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मोदीराज लाओ

मोदीराज लाओ
भारत बचाओ

गुरुवार, 27 मई 2010

क्या लोकसंघर्ष,विस्फोट काम व लख़नऊ ब्लॉसगर्स असोसिएशन जबाब देगें।-2


आपसे हमने जो प्रश्न पूछे वेशक उनमें से बहुत से प्रश्नों का समाधान आपके पास नहीं न ही वो सब आपके कारण हो रहा है लेकिन दुख के साथ कहना पड़ता है कि आप लोग एक आक्रमक समुदाए से सबन्धित आतंकवादियों के भड़ाकाऊ व घृणा फैलाने वाले कामों का विरोध करने के बजाए उनके घृणा फैलाओ अभियान के परिणामसवारूप हिन्दूओं पर हुए सब हमलों का दोष हिन्दूओं व सुरक्षावलों के सिर मड़कर एक तरह से उनके द्वारा फैलाए जा रहे आतंकवाद को खुला समर्थन दे रहे हैं।


• जिस तरह का लेख हिन्दूओं को अपमानित करने के लिए लख़नऊ ब्लॉजगर्स असोसिएशन पर लिखा गया अगर हिन्दू भी उस पर उसी तरह की प्रतिक्रिया करें जैसी मुसलमानों ने सिमोगा में की कई दिनों तक हिंसा फैलाकर व समाचार पत्रों के कार्यालयों को जलाकर की तो फिर परिणाम स्वारूप मारे गए हिन्दूओं और मुसलामानों के कत्ल के लिए क्या लख़नऊ ब्लॉगर्स असोसिएशन जिम्मेवारी लेने को तैयार है?
भगवान न करे ऐसी कोई हिंसा हो लेकिन अगर होती है तो फिर इस वात की क्या गारंटी है कि लोकसंघर्ष,विस्फोट काम उस दंगे के लिए हिन्दूओं व सुरक्षावलों को जिम्मेवार ठहराकर मुसलमानों को अगले दंगे के लिए भड़काना शुरू कर देंगे?


• जिस तरह आप लोग गुजरात दंगो के लिए हिन्दूओं को शूली पर टांगने की बात कर रहे हैं अगर उसी तरह हिन्दू भी हिन्दूओं को जिन्दा जलाने वाले 2000 मुसलिम आतंकवादियों ( जो वास्तविक रूप से दंगों के असली गुनाहकार हैं ठीक उसी तरह जिस तरह अनवर जमाल और सलीमखान लगातार हिन्दूओं के आस्थ केन्द्रों पर हमला कर नए दंगे की भूमिका तैयार कर रहे हैं)को सूली पर टांगने के लिए अभियान शुरू कर दें जिन्होंने ट्रेन रोककर आग लगाई थी तो ?


• अगर विस्फोट काम वास्तब में मानबता की पक्षधर हैं तो 23 बर्ष पहले हुए मेरठ दंगों जिसके लिए भी मुसलिम आतंकवादी जिम्मेवार थे का दोष हिन्दूओं व सुरक्षावलों पर डालकर मुसलिम आतंकवादियों को फिर से दंगा भड़काने के लिए भूमिका तैयार करने का क्या मतलब ?
 सच्चाई पढ़ो जरा।


"The Beginning of the Tragedy


Large scale rioting began in the early hours of May 19, 1987 and the maximum damage was done just in course of a few hours. On that fateful morning, thousands of people, already incited by inflammatory speeches and slogans broadcast over public address system in mosques, barricaded the national highway, burnt 14 factories, hundreds of shops and houses, vehicles, and petrol pump, and cast scores of people into flames. The sporadic Hindu reaction was revengeful. Meerut continued in flames between May 19 and May 22, with murder, loot, explosions, and wild rumours further fuelling violence. "


• जिस तरह आप लोग हत्याओं की सालगिराह मनाने का चलन चला रहे हैं ठीक उसी चलन का पालन करते हुए अगर हिन्दू आज तक मुसलिम आतंकवादियों द्वारा की गई हिन्दूओं की हत्याओं की सालगिराह मनाना सुरू कर दें तो ? उसके परिमामस्वारूप पैदा हुए बातबरण की बजह से होने वाली हत्याओं के लिए क्या विस्फोट काम जिम्मेवारी लेने को तैयार है अगर नहीं तो फिर ऐसी उकसाने वाली कार्यवाही क्यों ?


