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मोदीराज लाओ

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भारत बचाओ

शुक्रवार, 21 मई 2010

किस तरह होते हैं मुसलमानों पर अत्याचार आओ जरा वानगी भर देखें?क्या आप समाधान बताओगे?

पिछले रविवार को हम शुबह शुबह वाराणशी पहुंच गए वो भी नइ सड़क रोड़ पर।वहां पर जो हुआ उसे देख कर हमें ज्यादा हैरानी नहीं हुई शायद आपको भी न हो क्योंकि अब तो ये बात अब सारे देश में हर खाली पड़ी जगह ,चौराहे व सड़क पर आम हो गई है।


हमने सुना था कि वाराणसी गंगा-जमुनी संसकृति का प्रतीक है जिसे मुसलिम भाईयों ने हर कुर्वानी लेकर जिन्दा रखा है अभी हाल ही में इन मुसलिम भाईयों ने हनुमान मन्दिर की कुर्वानी लेकर इसी गंगा-जमुनी तहजीब को आगे बढ़ाने का अपनी तरफ से एक बड़ा प्रयास किया।जो कसर रह गई थी उसे मुसलिम भाईयों ने बंगलादेशीयों के साथ मिलकर हर सड़क किनारे,चौराहे व भीड़भाड़ वाली जगह की कुर्वानी ली उस पर अपने आसियाने व दुकानें खोलकर वो भी इसी तहजीब की खातिर।ये काम मुसलामन सिर्फ काशी में ही थोड़े कर रहे हैं सारे भारत में पूरी लगन से ये अपने इस काम को जाम दे रहे हैं। लोग इसे नजायज कब्जा बताते हैं,हम कहते हैं कि जब प्रधानमन्त्री मनमोहनखान कह चुके हैं कि देश के संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का है तो फिर नजायज कब्जा कैसा।जो लोग इसे नजायज कब्जा बताते हैं उन्हे सरियत व संविधान की जानकारी नहीं।आखिर संविधान ने ही तो मुसलमानों को शरीयत व कुरान शरीफ का पालन करते हुए चार-चार शादियां कर 30-40 बच्चे पैदा करने का अधिकार दिया है।अब जब ये संविधान के अनुसार जीबन जी कर देश से इतनी छोटी सी कुर्वानी ले रहे हैं तो फिर इनके बच्चों के पालन पोषण व रोजगार की जिम्मेदारी भी संविधान वोले तो देश वोले तो हिन्दूओं की ही हुई न ।अब जब उन्होंने देश की कुर्वानी लेने की खातिर(कशमीर समेत चार हिस्सों पहले ही ले चुके हैं) इन बच्चों को पालने के लिए सड़क पर कब्जा कर अपने आसियाने व दुकानें बना ली तो फिर प्रसासन को तो इन्हें विजली पानी उपलब्ध करवाने की ब्यबस्था करनी चाहिए थी सड़क तो है ही । बैसे भी आप बताओ कि सड़कों पर पूंजीवादियों के बाहन चलाने जरूरी हैं या फिर इन बेचारे गरीबों का भरण-पोषण व आसियाना बनाना। शुबह-शुबह जब हमने देखा कि ये वेचारे अपने आसियाने की रक्षा के लिए जब पुलिस पर सिर्फ पत्थर ही बरसा रहे थे तो पुलिस ने इन पर फूल वरसाने के बजाए लाठी चार्ज कर दिया। हमें एकदम एहसास हो गया कि पुलिस सांप्रदायिक ताकतों वोले तो वीएसपी वोले तो हिन्दूओं के इसारे पर काम कर रही हैं ।अगर पुलिस इसी तरह इन्हे सड़कों ,चौराहों व हिन्दूओं की जमीनों पर कब्जा करने से रोकेगी तो भला कौन मुसलमान या सेकुलर हिन्दू ये सब बरदाश कर पाएगा।जिस दिन मनमोहन खान को ये पता चला कि पुलिस ने इन वेचारे मुसलिम भाईयों के साथ ऐसा सलूक किया है उस दिन वो 36 हॉंडग्रनेड व 12 AK47 रखने वाले वेचारे मुसलिम भाई सोराबुद्दीन को मारने वाले गुजरात के पुलिस अधिकारियों की तरह इन्हें भी जेल में डाल देंगे CBI वोले तो कांग्रेस ब्यूरो आफ इनवेसटीगेशन का उपयोग कर।तब होश ठिकाने आयेंगे इस सांप्रदायिक मुख्यामन्त्री के।
विसवास नहीं होता हमारी बातों पर तो कशमीर में काम करने वाले सैनिकों के हालात देख लो कि किस तरह मुसलिम आक्रमणकारियों को सैनिकों से बचाने के लिए मनमोहनखान सरकार ने सैनिकों के हाथ पीछे बांधकर उन्हें इन आक्रमणकारियों से लड़ने की खुली छूट दे दी है ये सब पहले गांव मुहले में होता था कि जब दो लोगों की लड़ाई होती थी तो शातिर बदमाश अपने विरोधी के हाथ पकड़ कर चिल्लाने लगता था लडाई नहीं करनी है लड़ाई नहीं करनी है साथ ही दोस्त को इसारा कर देता था कि बना के ठोको इसे।इस सब के परिणामस्वारू आजकल कशमीर घाटी में शहीद होने वाले सैनिकों की शंख्या कई गुना बढ़ गई है फिर भी अगर कोई मुसलिम आतंकवादी सोनिकों द्वारा मार दिया जाता है तो उसे आम मुसलमान बताकर मारने वाले सैनिक को उस पुलिस के हवाले कर दिया जाता है जो खुद मुसलिम आतंकवादियों से भरी पड़ी है।


