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मोदीराज लाओ

मोदीराज लाओ
भारत बचाओ

शनिवार, 31 जनवरी 2009

भारत विरोधी भारत सरकार

भारत विरोधी भारत सरकार
जब से इस हिन्दुविरोधी मुस्लिम जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह की सरकार सत्ता में आई है तब से इसका एक ही चेहरा उभर कर सामने आता है पहले दिन से लेकर आज तक इस सरकार का एक-एक काम चीख-चीख कर कह रहा है कि इस सरकार का एक मात्र मकसद येनकेन प्रकारेण भारतीय संस्कृति और सभ्यता को तबाहकर हिन्दुओं को मरवाकर मुस्लिम जिहादियों और धर्मांतरण के ठेकेदारों का सहयोग लेकर देश को एक ऐसी दिशा देना है। जिसका एकमात्र परिणाम गृहयुद्ध है।
गृहयुद्ध में विदेशी सहायता लेकर हिन्दुओं का नामोनिशान मिटाकर इस एंटोनिया माइनो मारियो को देशभक्त हिन्दुओं द्वारा प्रधानमन्त्री न बनने देने का बदला लेकर व भारत विरोधी ताकतों के षड्यन्त्र को पूरा कर देश में मुस्लिम जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों का आदमखोर राक्षसी राज्य स्थापित करना है अगर आपको इस बारे में कोई शंका है तो अगले कुछ पन्नें जिन पर हम इस सरकार के सिर्फ पिछले 4⅔ वर्ष के सांप्रदायिक निर्णय लिखेँगे जो न केवल आपका भ्रम दूर कर देंगे बल्कि आपको यह भी स्पष्ट कर देंगे कि ये हिन्दूविरोधियों का गिरोह जो सैकुलर होने का दावा करता है वो इस देश का अति सांप्रदायिक गिरोह है।
ये देश की पहली सरकार है जिसके सभी बड़े पदों पर खुद को भारतीय के बजाए अल्पसंख्यक कहने में गर्व महसूस करने वाले बैठे हैं इस गिरोह की प्रमुख एंटोनियो माइनोमारियो विदेशी अंग्रेज ईसाई जिसके पी ए के रूप में प्रधानमंत्री नियुक्त हुआ है और गुलामी में देशविरोधी काम करने को मजबूर है एंटोनियो के कोर ग्रुप में या तो ईसाई हैं या मुसलमान । सरकार का एक महत्वपूर्ण पद रक्षा मंत्रालय हिन्दू प्रणव मुखर्जी जी के पास था जिसे छीन कर ईसाई ए के एंटनी के पास दे दिया। रही गृह मंत्रालय की बात तो उसके बारे में सारे देश को विश्वास हो चुका है कि उसे स्वांय एंटोनिया चला रही हैं ।
कुल मिलाकर इस सरकार को हम देश की पहली अल्पसंख्यक सरकार कह सकते हैं जिसके द्वारा बहुसंख्यक देश के असली मालिक हिन्दुओं पर किए जा रहे हमलों को देख कर कलेजा मुँह को आता है इस देशद्रोही अल्पसंख्यक सरकार ने हिन्दुओं व हिन्दू संगठनों को आतंकवादी सिद्ध करने के जो प्रयत्न किए सो किए इसने तो भारतीय सेना तक को न बख्शा ।
आज तक किसी देशभक्त सरकार ने सेना में मुसलमानों या ईसाईयों की संख्या धटाने की कोशिश तो दूर बात तक नहीं की जो कि जिहादियों द्वारा सेना व हिन्दुओं पर किए जा रहे हमलों की एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया हो सकती थी । लेकिन इस सरकार ने सेना में हिन्दुओं की संख्या घटाने का दुस्साहस किया जो कि सेना ने ठुकराकर देश को इस हिन्दुविरोधी देशविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह के विनाशकारी षड्यन्त्र से बचा लिया। जिसकी वजह से आज लैफ्टीनैंट कर्नल श्रीकाँत पुरोहित जी को काल्पनिक घटनाओं में फंसाकर सेना को कटघरे में खड़ा करने का दुस्साहस किया जा रहा है।
ये बात यहीं पर खत्म नहीं हो जाती सोचने वाला विषय यह है कि सरकार को देशभक्त हिन्दुओं से डर क्यों लगा ? क्यों सरकार को ऐसा लगा कि देश की रक्षा करने वाली सेना उसके लिए खतरा है ।क्योंकि किसी भी देश की सेना तो उस देश की देशभक्त सरकार की रीढ़ की हड्डी होती है लेकिन किसी भी देशद्रोही सरकार के लिए खतरा !
· सरकार ने सत्ता मे आते ही देशभक्त हिन्दुओं व सुरक्षाबलों के खून के प्यासे जिहादी आतंकवादियों को कानून के शिकंजे से बचाने के लिए आतंकवाद विरोधी कठोर कानून हटा दिया।आज इस सरकार के पांच साल पूरे होने वाले हैं देश में आतंकवाद अपने चरम पर है पर सुरक्षाबलों के पास आज भी कोई कारगर कानून नहीं है। जिसकी वजह से एक तो आतंकवादी अपनी इच्छा अनुसार हमला कर रहे हैं और उनके सहयोगी व ये सेकुलर गिरोह आतंकवादियों द्वारा मारे गये हिन्दुओं को जायज ठहराने के लिए कभी कह रहे हैं ये मुसलमान गरीब हैं कभी कह रहे हैं ये अनपढ हैं कभी कह रहे हैं ये हिन्दुओं द्वारा सताए हुए हैं।
पोटा हटाने के लिए भी यही तर्क दिया गया कि ये हम मुसलमानों को बचाने के लिए कर रहे हैं। ये सब तर्क ये धारणा बनाते हैं कि सब के सब मुसलमान जिहादी आतंकवादी हैं बेशक सरकार मानती हो कि सच्चाई यही है फिर भी हमें समझना चाहिए कि बेशक सारे के सारे जिहादी आतंकवादी मुसलमान हैं पर सारे मुसलमान जिहादी आतंकवादी नहीं हैं। क्योंकि मुसलमान अल्लाह को मानते हैं भारत को अपनी मातृभूमि मानते हैं नमकहलाल होते हैं जबकि जिहादी आतंकवादी आदमखोर जिहादी अल्लाह को मानते हैं औरंगजेब बाबर के समर्थक गद्दार और नमकहराम हैं । जो कि न अनपढ हैं न गरीब हैं क्योंकि ये जिहादी कोई डाक्टर है तो कोई इंजिनियर ।
अब रही बात मुसलमानों को हिन्दुओं द्वारा सताए जाने की तो एक तो जिहादी आतंकवादियों द्वारा किए गये हमलों में मारे जाने वाले 95% हिन्दू हैं क्योंकि योजनाबद्ध ये सारे हमले हिन्दुबहुल क्षेत्रों व मन्दिरों में किए जाते हैं दूसरा ये जिहादी इस्लाम के नाम पर देश के तीन-तीन टुकड़े करवा कर उन पर कब्जा कर चुके हैं अब अखण्ड भारत का छोटा सा हिस्सा सिर्फ भारत ही हिन्दुओं के लिए है अब इसमें भी इस्लामी राज्य बनाने के लिए ये जिहादी कत्लोगारद मचा रहे हैं ऐसे में आप खुद फैसला करें कि कौन किसका सत्ताया हुआ है ।
ये तो बिल्कुल वैसा ही है कि किसी के घर में घुसकर उस पर हमला करना मारकाट मचाना उसके द्वारा प्रतिरोध करने पर शोर मचा देना कि घर का मालिक हमें सत्ता रहा है इसे घर से बाहर निकालकर सजा दो।
जब हिन्दू राष्ट्र भारत में ये स्थिति है तो जरा चिंतन करें कि हिन्दू दुनिया में कहां सुरक्षित है ?

· इस सरकार ने सत्ता में आते ही आतंकवादियों से संघर्ष में शहीद होने वाले अर्धसैनिक बलों के परिवारों को मिलने वाली विशेष आर्थिक सहायता ये कहकर बंद कर दी कि सरकार के पास पैसे की कमी है और सुरक्षाबलों द्वारा मारे गये जिहादी आतंकवादियों के परिवारों को आर्थिक सहायता देना शुरू कर दी तब पैसा कहां से आया । वास्तव में कमी पैसे की नहीं, नीयत में खोट है सरकार की नीयत जिहादी आतंकवाद को बढ़ावादेने की है। न तो नीयत साफ है न नीति ।
· सरकार ने मुसलमानों और ईसाईयों द्वारा चलाए जाने वाले शिक्षा संस्थानों को कानून के नियन्त्रण से बाहर कर उन्हें देशविरोधी हिन्दुविरोधी एजंडे को लागू करने की खुली छूट दे दी।
· सरकार ने सांप्रदायिक आधार पर मुसलमानों और ईसाईयों के बच्चों के लिए छात्रवृतियां देने की शुरूआत की जो कि हिन्दुओं के बच्चों के साथ अन्याय है क्या इन बच्चों का कसूर ये है कि ये हिन्दू हैं ? जरा सोचो सांप्रदायिक आधार छात्रवृतियों से वंचित ये बच्चे जब बड़े हो जांयेगे तो इनकी मानसिकता क्या होगी ?
· सरकार द्वरा घोषणा की गई कि देश के संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का है। भारत के बाकी तीन हिस्सों अफगानिस्तान,पाकिस्तान,बांगलादेश में भी पहला अधिकार मुसलमानों का ही है तो फिर हिन्दुओं का पहला अधिकार कहां है ? हिन्द महांसागर में डूब मरने का या जिहादी राक्षसों के हाथों हलाल होने का कश्मीरघाटी की तरह!
· सरकार द्वारा ये भी कार्यक्रम बनाया गया कि मुस्लिम बहुल जिलों का प्राथमिकता के आधार पर विकास किया जाएगा तो क्या ये माना जाये कि हिन्दुबहुल जिलों का पूरी तरह विकास हो चुका है और इतने अधिक विकास की वजह से हिन्दू किसान आत्महत्या करने पर मजबूर हैं या फिर यह माना जाए कि हिन्दुओं ने परिवारनियोजन को राष्ट्रहित में अपनाकर अपराध किया है ?
· माननीय उच्च न्यायालय द्वरा हजयात्रा के लिए सरकार द्वारा दिए जाने वाले अनुदान को गैर कानूनी घोषित किए जाने पर सरकार का तिलमिलाना व माननीय सर्वोच्च न्यायलय में अपील कर इस सांप्रदायिक अनुदान को जारी रखने की अपील को क्यों भेदभाव करने वाला कदम न माना जाए ।
क्या सरकार हिन्दुओं को चारधाम की यात्रा के लिये 50000रूपये प्रतिव्यक्ति अनुदान देती है ? क्या सिखों को स्वरणमन्दिर की यात्रा के लिए अनुदान देती है ? वैसे भी हिन्दुओं द्वरा टैक्स के रूप में दिए गये अपनी खूनपसीने की कमाई को इस तरह बरबाद करना वो भी जिहादी मानसिकता के विकासके लिए और आमरनाथ यात्रा पर जाने वाले यात्रियों से पंजीकरण शुल्क व जम्मूकश्मीर सीमा पर टैक्स वसूलना हिन्दुविरोधी मानसिकता नहीं तो और क्या है ? अगर आपको भरोसा नहीं तो सी.ए.जी. की रिपोर्ट पढ़ो।
New Delhi: The Comptroller and Auditor General of India has come down heavily on the Ministry of External Affairs for sending extravagant, cumbersome goodwill delegation to Saudi Arabia every year . The CAG says this spending is in "disregard for economy in public expenditure."
· The Centre sends a Haj goodwill delegation of more than 30 people for 18-20 days to Saudi Arabia every year to promote goodwill between the two countries.
इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि साउदीअरब आज भारत विरोधी सब जिहादी आतंकवादियों की शरणस्थली बना हुआ है और भारत में हिन्दुओं व सुरक्षाबलों का खून बहाने वाले जिहादी आतंकवादियों व उनके समर्थकों को अधिक से अधिक धन उपलब्ध करवाकर भारत में आदमखोर जिहादी अल्लाह का सम्राज्य बनाने के लिए प्रयासरत है।जिस सांप्रदायिक देश में चर्च या मन्दिर बनाने तक की इजाजत नहीं क्या उस देश में हिन्दूराष्ट्र भारत जैसे देश, जहाँ किसी पूजा के स्थान को बनाने पर कोई प्रतिबन्ध नहीं, के नागरिकों को वो भी हिन्दुओं के पैसे से भेजकर जिहादी कट्टरता आयात करना व भारतीयों के जानमाल को खतरे में डालना उचित है ?

· "The Ministry has not established the goodwill functions to be performed by the members of the delegation through which the fulfilment of the intended objectives is ensured," the CAG said in his report.
महानिदेशक जी ये क्या कह रहे हैं, क्या आपको नहीं पता इस देश से हिन्दुओं का नामोनिशान मिटाना ही एकमात्र गुडविल फंक्शन है अगर आपको बता दिया और हिन्दुओं को पता लग गया तो भेद खुल जाएगा और अगर भेद खुल गया तो इन मुस्लिमप्रस्तों की खैर नहीं !
· It also said the component-wise analysis of the total expenditure of Rs 2.39 crore incurred on one of the goodwill delegations (Haj-2006 II) disclosed that while the airfare accounted for Rs 12.85 lakh and the daily subsistence allowance to the members was Rs 12.12 lakh , other local expenditure aggregated Rs 2.14 crore.
· The CAG report also said examination of the documents in the MEA and in the Mission at Jeddah disclosed that the leader of the delegation holds a few meetings with the local dignitaries and officials.
· "Only two-three other members of the goodwill delegation are associated with these meetings and the dinner. Other members have no role in promotion of goodwill," it said.
· The total expenditure on Haj delegation 2006-II was Rs 2.39 crore and at this rate, the expenditure on each member of the delegation works out to a massive Rs 8.85 lakh for Haj 2006-II.
ये 9,00,000 रूपये प्रति व्यक्ति तो सिर्फ यात्रा का प्रबन्ध करने के लिए जाने वाले सरकारी अमले का खर्चा है असली खर्चा लगभग 50000रू प्रति व्यक्ति यात्रा के दौरान किया जाना है ।
जागो ! हिन्दू जागो !

