हम एक वार नहीं कई वार देशभक्त भारतीयों का ध्यान इस वात की ओर खींच चुके हैं कि खुद को सेकुलर कहने वाला गठबन्धन धर्मनिरपेक्षता की आड़ में छुपा हुआ आतंकवादियों का गिरोह है। इस गिरोह का एक-एक कदम चीख-चीक कर कह रहा है कि इस गिरोह का भारतीयता, मानबता या फिर सर्वधर्मसम्भाव से कोई रिस्ता नहीं । यह गिरोह लगातार भारत में योजनाबद्ध तरीके से लोगों को सांप्रदायिक आधार पर बांट कर भारत की सरवधर्मसम्भाव से सिंचित भुगौलिक, सांस्कृतिक व अद्यातमिक एकता को तहस नहस करने में दिन-रात एक किए हुए है। अपने इसी उद्देश्य की पूरती के लिए यह गिरोह देश में कानून भारतीयों के लिए बनाने के बजाए सांप्रदाय, जाति, क्षेत्र, भाषा के आदार पर बना रहा है।बार-बार अल्पसंख्याकवाद का उपयोग देशद्रोह को आगे बढ़ाने के लिए हथियार के रूप में कर रहा है। यह गद्दारों का सेकुलर गिरोह जहां एक तरफ आतंकवादियों को कानून के संकजे से बचाने के लिए आतंकवादविरोधी कानूनों को कमजोर व समाप्त करता जा रहा है वहीं दूसरी तरफ इन आतंकवादियों से भारतीयों की रक्षा के लिए लामबंद हो रहे समाजिक व सैनिक देशभक्त क्रांतिकारी संगठनों को आतंकवादी व सांप्रदायिक कहकर बदनाम करने का काम आतंकवादियों के साथ मिलकर कर रहा है।इस सेकुलर गिरोह में न केवल राजनितिक दल(कांग्रेस,समाजवादी पार्टी,वांमपंथी,राजेडी,एनसीपी,मुसलिम लीग,पीडीपी,नेसलल कान्फ्रैंस,एलजेपी) सामिल हैं पर साथ ही बहुत से आदमखोर मानबाधिकार संगठन, गैर सरकारी संगठन(एन.जी.ओ),समाचार चैनल (खासकर IBN7, NDTV, INDIATV) व समाचारपत्र,लेखक और फिल्म इंडसटरी से जुड़े लोग भी सामिल हैं। यह गिरोह आज तक कई बार वेनकाव हो चुका है पर सरकार व संचार साधनों पर अपनी पकड़ के कारण ये आतंकवादियों का सेकुलर गिरोह हर वार वार जनता के आक्रोश से अपने आप को बचाने में संमर्थ रहा है। हमें पूरा विशवास है कि जल्दी ही देश की शांतिप्रिए जनता इस भारतविरोधी गिरोह की असलियत को पहचाकर इस गिरोह को इसके अंजाम तक पहुंचाएगी।
हमने आज तक जो भी लिखा है वो प्रमाणिकता से लिखा है विना किसी भय, कूटनिती, रागद्वेश लोभ-लालच के।इसी के परिणामस्वारूप इस गिरोह को भ्रमवश सेकुलर मानने वाले भ्रमित हिन्दू भी भ्रम से मुक्त होकर इस गिरोह की असलियत को उजागर करने के काम में हाथ वंटाने लग पड़े हैं । जिस दिन हम इस गिरोह की भारत-विरोधी आतंकवाद समर्थक असलियत आम लोगों को समझाने में समर्थ हो जायेंगे उस दिन इस गिरोह का एक भी आतंकवादी व इन आतंकवादियों का एक भी समर्थक जिंदा नहीं बचेगा। वस जरूरत है तो इस गिरोह को यथाशीघ्र पूर्णरूप से वेनकाव करने की ।
इसी गिरोह को वेनकाव करने के लिए हमने नकली धर्मनिर्पेक्षता(जो आनलाइन उपलब्ध है) नामक पुस्तक लिखी जिसमें हमने इस गिरोह के हिन्दूविरोधी देशविरोधी कुकर्मों को उजागर कर इनकी असलियत जनता के सामने रखी । इस पुस्तक में हमने सपष्ट कहा था कि ये गिरोह न केवल आतंकवादियों की मदद कर रहा है पर खुद भी आतंकवादी गतिविधियों में सक्रिए है। इसी पुस्तक में हमने लिखा था कि अबदुल रहमान अन्तुले, महेस भट्ट,अबु हाजमी,माजिद मेनन व विनोद दुआ जैसे लोग आतंकवादी गतिविधियों में सीधे-सीधे सामिल हैं।
आप सब जानते हैं कि महेश भट्ट का बेटा राहुल भट्ट मुसलिम आतंकवादी हेडली उर्फ हैदर अली को भारत में आतंकवादी गतिविधिया फैलाने में सहायता करने का देषी पाया गया है ये बात अलग है कि क्योंकि महेशभट्ट खुद इस हिन्दूविरोधी-देशविरोधी गिरोह का प्रमुस सदस्या है तथा देश व प्रदेश में इसी सुलर गिगोह की सरकार होने के कारण इस आतंकवादी राहुल भट्ट को बचोने की कोशिस की जा रही है ।
आज आपको ये भी पता चल चुका होगा कि समाजपार्टी के विधायक अबु हाजमी व कांग्रेस के भूतपूर्व विधायक अबदुल सलाम ने वटला हाउस में सुरक्षा बलों पर हमला कर स्वर्गीय मोहन चन्द शर्मा जी को शहीद करने वाले आतंकवादियों को न केवल पैसे दिए पर साथ ही इन दोनों आतंकवादी नेतों ने इन आतंकवादियों को सुरक्षाबलों से बचने के लिए नेपाल भाग जाने को भी कहा।
अबु हाजमी वो आतंकवादी नेता है जो 1993 में मुसलिम आतंकवादियों द्वारा किए गए हमले में भी सामिल था लेकिन उस वक्त भी सेकुलर गिरोह ने अपने प्रभाव का प्रयोग कर इस आतंकवादी को बचाने में सफलता हासिल की थी। यही आतंकवादी मुम्बई में मुसलिम आतंकवादी दाऊद इब्राहीम की हिन्दूविरोधी गतिविधियों को सेकुलर गिरोह का सरंक्षण दिलबाता है मतलब भारत में दाऊद इब्राहीम जैसे खूंखार मुसलिम आतंकवादी की गतिविधियों को आगे बढ़ाने में भी सेकुलर नेताओं का ही हाथ है।
रही कांग्रेस की बात तो इस दल का तो इतिहास ही मुसलिम गद्दारों को जन्म देने का है जिस तरह आज इस कांग्रेस ने अबदुल सलाम जैसे आतंकवादी को जन्म दिया है इसी तरह इस कांग्रेस ने मुहम्मद अली जिन्ना जैसे गद्दार को जन्म दिया था। इसी कांग्रेस ने बर्तमान में आतंकवादी संगठन पीडीपी के अध्यक्ष को जन्म दिया था। इसी गद्दार व ततकालीन एनसी सरकार व मुसलिम आतंकवादियों ने मिलकर 60000 हिन्दूओं को कत्ल कर लाखों हिन्दूओं को अपना घरबार छोड़ने पर मजबूर किया।
मुम्बई पर 2008 का हमला भी इसी कांग्रेस सरकार के सहयोग व इसके आतंकवादीनेता अबदुल रहमान अन्तुले के सहयोग से अनजाम दिया गाया ।यही बजह है कि आज तक उन गद्दारों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं जो भारतीय नागरिक हैं क्योंकि मुम्बई पर हमला करने वाले आतंकवादी अबदुल रहमान अन्तुले के घर को अपने बेश के रूप में उपयोग कर रहे थे।यही बजह थी कि हमले के दौरान ही जांच को उल्टी दिशा देने के लिए सेकुलर गिरोह ने ये अफवाह फैला दी कि ये हमला हिन्दूओं ने किया है जबकि असलियत सबके सामने थी कि मुसलिम आतंकवादीयों ने ये हमला अबदुल रहमान अन्दुले के दिशा निर्देशों के अनुसार किया था। इसीलिए अबदुल रहमान अन्तुले ने कहा था कि ये मुसलिम आतंकवादी हेमंत करकरे को मारने नहीं आए थे । वेचारा हेमन्त करकरे उन मुसलिम आतंकवादियों को बचाने के लिए दिन-रात एक किए हुए था जो हिन्दूक्रांतिकारियों के निशाने पर थे (हम कह सकते हैं कि हेमन्त जी सरकारी नौकर होने के कारण सरकारी आदेशों का पालन कर रहे थे।) उन्हीं मुसलिम आतंकवादियों ने शहीद हेमन्त करकरे जी पर हमला कर दिया।हमारे सब देशभक्त सुरक्षा अधिकारियों को इस वात से सबक लेकर किसी भी मुसलिम आतंकवादी की रक्षा हिन्दू क्रांतिकारियों से नहीं करनी चाहिए क्योंकि ये मुसलिम आतंकवादी आज तक अपने बाप के नहीं हुए तो ये देश के क्या होंगे। उल्टा सुरक्षाबलों को आतंकवाद से निपटने के लिए हिन्दूक्रांतिकारियों को सहायता देनी चाहिए व जरूरत पड़ने पर सहायता लेनी भी चाहिए।क्योंकि यही देस हित में है। 2001 में लोकतन्त्र के मन्दिर पारलियामेंट पर हमला भी इसी सेकुलर गिरोह ने करवाया था । यही बजह है कि तरह-तरह के हथकण्डे अपनाकर इस सेकुलर गिरोह ने एक को छुड़वा लिया जबकि दूसरे को माननीय सर्वोच न्यायालय द्वारा 2006 में सुनवाई गई फांसी की सजा को ये सेकुलर गिरोह आज तक रेके हुए है।
1993 के मुम्बई हमले में भी इसी कांग्रेस के सबसे बड़े सेकिलर नेता सुनील दत्त का बेटा संजय दत सामिल था । साथ में अबु हाजमी व माजिद मेनन जैसे गद्दार।
जब से सेकुलर गिरोह के मौथपीस महेसभट्ट के लाडले आतंकवादीपुत्र का असलियत जनता के सामने आई है तब से माजिद मेनन व गौतम नबलखा जैसे गद्दार भूमिगत हो गए हैं अब उनकी जगह सेमुयल नामक सेकुलर आतंकवादी लने लगा है आगो जागरूकता के इस अभियान को आगे बढ़ाकर देश को आतंकवादियों से मुक्त करवायें बरना अगर ये सेकुलर गिरोह इसी तरह इन आतंकवादियों की सहायता कर आगे बढ़ता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब भारत की दुर्गति भी अफगानीस्थान जैसी होगी। आओ मरे प्यारे बौद्धिक गुलाम हिन्दूओ पढ़ो इस दिवार पर लिखी कड़वी सच्चाई को और मिटा डालो सेकुलरता के नाम पर भारतीयता पर हमला करने वाले इन गद्दारों को ।
जागो भारतीयो जागो अब न जागे तो क्या खाक जागोगे ?
धर्मनिर्पेक्ष आतंकवादियों द्वारा रचे जा रहे हिन्दूविरोधी-देशविरोधी षडयन्त्रों को उजागर करने की कोशिश। हमारा मानना है कि भारत में कानून सांप्रदाय,जाति,भाषा,क्षेत्र,लिंग अधारित न बनाकर भारतीयों के लिए बनाए जाने चाहिए । अब वक्त आ गया है कि हिन्दूमिटाओ-हिन्दूभगाओ अभियान चलाने वाले भारतविरोधी धर्मनिर्पेक्ष आतंकवादियों को उनके समर्थकों सहित खत्म करने के लिए सब देशभक्तों द्वारा एकजुट होकर निर्णायक अभियान चलाया जाए।
गुरुवार, 11 मार्च 2010
मंगलवार, 2 मार्च 2010
प्रधानमंत्री मनमोहन खान द्वारा भारत के इस्लामीकरण को आगे बढ़ाने के लिए जिहादी आतंकवाद के जनक सौदी अरब की यात्रा
मुसलिम क्रांतिकारियों की भारत को देन
फरबरी 2010 के अंतिम दिनों में भारत-विरोधी भारत सरकार के एंटोनियोमाईनोमारियो के गुलाम प्रधानमंत्री द्वारा सौदीअरब की यात्रा की गइ। जिसका मूल उद्देशया था भारत के इस्लामीकरण के लिए इस्लामिक आतंकवाद के जनक व पोषक सौदी अरब को भारत-विरोधी भारत सरकार(2004-2010) द्वारा उठाये गए कदमों की जानकारी देना व भविष्या में उठाये जाने बाले कदमों के बारे में आदेश प्राप्त करना।
प्रधानमंत्री ने सौदीअरब के सुलतान को बताया कि उन्होंने भारत के हिन्दूओं को बता दिया है कि मर्यादापुर्षोत्तम राम और कृष्ण कालपनिक हैं व हिन्दूओं की धार्मिक और अध्यात्मिक पुस्तकें भी काल्पनिक हैं ।इसलिए भारतीय धर्म और संस्कृति बोले तो हिन्दू संस्कृति का कोई अस्तित्व नहीं है। हिन्दूओं को इसी बात का एहसाह करवाने के लिए हमने रामसेतू को तोड़ने का हर सम्भव प्रयास किया। लेकिन क्या करें तोड़ने के लिए लाई गई मसीनें ही टूट गईं नहीं तो हमने अदालत का फैसला आने से पहले ही उसे तोड़ देना था। सुलतान जी आप चिंता न करें भारत में बहुत जल्दी सब अदालतों में आपको 100प्रतिशत वकील मुसलिम क्रांतिकारी ही नजर आयेंगे।फिर फैसले भी मुसलिम क्रांतिकारियों की इच्छा अनुसार ही आयेंगे।
हिन्दूओं को जलील करने के लिए हमने पहले बाब अमरनाथ यात्रा के लिए जमीन दी और फिर वापिस ले ली। जिसके बाद ये हिन्दू आतंकवादी 71 दिनों तक छाती पिटते रहे पर हमने एक ना सुनी हमने इन हिन्दू आतंकवादियों को देखते ही गोली मारने के आदेश तक दे दिए।इस अन्दोलन में महौल बनाने बाले हिन्दू आतंकवादी दयानन्द पांडे को हमने जूठे आरेप लगाकर जेल में डाल दिया व उसका चरित्र हनन करने का हरसम्भव प्रयास किया ।
आगे उन्होंने सुलतान को बताया कि भारत के हिन्दूओं को बता दिया गया है कि भारत के संस्साधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का है मुसलमानों के इसी अधिकार को ध्यान में रखते हुए सरकार ने प्राथमिकता के आधार पर मुसलिमबहुल जिलों का विकाश करने का निर्णय किया है इसलिए हिन्दूओं को ये संकेत दे दिया गया है कि अगर वो हिन्दूबहुल जिलों का विकास चाहते हैं तो वो जिहादी क्रांतिकारीयों व लब जिहाद का साथ देकर अपने जिलों को मुसलिमबहुल बनायें व सरकार से इनाम के तौर पर विकास पायें ।
लब जिहाद को सबसे अधिक सफलता केरल राज्या में मिलती हुई दिखाई दे रही है पर कुछ हिन्दू आतंकवादी इस लब जिहाद का विरोध कर रहे हैं इन हिन्दू आतंकवादियों ने लब जिहाद के विस्तार में रोड़े अटकाने के लिए केरल उच्च न्यायलय में मुक्दमें दर्ज करवा दिए हैं।इन्हीं मुकदमों को ध्यान में रखते हुए हमने केरल उच्च न्यायलय में केन्द्र सरकार की ओर से 100 प्रतिसत एडवोकेट मुसलिम नियुक्त किए हैं ताकि कोई हिन्दू आतंकवादी एडवोकेट इस लब जिहाद के मार्ग में रूकाबट न डाल सके। बैसे वहां 1998 में कोयबटूर में हिन्दू आतंकवादी अडबानी द्वारा किए जा रहे हिन्दू आतंकवादियों के जलसे में बम्म फैंकने बाले मुसलिम जिहादी क्रांतिकारी मदनी का भी तो केश चल रहा है ।हमारे इस 100 प्रतिसत मुसलिम वकील नियुक्त करने बाले फैसले से मदनी जी को छुड़ानें में भी सहायता मिलेगी।
हमने हिन्दूओं को उनकी औकात बताने के लिए ही अपनी सरकार के बजट को सांप्रदाचिक आधार पर बांट दिया। यही नहीं हमने बच्चों को मिलने वाली छात्रवृति तक को सांप्रदायिक आधार पर बांट कर छात्रवृतियों के एक बड़े हिस्से से हिन्दूओं के बच्चों को वंचित कर दिया।हमने हिन्दूओं को नोकरियों से बंचित करने के लिए मुसलमानों को आरक्षण की बात आगे बढ़ाई जिसे अदालतों ने रोकने की कोशिस की इसका समाधान भी हमें 100प्रतिसत मुसलिम वकील ही दिखाई देते हैं जिसका प्रयोग हम केरल से शुरू कर हे हैं।
प्रधानमंत्री मनमोनखान ने सुलतान जी को आगे बताया कि हमने ये स्वांए महसूस किया कि देश के इस्लामीकरम में हिन्दूबहुल भारतीय सेना रूकावट पैदा कर सकती है इसीलिए हमने सेना में मुसलमानों की गिनती के बहाने मुसलिम क्रांतिकारियों की संख्या बढ़ाने का प्रयत्न किया जिसे सेना ने नकार दिया। सेना की इसी मुसलिमविरोदी हरकत का जबाव देने के लिए हमने मुसलिम क्रांतिकारियों की जासूसी करने वाले हिन्दू आतंकवादी कर्नल श्रीकांत पुरोहित को झूठे कोसों में फंसाकर जेल में डलबा दिया।हमारे पास कोई प्रमाण तो था नहीं इसीलिए हमने उस पर झूठे केस बनाकर मकोका लगवा दिया जिसे बाद में मकोका अदालत ने खारिज कर दिया क्योंकि वहाँ पर वकील हिन्दू आतंकवादी ही था।फिर भी हमने उसे जेल से नहीं छोड़ा ताकि हिन्दू आतंकवादियों का हौंसला न बढ़े।अदालतों में 100 प्रतिशत मुसलिम वकील रखने का निर्णय लेने के पीछे यह भी एक कारण रहा।हमने भारतीय सुरक्षाबलों में बड़े सतर पर मुसलिम क्रांतिकारियों की भरती शुरू कर दी है सच्चर कमेटी हमने इसी उदेशय के लिए बनाई थी ताकि हिन्दूओं के हकों को छीन कर मुसलमानों को देने में आसानी रहे ।
प्रधानमंत्री मनमोनखान ने सुलतान जी को आगे बताया कि हिन्दू धर्म का प्रचार-प्रसार करने वाली हिन्दू आतंकवादी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को रोतों-रात उठवाकर उसके साथ वही ब्याबहार किया जो कि हिन्दूओं के साथ एक मुसलिम देश में हो सकता है।
प्रधानमंत्री मनमोनखान ने सुलतान जी को आगे बताया कि हमें मालूम है कि आर एस एस जैसे हिन्दू आतंकवादी संगठन आगे चलकर भारत के इस्लामीकरण में रूकाबटें पैदा कर सकते हैं इसीलिए हमने कर्नल पुरोहित के मामले में उन्हें लपेट कर बदनाम कर उनपर प्रतिबन्ध लगाने की कोशिस की लेकिन हमारे हाथ इसलिए बन्ध गए क्योंकि उसमें अबदुलकलाम का भी नाम आ गया बरना आज तक इन सब संगठनों पर प्रतिबन्ध लगा दिया होता।
प्रधानमंत्री ने सौदीअरब के सुलतान को बताया कि हमने मुसलिम क्रांतिकारी अफजल को सर्वोच नयायालय के आदेश के बाबजूद फांसी पर नहीं लटकाया क्योंकि अफजल जैसे क्रांतिकारी ही हमारी ताकत हैं क्योंकि इन्हीं क्रांतिकारियों से प्रेरणा पाकर भारत का हर मुसलमान हथियार उठाकर हिन्दूओं का सारे भारत से उसी तरह सफाया करेगा जिस तरह हमारे मित्रों ने कश्मीघाटी से किया । अपने इसी मिशन को आगे बढ़ाने के लिए हमने कशमीरी क्रांतिकारियों को भारत बुलाया व बटाला हाऊस में हमला करने बाले क्रांतिकारियों पर मकोका नहीं लगाया क्योंकि ये मकोका तो हमने हिन्दू आतंकवादियों के लिए बनए रखा है बरना आज तक हम इसे पोटा की तरह समाप्त कर चुके होते। हमें लगा कि गुजरात की सरकार गुजकोका के माध्यम से जिहादी क्रांतिकारियों के काम पर रोक लगा सकती है इसीलिए हमनें विधानसभा द्वार चार बार पारित किए गए गुजकोका को मंजूरी नहीं दी क्योंकि हम नहीं चाहते कि किसी हालात में भारत के इस्लामीकरण की गति धीमी पढ़े। हमने ये निर्णय कर लिया है कि जो कोई भी भारत के इस्लामीकरम में रूकाबट पैदा करने की कोशिश करेगा उसे हम आतंकवादी करार देकर जेल में डाल देंगे अगर वे साधु सन्त हुआ तो उसका चरित्र हनन करेंगे।
प्रधानमंत्री ने सौदीअरब के सुलतान को बताया कि हमने सर्वोच न्यालय के आदेस के बाबजूद बंगलादेशी मुसलिम क्रांतिकारियों को देश से बाहर नहीं निकाली वल्कि कानून में फेरबदल कर इनके लिए आसाम में रहना और सुविधाजनक वनाया।
प्रधानमंत्री ने सौदीअरब के सुलतान को बताया कि हम ये सब काम विना एक्सपोज होते हुए इसलिए कर पाए क्योंकि आपके पैसे पर पलने बाले अधिकतर समातार चैनल, वालीबुड फिल्मनिरमाता व समाचार पत्र हमारे इस भारत के इस्लामीकरण के अभियान में बढ़चढ़कर सहयोग दे रहे हैं पर ये सब वीच-वीच में कभी कभार हिन्दू आतंकवादियों की बात भी रखने का दुहसाहस करते हैं इसीलिए कुछदिन पहले हमने इन पर प्रतिबन्ध लगाने का अभियान चलाया था उसके बाद से ये सब एक आबाज में हमारे मुसलिम क्रांतिकारियों के प्रचार-प्रसार में रात-दिन एक किए हुए हैं व इन्होंने हिन्दू आतंकवादियों का जीना हराम कर दिया है फिर भी आप इनको व हमारी पार्टी को मिलने बाले मेहनताने की रकम बढ़ा दें ताकि हम अपने इस इस्लामीकरम के कार्य में और गति ला सकें हो सके तो हिन्दू आतंकवादी संगठनों के नेताओं को भी खरीदने का प्रयास करें ताकि वो भी हमारी तरह सैकुलर होकर भारत के इसलामीकरण की प्रक्रिया में हमारा सहयोग कर सकें। आपको ये इसलिए भी बढ़ा देना चाहिए क्योंकि हमने मन्दिरों को अपने कब्जे में लेकर मन्दिरों का पैसा मुसलमानों को मक्कामदीना की यात्रा के लिए अनुदान के रूप में दिया जबकि हिन्दूओं पर कुम्भ यात्रा के लिए 20% जजिया कर लगाया।
अन्त में सुलतान ने मनमोहन खान की पीठ थपथपाई और बताया कि ये संसार सिर्फ मुसलिम जिहादी क्रांतिकारियों के लिए बना है इसमें किसी गैरमुसलिम को रहने का कोई हक नहीं ।मदरसे इन क्रांतिकारियों के ट्रेनिंग सेंटर हैं व मस्जिदें ओपेरसन सैंटर ,बुरका हथियार धुपाकर ले जाने के लिए । सुलतान ने प्रधानमन्त्री को आदेश दिया कि इन सब का ख्याल रखो और हम आपके बोटों का ख्याल रखेंगे क्योंकि हमारे वोट मस्जिदों से आदेश मिले विना नहीं डलते। आगे और बहुत से कदम ठाने के लिए सुलतान ने आदेश दिए मनमोहनखान ने उनसबका बचन देकर अकशरसह पालन करने का बायदा किया......
जागो हिन्दू आतंकवादियो जागो
फरबरी 2010 के अंतिम दिनों में भारत-विरोधी भारत सरकार के एंटोनियोमाईनोमारियो के गुलाम प्रधानमंत्री द्वारा सौदीअरब की यात्रा की गइ। जिसका मूल उद्देशया था भारत के इस्लामीकरण के लिए इस्लामिक आतंकवाद के जनक व पोषक सौदी अरब को भारत-विरोधी भारत सरकार(2004-2010) द्वारा उठाये गए कदमों की जानकारी देना व भविष्या में उठाये जाने बाले कदमों के बारे में आदेश प्राप्त करना।
प्रधानमंत्री ने सौदीअरब के सुलतान को बताया कि उन्होंने भारत के हिन्दूओं को बता दिया है कि मर्यादापुर्षोत्तम राम और कृष्ण कालपनिक हैं व हिन्दूओं की धार्मिक और अध्यात्मिक पुस्तकें भी काल्पनिक हैं ।इसलिए भारतीय धर्म और संस्कृति बोले तो हिन्दू संस्कृति का कोई अस्तित्व नहीं है। हिन्दूओं को इसी बात का एहसाह करवाने के लिए हमने रामसेतू को तोड़ने का हर सम्भव प्रयास किया। लेकिन क्या करें तोड़ने के लिए लाई गई मसीनें ही टूट गईं नहीं तो हमने अदालत का फैसला आने से पहले ही उसे तोड़ देना था। सुलतान जी आप चिंता न करें भारत में बहुत जल्दी सब अदालतों में आपको 100प्रतिशत वकील मुसलिम क्रांतिकारी ही नजर आयेंगे।फिर फैसले भी मुसलिम क्रांतिकारियों की इच्छा अनुसार ही आयेंगे।
हिन्दूओं को जलील करने के लिए हमने पहले बाब अमरनाथ यात्रा के लिए जमीन दी और फिर वापिस ले ली। जिसके बाद ये हिन्दू आतंकवादी 71 दिनों तक छाती पिटते रहे पर हमने एक ना सुनी हमने इन हिन्दू आतंकवादियों को देखते ही गोली मारने के आदेश तक दे दिए।इस अन्दोलन में महौल बनाने बाले हिन्दू आतंकवादी दयानन्द पांडे को हमने जूठे आरेप लगाकर जेल में डाल दिया व उसका चरित्र हनन करने का हरसम्भव प्रयास किया ।
आगे उन्होंने सुलतान को बताया कि भारत के हिन्दूओं को बता दिया गया है कि भारत के संस्साधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का है मुसलमानों के इसी अधिकार को ध्यान में रखते हुए सरकार ने प्राथमिकता के आधार पर मुसलिमबहुल जिलों का विकाश करने का निर्णय किया है इसलिए हिन्दूओं को ये संकेत दे दिया गया है कि अगर वो हिन्दूबहुल जिलों का विकास चाहते हैं तो वो जिहादी क्रांतिकारीयों व लब जिहाद का साथ देकर अपने जिलों को मुसलिमबहुल बनायें व सरकार से इनाम के तौर पर विकास पायें ।
लब जिहाद को सबसे अधिक सफलता केरल राज्या में मिलती हुई दिखाई दे रही है पर कुछ हिन्दू आतंकवादी इस लब जिहाद का विरोध कर रहे हैं इन हिन्दू आतंकवादियों ने लब जिहाद के विस्तार में रोड़े अटकाने के लिए केरल उच्च न्यायलय में मुक्दमें दर्ज करवा दिए हैं।इन्हीं मुकदमों को ध्यान में रखते हुए हमने केरल उच्च न्यायलय में केन्द्र सरकार की ओर से 100 प्रतिसत एडवोकेट मुसलिम नियुक्त किए हैं ताकि कोई हिन्दू आतंकवादी एडवोकेट इस लब जिहाद के मार्ग में रूकाबट न डाल सके। बैसे वहां 1998 में कोयबटूर में हिन्दू आतंकवादी अडबानी द्वारा किए जा रहे हिन्दू आतंकवादियों के जलसे में बम्म फैंकने बाले मुसलिम जिहादी क्रांतिकारी मदनी का भी तो केश चल रहा है ।हमारे इस 100 प्रतिसत मुसलिम वकील नियुक्त करने बाले फैसले से मदनी जी को छुड़ानें में भी सहायता मिलेगी।
हमने हिन्दूओं को उनकी औकात बताने के लिए ही अपनी सरकार के बजट को सांप्रदाचिक आधार पर बांट दिया। यही नहीं हमने बच्चों को मिलने वाली छात्रवृति तक को सांप्रदायिक आधार पर बांट कर छात्रवृतियों के एक बड़े हिस्से से हिन्दूओं के बच्चों को वंचित कर दिया।हमने हिन्दूओं को नोकरियों से बंचित करने के लिए मुसलमानों को आरक्षण की बात आगे बढ़ाई जिसे अदालतों ने रोकने की कोशिस की इसका समाधान भी हमें 100प्रतिसत मुसलिम वकील ही दिखाई देते हैं जिसका प्रयोग हम केरल से शुरू कर हे हैं।
प्रधानमंत्री मनमोनखान ने सुलतान जी को आगे बताया कि हमने ये स्वांए महसूस किया कि देश के इस्लामीकरम में हिन्दूबहुल भारतीय सेना रूकावट पैदा कर सकती है इसीलिए हमने सेना में मुसलमानों की गिनती के बहाने मुसलिम क्रांतिकारियों की संख्या बढ़ाने का प्रयत्न किया जिसे सेना ने नकार दिया। सेना की इसी मुसलिमविरोदी हरकत का जबाव देने के लिए हमने मुसलिम क्रांतिकारियों की जासूसी करने वाले हिन्दू आतंकवादी कर्नल श्रीकांत पुरोहित को झूठे कोसों में फंसाकर जेल में डलबा दिया।हमारे पास कोई प्रमाण तो था नहीं इसीलिए हमने उस पर झूठे केस बनाकर मकोका लगवा दिया जिसे बाद में मकोका अदालत ने खारिज कर दिया क्योंकि वहाँ पर वकील हिन्दू आतंकवादी ही था।फिर भी हमने उसे जेल से नहीं छोड़ा ताकि हिन्दू आतंकवादियों का हौंसला न बढ़े।अदालतों में 100 प्रतिशत मुसलिम वकील रखने का निर्णय लेने के पीछे यह भी एक कारण रहा।हमने भारतीय सुरक्षाबलों में बड़े सतर पर मुसलिम क्रांतिकारियों की भरती शुरू कर दी है सच्चर कमेटी हमने इसी उदेशय के लिए बनाई थी ताकि हिन्दूओं के हकों को छीन कर मुसलमानों को देने में आसानी रहे ।
प्रधानमंत्री मनमोनखान ने सुलतान जी को आगे बताया कि हिन्दू धर्म का प्रचार-प्रसार करने वाली हिन्दू आतंकवादी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को रोतों-रात उठवाकर उसके साथ वही ब्याबहार किया जो कि हिन्दूओं के साथ एक मुसलिम देश में हो सकता है।
प्रधानमंत्री मनमोनखान ने सुलतान जी को आगे बताया कि हमें मालूम है कि आर एस एस जैसे हिन्दू आतंकवादी संगठन आगे चलकर भारत के इस्लामीकरण में रूकाबटें पैदा कर सकते हैं इसीलिए हमने कर्नल पुरोहित के मामले में उन्हें लपेट कर बदनाम कर उनपर प्रतिबन्ध लगाने की कोशिस की लेकिन हमारे हाथ इसलिए बन्ध गए क्योंकि उसमें अबदुलकलाम का भी नाम आ गया बरना आज तक इन सब संगठनों पर प्रतिबन्ध लगा दिया होता।
प्रधानमंत्री ने सौदीअरब के सुलतान को बताया कि हमने मुसलिम क्रांतिकारी अफजल को सर्वोच नयायालय के आदेश के बाबजूद फांसी पर नहीं लटकाया क्योंकि अफजल जैसे क्रांतिकारी ही हमारी ताकत हैं क्योंकि इन्हीं क्रांतिकारियों से प्रेरणा पाकर भारत का हर मुसलमान हथियार उठाकर हिन्दूओं का सारे भारत से उसी तरह सफाया करेगा जिस तरह हमारे मित्रों ने कश्मीघाटी से किया । अपने इसी मिशन को आगे बढ़ाने के लिए हमने कशमीरी क्रांतिकारियों को भारत बुलाया व बटाला हाऊस में हमला करने बाले क्रांतिकारियों पर मकोका नहीं लगाया क्योंकि ये मकोका तो हमने हिन्दू आतंकवादियों के लिए बनए रखा है बरना आज तक हम इसे पोटा की तरह समाप्त कर चुके होते। हमें लगा कि गुजरात की सरकार गुजकोका के माध्यम से जिहादी क्रांतिकारियों के काम पर रोक लगा सकती है इसीलिए हमनें विधानसभा द्वार चार बार पारित किए गए गुजकोका को मंजूरी नहीं दी क्योंकि हम नहीं चाहते कि किसी हालात में भारत के इस्लामीकरण की गति धीमी पढ़े। हमने ये निर्णय कर लिया है कि जो कोई भी भारत के इस्लामीकरम में रूकाबट पैदा करने की कोशिश करेगा उसे हम आतंकवादी करार देकर जेल में डाल देंगे अगर वे साधु सन्त हुआ तो उसका चरित्र हनन करेंगे।
प्रधानमंत्री ने सौदीअरब के सुलतान को बताया कि हमने सर्वोच न्यालय के आदेस के बाबजूद बंगलादेशी मुसलिम क्रांतिकारियों को देश से बाहर नहीं निकाली वल्कि कानून में फेरबदल कर इनके लिए आसाम में रहना और सुविधाजनक वनाया।
प्रधानमंत्री ने सौदीअरब के सुलतान को बताया कि हम ये सब काम विना एक्सपोज होते हुए इसलिए कर पाए क्योंकि आपके पैसे पर पलने बाले अधिकतर समातार चैनल, वालीबुड फिल्मनिरमाता व समाचार पत्र हमारे इस भारत के इस्लामीकरण के अभियान में बढ़चढ़कर सहयोग दे रहे हैं पर ये सब वीच-वीच में कभी कभार हिन्दू आतंकवादियों की बात भी रखने का दुहसाहस करते हैं इसीलिए कुछदिन पहले हमने इन पर प्रतिबन्ध लगाने का अभियान चलाया था उसके बाद से ये सब एक आबाज में हमारे मुसलिम क्रांतिकारियों के प्रचार-प्रसार में रात-दिन एक किए हुए हैं व इन्होंने हिन्दू आतंकवादियों का जीना हराम कर दिया है फिर भी आप इनको व हमारी पार्टी को मिलने बाले मेहनताने की रकम बढ़ा दें ताकि हम अपने इस इस्लामीकरम के कार्य में और गति ला सकें हो सके तो हिन्दू आतंकवादी संगठनों के नेताओं को भी खरीदने का प्रयास करें ताकि वो भी हमारी तरह सैकुलर होकर भारत के इसलामीकरण की प्रक्रिया में हमारा सहयोग कर सकें। आपको ये इसलिए भी बढ़ा देना चाहिए क्योंकि हमने मन्दिरों को अपने कब्जे में लेकर मन्दिरों का पैसा मुसलमानों को मक्कामदीना की यात्रा के लिए अनुदान के रूप में दिया जबकि हिन्दूओं पर कुम्भ यात्रा के लिए 20% जजिया कर लगाया।
अन्त में सुलतान ने मनमोहन खान की पीठ थपथपाई और बताया कि ये संसार सिर्फ मुसलिम जिहादी क्रांतिकारियों के लिए बना है इसमें किसी गैरमुसलिम को रहने का कोई हक नहीं ।मदरसे इन क्रांतिकारियों के ट्रेनिंग सेंटर हैं व मस्जिदें ओपेरसन सैंटर ,बुरका हथियार धुपाकर ले जाने के लिए । सुलतान ने प्रधानमन्त्री को आदेश दिया कि इन सब का ख्याल रखो और हम आपके बोटों का ख्याल रखेंगे क्योंकि हमारे वोट मस्जिदों से आदेश मिले विना नहीं डलते। आगे और बहुत से कदम ठाने के लिए सुलतान ने आदेश दिए मनमोहनखान ने उनसबका बचन देकर अकशरसह पालन करने का बायदा किया......
