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मोदीराज लाओ

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भारत बचाओ

मंगलवार, 22 जून 2010

इटालियन अंग्रेज एंटोनिया के गुलाम मनमोहन खान की कांग्रेसी सरकार को मुसलिम आतंकवादियों पर भारतीय सेना से अधिक भरोसा?

जब हमने अपनी पुस्तक नकली धर्मनिर्पेक्षता लिखी थी तो हमें अन्दाजा नहीं था कि कांग्रेस खुलरकर इस तरह आतंकवादियों के समर्थन में आ जाएगी।


आए दिन ऐसे सपष्ट प्रमाण मिल रहे हैं कि विदेशी अंग्रेज एंटोनिया के गुलाम मनमोहनखान की सरकार को आतंकवादियों पर भारतीय सेना से जयादा भरोसा है।


हाल ही में सेना ने मनमोहनखान के उपर आतमघाती जिहादी आतंकवादी हमले की चिन्ता जताई थी जिसे केन्द्र सरकार ने सिरे से नकार दिया।





जब केन्द्र सरकार आतकंकवादियों को भारतीय नागरिकों विशेषकर हिन्दूओं व सैनिकों को मारने की खूली छूट दे रही है तो भला आतंकवादी गद्दार सरकार पर हमला क्यों करेंगे?


इन गद्दारों की सुरक्षा में लगे सैनिकों को चाहिए कि आतंकवादियों के हमले के दौरान इन्हें आतंकवादियों के रहमोकर्म पर छोड़कर दूर से नजारा देखें।
आओ देखो किस तरह सैनिकों पर पर मुसलिम आतंकवादियों के हमले बढ़ते जा रहे हैं जिसमें शहीद होने वाले सैनिकों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है।




शायद इन्हीं हमलों से उतसाहित सरकार आतंकवादियों को और खुला हाथ देकर देश को सोवियत संघ (USSR) की तर्ज पर खण्ड-खण्ड करने की योजना को आगे बढ़ाने के लिए सेना को और वेढ़ियों में जकड़ने की तैयारी कर रही है।



सरकार की ऐसी आतंकवाद समर्थक नितीयों से उतसाहित मुसलिम आतंकवादी अब तो अपने हथियारों के कारखाने भी भरात में लगाने की योजना बना रहे हैं।


आपको यहां बताते चलें कि जिस तरह गद्दारों की ये कांग्रेस सरकार व सेकुलर गिरोह शासित राज्यों की सरकारें लगातार सुरक्षाबलों पर दबाब बनाए हुए हैं उससे आतंकवादियों के हमलों का जबबा देना तो दूर सैनिकों को अपनी रक्षा तक करना मुसकिल होता जा रहा है।


आओ मिलकर गद्दारों के सेकुलर गिरोह के विरूद्ध काम करें।
हमें आशा है कि सेना के कर्ता धर्ता कमांडर सरकार की इन नितीयों के विरूद्ध जरूर निर्णायक कदम उठाकर इन गद्दार शासकों को गोली से उड़ाकर शासन बयबस्था अपने हाथ में लेकर देश को इस बर्बादी से बचाने के लिए जरूरी कदम उठायेंगे ।






















8 टिप्‍पणियां:

माधव ने कहा…

govt should do something

दीर्घतमा ने कहा…

कांग्रेसियों पर देश को भरोसा नहीं करने लायक है ये सेकुलर क़े नाम पर देशद्रोह कर रहे है .
बेबाक टिप्पड़ी क़े लिए बहुत-बहुत धन्यवाद .

