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मोदीराज लाओ

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भारत बचाओ

मंगलवार, 2 नवंबर 2010

क्या आप भी मानते हैं कि RSS कायरों का संगठन है ?

अयोध्या में हिन्दूमहासभा ने RSS पर कायरों का संगठन होने का आरोप लगाने के साथ-साथ यह भी कहा कि संघ आतंकवाद कैसे फैला सकता है ।

हमारा मानना है कि संघ के वारे में जो छवि हिन्दूविरोधी-देशविरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह द्वारा बनाई जाती है उससे प्रभावित होकर कई उग्र हिन्दू संघ में प्रवेश कर जाते हैं जब वो संघ के अन्दर काम करते हैं तो स्थिति विलकुल विपरीत मिलती है। इस स्थिति में कोई भी उग्र हिन्दू अपना आपा खो सकता है( लगता है कि ये आरोप ऐसे ही हिन्दू ने लगाया है) । क्योंकि संघ के वारे में मिडीया में सुनने से लगता है कि संघ क्रांतिकारी संगठन है लेकिन बास्तब में संघ का क्रांति से दूर-दूर तक कोई बास्ता नहीं ।संघ के संविधान की पहली पंक्ति में लिखा है कि संघ समाजिक और सांसकृतिक संगठन है जबकि दूसरी पंक्ति में लिखा है है कि संघ में हिसंक या देशविरोधी प्रवृति से ग्रर्सित व्यक्ति के लिए कोई जगह नहीं। बस ये जो हिंसक शब्द है यही सारी समस्या की जड़ है।

संघ में हमारा प्रवेश तब हुआ जब हम गणित में सनात्कोतर पढ़ाइ के दौरान हास्टल में बांमपंथी हिंसा के सिकार बने। इस बामपंथी हमले का सामना करने में संघ ने हमारा साथ दिया।

हमें लगा कि हिन्दूक्रांति के काम को आगे बढ़ाने के लिए संघ हमें सहायता प्रदान करेगा । लेकिन धीरे-धीरे हमें लगा कि मुसलिम आतंकवादियों की हिंसा की प्रतिक्रियास्वारूप हमारे मन में मुसलमानों के प्रति जो आग भरी थी वो शांत होने लगी। हमने धैर्य बनाए रखा लेकिन अपने हर सम्मभव प्रयत्न के बाबजूद हम संघ के अधिकारियों को अपनी प्रतिक्रियावादी हिंसा की निती के वारे में विश्वास में न ले सके ।

अन्त में हमने संघ के अधिकारियों के सामने सीधी बात ऱखी कि अगर कशमीरघाटी या किसी और मुसलिम बहुल क्षेत्र में या फिर मुसलिम आतंकवादी हमले में अगर 10 हिन्दू मारे जाते हैं तो हमें 20 मुसलमानों का कत्ल सुनिश्चित करना चाहिए। बस फिर क्या था संघ के एक अधिकारी ने हमें पूछा कि ये सब कब रूकेगा हमने कहा कि हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के बाद। फिर अधिकारी ने आगे प्रश्न किया कि क्या गारंटी है कि हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के बाद जिन को कत्ल की आदत पड़ जाएगी वो खुद को हिंसा से रोकने में समर्थ होंगे । इस बात को समझाने के लिए उन्होंने पाकिस्तान व अफगानीस्थान में रहने वाले मुसलमानों का उधाहरण दिया। उन्होंने हमें समझाने की कोशिश की कि किस तरह उन मुसलमानों ने हिन्दूओं के खत्म हो जाने के बाद मुसलमानों पर ही हमले शुरू किए जो आज तक जारी हैं। आगे हमें उस अधिकारी ने समझाने की कोशिश की, कि किस तरह ये मुसलिम भी अपने ही भाई हैं। इनका और हमारा खून एक है।

इस तरह हमें समझ आ गया कि RSS में हमारी दाल नहीं गलने वाली फिर कुछ समय के लिए हमने किसी को ये बात नहीं बताई लेकिन धीरे-धीरे हमें एहसास हुआ कि RSS ने अपने आप ही हमें बाहर का रास्ता दिखा दिया ।

हालांकि आपको हैरानी होगी कि किसी ने हमें संघ से बाहर निकले को नहीं कहा न ही इस बात की सूचना दी कि हमें संघ से बाहर कर दिया गया है। हमें जिला कार्यकारणी से निकालकर संघ की जिम्मेवारी से मुक्त कर दिया गया वो भी हमें विना यह ऐहसास करवाए कि अब हम संघ के सदस्य नहीं हैं।

इसके बाद हमने अन्य संगठनों से सम्पर्क करने की कोशिश की जो आज तक जारी है। ऐसा नहीं कि संघ के कार्यों पर हमारा विस्वास नहीं लेकिन हमें लगता है कि संघ की शांतिप्रिय निती आज के हालात में हिन्दूहित-देशहित की रक्षा नहीं कर सकती। आज जरूरत है ईंट का जबाब पत्तथर से देने की क्योंकि राक्षसों का मुकावला विना राक्षस बने नहीं किया जा सकता। वेशक संघ क्रांतिकारी संगठन नहीं फिर भी हम मानते हैं कि संघ कायरों का संगठन कभी नहीं कहला सकता।

धारा के विपरीत जिस तरह संघ राष्ट्रवाद के साथ चट्टान की तरह खड़ा है वो साहस गद्दारों के राज में कोई कायर नहीं दिखा सकता।वेशक संघ की रितीनिती से हम सहमत नहीं फिर भई हमें लगता है कि संघ कार्य भी अपने समाज के अन्दर जरूरी है।

हिन्दू महासभा को समझना चाहिए कि संघ पर हमला करने के बजाए उसे खुद आगे बढ़कर जेलों में बन्द 30 निर्दोष हिन्दूओं की रक्षा के लिए कदम उठाने चाहिए ताकि हमारे जैसे उग्र हिन्दू ,हिन्दूमहसभा के बैनर तले देशविरोधी हिन्दू विरोधी धर्मनिर्पेक्ष गिरोह के हंमलों का जबाब उसी की भाषा में उसे दे सकें।

4 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

नहीं जी!
यह तो देशप्रेमियों का संगठन है!

