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मोदीराज लाओ

मोदीराज लाओ
भारत बचाओ

मंगलवार, 18 मई 2010

क्या बलाग जगत आतंकवादियों व उनके समर्थकों से भरा पड़ा या फिर नपुसंकों से

जब से हम बलागवाणी पर आये हैं तब से हम देख रहे हैं कि जब भी आतंकवादियों का विरोध करने वाली या फिर उनके समर्थकों को वेनकाब करने वाली पोस्ट लिखी जाती है उनमें से अधिकतर बलागवाणी पर उनमें से पिट जाती है जबकि गद्दारों के समर्थन व सुरक्षावलों व भारतीय संस्कृति के विरूद्ध लिखी हर पोस्ट हिट होती है लेखक चाहे कोई भी हो । सिर्फ लगभग 15-20 लोग ऐसे हैं जो आतंकवादियों व गद्दारों के विरूद्ध संघर्ष कर रहे हैं वाकियों का क्या।आओ जरा इस पोस्ट को देखो और बताओ कि क्या झूठ कहा है इसमें अगर सत्य है तो फिर समर्थन या विरोध क्यों नहीं


गद्दारों की सरदार अंग्रेज के खुले समर्थन से प्ररित माओवादी आतंकवादियों ने एक वार फिर आम जनता पर कहर ढाया...सेना को सता अपने हाथ में लेकर आतंकवादियों के समर्थकों को गोली से उड़ा देना चाहिए।




हमने कुछ दिन पहले आपसे उस अंग्रेज का नाम पूछा था जिसे तीन-तीन कांग्रेसियों ने भारत की असमिता की खातिर जोर दार तमाचा जड़ा।परन्तु लगता है कि अब इस अंग्रेज के बढ़ते भारत विरोधी कदमों को रोकना आम या खास भारतीयों के बस की बात नहीं रही क्योंकि जिस वेशर्मी व विना रेक-टोक के ये अंग्रेज व इसके इसारे पर काम करने वाले दिगविजय सिंह जैसे गद्दार अपने भारत विरोधी कुकर्मों को अंजाम दे रहे हैं उसे सिर्फ और सिर्फ सेना ही रोक सकती है और कोई नहीं ।


क्योंकि भाजपा के नेता तो हिन्दूओं की पुरानी आतमघाती उदतारता की आदत के सिकार होकर इतने उदार हो गए हैं कि उन्होंने इस अंग्रेज के हर देशविरोधी काम को देख-सुनकर भी अपनी जुवान पर ताला जड़ लिया है। लगता है उन्होंने मान लिया है कि जनता ने इस गद्दार के गुलाम प्रधानमन्त्री को दोवार चुनकर इस अंग्रेज को गद्दारी का खुला परमिट दे दिया है पर वो क्या जानें की जनता इनकी फूटडालो और राजकरो की नीति की बजह से भ्रम का सिकार हुई है जिसका खामियाजा वो अपनी जान देकर चुका रही है।


देखो आप लोग पढ़े लिखे समझदार लोग हैं इसलिए हम आपके सामने जो भी बात रखते हैं वो तर्क व यथोचित प्रमाण सहित रखते हैं इसके लिए कइ वार पोस्ट जरूरत से ज्यादा लम्बी भी हो जाती है।


जिस दिन सरकार ने माओवादी आतंकवदियों के विरूद्ध आपरेसन ग्रीन हंट शुरू किया था उसी दिन से आतंकवादियों के मददगार इस आपरेशन को अबरूद्ध करने के लिए इन आतंकवादियों के समर्थन में कोई न कोई ब्यान दिए जा रहे हैं।इस मामले में सबसे अग्रणी रहे हैं दिगविजय सिंह।हैरानी की बात तो ये है कि इस गद्दार का इन आतंकवादियों के समर्थन में ब्यान तब आता है जब न आतंकवादियों के हमले में सैनिक शहीद होते हैं या फिर तब जब इन आतंकवादियों के हमलों में आम लोग मारे जाते हैं।मतलब हर ब्यान का मकसद होता है सुरक्षाबलों को आतंकवादियों के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही से रोकना ताकि आतंकवादियों की ताकत वनी रहे और वो सेना व सुरक्षाबलों को निशाना बनाते रहें। आपको प्रमाण चाहिए तो आजका ब्यान सुन लें।इस बार तो हमला सब गद्दारों की सरदार एंटोनियो माइनो मारियो के उस ब्यान के बाद आया है जिसमें इस गद्दार न आतंकवादियों को गरीबों का मसीहा करार देकर इनके विरूद्ध सैनिक कार्यवाही का विरोध किया है वो बी तब जब इन पर कुछ दबाब बनता हुआ दिक रहा था परिणाम 60 लोगों का की शहीदी जिसमें 16 सैनिक थे।आपको समझना चाहिए कि क्योंकि प्रधानमन्त्री सहित सारी सरकार इसी अंग्रेज की गुलाम है इसलिए इसके ब्यान का मतलब है सरकार को इन आतंकवादियों के विरूद्ध कार्यवाही न करने का आदेश।


अब आप सोचेंगे कि हमने इस अंग्रेज को गद्दारों की सरदार क्यों कहा?


