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मोदीराज लाओ

मोदीराज लाओ
भारत बचाओ

मंगलवार, 6 अप्रैल 2010

भारतीय संस्कृति पर हर वक्त भौंकने वालों की असलियत हम बताते हैं आपको वो भी विना किसी गाली गलौच के ।अगर ठीक लगे तो खुल कर समर्थन करना गलत लगे तो तर्कपूर्ण कारण देकर हमें समझाना।

इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी गद्दारों के सेकुलर गिरोह द्वारा अल्पसंख्यकवाद व धर्मनिर्पेक्षता जैसे प्रावधानों का उपयोग जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों के षड्यन्त्रों को आगे बढ़ाने व हिन्दूविरोध के लिए इस हद तक किया जा रहा है कि अब देश की आम राष्ट्रभक्त हिन्दू जनता में यह धारणा बन चुकी है कि अल्पसंख्यकवाद व धर्मनिर्पेक्षता जैसे प्रावधान गद्दारी व देशद्रोह के ही पर्यायवाची हैं ।


देश को बचाने के लिए इन दोनों ही प्रावधानों को यथाशीघ्र समाप्त किया जाना परम आवश्यक है नहीं तो ये देशद्रोही हिन्दुविरोधी गद्दारों का सेकुलर गिरोह अल्पसंख्यकवाद व धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में भारतीय सभ्यता व संस्कृति को तबाह कर, न जाने देश के कितने टुकड़े और करवा देगा । जिसका परिणाम हिन्दुओं को यहूदीयों की तरह दर-दर की ठोकरें खानें या फिर मरने पर मजबूर कर देगा । क्योंकि 9वीं शत्ताब्दी में अफगानिस्तान व 20वीं शताब्दी में पाकिस्तान बांगलादेश बनने पर जो हिन्दू जिहादियों के हमलों से बच निकले वो भागकर भारत आ गये पर अगर वर्तमान भारत भी न रहा तो कहाँ जाँएगे ?

लोग कहते हैं युनान मिश्र रोमां सब मिट गये।

कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी।।

पर यह भी सत्य है कि

उस कौम का इतिहास नहीं होता।

जिसको मिटने का एहसास नहीं होता।।

संभल कर एकजुट होकर कदम उठाओ ए हिन्दूओ ।।।

बर्ना तुम्महारी दास्तान तक न होगी दास्तानों में।।।।

आओ जरा भारत में अल्पसंख्यक बनाए गए घटकों का वही खाता खंगाले। वास्तव में अल्पसंख्यक आयोग का गठन ही मुसलमानों को विशेषाधिकार देने के उद्देश्य से किया गया था । ये मुसलमान ही इस आयोग के प्रमुख नीति-निर्धारक हैं । ये मुसलमान वही है जिनके भले के लिए 1947 में संप्रदाय के आधार पर अखण्ड भारत का विभाजन करवाकर वर्तमान पाकिस्तान बांगलादेश बनाए गये जो कि मुसलमानों के लिए हैं ।

o पाकिस्तान, बांगलादेश बनाने का कारण भी कोई दबा छुपा नहीं है सबको जानकारी है कि इस्लाम एक तरफ सूफी सन्तों को जन्म देता है जो भाईचारे की बात कर, अब्दुल हमीद को जन्म देते हैं । पर उससे हजारों गुना ज्यादा इस्लाम के नाम पर ऐसी राक्षसी प्रबृतियों का जन्म होता है जो इस्लाम के सिबा और किसी विश्वास के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करतीं। यहाँ तक जो मुस्लिम होने के बावजूद कत्लोगारद का विरोध या निन्दा करते हैं उन्हें भी काफिर कहकर मौत के घाट उतारने की पैरवी की जाती है । इसी प्रबृति की वजह से 1947 में जिहादियों ने हिन्दुओं का खून बहाकर इस देश को अपनी मातृभूमि मानने व हिन्दुओं के साथ रहने से मना कर दिया ।

o आज लगभग फिर वही स्थिति देश में बन चुकी है मुसलमानों के जिहादी प्रतिनिधियों ने वन्देमातरम् का विरोध कर भारत को अपनी मातृभूमि मानने से मना कर दिया है। सारे देश में हिन्दुबहुल क्षेत्रों व मन्दिरों में बम्ब विस्फोट कर हिन्दुओं का खून बहाकर अपने जिहादी अल्लाह को पिलाना शुरू कर दिया है ताकि बदले में ये आदमखोर जिहादी अल्लाह इनको जन्नत दे दे ।

हमें तो समझ ये नहीं आता कि जिस आदमखोर अल्लाह का पेट पूरे अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांगलादेश, कश्मीरघाटी , गोधरा में रेल के डिब्बे व आसाम के इतने सारे हिन्दुओं का खून पीकर नहीं भरा क्या उसका पेट अब मुठी भर बचे हिन्दुओं के खून से भर पाएगा। नहीं ,ऐसा सम्भव नहीं, इसी लिए दुनियाभर के विभिन्न गैर मुस्लिमों व जहां गैर मुस्लिम न मिलें वहां पर उदार मुस्लिमों के खून से भी काम चलाना पड़ रहा है।

o इस जिहादी अल्लाह को तो मानो शांतिप्रिय हिन्दुओं के शिकार का चस्का ही लग गया है क्योंकि इस जिहादी अल्लाह ने मुहम्मदबिन कासिम के रूप में भारत में प्रवेश किया और हिन्दुओं का खून पीने लगा । उसके बाद मुहम्मदगौरी, औरंगजेब व बाबर के वक्त तो ये जिहादी अल्लाह मानो पानी की जगह भी हिन्दुओं का खून ही पीने लगा।

फिर महाराणा प्रताप,छत्रपति शिवाजी,महारानी लक्ष्मीबाई, वीर तांत्यटोपे, गुरू तेगबहादुर जी, उनके बेटे श्री गुरूगोविन्द सिंह जी व उनके चार बहादुर बेटों ने इस आदमखोर जिहादी अल्लाह के दान्त तोड़कर भारत से हिन्दुओं के खून के प्यासे आदमखोर जिहादी अल्लाह को मार भगाने की बहुत कोशिश की पर अफसोस हिन्दुओं के सैकुलर गिरोह की कबूतर की तरह बन्द आँख आज तक न खुली। कभी जयचन्द पैदा हो गये तो कभी जयचन्द के बंशज सैकुलर नेता । जो हमेशा इस आदमखोर जिहादी अल्लाह व उसके द्वारा प्रेरित जिहादियों के समर्थन में खड़े नजर आए । बाकी रणबांकुरों व वीरांगनाओं की बात तो छोड़ो इन बेशर्म धर्मनिर्पेक्षतावादियों को श्री गुरूगोविन्द सिंह जी के चार-चार बेटों के बहे लहु की भी लाज न आई ।

अब सोचने की बात ये है कि जो हिन्दुओं के खून का प्यासा है वो इनसान है या शैतानी राक्षस ? स्पष्ट रूप से शैतानी राक्षस है। उसका बंशज कहलवाने में फक्र महसूस करने वाले मुस्लिम जिहादी, सैकुलर नेता व मीडिया जो हर हाल में उसका गुणगान व समर्थन करके हिन्दुओं को मरवाने के लिए अनुकूल महौल बनाकर व अफवाहें फैलाकर हिन्दुओं को आपस में लड़बाकर, मर्यादा पुरूषोतम भगवान श्री राम के अस्तित्व को नकारकर व साध्वी प्रज्ञा सिंह जैसी बीरांगनाओं व उसके नेतृत्व में इस जिहादी अल्लाह को मिटाने के लिए संघर्षरत जवानों को जेलों में डलवाकर बदनाम करने के लिए अफवाहें फैलाकर इस आदमखोर जिहादी अल्लाह को खुश रखने का लगातार प्रयास कर रहे हैं। क्या वे हिन्दुओं के खून के प्यासे आदमखोर अल्लाह से कम हैं ?

यहाँ पर यह बात गौर करने वाली है कि इस्लाम में दो तरह के अल्लाह हैं । एक वे जिसको आम देशभक्त मुसलमान अल्लाह कहता है जो शान्ति और भाईचारे की बात करता है, सूफी सन्तों को जन्म देता है, देशभक्तों ,नमक हलालों को जन्म देता है ।


दूसरा आदमखोर जिहादी अल्लाह जिसे जिहादी अल्लाह या शैतान कहते हैं जो जिहादियों को जन्म देता है जिसकी शैतानी पुस्तक में लिखा है कि गैर जिहादियों को हलाल करने से जन्नत नसीब होती है । देशद्रोह, नमक हरामी व गद्दारी जिहादियों का पहला कर्तव्य है।

यही पुस्तक 7 वीं शत्ताब्दी से आज 21 वीं शताब्दी तक भारत को लहूलुहान करती आ रही है। सुलतानों, मुगलों, औरंगजेब , बाबर, अफजल, आतिफ, अबुबशर जैसे सैतानों को जन्म देती आ रही है और हिन्दुओं का खून बहाती आ रही है भारत के टुकड़े करवाती आ रही है।

अगर मानवता भाईचारे और शांति के प्रतीक, अंतिम सांसे ले रहे, मेरे प्यारे भारत को बचाना है तो मेरे प्यारे देशभक्त नमकहलाल भारतीयों को जात-पात, ऊंचनीच, छुआछूत ,संप्रदायवाद, क्षेत्रवाद ,पार्टीवाद सब भूलाकर एकजुट होकर गुरू गुरूगोविन्द सिंह जी के मार्ग पर चलकर नमक का कर्ज चुकाकर इस आदमखोर जिहादी अल्लाह, जिहादियों व उसके कट्टर समर्थक सैकुलर गद्दारों का नामोनिशान मिटाना है ।

आज सुबह (07नवम्बर2008) हमने ये पिछला पेज लिखा और आज ही जिहादी अल्लाह के वंशज मुस्लिम जिहादियों और शांतिप्रिय मुसलमानों के बीच संघर्ष शुरु हो गया। ओसामाबिन लादेन के समर्थक मुस्लिम जिहादियों के विरूद्ध अल्लाह के वंशजों ने फतबा जारी कर दिया कि ओसामा की सोच का प्रचार प्रसार इस्लाम के विरूद्ध है ।

अल्लाह के बन्दों ने दो कदम आगे बढकर इस आदमखोर जिहादी अल्लाह के बंशज जाकिर हुसैन को व इस जिहादी द्वारा चलाए जा रहे टी वी चैनल(पीस) को मिल रहे बेशुमार पैसे की जांच करवाने की भी मांग की । भारतीयों को अमन चैन के प्रतीक अल्लाह व खूनखराबे की जड़ इस आदमखोर जिहादी अल्लाह के अन्तर को यथाशीध्र समझना होगा व अल्लाह के बन्दों का साथ देकर इस आदमखोर जिहादी अल्लाह को मिटाना होगा। नहीं तो ये सब भारतीयों को हिंसा की आग में जलाकर राख कर देगा।

आपको यह जान कर हैरत होगी कि जिस देशबिरोधी चैनल(एन डी टी वी) पर ये सब दिखाया जा रहा था उस चैनल ने अल्लाह के बन्दों का पक्ष लेने के बजाए आदमखोर जिहादी अल्लाह के जिहादी जाकिर हुसैन का पक्ष लिया ।

सोचने वाला विषय यह भी है कि जिस हिन्दुविरोधी-देशविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक सरकार ने साध्वी व उसके देश भक्त सैनिक सहयोगियों को बिना सबूत जेल में डालने में इतनी जल्दबाजी दिखाई क्या वो सरकार इस जिहादी नासिर हुसैन के कुकर्मों को रोकने के लिए कोई कदम उठा पायेगी ?

हम वर्तमान भारत में अल्पसंख्यक आयोग की प्रासंगिकता पर बात कर रहे थे ये भारत अखण्ड भारत का वो हिस्सा है जो 1947 में अखण्ड भारत को विभाजित कर मुसलमानों के लिए दिए गये दो हिस्सों के बाद बचा है। स्वाभाविक व न्यायिक रूप से यह हिस्सा इस देश के मूल निबासियों हिन्दुओं का है जिसका सही नाम हिन्दूराष्ट्र भारत ही है । जिस किसी को भी इस नाम व हिन्दुओं के अधिकार पर आपत्ति है उसे प्राकृतिक न्याय के हिसाब से इस देवभूमि भारत में रहने का कोई अधिकार नहीं है । जो भी इस देश में रह रहा है उसे इस बात को अच्छी तरह से समझ लेना होगा कि हिन्दू संस्कृति और सभ्यता ही भारतीय संस्कृति और सभ्यता है जो खुद को हिन्दू नहीं मानता वो भारतीय कैसे हो सकता है और जो भारतीय नहीं वो यहां का नागरिक नहीं आगंतुक है उसे आज नहीं तो कल हमारी मातृभूमि को छोड़ना होगा ।

अब विचार करने वाली बात यह है कि जिन मुसलमानों को हिन्दू होने पर आपत्ति थी उनके लिए अखण्ड भारत को तोड़कर पाकिस्तान ,वंगलादेश बनवा दिए गए। जो भारत में रह गए वो सभी हिन्दू हैं फिर अल्पसंख्यक आयोग की क्या जरूरत ? अगर वो खुद को हिन्दू नहीं मानते फिर यहां रहे किस लिए और अभी भी क्या बिगड़ा है सारी सीमांयें खुली हैं, बसें जा रही हैं, जब वहां से इतने सारे घुसपैठिए-जिहादी आ रहे हैं तो इनको जाने से कौन रोकेगा ?