हिन्दू जानना चाहता है कि कितने ईसाई या मुस्लिम देशों में हिन्दुओं को वहां पर अल्पसंख्यक होने के नाते वो सब सुविधायें मिलती हैं जो भारत में हिन्दुओं को उनके मूल अधिकारों से वंचित कर इन ईसाईयों और मुसलमानों को दी जाती हैं?
सरकार क्या बताएगी संसार के अधिकतर देशों में हिन्दुओं को दोयम दर्जे के नागरिक की तरह रखा जाता है उन्हें मन्दिर तक नहीं बनाने दिये जाते, कई देशों में उन्हें मृत्यु के बाद अपने परिजनों तक को जलाने तक की इजाजत नहीं।
अब आप ही बताओ कि सब जगह हिन्दू ही क्यों भेदभाव सहे कम से कम हिन्दुस्थान में तो ये भेदभाव नहीं होना चाहिए । हम भारत के हिन्दू सिर्फ इतनी मांग कर रहे हैं कि हमें बेशक विशेषाधिकार न दिये जाँए पर कम से कम हमें हमारे बच्चों को इस आधार पर अपने अधिकारों से तो न वंचित किया जाए कि हम हिन्दू हैं भारत में तो कम से कम ये सब नहीं होना चाहिए ।
हमारी ये बात मानना तो दूर हमारे अधिकारों के लिए माँग उठाने वाले देशभक्त हिन्दूसंगठनों को ये गिरोह साँप्रदायिक, आतंकवादी, फासिस्ट कहकर सारी दुनिया में बदनाम कर रहा है और कातिल जिहादियों को अपना भाई । हमारी मौत तक को ये गठबन्दन जायज ठहरा रहा है । अब आप ही बताओ इन सब हालात मे हमें अपना हक दिलवाने के लिए व इन जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों से रक्षा करने के लिए कोई हिन्दू हथियार उठा ले तो फिर हम सब हिन्दू उसका साथ क्यों न दें ?
· आज स्वामी रामदेव जी ने योग व आयुर्वेद को हर देशभक्त भारतीय के जीवन का अभिन्न अंग बनाकर उनके जीवन स्तर में वो सुधार ला दिया है जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था । स्वामी रामदेव जी का यह अभियान अमीर-गरीब सबके लिए आशा की नई किरण बनकर उभरा है और हर देशभक्त भारतीय के अन्दर राष्ट्रभक्ति की वो ज्वाला पैदा कर रहा है जो गद्दारी व भ्रष्टाचार को जलाकर राख कर देने की ताकत रखती है ।आगे चलकर स्वामी रामदेव जी सब देशभक्त संगठनों के प्ररणा स्रोत वनने वाले हैं ।
स्वामी रामदेव जी द्वारा भारतीय सभ्यता और संस्कृति के प्रचार-प्रसार से तंग आकर इस देशविरोधी हिन्दुविरोधी जिहादी आतंकवाद व धर्मांतरण समर्थक सरकार ने स्वामी रामदेव जी के देशहित में किए जा रहे कार्यों को रोकने के लिए उनके ऊपर वृंदा करात के नेतृत्व में हमला बोल दिया ।
ये वृंदा करात वहीं हैं जो उस वांमपंथी विचारधारा से सबन्ध रखती हैं जो अफगानिस्तान व अन्य देशों मे ईसाई अमेरिका द्वारा मुस्लिम जिहादियों को कतलोगारद से रोकने के लिए किए जा रहे प्रयत्नों का विरोध करती है। वाममार्गी विचारधारा सारे भारत में राष्ट्रबाद व भारतीय-संस्कृति और सभ्यता का हर स्तर पर विरोध करती है, हर बक्त अपने भारत के विरूद्ध लड़ती रहती है। हमें हैरानी होती होती कि जो विचारघारा चीन में हर तरह से अपने राष्ट्र को सर्वोपरि मानती है वही विचारधारा भारत में देशद्रोह का मार्ग कैसे अपना लेती है ?
हम तो कहते हैं इन भारतीय वामपंथियों को वाममार्गी विचारधारा का सही ज्ञान ही नहीं । भारत में ये बात तो वामपंथ की करते हैं इनका असली काम भारतीयों को भाषा,क्षेत्र, जाति और हिन्दू-मुस्लिम के नाम पर लड़वाने का है जिसका जवलंत उदाहरण सिंगूर में इनके द्वारा गरीब किसानों की भूमि पर गोली के बल पर गुंडागरदी द्वारा किया गया कब्जा है। उन किसानों पर मार्कशवादी गुण्डों ने क्या-क्या अत्याचार नहीं किए । तभी तो आज भारत में नक्सलवादी व माओवादी हिंसा का केंन्द्र इनके द्वारा शासित प्रदेशों के आस-पास ही नजर आता है।
इसी हिंसा के समर्थक होने की वजह से नेपाल में कातिल माओवादियों को सत्ता में बिठाने के लिए ये मध्यस्ता करते हुए पकड़े जाते हैं हमें हैरानी होती है उन माता-पिता जी की प्रतिक्रिया के बारे में सोचकर जिन्होंने अपने पुत्र का नाम सीता-राम रखा होगा कितने आस्तिक होंगे वो माता-पिता । क्या-क्या उमीदें लगाई होंगी उन्होंने अपने इस हिन्दूपुत्र से जो आगे चलकर उसी मर्यादापुर्षोत्तम भगवान श्रीराम के अस्तित्व को नकारने वालों के साथ खड़ा नजर आया और मानवता के शत्रु जिहादियों का पक्ष लेने वाले देशद्रोही गिरोह का हिस्सा बना । पिछले दिनों इसी विचारधारा के अनजान ने हिन्दू साधु-सन्तों के बारे में ऐसी टिप्पणी की कि अगर वहां पर कोई अपने जैसा हिन्दू बैठा होता तो वहीं पर खत्म कर देता ऐसे दुष्ट हिन्दुविरोधी गद्दार को ।
खैर स्वामी रामदेव जी ठहरे घोर राष्ट्रवादी व कौमनष्ट ठहरे पक्के राष्ट्रविरोधी दोनों का मेल कैसे हो सकता है ? शायद अपने इसी राष्ट्रविरोधी वोटबैंक को पक्का करने के लिए स्वामी जी पर हमला बोला गया । हर तरह के मनघड़ंत आरोप लगाने शुरू कर दिए गये । उनको बदनाम करने के लिए सरकारी तन्त्र का दुरूपयोग कर कई षड्यन्त्र रचे गये। ये स्वामी रामदेव जी के प्रति देशभक्त जनता का अटूट विश्वास व भगवान की अपार कृपा थी जिसके कारण इन राक्षसों का कोई षड्यन्त्र सफल न हो पाया । धर्मप्रचार के काम में लगे स्वामी जी पर इस देशद्रोही गिरोह का ये हमला हमें जिहादियों द्वारा हिन्दुओं पर किए जा रहे बम्ब हमलों का बौधिक स्वरूप दिखाई देता है।
· बापू आशा राम के विरूद्ध रचे गए षड्यन्त्र की भी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए क्योंकि बापू आशा राम जी का काम भी धर्मांतरण के दलालों को अपने रास्ते में रूकावट की तरह खटता है हो न हो उनको बदनाम करने में इस हिन्दुविरोधी धर्मांतरण समर्थक गिरोह का हाथ जरूर निकलेगा।
· समय-समय पर सांई राम के बारे में भी इसी हिन्दुविरोधी गिरोह का एक वर्ग अफवाहें फैलाता रहता है ।
· हाल ही में श्री-श्री रविशंकर जी को भी विवादों में घसीटने की कोशिश की गई ।
· इस सरकार द्वारा हिन्दू साधु सन्तों पर हमला करना व उनको बदनाम करना कोई नयी बात नहीं है आपको याद होगा कि कुछ वर्ष पहले हिन्दुओं को चिड़ाने के लिए दीवाली के शुभ अवसर पर इस सरकार ने स्वामी जयेन्दर सरस्वती जी को गिरफ्तार किया जिन्हें बाद में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर छोड़ना पड़ा।
ये वो सरकार है जो मर्यादापुर्षोत्तम भगवान श्री राम के अस्तित्व को तो नकारती है पर पोप के मरने पर राष्ट्रीय शोक घोषित करती है।
· भारत तो भारत इस भारत विरोधी सरकार ने विदेशों में भी हिन्दुविरोधी षड्यन्त्र रचे। जिसका ताजा और स्पष्ट उदाहरण नेपाल है । इस सरकार के सत्ता में आते ही नेपाल में धर्मपरायण हिन्दुओं पर चीन समर्थित माओवादियों के हमले तेज हो गये । हिन्दूराष्ट्र नेपाल ने इस हिन्दुविरोधी हिंसा से निपटने के लिए हथियारों की मांग की जो इससे पहले की सरकारें देती रहीं थीं ।
लेकिन इस सरकार ने देशहित को दरकिनार कर हिन्दूविरोध को सर्वोपरि मानकर हिन्दूराष्ट्र नेपाल को हथियार देने से मना कर दिया। परिणामस्वरूप संसार के मानचित्र से दुनिया का एकमात्र हिन्दूराष्ट्र गायब हो गया और इसकी जगह हजारों हिन्दुओं के खून के दोषी माओवादियों के नेतृत्व में माओवादी नेपाल ने ले ली । जिसे इस हिन्दुविरोधी देशविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह ने अपनी विजय के रूप में प्रचारित किया।
· ये वही सरकार है जो अपने हिन्दुविरोधी ऐजंडे को धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में आगे बढ़ाने में विश्वास रखती है जिसकी पोल तब खुल जाती है जब हिन्दुविरोधी हर लेखक को अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के बहाने समर्थन देने वाली व पुरस्कृत करने वाली यह सरकार इस्लाम की सच्चाई को उजागर करने वाली लेखिका तसलीमा नसरीन को पहले तो भारत में ही बंदी बना लेती है, जिहादियों के हमलों से नहीं बचाती है और अंत में उसे भारत से बाहर निकाल देती है !
· ये देश के विभाजन के बाद पहली सरकार है जिसने बजट को भी संप्रदाय के आधार पर बनाया मतलब मुसलमानों के लिए अलग बजट और हिन्दुओं के लिए अलग बजट । ऐसा सांप्रदायिक बजट 1947 में बनाया गया था जिसके बाद देश का सांप्रदायिक आधार पर विभाजन हो गया था।
जागो ! हिन्दू जागो !
भारत के संविधान में सांप्रदायिक आधार पर आरक्षण वर्जित है फिर देखो तुम्हें ये कितना सम्मान देते हैं।
क्यों तुम हिन्दुओं के बच्चों को बेरोजगार कर भूखा मारने पर तुले हो ? क्यों तुम हिन्दुओं की जान लेने पर तुले हो एक तरफ जिहादियों से मरबा रहे हो दुसरी तरफ खुद हिन्दुओं के मुंह का निवाला छीन रहे हो ? एक साथ जहर क्यों नहीं दे देते ?
कभी कहते हो भगवान राम हुए ही नहीं फिर कहते हो राम सेतु भगवान राम ने ही तोड़ दिया इतनी गद्दारी से मन नहीं भरता तो एक तरफ हिन्दुओं को हलाल करने वालों को बचाने के लिए पोटा हटाते हो और माननीय सर्वोच्चन्यायलय से सजा प्राप्त जिहादी को फाँसी देने के बजाए पालते हो लोकतन्त्र के मन्दिर पर हमला करवाने वाले जिहादी प्रोफैसर को बचाने के लिए गद्दार परजीवी लेखकों व देशद्रोही मानवाधिकार संगठनों के द्वारा मोमबती जलाओ अभियान चलाते हो ।
दूसरी तरफ हिन्दुओं के जानमाल की रक्षा के लिए संघर्षरत हिन्दू संगठनों, भारतीय सभ्यता संस्कृति की रक्षा में लगे साधु-सन्तो को आतंकवादी सिद्ध करने के लिए षड्यन्त्र रचाते हो और इस गद्दारी की दौड़ में तुम देश की सुरक्षा की गारंटी सेना पर भी कीचड़ उछालते हो इस सब में तुम देशभक्तों के हाथों लिखी अपनी मौत को क्यों भूल जाते हो ?
हिन्दूओ तुम कब तक मार खाओगे ? कब तक पिटते रहोगे ? कब तक धोखा खाते रहोगे इन हिन्दूविरोधियों से ? कब तक गिड़गड़ाओगे इन जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों के आगे ? कब तक देश के टुकड़े होने दोगे ? कब तक इन गद्दारों के झूठ पर भरोसा कर अपने लिए शहीद होने वाले बलिदानियों के साथ खड़े न होकर चुपचाप उनके बलिदान होने का तमाशा देखोगे ?
कब तक अपने क्राँतिकारियों के शहीद होने पर सिर्फ नारे लगाकर किनारे पर खड़े रहोगे, कब तक अपनी मां को अपमानित करने वालों का साथ देते रहोगे ? कब तक भागते रहोगे ? कहां तक भागोगे ?
इन गद्दारों ने जिहादियों के साथ मिलकर अफगानिस्तान बनवा दिया आप भागकर भारत आ गये । इन सेकुलर गद्दारों ने आदमखोर अल्लाह के सैतानों के साथ मिलकर पाकिस्तान बांगलादेश बनवा दिए, आप भागकर भारत आ गये ,अब जब भारत ही नहीं बचेगा तो कहां जाओगे ?
अभी तो गैर हिन्दुओं की अवादी 25% से कम है। तब इस गद्दारों के गिरोह का हिन्दुओं पर इतना जोरदार हमला है। जब ज्यादा हो जाएगी तो ये गिरोह मुस्लिम जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों के साथ मिलकर हिन्दुओं व उनकी संस्कृति का ठीक उसी तरह सफाया कर देंगे जिस तरह इन्होंने कश्मीर घाटी व उतर-पूर्व के कई राज्यों में किया और आसाम व देश के कई अन्य हिस्सों में कर रहे हैं !
कायरों की तरह तिल-तिल कर मरने से एक बार बहादुरों की तरह लड़कर मरना आत्मा को शांति देता है । मेरे प्यारे शांतिप्रिय हिन्दूओ अभी वक्त है कूद पड़ो जंगे मैदान में मिटा डालो इन मानवता के शत्रुओं को वरना हाथ मलते रह जाओगे ।
अगर हालात और बिगड़ते हैं तो वो गलती न करना जो आपने 9वीं व 20वीं शताब्दी में की थी । इस बार जो युद्ध हम भारतीयों पर इन गद्दारों के गिरोह द्वारा थोपा गया है, अगर आगे बढ़ता है ,जिसकी पूरी सम्भावना है तो ये युद्ध निर्णायक व अन्तिम होना चाहिए एक भी गद्दार देशद्रोही आतंकवादी या उसका समर्थक जिन्दा नहीं बचना चाहिए। ताकि भविष्य में कोई आदमखोर जिहादी अल्लाह या उसका वंशज हिन्दुओं की ओर आँख न उठा सके व न ही कोई जयचन्द उसका साथ देने का दुस्साहस कर सके।
· इस सरकार ने माननीय सर्वोच्चन्यायालय में लिख कर दिया कि भगवान राम हुए ही नहीं हैं वो काल्पनिक हैं क्योंकि इस सरकार ने उन्हें नहीं देखा है।
हम इस सरकार व सरकार के इस विचार का समर्थन करने वालों से पूछना चाहते हैं कि क्या उन्होंने दादा के दादा को देखा है अगर नहीं देखा है तो इसका अर्थ ये हुआ कि इनके दादा के दादा हुए ही नहीं मतलब इनके दादा के पिता का कोई बाप ही नहीं ...आगे ये खुद सोचें ये क्या कह रहे हैं अपने बाप के बारे में ? हम नहीं लिख सकते !
जब हिन्दुओं व उनके संगठनों ने भगवान राम के अस्तित्व को नकारने का कड़ा विरोध किया तो इस सरकार ने माननीय सर्वोच्चन्यायालय में लिख कर दिया कि भगवान राम ने रामसेतु को खुद ही तोड़ दिया था अब कोई इस सरकार से पूछे कि इन दोनों हल्फनामों को मिलाकर देखो सत्य अपने आप सामने आ जाएगा। किसी ने क्या खूब कहा है कि एक झूठ को छुपाने के लिए कई झूठ बोलने पड़ते हैं !
जो सरकार हिन्दुओं की भावनाओं की परवाह न करते हुए ऐसे हल्फनामे माननीय सर्वोच्चन्यायालय में दे सकती है उसे तो खुल कर डैनिस पत्रकार के उस कार्टून का समर्थन करना चाहिए था जिसमें हजरत मुहम्मद को जिहादी आतंकवाद का प्रेरणा सत्रोत बताते हुए बम्ब फोड़ते हुए दिखाया था पर उसका तो इस जिहाद समर्थक सरकार ने विरोध किया वो भी जिहादियों के साथ मिलकर ! वाह क्या धर्मनिर्पेक्षता है ?
· श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड को आवंटित 800 कनाल भूमि का कश्मीर घाटी में जिहादियों द्वारा यह कह कर विरोध किया कि ये जमीन आवंटित होने से घाटी में फिर से हिन्दू वापिस आ जांयेगे जिन्हे 15 वर्ष जिहाद चलाकर मारा व निकाला गया । विरोध प्रदशर्नों के दौरान तीर्थ यात्रियों पर हमले किए गये, तिरंगा जलाया गया,पाकिस्तानी झंडा फैराया गया। सरकार ने जिहादी आतंकवादियों की इस देशद्रोही जंग को सफल बनाते हुए सिर्फ तीन दिन में ये भूमि आवंटन रद्द कर दिया।
सरकार के इस हिन्दुविरोधी-देशविरोधी निर्णय के विरूद्ध भूमि आवंटन को रद्द न करने के लिए देशभक्त संगठनों, सारे देश के हिन्दुओं द्वारा जम्मू के देशभक्त भारतीयों के नेतृत्व में अंदोलन चलाया गया । जिसमें देशभक्त मुसलमान भी शामिल हुए । इस अंदोलन में भारत माता की जय, वंदेमातरम् के नारे लगाये गये, सारे अंदोलन को तिरंगे के सम्मान में चलाया गया । सरकार ने हर तरह का बल प्रयोग कर व षड्यन्त्र रच कर इस अंदोलन को कुचलने का प्रयत्न किया । शहीद कुलदीप जी जैसे अनेकों लोगों ने बलिदान दिया ।लेकिन सरकार के कानों तक देशभक्ति से ओतप्रोत अंदोलन की आवाज नहीं पहुंची। कुल मिलाकर इस अंदोलन के थमने के बजाए और ताकतवर होता देख सरकार ने 70 दिनों को बाद घुटने टेके।
ये होता है मानसिकता का असर। क्योंकि ये सरकार हिन्दुविरोधी देशद्रोहियों की है इस लिए गद्दारों की हिन्दुविरोधी-देशविरोधी बात मानने में 3 दिन लगे और राष्ट्रवादियों की बात 70 दिन तक सुनाई ही नहीं दी !
· यह वही सरकार है जिसने भारत माता व हिन्दूदेवी देवताओं का अपमान करने वाले एम एफ हुसैन को सजा देने के बजाए उसे पुरस्कृत किया।
· यह वही सरकार है जिसने सारे भारत में एक साथ एक ही दिन वन्देमातरम् गाये जाने का आदेश दिया । लेकिन अलगाववादी आतंकवादियों द्वारा वन्देमातरम् का विरोध करने पर उन गद्दारों को फाँसी पर लटकाने की बजाए अपना आदेश ही वापिस ले लिया और गद्दारों के विरोध को जायज ठहराने का अपराध किया ।
· आज वही सरकार वन्देमातरम् का समर्थन व देशद्रोहियों का विरोध करने वाले सैनिकों, तपस्वियों, हिन्दुओं व हिन्दुओं के संगठनों के कार्यकर्ताओं को देशभक्ति के जुर्म में जेलों में बन्द कर उनके ऊपर अत्याचार कर रही है। ईसाई व मुस्लिम देशों से मिलने वाले पैसों के बदले हिन्दुओं व उनके संगठनों पर डंके की चोट पर कुत्तों की तरह भौंकने वाले टी वी चैनल इन क्राँतिकारियों के बारे में अपशब्दों का प्रयोग किसी भी कीमत पर चाँद की ओर मुँह कर थूकने जैसा प्रयास कर रहें हैं । इस बात से बेखबर कि थूक खुद इनके अपने मुँह पर गिर रहा है सब देशभक्त जनता समझती है कि ये गद्दार टी.वी चैनल किसके टुकड़ों पर पलते हैं ।
· यह वही सरकार है जिसने आंध्रप्रदेश में हिन्दुबहुल क्षेत्रों में बम्बविस्फोट करने के आरोप मे पकड़े गये मुसलमानों को छोड़ते वक्त एक-एक आटो भेंट किया।
· यब वही सरकार है जिसने मध्यप्रदेश व अन्य प्रदेशों की सरकारों द्वारा सिमी उर्फ इंडियन मुज्जाहीदीन के आतंकवादियों को पकड़ने के लिए चलाए गये अभियान को रूकवाने के लिए ये कहकर दबाव डाला कि ये निर्दोष मुसलमान हैं। बाद में उसी सिमी ने बंगलौर से लेकर हैदराबाद तक सैंकड़ो विस्फोट कर हजारों हिन्दुओं के घर उजाड़ कर अपने निर्दोष होने का प्रमाण केन्द्र सरकार को दे दिया !
· यह उसी गिरोह की सरकार है जिसने 15 फरवरी 2008 को कोयम्बटूर बम्ब हमले में मारे गये 58 लोगों के कत्ल के दोषी अब्दुल मदनी को पहले जेल में हर तरह की सुविधायें दी और बाद में उसे छुड़वा दिया।
आज उसी गिरोह की केन्द्र सरकार बिना किसी प्रमाण के निर्दोष हिन्दुओं को जेल में डाल कर टैस्ट पर टैस्ट करवाये जा रही है और हर तरह से फंसाने का प्रयत्न कर रही है।
हिन्दुओं को सरकार के षड्यन्त्र का पता न लग जाए इसके लिए सूचनांयें लीक करवाकर हिन्दुविरोधी मीडिया का दुरूपयोग कर हिन्दुओं व साधु- सन्तो को बदनाम कर रही है ।
· ये वही सरकार है जिसने माननीय सर्वोच्चन्यायालय द्वारा नियुक्त किए गए सेवानिवृत न्यायाधीश नानावती जी के द्वारा जारी जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए एक दागी सेवानिवृत न्यायाधीश यु सी बैनर्जी को जांच पर लगाया सिर्फ यह सिद्ध करने के लिए कि 2000 जिहादी मुसलमानों की जिस भीड़ ने ट्रेन में सफर कर रहे हिन्दुओं को जलाने के लिए गोधरा में ट्रेन रोककर आग लगाई वो भीड़ निर्दोष है और जो हिन्दू ट्रेन में सफर कर रहे थे और इस आग में जलकर राख हो गये वो दोषी। क्या आपने कभी ऐसी कमीनी नीच हिन्दुविरोधी किसी और सरकार के बारे में सुना है ?
· यह वही सरकार है जो आरक्षण के बहाने हिन्दुओं को लड़वाने का प्रयत्न करती है। जिसे माननीय सर्वोच्चन्यायालय रोकने का प्रयत्न करता है। लेकिन ये सरकार अपनी फूट डालो और राज करो की नीति को वोटों में बदलने के लिए कानून बनाती है कि प्रतिवर्ष 4,50,000 रूपये यानि कि हर महीने 37000 रू कमाने वाला व्यक्ति पिछड़ा हुआ है ।
अब आप सोचो जिसकी एक वर्ष की पूरी कमाई ही 37000 रूपये या इससे कम हो उसे क्या कहेंगे ?
जिन लोगों की वार्षिक आय 4,50,000 रूपये से कम है उनसे सरकार टैक्स क्यों लेती है ?
जिन लोगों को ये भ्रम है कि आरक्षण गरीबों की सहायता करने की व्यवस्था है उनकी आंखें अब खुल जानी चाहिए। हम तो सब हिन्दुओं से यही कहेंगे कि इन विषयों पर आपस में न लड़ें क्योंकि इस देशद्रोही गिरोह की यही मनसा है कि हिन्दुओं को किसी भी तरह आपस मे लड़वाया जाए ।
गरीब कोई भी है उसकी आपस में मिलकर सहायता करें ताकि हम सब हिन्दू इस देशद्रोही गिरोह के विघटनकारी षड्यन्त्रों को असफल कर सकें।
· यह वही सरकार है जो झूठे आरोपों में फंसाये गये हिन्दुओं के विरूद्ध कोई प्रमाण न मिलने पर उनके विरूद्ध मकोका लगाती है अन्य प्रदेश सरकारों द्वारा बनाए गये ऐसे ही कानूनों से जिहादियों को बचाने के लिए उन कानूनों को मंजूरी नहीं देती है ।
गुजकोका को तो ये जिहाद समर्थक सेकुलर सरकार गुजरात सरकार द्वारा बार-बार आग्रह करने पर भी रोके रखती है । अब आप ही सोचो कि क्यों न कहें कि इस हिन्दुविरोधी सरकार का मकसद जिहादियों की रक्षा कर देश को बार-बार लहूलुहान करवाना है।
इस चार वर्ष के कार्यकाल में इस देशद्रोही सरकार ने वो कर दिखाया है जिसका सार ही इस सरकार व इसका समर्थन करने वाले गिरोह को माननीय सर्वोच्चन्यायालय में देशद्रोही, सांप्रदायिक, हिन्दुविरोधी व गद्दार साबित करने के लिए काफी है इसके सारे कुकर्म देखने पर तो इस गिरोह को संबोधित करने के लिए मानवता का शत्रु दानव या शैतान जैसे शब्द भी छोटे पड़ते हैं।
आप ही बताओः-
· जो सरकार हर चीज को सांप्रदायिक आधार पर बांटे जैसे कि संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का,छात्रवृतियां मुसलमानों के लिए, विकास मुस्लिमबहुल जिलों का,यहां तक कि बजट को भी ... उसे सांप्रदायिक नहीं तो क्या कहेंगे ?
· जो सरकार संविधान व माननीय सर्वोच्चन्यायालय के आदेशों का पालन न करे जैसे कि अफजल को फाँसी व धर्म आधारित आरक्षण... वो देशद्रोही नहीं तो और क्या है?
जो सरकार मर्यादा पुर्षोत्तम भगवान राम के अस्तित्व को नकारे उनकी निशानियों को मिटाने का प्रयत्न करे साधु सन्तों का अपमान करे हिन्दुओं को बदनाम करे... वो हिन्दुविरोधी नहीं तो और क्या है ?
अन्त में जो सरकार एक विदेशी एंटोनियो माइनो मारियो की गुलाम होकर भारतीय सेना में धर्म के आधार पर फूट डालने का प्रयास करे, देशभक्त सैनिकों को गिरफ्तार करे,शहीदों का अपमान करे,जिहादियों के विरूद्ध काम करने वाले साधु-सन्तों सैनिकों साध्वियों व हिन्दुओं को आतंकवादी कहे व जिहादी आतंकवादियों को अपना भाई वो सरकार गद्दारों की नहीं तो किसकी है ?
आशा है आपको ये बात स्पष्ट हो गई होगी कि इस गिरोह को समस्त देशभक्त व धर्मपरायण लोग हिन्दुविरोधी देशद्रोही जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह क्यों कह रहे हैं व इस सरकार को सेना से डर क्यों लगा ?
हमने इस सैकुलर बोले तो शैतानी गिरोह को आज से 20 वर्ष पहले(18 वर्ष की आयु में) जब भारतीय राजनीति में देखा तो हमने भी बाकी लोगों की तरह यही माना कि ये लोग राजनीति कर रहे हैं सत्ता में आने पर कोई देशद्रोही या हिन्दुविरोधी काम नहीं करेंगे ।
फिर कुछ वर्ष बाद युनाइटेड फ्रंट सरकार के कामों को देखकर ये भ्रम टूटा और लगा कि ये गिरोह तो अल्पसंख्यकवाद व धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में देशद्रोह के मार्ग पर अग्रसर है पर हमनें सोचा कि हो सकता है हम तत्कालिक कारणों व जवानी के जोश से प्रभावित होकर ऐसा महसूस कर रहे हैं।
लेकिन आज नवम्बर 2008 में इनके विपक्ष में रहते किए गये मिथ्या प्रचार को छोड़ भी दें तो भी सिर्फ पिछले 4⅔ वर्ष के षड्यन्त्रों व कुकर्मों को देखकर कोई भी जागरूक व्यक्ति इसी निष्कर्ष पर पहुँचेगा कि यह राजनीति नहीं -गद्दारी है, धर्मनिर्पेक्षता नहीं- देशद्रोह है।, अल्पसंख्यकवाद नहीं हिन्दूविरोध- बोले तो- मानवता का विरोध है।।
ये गिरोह हिन्दुविरोधी देशद्रोही जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गद्दारों का गिरोह है ।
· । क्योंकि सांप्रदायिक आधार पर आरक्षण भी सांप्रदायिक आधार पर देश के विभाजन का प्रमुख कारण था। लेकिन इस देशद्रोही सरकार ने संविधान का उल्लंघन कर मुसलमानों के लिए सांप्रदायिक आधार पर आरक्षण दिया। जिसे माननीय न्यायालय ने रोकने का हर संभव प्रयास किया पर सब बेकार क्योंकि ये सरकार हिन्दूराष्ट्र भारत की हर चीज को सांप्रदायिक आधार पर बांटकर देश को तबाह करने की कसम जो उठा चुकी है ।
ये सरकार सच्चर कमेटी के आधार पर कुतर्क देती है कि मुसलमानों को नौकरियां कम हैं हिन्दू जानना चाहते हैं कि भारत पाक बांगलादेश सब अखण्ड भारत के हिस्से हैं जिस पर सबका अधिकार था जब पाक व बांगलादेश में हिन्दुओं का अधिकार नहीं फिर भारत में मुसलमानों को विशेषाधिकार देने का तर्क क्यों ?
वैसे भी इस वक्त इन सब देशों में कुल नौकरियों का जो हिस्सा मुसलमानों के पास है वो कम नहीं बहुत ज्यादा है बाकी गिनती तो आप करो जो आँकड़े हमारे पास उपलब्ध हैं वो हिन्दुओं के लिए खतरे की घंटी है इस वक्त अखण्ड भारत की तीन क्रिकेट टीमें हैं जिनमें 33 खिलाड़ी खेलते हैं उनमें से 22- 25 मुसलमान हैं यानिके 75% से ज्यादा जबकि 8-11 हिन्दू सिख ईसाई जैन बौध पारसी यानिके 27% से कम। और मुसलमानों की कुल आबादी हिन्दुओं की आबादी से आधी ।
ये भी मुसलमानों को आरक्षण देकर छीनने पर तुले हो बेशर्मों ,कुछ तो शर्म करो ,अगर तुम्हें मुसलमानों की इतनी ही चिन्ता सत्ता रही है तो इन सब को साथ लेकर पाकिस्तान या बांगलादेश क्यों नहीं चले जाते ।

