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मोदीराज लाओ

मोदीराज लाओ
भारत बचाओ

शनिवार, 29 मई 2010

हिन्दू कौन?

आसिन्धु-सिन्धु पर्यन्ता यस्य भारत भूमिका


पितृ भू: पुन्यभूशचैव स वै हिन्दुरितिस्मृत:


अर्थात


सिन्धु के उदगम स्थान से समुद्र पर्यन्त


जो भारत भूमि है उसे जो पितृ-भूमि तथा


पुण्य-भूमि मानता है,वह हिन्दू कहलाता है।




अन्न जहां का--------हमने खाया


वस्त्र जहां के--------------हमने पहने


पानी जहां का-------------------हमने पिया


उसकी रक्षा कौन करेगा-----------हम करेंगे,हम करेंगे


देश की रक्षा कौन करेगा-------------------------हम करेंगे,हम करेंगे


गद्दारों व उनके समर्थकों का सर्वनाश कौन करेगा-----------------------------------------------------------------------------हम करेंगे ,हम करेंगे
साभार
शाखा पुस्तिका


6 टिप्‍पणियां:

aarya ने कहा…

तेरा वैभव अमर रहे माँ हम दिन चार रहे ना रहे
रत्नेश त्रिपाठी

जीत भार्गव ने कहा…

Aapke Blog Pe Har Lekh Padhne Laayak Hai. Secularism Ki Afeem Khaakar Soye Hindu-Jan Ko Jagaane Kaa Yah Upkram Nirantar Chaltaa Rahe. Maa Bhaarti AapKi Kalam Ki Fhaar Salaamat Rakhe. Shubhkaamnaayen

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

Maine ek tippani Suman ke lok sangharsh waale aaj ke lekh par kee hai . aapne padhaa ???

माधव ने कहा…

हर साख पे उल्लू बैठा है अंजामे गुलिस्ता क्या होगा .
किन गदारों को ख़तम करेंगे आप , हमाम में सभी नंगे है

सुनील दत्त ने कहा…

गोदियाल जी झूठ न वोला करो आप इसे टिप्पणी कहते हैं ये तो वो आयना है जिसमें अगर सुमन जी सच में अपना चेहरा देखेंगे तो गद्दारों के साथ कड़ा होने से पहले 100 वार सोचेंगे।देखो हम आपका पूरा लेख ही उठा लाए वोभी आपकी इजाजत के विना।
जनाब आपका लेख सुरू होता है अब


"The Beginning of the Tragedy


Large scale rioting began in the early hours of May 19, 1987 and the maximum damage was done just in course of a few hours. On that fateful morning, thousands of people, already incited by inflammatory speeches and slogans broadcast over public address system in mosques, barricaded the national highway, burnt 14 factories, hundreds of shops and houses, vehicles, and petrol pump, and cast scores of people into flames. The sporadic Hindu reaction was revengeful. Meerut continued in flames between May 19 and May 22, with murder, loot, explosions, and wild rumours further fuelling violence. "

श्रीमान सुमन जी , ब्लॉग पर लगा आपका उम्रदराज फोटो देखकर आपकी इज्जत करता था ! वैसे बामपंथियों ( क्षमा करना मगर अपशब्द में इन्हें xxxपंथियों भी कहा जाता रहा है ) से मैं शुरू से ही घृणा करता हूँ इनकी घटिया मानसिकता की वजह से ! खैर इस बात को छोडिये, लिखने की जहां तक बात है तो मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि मैं आप जैसे वामपंथियों पर आपसे बेहतर एक लंबा लेख लिख सकता हूँ लेकिन मैं दोगले बेशर्म प्राणियों को ज्यादा अहमियत नहीं देता !

सवाल तो बहुत है , आप जैसे वामपंथियों से पूछने के लिए मगर याहां सिर्फ दो सवाल पूछुंगा !
एक) अभी कुछ दिन पहले सुनील दत जी के कुछ सवाल किये थे तो आपने उसके जबाब में हरिद्वार का उदाहरण दिया , मिंया सुमन जी , आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि मैं भी दिल्ली में रहता हूँ और हर शुक्रवार को जुमे की नमाज के लिए जितनी पोलिसे फ़ोर्स लगाईं जाते है , उसकी वजह से बहुत से निरपराध मारे जाते है, अरबों रूपये का खर्च आता है , घंटो सड़के जाम रहती है ! यह मैं अपने एक इन्स्पेक्टर मित्र के हवाले से कह रहा हूँ क्योंकि हाल ही में उसके इलाके में एक वारदात हुई थी जिसमे एक गृहणी मारी गई ! मैंने जब विरोद स्वरुप उसी यह प्रश्न उठाया तो उसका सीधा सा जबाब था कि थाणे की पूरी फाॅर्स शुक्रवार की नमाज के लिए सड़क पर लगा दी गई थी ! सुनील जी ने आपसे सवाल यात्रा के रियायत का पूछा था हरिद्वार का नही, पर तुन जैसे लोग एक सोच के दायरे से बाहर तो झाँक ही नहीं सकते !

दो ) २९ दिसंबर २००८ , फिलिस्तीन पर इस्जारिले हमले के विरोध में जब नै दिल्ली के इजराइली दूतावास पर लाल झंडा लिए एक लम्बी फ़ौज देखी ( भले ही वो ५०-५० रूपये देकर झुग्गियों से उठाये गए हों ) तो लगा कि जय चाँद बहले ही ११०० साल पहले मर चुका मगर उसकी पैदावार काफी फलफूल गई है देश में ! क्या आप बता सकते है एक भी ऐसा वाकया ( मैंने हर बात को करीब से नोट किया उस वक्त और मिरे पास पुक्ता सबूत भी है ) जिसमे २६/११ में पाकिस्तान का किल्येर हाथ होने का बावजूद भी इन जयचंद की औलादों ने पाकिस्तान के दूतावास पर वैसा ही प्रदर्शन किया हो ?
ज्यादा नहीं कहूंगा क्योंकि आप समझदार है!


अन्त में गोदियाल जी सच कहेंतो आज तो आपका आशीर्वाद लेने को मन करता है।
सुनील दत्त

दिगम्बर नासवा ने कहा…

मन समर्पित, तन समर्पित, और यह जीवन समर्पित ..
चाहता हूँ देश की माटी तुझे कुछ और भी दूं ...