साथ कहना पड़ता है कि हर वार सरकार इनके दबाब में आकर कुछ न कुछ कदम ऐसे उठा देती है जो इन आतंकवादियों का हौसला बढ़ाने वाले सिद्ध होते हैं। सरकार ने आज की तारीक में सुरक्षवलों पर इतने प्रतिबन्ध लाद दिए हैं कि जब कभी भी जहां कहीं भी आतंकवादियों का सुरक्षाबलों से सामना होता है तो इसमें आतंकवादियों से कहीं अधिक सुरक्षबल मार दिए जाते हैं। अगर सुरक्षाबल आतंकवादियों को विना नुकसान उठाये मारने में सफल हो जाते हैं तो उस मुठभेड़ को फर्जी करार दे दिया जाता है अगर शहीद होने वाले सैनिकों की संख्या मरने वाले आतंकवादियों से कम हो तो भी लड़ाई को फर्जी करार दे दिया जाता है। मतलब ये गिरोह तभी खुश होता है जब भारतीय सुरक्षावलों को ज्यादा से ज्यादा नुकशान हो। मतलब इस गिरोह की बफादरी भारत के प्रति न होकर भारत के शत्रुओं के प्रति ही रहती है फिर ये शत्रु चाहे चीन समर्थक वांमपंथी आतंकवादी हों या फिर पाक समर्थक मुंसलिम आतंकवादी या फिर रोम समर्थक ईसाई आतंकवादी ।
अब आप सोचेगें कि जब ये गिरोह इतना सबकुछ सरेआम कर रहा है तो फिर देशभक्त लोग इस गिरोह से जुड़े लोगों को खत्म क्यों नहीं कर देते। बस समस्या यहं पर है कि ये गिरोह कभी खुद को धर्मनिर्रपेक्षता के चोले में लपेट लेता है तो कभी मानवाधिकार के चोले में तो कभी पत्रकार के चोले में तो कभी एनजीओ के चोले में । ये गिरोह अपनी असली पहचान जनता के सामने उजागर ही नहीं होने देता ।क्योंकि इस गिरोह के मालिक सीमा पार हैं और वो सब भारत को नुकसान पहुंचाने के मुद्दे पर एकमत हैं इसलिए इस गिरोह की पहुंच संसार की बहुत सी ऐसी संस्थाओं तक है जो अपने आप को उसी तरह के चोलों में लपेट कर भारत को नुकशान पहूचाने के लिए भारत सरकार पर अपने-अपने देशों की सरकारों के माध्यम से दबाब बनाती हैं। ऐसा देखा गया है कि अक्सर भारत सरकार इन विदेशीयों के दबाब में आ जाती है फिर वो चाहे किसी भी दल की हो। परिणाम स्वारूप जिस गिरोह पर प्रतिबन्ध लगाकर सरकार को उससे जुढ़े लोगों को फांसी पर लटकाना चाहिए सरकार उसको बढ़ावा देने पर मजबूर होती है और कई वार तो उन्हीं संस्थाओं के साथ खड़ी नजर आती है।
अब प्रश्न यह पैदा होता है कि समाधान क्या है ।समाधान मुस्किल ही नहीं असम्भव भी दिखता है यदि हम जागरूक नहों तो । इस गिरोह से सक्रियता से जुड़े गद्दारों की संख्या बहुत कम है मतलब बड़ी मुस्किल से1-3 हजार पर इस गिरोह की पकड़ क्योंकि सरकार व संचार साधनों पर अधिक है इस बजह से एक बड़ा बर्ग जो संचार साधनों का उपयोग करता है वो इस गिरोह के प्रति न केवल सहानुभूति रखता है पर उसे ऐसा भी लगता है कि ये गिरोह ठीक कर रहा है । क्योंकि अगर एक झूठ को सौ वार दोहराया जाए तो वो फिर झूठ झूठ नहीं लगता । ये गिरोह तो एक झूठ को हजार वार दोहराता है कभी सराकर के माध्यम से कभी समाचार चैनलों के माध्यम से तो कभी समाचार पत्र पत्रिकाओं के माध्यम से । परिणामस्वारूप झूठ का एक ऐसा तानावाना वन जाता है जिसमें एक जागरूक बुद्धिजीवी भी उल्झ कर रह जाता है आम जनता द्वरा इस षडयन्त्र को विना किसी प्रयत्न से समझना लगभग नामुमकिन है।
इस गिरोह को निपटाने के लिए तीन स्तर पर काम करना पढ़ेगा ।पहला ऐसा जनमत त्यार करना जो इस गिरोह के प्रभाव में रहने वाली सरकार न चुने । दूसरा अपने लेखों व भाषणों के माध्यम से जनता के सामने इसके एक-एक षडयन्त्र को उजागर करना। तीसरा जगह-जगह HTF के विचारों से सहमति ऱखने वाले लोगों से सम्पर्क कर इस गिरोह से सबन्धित गद्दारों को चुन-चुन कर निशाना वनाना। HTF से सबन्धित कार्यकर्ताओं को ऐसे गद्दारों की सूचना स्थनीय पुलिस को देने व उनके विरूद्ध कड़ी कार्यावाही सुनिश्चित करने के निर्देश जारी हो चुके हैं। हम सबको सिर्फ इतना करना है कि अपने जिले में इस दिशा में काम कर रहे देशभक्त संगठनों के कार्यकर्ताओं को संगठित कर इन गद्दारों को ठिकाने लगाने की योजना स्थानीय स्तर पर वनाकर अन्जाम देनी है संचार साधनों से दूर रहकर । संचार साधनों को उपयोग हम सिर्फ बैचारि विजय के लिए करेंगें । आप सब देशभक्तों से आशा है कि आप अपने –अपने स्तर पर अपनी-अपनी समर्थय के अनुशार इस गिरोह का पर्दाफास कर अपने देश को इस गिरोह के चुंगल से मुक्तकर आये दिन होने वाली हिंसा से मुक्त करेंगे।
अन्त में हम आपसे सिर्फ इतना कहेंगे कि हत्यारों का समर्थन करने वाल यह गिरोह विदेशीयों व देशद्रोहियों के टुकड़ों पर पलने वाला वो आसतीन का सांप है जिसका फन अगर आज न कुचला गया तो ये गिरोह हर देशभक्त शांतिप्रिय भारतीय का जीना हराम कर देगा। इस गिरोह का हर कदम देश में हिंसा-प्रतिहिंसा को बढ़ावा दे रहा है। आओ मिलकर इस गिरोह का पर्दाफास कर इसके खातमे का प्रण करें।
गुरुवार, 8 अप्रैल 2010
महिलाओं के साथ बलात्कार किये जाते हैं, उनके स्तन काट दिए जाते हैं ...
सबसे पहले इस आरोप को पढिए जो NDTV पर वांमपंथी आतंकवादियों के समर्थकों द्वारा लगाया गया और जिसका एंकर ने समर्थन किया।
(इसी सरकार के आदेश से इन आदिवासियों में से बिना असली नक्सल की पहिचान किये उनकी महिलाओं के साथ बलात्कार किये जाते हैं, उनके स्तन काट दिए जाते हैं और उनके बच्चों की अंगुलियाँ काट दी, छील दी जाती हैं.. और ये सब होता है इस मानसिक रूप से दिवालिया सरकार के आदेशों से, कुछ दुर्दांत अफसरों के कहने पर. परिणामस्वरूप बलि चढ़ती है मासूमों की,)
हम तो कहते हैं कि गृहमन्त्री और अन्य मन्त्रीयों को फांसी पर चढ़ाने की मांग करने वालों को पहले यह सोचना चाहिए कि क्या NDTV जैसे देशविरोधी चैनलों द्वारा माओवादी आतंकवादियों को फायदा पहुंचाने के लिए फैलाए जा रहे इस झूठ को प्रचारित करना कहां तक उचित है।इसमें कोई शक नहीं कि कानून ब्याबस्था के लिए सरकार जिम्मेदार है पर इस तरह के मनघड़ंत आरोप तो हिंसा को बढ़ावा देने के लिए हिंसा फैला रहे वामपंथी आतंकवादियों के कुकर्मों को आगे बढ़ाने वाले ही सिद्ध होंगे ।इस तरह की घटनाओं पर हमारे जैसे छोटे लोगों का आक्रोसित होना स्वाभाविक है पर इसका अर्थ यह नहीं कि हम देशद्रोह पर उतारू हो जायें ।क्योंकि जिस सेना पर यह आरोप लगाय जा रहे हैं ये वो सेना है जिसने कशमीर घाटी में तालिवान से लड़ते वक्त भी मानवाधिकारों का हनन नहीं कि ।यहां तक कि विदेशों में गए इन सैनिकों के न्यायोचित मानवीय ब्याबहार का लोहा अफ्रीकी देशों में भी माना गया ।कारगिल युद्ध के वक्त पाकिस्तान के सैतान सैनिकों द्वारा इस तरह के जैसे यहां लिखे हैं अमानविय अत्याचार करने के वावजूद भारतीय सेना ने एक भी पाकिस्तानी आतंकवादी या सैनिक के साथ कोई अमानवीय ब्याबहार नहीं किया। वो सेना इन मुठीभर चीन समर्थक बांमपंथी आतंकवादियों के विरूद्ध ऐसा घिनौना कार्या कभी नहीं कर सकती ।हां ऐसा हो सकता है कि माओवादी आतंकवादी शांतिप्रिय वनवासियों को भड़काने के लिए उन पर इस तरह के कुकर्म कर आरोप सेना पर लगा दें विलकुल बैले ही जैसे आजकल दो मुसलिम महिलाओं का पाक समर्थक आतंकवादियों ने कत्ल कर सेना पर आरोप लगा दिया कि सैनिकों ने बालात्कार कर इन महिलों का कत्ल किया ।अब यह सिद्ध हो चुका है कि इन महिलाओं के साथ कोई रेप नहीं हुआ वल्कि आतंकवादियों ने ही इनका कत्ल किया था। ये उन लोगों की सेना है जिन्होंने हमेशा अतायचार का जबाब अत्याचार से देने के बजाए उस क्षेत्र को अत्याचिरियों(अफगानीस्थान,पाकिस्तान,बंगलादेश) के हवाले कर दिया है । आज देख लो वहां क्या हाल है।जो हमारे विरूद्ध लड़े थे आज एकदूसरे के विरूद्ध लड़ रहे हैं।
सच में हमें तो हैरानी हो रही है कि जो आरोप ये भारत के शत्रु आतंकवादियों के समर्थक भाजपा पर लगाते थे आज वही आरोप ये लोग अपने लाडले सेकुलर गिरोह की सरकार पर लगा रहे हैं ।जिस सेकुलर गिरोह ने आज तक हर हाल में आतंकवादियों (चाहे वो पाक समर्थक हों या फिर चीन समर्थक) का साथ दिया है ये सोचकर कि आज नहीं तो कल इन गद्दारों को अक्कल आ जोयेगी पर अफशोश इन गद्दारों को अक्कल नहीं आई और जनता ने बुद्धिमतापूर्वक इस सेकुलर गिरोह को अपने पाले गद्दारों का सफाया करने के लिए चुन दिया ।हम तो ये कल्पना करते ही डर जाते हैं कि जो गद्दार कल तक हर हाल में सेकुलर गिरोह का समर्थन करने के लिए भजपा पर हर तरह के आरोप लगा रहे थे आज वो ही गद्दार उसी सेकुलर गिरोह पर वैसे ही आरोप लगा रहे हैं । तभी तो कहा गया है कि कुता पागल होने पर सबसे पहले अपने मालिक को ही काटता है यही आज कांग्रेस के साथ हो रहा है । जो कांग्रेस इन विदेशीयों के टुकड़ों पर पलने वाले दानवाधिकार कतार्यकरताओं मिडीया एनजीओस को हर तरह का सरंक्षण देती रही वही आज उसको बदनाम करने पर तुले हैं वो चाहे वटला हाऊस इंनकाऊंटर का मामला हो या वामपंथी आतंकवादियों का।
अन्त में हम इतना ही कहेंगे कि आज जो भी देशभक्त हैं उन्हें हप हाल में सेना के साथ खड़ा होना चाहिए और माओवाजी आतंकवादियों को कहना चाहिए कि वो लोग अपने हथियार ढाल दें अपने आप को सेना के हवाले कर दें घवराने की कोई बात नहीं क्योंकि जो सरकार अफजल जैसे आतंकवादी को माननीय सर्वोच्च न्यायलय के आदेश के वावजूद वचा सक्ति है वो उनको भी जरूर बचा लेगी लेकिन इसके लिए उन्हें आत्मसमर्पण करना जरूरी है वरना उनको कोई नहीं बचा सकता। जैसे कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह गद्दार सहजाद के घर गए थे उसी तरह मणिसंकर अयर आपके घर आने की त्यारी कर रहे हैं ।बस हथियार छोड़कर सेकुलर गिरोहग का समर्थन करने की खुली घोषणा कतर दो बैसे भी आपने(माओवादी आतंमकवादियों ने) ही स्वामी लक्ष्मी नारायण जी का कत्ल करने के वाद कहा था कि आप धर्मनिर्पेक्ष राजाया बनाना चताहते हैं तो अब क्या प्रौबलम है बनाओ न धर्मनिर्रपेक्ष राज्य शमशानघाटजाकर या ङथियार डालकर। हमनें मालूम है कि जिन ईसाईयों को बचाने के लिए आपने ये जुल्म अपने सिर लिय़ा था वो हरी आज एक तरफ आपको हथियार दे रहे हैं दूसरी तरफ ...
