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मोदीराज लाओ

मोदीराज लाओ
भारत बचाओ

गुरुवार, 12 अगस्त 2010

क्या आतंकवादियों का समर्थन करने वाले नेताओं व छदम मानवाधिकारवादीयों को खुलेआम गोली से नहीं उड़ा देना चाहिए?

आज भारत में लोकतन्त्र का अर्थ हो गया है वेसमझ जनता द्वारा, गद्दारों की फूट चालो राज करो के षडयन्त्रों का सिकार होकर देशविरोधियों के हाथ मजबूत कर आतंकवादियों व देश के दुशमनों के लिए के लिए साशन ।अगर हम भारत के वर्तमान हालात का गहराई से अध्ययन करें तो सिर्फ एक बात उभर कर सामने आती है कि भारत के भीड़तन्त्र के चारों सत्मभ किसी न किसी रूप में देश के दुश्मन आतंकवादियों व अपराधियों को फायदा पहुंचाने के औजार बन गए हैं।


इस भीड़तन्त्र के चौथे सतम्भ मीडिया का एकमात्र काम बन गया है देश के शत्रुओं के अनुकूल बाताबरण बनाना, देसभक्तों को खलनायक के रूप में प्रसतुत करना व इसके बदले में देश के शत्रुओं से मोटी रकम प्राप्त करना।


इस भीड़तन्त्र के प्रमुख सत्मभ संसद के रहनुमाओं का काम बन गया है अपराधियों के बचाब के लिए कानून बनाना ब देश के शत्रुओं के पक्ष में बयानबाजी करना।


लोकतन्त्र की रक्षा के लिए एक मात्र उमीद न्यायापालिक भी धीरे-धीरे मिडीया व संसद के मार्ग पर आगे बढ़ते हुए गद्दारों के हाथों विकती नजर आ रही है ।


आतंकवादी इशरत जहां व सोराबूद्दीन के मामले न्यायपालिका की देश से गद्दारी के सबसे बड़े उधाहरण हैं। न्यायपालिका भारतीय जनमानस की भावना व रितीरिवाज के प्रति कितनी संवेदनहीन है इसका सबसे बढ़ा उधाहरण है Live In relationship में अदालत द्वारा भगवान श्री कृष्ण जी का नमा उछालना विना ये सोचे समझे कि एतिहासिक तथ्य इसके विलकुल विपरीत हैं।


आज जब देश के सामने माओवादी आतंकवाद मुसलिम आतंकवाद के वाद सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरा है उस वक्त केन्द्र सरकार के ,ममता बैनर्जी जैसे मन्त्रियों व दिगविजय सिंह जैसे मानबताविरोधी नेताओं द्वारा खुलेआम माओवादी आतंकवादियों का समर्थन करना इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि आज देश व आमजनता से गद्दारी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह से सबन्धित नेताओं की आदत बन चुका है।


हमारे विचार में माओवादी आतंकवादी संगठन PCPA के साथ मेघा पाटेकर व अग्नीवेश द्वारा मंच सांझा करना धर्मनिर्पेक्ष मानवाधिकारवादियों व देश के शत्रुओं के हिसंक गठजोड़ का विलकुल सपष्ट उधारण है।


हमार विचार में आज जो भी व्यक्ति भारतविरोधी आतंकवादियों का पक्ष लेता है, चाहे वो कितने भी उंचे पद पर क्यों न हो को खुलेआम गोली से मार डालना चाहिए वरना देश के आम नागरिक को अपने जीवनयापन के लिए आतंकवादियों का मोहताज होना पड़ेगा जो किसी भी तरह से सवीकार नहीं किया जा सकता।






5 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

आप को हिटलर के जमाने में जर्मनी में पैदा होना चाहिए था।

Suresh Chiplunkar ने कहा…

सहमत हूं… अब तो यही इलाज सुधार ला सकता है थोड़ा…

भ्रष्टाचारी को तो सड़क पर लाकर पहले पीटना चाहिये, फ़िर जनता के हवाले कर देना चाहिये और जनता की मार से भी वह बच जाये तब उसे गोली से उड़ाना चाहिये…

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

प्रजातन्त्र में यह सम्भव होगा?

दीर्घतमा ने कहा…

सुनील जी
नमस्ते
वास्तव में हिटलर ने अपने देश राष्ट्र क़े लिए सब कुछ किया था मनमोहन सिंह क़ा कश्मीर पर बयान क्या दर्शाता है क्या हम फिर से देश बिभाजन स्वीकार करेगे आवस्यकता है किसी देश भक्त हिटलर की और शाहसी नेतृत्वा की जो देश की सिकुड़ती हुई सिमवो की रक्षा कर सके इतनी अच्छी पोस्ट क़े लिए आभार.
बहुत-बहुत धन्यवाद

दीर्घतमा ने कहा…

माओबादी बैचारिक तानाशाही चाहते है इनका कोई इलाज नहीं है भारत क़े सभी आतंकबादी एक है कश्मीर क़े आतंक बादी भी मिले है ये खुली युद्ध की चुनौती दे रहे है इन्हें लड़कर ही समाप्त करना होगा,स्वामी अग्निवेश को आर्यसमाज ने निकाल दिया ये सेकुलारिस्तो क़ा पुछल्ला मात्र है.