जागो हिन्दू आतंकवादियो जागो
मंगलवार, 23 फ़रवरी 2010
पाकिस्तान में मुसलिम आतंकवादियों ने सिखों का सिर काटकर गुरूद्वारे में फैंका
(कशमीरघाटी में मुसलिम आतंकवादियों द्वारा मारे गए सिखों के पास उनके परिबारजन विलाप करते हुए)
हम लगातार हिन्दूओं-सिखों का ध्यान मुसलिम आतंकवाद की ओर खींचने का प्रयत्न कर रहे हैं लेकिन एक तो हिन्दू-सिख ये समझजने को तैयार नहीं दूसरा मुसलिम आतंकवादियों व उनके समर्थकों का सूचना तन्त्र इतना ताकतबर है कि वो इस सच्चाई को हिन्दूओं-सिखों तक किसी भी स्थिति में नहीं पहूंचने देना चाहता। इतिहास इस बात का साक्षी है कि इस्लाम जिस क्षेत्र या देश में भी गया है वहां कतलो-गारद हिंसा अशांति के सिवा कुछ भी नहीं रहा ।बार-बार ये कहा जाता है कि इस्लाम हिंसा कतलो-गारद की शिक्षा नहीं देता पर सच्चाई इसके विलकुल विपरीत है।दुनिया का कोई भी देश या क्षेत्र ले लो जो मुसलिम विहीन हैं सिर्फ वही क्षेत्र इस कतलो गारद से मुक्त है ।जहां मुसलिम अबादी 10 प्रतिशत से कम है वहां वेशक जिहाद का खुला हिंसात्मक स्वारूप देखने को नहीं मिलता ।भारतीयों को ये सब समझने के लिए ज्यादा दूर जाने की जरूरत नहीं ।आज विभाजित भारत के इस हिस्से पर अगर हम नजर दौड़ायें तो एक बात सपष्ट देखने को मिलती है कि जहां-जहां खुद को हिन्दू मानने बालों की जनशंख्या अधिक है वहां-वहां शांति है पर जहं कहीं भी हिन्दू जनशंख्या कम है वहां आग लगी है हर रोज हिंसा हो रही है बम्म-विस्फोट हो रहे हैं ।कुछ लोग कई बार बांमपंथी आतंकवाद को हिन्दू आतंकवाद की संज्ञा देने की मूर्खता करत बैठते हैं पर वो ये भूल जाते हैं कि वांमपंथी खुद को हिन्दू नहीं मानते न ही वो ये हिंसा हिन्दू –धर्म के प्रचार प्रसार के लिए करते हैं (बैसे भी बांमपंथियों के प्रचार-प्रसार का तरीका भी मुसलिम आतंकवादियों के तरीके से कोई अलग नहीं है) जबकि मुसलिम आतंकवाद एक योजना के अनुसार इस्सलाम के प्रचार-प्रसार के लिए हिंसा करते हैं जिसे वो जिहाद कहते हैं।इसी जिहाद को आगे बढ़ाते हुए कशमीर में इस्लामी आतंकवादियों का राज्या स्थापित करने के लिए मुसलमानों ने हिन्दूमिटाओ-हिन्दूभगाओ अभियान चलाकर हजारों हिन्दूओं को मौत के घाट उतारकर लाखों को घरबार छोड़ने पर मजबूर किया ।इसी जिहाद की कड़ी को भारत में मुसलिम आतंकवादियों राज्या स्थापित करने के लिए देश भर में हिन्दूओं को निसाना बनाकर लगातार हमले किए जा रहे हैं जिसे तरह-तरह के कुतर्क देकर इन मुसलिम आतंकवादियों के ठेकेदार जायज ठहराने की कोशिस कर रहे हैं ताकि ये जिहादी आतंकवाद आगे बढ़ता रहे। पाकिस्तान में गैर-मुसलिमों का लगभग सफाया किया जा चुका है कुछ गिने चुने बच गए हैं उन्हीं पर इस्लाम अपनाने के लिए लगातार दबाब बनाया जा रहा है जब वो नहीं माने तो उन्हें जजिया कर देने के लिए बाध्या किया गया । जब वो मुसलमानों को दबाब में नहीं आए तो उन्हें अगवा कर उन पर जुल्म ढाय गय ।जब ये सिख इन जुल्मों के बाबजूद गुरूओं की शिक्षा पर अडिग रहे तो इन्हें हलाल कर इनमें से दो के सिर गुरूद्वारे में फैंक दिए गए। जो कुछ आज ये सिखों के साथ किया गया कमोवेस दुनिया के हर हिस्से में जहां कहीं भी मुसलमान बहुमत मे हैं गैर-मुसलिमों के साथ यही सब किया जा रहा है ।पाकिस्तान में हिन्दूओं के साथ भी यही सब किया गया ।अब कैसे कहें कि मुसलमान आतंकवादी नहीं हैं या फिर आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं होता।मुसलिम आतंकवाद के प्रति कबूतर की तरह आंख बंद कर काम नहीं चलने बाला जरूरत है तो हिन्दू-सिखों को मिलकर कुछ एसे रास्ते निकालने की जिनसे हिन्दूओं-सिखों की आने-बाली पिड़ीयों को इन मुसलिम आतंकवादियों के हिंसक अत्याचारों से बचाया जा सके।
(कशमीर घाटी में मुसलमानों द्वारा कतल किया गया हिन्दू)
अभी नहीं तो कभी नहीं जागो जगाओ और परमपूजनीय गुरूगोविंदसिंह जी के बताए मार्ग पर आगे बढ़ो व अपनी आने बाली पिढ़ीयों को सुरक्षिक करो
हम लगातार हिन्दूओं-सिखों का ध्यान मुसलिम आतंकवाद की ओर खींचने का प्रयत्न कर रहे हैं लेकिन एक तो हिन्दू-सिख ये समझजने को तैयार नहीं दूसरा मुसलिम आतंकवादियों व उनके समर्थकों का सूचना तन्त्र इतना ताकतबर है कि वो इस सच्चाई को हिन्दूओं-सिखों तक किसी भी स्थिति में नहीं पहूंचने देना चाहता। इतिहास इस बात का साक्षी है कि इस्लाम जिस क्षेत्र या देश में भी गया है वहां कतलो-गारद हिंसा अशांति के सिवा कुछ भी नहीं रहा ।बार-बार ये कहा जाता है कि इस्लाम हिंसा कतलो-गारद की शिक्षा नहीं देता पर सच्चाई इसके विलकुल विपरीत है।दुनिया का कोई भी देश या क्षेत्र ले लो जो मुसलिम विहीन हैं सिर्फ वही क्षेत्र इस कतलो गारद से मुक्त है ।जहां मुसलिम अबादी 10 प्रतिशत से कम है वहां वेशक जिहाद का खुला हिंसात्मक स्वारूप देखने को नहीं मिलता ।भारतीयों को ये सब समझने के लिए ज्यादा दूर जाने की जरूरत नहीं ।आज विभाजित भारत के इस हिस्से पर अगर हम नजर दौड़ायें तो एक बात सपष्ट देखने को मिलती है कि जहां-जहां खुद को हिन्दू मानने बालों की जनशंख्या अधिक है वहां-वहां शांति है पर जहं कहीं भी हिन्दू जनशंख्या कम है वहां आग लगी है हर रोज हिंसा हो रही है बम्म-विस्फोट हो रहे हैं ।कुछ लोग कई बार बांमपंथी आतंकवाद को हिन्दू आतंकवाद की संज्ञा देने की मूर्खता करत बैठते हैं पर वो ये भूल जाते हैं कि वांमपंथी खुद को हिन्दू नहीं मानते न ही वो ये हिंसा हिन्दू –धर्म के प्रचार प्रसार के लिए करते हैं (बैसे भी बांमपंथियों के प्रचार-प्रसार का तरीका भी मुसलिम आतंकवादियों के तरीके से कोई अलग नहीं है) जबकि मुसलिम आतंकवाद एक योजना के अनुसार इस्सलाम के प्रचार-प्रसार के लिए हिंसा करते हैं जिसे वो जिहाद कहते हैं।इसी जिहाद को आगे बढ़ाते हुए कशमीर में इस्लामी आतंकवादियों का राज्या स्थापित करने के लिए मुसलमानों ने हिन्दूमिटाओ-हिन्दूभगाओ अभियान चलाकर हजारों हिन्दूओं को मौत के घाट उतारकर लाखों को घरबार छोड़ने पर मजबूर किया ।इसी जिहाद की कड़ी को भारत में मुसलिम आतंकवादियों राज्या स्थापित करने के लिए देश भर में हिन्दूओं को निसाना बनाकर लगातार हमले किए जा रहे हैं जिसे तरह-तरह के कुतर्क देकर इन मुसलिम आतंकवादियों के ठेकेदार जायज ठहराने की कोशिस कर रहे हैं ताकि ये जिहादी आतंकवाद आगे बढ़ता रहे। पाकिस्तान में गैर-मुसलिमों का लगभग सफाया किया जा चुका है कुछ गिने चुने बच गए हैं उन्हीं पर इस्लाम अपनाने के लिए लगातार दबाब बनाया जा रहा है जब वो नहीं माने तो उन्हें जजिया कर देने के लिए बाध्या किया गया । जब वो मुसलमानों को दबाब में नहीं आए तो उन्हें अगवा कर उन पर जुल्म ढाय गय ।जब ये सिख इन जुल्मों के बाबजूद गुरूओं की शिक्षा पर अडिग रहे तो इन्हें हलाल कर इनमें से दो के सिर गुरूद्वारे में फैंक दिए गए। जो कुछ आज ये सिखों के साथ किया गया कमोवेस दुनिया के हर हिस्से में जहां कहीं भी मुसलमान बहुमत मे हैं गैर-मुसलिमों के साथ यही सब किया जा रहा है ।पाकिस्तान में हिन्दूओं के साथ भी यही सब किया गया ।अब कैसे कहें कि मुसलमान आतंकवादी नहीं हैं या फिर आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं होता।मुसलिम आतंकवाद के प्रति कबूतर की तरह आंख बंद कर काम नहीं चलने बाला जरूरत है तो हिन्दू-सिखों को मिलकर कुछ एसे रास्ते निकालने की जिनसे हिन्दूओं-सिखों की आने-बाली पिड़ीयों को इन मुसलिम आतंकवादियों के हिंसक अत्याचारों से बचाया जा सके।
(कशमीर घाटी में मुसलमानों द्वारा कतल किया गया हिन्दू)
अभी नहीं तो कभी नहीं जागो जगाओ और परमपूजनीय गुरूगोविंदसिंह जी के बताए मार्ग पर आगे बढ़ो व अपनी आने बाली पिढ़ीयों को सुरक्षिक करो
सोमवार, 22 फ़रवरी 2010
गोआ में मडगांव के बहाने हिन्दुविरोधी-भारतविरोधी मिडीया ईसाई मिसनरी एंटोनियो की गुलाम सरकार का देशभक्त हिन्दूओं पर एक और हमला
मेरे प्यारे हिन्दूओ आपको जरूर याद होगा कि किस तरह ईसाई मिसनरी एंटोनियो माइनो मारियो के इसारे पर लैफ्टीनैंट कर्नल पुरोहित जैसे देशभक्त सैनिक व साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर जैसे क्रंतिकारियों को झूठे मामलों में फंसाकर उन पर मकोका लगा दिया गया जिसे माननीय मकोका न्यायलय ने वाद में मनघड़ंत(झूठा) पाकर खारिज कर दिया गया ।
आपको यह भी याद होगा कि किस तरह एंटोनियो माइनो मारियो के इसारे पर तत्कालीन कानून मंत्री हंसराजभारद्वाज को एंटोनियो माइनो मारियो के हमबतन-हमराज व पार्टनर क्वात्रोची के लंदन बैंक में जब्त बोफोर्स-दलालीकांड की रकम को छुड़बाने के लिए लंदन भेजा गया और रातों-रात सारी रकम निकलवा ली गई। जब मानीय नयायलय ने उस रकम को जब्त रखने के आदेश दिए तब तक सारा काम निपट चुका था।
आपको यह भी जरूर ध्यान में होगा कि अभी हाल ही में एंटोनियो की गुलाम मनमोहन सरकार ने किस तरह बोफोर्स दलाली कांड में एंटोनियो माइनो मारियो के सह अभियुक्त क्वात्रोची को सब मुकदमों से मुक्त करने की अंतिम सफल कोशिश की । माननीय न्यायलया में कोइ अड़चन न आये इसके लिए एक अभियुक्त के सहयोगी को सरकारी बकील नियुक्त करबा दिया । क्या इससे बढ़ी बेशर्म और गद्दार सरकार आपने कभी देखी है ।
आपको जरूर यह भी याद होगा कि माननीय सर्वोच न्यायालय ने जिहादी आतंकवादी मुहम्मद अफजल को 19 नमम्वर 2006 को फांसी तय की थी जिसे गद्दारों की समर्थक ये हिन्दुविरोधी सरकार आज तक लटकाय हुए है। यह वही सरकार है जिसने हैदराबाद बम्मविस्फोटों के दोसियों को जेल से रिहा कर एक-एक आटोरिक्सा दिया ।
· आज यही हिन्दुविरोधी-भारतविरोधी मुसलिम आतंकवादियों व ईसाई दलालों की समर्थक सरकार सरारती तत्वों द्वारा किए गए बम्मविस्फोटों मे मारे गए निर्दोष शांतिप्रिय देशभक्त धार्मिक संस्था के सदस्यों के परिबारजनों को संतावना देने के बजाए उन मारे गए देशभक्तों के विरद्ध ही आरोप पर आरोप लगाय जा रही है।(for more information visit Hindu Jaguriti Samiti) आपको याद होगा कि यह वही गद्दारों की सरकार है जिसने मुसलिमजिहादी आतंकवादी इसरत जहां के मरने पर मुआबजा दिया था और देशभक्तों के मरने पर देशद्रोह का केश दर्ज कर दिया उस मुसलिम जिहादी आतंकवादी को निर्दोस सिद्ध करने के लिए ये गद्दार आज भी प्रयत्न कर रहे हैं ।
· मुम्बइ में इस गद्दारों की सरकार ने जिन मुसलिम जिहादीयों को बचाने के लिए हिन्दूक्रंतिकारियों पर झूठे आरेप लगाये और इन आरोपों को आगे बढ़ाने के लिए जिस अधिकारी का दुरूपयोग किया कुदरत का न्याय देखो वो अधिकारी उन्हीं मुसलिम जिहादी आतंकवादियों के हाथों मारा गया ।तब भी इस गद्दार मिडीया व राजनितिक दलों के घर-कुदालों ने उस हमले में हिन्दुओं को फंसाने का भरपूर प्रयास किया।
· कहते हैं जिसका कोई नहीं उसका भगवान होता है आज देशभक्त हिन्दु लगभग लावारिस व अनाथ सा जीबन जीने को मजबूर हैं । इन हालात में हम भगबान से यही प्रर्थना कर सकते हैं कि जिस तरह उसने आज तक धर्म-रक्षकों का साथ दिया है आगे भी अपना आशीर्बाद धर्मरक्षक देशभक्तों पर बनाए रखे ताकि हम इन गद्दारों के षडयन्त्रों को असफल कर अपनी प्यारी भारतमाता को इन गद्दारों से मुक्त करवा सकें। पर गीता में कहा गया है कर्म प्रधान है आओ मेरे प्यारे जागरूक हिन्दुओ खुद सक्रिए हो जाओ व बौद्धिक गुलाम हिन्दुओं को जगाकर इस हिन्दूक्रति का निर्णायक शूत्रपात करो ..... जागो हिन्दू जागो .
रविवार, 21 फ़रवरी 2010
वन्देमातरम् का विरोध देशद्रोह नहीं तो और क्या है ?
जब हमने सुना कि स्वामीरामदेव जी देववन्द में जा रहे हैं तो लगा कि मुसलिम जिहादी आतंकवादियों की जन्मदाता जमात की सोच में बदलाब आ रहा है
लेकिन इस यात्रा के आस-पास जो कुछ घटा उस सबने हमारे जैसे अति आशाबादी करोड़ो लोगों को इस सच्चाई का सामना करबा दिया कि मुसलमानों का एक
बड़ा बर्ग 1947 में भी गद्दार था आज भी गद्दार है और तब तक गद्दार रहेगा जब तक इन गद्दारों का हिन्दूक्रांति के माध्यम से दिमाग ठीक नहीं कर दिया
जाता । आप सोच रहे होंगे कि क्या बजह है कि ये गिने-चुने गद्दार बार-बार भारत के मान-सम्मान को मलियामेट करते हैं बेगुनाह भारतीयों का खून बहाते हैं
देश का विभाजन करबाते हैं फिर भी जिन्दा बच जाते हैं । इसकी सबसे बड़ी बजह यह है कि इन मुसलिम जिहादी आतंकवादियों के समर्थक व पोषक बाद्धिक-
गुलाम हिन्दु 1947 में भी सता मे थे आज भी सता में हैं और तब तक सता में रहेंगे जब तक इन बोद्धिक गुलाम हिन्दुओं की बुद्धि को ठीक नहीं कर दिया
जाता ।अब प्रश्न यह उठता है कि इन गद्दारों की बुद्धि को ठीक कौन करेगा और कैसे करेगा । हमारे विचार में इन गद्दारो को ठीक करने के लिए हमें उन गिने
–चुने नेताओं,पत्रकारों व बुद्धिजीवियों को गोली से उड़ाना होगा जो हर वक्त देश की निर्दोश जनता का खून बहाने बाले मुसलिमजिहादी आतंकवादियों- बामपंथी
नकस्लियों माओवादियों के अनुकूल महौल वनाकर उनके द्वारा किए गए हर कत्लयाम को जायज ठहराकर मासूम मुस्लिम बच्चों व दलितों और आदिवसियों को
कत्लोगारद की अंधेरी दुनिया मे धकेल देते हैं । अब प्रश्न उठता है कि गोली मारेगा कौन । देखो ये गौर करने का सबसे महतवपूर्ण विन्दु है इसका सीधा सा
उतर है कि जितने भी लोग आज देशभक्त होने का दावा कर रहे हैं देश के लिए मरमिटने की कशमें उठा रहे हैं,लेख लिख रहे हैं, भाषण दे रहे हैं उन सबको
अपना मुंह बन्द कर एक दूसरे के साथ सम्पर्क कर संगठित होकर योजना बनाकर इस काम को अन्जाम देना चाहिए।अब आप सोचेंगे कि हथियार कहां से
आयेंगे । देश में जब इन गद्दार आतंकवादियों को भारत के शत्रु देशों व लोगों से हथियार मिल सकते हैं तो क्या ये मुमकिन है कि देशभक्तों को भारत के मित्र
लोगों व देशों से हथियार न मिलें ।बैसे भी इन गद्दारों को खत्म करना सुरक्षाबलों का काम है जब गद्दार नेता व बुद्धिजीवी सुरक्षबलों को इन गद्दारों का खात्मा
करने से रोक रहे है तो सुरक्षबलों को खुद देशभक्त लोगों व संगठनों से सम्पर्क कर उनकी इस पवित्र कार्य में सहायता करनी चाहिए।
कोइ भी विवेकशील ब्यक्ति हमें ये सुभाब देगा कि कानून को अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए व कानून को अपना काम करने देना चाहिए । बस यहीं पर समस्या पैदा होती है ये गद्दार कानून को ही तो अपना काम नहीं करने दे रहे ।क्या अफजल को फांसी हमने सुनाई थी नहीं न माननीय सर्वोच न्यायालय ने आदेश दिया था कि अफजल को 19 नम्मवर 2006 को फांसी पर चढ़ा देना चाहिए ।आज 19 नम्मवर 2009 आने वाला है क्या कानून को अपना काम करने दिया गया । नहीं न
अब आप सोचो कि जिस स्थान पर वन्देमातरम् का विरोध कर देश की सम्प्रभुता को ललकारा जा रहा हो क्या उस स्थान पर देश के कानून के प्रतिनिधि को सुरक्षबल भेजकर गद्दारों को गोली से उड़ाकर या कानून के अनुसार जो भी सजा बनती हो वो सजा देनी चाहिए या नहीं सबका जबाब होगा हां कानून के अनुसार जो भी सजा बनती है वो देनी चाहिए । लेकिन यहां तो देश का गृहमन्त्री अपने आप जाकर गद्दारों का हौसला बढ़ाता बेचारा कानून क्या करेगा ।
अब वक्त आ गया है कि हम सच का सामना करें और देशभक्त और देशभक्तों के समर्थकों व गद्दारों और गद्दारों को समर्थकों को पहचान कर अपने आप को देशभक्तों को चुनकर उनके साथ आगे बढ़े और हिजड़े बनकर तमासा न देखें ,कानून,दया,मानबता का बहाना बनाकर अपनी बुजदिली को तर्क देकर छुपाने की कोशिश न करें ।
सच मे हम स्वामी रामदेव जी के हैसले की दाद देते हैं कि उन्होंने गद्दारों के वीच जाकर भी देशभक्ति से ओतप्रोत भाषण दिया पर दुख होता है कि भारत मात की जय या वन्देमातरम् कहने का हौसला वो भी न जुटा सके वैसे भी जिन गद्दारों के साथ भारत विरोधी भारत सरकार खड़ी हो उन गद्दारों के सामने भारत माता की जय या वन्देमातरम वोलने का मतलव है गद्दारों की सरकार से पंगा लेना ।
बुधवार, 17 फ़रवरी 2010
धर्म के आधार पर आरक्षण कांग्रेस की हिन्दुविरोधी-देशविरोधी मानसिकता का एक और प्रमाण
1857 का स्वतन्त्रता संग्राम एक एक ऐसी घटना थी जिसने अंग्रेजों को इतना डरा दिया कि उन्हें हर पल भारत में क्राँति की नइ सम्भावनायें दिखाइ देने लगी ।उन्हें लगा कि अब भारत को गुलाम बनाए रखना उनके बस की बात नहीं। क्योंकि यहां के लोग महरानी लक्ष्मीवाई,मंगलपांडे जैसे क्रांतिकारियों की आत्मा की आवाज को समझकर अपने आप को मातृभूमि को आजाद करवाने के लिए बलिदान करने की राह पर निकलने लगे हैं। बस इसी डर ने उन्हें भारत में एक एसा दल त्यार करने पर बाद्य किया जो देखने में हिन्दुस्थानियों का लगे लेकिन बफादार अंग्रेजों के प्रति रहे।
1885 में ऐ ओ हयूम के नेतृत्व में अंग्रेजों के स्वपनों को भारत में साकार करने के लिए कांग्रेस की स्थापना की गई। 1885 से आज तक कुछ अपबादों को छोड़ दिया जाए तो कांग्रेस भारत में अंग्रेजियत के प्रचार-प्रसार व हिन्दूत्व के विरोध का सबसे बड़ा अधार सत्मभ है। यही वो दल है जिसने 1947 में गोरे अंग्रेजों के चले जाने के बाद भी आज तक कभी भारतीयों को आजादी का एहसास नहीं होने दिया। इसी दल की कढ़ी मेहनत और दृड़ निस्चय के परिणाम स्वरूप आज सब भारतीय जात-पात, सांप्रदाय, भाषा, क्षेत्र के नाम पर एक दूसरे का खून बहा रहे हैं। जब कभी भी इस दल को लगता है कि देश में शांति-एकता और भाई-चारे का दौर शूरू हो रहा है तो ये दल अपनी फूट डालो और राज करो की निति में से कोई न्या तीर चलाकर एसी आग लगाता है जिसकी तपस बर्षों तक हिन्दुस्थानियों को जलाती रहती है।
इसी फूट डालो और राज करो की निति के परिणामस्वरूप 1947 में भारत का विभाजन हो गया। दो हिस्से मुसलमानों के लिए एक हिस्सा हिन्दुओं के लिए। विभाजन की भूमिका त्यार की अंग्रेजों ने कांग्रेसियों के साथ मिलकर ।जिसे सिरे चढ़ाया पुराने कांग्रेसी मुहम्द अली जिन्ना ने 1946 में मुसलमानों को हिन्दूओं के विरूद्ध सीधी कार्यवाही का आदेश देकर। जिसके परिणाम स्वरूप मुसलमानों ने सारे देश में हिन्दूओं पर हमले शुरू कर दिए सारा देश हिन्दूओं की कब्रगाह बनने लगा धारे-धीरे हिन्दूओं को समझ आने तगा कि अगर बचना है तो मुकाबला करना पड़ेगा । धीरे-धारे हिन्दूओं ने अपने आप को संगठित कर मुसलिम जिहादियों का मुकाबला करना शुरू किया । जैसे ही हिन्दूओं ने मुसलिम जिहादियों को उन्हीं की भाषा में जबाब देना शुरू किया तो कांग्रेसियों से बर्दास नहीं हुआ और कांग्रेसियों के नेता ने मुसलिम जिहादियों को बचाने के लिए अनसन शुरू कर दिया। बेचारे बौद्धिक गुलाम हिन्दु कांग्रेसियों के बनाए मकड़जाल में ऐसो फंसे कि आज तक निकल न पाये।
मुसलमानों ने एकजुट होकर सारे पाकिस्तान से हिन्दू-सिखों का लगभग नमोनिसान मिटा दिया ।जो गिने-चुने रह गए उनका कत्लयाम आज तक जारी है।बर्तमान भारत से भी मुसलमान धीरे-धीरे पाकिसस्तान जा रहे थे तभी कांग्रेसियों ने हिन्दूओं को लहूलुहान करने के लिए एक और चाल चली और मुसलमानों को पाकिस्तान जाने से रोक दिया। जिहादियों के रणनितीकार तो पहले ही त्यार बैठे थे अपने जिहादी बीज का कुछ हिस्सा बर्तमान भारत में छोड़ देने के लिए ताकि बचे खुचे भारत को भी लगातार तहुलुहान करने के बाद हिन्दूविहीन कर दिया जाए।
1947 में भारत विभाजन के बाद मुसलिम जिहादियों की एकमात्र नीति रही अधिक से अधिक बच्चे पैदा कर भारत में अपनी जनशंख्या बढ़ाना व अलगावबाद की भावना जागृत रखना । इन उदेश्यों की पूर्ति के लिए ही जिहादियों ने हमेशा परिबार नियोजन व बन्देमातरम् का बार-बार विरोध किया । उन की इस रणनिती को सफल बनाने के लिए कांग्रेसियों ने उन्हें न केबल लोजिसटिक सहायता उपलब्ध करबाइ बल्कि उनकी अलगावबादी नीतियों को सहारा देने के लिए हर तरह के कानून बनाए। मतलब अंग्रेजों द्वारा सौंपी गई भूमिका को कांग्रेस आज तक निभाती चली आ रही है।
अब आप समझ सकते हैं कि क्यों कांग्रेस मुसलमानों व इसाईयों को धर्म के आधार पर आरक्षण की बात कर रही है। कांग्रेस का 1885 से आज तक जो उदेश्य सपष्ट दिखता है वो है हिन्दुविरोध-देशविरोध वोले तो गद्दारी। बरना हर कोई जानता है कि अंग्रेजों और इसाईयों को आरक्षण देने की बात तो केबल गद्दार हिन्दुविरोधी ही कर सकते हैं की देशभक्त नहीं। आओ जरा विचार करें कि मुसलमानों और इसाइयों को आरक्षण क्यों नहीं मिलना चाहिए ।
संविधान धर्म(सांप्रदाए) के आधार पर आरक्षण की इजाजत नहीं देता। क्योंकि धर्म के आधार पर फूट डालो और राज करो की नितीयों के परिणामस्वरूप ही भारत का एक से अधिक बार विभाजन(अफगानीस्तान,पाकिस्तान,बंगलादेश) हो चुका है। आज कोइ भी विवेकशील ब्यक्ति इस आग से खेलने का दुहसाहस नहीं कर सकता। एसा केबल गद्दार ही कर सकते हैं। जो लोग कह रहे हैं कि संविधान की इस पंक्ति को हटा देना चाहिए उन्हें समझना चाहिए कि अगर ये पंक्ति हटानी ही है तो देश की 100% नौकरियां हिन्दूओं के लिए आरक्षित कर देनी चाहिए।
मुसमानों और इसाईयों ने हिन्दुओं को लगभग 1000 वर्ष तक गुलाम बनाकर रखा। इस दौरान मुसलमानों व इसाइयों ने हिन्दूओं पर अनगिनत जुल्म ढाए। हिन्दुओं के आस्थास्थल मन्दिर गिराए। मां-बहन-बेटियों की इज्जत से खिलबाड़ किया। नौकरियों पर हर तरह से पहला अधिकार मुसलमानों व इसाईयों को दिया गया ।हिन्दुओं के साथ जानबरों से भी बदतर बरताव किया गया।इन ईसाईयों और मुसलमानों को आरक्षण देना न हिन्दूओं की हैसियत है न इन्हें आरक्षण की जरूरत है। बैसे भी कोई गुलाम(हिन्दू) अपने सासक (मुसलमान और इसाइ ) को आरक्षण देने की हैसियत कहां रखता है।
मुसलमानों ने तो न केबल हिन्दुओं को गुलाम बनाकर रखा बल्कि अखण्ड भारत के चार टुकड़े कर तीन पर अपना 100% कब्जा कर लिया। जब भारत के बाकी तीन हिस्सों अफगानिस्तान,पाकिस्तानव बंगलादेश में मुसलमानों को 100% आरक्षण प्राप्त है तो फिर भारत में 100% आरक्षण हिन्दूओं को क्यों नहीं।
जो इसाइ आज भी धन-बल के जोर पर हिन्दूओं को धर्मपरिबर्तन करने पर बाध्य कर रहे हैं उन इसाइयों को आरक्षण कैसा। आज भी देश के अधिकतर शिक्षण संस्थान जिनमें भारत के अधिकतर प्रभावशाली लोगों के बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं ईसाईयों के खब्जे में हैं। जो इसाइ आज भी देश के हर बड़े पद पर विराजमान हैं उन्हें आरक्षण की क्या जरूरत।
आज जब भारत सरकार एक इसाई एंटोनिये माइनो मारियो की गुलाम है देश का रक्षामन्त्री एक इसाइ है। एंटोनियों के सब के सब सलाहकार या तो इसाइ हैं या फिर मुसलमान । ऐसे में मुसलमानों और इसाईयों को आरक्षण की बात करना हिन्दुविरोध- देशविरोध के सिवा और कुछ नहीं ।
कुछ लोग ये तर्क देते हैं कि ये इसाइ और मुसलमान वो नहीं जिन्होंने हिन्दुओं को गुलाम बनाया था ये तो हिन्दुओं से ही इसाइ व मुसलमान बने हैं । प्रशन पैदा होता है कि ये मुसलमान और ईसाई इसलिए बने ताकि इन्हें गरीवी व छुआछूत से छुटकारा मिल सके जो कि नहीं मिल सका फिर तो इन्हें बापस हिन्दु बन जाना चाहिए क्योंकि जिस उद्देशय को लेकर ये धर्मभ्रष्ट हुए बो उदेशय ही पूरा नहीं हुआ। कम से कम धर्म का पालन तो करें और आरक्षण का फायदा भी लें । बैसे भी संस्सार का एकमात्र मानब धर्म हिन्दुधर्म ही तो है बाकी सब तो राजनितीक विचारधारायें हैं आज नहीं तो कल विलुप्त हो जांयेंगी।
जो मुसलमान बन्देमातरम् का विरोध कर रहे हैं वो राष्ट्रवाद के हर पैमाने से गद्दार हैं अत: गद्दारों को आरक्षण की बात गद्दार ही कर सकते हैं देशभक्त नहीं। इसे समय का न्याय ही कहेंगे कि जो लोग आईबीएन7 पर वन्देमातरम् का विरोध कर रहे थे वो ही आरक्षण की मांग भी उठा रहे थे। मतलब आप समझ सकते हैं।
रही बात गरीवी की तो इस संसार में हिन्दूओं से ज्यादा गरीब और बदनसीब कौन है जिनके देश पर मुसलमानों और इसाइयों ने कब्जा कर लिया और वो वेचारा कुछ न कर सका। हिन्दुओं के देश को मुसलमानों ने चार हिस्सों में बांट कर उनमें से तीन पर अपना कब्जा जमाकर हिन्दू को वहां से निकाल दिया। अब उसे चौथे हिस्से से निकालने की त्यारी चल रही है। पांच लाख से अधिक हिन्दू तो अकेले कशमीर घाटी से बेघर कर दिए गए बचारा हिन्दू कुछ न कर सका ।मां-बहन बेटियों की इज्जत तार-तार की की गई बेचारा हिन्दू कुछ न कर सका नबालिग बच्चों को हलाला कर दिया गया बेचारा हिन्दू कुछ सका। न्याय की बात तो दूर कोइ दुनिया में सन्तावना तक देने वाला कोई नहीं । अगर बास्तब में मुसलमान गरीब होते तो वो परिबार नियोजन का विरोध नहीं करते ।देशभर में बम्मविस्फोट कर हिन्दुओं का खून नहीं बहाते। अगर इसाइ गरीब होते तो वो बड़ी शिक्षण संस्थाओं व सेवा के नाम पर प्रलोभन देकर हिन्दूओं को धर्मपरिबर्तन कर इसाई बनने पर बाध्या नहीं करते। बास्तब में अगर कोई गरीब है तो वह हिन्दु है । लेकिन हिन्दू की बदनशीवी यह है कि उसकी गरीवी पर कोइ ध्यान देने बाला नहीं उल्टा ये गद्दार उसे और गरीव दीन हीन बनाने पर तुले हैं।
रही बात अल्पसंख्यक होने की तो दुनिया में अगर कोई अल्पसंख्यक है तो वो हिन्दू है । अगर अकेले देश की बात की जाए तो दुनिया के लगभग 200 देशों में हिन्दू अलपसंख्यक है बताओ जरा कितने देशों में हिन्दूओं को विसेषा अधिकार प्राप्त हैं या आरक्षण प्राप्त है आरक्षण या विशेषा अधिकार तो दूर समान अधिकार तक प्राप्त नहीं हैं।
अन्त में हम तो यही कहेंगे कि जो भी भारत के नागरिक हैं और देश के प्रति बफादार हैं उन्हें वो सब अधिकार मिलने चाहिए जो भारतीय नागरिक को प्राप्त हैं लेकिन धर्म के आधार पर किसी को भी कोई विशेषाधिकार नहीं देना चाहिए ।इसी में हम सब का भला है।
मंगलवार, 16 फ़रवरी 2010
बात चीत रहेगी जारी , बात चीत रहेगी जारी
चाहे हम हों कितने तगड़े , मुंह वो हमारा धूल में रगड़े,
पटक पटक के हमको मारे , फाड़ दिए हैं कपड़े सारे ,
माना की वो नीच बहुत है , माना वो है अत्याचारी ,
लेकिन - बात चीत रहेगी जारी , बात चीत रहेगी जारी .
जब भी उसके मन में आये , जबरन वो घर में घुस जाए ,
बहू बेटियों की इज्ज़त लूटे, बच्चों को भी मार के जाए ,
कोई न मौका उसने छोड़ा , चांस मिला तब लाज उतारी ,
लेकिन - बात चीत रहेगी जारी , बात चीत रहेगी जारी .
हम में से ही हैं कुछ पापी , जिनका लगता है वो बाप ,
आग लगाते हुए वे जल मरें , तो भी उसपर हमें ही पश्चाताप ?
दुश्मन का बुरा सोचा कैसे ??? हिम्मत कैसे हुई तुम्हारी ???
अब तो - बात चीत रहेगी जारी , बात चीत रहेगी जारी .
बम यहाँ पे फोड़ा , वहां पे फोड़ा , किसी जगह को नहीं है छोड़ा ,
मरे हजारों, अनाथ लाखों में , लेकिन गौरमेंट को लगता थोडा ,
मर मरा गए तो फर्क पड़ा क्या ? आखिर है ही क्या औकात तुम्हारी ???
इसलिए - बात चीत रहेगी जारी , बात चीत रहेगी जारी .
लानत है ऐसे सालों पर , जूते खाते रहते हैं दोनों गालों पर ,
कुछ देर बाद , कुछ देर बाद , रहे टालते बासठ सालों भर ,
गौरमेंट करती रहती है नाटक , जग में कोई नहीं हिमायत ,
पर कौन सुने ऐसे हाथी की , जो कोकरोच की करे शिकायत ???
इलाज पता बच्चे बच्चे को , पर बहुत बड़ी मजबूरी है सरकारी ,
इसीलिये - बात चीत रहेगी जारी , बात चीत रहेगी जारी .
वैसे हैं बहुत होशियार हम , कर भी रक्खी सेना तैयार है ,
सेना गयी मोर्चे पर तो - इन भ्रष्ट नेताओं का कौन चौकीदार है ???
बंदूकों की बना के सब्जी , बमों का डालना अचार है ,
मातम तो पब्लिक के घर है , पर गौरमेंट का डेली त्योंहार है
ऐसे में वो युद्ध छेड़ कर , क्यों उजाड़े खुद की दुकानदारी ???
इसीलिये - बात चीत रहेगी जारी , बात चीत रहेगी जारी .
सपूत हिंद के बहुत जियाले , जो घूरे उसकी आँख निकालें ,
राम कृष्ण के हम वंशज हैं , जिससे चाहें पानी भरवालें ,
जब तक धर्म के साथ रहे हम , राज किया विश्व पर हमने ,
कुछ पापी की बातों में आ कर , भूले स्वधर्म तो सब से हारे ,
जाग गए अब, हुए सावधान हम , ना चलने देंगे इनकी मक्कारी ,
पर तब तक - बात चीत रहेगी जारी , बात चीत रहेगी जारी .
रचयिता : धर्मेश शर्मा , भारत
मुंबई दिनांक २०.०९.२००९
संशोधन , संपादन : आनंद जी.शर्मा
पटक पटक के हमको मारे , फाड़ दिए हैं कपड़े सारे ,
माना की वो नीच बहुत है , माना वो है अत्याचारी ,
लेकिन - बात चीत रहेगी जारी , बात चीत रहेगी जारी .
जब भी उसके मन में आये , जबरन वो घर में घुस जाए ,
बहू बेटियों की इज्ज़त लूटे, बच्चों को भी मार के जाए ,
कोई न मौका उसने छोड़ा , चांस मिला तब लाज उतारी ,
लेकिन - बात चीत रहेगी जारी , बात चीत रहेगी जारी .
हम में से ही हैं कुछ पापी , जिनका लगता है वो बाप ,
आग लगाते हुए वे जल मरें , तो भी उसपर हमें ही पश्चाताप ?
दुश्मन का बुरा सोचा कैसे ??? हिम्मत कैसे हुई तुम्हारी ???
अब तो - बात चीत रहेगी जारी , बात चीत रहेगी जारी .
बम यहाँ पे फोड़ा , वहां पे फोड़ा , किसी जगह को नहीं है छोड़ा ,
मरे हजारों, अनाथ लाखों में , लेकिन गौरमेंट को लगता थोडा ,
मर मरा गए तो फर्क पड़ा क्या ? आखिर है ही क्या औकात तुम्हारी ???
इसलिए - बात चीत रहेगी जारी , बात चीत रहेगी जारी .
लानत है ऐसे सालों पर , जूते खाते रहते हैं दोनों गालों पर ,
कुछ देर बाद , कुछ देर बाद , रहे टालते बासठ सालों भर ,
गौरमेंट करती रहती है नाटक , जग में कोई नहीं हिमायत ,
पर कौन सुने ऐसे हाथी की , जो कोकरोच की करे शिकायत ???
इलाज पता बच्चे बच्चे को , पर बहुत बड़ी मजबूरी है सरकारी ,
इसीलिये - बात चीत रहेगी जारी , बात चीत रहेगी जारी .
वैसे हैं बहुत होशियार हम , कर भी रक्खी सेना तैयार है ,
सेना गयी मोर्चे पर तो - इन भ्रष्ट नेताओं का कौन चौकीदार है ???
बंदूकों की बना के सब्जी , बमों का डालना अचार है ,
मातम तो पब्लिक के घर है , पर गौरमेंट का डेली त्योंहार है
ऐसे में वो युद्ध छेड़ कर , क्यों उजाड़े खुद की दुकानदारी ???
इसीलिये - बात चीत रहेगी जारी , बात चीत रहेगी जारी .