(इसी सरकार के आदेश से इन आदिवासियों में से बिना असली नक्सल की पहिचान किये उनकी महिलाओं के साथ बलात्कार किये जाते हैं, उनके स्तन काट दिए जाते हैं और उनके बच्चों की अंगुलियाँ काट दी, छील दी जाती हैं.. और ये सब होता है इस मानसिक रूप से दिवालिया सरकार के आदेशों से, कुछ दुर्दांत अफसरों के कहने पर. परिणामस्वरूप बलि चढ़ती है मासूमों की,)
हम तो कहते हैं कि गृहमन्त्री और अन्य मन्त्रीयों को फांसी पर चढ़ाने की मांग करने वालों को पहले यह सोचना चाहिए कि क्या NDTV जैसे देशविरोधी चैनलों द्वारा माओवादी आतंकवादियों को फायदा पहुंचाने के लिए फैलाए जा रहे इस झूठ को प्रचारित करना कहां तक उचित है।इसमें कोई शक नहीं कि कानून ब्याबस्था के लिए सरकार जिम्मेदार है पर इस तरह के मनघड़ंत आरोप तो हिंसा को बढ़ावा देने के लिए हिंसा फैला रहे वामपंथी आतंकवादियों के कुकर्मों को आगे बढ़ाने वाले ही सिद्ध होंगे ।इस तरह की घटनाओं पर हमारे जैसे छोटे लोगों का आक्रोसित होना स्वाभाविक है पर इसका अर्थ यह नहीं कि हम देशद्रोह पर उतारू हो जायें ।क्योंकि जिस सेना पर यह आरोप लगाय जा रहे हैं ये वो सेना है जिसने कशमीर घाटी में तालिवान से लड़ते वक्त भी मानवाधिकारों का हनन नहीं कि ।यहां तक कि विदेशों में गए इन सैनिकों के न्यायोचित मानवीय ब्याबहार का लोहा अफ्रीकी देशों में भी माना गया ।कारगिल युद्ध के वक्त पाकिस्तान के सैतान सैनिकों द्वारा इस तरह के जैसे यहां लिखे हैं अमानविय अत्याचार करने के वावजूद भारतीय सेना ने एक भी पाकिस्तानी आतंकवादी या सैनिक के साथ कोई अमानवीय ब्याबहार नहीं किया। वो सेना इन मुठीभर चीन समर्थक बांमपंथी आतंकवादियों के विरूद्ध ऐसा घिनौना कार्या कभी नहीं कर सकती ।हां ऐसा हो सकता है कि माओवादी आतंकवादी शांतिप्रिय वनवासियों को भड़काने के लिए उन पर इस तरह के कुकर्म कर आरोप सेना पर लगा दें विलकुल बैले ही जैसे आजकल दो मुसलिम महिलाओं का पाक समर्थक आतंकवादियों ने कत्ल कर सेना पर आरोप लगा दिया कि सैनिकों ने बालात्कार कर इन महिलों का कत्ल किया ।अब यह सिद्ध हो चुका है कि इन महिलाओं के साथ कोई रेप नहीं हुआ वल्कि आतंकवादियों ने ही इनका कत्ल किया था। ये उन लोगों की सेना है जिन्होंने हमेशा अतायचार का जबाब अत्याचार से देने के बजाए उस क्षेत्र को अत्याचिरियों(अफगानीस्थान,पाकिस्तान,बंगलादेश) के हवाले कर दिया है । आज देख लो वहां क्या हाल है।जो हमारे विरूद्ध लड़े थे आज एकदूसरे के विरूद्ध लड़ रहे हैं।
सच में हमें तो हैरानी हो रही है कि जो आरोप ये भारत के शत्रु आतंकवादियों के समर्थक भाजपा पर लगाते थे आज वही आरोप ये लोग अपने लाडले सेकुलर गिरोह की सरकार पर लगा रहे हैं ।जिस सेकुलर गिरोह ने आज तक हर हाल में आतंकवादियों (चाहे वो पाक समर्थक हों या फिर चीन समर्थक) का साथ दिया है ये सोचकर कि आज नहीं तो कल इन गद्दारों को अक्कल आ जोयेगी पर अफशोश इन गद्दारों को अक्कल नहीं आई और जनता ने बुद्धिमतापूर्वक इस सेकुलर गिरोह को अपने पाले गद्दारों का सफाया करने के लिए चुन दिया ।हम तो ये कल्पना करते ही डर जाते हैं कि जो गद्दार कल तक हर हाल में सेकुलर गिरोह का समर्थन करने के लिए भजपा पर हर तरह के आरोप लगा रहे थे आज वो ही गद्दार उसी सेकुलर गिरोह पर वैसे ही आरोप लगा रहे हैं । तभी तो कहा गया है कि कुता पागल होने पर सबसे पहले अपने मालिक को ही काटता है यही आज कांग्रेस के साथ हो रहा है । जो कांग्रेस इन विदेशीयों के टुकड़ों पर पलने वाले दानवाधिकार कतार्यकरताओं मिडीया एनजीओस को हर तरह का सरंक्षण देती रही वही आज उसको बदनाम करने पर तुले हैं वो चाहे वटला हाऊस इंनकाऊंटर का मामला हो या वामपंथी आतंकवादियों का।
अन्त में हम इतना ही कहेंगे कि आज जो भी देशभक्त हैं उन्हें हप हाल में सेना के साथ खड़ा होना चाहिए और माओवाजी आतंकवादियों को कहना चाहिए कि वो लोग अपने हथियार ढाल दें अपने आप को सेना के हवाले कर दें घवराने की कोई बात नहीं क्योंकि जो सरकार अफजल जैसे आतंकवादी को माननीय सर्वोच्च न्यायलय के आदेश के वावजूद वचा सक्ति है वो उनको भी जरूर बचा लेगी लेकिन इसके लिए उन्हें आत्मसमर्पण करना जरूरी है वरना उनको कोई नहीं बचा सकता। जैसे कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह गद्दार सहजाद के घर गए थे उसी तरह मणिसंकर अयर आपके घर आने की त्यारी कर रहे हैं ।बस हथियार छोड़कर सेकुलर गिरोहग का समर्थन करने की खुली घोषणा कतर दो बैसे भी आपने(माओवादी आतंमकवादियों ने) ही स्वामी लक्ष्मी नारायण जी का कत्ल करने के वाद कहा था कि आप धर्मनिर्पेक्ष राजाया बनाना चताहते हैं तो अब क्या प्रौबलम है बनाओ न धर्मनिर्रपेक्ष राज्य शमशानघाटजाकर या ङथियार डालकर। हमनें मालूम है कि जिन ईसाईयों को बचाने के लिए आपने ये जुल्म अपने सिर लिय़ा था वो हरी आज एक तरफ आपको हथियार दे रहे हैं दूसरी तरफ ...
मां का दूध पिया है गद्दारो ; तो खुलकर सामने आओ
अब वक्त आ गया है कि मिडीया से जुड़े लोग खासकर समाचार चैनलों व समाचार पत्रों से जुड़े लोग अपनी व अपने मालिकों की राष्ट्रीयता जनता के सामने रखें साथ ही इनमें से जो लोग भारत की नागरिकता रखते हैं वो ये भी सपष्ट करें कि उनकी बफादारी किसके प्रति है भारत या भारत के शत्रुओं के प्रति।
माओबादी आतंकवादियों के हमले में शहीद हुए 76 जवानों की की चिता की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई है कि समाचार चैनलों ने सुरक्षाबलों पर मनघड़ंत आरोप लगाकर माओवादी आतंकवादियों का हौसला बढ़ाने की कोशिस सुरू कर दी है।इन चैनलों पर माओवादियों के लिए आतंकवादी के बजाए क्रांतिकारी कहा जा रहा है।समाचारों को इस तरह से पेश किया जा रहा है मानो ये चैनल भारत के ना होकर चीन के हों जो चीन के प्रति बफादार माओवादियों द्वारा भारत के प्रति बफादार सैनिकों पर हमलों से खुश हों। ये चैनल काफी समय से आतंकवादियों के अनुकूल महौल बनाने का सफल प्रयत्न कर रहे हैं। जब भी ये आतंकवादी देश की अस्मिता पर हमला वालते हैं ये चैनल माओवादियों के समर्थकों को अपने कार्यक्रमों में बुलाकर उनके द्वारा सेना,पुलिस व अर्धसैनिक वलों पर मनघडंत आरोप लगवाते हैं।जैसे ही पैनल में बैठा कोई देशभक्त ब्यक्ति इन आतंकवादियों के समर्थकों के द्वारा सुरक्षावलों को बदनाम करने के लिए लगाए गय आरोपों को नकारने की कोशिश करता है बैसे ही इन चैनलों के एंकर वीच में हस्तक्षेप करके उसे रोक देते हैं।कुलमिलाकर न चैनलों पर देशभक्त लोगों को अपनी बात ठीक से रखने का मौका नहीं दिया जाता व आतंकवादियों के समर्थकों की बात को सर्वोपरि रखने की कोशिस एक योजना के तहत इन चैनलों द्वारा की जाती।
06/04/10 को IBN7 ने अपने यहां एक ऐसे माओवादी आतंकवादी(निलाप) को वुलाया जिसने अपने साथी आतंकवादियों द्वारा जवानों पर किए गय हमले की निंदा तक करने से मना कर दिया व इस आतंकवादी ने भारत सरकार व सुरक्षा वलों पर अधारहीन आरोप लगाकर बनवासियों को देश के विरूद्ध भड़काने की कोशिश की।इस घटना के साक्षी चन्दन मिश्रा जी और मनीष तिवारी जी हैं। भारत विरोध के सौकीन आशुतोष राणा ने इस कार्यक्रम में एंकर की भूमिका निभाई।
07/04/10 को NDTV ने एक कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें ऐसे काल्पनिक आरोप लगाय गए जो भारत के अर्घसैनिक बलों तो क्या भारतीय संस्कृति में विस्वास रखने वाले किसी गुण्डे मवाली पर भी नहीं लगाए जा सकते हैं।कुलमिलाकर इल कार्यक्रम में भी वनवासियों को सुरक्षावलों के विरद्ध भड़काने की कोशिस की गई। इन आरोपों को लिखना भी हमारे हिसाब से गैर कानूनी होना चाहिए। इन आरोंपों के साक्षी भूतपूर्व गृह राज्यमन्त्री श्री जायसवाल जी हैं जो इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।इस कार्यक्रम की करिग इस तरह के आरोप लगवाने के शौकीन अभिज्ञान प्रकाश ने की।
हमारे विचार में अगर सरकार सच में हिंसा बढ़ाए विना आतंकवाद को खत्म करना चाहती है तो उसे इन अभियानों व सुरक्षाबलों से सबन्धित किसी भी तरह के कार्यक्रमों पर रोक लगा देनी चाहिए व जो चैनल लगातार आतंकवादियों के पक्ष में महौल वनाने की कोशिश कर रहे हैं उन पर प्रतिबन्ध लगाकर ऐसे एंकरस को जेल में डाल देना चाहिए ताकि भारत विरोधी ऐसे गद्दार एंकरों की फौज त्यार न हो सके ।
हमारे प्यारे बलागरस आप लोगों की परीक्षा सुरू हो चुकी है क्योंकि बहुत से गद्दार मिडीया कर्मी, दानवाधिकारकार्यकरता, विके हुए लेखक,लेखकों के वेश में छुपे आतंकवादी व उनके समर्थक आपके वीच में घुश चुके हैं ।इसलिए आपको साबधान रहने की जरूरत है कि जिस तरह मिडीया जनता की निगाह में देशविरोधी वन चुका है उसी तरह कहीं बलागर जगत भी बदनाम न हो जाए। देशविरोधियों की पहचान के कुछ विन्दू
अक्सर सुरक्षावलों पर मनघड़ंत व झूठे आरोप लगाना
आतंकवादियों के प्रति सहानुभूति जताना
आतंकवादियों के भारतविरोधी कुकर्मों को सही ठहराने का दुस्साहस करना
वामपंथी आतंकवादियों को गरीवों का मसीहा बतान----मूर्ख से मूर्ख आदमी भी जानता है कि सड़कों,पुलों,रेलों व सरकारी स्कूलों का उपयोग सिर्फ गरीब ही करते हैं इनमें बढ़े नेताओं या बयापारियों के बच्चे नहीं पढ़ते ।जो लोग इनको तहस-नहस कर रहे हैं वो गरीवों के हितैसी कैसे हो सकते हैं। बैसे भी जिस देश की सेना दुनिया में किसी भी देश की सेना को हराने की ताकत रखती हो उससे हथियारबंद लड़ाई करना अपनी व अपने समर्थकों की मौत को वुलावा देना है इन मूर्खों को यहां तक तो समझ नहीं कि आज के समय में भारतीय सेना से लड़ने का जोखिम तो चीन नहीं उठा सकता इसीलिए वो इन मूर्खों का इस्तेमाल कर रहा है।
सुरक्षबलों द्वारा की गई हर कार्यावाही को संदेहास्पद वनाकर पेश करना।
पाकिस्तान समर्थक आतंकवादियों को निर्दोष मुसलमान वताकर पेश करना
जनता में आतंकवादियों के विरूद्ध आक्रोश पैदा होने से बचाने के लिए उन्हें अनपढ़ और गरीब बताना जबकि इस मंहगाई के दौर में आतंकवाद फैलान गरीब के बश की बात नहीं।
इतिहास साक्षी है इस वात का कि जनअन्दोलन हथियारों से नहीं जनक्रांति से जीता जाता है। ये आतंकवादी जानते हैं कि जनता इनके साथ नहीं इसीलिए ये चोरीछुपे काय़रों,चोरों,डाकुओं लुटेरों कमीनों की तरह हमला कर रहे हैं। छुप-छुप कर हमला कर रहे हो- मां का दूध पिया है गद्दारो चीन के यारो तो खुलकर सामने आओ अगर रातों रात तुम्हार बैंड न वज जाये तो कहना
माओबादी आतंकवादियों के हमले में शहीद हुए 76 जवानों की की चिता की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई है कि समाचार चैनलों ने सुरक्षाबलों पर मनघड़ंत आरोप लगाकर माओवादी आतंकवादियों का हौसला बढ़ाने की कोशिस सुरू कर दी है।इन चैनलों पर माओवादियों के लिए आतंकवादी के बजाए क्रांतिकारी कहा जा रहा है।समाचारों को इस तरह से पेश किया जा रहा है मानो ये चैनल भारत के ना होकर चीन के हों जो चीन के प्रति बफादार माओवादियों द्वारा भारत के प्रति बफादार सैनिकों पर हमलों से खुश हों। ये चैनल काफी समय से आतंकवादियों के अनुकूल महौल बनाने का सफल प्रयत्न कर रहे हैं। जब भी ये आतंकवादी देश की अस्मिता पर हमला वालते हैं ये चैनल माओवादियों के समर्थकों को अपने कार्यक्रमों में बुलाकर उनके द्वारा सेना,पुलिस व अर्धसैनिक वलों पर मनघडंत आरोप लगवाते हैं।जैसे ही पैनल में बैठा कोई देशभक्त ब्यक्ति इन आतंकवादियों के समर्थकों के द्वारा सुरक्षावलों को बदनाम करने के लिए लगाए गय आरोपों को नकारने की कोशिश करता है बैसे ही इन चैनलों के एंकर वीच में हस्तक्षेप करके उसे रोक देते हैं।कुलमिलाकर न चैनलों पर देशभक्त लोगों को अपनी बात ठीक से रखने का मौका नहीं दिया जाता व आतंकवादियों के समर्थकों की बात को सर्वोपरि रखने की कोशिस एक योजना के तहत इन चैनलों द्वारा की जाती।
06/04/10 को IBN7 ने अपने यहां एक ऐसे माओवादी आतंकवादी(निलाप) को वुलाया जिसने अपने साथी आतंकवादियों द्वारा जवानों पर किए गय हमले की निंदा तक करने से मना कर दिया व इस आतंकवादी ने भारत सरकार व सुरक्षा वलों पर अधारहीन आरोप लगाकर बनवासियों को देश के विरूद्ध भड़काने की कोशिश की।इस घटना के साक्षी चन्दन मिश्रा जी और मनीष तिवारी जी हैं। भारत विरोध के सौकीन आशुतोष राणा ने इस कार्यक्रम में एंकर की भूमिका निभाई।
