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मोदीराज लाओ

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भारत बचाओ

सोमवार, 3 अक्तूबर 2011

दिगविजय सिंह को समझना चाहिए कि बुरे काम का अन्जाम बुरा ही होता है…


दिगविजय सिंह कह रहा है कि वह देशभक्त है और उसका अपमान किया जा रहा है जिससे उसके परिबार व मित्रों को कष्ट हो रहा है ।इस कष्ट से बचने के लिए उसने कोर्ट में केश दर्ज करवा दिया है। इसमें कोई सन्देह नहीं कि जो लोग दिगविजय से प्यार करते हैं वो लोग ऐसे चित्रोंDigi को देखकर जरूर दुखी हुए होंगे।
ये चित्र सही हैं या गलत इस बात का फैसला करने के लिए हमें दिगविजय सिंह द्वारा अपमानित किए गए संगठनों, सन्तों व सुरक्षाबलों के करोड़ों देशभक्त समर्थकों के कष्टों को भी समझना होगा।
दिगविजय द्वारा प्रताड़ित किए गए देशभक्तों की संख्या इतनी अधिक है कि अगर दिगविजय ऐसे लाखों केस भी दर्ज करवा दे तो भी इन प्रताड़ित देशभक्तों के आक्रोश से बचना अगर नामुमकिन नहीं तो असम्भव जरूर है।
दिगविजय के मित्रों को भगवान से प्रार्थना करनी चाहिए कि ये मानसिक रूप से प्रताड़ित देशभक्त सिर्फ अपनी कलम से ही अपने आक्रोश और क्षोभ को शान्त कर ले वरना दिगविजय द्वारा दिए गए बोल बचन तो ऐसे हैं कि कोई भी कम संयम वाला देशभक्त अपना आपा खोकर दिगविजय द्वारा दी जा रही मानसिक प्रताड़ना से मुक्ति पाने के लिए कोई भी extreme कदम तक उठा सकता है जिसमें आत्मवलिदान से लेकर प्रताड़ित करने वाले से छुटकारा तक कुछ भी हो सकता है।
दीगविजय ने कहा
“ स्वामी राम देब को पत्तथर बान्ध कर तबतक पानी में डुवोए रखना चाहिए जब तक उनके प्राण न निकल जायें”
देशभक्त कहते हैं कि “भारतीय संस्कृति के ध्वजबाहक स्वामी राम देब जी जैसे प्रखर देशभक्त का अपमान करने वाले पापी को इतने डुकड़ों में विभाजित कर देना चाहिए कि उन टुकड़ों को चील-कऊए भी चोंच से उठाने में संकोच करें।”
दिगविजय ने कहा “स्वामी रामदेव ठग था ठग है और ठग रहेगा”
देशभक्त कहते हैं “दिगविजय गद्दार था गद्दार है और गद्दार रहेगा”
अपनी सिकायत में दिगविजय खुद को देशभक्त बताता है ।
हम आपसे जानना चाहते हैं कि “क्या कोई देशभक्त ,अपने जीवन का वलिदान देकर देशवासियों की रक्षा के लिए आतंकवादियो का अन्त सुनिस्चित करने वाले ,शहीद मोहन चन्द शर्मा की शहीदी का अपमान कर  सकता है? ”
लेकिन दिगविजय ने आजमगढ़ के गांव संजरपुर का दौरा कर बटला हाउस मुठभेड़ में मारे गए आतिफ व साजिद नामक आतंकवादियों को न केवल निर्दोश बताया पर साथ ही उनके गोलीवारी में मारे जाने के तरीके पर प्रश्न खड़े कर अपनी गद्दारी की मानसिकता को सबके सामने उजागर कर दिया।
अगर शहीदों का अपमान करने वालों को देशभक्त कहेंगे तो भला गद्दार किसे कहेंगे?
दिगविजय की आधारहीन बातों से तंग अगर अन्ना anna hajare ji2जी हजारे जैसा मंझा  हुआ बुजुर्ग व्यक्ति दिगविजय को पागलखाने भेजने की सिफारिस करता है तो भला आप उस नौजवान से क्या उम्मीद करेंगे जो परमपूजनीय स्वामी राम देव जीRam Dev ji (2) के नेतृत्व में कालेधन को भारत बापस लाने के लिए प्रतिबद्ध है जो स्वामी जी को अपना गुरू,मार्गदर्शक व नेता सबकुछ मानता है।
अगर वो ऐसा चित्रDigi1 बनाकर अपना आक्रोश निकालता है तो दिगविजय को केश करने के बजाए अपनी जुवान पर लुगाम लगाने की कोसिस करनी चाहिए ताकि कोई नौजवान दिगविजय के बकवास से तंग आकर कोई ऐसा कदम न उठा बैठे जिससे दिगविजय के साथ-साथ उस नौजवान का जीवन भी दांव पर लगा जाए।
एकदिन दिगविजय  देशभक्तों के संगठन RSS को बमों की फैक्ट्री करार दे देते हैं । जो बात आज तक भारत की कट्टर दुशमन ISI या फिर अमेरिका की खुफिया ऐजेंसी FBI या पिर पिछले 6 वर्षों से RSS को फंसाने व बदनाम करने के लिए लगाई गई CBI जैसी गुप्तचर संस्था ने नहीं कही वो बात दिगविजय कहे तो फिर भला RSS से जुड़ा देशभक्त क्या करे ?
कोर्ट में जाए या फिर चित्र Digi4बनाकर अपमान का बदला अपमान से ले या पिर कलम उठाकर अपने आक्रोश को शब्दों के बाण चलाकर शान्त करे।
आओ जरा अब दिगविजय के असली चरित्र को पहचानें…
ये दिगविजय वो शैतान है जो भारत के इतिहास के सबसे बड़े आतंकवादी हमले जो मुम्बई पर हुआ था को RSS के बहाने हिन्दूओं द्वारा किया गया हमला बताता है ये हमला वो हमला है जिसे खुद  कांग्रेस की सरकार व अमेरिका पाकिस्तान द्वरा किया गया हमला बताते हैं जो हेडली की गिर्फतारी के बाद  अमेरिकी न्यायालय में भी साबित होने के करीब पहुंच गया है व कसाब की गिफ्तारी के बाद भारतीय न्यायलय में साबित हो चुका है।
अब आप बताओ दिगविजय देश के साथ इससे बड़ी और क्या गद्दारी कर सकता है?