सपूत हिंद के बहुत जियाले , जो घूरे उसकी आँख निकालें ,
राम कृष्ण के हम वंशज हैं , जिससे चाहें पानी भरवालें ,
जब तक धर्म के साथ रहे हम , राज किया विश्व पर हमने ,
कुछ पापी की बातों में आ कर , भूले स्वधर्म तो सब से हारे ,
जाग गए अब, हुए सावधान हम , ना चलने देंगे इनकी मक्कारी ,
पर तब तक - बात चीत रहेगी जारी , बात चीत रहेगी जारी .
रचयिता : धर्मेश शर्मा , भारत
मुंबई दिनांक २०.०९.२००९
संशोधन , संपादन : आनंद जी.शर्मा
रविवार, 14 फ़रवरी 2010
भारत से गद्दारी कर पाकिस्तान का गुणगान करने बाले गद्दारों के नाम खुला संदेश
भारत से गद्दारी कर पाकिस्तान का गुणगान करने बाले गद्दारों के नाम खुला संदेश
13 फरबरी 2010 को महाराष्ट्र के पुणे शहर में मुसलिम आतंकवादियों द्वार किए गए जिहादी हमले में 9 लोग मारे गए व लगभग पचास लोग घायल हुए । पाकिस्तानियों के लिए लड़ने बाले व देशभक्तों को गाली गलौच करने बाले शाहरूख व उस जैसे सब लोगों से हम सिर्फ इतना ही कहेंगे कि समझदार लोग जिस पत्र में खाते हैं उस पत्र में छिद्र नहीं करते । हां अगर इन लोगों को पाकिस्तानियों से इतना ही लगाब है तो ये लोग पाकिस्तान क्यों नहीं चले जाते क्योंकि 1947 में पाकिस्तान का निर्माण ही इन जैसे गद्दारों के लिए किया गया था । पाकिस्तान उन लोगों के लिए बनाया गया था जो वन्देमातरम् का गान अमनी शान के खिलाफ समझते हैं गद्दारी और नमक हरामी जिनकी रग-रग में है । जो खाते–रहते भारत में हैं गुणगान पाकिस्तान और मुसलिम आतंकवादियों का करते हैं । कहां है इन गद्दारों की मां एंटोनियो माईनो मारियो ,उसका लाल और इन दोनों का गुलाम दिगविजय सिंह कोई जाकर बताए उसे कि पुलिस के लोग अपनी जान की बाजी लगाकर मुसलिम आतंकवादियों को पकड़ने बाले हैं । कहीं ये आतंकवादी इन पुलिसबालों के हाथ न आ जायें इसके लिए ये गद्दार जल्दी से इन आतंकवादियों के घर जाकर बैठ जाए और कह दे ये निर्देष हैं एंटोनियों के लाल हैं इन्हें कोई न पकड़े । पकड़ना है तो जाकर देशभक्त संगठनों के कारकर्ताओं को पकड़ें जो हर वक्त देशभक्ति का राग अलाप कर इन गद्दारों के बने बनाए खेल को विगाड़ रहे हैं । पर इस दिगविजयसिंह को यह भी बता देना कि इन आतंकवादियों का अगला निशाना इटली के निवासी हैं कहीं ये पहुंचते –पहुंचते इन सब गद्दारों की मां एंटोनियो तक न पहुंच जायें। फिर क्या करोगे।
जागो मेरे प्यारे सर्वधर्मसम्भाव में विस्वास रखने बाले हिन्दू भाईयो ,इस देश को अपनी मां मानकर वन्देमातरम् का गान करने बाले देशभक्त मुसलिम भाईयो बचा लो अपने तिल- तिल मिटते हिन्दू राष्ट्र भारत को क्योंकि जिस दिन ये पाकिस्तान हो जाएगा तो न हिन्दू बचेंगे न शांतिप्रिय देशभक्त मुसलिम भाई ही बचेंगे । अगर कोई बचेगा तो सिर्फ मुसलिम आतंकवादी व उनके गुलाम।
हम देशभक्त हिन्दूमुसलिम भाईयों से यही कहेंगे कि पहचानो उन मुसलिम गद्दारों को जो ये आतंकबाद फैला रहे हैं व उन मुसलमानों को जो इन आतंकवादियों को सरण दे रहे हैं इन्हें निर्दोश बताकर इस मुसलिम आतंकवाद को आगे बढ़ा रहे हैं पहचानों उन हिन्दूओं को जो हिन्दू होकर हिन्दूओं से गद्दारी कर न मुसलिम आतंकवादियों का साथ देकर आपके बच्चों को मौत की ओर धकेल रहे हैं ।
देशभक्तों के शव्र का इमत्हान न लो गद्दारो
अगर ये सवर टूट गया
तो न कोई गद्दार बचेगा न कोई इन गद्दारों का मददगार
समझो हम समझा रहे हैं जो न समझे तो मिट जाओगे
खुद तो मिटोगे पर हिन्दूओं की बर्षों से कमाई सहनशीलता को भी मिटा डालोगे
13 फरबरी 2010 को महाराष्ट्र के पुणे शहर में मुसलिम आतंकवादियों द्वार किए गए जिहादी हमले में 9 लोग मारे गए व लगभग पचास लोग घायल हुए । पाकिस्तानियों के लिए लड़ने बाले व देशभक्तों को गाली गलौच करने बाले शाहरूख व उस जैसे सब लोगों से हम सिर्फ इतना ही कहेंगे कि समझदार लोग जिस पत्र में खाते हैं उस पत्र में छिद्र नहीं करते । हां अगर इन लोगों को पाकिस्तानियों से इतना ही लगाब है तो ये लोग पाकिस्तान क्यों नहीं चले जाते क्योंकि 1947 में पाकिस्तान का निर्माण ही इन जैसे गद्दारों के लिए किया गया था । पाकिस्तान उन लोगों के लिए बनाया गया था जो वन्देमातरम् का गान अमनी शान के खिलाफ समझते हैं गद्दारी और नमक हरामी जिनकी रग-रग में है । जो खाते–रहते भारत में हैं गुणगान पाकिस्तान और मुसलिम आतंकवादियों का करते हैं । कहां है इन गद्दारों की मां एंटोनियो माईनो मारियो ,उसका लाल और इन दोनों का गुलाम दिगविजय सिंह कोई जाकर बताए उसे कि पुलिस के लोग अपनी जान की बाजी लगाकर मुसलिम आतंकवादियों को पकड़ने बाले हैं । कहीं ये आतंकवादी इन पुलिसबालों के हाथ न आ जायें इसके लिए ये गद्दार जल्दी से इन आतंकवादियों के घर जाकर बैठ जाए और कह दे ये निर्देष हैं एंटोनियों के लाल हैं इन्हें कोई न पकड़े । पकड़ना है तो जाकर देशभक्त संगठनों के कारकर्ताओं को पकड़ें जो हर वक्त देशभक्ति का राग अलाप कर इन गद्दारों के बने बनाए खेल को विगाड़ रहे हैं । पर इस दिगविजयसिंह को यह भी बता देना कि इन आतंकवादियों का अगला निशाना इटली के निवासी हैं कहीं ये पहुंचते –पहुंचते इन सब गद्दारों की मां एंटोनियो तक न पहुंच जायें। फिर क्या करोगे।
जागो मेरे प्यारे सर्वधर्मसम्भाव में विस्वास रखने बाले हिन्दू भाईयो ,इस देश को अपनी मां मानकर वन्देमातरम् का गान करने बाले देशभक्त मुसलिम भाईयो बचा लो अपने तिल- तिल मिटते हिन्दू राष्ट्र भारत को क्योंकि जिस दिन ये पाकिस्तान हो जाएगा तो न हिन्दू बचेंगे न शांतिप्रिय देशभक्त मुसलिम भाई ही बचेंगे । अगर कोई बचेगा तो सिर्फ मुसलिम आतंकवादी व उनके गुलाम।
हम देशभक्त हिन्दूमुसलिम भाईयों से यही कहेंगे कि पहचानो उन मुसलिम गद्दारों को जो ये आतंकबाद फैला रहे हैं व उन मुसलमानों को जो इन आतंकवादियों को सरण दे रहे हैं इन्हें निर्दोश बताकर इस मुसलिम आतंकवाद को आगे बढ़ा रहे हैं पहचानों उन हिन्दूओं को जो हिन्दू होकर हिन्दूओं से गद्दारी कर न मुसलिम आतंकवादियों का साथ देकर आपके बच्चों को मौत की ओर धकेल रहे हैं ।
देशभक्तों के शव्र का इमत्हान न लो गद्दारो
अगर ये सवर टूट गया
तो न कोई गद्दार बचेगा न कोई इन गद्दारों का मददगार
समझो हम समझा रहे हैं जो न समझे तो मिट जाओगे
खुद तो मिटोगे पर हिन्दूओं की बर्षों से कमाई सहनशीलता को भी मिटा डालोगे
शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2010
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय

ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
बुधवार, 10 फ़रवरी 2010
देशभक्त कांग्रेसियों के नाम एक खुला पत्र
देशभक्त कांग्रेसियों के नाम एक खुला पत्र
आज तक हमने जो देखा-सुना-समझा वो लिखा।हमने कोसिस की सैकुलर गिरोह के हिन्दूविरोधी-देशविरोधी कुकर्मों को देश के सामने रखने की । इन कुकर्मों को देख कर हमारे अन्दर जो आक्रोश पैदा हुआ उसके परिणामस्वारूप हमने एक पुस्तक नकली धर्मनिर्पेक्षता लिख डाली जो अपने ब्लाग http://samrastamunch.spaces.live.com पर उपलब्ध है । सुना था मन की बात लिखने के बाद मन हल्का हो जाता है और मनुष्य हिंसक होने से बच जाता है एसा हुआ भी।परन्तु जैसे ही हमने अपना ध्यान किसी और रचनात्मक विषय पर लगाने की कोशिश की तब तक सैकुलर गिरोह ने कोई और बड़ा हिन्दूविरोधी देशविरोधी कुकर्म कर दिया ।इस सैकुसर गिरोह का सबसे बड़ा घटक अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी है।आज हमने फैसला किया है कि इसी पीर्टी के अन्दर काम कर रहे देशभक्त कांग्रेसियों से सीधी बात की जाए ।
मेरे प्यारे देशभक्त कांग्रेसी भाईयो हम समझते हैं कि कांग्रेस की सथापना से लेकर आज तक कांग्रेस में जहां एक तरफ नेताजी सुभाषचन्द्र बोस,शहीद भगत सिंह ,वीर साबरकर जैसे घोर राष्ट्रवादी रहे हैं तो दूसरी तरफ गद्दारों या यूं कहें देशविरोधियों-हिन्दूविरोधीयों की भी कभी कमी नहीं रही है। हम अपना ध्यान केंद्रित करेंगे सिर्फ 1947 के बाद की घटनाओं पर।
15 अगस्त 1947 को धर्म(सांप्रदाय) के आधार पर भारत का विभाजन होने के बाद जब पाकिस्तान और बंगलादेश को हिन्दूविहीन कर दिया गया तो भारत में मुसलमानों को रखने का क्या औचित्या था उसवक्त कांग्रेस के अनेक देशभक्त लोगों ने बार-बार मुसलमानों को देश में न रहने देने की बकालत की थी फिर भी गद्दार कांग्रेसियों ने मुसलमानों को भारत में रखने का फैसला क्यों किया?
आज देश पर बार-बार हो रहे मुसलिम आतंकवादी हमलों के बाद आप समझ सकते हैं कि कौन सही था कौन गलत ?
अगर मुसलमानों को भारत में इस आधार पर रखा गया कि मुसलमान देशभक्त हैं और सर्वधर्मसम्भाव में विस्वास रखते हैं तो फिर वन्देमातरम् की चार पंक्तियों को छोड़ कर वाकी पंक्तियों को क्यों काट दिया गया?
जब भारत को हिन्दू राष्ट्र नहीं घोषित किया गया तो फिर देश में अल्पसंख्यकबाद के नाम पर धर्म के आधार पर कानून क्यों बनाए गए?
जब सारा देश एक है तो फिर मुसलिमबहुल कश्मीरघाटी की बजह से जम्मु-कश्मीर में अलग संविधान,अलग कानून,धारा 370 क्यों ?
1955 में जब हिन्दू पर्सनल ला समाप्त कर हिन्दूओं को देश के संविधान के अनुसार जीवन यापन करने के लिए कहा गया तो फिर मुसलिम पर्नसनल ला को समाप्त कर क्यों मुसलमानों को संविधान के दायरे में नहीं लाया गया?
समाजिक बुराईयों के नाम पर हिन्दूओं की अनेक मान्याताओं पर सरकार ने प्रतिबंध लगाया तो फिर बुर्के और आतंकलादियों की नर्सरी मदर्सों पर प्रतिबंध क्यों नहीं?
जब संविधान में धर्मनिर्पेक्ष शब्द नहीं था तो 1977 में इसे संविधान में क्यों जोड़ा गया?
जब संविधान में समानता का अधिकार है तो फिर नियम जाति,क्षेत्र,सांप्रदाय,भाषा के आधार पर क्यों?
जब केरल में मुसलीम लीग को सरकार बनाने का अधिकार प्राप्त है तो फिर पंजाब में सिखों की सरकार न बनने देने के प्रयास कर क्यों भिंडराबाले को पाला गया?
1984 में जब साहवानो केश में माननीय सर्वोच न्यायलया ने मुसलिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए कानून पारित किया तो उसे त्तकालीन कांग्रेस सरकार ने क्यों शरीयत का हबाला देकर रद्द कर दिया ?
1986 में जब खुद स्वर्गीय राजीब गांधी जी ने पूजा अर्चना कर अयोध्या में मन्दिर के कार्यों को आगे बढ़ाया तो फिर बाद में उस मन्दिर को क्यों मस्जिद कहकर पुकारा गया ?
कांग्रेस बार-बार गुजरात का मुद्दा उछाल कर हिन्दूओं को घेरने की बात करती है जहां मुसलांनों द्वारा लगाई गई आग के परिणामस्वारूप 2000 से कम मुसलमानों का कत्ल हुआ तो फिर कशमीर घाटी पर चुप्पी क्यों जहां 60000 हिन्दुओं को कत्ल कर पांच लाख के घार बार उजाड़ दिए गए ?
2004-2009 के वीच में
क्यों मुसलिम जिहादी आतंकवादियों को बचाने के लिए पोटा हटाकर न्या कानून नहीं बनाया गया?
क्यों प्रधानमन्त्री ने मुसलिम बहुल जिलों के विकास की बात कर एक तो मुसलमानों को अधिक से अधिक बच्चे पैदा करने के लिए उकसाया दूसरा विकास को हिन्दू-मुसलिम के नाम पर बांटने का कुकर्म किया?
क्यों सेना में मुसलमानों की गिनती कर सुरक्षबलों में सिर्फ मुसलमानों की भर्ती कर सुरक्षाबलों को धर्म के आधार पर बांटन का प्रयास किया?
सेना के सैनिकों को बहनों द्वारा भेजी राखी को पहनने पर आपती क्यों ?क्या खतना करवा चुके लोगों को सेना में भरती न करने का साहस है? क्योंकि दोनों ही धार्मिक चिन्ह हैं।
बच्चों की छात्रवृतियों का सांप्रदायिक आधार पर बंटबारा क्यों?
क्यों भगवान राम के अस्तित्व को नकारने का दुस्साहस किया गया?
क्यों बाबा अमरनाथ जमीन के बहाने हिन्दू को नीचा दिखने का छडयन्त्र रचा गया?
क्यों बजट को हिन्दू-मुसलिम के नाम पर बांटा गया ऐसा देश के विभाजन से पहले किया जाता था जिसका परिणाम देश के विभाजन के रूप में सामने आया
जब संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण का निषेध करता तो फिर क्यों पहले आंध्रप्रदेश में फिर देश में मुसलमानों को आरक्षण देने का बार-बार षडयन्त्र रचा जा रहा है?
जब कांग्रेस सरकार सिरोमणी गुरूद्वारा प्रबन्धक कमेटी,हज कमेटी व वक्फ बोर्ड जैसी सांप्रदाय आधारित संस्थाओं को लगातार आगे बढ़ा रही है फिर हिन्दु संगठनों को बार-बार बदनाम करने के षडयन्त्र क्यों?
जब मुसलीमलीग,देववन्द जैसे देशविरोधी संगठनों पर सरकार लगातार मेहरबान है तो फिर देशभक्त संगठनों को अपमानित करने के बार-बार प्रयास क्यों?
जब हिन्दू साधु सन्तों सैनिकों को अपमानित कर जोर जबरदस्ती से मकोका लगाकर(जिसे माननीय न्यायालया ने गलत करार देकर हटा दिया) जेलों में विना किसी अपराध के जेलों में बंद कर दिया गया तो फिर मुसलिम जिहादी आजंकबादी कातिलों के प्रति हमदर्दी व नर्मी क्यों ?
पंजाब में भिंडराबाले को पालकर देश को लहुलूहान कर दने के बाबजूद भिंडराबाले की तर्ज पर राज ठाकरे को बढ़ाबा क्यों?
सरकार का काम होता है लोगों को सुरक्षा देना फिर महाराष्ट्र के मुख्यमन्त्री द्वारा क्षेत्रबाद का जैहर फैलाकर आग लगाने का काम क्यों ?
जिन सुरक्षाबलों के सैनिकों ने पार्लियामैंट पर हमले के दौरान अपनी जान की बाजी लगाकर इन कांग्रेसी नेताओं की जान बचाई उन्हीं का अपमान कर मुसलिम जिहादी आतंकवादी की फांसी पर इतनी देर क्यों?
हज यात्रा के लिए प्रति मुसलमान 60000 रूपए की सहायता और हिन्दुओं पर कुम्भ मेले में जाने के लिए अतिरिकत जजिया कर क्यों ?
बटाला हुऊस इन्काउंटर के दौरान अपनी जान की बाजी लगाकर लोगों के जान-माल की रक्षा करने बाले शहीद मोहन चन्द शर्मा का अपमान कर मुसलिम आतंकवादी सहजाद को बचाने के लिए कांग्रेसियों द्वारा सुरक्षाबलों पर हमला क्यों ?
जरा सोचो कि कांग्रेस वही सब नहीं कर रही है जो औरंगजेब व बाबर जैसे मुसलिम आतंकवादी राक्षसों ने किया था?
मेरे प्यारे देशभक्त कांग्रेसियो जरा सोचो सांप्रदायिक आधार पर सबकुछ बांट दने के बाद क्या देश बचेगा ?
अगर देश नहीं बच पायेगा तो फिर क्या आप बचोगे ?
क्या कश्मीर घाटी,पाकिस्तान बंगलादेस अपगानीस्थान में गद्दार-मुसलिमप्रस्त कांग्रेसियों को बख्स दिया गया ?
नहीं न
तो फिर ये मुसलिम आतंकवादी देशभक्त कांग्रेसियों को बख्स देंगे ऐसा आप कैसे सोच सकते हैं ?
हम समझते हैं कि देश को बचाने के लिए कांगेस को गद्दारों से मुक्त करवा देशभक्तों के हाथ में देना जरूरी है क्या आप ये काम कर पांयेंगे ?
अगर हां तो उठाओ आबाज सब देशभक्त आपको अपने साथ खड़े मिलेंगे...
जागरूक लोगों को भी सोचना चाहिए कि इतने सारे फूट डालो और राज करो के कदम कांग्रेस द्वारा उठाये जाने के बाद भी क्यों मिडीया इनके विरूद्ध आबज नहीं उठाता ?
प्रतिक्रिया जरूर दीजिएगा बरना हम समझेंगे कि ...
आज तक हमने जो देखा-सुना-समझा वो लिखा।हमने कोसिस की सैकुलर गिरोह के हिन्दूविरोधी-देशविरोधी कुकर्मों को देश के सामने रखने की । इन कुकर्मों को देख कर हमारे अन्दर जो आक्रोश पैदा हुआ उसके परिणामस्वारूप हमने एक पुस्तक नकली धर्मनिर्पेक्षता लिख डाली जो अपने ब्लाग http://samrastamunch.spaces.live.com पर उपलब्ध है । सुना था मन की बात लिखने के बाद मन हल्का हो जाता है और मनुष्य हिंसक होने से बच जाता है एसा हुआ भी।परन्तु जैसे ही हमने अपना ध्यान किसी और रचनात्मक विषय पर लगाने की कोशिश की तब तक सैकुलर गिरोह ने कोई और बड़ा हिन्दूविरोधी देशविरोधी कुकर्म कर दिया ।इस सैकुसर गिरोह का सबसे बड़ा घटक अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी है।आज हमने फैसला किया है कि इसी पीर्टी के अन्दर काम कर रहे देशभक्त कांग्रेसियों से सीधी बात की जाए ।
मेरे प्यारे देशभक्त कांग्रेसी भाईयो हम समझते हैं कि कांग्रेस की सथापना से लेकर आज तक कांग्रेस में जहां एक तरफ नेताजी सुभाषचन्द्र बोस,शहीद भगत सिंह ,वीर साबरकर जैसे घोर राष्ट्रवादी रहे हैं तो दूसरी तरफ गद्दारों या यूं कहें देशविरोधियों-हिन्दूविरोधीयों की भी कभी कमी नहीं रही है। हम अपना ध्यान केंद्रित करेंगे सिर्फ 1947 के बाद की घटनाओं पर।
15 अगस्त 1947 को धर्म(सांप्रदाय) के आधार पर भारत का विभाजन होने के बाद जब पाकिस्तान और बंगलादेश को हिन्दूविहीन कर दिया गया तो भारत में मुसलमानों को रखने का क्या औचित्या था उसवक्त कांग्रेस के अनेक देशभक्त लोगों ने बार-बार मुसलमानों को देश में न रहने देने की बकालत की थी फिर भी गद्दार कांग्रेसियों ने मुसलमानों को भारत में रखने का फैसला क्यों किया?
आज देश पर बार-बार हो रहे मुसलिम आतंकवादी हमलों के बाद आप समझ सकते हैं कि कौन सही था कौन गलत ?
अगर मुसलमानों को भारत में इस आधार पर रखा गया कि मुसलमान देशभक्त हैं और सर्वधर्मसम्भाव में विस्वास रखते हैं तो फिर वन्देमातरम् की चार पंक्तियों को छोड़ कर वाकी पंक्तियों को क्यों काट दिया गया?
जब भारत को हिन्दू राष्ट्र नहीं घोषित किया गया तो फिर देश में अल्पसंख्यकबाद के नाम पर धर्म के आधार पर कानून क्यों बनाए गए?
जब सारा देश एक है तो फिर मुसलिमबहुल कश्मीरघाटी की बजह से जम्मु-कश्मीर में अलग संविधान,अलग कानून,धारा 370 क्यों ?
1955 में जब हिन्दू पर्सनल ला समाप्त कर हिन्दूओं को देश के संविधान के अनुसार जीवन यापन करने के लिए कहा गया तो फिर मुसलिम पर्नसनल ला को समाप्त कर क्यों मुसलमानों को संविधान के दायरे में नहीं लाया गया?
समाजिक बुराईयों के नाम पर हिन्दूओं की अनेक मान्याताओं पर सरकार ने प्रतिबंध लगाया तो फिर बुर्के और आतंकलादियों की नर्सरी मदर्सों पर प्रतिबंध क्यों नहीं?
जब संविधान में धर्मनिर्पेक्ष शब्द नहीं था तो 1977 में इसे संविधान में क्यों जोड़ा गया?
जब संविधान में समानता का अधिकार है तो फिर नियम जाति,क्षेत्र,सांप्रदाय,भाषा के आधार पर क्यों?
जब केरल में मुसलीम लीग को सरकार बनाने का अधिकार प्राप्त है तो फिर पंजाब में सिखों की सरकार न बनने देने के प्रयास कर क्यों भिंडराबाले को पाला गया?
1984 में जब साहवानो केश में माननीय सर्वोच न्यायलया ने मुसलिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए कानून पारित किया तो उसे त्तकालीन कांग्रेस सरकार ने क्यों शरीयत का हबाला देकर रद्द कर दिया ?
1986 में जब खुद स्वर्गीय राजीब गांधी जी ने पूजा अर्चना कर अयोध्या में मन्दिर के कार्यों को आगे बढ़ाया तो फिर बाद में उस मन्दिर को क्यों मस्जिद कहकर पुकारा गया ?
कांग्रेस बार-बार गुजरात का मुद्दा उछाल कर हिन्दूओं को घेरने की बात करती है जहां मुसलांनों द्वारा लगाई गई आग के परिणामस्वारूप 2000 से कम मुसलमानों का कत्ल हुआ तो फिर कशमीर घाटी पर चुप्पी क्यों जहां 60000 हिन्दुओं को कत्ल कर पांच लाख के घार बार उजाड़ दिए गए ?
2004-2009 के वीच में
क्यों मुसलिम जिहादी आतंकवादियों को बचाने के लिए पोटा हटाकर न्या कानून नहीं बनाया गया?
क्यों प्रधानमन्त्री ने मुसलिम बहुल जिलों के विकास की बात कर एक तो मुसलमानों को अधिक से अधिक बच्चे पैदा करने के लिए उकसाया दूसरा विकास को हिन्दू-मुसलिम के नाम पर बांटने का कुकर्म किया?
क्यों सेना में मुसलमानों की गिनती कर सुरक्षबलों में सिर्फ मुसलमानों की भर्ती कर सुरक्षाबलों को धर्म के आधार पर बांटन का प्रयास किया?
सेना के सैनिकों को बहनों द्वारा भेजी राखी को पहनने पर आपती क्यों ?क्या खतना करवा चुके लोगों को सेना में भरती न करने का साहस है? क्योंकि दोनों ही धार्मिक चिन्ह हैं।
बच्चों की छात्रवृतियों का सांप्रदायिक आधार पर बंटबारा क्यों?
क्यों भगवान राम के अस्तित्व को नकारने का दुस्साहस किया गया?
क्यों बाबा अमरनाथ जमीन के बहाने हिन्दू को नीचा दिखने का छडयन्त्र रचा गया?
क्यों बजट को हिन्दू-मुसलिम के नाम पर बांटा गया ऐसा देश के विभाजन से पहले किया जाता था जिसका परिणाम देश के विभाजन के रूप में सामने आया
जब संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण का निषेध करता तो फिर क्यों पहले आंध्रप्रदेश में फिर देश में मुसलमानों को आरक्षण देने का बार-बार षडयन्त्र रचा जा रहा है?
जब कांग्रेस सरकार सिरोमणी गुरूद्वारा प्रबन्धक कमेटी,हज कमेटी व वक्फ बोर्ड जैसी सांप्रदाय आधारित संस्थाओं को लगातार आगे बढ़ा रही है फिर हिन्दु संगठनों को बार-बार बदनाम करने के षडयन्त्र क्यों?
जब मुसलीमलीग,देववन्द जैसे देशविरोधी संगठनों पर सरकार लगातार मेहरबान है तो फिर देशभक्त संगठनों को अपमानित करने के बार-बार प्रयास क्यों?
जब हिन्दू साधु सन्तों सैनिकों को अपमानित कर जोर जबरदस्ती से मकोका लगाकर(जिसे माननीय न्यायालया ने गलत करार देकर हटा दिया) जेलों में विना किसी अपराध के जेलों में बंद कर दिया गया तो फिर मुसलिम जिहादी आजंकबादी कातिलों के प्रति हमदर्दी व नर्मी क्यों ?
पंजाब में भिंडराबाले को पालकर देश को लहुलूहान कर दने के बाबजूद भिंडराबाले की तर्ज पर राज ठाकरे को बढ़ाबा क्यों?
सरकार का काम होता है लोगों को सुरक्षा देना फिर महाराष्ट्र के मुख्यमन्त्री द्वारा क्षेत्रबाद का जैहर फैलाकर आग लगाने का काम क्यों ?
जिन सुरक्षाबलों के सैनिकों ने पार्लियामैंट पर हमले के दौरान अपनी जान की बाजी लगाकर इन कांग्रेसी नेताओं की जान बचाई उन्हीं का अपमान कर मुसलिम जिहादी आतंकवादी की फांसी पर इतनी देर क्यों?
हज यात्रा के लिए प्रति मुसलमान 60000 रूपए की सहायता और हिन्दुओं पर कुम्भ मेले में जाने के लिए अतिरिकत जजिया कर क्यों ?
बटाला हुऊस इन्काउंटर के दौरान अपनी जान की बाजी लगाकर लोगों के जान-माल की रक्षा करने बाले शहीद मोहन चन्द शर्मा का अपमान कर मुसलिम आतंकवादी सहजाद को बचाने के लिए कांग्रेसियों द्वारा सुरक्षाबलों पर हमला क्यों ?
जरा सोचो कि कांग्रेस वही सब नहीं कर रही है जो औरंगजेब व बाबर जैसे मुसलिम आतंकवादी राक्षसों ने किया था?
मेरे प्यारे देशभक्त कांग्रेसियो जरा सोचो सांप्रदायिक आधार पर सबकुछ बांट दने के बाद क्या देश बचेगा ?
अगर देश नहीं बच पायेगा तो फिर क्या आप बचोगे ?
क्या कश्मीर घाटी,पाकिस्तान बंगलादेस अपगानीस्थान में गद्दार-मुसलिमप्रस्त कांग्रेसियों को बख्स दिया गया ?
नहीं न
तो फिर ये मुसलिम आतंकवादी देशभक्त कांग्रेसियों को बख्स देंगे ऐसा आप कैसे सोच सकते हैं ?
हम समझते हैं कि देश को बचाने के लिए कांगेस को गद्दारों से मुक्त करवा देशभक्तों के हाथ में देना जरूरी है क्या आप ये काम कर पांयेंगे ?
अगर हां तो उठाओ आबाज सब देशभक्त आपको अपने साथ खड़े मिलेंगे...
जागरूक लोगों को भी सोचना चाहिए कि इतने सारे फूट डालो और राज करो के कदम कांग्रेस द्वारा उठाये जाने के बाद भी क्यों मिडीया इनके विरूद्ध आबज नहीं उठाता ?
प्रतिक्रिया जरूर दीजिएगा बरना हम समझेंगे कि ...
मंगलवार, 2 फ़रवरी 2010
कांग्रेस की फूट डालो और राज करो की निती न जाने क्या-क्या गुल खिलाएगी ?
कांग्रेस की फूट डालो और राज करो की निती न जाने क्या-क्या गुल खिलाएगी ?
15 अगस्त 1947 को आखंड भारत का विभाजन कांग्रेस के माध्यम से अंग्रेजों की फूट डालो और राज करो की निती का परिणाम था । सबको उमीद थी कि कांग्रेस इससे सबक लेकर वर्तमान भारत में एसा कोई काम नहीं करेगी जो भारतीयों को जाति, क्षेत्र, सांप्रदाय(धर्म) ,भाषा के आधार पर बांटे । आज 2010 में अगर हम पिछले 62 वर्ष में से 10 वर्ष निकाल दें तो वाकी सारा समय कांग्रेस का ही सासन रहा । इस समय में कांग्रेस ने जितने भी नियम बनाय उन सब अगर तार्किक आधार पर विसलेशण किया जाए तो हम पांयेगे कि लगभग हर कानून जाति, क्षेत्र, सांप्रदाय(धर्म) ,भाषा के आधार पर बनाया गया । ढूंढने पर हो सकता है कि ऐसे कुछ कानून मिलें जो जो गलती से भारतीयों के लिए बनाए गए हों पर मोटे जौर पर लगभग हर कानून का आधार जाति, क्षेत्र, सांप्रदाय(धर्म) और भाषा ही है। कानून तो कानून राज्यों तक का निर्माण प्रसासनिक आधार पर करने के बजाए ऐसे ही विभाजनकारी आधारों पर किया गया गया । यही बजह है कि देश में आज जितने भी राजनितीक दल हैं उनके निर्माण का आधार भी कहीं न कहीं जाति, क्षेत्र, सांप्रदाय(धर्म) ,भाषा ही है। कांग्रेस की इसी विभाजनकारी फूट डालो और राज करो की निती के परिणामस्वरूप ही भारत में मिडीया भी अपने प्रोग्राम जाति, क्षेत्र, सांप्रदाय(धर्म) ,भाषा के आधार पर ही बनाता है । कांग्रेस की इसी फूट डालो और राज करो की निती के परिणामस्वरूप ही भारत विरोधी विदेशी ताकतों ने देश में मानवाधिकार संगठनों व मिडीया के नाम पर दर्जनों भारत-विरोधी गिरोह त्यार कर डाले । इन्हीं गिरोहों में छुपे गद्दार समय-समय पर छोटी सी बात को इतनी तूल दे देते हैं कि लगता है जैसे गृहयुद्ध की स्थिति बन गई हो । ये गद्दार भारत विभाजन की बातें ऐसे करते हैं मानों शालाद में गाजर मूली खा रहे हों ।
महाराष्ट्र में मराठी गैर मराठी के नाम पर जो कुछ किया जा रहा है उसका आधार कहीं न कहीं इस राज्या का भाषा के आधार पर निर्माण है। राज ठाकरे ने उतर भारतीयों के विरूध जब जहर उगलना शुरू किया तो हमने अपने ब्लाग पर लिखा था कि जिस तरह कांग्रेस ने पंजाब में अकालियों को हटाकर अपनी सरकार बनबाने के लिए भिंडरावाले को पाल-पोस कर आगे बढांया था ठीक उसी तरह महाराष्ट्र में शिवसेना को कमजोर करने के लिए कांग्रेस राज ठाकरे को पाल-पोस कर आगे बढ़ा रही है । पंजाब में कांग्रेस द्वारा लगाइ गई आग की कीमत हजारों हिन्दू-सिखों को अपने प्राण देकर चुकानी पड़ी थी । जिसकी चिंगारीयां आज तक यहां वहां देखने को मिलती हैं ।जिन हिन्दू-सिखों का खून का रिस्ता है उनमें से एक को तोड़ कर इस कांग्रेस की इस विभाजनकारी निती ने अलपसंख्यक बना डाला । सायद भारतीयों को तोड़ने की हसरत इस कांग्रेस की अभी तक पूरी नहीं हुई थी इसीलिए महाराष्ट्र में ठण्डी पड़ चुकी इस चिंगारी को महाराष्ट्र के मुख्यमन्त्री ने ड्राईवर के लाइसैंस के साथ मराठी भाषा जोड़ कर शुलगाया । बस फिर क्या था कांग्रेस का दलाल राज ठाकरे तो पहले से त्यार बैठा था उसने मौका हाथों हाथ लिया । बस फिर क्या था बोट-बैंक के चक्कर में शिवसेना भी कूद पड़ी इस विभाजनकारी राजनिती में । हम तो कहते हैं कि उतर भारतीयों के विरूद्ध आग चाहे राजठाकरे उगले या शिवसेना। दोनों पर कार्यवाही करने की जिम्मेवारी सरकार की है लेकिन जब सरकार का मुखिया ही जहर उगलने लगे फिर कार्यावाही कौन करे ?