07/04/10 को NDTV ने एक कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें ऐसे काल्पनिक आरोप लगाय गए जो भारत के अर्घसैनिक बलों तो क्या भारतीय संस्कृति में विस्वास रखने वाले किसी गुण्डे मवाली पर भी नहीं लगाए जा सकते हैं।कुलमिलाकर इल कार्यक्रम में भी वनवासियों को सुरक्षावलों के विरद्ध भड़काने की कोशिस की गई। इन आरोपों को लिखना भी हमारे हिसाब से गैर कानूनी होना चाहिए। इन आरोंपों के साक्षी भूतपूर्व गृह राज्यमन्त्री श्री जायसवाल जी हैं जो इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।इस कार्यक्रम की करिग इस तरह के आरोप लगवाने के शौकीन अभिज्ञान प्रकाश ने की।
हमारे विचार में अगर सरकार सच में हिंसा बढ़ाए विना आतंकवाद को खत्म करना चाहती है तो उसे इन अभियानों व सुरक्षाबलों से सबन्धित किसी भी तरह के कार्यक्रमों पर रोक लगा देनी चाहिए व जो चैनल लगातार आतंकवादियों के पक्ष में महौल वनाने की कोशिश कर रहे हैं उन पर प्रतिबन्ध लगाकर ऐसे एंकरस को जेल में डाल देना चाहिए ताकि भारत विरोधी ऐसे गद्दार एंकरों की फौज त्यार न हो सके ।
हमारे प्यारे बलागरस आप लोगों की परीक्षा सुरू हो चुकी है क्योंकि बहुत से गद्दार मिडीया कर्मी, दानवाधिकारकार्यकरता, विके हुए लेखक,लेखकों के वेश में छुपे आतंकवादी व उनके समर्थक आपके वीच में घुश चुके हैं ।इसलिए आपको साबधान रहने की जरूरत है कि जिस तरह मिडीया जनता की निगाह में देशविरोधी वन चुका है उसी तरह कहीं बलागर जगत भी बदनाम न हो जाए। देशविरोधियों की पहचान के कुछ विन्दू
अक्सर सुरक्षावलों पर मनघड़ंत व झूठे आरोप लगाना
आतंकवादियों के प्रति सहानुभूति जताना
आतंकवादियों के भारतविरोधी कुकर्मों को सही ठहराने का दुस्साहस करना
वामपंथी आतंकवादियों को गरीवों का मसीहा बतान----मूर्ख से मूर्ख आदमी भी जानता है कि सड़कों,पुलों,रेलों व सरकारी स्कूलों का उपयोग सिर्फ गरीब ही करते हैं इनमें बढ़े नेताओं या बयापारियों के बच्चे नहीं पढ़ते ।जो लोग इनको तहस-नहस कर रहे हैं वो गरीवों के हितैसी कैसे हो सकते हैं। बैसे भी जिस देश की सेना दुनिया में किसी भी देश की सेना को हराने की ताकत रखती हो उससे हथियारबंद लड़ाई करना अपनी व अपने समर्थकों की मौत को वुलावा देना है इन मूर्खों को यहां तक तो समझ नहीं कि आज के समय में भारतीय सेना से लड़ने का जोखिम तो चीन नहीं उठा सकता इसीलिए वो इन मूर्खों का इस्तेमाल कर रहा है।
सुरक्षबलों द्वारा की गई हर कार्यावाही को संदेहास्पद वनाकर पेश करना।
पाकिस्तान समर्थक आतंकवादियों को निर्दोष मुसलमान वताकर पेश करना
जनता में आतंकवादियों के विरूद्ध आक्रोश पैदा होने से बचाने के लिए उन्हें अनपढ़ और गरीब बताना जबकि इस मंहगाई के दौर में आतंकवाद फैलान गरीब के बश की बात नहीं।
इतिहास साक्षी है इस वात का कि जनअन्दोलन हथियारों से नहीं जनक्रांति से जीता जाता है। ये आतंकवादी जानते हैं कि जनता इनके साथ नहीं इसीलिए ये चोरीछुपे काय़रों,चोरों,डाकुओं लुटेरों कमीनों की तरह हमला कर रहे हैं। छुप-छुप कर हमला कर रहे हो- मां का दूध पिया है गद्दारो चीन के यारो तो खुलकर सामने आओ अगर रातों रात तुम्हार बैंड न वज जाये तो कहना
मंगलवार, 6 अप्रैल 2010
भारतीय संस्कृति पर हर वक्त भौंकने वालों की असलियत हम बताते हैं आपको वो भी विना किसी गाली गलौच के ।अगर ठीक लगे तो खुल कर समर्थन करना गलत लगे तो तर्कपूर्ण कारण देकर हमें समझाना।
इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी गद्दारों के सेकुलर गिरोह द्वारा अल्पसंख्यकवाद व धर्मनिर्पेक्षता जैसे प्रावधानों का उपयोग जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों के षड्यन्त्रों को आगे बढ़ाने व हिन्दूविरोध के लिए इस हद तक किया जा रहा है कि अब देश की आम राष्ट्रभक्त हिन्दू जनता में यह धारणा बन चुकी है कि अल्पसंख्यकवाद व धर्मनिर्पेक्षता जैसे प्रावधान गद्दारी व देशद्रोह के ही पर्यायवाची हैं ।
देश को बचाने के लिए इन दोनों ही प्रावधानों को यथाशीघ्र समाप्त किया जाना परम आवश्यक है नहीं तो ये देशद्रोही हिन्दुविरोधी गद्दारों का सेकुलर गिरोह अल्पसंख्यकवाद व धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में भारतीय सभ्यता व संस्कृति को तबाह कर, न जाने देश के कितने टुकड़े और करवा देगा । जिसका परिणाम हिन्दुओं को यहूदीयों की तरह दर-दर की ठोकरें खानें या फिर मरने पर मजबूर कर देगा । क्योंकि 9वीं शत्ताब्दी में अफगानिस्तान व 20वीं शताब्दी में पाकिस्तान बांगलादेश बनने पर जो हिन्दू जिहादियों के हमलों से बच निकले वो भागकर भारत आ गये पर अगर वर्तमान भारत भी न रहा तो कहाँ जाँएगे ?
लोग कहते हैं युनान मिश्र रोमां सब मिट गये।
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी।।
पर यह भी सत्य है कि
उस कौम का इतिहास नहीं होता।
जिसको मिटने का एहसास नहीं होता।।
संभल कर एकजुट होकर कदम उठाओ ए हिन्दूओ ।।।
बर्ना तुम्महारी दास्तान तक न होगी दास्तानों में।।।।
आओ जरा भारत में अल्पसंख्यक बनाए गए घटकों का वही खाता खंगाले। वास्तव में अल्पसंख्यक आयोग का गठन ही मुसलमानों को विशेषाधिकार देने के उद्देश्य से किया गया था । ये मुसलमान ही इस आयोग के प्रमुख नीति-निर्धारक हैं । ये मुसलमान वही है जिनके भले के लिए 1947 में संप्रदाय के आधार पर अखण्ड भारत का विभाजन करवाकर वर्तमान पाकिस्तान बांगलादेश बनाए गये जो कि मुसलमानों के लिए हैं ।
o पाकिस्तान, बांगलादेश बनाने का कारण भी कोई दबा छुपा नहीं है सबको जानकारी है कि इस्लाम एक तरफ सूफी सन्तों को जन्म देता है जो भाईचारे की बात कर, अब्दुल हमीद को जन्म देते हैं । पर उससे हजारों गुना ज्यादा इस्लाम के नाम पर ऐसी राक्षसी प्रबृतियों का जन्म होता है जो इस्लाम के सिबा और किसी विश्वास के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करतीं। यहाँ तक जो मुस्लिम होने के बावजूद कत्लोगारद का विरोध या निन्दा करते हैं उन्हें भी काफिर कहकर मौत के घाट उतारने की पैरवी की जाती है । इसी प्रबृति की वजह से 1947 में जिहादियों ने हिन्दुओं का खून बहाकर इस देश को अपनी मातृभूमि मानने व हिन्दुओं के साथ रहने से मना कर दिया ।
o आज लगभग फिर वही स्थिति देश में बन चुकी है मुसलमानों के जिहादी प्रतिनिधियों ने वन्देमातरम् का विरोध कर भारत को अपनी मातृभूमि मानने से मना कर दिया है। सारे देश में हिन्दुबहुल क्षेत्रों व मन्दिरों में बम्ब विस्फोट कर हिन्दुओं का खून बहाकर अपने जिहादी अल्लाह को पिलाना शुरू कर दिया है ताकि बदले में ये आदमखोर जिहादी अल्लाह इनको जन्नत दे दे ।
हमें तो समझ ये नहीं आता कि जिस आदमखोर अल्लाह का पेट पूरे अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांगलादेश, कश्मीरघाटी , गोधरा में रेल के डिब्बे व आसाम के इतने सारे हिन्दुओं का खून पीकर नहीं भरा क्या उसका पेट अब मुठी भर बचे हिन्दुओं के खून से भर पाएगा। नहीं ,ऐसा सम्भव नहीं, इसी लिए दुनियाभर के विभिन्न गैर मुस्लिमों व जहां गैर मुस्लिम न मिलें वहां पर उदार मुस्लिमों के खून से भी काम चलाना पड़ रहा है।
o इस जिहादी अल्लाह को तो मानो शांतिप्रिय हिन्दुओं के शिकार का चस्का ही लग गया है क्योंकि इस जिहादी अल्लाह ने मुहम्मदबिन कासिम के रूप में भारत में प्रवेश किया और हिन्दुओं का खून पीने लगा । उसके बाद मुहम्मदगौरी, औरंगजेब व बाबर के वक्त तो ये जिहादी अल्लाह मानो पानी की जगह भी हिन्दुओं का खून ही पीने लगा।
फिर महाराणा प्रताप,छत्रपति शिवाजी,महारानी लक्ष्मीबाई, वीर तांत्यटोपे, गुरू तेगबहादुर जी, उनके बेटे श्री गुरूगोविन्द सिंह जी व उनके चार बहादुर बेटों ने इस आदमखोर जिहादी अल्लाह के दान्त तोड़कर भारत से हिन्दुओं के खून के प्यासे आदमखोर जिहादी अल्लाह को मार भगाने की बहुत कोशिश की पर अफसोस हिन्दुओं के सैकुलर गिरोह की कबूतर की तरह बन्द आँख आज तक न खुली। कभी जयचन्द पैदा हो गये तो कभी जयचन्द के बंशज सैकुलर नेता । जो हमेशा इस आदमखोर जिहादी अल्लाह व उसके द्वारा प्रेरित जिहादियों के समर्थन में खड़े नजर आए । बाकी रणबांकुरों व वीरांगनाओं की बात तो छोड़ो इन बेशर्म धर्मनिर्पेक्षतावादियों को श्री गुरूगोविन्द सिंह जी के चार-चार बेटों के बहे लहु की भी लाज न आई ।
अब सोचने की बात ये है कि जो हिन्दुओं के खून का प्यासा है वो इनसान है या शैतानी राक्षस ? स्पष्ट रूप से शैतानी राक्षस है। उसका बंशज कहलवाने में फक्र महसूस करने वाले मुस्लिम जिहादी, सैकुलर नेता व मीडिया जो हर हाल में उसका गुणगान व समर्थन करके हिन्दुओं को मरवाने के लिए अनुकूल महौल बनाकर व अफवाहें फैलाकर हिन्दुओं को आपस में लड़बाकर, मर्यादा पुरूषोतम भगवान श्री राम के अस्तित्व को नकारकर व साध्वी प्रज्ञा सिंह जैसी बीरांगनाओं व उसके नेतृत्व में इस जिहादी अल्लाह को मिटाने के लिए संघर्षरत जवानों को जेलों में डलवाकर बदनाम करने के लिए अफवाहें फैलाकर इस आदमखोर जिहादी अल्लाह को खुश रखने का लगातार प्रयास कर रहे हैं। क्या वे हिन्दुओं के खून के प्यासे आदमखोर अल्लाह से कम हैं ?
यहाँ पर यह बात गौर करने वाली है कि इस्लाम में दो तरह के अल्लाह हैं । एक वे जिसको आम देशभक्त मुसलमान अल्लाह कहता है जो शान्ति और भाईचारे की बात करता है, सूफी सन्तों को जन्म देता है, देशभक्तों ,नमक हलालों को जन्म देता है ।
दूसरा आदमखोर जिहादी अल्लाह जिसे जिहादी अल्लाह या शैतान कहते हैं जो जिहादियों को जन्म देता है जिसकी शैतानी पुस्तक में लिखा है कि गैर जिहादियों को हलाल करने से जन्नत नसीब होती है । देशद्रोह, नमक हरामी व गद्दारी जिहादियों का पहला कर्तव्य है।
यही पुस्तक 7 वीं शत्ताब्दी से आज 21 वीं शताब्दी तक भारत को लहूलुहान करती आ रही है। सुलतानों, मुगलों, औरंगजेब , बाबर, अफजल, आतिफ, अबुबशर जैसे सैतानों को जन्म देती आ रही है और हिन्दुओं का खून बहाती आ रही है भारत के टुकड़े करवाती आ रही है।
अगर मानवता भाईचारे और शांति के प्रतीक, अंतिम सांसे ले रहे, मेरे प्यारे भारत को बचाना है तो मेरे प्यारे देशभक्त नमकहलाल भारतीयों को जात-पात, ऊंचनीच, छुआछूत ,संप्रदायवाद, क्षेत्रवाद ,पार्टीवाद सब भूलाकर एकजुट होकर गुरू गुरूगोविन्द सिंह जी के मार्ग पर चलकर नमक का कर्ज चुकाकर इस आदमखोर जिहादी अल्लाह, जिहादियों व उसके कट्टर समर्थक सैकुलर गद्दारों का नामोनिशान मिटाना है ।
आज सुबह (07नवम्बर2008) हमने ये पिछला पेज लिखा और आज ही जिहादी अल्लाह के वंशज मुस्लिम जिहादियों और शांतिप्रिय मुसलमानों के बीच संघर्ष शुरु हो गया। ओसामाबिन लादेन के समर्थक मुस्लिम जिहादियों के विरूद्ध अल्लाह के वंशजों ने फतबा जारी कर दिया कि ओसामा की सोच का प्रचार प्रसार इस्लाम के विरूद्ध है ।
अल्लाह के बन्दों ने दो कदम आगे बढकर इस आदमखोर जिहादी अल्लाह के बंशज जाकिर हुसैन को व इस जिहादी द्वारा चलाए जा रहे टी वी चैनल(पीस) को मिल रहे बेशुमार पैसे की जांच करवाने की भी मांग की । भारतीयों को अमन चैन के प्रतीक अल्लाह व खूनखराबे की जड़ इस आदमखोर जिहादी अल्लाह के अन्तर को यथाशीध्र समझना होगा व अल्लाह के बन्दों का साथ देकर इस आदमखोर जिहादी अल्लाह को मिटाना होगा। नहीं तो ये सब भारतीयों को हिंसा की आग में जलाकर राख कर देगा।
आपको यह जान कर हैरत होगी कि जिस देशबिरोधी चैनल(एन डी टी वी) पर ये सब दिखाया जा रहा था उस चैनल ने अल्लाह के बन्दों का पक्ष लेने के बजाए आदमखोर जिहादी अल्लाह के जिहादी जाकिर हुसैन का पक्ष लिया ।
सोचने वाला विषय यह भी है कि जिस हिन्दुविरोधी-देशविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक सरकार ने साध्वी व उसके देश भक्त सैनिक सहयोगियों को बिना सबूत जेल में डालने में इतनी जल्दबाजी दिखाई क्या वो सरकार इस जिहादी नासिर हुसैन के कुकर्मों को रोकने के लिए कोई कदम उठा पायेगी ?