मुहम्मद-रसूल ने कहा…

lage rhoooooooooooooo

सुलभ § Sulabh ने कहा…

हम अपने जवान निरंतर खो रहे हैं :(

हिंदुत्व और राष्ट्रवाद ने कहा…

बहुत अच्छा सुनीलजी,

आप की लेखन शैली गजब की है आप ऐसे मुद्दों को उठाते रहिए..लेकिन गौर करने लायक बात ये है की हिंदू सब कुछ देखकर सब समझकर भी अपने विनाश को अपनी आँखो से देखकर भी जागना क्यूँ नही चाहता है...??? यही चिंता का विषय है..
एक बात बता दूं आपको.. की अगर सब हिंदू एक साथ होकर अपने वोटों की "कीमत" वसूलने लगे तो "तुरिन सरकार" की हर नीति ज़मीन मे दफ़न हो जाएगी..
जय हिन्दुत्व जय हिंद...

hem pandey ने कहा…

हमारी सरकार वोटों की खातिर आतंकियों के प्रति उतनी सख्त नहीं होती जितना होना चाहिए.'चूंकि, अधिकाँश आतंकी मुस्लिम धर्मावलम्बी हैं इस लिए उन पर कारवाई करना मुस्लिम वोटों को नाराज करना है,' यह सोच सरासर राष्ट्रद्रोही है और हमें बहुत नुक्सान पहुंचा रहा है.लेकिन आपका यह कहना -
'हमें आशा है कि सेना के कर्ता धर्ता कमांडर सरकार की इन नितीयों के विरूद्ध जरूर निर्णायक कदम उठाकर इन गद्दार शासकों को गोली से उड़ाकर शासन बयबस्था अपने हाथ में लेकर देश को इस बर्बादी से बचाने के लिए जरूरी कदम उठायेंगे ।'
उचित नहीं. सेना द्वारा शासन व्यवस्था अपने हाथ में लेने के दुष्परिणाम पाकिस्तान में देखे जा सकते हैं.

सुनील दत्त ने कहा…

हेम पांडे जी अगर हम गहराई से विशलेषण करें तो पायेंगे कि अगर आज पाकिस्तान अस्तित्व में है तो सिर्फ सेना की बजह से बर्ना पाकिसतान कब का खत्म हो चुका होता।
जरा सोचो कि एक पिदना सा देश पिछले 60 बर्षो से भारत के नाक में दम किए हुए है व भारत में कहीं भी अपनी इच्छा अनुशार हमला करने में समर्थ है तो ये उसकी कामयावी नहीं तो और क्या है।
जिस पाकिस्तान ने आतंकवाद को अपनी विदेश निती का अंग बनाकर लाखों भारतीयों का खून बहाकर 60 बर्ष तक आधी कस्मीर घाटी पर कब्जा बरकरार रखकर अमेरिका से F16
जैसे उन्नत हथियार प्राप्त करने में सफलता हासिल की है वो पाकिस्तान अपनी रणनिती में सफल सिर्फ औप सिर्फ पाकिस्तानी सेना की बजह से ही है।
दूसरी तरफ भारत ने इस भीड़तन्त्र के परिणामस्वारूप आज तक अपने क्षेत्र कभी चीन के हाथों खोए तो कभी पाकिस्तान के हाथों, लाखों भारतीय नागरिकों विशेषकर हिन्दूओं का कत्ल हुआ सो आलग,अपने ही देश में हिन्दू सरणार्थी बना दिए गए।
अगर इस सबके बाबजूद ये गद्दार नेता आतंकवादियों की मदद किए जा रहे हैं तो समाधान सिर्फ एक ही है अगले 25 बर्ष तक सैनिक सासन बरना न देश बचेगा न नागरिक।
बैसे भी जिस फूट डालो और राज करो की निती को ये गद्दार नेता आगे बढ़ा रहे हैं उसका परिणाम गृहयुद्ध के सिवा और क्या हो सकता है?
हमें आशा है कि आप भी गहराई से चिन्तन करने के परिणामस्वारूप देश की रक्षा की खातिर इस बात से सहमत होंगे कि सैनिक शासन ही एकमात्र समाधान है।

Tafribaz ने कहा…

is aadmi ko orkuch kam hi nahi hai doosro ko bhadkata rehta hai