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मोदीराज लाओ

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भारत बचाओ

शुक्रवार, 17 मई 2013

शुद्ध सात्विक प्रेम(TRUE LOVE)


शुद्ध सात्विक प्रेम अपने कार्य का आधार है। दिव्य ऐसे प्रेम में ईश्वर स्वयं साकार है।। प्रेम जो केवल समर्पण भाव को ही जनता है, उसमें ही स्वयं की ध्नयता केवल मानता है, राष्ट्रभर में स्नेह भरना साधना का सार है।। शुद्ध सात्विक प्रेम अपने कार्य का आधार है। भारत जननी ने किया ,वात्सल्य से पालन हमारा, है कृपा इसकी मिला यह प्राण तन जीवन हमारा भक्ति से हम हों समर्पित ,बस यही अधिकार है।। शुद्ध सात्विक प्रेम अपने कार्य का आधार है। जाति,भाषा, प्रान्त आदि वर्ग भेदों को मिटाने, दूर अर्थाभाव करने, तम अविद्या का मिटाने, नित्य ज्योतिर्मय हमारा, ह्रदय स्नेहागार है।। शुद्ध सात्विक प्रेम अपने कार्य का आधार है। कोटि आँखों से निरन्तर , आज आँसू वह रहे हैं, आज अगणित वन्धु अनगिन यातनायें सह रहे हैं. दुख हरें सुख दें सभी को, बस यही अधिकार है ।। शुद्ध सात्विक प्रेम अपने कार्य का आधार है।

2 टिप्‍पणियां:

sanjeev Pundir ने कहा…

Bahut Sunder.

तुषार राज रस्तोगी ने कहा…

जय हो | बहुत सुन्दर लिखा |