हम वर्तमान भारत में अल्पसंख्यक आयोग की प्रासंगिकता पर बात कर रहे थे ये भारत अखण्ड भारत का वो हिस्सा है जो 1947 में अखण्ड भारत को विभाजित कर मुसलमानों के लिए दिए गये दो हिस्सों के बाद बचा है। स्वाभाविक व न्यायिक रूप से यह हिस्सा इस देश के मूल निबासियों हिन्दुओं का है जिसका सही नाम हिन्दूराष्ट्र भारत ही है । जिस किसी को भी इस नाम व हिन्दुओं के अधिकार पर आपत्ति है उसे प्राकृतिक न्याय के हिसाब से इस देवभूमि भारत में रहने का कोई अधिकार नहीं है । जो भी इस देश में रह रहा है उसे इस बात को अच्छी तरह से समझ लेना होगा कि हिन्दू संस्कृति और सभ्यता ही भारतीय संस्कृति और सभ्यता है जो खुद को हिन्दू नहीं मानता वो भारतीय कैसे हो सकता है और जो भारतीय नहीं वो यहां का नागरिक नहीं आगंतुक है उसे आज नहीं तो कल हमारी मातृभूमि को छोड़ना होगा ।
अब विचार करने वाली बात यह है कि जिन मुसलमानों को हिन्दू होने पर आपत्ति थी उनके लिए अखण्ड भारत को तोड़कर पाकिस्तान ,वंगलादेश बनवा दिए गए। जो भारत में रह गए वो सभी हिन्दू हैं फिर अल्पसंख्यक आयोग की क्या जरूरत ? अगर वो खुद को हिन्दू नहीं मानते फिर यहां रहे किस लिए और अभी भी क्या बिगड़ा है सारी सीमांयें खुली हैं, बसें जा रही हैं, जब वहां से इतने सारे घुसपैठिए-जिहादी आ रहे हैं तो इनको जाने से कौन रोकेगा ?
वैसे आज जागरूक हिन्दू एक साधारण सा प्रश्न पूछता है कि क और ख दो सगे भाई हैं क और ख के माता पिता के सिर्फ दो ही बच्चे हैं क लड़-झगड़ कर माता पिता के रहते ही अपना हिस्सा अलग करवा लेता है अब माता पिता की मृत्यु होने पर बाकी का हिस्सा किस्का है ? सीधा सा उत्तर है ख का ।
वैसे हिन्दू द्वारा ये प्रश्न पूछना भी उसकी उदारता का ही प्रतीक है क्योंकि जिन जिहादीयों से ये प्रश्न पूछा जा रहा है वो तो आक्राँता है भारत उसका मूल निबास नहीं बल्कि उपनिबेस था जिसका विभाजन करवाकर उसने तीन(अफगानिस्तान,पाकिस्तान,वंगलादेश) हिस्सों को हमेसा के लिए अपना उपनिवेश बना लिया ।अब इन जिहादीयों को चाहिए कि अपने उपनिवेश में रहकर जो मरजी करें और वर्तमान भारत को न छेड़ें क्योंकि अगर जागरूक हिन्दुओं व उनके संगठनों की तरह कहीं गलती से भी इस हिन्दुविरोधी देश विरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक सैकुलर गिरोह में शामिल हिन्दुओं को भी अगर भारतीय संस्कृति और सभ्यता के विरोधी आदमखोर जिहादी अल्लाह व जिहादियों की असलिएत समझ में आ गई तो भारत तो भारत बाकी के तीन हिस्से भी इन जिहादियों को खाली करने पड़ सकते हैं ।
अब आप ही फैसला करो कि जिस इस्लाम ने अखण्ड भारत पर हमला कर कब्जा कर लिया, हिन्दुओं पर बेपनाह जुलम ढाये, संस्कृति और सभ्यता को नष्ट करने का हर सम्भव प्रयास किया, शांति और भाईचारे के प्रतीक हजारों मन्दिर तोड़े, अन्त में देश का विभाजन करवाकर उसके बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया । क्या वह इस्लाम उस अखण्ड भारत के बचे हुए छोटे से हिस्से वर्तमान भारत में अल्पसंख्यक का दर्जा पाने का हकदार है ?
o अब रही बात उन मुसलमानों की जो अल्लाह को तो मानते हैं पर आदमखोर जिहादी अल्लाह को नहीं मानते । ऐसे शांतिप्रिय देशभक्त नमकहलाल मुसलमान जो इस देश को अपनी मातृभूमि मानते हैं को अल्पसंख्यक कहना उनका अपमान है क्योंकि अपनी मातृभूमि में कोई अल्पसंख्यक कैसे हो सकता है। अब आप ही बताओ अल्पसंख्यक आयोग की क्या जरूरत है ?
आओ अब अल्पसंख्यक आयोग के दूसरे घटक ईसाईयों की बात करें । यह वही संप्रदाय है जो 16 वीं सदी में ब्यापार के बहाने भारत पर कब्जा जमाकर बैठ गया और 300 वर्ष तक इन ईसाईयों ने इस देश को जमकर लूटा । यहां के मूल निबासी हिन्दुओं व कई वर्षों से कब्जा जमाकर बैठे मुसलमानों पर इन ईसाईयों ने जी भरकर जुल्म ढाए । ये तो भला हो शहीद भगत सिंह, शहीद राजगुरू, शहीद सुखदेव, शहीद चन्दरशेखर आजाद, शहीद बाल गंगाधर तिलक , शहीद लाला लाजपतराय, शहीद विपन चन्द्र पाल जैसे अनगिनत ज्ञात और अज्ञात क्रांतिकारियों का जिनके बलिदानों ने भारतीयों के अन्दर इन अंग्रेजों को भगाने की ज्वाला को हमेसा जगाए रखा और अन्त में नेताजी सुभाष चन्द्रवोस की आजाद हिन्द सेना के डर से इन अंग्रेज ईसाईयों को भारत छोड़ कर भागना पड़ा।
क्या कहें उस नेहरू जी को जिसने दुष्ट ईसाई अफसरों व उनकी घरबालियों की दोस्ती में फंस कर उनकी नजायज बातों को मान कर देश को एक ऐसी हिन्दुविरोधी दिशा देने का अपराध किया जो आज देशद्रोहियों व गद्दारों को भारतीय संस्कृति व सभ्यता के रक्षक देशभक्त हिन्दुओं और उनके संगठनों पर हर तरह से हमला करने में सहयोग दे रही है । अब आप खुद फैसला करो कि ये ईसाई समुदाय जो भारत की बरबादी के लिए हर तरह से जिम्मेवार है क्या अल्पसंख्यक का दर्जा पाने के काबिल है ? नहीं न ।वैसे भी जिस ईसाई संप्रदाय से सबन्धित अंग्रेज इटालिएन एंटोनियो माइनो मारियो सारी की सारी भारत सरकार को गुलाम बनाकर बैठी हो व जिसके निर्देश पर गुलाम सरकार देशद्रोह के रास्ते पर चलते हुए देशभक्त साधुसंतो व सैनिकों को जेल में डाल रही हो, भारतीय संस्कृति व सभ्यता के आधार स्तम्भ मर्यादा पुर्षोतम भगवान श्री राम के अस्तित्व को नकार रही हो उस संप्रदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा देना कैसे उपयुक्त हो सकता है ?
मेरे प्यारे नासमझ हिन्दूओ क्या आपने कभी सोचा कि जिनके आप गुलाम रहे, जिन्होंने असहनीय यातनांयें देकर हिन्दुओं को सताया, हिन्दुओं को हर अधिकार से वंचित किया, आज वो ही इन गद्दार हिन्दुविरोधी नेताओं द्वारा अल्पसंख्यक का दर्जा देकर विशेषाधिकार के अधिकारी कैसे वना दिए गए।
जिस मजहब का संचालन आज भी भारत के बजाए इटली के रोम से होता हो ,जिस संप्रदाय के अनुयायी हिन्दुओं के धार्मिक गुरू व समाज सेवक स्वामी लक्ष्मणानन्द जी का कत्ल करने का दुस्साहस कर सकते हों । इसके परिणामस्वरूप पड़ी मार पर संसार के अधिकतर ईसाई देशों में हिन्दुओं के विरूद्ध महौल बनाने व भारत विरोधी प्रदर्शन करवाने में समर्थ हों उन्हें अल्पसंख्यक दर्जे की क्या जरूरत ?
ये लेख हमने मंबई हमले से पहले भारतभर में मुसलिम आतंकवादियों द्वरा किए जा रहे हमलों के दौरान लिखा था। विना किसी पूर्वागरह से ।एक तरफ हमारी नजर में मुसलिम आतंकवादीयों और उनके समर्थकों का बहुमत था तो दूसरी तरफ वो मुसलिम जो कभी अलगाववाद की न वात करते हैं न समर्थन।
देश को बचाने के लिए इन दोनों ही प्रावधानों को यथाशीघ्र समाप्त किया जाना परम आवश्यक है नहीं तो ये देशद्रोही हिन्दुविरोधी गद्दारों का सेकुलर गिरोह अल्पसंख्यकवाद व धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में भारतीय सभ्यता व संस्कृति को तबाह कर, न जाने देश के कितने टुकड़े और करवा देगा । जिसका परिणाम हिन्दुओं को यहूदीयों की तरह दर-दर की ठोकरें खानें या फिर मरने पर मजबूर कर देगा । क्योंकि 9वीं शत्ताब्दी में अफगानिस्तान व 20वीं शताब्दी में पाकिस्तान बांगलादेश बनने पर जो हिन्दू जिहादियों के हमलों से बच निकले वो भागकर भारत आ गये पर अगर वर्तमान भारत भी न रहा तो कहाँ जाँएगे ?
लोग कहते हैं युनान मिश्र रोमां सब मिट गये।
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी।।
पर यह भी सत्य है कि
उस कौम का इतिहास नहीं होता।
जिसको मिटने का एहसास नहीं होता।।
संभल कर एकजुट होकर कदम उठाओ ए हिन्दूओ ।।।
बर्ना तुम्महारी दास्तान तक न होगी दास्तानों में।।।।
आओ जरा भारत में अल्पसंख्यक बनाए गए घटकों का वही खाता खंगाले। वास्तव में अल्पसंख्यक आयोग का गठन ही मुसलमानों को विशेषाधिकार देने के उद्देश्य से किया गया था । ये मुसलमान ही इस आयोग के प्रमुख नीति-निर्धारक हैं । ये मुसलमान वही है जिनके भले के लिए 1947 में संप्रदाय के आधार पर अखण्ड भारत का विभाजन करवाकर वर्तमान पाकिस्तान बांगलादेश बनाए गये जो कि मुसलमानों के लिए हैं ।
o पाकिस्तान, बांगलादेश बनाने का कारण भी कोई दबा छुपा नहीं है सबको जानकारी है कि इस्लाम एक तरफ सूफी सन्तों को जन्म देता है जो भाईचारे की बात कर, अब्दुल हमीद को जन्म देते हैं । पर उससे हजारों गुना ज्यादा इस्लाम के नाम पर ऐसी राक्षसी प्रबृतियों का जन्म होता है जो इस्लाम के सिबा और किसी विश्वास के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करतीं। यहाँ तक जो मुस्लिम होने के बावजूद कत्लोगारद का विरोध या निन्दा करते हैं उन्हें भी काफिर कहकर मौत के घाट उतारने की पैरवी की जाती है । इसी प्रबृति की वजह से 1947 में जिहादियों ने हिन्दुओं का खून बहाकर इस देश को अपनी मातृभूमि मानने व हिन्दुओं के साथ रहने से मना कर दिया ।
o आज लगभग फिर वही स्थिति देश में बन चुकी है मुसलमानों के जिहादी प्रतिनिधियों ने वन्देमातरम् का विरोध कर भारत को अपनी मातृभूमि मानने से मना कर दिया है। सारे देश में हिन्दुबहुल क्षेत्रों व मन्दिरों में बम्ब विस्फोट कर हिन्दुओं का खून बहाकर अपने जिहादी अल्लाह को पिलाना शुरू कर दिया है ताकि बदले में ये आदमखोर जिहादी अल्लाह इनको जन्नत दे दे ।
हमें तो समझ ये नहीं आता कि जिस आदमखोर अल्लाह का पेट पूरे अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांगलादेश, कश्मीरघाटी , गोधरा में रेल के डिब्बे व आसाम के इतने सारे हिन्दुओं का खून पीकर नहीं भरा क्या उसका पेट अब मुठी भर बचे हिन्दुओं के खून से भर पाएगा। नहीं ,ऐसा सम्भव नहीं, इसी लिए दुनियाभर के विभिन्न गैर मुस्लिमों व जहां गैर मुस्लिम न मिलें वहां पर उदार मुस्लिमों के खून से भी काम चलाना पड़ रहा है।
o इस जिहादी अल्लाह को तो मानो शांतिप्रिय हिन्दुओं के शिकार का चस्का ही लग गया है क्योंकि इस जिहादी अल्लाह ने मुहम्मदबिन कासिम के रूप में भारत में प्रवेश किया और हिन्दुओं का खून पीने लगा । उसके बाद मुहम्मदगौरी, औरंगजेब व बाबर के वक्त तो ये जिहादी अल्लाह मानो पानी की जगह भी हिन्दुओं का खून ही पीने लगा।
फिर महाराणा प्रताप,छत्रपति शिवाजी,महारानी लक्ष्मीबाई, वीर तांत्यटोपे, गुरू तेगबहादुर जी, उनके बेटे श्री गुरूगोविन्द सिंह जी व उनके चार बहादुर बेटों ने इस आदमखोर जिहादी अल्लाह के दान्त तोड़कर भारत से हिन्दुओं के खून के प्यासे आदमखोर जिहादी अल्लाह को मार भगाने की बहुत कोशिश की पर अफसोस हिन्दुओं के सैकुलर गिरोह की कबूतर की तरह बन्द आँख आज तक न खुली। कभी जयचन्द पैदा हो गये तो कभी जयचन्द के बंशज सैकुलर नेता । जो हमेशा इस आदमखोर जिहादी अल्लाह व उसके द्वारा प्रेरित जिहादियों के समर्थन में खड़े नजर आए । बाकी रणबांकुरों व वीरांगनाओं की बात तो छोड़ो इन बेशर्म धर्मनिर्पेक्षतावादियों को श्री गुरूगोविन्द सिंह जी के चार-चार बेटों के बहे लहु की भी लाज न आई ।
अब सोचने की बात ये है कि जो हिन्दुओं के खून का प्यासा है वो इनसान है या शैतानी राक्षस ? स्पष्ट रूप से शैतानी राक्षस है। उसका बंशज कहलवाने में फक्र महसूस करने वाले मुस्लिम जिहादी, सैकुलर नेता व मीडिया जो हर हाल में उसका गुणगान व समर्थन करके हिन्दुओं को मरवाने के लिए अनुकूल महौल बनाकर व अफवाहें फैलाकर हिन्दुओं को आपस में लड़बाकर, मर्यादा पुरूषोतम भगवान श्री राम के अस्तित्व को नकारकर व साध्वी प्रज्ञा सिंह जैसी बीरांगनाओं व उसके नेतृत्व में इस जिहादी अल्लाह को मिटाने के लिए संघर्षरत जवानों को जेलों में डलवाकर बदनाम करने के लिए अफवाहें फैलाकर इस आदमखोर जिहादी अल्लाह को खुश रखने का लगातार प्रयास कर रहे हैं। क्या वे हिन्दुओं के खून के प्यासे आदमखोर अल्लाह से कम हैं ?