हिन्दू एकता सिद्धांत

यहाँ पर यह स्पष्ट करना भी जरूरी है कि संसार में हिन्दू धर्म ही एकमात्र ऐसी जीवन पद्धति है जिसे किसी संप्रदाय विशेष के साथ नहीं जोड़ा जा सकता,जिसमें कभी किसी संप्रदाय विशेष को अपना शत्रु घोषित नहीं किया गया,इन्सान तो इन्सान पेड़ पौधों जीव-जन्तुओं, पशु-पक्षियों सब में भगवान के रूप को देखा गया, उनकी पूजा की गई । आज तक एक भी लड़ाई किसी पूजा पद्धति के विरोध या समर्थन में नहीं लड़ी गई । हिन्दू धर्म में किसी क्षेत्र विशेष या संप्रदाय विशेष की बात न कर सारे संसार को परिवार मानकर उसकी भलाई की बात की गई । हिन्दूधर्म के प्रचार प्रसार के लिए आज तक किसी देश या संप्रदाय विशेष पर हमला नहीं किया गया। हिन्दू जीवन पद्धति ही दुनिया में सर्वश्रेष्ठ जीवन पद्धति है।
लेकिन जिसने भी मानवता के प्रतीक इस हिन्दू संस्कृति व उसे मानने वाले हिन्दुओं पर हमला किया है । इतिहास इस बात का गवाह है कि ऐसे राक्षस को पाप का घड़ा भर जाने पर अपने किए की सजा भुगतनी पड़ी है।
हमारे विचार में राक्षसों के इस सैकुलर गिरोह के पापों का घड़ा भी लगभग भर चुका है। साधु-सन्तों का अपमान व भगवान राम के अस्तित्व को नकारना इस बात के पक्के प्रमाण हैं।
हमने सुना था कि जब किसी राक्षस का अन्त नजदीक होता है तो उसके द्वारा किए जाने वाले पाप व अत्याचार बढ़ जाते हैं जो हमने पिछले कुछ वर्षों में देख भी लिया ।
अब सिर्फ इस धर्मनिर्पेक्षता रूपी राक्षस का अन्त देखना बाकी है इस राक्षस के खात्में के लिए कर्नल श्रीकांत पुरोहित, साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर,सुधाकर चतुर्वेदी जी, राम जी जैसे करोड़ों प्रशिक्षित गण हमले का जबाब देकर इन मुस्लिम आतंकवादियों व इनके समर्थक सैकुलरिस्टों का संहार करने के लिए तैयार बैठे हैं बस इंतजार है तो सेनापति के इशारे का जिस दिन ये इशारा मिल गया उसी दिन ये सब राक्षस अपनी सही जगह पर पहुँच जाँयेगे !
हम यहां पर यह सपष्ट कर देना चाहते हैं कि धर्म विहीन प्राणी मानव नहीं दानव होता है। अतः धरमनिर्पेक्षता मानव के लिए अभिशाप है क्योंकि यह मानव को दानव वना देती है। जिसका सीधा सा उधाहरण इस सेकुलर गिरोह द्वारा किए गए क्रियाकलाप हैं। इसी धर्मनिर्पेक्षता की वजह से सेकुलर गिरोह मानव जीवन के शत्रु आतंकवादियों का तो समर्थन करता है पर मर्यादापुर्षोत्तम भगवान श्री राम का विरोध ।
हम बात कर रहे थे हिन्दू धर्म की, बीच में धर्म और अधर्म के बीच होने वाले निर्णायक युद्ध के लिए बन रही भूमिका का स्वतः ही स्मरण हो आया ।
जो लोग हिन्दुओं को लड़वाने के लिए यह मिथ्या प्रचार करते हैं कि हिन्दू धर्म में प्राचीन समय से छुआछूत है । उनकी जानकारी के लिए हम ये प्रमाण सहित स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि बेशक हिन्दू धर्म में वर्ण व्यवस्था शुरू से रही है जो कि किसी भी समाज को व्यवस्थित ढ़ंग से चलाने के लिए जरूरी होती है पर छुआछूत 1000 वर्ष के गुलामी के काल की देन है। खासकर मुसलिम जिहादियों के गुलामी काल की।
वर्णव्यवस्था की उत्पति के लिए दो विचार स्पष्ट रूप से उभर कर सामने आते हैं
एक विचार यह है कि सभी वर्ण शूद्र, वैश्य, क्षत्रिय और ब्राह्मण भगवान के अंगो से बने । पैर से शूद्र, जंघा से वैश्य, भुजाओं से क्षत्रिय व सिर से ब्राह्मण। अब आप सोचो कि भगवान का कौन सा अंग अछूत हो सकता है सिर ,पैर, जंघा या भुजांयें । कोई नहीं क्योंकि जिसे हम भगवान मानते हैं उसका हर अंग हमारे लिए भगवान ही है । वैसे भी हम बड़ों व साधु संतों के पैर ही पूजते हैं। अतः किसी भी हिन्दू, वर्ण, जाति को अछूत कहना भगवान को अछूत कहने के समान है और जो यह सब जानते हुए भगवान का अपमान करता है वह नरक का भागीदार बनता है। अतः यह हम सब हिन्दुओं का कर्तव्य बनता है कि हम सब हिन्दुओं तक ये सन्देश पहुँचांए और उसे नरक का भागीदार बनने से रोकें।
दूसरा विचार यह है कि मनु जी के चार सन्तानें हुईं । जब बच्चे बड़े होने लगे तो मनु जी के मन में यह विचार आया कि सब कामों पर एक ही ताकतवर बच्चा कब्जा न कर ले इसलिए उन्होंने अपने चारों बच्चों को काम बांट दिए ।सबसे बड़े को सबको शिक्षा का जिसे ब्राह्मण कहा गया। उससे छोटे को सबकी रक्षा का जिसे क्षत्रिय कहा गया। तीसरे को खेतीबाड़ी कर सबके लिए भोजन पैदा करने का जिसे वैश्य कहा गया। चौथे को सबकी सेवा करने का जिसे शूद्र कहा गया ।
अब आप ही फैसला करो कि जब चारों भाईयों का पिता एक, चारों का खून एक, फिर कौन शुद्ध और कौन अशुद्ध ,कौन छूत कौन अछूत ?
यह एक परम सत्य है कि संसार में कोई भी काम छोटा या बडा , शुद्ध या अशुद्ध नहीं होता । फिर भी हम सेवा के काम पर चर्चा करते हैं और सेवा में भी उस काम की जिसे साफ-सफाई कहा जाता है जिसमें शौच उठाना भी जोड़ा जा सकता है ।(हालांकि भारत मे शौच घर से दूर खुली जगह पर किया जाता था इसलिए उठाने की प्रथा नहीं थी ये भी गुलामी काल की देन है ) आगे जो बात हम लिखने जा रहे हैं हो सकता है माडर्न लोगों को यह समझ न आए(माडर्न कौन हैं इसके बारे में हम अगली पुस्तक में लिखेंगे) ।
अब जरा एक हिन्दू घर की ओर ध्यान दो और सोचो कि घर में सेवा का काम कौन करता है आपको ध्यान आया की नहीं ? हाँ बिल्कुल ठीक समझे आप हर घर में साफ-सफाई का काम माँ ही करती है और बच्चे का मल कौन उठाता है ? हाँ बिल्कुल ठीक समझे आप हर घर में माँ ही मल उठाती है । मल ही क्यों गोबर भी उठाती है और रोटी कौन बनाता है वो भी माँ ही बनाती है । उस मल उठाने वाली माँ के हाथों बनाई रोटी को खाता कौन है। हम सभी खाते हैं क्यों खाते हैं वो तो गंदी है-अछूत है ?
क्या हुआ बुरा लगा न कि जो हमें जन्म देती है पाल पोस कर बढ़ा करती है भला वो शौच उठाने से गन्दी कैसे हो सकती है ? जिस तरह माँ साफ-सफाई करने से या शौच उठाने से गंदी या अछूत नहीं हो जाती पवित्र ही रहती है।
ठीक इसी तरह मैला ढोने से या साफ-सफाई करने से कोई हिन्दू अपवित्र नहीं हो जाता । अगर ये सब कर मां अछूत हो जाती है तो उसके बच्चे भी अछूत ही पैदा होंगे फिर तो ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य व शूद्र सभी अछूत हैं और जब सभी अछूत हैं तो भी तो सभी भाई हैं भाईयों के बीच छुआछूत कैसी ?
कुल मिलाकर हम कह सकते हैं कि कोई हिन्दू न छोटा है न बढ़ा सब हिन्दू एक समान हैं कोई अछूत नहीं इसीलिए कहा गया है कि-
न हिन्दू पतितो भवेत
कोई हिन्दू पतित नहीं होता और जो हिन्दू दूसरे हिन्दू को पतित प्रचारित करता है वो हिन्दुओं का हितैषी नहीं विरोधी है और जो हिन्दुओं का विरोधी है वो हिन्दू कैसा ?
हमें उन बेसमझों पर बढ़ा तरस आता है जो गाय हत्या व हिन्दुओं के कत्ल के दोषियों मुसलमानों व ईसाईयों (जो न हमारे देश के न खून के न हमारी सभ्यता और संस्कृति के) को अपना भाई बताते हैं और उन को जिनका देश अपना, संस्कृति अपनी और तो और जिनका खून भी अपना, को अछूत मानकर पाप के भागीदार बनते हैं ।
उनकी जानकारी के लिए हम बता दें कि हिन्दुओं के कातिलों आक्रमणकारी मुसलमानों व ईसाईयों को भाई कहना व अपने खून के भाईयों को अछूत अपने आप में ही इस बात का सबसे बढ़ा प्रमाण है कि ये छुआछूत इन मुसलमानों व ईसाईयों की गुलामी का ही परिणाम है क्योंकि अगर हिन्दूसमाज इस तरह के भेदभाव का समर्थक होता तो सबसे ज्यादा छुआछूत इन कातिलों से होती न कि अपने ही खून के भाईयों से ।
इस गुलामी के काल में जिस तरह हर वर्ण के कुछ जयचन्द, जैसे सैकुलर स्वार्थी हिन्दुओं ने इन साम्राज्यवादी मुसलमानों व ईसाईयों के सामने घुटने टेक कर मजबूरी या लालच में अपनी मातृभूमि व खून के भाईयों के विरूद्ध कार्य किया ठीक उसी तरह अग्निबेश जैसे हिन्दुओं ने मातृभूमि व हिन्दुओं के विरूद्ध काम करते हुए समाज के अन्दर इन दुष्टों के दबाव या लालच में आकर अनेक भ्राँतियां फैलाई छुआछूत भी उन्हीं में से एक है।
पर इस हिन्दुविरोधी देशद्रोही जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह ने हिन्दुओं को आपस में लड़वाने के लिए इतना जहर फैलाया है कि एक पोस्टर पर बाबा भीमराव अम्बेदकर जी का नाम न छापने पर आज एक हिन्दू दूसरे हिन्दू पर इतना तगड़ा प्रहार करता है कि एक दूसरे के खून के प्यासे सगे भाईयों को देखकर रूह काँप उठती है । ये लोग यह भूल जाते हैं कि बाबा जी सब हिन्दुओं के हैं किसी एक वर्ग के नहीं ।
ये वही बाबा भीमराव अम्बेदकर जी हैं जिन्होंने अंग्रेज ईसाईयों के हिन्दुओं को दोफाड़ करने के सब षड्यन्त्रों को असफल कर दिया था। हम जानते हैं कि धर्मांतरण के दलालों द्वारा लगाई गई आग को सिर्फ एक दो प्रमाणों से नहीं बुझाया जा सकता क्योंकि इस हिन्दुविरोधी गिरोह का मकसद सारे हिन्दू समाज को इस आग में झुलसाकर राख कर देना है ।
यही तो इस देशद्रोही गिरोह की योजना है कि हिन्दुओं के मतभेदों को इतना उछालो कि उनमें एक दूसरे के प्रति वैमनस्य का भाव इतना तीव्र हो कि वो राष्ट्रहित हिन्दूहित में भी एक साथ न आ सकें ।
यह हम सब हिन्दुओं शूद्र, क्षत्रिय, ब्राह्मण, वैश्य का आज पहला कर्तव्य होना चाहिए कि गुलामी काल से पहले के हिन्दू एकता के प्रमाणों को संजोकर व वर्तमान में हिन्दूएकता के प्रमाणों को उजागर कर इस हिन्दुविरोधी षड़यन्त्र को असफल करें।
जिहादियों व धर्मांतरण के दलालों द्वारा हिन्दुओं पर थोपे गये
इस युद्ध को निर्णायक युद्ध की तरह लड़कर अपनी ऋषियों-मुनियों मानव सभ्यता की भूमि भारत को इन पापियों से मुक्त करवाकर राम राज्य की स्थापना करें ।
अपने हिन्दूराष्ट्र भारत को विकास के पथ पर आगे बढ़ाकर गरीब से गरीब हिन्दू तक विकास का लाभ पहुँचायें व उसे शांति व निर्भीकता से जीने का अवसर प्रदान करें जो इन असुरों के रहते सम्भव नहीं। वैसे भी किसी ने क्या खूब कहा है-
मरना भला है उनका जो अपने लिए जिए।
जीते हैं मर कर भी वो जो शहीद हो गए कौंम के लिए।।
जिस छुआछूत की बात आज कुछ बेसमझ करते हैं उसके अनुसार ब्राह्मण सबसे शुद्ध , क्षत्रिय थोड़ा कम, वैश्य उससे कम, शूद्र सबसे कम।
चलो थोड़ी देर के लिए यह मान लेते हैं कि यह व्यवस्था आदि काल से प्रचलित है। तो क्योंकि क्षत्रिय ब्राह्मण से अशुद्ध है तो फिर ब्राह्मण क्षत्रिय की पूजा नहीं कर सकते हैं पर सच्चाई इसके विपरीत है मर्यादा पुर्षोतम भगवान श्री राम क्षत्रिय हैं पर सारे ब्राह्मण अन्य वर्णों की तरह ही उन्हें भगवान मानते हैं उनकी पूजा करते हैं।
भगवान श्री कृष्ण ब्राह्मण थे क्या ? जो सारे हिन्दू उनकी पूजा करते हैं। सब हिन्दू उनको भगवान मानते हैं उनकी पूजा करते हैं। ये सत्य है पर वो ब्राह्मण नहीं वैश्य वर्ण से सबन्ध रखते हैं फिर तो ब्राह्मण और क्षत्रिय उनसे शुद्ध हैं उनकी पूजा कैसे कर करते हैं ? ब्राह्मण और क्षत्रिय उनकी पूजा करते हैं ये सत्य है इसे देखा जा सकता है।
अतः इस सारी चर्चा से हम इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि वर्ण व्यवस्था एक सच्चाई है पर ये शुद्ध अशुद्ध वाली अवधारणा गलत है और आदिकाल से प्रचलित नहीं है ये गुलामी काल की देन है।
अगर ये आदिकाल से प्रचलित होती तो मर्यादा पुर्षोतम भगवान श्री राम भीलनी को माँ कहकर न पुकारते न ही उनके जूठे बेर खाते । अतः जो भी हिन्दू इस शुद्ध-अशुद्ध की अवधारणा में विश्वास करता है वो अज्ञानी है बेसमझ है उसे सही ज्ञान देकर हिन्दू-एकता के इस सिद्धान्त को मानने के लिए प्रेरित करना हम सब जागरूक हिन्दुओं का ध्येय होना चाहिए और जो इस ध्येय से सहमत नहीं उसे राष्ट्रवादी होने का दावा नहीं करना चाहिए।
अब जरा वर्तमान में अपने समाज में प्रचलित कार्यक्रमों पर ध्यान केन्द्रित करते हैं । इस हिन्दुविरोधी देशद्रोही जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह के इतने तीव्र दुष्प्रचार व विभाजनकारी षड्यन्त्रों के बावजूद आज भी जब किसी हिन्दू के धर में शादी होती है तो सब वर्ण उसे मिलजुलकर पूरा करते हैं।
आज भी ब्राह्मण,क्षत्रिय,वैश्य, शूद्र में से किसी के भी घर में शादी यज्ञ या अन्य कार्यक्रमों के दौरान भोजन जिस बर्तन में रखा जाता है या जिस बर्तन में भोजन किया जाता है उसे उस हिन्दू भाई द्वारा बनाया जाता है जिसे इस शुद्ध-अशुद्ध की अवधारणा के अनुसार कुछ शूद्र भी अशुद्ध मानते हैं।
यहां तक कि अधिकतर घरों में आज भी रोटियां उसी के बनाए बर्तन में रखी जाती हैं दूल्हे की सबसे बड़ी पहचान मुकुट(सेहरा) तक शूद्र हिन्दू भाई द्वारा ही बान्धा जाता है और तो और बारात में सबसे आगे भी शूद्र ही चलते हैं यहां तक कि किसी बच्चे के दांत उल्टे आने पर शूद्र को ही विधिवत भाई बनाया जाता है ।
अगर शूद्र को आदिकाल से ही अछूत माना जाता होता वो भी इतना अछूत कि उसकी परछांयी तक पड़ना अशुभ माना जाता होता तो ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, सब शूद्र के बनाए बर्तन में न खाना खाते ,न शूद्र द्वारा मुकुट बांधा जाता,न बारात में शूद्र को सबसे आगे चलाया जाता और न ही शादियों में हिन्दू समाज का ये मिलाजुला स्बरूप दिखता जो इस शुद्ध-अशुद्ध की अवधारणा को पूरी तरह गलत सिद्ध करता है
हां वर्तमान में जो हिन्दूएकता के सिद्धांत के विपरीत एक ही वर्ण में या विभिन्न वर्णों के बीच कुछ कुरीतियां दिखती हैं । उन्हें हिन्दूसमाज को यथाशीघ्र बिना कोई वक्त गवाए दूर करना है और हिन्दूएकता के इस सिद्धांत को हर घर हर जन तक पहुँचाना है। दिखाबे के लिए नहीं दिल से- मन से क्योंकि किसी भी हिन्दू को अशुद्ध कहना न केवल हिन्दुत्व की आत्मा के विरूद्ध है बल्कि भगवान का भी अपमान है ।
काम बहुत आसान है अगर दिल से समझा जाए तो ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य को सुपिरियोरिटी कम्पलैक्स(बड़प्पन) व शूद्र को इनफिरियोरिटी कम्पलैक्स(हीन भावना) का भाव दूर कर अपनी उत्पति को ध्यान में रख कर अपनी असलिएत को पहचाहना होगा याद रखना होगा कि हमारा खून एक है ।
जिस तरह हमारी मां सेवा का काम कर अछूत नहीं हो सकती ठीक इसी तरह कोई शूद्र भाई भी अछूत नहीं हो सकता।
हम सब हिन्दू एक हैं भाई-भाई हैं। एक-दूसरे का अपमान भगवान का अपमान है।
अब वक्त आ गया है कि सब हिन्दू इस हिन्दुविरोधी-देशद्रोही जिहाद व धर्मांतरण समर्थक सैकुलर गिरोह के भ्रामक दुष्प्रचार का शिकार होकर इन हिन्दूविरोधियों के हाथों तिल-तिल कर मरने के बजाए एकजुट होकर जंगे मैदान में कूदकर अपने आपको हिन्दूराष्ट्र भारत की रक्षा के लिए समर्पित कर दें ।
वरना वो दिन दूर नहीं जब हिन्दू अफगानिस्तान, बांगलादेश, पाकिस्तान की तरह वर्तमान हिन्दूराष्ट्र भारत से भी बेदखल कर दिए जांए जैसे कश्मीर घाटी से कर दिए गये और मरने व दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर होंगे।