इन हालात में संघ ने उतर भारतीयों की रक्षा की जिमेवारी उठाकर अपनी विचारधारा के अनुरूप एक नेक कदम उठाया है। संघ को इस बात के प्रति सचेत रहने की जरूरत है कि कहीं कांग्रेस सरकार उसको उलझाने के लिए कोई और डरटी गेम न खेले । संघ को शिवसेना से भी बात कर उसे उसकी गलती का एहसास करवाना चाहिए।
हम तो शिवसेना से यही कहेंगे कि या तो शिवसेना भगवा चोला उतारकर खुद को देशभक्त कहना छोड़ दे या फिर अपने आप को फूट डालो और राज करो की कांग्रेस की निति से दूर कर ले । ये दोनों चीजें साथ-साथ नहीं चल सकतीं । जो देशभक्त भगवा का समर्थक वोटर है वो कभी भी क्षेत्रवाद या भाषावाद की बात करने बालों को वोट नहीं डाल सकता । शिव सेना को समझना चाहिए कि हमलोगों ने आज तक अगर शिव-सेना का समर्थन किया तो सिर्फ इसलिए कि जिहादी आतंकवाद के विरूद्ध महाराष्ट्र मे जो भी आबाजें उठीं उनमें से सबसे उंची आबाज शिवसेना की थी और आज भी है । लेकिन अगर शिवसेना देशभक्ति की जगह क्षेत्रवाद या भाषावाद को अपनी विचारधारा बनाती है तो फिर हम इसे गद्दारी ही कहेंगे और गद्दारों के साथ कोई देशभक्त खड़ा नहीं हो सकता। शिवसेना को समझना चाहिए कि देश पर जिहादी आदंकवाद का जो खतरा मंडरा रहा है उसे देखते हुए देश को शिवसेना की जरूरत है लेकिन राष्ट्रवादी विचारधार के साथ । शिवसेना को समझना चाहिए कि मराठी गैर मराठी की बात कर शिवसेना विल्कुल वैसी ही गद्दारी कर रही है जैसी कांग्रेस ने कश्मीर में धारा 370 लगाकर की थी और आज भी कर रही है।
ऱाहुल गांधी का सुरक्षाबलों को मराठी-गैरमराठी में बांटने बाला बयान न केवल राहुल की सोच का दिवालियापन उजारग करता है पर साथ ही कांग्रेस की फूट डालो और राज करो की निती को भी आगे बढ़ाता है । कांग्रेस के लिए यह कोई नई बात नहीं । इससे पहले कांग्रेस सेना को मुसलिम-गैर मुसलिम के आधार पर बांटने का षडयन्त्र कर चुकी है जिसे सेना प्रमुख जे जे सिंह जी ने अपनी समझदारी व दृड़ता से असफल कर दिया।
विहार में जब राहुल ने अपनी सोच का दिवालियापन प्रकट करते हुए वर्तमान भारत के सबसे अधिक प्रगतिशील व शांतिप्रय राज्य पर सिर्फ इसलिए हमला किया क्योंकि वहां पर हिन्दूत्वनिष्ठ व देशभक्त सरकार काम कर रही है तो विहार के कांग्रेसी हिन्दू कार्यकर्ताओं के सब्र का बांध टूट पड़ा और उन्होंने राहुल पर कुर्सियां जूते चप्पल फैंक कर उसकी सोच के दिवालिएपन का करारा जबाब दिया।हमें इन्तजार है उस वक्त का हर भारतीय इस राहुल की सोच के दिवालिएपन को समझकर एसा ही करारा जबाब दे।
शिव सेना को समझना चाहिए कि अगर वो मराठी-गैरमराठी के मुद्दे पर उतर भारतीयों को निशाना बनाती है तो फिर उसमें और राहुल में कोई फर्ख नहीं रह जाएगा। राहुल द्वारा विभाजन की बातें करना मिडीया और हमें इसलिए ज्यादा बुरा नहीं लगता क्यों वो एक विदेशी मां की औलाद है और उसी विदेशी की संगत में पल बढ़ रहा है वो भारतियों को बांटने के सिवा और कर भी क्या सकता है। पर शिव सेना द्वारा एसी बात करना किसी भी हालात में न ये मिडीया,न भारतीय जनता स्वीकार कर सकती है क्योंकि हमें शतप्रतिशत विस्वास है कि शिवसेना के लोग भारतीय हैं। हां अगर सिवसेना के लोग भी कांग्रेसियों की तरह विदेशीयों के हाथों विक कर उनकी कठपुतली बन चुके है तो उन्हें खुलकर कांग्रेस के साथ हाथ मिला लेना चाहिए।
राहुल गांधी ने खुद कहा है कि भारत का चपा-चपा सब भारतीयों का है यहां पर इटालियन माइनो मारियो व उसकी सन्तानों का कोई हक नहीं । राहुल गांधी की इस बात पर अमल करते हुए शिव सेना को मराठी-गैरमराठी का मुद्दा छोड़ कर भारत के प्रधानमंत्री को इस इटालियन एंटोनियो माइनो मारियो से आजाद करवाने के लिए संघर्ष छेड़ देना चाहिए या फिर अपनी पार्टी का नाम बदल कर उसका कांग्रेस में विलय कर देना चाहिए। क्योंकि ऐसी विभानकारी बातें कर शिव सेना छत्रपतिशिवाजी के नाम को बदनाम कर रही है ।शिवाजी भारत के वो महान योद्धा हैं जिन्होंने मरतेदम तक अपनी तलबार का रूख हिन्दूओं की ओर नहीं होने दिया चाहे वो गद्दार हिन्दू मुसलिम जिहादीयों के साथ क्यों न जा मिले हों । इतिहास गवाह है इस बात का कि छत्रपति शिवाजी की तलवार जब भी उठी हिन्दूओं की रक्षा के लिए उठी । शिव सेना को उस छत्रपति शिवाजी की सौगंध जो अपना हाथ या जुवान उतरव भारतीय हिन्दुओं के विरूद्ध उठाए। शिव सेना को तो चाहिए कि छत्रपति शिवा जी के मार्ग पर आगे बढ़ते हुए कांग्रेस के दलाल राज ठाकरे व कांग्रेस की विभाजनकारी नितीयों से उतर भारतीयों की रक्षा करे ।
हमें संका हो रही है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि उतर भारतीयों में छुप कर आने वाले मुसलिम जिहादियों की बढ़ती शंख्या से घबराकर शिव सेना शिर्फ जिहादियों की बात न कर सब के सब उतर भारतीयों को निशाना बना रही हो । मतलब शिवसेना अब इतनी कमजोर हो गई है कि जिहादी आतंकवादियों के विरूद्ध बोलने की उसकी ताकत न रही हो ।तब तो ये और भी चिन्ता का विषय है। अगर ऐसा है तब तो शिवसेना को बैसे ही मुंह बन्द कर लेना चाहिए क्यों छत्रपति शिवाजी के नाम पर बना संगठन अगर इतना कायर और ढरपोक हो चुका है कि अपनों को अपना शत्रु मानने लग पड़ा है तो फिर उसे अस्तित्व में रहने का कोई हख नहीं। बैसे भी शिव सेना को समझना चाहिए कि भारत हमेशा हिन्दूओं की आपसी फूट के परिणाम स्वरूप ही पहले मुगलों का फिर अंग्रेजों का गुलाम हुआ और आजकल एक ईटालियन एंटोनियोमाइनोमारियो का । अब शिव सेना को खुद ये निर्णय करना है कि उसका मकसद छत्रपति शिवाजी के बताए मार्ग पर आगे बढ़ते हुए हिन्दूओं को संगठित कर एक समर्थ स्वतन्त्र स्वाभिमानी भारत का निर्माण करना है या फिर कांग्रेस की फूट डालो और राज करो की निती पर आगे बढ़ते हुए एक कमजोर,गुलाम भिखमंगे इंडिया का। अगर अब भी हमारी बात शिवसेना को समझ न आए तो हम उनसे यही कहेंगे कि शिवसेना के लोग हर-रोज स्वामिरामदेव जी को आस्था चैनल पर शुबह 5.30 से 7.30 व शाम को 8 से 9 तक सुनें, समझें और फैसला करें कि क्या देशभक्त लोगों द्वारा एसी विभाजनकारी हरकतों के लिए साधन ,समय व उर्जा बर्बाद करना उचित है वो भी उस समय जब भारत पर लगातार जिहादी हमले हो रहे हों।
15 अगस्त 1947 को आखंड भारत का विभाजन कांग्रेस के माध्यम से अंग्रेजों की फूट डालो और राज करो की निती का परिणाम था । सबको उमीद थी कि कांग्रेस इससे सबक लेकर वर्तमान भारत में एसा कोई काम नहीं करेगी जो भारतीयों को जाति, क्षेत्र, सांप्रदाय(धर्म) ,भाषा के आधार पर बांटे । आज 2010 में अगर हम पिछले 62 वर्ष में से 10 वर्ष निकाल दें तो वाकी सारा समय कांग्रेस का ही सासन रहा । इस समय में कांग्रेस ने जितने भी नियम बनाय उन सब अगर तार्किक आधार पर विसलेशण किया जाए तो हम पांयेगे कि लगभग हर कानून जाति, क्षेत्र, सांप्रदाय(धर्म) ,भाषा के आधार पर बनाया गया । ढूंढने पर हो सकता है कि ऐसे कुछ कानून मिलें जो जो गलती से भारतीयों के लिए बनाए गए हों पर मोटे जौर पर लगभग हर कानून का आधार जाति, क्षेत्र, सांप्रदाय(धर्म) और भाषा ही है। कानून तो कानून राज्यों तक का निर्माण प्रसासनिक आधार पर करने के बजाए ऐसे ही विभाजनकारी आधारों पर किया गया गया । यही बजह है कि देश में आज जितने भी राजनितीक दल हैं उनके निर्माण का आधार भी कहीं न कहीं जाति, क्षेत्र, सांप्रदाय(धर्म) ,भाषा ही है। कांग्रेस की इसी विभाजनकारी फूट डालो और राज करो की निती के परिणामस्वरूप ही भारत में मिडीया भी अपने प्रोग्राम जाति, क्षेत्र, सांप्रदाय(धर्म) ,भाषा के आधार पर ही बनाता है । कांग्रेस की इसी फूट डालो और राज करो की निती के परिणामस्वरूप ही भारत विरोधी विदेशी ताकतों ने देश में मानवाधिकार संगठनों व मिडीया के नाम पर दर्जनों भारत-विरोधी गिरोह त्यार कर डाले । इन्हीं गिरोहों में छुपे गद्दार समय-समय पर छोटी सी बात को इतनी तूल दे देते हैं कि लगता है जैसे गृहयुद्ध की स्थिति बन गई हो । ये गद्दार भारत विभाजन की बातें ऐसे करते हैं मानों शालाद में गाजर मूली खा रहे हों ।
महाराष्ट्र में मराठी गैर मराठी के नाम पर जो कुछ किया जा रहा है उसका आधार कहीं न कहीं इस राज्या का भाषा के आधार पर निर्माण है। राज ठाकरे ने उतर भारतीयों के विरूध जब जहर उगलना शुरू किया तो हमने अपने ब्लाग पर लिखा था कि जिस तरह कांग्रेस ने पंजाब में अकालियों को हटाकर अपनी सरकार बनबाने के लिए भिंडरावाले को पाल-पोस कर आगे बढांया था ठीक उसी तरह महाराष्ट्र में शिवसेना को कमजोर करने के लिए कांग्रेस राज ठाकरे को पाल-पोस कर आगे बढ़ा रही है । पंजाब में कांग्रेस द्वारा लगाइ गई आग की कीमत हजारों हिन्दू-सिखों को अपने प्राण देकर चुकानी पड़ी थी । जिसकी चिंगारीयां आज तक यहां वहां देखने को मिलती हैं ।जिन हिन्दू-सिखों का खून का रिस्ता है उनमें से एक को तोड़ कर इस कांग्रेस की इस विभाजनकारी निती ने अलपसंख्यक बना डाला । सायद भारतीयों को तोड़ने की हसरत इस कांग्रेस की अभी तक पूरी नहीं हुई थी इसीलिए महाराष्ट्र में ठण्डी पड़ चुकी इस चिंगारी को महाराष्ट्र के मुख्यमन्त्री ने ड्राईवर के लाइसैंस के साथ मराठी भाषा जोड़ कर शुलगाया । बस फिर क्या था कांग्रेस का दलाल राज ठाकरे तो पहले से त्यार बैठा था उसने मौका हाथों हाथ लिया । बस फिर क्या था बोट-बैंक के चक्कर में शिवसेना भी कूद पड़ी इस विभाजनकारी राजनिती में । हम तो कहते हैं कि उतर भारतीयों के विरूद्ध आग चाहे राजठाकरे उगले या शिवसेना। दोनों पर कार्यवाही करने की जिम्मेवारी सरकार की है लेकिन जब सरकार का मुखिया ही जहर उगलने लगे फिर कार्यावाही कौन करे ?
इन हालात में संघ ने उतर भारतीयों की रक्षा की जिमेवारी उठाकर अपनी विचारधारा के अनुरूप एक नेक कदम उठाया है। संघ को इस बात के प्रति सचेत रहने की जरूरत है कि कहीं कांग्रेस सरकार उसको उलझाने के लिए कोई और डरटी गेम न खेले । संघ को शिवसेना से भी बात कर उसे उसकी गलती का एहसास करवाना चाहिए।
हम तो शिवसेना से यही कहेंगे कि या तो शिवसेना भगवा चोला उतारकर खुद को देशभक्त कहना छोड़ दे या फिर अपने आप को फूट डालो और राज करो की कांग्रेस की निति से दूर कर ले । ये दोनों चीजें साथ-साथ नहीं चल सकतीं । जो देशभक्त भगवा का समर्थक वोटर है वो कभी भी क्षेत्रवाद या भाषावाद की बात करने बालों को वोट नहीं डाल सकता । शिव सेना को समझना चाहिए कि हमलोगों ने आज तक अगर शिव-सेना का समर्थन किया तो सिर्फ इसलिए कि जिहादी आतंकवाद के विरूद्ध महाराष्ट्र मे जो भी आबाजें उठीं उनमें से सबसे उंची आबाज शिवसेना की थी और आज भी है । लेकिन अगर शिवसेना देशभक्ति की जगह क्षेत्रवाद या भाषावाद को अपनी विचारधारा बनाती है तो फिर हम इसे गद्दारी ही कहेंगे और गद्दारों के साथ कोई देशभक्त खड़ा नहीं हो सकता। शिवसेना को समझना चाहिए कि देश पर जिहादी आदंकवाद का जो खतरा मंडरा रहा है उसे देखते हुए देश को शिवसेना की जरूरत है लेकिन राष्ट्रवादी विचारधार के साथ । शिवसेना को समझना चाहिए कि मराठी गैर मराठी की बात कर शिवसेना विल्कुल वैसी ही गद्दारी कर रही है जैसी कांग्रेस ने कश्मीर में धारा 370 लगाकर की थी और आज भी कर रही है।
ऱाहुल गांधी का सुरक्षाबलों को मराठी-गैरमराठी में बांटने बाला बयान न केवल राहुल की सोच का दिवालियापन उजारग करता है पर साथ ही कांग्रेस की फूट डालो और राज करो की निती को भी आगे बढ़ाता है । कांग्रेस के लिए यह कोई नई बात नहीं । इससे पहले कांग्रेस सेना को मुसलिम-गैर मुसलिम के आधार पर बांटने का षडयन्त्र कर चुकी है जिसे सेना प्रमुख जे जे सिंह जी ने अपनी समझदारी व दृड़ता से असफल कर दिया।
विहार में जब राहुल ने अपनी सोच का दिवालियापन प्रकट करते हुए वर्तमान भारत के सबसे अधिक प्रगतिशील व शांतिप्रय राज्य पर सिर्फ इसलिए हमला किया क्योंकि वहां पर हिन्दूत्वनिष्ठ व देशभक्त सरकार काम कर रही है तो विहार के कांग्रेसी हिन्दू कार्यकर्ताओं के सब्र का बांध टूट पड़ा और उन्होंने राहुल पर कुर्सियां जूते चप्पल फैंक कर उसकी सोच के दिवालिएपन का करारा जबाब दिया।हमें इन्तजार है उस वक्त का हर भारतीय इस राहुल की सोच के दिवालिएपन को समझकर एसा ही करारा जबाब दे।
शिव सेना को समझना चाहिए कि अगर वो मराठी-गैरमराठी के मुद्दे पर उतर भारतीयों को निशाना बनाती है तो फिर उसमें और राहुल में कोई फर्ख नहीं रह जाएगा। राहुल द्वारा विभाजन की बातें करना मिडीया और हमें इसलिए ज्यादा बुरा नहीं लगता क्यों वो एक विदेशी मां की औलाद है और उसी विदेशी की संगत में पल बढ़ रहा है वो भारतियों को बांटने के सिवा और कर भी क्या सकता है। पर शिव सेना द्वारा एसी बात करना किसी भी हालात में न ये मिडीया,न भारतीय जनता स्वीकार कर सकती है क्योंकि हमें शतप्रतिशत विस्वास है कि शिवसेना के लोग भारतीय हैं। हां अगर सिवसेना के लोग भी कांग्रेसियों की तरह विदेशीयों के हाथों विक कर उनकी कठपुतली बन चुके है तो उन्हें खुलकर कांग्रेस के साथ हाथ मिला लेना चाहिए।
राहुल गांधी ने खुद कहा है कि भारत का चपा-चपा सब भारतीयों का है यहां पर इटालियन माइनो मारियो व उसकी सन्तानों का कोई हक नहीं । राहुल गांधी की इस बात पर अमल करते हुए शिव सेना को मराठी-गैरमराठी का मुद्दा छोड़ कर भारत के प्रधानमंत्री को इस इटालियन एंटोनियो माइनो मारियो से आजाद करवाने के लिए संघर्ष छेड़ देना चाहिए या फिर अपनी पार्टी का नाम बदल कर उसका कांग्रेस में विलय कर देना चाहिए। क्योंकि ऐसी विभानकारी बातें कर शिव सेना छत्रपतिशिवाजी के नाम को बदनाम कर रही है ।शिवाजी भारत के वो महान योद्धा हैं जिन्होंने मरतेदम तक अपनी तलबार का रूख हिन्दूओं की ओर नहीं होने दिया चाहे वो गद्दार हिन्दू मुसलिम जिहादीयों के साथ क्यों न जा मिले हों । इतिहास गवाह है इस बात का कि छत्रपति शिवाजी की तलवार जब भी उठी हिन्दूओं की रक्षा के लिए उठी । शिव सेना को उस छत्रपति शिवाजी की सौगंध जो अपना हाथ या जुवान उतरव भारतीय हिन्दुओं के विरूद्ध उठाए। शिव सेना को तो चाहिए कि छत्रपति शिवा जी के मार्ग पर आगे बढ़ते हुए कांग्रेस के दलाल राज ठाकरे व कांग्रेस की विभाजनकारी नितीयों से उतर भारतीयों की रक्षा करे ।
हमें संका हो रही है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि उतर भारतीयों में छुप कर आने वाले मुसलिम जिहादियों की बढ़ती शंख्या से घबराकर शिव सेना शिर्फ जिहादियों की बात न कर सब के सब उतर भारतीयों को निशाना बना रही हो । मतलब शिवसेना अब इतनी कमजोर हो गई है कि जिहादी आतंकवादियों के विरूद्ध बोलने की उसकी ताकत न रही हो ।तब तो ये और भी चिन्ता का विषय है। अगर ऐसा है तब तो शिवसेना को बैसे ही मुंह बन्द कर लेना चाहिए क्यों छत्रपति शिवाजी के नाम पर बना संगठन अगर इतना कायर और ढरपोक हो चुका है कि अपनों को अपना शत्रु मानने लग पड़ा है तो फिर उसे अस्तित्व में रहने का कोई हख नहीं। बैसे भी शिव सेना को समझना चाहिए कि भारत हमेशा हिन्दूओं की आपसी फूट के परिणाम स्वरूप ही पहले मुगलों का फिर अंग्रेजों का गुलाम हुआ और आजकल एक ईटालियन एंटोनियोमाइनोमारियो का । अब शिव सेना को खुद ये निर्णय करना है कि उसका मकसद छत्रपति शिवाजी के बताए मार्ग पर आगे बढ़ते हुए हिन्दूओं को संगठित कर एक समर्थ स्वतन्त्र स्वाभिमानी भारत का निर्माण करना है या फिर कांग्रेस की फूट डालो और राज करो की निती पर आगे बढ़ते हुए एक कमजोर,गुलाम भिखमंगे इंडिया का। अगर अब भी हमारी बात शिवसेना को समझ न आए तो हम उनसे यही कहेंगे कि शिवसेना के लोग हर-रोज स्वामिरामदेव जी को आस्था चैनल पर शुबह 5.30 से 7.30 व शाम को 8 से 9 तक सुनें, समझें और फैसला करें कि क्या देशभक्त लोगों द्वारा एसी विभाजनकारी हरकतों के लिए साधन ,समय व उर्जा बर्बाद करना उचित है वो भी उस समय जब भारत पर लगातार जिहादी हमले हो रहे हों।
शुक्रवार, 22 जनवरी 2010
एम एफ हुसैन की हिन्दूविरोधी-देशविरोधी चित्रकारी के समर्थक एस दीपंकर के नाम संदेश
आज दिनांक 20-01-2010 को हमने पंजाब केसरी में एक संपादकीय पढ़ा जिसका सीर्षक है मुसलिम जिहादी आतंकबादी हुसैन स्वदेश कब लौट पायेंगे।मन को बहुत पीड़ा हुई ये जानकर कि भारत में ऐसे भी हिन्दू हैं जो अपनी मां बहन हेटी की नंगी तस्वीरें एम एफ हुसैन से बनबाकर देखना चाहते हैं।उन्हीं का प्रतिनिधित्व करते हैं एस दीपांकर । हम तो एस दीपांकर जैसी मानसिकता रखने बाले लोगों से यही कहेंगे कि अगर वो सच में एम एफ हुसैन को जिहादी आतंकवादी नहीं मानते हैं तो वो अपने इस मित्र से पूछें कि उसने अपनी मां व बहन के चित्र नग्नावस्था में क्यों नहीं बनाए । अगर वो एसा करते तो हम मान लेते कि हुसैन वाक्य ही एक राक्षस है इसलिए सभ्यता संस्कृति को समझना उसके बस से बाहर है। पर सच्चाई यह है कि उसने हिन्दुओं की आस्था के केन्द्र सभी देवी-देवताओं के साथ-साथ भारत माता के अपमानजनक चित्र हिन्दूओं को अपमानित करने के लिए बनाए व अपनी मां बहन,बहन व फातिमा के चित्र पूरण बस्त्र पहने हुए बनाए। हम निजी तौर से हिन्दू देवियों को अपनी मां की तरह मानते हैं और जिस अबस्था मॆं उसने ये चित्र बनाए उसे देखकर एसे दुष्ट का अगर हमें कत्ल भी करना पड़े तो भी हम पीछे हटने बाले नहीं । रही बात आपके जैसे समर्थकों की तो उनसे तो हम यही कहेंगे कि वो वाक्य ही इतने खुले विचार वाले हैं तो जरा अपनी मां वहन बेटी की नग्न तस्वीर बनबाकर देखो तब पता चले कि कैसा दर्द होता है ।अगर एसा नहीं कर सकते तो बेहतर यही है कि ऐसे राक्षसों की पशु प्रवृति को बढ़ावा देकर हिन्दूओं को उस हद तक न ले जाओ जहां उनके पास हथियार उठाने के सिवा और कोई चारा न बचे ।
बुधवार, 4 फ़रवरी 2009
रविवार, 1 फ़रवरी 2009
धर्मनिर्पेक्षता -बोले तो -देशद्रोह
अनुक्रमणिका
1. आत्मकथन 1
2. प्रसतावना 6
3. नापाक सेकुलर गिरोह के देशविरोधी षडयन्त्र 9
4. एंटोनियो के हिन्दुविरोधी षडयन्त्र 37
5. हिन्दुविरोध-- कांग्रेस की पुरानी आदत 48
6. अल्पसंख्यकवाद के बहाने देशद्रोह 56
7. सेकुलर गिरोह का हिन्दु-सिखों पर हमला 63
8. भारत विरोधी भारत सरकार 76
9. हिन्दू एकता सिद्धांत 94
10. हिन्दूक्रांति की शुरूआत या सरकारी षडयन्त्र 102
11. धर्मनिर्पेक्षता का खूनी चेहरा 124
12. मुम्बई हमला खतरे की घंटी 131
13. आतंकवाद पर सेकुलर गिरोह की भ्रमित सोच 151
14. सांप्रदायिक दंगे जिम्मेबार कौन 161
15. हिन्दू मिटाओ- हिन्दू भगाओ अभियान 175
आत्मकथन
मेरा प्यारा भारत ,लोकतांत्रिक भारत, हिन्दुओं की मातृभूमि भारत, संसार के विभिन्न हिस्सों से बेघर हुए लोगों का सहारा भारत, सुलतानों, मुगलों और अंग्रेजों के आक्रमणों के कोढ़ का मारा भारत, मुस्लिम जेहादी आतंकवादियों द्वारा दिए गए व दिए जा रहे जख्मों से करहाता भारत, अपने जयचन्दों के विश्वासघात का मारा भारत आज फिर एक ऐसे नापाक हिन्दुविरोधी-देशविरोधी गिरोह के देश तोड़क षडयन्त्रों को झेल रहा है जो खुद को सेकुलर कहता है व भारतीय संस्कृति और सभ्यता की हर पहचान को मिटाने पर उतारू है ।
15 अगस्त 1947 में मुस्लिम जेहादी उन्माद के परिणामस्वरूप कांग्रेस द्वारा अखण्ड भारत का विभाजन करवाकर मुसलमानों के लिए अलग देश बनवा देने के बाद सब भारतीयों को एक उम्मीद जगी थी कि कांग्रेस की जिस मुस्लिमप्रस्त हिन्दुविरोधी राजनीति की बजह से अखण्ड भारत के टुकड़े हुए उस राजनीति से कांग्रेस हमेशा के लिए तौवा कर लेगी । मुहम्मदअली जिन्ना जैसे नेता कांग्रेस कभी दोवारा पैदा नहीं करेगी ।कभी दोवारा न कांग्रेस का अध्यक्ष कोई विदेशी अंग्रेज बनेगा न देश फिर किसी अंग्रेज का गुलाम होगा ।
लेकिन उस वक्त सब देशभक्त भारतीयों की उम्मीदों पर पानी फिर गया जब कांग्रेस के कुछ हिन्दुविरोधी नेताओं ने ईसाई देशों में प्राप्त शिक्षा के परिणामस्वरूप बनी गुलाम सोच को आगे बढ़ाते हुए देश को हिन्दुराष्ट्र घोषित करने का विरोध कर दिया, भारतीय संस्कृति और सभ्यता के प्रतीक परमपूजनीय भगवाध्वज को राष्ट्रीय ध्वज बनाने का विरोध कर दिया । मर्यादा पुर्षोतम भगवान श्री राम को भारत का आदर्श घोषित करने की जगह एक ने खुद को बापू तो दूसरे ने खुद को चाचा घोषित करते हुए देश के अन्दर एक ऐसी हिन्दुविरोधी विभाजनकारी राजनीति को जन्म दिया जिसके परिणाम स्वरूप आज सिर्फ 61 वर्ष बाद भारत फिर से उसी जगह पहुंच गया है जहां 1946 में था ।
विभाजन से सबक लेकर देश में कानून भारतीयों के लिए बनाने की जगह अंग्रेजों की “ फूट डालो और राज करो ” की नीति अपनाते हुए धर्म, संप्रदाय, क्षेत्र,भाषा और जाति के आधार पर बनाए गए जिसके परिणामस्वरूप देश में क्षेत्रीय, सांप्रदायिक, जाति आधारित दलों की एक ऐसी देशतोड़क राजनीति को जन्म दिया जो आज नासूर बन चुकी है ।
इन देशविरोधी-हिन्दुविरोधी दलों की हिन्दुविरोधी देशतोड़क नीतियों से प्रेरित होकर संसार के विभिन्न मुस्लिम व ईसाई देशों ने अपने पैसे के बल पर इन दलों में से अधिकतर नेताओं को खरीदकर व उन खरीदे हुए नेताओं के सहयोग से देश के अन्दर देशविरोधी मानवाधिकार संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं ,समाचार चैनलों, समाचार पत्रों , नौकरशाहों व राजनीतिक दलों का एक ऐसा गिरोह बनाने में सफलता हासिल की जो खुद को धर्मनिर्पेक्षता के चोले में छुपाकर हिन्दुविरोधी-देशविरोधी रास्ते पर आगे बढ़ते हुए देश को आर्थिक व सांस्कृतिक तौर तबाह करने पर तुला हुआ है ।
यह सेकुलर गिरोह वन्देमातरम् का विरोध करने वालों का तो साथ देता है पर उसी वन्देमातरम् का समर्थन व गुणगान करने वालों को सांप्रदायिक कहकर उन पर हमला बोलता है।
यह वो गिरोह है जो मुस्लिम जेहादी आतंकवादियों को कानून के शिकंजे से बचाने के लिए पोटा जैसे कानून हटाता है और मुस्लिम जेहादी आतंकवादियों के हमलों से बचने के लिए सचेत करने वाली साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर व सिमी जैसे संगठनों की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए संघर्षशील सैनिक लैफ्टीनैंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित जैसे देशभक्तों को जेल में बन्दकर उन पर मनघड़न्त आरोप लगाता है अत्याचार करता है ।
यह गिरोह आतंकवादियों के लिए मानवाधिकारों की बात करता है और राहुल राज जैसे सिरफरे नौजवान को सरेआम गोली से उड़ाता है ।
यह वो गिरोह है जो देशभक्त हिन्दुसंगठनों को अपना शत्रु मानकर हर वक्त उन पर हमला बोलता है और हजारों हिन्दुओं का खून बहाने वाले मुस्लिम जेहादी आतंकवादियों को अपना भाई बताता है उनको फांसी से बचाने के लिए उनकी फाइल दबाता है ।
यह गिरोह देश में किसी मुस्लिम जेहादी आतंकवादी या ईसाई धर्मांतरण के ठेकेदार के मारे जाने पर तो आसमान सिर पर उठा लेता है पर इन गद्दारों के हाथों कत्ल किय जा रहे हजारों हिन्दुओं के बारे में या तो मौन धारण कर लेता है या फिर तरह-तरह के बहाने बनाकर हिन्दुओं के कत्ल को सही ठहराने की दुष्टता करता है।
यह वही गिरोह है जो मुस्लिम जेहादी द्वारा बनाई गई भारत माता व दुर्गा माता की आपत्तिजनक पेंटिंगस को अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता बताता है पर उसी वक्त मुस्लिम जेहादी आतंकवाद की जड़ को दिखाते हजरत मुहमम्द के कार्टूनों का विरोध करता है।
हद तो तब हो जाती है जब ये गिरोह एक तरफ ईसाई पोप के मरने पर देश में तीन दिन के शोक की घोषणा करता है और दूसरी तरफ भारतीय संस्कृति और सभ्यता के आधार सतम्भ मर्यादा पुर्षोतम भगवान श्री राम के अस्तित्व को ही नकार देता है ।
यह वो गिरोह है जो बात तो धर्मनिर्पेक्षता की करता है पर बच्चों को मिलने वाली छात्रवृतियों व कर्ज से लेकर भारत के बजट तक को सांप्रदायिक आधार पर बांट देता है ।
अन्त में आप खुद सोचो कि जो गिरोह देश की खातिर वटाला हाऊस में शहीद होने वाले शहीद मोहन चन्द शर्मा व मुम्बई में शहीद होने वाले दर्जनों शहीदों का मान-सम्मान करने के बजाए उनका अपमान करने की दुष्टता करता है वो गिरोह देशभक्त लोगों का नेतृत्व करता है या गद्दारों का ?
इस सेकुलर गिरोह के राष्ट्रविरोधी-हिन्दुविरोधी षडयन्त्रों की ओर देश के राष्ट्रभक्त लोगों का ध्यान खींचना व इन षडयन्त्रों का पर्दाफास कर, गद्दार षडयन्त्रकारियों को उनके अंजाम तक पहुंचाकर अपने देश भारत को इन विश्वासघातियों के मकड़जाल से मुक्तकरवाकर फिर से राष्ट्रभक्ति की जवाला को सुलगाना ही अपनी इस पुस्तक धर्मनिर्पेक्षता बोले तो देशद्रोह का मूल उदेश्य है ।
इस पुस्तक की रचना उस वक्त शुरू हुई जब देश में मुस्लिम जेहादियों द्वारा जगह-जगह बम्मविस्फोट कर देशभक्त भारतीयों का लहू पानी की तरह बहाया जा रहा था व ये गठबन्धन मुस्लिम जेहादियों के षडयन्त्रों को छुपाने के लिए हर रोज नये बहाने गढ़ रहा था। सरकार देशवासियों की रक्षा करने के बजाए मुस्लिम जेहादी आतंकवादियों को अपना भाई बताकर इनका बचाव कर रही थी। इस पुस्तक के पहले भाग का कार्य 26 नवम्बर 2008 को बन्द कर दिया गया लेकिन उसी दिन शाम को एक बार फिर मुस्लिम जेहादियों ने मुम्बई पर हमला बोल दिया ।
सरकार के पिछले पांच वर्षों के आतंकवाद समर्थक निर्णयों का भयानक परिणाम देश की सारी जनता ने अपनी आंखों से देख लिया । हमें लगा कि इस घटना के बाद सरकार को अपनी बेबकूफी का एहसास होगा व सरकार अपनी सांप्रदायिक सोच त्याग कर देश के अन्दर छुपे गद्दारों को ढूंढ-ढूंढ कर मिटा देगी।
लेकिन ये जानकर बड़ी हैरानी हुई कि जिस वक्त सारा विपक्ष सरकार के पिछले पांच वर्ष के देशविरोधी निर्णयों को भुलाकर आतंकवादियों से निपटने के विषय पर सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहा था ठीक उसी बक्त सरकार के ही मन्त्री ने पाकिस्तान की भाषा बोलकर मुम्वई हमले का दोष हिन्दुओं पर डालने का असफल प्रयास किया जिसका कई सांप्रदायिक सोच रखने वाले गद्दारों ने समर्थन किया ।
इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह थी कि युद्ध की इस घड़ी में भी कांग्रेस ने वर्तमान भारत के मुस्लिम जिहादी अबदुल रहमान अंतुले का साथ देकर सिद्ध कर दिया कि हिन्दुविरोधी कांग्रेस द्वारा मुहम्दअली जिन्ना पैदा करने की प्रक्रिया यथावत जारी है ।
यह पुस्तक किसी लेखक की कोई कृति नहीं वल्कि मीडिया व सेकुलर गिरोह द्वरा किए जा रहे देशविरोधी-हिन्दुविरोधी दुष्प्रचार से तंग आकर एक आम भारतीय द्वारा वयक्त की गई प्रतिक्रिया है । आप सब पाठकों से विनम्र प्रार्थना है कि इसे आराम से पढ़ें, इन देशद्रोहीयों को पहचानें व इनके षडयन्त्रों को समझें, अपनी पसंद के स्वाभिमानी देशभक्त संगठनों से जुड़ें या फिर जिस भी संगठन से जुड़ें उसे देशभक्त और स्वाभिमानी बनायें, अन्त में संगठित होकर इन देशविरोधी-हिन्दुविरोधी गद्दारों से भारत माता को मुक्त करवाकर एक स्वाभिमानी भारत का निर्माण करें।
1. आत्मकथन 1
2. प्रसतावना 6
3. नापाक सेकुलर गिरोह के देशविरोधी षडयन्त्र 9
4. एंटोनियो के हिन्दुविरोधी षडयन्त्र 37
5. हिन्दुविरोध-- कांग्रेस की पुरानी आदत 48
6. अल्पसंख्यकवाद के बहाने देशद्रोह 56
7. सेकुलर गिरोह का हिन्दु-सिखों पर हमला 63
8. भारत विरोधी भारत सरकार 76
9. हिन्दू एकता सिद्धांत 94
10. हिन्दूक्रांति की शुरूआत या सरकारी षडयन्त्र 102
11. धर्मनिर्पेक्षता का खूनी चेहरा 124
12. मुम्बई हमला खतरे की घंटी 131
13. आतंकवाद पर सेकुलर गिरोह की भ्रमित सोच 151
14. सांप्रदायिक दंगे जिम्मेबार कौन 161
15. हिन्दू मिटाओ- हिन्दू भगाओ अभियान 175
आत्मकथन
मेरा प्यारा भारत ,लोकतांत्रिक भारत, हिन्दुओं की मातृभूमि भारत, संसार के विभिन्न हिस्सों से बेघर हुए लोगों का सहारा भारत, सुलतानों, मुगलों और अंग्रेजों के आक्रमणों के कोढ़ का मारा भारत, मुस्लिम जेहादी आतंकवादियों द्वारा दिए गए व दिए जा रहे जख्मों से करहाता भारत, अपने जयचन्दों के विश्वासघात का मारा भारत आज फिर एक ऐसे नापाक हिन्दुविरोधी-देशविरोधी गिरोह के देश तोड़क षडयन्त्रों को झेल रहा है जो खुद को सेकुलर कहता है व भारतीय संस्कृति और सभ्यता की हर पहचान को मिटाने पर उतारू है ।
15 अगस्त 1947 में मुस्लिम जेहादी उन्माद के परिणामस्वरूप कांग्रेस द्वारा अखण्ड भारत का विभाजन करवाकर मुसलमानों के लिए अलग देश बनवा देने के बाद सब भारतीयों को एक उम्मीद जगी थी कि कांग्रेस की जिस मुस्लिमप्रस्त हिन्दुविरोधी राजनीति की बजह से अखण्ड भारत के टुकड़े हुए उस राजनीति से कांग्रेस हमेशा के लिए तौवा कर लेगी । मुहम्मदअली जिन्ना जैसे नेता कांग्रेस कभी दोवारा पैदा नहीं करेगी ।कभी दोवारा न कांग्रेस का अध्यक्ष कोई विदेशी अंग्रेज बनेगा न देश फिर किसी अंग्रेज का गुलाम होगा ।
लेकिन उस वक्त सब देशभक्त भारतीयों की उम्मीदों पर पानी फिर गया जब कांग्रेस के कुछ हिन्दुविरोधी नेताओं ने ईसाई देशों में प्राप्त शिक्षा के परिणामस्वरूप बनी गुलाम सोच को आगे बढ़ाते हुए देश को हिन्दुराष्ट्र घोषित करने का विरोध कर दिया, भारतीय संस्कृति और सभ्यता के प्रतीक परमपूजनीय भगवाध्वज को राष्ट्रीय ध्वज बनाने का विरोध कर दिया । मर्यादा पुर्षोतम भगवान श्री राम को भारत का आदर्श घोषित करने की जगह एक ने खुद को बापू तो दूसरे ने खुद को चाचा घोषित करते हुए देश के अन्दर एक ऐसी हिन्दुविरोधी विभाजनकारी राजनीति को जन्म दिया जिसके परिणाम स्वरूप आज सिर्फ 61 वर्ष बाद भारत फिर से उसी जगह पहुंच गया है जहां 1946 में था ।
विभाजन से सबक लेकर देश में कानून भारतीयों के लिए बनाने की जगह अंग्रेजों की “ फूट डालो और राज करो ” की नीति अपनाते हुए धर्म, संप्रदाय, क्षेत्र,भाषा और जाति के आधार पर बनाए गए जिसके परिणामस्वरूप देश में क्षेत्रीय, सांप्रदायिक, जाति आधारित दलों की एक ऐसी देशतोड़क राजनीति को जन्म दिया जो आज नासूर बन चुकी है ।
इन देशविरोधी-हिन्दुविरोधी दलों की हिन्दुविरोधी देशतोड़क नीतियों से प्रेरित होकर संसार के विभिन्न मुस्लिम व ईसाई देशों ने अपने पैसे के बल पर इन दलों में से अधिकतर नेताओं को खरीदकर व उन खरीदे हुए नेताओं के सहयोग से देश के अन्दर देशविरोधी मानवाधिकार संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं ,समाचार चैनलों, समाचार पत्रों , नौकरशाहों व राजनीतिक दलों का एक ऐसा गिरोह बनाने में सफलता हासिल की जो खुद को धर्मनिर्पेक्षता के चोले में छुपाकर हिन्दुविरोधी-देशविरोधी रास्ते पर आगे बढ़ते हुए देश को आर्थिक व सांस्कृतिक तौर तबाह करने पर तुला हुआ है ।
यह सेकुलर गिरोह वन्देमातरम् का विरोध करने वालों का तो साथ देता है पर उसी वन्देमातरम् का समर्थन व गुणगान करने वालों को सांप्रदायिक कहकर उन पर हमला बोलता है।
यह वो गिरोह है जो मुस्लिम जेहादी आतंकवादियों को कानून के शिकंजे से बचाने के लिए पोटा जैसे कानून हटाता है और मुस्लिम जेहादी आतंकवादियों के हमलों से बचने के लिए सचेत करने वाली साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर व सिमी जैसे संगठनों की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए संघर्षशील सैनिक लैफ्टीनैंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित जैसे देशभक्तों को जेल में बन्दकर उन पर मनघड़न्त आरोप लगाता है अत्याचार करता है ।
यह गिरोह आतंकवादियों के लिए मानवाधिकारों की बात करता है और राहुल राज जैसे सिरफरे नौजवान को सरेआम गोली से उड़ाता है ।
यह वो गिरोह है जो देशभक्त हिन्दुसंगठनों को अपना शत्रु मानकर हर वक्त उन पर हमला बोलता है और हजारों हिन्दुओं का खून बहाने वाले मुस्लिम जेहादी आतंकवादियों को अपना भाई बताता है उनको फांसी से बचाने के लिए उनकी फाइल दबाता है ।
यह गिरोह देश में किसी मुस्लिम जेहादी आतंकवादी या ईसाई धर्मांतरण के ठेकेदार के मारे जाने पर तो आसमान सिर पर उठा लेता है पर इन गद्दारों के हाथों कत्ल किय जा रहे हजारों हिन्दुओं के बारे में या तो मौन धारण कर लेता है या फिर तरह-तरह के बहाने बनाकर हिन्दुओं के कत्ल को सही ठहराने की दुष्टता करता है।
यह वही गिरोह है जो मुस्लिम जेहादी द्वारा बनाई गई भारत माता व दुर्गा माता की आपत्तिजनक पेंटिंगस को अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता बताता है पर उसी वक्त मुस्लिम जेहादी आतंकवाद की जड़ को दिखाते हजरत मुहमम्द के कार्टूनों का विरोध करता है।
हद तो तब हो जाती है जब ये गिरोह एक तरफ ईसाई पोप के मरने पर देश में तीन दिन के शोक की घोषणा करता है और दूसरी तरफ भारतीय संस्कृति और सभ्यता के आधार सतम्भ मर्यादा पुर्षोतम भगवान श्री राम के अस्तित्व को ही नकार देता है ।
यह वो गिरोह है जो बात तो धर्मनिर्पेक्षता की करता है पर बच्चों को मिलने वाली छात्रवृतियों व कर्ज से लेकर भारत के बजट तक को सांप्रदायिक आधार पर बांट देता है ।
अन्त में आप खुद सोचो कि जो गिरोह देश की खातिर वटाला हाऊस में शहीद होने वाले शहीद मोहन चन्द शर्मा व मुम्बई में शहीद होने वाले दर्जनों शहीदों का मान-सम्मान करने के बजाए उनका अपमान करने की दुष्टता करता है वो गिरोह देशभक्त लोगों का नेतृत्व करता है या गद्दारों का ?