यहाँ पर यह बात गौर करने वाली है कि इस्लाम में दो तरह के अल्लाह हैं । एक वे जिसको आम देशभक्त मुसलमान अल्लाह कहता है जो शान्ति और भाईचारे की बात करता है, सूफी सन्तों को जन्म देता है, देशभक्तों ,नमक हलालों को जन्म देता है ।
दूसरा आदमखोर जिहादी अल्लाह जिसे जिहादी अल्लाह या शैतान कहते हैं जो जिहादियों को जन्म देता है जिसकी शैतानी पुस्तक में लिखा है कि गैर जिहादियों को हलाल करने से जन्नत नसीब होती है । देशद्रोह, नमक हरामी व गद्दारी जिहादियों का पहला कर्तव्य है।
यही पुस्तक 7 वीं शत्ताब्दी से आज 21 वीं शताब्दी तक भारत को लहूलुहान करती आ रही है। सुलतानों, मुगलों, औरंगजेब , बाबर, अफजल, आतिफ, अबुबशर जैसे सैतानों को जन्म देती आ रही है और हिन्दुओं का खून बहाती आ रही है भारत के टुकड़े करवाती आ रही है।
अगर मानवता भाईचारे और शांति के प्रतीक, अंतिम सांसे ले रहे, मेरे प्यारे भारत को बचाना है तो मेरे प्यारे देशभक्त नमकहलाल भारतीयों को जात-पात, ऊंचनीच, छुआछूत ,संप्रदायवाद, क्षेत्रवाद ,पार्टीवाद सब भूलाकर एकजुट होकर गुरू गुरूगोविन्द सिंह जी के मार्ग पर चलकर नमक का कर्ज चुकाकर इस आदमखोर जिहादी अल्लाह, जिहादियों व उसके कट्टर समर्थक सैकुलर गद्दारों का नामोनिशान मिटाना है ।
आज सुबह (07नवम्बर2008) हमने ये पिछला पेज लिखा और आज ही जिहादी अल्लाह के वंशज मुस्लिम जिहादियों और शांतिप्रिय मुसलमानों के बीच संघर्ष शुरु हो गया। ओसामाबिन लादेन के समर्थक मुस्लिम जिहादियों के विरूद्ध अल्लाह के वंशजों ने फतबा जारी कर दिया कि ओसामा की सोच का प्रचार प्रसार इस्लाम के विरूद्ध है ।
अल्लाह के बन्दों ने दो कदम आगे बढकर इस आदमखोर जिहादी अल्लाह के बंशज जाकिर हुसैन को व इस जिहादी द्वारा चलाए जा रहे टी वी चैनल(पीस) को मिल रहे बेशुमार पैसे की जांच करवाने की भी मांग की । भारतीयों को अमन चैन के प्रतीक अल्लाह व खूनखराबे की जड़ इस आदमखोर जिहादी अल्लाह के अन्तर को यथाशीध्र समझना होगा व अल्लाह के बन्दों का साथ देकर इस आदमखोर जिहादी अल्लाह को मिटाना होगा। नहीं तो ये सब भारतीयों को हिंसा की आग में जलाकर राख कर देगा।
आपको यह जान कर हैरत होगी कि जिस देशबिरोधी चैनल(एन डी टी वी) पर ये सब दिखाया जा रहा था उस चैनल ने अल्लाह के बन्दों का पक्ष लेने के बजाए आदमखोर जिहादी अल्लाह के जिहादी जाकिर हुसैन का पक्ष लिया ।
सोचने वाला विषय यह भी है कि जिस हिन्दुविरोधी-देशविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक सरकार ने साध्वी व उसके देश भक्त सैनिक सहयोगियों को बिना सबूत जेल में डालने में इतनी जल्दबाजी दिखाई क्या वो सरकार इस जिहादी नासिर हुसैन के कुकर्मों को रोकने के लिए कोई कदम उठा पायेगी ?
हम वर्तमान भारत में अल्पसंख्यक आयोग की प्रासंगिकता पर बात कर रहे थे ये भारत अखण्ड भारत का वो हिस्सा है जो 1947 में अखण्ड भारत को विभाजित कर मुसलमानों के लिए दिए गये दो हिस्सों के बाद बचा है। स्वाभाविक व न्यायिक रूप से यह हिस्सा इस देश के मूल निबासियों हिन्दुओं का है जिसका सही नाम हिन्दूराष्ट्र भारत ही है । जिस किसी को भी इस नाम व हिन्दुओं के अधिकार पर आपत्ति है उसे प्राकृतिक न्याय के हिसाब से इस देवभूमि भारत में रहने का कोई अधिकार नहीं है । जो भी इस देश में रह रहा है उसे इस बात को अच्छी तरह से समझ लेना होगा कि हिन्दू संस्कृति और सभ्यता ही भारतीय संस्कृति और सभ्यता है जो खुद को हिन्दू नहीं मानता वो भारतीय कैसे हो सकता है और जो भारतीय नहीं वो यहां का नागरिक नहीं आगंतुक है उसे आज नहीं तो कल हमारी मातृभूमि को छोड़ना होगा ।
अब विचार करने वाली बात यह है कि जिन मुसलमानों को हिन्दू होने पर आपत्ति थी उनके लिए अखण्ड भारत को तोड़कर पाकिस्तान ,वंगलादेश बनवा दिए गए। जो भारत में रह गए वो सभी हिन्दू हैं फिर अल्पसंख्यक आयोग की क्या जरूरत ? अगर वो खुद को हिन्दू नहीं मानते फिर यहां रहे किस लिए और अभी भी क्या बिगड़ा है सारी सीमांयें खुली हैं, बसें जा रही हैं, जब वहां से इतने सारे घुसपैठिए-जिहादी आ रहे हैं तो इनको जाने से कौन रोकेगा ?
वैसे आज जागरूक हिन्दू एक साधारण सा प्रश्न पूछता है कि क और ख दो सगे भाई हैं क और ख के माता पिता के सिर्फ दो ही बच्चे हैं क लड़-झगड़ कर माता पिता के रहते ही अपना हिस्सा अलग करवा लेता है अब माता पिता की मृत्यु होने पर बाकी का हिस्सा किस्का है ? सीधा सा उत्तर है ख का ।
वैसे हिन्दू द्वारा ये प्रश्न पूछना भी उसकी उदारता का ही प्रतीक है क्योंकि जिन जिहादीयों से ये प्रश्न पूछा जा रहा है वो तो आक्राँता है भारत उसका मूल निबास नहीं बल्कि उपनिबेस था जिसका विभाजन करवाकर उसने तीन(अफगानिस्तान,पाकिस्तान,वंगलादेश) हिस्सों को हमेसा के लिए अपना उपनिवेश बना लिया ।अब इन जिहादीयों को चाहिए कि अपने उपनिवेश में रहकर जो मरजी करें और वर्तमान भारत को न छेड़ें क्योंकि अगर जागरूक हिन्दुओं व उनके संगठनों की तरह कहीं गलती से भी इस हिन्दुविरोधी देश विरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक सैकुलर गिरोह में शामिल हिन्दुओं को भी अगर भारतीय संस्कृति और सभ्यता के विरोधी आदमखोर जिहादी अल्लाह व जिहादियों की असलिएत समझ में आ गई तो भारत तो भारत बाकी के तीन हिस्से भी इन जिहादियों को खाली करने पड़ सकते हैं ।
अब आप ही फैसला करो कि जिस इस्लाम ने अखण्ड भारत पर हमला कर कब्जा कर लिया, हिन्दुओं पर बेपनाह जुलम ढाये, संस्कृति और सभ्यता को नष्ट करने का हर सम्भव प्रयास किया, शांति और भाईचारे के प्रतीक हजारों मन्दिर तोड़े, अन्त में देश का विभाजन करवाकर उसके बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया । क्या वह इस्लाम उस अखण्ड भारत के बचे हुए छोटे से हिस्से वर्तमान भारत में अल्पसंख्यक का दर्जा पाने का हकदार है ?
o अब रही बात उन मुसलमानों की जो अल्लाह को तो मानते हैं पर आदमखोर जिहादी अल्लाह को नहीं मानते । ऐसे शांतिप्रिय देशभक्त नमकहलाल मुसलमान जो इस देश को अपनी मातृभूमि मानते हैं को अल्पसंख्यक कहना उनका अपमान है क्योंकि अपनी मातृभूमि में कोई अल्पसंख्यक कैसे हो सकता है। अब आप ही बताओ अल्पसंख्यक आयोग की क्या जरूरत है ?
आओ अब अल्पसंख्यक आयोग के दूसरे घटक ईसाईयों की बात करें । यह वही संप्रदाय है जो 16 वीं सदी में ब्यापार के बहाने भारत पर कब्जा जमाकर बैठ गया और 300 वर्ष तक इन ईसाईयों ने इस देश को जमकर लूटा । यहां के मूल निबासी हिन्दुओं व कई वर्षों से कब्जा जमाकर बैठे मुसलमानों पर इन ईसाईयों ने जी भरकर जुल्म ढाए । ये तो भला हो शहीद भगत सिंह, शहीद राजगुरू, शहीद सुखदेव, शहीद चन्दरशेखर आजाद, शहीद बाल गंगाधर तिलक , शहीद लाला लाजपतराय, शहीद विपन चन्द्र पाल जैसे अनगिनत ज्ञात और अज्ञात क्रांतिकारियों का जिनके बलिदानों ने भारतीयों के अन्दर इन अंग्रेजों को भगाने की ज्वाला को हमेसा जगाए रखा और अन्त में नेताजी सुभाष चन्द्रवोस की आजाद हिन्द सेना के डर से इन अंग्रेज ईसाईयों को भारत छोड़ कर भागना पड़ा।
क्या कहें उस नेहरू जी को जिसने दुष्ट ईसाई अफसरों व उनकी घरबालियों की दोस्ती में फंस कर उनकी नजायज बातों को मान कर देश को एक ऐसी हिन्दुविरोधी दिशा देने का अपराध किया जो आज देशद्रोहियों व गद्दारों को भारतीय संस्कृति व सभ्यता के रक्षक देशभक्त हिन्दुओं और उनके संगठनों पर हर तरह से हमला करने में सहयोग दे रही है । अब आप खुद फैसला करो कि ये ईसाई समुदाय जो भारत की बरबादी के लिए हर तरह से जिम्मेवार है क्या अल्पसंख्यक का दर्जा पाने के काबिल है ? नहीं न ।वैसे भी जिस ईसाई संप्रदाय से सबन्धित अंग्रेज इटालिएन एंटोनियो माइनो मारियो सारी की सारी भारत सरकार को गुलाम बनाकर बैठी हो व जिसके निर्देश पर गुलाम सरकार देशद्रोह के रास्ते पर चलते हुए देशभक्त साधुसंतो व सैनिकों को जेल में डाल रही हो, भारतीय संस्कृति व सभ्यता के आधार स्तम्भ मर्यादा पुर्षोतम भगवान श्री राम के अस्तित्व को नकार रही हो उस संप्रदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा देना कैसे उपयुक्त हो सकता है ?
मेरे प्यारे नासमझ हिन्दूओ क्या आपने कभी सोचा कि जिनके आप गुलाम रहे, जिन्होंने असहनीय यातनांयें देकर हिन्दुओं को सताया, हिन्दुओं को हर अधिकार से वंचित किया, आज वो ही इन गद्दार हिन्दुविरोधी नेताओं द्वारा अल्पसंख्यक का दर्जा देकर विशेषाधिकार के अधिकारी कैसे वना दिए गए।
जिस मजहब का संचालन आज भी भारत के बजाए इटली के रोम से होता हो ,जिस संप्रदाय के अनुयायी हिन्दुओं के धार्मिक गुरू व समाज सेवक स्वामी लक्ष्मणानन्द जी का कत्ल करने का दुस्साहस कर सकते हों । इसके परिणामस्वरूप पड़ी मार पर संसार के अधिकतर ईसाई देशों में हिन्दुओं के विरूद्ध महौल बनाने व भारत विरोधी प्रदर्शन करवाने में समर्थ हों उन्हें अल्पसंख्यक दर्जे की क्या जरूरत ?