हिन्दूक्रांति की शुरूआत या सरकारी षडयन्त्र

अगर इस हिन्दुविरोधी सरकार द्वारा लगाये गये आरोप सही हैं तो अपने इस आन्दोलन की शुरूआत लैफ्टीनैंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित जी के नेतृत्व में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर जी के मार्गदर्शन में हो चुकी है।
बस जरूरत है तो इस आन्दोलन को 1857 के स्वतन्त्रता संग्रांम की तरह अधूरा न छोड़ कर आगे बढ़ाना और इन जिहादियों व धर्मांतरण के दलालों से मुक्त कराना । क्योंकि जिस तरह उस वक्त भारतीय अंग्रेजों के अत्याचारों से त्रस्त थे ठीक इसी तरह आज समस्त हिन्दूसमाज इन जिहादियों, धर्मांतरण के दलालों व उनके समर्थक इस सैकुलर गिरोह द्वारा किए जा रहे अत्याचारों व हिन्दू-विरोधी षड्यन्त्रों से त्रस्त है।
जरा सोचो जो गिरोह हिन्दुबहुल क्षेत्रों व मन्दिरों पर लगातार हो रहे बम्मविस्फोटों को गुमराह भाईयों का काम बता रहा था बार- बार इस्लामिक आतंकवाद को कभी अयोध्या तो कभी गुजरात का तर्क देकर जायज ठहरा रहा था कभी गरीबी तो कभी अनपढ़ता का बहाना बना रहा था ।
कुछ न दिखे तो पाक आई.एस.आई का काम बताकर बिना मुस्लिम जिहादियों के विरूद्ध कोई कार्यवाही किए पल्ला छुड़ा रहा था । हिन्दुओं के कातिलों को बचाने के लिए कठोर कानून न वनाने की बात कर रहा था । धमाका होते ही सबन्धित क्षेत्र के संभावित हमलावरों को बचाने के लिए कर्फयु लगा रहा था व साँप्रदायिक हिंसा रोकने के बहाने हमलावरों को बचाने के रास्ते तलाश रहा था ।
हमला मुसलमानों ने किया है ऐसा पता हिन्दुओं को न लग जाए इसके लिए जिहादियों द्वारा मारे जाने वालों की पहचान छुपा रहा था व पुलिस पर अपराधी मुसलमानों के नाम न बताने के लिए दबाव बना रहा था । आतंकवादी का कोई धर्म नहीं होता ऐसा जोर-जोर से चिलाकर इस्लाम की असलिएत छुपा रहा था। हिन्दुविरोधी मीडिया इस गिरोह के सारे दुष्प्रचार व षड्यन्त्रों को आगे बढ़ा रहा था ।
कुल मिलाकर जिहादियों को हिन्दुबहुल क्षेत्रों व मन्दिरों में बम्ब विस्फोट करने से रोकने या टोकने के बजाए उन्हें हर तरह की नैतिक व तकनीकी मदद देकर हमले तेज करने के लिए सैकुलर गिरोह व मीडिया द्वारा मिलकर भड़काया जा रहा था ।
वो ही गिरोह मालेगांव में हुए सिर्फ एक बम्ब विस्फोट व पांच मुसलमानों के कत्ल पर इतना बौखला जाता है कि हिन्दूआतंकवादी हैं हिन्दूआतंकवादी है चिल्लाना शुरू कर देता है(वो भी तब जब अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये काम जिहादियों का नहीं है) ये मुसलमानों पर हमला है ऐसा शोर मचा देता है।
एक हिन्दू साध्वी को अवैध हिरासत में रखकर अत्याचार कर झूठे आरोप स्वीकार करने का दबाव बनाता है। मीडिया उस साध्वी द्वारा शहीदों की आत्मा की शान्ति के लिए आयोजित पिण्ड दान को आतंकवादी गतिविधी बताता है( ये पिण्डदान श्री अमरनाथयात्रा संघर्ष समिति के नेतृत्व में देशविरोधियों के विरूद्ध चले संघर्ष में हिन्दुविरोधी सरकार द्वारा करवाई गई गोलीबारी में मारे गये हिन्दुओं की आत्मा की शान्ति के लिए करवाया गया था।) तरह- तरह की अफवाहें फैलाता है कहानियां बनाता है ये हिन्दुविरोधी गिरोह की सरकार लगभग सभी हिन्दू संगठनों को आतंकवादी कहकर बदनाम करना शुरू कर देती है ।
साध्वी जी के फोन रिकार्ड के आधार पर गिरफ्तारियाँ शुरू हो जाती है। गिरफ्तारियों का सिलसिला रूकता है सुधाकर जी की गिरफ्तारी के बाद डाक्टर अब्दुल कलाम जी का नाम आने पर । पकड़े गये सब व्यक्तियों का अपराध सिर्फ इतना था कि इनका उस साध्वी के साथ सबन्ध था। जो झूठे आरोप लगाकर सरकार ने गिरफ्तार की थी ।
आगर कहीं डा अब्दुलकलाम जी का नाम न आता तो आज इन्हीं सम्पर्कों के बहाने कई और हिन्दू कार्यकर्त्ता, हिन्दूसंगठनों के पदाधिकारी व साधु-सन्त जेलों में होते जिसका प्रयास आज भी जारी है और डा अब्दुल कलाम जी को भी लैफ्टीनैंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित जी की तरह जेल में डाल दिया जाता अगर वो मुसलमान न होते तो ।
सरकार द्वारा प्रचार शुरू कर दिया गया कि ये मुसलमानों को मारने का बहुत बढ़ा षड्यन्त्र है और सरकार के इस काल्पनिक षडयन्त्र के बहाने हिन्दू तो हिन्दू सेना तक को बदनाम किया गया। कुल मिलाकर जो हिन्दू पकड़े गए वो या तो हिन्दूकार्यकर्ता हैं जो मुस्लिम जिहादी हमलों के विरूद्ध आम जनता को जागरूक कर रहे थे या फिर वो सैनिक अधिकारी जो जिहादियों के विरूद्ध खुफिया जानकारी जुटा रहे थे ।
अब प्रश्न यह पैदा होता है कि आखिर सरकार इस हद तक इन हिन्दू संगठनों को बदनाम करने पर क्यों अमादा है ?
वास्तव में इसके कई कारण हैं पर इसका प्रमुख कारण इन संगठनों का सरकार द्वारा किए जा रहे देशविरोधी-हिन्दुविरोधी कामों का डटकर विरोध कर आम जनता को जागरूक करना है । सरकार को पता है कि जब तक देश की हिन्दू जनता का विश्वास इन हिन्दूवादी संगठनों में बना हुआ है तब तक इस देशद्रोह के रास्ते पर आगे बढ़ाना एक सीमा से आगे सम्भव नहीं ।अगर देश को तबाही और बर्बादी के उस रास्ते पर ले जाना है जो जिहादी और धर्मांतरण के ठेकेदार चाहते हैं तो हिन्दू संगठनों को कमजोर करना जरूरी है ।
वैसे भी जिस अंग्रेज एंटोनियो की ये सरकार गुलाम है उस अंग्रेज को हिन्दू संगठनों के डर ने प्रधानमन्त्री के पद से दूर रहने पर मजबूर किया तथा बाद में इन हिन्दूसंगठनों ने सरकार के बल पर चलाए जा रहे धर्मांतरण अभियान को जनसहयोग से रोकने में सफलता हासिल की ।
दूसरा इस हिन्दुविरोधी गुलाम सरकार द्वारा मर्यादापुर्षोत्तम भगवान श्री राम द्वारा निर्मित रामसेतु को तोड़ने की सब योजनाओं पर अगर किसी ने पानी फेरा तो इन हिन्दू-संगठनों द्वारा जनसहयोग से चलाए गये अन्दोलनों ने ।
तीसरा भूमि आबन्टन को रद करने पर जम्मू के वर्तमान इतिहास में पहली बार 70 दिन तक चला राष्ट्रवादी आन्दोलन।
जिस बात ने इस सरकार के होश उड़ा दिए वो था राष्ट्रवादी मुसलमानों का इस आन्दोलन में हिन्दू संगठनों का साथ देना । सरकार ने बार-बार आन्दोलनकारियों को कशमीरी जिहादियों के हमलों से डराने की कोशिश की लेकिन राष्ट्रवादी जब एक बार सर पर कफन बाँध लेते हैं तो रूकते तभी हैं जब मकसद पूरा हो जाता है यही इस मामले में भी हुआ।
अगर आप आज तक इस सेकुलर गिरोह के चुनावी मुद्दे देखें तो वो सिर्फ दो ही पहलु नजर आते हैं ।
एक आम आदमी का जिसकी हवा मंहगाई ने निकाल दी जो पिछली सरकार ने पूरी तरह से नियन्त्रण में रखी थी । अब तो लोग कहने लगे हैं कांग्रेस का हाथ आम आदमी के पेट पर लात।
दूसरा है जिहादियों को खुश करने के लिए हिन्दूविरोध व आम मुसलमान को साथ रखने के लिए हिन्दू संगठनों का डर दिखाना ।
लेकिन जब हिन्दू संगठन और राष्ट्रवादी मुसलमान एक साथ मिलकर आन्दोलन करें वो भी 70 दिन तक।
तो फूट डालो और राज करो की नीति पर चलने वाला ये गिरोह ऐसी एकता कैसे सहन कर सकता है। जब कुछ न दिखा तो मुसलमानों को डराने के लिए व हिन्दू संगठनों को बदनाम करने के लिए इस गिरोह ने काल्पनिक हिन्दूआतंकवाद का सहारा लिया ।
इस गठबंधन को उम्मीद थी कि बात-बात पर भड़कने वाले मुसलमानों में छिपे जिहादी आतंकवादी हिन्दुओं पर हमला करेंगे और दंगे भड़क उठेंगे और ये गिरोह फिर से अल्पसंख्यकों की रक्षा को मुद्दा बनाकर चुनाव जीत लेगा ।
जब ऐसा कुछ न हुआ तो सरकार ने हिन्दू संगठनों में फूट डालने के लिए नया षड्यन्त्र रचा और अफवाह फैला दी कि पकड़े गये हिन्दू क्योंकि घोर राष्ट्रवादी वीरसावरकर द्वारा बनाये गये अभिनव भारत नामक संगठन से हैं इसलिए ये हिन्दू राष्ट्रवादी संगठन के पदाधिकारियों को मारना चाहते हैं ।
जब सब हिन्दूसंगठनों ने सरकार के इस दुष्प्रचार को सरकार की फूट डालो और राज करो की नीति कहकर नकार दिया तो सरकार ने प्रखर हिन्दूराष्ट्रवादी प्रवीणभाई तोगड़िया जी पर अभिनव भारत को पैसे देने का आरोप लगाकर फिर हिन्दू संगठनों के बीच दूरी पैदा करने की कोशिश की ।
एक क्षण के लिए यह मान भी लें कि उन्होंने या किसी और ने अभिनव भारत जैसे प्रखर हिन्दूराष्ट्रवादी संगठन को पैसे दिए थे व उनके या किसी और के इस संगठन के साथ गूढ़ सबन्ध हैं तो भी किसी देशभक्त संगठन को पैसे देना या उसके साथ सबन्ध रखने में बुराई ही क्या है ?
जिस सरकार को मुस्लिम व ईसाई देशों से जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों को मिलने वाले पैसे पर कोई आपति नहीं उसे अभिनव भारत को मिलने वाले पैसे पर आपति क्यों ?
रही बात आरोपों की तो ये तो देखो आरोप कौन लगा रहा है एक अंग्रेज की गुलाम हिन्दुविरोधी देशद्रोही सरकार ?
वैसे भी जब देश पर ऐसे गिरोह का राज हो जो अंग्रेजों का गुलाम हो, जो जिहादियों को अपना भाई बताता हो तथा जो देश के निर्दोष हिन्दुओं की रक्षा करने के बजाए उन्हें मरवाने के इन्तजाम में लगा हो तो भला देशभक्त हिन्दुओं के पास हथियार उठाने के सिवा और चारा भी क्या है ?
हम गद्दारों के इस गिरोह को बता देना चाहते हैं कि जब-जब भी हिन्दुओं पर अत्याचार किए गये हैं राम के अस्तित्व को नकारा गया है तब-तब भगवान ने खुद अवतार लेकर ऐसे पापियों का संहार किया है । पापियों के इस गिरोह का भी वही हश्र होने वाला है अभी तो सिर्फ साध्वी के रूप में गणों का आना शुरू हुआ अभी से घबरा गए! जो बोई है वो फसल तो काटनी ही पड़ेगी।
आपका विनाश आपको लैफ्टीनैंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित जी के रूप में अभी तो दर्शन ही दे रहा है पिछले कई वर्षों से हिन्दुओं पर ढाऐ गये हर जुल्म, निकाली गई हर गाली का हिसाब चुकाना पड़ेगा ।
अपने अन्त समय में अपने द्वारा किए गये दुराचारों ,रचे गये षड्यन्त्रों ,बहाए गये हजारों हिन्दुओं के लहु को अच्छी तरह याद कर लो, ये भी याद कर लो कि हलाल किए हिन्दुओं में अनेक दूध पीते बच्चे भी शामिल थे। जरा सोचो आपने हिन्दूविरोध और जिहाद समर्थन में अन्धे होकर ये क्या करवा दिया तुम्हें तो नरक में भी जगह नहीं मिलेगी अभी तो सिर्फ अपने किए पापों की सजा के बारे में सोचो आपके द्वारा किए गये पाप इतने भयानक हैं तो इनकी सजा कैसी होगी ?
जरा सोचो जो गिरोह जिहादियों को बचाने के लिए मुम्बई बम्ब धमाकों के आरोपियों पर से पोटा हटाता है। हैदराबाद बम्ब विस्फोटों के दोषियों को छोड़ कर उनका हौसला बढ़ाने के लिए एक-एक आटो भेंट करता है, इन जिहादियों व उनके समर्थकों को आक्रोशित हिन्दुओं के कहर से बचाने के लिए कभी बेचारा कभी अनपढ़ कभी गरीब तो कभी अपना भाई बताता है ।
मतलब हिन्दुओं के कातिल आतंकवादियों को अपना भाई बताकर उन्हें बचाने की हर कोशिश करता नजर आता है । वैसे भी ये गिरोह जिहादियों को बचाने के लिए जो तर्क देता है वो ही तर्क जिहादी हिन्दुओं को मारने के बाद देते हैं मतलब साफ है कि हिन्दुओं को कत्ल करने के लिए दोनों कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं !
वो ही गिरोह निर्दोष हिन्दुओं पर झूठे आरोप लगाकर हर हाल में उन्हें फंसाने के लिए हिन्दुओं पर अमानवीय अत्याचार करता है उनके विरूद्ध जांच पे जांच करवाता है । कभी मुम्बई पुलिस तो कभी हरियाणा पुलिस से ।
उनको कुछ न मिला तो सी बी आई से फिर भी कुछ न मिला तो इन निर्दोष हिन्दुओं को छोड़ने के बजाए इन्हें हिरासत में रखकर और यातनांयें देने के लिए इन पर मकोका लगा देता है।
वो ही मकोका सैंकड़ो बम्बविसफोट कर हजारों हिन्दुओं का कत्ल व मोहन चन्द जी को शहीद करने वाले बटाला हाऊस मुठभेड़ के बाद पकड़े गये जिहादियों पर क्यों नहीं लगाया जाता है ?
हम तो कहते हैं कि इस बात की जाँच होनी चाहिए कि ये गुलाम सरकार ये सब कहीं विदेशी ईसाई खुफिया तन्त्र के बल पर तो नहीं कर रही । अगर ऐसा है तो स्थिति और भी गम्भीर और खतरनाक है ।
शंका तब और भी बढ़ जाती है जब निर्दोष साध्वी जी का तीन-तीन बार नार्को टैस्ट करवाया जाता है सवाल खड़े होने पर तर्क दिया जाता है कि एक ही नार्को तीन बार करवाया । सैंकड़ों बम्बविस्फोट कर हजारों हिन्दुओं का कत्ल करने वाले सैंकड़ों जिहादियों में से कितनों का नार्को तीन-तीन बार करवाया गया ?
हिन्दू विरोधी षडन्यत्र तब और गहरा जाता है जब इतने बार विज्ञानिक टैस्ट करवाऐ जाने व इतनी बर्बर यातनांयें देने के बावजूद कोई प्रमाण न मिला और ये सिद्ध हो गया कि साध्वी निर्दोष है ।उसने जो भी जानकारी पुलिस को दी थी सही है
तो उसे छोड़ने के बजाए कुतर्क दिया गया कि साध्वी योग जानती है इसलिए उसने मशीन को अपने बस में कर लिया जिसको न केवल योग विशेषज्ञ स्वामी रामदेव जी बल्कि इन टैस्टों के विशेषज्ञों ने भी असम्भव करार दिया । इस तरह जो अपमान साध्वी जी का इस सैकुलर गिरोह द्वारा किया गया उसकी भरपायी तो पापी हिन्दुविरोधीयों के विनाश से ही सम्भव है।
जब हिन्दूवादी संगठन सरकार के इस षड्यन्त्र को पहचान कर उसका विरोध करते हैं तो इसे राजनीति का नाम देकर सरकार हिन्दुओं को बदानाम करने के षड्यन्त्र को आगे बढ़ाती है और साध्वी सहित सभी आरोपियों पर मकोका लगा दिया जाता है ।
यह उसी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह की सरकार है जो मुस्लिम आतंकवादियों को बचाने के लिए इन्हें गुमराह, अनपढ़, गरीब मुस्लिम नौजवान बताती है उन्हें कोई सजा न मिल पाए इसका हर प्रयास करती है क्योंकि वो जिहादी मुसलमान हैं इसलिए ये सरकार उनके प्रति बिल्कुल दयालु नजर आती है।
लेकिन यही हिन्दुविरोधी गिरोह की सरकार सिरफिरे युवक राहुल राज को किस तरह गोली से उड़ाती है । साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को गैर कानूनी ढंग से उठाकर अवैध कब्जे में रख कर यातनांये देती है हिन्दुविरोधी मीडिया के माध्यम से दुष्प्रचार करवाती है यही सब लैफ्टीनैंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित व अन्य आरोपियों के साथ भी दोहराया जाता है । इतना सब करने के बाद भी जब कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिलता है तो इन आरोपियों को जबर्दस्ती जेल में रखने के लिए इन पर छोटे-छोटे झूठे मामले दर्ज कर मकोका लगा दिया जाता है !
लैफ्टीनैंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित जी कोई पहले सैनिक नहीं हैं जिन्हें जिहादियों को बचाने की खातिर इस सरकार ने जेल मे डाला है। इससे पहले कश्मीर सहित देश के कई भागों में ये सब सुरक्षाबलों के उन जवानों के साथ किया जा चुका है जिन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए जिहादियों को मार गिराया ।
हर जगह सुरक्षाबलों को दंडित करने के लिए हिन्दुविरोधी सरकार, तालिबानी मीडिया व बिके हुए मानवाधिकार संगठनों ने जिहादियों को आम मुसलमान बताकर पेश किया ।
कुछ आरोपियों की सामाजिक छवि को धूमिल करने के लिए उनकी जिन्दगी से सबन्धित काल्पनिक निजी मामलों को हिन्दुविरोधी मीडीया के सहयोग से उछाल कर जनता के मन में उनके द्वारा हिन्दू रक्षा के लिए किए जा रहे त्याग के प्रति शंका पैदा करने का प्रयत्न किया जा रहा है !
आज तक मुस्लिम जिहादियों द्वारा सैंकड़ों विस्फोट कर हजारों हिन्दुओं का कत्ल देश के विभिन्न हिस्सों में किया जा चुका है अगर पुणे पुलिस पर भरोसा किया जाए तो उसने 300 जिहादियों की सूची देश में हुए दर्जनों धमाकों से पहले इसी सरकार को दी है। आज तक क्या इस सरकार ने इन जिहादियों को पकड़ने के लिए इतनी तत्परता दिखाई है जितनी हिन्दुओं को झूठे मामलों में फंसाने के लिए दिखा रही है ?
एक बात और भी चौंका देले वाली है कि जब उत्तर प्रदेश में सी आर पी एफ कैंप पर हमला करने वाले जिहादियों ने मुम्बई पर हमले की जानकारी दी तो उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ये सूचना महाराष्ट्र सरकार को दी गई तो महाराष्ट्र सरकार ने उन जिहादियों से पूछताछ करने या एटीएस द्वारा रिमांड पर लेने से क्यों इन्कार कर दिया गया ?
1993 में मुम्बई को बम्ब विस्फोटों से दहलाकर सैंकड़ों हिन्दुओं को कत्ल व हजारों को घायल करने वाले षड्यन्त्र के सूत्रधार जिहादी आतंकवादी को आज तक पकड़ना तो दूर उसे पकड़ने की कोई गम्भीर कोशिश तक नहीं की गई । और तो और उसकी अवैध सम्पति को आज तक बेचने का साहस तक न दिखा सकी ये सरकार । राम जी के भाई को तो झट से पकड़ कर जेल मे ड़ाल दिया । काश इतनी चुस्ती इस जिहादी दाऊद के परिवार को जेल में डालने के लिए दिखाई होती । तब तो दर्जनों शिकायतें मिलने के बाद भी कार्यवाही करने का साहस ये हिन्दुविरोधी सरकार नहीं जुटा पाती !
साहस जुटाय भी कैसे क्योंकि इस जिहाद समर्थक सरकार को पता है कि दाउद को पालने व बचाने वाले सब लोग इस सरकार के सहयोगी ही तो हैं । वरना क्या बात है कि जिस दाउद की महफिलों में हमारे फिल्मी कलाकार अपना शरीर बेचकर आते हैं , उस दाउद की महफिलों में हमारे खुफिया विभाग के लोग नहीं पहुंच पाते ?
हमें तो शक ही नहीं विसवाश होता जा रहा है कि हिन्दुओं को ऐसे जिहादी आतंकवादियों के कहने पर ही जेलों में डाल कर हिन्दू आतंकवादी हिन्दू-आतंकवादी का शोर मचाया जा रहा है जागो मेरे प्यारे बेसमझ आपस में लड़ने वाले हिन्दूओ बचा सकते हो तो बचा लो अपने देश को इन विके हुए गद्दारों के षड्यन्त्रों से वरना अनर्थ हो जाएगा हिन्दू कहीं के नहीं रहेंगे !
पिछले 20 वर्षों से भारत जिहादी हमलों को झेल रहा है क्या किसी जिहादी मौलवी या आतंकवादी के निजी मामलों को इस तरह उछाला गया है जिस तरह इन हिन्दुओं के निजी मामलों को उछाला जा रहा है या ऐसा वहशीयाना व्यावहार किसी जिहादी के साथ किया गया जैसा इन हिन्दुओं के साथ किया जा रहा है ?
ये सब करते हुए ये हिन्दुविरोधी गिरोह ये क्यों भूल जाता है ये जो हिन्दू जनता है वो सब जानती है कि देशभक्त योद्धा कैसे होते हैं वो देशद्रोहियों से बचने के लिए क्या-क्या करते हैं उन्हें बदनाम करने के लिए गद्दार कैसे-कैसे षड्यन्त्रों का सहारा लेते हैं !
ये हिन्दू अच्छी तरह जानता है कि ये वही मीडीया है जो अबु सलेम व दाउद इब्राहीम जैसे गद्दार जिहादियों को सम्मान सूचक भाषा से सम्बोधित करता है व ऐसे राक्षसों से हिन्दुओं की रक्षा में लगे हिन्दुओं और उनके संगठनों को असंसदीय भाषा से सम्बोधित करता है और करे भी क्यों न क्योंकि देश के गद्दारों व हिन्दूविरोधियों के पैसे और संरक्षण से ही तो ये देशद्रोही चैनल चलते हैं ! और उन्हीं के बारे में कुछ आपत्तिजनक बोलेगा तो मार पड़ेगी ।
आज तक जिहादी आतंकवादियों ने जितने भी हमले बोले उन सब में इस मीडिया ने वही बोला जो जिहादी बोलते हैं और जो जिहादियों को अच्छा लगता । एकमात्र जिहादी हमला जिस में मीडिया निष्पक्ष रहा वो था बटाला हाउस मुठभेड़ और परिणांम सबके सामने है जिहादियों के ठेकेदार अमरसिंह ने मीडिया की वो कुटाई करवाई कि आज तक इस मीडिया ने जिहादी आतंकवाद का परदाफाश करना तो दूर देश में छुपे जिहादियों की ओर उंगली तक उठाने का साहस न किया । करते भी कैसे जान बची और लाखों पाय ।
हिन्दूओ समझो कि अगर इस हिन्दुविरोधी देशद्रोही गिरोह के गाली-गलौच से बचना है तो इनकी जमकर कुटाई करना ही एकमात्र तरीका है ।
मुस्लिम जिहादियों द्वारा कुटाई के बाद इस मीडिया द्वारा फिर से शुरू हो गया हिन्दुओं को गाली-गलौच करने व आतंकवादी कहकर बदनाम करने का सिलसिला ।
मीडिया अच्छी तरह से जानता है कि निर्दोष हिन्दू को जितनी मर्जी गाली निकालो, उसको जितना मर्जी बदनाम करो, जो मन में आए कहते रहो बेचारा क्या करेगा ?
ठहरा जो सनातन में विश्वाश करने वाला हथियार तो उठा नहीं सकता, कत्ल तो दूर पिटाई तक तो कर नहीं सकता ।
परन्तु अगर कहीं कातिल जिहादियों को कातिल कह दिया तो फिर ये जिहादी और इन जिहादियों के सैकुलर दलाल इस मीडिया से जुड़े लोगों का जीना हराम कर देंगे वो भी अगर जिन्दगी बख्श दी जाएगी तो ।
यही वजह है आज तक इस देशद्रोही मीडिया ने जितने भी स्टिंग आपरेशन किए उनमें से अधिकतर (95%) हिन्दुत्व की बात या समर्थन करने वालों के विरूद्ध उनको बदनाम करने के लिए किए ।
एक स्टिंग आपरेशन जिसमें इस हिन्दुविरोधी सरकार को बचाने के लिए जिहादी दलालों द्वारा पैसे देकर सांसदों को खरीदते दिखाया गया उसे समय पर दिखाने के बजाए कई दिन बाद दिखाया गया वो भी पूरा नहीं ताकि इस देशद्रोही सरकार को बचाया जा सके ।
