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मोदीराज लाओ

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भारत बचाओ

बुधवार, 18 अगस्त 2010

समरसता के प्रेरणास्त्रोत हमारे डा. भीमराव अम्बेडकर जी----2




WHO ARE SHUDRAS में अम्बेडकर जी ने कहा जिस हिन्दू धर्म का ज्ञान इतना श्रेष्ठ है कि उस ज्ञान के प्रभाव से चींटी, सांप, तुलसी मतलब छोटे से चोटे जीव से लेकर पेड़-पौधों तक की पूजा करने वाला हिन्दू, हिन्दू को न छुए ऐसा कैसे हो सकता है ?



उन्होंने सपष्ट कहा कि समस्या धर्म की नहीं समस्या मानसिकता की है खासकर स्वर्ण मानसिकता जो गुलामी के प्रभाव के कारण विकृत हो चुकी है जिसे बदलने की जरूरत है । यदि स्वर्ण मानसिकता बदलेगी तो हिन्दू समाज बदलेगा ।


उन्होंने सत्याग्रह का शस्त्र उठाया। भगवद गीता को हथियार बनाया।तालाब के पानी हेतु---महाड़ सत्यग्रह ।नासिक के कालराम मन्दिर में प्रवेश हेतु सत्याग्रह किया लाठियां खाईं।


1935 में रूढ़ीबादिता व भ्रम के शिकार लोगों को Shock TREATMENT देते हुए कहा सुधरना है तो सुधर जाओ वरना मैं धर्मांतरण कर लूंगा। जबकि वासत्विकता यह है कि उन्होंने कभी धर्मांतरण किया ही नहीं। उनके सारे सहित्य में हिन्दू राष्ट्र शब्द का प्रयोग बार-बार हुआ है उन्होंने जातिविहीन समाज रचना, राष्ट्र संगठन सब पर लिखा है।


1947 में मुसलिम अलगावबाद के परिणास्वारूप देश का विभाजन हो गया । जिस पर अम्बेडकर जी ने सपष्ट कहा कि अब जबकि मुसलमानों को अलग देश दे दिया गया है तो हमें पाकिस्तान से सब हिन्दूओं को भारत ले आना चाहिए व भारत से सब मुसलमानों को पाकिस्तान भेज देना चाहिए ताकि मुसलमान अपने घर पाकिस्तान में सुख से रहें और हिन्दू अपने घर भारत में सुख से रहें। आज चारों ओर फैले मुसलिम आतंकवाद को देखकर आप खुद समझ सकते हैं कि डा. अम्मवेडकर जी कितने दूरदर्शी थे।


विभाजन के बाद Hindu Code Bill अम्बेडकर जी की हिन्दू समाज को सबसे बढ़ी देन है । इसी में अम्बेडकर जी ने ‘हिन्दू किसे कहते हैं, इसकी व्याख्या की जिसमें सपष्ट कहा गया कि विदेशी धारणाओं इस्लाम और इसाईयत को छोड़कर भारत में रहने वाले (हिन्दू-सिख-बौद्ध-जैन----इत्यादि) सब लोग हिन्दू हैं।

                                                                                             क्रमश:


2 टिप्‍पणियां:

SANJEEV RANA ने कहा…

badhiya .
m fir se blog jagat me laut aaya hun ji.

सुनील दत्त ने कहा…

संजीब जी आपका हार्दिक मन से स्वागत है।