आनन्‍द पाण्‍डेय ने कहा…

भइया संघ को बदनाम करने की पुरजोर कोशिश की जा रही है
संघ की एक ही गलती रही शायद कि वो सबको अपना भाई मान बैठा
पर आज उसके अपने ही उस पर कीचड उछाल रहे हैं ।
खैर
मुद्दई लाख बुरा चाहे तो क्‍या होता है
वही होता है जो किस्‍मत में लिखा होता है ।।

Himwant ने कहा…

राजीव गांधी की हत्या संभवतः चर्च के षडयंत्र के तहत हुई थी। पिता राजीव के अन्दर हिन्दु संस्कार विद्यमान थे। पिता जिवित रहते तो वे राहुल को हिन्दु संस्कार अवश्य देते। लेकिन राजिव की हत्या के बाद राहुल तथा प्रियंका को सारे संस्कार अपनी ईसाई माता से मिले। प्रियंका विवाह भी एक ईसाई युवक से कराया गया।

अब हमे समझना होगा कि चर्च का मानस क्या चाहता है। जो चर्च चाहेगा वही राहुल करेगा। चर्च चाहता है भारत मे हिन्दु और मुसलमान झगडते रहे। उन्होने बडे सोच समझ कर यह बयान दिया है रा.स.स. तो सिमी जैसा है। ऐसा कह कर उसने एक तीर से दो शिकार किए है।

संघ बुरा नही है। संगठन बुरा नही होता है - व्यक्ति बुरा हो सकता है। मुझे विश्वास है की संघ के अन्दर भी कुछ लोग अवश्य है जो चर्च योजना पर काम करते है।

हिन्दु वीर बढे चलो हम तुम्हारे साथ है.....

bhagvatprasad mishra ने कहा…

मेरे भाई हिन्दुस्तान मे राजनीति के हमाम मे सब नंगे है।
सारी पार्टियां चोर चोर मोसेरे भाई हैं ये पब्लिक को दिखाने के
लिये एक दूसरे के विरोधी हैं। देश मे जितने भी संगठन या पार्टी है सबका मकसद सत्ता है

बहिरा बांटे रेवड़ी अंधरा चीन्ह चीन्ह के देय

ऐसी कौन सी पार्टी है या ऐसा कौन सा नेता है जो भ्रष्ट नही
है आज कल तो भ्रष्टाचार की होड़ मे संत महत्मा भी कूद पड़े
हैं। राजनीती मे धर्म और धर्म मे राजनीती घुस कर खिचड़ी बन
गयी है। मेन मकसद है पैसा कैसे कमायें करोंड़ो रुपये फूंक कर गद्दी पायी अगले चुनाव मे लगाना है।

अपने भारत मे गुलामी का सैकड़ों साल पुराना जींस फुल फॉम मे है हम और आप लोग ही उसे जिंन्दा रखे हुऐ है जैसे हर नेता हर पार्टी हर संगठन के पीछे भारी भीड़ है। नेता. पार्टी; संगठन; चाहे जो करवा दे गुलाम मरने मारने पर उतारु हो जाते हैं। जितना मंा बाप की इज्जत नही करते अपने बुजुर्गो का कहना नही मानते उससे ज्यादा नेताओं, पार्टी,संगठनो का कहना मानते है इनके कहने पर कुछ भी करने को तैयार है। हमारे पूर्वजो ने मुगलो फिर अंग्रेजों की गुलामी की आज हम नेता पार्टी संगठनो की गुलामी कर रहे है।
जिस दिन ये गुलामी का जींस मर जायेगा उस दिन ये नेता और अपना भारत सुधर जायेगा।
अब देखिये यदि मै किसी पार्टी से जुड़ा हूं तो विरोधी पार्टी के उूपर खीज उतारुंगा क्योकि वो सत्ता मे है जिस दिन मेरी पार्टी सत्ता मे आजायेगी मुझे अपनी पार्टी जिससे मै आस्था से जुड़ा हूं उसकी गलती पर मजबूरी है मै आंखें बंद कर लूंगा।
क्योकि मे गुलामी की जंजीरों से जकड़ा हूं कही न कहीं मेरा स्वार्थ भी जुड़ा है।

भाई खीज कर अपने खून को मत जलाओ कमजोर हो जाओगे। चिल्लाते चिल्लाते कई उूपर चले गये नेताओं को कोई फर्क नही पड़ता मोटी खाल के होते है नेताओ की जात अलग होती है। इनके इंसान का दिल नही रहता और न ये इंसान रह जाते हैं

एक लेख पढ़ा था

अगर दुनिया को बदलना है तो खुद को बदल डालो दुनिया अपने आप बदल जायेगी।
इस जींस को मारने की शुरुआत हमे और आपको करनी पड़ेगी।
फालतू मे अपनी एनर्जी नंगा करने मे वेस्ट कर रहे हैं।
आसमान मे थूंकोगे थूक वापस मंुह पे गिरेगा
पहले हम इस गुलामी से बाहर निकले और फिर दूसरो को निकालने मे ताकत लगाये। हम अपनी ताकत नेताओ या पार्टी या संगठन मे बर्बाद कर देते है

अच्छे प्रयास सार्थक होते है