इस सेकुलर गिरोह के राष्ट्रविरोधी-हिन्दुविरोधी षडयन्त्रों की ओर देश के राष्ट्रभक्त लोगों का ध्यान खींचना व इन षडयन्त्रों का पर्दाफास कर, गद्दार षडयन्त्रकारियों को उनके अंजाम तक पहुंचाकर अपने देश भारत को इन विश्वासघातियों के मकड़जाल से मुक्तकरवाकर फिर से राष्ट्रभक्ति की जवाला को सुलगाना ही अपनी इस पुस्तक धर्मनिर्पेक्षता बोले तो देशद्रोह का मूल उदेश्य है ।
इस पुस्तक की रचना उस वक्त शुरू हुई जब देश में मुस्लिम जेहादियों द्वारा जगह-जगह बम्मविस्फोट कर देशभक्त भारतीयों का लहू पानी की तरह बहाया जा रहा था व ये गठबन्धन मुस्लिम जेहादियों के षडयन्त्रों को छुपाने के लिए हर रोज नये बहाने गढ़ रहा था। सरकार देशवासियों की रक्षा करने के बजाए मुस्लिम जेहादी आतंकवादियों को अपना भाई बताकर इनका बचाव कर रही थी। इस पुस्तक के पहले भाग का कार्य 26 नवम्बर 2008 को बन्द कर दिया गया लेकिन उसी दिन शाम को एक बार फिर मुस्लिम जेहादियों ने मुम्बई पर हमला बोल दिया ।
सरकार के पिछले पांच वर्षों के आतंकवाद समर्थक निर्णयों का भयानक परिणाम देश की सारी जनता ने अपनी आंखों से देख लिया । हमें लगा कि इस घटना के बाद सरकार को अपनी बेबकूफी का एहसास होगा व सरकार अपनी सांप्रदायिक सोच त्याग कर देश के अन्दर छुपे गद्दारों को ढूंढ-ढूंढ कर मिटा देगी।
लेकिन ये जानकर बड़ी हैरानी हुई कि जिस वक्त सारा विपक्ष सरकार के पिछले पांच वर्ष के देशविरोधी निर्णयों को भुलाकर आतंकवादियों से निपटने के विषय पर सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहा था ठीक उसी बक्त सरकार के ही मन्त्री ने पाकिस्तान की भाषा बोलकर मुम्वई हमले का दोष हिन्दुओं पर डालने का असफल प्रयास किया जिसका कई सांप्रदायिक सोच रखने वाले गद्दारों ने समर्थन किया ।
इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह थी कि युद्ध की इस घड़ी में भी कांग्रेस ने वर्तमान भारत के मुस्लिम जिहादी अबदुल रहमान अंतुले का साथ देकर सिद्ध कर दिया कि हिन्दुविरोधी कांग्रेस द्वारा मुहम्दअली जिन्ना पैदा करने की प्रक्रिया यथावत जारी है ।
यह पुस्तक किसी लेखक की कोई कृति नहीं वल्कि मीडिया व सेकुलर गिरोह द्वरा किए जा रहे देशविरोधी-हिन्दुविरोधी दुष्प्रचार से तंग आकर एक आम भारतीय द्वारा वयक्त की गई प्रतिक्रिया है । आप सब पाठकों से विनम्र प्रार्थना है कि इसे आराम से पढ़ें, इन देशद्रोहीयों को पहचानें व इनके षडयन्त्रों को समझें, अपनी पसंद के स्वाभिमानी देशभक्त संगठनों से जुड़ें या फिर जिस भी संगठन से जुड़ें उसे देशभक्त और स्वाभिमानी बनायें, अन्त में संगठित होकर इन देशविरोधी-हिन्दुविरोधी गद्दारों से भारत माता को मुक्त करवाकर एक स्वाभिमानी भारत का निर्माण करें।
प्रस्तावना
भारत में लगातार हो रहे आतंकवादी हमलों पर अनेकों पुस्तकें लिखी गई हैं ।परन्तु प्रस्तुत पुस्तक धर्मनिर्पेक्षता-वोले तो-देशद्रोह अपने आप में एक विशेष कृति है। भारतवर्ष के लिए आतंकवाद नया नहीं है इस आतंकवाद का सामना भारत 7वीं शताब्दी में भारत में प्रवेश करने वाले पहले मुस्लिम जेहादी आतंकवादी मुहम्दविन कासिम के समय से कर रहा है जिसका राक्षसी चेहरा औरंगजेब और बाबर के रूप में भारत ने देखा और सहा। ये मुस्लिम जेहादी हमला ही भारत में हर तरह के आतंकवाद की जड़ है । आज भारत में छोटी मोटी चोर बजारी व दंगे से लेकर अन्तराष्ट्रीय नसे के कारोबार व भारत में जाली मुद्रा के प्रसार तक के हर भारत विरोधी गैरकानूनी कारोबार के पीछे किसी न किसी मुस्लिम जेहादी का ही हाथ निकलता है । ये मुस्लिम जेहादी आतंकवाद भारत के कई विभाजन करवा चुका है हजारों मन्दिर तोड़ चुका है लाखों हिन्दुओं का खून बहा चुका है और आज भी बहा रहा है ।
किसी भी समाज में राक्षसों का जन्म लेना कोई नई बात नहीं है लेकिन समाज का उन राक्षसों के बचाब व समर्थन में खड़े होना विनाश का कारण बनता है यही सबकुछ आज मुस्लिम समाज के साथ हो रहा है एक तरफ अखण्ड भारत के हिन्दुओं वाले इस हिस्से में ये जेहादी मुस्लिम हिन्दुओं का खून बहा रहे हैं कभी कभार देशभक्त मुसलमानों पर भी हमला बोल रहे हैं तो दूसरी तरफ अखण्ड भारत के ही दूसरे हिस्सों पाकिस्तान व अफगानिस्तान में यही मुस्लिम जेहादी मुसलमानों का ही खून बहा रहे हैं ।
ये तो सनातन शांतिप्रिय संस्कृति के समर्थक हिन्दुओं की सहनशक्ति की इन्तहां है कि इन मुस्लिम ज्हादियों के शिकार हिन्दू अभी तक अपना संयम नहीं खोए हैं और मुस्लिम जेहादियों द्वारा चलाय जा रहे हिन्दू मिटाओ-हिन्दू भगाओ अभियान का जबाब उन्हीं के तरीके से नहीं दे रहे हैं । वरना आज तक न हिन्दुओं के कातिल मुस्लिम जेहादी बचते न उनके ठेकेदार भारत-विरोधी धर्मनिर्पेक्षतावादी ।
मुसलमानों को अगर मानवता के प्रति लेशमात्र भी समर्पण है तो इन्हें मिलजुलकर इस्लाम के नाम पर मार-काट मचा रहे इन मुस्लिम जेहादियों को यथाशीघ्र बिना कोई समय गवाय अपने आप मिटा देना चाहिए वरना इन मुस्लिम जेहादियों के हमलों से त्रस्त भारतीय जनता मुसलमानों में छुपे इन मुस्लिम जेहादियों को ढूंढ-ढूंढ कर मारने पर मजबूर होगी ।
इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब-जब भी हिन्दुओं के अन्दर राक्षस पैदा हुए हैं हिन्दुओं ने खुद उन राक्षसों को जड़-मूल से मिटाया है परन्तु मुसलमानों ने इसके विपरीत न केवल मुसलमानों के अन्दर पैदा होने बाले राक्षसों को समर्थन दिया है बल्कि उन्हें जेहादी का दर्जा देकर, मदरसों व मस्जिदों को उनकी शरणगाह बनाकर अपने बच्चों को उन राक्षसों के नक्से कदम पर चलने के लिए बाध्य भी किया है जिसका परिणाम आज समस्त मुस्लिम समाज भारत के सिवा सारे संसार में भुक्त रहा है ।
मुस्लिम जेहादी राक्षसों के समर्थन में मुस्लिम समाज का खड़ा होना कोई नई बात नहीं है लेकिन हिन्दुओं द्वारा धर्मनिर्पेक्षता के नाम पर इन मुस्लिम जेहादी राक्षसों का समर्थन करना व उनको आगे बढ़ाना वाक्य ही चौंकाने वाला है। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाला भारत में ऐसे राष्ट्रविरोधी मीडिया, मानवाधिकार संगठनों, लेखकों, समाजिक कार्यकर्ताओं व नौकरसाहों का पनपना है जो हर वक्त इन मुस्लिम जेहादी आंतकवादियों के बचाब में हर दिन नया कारण ढूंढते नजर आते हैं और हर मुस्लिम जेहादी आतंकवादी हमले के लिए हिन्दुओं को दोषी ठहराते हैं । धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में चल रहे इस मानवता विरोधी षडयन्त्र को आज बेनकाब कर जड़मूल से समाप्त नहीं किया गया तो आने बाली पीढ़ियां वर्तमान भारतीय समाज को कभी माफ नहीं कर पांयेगी ।
आज राजनितीक दलों का खुद को धर्मनिर्पेक्ष कहलबाने वाला गठबन्धन भारत को अफगानीस्तान बनाने की राह पर अग्रसर है ये गठबन्धन जिस तरह हिन्दूत्वनिष्ठ-राष्ट्रबादी संगठनों को कमजोर करने के लिए, मुस्लिम जेहादियों के लिय किये जाने बाले कार्यों को मुसलमानो के लिए किए जाने वाले कार्य बताता है व मुस्लिम जेहादी आतंकवादियों के विरूद्ध सुरक्षबलों द्वारा की जाने बाली कार्यवाही को मुसलमानों के बिरूध कार्यवाही बताता है वो बिल्कुल वैसे ही कदम हैं जैसे कदम पाकिस्तान में समय-समय पर आने वाली सरकारों ने व अफगानीस्तान में अमेरिका ने क्रमशः मुस्लिम जेहादीयों को हिन्दूस्थान पर हमला करने व रूस को भगाने के लिये उठाय जिसके परिणामस्वरूप आज वही जेहादी पाकिस्तान व संसार के लिए भस्मासुर साबित हो रहे हैं ।
भारत पर वर्तमान में इस आतंकबादी हमले के अतिरिक्त सांस्कृतिक हमला भी बोला जा रहा है जो इस आतंकबादी हमले से कहीं ज्यादा भयानक व खतरनाक है । इस सांस्कृतिक हमले का नेतृत्व ईटालियन ईसाई एंटोनियो माइनो मारियो अपने इस देशविरोधी हिन्दूविरोधी जेहाद व धर्मांतरण समर्थक धर्मनिर्पेक्ष गठवन्धन के सहयोग से कर रही है ।
जो भारतीय संस्कृति और सभ्यता 900 बर्ष के मुस्लिम जेहादी आंतकवादियों के गुलामीकाल व 300 बर्ष के धर्मांतरण के ठेकेदार ईसाई सम्राज्यवादियों के गुलामी काल में अपने आप को अपने राष्ट्रभक्त बलिदानियों के बलिदानों व अपनी आन्तरिक मजबूती के बल पर अपने आप को बचाने में समर्थ रही वो ही भारतीय संस्कृति पिछले 50 वर्षों के हिन्दूबिरोधियों व गद्दारों के सांस्कृतिक हमलों से छिन्न-भिन्न होती नजर आ रही है क्योंकि इस 1200 वर्षों के गुलामीकाल में समस्त भारतीय समाज बोले तो हिन्दू समाज उन अत्याचारियों व विदेशियों के षडयन्त्रों के प्रति जागरूक था उनसे लोहा लेने को तत्पर था।
लेकिन वही हिन्दू समाज धर्मनिर्पेक्षता के चोले में छुपे अपने ही राष्ट्र भारत के हिन्दूविरोधी शत्रुओं को पिछले साठ वर्षों से इन गद्दारों द्वारा योजनाबद्ध भारतीय संस्कृति और सभ्यता पर किए जा रहे हमलों के बाबजूद इन देशद्रोहियों को पहचाने में असमर्थ रहा परिणामस्वरूप हिन्दू समाज ने अपूर्णीय क्षति उठाई ।इस देशविरोधी आतंकवाद समर्थक धर्मनिर्पेक्ष गठबन्धन की असलियत उस वक्त सामने आई जब इसने भारतीय संस्कृति और सभ्यता के अधार सतम्भ मर्यादा पुर्षोत्तम भगवान श्री राम के अस्तित्व को ही नकार दिया । जिसके परिणाम स्वरूप हिन्दुओं को ये सपष्ट हो गया कि क्यों ये गठबन्धन हर वक्त हिन्दू संगठनों पर हमला करता है व मुस्लिम जेहादी आतंकवादियों को अपना भाई बताता है।
इस देशद्रोही गठबन्धन की असलियत को उजागर करना ही इस पुस्तक का मूल उद्देश्य है।
किसी भी समाज में राक्षसों का जन्म लेना कोई नई बात नहीं है लेकिन समाज का उन राक्षसों के बचाब व समर्थन में खड़े होना विनाश का कारण बनता है यही सबकुछ आज मुस्लिम समाज के साथ हो रहा है एक तरफ अखण्ड भारत के हिन्दुओं वाले इस हिस्से में ये जेहादी मुस्लिम हिन्दुओं का खून बहा रहे हैं कभी कभार देशभक्त मुसलमानों पर भी हमला बोल रहे हैं तो दूसरी तरफ अखण्ड भारत के ही दूसरे हिस्सों पाकिस्तान व अफगानिस्तान में यही मुस्लिम जेहादी मुसलमानों का ही खून बहा रहे हैं ।
ये तो सनातन शांतिप्रिय संस्कृति के समर्थक हिन्दुओं की सहनशक्ति की इन्तहां है कि इन मुस्लिम ज्हादियों के शिकार हिन्दू अभी तक अपना संयम नहीं खोए हैं और मुस्लिम जेहादियों द्वारा चलाय जा रहे हिन्दू मिटाओ-हिन्दू भगाओ अभियान का जबाब उन्हीं के तरीके से नहीं दे रहे हैं । वरना आज तक न हिन्दुओं के कातिल मुस्लिम जेहादी बचते न उनके ठेकेदार भारत-विरोधी धर्मनिर्पेक्षतावादी ।
मुसलमानों को अगर मानवता के प्रति लेशमात्र भी समर्पण है तो इन्हें मिलजुलकर इस्लाम के नाम पर मार-काट मचा रहे इन मुस्लिम जेहादियों को यथाशीघ्र बिना कोई समय गवाय अपने आप मिटा देना चाहिए वरना इन मुस्लिम जेहादियों के हमलों से त्रस्त भारतीय जनता मुसलमानों में छुपे इन मुस्लिम जेहादियों को ढूंढ-ढूंढ कर मारने पर मजबूर होगी ।
इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब-जब भी हिन्दुओं के अन्दर राक्षस पैदा हुए हैं हिन्दुओं ने खुद उन राक्षसों को जड़-मूल से मिटाया है परन्तु मुसलमानों ने इसके विपरीत न केवल मुसलमानों के अन्दर पैदा होने बाले राक्षसों को समर्थन दिया है बल्कि उन्हें जेहादी का दर्जा देकर, मदरसों व मस्जिदों को उनकी शरणगाह बनाकर अपने बच्चों को उन राक्षसों के नक्से कदम पर चलने के लिए बाध्य भी किया है जिसका परिणाम आज समस्त मुस्लिम समाज भारत के सिवा सारे संसार में भुक्त रहा है ।
मुस्लिम जेहादी राक्षसों के समर्थन में मुस्लिम समाज का खड़ा होना कोई नई बात नहीं है लेकिन हिन्दुओं द्वारा धर्मनिर्पेक्षता के नाम पर इन मुस्लिम जेहादी राक्षसों का समर्थन करना व उनको आगे बढ़ाना वाक्य ही चौंकाने वाला है। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाला भारत में ऐसे राष्ट्रविरोधी मीडिया, मानवाधिकार संगठनों, लेखकों, समाजिक कार्यकर्ताओं व नौकरसाहों का पनपना है जो हर वक्त इन मुस्लिम जेहादी आंतकवादियों के बचाब में हर दिन नया कारण ढूंढते नजर आते हैं और हर मुस्लिम जेहादी आतंकवादी हमले के लिए हिन्दुओं को दोषी ठहराते हैं । धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में चल रहे इस मानवता विरोधी षडयन्त्र को आज बेनकाब कर जड़मूल से समाप्त नहीं किया गया तो आने बाली पीढ़ियां वर्तमान भारतीय समाज को कभी माफ नहीं कर पांयेगी ।
आज राजनितीक दलों का खुद को धर्मनिर्पेक्ष कहलबाने वाला गठबन्धन भारत को अफगानीस्तान बनाने की राह पर अग्रसर है ये गठबन्धन जिस तरह हिन्दूत्वनिष्ठ-राष्ट्रबादी संगठनों को कमजोर करने के लिए, मुस्लिम जेहादियों के लिय किये जाने बाले कार्यों को मुसलमानो के लिए किए जाने वाले कार्य बताता है व मुस्लिम जेहादी आतंकवादियों के विरूद्ध सुरक्षबलों द्वारा की जाने बाली कार्यवाही को मुसलमानों के बिरूध कार्यवाही बताता है वो बिल्कुल वैसे ही कदम हैं जैसे कदम पाकिस्तान में समय-समय पर आने वाली सरकारों ने व अफगानीस्तान में अमेरिका ने क्रमशः मुस्लिम जेहादीयों को हिन्दूस्थान पर हमला करने व रूस को भगाने के लिये उठाय जिसके परिणामस्वरूप आज वही जेहादी पाकिस्तान व संसार के लिए भस्मासुर साबित हो रहे हैं ।
भारत पर वर्तमान में इस आतंकबादी हमले के अतिरिक्त सांस्कृतिक हमला भी बोला जा रहा है जो इस आतंकबादी हमले से कहीं ज्यादा भयानक व खतरनाक है । इस सांस्कृतिक हमले का नेतृत्व ईटालियन ईसाई एंटोनियो माइनो मारियो अपने इस देशविरोधी हिन्दूविरोधी जेहाद व धर्मांतरण समर्थक धर्मनिर्पेक्ष गठवन्धन के सहयोग से कर रही है ।
जो भारतीय संस्कृति और सभ्यता 900 बर्ष के मुस्लिम जेहादी आंतकवादियों के गुलामीकाल व 300 बर्ष के धर्मांतरण के ठेकेदार ईसाई सम्राज्यवादियों के गुलामी काल में अपने आप को अपने राष्ट्रभक्त बलिदानियों के बलिदानों व अपनी आन्तरिक मजबूती के बल पर अपने आप को बचाने में समर्थ रही वो ही भारतीय संस्कृति पिछले 50 वर्षों के हिन्दूबिरोधियों व गद्दारों के सांस्कृतिक हमलों से छिन्न-भिन्न होती नजर आ रही है क्योंकि इस 1200 वर्षों के गुलामीकाल में समस्त भारतीय समाज बोले तो हिन्दू समाज उन अत्याचारियों व विदेशियों के षडयन्त्रों के प्रति जागरूक था उनसे लोहा लेने को तत्पर था।
लेकिन वही हिन्दू समाज धर्मनिर्पेक्षता के चोले में छुपे अपने ही राष्ट्र भारत के हिन्दूविरोधी शत्रुओं को पिछले साठ वर्षों से इन गद्दारों द्वारा योजनाबद्ध भारतीय संस्कृति और सभ्यता पर किए जा रहे हमलों के बाबजूद इन देशद्रोहियों को पहचाने में असमर्थ रहा परिणामस्वरूप हिन्दू समाज ने अपूर्णीय क्षति उठाई ।इस देशविरोधी आतंकवाद समर्थक धर्मनिर्पेक्ष गठबन्धन की असलियत उस वक्त सामने आई जब इसने भारतीय संस्कृति और सभ्यता के अधार सतम्भ मर्यादा पुर्षोत्तम भगवान श्री राम के अस्तित्व को ही नकार दिया । जिसके परिणाम स्वरूप हिन्दुओं को ये सपष्ट हो गया कि क्यों ये गठबन्धन हर वक्त हिन्दू संगठनों पर हमला करता है व मुस्लिम जेहादी आतंकवादियों को अपना भाई बताता है।
इस देशद्रोही गठबन्धन की असलियत को उजागर करना ही इस पुस्तक का मूल उद्देश्य है।
शनिवार, 31 जनवरी 2009
नापाक सेकुलर गिरोह के देशविरोधी षडयन्त्र
भारत में आज बहुत ही खतरनाक स्थिति बनती जा रही है अपने हिन्दूराष्ट्र भारत में विदेशी संस्कृति से प्रेरित मीडिया, खुद को सैकुलर कहलवाने वाले राजनीतिक दलों, बिके हुए देशद्रोही मानवाधिकार संगठनों, खुद को सामाजिक कार्यकर्त्ता कहलवाने वाले गद्दारों, आतंकवादियों व परजीवी हिन्दुविरोधी लेखकों का एक ऐसा सेकुलर गिरोह बन चुका है जो भारत को सांस्कृतिक व आर्थिक रूप से तबाह करने पर आमादा है। इस गिरोह को हर उस बात से नफरत है जिसमें भारतीय संस्कृति व राष्ट्रवाद का जरा सा भी अंश शेष है । यह गिरोह हर उस बात का समर्थन करता है जो देशद्रोही कहते या करते हैं । यह गिरोह देश की रक्षा के लिए जान खतरे में डालकर जिहादी आतंकवादियों का सामना करने वाले देशभक्त बहादुरों से अपराधियों जैसा व्यवहार कर रहा है और न जानें उनके लिए क्या-क्या अपशब्द प्रयोग रहा है। देशद्रोही जिहादियों व अन्य आतंकवादियों को बेचारा गरीब अनपढ़ व सत्ताया हुआ बताकर हीरो बनाता जा रहा है । सेवा के नाम पर छल कपट और अवैध धन का उपयोग कर भोले-भाले बनवासी हिन्दुओं को गुमराह कर उनमें असभ्य पशुतुल्य विदेशी सोच का संचार कर हिन्दुविरोधी-राष्ट्रविरोधी मानसिकता का निर्माण करने वाले धर्मान्तरण के ठेकेदारों को हर तरह का सहयोग देकर देश की आत्मा हिन्दू संस्कृति को तार-तार करने में जुटा है। यह गिरोह एक ऐसा तानाबाना बुन चुका है जिसे हर झूठ को सच व हर सच को झूठ प्रचारित करने में महारत हासिल है।
हम दाबे के साथ कह सकते हैं कि इस हिन्दुविरोधी देशद्रोही गिरोह की क्रियाप्रणाली हमेशा जिहाद व धर्मांतरण समर्थक रही है इसमें भी खतरनाक कड़बी सच्चाई यह है कि इस हिन्दुविरोधी देशद्रोही गिरोह ने कभी भारतीय संस्कृति के प्रतीकों का सम्मान करने वाले देशभक्त मुसलमानों व ईसाईयों जो खुद को हिन्दूसमाज का अभिन्न अंग व भारत को अपनी मां मानते हैं को न कभी प्रोत्साहन दिया न ही कभी उनका भला चाहा ।
इस हिन्दुविरोधी देशद्रोही गिरोह को अगर किसी की चिन्ता है तो उन जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों की जो अपनी आवादी बढ़ाकर ,धर्मांतरण करवाकर ,शान्तिप्रिय हिन्दुओं का खून बहाकर इस हिन्दूराष्ट्र भारत के फिर से टुकड़े कर इस्लामिक व ईसाई राज्य वनाने का षड़यन्त्र पूरा करने के लिए इस देशद्रोही सरकार का समर्थन पाकर अति उत्साहित होकर आगे बढ़ रहे हैं ।
देश के हिन्दुबहुल क्षेत्रों में लगातार हो रहे बम्बविस्फोट व धर्मांतरण पर जोर इसी षड़यन्त्र को आगे बढाने का हिस्सा है। सरकार द्वारा मर्यादापुर्षोत्तम भगवान श्री राम के अस्तित्व को नकारना, आतंकवादविरोधी कानून पोटा को हटाना, अफजल का समर्थन करना, धर्मांतरण विरोधी कानून न बनाना और अपनी जान जोखिम में डालकर आतंकवादियों को पकड़ने व मारगिराने वाले सेना पुलिस अर्धसैनिकबलों के जवानों को अपमानित करना व जेल में डालना यही दर्शाता है कि ये सरकार जिहादियों व धर्मान्तरण के ठेकेदारों के देशतोड़क षड्यन्त्रों को आगे बढाने के लिए कितनी आतुर है व किस हद तक गिर सकती है ।
इन सब षड्यन्त्रों का विरोध करने वाले हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों पर सरकार द्वारा बोला जा रहा हमला व इनको बदनाम करने के लिए आए दिन रचे जा रहे षड्यन्त्र सरकार की इसी मानसिकता का परिचायक है वैसे भी आप इतना तो समझ ही सकते हैं कि जो सरकार एक विदेशी इटालिएन अंग्रेज एंटोनिया माइनो मारियो की गुलाम हो वो ये सब नहीं करेगी तो और क्या करेगी ?
जरा सोचो जिन जिहादियों ने भारतीय संस्कृति के प्रतीक दर्जनों मन्दिरों को तोड़ा, हजारों हिन्दुओं को चुन चुन कर या हिन्दुबहुल क्षेत्रों में बम्बविस्फोट करके मौत के घाट उतारा, प्रजातन्त्र के सबसे बडे मन्दिर संसद भवन तक पर हमला किया, तो भला ऐसा क्या है कि इन जिहादियों ने इस गिरोह के एक भी केन्द्र पर आज तक एक भी हमला नहीं किया ?
क्योंकि मुस्लिम जिहादी इस गिरोह के देशविरोधी-हिन्दुविरोधी चरित्र से अच्छी तरह परिचित है और आतंकवादी, देशविरोधी-हिन्दुविरोधी पर हमला करें यह कैसे हो सकता है ?
वैसे तो आप समझ ही गये होंगे कि हम हिन्दूविरोधियों के किस देशद्रोही गिरोह की बात कर रहे हैं और इस में कौन कौन हैं पर फिर भी कल कोई यह न कहे कि हिन्दू कार्यकर्ता देशद्रोहियों का नाम लिखने से डर गया इसलिए हम इनके बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे । यह देशद्रोही हिन्दुविरोधी गिरोह अपने आपको सैकुलर कहलवाना पसन्द करता है जबकि सच्चाई यह है कि यह वर्तमान भारत का सबसे ज्यादा हिंसात्मक व सांप्रदायिक गिरोह है ।
इसका एक सदस्य कांग्रेस, धर्म के नाम पर देश के विभाजन को स्वीकार कर चुकी है बचे हुए हिन्दू भारत में कानून भारतीयों की जगह भाषा, जाति, क्षेत्र, संप्रदाय के आधार पर बनाकर व अल्पसंख्यकवाद के नाम पर जिहादी आतंकवादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों का समर्थन कर अगले विभाजन की नींब रख चुकी है।
जबकि इसका दूसरा घटक मुस्लिमलीग वो है जिसने धर्म के नाम पर अलग देश पाकिस्तान मांगा और अलगाववादी जिहादियों के लिए आज भी प्रेरणा स्रोत है।
जबकि तीसरा घटक लैफ्ट है जिसने 1962 के युद्ध में चीन का साथ दिया तथा जिसके द्वारा चलाई जा रही हिंसा से बेकसूर देशभक्त हिन्दुओं का कत्ल किया जा रहा है जो हर वक्त भारतीय संस्कृति सभ्यता का अपमान करता है। हिन्दुओं का हर स्तर पर विरोध करता है। भारत की अखण्डता का विरोध करता है। माओवादी व नक्सली हिंस्सा का सूत्रधार है। मार्च 2006 में जिहादियों के साथ मिलकर संसार में अमेरिका द्वारा मारे जा रहे मुस्लिम आतंकवादीयों के विरोध में प्रदर्शन करवाता है व मुस्लिम गुंडों से हिन्दुओं पर हमले करवाता है।
इसका चौथा व पाँचवां घटक समाजवादी पार्टी व राष्ट्रीय जनता दल वे हैं जो सिमी उर्फ इंडियन मुझाहिदीन जैसे आतंकवादी गैंग पर प्रतिबन्ध लगाने का विरोध करते हैं मुस्लिम आतंकवादियों को खुश करने के लिए हिन्दुओं का खून बहाने का समर्थन करते हैं तथा राष्ट्रवादी हिन्दूसंगठनों पर प्रतिबंध की मांग कर खुद को बाबर की औलाद सिद्ध करते हैं।
इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी गिरोह का सातवां घटक वो है जो इनके जैसा देशद्रोही दिखने के लिए बंगलादेशी घुसपैठियों को भारत की नागरिकता देने की मांग करता है l
जरा सोचो अगर ये घटक देशभक्त होते तो भला ऐसे देशद्रोही काम करते ? कभी नहीं
इसके अतिरिक्त इस सेकुलर गिरोह के कई और सहयोगी हैं जो अभी राष्ट्रवाद और देशद्रोह में से किसी एक सपष्ट दिशा में नहीं हैं उनके द्वारा भविष्य में किए जाने वाले काम ही यह तय करेंगे कि वो हर हाल में इस देशविरोधी-हिन्दुविरोधी सेकुलर गिरोह का साथ देते हैं या इस गिरोह के देशविरोधी-हिन्दुविरोधी कामों से तंग आकर राष्ट्रवाद की ओर मुड़ जाते हैं।
अगर ये गिरोह किसी ईसाई या मुस्लिम बहुल देश में होता और ठीक इसी तरह ईसाईयों या मुसलमानों के विरोध में काम करता जैसे हिन्दुओं के विरोध में कर रहा है तो या तो ऐसे गिरोह के नेताओं को फाँसी पर लटका दिया जाता या लोग पत्थरों से पीट-पीट कर इनकी हत्या कर देते पर ये सब हो रहा है शान्तिप्रिय हिन्दुओं की मातृ भूमि भारत में और वो भी हिन्दुओं को यहां से खदेड़ने के लिए फिर भी देश के गद्दार अभी तक जिन्दा हैं व अपनी मां का सौदा सरे बाज़ार कर रहे हैं !
पिछले दिनों इस देशद्रोही गिरोह ने सोराबुदीन के बहाने यह सिद्ध करने का प्रयत्न किया कि भारत में निर्दोष मुसलमानों पर अत्याचार किए जा रहे हैं पर सच्चाई यह है कि सोराबुदीन एक जिहादी आतंकवादी था न कि कोई सूफी सन्त । इस आतंकवादी के घर से दर्जनों एके-47 व हैंडग्रनेड मिले थे। जरा सोचो इन हथियारों का इस्तेमाल किसके विरूद्ध किया जाना था स्पष्ट है हिन्दुओं के विरूद्ध। जिन जवानों ने इस आतंकवादी को मारा उन्होनें सैंकडों निर्दोष हिन्दुओं के जानमाल की रक्षा की। अगर यह गिरोह ऐसे दुर्दाँत आतंकवादी को बेचारा निर्दोष मुसलमान कहकर प्रचारित करता है तो यह इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी गिरोह की तालिबानी मानसिकता नहीं तो और क्या है ?
हमें तो कई बार ऐसा लगता है जैसे मानो इस गिरोह से जुड़े लोग भारत माता को अपनी मातृ भूमि ही नहीं मानते अगर ये भारत माता को अपनी मातृ भूमि मानते होते तो देशद्रोही जिहादियों के समर्थन में यूँ न खड़े होते वेचारा, अनपढ़, सत्ताया हुआ कहकर उनके द्वारा बम्बविस्फोटों में बहाये गए निर्दोषों के लहू को जायज ठहराने का नीच प्रयास न करते, न ही मुठभेड़ों में मारे गये देशद्रोही जिहादियों के मामले उछाल कर सुरक्षाबलों को बदनाम करने का घिनौना अपराध करते !
क्या इस गिरोह ने कभी कश्मीर घाटी में मुस्लिम जिहादियों द्वारा चलाए गए हिन्दू मिटाओ हिन्दू भगाओ अभियान(जिसमें हजारों हिन्दुओं को हलाल कर मारा गया व लाखों हिन्दुओं को अपना घरबार छोड़कर भागने को मजबूर किया गया, जिस जिहाद के दायरे में अब सारे हिन्दुस्थान को लेने का प्रयास हिन्दुओं के धार्मिकस्थलों व हिन्दुबहुल क्षेत्रों में किए जा रहे बम्बविस्फोटों से स्पष्ट दिख रहा है)के विरोध में कभी इतनी प्रखर आवाज उठाई जितनी ये लोग पिछले छः वर्षो से गुजरात के बारे में उठाए हुए हैं वो भी तब जब गुजरात में पहले हमला गोधरा में रेल के डिब्बे में अठाबन हिन्दुओं को जिन्दा जलाकर व 43 को घायल कर जिहादी मानसिकता वाले मुसलमानों ने किया था । बाद में हिन्दुओं द्वारा आत्मरक्षा में प्रतिक्रियास्वरूप हुई हिंसा में उनके समर्थक व दुर्घटनाबस कुछ आम मुसलमान व हिन्दू भी मारे गये थे किसी ने यह कहने की जहमत न उठाई कि अगर मुसलमान हिन्दुओं पर हमला न करते, शान्तिप्रिय हिन्दुओं को जिन्दा न जलाते, तो न दंगे होते न कोई मरता ।
क्या आपने कभी इस गिरोह को हर रोज शहीद हो रहे सुरक्षाबलों के जवानों व आए दिन बहाए जा रहे निर्दोष हिन्दुओं के खून के विरोध में आवाज उठाते हुए देखा ?
क्या शहीद हुए जवानों व हिन्दुओं के परिवारों के सामने आ रही विपत्तियों को इतने जोर-शोर से उठाते हुए देखा ?
जितने जोर-शोर से ये शान्तिप्रिय हिन्दुओं का खून बहाने वाले जिहादियों के लिए उठाते हैं नहीं न, क्यों ?
क्योंकि इस देशद्रोही गिरोह को तो चिन्ता सिर्फ आतंकवादियों व उनके परिवारों की है न कि देश की रक्षा की खातिर बलिदान होने वाले जवानों व हिन्दुओं की ।
कश्मीर में कुछ महीने पहले आपने देखा कि किस तरह जिहादियों के शवों को जमीन से खोद कर निकालते हुए दिखाया गया और कहा गया कि ये जिहादी आतंकवादी निर्दोष हैं घन्टों इसका प्रसारण किया जाता रहा वो भी लाइब । जिहादियों को आम मुसलमान बताकर उनके समर्थन में प्रदर्शन करते हुए दिखाया गया । जिन देशभक्त सुरक्षाबलों के जवानों ने अपने प्राणों की परवाह न करते हुए इन आतंकवादियों को मार गिराया, को वहां की देशद्रोही सरकार के साथ मिलकर जेल में डलबा दिया गया । जिस सरकार का मुखिया माननीय सर्वोच्च न्यायालय से फाँसी की सजा प्राप्त देशद्रोही जिहादी आँतकतवादी को बचाने का प्रयत्न करता है वो सरकार देशद्रोहियों की नहीं तो और किसकी है ?
उन्हीं दिनों रजौरी में जिहादियों ने छः हिन्दुओं को हलाल किया इससे पहले 2 मई 2006 को डोडा व उधमपुर में 36 हिन्दुओं को एक साथ जिहादी आतंकवादियों द्वारा कत्ल किया गया तो भला इस देशद्रोही मीडिया ने कितने घंटे सीधा प्रसारण किया ? कितने अनाथ बच्चों जो जिहादी आतंकवादियों की वजह से लावारिस हो गए के साक्षात्कार दिखाए ? कितनी महिलाओं जिनके सुहाग इन मुस्लिम जिहादी आतंकवादियों ने उजाड़ दिए, जिनके छोटे-छोटे बच्चे हलाल कर दिए गए, का दुख इस हिन्दुविरोधी देशद्रोही मीडिया ने दिखाया ।
गुजरात में कुछ महीने पहले एक मुस्लिम जिहादी लड़की इसरत जहां मारी गई जिसके बारे में इस देशद्रोही मीडिया व जिहाद समर्थकों ने सारी दुनिया में अफवाह फैला दी कि यह लड़की निर्दोष है और गुजरात की सरकार मुस्लिम विरोधी है इसलिए इसे पुलिस ने मार गिराया । इस मुस्लिम जिहादी लड़की के जनाजे में जिहाद समर्थक कांग्रेसियों व समाजवादियों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया । कुछ चैनलों ने इसका सीधा प्रसारण किया । जैसे अपने देशद्रोही चरित्र को दिखाने के लिए ये काफी न हो महाराष्ट्र की कांग्रेस सरकार ने मुस्लिम जिहादी लड़की की मौत पर मुआब्जा भी दिया । क्योंकि यह लड़की महाराष्ट्र की थी इस लिए जांच का जिम्मा महाराष्ट्र पुलिस के विशेष दल(ए टी एस) को सौंपा गया। गहन छानबीन के बाद यह पाया गया कि यह लड़की आतंकवादी थी । जिहादी संगठनों ने खुद इसे अपना सहयोगी बताकर उसे इस्लाम के लिए शहीद बताया ।
अब जरा आप ही सोचो कि खुद को सैकुलर कहलवाने वाला यह देशद्रोही राजनैतिक दलों व गद्दार मीडिया का गिरोह जिहादी आतंकवादियों का बार-बार उनके मुस्लिम होने के नाम पर समर्थन कर सब के सब मुस्लिमों पर आतंकवादी होने का ठप्पा लगा रहा है कि नहीं ?