ये लेख हमने मंबई हमले से पहले भारतभर में मुसलिम आतंकवादियों द्वरा किए जा रहे हमलों के दौरान लिखा था। विना किसी पूर्वागरह से ।एक तरफ हमारी नजर में मुसलिम आतंकवादीयों और उनके समर्थकों का बहुमत था तो दूसरी तरफ वो मुसलिम जो कभी अलगाववाद की न वात करते हैं न समर्थन।
सैनिकों के खून की प्यासी केन्द्र सरकार पर देशभक्त बलागरस के साथ सीधी बात
भारत के शत्रुओं द्वारा भारत के देशभक्त लोगों/सैनिकों पर हमला करना कोई नई बात नहीं लेकिन सरकार का फर्ज है देश के शत्रुओं के साथ सख्ती से निपटना व देशद्रोह करने वाले हर ब्यक्ति/संस्था का नमोनिशान मिटाना । शत्रु चाहे देश के अन्दर हो या बाहर । पर भारत में आज एक ऐसी सरकार है जिसका हर कदम चीख-चीख कर उसकी गद्दारी की दास्तां बयान कर रहा है।सरकार ने सता में आते ही देश के लिए शहीद होने पर अर्धसैनिकबलों को मिलने वाली राशी ये कहकर कम कर दी कि सरकार के पास पैसा नहीं है। आतंकवादियों के विरूद्ध सुरक्षबलों के कारगर हथियार पोटा को ये कहकर निरस्त कर दिया कि जिन आतंकवादियों को पोटा के तहत सजा मिल रही हैं वो इसलिए निर्दोश हैं क्योंकि सेकुलर गिरोह को उनके वोट की सख्त जरूरत है। बात बढ़ते-बढ़ते यहां तक जा पहूंची कि माननीय सर्वोच्चन्यायालय द्वारा फांसी की सजा प्राप्त आतंकवादी भी सेकुलर गिरोह को निर्दोश नजर आया परिणामस्वारूप सरकार उस आतॉंकवादी को मिलने वाली फांसी आज तक रोके हुए है। ध्यान रहे कि इन आतंकवादियों से इन हिजड़े नेताओं की रक्षा करने के लिए सुरक्षाबलों के दर्जनों जवानों ने अपनी शहीदी दी थी पर इन गद्दार सेकुलर नेताओं ने उनकी कुर्वानी का शिला उनके कातिल की फांसी रोक कर दिया। आप सबके सामने शहीद मोहन चन्द शर्मा जी ने अपने देश के नागरिकों की जान-माल की रक्षा की खातिर अपने प्राण दे दिए पर वेशर्म गद्दार अमरसिंह ने उस शहीद ता अपमान सबके सामने किया । जब उस शीहद पर हमला करने वाला आतंकवादी सहजाद पकड़ा गया तो कांग्रेस के महासचिव गद्दार दिगविजय सिंह ने उस आतंकवादी के घर जाकर आतंकवादियो को खुला संदेश दिया कि आप चाहे जितने मर्जी सैनिकों को शहीद करो सेकुलर सरकार आपके साथ है आपका कोई कुछ नहीं विगाड़ सकता। अपनी वबात को अंजाम तक पहंचाने के लिए गद्दारों के सरदार राहुल नेहरू का आजमगढ़ दौरा भी निश्चित करवाया। इन सारी बातों को लिखने से हमारा अभिप्राय सिर्फ इतना है कि ये सैकुलर सरकार हर तरह से आतंकवादियों के अनुकूल बाताबरण बनाने में जुटी है।
एक तरफ इस गद्दारों की सरकार ने आतंकवादियों से निपटने वाले सबके सब कानून कमजोर कर डाले दूसरी तरफ देशहित में आतंकवादियों के विरूद्ध माननीय न्यायालय द्वारा दिए दए निर्णय रोक डाले। तीसरी तरफ भारत के शत्रुओं के पैसे पर पलने वाले एनजीओ + नकली मानवाधिकार संगठनों + देशविरोधी मिडीया+गद्दार परजीवियों+ आतंकवादियों के मददगार फिल्म निर्माताओं के सहयोग से सरकार ने मानवाधिकारों के नाम पर आतंकवादियों के अधिकारों का ऐसा ढिंढोरा पीटा कि खुद सरकार ने जनता को अपने सैनिकों को मरवाने के लिए मानसिक रूप से त्यार कर दिया। आज सरकार ने सैनिकों चाहे वो सेना के हों या फिर अर्ध सैनिक बलों के हाथ इस तरह से बांध दिए हैं कि वो निर्दोष नागरिकों की तो क्या अपने जवानों तक की रक्षा कर पाने में असफल हैं। क्योंकि कशमीर से कन्याकुमारी तक व पूर्व से पश्चिम तक सेना के उपर इस हद तक दबाब बना दिया गया है कि मानवाधिकार पहले हैं और देश की रक्षा वाद में। आज अगर कोई सैनिक देश की रक्षा की खातिर किसी आतंकवादी को मार देता है तो उसे ये खुद सिद्ध करना है कि मारा गया ब्यक्ति आतंकवादी था।और ये सिद्ध करने के लिए प्रमाण जुटाने का उस सैनिक के पास कोई संगठन नहीं ।कशमीर जैसे राज्यों में प्रमाण जुटाने का जिम्मा उस पुलिस पर है जो खुद आतंकवादियों से भरी पड़ी है। पश्मिम बंगाल में डी आई जी स्तर का अधिकारी खुद यह कहते हुए जनता के सामने आ चुका है कि वहां का मुख्यामन्त्री व सरकार माओवादियों को तकनिकी सहायता पलब्ध करवा रहे हैं जिसके परिणामस्वारूप अर्धसैनिक बलों का कैंप एक ऐसा भीड़-भाड़ वाली जगह पर लगवाया गया था जहां पर युद्धकरना लगभग असम्भव था क्योकि युद्ध की स्थिति में आस-पास के नागरिक मारे जाते ।इस कैंप को यहां न लगाने की सलाह बड़े अधिकारी ने दी लेकिन मुख्यामन्त्री के चहेते एस.पी ने अपने बड़े अधिकारी की बात मानने से इन कार कर दिया ।परिणाम स्वारूप माओवादी आतंकवादियों ने 26 सुरक्षाबलों के सैनिकों को जिंदा जला दिया। अभी 04-04-2010 को खुद गृहमन्त्री ने ये बात स्वीकार की पश्चिम बंगाल सरकार वांमपंथी आतंकवादियों के साथ मिली हुई है इसलिए सख्ती से निपटने में सहयोग नहीं कर रही है। बैसे भी देश का बच्चा-बच्चा जानता है कि ये लाल आतंकवाद चीन के ईसारे पर CPM+CPI+SFI+CPM(m) संगठनों द्वारा देशभर में फैलाय जा रहा है। अगर सरकार सच में लाल आतंकवाद से निपटने के प्रति गम्मभीर है तो उसे सबसे पहले इन संगठनों से निपटना होगा क्योंकि इन्हीं संगठनों के माध्यम से माओवादी आतंकवादी अपनी गतिविधियों का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। जिसका प्रमाण उसवक्त मिला जब नेपाल मे माओवादियों की सरकार बनवाने के लिए सीता राम येचुरी खुद वहां गए। नेपाल में माओवादी आतंकवादियों की सरकार वनवाने के लिए इसी सेकुलर गिरोह की सरकार ने भारत की मित्र नेपाली सेना को हथियारों की सपलाई बन्द कर दी थी। जो लोग नेपाल में माओवादी आतंकवादियों की सरकार बनबाने के लिए ऐसे देशविरोधी कदम उठा सकते हैं वो भला अपने देश में इन आतंवादियों को अपने द्वारा सासित राज्यों में कौन सी मदद नहीं पहूंचा रहे होंगे।
खुद गृह मन्त्री जब लालगढ़ गय़ तो इनका विरोध इन्हीं संगठनों की सहायता से त्यार एक तथाकथित बुद्धिजीवीयों(परजिवीयों) के गिरोह ने कि या । इसी गिरोह ने कुछ दिन पहले वहां एक रेलगाड़ी को बन्धक भी बनाया था।
आपको याद होगा कि कल ही गृहमन्त्र चितमवरम जी ने ये ब्यान दिया था कि माओवादी आतंकवादियों के विरूद्ध सेना का प्रयोग नहीं किया जायेगा ।उस मूर्ख गृहमन्त्री से कोई पूछे कि जब माओवादी आतंकवादी देश के विरूद्ध युद्ध की घोषणा किए हुए हैं तो सेना का प्रयोग करने में दिक्कत क्या है और अगर सेना का प्रयोग नहीं भी करना है तो ये आतंकवादियों को बताकर उनका हौसला बढ़ाने की क्या जरूरत है? आपने माहराष्ट्र एटीएस प्रमुख श्री रघुवंशी जी को सिर्फ इसलिए हटा दिया क्योंकि उन्होंने आतंकवादियों के नाम जनता को बता दिए आपने अपनी ही सरकार द्वारा लड़ी जा रही लड़ाई की योजना आतंकवादियो के सामने रख दी आपको क्यों इस पद से नहीं हटाया जाना चाहिए पर हटाएगा कौन क्योंकि आपके ऐसे ब्यान देश के शत्रुओं का हौसला बढ़ाते है जो एंटोनियो को अच्छा लगता है।
आप सबको याद होगा कि पिछले दिनों भारतीय वायुसेना ने आत्मरक्षा के लिए आतंकवादियों पर गोली चलाने का अधिकार मांगा था जिसे देने में इस देशविरोधी सरकार ने हरप्रकार की आना कानी की थी । अब आप बताओ जब सेना को खुद की रक्षा में गोली चलाने का अधिकार मांगने पर भी आनाकानी की जाती है तो भला सेना आतंकवादियों का पता लगाते हगी उन पर हमला कर सके ऐसा अधिकार कैसे मिल सकता है ।सुरक्षबल पहले आतंकवादियों का पता लगांयेगे फिर उनके मानबाधिकार सुरक्षित करने के लिए वहां के नेताओं के गुलाम DC/SDM/ADM को सूचित करेंगे फिर ये अफसर अपने आका हिजड़े नेताओं को सूचित करेंगे फिर आतंककवादियों पर गोली चलाने का अधिकार क्यों चाहिए इस पर सवाल जबाब होगा तब तक आतंकवादी सुरक्षावलों को मारकर अपने मित्र नेताओं के घर में जाकर छुप चुके होंगे। इन्हीं सब प्रतिबन्धों का परिणाम है कि आज आज 75 से अधिक CRPF जवानों को मौत के घाट उतारा गया ।दुख की बात यह है कि इन जवानों को शहीद होने से पहले युद्ध करने का मौका भी नहीं मिला।अभी दो दिन पहले 11 सैनिकों को इन्हीं वांमपंथी आतंकवादियों ने शहीद किया था । बैसे भी कशमीर से कन्याकुमारी तक सुरक्षा बलों पर मिडिया द्वार मानवाधिकारों के नाम पर आतंकवादियों को बचाने के लिए जिस तरह हमला वोला जा रहा है ऐसो महौल में कौन सैनिक आतंकवादियों पर गोली चलाकर अपने बच्चों को भूखा मारने का दुस्साहस करेगा । जिस सोराबुदीन के नाम पर आज तक बंजारा जैसे बहादुर अफसरों पर अत्याचार किए जा रहे हैं उस आतंकवादी के घर से दर्जनों एके 47 व हैंडग्रेनेड मिले थे।मुम्बई मे दाऊद जैसे आतॆंकवादियों को खुश करने के लिए उनके पालतु नेताओं ने कितने ही सार्प सूटरों को नौकरी से निकलवाकर उन पर मनघड़ंत आरोप लगवाये।कशमीर में अक्सर महिलाओं से बालात्कार का आरोप लगाकर सैनिकों को निशाना बनाया जाता रहा है।अभी हाल ही मे ये सिद्ध हो चुका है कि जिन महिलाओं की बात कर सैनिकों को बदनाम करने की कोशिश की जा रही थी उनके साथ रेप नहीं हुआ था।
हमारे देशभक्त बलागर भाईयों से सिर्फ इतनी विनती है कि अगर हो सके तो शुक्रवार तक अपने लेख सिर्फ आतंकवाद पर केन्द्रित करें ।इन लेखों के माध्यम से हम आतंकवाद से कैसे निपटा जा सकता है पर एक राय बनाने की कोशिस करें अगर हो सके तो ये भी बताने की कोशिश करें कि आतंकवादियों से निपटने में देशभक्त ब्लागरस क्या योगदान कर सकते हैं और कैसे। आओ मिलकर गद्दारों का पर्दाफास कर उनका सर्वनाश करें।
अन्त में मानीय गृहमन्त्री जी को आतंकवादियों से निपतने के लिए कुछ सुझाब
• सबसे पहले उन लोगों को मौत के घाट उतारा जाए जो आतंकवादियों के समर्थन में वोलते या लिखते हैं।
• आतंकवादियों के अनुकूल महौल बनाने में समाचार चैनलों की भूमिका की जांच करवाकर उनके विरूद्ध कठोर से कठोर कार्यावाही अमल में लाई जाए।
• NDTV जो कि आतंकवादियों के अनुकूल बाताबरण बनाने में हर मर्यादा तोड़ चुका है के विरूद्ध विना कोई समय गवाए कार्यावाही अमल में लाई जाए।
• पाकिस्तान समर्थक आतंकवादियों व वांमपंथी आतंकवादियों के रिस्तों को जनता के सामने रखकर कर दोनों के विरूद्ध विना न्यायलय में जाए ON THE SPOT कार्यावाही अमल में लाई जाए।
• गौतम नबलखा,विजय त्रिवेदी,महेशभट्ट ,माजिद मैनन,अबु हाजमी,ओबैसी ,एच के दुआ ,वाई पी सिंह जैसे लोगों के आतंकवादियों के साथ सहानुभूति के कारणों का पता लागाया जाए व इनके विरूद्ध कठोर से कठोर कार्यावाही अमल में लाई जाए।
• समाचार चैनलों ,पत्र-पत्रिकाओं, समाचार पत्रों पर सैनिकों के विरूद्ध कुछ भी कहने पर यथाशीघ्र प्रतिबन्ध लगाया जाए।
• आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त पाये जाने वाले गद्दारों के लिए कम से कम फांसी की सजा तय की जाए।
• हर उस ब्यक्ति को आतंकवादी मान जाए जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से आतंकवादियों का मददगार पाया जाए।
• देश के अन्दर व बाहर के बलागरस के लेखों की जांच पड़ताल कर देशभक्तों और गद्दारों को चिहनित कर गद्दारों को मौत के घाट उतारा जाए।
• गृहमन्त्री जी आतंकवाद को खत्म कर ने की पहली सीढ़ी उनके समर्थकों ,पोषकों ,बैचारिक मित्रों को खत्म करना है।
अन्त में सैनिकों से यही कहेंगे कि अगर सरकार ये कदम नहीं उठाती है तो गद्दार नेताओं को गोली मारकर सता अपने हाथ में लेकर देश के अन्दर और बाहर के शत्रुओं को मिटाकर भारत को गद्दारों से मुक्त किया जाए।भारत का हर देशभक्त आपको अपने साथ खड़ा मिलेगा ।
सोमवार, 5 अप्रैल 2010
जो जानवर अपने हर लेख में भारतीय संस्कृति के आस्था के प्रतीकों पर झूठे व अभद्र आरोप लगाकर प्रहार करते हैं उसके लेखों पर प्रतिक्रिया देना क्या उसके द्वारा फैलाई जा रही बकवास को बढ़ावा देने के समान नहीं ?