ये सब किया उस देशविरोधी चैनल ने जो चर्च के पैसे से चलता है व दिनरात हिन्दुओं, उनके संगठनों व साधु सन्तों को असंसदीय भाषा में डंके की चोट पर गाली गलौच करता है व अपने आकाओं को अपने हिन्दुविरोधी होने का प्रमाण देता है ।
खैर छोड़ो विदेशी सोच के गुलाम इस बिके हुए मीडिया से और उम्मीद भी क्या कर सकते हैं !
पर इस एटीएस को क्या कहें जो अपनी बात को अपने आप ही काट कर स्पष्ट संकेत दे रही है कि ये कोई जांच नहीं ये तो हिन्दुओं व उनके संगठनों को बदनाम करने का षड्यन्त्र है जो इस हिन्दुविरोधी-देशविरोधी जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गठबंधन के भारी दबाव में एटीएस को मजबूरी में करना पड़ रहा है आप सोचेंगें हमें कैसे पता चला तो देखो जरा ।
सबसे पहले कहा गया हिन्दू आतंकवादी पकड़ा गया। नाम सामने लाया गया एक महिला का वो भी घरबार छोड़कर भगवान के काम में लगी एक साध्वी का ।
पकड़ने के बाद कहा गया ये साध्वी एबीवीपी से सबन्ध रखती है पता चला साधवी जी ने 1997 में ये संगठन छोड़ दिया । फिर कहा ये हिन्दू जागरण मंच से है पता चला इस संगठन में महिलाएं होती ही नहीं । फिर नाम आया राष्ट्रीय जागरण मंच का फिर बजरंग दल का फिर देश के सबसे शांतिप्रय देशभक्त संगठन आर एस एस का और अब अभिनव भारत जैसे घोर राष्ट्रवादी संगठन का... मतलब आरोपी एक--- संगठन आधा दर्जन ।
इस देशद्रोही गिरोह व हिन्दुविरोधी मीडिया ने मिलकर शोर मचा दिया सारे हिन्दूसंगठनों व साधु-सन्तों में आतंकवादी हैं और जोर-शोर से ऐसा महौल बनाया मानो प्रतिबन्ध अब लगा कि अब लगा लेकिन जागरूक हिन्दुओं के हाव भाव को देखते हुए इस हिन्दुविरोधी सरकार का हौसला न पड़ा ।
बात यहीं रूक जाती तो शायद सरकार की पोल यूँ न खुलती । अब कहा गया सेना के बड़े-बड़े अधिकारी इस जिहादियों को मारने के बहुत बड़े षड्यन्त्र में शामिल हैं ।
बम्ब विस्फोट एक मारे गये जिहादी पांच हिन्दू आतंकवादियों का षड्यन्त्र बहुत बडा ?
बम्ब विस्फोट सैंकड़ों मारे गये हिन्दू हजारों गुमराह मुस्लिम भाईयों का काम कोई मुस्लिम आतंकवादी नहीं कोई षड्यन्त्र नहीं !
पता लगा ऐसी होती है सैकुलर सरकार अल्पसंख्यकों की सरकार विदेशियों की गुलाम- कातिलों की सरकार !
अब पकड़े गये लैफ्टीनैंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित जो जिहादियों व सेकुलरों के नैटवर्क का पर्दाफाश करने वाले थे । तर्क दिया गया कि ये साध्वी जी सहित कई उग्र हिन्दुओं के समपर्क में थे ।
अरे भई कुछ तो होश करो जो जिहादियों के विरूद्ध खुफिया जानकारी जुटा रहा हो उसको जिहादियों के विरूद्ध जनता को जागरूक कर रहे हिन्दूसंगठनों से उनके पास उपलब्ध जानकारी लेने के लिए देशहित में सम्पर्क करना ही पड़ेगा ऐसा तो नेहरू जी को भी चीन द्वारा किए गये आक्रमण के दौरान करना पड़ा था और इसी के परिणामस्वरूप संघ की एक बटालिएन को गणतन्त्र दिवस परेड में हिस्सा लेने के लिए बुलाया गया ।
कहा गया प्रसाद ही मास्टरमांइड है प्रसाद ने ही आर डी एक्स दिया । समझौता एक्सप्रैस में भी विस्फोट इसी आर डी एक्स से किया गया । पता चला समझौता एक्सप्रैस विस्फोट में आर डी एक्स का प्रयोग ही नहीं हुआ ! लैफ्टीनैंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित की पहुँच आर डी एक्स तक थी ही नहीं क्योंकि वो खुफिया विभाग में थे न कि एक्शन विभाग में ! फिर इस प्रखर राष्ट्रभक्त के ऊपर छोटे-छोटे काल्पनिक मामले दर्ज करने का सिलसिला शुरू हुआ ।
फिर नाम उछाला गया भाजपा का कहा गया एक विधायक की गिरफ्तारी होने वाली है । जब अदित्यनाथ जी योगी ने ललकारा हिन्दुओं के कातिल जिहादियों को अपना भाई बताने वाले गृहमन्त्री को - तो पकड़ा गया सुधाकर चतुर्वेदी जी को ।
कहा गया अब हिन्दू क्रांतिकारियों के सहयोगी बड़े –बड़े नामों का भांडाफोड़ होने वाला है नाम व फोटो सामने लाए गये डा. अब्दुल कलाम जी, डा. प्रवीण भाई तोगड़िया जी, श्री श्री रविशंकर जी, माननीय संघचालक सुदर्शन जी जैसे निष्ठावान देशभक्तों के ।
बढ़ते जनआक्रोश को देखकर इस हिन्दुविरोधी सरकार ने फूट डालो और राज करो के अपने एजंडे को आगेबढ़ाते हुए अफवाह फैला दी कि ये हिन्दूक्राँतिकारी संघ के अधिकारियों को मरवाना चाहते हैं ! वाह क्या बात है झूठ बोलो तो ऐसा कि सुनने वाले के होश उड़ जांए !
सच में थोड़ी देर तो हम भी सन रह गये फटाक से मन में सरकार के हिन्दुविरोधी रूख को देखते हुए विचार आया कि कहीं सरकार शहीद श्यामा प्रसाद मुखरजी जी की तरह कहीं जिहादियों के साथ मिलकर इन संघ के अधिकारियों को मरवाकर दोष हिन्दू क्राँतिकारियों पर डालने की योजना तो नहीं बना रही ?
काश इनको पता होता संघ की कार्य पद्धति का जहां राष्ट्र से ऊपर कोई नहीं बड़े से बढ़ा पदाधिकारी भी नहीं।
अब आप खुद ही फैसला कर लो कि क्या सच है क्या झूठ पहले कहा गया ये क्रांतिकारी संघ के हैं अब कह रहे हैं संघ इनके निशाने पर है!
अच्छा मान लेते हैं कि जो सरकार कह रही है वो सब सत्य है मतलब जिहादियों के हमलों से तंग आकर इन सब क्राँतिकारियों ने मिलकर सिमी के अड्डों को ध्वस्त करने की योजना बनाई । और उसे अंजाम तक पहुँचाने के लिए कुछ बम्ब विस्फोट भी किए । ये भी मान लेते हैं कि इन बम्ब विस्फोटों में जिहादियों के साथ-साथ कुछ आम मुसलमान भी मारे गये । तो भी इन क्राँतिकारियों ने क्या गलत किया जो हिन्दुओं को मार रहे थे उन्हें मारकर इन्होंने एक तरह से कानून की मदद ही तो की है रही बात निर्दोषों के मारे जाने की तो किसी भी युद्ध में थोड़े बहुत तो निर्दोष मारे ही जाते हैं।
अगर देश में कोई देशभक्त सरकार होती तो इन क्राँतिकारियों को हिन्दुओं की जान माल की रक्षा के लिए संघर्ष करने के लिए ईनाम देती । पर इसे देश का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि देश में एक ऐसी हिन्दुविरोधी जिहाद समर्थक सरकार है जो जिहादी आतंकवादियों को न खुद मारती है न किसी को मारने देती है उल्टा देशभक्त साधु सैनिकों हिन्दुओं को फाँसी पर चढ़ाने के लिए षड्यन्त्र रचती है ।
जागो ! हिन्दू जागो !
बैसी भी आज तक जो हजारों हिन्दू इन मुस्लिम जिहादियों द्वारा मारे गए वो सब भी तो निर्दोष ही थे । दोष था तो सिर्फ इतना कि वो देशविरोधी नहीं थे, मुस्लिम जिहादी नहीं थे, गद्दार नहीं थे !
जिस गिरोह ने इन हिन्दुओं के मारे जाने को सही ठहराने के लिए ये तर्क दिया कि मस्जिद(राम मन्दिर) को गिराया गया इसलिए जिहादियों ने ये सब किया और जिस मीडिया ने उनके इस तर्क का समर्थन और प्रचार प्रसार किया यहां तक कहा कि ये जिहादी सरकार के भाई हैं वो किस मुँह से इन हिन्दू क्राँतिकारियों को हिन्दू आतंकवादी कह रहे हैं ?
इस देशद्रोही जिहाद समर्थक गिरोह का इन हिन्दुओं को अपशब्द कहना बिल्कुल वैसा ही अपराध है जैसा अपराध इन गद्दारों ने शहीद मोहन चन्द शर्मा जी की शहीदी पर सवाल उठाकर किया था !
इसलिए इन गद्दारों से हम बात नहीं कर रहे। हम बात कर रहे हैं उन हिन्दुओं से जो धर्म-अधर्म की इस जंग में कोने पर खड़े होकर इतने जुल्म हो जाने के बाद भी अनिर्णय की स्थिति में हैं।
हम कह रहे थे कि युद्ध में कुछ निर्दोषों का मारा जाना स्वाभाविक ही है। अगर आपको लगता है कि ये युद्ध नहीं है तो जाओ उन हिन्दुओं के पास जो अपने ही देश में अपने ही घर से उजड़ गये ।
या फिर उन हिन्दुओं के पास जिनमें से किसी ने अपने माँ-बाप, किसी ने भाई-बहन,किसी ने अपने बच्चों को, तो किसी ने अपने सुहाग को इन जिहादियों के हाथों खोया है कईयों ने तो अपने सामने इन जिहादियों के हाथों अपने 0 से 18 साल के बच्चों को हलाल होते देखा है। कहीं-कहीं तो इन जिहादियों ने दूध पीते बच्चों को भी हलाल कर दिया। जो माँ ,बहन-बेटियों की आबरू से खिलवाड़ किया गया सो अलग और ऐसे प्रताड़ित हिन्दुओं की संख्या लाखों में है ।अब ये युद्ध नहीं तो और क्या है ?
ये युद्ध किसी दूसरे देश के साथ नहीं ये बाहरी सहायता से चल रहा आंतरिक युद्ध है। जिसे जिहादियों और धर्मान्तरण के ठेकेदारों ने हिन्दुओं के विरूद्ध छेड़ रखा है अब ये हिन्दुओं के ऊपर है कि इन आसुरों के हाथों कायरों की तरह मरना है या फिर जंगे मैदान में उतर कर जीत हासिल करनी है या वीरगति को प्राप्त होना है।
हमें तो कायरों की तरह मरना स्वीकार नहीं इसलिए हम जंगे मैदान में उतर रहे हैं। आपको किनारे खड़े होकर तमाशा देखना है या फिर भगवान के इस काम में आहुति देनी है ये खुद फैसला करो !
इसे भारत का दुर्भाग्या ही कहेंगे कि जब भारत ने पटेल जैसे प्रखर राष्ट्रभक्त को जन्म दिया तो उसी वक्त नेहरू भी पैदा हो गया जिसने अपनी राजनीतिक चालों से देशभक्ति का बंटाधार कर दिया। इसी तरह जब भारत ने अडवाणी जैसे प्रमाणिक देशभक्त को जन्म दिया उसी वक्त वाजपेयी पैदा हो गया जिसने नोवेल शान्तिपुरस्कार के चक्कर में देशभक्ति को ठेंगा दिखाकर हिन्दूक्रांति को एसी क्षति पहुंचाई जिसकी भरपाई वर्षों तक सम्भव नहीं दिखती ।
आतंकवाद भी बाहरी देशों के बजाए अपने नेताओं की आतंकवाद समर्थक नीतियों की बजह से कहीं ज्यादा फला फूला है ? क्यों ये सेकुलर गिरोह सख्त कानून का विरोध कर भारत को एक ऐसा देश बनाने पर तुला है कि दुनिया के सब अपराधी भारत को अपना गढ़ बनाकर भारतीयों पर हमला कर उनको मिटाने के बाद दुनियाभर में अपराध फैलाकर भारत को बदनाम करें ।
अगर इस सेकुलर गिरोह ने ये हिन्दुविरोधी आतंकवाद समर्थक नीतियां यथाशीघ्र नहीं छोड़ीं तो वो दिन दूर नहीं जब भारत को भी पाकिस्तान व अफगानीस्तान जैसे हालात का सामना करना पड़ेगा और इस सब के लिए जेहादियों को शरण देने वाले मुसलमानों से कहीं ज्यादा यह सेकुलर गिरोह जिम्मेवार होगा । आज जो हालात देश में बनते जा रहे हैं उस सब के लिए भी मुसलमानों से ज्यादा मुस्लिम जेहादियों को उकसाने वाले व उनके अनुकूल वातावरण बनाने वाले ये सेकुलर नेता ही जिम्मेवार हैं।
बेशक पाकिस्तान आतंकियों का कारखाना बन चुका है पर जिहादियों को स्थानीय सहायता तो पाकिस्तान नहीं दे रहा । आतंकवादियों को फाँसी देने से तो पाक नहीं रोक रहा पकिस्तान का नाम लेकर ये धोखेबाज नेता हमें इस युद्ध में उत्तरने से रोक रहे है।
जब ये सत्य है कि ये युद्ध पाक लड़ रहा है तो फिर वहां के लिए बसें और ट्रेनें क्यों चलाई जा रही हैं ? क्यों बंद नहीं कर दिया जाता इन सब को ? क्यों रद्द नहीं कर दिया जाता उन सब समझौतों को जो भारत के बजाय पाकिस्तान को लाभ पहुंचाते हैं ? क्या जिहादियों को बचाने के लिए पोटा पाकिस्तान ने हटाया ? वो तो अपने यहां आतंकवादियों को गोली मार रहा है और ये सैकुलर गिरोह माननीय सर्वोच्चन्यायालय के आदेश के बावजूद जिहादियों को पाल रहा है उनको बचाने के उपाय ढूंढ रहा है व उनके विरूद्ध लड़ रहे देशभक्तों को प्रताड़ित कर रहा है !
पाक तो बीजा छूटों, बसों व ट्रेनों का भी विरोध करता है फिर इन नेताओं को क्या खाज होती है ये सब करने की ?
क्योंकि या तो ये जानते हैं सब कतलो-गारद पाक की मदद से भारत के मुसलमानों में छिपे जिहादी ही कर रहे हैं या फिर मुस्लिम देश इन नेताओं को खरीद कर मुस्लिम जेहादियों के अनुकूल वातावरण बनाने के लिए देशविरोधी मानवाधिकार संगठनों,गद्दार लेखकों, देशविरोधी समाचार पत्रों व हिन्दुविरोधी मीडिया के माध्यम से दवाव वनाकर बाध्य कर देते हैं।
हम तो कहते हैं कि भारतीय सेना को सिमी जैसे मुस्लिम आतंकवादी संगठनों, मुसलिम घुसपैठियों का समर्थन करने बाले नेताओं का नार्को करवाकर पता लगाना चाहिए कि इस साजिस में कौन-कौन दल व नेता सामिल हैं व ऐसे गद्दारों को फांसी पर चढ़ाना चाहिए।
बेशक देश में बम्मविस्फोट करने वाले अधिकतर मुस्लिम जिहादी हैं पर उनकी पैरवी करने वाला, उनके अनुकूल वातावरण बनाने वाला उन्हें उकसाने वाला, तो यही सेकुलर गिरोह है ।
अगर आप सोच रहे हैं कि इन जिहादियों, नक्सलियों, माओवादियों, चर्च प्रेरित आतंकवादियों को बारूद कहाँ से मिलता है बेशक पाकिस्तान से भी मिलता है पर उसे रोकने की जिम्मेवारी भी तो सरकार की है। जरा जी न्यूज की इस रिपोर्ट को देखो ।
इस रिपोर्ट(23-11-08) के अनुसार पिछले कुछ समय में 20,000 किलो बारूद,1,00,000 डेटोनेटर,1500 जिलेटिन छड़ें, 5200 मी से अधिक डेटोनेटिंग फ्यूज, सेफ्टीफ्यूज इसके अतिरिक्त टनों के हिसाब से अन्य विस्फोटक देश की विभिन्न विस्फोटक बनाने वाली फैक्टरीयों से चोरी के बहाने गायब करवाया जा चुका है जब इस बारे में महाराष्ट्र के विस्फोटक नियंत्रक जोआब अली से बात की गई तो उसने इसे आम घटना बताया।
रही बात जिहादियों की ट्रेनिंग की तो कुछ दिन पहले ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने देश में चल रहे आतंकवादी ट्रेनिंग कैम्पों की संख्या 800 बताई थी। ये संख्या तो तब है जब मस्जिदों में चल रहे अधिकतर जिहादी ट्रेनिंग कैंम्पों तक न सरकार की पहुँच है न पहुँच बनाने की कोशिश है।
अब आप ही फैसला करो कि ये आन्तरिक युद्ध है कि नहीं । अब आप कहेंगे कि बेशक ये युद्ध है पर इसके लिए हमारे पास सुरक्षा बल हैं । आपको यह ध्यान रखना चाहिए कि पुलिस- बोले तो-एटीएस वो ही करती है जो सरकार चाहती है जो सरकार सत्ता में आते ही जिहादियों के लिए खौफ बन चुके पोटा को हटाती है क्या पुलिस और जिहादियों के लिए ये संकेत काफी नहीं ?
अब रही बात सेना की तो भारतीय सेना बिना सरकारी आदेश के कोई एक्शन नहीं करती । भारतीय सेना पर सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में एक्शन के दौरान क्या-क्या प्रतिबन्ध लगाये जाते हैं ये तो सेना ही जानती है। वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि भारत में प्रतिदिन औसत 11 जवान शहीद होते हैं । इस युद्ध को निर्णायक रूप से सेना तभी लड़ सकती है जब देश की बागडोर सेना खुद अपने हाथों मे ले ले ।
काश ! ऐसा हो पाता तो कम से कम पाँच साल देश इस विदेशी अंग्रेज का गुलाम तो न रहता । एक विदेशी अंग्रेज इतनी बड़ी भारतीय सेना के होते हुए देश को गुलाम बनाकर बैठ जाए और देश को बर्बाद करने का हर प्रयत्न करने में कामयाब रहे । जरा सोचो सैनिक भाईयो सोचो कि शहीद भक्त सिंह जी के अंग्रेजों को निकालने के लिए किए गये बलिदान का ये अपमान नहीं तो और क्या है ?
अब आप ही बताओ जब देश में एक विदेशी अंग्रेज की गुलाम जिहाद व धर्मांतरण समर्थक सरकार सत्ता में हो तो इस जिहादियों द्वारा थोपे गये युद्ध को कौन लड़े ? क्योंकि ऐसी हिन्दुविरोधी सरकार आतंकवादियों पर हमला बोलने की इजाजत तो सुरक्षाबलों को दे नहीं सकती । ऐसे हालात में अगर हिन्दू हथियार न उठाये तो क्या निहत्था मरे?
आशा है कि आप समझ गये होंगे कि ये बाहरी व आन्तरिक सहयोग से हिन्दुओं पर थोपा गया आन्तरिक युद्ध है जिसे हिन्दुओं को ही लड़ना पड़ेगा क्योंकि इसे न लड़ने या हारने की स्थिति में हिन्दुओं को ही मरना या बेघर होना पड़ेगा ।
अतः आशा है कि आप भगवान का नाम लेकर इस युद्ध में तन-मन-धन सहित कूद पड़ेंगे व इन असुरों से देश को आजाद करवाने के इस यज्ञ में भाग लेकर इस मानव सभ्यता को बचाने में सफल होंगे ।
अगर आपको ये लग रहा है कि हम हिन्दू क्राँतिकारियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं तो आप गलत सोच रहे हैं आपको इस पुस्तक को फिर से पढ़ने की जरूरत है क्योंकि यह परम सत्य है कि एक क्राँतिकारी का बलिदान अनेकों क्राँतिकारियों को जन्म देता है इन क्राँतिकारीयों के जेल में जाने के साथ ही हिन्दुओं में हिन्दूक्राँति की ज्वाला तीव्र हो रही है...
अपना तो पहले से ही स्पष्ट मानना है कि लातों के भूत बातों से नहीं मानते मतलब साफ है अगर दुनियां में कहीं भी किसी भी हिन्दू को ईसाईयत( नक्सलवाद), इस्लाम, धर्मनिर्पेक्षता, वामपंथ(माओवाद) के नाम पर मारा जाता है तो उससे दोगुनी संख्या में कातिलों व उनके समर्थकों को मारकर ही समस्या का समाधान किया जा सकता है ।
अन्यथा मरते रहो ये राक्षस आपको तब तक मारते रहेंगे जब तक आप खत्म नहीं हो जाते और मानवता का शत्रु ये सैकुलर गिरोह आपके कत्ल को सही ठहराने के लिए इन कातिलों की अनपढ़ता ,गरीबी से लेकर राममन्दिर आन्दोलन तक की सहायता लेता रहेगा और अगर आप विरोध करेंगे तो आपको सांप्रदायिक कहकर गाली निकालेगा अगर इतने से काम चल गया तो ठीक नहीं तो आपको जिहादियों के इशारे पर हिन्दू आतंकवादी कहकर सारी दुनिया में बदनाम कर आपके साधुसन्तों-सैनिकों को अपमानित कर इन जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों के हिन्दू-मिटाओ हिन्दू-भगाओ अभियान को सफल बनाने में हर संभव सहयोग देगा !
जागो ! हिन्दू जागो !
हम तो साधु-सन्तों व शान्ति की बात करने वाले देशभक्त हिन्दूसंगठनों से भी ये विनम्र प्रार्थना करेंगे कि देश के बिगड़ते हालात को देखते हुए अहिंसा के मार्ग पर बढ़ने के अपने संकल्प पर पुनर्विचार करें व परिवेश को ध्यान में रखते हुए अपनी योजनांयें बनायें कहीं ऐसा न हो आप अहिंसा का पालन करते रह जांयें और 1947 की तरह ये देशद्रोही सैकुलर गिरोह करोंड़ों हिन्दुओं का कत्ल करवाकर देश को जिहादियों के रहमोकरम पर छोड़ दे ।
कब तक आप ये सब देखते रहेंगे कबतक हमारे जैसे हिन्दू कार्यकर्ताओं को मर्यादा व अहिंसा का तरक देकर दरकिनार करते रहेंगे ।
जब मर्यादा पुर्षोतम भगवान राम के ही अस्तित्व को ही नकार दिया गया हो तो काहे की मर्यादा। वैसे भी गीता में कहा गया है
धर्मों रक्षति रक्षितः
अर्थात धर्म उसकी रक्षा के लिए है जो धर्म का पालन करता है। धर्म के अस्तित्व को ही नकारने वाले इन आतंकवादियों व सैकुलर असुरों के लिए काहे की अहिंसा।
अगर मानवता को बचाना है तो इन असुरों पर निर्णायक विजय जरूरी है और निर्णायक विजय के लिए इन असुरों का मुकाबला इन्हीं के तरीके से करना जरूरी है वरना कहीं ऐसा न हो इतिहास आपको भी भीष्म-पितामह की तरह कभी माफ न करे।
अहिंसा की बात करने वाले हिन्दू ही बताएं कि जब हर तरफ से हथियारबंद जिहादी ,धर्मांतरण के ठेकेदार ईसाई, नक्सलवादी, माओवादी (सीपीआई,सीपीएम) , चर्च प्रेरित आतंकवादी हिन्दुओं पर हमला कर रहें हैं और धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में ये देशद्रोही गिरोह निर्दोष हिन्दुओं की रक्षा करने के बजाए इन कातिलों का हर तरह का सहयोग दे रहा हो तो फिर हिन्दू हथियार क्यों न उठायें ?
जब हिन्दू हथियार उठायें तो फिर सारा हिन्दूसमाज उनके साथ खड़ा क्यों न हो । और जब सारा हिन्दूसमाज उनके साथ खड़ा हो तो फिर दुशमन की क्या मजाल के बच के निकल जाए और दोबारा अपने हिन्दुओं की तरफ आँख उठाए।
हम इन हिन्दुओं को विनम्रतापूर्वक ये बताना चाहते हैं कि हिन्दुओं ने इस लड़ाई से बचने के लिए अफगानिस्तान से लेकर कश्मीर घाटी तक सबकुछ छोड़ दिया बदले में क्या मिला गाली, सांप्रदायिक आतंकवादी होने का लांछन, हमले पर हमला ?
हिन्दुओं ने सबके अस्तित्व को स्वीकार किया बदले मे क्या मिला हमारे आस्था के आधार स्तम्भ भगवान राम के अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह ?
हिन्दुओं ने बेघरों से लेकर आक्राँताओं तक को अपनी मातृभूमि भारतवर्ष में बसने दिया बदले में क्या मिला देश का विभाजन बचे हुए अखण्ड भारत के छोटे से टुकड़े से हिन्दुओं को ही उजाड़ने का षड्यन्त्र ।
नहीं चाहिए हमें ये शमशानघाट वाली शांति गोली मार दो ऐसी शांति की बात करनें वालों को जो हिन्दुओं के कत्ल व बेघर होने की वजह बने । स्पष्ट कर दो इन विधर्मियों को कातिल धर्मनिर्पोक्षतावादियों को--ये राष्ट्र हिन्दूराष्ट्र है सिर्फ हिन्दुओं का है- जिनको इसके हिन्दूराष्ट्र होने पर आपत्ति है छोड़ कर चले जांयें अपने-अपने देशों को वापिस जहां से आए थे वरना मिटा दिए जाओगे !
यहां औरंगजेब, बाबर ,गजनबी , डायर की जिहादी व धर्मांतरण की दलाल सन्तानों के लिए कोई जगह नहीं ये ऋषियों-मुनियों योगियों की भूमि है हिन्दुओं की भूमि है यहां अहिन्दुओं का क्या काम ?
भारत के इतिहास की ये निर्णायक लड़ाई हमारी मजबूरी है शौक नहीं ।