पिछले सोलह वर्षों से यह देशद्रोही गिरोह एक झूठ बार-बार बड़ी बेशर्मी से दोहराए जा रहा है कि बाबरी मस्जिद गिरा दी । हम इस देशद्रोही गिरोह की जानकारी के लिए यह वता दें कि 1992 में हिन्दूकार्यकर्त्ताओं ने कारसेवा श्री राम मन्दिर के जीर्णोद्धार के लिए की थी न कि किसी मस्जिद को गिराने के लिए अगर भरोसा न हो तो अपने सहयोगी कांग्रेस से पता कर लें कि 1986 में कांग्रेस सरकार के प्रधानमन्त्री स्वर्गीय राजीव जी ने जिस पूजास्थल पर लगा ताला खुलवाया था व पूजा की थी वो मन्दिर था या मस्जिद ? हमें तो हैरानी होती है कि जिस मन्दिर में पूजा होती थी वो गिरने के बाद इन हिन्दू-विरोधियों के लिए मस्जिद कैसे हो गई ?
वैसे भी इस देशद्रोही गिरोह व उसके सहयोगियों को छोड़ कर बच्चा- बच्चा जानता है कि अयोध्या भगवान राम जी की जन्मभूमि है। जहां पर आक्रांता बाबर के शासन से पहले भगवान राम जी का भव्य मन्दिर था जिसके ऊपर के हिस्से को, जिहादी बाबर के आदेश से उसके सेनापति मीरबाकी ने, मस्जिदनुमा बनवा दिया था । जिस मस्जिदनुमा ढांचे में कभी नमाज तक अता नहीं की गई भला उस ढांचे को कोई विवेकशील व्यक्ति मस्जिद कैसे कह सकता है ? हम तो चाहेंगे कि यह गिरोह देश को बताए कि मक्का मदीना में कितने मन्दिर या चर्च हैं ?
एन डी ए की सरकार के दौरान भारत यात्रा पर आए ईरान के धार्मिक प्रमुख खातमी जी ने स्पष्ट कहा “ जिस स्थान पर एक बार भी पूजा की गई हो उसे किसी भी स्थिति में मस्जिद नहीं कहा जा सकता । अगर इतना काफी न हो तो यह देशद्रोही हिन्दुविरोधी गिरोह यह बता दे कि अगर पूर्वजों की निशानी पर कोई आक्रमणकारी कब्जा कर ले तो उसे छुड़बाना बच्चों का फर्ज है कि नहीं ?
अन्त में इन जयचन्द की सन्तानों से हम इतना ही कहेंगे कि अगर हो सके तो सच का सामना करना सीखो और सच यही है कि अयोध्या में भगवान राम जी का मन्दिर था, है और रहेगा चाहे ये हिन्दुविरोधी जितना मर्जी जोर से चिल्लाते रहें सच तो सच है इसे दबाया नहीं जा सकता ।
अगर इस गिरोह में जरा सी भी इन्सानियत नाम की चीज या फिर माननीय न्यायालय के प्रति जरा सा भी सम्मान बाकी है तो इसे चाहिए कि माननीय न्यायालय का फैसला आने तक यथास्थिति का पालन करते हुए मन्दिर शब्द का प्रयोग करे या फिर अपना जहरीला प्रचार बन्द रखे अन्यथा माननीय न्यायालय का फैसला सत्य के पक्ष में आने पर होने वाले जान माल के नुकसान की जिम्मेवारी लेने के लिए तैयार रहे !
क्योंकि इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी गिरोह का झूठा और जहरीला प्रचार न केवल मुस्लिम जिहादियों को आम मुसलमानों को भड़काने का मसाला देता है पर साथ ही विदेशों में इस झूठ को फैलाकर धन इकट्ठा करने का मौका भी देता है। उसी धन से हथियार खरीद कर हिन्दुओं को शहीद किया जाता है।
हो सकता है उसी धन का कुछ हिस्सा शायद इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी गिरोह की जेब में भी जाता हो वरना ऐसा कैसे हो सकता है कि यह गिरोह शान्तिप्रिय को हिंसक, देशभक्त को देशद्रोही, सर्वधर्मसमभाव के जन्मदाता पोषक व समर्थक शान्तिप्रिय हिन्दुओं को सांप्रदायिक व आतंकवादी सिद्ध करने का बार-बार असफल प्रयत्न करता है और बेनकाब होता जाता है। इनका यह जहरीला प्रचार कहीं न कहीं शान्तिप्रिय आस्तिक हिन्दुओं को भी उत्तेजित करता है। माना के हिन्दू शांतिप्रिय है सनातन में विश्वास रखता है पर हर बात की एक हद होती है !
मुस्लिम जाहादियों द्वारा तोड़ा गया शिबलिंग
ये लेख लिखना हमनें तब शुरु किया था जब यह घर्मनिर्पेक्ष गिरोह मुस्लिम जिहादी आतंकवादी संगठन सिमी उर्फ इंडियन मुझाहिदीन का बचाव कर आम मुसलमानों को भड़काकर इस आतंकवादी संगठन के साथ खड़े होने के लिए प्रेरित कर रहा था। जिसका परिणाम बाटाला हाऊस मुठभेड़ के बाद जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के उपकुलपति के नेतृत्व में देशद्रोही मुस्लिम आतंकवादियों के समर्थन में निकाली गई रैली के रूप में देखने को मिला । इस विश्वविद्यालय के जिहादियों के साथ सम्बन्धों की जांच भारतीय सेना से करवाई जानी चाहिए ।
हमें ये भी जानकारी मिली है कि इस विश्वविद्यालय को सब मुस्लिम आतंकवादियों के गढ़ साउदी अरब से भी आर्थिक सहायता मिलती है। अगर ये सत्य है फिर तो यह स्पष्ट है कि ये विश्वविद्यालय मुस्लिम आतंकवादियों को अपने यहां शरण देता है जो एक तरह से भारत के विरूद्ध युद्ध की तैयारी जैसा है । वैसे भी हम इन सैकुलर गद्दारों से जानना चाहेंगे कि क्या एक जिहादी देश के पैसे से चल रहे विश्वविद्यालय द्वारा मुस्लिम आतंकवादियों का समर्थन करना देशद्रोह नहीं तो और क्या है ?
जागो ! हिन्दू जागो !
बाद में ये सैकुलर गिरोह खुद इन देशद्रोही मुस्लिम जिहादी आतंकवादियों के समर्थन में उत्तर आया और शहीद मोहन चन्द शर्मा जी के नेतृत्व में पुलिस जवानों की बहादुरी और बलिदान को गाली-गलौच करते हुए न्यायिक जांच की मांग करने लगा।
यह वही गिरोह है जिसके नेतृत्व में सारे भारत में वन्देमातरम् का गान करने का फैसला किया गया लेकिन मुठीभर देशद्रोही मुस्लिम आतंकवादियों द्वारा वन्देमातरम् का विरोध इस आधार पर किए जाने पर कि वन्देमातरम् का गान उनकी जिहादी मानसिकता के विरूद्ध है। इस गिरोह की सरकार ने वन्देमातरम् गाने का फैसला वापिस लेते हुए यह कह दिया कि जिसको गाना है वो गाए जिसको नहीं गाना है वो न गाए।
· इस फैसले से एक तो राष्ट्रगीत का अपमान किया गया !
· दूसरे देशद्रोही मुस्लिम आतंकवादियों का हौंसला बढ़ाया गया !
· तीसरा आम मुसलमान को वन्देमातरम् का विरोधी घोषित कर दिया !
· जब ये देशविरोधी मानसिकता वाले देशद्रोही परिवार नियोजन जैसे कार्यक्रमों का विरोध करते हैं और अधिक से अधिक बच्चे पैदा कर देश के इस्लामीकरण की बात करते हैं तो ये सैकुलर गिरोह आम देशभक्त मुसलमान को परिवार नियोजन जैसे कार्यक्रमों के लाभ बताकर उसके साथ खड़ा होने के बजाए जिहादी मानसिकता वाले देशद्रोहियों का साथ देता है और परिवार नियोजन जैसे कार्यक्रमों का विरोध करता है।
परिवार नियोजन का समर्थन करने वालों को सांप्रदायिक कहकर आम देशभक्त मुसलमानों को डराकर जिहादी मानसिकता वाले देशद्रोहियों का साथ देने के लिए मजबूर करता है फिर मुसलमानों की गरीबी का ढिंढोरा पीटने के लिए सच्चर कमेटी बनाता है
अब इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी सैकुलर गिरोह को कौन समझाये कि बिना परिवार नियोजन के विकास सम्भव नहीं।
· चौथा मुठीभर अलगावबादी मानसिकता वाले सिरफिरों द्वारा वन्देमातरम् व परिवार नियोजन के विरोध को सब मुसलमानों की राय बताकर सब के सब मुसलमानों पर देशद्रोही होने का लैबल चिपका दिया ।
अब आप ही सोचो कि यह गिरोह देशद्रोही मुस्लिम आतंकवादियों का समर्थक है या आम देशभक्त मुसलमान का ?
हमारे विचार में यह गिरोह सिर्फ देशद्रोही मुस्लिम आतंकवादियों का समर्थक है न कि आम देशभक्त मुसलमान का क्योंकि यह गिरोह हर तरह से आम देशभक्त मुसलमान का नुकसान ही कर रहा है।
एक तरफ यह देशद्रोही गिरोह मुहम्मद अफजल, सोराबुदीन व आतिफ जैसे देशद्रोही मुस्लिम आतंकवादियों का समर्थन कर आम देशभक्त मुसलमानों के बच्चों को साफ संदेश दे रहा है कि तुम आतंकवादी बनो सारा सैकुलर बोले तो देशद्रोही गिरोह आपका सुरक्षा कवच बनकर खड़ा है !
दूसरी तरफ बहुत सी मस्जिदों व मदरसों पर इस अलगावबादी मानसिकता वाले आतंकवादियों के कब्जे की वजह से इस्लाम में ब्यापत बुराईयों को समाप्त करने के बजाए उल्टा उनका समर्थन कर इन बुराईयों को बढाबा देकर आम देशभक्त मुसलमानों के बच्चों व देश को एक ऐसे गर्त में धकेलता चला जा रहा है जिसका परिणाम अफगानिस्तान व पाकिस्तान के कबाइली इलाकों जैसी जाहलिएत है न कि जन्नत जो कि ये जिहादी मानसिकता वाले आतंकवादी इस गिरोह की सहायता से प्रचारित कर रहे हैं।
अगर इस सेकुलर गिरोह का ये आतंकवाद प्रेम व हिन्दूविरोध इसी तरह जारी रहा तो वो दिन दूर नहीं जब भारत में भी अफगानीस्तान जैसे हालात वन जायेंगे और हर जगह तालिबान ही नजर आयेंगे।
अगर इन्हें आम मुसलमान की चिन्ता होती तो ये अल्पसंख्यकवाद व धर्मनिर्पेक्षता के बहाने देशद्रोही मुस्लिम जिहादी आतंकवादियों का समर्थन कर व शान्तिप्रिय हिन्दुओं और उनके राष्ट्रवादी संगठनों का खौफ दिखाकर आम मुसलमान को राष्ट्र की मुख्यधारा से काटने का यूँ प्रयत्न न करते बल्कि इस सत्य का एहसास करवाते कि वेशक दोनों की पूजा-पद्धति अलग-अलग है पर दोनों के पूर्वज एक ही हैं ।
क्योंकि आक्रमणकारी जिहादियों के साथ तो कुछ गिनेचुने जिहादी ही आए थे। आम मुसलमान वो परावर्तित हिन्दू हैं जो औरंगजेब और बाबर जैसे राक्षसों के अत्याचारों से तंग आकर इस्लाम अपनाने को मजबूर हुए और इस सैकुलर गिरोह की भारतीय संस्कृति विरोधी फूट डालो और राज करो के देशद्रोही षड्यन्त्रों की वजह से आज तक मजबूर हैं वरना इन मुठीभर देशद्रोही मुस्लिम आतंकवादियों में कहाँ इतना दम था कि इन आम देशभक्त मुसलमानों की आवाज को इस तरह दबाकर रखते और इनके होनहार बच्चों को आतंकवाद की उस अंधेरी गली में धकेलते जिसके रास्ते सीधे जहन्नुम में खुलते हैं ।
आम देशभक्त मुसलमान न तो जिहादी है,न आतंकी है, न ही कट्टर और न ही औरंगजेब और बाबर जैसे राक्षसों की संतान। ये तो भगवान राम की उस संतान की तरह है जो मन्दिर जाती है फर्क सिर्फ इतना है कि इसकी पूजा पद्धति थोड़ी अलग है । सारा मामला जयचंद के वंशज इस देशद्रोही गिरोह व औरंगजेब और बाबर जैसे राक्षसों की संतानों इन मुठ्ठीभर देशद्रोही मुस्लिम जिहादी आतंकवादियों के द्वारा उलझाया हुआ है।
अगर आपको लगता है कि मामला इतना सीधा नहीं है तो जरा इस बात की ओर ध्यान दो ।
Ø हम दावे के साथ कह सकते हैं कि जिन हिन्दुओं व राष्ट्रवादी संगठनों का नाम लेकर आम देशभक्त मुसलमानों को डराया व उकसाया जाता है उनमें से किसी को भी अपने इन मुस्लिम भाईयों के मस्जिद जाने पर कोई आपत्ति नहीं है और न ही इन मुस्लिम भाईयों को हिन्दुओं के मन्दिर जाने या मूर्तिपूजा करने पर कोई आपत्ति हो सकती है।
Ø लेकिन औरंगजेब और बाबर जैसे राक्षसों की संतानों को व इस देशद्रोही सैकुलर गिरोह को, हिन्दुओं के मन्दिर जाने, मूर्तिपूजा करने और यहाँ तक कि हिन्दुओं के आस्तिक होने पर ही घोर आपत्ति है तभी तो यह गिरोह एक तरफ माननीय सर्वोच्चन्यायालय में सपथपत्र देकर घोषणा करता है कि भगवान राम हुए ही नहीं और दूसरी तरफ इनके लाडले देशद्रोही मुस्लिम जिहादी आतंकवादी मन्दिरों में बम्ब विस्फोट करते हैं ।
यह सैकुलर गिरोह यह भूल जाता है कि ये सबकुछ तबतक चल रहा है जब तक हिन्दू इनकी असलिएत से अनभिज्ञ है व अपने शान्तिप्रिय स्वभाव को नहीं छोड़ता लेकिन अब इनकी असलिएत बड़ी तेज गति से बेनकाब हो रही है और हिन्दू समझ रहा है कि जो शहीद मोहनचन्द शर्मा जी के बलिदान का अपमान कर रहे हैं वो भला देशभक्त कैसे हो सकते हैं ? जो देश के लिए प्राण जोखिम में डालकर देशद्रोहियों को पकड़ने व मारगिराने वाले सैनिकों व पुलिस के जवानों को शक की निगाह से देखते हैं उनकी शहीदी का अपमान करते हैं व देशद्रोही मुस्लिम जिहादी आतंकवादियों का समर्थन करते हैं उनके समर्थन में रैलियां धरने प्रदर्शन जुलूस निकालते हैं इनकी खातिर कोर्ट पहुंचते हैं कोर्ट को गुमराह करने का जोर-शोर से प्रयास करते हैं फिर फैसला सत्य और न्याय के पक्ष में आने पर माननीय सर्वोच्चन्यायालय तक का अपमान करते हैं व आदेश नहीं मानते व माननीय सर्वोच्चन्यायालय तक को अपनी सीमा में रहने और इनके देशविरोधी कामों में हस्ताक्षेप न करने की धमकी तक दे डालते हैं । मानो ये सब काफी न हो तो इनके समर्थन से पलने वाले आतंकवादी न्यायालय परिसर,पुलिस व सेना के शिविरों और गाड़ियों में बम्ब विस्फोट कर डालते हैं मानो कि के कह रहे हों जब संइयां भय सरकार तो फिर डर काहे का ।
ü यही वजह है कि जब भी हम हिन्दू बोलते हैं तो उसका अभिप्राय उन सभी भारतीयों से है जो भारत भूमि को सच्चे मन से अपनी मातृभूमि मानते हैं भारतीय संस्कृति को अपनी संस्कृति मानते हैं भारत के शत्रु को अपना शत्रु मानते हैं फिर वो चाहे पूजा के लिए मन्दिर या गुरूद्वारा या मस्जिद या गिरजाघर कहीं भी जाएं या फिर कहीं भी न जाएं या फिर सब जगह जाएं उसके देशभक्त भारतीय अर्थात हिन्दू होने पर कोई फर्क नहीं पड़ता । इस हिन्दू को एक दूसरे की पूजा पद्धति पर कोई आपत्ति नहीं होती ।
ü आप जरा सोचो कंधार काबुल जो कभी भारत था अफगानिस्तान बनकर गृहयुद्ध का शिकार क्यों है ? सिंध , ब्लूचीस्तान, कराची, लाहौर, ढाका जो 60 वर्ष पहले भारत था आज आन्तरिक मार-काट का शिकार क्यों है ? लोग वही हैं, जमीन वही है, सब कुछ वही है बस फर्क पड़ा तो इतना कि वो खुद को हिन्दू नहीं मानते ।
ü हम बाहर की बात क्यों करें जरा भारत को ही ध्यान से देखें कि कहां-कहां अलगाववाद है, हिंसा है, दंगा है, अशांति है सिर्फ वहां पर जहां-जहां खुद को हिन्दू न मानने वालों की संख्या प्रभावशाली है जैसे कि कश्मीरघाटी,आसाम,गोधरा, कंधमाल,मऊ, उत्तर-पूर्व के कई हिस्से। देश में और भी कई स्थान ऐसे हैं जहां खुद को हिन्दू न मानने वाले अकसर हिन्दुओं पर हमला करते रहते हैं और यह सैकुलर गिरोह हमलावरों के समर्थन में हिन्दुओं व उनके संगठनों को सांप्रदायिक, कातिल,गुंडा प्रचारित कर बदनाम करने के लिए विश्वव्यापी अभियान चलाता रहता है
ü यह मूर्खों का गिरोह इतना भी सोचने का कष्ट नहीं करता कि अगर हिन्दुओं व उनके संगठनों को ही इस्लाम या ईसाईयत मिटाओ अभियान चलाना हो तो वो हिन्दुबहुल क्षेत्रों मे शुरू करें और सारे भारत में एक साथ चलाएं न कि उन क्षेत्रों में जहां इस्लाम या ईसाईयत को मानने वाले या तो बहुसंख्यक बन गय हैं या बहुसंख्यक बनने के कगार पर पहुंच गए हों जबकि सच्चाई यह है कि हिन्दुओं व उनके संगठनों को इस्लाम या ईसाईयत से कोई समस्या नहीं ।
समस्या है तो उन देशद्रोहियों से है जो इस्लाम के बहाने जिहादी मानसिकता का प्रचार-प्रसार व समर्थन करते हैं व खुद को औरंगजेब और बाबर जैसे नरभक्षीयों की संतान कहलवाने में गर्व महसूस करते हैं या सेवा के नाम पर ईसाईयत के प्रचार-प्रसार के बहाने हिन्दूधर्म की निंदा कर हिन्दूधर्म विरोधी महौल बनाकर छल-कपट से जबरन धर्माँतरण को बढ़ावा देते हैं व धर्माँतरण का विरोध करने वाले परम पूजनीय स्वामी लक्ष्मणानन्द सरस्वती जी जैसे देशभक्त समाजसेवकों और सन्तों का कत्ल करते हैं ।
Ø इस देशद्रोही गिरोह को हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि खुद को औरंगजेब और बाबर जैसे नरभक्षियों की संतान कहलवाने वाले इन मुठ्ठीभर देशद्रोही मुस्लिम आतंकवादियों व धर्माँतरण करवाने वालों के लिए इस देश में न कोई जगह है और न ही कोई जगह हो सकती है फिर भी इस गिरोह को अगर विषय स्पष्ट नहीं तो हम इनके सामने वो सच्चाई रखने का प्रयास करेंगे जिसे आज हर देशभक्त महसूस करता है पर कहने से बचता है शायद इस उम्मीद में कि मानवता के शत्रु अपने आप मानवता को लहूलुहान करना छोड़ देंगे पर वो यह भूल जाता है कि राक्षस के मुँह अगर एक बार खून लग जाए तो वह तब तक नहीं रूकता जब तक सामने वाला खत्म न हो जाए या फिर इस राक्षस को खत्म न कर दिया जाए । हमारे विचार में भारत से अब इस राक्षस को मिटा देने का वक्त आ चुका है !
आप समझ ही गये होंगे कि हम किस राक्षस की बात कर रहे हैं । जी हाँ आप बिल्कुल ठीक समझे हम मुस्लिम आतंकवाद की बात कर रहे हैं ये आतंकवाद भारत के लिए कोई नया नहीं । इसका भारत में प्रवेश सातवीं/आठवीं शताब्दी में मुहम्मदबिन कासिम के रूप में सिंध के रास्ते हुआ जिसका असली राक्षसी चेहरा महमूदगजनबी ,औंरगजेब, बाबर, चंगेजखां ,जहांगीर आदि के रूप में सामने आया। इन राक्षसों ने हिन्दुओं पर कौन से जुल्म नहीं ढाए। अनगिनत हिन्दुओं का कत्ल किया, माताओं, बहनों, बहु, बेटियों, बच्चों तक को नहीं बख्शा माताओं, बहनों, बहु, बेटियों की इज्जत से खिलवाड़ किया सो अलग और ये सब हुआ मुस्लिम जिहाद के नाम पर ईस्लाम के प्रसार के लिए।
आस्था विश्वाश भाईचारे का कौन सा ऐसा चिन्ह है जिसे इन जिहादियों ने बख्शा ?
बेहिसाब मन्दिरों को लूटा और तोड़ा प्रमाण ढूँढने की जरूरत नहीं प्रमाण देश के हर कोने में मौजूद हैं सोमनाथ, अयोध्या,मथुरा और काशी के बारे में कौन नहीं जानता । कोई तो बताए ये सब कैसे भुलाया जा सकता है ? और क्यों भुलाया जाना चाहिए? इस देश की मिट्टी का एक-एक कण इन नरभक्षी मुस्लिम आतंकवादियों द्वारा किए गय कत्लेआम से सना है इस परंपरा का पालन मुस्लिम कम, सैकुलर गिरोह ज्यादा करने पर तुला हुआ है ।
गुरू तेगबहादुर जी की कुर्बानी को कौन भुला सकता है क्या यह झूठ है कि वह जिहाद का शिकार सिर्फ इसलिए हुए क्योंकि उन्होंने धर्मांतरण का विरोध किया ?
श्री गुरूगोविन्द सिह जी बेटों सहित बलिदान हुए किस लिए ? धर्म की रक्षा के लिए। पर किससे ? इन्हीं राक्षसों से, जिन्हें आप चाहे मुस्लिम आतंकवादी कहो चाहे जिहादी या फिर इनका बचाव करने के लिए बेचारा, गुमराह, गरीब, अनपढ़, सत्ताया हुआ मुस्लिम नौजवान ( देशद्रोही-हिन्दुविरोधी इन्हें इसी नाम से पुकारते हैं) पर सच्चाई यही है कि ये राक्षस यह सब कुछ इस्लाम पर हो रही काल्पनिक ज्यादतियों का अपने सैकुलर एजेंटों के माध्यम से झूठ फैलाकर इस्लाम के प्रचार-प्रसार के लिए जिहाद का नाम लेकर करते थे, कर रहें हैं और तब तक करेंगे जब तक इस भारत से हिन्दुओं का नामोनिशान नहीं मिट जाता या फिर इन्हें इनके समर्थकों सहित मिटा नहीं दिया जाता ।
जरा याद करो महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज का बलिदान । सारी ज़िन्दगी धर्म की रक्षा के लिए लड़े और धर्म की रक्षा के लिए बलिदान हुए। पर रक्षा किससे ? इन्हीं राक्षसों से जिन्हें यह सैकुलर गिरोह बेचारा गरीब सताया हुआ प्रचारित करके यह कुतर्क देता है कि वर्तमान भारत में यह सब हिन्दू संगठनों की वजह से हो रहा है और वो भी राम मन्दिर अंदोलन व गुजरात का बदला लेने को लिए।
लेकिन सच्ची-पक्की बात यह है कि जिस जिहाद से लड़ते हुए वह अनगिनत अमूल्य बलिदानी शहीद हुए थे उसी जिहाद का मुकाबला आज हिन्दू संगठन,सुरक्षावल व समस्त हिन्दूसमाज कर रहा है और जो गद्दारी उस वक्त जयचन्द जैसे देशद्रोहियों ने की थी वो ही गद्दारी आज ये देशद्रोहियों का सैकुलर गिरोह कर रहा है ।
· आओ जरा वर्तमान भारत में धर्म पर हो रहे हमलों का तार्किक विश्लेशण करें। दीवाली पर दिल्ली में धमाके, होली पर वाराणसी में बजरंगबली के मन्दिर में धमाके,राखी पर मुम्बई में धमाके,गणेशोत्सव पर फिर दिल्ली में धमाके ,इसके अतिरिक्त अहमदावाद, सूरत, जयपुर में मन्दिर के पास, कर्नाटक, रघुनाथ मन्दिर, अक्षरधाम मन्दिर । इन सब धमाकों में दो बातें स्पष्ट उभर कर आती हैं एक तो ये सब धमाके हिन्दुबहुल क्षेत्रों व मन्दिरों को निशाना बनाकर किए जाते हैं ताकि अधिक से हिन्दुओं को मौत के घाट उतारा जा सके और दूसरी बात यह कि ये सब धमाके उन्हीं मुस्लिम आतंकवादियों द्वारा किए जा रहे हैं जिन्हें इस गिरोह की सरकार का गृहमन्त्री सरकार में शामिल लोगों का भाई बताता है।
Ø इन सब धमाकों का एक ही उद्देश्य है शान्तिप्रिय हिन्दुओं की बर्बादी और राक्षसों का बर्चस्व स्थापित करना। जिहादियों के समर्थक यह तर्क देते हैं कि ये हमले हिन्दुओं को निशाना बनाकर नहीं किए जा रहे क्योंकि इसमें मुस्लिम भी मारे जाते हैं(इस झूठ का प्रचार करने के लिए इनका सहयोगी मीडिया धमाकों में मारे गये एक मुस्लिम को बार-बार दिखाकर इस झूठ को आगे बढ़ाकर सच को छुपाने की कोशिश करता है ) पर वो यह सच्चाई छुपाने की कुचेष्ठा करते हैं कि ऐसे धमाकों में मारे जाने वाले मुस्लिमों की संख्या न के बराबर होती है।
· जिहादियों के समर्थक यह तर्क भी देते हैं कि ये हमले तो मस्जिदों को निशाना बनकर भी किए जाते पर ये लोग यह बताने से बचते हैं कि जामामस्जिद में हुए बम्बविस्फोट में सिर्फ एक व्यक्ति घायल हुआ मरा कोई भी नहीं । मक्कामस्जिद में बम्बविस्फोट पानी की टांकी के पास हुआ न कि मस्जिद के अन्दर इसी तरह मालेगांव( यहाँ मुसलमान भगदड़ में मरे न कि धमाके से) में भी बम्बविस्फोट मस्जिद के पास हुआ न कि मस्जिद के अन्दर और ये दोनों बम्बविस्फोट दुर्घटनाबश हुए क्योंकि इन जिहादियों के प्रशिक्षण केन्द्र मदरसे हैं और संचालन केन्द्र मस्जिदें । ऐसे स्थानों पर परीक्षण के समय या दुर्घटनाबश बम्बविस्फोट होना सामान्य घटना है न कि कोई साजिश । ऐसी भी चर्चा है कि जिहादी हिन्दुबहुल क्षेत्र में बम्ब रखने जा रहे थे कि रास्ते में पड़ती मस्जिद में अपने सहयोगियों से मिलने के लिए व धमाकों से पहले नमाज पढ़ने के लिए रूके और इस बीच दुर्घटनाबस ये धमाके हो गये । वरना अगर ये बम्ब किसी हिन्दू ने लगाने होते तो मस्जिद में लगाता न कि बाहर ।
· जो लोग बार-बार हिन्दू आतंकवाद की काल्पनिक अवधारणा बना रहे हैं वो ये क्यों कैसे भूल रहे हैं कि पाकिस्तान जैसे मुस्लिम देशों में जो मस्जिदों में तबाही हो रही है वो मुस्लिम जिहादी ही तो कर रहे हैं। फिर भारत में ये सब मुस्लिम जिहादी नहीं कर रहे हैं ऐसा तो जिहादियों का बचाव करने वाले बिके हुए दलालों द्वारा ही कहा जा सकता है या फिर उन कातिलों द्वारा जिन्होंने ये धमाके खुद करवाये हों !
लेकिन जिहादियों को अपना भाई मानने वाला यह गिरोह इन जिहादियों को हीरो बनाने के लिए कुछ भी कह सकता है कुछ भी कर सकता है।
v इस सैकुलर गिरोह ने तो मानो निर्दोष शान्तिप्रिय हिन्दुओं को इन घटनाओं में झूठा फंसाकर आतंकवादी सिद्ध करने की कसम उठा रखी हो और उठांए भी क्यों न एक तरफ शहीद मोहनचन्द शर्मा जी के बलिदान का अपमान करने के मुद्दे पर अभी देशभक्त हिन्दुओं का गुस्सा शान्त भी नहीं हुआ था कि राजठाकरे के माध्यम से हिन्दुओं को क्षेत्रवाद के आधार पर लड़ाकर फूट डालो और राज करो की साजिश का पर्दाफाश हो गया। ऊपर से पिछले कई दशकों से बोले जा रहे इस झूठ का कलंक कि हिन्दू आतंकवादी हैं जब पिछले पाँच सालों के षड्यन्त्रों के बावजूद कोई हिन्दू आतंकवादी न मिला तो मरता क्या न करता इसलिए हताशा में एक निर्दोष राष्ट्रभक्त साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को ए .टी .एस पर दबाव बनाकर डलबा दिया जेल में यह भी न सोचा कि देशद्रोही हिन्दुविरोधी जिहाद समर्थक गिरोह की सरकार द्वारा निर्दोष राष्ट्रभक्त हिन्दुओं को जेल में डालकर ‘हिन्दू आतंकवादी हैं , ‘हिन्दू आतंकवादी हैं , प्रचारित करने से कोई उस पर भरोसा करने वाला नहीं क्योंकि सब जानते हैं कि जिहादी आतंकवादियों को अपना भाई बताने वाली सरकार, उनको सजा से बचाने के लिए पोटा हटाने वाली सरकार, सेना व पुलिस के बहादुर जवानों द्वारा मारे गए जिहादी आतंकवादियों के परिवारों को मुआबजा देने वाली सरकार, माननीय सर्वोच्च न्यायालय से फाँसी की सजा प्राप्त जिहादी आतंकवादी मुहम्मद अफजल को फाँसी न देकर दो वर्ष से उसे बचाकर रखने वाली सरकार ,प्रतिशोध में बेबकूफ बने हिन्दू राहुल राज को एक पल में आनॅ द स्पाट गोली मारकर फाँसी देने वाली सरकार, क्वात्रोची जैसे देशविरोधी लुटेरे एन्टोनियो माइनो मारियो के एजेंट के लंदन बैंक में देशभक्त सरकार द्वरा जब्त करवाए गए वोफोर्स काँड दलाली के पैसे को कानूनमन्त्री भेज कर छुड़वाने वाली सरकार, आसाम में बंगलादेशी घुसपैठियों के साथ मिलकर सरकार बनाकर जिहादी आतंकवादियों द्वारा हिन्दुओं को मरवाने व बेघर करवाने वाली सरकार, इन हत्यारे बंगलादेशी घुसपैठिए जिहादी आतंकवादियों को बांगलादेश वापिस भेजने के लिए माननीय सर्वोच्चन्यायालय के आदेशों को न मानने व ऐसे सभी कानूनों को तोड़ने वाली सरकार, जिहादी आतंकवादियों को कानून बनवाकर जेलों से छुड़वाने वाली सरकार , जिहादी आतंकवादियों को अपने प्राणों की बाजी लगाकर पकड़ने या मारने वाले सेना व पुलिस के बहादुर जवानों को जेलों में डलवाने वाली सरकार,शहीद मोहन चन्द शर्मा जी जैसे देशभक्तों के बलिदान का अपमान करने वाली सरकार देशभक्तों को अपमानित करने के लिए कोई भी षड्यन्त्र रच सकती है, किसी भी हद तक गिर सकती है ।
v निर्दोष राष्ट्रभक्त साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर जी को जेल में डालना इसी षड्यन्त्र का एक हिस्सा है इससे पहले भी यह सरकार राष्ट्रभक्त सन्त परम पूजनीय स्वामी रामदेव जी को अपमानित करने के लिए कई षड्यन्त्र रचकर मुंह की खाकर अपनी फजीहत करवा चुकी है । निर्दोष राष्ट्रभक्त साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर जी के मामले में भी सरकार के षड्यन्त्र का यही हश्र होने वाला है । वैसे भी जरा आप निष्पक्ष होकर सोचो कि जो सरकार हिन्दूविरोधियों को खुश करने के लिए भगवान राम जी के अस्तित्व को ही नकार सकती हो वो भला भारतीय संस्कृति को नष्ट करने के लिए क्या नहीं कर सकती है बोले तो ,कुछ भी कर सकती है ये तो सेना, राष्ट्रभक्त हिन्दुओं व उनके संगठनों का डर है जो इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह को अपने नापाक कदम पीछे खींचने पर मजबूर कर देता है वरना आज तक तो यह देशद्रोही हिन्दुविरोधी गिरोह जिहाद व धर्मांतरण समर्थकों के साथ मिलकर सारे भारत से भारतीय संस्कृति बोले तो हिन्दू संस्कृति का नामोनिशान उसी तरह मिटा देता जिस तरह कश्मीरघाटी,उत्तरपूर्व के कई क्षेत्रों से मिटाया व देश के कई अन्य हिस्सों में यह हिन्दू मिटाओ हिन्दू भगाओ अभियान जोर-शोर से चल रहा है पर यह वहीं सम्भव हो पा रहा है जहां हिन्दू संगठन बिल्कुल कमजोर हैं और हिन्दू संगठन वहां पर कमजोर हैं जहां पर राष्ट्रभक्त कम संख्या में हैं अतः सारे भारत में राष्ट्रभक्तों की संख्या बढ़ाकर व देशद्रोही हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थकों की संख्या घटाकर भारतीय सेना के हाथ मज़बूत कर भारतीय संस्कृति को बचाकर विश्वगुरू भारत का पुनःनिर्माण करने के लिए हिन्दूक्रांती देश की जरूरत है शौक नहीं ।
हिन्दुओं को आतंकवादी व कातिल बताने बाला यह झूठ इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह का कोई पहला झूठ नहीं आप सबको याद होगा कि सन 2000 में जब केन्द्र में एन.डी.ए की सरकार थी और गुजरात में भाजपा की । कुछ समय बाद आंध्रप्रदेश, गोआ, गुजरात और कर्नाटक में चर्चों पर हमले होने लगे तो हिन्दूविरोधियों के इस गिरोह ने देश-विदेश में शोर मचा दिया कि ये हमले योजनाबद्ध तरीके से अल्पसंख्यकों को खत्म करने की साजिश के तहत हिन्दूसंगठन करवा रहे हैं बाद में मीडिया का एक बढ़ा वर्ग भी इस दुष्प्रचार में शामिल हो गया । हिन्दूसंगठनों ने लाख कहा कि कि इन हमलों से उसका कोई वास्ता नहीं पर ये कहाँ सुनने वाले थे इनको तो सिद्ध करना था कि हिन्दुत्व की बात करने वाले सांप्रदायिक हैं कातिल हैं ! आप समझ सकते हैं कि निर्दोष को दोषी साबित करना कितना मुस्किल होता है ? इसलिए इस टीम ने पूरा जोर लगाया सच्चाई को दबाने में, पर सच्चाई तो सच्चाई है कहां दबती है सामने आ ही जाती है इस मामले में भी यही हुआ और सिद्ध हो गया कि ये सैकुलर गिरोह गद्दारों का वो गिरोह है जो हिन्दुओं व उनके संगठनों को बदनाम कर, देश को तवाह करने के लिए किसी भी हद तक गिर सकता है-झूठ बोल सकता है ।
आँध्रप्रदेश में दीनदार अंजुमन नामक मुस्लिम आतंकवादी गैंग के 23 जिहादी पकड़े गए जिन्होंने यह स्वीकार किया कि देश में चर्चों पर हमले इन्होंने किए थे। भगवान की दया से ये गैंग किसी भारतीय जनता पार्टी शासित राज्य में नहीं पकड़ी गई वरना ये देशद्रोही गिरोह आरोप लगा देता कि ये गलत पकड़े गए ।
क्या हिन्दुओं व उनके संगठनों को बेवजह बदनाम करने वाले इन दुष्टों ने हिन्दुओं से माफी मांगी या इस बेवकूफी से कोई सबक लिया कोई नहीं । अगर इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह के लोग इतने ही समझदार होते तो भला वो देशद्रोहियों का साथ देते क्या ?
अगर आपको इन जिहादियों के दोषी होने के बारे में कोई सन्देह है तो आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि 22 नवम्बर 2008 को माननीय न्यायालय में इनका अपराध सिद्ध हो चुका है । अगर इस हिन्दुविरोधी तालिबानी मीडिया ब सैकुलर गिरोह में शर्म नाम की कोई चीज बाकी है तो इसे सारे संसार में हिन्दुओं को कातिल कहकर फैलाए गये झूठ के लिए समस्त जिन्दुओं से माफी मांग लेनी चाहिए वरना हमें विश्वास हो जाएगा कि ये असुरों का तालिबानी गिरोह है !