वैसे आज जागरूक हिन्दू एक साधारण सा प्रश्न पूछता है कि क और ख दो सगे भाई हैं क और ख के माता पिता के सिर्फ दो ही बच्चे हैं क लड़-झगड़ कर माता पिता के रहते ही अपना हिस्सा अलग करवा लेता है अब माता पिता की मृत्यु होने पर बाकी का हिस्सा किस्का है ? सीधा सा उत्तर है ख का ।

वैसे हिन्दू द्वारा ये प्रश्न पूछना भी उसकी उदारता का ही प्रतीक है क्योंकि जिन जिहादीयों से ये प्रश्न पूछा जा रहा है वो तो आक्राँता है भारत उसका मूल निबास नहीं बल्कि उपनिबेस था जिसका विभाजन करवाकर उसने तीन(अफगानिस्तान,पाकिस्तान,वंगलादेश) हिस्सों को हमेसा के लिए अपना उपनिवेश बना लिया ।अब इन जिहादीयों को चाहिए कि अपने उपनिवेश में रहकर जो मरजी करें और वर्तमान भारत को न छेड़ें क्योंकि अगर जागरूक हिन्दुओं व उनके संगठनों की तरह कहीं गलती से भी इस हिन्दुविरोधी देश विरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक सैकुलर गिरोह में शामिल हिन्दुओं को भी अगर भारतीय संस्कृति और सभ्यता के विरोधी आदमखोर जिहादी अल्लाह व जिहादियों की असलिएत समझ में आ गई तो भारत तो भारत बाकी के तीन हिस्से भी इन जिहादियों को खाली करने पड़ सकते हैं ।

अब आप ही फैसला करो कि जिस इस्लाम ने अखण्ड भारत पर हमला कर कब्जा कर लिया, हिन्दुओं पर बेपनाह जुलम ढाये, संस्कृति और सभ्यता को नष्ट करने का हर सम्भव प्रयास किया, शांति और भाईचारे के प्रतीक हजारों मन्दिर तोड़े, अन्त में देश का विभाजन करवाकर उसके बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया । क्या वह इस्लाम उस अखण्ड भारत के बचे हुए छोटे से हिस्से वर्तमान भारत में अल्पसंख्यक का दर्जा पाने का हकदार है ?

o अब रही बात उन मुसलमानों की जो अल्लाह को तो मानते हैं पर आदमखोर जिहादी अल्लाह को नहीं मानते । ऐसे शांतिप्रिय देशभक्त नमकहलाल मुसलमान जो इस देश को अपनी मातृभूमि मानते हैं को अल्पसंख्यक कहना उनका अपमान है क्योंकि अपनी मातृभूमि में कोई अल्पसंख्यक कैसे हो सकता है। अब आप ही बताओ अल्पसंख्यक आयोग की क्या जरूरत है ?

आओ अब अल्पसंख्यक आयोग के दूसरे घटक ईसाईयों की बात करें । यह वही संप्रदाय है जो 16 वीं सदी में ब्यापार के बहाने भारत पर कब्जा जमाकर बैठ गया और 300 वर्ष तक इन ईसाईयों ने इस देश को जमकर लूटा । यहां के मूल निबासी हिन्दुओं व कई वर्षों से कब्जा जमाकर बैठे मुसलमानों पर इन ईसाईयों ने जी भरकर जुल्म ढाए । ये तो भला हो शहीद भगत सिंह, शहीद राजगुरू, शहीद सुखदेव, शहीद चन्दरशेखर आजाद, शहीद बाल गंगाधर तिलक , शहीद लाला लाजपतराय, शहीद विपन चन्द्र पाल जैसे अनगिनत ज्ञात और अज्ञात क्रांतिकारियों का जिनके बलिदानों ने भारतीयों के अन्दर इन अंग्रेजों को भगाने की ज्वाला को हमेसा जगाए रखा और अन्त में नेताजी सुभाष चन्द्रवोस की आजाद हिन्द सेना के डर से इन अंग्रेज ईसाईयों को भारत छोड़ कर भागना पड़ा।

क्या कहें उस नेहरू जी को जिसने दुष्ट ईसाई अफसरों व उनकी घरबालियों की दोस्ती में फंस कर उनकी नजायज बातों को मान कर देश को एक ऐसी हिन्दुविरोधी दिशा देने का अपराध किया जो आज देशद्रोहियों व गद्दारों को भारतीय संस्कृति व सभ्यता के रक्षक देशभक्त हिन्दुओं और उनके संगठनों पर हर तरह से हमला करने में सहयोग दे रही है । अब आप खुद फैसला करो कि ये ईसाई समुदाय जो भारत की बरबादी के लिए हर तरह से जिम्मेवार है क्या अल्पसंख्यक का दर्जा पाने के काबिल है ? नहीं न ।वैसे भी जिस ईसाई संप्रदाय से सबन्धित अंग्रेज इटालिएन एंटोनियो माइनो मारियो सारी की सारी भारत सरकार को गुलाम बनाकर बैठी हो व जिसके निर्देश पर गुलाम सरकार देशद्रोह के रास्ते पर चलते हुए देशभक्त साधुसंतो व सैनिकों को जेल में डाल रही हो, भारतीय संस्कृति व सभ्यता के आधार स्तम्भ मर्यादा पुर्षोतम भगवान श्री राम के अस्तित्व को नकार रही हो उस संप्रदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा देना कैसे उपयुक्त हो सकता है ?

मेरे प्यारे नासमझ हिन्दूओ क्या आपने कभी सोचा कि जिनके आप गुलाम रहे, जिन्होंने असहनीय यातनांयें देकर हिन्दुओं को सताया, हिन्दुओं को हर अधिकार से वंचित किया, आज वो ही इन गद्दार हिन्दुविरोधी नेताओं द्वारा अल्पसंख्यक का दर्जा देकर विशेषाधिकार के अधिकारी कैसे वना दिए गए।


जिस मजहब का संचालन आज भी भारत के बजाए इटली के रोम से होता हो ,जिस संप्रदाय के अनुयायी हिन्दुओं के धार्मिक गुरू व समाज सेवक स्वामी लक्ष्मणानन्द जी का कत्ल करने का दुस्साहस कर सकते हों । इसके परिणामस्वरूप पड़ी मार पर संसार के अधिकतर ईसाई देशों में हिन्दुओं के विरूद्ध महौल बनाने व भारत विरोधी प्रदर्शन करवाने में समर्थ हों उन्हें अल्पसंख्यक दर्जे की क्या जरूरत ?

ये लेख हमने मंबई हमले से पहले भारतभर में मुसलिम आतंकवादियों द्वरा किए जा रहे हमलों के दौरान लिखा था। विना किसी पूर्वागरह से ।एक तरफ हमारी नजर में  मुसलिम आतंकवादीयों और उनके समर्थकों का बहुमत था  तो दूसरी तरफ  वो मुसलिम जो कभी अलगाववाद की न वात करते हैं न समर्थन।

सैनिकों के खून की प्यासी केन्द्र सरकार पर देशभक्त बलागरस के साथ सीधी बात




भारत के शत्रुओं द्वारा भारत के देशभक्त लोगों/सैनिकों पर हमला करना कोई नई बात नहीं लेकिन सरकार का फर्ज है देश के शत्रुओं के साथ सख्ती से निपटना व देशद्रोह करने वाले हर ब्यक्ति/संस्था का नमोनिशान मिटाना । शत्रु चाहे देश के अन्दर हो या बाहर । पर भारत में आज एक ऐसी सरकार है जिसका हर कदम चीख-चीख कर उसकी गद्दारी की दास्तां बयान कर रहा है।सरकार ने सता में आते ही देश के लिए शहीद होने पर अर्धसैनिकबलों को मिलने वाली राशी ये कहकर कम कर दी कि सरकार के पास पैसा नहीं है। आतंकवादियों के विरूद्ध सुरक्षबलों के कारगर हथियार पोटा को ये कहकर निरस्त कर दिया कि जिन आतंकवादियों को पोटा के तहत सजा मिल रही हैं वो इसलिए निर्दोश हैं क्योंकि सेकुलर गिरोह को उनके वोट की सख्त जरूरत है। बात बढ़ते-बढ़ते यहां तक जा पहूंची कि माननीय सर्वोच्चन्यायालय द्वारा फांसी की सजा प्राप्त आतंकवादी भी सेकुलर गिरोह को निर्दोश नजर आया परिणामस्वारूप सरकार उस आतॉंकवादी को मिलने वाली फांसी आज तक रोके हुए है। ध्यान रहे कि इन आतंकवादियों से इन हिजड़े नेताओं की रक्षा करने के लिए सुरक्षाबलों के दर्जनों जवानों ने अपनी शहीदी दी थी पर इन गद्दार सेकुलर नेताओं ने उनकी कुर्वानी का शिला उनके कातिल की फांसी रोक कर दिया। आप सबके सामने शहीद मोहन चन्द शर्मा जी ने अपने देश के नागरिकों की जान-माल की रक्षा की खातिर अपने प्राण दे दिए पर वेशर्म गद्दार अमरसिंह ने उस शहीद ता अपमान सबके सामने किया । जब उस शीहद पर हमला करने वाला आतंकवादी सहजाद पकड़ा गया तो कांग्रेस के महासचिव गद्दार दिगविजय सिंह ने उस आतंकवादी के घर जाकर आतंकवादियो को खुला संदेश दिया कि आप चाहे जितने मर्जी सैनिकों को शहीद करो सेकुलर सरकार आपके साथ है आपका कोई कुछ नहीं विगाड़ सकता। अपनी वबात को अंजाम तक पहंचाने के लिए गद्दारों के सरदार राहुल नेहरू का आजमगढ़ दौरा भी निश्चित करवाया। इन सारी बातों को लिखने से हमारा अभिप्राय सिर्फ इतना है कि ये सैकुलर सरकार हर तरह से आतंकवादियों के अनुकूल बाताबरण बनाने में जुटी है।


एक तरफ इस गद्दारों की सरकार ने आतंकवादियों से निपटने वाले सबके सब कानून कमजोर कर डाले दूसरी तरफ देशहित में आतंकवादियों के विरूद्ध माननीय न्यायालय द्वारा दिए दए निर्णय रोक डाले। तीसरी तरफ भारत के शत्रुओं के पैसे पर पलने वाले एनजीओ + नकली मानवाधिकार संगठनों + देशविरोधी मिडीया+गद्दार परजीवियों+ आतंकवादियों के मददगार फिल्म निर्माताओं के सहयोग से सरकार ने मानवाधिकारों के नाम पर आतंकवादियों के अधिकारों का ऐसा ढिंढोरा पीटा कि खुद सरकार ने जनता को अपने सैनिकों को मरवाने के लिए मानसिक रूप से त्यार कर दिया। आज सरकार ने सैनिकों चाहे वो सेना के हों या फिर अर्ध सैनिक बलों के हाथ इस तरह से बांध दिए हैं कि वो निर्दोष नागरिकों की तो क्या अपने जवानों तक की रक्षा कर पाने में असफल हैं। क्योंकि कशमीर से कन्याकुमारी तक व पूर्व से पश्चिम तक सेना के उपर इस हद तक दबाब बना दिया गया है कि मानवाधिकार पहले हैं और देश की रक्षा वाद में। आज अगर कोई सैनिक देश की रक्षा की खातिर किसी आतंकवादी को मार देता है तो उसे ये खुद सिद्ध करना है कि मारा गया ब्यक्ति आतंकवादी था।और ये सिद्ध करने के लिए प्रमाण जुटाने का उस सैनिक के पास कोई संगठन नहीं ।कशमीर जैसे राज्यों में प्रमाण जुटाने का जिम्मा उस पुलिस पर है जो खुद आतंकवादियों से भरी पड़ी है। पश्मिम बंगाल में डी आई जी स्तर का अधिकारी खुद यह कहते हुए जनता के सामने आ चुका है कि वहां का मुख्यामन्त्री व सरकार माओवादियों को तकनिकी सहायता पलब्ध करवा रहे हैं जिसके परिणामस्वारूप अर्धसैनिक बलों का कैंप एक ऐसा भीड़-भाड़ वाली जगह पर लगवाया गया था जहां पर युद्धकरना लगभग असम्भव था क्योकि युद्ध की स्थिति में आस-पास के नागरिक मारे जाते ।इस कैंप को यहां न लगाने की सलाह बड़े अधिकारी ने दी लेकिन मुख्यामन्त्री के चहेते एस.पी ने अपने बड़े अधिकारी की बात मानने से इन कार कर दिया ।परिणाम स्वारूप माओवादी आतंकवादियों ने 26 सुरक्षाबलों के सैनिकों को जिंदा जला दिया। अभी 04-04-2010 को खुद गृहमन्त्री ने ये बात स्वीकार की पश्चिम बंगाल सरकार वांमपंथी आतंकवादियों के साथ मिली हुई है इसलिए सख्ती से निपटने में सहयोग नहीं कर रही है। बैसे भी देश का बच्चा-बच्चा जानता है कि ये लाल आतंकवाद चीन के ईसारे पर CPM+CPI+SFI+CPM(m) संगठनों द्वारा देशभर में फैलाय जा रहा है। अगर सरकार सच में लाल आतंकवाद से निपटने के प्रति गम्मभीर है तो उसे सबसे पहले इन संगठनों से निपटना होगा क्योंकि इन्हीं संगठनों के माध्यम से माओवादी आतंकवादी अपनी गतिविधियों का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। जिसका प्रमाण उसवक्त मिला जब नेपाल मे माओवादियों की सरकार बनवाने के लिए सीता राम येचुरी खुद वहां गए। नेपाल में माओवादी आतंकवादियों की सरकार वनवाने के लिए इसी सेकुलर गिरोह की सरकार ने भारत की मित्र नेपाली सेना को हथियारों की सपलाई बन्द कर दी थी। जो लोग नेपाल में माओवादी आतंकवादियों की सरकार बनबाने के लिए ऐसे देशविरोधी कदम उठा सकते हैं वो भला अपने देश में इन आतंवादियों को अपने द्वारा सासित राज्यों में कौन सी मदद नहीं पहूंचा रहे होंगे।


