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मोदीराज लाओ

मोदीराज लाओ
भारत बचाओ

गुरुवार, 22 दिसंबर 2011

मुसलिम आरक्षण के विना आप लोकपाल के वारे में सोच भी कैसे सकते हैं?

आज हमारे बहुत से भ्रष्टाचार विरोधी भारतीय सिर पर हाथ रखकर रो रहे हैं कि उन्होंने किससे पंगा ले लिया है। कुमार विस्वास जी की स्थिति को देखकर तो ऐसा ही लगता है।इन भ्र्ष्टाचार विरोधियों ने वो ख्वाब देखा है जिसकी कल्पना आज तक किसी ने भी नहीं की थी। इन भ्रष्टाचार विरोधियों ने सोचा कि आज तक कांग्रेस द्वारा जाति-सांप्रदाय- भाषा-क्षेत्र-के आधार विभाजित भारतीयों को वो  भ्रष्टाचार के मुद्दे पर एक साथ लाकर पहले मुगलों, फिर अंग्रेजों और  अब काँग्रेस द्वारा संचालित फूट डालो और राज करो के षडयन्त्र को हमेशा के लिए खत्म कर देंगे।
लेकिन आज काँग्रेस ने  फूट डालो और राज करो का वो दांव खेला जिसका इन भ्रष्टाचारविरोधियों के पास अभी तक कोई तोड़ नहीं दिखता।
जो मिडीया कल तक लोकपाल पर चर्चा को वेचैन था वही मिडीया आज इस्लामिक आरक्षण पर जमकर बहस करवा रहा है क्योंकि सरकार ने काले धन से संचालित मिडीया को भी जोकपाल विल की परिधि में रखा है। मिडीया की इस दुखती रग को छूने का जिम्मा एंटोनिया ने सौंपा था लालू प्रसाद यादब को ।जिसे लालू ने बखूबी निभाया भी।
यही नहीं लालू ने सब भ्रष्ट सांसदों का समर्थन उन्हें व सब लुटेरों की सरगना एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो को होने का दाबा भी किया।
कुल मिलाकर आज जब भारत में ISI  +KGB + CIA के ऐजंट मिलकर सरकार चला रहे हों तो हमारी खोपड़ी में ये नहीं बैठता कि कोई भी समझदार व्यक्ति ऐसी भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी सरकार से भारत हित की उम्मीद भला कैसे कर सकता है?
इन भ्रष्टाचारविरोधियों के नेताओं स्वामी जी व अन्ना जी को सोचना चाहिए कि इन्होंने किस आधार पर भ्रष्टाचार व गद्दारी की जननी कांग्रेस से ऐसी उम्मीद कर डाली जो अन्तोत्वगत्व कांग्रेस के ही बिनाश का कारण बन सकती है।
क्या अन्ना जी व स्वामी जी को नहीं पता कि आज के प्रधानमन्त्री वही कर रहे हैं जो उन्हें बिदेशी विषकन्या एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो से आदेश मिल रहे हैं।
चलो मान लेते हैं कि ये सरकार  KGB + CIA की बातें ताकतबर देशों के दबाब में मान रही है लेकिन अगर ये सरकार गद्दारों की नहीं तो फिर ये पाकिस्तान जैसे बिफल इस्लामिक रिपबलिक की ऐजेंसी ISI के इसारे पर क्यों काम कर रही है?
अभी हाल ही में अमेरिका में पकड़े गए ISI सरगना गुलामनबी फई ने अमेरीकी कोर्ट में इस सरकार के कई मन्त्रियों के साथ सबन्ध होने की बात कबूली है। यही नही आरेप हरीश खरे पर भी लगे हैं हरीश खरे प्रधानमन्त्री के मिडीया सलाहकार हैं। वेशक हरीश खरे ने ISI के साथ किसी भी तरह के सबन्ध होने से मना किया है । बैसे हम भी अभी तक हरीश खरे के विरूद्ध कोई प्रमाण नहीं ढूंढ पाए हैं लेकिन अगर FBI की जांच में हरीश खरे का नाम आया है तो इसे नकारा भी नहीं जा सकता ।