वो इसलिए कि मामला चाहे पाक समर्थक आतंकवादियों का हो या फिर चीन समर्थक आतंकवादियों का हर जगह यही गद्दार उनको बढ़ाबा देती हुई प्रतीत होती है।आपको याद होगा कि किस तरह अमर सिंह द्वार बटला हाऊस मुठभेड़ में शहीद आतंकवादी का अपमान किया था। तब ततकालीन पार्टी प्रवक्ता सत्यब्रत चतुर्वेदी जी ने अमर सिंह को शहीद का अपमान करने पर गद्दार कहा था।विना कोई वक्त गवाए गद्दारों की सरदार इस अंग्रेज ने उन्हें प्रवक्ता पद से चलता कर दिया था। अब आपको ये वताने की जरूरत तो नहीं कि कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष कौन है।


दूसरी तरफ इसी पार्टी के महासचिब दिगविजय सिंह ने वार-वार बटला हाऊस इंनकांऊटर के शहीदों का अपमान कर आतंकवादियों का पक्ष लिया।उनके विरूद्ध कोई कार्यवाही अमल में नहीं लाई गई उल्टा दिगविजय सिंह ने सबके सामने सवीकार किया कि वो जो भी आतंकवादियों के लिए कर रहे हैं वो सब इस अंग्रेज व इसके बेटे के इसारे पर हो रहा है जिसका इस अंग्रेज ने कोई विरोध नहीं किया मतलब है दिगविजय सिंह ने सच कहा।


आपके याद होगा हाल ही में महाराष्ट्र में पुलिस अधीक्षक की नियुक्ति अहमद पटेल+गृहमन्त्री महारष्ट्र+आतंवादियों की संयुक्त समिती द्वारा तय किए जाने का मामला सामने आया।आप जानते हैं कि अहमद पटेल इसी अंग्रेज के सलाहकार हैं।उनके विरूद्ध भी कोई कार्यवाही नहीं हुई।


वोफोर्स दलाली कांड के अभियुक्त कवात्रोची के पैसे लंदन बैंक से निकलवाने ततकालीन काननू मन्त्री हंसराज भारद्द्वाज इस अंग्रेज के आदेश पर लंदन पहुंच गए जिसकी बजह से बाद में कोर्ट के आदेश के वावजूद वो पैसे नहीं रोके जा सके। बाद में इसी अंग्रेज के आदेश पर इसकी गुलाम सरकार ने क्वात्रोची के विरूद्ध सारे मामले वापस ये कहकर ले लिए कि इससे देश की छवि खराब होती है मतलब इस अंग्रेज की छवि खराब होती है।क्योंकि गुलाम सरकार की निगाह में ये अंग्रेज ही देश है। इसीलिए ये सरकार इस अंग्रेज की चवि खराब होने को देश की छवि खराब होना कहती है । अनेकों और ऐसे मामले हैं जिससे इस अंग्रेज के भारत विरोधी षडयन्त्र वेनकाब होते हैं।


अब आप बताओ हुई न ये अंग्रेज गद्दारों की सरदार व पनाहगार। आशा है आप भी ऐसे मामलों को अपनी कलम से शब्द देकर जनता के समाने रखकर इसे वेनकाब करेंगे।


अब प्रश्न उठता है कि इस सारी समस्या को कोई लोकतान्त्रिक हल है कि नहीं हमारे विचार में नहीं क्योंकि सारा मीडिया देशविरोधी रूख अपनाकर भारत को तबाह करने पर अमादा है।जिससे आतंकवादियों से लड़ना लगभग असम्भव हो गया है। जैसे ही आतंकवादी हमला करते हैं सब चैनल सुरक्षाबलों पर हमला वोल देते हैं हर हमले में उन्हीं का दोष निकालकर।


आपको याद होगा कि किस तरह सरकार व पार्टी पर पकड़ रखने वाले इन्हीं आतंकवादियों के मददगारों की बजह से दुखी होकर गृहमन्त्री ने लाचारी में तयागपत्र देने की पेशकश कर दी थी। गृहमन्त्री की ये मजबूरी कल उस वक्त एक वार फिर जाहिर हो गयी जब उन्होंने वताया कि उनके पास आतंकवादियों से लड़ने के प्रयाप्त अधिकार नहीं हैं ।


अब आखिर कौन है जो देश के गृहमन्त्री को आतंकवादियों के विरूद्ध कार्यवादी करने से रोक सकता है हमारे विचार में सिर्फ और सिर्फ ये अंग्रेज।


अन्त में अब आतंकवाद व विदेशी षडयन्त्रों से त्रस्त भारत की समस्याओं का एक ही हल है वो है सेना द्वारा सासन अपने हाथ में लेकर गद्दारों का नास करना। वो भी उन्हें चौराहे पर खड़ा कर गोली से उड़ाकर बरना अब इस देश का आम या खास कोई भी इन गद्दारों की पहुंच से बाहर नहीं।


































14 टिप्‍पणियां:

E-Guru Rajeev ने कहा…

सही हमला. एकदम निशाने पर.