खुद गृह मन्त्री जब लालगढ़ गय़ तो इनका विरोध इन्हीं संगठनों की सहायता से त्यार एक तथाकथित बुद्धिजीवीयों(परजिवीयों) के गिरोह ने कि या । इसी गिरोह ने कुछ दिन पहले वहां एक रेलगाड़ी को बन्धक भी बनाया था।


आपको याद होगा कि कल ही गृहमन्त्र चितमवरम जी ने ये ब्यान दिया था कि माओवादी आतंकवादियों के विरूद्ध सेना का प्रयोग नहीं किया जायेगा ।उस मूर्ख गृहमन्त्री से कोई पूछे कि जब माओवादी आतंकवादी देश के विरूद्ध युद्ध की घोषणा किए हुए हैं तो सेना का प्रयोग करने में दिक्कत क्या है और अगर सेना का प्रयोग नहीं भी करना है तो ये आतंकवादियों को बताकर उनका हौसला बढ़ाने की क्या जरूरत है? आपने माहराष्ट्र एटीएस प्रमुख श्री रघुवंशी जी को सिर्फ इसलिए हटा दिया क्योंकि उन्होंने आतंकवादियों के नाम जनता को बता दिए आपने अपनी ही सरकार द्वारा लड़ी जा रही लड़ाई की योजना आतंकवादियो के सामने रख दी आपको क्यों इस पद से नहीं हटाया जाना चाहिए पर हटाएगा कौन क्योंकि आपके ऐसे ब्यान देश के शत्रुओं का हौसला बढ़ाते है जो एंटोनियो को अच्छा लगता है।


आप सबको याद होगा कि पिछले दिनों भारतीय वायुसेना ने आत्मरक्षा के लिए आतंकवादियों पर गोली चलाने का अधिकार मांगा था जिसे देने में इस देशविरोधी सरकार ने हरप्रकार की आना कानी की थी । अब आप बताओ जब सेना को खुद की रक्षा में गोली चलाने का अधिकार मांगने पर भी आनाकानी की जाती है तो भला सेना आतंकवादियों का पता लगाते हगी उन पर हमला कर सके ऐसा अधिकार कैसे मिल सकता है ।सुरक्षबल पहले आतंकवादियों का पता लगांयेगे फिर उनके मानबाधिकार सुरक्षित करने के लिए वहां के नेताओं के गुलाम DC/SDM/ADM को सूचित करेंगे फिर ये अफसर अपने आका हिजड़े नेताओं को सूचित करेंगे फिर आतंककवादियों पर गोली चलाने का अधिकार क्यों चाहिए इस पर सवाल जबाब होगा तब तक आतंकवादी सुरक्षावलों को मारकर अपने मित्र नेताओं के घर में जाकर छुप चुके होंगे। इन्हीं सब प्रतिबन्धों का परिणाम है कि आज आज 75 से अधिक CRPF जवानों को मौत के घाट उतारा गया ।दुख की बात यह है कि इन जवानों को शहीद होने से पहले युद्ध करने का मौका भी नहीं मिला।अभी दो दिन पहले 11 सैनिकों को इन्हीं वांमपंथी आतंकवादियों ने शहीद किया था । बैसे भी कशमीर से कन्याकुमारी तक सुरक्षा बलों पर मिडिया द्वार मानवाधिकारों के नाम पर आतंकवादियों को बचाने के लिए जिस तरह हमला वोला जा रहा है ऐसो महौल में कौन सैनिक आतंकवादियों पर गोली चलाकर अपने बच्चों को भूखा मारने का दुस्साहस करेगा । जिस सोराबुदीन के नाम पर आज तक बंजारा जैसे बहादुर अफसरों पर अत्याचार किए जा रहे हैं उस आतंकवादी के घर से दर्जनों एके 47 व हैंडग्रेनेड मिले थे।मुम्बई मे दाऊद जैसे आतॆंकवादियों को खुश करने के लिए उनके पालतु नेताओं ने कितने ही सार्प सूटरों को नौकरी से निकलवाकर उन पर मनघड़ंत आरोप लगवाये।कशमीर में अक्सर महिलाओं से बालात्कार का आरोप लगाकर सैनिकों को निशाना बनाया जाता रहा है।अभी हाल ही मे ये सिद्ध हो चुका है कि जिन महिलाओं की बात कर सैनिकों को बदनाम करने की कोशिश की जा रही थी उनके साथ रेप नहीं हुआ था।


हमारे देशभक्त बलागर भाईयों से सिर्फ इतनी विनती है कि अगर हो सके तो शुक्रवार तक अपने लेख सिर्फ आतंकवाद पर केन्द्रित करें ।इन लेखों के माध्यम से हम आतंकवाद से कैसे निपटा जा सकता है पर एक राय बनाने की कोशिस करें अगर हो सके तो ये भी बताने की कोशिश करें कि आतंकवादियों से निपटने में देशभक्त ब्लागरस क्या योगदान कर सकते हैं और कैसे। आओ मिलकर गद्दारों का पर्दाफास कर उनका सर्वनाश करें।


अन्त में मानीय गृहमन्त्री जी को आतंकवादियों से निपतने के लिए कुछ सुझाब


• सबसे पहले उन लोगों को मौत के घाट उतारा जाए जो आतंकवादियों के समर्थन में वोलते या लिखते हैं।


• आतंकवादियों के अनुकूल महौल बनाने में समाचार चैनलों की भूमिका की जांच करवाकर उनके विरूद्ध कठोर से कठोर कार्यावाही अमल में लाई जाए।


• NDTV जो कि आतंकवादियों के अनुकूल बाताबरण बनाने में हर मर्यादा तोड़ चुका है के विरूद्ध विना कोई समय गवाए कार्यावाही अमल में लाई जाए।


• पाकिस्तान समर्थक आतंकवादियों व वांमपंथी आतंकवादियों के रिस्तों को जनता के सामने रखकर कर दोनों के विरूद्ध विना न्यायलय में जाए ON THE SPOT कार्यावाही अमल में लाई जाए।






• गौतम नबलखा,विजय त्रिवेदी,महेशभट्ट ,माजिद मैनन,अबु हाजमी,ओबैसी ,एच के दुआ ,वाई पी सिंह जैसे लोगों के आतंकवादियों के साथ सहानुभूति के कारणों का पता लागाया जाए व इनके विरूद्ध कठोर से कठोर कार्यावाही अमल में लाई जाए।


• समाचार चैनलों ,पत्र-पत्रिकाओं, समाचार पत्रों पर सैनिकों के विरूद्ध कुछ भी कहने पर यथाशीघ्र प्रतिबन्ध लगाया जाए।


• आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त पाये जाने वाले गद्दारों के लिए कम से कम फांसी की सजा तय की जाए।


• हर उस ब्यक्ति को आतंकवादी मान जाए जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से आतंकवादियों का मददगार पाया जाए।


• देश के अन्दर व बाहर के बलागरस के लेखों की जांच पड़ताल कर देशभक्तों और गद्दारों को चिहनित कर गद्दारों को मौत के घाट उतारा जाए।


• गृहमन्त्री जी आतंकवाद को खत्म कर ने की पहली सीढ़ी उनके समर्थकों ,पोषकों ,बैचारिक मित्रों को खत्म करना है।


अन्त में सैनिकों से यही कहेंगे कि अगर सरकार ये कदम नहीं उठाती है तो गद्दार नेताओं को गोली मारकर सता अपने हाथ में लेकर देश के अन्दर और बाहर के शत्रुओं को मिटाकर भारत को गद्दारों से मुक्त किया जाए।भारत का हर देशभक्त आपको अपने साथ खड़ा मिलेगा ।






सोमवार, 5 अप्रैल 2010

जो जानवर अपने हर लेख में भारतीय संस्कृति के आस्था के प्रतीकों पर झूठे व अभद्र आरोप लगाकर प्रहार करते हैं उसके लेखों पर प्रतिक्रिया देना क्या उसके द्वारा फैलाई जा रही बकवास को बढ़ावा देने के समान नहीं ?

हम जब लखनऊ ब्लागर ऐसोसियेसन पर गए तो हमने सोचा कि हम अपने से अलग सोच रखने वालों से चर्चा-परिचर्चा करेंगे ।लेकिन वहां तो अधिकतर ऐसे लेख आने लगे जिनका एक मात्र सार भारतीय संस्कृति का नाम लेकर भारतीय संस्कृति को ही लांछित करना था। पहले हमने सोचा कि हम इसका जबाब देंगे लेकिन फिर ख्याल आया कि क्या जबाब देंगे जैसे वो भारतीय संस्कृति के आस्था के प्रतीकों को गाली निकाल रहे हैं बैसे ही हमें अरब देशों के आस्था के प्रतीकों को गाली निकालनी पड़ेगी। जो हमारे स्वभाव के विपरीत है ।हम तो यहां सिर्फ उन बातों का प्रतिकार करने के लिए हैं जो हमारे अपने देश में हमें ही मौत के घाट उतारने के लिए उपयोग हो रही है ।उस तर्कविहीन चर्चा से बचने के लिए हमने लखनऊ बलागर ऐसोसियन छोड़ दी।

लोकिन हम देख रहे हैं कि बलागवाणी पर भी ऐसे हिन्दूविरोधी जानवरों के तर्कविहीन बकबास को काफी देशभक्त लोग भी अपनी बहुमूल्य टिप्पणी लिख कर सम्मानित कर रहे हैं।हम ये तो नहीं मान सकते कि ये लोग इनके भ्रमित करने वाले शीर्षकों में उलझ कर उस बकवास पर कलिक कर देते हैं। हमारे इन मित्रों को सोचना चाहिए कि ये जानवर ऐसे भ्रमित करने वाले शीर्षक बनाते ही इसलिए हैं ताकि इनको प्रचार मिले और जब हम ऐसे लेख पर कलिक करते हैं तो ये अपने मकसद में सफल हो जाते हैं।आपकी टिप्पणी पक्ष में है या विपक्ष में इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।हमारे विचार में सिर्फ तरकपूर्ण वातों पर ही टिपणी की जानी चाहिए और तरकहीन बकवास पर न तो क्लिक करना चाहिए नही उस पर टिप्पणी की जानी चाहिए।जिन बलागों पर लगातार ऐसी बकवास लिखी जा रही है उनका वहिसकार करना चाहिए।

अनेक जागरूक भाई तो इन जानवरों द्वारा फैलाई जा रही बकवास का विरोध करने के लिए टिप्पणी लिखते हैं हैं लेकिन हमने तो ऐसे भी बैद्धिक गुलाम देखे जिन्होंने ऐसे ही जानवरों द्वारा मर्यदा पुर्षोतम भगवान राम-माता सीता -शृष्टी के निर्मात भगवान ब्रहमा-पालक भगवान विशनु व अधर्मियों के विनाशक भगवान महेश को अपमानित करने वाले ब्लागों पर जाकर उनका समर्थन तक कर डाला। इन बेबकूफों को कौन समझाये कि जब इस तरह की बातें लिखने वाले खुद का धर्म धरेमनिर्पेक्षता लिखते हैं तो फिर अरब देशों के आस्था के केन्द्रों की पैरवी व प्रचार-प्रसार वो क्यों करते हैं बास्तव में ये लोग सिर्फ बैद्धिक गुलाम हिन्दूओं को भ्रमित करने के लिए कभी खुद को सेकुलर बनाकर पेश करते हैं कभी अपना हिन्दू नाम रखकर हिन्दू धर्म को गाली निकालते हैं दोनों ही स्थितियों में ये बौद्धिक गुलाम हिन्दू इनके फैलाए जाल में फंसकर अपने सारे भारतीय समाज को निचा दिखाते हैं।हम इन बौद्धिक गुलाम हिन्दूओं से विनम्र प्रार्थना करते हैं कि आप अगर भारतीय संस्कृति का समर्थन नहीं कर सकते तो कम से कम मुंह तो बन्द रख सकते हैं। अगर आपको सेकुलर गिरोह की देशविरोधी हिन्दूविरोधी षडयन्त्रों के वारे में कोई शंका है तो कम से कम एक वार आप हमारी पुस्क नकली धर्मनिर्पेक्षता जरूर पढ़ लें फिर भी भ्रम रहे तो हमारे से सीधी चर्चा करें या तो हमें अपना तर्कपूरण नजरिया समझा दें या फिर हमारा नजरिया समझ लें। पर भगवान के लिए इन हिन्दूविरोधियों के जाल में फंस कर इनके हिन्दूमिटाओ –हिन्दूभगाओ अभियान के सहयोगी वनकर मानवबता के विनाश में हिस्सेदार न बनें। आपको याद रखना चाहिए कि जयचंद और कृपा राम की गद्दारी ने ही इन आतंकवादी राक्षसों को आगे बढ़ने में सहायता की वरना आज भी हम अफगानीस्थान तक होते।