उपर से सारे सेकुलर गिरोह (मिडीया सहित )द्वारा ये प्रपेगंडा कि मुसलमानों पर अत्याचार किए जा रहे हैं।


अब आप खुद फैसला कर लो कि कौन किस पर अत्याचार कर रहा है और समाधान क्या है?






9 टिप्‍पणियां:

honesty project democracy ने कहा…

सुनील दत्त जी आपके विचारों में सच्चाई की सार्थक क्रांति के बीज मौजूद हैं ,लेकिन इसके लिए हमें एकजुट होकर लड़ना होगा तब जाकर कामयाबी मिलेगी / आज लोगों में डर की वजह से जो जमीर और इंसानियत मर गयी है हमें सबसे पहले उसे जिन्दा करने के लिए एकजुटता की एक सुरक्षा चक्र बनाने की जरूरत है / आज ताकतवर और कुकर्मी लोग कानून को नहीं जंगल के कानून को मानते है और आम आदमी डर से उसे स्वीकार कर रहा है ,इस स्थिति को हम सब को निडरता को बढाकर रोकना होगा / दिल्ली में कल पूरे देश के ब्लोगरों के सभा का आयोजन किया जा रहा है जो ,नांगलोई मेट्रो स्टेशन के पास जाट धर्मशाला में 3 से 6 बजे तक किया जा रहा है ,आप सबसे आग्रह है की आप लोग इसमें जरूर भाग लें और एकजुट हों / ये शुभ कार्य हम सब के सामूहिक प्रयास से हो रहा है /अविनाश जी के संपर्क में रहिये और उनकी हार्दिक सहायता हर प्रकार से कीजिये / अविनाश जी का मोबाइल नंबर है -09868166586 -एक बार फिर आग्रह आप लोग जरूर आये और एकजुट हों /
अंत में जय ब्लोगिंग मिडिया और जय सत्य व न्याय
आपका अपना -जय कुमार झा ,09810752301

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

जबरदस्त !

संजय कुमार चौरसिया ने कहा…

bahut khoob aur achchhi baat likhi

http://sanjaykuamr.blogspot.com/

vedvyathit ने कहा…

achchhi prstuti ke sath schchai kabyan kiya hai
sadhuvad
ved vyathi

सुनील दत्त ने कहा…

जय कुमार झा जी आपने जो कहा सब ठीक कहा।हम आते जरूर पर जब आपका ये संदेश हमें मिला तब तक समय इतना कम बचा है कि हमारे लिए दिल्ली पहुंचना सम्भव नहीं।
आपको शुभकामनायें।

फ़िरदौस ख़ान ने कहा…

हम हमारे ब्लॉग पर जब भी कोई टिप्पणी करते हैं, हम उसके प्रकाशित ज़रूर करते हैं...कल कई ब्लोगर्स ने हमसे शिकायत की है की हमने उनकी टिप्पणी प्रकाशित नहीं की, जबकि हकीक़त यह है की हमें उनकी टिप्पणियां मिली ही नहीं मिलीं... ऐसा क्यों हुआ है यह कोई तकनीकी जानकार ही जवाब दे सकता है...
जहां तक आपके ब्लॉग पर टिप्पणी की बात है... कल हमने ब्लॉग नहीं देखा... हम जब भी आपके ब्लॉग पर आएंगे टिप्पणी ज़रूर करेंगे...
हम एक बात दावे से कह सकते हैं, मुल्क के मामले में अधिकांश मुसलमान आपके साथ ही खड़े होंगे... ग़ुलामी और दहशतगर्दी कोई भी पसंद नहीं करता... कुछ मुट्ठी भर लोगों की वजह से आप दिल में मुसलमानों के लिए कोई दुर्भावना न रखें, यह हमारा आपसे विन्रम निवेदन है... जो मुसलमान ग़लत बात का साथ देगा, आपसे पहले हम उसका विरोध करेंगे... और हमेशा से करते आए हैं...

Dr. Purushottam Lal Meena Editor PRESSPALIKA ने कहा…

जिन्दा लोगों की तलाश! मर्जी आपकी, आग्रह हमारा!!