बुरके वाली ने कहा…

जमाल ने तुम सबकी बोलती बन्द कर रखी है. उसका सामना करने का साहस है ? कैरान्वी की चुनोतियों का सामना करने का साहस है ? नही ना

Sanjay Sharma ने कहा…

भारत शुरू से गद्दारों का देश है .

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

दिक्कत ये है कि अब इनसे सेना भी अछूती नहीं रही !

kunwarji's ने कहा…

संजय जी मुझे नहीं पता आप कितने अनुभव के आधार पर ये बात कह रहे हो पर मै आपसे सहमत नहीं हूँ!आज तो मै सुनील जी से भी सहमत नहीं हूँ!

ऐसा कतई नहीं है!कुछ एक गन्दी मछली पूरे तालाब को गन्दा दिखा जरुर सकती पर कर नहीं सकती!मेरा तो ऐसा ही मानना है!

वैसे आपकी चिंता जायज़ है!

कुंवर जी,

RAJENDRA ने कहा…

आज की शिक्षा ने जो दृष्टि चाहिए वह शायद
नहीं दी है - सही गलत का ज्ञान होते हुए भी सही का पक्ष
भय के कारन लोग नहीं लेते हैं

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा…

बहुत से लोगों का मानना है कि नक्सलवाद पीड़ित आदमी का संघर्ष है....और इसी तरह से ये मानने वाले भी कम नहीं हैं कि आतंकवाद मुस्लिमों के ऊपर होने वाले जुल्मों की परिणति है..... अब इस तरह की सोच रखने वाले जयादा हैं...........
आतंकवाद का विरोध करना..........मतलब खुद को हिन्दू समर्थक और मुस्लिम विरोधी बताना है...आज के समय में आदमी सब कुछ कर सकता है मुस्लिम विरोध नहीं कर सकता.....सब कुछ बन सकता है पर हिन्दू नहीं बन सकता................
अब समय आ गया है कि हम सब लेखकजन (जैसा कि हम दावा करते हैं) हमें मिलकर आतंकवाद के विरुद्ध, नक्सलवाद के विरुद्ध, भ्रष्टाचार के विरूद्ध और इसी तरह की तमाम सारी समस्याओं के विरुद्ध खुल कर लिखना होगा....
जय हिन्द, जय बुन्देलखण्ड

honesty project democracy ने कहा…

हमारे ख्याल से समुचित पारदर्शिता का अभाव और मिडिया का पैसों के प्रति ज्यादा लगाव व सामाजिक सरोकार से लगातार दूर होते जाना इन परिस्थितियों के लिए जिम्मेवार है /

सुनील दत्त ने कहा…

कुंवर जी हम जानना चाहेंगे कि आप किस बात से सहमत नहीं हैं।

सुनील दत्त ने कहा…

बुरेके वाली जी हम पहले भी कई बार कह चुके हैं कि जानवरों का मुकावला जानबर बनकर ही किया जा सकता है उस सतर तक गिरना हमारे लिए सम्भव नहीं वेहतर हो अगर ये काम आप अपने हाथ में ले लें

सुनील दत्त ने कहा…

गोदियाल जी को छाड़कर वाकी सबसे सहमत।
वेशक सेना मे थोड़ी बहुत कमी आई हो फिर भी वाकी सब संस्थाओं के मुकावले में आज भी सेना पर सबसे अधिक भरोसा किया जा सकता है।हमने एक सर्वे किया था जिसमें 92% लोगों ने देश में अगले 20 वर्ष तक सैनिक शाशन का समर्थन किया था ।

सुनील दत्त ने कहा…

संजय जी वेशक भारत में गद्दारों की बहुत बड़ी शंख्या है पर ये गद्दारी का चलन शुरू से नहीं है।ये कब और कैसे शुरू हुआ इस पर हम अध्ययन कर रहे हैं बहुत जल्दी आपके सामने रखेंगे अगर किसी और ने नहीं रखा तो ।

सुलभ § सतरंगी ने कहा…

राष्ट्रहित में विदेशी साजिशों के विरोध में अपने स्वर को मुखर तो करना ही होगा

dr.aalok dayaram ने कहा…

आज की नपुंसक सरकार से माओवादी और इसलामी आतंकवाद से निपटने की आशा करना ही बेमानी है। आतंकवादी हमले हैं कि रूकने के आसार ही नहीं दिखाई दे रहे है जब भी सरकार आधे अधूरे मन से कोई कार्रवाई करने का मन बनाती है तो दिग्विजय जैसे नेता आतंकवादियों की ढाल बनकर खडे हो जाते हैं। सुरक्छा बल के जवान मारे जा रहे हैं,जनता मारी जा रही है और सरकार में बैठे जिम्मेदार लोग कडी कार्रवाई करने का सिर्फ़ बयान जारी कर रहे हैं। तुष्टिकरण की नीति के भयंकर परिणाम सामने आने लगे हैं। कठपुतली प्रधान मंत्री लाचार दिख रहे हैं। मिडिया दोगली नीति पर चल रहा है।हालत ऐसे बनते जा रहे हैं कि जिसमें सेना की सक्रिय भूमिका पर गंभीरता से विचार करना चाहिये।