जन्म-जन्म का साथ है हमारा -तुम्हारा या फिर गर्लफरैंड चाहिए

कया आपको विना सादी के आपके साथ रहने वाली गर्लफरैंड चाहिए



दुनिया में भारतीय समाज सिर्फ एक ऐसा समाज है जिसका हर कार्याकलाप संस्थागत है जन्म से लेकर मृत्यु तक । भारतीय संस्कृति ही एक ऐसी संस्कृति है जिसे सभ्य संस्कृति वोले तो मानव संस्कृति कहा जा सकता है। वाकी सब तो पशुतुल्य है उनका हर क्रिया कलाप पशुओं से मिलताजुलता है।न कोई सभ्यता न कोई संसकृति। पशु प्रवृति में दो पशु तब तक साथ होते हैं जब तक दोनों को एक दूसरे से शारीरिक सबन्धों की जरूरत होती है जैसे ही सारीरिक जरूरत पूरी सबन्ध खत्म।फिर दूसरा सबन्ध शुरू। बच्चों को नहीं पता कि उनके मां-वाप कौन है मां-वाप को नहीं पता कि कौन उसका बच्चा है। सारा काम सिर्फ सारीरिक सबन्धों के लिए कोई जिमेवारी नहीं कोई मर्यादा नहीं। सबकेसब संकरी नसल । अब भारत में एक ऐसा गिरोह सक्रिय हो चुका है जो इन पशु प्रवृतियों से इतना प्रभावित है कि भारत की संस्कृति को हर तरह से नुकसान पहुंचा कर पशु प्रवृति बनाने पर तुला है। ये गिरोह कभी कहता है नर को नर से शारीरिक संबन्ध बनाने का अधिकार होना चाहिए । कभी कहता है एक ही गांव /गोत्र में शादी पर प्रतिबन्ध नहीं होना चाहिए।कभी ये मात-पिता के बच्चों पर अधिकार पर प्रश्न उठाता है। कभी बच्चों को पढ़ाई-लिखाई सबछोड़कर सिर्फ ब्याबिचार पर अपना ध्यान केन्द्रित करने को उकसाता है। कभी ये गिरोह बच्चों द्वारा भागकर अपने माता-पिता की ईच्छा के विरूद्ध शादी को उनका अधिकार बतात है । कई ये गिरोह लिव न रिस्ते की बात करता है। मतलब ये गिरोह अपने कब्जे वाले सब संसाधनों का उपयोग कर पशु संस्कृति को आगे बढ़ाने के काम पर लगा रहता है।सच बतायें तो हमें इस पर कोई आपति नहीं कि ये मानब होकर क्यों पशु की तरह जीवन जीने पर उतारू है क्योंकि हो सकता है इसकी उत्पति इसी प्रवृति के फलस्वारूप ही हो। बस आपति है तो इस बात पर कि जो मानब की तरह जीबन जी रहे हैं उनके जीने के तरीके पर ये पशुओं का गिरोह कैसे सवाल उठा सकता है। इस गिरोह को चाहिए कि ये वहां जाकर रहे जहां इनके जैसे पशु प्रवृति को मानने वालों की संख्या अधिक है।


कुछ दिन पहले हमारा सामना ऐसे ही पशु-गिरोह(उम्र25-45)के साथ हुआ।बातों-बातों में हमने उनसे पूछा कि क्या आपको महिला मित्र चाहिए ।तो सबका जबाब था हां ।हमें कोई हैरानी नहीं हुई हम सबझ गए कि सबकेसब सेकुलर हैं। हमने दूसरा प्रश्न किया क्या आप अपनी मां-बहन-बेटी-पत्नी को पुरूष मित्र रखने की राय/सहमति देंगे।सबके सब भड़क गय।सबका जबा था कैसी बैत करते हो तुम हम तो हमारी मां-बहन-बेटी-पत्नी के वारे में ऐसा सोचने वाले के नाक-मुंह सब तोड़ देंगे कत्ल कर देंगे उस गधे को ।फिर हमने कहा कि जिस तरह आप अपनी मां-बहन-बेटी-पत्नी के साथ कोई सबन्ध नहीं बनने देना चाहते कमोवेश ऐसी ही स्थिति समाज के बढ़े हिस्से की है ।अब आप बताओ कि जिस लड़की को आप अपनी विना शादी की फ्रैंड वनाना चाहते वो लड़की आयेगी कहां से ? क्योंकि समाज की हर लड़की किसी न किसी की मां-बहन-बेटी-पत्नी है।


अन्त में हम तो सिर्फ इतना कहेंगे कि हमें दूसरों की मां-बहन-बेटी-पत्नी के साथ बैसा ही ब्याभार करना चाहिए जैसा हम अपनी मां-बहन-बेटी-पत्नी के साथ होने की आशा करते हैं।क्योंकि अगर हम दुसरों की मां-बहन-बेटी-पत्नी का अपमान करते हैं तो इस बात की पक्की गारंटी है कि हमरी मां-बहन-बेटी-पत्नी का अपमान दूसरे करेंगे।क्योंकि हमारा ब्याबहार ही समाज की दिशा तय करता है।


सब भारतीयों की एक ही आबाज जन्म-जन्म का साथ है हमारा


 तुम्हारा वाकी सब...


रविवार, 4 अप्रैल 2010

देशभक्त कांर्गेसियों द्वारा समय-यमय पर हिन्दूविरोधीयों-देसविरोधियों के विरूद्ध बजाए जा रहे विगूल को एक समूर्ण क्रांति में वदलने की जरूरत है।



हमारा पक्का विशवास है कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व वेशक हिन्दूविरोधियों-दोशविरोधियों के हाथों में है लेकिन कांग्रेस में देशभक्त नेताओं की कमी नहीं।जरूरत है देशभक्त कांग्रेसियों को पहचान कर उनका साथ देकर कांग्रेस को देशविरोधियों से आजाद करवाने की क्योंकि कांग्रेस जब तक विदेशियों के ईसारे पर नाचेगी तब तक वो जब खुद सता में है तो गद्दारों के विरूद्ध काम करने के बजाए गद्दारों के लिए काम करेगी और जब विपक्ष में होगी तो सतारूढ़ दल द्वारा लिए गए किसी भी देशहित के निर्णय को किसी सांप्रदाय/जाति/क्षेत्र विशेष के विरूद्ध बताकर देश में दंगा फैलाकर हिन्दूओं को आपस में लड़वाकर भारत को कमजोर करेगी। देश को विदेशी ताकतों के चुंगल आजाद करवाना अकेले भाजपा/ भारत स्वाभिमान के बश की बात नहीं ।विदेशी ताकतों के संकजे से भारत को आजाद करवाने के लिए देश के सब देशभक्त लोगों को ठीक उसी तरह संगठित होना होगा जैसे गद्दार सेकुलर गिरोह के रूप में संगठित होकर अपने देशविरोधी-हिन्दूविरोधी षडयन्त्रों को अंजाम दे रहे हैं । हर देसविरोधी समाचार चैनल/मानवाधिकार संगठन/एन जी ओ/समाजिक कार्यकरता/धर्मांतरण की ठेकेदार संस्थायें /आतंकवादी गिरोह/कुछ न्यायधीश/फिल्म निर्माता/लेखक इस भारत विरोधी सेकुलर गिरोह का हिस्सा हैं।ठीक इसी तरह देशभक्त हिन्दू संगठनों को हर उस ब्यक्ति को साथ लाने का प्रयत्न करना होगा जो देश के प्रति बफादार है।


जब अमेरिकी दबाब में अंग्रेजों के गुलाम प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एंटोनियो के ईसारे पर एक ऐसा विल लोकसभा में पास करवाने की कोशिस की जो अमेरिकी कंपनियों को भारतीयों को मारने की खुली छूट देता था तब हर देशभक्त की तरह देशभक्त कांग्रेसियों को भी बुरा लगा ।इन 35 देशभक्त कांग्रेसियों ने विधेयक पेश होने के वक्त संसद से अनुपस्थित रहकर अपना विरोध प्रकट कर देशविरोधी कांग्रेसी नेतृत्व की पोल खोलकर रख दी।हमारे विचार से इन कांग्रेसियों के देशहित में लिए गय इस फैसले का जितना सनर्थन किया जाये उतना कम है।जनता को समझना चाहिए कि जब पूरी कांग्रस पार्टी का शीर्ष नेतृत्व देशविरोधियों के हाथ में हो तब इस तरह का कदम उठाना अपना कैरियर दांव पर लगाने जैसा था। हमारे विचार में ये कांग्रेसी जानते हैं कि अगर देश है तो कैरियर है अगर देश नहीं तो काहे का कैरियर।


ऐसा नहीं कि ये पहली घटना है जिसमें देशभक्त कांग्रेसियों ने विदेशीयों की हिन्दूविरोध-देशविरोदी नितियों का विरोध किया हो ।इससे पहले हिमाचल के ततकालीन मुख्यामन्त्री वारभद्र सिंह जी ने हिमाचल में एक ऐसा विधेयक पारित करवाया जो धर्मांतरण के ठेकेदारों के मूंह पर तमाचे की तरह जा लगा।इस विधेयक को रद्द करने के लिए अमेरिका से लेकर एंटोनियो तक के दबाब को ठेंगा दिखाते हुए वीरभद्र सिंह जी ने वो ही किया जो देशहित में था।जिसकी उन्हें कीमत भी चुकानी पड़ी। एंटोनियों ने अपने प्रभाव का प्रयोग नवीन चावला के माध्यम से करते हुए चुनाब छे महीने पहले करवाकर योजनाबद्ध तरीके से वीरभद्र जी के समर्थक ताकतवर जिताऊ उमीदवारों के टिकट कटवाकर वीरभद्र सिह जी को चुनाब हरवाकर अपने सांप्रदाय से संबन्ध रखने वाली विद्यास्टोक्स को नेता विपक्ष बनवा दिया।


सत्यव्रत चतुर्वेदी जी को कौन भुला सकता है जिन्होंने शहीद मोहन चन्द जी का अपमान करने वाले गद्दार अमर सिंह को पागल करार देकर अपनी अप्रसन्ता को जगजाहिर कर दिया।परिणामस्वारूप गद्दारों की ठेकेदार एंटोनिया ने उन्हें कांग्रेस के प्रवक्ता पद से हटा दिया।ध्यान रहे अभी कुछ दिन पहले एक और गद्दार के विरूद्ध मुंह खोलने के फलस्वारूप इस गद्दार एंटोनिया ने उन्हें फिर कांग्रेस के प्रवक्ता पद से हटा दिया।


अभी पिछले कल ही पर्यावरण मंत्री श्री जयराम रमेस जी ने गुलामी के प्रतीक गाऊन को उपनिवेशवाद का स्मृतिचिन्ह करार देकर एक सच्चे भारतीय का मन प्रकट कर एंटोनियो की गुलामी के विरूद्ध विद्रेह का एक और विगुल बजा दिया । जिस पर भारत में रह रहे विदेशी आक्रममकारियों के एजेंट धर्मांतरण के ठेकेदार ईसाईयों को काफी तकलीफ हुई । हो सकता है कि बहुत जल्दी ये ईसाई अपनी ठेकेदार एंटोनिया के पास जाकर ठीक उसी तह सिकायत करें जिस तरह वीरभद्र सिंह जी की की थी






अन्त में हम तो इतना ही कहेंगे कि देशभक्त कांर्गेसियों द्वारा समय-समय पर हिन्दूविरोधियों-देशविरोधियों के विरूद्ध बजाए जा रहे विगूल को एक समूर्ण क्रांति में वदलने की जरूरत है।






ये संघी क्यों लगाते हैं साम्प्रदायिक आग


Diwakar Maniwrote:
यह लेख( सांप्रदायिक दंगो पर मुंह खोलने से पहले....) पूरी तरह से एक आहत हिंदू मन की व्यथा को प्रतिबिंबित करता है. ये जितनी भी घटनाएं हैं, इसके पीछे शर्मनिरपेक्ष सरकार, मीडिया इत्यादि का तो हाथ हैं ही, इसमें हम हिंदुओं के अंदर व्याप्त हो गई हजारों सालों की कायरता भी है. "वीर भोग्या वसुंधरा" अर्थात्‌ जमीन पर राज वीर ही करते हैं, और हमारे कौम के अधिकांश जनों का खून अब पानी बन गया है. देश-समाज, अपनी कौम के अन्य लोगों, स्थलों के साथ कुछ भी हो, हमें तो बस अपनी चिन्ता है. वहीं ये जिहादी कौम वाले डॆनमार्क, फिलीस्तीन, तुर्की में हुई घटना से भारत को हिला देते हैं. कुछ इसी तरह की बातों/घटनाओं को लेकर, जब गुजरात के अक्षरधाम मंदिर पर हमला हुआ था, और गोधरा में स्वयंसेवकों को जिन्दा जला दिया गया था, मैंने यह कविता लिखी थी-
उन्होनें कहा- लादेन मरे या बुश, हम दोनों में खुश.
फिर जोड़ा- ना लादेन मरे ना बुश, लगे दोनों पर अंकुश.


उनकी बातें सुनकर पूछा मैनें उनसे
लादेन और बुश की हो रही है लड़ाई
उसमें हिन्दूओं की क्यों हो रही है कुटाई ?
आपके पास क्या है इसका जवाब ?