धर्मनिर्पेक्षता का खूनी चेहरा

o कौन नहीं जानता किस तरह इधर धर्मनिपेक्षता की आड़ में हिन्दुओं को आपस में लड़वाने के षड्यन्त्र रचे जाते रहे चुनाव होते रहे, धर्मनिर्पेक्षता की रक्षा के बहाने हिन्दू धर्म के मान-सम्मान मर्यादा को तार तार कर हिन्दुओं को बदनाम किया जाता रहा उधर कश्मीर घाटी में सैकुलर गद्दार सरकारों के बैनर तले हिन्दुओं को कुचला जाता रहा , हलाल किया जाता रहा ,भागने पर मजबूर किया जाता रहा , सेना की जिहादियों के विरूद्ध कार्यवाही को अल्पसंख्यकों की रक्षा के नाम पर रोका जाता रहा कार्यवाही करने वाले बहादुर जवानों को मानवाधिकार का सहारा लेकर कोर्ट , कचहरियों व जेलों के चक्कर काटने पर मजबूर किया जाता रहा , मस्जिदों मे छुपे आतंकवादियों को बकरे खिलाये जाते रहे ,भारत का गृहमन्त्री बन चुके कांग्रेसी जिहादी की आतंकवादी बेटी की चाल में फंसकर उग्रवादियों को छोड़ा जाता रहा ।
o हैरानी होती है ये सुनकर कि जब निर्दोष हिन्दुओं का खून बहाने वाले राक्षसों को सजा देने की बारी आए तो मानवाधिकारों की दुहाई और विस्थापित किए जा रहे मारे जा रहे निर्दोष हिन्दुओं के लिए कोई मानवाधिकार नहीं । ये फैसले की घड़ी है फैसला तो आप खुद कीजिए कि ऐसे कुतर्क देने वाला ये सेकुलर गिरोह हिन्दुविरोधी देशद्रोही नहीं तो और क्या है ?
o परिणाम सबके सामने है । अपने ही देश के एकमात्र मुस्लिम बहुल क्षेत्र कश्मीर घाटी से हिन्दुओं का सफाया । जिस कश्मीरधाटी से या तो हिन्दुओं को भगा दिया गया या फिर हलाल कर दिया गया उसी हिन्दुओं के खून से रंगी इस कश्मीर घाटी को अल्पसंख्यकों के ठेकेदार आज अमन भाईचारे और धर्मनिर्पेक्षता की मिसाल बनाकर प्रस्तुत करने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं और हिन्दुओं के खून-पसीने की कमाई इन जिहादियों को अनुदान के रूप में देकर इन्हें हिन्दू को मार-काट कर भगाने के लिए दण्डित करने की जगह पुरस्कृत कर रहे हैं !
सिर्फ एक कश्मीरघाटी थोड़े ही है जरा आसाम व उतर-पूर्व के हालात देखो । सोचो जरा कि इन धर्मनिर्पेक्षतावादियों ने जिहादी बंगलादेशी घुसपैठियों व धर्मांतरण के दलाल ईसाईयों के साथ मिलकर आसाम व उतर-पूर्व में क्या हालात पैदा कर दिए हैं ?
आओ जरा आसाम की बात करें। हम ज्यादा दूर नहीं जायेंगे बात है 1983 की जब बंगलादेशी घुसपैठियों की वजह से स्थानीय निवासियों को असुविधा का एहसास होने लगा उन्होंने आवाज उठानी शुरू की लेकिन दिल्ली में बैठे धर्मनिर्पेक्षता के ठेकेदारों ने देशभक्त असमियों का साथ देने के बजाए जिहादी घुसपैठियों का साथ दिया ।
15 अक्तूबर 1983 को ऐसा कानून(आई एम डी टी) बनाया जिसके अनुसार किसी भी घुसपैठी जिहादी को विदेशी साबित करने की जिम्मेवारी सरकार या सुरक्षाबलों से हटाकर आम भारतीय नागरिक पर डाल दी गई और साथ ही 25 मार्च 1971 से पहले आए घुसपैठियों को भारतीय नागरिक मान लिया गया बस यहीं से शुरू हुआ हिन्दुओं का उजड़ना और घुसपैठियों का हावी होना जो आज विकराल रूप धारण कर चुका है।
समस्या तब और गम्भीर हो गई जब स्थानीय मुसलमान इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी गिरोह का घुसपैठ-समर्थक रूख देख कर इन मुस्लिम घुसपैठियों के समर्थन में आ गये । इस तरह आसाम में देशद्रोह की राजनीति का सूत्रपात हुआ जो आज हिन्दुओं के मान-सम्मान जानमाल का दुश्मन बन गया है ।
आपको ये जान कर हैरानी होगी कि 1983 से 2005 तक सिर्फ आसाम में 2,00,000 से अधिक विदेशियों की पहचान की गई लेकिन इस घुसपैठ समर्थक कानून की वजह से सिर्फ दस हजार को कानूनन विदेशी सिद्ध किया जा सका और इन 10,000 में से भी सिर्फ 1500 से कम घुसपैठियों को बांगलादेश वापिस भेजा जा सका ।
देशविरोधी इस कानून को अन्ततः माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने 12 जुलाई 2005 को रद्द कर इस देशविरोधी सैकुलर गिरोह की असलियत जनता के सामने उजागर कर दी ।
आपको हैरानी नहीं होनी चाहिए कि इस हिन्दुविरोधी विदेशी की गुलाम देशद्रोही सरकार व गिरोह ने मानीय न्यायालय के इस देशहित मे दिए गये निर्णय का डटकर विरोध किया । माननीय न्यायालय ने इस घुसपैठ को देश पर आक्रमण माना और इस कानून को घुसपैठ रोकने के रास्ते में जानबूझ कर रूकावट पैदा करने के लिए बनाया गया बताकर इसे असंवैधानिक व विभाजनकारी माना । घुसपैठियों को देश के बाहर निकालने की जिम्मेवारी केन्द्र सरकार पर डाली ।
लेकिन दुर्भाग्य से आज केन्द्र में इसी देशद्रोही गिरोह की सरकार होने के कारण पिछले तीन वर्षों में एक भी विदेशी को देश से बाहर नहीं निकाला । निकालती भी कैसे क्योंकि जो सरकार खुद विदेशी की गुलाम हो वो भला विदेशियों को बाहर निकालेगी क्या ?
आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि हम बंगलादेशी घुसपैठियों को निकालने की बात कर रहे हैं पर इस हिन्दुविरोधी देशद्रोही जिहाद व धर्मांतरण समर्थक इस गिरोह के एक सहयोगी कांग्रेस ने इन घुसपैठियों के लिए अल्पसंख्यकों के अधिकारों की दुहाई देकर इस्लाम के नाम पर जिहादी छात्र व राजनीतिक संगठन बनवाकर उनके साथ मिलकर चुनाव लड़कर सरकार बना ली।
अब ये जिहादी संगठन आये दिन बम्ब विस्फोट कर रहे हैं। हिन्दुओं पर हमले कर रहें हैं उन्हें जिन्दा जला रहे हैं। पाकिस्तान के झंडे फहरा रहे हैं ।हिन्दुओं को अपना घरबार छोड़कर भागने पर मजबूर कर रहे हैं सरकार निर्दोष हिन्दुओं के जानमाल की रक्षा करने के बजाए इन जिहादी संगठनों का साथ दे रही है । जिसके परिणाम स्वरूप आसाम में लाखों हिन्दू बेघर हो चुके हैं ।
कुल मिलाकर आसाम में बिल्कुल कश्मीर जैसे हालात बनते जा रहे हैं और इसमें कोई शंका नहीं रहनी चाहिये कि ये सबकुछ समय रहते रोका न गया तो वो वक्त दूर नहीं जब आसाम भी कश्मीर की तरह हिन्दुविहीन होकर जिहादियों के कब्जे में चला जाएगा ।
हमें हैरानी तो तब होती है जब देशभकत लोग हिन्दुओं पर हो रहे जुल्मों सितम के विरूद्ध आवाज उठाते हैं तो ये सैकुलर हिन्दुविरोधी उन्हें साप्रदायिक कहकर गाली निकालते हैं व इन कातिल जिहादियों को अल्पसंख्यक बताकर इनकी हिंसा व हमलों के शिकार हिन्दुओं को ही दोषी ठहरा देते हैं और इन जिहादियों के साथ मिलकर हिन्दुओं व उनके संगठनों पर हमला बोल देते हैं इस सबसे काम न चले तो हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए हिन्दू आतंकवाद का झूठ फैला देते हैं । अब आप ही बताओ स्वाभिमान, सम्मान व शाँति से जीने की चाह रखने वाला हिन्दू करे तो क्या करे ? कोई और हिन्दू देश भी तो नहीं कि वहां भाग जांयें !
अब ये फैसला हम हिन्दुओं पर छोड़ते हैं कि उन्हें मुस्लिमबहुल कश्मीर घाटी ,आसाम, ईसाई बहुल उत्तर-पूर्व या वांमपंथ से प्रेरित माओवाद व नस्लवाद प्रभावित क्षेत्रों जैसी धर्मनिर्पेक्षता चाहिए जो इस्लाम,ईसाईयत(नक्सलवाद) व वांमपंथ(माओवाद) के प्रचार प्रसार के लिए हिन्दुओं का खून बहाने में फक्र महसूस करती है या हिन्दुबहुल क्षेत्रों जैसा सर्वधर्म सम्भाव जहां 95% से अधिक हिन्दू आबादी होने के बावजूद आज तक हिन्दूधर्म के प्रचार-प्रसार के लिए हमला कर किसी भी मुस्लिम या ईसाई या वांमपंथी का खून नहीं बहाया गया !
o हमें घृणा है होती उन गद्दारों से जो एक काल्पनिक मस्जिदध्वंस, जिसमें सेकुलर नेताओं द्वारा हिन्दुओं का खून पानी की तरह बहाया गया,पर हिन्दुओं द्वारा एक भी मुसलमान नहीं मारा गया, के लिए तो छाती पीट-पीट कर रोते हैं पर कश्मीर घाटी में हलाल किए गये व आसाम में मारे जा रहे हजारों हिन्दुओं की मौत व तोड़े गए मन्दिरों पर एक आंसु तक नहीं बहाते उल्टा उनकी मौत पर रो रहे हिन्दूसंगठनों को सांप्रदायिक कहकर गाली निकालते हैं । आतंकवादी कहते हैं और लोकतंत्र के मन्दिर पर हमला करने वाले आतंकवादियों को बचाने के लिए मोमबती जलाओ अभियान चलाते हैं ।
o हमें घिन आती है उन बिके हुए दलालों से जो खुद को सैकुलर लेखक व मानवाधिकारवादी सामाजिक कार्यकर्ता प्रचारित करने के लिए अपने ऊपर जिहादियों व धर्मांतरण के ठेकेदारों द्वारा लगाई जाने वाली बोली की राशि बढ़वाने के लिए गुजरात में जिहादियों द्वारा हिन्दुओं को जिन्दा जलाकर लगाई गई आग में मारे गए सैंकड़ों मुसलमानों के विरोध में दर्जनों लेख लिख डालते हैं पर कश्मीर घाटी में मारे गए हजारों हिन्दुओं के कत्ल के विरोध में लिखने के लिए उनकी कलम की स्याही सूख जाती है।
हम बड़ी विनम्रता से माननीय सर्वोच्च न्यायालय से भी यह जानना चाहेंगे कि क्यों माननीय न्यायालय ने इन हिन्दुविरोधी जिहाद समर्थक देशद्रोहियों के कहने पर गुजरात के अधिकतर मामले गुजरात से बाहर इन हिन्दूविरोधियों द्वारा शासित राज्यों में स्थानांत्रित कर दिए ?
यही पैमाना कश्मीरघाटी व देश के अन्य हिस्सों में इन हिन्दुविरोधी धर्मनिर्पेक्षतावादियों की सरकारों के बैनर तले चल रहे हिन्दुओं के नरसंहार के लिए क्यों नहीं अपनाया गया जो आज भी जम्मू के मुस्लिमबहुल क्षेत्रों सहित देश के कई अन्य हिस्सों में जारी है ?
जहां पर बड़े से बड़े नरसंहार के दोषियों को या तो निचली अदालतों ने जिहादसमर्थक सरकारों द्वारा अधूरे तथ्य पेश करने की वजह से, प्रमाण के अभाव में छोड़ दिया या फिर इन हिन्दुविरोधी सरकारों ने कानून बनवाकर या आत्मसमर्पण का सहारा लेकर छुड़वादिया । हद तो तब हो गई जब इन देशविरोधी जिहादियों को सुरक्षाबलों में भरती कर दिया गया ।
हम हिन्दू माननीय सर्वोच्चन्यायालय से विनम्र प्रार्थना करते हैं कि आज तक इस तरह छोड़े गये हिन्दुओं के नरसंहारों के आरोपियों व दोषियों से सबन्धित सभी मामलों की जांच करवायी जाए ताकि इन नरसंहारों के परिणामस्वरूप हिन्दुओं के अन्दर पैदा हो रहे आक्रोश को समय रहते इन्साफ दिलवाकर दूर किया जा सके ।
आज इस हिन्दुविरोधी महौल में हिन्दुओं को भारतीय सेना के बाद अगर किसी से न्याय की उम्मीद है तो वो माननीय न्यायालय से है ।
आशा है माननीय सर्वोच्चन्यायालय अल्पसंख्यकवाद व धर्मनिर्पेक्षता के नाम पर हिन्दुओं से किए जा रहे भेदभाव व अत्याचारों का सुओ मोटो नोटिस लेकर इस भेदवाद को खत्म कर हिन्दुविरोधी सरकारों द्वारा गृहयुद्ध की ओर धकेले जा रहे देश के कदमों को रोककर मानवता की आधार स्तम्भ भारतीय संस्कृति- बोले तो-हिन्दू संस्कृति को बचाने में अपना अमूल्य योगदान देकर असंख्य प्राणों की रक्षा करने में समर्थ होगा ।
o हां तो हम बात कर रहे थे कश्मीरघाटी में जिहादियों द्वरा हिन्दुओं पर ढाये गये अत्याचारों के बारे में लेकिन परस्थितिवश न्याय की आशा की एक किरण माननीय न्यायालय का समरण हो आया ।
o आज भी जम्मू व देश के विभिन्न हिस्सों में लगभग पाँच लाख हिन्दू अपना घरबार छोड़ कर दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं ।उनके बच्चे कुपोषण का शिकार होकर मर रहे है । अपने बच्चों को जिन्दा रखने की उम्मीद में विस्थापित हिन्दू अपने बच्चों को बेचने पर मजबूर हैं ।
जाओ जरा उनसे पूछो धर्मनिर्पेक्षता की राजनीति करने वाले मानव हैं या दानव। इन दानवों के पास मक्कामदीना की यात्रा के लिए प्रतिमुसलमान 50000 रूपये व जेरूशलम की यात्रा के प्रति ईसाई 80000 रूपये देने के लिए तो हैं पर अपने ही देश में विस्थापित हिन्दुओं के लिए कुछ नहीं । काश ये समझ पाते सर्वधर्मसम्भाव के मूलमन्त्र को !
o जिस गुलाम सरकार में शामिल दरिंदों की नींद हिथरो हवाई अड्डे पर बम्ब विस्फोट के आरोप में पकड़े गये जिहादी को मिल रही यातनाओं की वजह से उड़ जाती है। उन्हें अपने ही देश में दर दर भटक रहे इन हिन्दुओं का दर्द क्यों नहीं दिखाई देता ?
नींद उड़ना तो दूर यहां तो इन हिन्दुओं के दर्द को जन-जन तक पहुँचाने की कोशिश में लगे हिन्दूसंगठनों को ये सरकार आतंकवादी कहती है, सांप्रदायिक कहती है व हिन्दूरक्षा की विचारधारा का समर्थन करने वाले साधु सन्तों यहां तक कि देशभक्त सैनिकों को जेलों में डालकर उससे भी बुरी यातनांएं देती है ,जो यांतनाऐं एक जिहादी को मिलने पर इनकी नींद उड़ जाती है।
o क्यों इनको समझ नहीं आता कि घर से उजड़ने का दर्द क्या होता है ? क्यों इनको समझ नहीं आता कि ये यातनांयें ये हिन्दू किसी पर हमला करने की वजह से नहीं बल्कि अपने ही हमवतन गद्दारों के धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में रचे गये हिन्दुविरोधी षड्यन्त्रों की वजह से झेल रहे हैं ?
ये धर्मनिर्पेक्षता नहीं गद्दारी है देशद्रोह है हिन्दूविरोध है शैतानीयत है। नहीं चाहिए हिन्दुओं को ऐसी धर्मनिर्पेक्षता जो हिन्दुओं की आस्था से खिलवाड़ कर व हिन्दुओं का खून बहाकर फलतीफूलती है । आज इसी वजह से जागरूक हिन्दू इस धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में छुपे हिन्दूविरोधियों को पहचान कर अपनी मातृभूमि भारत से इनकी सोच का नामोनिशान मिटाकर इस देश को धर्मनिर्पेक्षता द्वारा दिए गये इन जख्मों से मुक्त करने की कसम उठाने पर मजबूर हैं।