काले अंग्रेजों के विरुद्ध जारी संघर्ष को आगे बढाने के लिये, यह टिप्पणी प्रदर्शित होती रहे, आपका इतना सहयोग मिल सके तो भी कम नहीं होगा।
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उक्त शीर्षक पढकर अटपटा जरूर लग रहा होगा, लेकिन सच में इस देश को कुछ जिन्दा लोगों की तलाश है। सागर की तलाश में हम सिर्फ सिर्फ बूंद मात्र हैं, लेकिन सागर बूंद को नकार नहीं सकता। बूंद के बिना सागर को कोई फर्क नहीं पडता हो, लेकिन बूंद का सागर के बिना कोई अस्तित्व नहीं है।

आग्रह है कि बूंद से सागर में मिलन की दुरूह राह में आप सहित प्रत्येक संवेदनशील व्यक्ति का सहयोग जरूरी है। यदि यह टिप्पणी प्रदर्शित होगी तो निश्चय ही विचार की यात्रा में आप भी सारथी बन जायेंगे।

हम ऐसे कुछ जिन्दा लोगों की तलाश में हैं, जिनके दिल में भगत सिंह जैसा जज्बा तो हो, लेकिन इस जज्बे की आग से अपने आपको जलने से बचाने की समझ भी हो, क्योंकि जोश में भगत सिंह ने यही नासमझी की थी। जिसका दुःख आने वाली पीढियों को सदैव सताता रहेगा। गौरे अंग्रेजों के खिलाफ भगत सिंह, सुभाष चन्द्र बोस, असफाकउल्लाह खाँ, चन्द्र शेखर आजाद जैसे असंख्य आजादी के दीवानों की भांति अलख जगाने वाले समर्पित और जिन्दादिल लोगों की आज के काले अंग्रेजों के आतंक के खिलाफ बुद्धिमतापूर्ण तरीके से लडने हेतु तलाश है।

इस देश में कानून का संरक्षण प्राप्त गुण्डों का राज कायम हो चुका है। सरकार द्वारा देश का विकास एवं उत्थान करने व जवाबदेह प्रशासनिक ढांचा खडा करने के लिये, हमसे हजारों तरीकों से टेक्स वूसला जाता है, लेकिन राजनेताओं के साथ-साथ अफसरशाही ने इस देश को खोखला और लोकतन्त्र को पंगु बना दिया गया है।

अफसर, जिन्हें संविधान में लोक सेवक (जनता के नौकर) कहा गया है, हकीकत में जनता के स्वामी बन बैठे हैं। सरकारी धन को डकारना और जनता पर अत्याचार करना इन्होंने कानूनी अधिकार समझ लिया है। कुछ स्वार्थी लोग इनका साथ देकर देश की अस्सी प्रतिशत जनता का कदम-कदम पर शोषण एवं तिरस्कार कर रहे हैं।

अतः हमें समझना होगा कि आज देश में भूख, चोरी, डकैती, मिलावट, जासूसी, नक्सलवाद, कालाबाजारी, मंहगाई आदि जो कुछ भी गैर-कानूनी ताण्डव हो रहा है, उसका सबसे बडा कारण है, भ्रष्ट एवं बेलगाम अफसरशाही द्वारा सत्ता का मनमाना दुरुपयोग करके भी कानून के शिकंजे बच निकलना।

शहीद-ए-आजम भगत सिंह के आदर्शों को सामने रखकर 1993 में स्थापित-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास)-के 17 राज्यों में सेवारत 4300 से अधिक रजिस्टर्ड आजीवन सदस्यों की ओर से दूसरा सवाल-

सरकारी कुर्सी पर बैठकर, भेदभाव, मनमानी, भ्रष्टाचार, अत्याचार, शोषण और गैर-कानूनी काम करने वाले लोक सेवकों को भारतीय दण्ड विधानों के तहत कठोर सजा नहीं मिलने के कारण आम व्यक्ति की प्रगति में रुकावट एवं देश की एकता, शान्ति, सम्प्रभुता और धर्म-निरपेक्षता को लगातार खतरा पैदा हो रहा है! हम हमारे इन नौकरों (लोक सेवकों) को यों हीं कब तक सहते रहेंगे?

जो भी व्यक्ति स्वेच्छा से इस जनान्दोलन से जुडना चाहें, उसका स्वागत है और निःशुल्क सदस्यता फार्म प्राप्ति हेतु लिखें :-
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा, राष्ट्रीय अध्यक्ष
भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास)
राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यालय
7, तँवर कॉलोनी, खातीपुरा रोड, जयपुर-302006 (राजस्थान)
फोन : 0141-2222225 (सायं : 7 से 8) मो. 098285-02666
E-mail : dr.purushottammeena@yahoo.in

सुनील दत्त ने कहा…

जो भी आपने कहा सही कहा। हम आपसे सहमत हैं। हम हर उस अन्दोलन का साथ देने को तैयार हैं जिसमें निर्पराध आम लोगों का कत्ल न हो।

बेनामी ने कहा…

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