उन्होनें उत्तर दिया-
सरासर गलती तो हिन्दूओं की हीं है.
क्यों वह समर्थन सच्चाई का कर रहे हैं ?


तब मैनें पूछा- हे जनाब !
उन निहथ्थे रामसेवकों का दोष क्या था,
जो जला दिये गये साबरमती की बोगियों में?


मेरी बात सुनकर रहा न गया उनसे
तमतमा गया चेहरा उनका
बोले,
क्या बात करते हो यार !
क्यों गये थे अयोध्या में होकर तैयार ?


वो जले तो ठीक हीं जले,
मरे तो ठीक हीं मरे.
यदि कोई हिन्दू मरा तो समझो कि उसने जरूर कोई गलती की होगी.


आखिर इस धर्मनिरपेक्ष देश में,
क्या उनको यह भी नहीं है अधिकार
कि वो मार सकें काफिरों को बार-बार?


वे तो अपने धर्म पर हैं अडिग.
उनका तो धर्म कहता है-
जो तेरी राह में हो पड़े,
उन्हे मारकर बनो तगड़े (गाज़ी).


उन्होनें तो केवल अपना काम किया
नाहक हीं उनको तुमने बदनाम किया.


जरा-सा रूक कर पूछा उन्होनें मुझसे-
बताओ श्रीमान् !
ये संघी क्यों लगाते हैं साम्प्रदायिक आग,
हिन्दूओं को ये क्यों भड़काते हैं
क्यों उन्हें जागृति का पाठ पढ़ाते हैं ?
ये तो सो रहे थे, नाहक हीं उन्हे जगा दिया.


अरे ! हिन्दूओं का तो काम ही है सहना
और बार-बार मरना.
ये लोग भी कोई लोग हैं,
आज मर-कट रहे हैं तो हो रहा है हल्ला.


इतना सुनकर रहा न गया मुझसे
मैनें कहा-
धन्य हो मेरे भाई
तुम्हारे रहते अन्य कौन बन सकता है कसाई.
हमें मारने के लिये तो आप जैसे धर्मनिरपेक्ष हीं काफी हैं.


अब वह दिन दूर नहीं,
जब आप जैसों के अनथक प्रयास से
ये अपाहिज-कायर हिन्दू मिट जायेंगे जहाँ से
मैं तो बेकार हीं कोस रहा था आपके प्यारों को
अरे ! आपके सामने उनकी क्या औकात है ?
ये सब घटनायें तो आप जैसों की सौगात है




यह प्रतिक्रिया सच्चाई ब्यान कर गई

शनिवार, 3 अप्रैल 2010

भारतीय की जान की कीमत

भारतीय की जान की कीमत



(बाल-बुद्धि भारतियों पर कवि का कटाक्ष)






अरे - समझौता गाड़ी की मौतों पर - क्या आंसू बहाना था


उनको तो - पाकिस्तान नाम के जहन्नुम में ही - जाना था


मरने ही जा रहे थे - लाहौर, करांची - या पेशावर में मरते


और उनके मरने पर - ये नेता - हमारा पैसा तो ना खर्च करते






और तुम - भारतियों, टट्पुंजियों - कहते हो हैं हम हिंदुस्थानी


जब हिसाब किया - तो निकला तुम्हारा ख़ून - बिलकुल पानी


औकात की ना बात करो - दुनिया में तुम्हारी औकात है क्या - खाक


वो समझौता में मरे तो १० लाख - तुम मुंबई में मरो तो सिर्फ ५ लाख






तुम से तो वो अनपढ़, जाहिल, इंसानियत के दुश्मन, ही अच्छे


देखो कैसे बन बैठे हैं - बिके हुए सिक यू लायर मीडिया के प्यारे बच्चे


उनके वहां मिलिटरी है - इसलिए - यहाँ आ के वोट दे जाते हैं


डेमोक्रेसी के झूठे खेल में - तुम पर ऐसे भारी पड़ जाते हैं






जाग जा - अब तो जाग जा ऐ भारत - अब ऐसे क्यूँ सोता है


वो मार दें - और तू मर जाये - लगता ऐसा ये "समझौता" है


प्रियजनों की मौत पर - फूट फूट रोवोगे - वोट नहीं क्या अब भी दोगे


लानत है - ख़ून ना खौले जिस समाज का - वो सज़ा सदा ऐसी ही भोगे






पांच साल में - आधा घंटा तो - वोट के लिए निकाला कर


विदेशियों के वोटों से जीतने वालों का तो मुंह काला कर


सब चोर लगें - तो उसमे से - तू अपने चोर का साथ दे दे


अपना तो अपना ही होता है - परायों को तू मात दे दे






बुद्धिमान है तू - अब अपनी बुद्धि से काम लिया कर


वोट दे कर अपनों को - वन्दे मातरम का उद्घोष कर


आक्रमणकारियों के दलालों का राज - समूल समाप्त कर


ऐ भारत - तू उठ खड़ा हो - निद्रा, तन्द्रा को त्याग कर






अपने भारतीय होने पर - दृढ़ता से अभिमान कर


कुछ तो कर - कुछ तो कर - अरे अब तो कुछ कर






रचयिता : धर्मेश शर्मासंशोधन,
संपादन : आनंद जी. शर्मा 

बुधवार, 31 मार्च 2010

तुम्हारी हत्या पर भी रख लेंगे २ मिनट का मौन





(अभागे भारतीय की फरियाद पर सिक-यू-लायर(Sick you Liar, बीमार मानसिकता वाले झुट्ठे) नेता द्वारा सांत्वना भरे कुटिल उपदेश की तरह पढ़ें)



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अच्छा!!! वो दुश्मन है? बम फोड़ता है? गोली मारता है?



मगर सुन - दोस्ती में - इतना तो सहना ही पड़ता है



तय है - जरुर खोलेंगे एक और खिड़की - उसकी ख़ातिर



मगर - हम नाराज़ हैं - तेरे लिए इतना तो कहना ही पड़ता है









तुम भी तो बड़े जिद्दी हो - दुश्मन भी बेचारा क्या करे



इतने बम फोड़े - शर्म करो - तुम लोग सिर्फ दो सौ ही मरे ? (कितने बेशर्म हो तुम लोग)



चलो ठीक है - इतने कम से भी - उसका हौंसला तो बढ़ता है



और फिर - तुम भी तो आखिर १०० करोड़ हो(*) - क्या फर्क पड़ता है?



[(*) ११५ करोड़ में १५ करोड़ तो विदेशी घुसपैठिये हमने ही तो अन्दर घुसाएँ हैं वोटों के लिए]









अच्छा! समझौते की गाड़ियों में दुश्मन भी आ जाते हैं???



क्या हुआ जो दिल लग गया यहाँ - और यहीं बस जाते हैं



बेचारे - ये तो वहां का गुस्सा है - जो यहाँ पर उतारते हैं



वहां पैदा होने के पश्चाताप में - यहाँ पर तुम्हें मारते हैं (क्यों न मारें?)









क्या सोचता है तू ? मरना था जिनको - वो तो गए मर



तू तो जिन्दा है ना - तो चल - अब मरने तक हमारे लिए काम कर



और क्या औकात थी उन मरने वालों की ? सिर्फ २०० रुपये मासिक कर (*१)



हम क्या शोक करें - क्यों शोक करें अब - ऐसे वैसों की मौत पर ?









अच्छा! आतंकवादी तुम्हें लूटता है? मारता है? मजहब के नाम पर ?



पर आतंकवादी का तो कोई मजहब ही नहीं होता - कुछ तो समझा कर (बेवकूफ कहीं के)



तू सहिष्णु है - भारत सहिष्णु है - यह भूल मत - निरंतर याद कर



क्या कहा? आत्मरक्षार्थ प्रतिरोध का अधिकार? - बंद यह बकवास कर (अबे,वोट बैंक लुटवायेगा क्या)









इन बेकार की बातों में - न अपना कीमती वक्त बरबाद कर



भूल जा - कुछ नहीं हुआ - जा काम पर जा - काम कर









तेरे गुस्से की तलवार को - हमारी शांति की म्यान में रख



हमने दे दिया है ना कड़ा बयान - ध्यान में रख



जानते हैं हम - इस बयान पर - वो ना देगा कान



चिंता ना कर - तैयार है - एक इस से भी कड़ा बयान









दे रक्खा है उसे - सबसे प्यारे देश का दरजा (*२)



चुकाना तो पड़ेगा ना - इस प्यार का करजा



दुनिया भर से - कर दी है शिकायत - कि वो मारता है



दुनिया को फुरसत मिले - तब तक तू यूँ ही मर जा









किस को पड़ी है कि - कौन मरा - और मार गया कौन



आराम से मर - तेरे लिए भी रख लेंगे - २ मिनट का मौन









रचयिता : धर्मेश शर्मा



संशोधन, संपादन : आनंद जी. शर्मा

मंगलवार, 30 मार्च 2010

ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः

ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः




ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः



ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः



ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः



ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः



ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः



ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः



ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः



ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः



ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः



ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः



ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः



ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः



ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः



ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः



ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः



ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः



ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः



ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः



ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः



ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः



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ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः



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ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः



ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः ॐ श्री हनुमते नमः





















रविवार, 28 मार्च 2010

सांप्रदायिक दंगो के वारे में मुंह खोलने से पहले आपको यह जानलेना अति आबस्यक है कि सांप्रदायिक दंगो के लिए जिम्मेबार कौन है फिर आपको खुदवाखुद पता चल जाएगा कि मोदी पर हमला करने बाले कितने सही हैं?

ये सरकार जिस तरह साँप्रदायिक दंगों को हिन्दुओं के विरूद्ध हथियार के रूप में प्रयोग कर रही है। उसे देखकर तो लगता है कि जिहादी हमलों में इतने हिन्दुओं की जान जाने के बावजूद सरकार को मुस्लिम जिहादी मानसिकता का ऐहसास ही नहीं है ।

इस सरकार की जानकारी के लिए हम बता दें कि आज तक देश में हुए दंगों में से 95% दंगों की शुरूआत अल्पसंख्यकों ने की है। इन में से भी अगर 2-4% दंगों को छोड़ दें तो बाकी सब की शुरूआत मुसलमानों में छुपे जिहादियों ने की है ।

आम-मुसलमान खुद को उतना ही भारतीय मानता है जितना बाकी भारतीय मानते हैं इसलिए उसे हिन्दू जीवन पद्धति बोले तो भारतीय जीवन पद्धति पर कोई तकलीफ नहीं होती ।

तकलीफ होती है तो उन मुस्लिम जिहादियों को जो खुद को औरंगजेब और बाबर के उतराधिकारी मानकर इस भारत को इस्लामी राज्य बनाने के षड़यन्त्र को इस सैकुलर गिरोह के सहयोग से व अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए बने विशेष कानूनों के दुरूपयोग से हिन्दुबहुल क्षेत्रों पर लगातार हमला कर आगे बढ़ा रहे हैं ।

अगर आपको नहीं पता तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इतिहास इन तथ्यों का साक्षी है कि कितने ही बार इन जिहादियों ने अल्लाह हो अकबर के नारे लगाते हुए मन्दिरों शिवाल्यों व अन्य पूजा स्थलों पर हमला कर तबाही मचाई व अनगिनत हिन्दुओं को इस्लाम के नाम पर हलाल किया ।

इस हिन्दुविरोधी देशद्रोही सैकुलर जिहाद व धर्मांतरण समर्थक सरकार व इसके सहयोगी गद्दार मीडिया ने बार-बार साँप्रदायिक दंगों का जिकर कुछ इस अन्दाज में किया कि मानो इन दंगों के लिए हिन्दू जिम्मेवार हों।

हम इतने बड़े पैमाने पर हिन्दुओं के विरूद्ध हुई हिंसा के बारे में लिखना नहीं चाहते थे। परन्तु इस सेकुलर गिरोह द्वारा सामप्रदायिक दंगों के बहाने जिहादियों द्वारा किए जा रहे हिन्दुओं के कत्ल को जायज ठहराने की दुष्टता ने हमें ये सब लिखने पर मजबूर कर दिया। हमें परेशानी में डाल दिया कि कहाँ से शुरू करें इन मुस्लिम जिहादियों द्वारा शुरू किए गए दंगों का लेखा-जोखा। अधिकतर देशद्रोही चैनल तो जिहादियों का समर्थन करने व हिन्दुओं को अपमानित करने में मुस्लिम जिहादियों को भी पीछे छोड़ देते हैं ।

अगर हम 1945 तक हुए हिन्दुओं के नरसहारों को न भी लिखें तो भी इन मुस्लिम जिहादियों ने 1946 के बाद ही हिन्दुओं पर इतने जुल्म ढाये हैं कि इनके बारे में सोचते ही रौंगटे खड़े हो जाते हैं ।

मन ये सोचने पर मजबूर हो जाता है कि हिन्दू ये सब कैसे और क्यों सहन कर गए ?

इतना कुछ हो जाने पर भी ये गिरोह जो खुद को सैकुलर कहता है इन जिहादियों का साथ क्यों दे रहा है ?

क्यों इस गिरोह को हिन्दुओं के कत्ल करवाने में फखर महसूस होता है विजय का एहसास होता है ?

क्यों और कैसे ये गिरोह हिन्दुओं के हुए हर नरसंहार के बाद जिहादियों के पक्ष में महौल बनाने पर उतारू हो जाता है ?

क्यों ये गिरोह हिन्दुओं को धोखा देकर उन्हें ही कत्ल करवाने में कामयाब जो जाता है ?