आओ जरा उड़ीसा के कंधमाल की बात करें जो 15 सितम्बर से 15 अक्तूबर 2008 तक पूरे जोर-शोर से न केवल भारत बल्कि पूरे संसार के ईसाई देशों खास कर एन्टोनियो मांइनो मारियो के घर इटली के पोप शासित रोम में पूरी तरह से छाया रहा । कई धर्मांतरण समर्थक हिन्दू विरोधी मंचों पर तो आज भी ये सुर्खियों में है । हो भी क्यों न कंधमाल को पोप शासित रोम बनाने के रास्ते में देशभक्त हिन्दू व उनके संगठन जो दीवार बनकर खड़े हो गए। हम इन धर्मांतरण के ठेकेदारों को यहाँ स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि यह इटली नहीं भारत है और भारत के किसी भी हिस्से को रोम नहीं बनने देंगे और भविष्य में अगर किसी हिस्से को रोम बनाने की कोशिश की तो वहां कंधमाल नजर आएगा ।
भगवान की लीला देखो नाइजीरिया में एक दूसरे का कत्ल कर उसे नरक बना देने वाले ये ईसाई व मुसलमान, अफगानिस्तान व ईराक में मुसलमानों की हत्या के लिए ईसाईयों को पानी पी-पी कर कोसने वाले व भारत में चर्चों पर हमला करने वाले मुसलमान भी देशभक्त हिन्दुओं व उनके संगठनों पर हमला करने के मुद्दे पर धर्मांतरण समर्थक ईसाईयों के साथ आ खडे हुए और स्पष्ट कर दिया कि सारी दुनिया में भले ही ईसाई मुसलमान एक दूसरे के खून के प्यासे हों पर हिन्दूराष्ट्र भारत को तबाह करने के मुद्दे पर ये जिहादी व धर्मांतरण समर्थक एक साथ हैं।
धर्मांतरण के ठेकेदार सारे भारत में हिन्दूधर्म के बारे में दुष्प्रचार कर भारतीय संस्कृति पर हमला बोले हुए हैं ये हमला भारत के बनवासी व दूरदराज क्षेत्रों में ज्यादा तीखा स्पष्ट और आक्रामक है ईसाईयों के इस अक्रामक दुष्प्रचार से देशभक्त हिन्दू समाज व उनके संगठन आक्रोश में हैं पर अपनी शांतिप्रिय सनातन संस्कृति के कारण शांतिप्रिय ढंग से इन धर्मांतरण के ठेकेदारों को समझाने व रोकने का असफल प्रयास कर रहे हैं लेकिन ये धर्मांतरण के ठेकेदार व उनके समर्थक अपनी आदत से मजबूर हैं क्योंकि ये सनातन संस्कृति को बदनाम कर समाप्त करने की कसम उठा चुके हैं और यही इनका ब्यापार भी है इन धर्मांतरण के ठेकेदारों द्वारा किए जा रहे दुष्प्रचार को सुन कर( ईसाई संसार में फैल रहे थे, हिन्दू घबरा गये,सनातन धर्म चकनाचूर हो गया सनातन को मानने वाले ईसाई बन गये) व इन इनके द्वारा लिखे जा रहे हिन्दू विरोधी सहित्य को पढ़ कर कोई भी आम समाज उत्तेजित होकर शाम दाम दण्ड भेद का उपयोग कर इनका नामोनिशान मिटाने पर उत्तर आए लेकिन ये देशभक्त हिन्दू समाज अपनी शांतिप्रिय सनातन संस्कृति के कारण सबकुछ सहन कर रहा है पर हर बात की हद होती है इसिलिए श्रीमद् भगवतगीता में साफ कहा गया है कि जब अत्याचार की अति हो जाए तो अत्याचारियों व अत्याचारियों के समर्थकों को समाप्त कर देना चाहिए !
ü ये जम्मू, गुजरात और उड़ीसा जैसी छुटपुट घटनांए इस आक्रोशित देशभक्त हिन्दू समाज की तात्कालिक हमले की प्रतिक्रिया का टरेलर मात्र हैं ये प्रतिक्रिया कितनी व्यापक व भयानक हो सकती है इसका अन्दाजा शायद इन धर्मांतरण के ठेकेदारों, जिहादियों व इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह को नहीं है इसीलिए ये सब गद्दार बारी-बारी से लगातार भारतीय संस्कृति पर प्रहार कर देशभक्त हिन्दू समाज की आत्मा को लहूलुहान कर अपनी मौत को बुलाबा दे रहे हैं।
परपूजनीय सन्त श्री लक्ष्मणानन्द जी का कत्ल अगर ये ईसाई मिशनरी न करते तो शायद बनवासी हिन्दू समाज का धैर्य न टूटता । जैसे देश के अन्य हिस्सों में हिन्दू समाज व हिन्दू संगठन ईसाई मिशनरियों के अत्याचार सह रहे हैं अनका गाली गलौच, भारतीय संस्कृति व हिन्दू समाज की घोर निन्दा वो भी असंसदीय भाषा में, सहन कर रहे हैं कंधमाल में भी करते रहते। परन्तु कत्ल सहने का धैर्य अब जबाब दे चुका है वो भी उस निहत्थे परपूजनीय सन्त व उनके सहयोगियों का जो दिन-रात बनवासियों की निस्वार्थ सेवा में लगे हुए थे ।
उन्हें चर्च ने इसलिए कत्ल करवा दिया कि वो धर्मांतरण का विरोध करते थे । कौन सहन करेगा इस साम्राज्यवादी सोच को ? क्यों सहन करेगा ? कब तक सहन करेगा ? हमारा देश हमारे लोग हमारी जमीन और हमारे पर ही आक्रमण और वो भी उन सम्राज्यवादी ईसाई मिशनरियों का जो 1600ई. में व्यापारियों के भेष में आए और हिन्दुओं के बीच फूट डलवाकर 300 वर्ष तक भारतीय अर्थव्यवस्था व संस्कृति को तहस नहस करते रहे और देशभक्त हिन्दुओं को मौत के घाट उतारते रहे और अब ईसाई मिशनरियों के रूप में आकर धर्मांतरण करवाकर हिन्दुओं के बीच फूट डलवाने का असफल प्रयास कर रहे हैं ।
परन्तु इनको यह नहीं भूलना चाहिए कि ये महारानी लक्ष्मीबाई व भगत सिंह का देश जलियांवाला बाग में ईसाई मिशनरी डायर द्वारा मचाई गई मार काट को अभी तक नहीं भूला है और न भूलेगा इसलिए ईसाई मिशनरियों को 16वीं शताब्दी की मानसिकता समय रहते त्याग देनी चाहिए या फिर परिणाम भुगतने के लिए तैयार हो जाना चाहिए हिन्दू समाज धर्मांतरण के ठेकेदारों को बख्शेगा नहीं । परमपूजनीय सन्त लक्ष्मणानन्द जी के ऊपर ईसाई मिशनरियों का ये दसवां हमला था ।
इनकी दुष्टता की पराकाष्ठा देखो हमले के स्थान पर जो चिट्ठी छोड़ी उसमें लिखते हैं कि क्योंकि हम भारत को सैकुलर बोले तो हिन्दुविहीन बनाना चाहते हैं इस लिए हमने स्वामी जी का कत्ल किया । कौन राष्ट्रभक्त हिन्दू इस दुष्टता को सहन कर सकता है जब इनकी दुष्टता का जबाब इन्हीं के तरीके से मिलने लगा तो शोर मचा दिया कि स्वामी जी का कत्ल माओवादियों ने किया है फिर माओवादियों को पैसा देकर उनका ब्यान दिलबा दिया वरना माओवादियों को क्या जरूरत पड़ी थी उस कत्ल की जिम्मेवारी लेने की जो उनकी सोच से मेल नहीं खाता । पता तो उन अपराधीयों का लगाया जाना चाहिए जिन्होंने माओवादियों से यह झूठा ब्यान दिलवाया जांच एजैंसियों व हिन्दुओं को गुमराहकर धर्मांतरण के ठेकेदारों को निर्दोष सिद्ध करने के लिए और उनका भी जो ईसाई देशों में इस झूठ को फैलाकर हिन्दुस्थान को बदनाम कर देशद्रोही कामों को अन्जाम देने के लिए धनसंग्रह कर रहे हैं। मीडिया के उन गद्दारों का भी पता लगाया जाना चाहिए जो बार-बार हिन्दुविरोधी दुष्प्रचार कर हिन्दुओं व हिन्दुस्थान को बदनाम कर अपनी जेबें भर रहे हैं ।
v जिस वक्त ये सबकुछ उड़ीसा में घट रहा था ठीक उसी वक्त बंगलादेशी जिहादी घुसपैठियों द्वारा आसाम में देशभक्त निर्दोष हिन्दुओं को हलाल किया जा रहा था जिन्दा जलाया जा रहा था उनके घरों को जलाकर उन्हें बेघर किया जा रहा था और कर कौन रहा था विदेशी बंगलादेशी जिहादी घुसपैठिये, मुस्लिम आतंकवादी । इसी वक्त महाराष्ट्र के धुले में आतंकवाद के विरोध में हो रही रैली को रोकने के लिए जिहादियों द्वरा हिन्दुओं पर हमला कर कई हिन्दुओं का कत्ल कर दिया व सैंकड़ों हिन्दुओं को घायल कर दिया ये हिंसा लगभग पाँच दिन तक चलती रही।
v उड़ीसा में ईसाईयों द्वारा स्वामी जी की निर्मम हत्या से शुरू हुई हिंसा में कुल 30 लोग मारे गए 500 घर जलाए गए । जबकि आसाम में जिहादियों द्वारा चलाए जा रहे हिन्दू मिटाओ हिन्दू भगाओ अभियान के तहत अब तक सैंकड़ों हिन्दू मारे जा चुके हैं, हजारों घर जलाए जा चुके हैं लाखों हिन्दू बेघर हो चुके हैं अभियान आज 31अक्तूबर 2008 तक जारी है । क्या आपने इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह को (जो बटाला हाउस मुठभेड़ व उड़ीसा के बारे में तरह-तरह की बातें बना रहे थे विशेष चर्चा-परिचर्चा ,रैलियां करवा रहे थे ,जोर जोर से चिला रहे थे ,ईसाई मार दिए ईसाई मार दिए, हिन्दुओं व उनके संगठनों पर मन गढ़ंत आरोप लगाकर उन पर प्रतिबन्ध लगाने की मांग कर रहे थे ) आसाम या धुले की बात करते हुए देखा चर्चा-परिचर्चा करवाते हुए देखा या फिर हिन्दू मार दिए हिन्दू मार दिए हिन्दुओं के घर जला दिए चिलाते हुए देखा नहीं न क्यों नहीं क्योंकि ये सैकुलर हैं
v धर्मनिर्पेक्षता इन्हें हिन्दुओं को, हिन्दुओं की सभ्यता संस्कृति को बदनाम करना, हिन्दुओं के देवी देवताओं को गाली-गलौच करना, साधु संतो को अपमानित करना यहां तक कि भारत की आत्मा भगवान राम के अस्तित्व को नकारना तो सिखाती है पर हिन्दुओं पर होने वाले अत्याचार, हिन्दुओं के जानमाल के नुकसान का विरोध करना नहीं सिखाती ।
क्योंकि हिन्दुओं के जानमाल का नुकसान करने वाले ही तो इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह का वोटबैंक हैं इनके अर्थतन्त्र की रीढ़ हैं ऊपर से हिन्दुओं का समर्थन करने के बदले कोई पैसे भी तो नहीं देता !
अगर ये गिरोह हिन्दुओं पर जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों द्वारा होने वाले जुलमों-सितम के विरूद्ध आवाज उठाएगा तो इनको मुस्लिम व ईसाई देशों से मिलने वाला धन और समर्थन दोनों बन्द हो जांएगे फिर ये न हिन्दुओं को मरबा पायेंगे न धर्मांतरण करवा पायेंगे इन हालात में इनका वोटबैंक कम होता चला जाएगा। क्योंकि जिस दिन हिन्दू इनकी फूट डालो राज करो के षड्यन्त्र के चंगुल से निकलकर इनकी देशद्रोही हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक मानसिकता को जानलेगा फिर इनको वोट तो क्या इस हिन्दूराष्ट्र भारत में इनका पिंडदान करने वाला भी कोई न मिलेगा ।
हम दाबे के साथ कह सकते हैं कि इस हिन्दुविरोधी देशद्रोही गिरोह की क्रियाप्रणाली हमेशा जिहाद व धर्मांतरण समर्थक रही है इसमें भी खतरनाक कड़बी सच्चाई यह है कि इस हिन्दुविरोधी देशद्रोही गिरोह ने कभी भारतीय संस्कृति के प्रतीकों का सम्मान करने वाले देशभक्त मुसलमानों व ईसाईयों जो खुद को हिन्दूसमाज का अभिन्न अंग व भारत को अपनी मां मानते हैं को न कभी प्रोत्साहन दिया न ही कभी उनका भला चाहा ।
इस हिन्दुविरोधी देशद्रोही गिरोह को अगर किसी की चिन्ता है तो उन जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों की जो अपनी आवादी बढ़ाकर ,धर्मांतरण करवाकर ,शान्तिप्रिय हिन्दुओं का खून बहाकर इस हिन्दूराष्ट्र भारत के फिर से टुकड़े कर इस्लामिक व ईसाई राज्य वनाने का षड़यन्त्र पूरा करने के लिए इस देशद्रोही सरकार का समर्थन पाकर अति उत्साहित होकर आगे बढ़ रहे हैं ।
देश के हिन्दुबहुल क्षेत्रों में लगातार हो रहे बम्बविस्फोट व धर्मांतरण पर जोर इसी षड़यन्त्र को आगे बढाने का हिस्सा है। सरकार द्वारा मर्यादापुर्षोत्तम भगवान श्री राम के अस्तित्व को नकारना, आतंकवादविरोधी कानून पोटा को हटाना, अफजल का समर्थन करना, धर्मांतरण विरोधी कानून न बनाना और अपनी जान जोखिम में डालकर आतंकवादियों को पकड़ने व मारगिराने वाले सेना पुलिस अर्धसैनिकबलों के जवानों को अपमानित करना व जेल में डालना यही दर्शाता है कि ये सरकार जिहादियों व धर्मान्तरण के ठेकेदारों के देशतोड़क षड्यन्त्रों को आगे बढाने के लिए कितनी आतुर है व किस हद तक गिर सकती है ।
इन सब षड्यन्त्रों का विरोध करने वाले हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों पर सरकार द्वारा बोला जा रहा हमला व इनको बदनाम करने के लिए आए दिन रचे जा रहे षड्यन्त्र सरकार की इसी मानसिकता का परिचायक है वैसे भी आप इतना तो समझ ही सकते हैं कि जो सरकार एक विदेशी इटालिएन अंग्रेज एंटोनिया माइनो मारियो की गुलाम हो वो ये सब नहीं करेगी तो और क्या करेगी ?
जरा सोचो जिन जिहादियों ने भारतीय संस्कृति के प्रतीक दर्जनों मन्दिरों को तोड़ा, हजारों हिन्दुओं को चुन चुन कर या हिन्दुबहुल क्षेत्रों में बम्बविस्फोट करके मौत के घाट उतारा, प्रजातन्त्र के सबसे बडे मन्दिर संसद भवन तक पर हमला किया, तो भला ऐसा क्या है कि इन जिहादियों ने इस गिरोह के एक भी केन्द्र पर आज तक एक भी हमला नहीं किया ?
क्योंकि मुस्लिम जिहादी इस गिरोह के देशविरोधी-हिन्दुविरोधी चरित्र से अच्छी तरह परिचित है और आतंकवादी, देशविरोधी-हिन्दुविरोधी पर हमला करें यह कैसे हो सकता है ?
वैसे तो आप समझ ही गये होंगे कि हम हिन्दूविरोधियों के किस देशद्रोही गिरोह की बात कर रहे हैं और इस में कौन कौन हैं पर फिर भी कल कोई यह न कहे कि हिन्दू कार्यकर्ता देशद्रोहियों का नाम लिखने से डर गया इसलिए हम इनके बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे । यह देशद्रोही हिन्दुविरोधी गिरोह अपने आपको सैकुलर कहलवाना पसन्द करता है जबकि सच्चाई यह है कि यह वर्तमान भारत का सबसे ज्यादा हिंसात्मक व सांप्रदायिक गिरोह है ।
इसका एक सदस्य कांग्रेस, धर्म के नाम पर देश के विभाजन को स्वीकार कर चुकी है बचे हुए हिन्दू भारत में कानून भारतीयों की जगह भाषा, जाति, क्षेत्र, संप्रदाय के आधार पर बनाकर व अल्पसंख्यकवाद के नाम पर जिहादी आतंकवादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों का समर्थन कर अगले विभाजन की नींब रख चुकी है।
जबकि इसका दूसरा घटक मुस्लिमलीग वो है जिसने धर्म के नाम पर अलग देश पाकिस्तान मांगा और अलगाववादी जिहादियों के लिए आज भी प्रेरणा स्रोत है।
जबकि तीसरा घटक लैफ्ट है जिसने 1962 के युद्ध में चीन का साथ दिया तथा जिसके द्वारा चलाई जा रही हिंसा से बेकसूर देशभक्त हिन्दुओं का कत्ल किया जा रहा है जो हर वक्त भारतीय संस्कृति सभ्यता का अपमान करता है। हिन्दुओं का हर स्तर पर विरोध करता है। भारत की अखण्डता का विरोध करता है। माओवादी व नक्सली हिंस्सा का सूत्रधार है। मार्च 2006 में जिहादियों के साथ मिलकर संसार में अमेरिका द्वारा मारे जा रहे मुस्लिम आतंकवादीयों के विरोध में प्रदर्शन करवाता है व मुस्लिम गुंडों से हिन्दुओं पर हमले करवाता है।
इसका चौथा व पाँचवां घटक समाजवादी पार्टी व राष्ट्रीय जनता दल वे हैं जो सिमी उर्फ इंडियन मुझाहिदीन जैसे आतंकवादी गैंग पर प्रतिबन्ध लगाने का विरोध करते हैं मुस्लिम आतंकवादियों को खुश करने के लिए हिन्दुओं का खून बहाने का समर्थन करते हैं तथा राष्ट्रवादी हिन्दूसंगठनों पर प्रतिबंध की मांग कर खुद को बाबर की औलाद सिद्ध करते हैं।
इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी गिरोह का सातवां घटक वो है जो इनके जैसा देशद्रोही दिखने के लिए बंगलादेशी घुसपैठियों को भारत की नागरिकता देने की मांग करता है l
जरा सोचो अगर ये घटक देशभक्त होते तो भला ऐसे देशद्रोही काम करते ? कभी नहीं
इसके अतिरिक्त इस सेकुलर गिरोह के कई और सहयोगी हैं जो अभी राष्ट्रवाद और देशद्रोह में से किसी एक सपष्ट दिशा में नहीं हैं उनके द्वारा भविष्य में किए जाने वाले काम ही यह तय करेंगे कि वो हर हाल में इस देशविरोधी-हिन्दुविरोधी सेकुलर गिरोह का साथ देते हैं या इस गिरोह के देशविरोधी-हिन्दुविरोधी कामों से तंग आकर राष्ट्रवाद की ओर मुड़ जाते हैं।
अगर ये गिरोह किसी ईसाई या मुस्लिम बहुल देश में होता और ठीक इसी तरह ईसाईयों या मुसलमानों के विरोध में काम करता जैसे हिन्दुओं के विरोध में कर रहा है तो या तो ऐसे गिरोह के नेताओं को फाँसी पर लटका दिया जाता या लोग पत्थरों से पीट-पीट कर इनकी हत्या कर देते पर ये सब हो रहा है शान्तिप्रिय हिन्दुओं की मातृ भूमि भारत में और वो भी हिन्दुओं को यहां से खदेड़ने के लिए फिर भी देश के गद्दार अभी तक जिन्दा हैं व अपनी मां का सौदा सरे बाज़ार कर रहे हैं !
पिछले दिनों इस देशद्रोही गिरोह ने सोराबुदीन के बहाने यह सिद्ध करने का प्रयत्न किया कि भारत में निर्दोष मुसलमानों पर अत्याचार किए जा रहे हैं पर सच्चाई यह है कि सोराबुदीन एक जिहादी आतंकवादी था न कि कोई सूफी सन्त । इस आतंकवादी के घर से दर्जनों एके-47 व हैंडग्रनेड मिले थे। जरा सोचो इन हथियारों का इस्तेमाल किसके विरूद्ध किया जाना था स्पष्ट है हिन्दुओं के विरूद्ध। जिन जवानों ने इस आतंकवादी को मारा उन्होनें सैंकडों निर्दोष हिन्दुओं के जानमाल की रक्षा की। अगर यह गिरोह ऐसे दुर्दाँत आतंकवादी को बेचारा निर्दोष मुसलमान कहकर प्रचारित करता है तो यह इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी गिरोह की तालिबानी मानसिकता नहीं तो और क्या है ?
हमें तो कई बार ऐसा लगता है जैसे मानो इस गिरोह से जुड़े लोग भारत माता को अपनी मातृ भूमि ही नहीं मानते अगर ये भारत माता को अपनी मातृ भूमि मानते होते तो देशद्रोही जिहादियों के समर्थन में यूँ न खड़े होते वेचारा, अनपढ़, सत्ताया हुआ कहकर उनके द्वारा बम्बविस्फोटों में बहाये गए निर्दोषों के लहू को जायज ठहराने का नीच प्रयास न करते, न ही मुठभेड़ों में मारे गये देशद्रोही जिहादियों के मामले उछाल कर सुरक्षाबलों को बदनाम करने का घिनौना अपराध करते !
क्या इस गिरोह ने कभी कश्मीर घाटी में मुस्लिम जिहादियों द्वारा चलाए गए हिन्दू मिटाओ हिन्दू भगाओ अभियान(जिसमें हजारों हिन्दुओं को हलाल कर मारा गया व लाखों हिन्दुओं को अपना घरबार छोड़कर भागने को मजबूर किया गया, जिस जिहाद के दायरे में अब सारे हिन्दुस्थान को लेने का प्रयास हिन्दुओं के धार्मिकस्थलों व हिन्दुबहुल क्षेत्रों में किए जा रहे बम्बविस्फोटों से स्पष्ट दिख रहा है)के विरोध में कभी इतनी प्रखर आवाज उठाई जितनी ये लोग पिछले छः वर्षो से गुजरात के बारे में उठाए हुए हैं वो भी तब जब गुजरात में पहले हमला गोधरा में रेल के डिब्बे में अठाबन हिन्दुओं को जिन्दा जलाकर व 43 को घायल कर जिहादी मानसिकता वाले मुसलमानों ने किया था । बाद में हिन्दुओं द्वारा आत्मरक्षा में प्रतिक्रियास्वरूप हुई हिंसा में उनके समर्थक व दुर्घटनाबस कुछ आम मुसलमान व हिन्दू भी मारे गये थे किसी ने यह कहने की जहमत न उठाई कि अगर मुसलमान हिन्दुओं पर हमला न करते, शान्तिप्रिय हिन्दुओं को जिन्दा न जलाते, तो न दंगे होते न कोई मरता ।
क्या आपने कभी इस गिरोह को हर रोज शहीद हो रहे सुरक्षाबलों के जवानों व आए दिन बहाए जा रहे निर्दोष हिन्दुओं के खून के विरोध में आवाज उठाते हुए देखा ?
क्या शहीद हुए जवानों व हिन्दुओं के परिवारों के सामने आ रही विपत्तियों को इतने जोर-शोर से उठाते हुए देखा ?
जितने जोर-शोर से ये शान्तिप्रिय हिन्दुओं का खून बहाने वाले जिहादियों के लिए उठाते हैं नहीं न, क्यों ?
क्योंकि इस देशद्रोही गिरोह को तो चिन्ता सिर्फ आतंकवादियों व उनके परिवारों की है न कि देश की रक्षा की खातिर बलिदान होने वाले जवानों व हिन्दुओं की ।
कश्मीर में कुछ महीने पहले आपने देखा कि किस तरह जिहादियों के शवों को जमीन से खोद कर निकालते हुए दिखाया गया और कहा गया कि ये जिहादी आतंकवादी निर्दोष हैं घन्टों इसका प्रसारण किया जाता रहा वो भी लाइब । जिहादियों को आम मुसलमान बताकर उनके समर्थन में प्रदर्शन करते हुए दिखाया गया । जिन देशभक्त सुरक्षाबलों के जवानों ने अपने प्राणों की परवाह न करते हुए इन आतंकवादियों को मार गिराया, को वहां की देशद्रोही सरकार के साथ मिलकर जेल में डलबा दिया गया । जिस सरकार का मुखिया माननीय सर्वोच्च न्यायालय से फाँसी की सजा प्राप्त देशद्रोही जिहादी आँतकतवादी को बचाने का प्रयत्न करता है वो सरकार देशद्रोहियों की नहीं तो और किसकी है ?
उन्हीं दिनों रजौरी में जिहादियों ने छः हिन्दुओं को हलाल किया इससे पहले 2 मई 2006 को डोडा व उधमपुर में 36 हिन्दुओं को एक साथ जिहादी आतंकवादियों द्वारा कत्ल किया गया तो भला इस देशद्रोही मीडिया ने कितने घंटे सीधा प्रसारण किया ? कितने अनाथ बच्चों जो जिहादी आतंकवादियों की वजह से लावारिस हो गए के साक्षात्कार दिखाए ? कितनी महिलाओं जिनके सुहाग इन मुस्लिम जिहादी आतंकवादियों ने उजाड़ दिए, जिनके छोटे-छोटे बच्चे हलाल कर दिए गए, का दुख इस हिन्दुविरोधी देशद्रोही मीडिया ने दिखाया ।
गुजरात में कुछ महीने पहले एक मुस्लिम जिहादी लड़की इसरत जहां मारी गई जिसके बारे में इस देशद्रोही मीडिया व जिहाद समर्थकों ने सारी दुनिया में अफवाह फैला दी कि यह लड़की निर्दोष है और गुजरात की सरकार मुस्लिम विरोधी है इसलिए इसे पुलिस ने मार गिराया । इस मुस्लिम जिहादी लड़की के जनाजे में जिहाद समर्थक कांग्रेसियों व समाजवादियों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया । कुछ चैनलों ने इसका सीधा प्रसारण किया । जैसे अपने देशद्रोही चरित्र को दिखाने के लिए ये काफी न हो महाराष्ट्र की कांग्रेस सरकार ने मुस्लिम जिहादी लड़की की मौत पर मुआब्जा भी दिया । क्योंकि यह लड़की महाराष्ट्र की थी इस लिए जांच का जिम्मा महाराष्ट्र पुलिस के विशेष दल(ए टी एस) को सौंपा गया। गहन छानबीन के बाद यह पाया गया कि यह लड़की आतंकवादी थी । जिहादी संगठनों ने खुद इसे अपना सहयोगी बताकर उसे इस्लाम के लिए शहीद बताया ।
अब जरा आप ही सोचो कि खुद को सैकुलर कहलवाने वाला यह देशद्रोही राजनैतिक दलों व गद्दार मीडिया का गिरोह जिहादी आतंकवादियों का बार-बार उनके मुस्लिम होने के नाम पर समर्थन कर सब के सब मुस्लिमों पर आतंकवादी होने का ठप्पा लगा रहा है कि नहीं ?
पिछले सोलह वर्षों से यह देशद्रोही गिरोह एक झूठ बार-बार बड़ी बेशर्मी से दोहराए जा रहा है कि बाबरी मस्जिद गिरा दी । हम इस देशद्रोही गिरोह की जानकारी के लिए यह वता दें कि 1992 में हिन्दूकार्यकर्त्ताओं ने कारसेवा श्री राम मन्दिर के जीर्णोद्धार के लिए की थी न कि किसी मस्जिद को गिराने के लिए अगर भरोसा न हो तो अपने सहयोगी कांग्रेस से पता कर लें कि 1986 में कांग्रेस सरकार के प्रधानमन्त्री स्वर्गीय राजीव जी ने जिस पूजास्थल पर लगा ताला खुलवाया था व पूजा की थी वो मन्दिर था या मस्जिद ? हमें तो हैरानी होती है कि जिस मन्दिर में पूजा होती थी वो गिरने के बाद इन हिन्दू-विरोधियों के लिए मस्जिद कैसे हो गई ?
वैसे भी इस देशद्रोही गिरोह व उसके सहयोगियों को छोड़ कर बच्चा- बच्चा जानता है कि अयोध्या भगवान राम जी की जन्मभूमि है। जहां पर आक्रांता बाबर के शासन से पहले भगवान राम जी का भव्य मन्दिर था जिसके ऊपर के हिस्से को, जिहादी बाबर के आदेश से उसके सेनापति मीरबाकी ने, मस्जिदनुमा बनवा दिया था । जिस मस्जिदनुमा ढांचे में कभी नमाज तक अता नहीं की गई भला उस ढांचे को कोई विवेकशील व्यक्ति मस्जिद कैसे कह सकता है ? हम तो चाहेंगे कि यह गिरोह देश को बताए कि मक्का मदीना में कितने मन्दिर या चर्च हैं ?
एन डी ए की सरकार के दौरान भारत यात्रा पर आए ईरान के धार्मिक प्रमुख खातमी जी ने स्पष्ट कहा “ जिस स्थान पर एक बार भी पूजा की गई हो उसे किसी भी स्थिति में मस्जिद नहीं कहा जा सकता । अगर इतना काफी न हो तो यह देशद्रोही हिन्दुविरोधी गिरोह यह बता दे कि अगर पूर्वजों की निशानी पर कोई आक्रमणकारी कब्जा कर ले तो उसे छुड़बाना बच्चों का फर्ज है कि नहीं ?
अन्त में इन जयचन्द की सन्तानों से हम इतना ही कहेंगे कि अगर हो सके तो सच का सामना करना सीखो और सच यही है कि अयोध्या में भगवान राम जी का मन्दिर था, है और रहेगा चाहे ये हिन्दुविरोधी जितना मर्जी जोर से चिल्लाते रहें सच तो सच है इसे दबाया नहीं जा सकता ।
अगर इस गिरोह में जरा सी भी इन्सानियत नाम की चीज या फिर माननीय न्यायालय के प्रति जरा सा भी सम्मान बाकी है तो इसे चाहिए कि माननीय न्यायालय का फैसला आने तक यथास्थिति का पालन करते हुए मन्दिर शब्द का प्रयोग करे या फिर अपना जहरीला प्रचार बन्द रखे अन्यथा माननीय न्यायालय का फैसला सत्य के पक्ष में आने पर होने वाले जान माल के नुकसान की जिम्मेवारी लेने के लिए तैयार रहे !
क्योंकि इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी गिरोह का झूठा और जहरीला प्रचार न केवल मुस्लिम जिहादियों को आम मुसलमानों को भड़काने का मसाला देता है पर साथ ही विदेशों में इस झूठ को फैलाकर धन इकट्ठा करने का मौका भी देता है। उसी धन से हथियार खरीद कर हिन्दुओं को शहीद किया जाता है।
हो सकता है उसी धन का कुछ हिस्सा शायद इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी गिरोह की जेब में भी जाता हो वरना ऐसा कैसे हो सकता है कि यह गिरोह शान्तिप्रिय को हिंसक, देशभक्त को देशद्रोही, सर्वधर्मसमभाव के जन्मदाता पोषक व समर्थक शान्तिप्रिय हिन्दुओं को सांप्रदायिक व आतंकवादी सिद्ध करने का बार-बार असफल प्रयत्न करता है और बेनकाब होता जाता है। इनका यह जहरीला प्रचार कहीं न कहीं शान्तिप्रिय आस्तिक हिन्दुओं को भी उत्तेजित करता है। माना के हिन्दू शांतिप्रिय है सनातन में विश्वास रखता है पर हर बात की एक हद होती है !
मुस्लिम जाहादियों द्वारा तोड़ा गया शिबलिंग
ये लेख लिखना हमनें तब शुरु किया था जब यह घर्मनिर्पेक्ष गिरोह मुस्लिम जिहादी आतंकवादी संगठन सिमी उर्फ इंडियन मुझाहिदीन का बचाव कर आम मुसलमानों को भड़काकर इस आतंकवादी संगठन के साथ खड़े होने के लिए प्रेरित कर रहा था। जिसका परिणाम बाटाला हाऊस मुठभेड़ के बाद जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के उपकुलपति के नेतृत्व में देशद्रोही मुस्लिम आतंकवादियों के समर्थन में निकाली गई रैली के रूप में देखने को मिला । इस विश्वविद्यालय के जिहादियों के साथ सम्बन्धों की जांच भारतीय सेना से करवाई जानी चाहिए ।
हमें ये भी जानकारी मिली है कि इस विश्वविद्यालय को सब मुस्लिम आतंकवादियों के गढ़ साउदी अरब से भी आर्थिक सहायता मिलती है। अगर ये सत्य है फिर तो यह स्पष्ट है कि ये विश्वविद्यालय मुस्लिम आतंकवादियों को अपने यहां शरण देता है जो एक तरह से भारत के विरूद्ध युद्ध की तैयारी जैसा है । वैसे भी हम इन सैकुलर गद्दारों से जानना चाहेंगे कि क्या एक जिहादी देश के पैसे से चल रहे विश्वविद्यालय द्वारा मुस्लिम आतंकवादियों का समर्थन करना देशद्रोह नहीं तो और क्या है ?
जागो ! हिन्दू जागो !
बाद में ये सैकुलर गिरोह खुद इन देशद्रोही मुस्लिम जिहादी आतंकवादियों के समर्थन में उत्तर आया और शहीद मोहन चन्द शर्मा जी के नेतृत्व में पुलिस जवानों की बहादुरी और बलिदान को गाली-गलौच करते हुए न्यायिक जांच की मांग करने लगा।
यह वही गिरोह है जिसके नेतृत्व में सारे भारत में वन्देमातरम् का गान करने का फैसला किया गया लेकिन मुठीभर देशद्रोही मुस्लिम आतंकवादियों द्वारा वन्देमातरम् का विरोध इस आधार पर किए जाने पर कि वन्देमातरम् का गान उनकी जिहादी मानसिकता के विरूद्ध है। इस गिरोह की सरकार ने वन्देमातरम् गाने का फैसला वापिस लेते हुए यह कह दिया कि जिसको गाना है वो गाए जिसको नहीं गाना है वो न गाए।
· इस फैसले से एक तो राष्ट्रगीत का अपमान किया गया !
· दूसरे देशद्रोही मुस्लिम आतंकवादियों का हौंसला बढ़ाया गया !
· तीसरा आम मुसलमान को वन्देमातरम् का विरोधी घोषित कर दिया !
· जब ये देशविरोधी मानसिकता वाले देशद्रोही परिवार नियोजन जैसे कार्यक्रमों का विरोध करते हैं और अधिक से अधिक बच्चे पैदा कर देश के इस्लामीकरण की बात करते हैं तो ये सैकुलर गिरोह आम देशभक्त मुसलमान को परिवार नियोजन जैसे कार्यक्रमों के लाभ बताकर उसके साथ खड़ा होने के बजाए जिहादी मानसिकता वाले देशद्रोहियों का साथ देता है और परिवार नियोजन जैसे कार्यक्रमों का विरोध करता है।
परिवार नियोजन का समर्थन करने वालों को सांप्रदायिक कहकर आम देशभक्त मुसलमानों को डराकर जिहादी मानसिकता वाले देशद्रोहियों का साथ देने के लिए मजबूर करता है फिर मुसलमानों की गरीबी का ढिंढोरा पीटने के लिए सच्चर कमेटी बनाता है
अब इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी सैकुलर गिरोह को कौन समझाये कि बिना परिवार नियोजन के विकास सम्भव नहीं।
· चौथा मुठीभर अलगावबादी मानसिकता वाले सिरफिरों द्वारा वन्देमातरम् व परिवार नियोजन के विरोध को सब मुसलमानों की राय बताकर सब के सब मुसलमानों पर देशद्रोही होने का लैबल चिपका दिया ।
अब आप ही सोचो कि यह गिरोह देशद्रोही मुस्लिम आतंकवादियों का समर्थक है या आम देशभक्त मुसलमान का ?
हमारे विचार में यह गिरोह सिर्फ देशद्रोही मुस्लिम आतंकवादियों का समर्थक है न कि आम देशभक्त मुसलमान का क्योंकि यह गिरोह हर तरह से आम देशभक्त मुसलमान का नुकसान ही कर रहा है।
एक तरफ यह देशद्रोही गिरोह मुहम्मद अफजल, सोराबुदीन व आतिफ जैसे देशद्रोही मुस्लिम आतंकवादियों का समर्थन कर आम देशभक्त मुसलमानों के बच्चों को साफ संदेश दे रहा है कि तुम आतंकवादी बनो सारा सैकुलर बोले तो देशद्रोही गिरोह आपका सुरक्षा कवच बनकर खड़ा है !