मुम्बई हमला खतरे की घंटी

हम अपने प्यारे हिन्दूराष्ट्र भारत को अल्पसंख्यकवाद व धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में चल रहे देशद्रोह हिन्दूविरोध को उन्हीं का मार्ग अपनाकर गद्दारों का इस पुण्य भूमि भारत से सफाया कर देने का प्रण लेकर इस अभिव्यक्ति के क्रम को विराम दे चुके थे कि 26/11/2008 को मुम्बई में जो हुआ उसने इस पुस्तक में अभिव्यक्त की गई युद्ध की शंका के साक्षात दर्शन करवा दिए ।
अब इस बर्बर इस्लामिक हमले के बारे में न लिखा जाए ऐसा कैसे हो सकता है ।
26 नवम्बर शाम को हमने बी. बी. सी. पर एक चर्चा सुनी जिसका शीर्षक था साँप्रदायिक आतंकवाद परन्तु इस सारी चर्चा का मकसद था हिन्दुओं को बदनाम करना व भारत में जिहादी आतंकवाद को विभिन्न कारण देकर न्यायोचित ठहराना । पहले तो हमने इस चर्चा के बारे में न लिखने का निर्णय लिया था लेकिन मुम्बई में हुए हमले ने हमें इन कातिलों के ठेकेदारों से बात करने पर मजबूर कर दिया ।इस कार्यक्रम में के एस ढिल्लों सेवानिवृत भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी जो पुलिस सुधारों पर काम कर रहे हैं ऐसा बताया गया । ये ढिल्लों कहते हैं कि भारत में कोई मुस्लिम आतंकवाद नहीं है सिर्फ कानून व्यवस्था की समस्या है और ये समस्या इसलिए पैदा हो रही है क्योंकि भारत में मुसलमानों को दबाने की कोशिश हो रही है।
ढिल्लों जी आप पुलिस सुधारों पर काम कर रहें हैं या जिहादी आतंकवादियो को बचाने के सूत्रों पर । इस सब के लिए पैसे सीधे साउदी अरब से मिलते हैं या बाया पाकिस्तान होकर । याद रखो आज यदि ये समाज पुलिस पर संदेह करता है तो आप जैसे आतंकवादियों के चाकर उँचे पदों पर बैठे या रहे पुलिस अधिकारियों की वजह से । आप जैसे गद्दारों की वजह से ही स्वर्गीय मोहन चन्द शर्मा जैसे देशभक्त जवानों का बलिदान देने के बावजूद ये जिहादी दानव आपे से बाहर होता जा रहा है ।
इस कार्यक्रम में भारतीय मानवाधिकार आयोग के पूर्व अध्यक्ष जगदीश वर्मा कहते हैं कि इन जिहादी आतंकवादियों को रोकने के लिए न तो सख्त कानून बनाने चाहिए न ही इनको गोली मारी जानी चाहिए जिहादी जो कहते हैं उस पर सरकार को अमल कर इनकी समस्या का समाधान करना चाहिए ।
जगदीश जी इनकी समस्या का समाधान है भारत के सब हिन्दुओं का कत्ल कर यहां दारूल इस्लाम बनाना सिर्फ भारत ही नहीं सारी दुनिया को इस्लामी राज्य बनाना । जगदीश जी आपकी इसी सोच की वजह से आप दानवाधिकार आयोग बोले तो आतंकवादी अधिकार आयोग के संस्थापक सदस्य कहलाने के पात्र हैं आपका ही वो कार्यकाल था जिसने भारतीय मानवाधिकार आयोग को हिन्दुविरोधी आतंकवादी आयोग बना डाला और हिन्दुओं को अपने ही देश में मूलाधिकारों से वंचित होने का एहसास करवाया ।
हमें अफसोस होता है आपको ये बताते हुए कि मानवाधिकार कानून का पालन करने वाले शान्तिप्रिय नागरिकों के लिए होते हैं न कि हर तरह के कानून और मानबता के बन्धन तोड़ कर निर्दोश नागरिकों का खून बहाने के लिए प्रतिबद्ध आतंकवादियों के लिए ।
जिस भारत के इतने बड़े पद पर आप जैसे अमन चैन के शत्रु व आतंकवादियों के मित्र पहुँच जाँयें उस भारत को इन जिहादी राक्षसों के हमलों से कौन बचा सकता है। आपको ये समझना चाहिए कि हर रोज हो रहे आतंकवादी हमलों में मारे जाने वाले निर्दोष नागरिकों के कत्ल के लिए इन आतंकवादियों से ज्यादा आप जैसे इन आतंकवादियों के समर्थक जिम्मेदार हैं ।
हम तो कहते हैं कि अफजल जैसे जिहादियों को फाँसी पर चढ़ाने से पहले आप जैसे उचें पदों पर बैठे या रहे आतंकवादियों के पैराकारों को पहले फाँसी पर चढ़ाना चाहिए ताकि आम भारतीय अमन चैन से जिन्दगी जी सकें ।
कुलदीप नैयर जी कहते हैं भारत की सारी पुलिस खराब है और हिन्दुओं में तालिबान हैं।
ये कुलदीप नैयर जी वही हैं जो आज तक गोधरा में मुस्लिम भीड़ द्वारा ट्रेन में आग लगाकर जिन्दा जलाए गये हिन्दुओं की प्रतिक्रियास्वरूप मारे गये लगभग 700 मुसलमानों का विरोध करने के लिए दर्जनों लेख लिख चुके हैं लेकिन मुस्लिम जिहादी आतंकवादियों द्वारा मारे गये 60000 से अधिक हिन्दुओं व विस्थापित हुए लाखों हिन्दुओं के बारे में लिखते वक्त इनकी स्याही सूख जाती है ।
यह वही लेखक है जो बिल्कुल ऐसा ही हमला संसद भवन पर करवाने वाले जिहादी प्रोफैसर को छुड़ाने के लिए मोमबती जलाओ अभियान चलाता है व सरकार पर दबाव बनाकर उस जिहादी को छुड़ाने में सफल होता है और अपने तालिबानी साथियों को खुश करता है।
हम इस हिन्दुविरोधी देशविरोधी परजीवी को ये बताना चाहते हैं कि तालिबान हिन्दुओं में नहीं उन बिके हुए लेखकों में हैं जो संसद भवन पर हुए जिहादी हमले को झूठा बताकर जिहादियों का समर्थन कर लोकतन्त्र व देश की रक्षा के लिए शहीद होने वाले जवानों के बलिदान का अपमान कर अपने देशद्रोही होने का प्रमाण देते हैं।
ये तो इन देशविरोधियों की किस्मत अच्छी है कि आज देश में एक विदेशी की गुलाम सरकार है और देशभक्तों ने अभी शस्त्र नहीं उठाये हैं वरना आज तक ऐसे गद्दार लेखकों को या तो सरकार फांसी चढ़ा देती या कोई स्वाभिमानी हिन्दू गोली मार देता।
हम इन हिन्दुविरोधी लेखकों को बताना चाहते हैं कि समझदार लोग जिस पतल में खाते हैं उसी पतल में छेद नहीं करते चाहे शत्रु कितना भी पैसा क्यों न दे दे । याद करो उन लेखकों को जिन्होंने इन राक्षसों से देश धर्म को बचाने के लिए हर तरह के जुल्म सहने के बावजूद देशभक्ति से ओतप्रोत लेख लिखे ओर फिर देखो उन गद्दारों को जो चन्द टुकड़ों की खातिर तालिबानों को बचाने के लिए सड़कों पर उतर आते हैं !
मुम्बई में हुए इस हमले में अपने 20 जवान शहीद हुए जिनमें दो अजय कमांडो भी शामिल थे व कुछ बहादुर जवान घायल भी हुए । आओ मिलकर इन सब शहीदों को प्रणाम करते हुए प्रण लें व घायलों के शीघ्र स्वीस्थय लाभ के लिए पूजा करें।
“तेरा वैभव अमर रहे मां हम दिन चार रहें न रहें ’
इसके अतिरिक्त 160 भारतीय व 25 विदेशी मारे गये व 300 से अधिक घायल हुए । यह हमला ऐसे समय में किया गया जब भारत की हिन्दुविरोधी सरकार ने पुलिस को जिहादी आतंकवादियों से देश का ध्यान हटाने की खातिर निर्दोष शान्तिप्रिय हिन्दुओं को आतंकवादी सिद्ध करने में लगाया हुआ था । सरकार की इस देशविरोधी नीति की कीमत देश के बहादुर जवानों को शहीद होकर चुकानी पड़ी व शांतिप्रिय लोगों को अपनी जान गंवाकर और भारत को अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगाकर ।
पुलिस को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करवाना कितना जरूरी है इस बात का भी एहसास इस वक्त करना अत्यन्त आवश्यक है। पर एहसास वो कर सकते हैं जिनको देश की चिन्ता हो,देश से प्यार हो !
अब आप ही फैसला करो कि इन हमलों में हुए जान-माल के नुकसान के लिए पाँच वर्षों से जिहादियों के अनुकूल वातावरण बना रही इस देशद्रोही सरकार, गद्दार सेकुलर गिरोह व जिहाद समर्थक मीडिया को जिम्मेवार क्यों न माना जाए ?
इस हमले का सीधा प्रसारण अधिकतर समाचार चैनलों ने दिखाया जिसने हमारे जवानों के काम को मुशकिल बनाया व आतंकवादियों की सहायता की । क्योंकि ऐसा सम्भव है कि देश-विदेश में बैठे जिहादियों के आका इन चैनलों को देखकर जिहादियों की सहायता कर रहें हों ।
हालांकि कुछ चैनलों ने बाद में अपनी गलती का एहसास होने पर इस प्रसारण को सीधा दिखाने के बजाए कुछ देर बाद दिखाना शुरू किया । आपने देखा होगा कि कुछ देशद्रोही चैनलों ने किस तरह आतंकवादियों का गुणगान किया व उन्हें हीरो बनाकर प्रचारित करने का दुस्साहस किया ।
एक चैनल जो अलकायदा के सहयोगी चैनल अलजजीरा का सहयोगी है जो लगातार हिन्दूविरोध के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। ये हिन्दूविरोध की ये प्रक्रिया इस चैनल के अलजजीरा के साथ समझौता करने के बाद से ही दिख रही है पहले ये चैनल बाकी सब चैनलों से अच्छा होता था ।
इस चैनल ने तो खुद को मुस्लिम जिहादियों का चैनल होने का दावा ही कर डाला जो यह सिद्ध करता है कि अधिकतर चैनलों में अपने आप को ज्यादा से ज्यादा मुस्लिम जिहाद समर्थक सिद्ध करने की प्रतिस्पर्धा हो रही है ।
इस चैनल ने तो तब हद ही कर दी जब इसने अपने सूत्रों का प्रयोग करते हुए एक मुस्लिम जिहादी आतंकवादी का इंटरव्यु ही ले डाला । हालांकि ये इन्टरव्यु करना सही नहीं था पर जब कर ही दिया तो ये इन्टरव्यु सब देशभक्त हिन्दुओं की आँखे खोलने वाला निकला ।
आतंकवादी ने स्पष्ट कहा कि भारत में भगवा सरकार है हिन्दुओं की सरकार है यह वही आरोप है जो ये सेकुसर गिरोह व हिन्दुविरोधी मीडिया हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों,शिवसेना व भाजपा पर लगाते हैं ।
हमें अचम्भा हुआ कि जो सरकार पूरी तरह से देशद्रोह व हिन्दूविरोध के मार्ग पर चलते हुए मुस्लिम जिहादियों को खुश करने के लिए मुस्लिम जिहादी आतंकवादी को फाँसी नहीं देती है, देश के लिए शहीद हुए जवानों का अपमान करती है, आतंकवादियों को खुश करने के लिए पोटा को हटाकर कोई नया जिहाद विरोधी सख्त कानून नहीं बनाती है, हिन्दुओं के बच्चों को उनके मूल अधिकारों से वंचित करती है , साधु-सन्तों को अपमानित करती है, हिन्दूविरोध में मर्यादा और बेशर्मी की हर हद पार करते हुए मर्यादापुर्षोत्तम भगवान श्री राम के अस्तित्व को नकारती है। उस सरकार को भी मुस्लिम जिहादी ने मुसलमान विरोधी, हिन्दुओं की सरकार बताया ।
उस जिहादी ने इस सरकार से मुस्लिमबहुल क्षेत्रों को आजाद करने के लिए कहा क्योंकि ये मुसलमान किसी हिन्दू की गुलामी सहन नहीं कर सकते । हिन्दुस्थान के मुसलमानों को हिन्दुओं की गुलामी से आजाद न करने पर हिन्दुओं पर जिहादी हमले और तेज करने की चेतावनी दी । इस मुस्लिम जिहादी ने इस जिहाद समर्थक सैकुलर गिरोह के स्वर में स्वर मिलाते हुए कहा कि अयोध्या में राममन्दिर नहीं बनना चाहिए ।
साथ ही ये भी कह दिया कि जब भी मुसलमान हिन्दुओं को गोधरा की तरह जिन्दा जलां दें या बम्ब हमलों में मार दें तो हिन्दुओं को निहत्था बिना लड़े मरना चाहिए गुजरात की तरह इस हमले का जबाब देकर जिहादियों के समर्थकों को नहीं मारना चाहिए । यही मांग ये जिहाद समर्थक सैकुलर गिरोह करता रहता है ।
अन्त में इस जिहादी की सारी बातों का सार यही था कि ये मुस्लिम जिहाद तब तक जारी रहेगा जब तक भारत के सब मुस्लिमबहुल क्षेत्रों को मुस्लिम देश नहीं बना दिया जाता(वन्देमातरम् का विरोध इसी कड़ी का एक हिस्सा है) मतलब साफ है कि जब तक कश्मीर घाटी की तरह सब हिन्दुओं को हलाल नहीं कर दिया जाता या फिर वो भाग नहीं जाते !
कुल मिलाकार इस मुस्लिम जिहादी आतंकवादी ने वो ही बातें कहीं जो भारत के मुस्लिम जिहादी और उनका समर्थक ये सैकुलर गिरोह कहता है अब आप ही फैसला करो कि ये गिरोह किसका है देशविरोधी आतंकवादियों का या देशभक्त भारतीयों का ?
अगर आप सोच रहे हैं कि ये आवाज भारतीय मुसलमानों की नहीं तो जरा ये पढ़ो ।
मुहम्मद अजहरूद्दीन मुसलमान होने के बावजूद देश की क्रिकेट टीम में चुना जाता है देश की टीम का कप्तान बनाया जाता है क्या कोई हिन्दू उसके मुस्लिम होने के कारण उसके चुने जाने या कप्तान बनने का विरोध करता है नहीं न ।
पर जब यही अजहरूद्दीन टीम के हित बेचता हुआ पकड़ा जाता है तो ये क्या कहता है क्योंकि मैं मुसलमान हूँ इसलिए मुझे फंसाया जा रहा है ।
जावेद अखतर और उसकी घर वाली गाने/फिल्में बनाकर देश के हिन्दुओं से करोड़ों रूपये कमाते हैं कोई हिन्दू उनके गानों/फिल्मों का उनके मुसलमान होने की वजह से विरोध नहीं करता लेकिन शबाना आजमी कहती है कि भारत में मुसलमानों के साथ भेदभाव होता है क्योंकि किसी सोसाइटी में विशेषाधिकार देकर उसे मकान नहीं दिया गया । जाबेद अखतर तो अक्सर उन देशभक्त हिन्दू संगठनों के बिरूध जहर उगलता रहता हैं जो मुस्लिम जिहादियों द्वारा हिन्दुओं पर किए जा रहे हमलों का विरोध करते हैं ।
देश के विभाजन के वक्त मुसलमानों द्वारा देश के साथ की गई गद्दारी से शर्मसार होकर अपना नाम बदलने वाले दिलीप कुमार उर्फ युसुफ खाँ की असलिएत तब सामने आती है जब वो सेकुलर गिरोह को फायदा पहुंचाने के लिए हिन्दुओं पर मुस्लिम जिहादियों द्वारा ढाये जा रहे जुल्मों का विरोध करने वाले हिन्दुओं व उनके संगठनों को अपशब्द कहता है ।
नदीम – श्रबण हिन्दू मुस्लिम एकता की मिसाल जोड़ी परिणाम गुलशन कुमार का कत्ल नदीम द्वारा । पकड़े जाने के डर से नदीम इंगलैंड भाग जाता है । वहां कोर्ट में कहता है कि भारत हिन्दू देश है अतः उसे मुस्लिम होने के कारण भारत में न्याय नहीं मिल सकता ।
भारत में रेलवे स्टेशन पर दो ट्रेनें आमने सामने टकराती हैं बहुत से लोग मारे जाते हैं शुरू में सब सोचते हैं कि ये ट्रेनें दुर्घटनावश टकरा गईं । बाद में पता चलता है कि ये ट्रेनें एक मुसलमान द्वारा जानबूझ कर हिन्दुओं को मारने के लिए टकराइ गई हैं जो वहां नौकरी करता था जब पुलिस उसे पकड़ने की कोशिश करती है तो जानकारी मिलती है कि उसने पहले से भागने की तैयारी कर रखी थी और वो परिवार सहित पाकिस्तान पहुँच गया है ।
उमर अबदुला जिसे मुसलमानों की नई पीड़ी का प्रतिनिधि माना जा सकता है संसद में कहता है बाबा अमरनाथ यात्रा के लिए एक इंच भूमि भी नहीं दी जायगी।
पिछले 3-4 बर्षों में सिर्फ मुसलमानों से जुड़े मसलों पर करबाई गई चर्चा-परिचर्चा में भाग लेने वाले मुसलमानों ने हर स्तर पर हिन्दू जनता व देश को धमकाने की कोशिश की । यहां तक कहा गया कि अगर मुसलमानों की हर बात नहीं मान ली जाती तो देश में मुस्लिम जिहादी हमले होते रहेंगे ।इन चर्चाओं में मुस्लिम कलाकारों से लेकर सांसदों तक का अलगावबादी रूख सबके सामने आ गया व ये भी सपष्ट हो गया कि पाकिस्तान की तरह ये मुसलिम प्रतिनिधि भी आतंकवाद को हथियार के रूप में प्रयोग कर रहे हैं । हैरानी तो तब हुई जब चर्चा करवाने वाले चैनलों के पत्रकारों ने इनके अलगाववादी व धमकी भरे देशविरोधी रुख को निरूत्साहित करने या टोकने के बजाय इनके अलगाववादी रूख का समर्थन किया।
अब आप ही बताओ ये गद्दारी नहीं तो और क्या है इनमें से किसी को भी हम कभी मुस्लिम जिहादी आतमकवादी नहीं मानते थे पर काम तो इन सब ने अलगाववाद का ही किया ।
इन सब मुसलमानों ने वो ही तर्क दिया जो मुस्लिम जिहादी आतंकवादी और उनके समर्थक अक्सर हिन्दुओं को मारने वाले मुस्लिम जिहादियों को बचाने के लिए देते हैं ऐसे तर्क देने में फारूकी और जावेद अख्तर जैसे लोग सबसे आगे रहते हैं ! फारूकी जैसे मुसलमानों की असलिएत उस वक्त भी सामने आ गई थी जब इन लोगों ने वन्देमातरम् का विरोध किया था ।
भारत का इतिहास ऐसी धोखेबाजी से भरा पड़ा है । क्रिकेट मैच में भारत की जीत पर मातम और पाकिस्तान की जीत पर जशन मनाते हुए इन मुसलमानों में छिपे जिहादियों को लाखों भारतीयों ने अपनी आँखों से देखा है ।
अब आप ही बताओ इनमें से भरोसा किया जाए तो किस पर और क्यों ?
क्या गारंटी है कि कश्मीर की तरह हिन्दुओं को खत्म करने की स्थिति में आ जाने के बाद ये मुस्लिम जिहादी एक भी हिन्दू को जिन्दा छोड़ देंगे ?
हम तो आतंकवाद समर्थक इस सेकुलर गिरोह से यही कहेंगे कि मुस्लिम जिहाद की फितरत को समझो इसके इतिहास को पढ़ो और देशद्रोह के इस आत्मघाती मार्ग को छोड़कर अपनी व अपने देशवासियों की जान बचाने के रास्ते तलाशो वर्ना कश्मीर घाटी की तरह इन मुस्लिम जिहादियों द्वारा मिटा दिये जाओगे । ये वक्त युद्ध का वक्त है आपस में लड़ने के बजाए एकजुट होकर इस मुस्लिम जिहाद को बेनकाब कर इस की जड़ को भारत से हमेशा के लिए खत्म कर दो ।
मुम्बई हमले के दौरान इस जिहादी ने जो कुछ भी कहा वो मुस्लिम जिहादियों की हर योजना को बेनकाब करता है जिसके अनुसार इस जिहाद का एकमात्र मकसद हिन्दुओं को तबाह और बर्बाद कर भारत में इस्लामी राज्य स्थापित करना है । इस जिहादी ने जो कुछ कहा वो नया नहीं है यही बात दबी जवान में हमारे अपने देश में मुसलमानों में छिपे जिहादी और उनके समर्थक कई वर्षों से कह रहे हैं सिर्फ कह ही नहीं रहे हैं कश्मीर में अपनी योजनानुसार हिन्दुओं का नामोनिशान मिटा चुके हैं व भारत के बाकी हिस्सों से मिटाने से लिए लगातार बम्ब विस्फोट कर रहे हैं।
हम तो भारतीय सेना से ये विनती करेंगे कि जिस तरह देश के गृहमन्त्री ने कमाँडो के आने की जानकारी इन चैनलों को दी व जिन चैनलों ने संदिग्ध भूमिका निभाई उसकी गहन जाँच होनी चाहिए साथ ही सेना को इन चैनलों द्वारा देशविरोधी तत्वों को फायदा पहुँचाने की खातिर हिन्दुओं, सुरक्षाबलों व सैनिकों की छवि को पिछले कुछ वर्षों से समय-समय पर किए जा रहे दुष्प्रचार की यथाशीघ्र जाँच करवाकर इन्हें उचित दण्ड दिया जाना चाहिए । ये दुष्प्रचार कई देशविरोधी हिन्दुविरोधी चैनलों पर इतने बड़े हमलों के बाद भी जारी है ।
हम तो उस वक्त दंग रह गए जब एक हिन्दुविरोधी चैनल(एन डी टी वी) के कार्यालय में बैठे विनोद दुआ को अपने रिपोर्टर द्वारा यह बताये जाने पर कि सैनिकों की जीत की खुशी में लोगों ने भारत माता की जय के नारे लगाय तो ये विनोद दुआ भड़क उठे और इस दुष्ट ने भारत माता की जय का विरोध किया।
यह वही चैनल है जो ईरान की इस्लामिक क्राँति का तो समर्थन करता है पर भारत में हिन्दूक्रांती का डटकर विरोध करता है ।
भारत में न्यायालय द्वारा 1993 के मुम्वई बम हमलों के दोशियों को सजा सुनाय जाने के बाद मुसलमानों को देश के विरुद्ध भड़काने की कोशिश करता है ।
कुल मिलाकर ये चैनल हर वक्त भारतीयों को सांप्रदाय और जाति के आधार पर लड़ाने का प्रयत्न करता हुआ नजर आता है। सुरक्षावलों व हिन्दुओं से जुड़े संवेदनशील मामलों को उछालकर उनकी छवी खराव करना इस चैनल की आदत वन गई है इस चैनल के कार्यक्रमों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि इस चैनल को कोई हिन्दुविरोधी-देशविरोधी विदेशी ताकत चला रही है या फिर ये देशविरोधियों के पैसे से चलता है।
वैसे भी ये चैनल देश में देशद्रोही चैनल के रूप मे मशहूर हो चुका है देखो इसका आगे चलकर क्या हश्र होता है इसे देशभक्त हिन्दू जनता ठीक करती है या आने वाली देशभक्त सरकार या फिर भारतीय सेना ?
हम तो आने वाली किसी भी देशभक्त सरकार से इस दुआ जैसे पत्रकारों सहित माजिद मैनन,महेश भट व नबलखा जैसे जिहादियों के समर्थकों का नार्को टैस्ट करवाकर ये किसके बल पर देशविरोधी काम करते हैं, पता लगाया जाए व ऐसे सभी देशविरोधियों को सबक सिखाया जाए ।
हमें तो हैरानी होती है ये देखकर कि भारत के अधिकतर समाचार चैनल व अन्य संचार के साधन देशद्रोह व गद्दारी के रास्ते पर इस हद तक क्यों बढ़ गए कि उनकी गद्दारी हमारे जैसे मीडिया के कट्टर समर्थकों को भी खटकने लगी है । हम देश के जितने भी लोगों से मिले उन में अधिकतर का यही कहना था कि इस मीडिया पर अगर यथाशीघ्र प्रतिबंध न लगाया गया तो ये गली-गली में देशद्रोही और गद्दार पैदा कर देगा ।
हमें यहां यह स्वीकार करने में कोई संकोच नहीं कि देशभक्त मीडिया किसी भी देश व समाज के लिय प्रेरणा स्रोत होता है पर विका हुआ गद्दार देशविरोधी मीडिया तवाही और बरबादी का कारण बनता है।
हमें ईर्ष्या होती है ये देखकर कि दूसरे देशों के चैनल इतने देशभक्त और हमारे यहां गद्दारों का इतना बड़ा टोला जो हर बक्त भारतीय सभ्यता और संस्कृति पर हमला बोले रहता है । हमने 15 वर्ष की आयु में बी.बी.सी सुनना शुरू किया था । हमने लगातार उनके कार्यक्रमों में ईसाईयत व देशभक्ति के प्रति विशेष लगाव पाया । हिन्दू संगठनों के बारे में हर तरह का झूठा प्रचार करना बी.बी.सी कार्यक्रमों की एक विशेष पहचान थी । हमें बुरा नहीं लगता था क्योंकि वो विदेशी थे उनका काम है हम पर हमला करना व अपना गुणगान करना ।
तब हम सोचते थे कि जब हमारा अपना स्वतन्त्र मीडिया होगा तो वो इस हिन्दुविरोधी-भारतविरोधी दुष्प्रचार का जबाब देगा । लेकिन हमारे होश तब उड़ गये जब भारत में स्वतन्त्र मीडिया की जगह विदेशियों का गुलाम विश्वासघाती मीडिया सामने आया जो उस बी.बी.सी से कहीं अधिक हिन्दुविरोधी-देशविरोधी रास्ते पर आगे बढ़ता हुआ सपष्ट दिखाई दे रहा है ।
राजस्थान में एक अनपढ़ हिन्दू महिला के मन्त्री बनने पर ये हिन्दुविरोधी मीडिया हाय तौबा मचाता है पर एक अनपढ़ विदेशी एंटोनिया माइनो मारियो द्वारा सारी सरकार को गुलाम बना लिये जाने पर इस मीडिया को कोई आपति नहीं होती । माना के राजस्थान की महिला अनपढ़ है पर भारतीय तो है देशभक्त तो है अपनी सभ्यता संस्कृति को तो समझती है सलाह भी लेगी तो किसी भारतीय से इस अंग्रेज की तरह तो नहीं है जिसने चुन-चुन कर हिन्दुओं को कांग्रेस के कोर ग्रुप से दूर कर दिया, जो खुद न भारतीय है न भारतीय संस्कृति और सभ्यता को समझती है सलाह भी लेती है तो अपनी विदेशी अंग्रेज मां से या फिर किसी ईसाई से ।
हमें ईर्ष्या होती है ये देखकर कि ईराक का एक देशभक्त मुस्लिम पत्रकार अपने देश को गुलामी की ओर धकेलने वाले ईसाई जार्ज बुश पर अपना विरोध दर्ज करवाने के लिए जूता फैंक देता है और हमारे पत्रकार हमारे देश को गुलाम बनाकर बैठी विदेशी इटालियन ईसाई एंटोनिया माइनो मारियो की हर बक्त चापलूसी करने की होड़ में ज्यादा से ज्यादा हिन्दुविरोधी-देशविरोधी दिखने का प्रयास करते हैं ।
हमें ये देखकर और भी आशचर्य होता है कि भारत के देशभक्त हिन्दूसंगठनों द्वारा इस विदेशी ईसाई एंटोनिया माइनो मारियो का विरोध करने पर देशभक्त हिन्दू संगठनों पर हमला करने वाला ये हिन्दूबिरोधी-देशविरोधी मीडिया इस देशभक्त मुस्लिम पत्रकार का समर्थन करता है ।
यह धन का भूखा मीडिया भरतीय क्रिकेट खिलाड़ियों के साथ अंग्रेज प्रभुत्व वाली आई.सी.सी द्वारा किए जा रहे भेदभाव पर तो आवाज उठाता है पर देश-विदेश में मुसलमानों और ईसाईयों द्वारा हिन्दुओं पर किए जा रहे हमलों का समर्थन करता नजर आता है वजह साफ है बी.सी.सी.आई मालदार है क्रिकेट के मामले में बी.सी.सी.आई से इस मीडिया को बड़ी रकम प्राप्त होती है इसलिय मीडिया इन खिलाड़ियों का पक्ष लेता है।
परन्तु दुनिया में और कोई हिन्दु देश न होने व भारत में हिन्दुओं के आर्थिक साधनों पर हिन्दुओं का अपना कब्जा न होने के कारण हिन्दुओं के अधिकारों या हिन्दुओं पर हो रही ज्यादतियों की बात करने पर हिन्दुओं से कोई पैसा प्राप्त होने की उम्मीद नहीं होती ।जबकि मुस्लिम और ईसाई देश इस्लाम और ईसाईयत के प्रचार प्रसार पर बड़ी रकम इन हिन्दुविरोधी-देशविरोधी चैनलों को देते हैं इसलिए ये देशविरोधी चैनल हर वक्त हिन्दु-धर्म पर हमला बोले रहते हैं, साधु-सन्तों को बदनाम करते हैं,राष्ट्रवाद की जगह अलगाववाद का पक्ष लेते हैं।
मुम्बई पर हमले का एक सबसे भयानक पहलु यह रहा कि हथियारों का इतना बढ़ा भण्डार इतने संवेदनशील भवनों में व इतने सुरक्षित क्षेत्र में इतने दिनों से इक्ट्ठा किया जाता रहा और इसकी उस सरकार को भनक तक न लगी जो निर्दोष सैनिकों साधु-सन्तों हिन्दुओं को जेल में डालकर सन 2025 में होने वाले तख्तापल्ट का पर्दाफाश 17 वर्ष पहले करने का दावा कर रही थी व उन चैनलों के होते हुए जो इस सरकार के हिन्दुओं को बदनाम करने के षड्यन्त्र में कंधे से कंधा मिलाकर इस सम्भावित तख्तापल्ट के प्रमाण जुटाने के दावे कर रोज नई-नई कहानी चला रहे थे ।
स्थिति इसलिए और भी गंभीर हो जाती है कि अगर मीडिया द्वारा चलाये जा रहे समाचार पर भरोसा करें तो शहीद हेमंत करकरे सहित ए टी एस के तीनों अधिकरी एक ही गाड़ी में सवार थे और तीनों गाड़ी के अन्दर बिना लड़े हुए मारे गये क्योंकि मुस्लिम जिहादियों ने गाड़ी पर इतना ताबड़तोड़ हमला किया कि इन्हें जवाबी कार्यवाही का मौका ही नहीं मिला और फिर उसी गाड़ी में सवार होकर मुस्लिम आतंकवादियों ने दौड़ा-दौड़ा कर लोगों को मारा ।
हम मीडिया द्वारा चलाए जा रहे इस समाचार को हरगिज न लिखते यदि इनके साथ घायल जवान को इस समाचार की पुष्टी करते हुए न दिखाया जाता । अगर ये समाचार गलत है तो दोषी चैनल को सजा दी जाए पर अगर सही है तो ये सरकार की जिहादी आतंकवादियों के प्रति लापरवाह सोच को दिखाता है।
मानो सरकार निहत्थे हिन्दुओं को आतंकवादी कहकर प्रचारित करने के बाद ये मानने लग पड़ी हो कि आतंकवादी निहत्थे होते हैं और इन हिन्दुओं की तरह बिना किसी प्रतिरोध के पकड़ में आ जाते हैं या फिर सरकार ये मानने लग पड़ी थी कि ए टी एस के कुछ अधिकारीयों ने उन हिन्दुओं पर बर्बर जुल्म ढाये हैं जो जिहादियों को मारने की कोशिश कर रहे थे इसलिए जिहादी ए टी एस पर हमला नहीं करेंगे और ऐसे भ्रम का शिकार होकर सरकार ने बिना पुख्ता सुरक्षा बन्दोबस्त व योजना के अधिकारीयों को युद्ध स्थल की ओर दौड़ा दिया । जिसके परिणामस्वरूप एक साथ 14 पुलिस जवान मारे गये जबकि सिर्फ एक आतंकवादी को मारा व एक को पकड़ा जा सका ।
अगर ये नुकसान सरकार द्वारा अल्पसंख्यक आतंकवादियों पर बोले तो जिहादियों पर गोली न चलाने के मौखिक आदेश या आधुनिक हथियार व जैकेट न होने की वजह से हुआ तो फिर इसके लिए जिम्मेवार नेताओं को चौराहे पर खड़ा कर गोली मार देनी चाहिए ।
अपना तो स्पष्ट मानना है कि सरकार के मुस्लिम जिहाद समर्थक रूख के कारण ही पुलिस के इतने जवानों को अपनी जान गवानी पड़ी है। जिस तरह शहीद मोहन चन्द शर्मा जी के मुठभेड़ में मारे जाने के बावजूद मुठभेड़ पर देशद्रोही सैकुलर नेताओं द्वारा प्रश्न उठाये गए ऐसे में कोई जवान मुस्लिम आतंकवादियों पर गोली चलाने से पहले सौ बार सोचता । हमारे विचार में पुलिस जवानों के मन में गोली चलाने और न चलाने का ये उधेड़बुन व अत्याधुनिक हथियारों का अभाव भी उनके कत्ल होने का कारण बना ।
आपने देखा है कि जब-जब भी पुलिस के जवानों ने जान-माल की हानि होने से पहले ही जिहादी आतंकवादीयों को मुठभेड़ में मार गिराने में सफलता हासिल की है तब-तब इन गद्दारों के सैकुलर गिरोह ने पुलिस द्वारा की गई कार्यवाही पर शंका प्रकट कर पुलिस के हौसले को तोड़ा है । ये मुठभेड़ चाहे कहीं भी हुई हो ।आपराध समर्थक मीडिया ने मारे जाने वाले अपराधियों के पक्ष में महौल बनाकर पुलिसबलों पर आरोप लगाकर उनका हौसला तोड़ने का अभियान चलाया ।
आपको याद होगा कि किस तरह सोराबुद्दीन मामले में दो प्रखर राष्ट्रभक्त अधिकारियों को इस दुर्दांत आतंकवादी को मार गिराने के बाद प्रताड़ित किया गया । इस जिहादी को आम निर्दोष मुसलमान बताकर पुलिस अधिकारीयों को अपराधी प्रचारित किया गया । आप जरा सोचो कि जिस व्यक्ति के पास दर्जनों हैंडगरनेड व ए के-47 हों उसे अगर निर्दोष कहा जाए तो फिर अपराधी कौन ?
ऐसे महौल में कौन पुलिस वाला जिहादियों को मार कर अपना मान-सम्मान, नौकरी ,परिवार सब दाव पर लगायेगा । हमारे विचार में सरकार का यही दबाव इतने अधिक पुलिस जवानों की मौत का कारण बना !
इस देशविरोधी जिहाद समर्थक महौल को बदलना पड़ेगा । बदलना होगा-बदलना होगा यही नारे बुला रहे थे इन जिहादी आतंकवादियों से दुखी लोग । इसे बदलने का काम सिर्फ देशभक्त जनता ही कर सकती है देशभक्त जनता को चाहिए कि जिहादियों के पक्ष में बोलने वाले नेत्ताओं ,पत्रकारों ,अधिकारियों, लेखकों, समाजिक कार्यकर्ताओं और मीडिया कर्मियों को देखते ही उन पर टूट पड़े मौके पर डांग,पत्थर या बंदूक जो भी हाथ लगे उसी से इनके नाक मुंह तोड़ दे । अगर कुछ भी न मिले तो कम से कम ऐसे गद्दारों के प्रति मुँह कर थूक दे या उन पर अपना जूता ही फैंक दें ताकि इनको अपने किए का एहसास हो सके और ये दोबारा इन कातिल जिहादियों का समर्थन या बचाव करने का दुससाहस न कर सकें !
यहाँ पर एक बात जो चौंका देने वाली है वो ये है कि जब जवान जिहादियों से लोहा ले रहे थे, शहीद हो रहे थे, इस सारी प्रक्रिया में पुलिस प्रमुख हसन गफूर व ए.एन राय कहां थे ?
इनकी भूमिका इसलिए और भी गम्भीर हो जाती है कि इस हमले में शुरू में कम से कम 50 जिहादियों ने हिस्सा लिया जो सेना के आने से पहले कहाँ गायब हो गए ऊपर से ये बचकाना ब्यान कि ये सब बिना स्थानीय सहायता से हुआ । इस तरह के हमलों के किसी भी जानकार से आप पता कर सकते हैं कि इतने बड़े पैमाने पर इतना व्यवस्थित हमला स्थानीय गद्दारों की सहायता के बिना हो ही नहीं सकता ।
हाँ यहां हम इस महाराष्ट्र पुलिस को ये बता देना चाहते हैं कि कुछ चैनलों व समाचारपत्रों द्वारा ये बताया गया था कि ये काम हिन्दू आतंकवादियों का हो सकता है क्योंकि आतंकवादियों ने हाथों में कंगन पहने हुए थे व उनके पास हिन्दू नामों से पहचान पत्र मिले थे ।
उर्दू प्रैस द्वारा लगातार मुस्लिम आतंकवादियों व पाकिस्तान को फायदा पहुंचाने के लिए बार-बार यह झूठ दोहराया जा रहा है कि ये हमला सरकार के सहयोग से हिन्दुओं व उनके संगठनों ने किया है।