क्यों ये गिरोह हिन्दुओं के आक्रोश से बच जाता है ?

क्यों हिन्दू एकजुट होकर हिन्दुओं के कातिलों व उनके समर्थकों पर एक साथ हमला नहीं बोलते ?

हम शुरू करते हैं 1946 से जब कलकता में मुसलमानों द्वारा किए गए हमलों में 5000 हिन्दुओं का कत्ल किया गया ।

फिर नवम्बर में पूर्वी बंगाल के नौखली जिला में हिन्दुओं का नरसंहार किया गया सब के सब हिन्दुओं को वहां से भगा दिया गया उनकी सम्पति तबाह कर दी गई ।

विभाजन के दौरान कम से कम 20 लाख हिन्दू-सिखों का कत्ल सिर्फ वर्तमान पाकिस्तान में किया गया ।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1947-1951 तक जिहादी मुसलमानों द्वारा किए गये अत्याचारों के परिणामस्वरूप एक करोड़ हिन्दू-सिख भारत भागने पर मजबूर किए गए ।

इसमें चौंकाने वाला तथ्य ये है कि वर्तमान भारत में भी इस दौरान हिन्दुओं पर हमले किए गए और तब की सैकुलर सरकार तमाशा देखती रही जिहादियों की रक्षा में लगी रही हिन्दुओं को मरवाती रही ।

फरवरी 1950 में 10,000 हिन्दुओं का ढाका और बंगला देश(तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) के अन्य भागों में नरसंहार किया गया । उसके बाद के कुछ महीनों में लाखों हिन्दुओं को वहां से भगाया गया ।

1950-60 के बीच में 50 लाख हिन्दुओं को मुस्लिम जिहादियों द्वारा पूर्वी पाकिस्तान से भारत भगाया गया ।

1971 में पाकिस्तानी सेना ने बांगलादेश मुक्ति अंदोलन के दौरान 25 लाख हिन्दुओं का कत्ल किया । जिसके परिणामस्वरूप अधिकतर हिन्दू सुरक्षा की खोज में भारत भाग आये ।

उस वक्त की सरकार ने इन हिन्दुओं की रक्षा के लिए क्या कदम उठाए ? कोई नहीं । आखिरकार बांगलादेश बनवाने का दावा करने वाले इन लोगों ने क्यों हिन्दुओं को लावारिस छोड़कर मरने पर मजबूर किया ?

सिर्फ इसलिए कि हिन्दू कभी संगठित होकर गैर हिन्दुओं पर हमला नहीं करता या फिर इसलिए कि कभी एकजुट होकर संगठित वोट बैंक नहीं बनाता ?

1989 में बांगलादेश में सैंकड़ों मन्दिर गिराए गए ।

1947 से 2000 के बीच जिहादी हमलों में 6 लाख चकमा बनवासियों का नामोनिशान मिटा कर मुसलमानों ने उनकी जमीन पर कब्जा कर उनकी औरतों को जबरन मुसलमानों के साथ विवाह करने को बाध्य किया ।

जागो ! हिन्दू जागो !

लड़ाई से भागो मत एकजुट होकर लड़ों वरना मिटा दिए जाओगे इन मुस्लिम जिहादियों व इनके आका धर्मनिर्पेक्षतावादियों द्वारा ।

1947-48 में मुसलमानों ने कश्मीर के जिस हिस्से पर कब्जा किया(पी ओ के) वहां से सब हिन्दुओं का नामोनिशान मिटा दिया गया ।

1985 में अलकायदा की स्थापना के बाद भारत समेत सारे भारत में मुस्लिम जिहाद के एक नये दौर की शुरूआत हुई ।

1986 में कश्मीर में जिहादियों द्वारा हिन्दुओं पर एक तरफा हमले शुरू किए गए । जिहादियों ने एक को मारो एक का बलात्कार करो सैंकड़ों को भगाओ की नीति अपनाई । मुसलमानों ने मस्जिदों से लाउडस्पीकरों द्वारा जिहाद का प्रचार प्रसार किया । उर्दू प्रैस के द्वारा भी जिहाद का प्रचार प्रसार किया गया । जिहाद शुरू होते ही हिन्दुओं के पड़ोसी मुसलमान ही उनके शत्रु बन गए । मुसलमानों ने संगठित होकर हिन्दुओं को निशाना बनाना शुरू किया ।

जिहादियों की भीड़ इक्ट्ठी होकर हिन्दुओं के घर में जाती उन पर हर तरह के जुल्म करने के बाद उनको दूध पीते बच्चों सहित हलाल कर देती । यहाँ समाचार दिया जाता पाकिस्तानी आतंकवादियों ने ये सब कर दिया । लेकिन सच्चाई यही थी कि हिन्दुओं को हलाल करने वाले उनके पड़ोसी मुसलमान ही होते थे। जो हिन्दुओं को कत्ल करने के बाद अपने-अपने घरों में रहते थे ।

कश्मीर के अधिकतर पुलिसकर्मी व महबूबामुक्ती जैसे नेता इस्लाम के नाम पर इन जिहादियों का हर तरह से सहयोग करते थे अभी भी कर रहे हैं । कई बार तो बाप व भाईयों के हाथ पैर बांध कर उनके परिवार की औरतों की इज्जत लूटकर उसके फोटो खींच कर बाप और भाईयों को ये सब देखते हुए दिखाया जाता था । बाद में ये तसवीरें हिन्दुओं के घरों के सामने चिपका दी जाती थी । परिणाम जो भी हिन्दू इन तसवीरों को देखता वही अपने परिवार की औरतों की इज्जत की रक्षा की खातिर भाग खड़ा होता । और उसके पास रास्ता भी क्या था सिवाय हथियार उठाने या भागने के । हिन्दुओं ने हथियार उठाने के बजाए भागना बेहतर समझा । क्योंकि अगर वो हथियार उठाते तो ये सैकुलर नेता उन्हें अल्पसंख्यकों बोले तो मुसलमानों का शत्रु बताकर जेल में डाल देते फांसी पर लटका देते ।

हमें हैरानी होती है इन धर्मनिर्पेक्षता की बात करने वालों पर जो हिन्दुओं पर हुए अत्याचारों के बारे में देश-दुनिया को जागरूक करने वालों को आतंकवादी कहते हैं, साम्प्रदायिक कहते हैं और इन सब जुल्मों-सितम को राजनीति बताते है हिन्दुओं को गुमराह करते है । ये सब दुष्प्रचार सिर्फ जिहादी ही नहीं बल्कि जिहादियों के साथ-साथ इनके ठेकेदार धर्मनिर्पेक्षता के पर्दे में छुपे ये राक्षस भी करते हैं जो अपनों का खून बहता देखकर भी अपनी आत्मा की आवाज नहीं सुनते । न केवल इन जिहादी आतंकवादियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ते हैं पर सरकार भी बनाते हैं और सत्ता में आने के बाद जिहादियों के परिवारों का जिम्मा उठाते हैं । उनको हर तरह की मदद की जिम्मेवारी लेते हैं जिहादी आतंकवादियों के परिवारों को आर्थिक सहायता देते हैं । हिन्दुओं को अपने घरों से भागने पर मजबूर करते हैं । जिहादियों के विरूद्ध सेना द्वारा कार्यवाही शुरू होने पर जिहादियों के मानवाधिकारों का रोना रोते हैं मतलब हर हाल में जिहादियों का साथ देते हैं ।

अगर आप सोचते हैं कि हम कोई पुरानी बात कर रहे हैं तो आप गलत हैं। जो कुछ कश्मीर में हिन्दुओं के साथ किया गया वो ही सबकुछ अब जम्मू के मुस्लिमबहुल क्षेत्रों में दोहराय जाने की तैयारी हो चुकी है तैयारी ही क्यों उसकी तो शुरूआत भी हो चुकी है पिछले दिनों जब डोडा उधमपुर में मई 2006 में 36 हिन्दुओं का कत्ल किया गया तो इस नरसंहार में बच निकलने में सफल हुए हिन्दुओं ने बताया कि उन्हें ये देख कर हैरानी हुई कि जो मुस्लिम जिहादी हिन्दुओं को इस तरह कत्ल कर रहे थे वो इन हिन्दुओं के पड़ोसी मुसलमान ही थे । जम्मू के मुस्लिमबहुल क्षेत्रों में इसके अतिरिक्त भी कई नरसंहार हो चुके हैं ।

पिछले दिनों हिमाचल के साथ लगते जम्मू के एक गाँव में गांव वालों ने जब एक मुस्लिम जिहादी को मार गिराया तो वहां के मुस्लिम जिहादी मुख्यमन्त्री के इशारे पर पुलिस इन गांव वालों की जान के पीछे पड़ गई । बेचारे गाँव वालों ने हिमाचल के चम्बा में छुप कर जान बचाई ।

जरा आप सोचो जो गुलामनबी आजाद माननीय न्यायालय से फांसी की सजा प्राप्त अफजल को निर्दोष कहता है क्या वो हिन्दुओं द्वारा मार गिराय गए जिहादी को आतंकवादी मान सकता है ?

क्या आपको याद है कि 20-20 बिश्व कप में भारत द्वारा पाकिस्तान को हरा देने के बाद जम्मू विश्वविद्यालय में देशभक्त हिन्दुओं द्वारा इस जीत की खुशी में भारत माता की जय बुलाय जाने के बाद किस तरह इन हिन्दुओं की पिटाई विशवविद्यालय के जिहादी मुसलमानों ने की और किस तरह सरकार के इशारे पर बाद में पुलिस ने उन दुष्टों के विरूद्ध कार्यवाही करने के बजाए इन देशभक्तों को ही निशाना बनाया ?

1993 तक कश्मीर में अधिकतर मन्दिर तोड़ दिय गए । आज सारे का सारा कश्मीर हिन्दुविहीन कर दिया गया है और ये गिरोह बात करता है हिन्दू आतंकवाद की साँप्रदायिकता की । कोई शर्म इमान नाम की चीज है कि नहीं । तब कहां चला जाता है ये सैकुलर गिरोह जब हिन्दुओं के नरसंहार होते हैं । तब तो ये सारा गिरोह जिहादियों का साथ देता है हिन्दुओं के नरसंहार करने वालों को गुमराह मुसलमान बताकर उनको सजा से बचाने के नय-नय बहाने बनाता है जिहादियों के समर्थन में सड़कों पर उत्तरता है ।

आप जितने मर्जी कानून बना लो अब जिहादियों द्वारा हिन्दुओं को निहत्था मरने पर कोई बाध्य नहीं कर सकता । जो हमला करेगा वो मरेगा । यह हमारी नहीं सब हिन्दुओं के उस मन की आवाज है जो लाखों हलाल हो रहे हिन्दुओं की चीखें सुन कर अब और हिन्दुओं को इस तरह न मरने देने की कसम उठा चुके हैं । जिहादियों को उनके किए की सजा जरूर मिलेगी और ऐसी सजा मिलेगी कि उनका हर हिन्दू के कत्ल में साथ देने वाले धर्मनिर्पेक्षता के चोले में छुपे ये राक्षस भी नहीं बचेंगे ।



1969 में गुजरात,1978 में अलीगढ़ ,1979 में जमशेदपुर, 1980 में मुरादाबाद,1982 और 88 में मेरठ,1989 में भागलपुर । कौन नहीं जानता कि ये सब के सब सांप्रदायिक दंगे मुसलमानों ने शुरू किए थे । बेशक बाद में इन में से कुछ दंगों में मुसलमानों को इसकी कीमत भी चुकानी पड़ी थी ।

जनवरी 1993 में भी मुम्बई में दंगे इन मुस्लिम जिहादियों ने ही शुरू किए थे और उसके बाद 12 मार्च 1993 को मुम्बई में ही बम्ब विस्फोट कर 600 हिन्दुओं का कत्ल किया व हजारों को घायल किया करोड़ों की सम्पति तबाह की सो अलग ।

15 मार्च 1993 में सी पी आई एम के सदस्य रासिद खान ने कलकता में बम्ब विस्फोट कर 100 लोगों का कत्ल किया ।

फरवरी 1998 में कोयम्बटूर में इन जिहादियों ने बम्ब विस्फोट कर अडवाणी जी को कत्ल करने की कोशिश की । इन बम्ब विस्फोटों में सैंकड़ो हिन्दुओं का कत्ल किया गया । इन हमलों के दोषी मदनी को इस सैकुलर सरकार ने न केवल सजा से बचाया बल्कि और हिन्दुओं का खून बहाने के लिए जेल से निकाल कर खुला छोड़ दिया ।

क्या आप भूल गए किस तरह गोधरा में 27 फरवरी 2002 को 2000 मुस्लिम जिहादियों की भीड़ जिसका नेतृत्व कांग्रेसी पार्षद कर रहा था, ने 58 हिन्दुओं को रेल के डिब्बे में जिन्दा जला दिया व इतने ही हिन्दुओं को घायल कर दिया, जो इन जिहादियों के बढ़ते हुए दुस्साहस को दिखाता है । बाद में किस तरह इस सैकुलर बोले तो देशद्रोही सरकार ने इन हिन्दुओं को जलाने वालों को बचाने के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त जज द्वारा की जा रही जांच को बाधित करने का षड़यन्त्र किया !