हरीश खरे के निजी तौर पर सबन्ध हों या न हों इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्यों वो जिस प्रधानमन्त्री के मिडीया सलाहकार हैं वो ही भारतविरोधी ISI ऐजेंट की तरह काम कर रहा है।
ISI के आदेश पर ISI ऐजेंट राजेन्द्र सच्चर को सचर कमेटी का अध्यक्ष बनाकर ISI के देशविरोधी-हिन्दूविरोधी षडयन्त्रों को वैधानिक दर्जा दिलवाने के लिए रिपोर्ट तैयार करवाना, (अधिक जानकारी के लिए यहां पढ़ें)  ISI के आदेश पर दलीप पांडगौंकर+राधा कुमार जैसे ISI ऐजेंटों को कशमीर पर ISI के षडयन्त्रों को बैधानिक दर्जा दिलवाने के लिए कमेटी का सदस्य बनाना, शर्म अलसेख में पाकिस्तान के साथ एक ऐसे घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करना जिसके अनुसार भारत को पाकिस्तान के बलूचीस्तान में आतंकवाद के लिए दोषी ठहराया गया ,भारत के संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का,मुसलिम बहुल जिलों के विकाश की बात कर मुसलमानों को अपनी जनसंख्य बढ़ाने को उकसाना,सुरक्षाबलों को आतंकवादी घटना के बाद इस्लामिक आतंकवादियों के विरूद्ध कार्यवाही न करने को कहना,पाठशाला में प्रवेश लेने पर मिलने वाली छात्रवृति को सिर्फ गैर हिन्दूओं तक सीमित करना यहां तक कि SC,ST,OBC के बच्चों को भी वन्चित करना, हिथरो हबाई अडडे पर बम धमाका करने वाले इस्लामिक आतंकवादी के पकड़े जाने पर प्रधानमन्त्री को नींद नहीं आना और रामलीला मैदान में निर्दोष देशभक्तों पर हमला करवाना व उसे जायज ठहराना, CBI का दुरूपयोग कर इसरत जहां व सोराबुद्दीन जैसे दुर्दांत आतंकवादियों को मार गिराने वाले जवानों को जेलों में ढलवाना , सांप्रदायिक हिंसा विल के माध्यम से मुसलमानों व मुसलिम आतंकवादियों के हर अपराध के लिए हिन्दूओं को दोषी ठहराने का षडयन्त्र रचना,सेना को सांप्रदायिक आधार पर बांटने का षडयन्त्र रचना जैसे कुकर्म कोई देशभक्त भारतीय तो कर नहीं सकता न ही करवा सकता है ऐसे भारतविरोधी-हिन्दूविरोधी काम तो भारत का शत्रु यानी ISI ऐजेंट ही कर/करवा सकता है। (हम अच्छी तरह जानते हैं कि मनमोहन में इतना साहस नहीं कि वो देश से इतनी बढ़ी गद्दारी करे जिसके परिणामस्वारूप देश का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है लेकिन प्रधानमन्त्री बने रहने के लालच में एक विदेशी विषकन्या के इसारे पर भारत का सर्वनाश करने के षडयन्त्र रचने के अपराध से इस भारतविरोधी को मुक्त नहीं किया जा सकता।)
अब आप ही बताओ ऐसे हालात में  मुसलिम आरक्षण के विना आप लोकपाल के वारे में सोच भी कैसे सकते हैं?

1 टिप्पणी:

दीर्घतमा ने कहा…

कोई भी गधिबदी देश भक्त हो ही नहीं सकता अन्ना टीम के ऊपर विस्वास करना देश घटी होगा आखिर प्रशांत भूषण को देख ही लिया ऐसे ही सभी होगे.