ये दिगविजय वो दिगविजय है जो मानबता के शत्रु ओसामाविन लादेन Ladenको ओसामा जी कहकर भारत के मुसलमानों को आतंकवाद के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए उकसाता है ,उस ओसामाविन लादेन को जिसे कोई समझदार मुसलमान भी जी कहना पसंद नहीं करता। आप जरा सोचो कि अगर मुसलमानों के बच्चे ऐसे लोगों के उकसावे में आकर देश में आतंकवाद को बढ़ाबा देते हैं तो भला भारत के दुशमनों के अलाबा और कौन खुश हो सकता है?
ये दिगविजय, जो शान्तिप्रिए हिन्दूओं को आतंकवादी कहकर अपमानित करता है , आतंकवादियों के घर जाकर शहीदों के वलिदान पर प्रश्न उठाकर सुरक्षाबलों का मनोबल तोड़ता है ,सन्तों को ठग कहता है कत्ल करने की धमकी देकर डराता है अपने समर्थकों को उकसाता है,RSS को बमों की फैक्ट्री बताता है व मानबता के दुशमन आतंकवादी ओसामविन लादेन को जी कहकर अपना आदर्श बताता है ।
आप ही बताओ कि इस दिगविजय के काल्पनिक आरोपों व अपशब्दों से प्रताड़ित और आक्रोशित देशभक्त इसके साथ कैसा बर्ताब करें?

2 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

mulla jo ab kutta diggu kahlata hai apne aap ko dekh kar bahul idlata hai.. jab malik(soniya) deti hai hddi to dum ko hila kar hindu or deshbhkto per bhokta hai... uski bhkti kebal malik or uske akao(mullo) se hai.. jis ke pair roj raat din chtta hai... ye diggu dogy bhi bade kamal ka hai... aaye din naye naye kaam karta .. kabhi bhishta me to kabhi nale me najar aata hai.... to kabhi mullo ke pkhno me bhishtha saaf karta pkda jata hai... kabhi kabhi to rahu baby ki potty mil jati hai jo amul baby garib ki roti kha kar karte hai...
jis karan diggu baby ke gun gata hai... barana to bas paKHNA HAI KTUO KA JAHA PER DIGU DOGY KAKSAR AATA JATA HAI ......

BARANA TO DIGGU NA TO GHAR(HINDU) KA RAHA NA GHAT(ISHAI) KA.... DIGGU DOGY TO BAN GAYA SAFAI KARMCHARI KEBAL ISLAM KA(MULLO) YA MALIK (SONIYA,RAHUL) KE MAKAN KA...........

ankur raisoni ने कहा…

vote bank ki rajniti ke karan kahi ek baar aur naa baat jaye mera bharat