अभी 2008 में किस तरह इन जिहादियों ने आतंकवाद के विरोध में रैली करने जा रहे सांसद योगी अदित्यनाथ पर आजमगढ़ में हमला बोल दिया । यह कैसी धर्मनिर्पेक्षता है जिसके राज में एक सांसद तक मुस्लिम जिहादी आतंकवाद के विरूद्ध बोलने की कोशिश करने पर मुसलमानों के हमले का शिकार हो जाता है ? जिस देश में जिहादी आतंकवाद के विरूद्ध बोलने पर एक सांसद तक सुरक्षित नहीं उस देश में आम हिन्दू बिना हथियार उठाये कैसे सुरक्षित रह सकता है ?

ठीक इसी तरह महाराष्ट्र धुले में इन जिहादियों ने आतंकवाद के विरोध में होने वाली रैली को दंगा फैला कर वहां की सरकार के सहयोग से रूकवाने में सफलता हासिल की । किस तरह उत्तर प्रदेश में इन जिहादियों ने बी एस पी नेता की हत्या की और किस तरह वहां की तत्कालीन सैकुलर जिहाद समर्थक सरकार ने उन जिहादियों की सहायता की ।

उत्तर प्रदेश में मऊ मे हुए दंगों को कौन भुला सकता है जब एक मुस्लिम जिहादी विधायक अंसारी ने गाड़ी में घूम-घूम कर मुसलमानों को उकसा कर हिन्दुओं के कत्ल करवाये । हिन्दूसंगठनों के कितने ही कार्यकर्ता इन जिहादियों के हमलों में आज तक मारे जा चुके हैं । आये दिन हिन्दुओं पर हमला करना इन मुस्लिम जिहादियों की आदत सी बनती जा रही है ।

हिन्दू तो आत्मरक्षा में मजबूरी में जवाबी कार्यवाही करता है वो भी कभी-कभी पानी सिर के ऊपर से निकल जाने के बाद । हिमाचल के चम्बा में 1998 में इन मुस्लिम जिहादियों ने दर्जनों हिन्दुओं का कत्ल कर दिया । कत्ल होने वाले सभी मजदूर थे । कत्ल करने वाले चम्बा के ही मुस्लिम जिहादी हैं जो आज तक बिना किसी सजा के खुले घूम रहे हैं क्योंकि पुलिस के पास ऐसे जिहादियों से निपटने के लिए कोई कड़ा कानून नहीं है।

सुन्दरनगर मण्डी में मुस्लिम प्रधान चुने जाने के बाद मुसलमानों में छुपे जिहादियों ने पाकिस्तान जिन्दाबाद के नारे लगाये । मण्डी में ही उत्तर प्रदेश के एक मुस्लिम जिहादी जो दर्जी का काम करता था, ने हिन्दू लड़की पर तेजाब फैंक दिया । आपको हैरानी होगी कि उस वक्त मंडी में पुलिस अधीक्षक भी मुस्लिम ही था । बाद में ये जिहादी पुलिस को चकमा देकर भागने में सफल रहा ।

हिमाचल में ही आए दिन जगह-जगह सरकारी जमीन पर कब्र बनाकर कब्जा करने के प्रयत्न किये जा रहे हैं । हिन्दुओं द्वारा विरोध किए जाने पर अल्पसंख्यवाद का सहारा लिया जा रहा है ।

कश्मीर के जिन मुस्लिम जिहादियों ने हिन्दुओं का नामोनिशान मिटा दिया वो भी अपने आप को आम मुसलमान बताकर हिमाचल व देश के अन्य हिन्दुबहुल हिस्सों में खुले घूम रहे हैं कभी मजदूरों के वेश, में तो कभी कपड़ा बेचने वालों के वेश में, तो कभी पल्लेदारों के वेश में प्रशासन उनका सहयोग कर रहा है । आम लोग इनकी बढ़ती संख्या को देखकर कोई अनहोनी न हो जाए ये सोच कर डर रहे हैं। हिन्दू संगठनों से इनके विरूद्ध कार्यवाही करने की गुहार लगा रहे हैं । हिमाचल का आम हिन्दू ये सोचने पर मजबूर हो गया है कि कहीं ये लोग कश्मीर में सेना की कार्यवाही से बचने के लिए तो हिमाचल नहीं आते । क्योंकि ये अक्सर सर्दियों में तब आते हैं जब पहाड़ों पर बर्फ पड़ जाती है जहां ये गर्मियां शुरू होते ही छुप जाते हैं व मौका पाते ही हिन्दुओं पर हमला बोल देते हैं । हिमाचल का चम्बा का डोडा के साथ लगता क्षेत्र तो इन जिहादियों की पक्की शरणगाह बनचुका है । सरकारी जमीन पर लगातार कब्जा किया जा रहा है हिन्दुओं की जमीन खरीद कर क्षेत्र को मुस्लिमबहुल बनाया जा रहा है और प्रशासन सो रहा है ।

कुछ वर्ष पहले बिलासपुर में एक मुस्लिम बस चालक/परिचालक ने हिन्दू लड़की को अगवा करने की कोशिश की । बाहर के अधिकतर जिहादी आम मुसलमानों के यहां शरण ले रहे हैं इन्हें जिहाद की शिक्षा दे रहे हैं हिन्दुओं के विरूद्ध भड़का रहे हैं । ये सब तब हो रहा है जब हिमाचल में हिन्दू 95% से अधिक हैं ।

अगर हिन्दू साम्प्रदायिक होते जैसे सैकुलर गिरोह प्रचारित करता है तो आज तक यहां एक भी मुसलमान जिन्दा न बचता ।पर सच्चाई यह है कि आज तक एक भी मुसलमान को हिन्दुओं ने हाथ नहीं लगाया है फिर भी हिन्दू सांप्रदायिक और जिस गिरोह के सहयोग से मुसलमानों ने कश्मीर से हिन्दुओं का सफाया कर दिया वो गिरोह और मुसलमान –शान्तिप्रय सैकुलर ।

हिमाचल के हिन्दुबहुल होने के बावजूद मुस्लिम जिहादियों द्वारा बार-बार किए जा रहे हमलों व मुसलमानों द्वारा किये जा रहे अतिक्रमण को हिन्दू कब तक सहन करेगा । एक वक्त तो ऐसा आयगा जब ये सब्र का बांध टूटेगा फिर क्या होगा...सब ठीक हो जाएगा !

अब ये सैकुलर जिहाद समर्थक सरकार इन जिहादियों को दंगों में मारे जाने पर लाखों रूपये की सहायता की घोषणा कर इनका हौसला बढ़ा रही है व हिन्दुओं के जान-माल को खतरे में डाल रही है ।

खैर हम भी कैसी बात कर रहे हैं जो सरकार खुद किसी अंग्रेज की गुलाम हो वो हिन्दुओं को तबाह करने के सिवा कर भी क्या सकती है ? क्योंकि जब हिन्दू तबाह और बरबाद हो जांयेंगे तभी तो ये देशद्रोही इस भारत को तबाह करने में कामयाब हो पांयेगे !

अन्त में सिर्फ इतना कहेंगे कि जिहादियों ने मुम्बई की सड़कों पर जिस तरह सरेआम गोलियां बरसाईं व निहत्थे बेकसूर लोगों का कत्लेआम किया वो भी पुलिस की गाड़ी में बैठकर । जिसके परिणाम सवरूप अभिताभ बच्चन जैसे लोगों को अपना हथियार बगल में रखकर सोना पड़ा ।

इस सब से यही सिद्ध होता है कि अगर साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर हिन्दुओं में इन जिहादियों के विरूद्ध जागरूकता अभियान चला रही थी और लैफ्टीनैंट कर्नल श्रीकांत प्रोहित हिन्दुओं को आत्म रक्षा की ट्रेनिंग दे रहे थे तो अच्छा ही कर रहे थे क्योंकि जो सरकार इस समाज के खास लोगों की रक्षा नहीं कर सकती अपने अधिकरियों तक को नहीं बचा सकती वो भला आम लोगों की क्या रक्षा करेगी कैसे करेगी और क्यों करेगी वो तो चन्दा भी नहीं दे सकते !

ऐसे में जब सरकार आम हिन्दुओं को जागरूक करने वालों व आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देने वालों को जेल में बन्द करती है तो वो कुल मिलाकर आतंकवादियों के काम को आसान बनाती है क्योंकि आत्मरक्षा की ट्रेनिंग लिए हुए लोगों को आतंकवादी इतनी आसानी से नहीं मार सकते जैसे मुम्बई की सड़कों पर मारा गया ।

जिस वक्त मुम्बई में कमांडो कार्यवाही चल रही थी ठीक उस वक्त मुस्लिम जिहादी इन्टरनैट पर दुआ कर रहे थे हे अल्लाह हिन्दुओं को तबाह और बरबाद कर दे। उन्हें ऐसी भयानक मौत दो ताकि उनकी रूह कांप जाए और हम हिन्दुस्थान को दारूल इस्लाम बनाने में कामयाब हो जांयें ।

अब ऐसे महौल में भारत के मुस्लिम जिहादी इस जिहाद में सहयोग नहीं करेंगे मात्र कल्पना तो हो सकती है यथार्थ नहीं । मामला सिर्फ आम मुसलमान को इस जिहाद में शामिल होने से बचाना है पर इन्हें तभी बचाया जा सकता है जब सरकार कड़े से कड़े कानून बनाकर जिहादियों के साथ-साथ उनके समर्थकों को भी मौत के घाट उतार दे ।

अगर सरकार जिहादियों के विरूद्ध कार्यवाही करने के बजाए उनको बचाने की कोशिश करती है जिहादियों के विरूद्ध कार्यवाही करने वालों को जेल में डालती है तो फिर ये काम तो प्रखर देशभक्त लोगों को ही करना पड़ेगा । क्योंकि अगर इस जिहाद को यथाशीघ्र जड़मूल से समाप्त न किया गया तो ये हर भारतीय का सुख चैन छीन लेगा ।

कुछ लोग अज्ञानवश जिहादी आतंकवाद की तुलना सिखों के आतंकवाद से करने की गलती करते हैं वो ये भूल जाते हैं कि सिखों का इतिहास धर्म की रक्षा की खातिर की गई बेहिसाब कुरबानियों का इतिहास है। सिखों का हिन्दुओं के साथ खून का वो गूढ़ रिश्ता है जिसने मुशकिल की उस घड़ी में भी हिन्दू-सिखों की आत्मा को मरने नहीं दिया । सिखों की धर्मिक पुस्तकें गैर सिखों के कत्लोगारद का समर्थन नहीं करतीं ।

अगर हम मुसलमानों के इतिहास को देखें तो ये हिन्दुओं के कत्लोगारद का इतिहास है इस इतिहास का हर पन्ना हिन्दुओं के ऊपर जिहादियों द्वारा किये हमलों से भरा पड़ा है । ये इतिहास धोखे, गद्दारी, व नमकहरामी का इतिहास है ।

अगर इतने हमलों और बर्बरता के बाद भी ईरान, मिश्र, मैसोपोटामिया, तुर्की, उत्तर अफ्रीका की तरह भारत का इस्लामीकरण न हो पाया तो ये कोई मुस्लिम जिहादियों की उदारता या दया की वजह से नहीं जैसा कि ये गद्दार गिरोह दुष्प्रचार करता है क्योंकि ये गुण तो इन जिहादी राक्षसों में थे ही नहीं, न आज हैं। ये तो हिन्दू क्राँतिकारियों व हिन्दुओं द्वारा लगातार किया गया कड़ा संघर्ष था जिसने भारतीय सभ्यता संस्कृति को बचाय रखा ।

शुरू में जब मुस्लिम जिहादियों ने हिन्दुओं पर हमला किया तो हिन्दू उनको अपने जैसा इन्सान समझने की गलती कर बैठे । जैसे जैसे हिन्दुओं को मुस्लिम जिहादियों के अत्याचारी और बर्बर प्रवृति का पता चलता गया वैसे- वैसे हिन्दू जागरूक और संगठित होता गया ।

वर्तमान में मुस्लिम जिहादियों ने बम्ब विस्फोट कर हिन्दुओं पर हमला करने का अधुनिक मार्ग अपनाया है बम्ब विस्फोट उन क्षेत्रों में किए जाते हैं जहां मुसलमान बहुत कम संख्या में हैं जहां मुसलमानों की बड़ी संख्या है वहां आज भी हिन्दुओं को गला काट कर हलाल करने का मार्ग अपनाया जाता है जैसे कश्मीर में कई बार देखने को मिला ।

हिन्दुबहुल क्षेत्रों में जहां कहीं भी मुसलमानों की संख्या बढ़ जाती है वहां पर पहले हिन्दुओं/मन्दिरों/त्योहारों पर हमला कर दंगा फैलाया जाता है इन दंगों में पहले हिन्दुओं को छुरा घोंप कर मारा जाता था अब इन हमलों में भी छोटे-छोटे देशी कट्टों व बमों का इस्तेमाल होने लगा है। हमलों के दौरान दंगा रोकने में लगे पुलिस कर्मियों पर भी अक्सर हमला बोला जाता है । ये हमले अक्सर योजना बनाकर किये जाते हैं जिससे कि हिन्दुओं के जान-माल को अधिक से अधिक नुकसान पहुँचाया जा सके ।

अगर कहीं हिन्दू आत्म रक्षा में तैयार बैठे हों और मुसलमानों को प्रतिक्रिया में नुकसान उठाना पड़ जाए तो फिर ये मुस्लिम जिहादी इसे अल्पसंख्यकों पर हमला बताकर जगह-जगह हिन्दुओं को सांप्रदायिक कहकर दुष्प्रचार शुरू कर देते हैं और ये जिहादसमर्थक गिरोह इनके इस दुष्प्रचार को आगे बढ़ाता है ।

आपको यहां पर इस बात को ध्यान में रखना चाहिये कि दुनिया का हर कानून इन्सान को आत्मरक्षा का अधिकार देता है फिर हिन्दुओं द्वारा इस अधिकार का उपयोग न करने के लिए दबाव बनाना व हिन्दुओं को इस अधिकार का उपयोग करने पर उन्हें बदनाम करना, उनको इन मुस्लिम जिहादियों के हाथों निहत्था मरने पर मजबूर करने के समान है जिससे हर किसी को बचने का प्रयत्न करना चाहिए ।

गुरुवार, 25 मार्च 2010

राजीब गांधी जी के हत्यारों को माफी की बात करने वाले उनके मित्र अभिताभ बच्चन जी को क्यों जलील करने पर तुले हैं ?