हम जब लखनऊ ब्लागर ऐसोसियेसन पर गए तो हमने सोचा कि हम अपने से अलग सोच रखने वालों से चर्चा-परिचर्चा करेंगे ।लेकिन वहां तो अधिकतर ऐसे लेख आने लगे जिनका एक मात्र सार भारतीय संस्कृति का नाम लेकर भारतीय संस्कृति को ही लांछित करना था। पहले हमने सोचा कि हम इसका जबाब देंगे लेकिन फिर ख्याल आया कि क्या जबाब देंगे जैसे वो भारतीय संस्कृति के आस्था के प्रतीकों को गाली निकाल रहे हैं बैसे ही हमें अरब देशों के आस्था के प्रतीकों को गाली निकालनी पड़ेगी। जो हमारे स्वभाव के विपरीत है ।हम तो यहां सिर्फ उन बातों का प्रतिकार करने के लिए हैं जो हमारे अपने देश में हमें ही मौत के घाट उतारने के लिए उपयोग हो रही है ।उस तर्कविहीन चर्चा से बचने के लिए हमने लखनऊ बलागर ऐसोसियन छोड़ दी।
लोकिन हम देख रहे हैं कि बलागवाणी पर भी ऐसे हिन्दूविरोधी जानवरों के तर्कविहीन बकबास को काफी देशभक्त लोग भी अपनी बहुमूल्य टिप्पणी लिख कर सम्मानित कर रहे हैं।हम ये तो नहीं मान सकते कि ये लोग इनके भ्रमित करने वाले शीर्षकों में उलझ कर उस बकवास पर कलिक कर देते हैं। हमारे इन मित्रों को सोचना चाहिए कि ये जानवर ऐसे भ्रमित करने वाले शीर्षक बनाते ही इसलिए हैं ताकि इनको प्रचार मिले और जब हम ऐसे लेख पर कलिक करते हैं तो ये अपने मकसद में सफल हो जाते हैं।आपकी टिप्पणी पक्ष में है या विपक्ष में इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।हमारे विचार में सिर्फ तरकपूर्ण वातों पर ही टिपणी की जानी चाहिए और तरकहीन बकवास पर न तो क्लिक करना चाहिए नही उस पर टिप्पणी की जानी चाहिए।जिन बलागों पर लगातार ऐसी बकवास लिखी जा रही है उनका वहिसकार करना चाहिए।
अनेक जागरूक भाई तो इन जानवरों द्वारा फैलाई जा रही बकवास का विरोध करने के लिए टिप्पणी लिखते हैं हैं लेकिन हमने तो ऐसे भी बैद्धिक गुलाम देखे जिन्होंने ऐसे ही जानवरों द्वारा मर्यदा पुर्षोतम भगवान राम-माता सीता -शृष्टी के निर्मात भगवान ब्रहमा-पालक भगवान विशनु व अधर्मियों के विनाशक भगवान महेश को अपमानित करने वाले ब्लागों पर जाकर उनका समर्थन तक कर डाला। इन बेबकूफों को कौन समझाये कि जब इस तरह की बातें लिखने वाले खुद का धर्म धरेमनिर्पेक्षता लिखते हैं तो फिर अरब देशों के आस्था के केन्द्रों की पैरवी व प्रचार-प्रसार वो क्यों करते हैं बास्तव में ये लोग सिर्फ बैद्धिक गुलाम हिन्दूओं को भ्रमित करने के लिए कभी खुद को सेकुलर बनाकर पेश करते हैं कभी अपना हिन्दू नाम रखकर हिन्दू धर्म को गाली निकालते हैं दोनों ही स्थितियों में ये बौद्धिक गुलाम हिन्दू इनके फैलाए जाल में फंसकर अपने सारे भारतीय समाज को निचा दिखाते हैं।हम इन बौद्धिक गुलाम हिन्दूओं से विनम्र प्रार्थना करते हैं कि आप अगर भारतीय संस्कृति का समर्थन नहीं कर सकते तो कम से कम मुंह तो बन्द रख सकते हैं। अगर आपको सेकुलर गिरोह की देशविरोधी हिन्दूविरोधी षडयन्त्रों के वारे में कोई शंका है तो कम से कम एक वार आप हमारी पुस्क नकली धर्मनिर्पेक्षता जरूर पढ़ लें फिर भी भ्रम रहे तो हमारे से सीधी चर्चा करें या तो हमें अपना तर्कपूरण नजरिया समझा दें या फिर हमारा नजरिया समझ लें। पर भगवान के लिए इन हिन्दूविरोधियों के जाल में फंस कर इनके हिन्दूमिटाओ –हिन्दूभगाओ अभियान के सहयोगी वनकर मानवबता के विनाश में हिस्सेदार न बनें। आपको याद रखना चाहिए कि जयचंद और कृपा राम की गद्दारी ने ही इन आतंकवादी राक्षसों को आगे बढ़ने में सहायता की वरना आज भी हम अफगानीस्थान तक होते।
लोकिन हम देख रहे हैं कि बलागवाणी पर भी ऐसे हिन्दूविरोधी जानवरों के तर्कविहीन बकबास को काफी देशभक्त लोग भी अपनी बहुमूल्य टिप्पणी लिख कर सम्मानित कर रहे हैं।हम ये तो नहीं मान सकते कि ये लोग इनके भ्रमित करने वाले शीर्षकों में उलझ कर उस बकवास पर कलिक कर देते हैं। हमारे इन मित्रों को सोचना चाहिए कि ये जानवर ऐसे भ्रमित करने वाले शीर्षक बनाते ही इसलिए हैं ताकि इनको प्रचार मिले और जब हम ऐसे लेख पर कलिक करते हैं तो ये अपने मकसद में सफल हो जाते हैं।आपकी टिप्पणी पक्ष में है या विपक्ष में इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।हमारे विचार में सिर्फ तरकपूर्ण वातों पर ही टिपणी की जानी चाहिए और तरकहीन बकवास पर न तो क्लिक करना चाहिए नही उस पर टिप्पणी की जानी चाहिए।जिन बलागों पर लगातार ऐसी बकवास लिखी जा रही है उनका वहिसकार करना चाहिए।
अनेक जागरूक भाई तो इन जानवरों द्वारा फैलाई जा रही बकवास का विरोध करने के लिए टिप्पणी लिखते हैं हैं लेकिन हमने तो ऐसे भी बैद्धिक गुलाम देखे जिन्होंने ऐसे ही जानवरों द्वारा मर्यदा पुर्षोतम भगवान राम-माता सीता -शृष्टी के निर्मात भगवान ब्रहमा-पालक भगवान विशनु व अधर्मियों के विनाशक भगवान महेश को अपमानित करने वाले ब्लागों पर जाकर उनका समर्थन तक कर डाला। इन बेबकूफों को कौन समझाये कि जब इस तरह की बातें लिखने वाले खुद का धर्म धरेमनिर्पेक्षता लिखते हैं तो फिर अरब देशों के आस्था के केन्द्रों की पैरवी व प्रचार-प्रसार वो क्यों करते हैं बास्तव में ये लोग सिर्फ बैद्धिक गुलाम हिन्दूओं को भ्रमित करने के लिए कभी खुद को सेकुलर बनाकर पेश करते हैं कभी अपना हिन्दू नाम रखकर हिन्दू धर्म को गाली निकालते हैं दोनों ही स्थितियों में ये बौद्धिक गुलाम हिन्दू इनके फैलाए जाल में फंसकर अपने सारे भारतीय समाज को निचा दिखाते हैं।हम इन बौद्धिक गुलाम हिन्दूओं से विनम्र प्रार्थना करते हैं कि आप अगर भारतीय संस्कृति का समर्थन नहीं कर सकते तो कम से कम मुंह तो बन्द रख सकते हैं। अगर आपको सेकुलर गिरोह की देशविरोधी हिन्दूविरोधी षडयन्त्रों के वारे में कोई शंका है तो कम से कम एक वार आप हमारी पुस्क नकली धर्मनिर्पेक्षता जरूर पढ़ लें फिर भी भ्रम रहे तो हमारे से सीधी चर्चा करें या तो हमें अपना तर्कपूरण नजरिया समझा दें या फिर हमारा नजरिया समझ लें। पर भगवान के लिए इन हिन्दूविरोधियों के जाल में फंस कर इनके हिन्दूमिटाओ –हिन्दूभगाओ अभियान के सहयोगी वनकर मानवबता के विनाश में हिस्सेदार न बनें। आपको याद रखना चाहिए कि जयचंद और कृपा राम की गद्दारी ने ही इन आतंकवादी राक्षसों को आगे बढ़ने में सहायता की वरना आज भी हम अफगानीस्थान तक होते।
जन्म-जन्म का साथ है हमारा -तुम्हारा या फिर गर्लफरैंड चाहिए
कया आपको विना सादी के आपके साथ रहने वाली गर्लफरैंड चाहिए
दुनिया में भारतीय समाज सिर्फ एक ऐसा समाज है जिसका हर कार्याकलाप संस्थागत है जन्म से लेकर मृत्यु तक । भारतीय संस्कृति ही एक ऐसी संस्कृति है जिसे सभ्य संस्कृति वोले तो मानव संस्कृति कहा जा सकता है। वाकी सब तो पशुतुल्य है उनका हर क्रिया कलाप पशुओं से मिलताजुलता है।न कोई सभ्यता न कोई संसकृति। पशु प्रवृति में दो पशु तब तक साथ होते हैं जब तक दोनों को एक दूसरे से शारीरिक सबन्धों की जरूरत होती है जैसे ही सारीरिक जरूरत पूरी सबन्ध खत्म।फिर दूसरा सबन्ध शुरू। बच्चों को नहीं पता कि उनके मां-वाप कौन है मां-वाप को नहीं पता कि कौन उसका बच्चा है। सारा काम सिर्फ सारीरिक सबन्धों के लिए कोई जिमेवारी नहीं कोई मर्यादा नहीं। सबकेसब संकरी नसल । अब भारत में एक ऐसा गिरोह सक्रिय हो चुका है जो इन पशु प्रवृतियों से इतना प्रभावित है कि भारत की संस्कृति को हर तरह से नुकसान पहुंचा कर पशु प्रवृति बनाने पर तुला है। ये गिरोह कभी कहता है नर को नर से शारीरिक संबन्ध बनाने का अधिकार होना चाहिए । कभी कहता है एक ही गांव /गोत्र में शादी पर प्रतिबन्ध नहीं होना चाहिए।कभी ये मात-पिता के बच्चों पर अधिकार पर प्रश्न उठाता है। कभी बच्चों को पढ़ाई-लिखाई सबछोड़कर सिर्फ ब्याबिचार पर अपना ध्यान केन्द्रित करने को उकसाता है। कभी ये गिरोह बच्चों द्वारा भागकर अपने माता-पिता की ईच्छा के विरूद्ध शादी को उनका अधिकार बतात है । कई ये गिरोह लिव न रिस्ते की बात करता है। मतलब ये गिरोह अपने कब्जे वाले सब संसाधनों का उपयोग कर पशु संस्कृति को आगे बढ़ाने के काम पर लगा रहता है।सच बतायें तो हमें इस पर कोई आपति नहीं कि ये मानब होकर क्यों पशु की तरह जीवन जीने पर उतारू है क्योंकि हो सकता है इसकी उत्पति इसी प्रवृति के फलस्वारूप ही हो। बस आपति है तो इस बात पर कि जो मानब की तरह जीबन जी रहे हैं उनके जीने के तरीके पर ये पशुओं का गिरोह कैसे सवाल उठा सकता है। इस गिरोह को चाहिए कि ये वहां जाकर रहे जहां इनके जैसे पशु प्रवृति को मानने वालों की संख्या अधिक है।
कुछ दिन पहले हमारा सामना ऐसे ही पशु-गिरोह(उम्र25-45)के साथ हुआ।बातों-बातों में हमने उनसे पूछा कि क्या आपको महिला मित्र चाहिए ।तो सबका जबाब था हां ।हमें कोई हैरानी नहीं हुई हम सबझ गए कि सबकेसब सेकुलर हैं। हमने दूसरा प्रश्न किया क्या आप अपनी मां-बहन-बेटी-पत्नी को पुरूष मित्र रखने की राय/सहमति देंगे।सबके सब भड़क गय।सबका जबा था कैसी बैत करते हो तुम हम तो हमारी मां-बहन-बेटी-पत्नी के वारे में ऐसा सोचने वाले के नाक-मुंह सब तोड़ देंगे कत्ल कर देंगे उस गधे को ।फिर हमने कहा कि जिस तरह आप अपनी मां-बहन-बेटी-पत्नी के साथ कोई सबन्ध नहीं बनने देना चाहते कमोवेश ऐसी ही स्थिति समाज के बढ़े हिस्से की है ।अब आप बताओ कि जिस लड़की को आप अपनी विना शादी की फ्रैंड वनाना चाहते वो लड़की आयेगी कहां से ? क्योंकि समाज की हर लड़की किसी न किसी की मां-बहन-बेटी-पत्नी है।
अन्त में हम तो सिर्फ इतना कहेंगे कि हमें दूसरों की मां-बहन-बेटी-पत्नी के साथ बैसा ही ब्याभार करना चाहिए जैसा हम अपनी मां-बहन-बेटी-पत्नी के साथ होने की आशा करते हैं।क्योंकि अगर हम दुसरों की मां-बहन-बेटी-पत्नी का अपमान करते हैं तो इस बात की पक्की गारंटी है कि हमरी मां-बहन-बेटी-पत्नी का अपमान दूसरे करेंगे।क्योंकि हमारा ब्याबहार ही समाज की दिशा तय करता है।
सब भारतीयों की एक ही आबाज जन्म-जन्म का साथ है हमारा
तुम्हारा वाकी सब...
दुनिया में भारतीय समाज सिर्फ एक ऐसा समाज है जिसका हर कार्याकलाप संस्थागत है जन्म से लेकर मृत्यु तक । भारतीय संस्कृति ही एक ऐसी संस्कृति है जिसे सभ्य संस्कृति वोले तो मानव संस्कृति कहा जा सकता है। वाकी सब तो पशुतुल्य है उनका हर क्रिया कलाप पशुओं से मिलताजुलता है।न कोई सभ्यता न कोई संसकृति। पशु प्रवृति में दो पशु तब तक साथ होते हैं जब तक दोनों को एक दूसरे से शारीरिक सबन्धों की जरूरत होती है जैसे ही सारीरिक जरूरत पूरी सबन्ध खत्म।फिर दूसरा सबन्ध शुरू। बच्चों को नहीं पता कि उनके मां-वाप कौन है मां-वाप को नहीं पता कि कौन उसका बच्चा है। सारा काम सिर्फ सारीरिक सबन्धों के लिए कोई जिमेवारी नहीं कोई मर्यादा नहीं। सबकेसब संकरी नसल । अब भारत में एक ऐसा गिरोह सक्रिय हो चुका है जो इन पशु प्रवृतियों से इतना प्रभावित है कि भारत की संस्कृति को हर तरह से नुकसान पहुंचा कर पशु प्रवृति बनाने पर तुला है। ये गिरोह कभी कहता है नर को नर से शारीरिक संबन्ध बनाने का अधिकार होना चाहिए । कभी कहता है एक ही गांव /गोत्र में शादी पर प्रतिबन्ध नहीं होना चाहिए।कभी ये मात-पिता के बच्चों पर अधिकार पर प्रश्न उठाता है। कभी बच्चों को पढ़ाई-लिखाई सबछोड़कर सिर्फ ब्याबिचार पर अपना ध्यान केन्द्रित करने को उकसाता है। कभी ये गिरोह बच्चों द्वारा भागकर अपने माता-पिता की ईच्छा के विरूद्ध शादी को उनका अधिकार बतात है । कई ये गिरोह लिव न रिस्ते की बात करता है। मतलब ये गिरोह अपने कब्जे वाले सब संसाधनों का उपयोग कर पशु संस्कृति को आगे बढ़ाने के काम पर लगा रहता है।सच बतायें तो हमें इस पर कोई आपति नहीं कि ये मानब होकर क्यों पशु की तरह जीवन जीने पर उतारू है क्योंकि हो सकता है इसकी उत्पति इसी प्रवृति के फलस्वारूप ही हो। बस आपति है तो इस बात पर कि जो मानब की तरह जीबन जी रहे हैं उनके जीने के तरीके पर ये पशुओं का गिरोह कैसे सवाल उठा सकता है। इस गिरोह को चाहिए कि ये वहां जाकर रहे जहां इनके जैसे पशु प्रवृति को मानने वालों की संख्या अधिक है।
कुछ दिन पहले हमारा सामना ऐसे ही पशु-गिरोह(उम्र25-45)के साथ हुआ।बातों-बातों में हमने उनसे पूछा कि क्या आपको महिला मित्र चाहिए ।तो सबका जबाब था हां ।हमें कोई हैरानी नहीं हुई हम सबझ गए कि सबकेसब सेकुलर हैं। हमने दूसरा प्रश्न किया क्या आप अपनी मां-बहन-बेटी-पत्नी को पुरूष मित्र रखने की राय/सहमति देंगे।सबके सब भड़क गय।सबका जबा था कैसी बैत करते हो तुम हम तो हमारी मां-बहन-बेटी-पत्नी के वारे में ऐसा सोचने वाले के नाक-मुंह सब तोड़ देंगे कत्ल कर देंगे उस गधे को ।फिर हमने कहा कि जिस तरह आप अपनी मां-बहन-बेटी-पत्नी के साथ कोई सबन्ध नहीं बनने देना चाहते कमोवेश ऐसी ही स्थिति समाज के बढ़े हिस्से की है ।अब आप बताओ कि जिस लड़की को आप अपनी विना शादी की फ्रैंड वनाना चाहते वो लड़की आयेगी कहां से ? क्योंकि समाज की हर लड़की किसी न किसी की मां-बहन-बेटी-पत्नी है।
अन्त में हम तो सिर्फ इतना कहेंगे कि हमें दूसरों की मां-बहन-बेटी-पत्नी के साथ बैसा ही ब्याभार करना चाहिए जैसा हम अपनी मां-बहन-बेटी-पत्नी के साथ होने की आशा करते हैं।क्योंकि अगर हम दुसरों की मां-बहन-बेटी-पत्नी का अपमान करते हैं तो इस बात की पक्की गारंटी है कि हमरी मां-बहन-बेटी-पत्नी का अपमान दूसरे करेंगे।क्योंकि हमारा ब्याबहार ही समाज की दिशा तय करता है।
सब भारतीयों की एक ही आबाज जन्म-जन्म का साथ है हमारा
तुम्हारा वाकी सब...
