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मोदीराज लाओ

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भारत बचाओ

मंगलवार, 21 सितंबर 2010

जामा मसजिद क्षेत्र में किए गय हमले के निशाने पर कौन था ?

19-09-10 को एकवार फिर दिल्ली पर हमला किया गया। हमला होने के कुछ ही क्षण बाद खुद को ISI का ऐजेंट बताने वाले खानदान ने से सबन्धित इमाम ने सीघे –सीधे इस हमले का आरोप हिन्दूओं के सिर मढ़ने की कोशिश की।

इस ISI का ऐजेंट का कहना था कि क्योंकि इस हमले के निशाने पर जामा मसजिद थी इसलिए ये हमला इंडियन मुझाहीद्दीन(IM) का नहीं हो सकता---मतलब इंडियन मुझाहीद्दीन(IM) का काम सिर्फ हिन्दूओं और मन्दिरों पर हमले करना है न कि मस्जिदों पर।

ISI का ऐजेंट की इस बात को मान लिया जाए कि मुसलिम आतंकवादी मस्जिद पर हमला नहीं कर सकते तब तो ये मानना पड़ेगा कि आज तक पाकिस्तान में मस्जिदों पर जितने भी हमले हुए वो मुसलिम जिहादी आतंकवादियों ने नहीं किए। जबकि हर तर्कशील वयक्ति इस बात को अच्छी तरह जानता है कि जब कुता पागल हो जाता है फिर वो अपना पराया नहीं देखता। खैर ISI के ऐजेंट इमाम को ये बात समझाना गधे के सिर पर सींग उगाने समान है।

अब हम बात करते हैं इस आतंकवादी हमले के असली निशाने की। इस जिहादी आतंकवादी हमले का असली निशाना थे जामा मसजिद के चारों ओर तैनात सुरक्षाबलों के जवान। वो जवान जो आतंकवादियों से जामा मस्जिद की रक्षा के लिए तैनात किए गए हैं लेकिन सरकार को कौन जमझाए कि आतंकवादियों व उनके समर्थकों को आतंकवादियों से कोई खतरा नहीं होता। जो जवान इनकी रक्षा के लए खड़े किए गए हैं वही जवान इन आतंकवादियों को जामा मसजिद को अपनी पनाहगाह के तौर पर प्रयोग करने में बाधा प्रतीत हो रहे हैं। इसीलिए कार बम के निशाने पर पास की पुलिस चौकी थी न कि जामा मसजिद। इसी तरह गोली-वारी के निशाने पर भी गेट नम्वर 3 पर तैनात सुरक्षा कर्मी थे ये तो सौभाग्य से सैलानियों की बस बीच में आ गई।

आतंकवादियों को उसी वक्त पकड़ा जा सकता था यदि पूरे जामा मसजिद क्षेत्र का तलासी अभियान चलाया जा सकता तो। पर यदि ऐसे किया जाता तो कांग्रेस का बोट-बैंक खतरे में पड़ जाता इसीलिए इस जिहादी आतंकवादी हमले को कांग्रेस ने सिरे से नकारने की कोशिस की।

ऐसा नहीं कि इंडियन मुझाहीद्दीन(IM) का ये हमला कोई पहला हमला हो इससे पहले भी इंडियन मुझाहीद्दीन(IM) भारत पर कई हमलों को अंजाम दे चुका है।
http://www.mid-day.com/news/2010/sep/200910-Delhi-Indian-Mujahideen-terrorist-Jama-Masjid-Attack.htm
लैफ्टीनैंट कर्नल पुरोहित ने INTELIGENCE OFFICER की DUTY का निर्वाह करते हुए इसी इंडियन मुझाहीद्दीन(IM) से जुड़े 300 आतंकवादियों की सूची महाराष्ट्र सरकार को देने की गलती की थी । परिणाम सबके सामने हैं इंडियन मुझाहीद्दीन(IM) के आतंकवादी तो खुलेआम अपनी कार्यवाहियों को अंजाम दे रहे हैं पर देश के बफादार सैनिक को जेल में डालकर प्रताड़ित किया जा रहा है।

इंडियन मुझाहीद्दीन(IM) को जिस तरह का सरंक्षण देने की गलती कांग्रेस ने की है न जाने उसकी कितनी कीमत देश को चुकानी पड़ेगी पर कांग्रेस को इससे क्या फर्क पड़ता है इसकी आका तो वोरिया-विसतर उठाकर इटली भाग जाएगी पर भारतीय कहां जायेंगे?

हम तो सरकार से यही कह सकते हैं कि विना कोई समय गंवाए आतंकवादियों के प्रति हमदर्दी छोड़कर उनसे कढ़ाई से निपटे वरना कहीं एसा न हो कि ये काम खुद देश के नागरिकतों को अंजाम देना पड़े फिर न आतंकवादी बचेंगे न इन्हें पनाह व संरक्षण देने वाले । सबके सब मौत के घट उतार दिए जायेंगे।

2 टिप्‍पणियां:

दीर्घतमा ने कहा…

जामा मस्जिद क़े पास हमला यह बताने की आवस्यकता नहीं है कि हमलावर कौन है और कहा छिपा है ,जब बुखारी ने कहा कि सबसे बड़ा आई.एस.आई. क़ा एजेंट मै हू तो क्या हुआ ? ये सब कामन वेल्थ खेल में दहसत फैलाना मात्र उद्देश्य. लेकिन क्यों पता करना यदि पकड़ा गया तो क्या होगा केवल सरकारी पैसा ही खर्च होगा उसे मुर्ग-मुसल्लम और सुख सुबिधाये उपलब्ध करायी जाएगी .वास्तव में इसके बिरुद्ध देश को खड़ा होना चाहिए आतंकबादी तभी ठीक होगे.

बेनामी ने कहा…

ghatiya maansikta se bhara hua lekh......