हमारे विचार में ये आतंकवादी हमले की जाँच का रूख हिन्दुओं की ओर मोड़ने का बिल्कुल वैसा ही षड्यन्त्र है जैसा इन मुस्लिम जिहादियों ने सिमी के कार्यालय के बाहर बम्ब विस्फोट वाली जगह पर साध्वी जी की बेची हुई बाइक छोड़ कर ( ये बाइक सुनील जोशी जी को बेची गई थी जिनको सिमी के जिहादियों ने शहीद कर दिया था तब जिहादी ये बाइक अपने साथ ले गये होंगे) किया था।
रही बात गुलाम प्रधानमन्त्री के इस दबाब की कि सुरक्षाबलों को अल्पसंख्यकों का विस्वास जीतना जरूरी है तो हम आपको बता दें कि इन अल्पसंख्यकों का विस्वास आप तभी जीत सकते है जब देश में मुस्लिम जिहादियों द्वारा किये गये हर हमले के बाद आप 10-20 हिन्दुओं को जेल में डाल दें या फिर हिन्दुओं को मुस्लिम जिहादियों की जगह आप ही हलाल कर दें ।
आपको लगता है कि हम गलत कह रहे हैं तो आप अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री अब्दुल रहमान अंतुले द्वारा दिया गया वो ब्यान देख लें जिसके अनुसार पुलिस अधिकारियों का कत्ल मुस्लिम जिहादियों ने नहीं हिन्दुओं ने किया है ।(सोचो जरा अगर ये हमला इस तरह खुलम-खुल्ला न होकर चुपके से किया गया होता और करने वाले भागने में सफल हो जोते जैसे अक्सर होता है तो आप हिन्दू संगठनों के पीछे लग जाते कि नहीं क्योंकि सरकारी दबाब भी इसी दिशा में होता)
अन्तुले ने जो कुछ कहा उससे तो लगता है कि मुस्लिम जिहादियों द्वारा किए जाने वाले हमलों व इन हमलों में मारे जाने वाले लोगों की जानकारी अन्तुले व अन्तुले जैसे मुस्लिम आतंकबाद समर्थक इन हिन्दूबिरोधी सैकुलर नेताओं के पास पहले से आ जाती है । हमारे विचार में पुलिस अंतुले को हिरासत में लेकर उसका नार्को टैस्ट करवाकर असानी से ये पता लगा सकती है कि अंतुले का इस मुस्लिम आतंकवादी हमले से क्या सबन्ध था और इन आतंकवादियों के स्थानीय सहयोगी गद्दार कौन-कौन थे । जिस तरह से सरकार ने अंतुले का बचाब किया है उससे एक बात तो सपष्ट हो जाती है कि ईतना बढ़ा आतंकवादी हमला हो जाने के बाबजूद सरकार के मुस्लिम आतंकबाद समर्थक रूख में कोई बदलाब नहीं आया है ।
मेरे प्यारे जवानों हम समझ सकते हैं कि आतंकवाद समर्थक सरकार के होते हुए मुस्लिम आतंकबादियों के विरूद्ध कार्यवाही करना असान नहीं पर कम से कम निर्दोष हिन्दुओं को तो बदनाम न करो । क्यों ऐसा करके आप अपनी व हिन्दुओं की जान को खतरे में डाल रहे हैं ?
इतना सबकुछ होने के बाद भी अगर आपको लगता है कि पकड़े गये हिन्दू निर्दोष क्राँतिकारी देशभक्त नहीं आतंकवादी है तो बिना कोई वक्त गवाये उनको गोली मार दो फाँसी दे दो। परन्तु इस देशद्रोही हिन्दुविरोधी सरकार की कठपुतली बनकर अपनी रक्षक भारतीय सेना व अपनी रीड़ की हड्डी हिन्दू संगठनों को बदनाम कर संसार में मानवता की आधार सनातन भारतीय संस्कृति को नीचा न दिखाओ ।
इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब-जब भी हिन्दू आपस में लड़े हैं तब-तब उन पर जिहादियों ने और जोर से हमला बोला है। ये हमला उसी का तत्कालिक उदाहरण है न सरकार निर्दोष हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए ओछे हथकण्डे अपनाती, न सुरक्षाबलों का ध्यान असली आतंकवादियों से हटता, न जवानों की जान जाती, न सरकार इस बहाने ईसाई विदेशी खुफिया एजेंसी को जाँच के बहाने हिन्दूराष्ट्र भारत में बुला पाती ।
हालांकी हम अमेरिका द्वारा बाकी जगह जिहादियों के विरूद्ध लड़ी जा रही लड़ाई का समर्थन करते हैं पर ये बात भी उतनी ही सत्य है कि तालिबान इसी अमेरिका के सहयोग से आगे बढ़ा है । अमेरिका का एकमात्र उद्देशय अमेरिकी हितों को आगे बढ़ाना है। ईसाईयत का प्रचार-प्रसार इन अमेरिकी हितों का प्रमुख हिस्सा है। सरकार द्वारा एफ वी आई को भारत में काम करने देना देश की सुरक्षा और सम्प्रभुता के लिए गंभीर खतरा है ।
अगर सरकार ये संदेश देने की कोशिश कर रही है कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियां मुस्लिम जिहादी आतंकवाद का मुकाबला करने में आसमर्थ हैं तो हम सरकार को बता देना चाहते हैं कि भारत में बढ़ता जिहादी आंतक इस देशद्रोही जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह की हिन्दुविरोधी नीतियों का दुष्परिणाम है न कि सुरक्षा एजेंसियों की असफलता का ।
क्योंकि इस गिरोह की सरकार ने सत्ता में आने के बाद अल्पसंख्यकों की रक्षा के बहाने न केवल भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को मुस्लिम जिहादियों के विरूद्ध कार्यवाही करने से रोका है बल्कि पोटा जैसे आतंकवाद विरोधी कानून हटाकर व सच्चर कमेटी से मुसलमानों से होने वाले काल्पनिक भेदभाव की रिपोर्ट दिलवाकर जिहादियों के षड्यन्त्रों को आगे बढ़ाने में तकनीकी मदद भी की है ।
रही बात गरीबी की तो कौन नहीं जानता कि आज भी भारत में 40 करोड़ हिन्दू गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। इनमें से 20 करोड़ को तो दो वक्त की रोटी मिलना भी तय नहीं होता । इस सब में ये भ्रम फैलाना कि सिर्फ मुसलमान ही गरीब हैं ।इस सरकार की साँप्रदायिक सोच व नीचता का परिचायक है। ये सरकार की विभाजनकारी हिन्दुविरोधी सोच का स्पष्ट उदाहरण है। क्योंकि देश में जितने हिन्दू पिछड़े हुए हैं, गरीब हैं, आत्महत्या करने को मजबूर हैं उतनी तो मुसलमानों की कुल संख्या नहीं है !
हम सरकार से यही कहेंगे कि विदेशी ईसाई एजैंसियो को भारत में काम करने की छूट देकर सरकार ने न केवल देश को खतरे मे डाला है बल्कि अपने देशविरोधी-हिन्दुविरोधी होने का एक और प्रमाण भारतीय जनता को दे दिया है।
इन ईसाई एजेंसियों को यदि यथाशीघ्र देश के बाहर न किया गया तो जिहादी हमलों के साथ-साथ चर्च प्रेरित हमले व धर्मांतरण भी तेज हो सकता है क्योंकि ये किसी से छुपा हुआ नहीं है कि भारत में ईसाईयों की हिन्दुविरोधी सारी गतिविधियां इन्हीं ईसाई देशों के सहयोग से चल रही हैं और इन ईसाई देशों का मानवाधिकार के बहाने भारत के जिहादी व देशविरोधी गुटों को कहीं न कहीं समर्थन रहा है।
इन ईसाई देशों के सहयोग से व जिहादसमर्थक मुस्लिम देशों की आर्थिक मदद से आज भारत में दर्जनों जाली मानवधिकार संगठन बोले तो जिहादी आतंकवादी दानवाधिकार संगठन , सैंकड़ों देशविरोधी एन जी ओ और हजारों गद्दार समाजिक कार्यकर्त्ता व मीडिया कर्मी और दर्जनों हिन्दू विरोधी चैनल जगह-जगह हिन्दुविरोधी देशतोड़क कामों में लगे हुए हैं ।
सरकार को अगर कुछ सीखना है तो अमेरिकीयों से अपनी सभ्यता और संस्कृति के प्रति प्यार और समर्पण सीखे । अपनों की जान जाने पर किस तरह प्रतिक्रिया करते हैं वो सीखे । उनसे देशभक्ति सीखे । देश की रक्षा कैसे करते हैं वो सीखे । अगर सीखना ही है तो आतंकवादी विरोधी कानून बनाना सीखे ।
पर ये सरकार ये सब खाक सीखेगी ये गद्दारों की वो सरकार है जो देशभक्तों के मरने पर खुशियां मनाती है भारतीयों को मारने वाले आतंकवादियों के विरूद्ध काम करने वाले हिन्दुओं को जेल में डालती है ।उनके कपड़े उतरवाने की धमकी देती है, उनकी जूतों से पिटाई करवाती है और देशभक्तों का कत्ल करने वालों को अपना भाई बताती है।
आज अमेरिका दुनिया को जितना मर्जी धर्मनिर्पेक्षता का पाठ पढ़ाये पर खुद अमेरिका आज भी एक ईसाई देश है वहां भी अन्य संप्रदायों के लोग रहते हैं। पर क्या कभी अमेरिका ने ईसाईयों को अपने मूल अधिकारों से वंचित कर अन्य संप्रदायों को विशेषाधिकार दिए हैं ? जैसे भारत में हिन्दुओं को मूल अधिकारों से वंचित कर मुसलमानों और ईसाईयों को विशेषाधिकार दिए जा रहे हैं ।
भारत का सारा मीडिया अमेरिका में ओबामा की जीत पर जश्न मना रहा था पर जिस बात को सीखने की जरूरत है वो ये है कि ओबामा ने जीतने के एकदम बाद सबसे पहले चर्च का धन्यावाद किया । अमेरिकी राष्ट्रपति बाईबल पर हाथ रखकर शपथ ग्रहण करता है।
आज भी अमेरिकी राष्ट्रपति का पहला कर्तव्य चर्च की रक्षा करना है । परन्तु भारत में अगर कोई प्रधानमन्त्री या व्यक्ति मन्दिर की बात करता है तो भारत के जिहादी आतंकवाद समर्थक धर्मनिर्पेक्षतावादियों के पेट में दर्द पड़ जाता है उसमें सांप्रदायिकता नजर आती है ।
पिछले दिनों अमेरिका में चर्चों में बच्चों के यौन शोषण(ऐसा करने वालों को इन्सान कहना भी पाप है) की बात आई। क्या वहाँ के मीडिया ने ईसाई धर्म-गुरूओं के बारे में उस तरह का गाली-गलौच किया जितना भारत का मीडिया उन हिन्दूधर्म गुरूओं के बारे में करता रहता है जो हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों को उजागर करते हैं व भारतीय सभ्यता संस्कृति का प्रचार प्रसार करने में लगे हैं ।
कोई भी देश तब तक महान नहीं बन सकता जब तक वो अपनी सभ्यता संस्कृति का सम्मान नहीं करता। अगर आज अमेरिका दुनिया का सबसे ताकतवर देश है तो इसी वजह से कि उसने अपनी सभ्यता और संस्कृति पर आक्रमण करने वाले को मौत के घाट उतार कर ही दम लिया है ।
आज वक्त आ गया है कि हम भारतीय आत्मघाती शाँति की बात करना छोड़ कर भारतीय सभ्यता और संस्कृति के विरोधियों पर सीधा हमला बोलने की आदत डालें और उसे मौत के घाट उतार कर दम लें ।