हम भारतीय इतने भोले-भाले हैं कि कोई भी बिदेशी हमारे साथ कुछ चिकनी-चुपड़ी बातें कर हमें धोखा देकर सबकुछ लूट कर ले जाता है और फिर वह अपने संसाधनों के माध्यम से हमें ये समझाने में सफल रहता है कि वो हमारा हितैसी है उसने जो कुछ भी किया वो हमारे भले के लिए किया ।हमारे भोलेपन की चर्मसीमा देखो हम सबकछ लुटाने के बाबजूद उसकी बातों में आकर उसे अपना सर्वस्व देने को तैयार हो जाते हैं और उसके विरूद्ध कोई बात बात करने वाले हमारे वास्तविक हितैसी पर इतना दबाब बना देते हैं कि वो भी उसका समर्थन करने पर बाध्या हो जाता है।आज सेकुलर गिरोह व मिडीया ने हमारी इसी कमजोरी का फायदा उठाते हुए वो सब सिर्फ कुछ बर्षों में कर डाला जो मुसलिम और ईसाई आक्रमणकारी सैंकड़ों बर्षों में न कर सके थे। आज चुन-चुन हर उस सांस्कृतिक मर्यादा पर हमला बोला जा रहा है जिस पर हर देशभक्त भारतीय को गर्व रहा है।

महाराष्ट्र में बांद्रा और बरली को जोड़ने बाले पुल के दूसरे चरण का उदघाटन मुख्यामन्त्री ने किया जिसमें महारास्ट्र सरकार के बुलाबे पर महानकलाकार अभिताभ बच्चन जी ने भी भाग लिया। इस कार्यक्रम में उनको पूरा मान सम्मान दिया गया जिसके वो हकदार हैं।उन्हें मुख्यामन्त्री के साथ विठाया गया ।दोनों कार्यक्रम के दौरान आत्मीयता से बातचीत करते हुए देखे गए।मिडीया ने इस समाचार को प्रमुखता से दिखाया। सामाचार दिल्ली मतलब एंटोनियो माईनो मारियो उर्फ सोनिया नेहरू के पास पहुंचा उसने महाराष्ट्र की सरकार व मुख्यामन्त्री को अपने विरोधी का इस तरह मान सम्मान करने पर धमकाया। गुलाम कांग्रेस अध्यक्ष ने कह दिया कि पार्टी को इस बात की जानकारी नहीं थी कि उसमें अभिताभ जी को बुलाया जा रहा है। हद तो तब हो गई जब कार्याक्रम के दौरान अभिताभ जी के साथ अत्मीयता से बातचीत करने वाले गुलाम मुख्यामन्त्री अशोक चौहान जी ने यहां तक कह दिया कि अगर उन्हें पता होता कि इस कार्याक्रम में अभिताभ जी ने आना है तो वो इस कार्यक्रम में सामिल ही नहीं होते। साफ दिख रहा है कि सब के सामने मुख्यमन्त्री जी अपने पद व अपना जलूस निकाल रहे हैं। प्रश्न सिर्फ इतना पैदा होता है कि मुख्यामन्त्री इतना बड़ा झूठ किसके दबाब में वोले रहे हैं और क्यों ?

हम सब जानते हैं कि अशोक जी को मुख्यामन्त्री पद एंटोनियो की चापलुसी करने के बदले प्राप्त हुआ और एंटोनिया के इसारे पर वे कभी भी जा सकता है क्योंकि अधिकतर कांग्रेसी आज भी 1947 से पहले की मानसिकता में ही जी रहे है जब अंग्रेजों का आदेश मानना मजबूरी थी । इसीलिए इस एंटोनिया को खुश करने के लिए अशोक जी इस हद तक गिर गए कि उन्होंने अपना पद बचाने के लिए अपनी सरकार द्वार बुलाए गए अभिताभ जी के मान सम्मान का भी ख्याल तक नहीं रखा । एक गुलाम और कर भी क्या सकता है ?

हम सब जानते हैं कि अभिताभ जी के एंटोनियो से पहले के नहरू परिबार के साथ अच्छे रिस्ते थे। लेकिन एंटोनियो के साथ अभिताभ जी की नहीं बनती।अब असल बात क्या है ये अरूण नहैरू जी व अभिताभ जी ही बता सकते हैं पर फिर भी यह सत्या है कि अभिताभ जी का अपराध उस नलिनी से ज्यादा नहीं हो सकता जिसने राजीब गांधी जी की हत्या की थी। इस बात से भी आप परिचित हैं कि एंटोनिया परिबार ने नलिनी को माफी देने की सक्रियता से बकालत की थी। मिडीया ने इनकी इस करतूत को मानबता की मिसाल बताकर एंटोनिया परिबार को हीरो बनाने की कोशिस की थी। हमारा प्रश्न विलकुल साधारण है कि जो परिबार इतना महान है कि अपने मुखिया का कत्ल करने वाले तक को माप कर सकता है वो भला अभिताभ जैसे ब्यक्ति को जलील करने के लिए इस हद तक कैसे जा सकता है ? हमारे विचार में नफरत और लोभ ही इस एंटोनिया का ट्रेड मार्क है जिसे ईसाईयों के हाथों बिका मिडीया तरह-तरह के कुतर्क देकर त्याग का रूप देकर प्रस्तुत करने का लगातार असफल प्रयास कर रहा है। अब आप सोचेंगे कि जब इनकी सोच इतनी छोटी है तो फिर इस परिबार ने नलिनी को माफी की बात क्यों की इसका उतर जानने के लिए हमारी पुस्तक नकली धर्मनिर्पेक्षता का हिस्सा एंटोनियो के हिन्दुविरोधी षडयन्त्र जरूर पढ़ें। ये बहुत बड़ी भारत विरोधी साजिस है जिसका राजीब जी सिकार हुए।

मिडीया खुद तो गुलामी की मानसिता से ग्रस्त हैं और इस मानसिकता को किस तरह भारतीयों के दिमाग में उतार रहा है उसका एक उधाहरण आपके सामने रख रहा हूं। जब चुनाब प्रचार चल रहा था तो समाचार चैनल आज तक पर आधी सक्रीन पर एंटोनिया को पर्चा भरते हुए दिखाया जा रहा था और आधी पर इंदिरा जी को।साथ में इनके बीच कपड़ों,चलने ,वोलने व सोचने के वीच समानता दिखाने का प्रयत्न किया जा रहा था ।आप और हम जनते हैं कि जींस का असर उन्हीं लोगों पर होता है जो एक दूसरे का साथ खून का रिस्ता रखते हैं पर एंटोनियो व इन्दिरा जी के वीच कोई खून का रिस्ता नहीं था ये उतना ही बड़ा सत्या है जितना ये कि एंटोनियो एक इटालियन विदेशी है जिसे सम्राज्यावादी ताकतों द्वारा यहां योजनबद्ध तरीके से पलांट किया गया है। अधिक जानकारी के लिए राष्ट्रपति जी को सुब्रामनयम स्वामी जी द्वारा सौंपा गया पत्र जरूर पढ़ें।

आपको ये भी जानकारी होगी कि 2004 में चुनाबों के वाद एंटोनियो खुद प्रधानमन्त्री बनना चाहती थी लेकिन राष्ट्रपति जी द्वारा उनको संविधान (सुब्रामनयम स्वामी जी द्वारा राष्ट्रपति जी को सौंपा गया पत्र पढ़ें ) के प्रवधानों व संघ परिवार द्वारा किए जा रहे विरोध को देखते हुए ऐसा सम्भव न होने की सूचना दी और एंटोनियो इस पद से दूर रहने पर मजबूर हो गई लेकिन विदेशी ताकतों के हाथों विके इस मिडीया ने अपने आकाओं के इसारे पर उसे त्याग की देवी के रूप में प्रचारित करना शुरू कर दिया ।प्रधानमन्त्री पद को ठोकर मार दी ऐसा मुख्या समाचार बनाया गया। यह झूठ ये गुलाम मिडीया आज तक दोहराह रहा है। अगर ये एंटोनिया इतनी ही त्याग की देवी थी तो 1998 में खुद प्रधानमंत्री बनने के लिए अपने पास 272 सांसदों का समर्थन होने का झूठा दावा करके क्यों आई थी जिसका पर्दाफास तब हो गया था जब राष्ट्रपति जी ने सूची मांगी और ये सिर्फ 237 सांसदों की सूची दे पायी ।

आगे चलकर इस विदेशी एंटोनिया की असलियत तब भी सामने आई जब दो लाभ के पदों पर होने की बजह से इसे एक पद छोड़ना पड़ा। असलियत तब भी उजागर हुई जब नटबर सिंह जी ने इस बात का पर्दाफास किया कि अनाज के बदले तेल कार्यक्रम में पैसा एंटोनिया ने खाया था जिसके लिए एंटोनिया ने सदाम हुसैन को वाकायदा एक पत्र लिखा था। ध्यान रहे ये कार्यक्रम इराक में मर रहे मुलमानों के बच्चों को बचाने के लिए चलाया जा रहा था। अरे जो एंटोनिया वहां से पैसा लूट सकती है तो वो और क्या छोड़ेगी। इस विदेशी के लूटेरे होने का प्रमाण तब भी मिला जब उसने कानूनमंत्री हंसराज भारद्वाज जी को अपने इटालियन हमबतन व बोफोर्श कांड के मुख्या अभियुकत के पैसे जो भारत सरकार द्वारा जब्त करवाय गए थे को छुड़वाने लिए विशेष रूप से लंदन भेजा । बाद में इस अभियुक्त जो भारतीयों की निगाह में राजीब जी का कत्ल करने का संदिगध भी है ,पर चल रहे सारे केस समाप्त करवा दिए।

जरा सोचो जिस डकैत का पर्दाफास कई-कई बार हो चुका हो वो बचा कैसे ठीक बैसे ही जैसे भारत पर हमला करवाने वाले संजय दत्त, अबु हाजमी, अफजल जैसे लोग बचाए जा रहे हैं ।इसीलिए तो कहा गया है कि चोर-चोर मौसेरे भाई । जब सता ही देशविरोधियों के हाथों में हो तो फिर गद्दारों का कोई क्या विगाड़ सकता है। कहते हैं कि जब सईयां भए कोतवाल तो फिर डर काहे का।

आप कह सकते हैं कि फिर जनता क्यों ऐसे गद्दारों को चुनती है वजह साफ है आज का ये गुलाम मिडीया भारतीयों के हित की बात भारतीयों तक पहुंचने ही नहीं देता ।इन सब मुद्दों को भारत-विरोधियों के हाथों विक चुके इस मिडीया ने दबा दिया । जरा सोचो कि जिस तरह बार-बार गुजरात में हुई हिंसा की बात की जाती है वो भी सिर्फ एक सांप्रदाए के पक्ष को रखने के लिए ठीक उसी तरह कशमीर में हुई बर्बर हिंसा की बात क्यों नहीं की जाती। जिस तरह बार-बार कंधार मामले को ठाकर अडवानी जी को निशाना बनाया जाता है ठीक उसी तरह बार-बार क्वात्रोची, अनाज के बदले तेल घूसकांड, विदेशी मूल,दो लाभ के पद,राष्ट्रपति के सामने प्रधन्मन्त्री बनने के लिए झूठे आंकड़े देने , को उठाकर एंटोनिया की असलियत जनता के सामने क्यों नहीं रखी जाती ? सिर्फ इसलिए कि भारतीय संस्कृति को बदनाम कर समाप्त करने के जिस षडयन्त्र के लिए इस विदेशी को भारतविरोदियों द्वारा यहां पलांट किया गया है उस षडयन्त्र में खुद मिडीया के मालिक सामिल हैं।

जिस समाज में अपनों का मान सम्मान करने के स्थान पर उनके हर कार्या पर अंगुली उठाने की आदत होती है वो समाज अक्सर इस भ्रम का सिकार हो जाता है कि अपने अच्छे नहीं विदेशी अच्छे हैं,अपने उतत्पादन अच्छे नहीं विदेशीयों के अच्छे हैं,अपना देश अच्छा नही विदेश अच्छा है अपना धर्म और संस्कृति अच्ची नहीं विदेशीयों की अच्छी है । जो समाज इस भ्रम का सिकार होता है वो अक्सर गुलाम रहता है। यही वजह है कि भारतीयों को जो आंसिक आजादी 1947 में मिली उसे 2004 में बौद्धिक गुलाम भारतीयों ने अपने हाथों एक विदेशी एंटोनियो माइनो मारियो के हवाले कर दिया। गुलमों के साथ कैसा सलूक होता है आप खुद महसूस कर सकते हैं....

बुधवार, 24 मार्च 2010

जय जय राम जय श्री राम

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