रविवार, 4 अप्रैल 2010
देशभक्त कांर्गेसियों द्वारा समय-यमय पर हिन्दूविरोधीयों-देसविरोधियों के विरूद्ध बजाए जा रहे विगूल को एक समूर्ण क्रांति में वदलने की जरूरत है।
हमारा पक्का विशवास है कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व वेशक हिन्दूविरोधियों-दोशविरोधियों के हाथों में है लेकिन कांग्रेस में देशभक्त नेताओं की कमी नहीं।जरूरत है देशभक्त कांग्रेसियों को पहचान कर उनका साथ देकर कांग्रेस को देशविरोधियों से आजाद करवाने की क्योंकि कांग्रेस जब तक विदेशियों के ईसारे पर नाचेगी तब तक वो जब खुद सता में है तो गद्दारों के विरूद्ध काम करने के बजाए गद्दारों के लिए काम करेगी और जब विपक्ष में होगी तो सतारूढ़ दल द्वारा लिए गए किसी भी देशहित के निर्णय को किसी सांप्रदाय/जाति/क्षेत्र विशेष के विरूद्ध बताकर देश में दंगा फैलाकर हिन्दूओं को आपस में लड़वाकर भारत को कमजोर करेगी। देश को विदेशी ताकतों के चुंगल आजाद करवाना अकेले भाजपा/ भारत स्वाभिमान के बश की बात नहीं ।विदेशी ताकतों के संकजे से भारत को आजाद करवाने के लिए देश के सब देशभक्त लोगों को ठीक उसी तरह संगठित होना होगा जैसे गद्दार सेकुलर गिरोह के रूप में संगठित होकर अपने देशविरोधी-हिन्दूविरोधी षडयन्त्रों को अंजाम दे रहे हैं । हर देसविरोधी समाचार चैनल/मानवाधिकार संगठन/एन जी ओ/समाजिक कार्यकरता/धर्मांतरण की ठेकेदार संस्थायें /आतंकवादी गिरोह/कुछ न्यायधीश/फिल्म निर्माता/लेखक इस भारत विरोधी सेकुलर गिरोह का हिस्सा हैं।ठीक इसी तरह देशभक्त हिन्दू संगठनों को हर उस ब्यक्ति को साथ लाने का प्रयत्न करना होगा जो देश के प्रति बफादार है।
जब अमेरिकी दबाब में अंग्रेजों के गुलाम प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एंटोनियो के ईसारे पर एक ऐसा विल लोकसभा में पास करवाने की कोशिस की जो अमेरिकी कंपनियों को भारतीयों को मारने की खुली छूट देता था तब हर देशभक्त की तरह देशभक्त कांग्रेसियों को भी बुरा लगा ।इन 35 देशभक्त कांग्रेसियों ने विधेयक पेश होने के वक्त संसद से अनुपस्थित रहकर अपना विरोध प्रकट कर देशविरोधी कांग्रेसी नेतृत्व की पोल खोलकर रख दी।हमारे विचार से इन कांग्रेसियों के देशहित में लिए गय इस फैसले का जितना सनर्थन किया जाये उतना कम है।जनता को समझना चाहिए कि जब पूरी कांग्रस पार्टी का शीर्ष नेतृत्व देशविरोधियों के हाथ में हो तब इस तरह का कदम उठाना अपना कैरियर दांव पर लगाने जैसा था। हमारे विचार में ये कांग्रेसी जानते हैं कि अगर देश है तो कैरियर है अगर देश नहीं तो काहे का कैरियर।
ऐसा नहीं कि ये पहली घटना है जिसमें देशभक्त कांग्रेसियों ने विदेशीयों की हिन्दूविरोध-देशविरोदी नितियों का विरोध किया हो ।इससे पहले हिमाचल के ततकालीन मुख्यामन्त्री वारभद्र सिंह जी ने हिमाचल में एक ऐसा विधेयक पारित करवाया जो धर्मांतरण के ठेकेदारों के मूंह पर तमाचे की तरह जा लगा।इस विधेयक को रद्द करने के लिए अमेरिका से लेकर एंटोनियो तक के दबाब को ठेंगा दिखाते हुए वीरभद्र सिंह जी ने वो ही किया जो देशहित में था।जिसकी उन्हें कीमत भी चुकानी पड़ी। एंटोनियों ने अपने प्रभाव का प्रयोग नवीन चावला के माध्यम से करते हुए चुनाब छे महीने पहले करवाकर योजनाबद्ध तरीके से वीरभद्र जी के समर्थक ताकतवर जिताऊ उमीदवारों के टिकट कटवाकर वीरभद्र सिह जी को चुनाब हरवाकर अपने सांप्रदाय से संबन्ध रखने वाली विद्यास्टोक्स को नेता विपक्ष बनवा दिया।
सत्यव्रत चतुर्वेदी जी को कौन भुला सकता है जिन्होंने शहीद मोहन चन्द जी का अपमान करने वाले गद्दार अमर सिंह को पागल करार देकर अपनी अप्रसन्ता को जगजाहिर कर दिया।परिणामस्वारूप गद्दारों की ठेकेदार एंटोनिया ने उन्हें कांग्रेस के प्रवक्ता पद से हटा दिया।ध्यान रहे अभी कुछ दिन पहले एक और गद्दार के विरूद्ध मुंह खोलने के फलस्वारूप इस गद्दार एंटोनिया ने उन्हें फिर कांग्रेस के प्रवक्ता पद से हटा दिया।
अभी पिछले कल ही पर्यावरण मंत्री श्री जयराम रमेस जी ने गुलामी के प्रतीक गाऊन को उपनिवेशवाद का स्मृतिचिन्ह करार देकर एक सच्चे भारतीय का मन प्रकट कर एंटोनियो की गुलामी के विरूद्ध विद्रेह का एक और विगुल बजा दिया । जिस पर भारत में रह रहे विदेशी आक्रममकारियों के एजेंट धर्मांतरण के ठेकेदार ईसाईयों को काफी तकलीफ हुई । हो सकता है कि बहुत जल्दी ये ईसाई अपनी ठेकेदार एंटोनिया के पास जाकर ठीक उसी तह सिकायत करें जिस तरह वीरभद्र सिंह जी की की थी
अन्त में हम तो इतना ही कहेंगे कि देशभक्त कांर्गेसियों द्वारा समय-समय पर हिन्दूविरोधियों-देशविरोधियों के विरूद्ध बजाए जा रहे विगूल को एक समूर्ण क्रांति में वदलने की जरूरत है।
ये संघी क्यों लगाते हैं साम्प्रदायिक आग
Diwakar Maniwrote:
यह लेख( सांप्रदायिक दंगो पर मुंह खोलने से पहले....) पूरी तरह से एक आहत हिंदू मन की व्यथा को प्रतिबिंबित करता है. ये जितनी भी घटनाएं हैं, इसके पीछे शर्मनिरपेक्ष सरकार, मीडिया इत्यादि का तो हाथ हैं ही, इसमें हम हिंदुओं के अंदर व्याप्त हो गई हजारों सालों की कायरता भी है. "वीर भोग्या वसुंधरा" अर्थात् जमीन पर राज वीर ही करते हैं, और हमारे कौम के अधिकांश जनों का खून अब पानी बन गया है. देश-समाज, अपनी कौम के अन्य लोगों, स्थलों के साथ कुछ भी हो, हमें तो बस अपनी चिन्ता है. वहीं ये जिहादी कौम वाले डॆनमार्क, फिलीस्तीन, तुर्की में हुई घटना से भारत को हिला देते हैं. कुछ इसी तरह की बातों/घटनाओं को लेकर, जब गुजरात के अक्षरधाम मंदिर पर हमला हुआ था, और गोधरा में स्वयंसेवकों को जिन्दा जला दिया गया था, मैंने यह कविता लिखी थी-
उन्होनें कहा- लादेन मरे या बुश, हम दोनों में खुश.
फिर जोड़ा- ना लादेन मरे ना बुश, लगे दोनों पर अंकुश.
उनकी बातें सुनकर पूछा मैनें उनसे
लादेन और बुश की हो रही है लड़ाई
उसमें हिन्दूओं की क्यों हो रही है कुटाई ?
आपके पास क्या है इसका जवाब ?
उन्होनें उत्तर दिया-
सरासर गलती तो हिन्दूओं की हीं है.
क्यों वह समर्थन सच्चाई का कर रहे हैं ?
तब मैनें पूछा- हे जनाब !
उन निहथ्थे रामसेवकों का दोष क्या था,
जो जला दिये गये साबरमती की बोगियों में?
मेरी बात सुनकर रहा न गया उनसे
तमतमा गया चेहरा उनका
बोले,
क्या बात करते हो यार !
क्यों गये थे अयोध्या में होकर तैयार ?
वो जले तो ठीक हीं जले,
मरे तो ठीक हीं मरे.
यदि कोई हिन्दू मरा तो समझो कि उसने जरूर कोई गलती की होगी.
आखिर इस धर्मनिरपेक्ष देश में,
क्या उनको यह भी नहीं है अधिकार
कि वो मार सकें काफिरों को बार-बार?
वे तो अपने धर्म पर हैं अडिग.
उनका तो धर्म कहता है-
जो तेरी राह में हो पड़े,
उन्हे मारकर बनो तगड़े (गाज़ी).
उन्होनें तो केवल अपना काम किया
नाहक हीं उनको तुमने बदनाम किया.
जरा-सा रूक कर पूछा उन्होनें मुझसे-
बताओ श्रीमान् !
ये संघी क्यों लगाते हैं साम्प्रदायिक आग,
हिन्दूओं को ये क्यों भड़काते हैं
क्यों उन्हें जागृति का पाठ पढ़ाते हैं ?
ये तो सो रहे थे, नाहक हीं उन्हे जगा दिया.
अरे ! हिन्दूओं का तो काम ही है सहना
और बार-बार मरना.
ये लोग भी कोई लोग हैं,
आज मर-कट रहे हैं तो हो रहा है हल्ला.
इतना सुनकर रहा न गया मुझसे
मैनें कहा-
धन्य हो मेरे भाई
तुम्हारे रहते अन्य कौन बन सकता है कसाई.
हमें मारने के लिये तो आप जैसे धर्मनिरपेक्ष हीं काफी हैं.
अब वह दिन दूर नहीं,
जब आप जैसों के अनथक प्रयास से
ये अपाहिज-कायर हिन्दू मिट जायेंगे जहाँ से
मैं तो बेकार हीं कोस रहा था आपके प्यारों को
अरे ! आपके सामने उनकी क्या औकात है ?
ये सब घटनायें तो आप जैसों की सौगात है
यह प्रतिक्रिया सच्चाई ब्यान कर गई
शनिवार, 3 अप्रैल 2010
भारतीय की जान की कीमत
भारतीय की जान की कीमत
(बाल-बुद्धि भारतियों पर कवि का कटाक्ष)
अरे - समझौता गाड़ी की मौतों पर - क्या आंसू बहाना था
उनको तो - पाकिस्तान नाम के जहन्नुम में ही - जाना था
मरने ही जा रहे थे - लाहौर, करांची - या पेशावर में मरते
और उनके मरने पर - ये नेता - हमारा पैसा तो ना खर्च करते
और तुम - भारतियों, टट्पुंजियों - कहते हो हैं हम हिंदुस्थानी
जब हिसाब किया - तो निकला तुम्हारा ख़ून - बिलकुल पानी
औकात की ना बात करो - दुनिया में तुम्हारी औकात है क्या - खाक
वो समझौता में मरे तो १० लाख - तुम मुंबई में मरो तो सिर्फ ५ लाख
तुम से तो वो अनपढ़, जाहिल, इंसानियत के दुश्मन, ही अच्छे
देखो कैसे बन बैठे हैं - बिके हुए सिक यू लायर मीडिया के प्यारे बच्चे
उनके वहां मिलिटरी है - इसलिए - यहाँ आ के वोट दे जाते हैं
डेमोक्रेसी के झूठे खेल में - तुम पर ऐसे भारी पड़ जाते हैं
जाग जा - अब तो जाग जा ऐ भारत - अब ऐसे क्यूँ सोता है
वो मार दें - और तू मर जाये - लगता ऐसा ये "समझौता" है
प्रियजनों की मौत पर - फूट फूट रोवोगे - वोट नहीं क्या अब भी दोगे
लानत है - ख़ून ना खौले जिस समाज का - वो सज़ा सदा ऐसी ही भोगे
पांच साल में - आधा घंटा तो - वोट के लिए निकाला कर
विदेशियों के वोटों से जीतने वालों का तो मुंह काला कर
सब चोर लगें - तो उसमे से - तू अपने चोर का साथ दे दे
अपना तो अपना ही होता है - परायों को तू मात दे दे
बुद्धिमान है तू - अब अपनी बुद्धि से काम लिया कर
वोट दे कर अपनों को - वन्दे मातरम का उद्घोष कर
आक्रमणकारियों के दलालों का राज - समूल समाप्त कर
ऐ भारत - तू उठ खड़ा हो - निद्रा, तन्द्रा को त्याग कर
अपने भारतीय होने पर - दृढ़ता से अभिमान कर
कुछ तो कर - कुछ तो कर - अरे अब तो कुछ कर
रचयिता : धर्मेश शर्मासंशोधन,
संपादन : आनंद जी. शर्मा
(बाल-बुद्धि भारतियों पर कवि का कटाक्ष)
अरे - समझौता गाड़ी की मौतों पर - क्या आंसू बहाना था
उनको तो - पाकिस्तान नाम के जहन्नुम में ही - जाना था
मरने ही जा रहे थे - लाहौर, करांची - या पेशावर में मरते
और उनके मरने पर - ये नेता - हमारा पैसा तो ना खर्च करते
और तुम - भारतियों, टट्पुंजियों - कहते हो हैं हम हिंदुस्थानी
जब हिसाब किया - तो निकला तुम्हारा ख़ून - बिलकुल पानी
औकात की ना बात करो - दुनिया में तुम्हारी औकात है क्या - खाक
वो समझौता में मरे तो १० लाख - तुम मुंबई में मरो तो सिर्फ ५ लाख
तुम से तो वो अनपढ़, जाहिल, इंसानियत के दुश्मन, ही अच्छे
देखो कैसे बन बैठे हैं - बिके हुए सिक यू लायर मीडिया के प्यारे बच्चे
उनके वहां मिलिटरी है - इसलिए - यहाँ आ के वोट दे जाते हैं
डेमोक्रेसी के झूठे खेल में - तुम पर ऐसे भारी पड़ जाते हैं
जाग जा - अब तो जाग जा ऐ भारत - अब ऐसे क्यूँ सोता है
वो मार दें - और तू मर जाये - लगता ऐसा ये "समझौता" है
प्रियजनों की मौत पर - फूट फूट रोवोगे - वोट नहीं क्या अब भी दोगे
लानत है - ख़ून ना खौले जिस समाज का - वो सज़ा सदा ऐसी ही भोगे
पांच साल में - आधा घंटा तो - वोट के लिए निकाला कर
विदेशियों के वोटों से जीतने वालों का तो मुंह काला कर
सब चोर लगें - तो उसमे से - तू अपने चोर का साथ दे दे
अपना तो अपना ही होता है - परायों को तू मात दे दे
बुद्धिमान है तू - अब अपनी बुद्धि से काम लिया कर
वोट दे कर अपनों को - वन्दे मातरम का उद्घोष कर
आक्रमणकारियों के दलालों का राज - समूल समाप्त कर
ऐ भारत - तू उठ खड़ा हो - निद्रा, तन्द्रा को त्याग कर
अपने भारतीय होने पर - दृढ़ता से अभिमान कर
कुछ तो कर - कुछ तो कर - अरे अब तो कुछ कर
रचयिता : धर्मेश शर्मासंशोधन,
संपादन : आनंद जी. शर्मा
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