दूसरी तरफ बहुत सी मस्जिदों व मदरसों पर इस अलगावबादी मानसिकता वाले आतंकवादियों के कब्जे की वजह से इस्लाम में ब्यापत बुराईयों को समाप्त करने के बजाए उल्टा उनका समर्थन कर इन बुराईयों को बढाबा देकर आम देशभक्त मुसलमानों के बच्चों व देश को एक ऐसे गर्त में धकेलता चला जा रहा है जिसका परिणाम अफगानिस्तान व पाकिस्तान के कबाइली इलाकों जैसी जाहलिएत है न कि जन्नत जो कि ये जिहादी मानसिकता वाले आतंकवादी इस गिरोह की सहायता से प्रचारित कर रहे हैं।
अगर इस सेकुलर गिरोह का ये आतंकवाद प्रेम व हिन्दूविरोध इसी तरह जारी रहा तो वो दिन दूर नहीं जब भारत में भी अफगानीस्तान जैसे हालात वन जायेंगे और हर जगह तालिबान ही नजर आयेंगे।
अगर इन्हें आम मुसलमान की चिन्ता होती तो ये अल्पसंख्यकवाद व धर्मनिर्पेक्षता के बहाने देशद्रोही मुस्लिम जिहादी आतंकवादियों का समर्थन कर व शान्तिप्रिय हिन्दुओं और उनके राष्ट्रवादी संगठनों का खौफ दिखाकर आम मुसलमान को राष्ट्र की मुख्यधारा से काटने का यूँ प्रयत्न न करते बल्कि इस सत्य का एहसास करवाते कि वेशक दोनों की पूजा-पद्धति अलग-अलग है पर दोनों के पूर्वज एक ही हैं ।
क्योंकि आक्रमणकारी जिहादियों के साथ तो कुछ गिनेचुने जिहादी ही आए थे। आम मुसलमान वो परावर्तित हिन्दू हैं जो औरंगजेब और बाबर जैसे राक्षसों के अत्याचारों से तंग आकर इस्लाम अपनाने को मजबूर हुए और इस सैकुलर गिरोह की भारतीय संस्कृति विरोधी फूट डालो और राज करो के देशद्रोही षड्यन्त्रों की वजह से आज तक मजबूर हैं वरना इन मुठीभर देशद्रोही मुस्लिम आतंकवादियों में कहाँ इतना दम था कि इन आम देशभक्त मुसलमानों की आवाज को इस तरह दबाकर रखते और इनके होनहार बच्चों को आतंकवाद की उस अंधेरी गली में धकेलते जिसके रास्ते सीधे जहन्नुम में खुलते हैं ।
आम देशभक्त मुसलमान न तो जिहादी है,न आतंकी है, न ही कट्टर और न ही औरंगजेब और बाबर जैसे राक्षसों की संतान। ये तो भगवान राम की उस संतान की तरह है जो मन्दिर जाती है फर्क सिर्फ इतना है कि इसकी पूजा पद्धति थोड़ी अलग है । सारा मामला जयचंद के वंशज इस देशद्रोही गिरोह व औरंगजेब और बाबर जैसे राक्षसों की संतानों इन मुठ्ठीभर देशद्रोही मुस्लिम जिहादी आतंकवादियों के द्वारा उलझाया हुआ है।
अगर आपको लगता है कि मामला इतना सीधा नहीं है तो जरा इस बात की ओर ध्यान दो ।
Ø हम दावे के साथ कह सकते हैं कि जिन हिन्दुओं व राष्ट्रवादी संगठनों का नाम लेकर आम देशभक्त मुसलमानों को डराया व उकसाया जाता है उनमें से किसी को भी अपने इन मुस्लिम भाईयों के मस्जिद जाने पर कोई आपत्ति नहीं है और न ही इन मुस्लिम भाईयों को हिन्दुओं के मन्दिर जाने या मूर्तिपूजा करने पर कोई आपत्ति हो सकती है।
Ø लेकिन औरंगजेब और बाबर जैसे राक्षसों की संतानों को व इस देशद्रोही सैकुलर गिरोह को, हिन्दुओं के मन्दिर जाने, मूर्तिपूजा करने और यहाँ तक कि हिन्दुओं के आस्तिक होने पर ही घोर आपत्ति है तभी तो यह गिरोह एक तरफ माननीय सर्वोच्चन्यायालय में सपथपत्र देकर घोषणा करता है कि भगवान राम हुए ही नहीं और दूसरी तरफ इनके लाडले देशद्रोही मुस्लिम जिहादी आतंकवादी मन्दिरों में बम्ब विस्फोट करते हैं ।
यह सैकुलर गिरोह यह भूल जाता है कि ये सबकुछ तबतक चल रहा है जब तक हिन्दू इनकी असलिएत से अनभिज्ञ है व अपने शान्तिप्रिय स्वभाव को नहीं छोड़ता लेकिन अब इनकी असलिएत बड़ी तेज गति से बेनकाब हो रही है और हिन्दू समझ रहा है कि जो शहीद मोहनचन्द शर्मा जी के बलिदान का अपमान कर रहे हैं वो भला देशभक्त कैसे हो सकते हैं ? जो देश के लिए प्राण जोखिम में डालकर देशद्रोहियों को पकड़ने व मारगिराने वाले सैनिकों व पुलिस के जवानों को शक की निगाह से देखते हैं उनकी शहीदी का अपमान करते हैं व देशद्रोही मुस्लिम जिहादी आतंकवादियों का समर्थन करते हैं उनके समर्थन में रैलियां धरने प्रदर्शन जुलूस निकालते हैं इनकी खातिर कोर्ट पहुंचते हैं कोर्ट को गुमराह करने का जोर-शोर से प्रयास करते हैं फिर फैसला सत्य और न्याय के पक्ष में आने पर माननीय सर्वोच्चन्यायालय तक का अपमान करते हैं व आदेश नहीं मानते व माननीय सर्वोच्चन्यायालय तक को अपनी सीमा में रहने और इनके देशविरोधी कामों में हस्ताक्षेप न करने की धमकी तक दे डालते हैं । मानो ये सब काफी न हो तो इनके समर्थन से पलने वाले आतंकवादी न्यायालय परिसर,पुलिस व सेना के शिविरों और गाड़ियों में बम्ब विस्फोट कर डालते हैं मानो कि के कह रहे हों जब संइयां भय सरकार तो फिर डर काहे का ।
ü यही वजह है कि जब भी हम हिन्दू बोलते हैं तो उसका अभिप्राय उन सभी भारतीयों से है जो भारत भूमि को सच्चे मन से अपनी मातृभूमि मानते हैं भारतीय संस्कृति को अपनी संस्कृति मानते हैं भारत के शत्रु को अपना शत्रु मानते हैं फिर वो चाहे पूजा के लिए मन्दिर या गुरूद्वारा या मस्जिद या गिरजाघर कहीं भी जाएं या फिर कहीं भी न जाएं या फिर सब जगह जाएं उसके देशभक्त भारतीय अर्थात हिन्दू होने पर कोई फर्क नहीं पड़ता । इस हिन्दू को एक दूसरे की पूजा पद्धति पर कोई आपत्ति नहीं होती ।
ü आप जरा सोचो कंधार काबुल जो कभी भारत था अफगानिस्तान बनकर गृहयुद्ध का शिकार क्यों है ? सिंध , ब्लूचीस्तान, कराची, लाहौर, ढाका जो 60 वर्ष पहले भारत था आज आन्तरिक मार-काट का शिकार क्यों है ? लोग वही हैं, जमीन वही है, सब कुछ वही है बस फर्क पड़ा तो इतना कि वो खुद को हिन्दू नहीं मानते ।
ü हम बाहर की बात क्यों करें जरा भारत को ही ध्यान से देखें कि कहां-कहां अलगाववाद है, हिंसा है, दंगा है, अशांति है सिर्फ वहां पर जहां-जहां खुद को हिन्दू न मानने वालों की संख्या प्रभावशाली है जैसे कि कश्मीरघाटी,आसाम,गोधरा, कंधमाल,मऊ, उत्तर-पूर्व के कई हिस्से। देश में और भी कई स्थान ऐसे हैं जहां खुद को हिन्दू न मानने वाले अकसर हिन्दुओं पर हमला करते रहते हैं और यह सैकुलर गिरोह हमलावरों के समर्थन में हिन्दुओं व उनके संगठनों को सांप्रदायिक, कातिल,गुंडा प्रचारित कर बदनाम करने के लिए विश्वव्यापी अभियान चलाता रहता है
ü यह मूर्खों का गिरोह इतना भी सोचने का कष्ट नहीं करता कि अगर हिन्दुओं व उनके संगठनों को ही इस्लाम या ईसाईयत मिटाओ अभियान चलाना हो तो वो हिन्दुबहुल क्षेत्रों मे शुरू करें और सारे भारत में एक साथ चलाएं न कि उन क्षेत्रों में जहां इस्लाम या ईसाईयत को मानने वाले या तो बहुसंख्यक बन गय हैं या बहुसंख्यक बनने के कगार पर पहुंच गए हों जबकि सच्चाई यह है कि हिन्दुओं व उनके संगठनों को इस्लाम या ईसाईयत से कोई समस्या नहीं ।
समस्या है तो उन देशद्रोहियों से है जो इस्लाम के बहाने जिहादी मानसिकता का प्रचार-प्रसार व समर्थन करते हैं व खुद को औरंगजेब और बाबर जैसे नरभक्षीयों की संतान कहलवाने में गर्व महसूस करते हैं या सेवा के नाम पर ईसाईयत के प्रचार-प्रसार के बहाने हिन्दूधर्म की निंदा कर हिन्दूधर्म विरोधी महौल बनाकर छल-कपट से जबरन धर्माँतरण को बढ़ावा देते हैं व धर्माँतरण का विरोध करने वाले परम पूजनीय स्वामी लक्ष्मणानन्द सरस्वती जी जैसे देशभक्त समाजसेवकों और सन्तों का कत्ल करते हैं ।
Ø इस देशद्रोही गिरोह को हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि खुद को औरंगजेब और बाबर जैसे नरभक्षियों की संतान कहलवाने वाले इन मुठ्ठीभर देशद्रोही मुस्लिम आतंकवादियों व धर्माँतरण करवाने वालों के लिए इस देश में न कोई जगह है और न ही कोई जगह हो सकती है फिर भी इस गिरोह को अगर विषय स्पष्ट नहीं तो हम इनके सामने वो सच्चाई रखने का प्रयास करेंगे जिसे आज हर देशभक्त महसूस करता है पर कहने से बचता है शायद इस उम्मीद में कि मानवता के शत्रु अपने आप मानवता को लहूलुहान करना छोड़ देंगे पर वो यह भूल जाता है कि राक्षस के मुँह अगर एक बार खून लग जाए तो वह तब तक नहीं रूकता जब तक सामने वाला खत्म न हो जाए या फिर इस राक्षस को खत्म न कर दिया जाए । हमारे विचार में भारत से अब इस राक्षस को मिटा देने का वक्त आ चुका है !
आप समझ ही गये होंगे कि हम किस राक्षस की बात कर रहे हैं । जी हाँ आप बिल्कुल ठीक समझे हम मुस्लिम आतंकवाद की बात कर रहे हैं ये आतंकवाद भारत के लिए कोई नया नहीं । इसका भारत में प्रवेश सातवीं/आठवीं शताब्दी में मुहम्मदबिन कासिम के रूप में सिंध के रास्ते हुआ जिसका असली राक्षसी चेहरा महमूदगजनबी ,औंरगजेब, बाबर, चंगेजखां ,जहांगीर आदि के रूप में सामने आया। इन राक्षसों ने हिन्दुओं पर कौन से जुल्म नहीं ढाए। अनगिनत हिन्दुओं का कत्ल किया, माताओं, बहनों, बहु, बेटियों, बच्चों तक को नहीं बख्शा माताओं, बहनों, बहु, बेटियों की इज्जत से खिलवाड़ किया सो अलग और ये सब हुआ मुस्लिम जिहाद के नाम पर ईस्लाम के प्रसार के लिए।
आस्था विश्वाश भाईचारे का कौन सा ऐसा चिन्ह है जिसे इन जिहादियों ने बख्शा ?
बेहिसाब मन्दिरों को लूटा और तोड़ा प्रमाण ढूँढने की जरूरत नहीं प्रमाण देश के हर कोने में मौजूद हैं सोमनाथ, अयोध्या,मथुरा और काशी के बारे में कौन नहीं जानता । कोई तो बताए ये सब कैसे भुलाया जा सकता है ? और क्यों भुलाया जाना चाहिए? इस देश की मिट्टी का एक-एक कण इन नरभक्षी मुस्लिम आतंकवादियों द्वारा किए गय कत्लेआम से सना है इस परंपरा का पालन मुस्लिम कम, सैकुलर गिरोह ज्यादा करने पर तुला हुआ है ।
गुरू तेगबहादुर जी की कुर्बानी को कौन भुला सकता है क्या यह झूठ है कि वह जिहाद का शिकार सिर्फ इसलिए हुए क्योंकि उन्होंने धर्मांतरण का विरोध किया ?
श्री गुरूगोविन्द सिह जी बेटों सहित बलिदान हुए किस लिए ? धर्म की रक्षा के लिए। पर किससे ? इन्हीं राक्षसों से, जिन्हें आप चाहे मुस्लिम आतंकवादी कहो चाहे जिहादी या फिर इनका बचाव करने के लिए बेचारा, गुमराह, गरीब, अनपढ़, सत्ताया हुआ मुस्लिम नौजवान ( देशद्रोही-हिन्दुविरोधी इन्हें इसी नाम से पुकारते हैं) पर सच्चाई यही है कि ये राक्षस यह सब कुछ इस्लाम पर हो रही काल्पनिक ज्यादतियों का अपने सैकुलर एजेंटों के माध्यम से झूठ फैलाकर इस्लाम के प्रचार-प्रसार के लिए जिहाद का नाम लेकर करते थे, कर रहें हैं और तब तक करेंगे जब तक इस भारत से हिन्दुओं का नामोनिशान नहीं मिट जाता या फिर इन्हें इनके समर्थकों सहित मिटा नहीं दिया जाता ।
जरा याद करो महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज का बलिदान । सारी ज़िन्दगी धर्म की रक्षा के लिए लड़े और धर्म की रक्षा के लिए बलिदान हुए। पर रक्षा किससे ? इन्हीं राक्षसों से जिन्हें यह सैकुलर गिरोह बेचारा गरीब सताया हुआ प्रचारित करके यह कुतर्क देता है कि वर्तमान भारत में यह सब हिन्दू संगठनों की वजह से हो रहा है और वो भी राम मन्दिर अंदोलन व गुजरात का बदला लेने को लिए।
लेकिन सच्ची-पक्की बात यह है कि जिस जिहाद से लड़ते हुए वह अनगिनत अमूल्य बलिदानी शहीद हुए थे उसी जिहाद का मुकाबला आज हिन्दू संगठन,सुरक्षावल व समस्त हिन्दूसमाज कर रहा है और जो गद्दारी उस वक्त जयचन्द जैसे देशद्रोहियों ने की थी वो ही गद्दारी आज ये देशद्रोहियों का सैकुलर गिरोह कर रहा है ।
· आओ जरा वर्तमान भारत में धर्म पर हो रहे हमलों का तार्किक विश्लेशण करें। दीवाली पर दिल्ली में धमाके, होली पर वाराणसी में बजरंगबली के मन्दिर में धमाके,राखी पर मुम्बई में धमाके,गणेशोत्सव पर फिर दिल्ली में धमाके ,इसके अतिरिक्त अहमदावाद, सूरत, जयपुर में मन्दिर के पास, कर्नाटक, रघुनाथ मन्दिर, अक्षरधाम मन्दिर । इन सब धमाकों में दो बातें स्पष्ट उभर कर आती हैं एक तो ये सब धमाके हिन्दुबहुल क्षेत्रों व मन्दिरों को निशाना बनाकर किए जाते हैं ताकि अधिक से हिन्दुओं को मौत के घाट उतारा जा सके और दूसरी बात यह कि ये सब धमाके उन्हीं मुस्लिम आतंकवादियों द्वारा किए जा रहे हैं जिन्हें इस गिरोह की सरकार का गृहमन्त्री सरकार में शामिल लोगों का भाई बताता है।
Ø इन सब धमाकों का एक ही उद्देश्य है शान्तिप्रिय हिन्दुओं की बर्बादी और राक्षसों का बर्चस्व स्थापित करना। जिहादियों के समर्थक यह तर्क देते हैं कि ये हमले हिन्दुओं को निशाना बनाकर नहीं किए जा रहे क्योंकि इसमें मुस्लिम भी मारे जाते हैं(इस झूठ का प्रचार करने के लिए इनका सहयोगी मीडिया धमाकों में मारे गये एक मुस्लिम को बार-बार दिखाकर इस झूठ को आगे बढ़ाकर सच को छुपाने की कोशिश करता है ) पर वो यह सच्चाई छुपाने की कुचेष्ठा करते हैं कि ऐसे धमाकों में मारे जाने वाले मुस्लिमों की संख्या न के बराबर होती है।
· जिहादियों के समर्थक यह तर्क भी देते हैं कि ये हमले तो मस्जिदों को निशाना बनकर भी किए जाते पर ये लोग यह बताने से बचते हैं कि जामामस्जिद में हुए बम्बविस्फोट में सिर्फ एक व्यक्ति घायल हुआ मरा कोई भी नहीं । मक्कामस्जिद में बम्बविस्फोट पानी की टांकी के पास हुआ न कि मस्जिद के अन्दर इसी तरह मालेगांव( यहाँ मुसलमान भगदड़ में मरे न कि धमाके से) में भी बम्बविस्फोट मस्जिद के पास हुआ न कि मस्जिद के अन्दर और ये दोनों बम्बविस्फोट दुर्घटनाबश हुए क्योंकि इन जिहादियों के प्रशिक्षण केन्द्र मदरसे हैं और संचालन केन्द्र मस्जिदें । ऐसे स्थानों पर परीक्षण के समय या दुर्घटनाबश बम्बविस्फोट होना सामान्य घटना है न कि कोई साजिश । ऐसी भी चर्चा है कि जिहादी हिन्दुबहुल क्षेत्र में बम्ब रखने जा रहे थे कि रास्ते में पड़ती मस्जिद में अपने सहयोगियों से मिलने के लिए व धमाकों से पहले नमाज पढ़ने के लिए रूके और इस बीच दुर्घटनाबस ये धमाके हो गये । वरना अगर ये बम्ब किसी हिन्दू ने लगाने होते तो मस्जिद में लगाता न कि बाहर ।
· जो लोग बार-बार हिन्दू आतंकवाद की काल्पनिक अवधारणा बना रहे हैं वो ये क्यों कैसे भूल रहे हैं कि पाकिस्तान जैसे मुस्लिम देशों में जो मस्जिदों में तबाही हो रही है वो मुस्लिम जिहादी ही तो कर रहे हैं। फिर भारत में ये सब मुस्लिम जिहादी नहीं कर रहे हैं ऐसा तो जिहादियों का बचाव करने वाले बिके हुए दलालों द्वारा ही कहा जा सकता है या फिर उन कातिलों द्वारा जिन्होंने ये धमाके खुद करवाये हों !
लेकिन जिहादियों को अपना भाई मानने वाला यह गिरोह इन जिहादियों को हीरो बनाने के लिए कुछ भी कह सकता है कुछ भी कर सकता है।
v इस सैकुलर गिरोह ने तो मानो निर्दोष शान्तिप्रिय हिन्दुओं को इन घटनाओं में झूठा फंसाकर आतंकवादी सिद्ध करने की कसम उठा रखी हो और उठांए भी क्यों न एक तरफ शहीद मोहनचन्द शर्मा जी के बलिदान का अपमान करने के मुद्दे पर अभी देशभक्त हिन्दुओं का गुस्सा शान्त भी नहीं हुआ था कि राजठाकरे के माध्यम से हिन्दुओं को क्षेत्रवाद के आधार पर लड़ाकर फूट डालो और राज करो की साजिश का पर्दाफाश हो गया। ऊपर से पिछले कई दशकों से बोले जा रहे इस झूठ का कलंक कि हिन्दू आतंकवादी हैं जब पिछले पाँच सालों के षड्यन्त्रों के बावजूद कोई हिन्दू आतंकवादी न मिला तो मरता क्या न करता इसलिए हताशा में एक निर्दोष राष्ट्रभक्त साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को ए .टी .एस पर दबाव बनाकर डलबा दिया जेल में यह भी न सोचा कि देशद्रोही हिन्दुविरोधी जिहाद समर्थक गिरोह की सरकार द्वारा निर्दोष राष्ट्रभक्त हिन्दुओं को जेल में डालकर ‘हिन्दू आतंकवादी हैं , ‘हिन्दू आतंकवादी हैं , प्रचारित करने से कोई उस पर भरोसा करने वाला नहीं क्योंकि सब जानते हैं कि जिहादी आतंकवादियों को अपना भाई बताने वाली सरकार, उनको सजा से बचाने के लिए पोटा हटाने वाली सरकार, सेना व पुलिस के बहादुर जवानों द्वारा मारे गए जिहादी आतंकवादियों के परिवारों को मुआबजा देने वाली सरकार, माननीय सर्वोच्च न्यायालय से फाँसी की सजा प्राप्त जिहादी आतंकवादी मुहम्मद अफजल को फाँसी न देकर दो वर्ष से उसे बचाकर रखने वाली सरकार ,प्रतिशोध में बेबकूफ बने हिन्दू राहुल राज को एक पल में आनॅ द स्पाट गोली मारकर फाँसी देने वाली सरकार, क्वात्रोची जैसे देशविरोधी लुटेरे एन्टोनियो माइनो मारियो के एजेंट के लंदन बैंक में देशभक्त सरकार द्वरा जब्त करवाए गए वोफोर्स काँड दलाली के पैसे को कानूनमन्त्री भेज कर छुड़वाने वाली सरकार, आसाम में बंगलादेशी घुसपैठियों के साथ मिलकर सरकार बनाकर जिहादी आतंकवादियों द्वारा हिन्दुओं को मरवाने व बेघर करवाने वाली सरकार, इन हत्यारे बंगलादेशी घुसपैठिए जिहादी आतंकवादियों को बांगलादेश वापिस भेजने के लिए माननीय सर्वोच्चन्यायालय के आदेशों को न मानने व ऐसे सभी कानूनों को तोड़ने वाली सरकार, जिहादी आतंकवादियों को कानून बनवाकर जेलों से छुड़वाने वाली सरकार , जिहादी आतंकवादियों को अपने प्राणों की बाजी लगाकर पकड़ने या मारने वाले सेना व पुलिस के बहादुर जवानों को जेलों में डलवाने वाली सरकार,शहीद मोहन चन्द शर्मा जी जैसे देशभक्तों के बलिदान का अपमान करने वाली सरकार देशभक्तों को अपमानित करने के लिए कोई भी षड्यन्त्र रच सकती है, किसी भी हद तक गिर सकती है ।
v निर्दोष राष्ट्रभक्त साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर जी को जेल में डालना इसी षड्यन्त्र का एक हिस्सा है इससे पहले भी यह सरकार राष्ट्रभक्त सन्त परम पूजनीय स्वामी रामदेव जी को अपमानित करने के लिए कई षड्यन्त्र रचकर मुंह की खाकर अपनी फजीहत करवा चुकी है । निर्दोष राष्ट्रभक्त साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर जी के मामले में भी सरकार के षड्यन्त्र का यही हश्र होने वाला है । वैसे भी जरा आप निष्पक्ष होकर सोचो कि जो सरकार हिन्दूविरोधियों को खुश करने के लिए भगवान राम जी के अस्तित्व को ही नकार सकती हो वो भला भारतीय संस्कृति को नष्ट करने के लिए क्या नहीं कर सकती है बोले तो ,कुछ भी कर सकती है ये तो सेना, राष्ट्रभक्त हिन्दुओं व उनके संगठनों का डर है जो इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह को अपने नापाक कदम पीछे खींचने पर मजबूर कर देता है वरना आज तक तो यह देशद्रोही हिन्दुविरोधी गिरोह जिहाद व धर्मांतरण समर्थकों के साथ मिलकर सारे भारत से भारतीय संस्कृति बोले तो हिन्दू संस्कृति का नामोनिशान उसी तरह मिटा देता जिस तरह कश्मीरघाटी,उत्तरपूर्व के कई क्षेत्रों से मिटाया व देश के कई अन्य हिस्सों में यह हिन्दू मिटाओ हिन्दू भगाओ अभियान जोर-शोर से चल रहा है पर यह वहीं सम्भव हो पा रहा है जहां हिन्दू संगठन बिल्कुल कमजोर हैं और हिन्दू संगठन वहां पर कमजोर हैं जहां पर राष्ट्रभक्त कम संख्या में हैं अतः सारे भारत में राष्ट्रभक्तों की संख्या बढ़ाकर व देशद्रोही हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थकों की संख्या घटाकर भारतीय सेना के हाथ मज़बूत कर भारतीय संस्कृति को बचाकर विश्वगुरू भारत का पुनःनिर्माण करने के लिए हिन्दूक्रांती देश की जरूरत है शौक नहीं ।
हिन्दुओं को आतंकवादी व कातिल बताने बाला यह झूठ इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह का कोई पहला झूठ नहीं आप सबको याद होगा कि सन 2000 में जब केन्द्र में एन.डी.ए की सरकार थी और गुजरात में भाजपा की । कुछ समय बाद आंध्रप्रदेश, गोआ, गुजरात और कर्नाटक में चर्चों पर हमले होने लगे तो हिन्दूविरोधियों के इस गिरोह ने देश-विदेश में शोर मचा दिया कि ये हमले योजनाबद्ध तरीके से अल्पसंख्यकों को खत्म करने की साजिश के तहत हिन्दूसंगठन करवा रहे हैं बाद में मीडिया का एक बढ़ा वर्ग भी इस दुष्प्रचार में शामिल हो गया । हिन्दूसंगठनों ने लाख कहा कि कि इन हमलों से उसका कोई वास्ता नहीं पर ये कहाँ सुनने वाले थे इनको तो सिद्ध करना था कि हिन्दुत्व की बात करने वाले सांप्रदायिक हैं कातिल हैं ! आप समझ सकते हैं कि निर्दोष को दोषी साबित करना कितना मुस्किल होता है ? इसलिए इस टीम ने पूरा जोर लगाया सच्चाई को दबाने में, पर सच्चाई तो सच्चाई है कहां दबती है सामने आ ही जाती है इस मामले में भी यही हुआ और सिद्ध हो गया कि ये सैकुलर गिरोह गद्दारों का वो गिरोह है जो हिन्दुओं व उनके संगठनों को बदनाम कर, देश को तवाह करने के लिए किसी भी हद तक गिर सकता है-झूठ बोल सकता है ।
आँध्रप्रदेश में दीनदार अंजुमन नामक मुस्लिम आतंकवादी गैंग के 23 जिहादी पकड़े गए जिन्होंने यह स्वीकार किया कि देश में चर्चों पर हमले इन्होंने किए थे। भगवान की दया से ये गैंग किसी भारतीय जनता पार्टी शासित राज्य में नहीं पकड़ी गई वरना ये देशद्रोही गिरोह आरोप लगा देता कि ये गलत पकड़े गए ।
क्या हिन्दुओं व उनके संगठनों को बेवजह बदनाम करने वाले इन दुष्टों ने हिन्दुओं से माफी मांगी या इस बेवकूफी से कोई सबक लिया कोई नहीं । अगर इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह के लोग इतने ही समझदार होते तो भला वो देशद्रोहियों का साथ देते क्या ?
अगर आपको इन जिहादियों के दोषी होने के बारे में कोई सन्देह है तो आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि 22 नवम्बर 2008 को माननीय न्यायालय में इनका अपराध सिद्ध हो चुका है । अगर इस हिन्दुविरोधी तालिबानी मीडिया ब सैकुलर गिरोह में शर्म नाम की कोई चीज बाकी है तो इसे सारे संसार में हिन्दुओं को कातिल कहकर फैलाए गये झूठ के लिए समस्त जिन्दुओं से माफी मांग लेनी चाहिए वरना हमें विश्वास हो जाएगा कि ये असुरों का तालिबानी गिरोह है !
आओ जरा उड़ीसा के कंधमाल की बात करें जो 15 सितम्बर से 15 अक्तूबर 2008 तक पूरे जोर-शोर से न केवल भारत बल्कि पूरे संसार के ईसाई देशों खास कर एन्टोनियो मांइनो मारियो के घर इटली के पोप शासित रोम में पूरी तरह से छाया रहा । कई धर्मांतरण समर्थक हिन्दू विरोधी मंचों पर तो आज भी ये सुर्खियों में है । हो भी क्यों न कंधमाल को पोप शासित रोम बनाने के रास्ते में देशभक्त हिन्दू व उनके संगठन जो दीवार बनकर खड़े हो गए। हम इन धर्मांतरण के ठेकेदारों को यहाँ स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि यह इटली नहीं भारत है और भारत के किसी भी हिस्से को रोम नहीं बनने देंगे और भविष्य में अगर किसी हिस्से को रोम बनाने की कोशिश की तो वहां कंधमाल नजर आएगा ।
भगवान की लीला देखो नाइजीरिया में एक दूसरे का कत्ल कर उसे नरक बना देने वाले ये ईसाई व मुसलमान, अफगानिस्तान व ईराक में मुसलमानों की हत्या के लिए ईसाईयों को पानी पी-पी कर कोसने वाले व भारत में चर्चों पर हमला करने वाले मुसलमान भी देशभक्त हिन्दुओं व उनके संगठनों पर हमला करने के मुद्दे पर धर्मांतरण समर्थक ईसाईयों के साथ आ खडे हुए और स्पष्ट कर दिया कि सारी दुनिया में भले ही ईसाई मुसलमान एक दूसरे के खून के प्यासे हों पर हिन्दूराष्ट्र भारत को तबाह करने के मुद्दे पर ये जिहादी व धर्मांतरण समर्थक एक साथ हैं।
धर्मांतरण के ठेकेदार सारे भारत में हिन्दूधर्म के बारे में दुष्प्रचार कर भारतीय संस्कृति पर हमला बोले हुए हैं ये हमला भारत के बनवासी व दूरदराज क्षेत्रों में ज्यादा तीखा स्पष्ट और आक्रामक है ईसाईयों के इस अक्रामक दुष्प्रचार से देशभक्त हिन्दू समाज व उनके संगठन आक्रोश में हैं पर अपनी शांतिप्रिय सनातन संस्कृति के कारण शांतिप्रिय ढंग से इन धर्मांतरण के ठेकेदारों को समझाने व रोकने का असफल प्रयास कर रहे हैं लेकिन ये धर्मांतरण के ठेकेदार व उनके समर्थक अपनी आदत से मजबूर हैं क्योंकि ये सनातन संस्कृति को बदनाम कर समाप्त करने की कसम उठा चुके हैं और यही इनका ब्यापार भी है इन धर्मांतरण के ठेकेदारों द्वारा किए जा रहे दुष्प्रचार को सुन कर( ईसाई संसार में फैल रहे थे, हिन्दू घबरा गये,सनातन धर्म चकनाचूर हो गया सनातन को मानने वाले ईसाई बन गये) व इन इनके द्वारा लिखे जा रहे हिन्दू विरोधी सहित्य को पढ़ कर कोई भी आम समाज उत्तेजित होकर शाम दाम दण्ड भेद का उपयोग कर इनका नामोनिशान मिटाने पर उत्तर आए लेकिन ये देशभक्त हिन्दू समाज अपनी शांतिप्रिय सनातन संस्कृति के कारण सबकुछ सहन कर रहा है पर हर बात की हद होती है इसिलिए श्रीमद् भगवतगीता में साफ कहा गया है कि जब अत्याचार की अति हो जाए तो अत्याचारियों व अत्याचारियों के समर्थकों को समाप्त कर देना चाहिए !
ü ये जम्मू, गुजरात और उड़ीसा जैसी छुटपुट घटनांए इस आक्रोशित देशभक्त हिन्दू समाज की तात्कालिक हमले की प्रतिक्रिया का टरेलर मात्र हैं ये प्रतिक्रिया कितनी व्यापक व भयानक हो सकती है इसका अन्दाजा शायद इन धर्मांतरण के ठेकेदारों, जिहादियों व इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह को नहीं है इसीलिए ये सब गद्दार बारी-बारी से लगातार भारतीय संस्कृति पर प्रहार कर देशभक्त हिन्दू समाज की आत्मा को लहूलुहान कर अपनी मौत को बुलाबा दे रहे हैं।
परपूजनीय सन्त श्री लक्ष्मणानन्द जी का कत्ल अगर ये ईसाई मिशनरी न करते तो शायद बनवासी हिन्दू समाज का धैर्य न टूटता । जैसे देश के अन्य हिस्सों में हिन्दू समाज व हिन्दू संगठन ईसाई मिशनरियों के अत्याचार सह रहे हैं अनका गाली गलौच, भारतीय संस्कृति व हिन्दू समाज की घोर निन्दा वो भी असंसदीय भाषा में, सहन कर रहे हैं कंधमाल में भी करते रहते। परन्तु कत्ल सहने का धैर्य अब जबाब दे चुका है वो भी उस निहत्थे परपूजनीय सन्त व उनके सहयोगियों का जो दिन-रात बनवासियों की निस्वार्थ सेवा में लगे हुए थे ।
उन्हें चर्च ने इसलिए कत्ल करवा दिया कि वो धर्मांतरण का विरोध करते थे । कौन सहन करेगा इस साम्राज्यवादी सोच को ? क्यों सहन करेगा ? कब तक सहन करेगा ? हमारा देश हमारे लोग हमारी जमीन और हमारे पर ही आक्रमण और वो भी उन सम्राज्यवादी ईसाई मिशनरियों का जो 1600ई. में व्यापारियों के भेष में आए और हिन्दुओं के बीच फूट डलवाकर 300 वर्ष तक भारतीय अर्थव्यवस्था व संस्कृति को तहस नहस करते रहे और देशभक्त हिन्दुओं को मौत के घाट उतारते रहे और अब ईसाई मिशनरियों के रूप में आकर धर्मांतरण करवाकर हिन्दुओं के बीच फूट डलवाने का असफल प्रयास कर रहे हैं ।
परन्तु इनको यह नहीं भूलना चाहिए कि ये महारानी लक्ष्मीबाई व भगत सिंह का देश जलियांवाला बाग में ईसाई मिशनरी डायर द्वारा मचाई गई मार काट को अभी तक नहीं भूला है और न भूलेगा इसलिए ईसाई मिशनरियों को 16वीं शताब्दी की मानसिकता समय रहते त्याग देनी चाहिए या फिर परिणाम भुगतने के लिए तैयार हो जाना चाहिए हिन्दू समाज धर्मांतरण के ठेकेदारों को बख्शेगा नहीं । परमपूजनीय सन्त लक्ष्मणानन्द जी के ऊपर ईसाई मिशनरियों का ये दसवां हमला था ।
इनकी दुष्टता की पराकाष्ठा देखो हमले के स्थान पर जो चिट्ठी छोड़ी उसमें लिखते हैं कि क्योंकि हम भारत को सैकुलर बोले तो हिन्दुविहीन बनाना चाहते हैं इस लिए हमने स्वामी जी का कत्ल किया । कौन राष्ट्रभक्त हिन्दू इस दुष्टता को सहन कर सकता है जब इनकी दुष्टता का जबाब इन्हीं के तरीके से मिलने लगा तो शोर मचा दिया कि स्वामी जी का कत्ल माओवादियों ने किया है फिर माओवादियों को पैसा देकर उनका ब्यान दिलबा दिया वरना माओवादियों को क्या जरूरत पड़ी थी उस कत्ल की जिम्मेवारी लेने की जो उनकी सोच से मेल नहीं खाता । पता तो उन अपराधीयों का लगाया जाना चाहिए जिन्होंने माओवादियों से यह झूठा ब्यान दिलवाया जांच एजैंसियों व हिन्दुओं को गुमराहकर धर्मांतरण के ठेकेदारों को निर्दोष सिद्ध करने के लिए और उनका भी जो ईसाई देशों में इस झूठ को फैलाकर हिन्दुस्थान को बदनाम कर देशद्रोही कामों को अन्जाम देने के लिए धनसंग्रह कर रहे हैं। मीडिया के उन गद्दारों का भी पता लगाया जाना चाहिए जो बार-बार हिन्दुविरोधी दुष्प्रचार कर हिन्दुओं व हिन्दुस्थान को बदनाम कर अपनी जेबें भर रहे हैं ।
v जिस वक्त ये सबकुछ उड़ीसा में घट रहा था ठीक उसी वक्त बंगलादेशी जिहादी घुसपैठियों द्वारा आसाम में देशभक्त निर्दोष हिन्दुओं को हलाल किया जा रहा था जिन्दा जलाया जा रहा था उनके घरों को जलाकर उन्हें बेघर किया जा रहा था और कर कौन रहा था विदेशी बंगलादेशी जिहादी घुसपैठिये, मुस्लिम आतंकवादी । इसी वक्त महाराष्ट्र के धुले में आतंकवाद के विरोध में हो रही रैली को रोकने के लिए जिहादियों द्वरा हिन्दुओं पर हमला कर कई हिन्दुओं का कत्ल कर दिया व सैंकड़ों हिन्दुओं को घायल कर दिया ये हिंसा लगभग पाँच दिन तक चलती रही।
v उड़ीसा में ईसाईयों द्वारा स्वामी जी की निर्मम हत्या से शुरू हुई हिंसा में कुल 30 लोग मारे गए 500 घर जलाए गए । जबकि आसाम में जिहादियों द्वारा चलाए जा रहे हिन्दू मिटाओ हिन्दू भगाओ अभियान के तहत अब तक सैंकड़ों हिन्दू मारे जा चुके हैं, हजारों घर जलाए जा चुके हैं लाखों हिन्दू बेघर हो चुके हैं अभियान आज 31अक्तूबर 2008 तक जारी है । क्या आपने इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह को (जो बटाला हाउस मुठभेड़ व उड़ीसा के बारे में तरह-तरह की बातें बना रहे थे विशेष चर्चा-परिचर्चा ,रैलियां करवा रहे थे ,जोर जोर से चिला रहे थे ,ईसाई मार दिए ईसाई मार दिए, हिन्दुओं व उनके संगठनों पर मन गढ़ंत आरोप लगाकर उन पर प्रतिबन्ध लगाने की मांग कर रहे थे ) आसाम या धुले की बात करते हुए देखा चर्चा-परिचर्चा करवाते हुए देखा या फिर हिन्दू मार दिए हिन्दू मार दिए हिन्दुओं के घर जला दिए चिलाते हुए देखा नहीं न क्यों नहीं क्योंकि ये सैकुलर हैं
v धर्मनिर्पेक्षता इन्हें हिन्दुओं को, हिन्दुओं की सभ्यता संस्कृति को बदनाम करना, हिन्दुओं के देवी देवताओं को गाली-गलौच करना, साधु संतो को अपमानित करना यहां तक कि भारत की आत्मा भगवान राम के अस्तित्व को नकारना तो सिखाती है पर हिन्दुओं पर होने वाले अत्याचार, हिन्दुओं के जानमाल के नुकसान का विरोध करना नहीं सिखाती ।
क्योंकि हिन्दुओं के जानमाल का नुकसान करने वाले ही तो इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह का वोटबैंक हैं इनके अर्थतन्त्र की रीढ़ हैं ऊपर से हिन्दुओं का समर्थन करने के बदले कोई पैसे भी तो नहीं देता !
अगर ये गिरोह हिन्दुओं पर जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों द्वारा होने वाले जुलमों-सितम के विरूद्ध आवाज उठाएगा तो इनको मुस्लिम व ईसाई देशों से मिलने वाला धन और समर्थन दोनों बन्द हो जांएगे फिर ये न हिन्दुओं को मरबा पायेंगे न धर्मांतरण करवा पायेंगे इन हालात में इनका वोटबैंक कम होता चला जाएगा। क्योंकि जिस दिन हिन्दू इनकी फूट डालो राज करो के षड्यन्त्र के चंगुल से निकलकर इनकी देशद्रोही हिन्दुविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक मानसिकता को जानलेगा फिर इनको वोट तो क्या इस हिन्दूराष्ट्र भारत में इनका पिंडदान करने वाला भी कोई न मिलेगा ।
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