• जिस तरह आप गुजरात दंगो में हुई कुल 1500 हत्याओं के लिए सीधे हिन्दूओं व सुरक्षावलों को जिम्मेवार ठहराते हैं क्या उसी तरह आपने कभी कशमीरघाटी में हुई 100000 मौतों व उजाड़े गए 500000 लोगों के लिए मुसलमानों व उनके सेकुलर नेताओं को कभी जिम्मेवार ठहराया क्या ?


• क्या आपने कभी सोचा कि क्यों वहीं पर दंगे होते हैं जहां पर हिन्दूओं की जनशंख्या कम होती है ?


• क्या आपने की सोचा कि अगर हिंसा हिन्दूओं ने फैलानी हो तो वो अपने बहुमत वाले क्षेत्रों में फैलायेंगे या फिर जहां वो कम हैं वहां पर ?


• आपको समझना चाहिए कि आज देश के कई ऐसे राज्य हैं जहां हिन्दूओं की जनशंख्या 90% से अधिक होने के वावजूद गैर हिन्दू मुख्यामन्त्री हुए हैं क्या ऐसी ही कल्पना लगभग 50% हिन्दू अबादी वाले जम्मू कसमीर में हिन्दू मुख्यमन्त्री होने की कर सकते हैं?


• अगर हिन्दू और मुसलमान एक जैसे हिंसक होते तो क्या 80% हिन्दू अबादी वाले सारे भारत से मुसलामनों का सफाया उसी तरह न कर दिया जाता जिस तरह कशमीर घाटी व उतर पूर्व के कई राज्यों से हिन्दूओं का सफाया कर दिया गया ?


• क्या आपने आज तक कभी इस वात का विरोध किया कि बच्चों की छात्रवृतियों का आधार सांप्रदाए नहीं होना चाहिए जो कि इस सेकुलर सरकार द्वारा वना दिया गया?


• जिन बच्चों को आप सांप्रदाए के आधार पर बंचित करेंगे क्या वो कभी सर्वघर्मसम्भाव के रास्ते पर चल सकेंगे?


• देखो मेरे भाई आज फूट डालो और राज करो की निती अपने चर्म पर है तो क्या आपकी कलम इस फूट डालो और राज करो की निती के विरूद्ध नहीं चलनी चाहिए?


• अगर आप बास्तब में समझते हैं कि आतंकवादी सही हैं और सुरक्षाबल गलत तो फिर खुल के कहो न कि तुम आतंकवादियों के समर्थक हो फिर देखो जरा परिणाम क्या होता है?


• जब देश सेकुलर है तो फिर देश में धर्म आधारित पाठशालाओं व उनको सरकारी सहयता का क्या मतलब?


• जब देश सेकुलर है तो देश के मदरसों को आतंकवाद व अलगाववाद की जड़ साऊदी अरब से आर्थिक सहायता क्यों ?


• जब देश के मन्दिरों पर सरकार का कब्जा है तो फिर मसजिदें और चर्च सरकार के कब्जे में क्यों नहीं ?


• .. जिन लोगों को भारत की सभ्यता संस्कृति, सुरक्षावलों, नयाय प्रक्रिया व संविधान पर कोई भरोशा नहीं तो क्या उनको आतंकवादियों की पनागाह पाकिस्तान या चीन जाकर नहीं बस जाना चाहिए?














9 टिप्‍पणियां:

सलीम ख़ान ने कहा…

aapke liye to mera ek hi brhmaastr kafi hai... himmat hai to padh lijiyega...

http://swachchhsandesh.blogspot.com/search/label/%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A4%BE

VICHAAR SHOONYA ने कहा…

100% sahmat.

paramjitbali-ps2b ने कहा…

विचारणीय पोस्ट।

सुनील दत्त ने कहा…

@ सलीम खान
सच्चाई जाननी है तो जरा हमारे दो लेख सांप्रदायिक दंगे जिम्मेदार कौन व आतंकवाद पर सेकुलर गिरोह की भ्रमित सोच जरूर पढें।
हम सिर्फ इतना ही कहेंगे कि जो आग आप लगा रहे हो शायद आपको उसके अन्जाम की कल्पना तक नहीं।अगर अनजाने में कर रहे तो छोड़ दो झूठ फैलाकर आग लगाना और अगर जानबूझ कर रहे हो तो समझ लो आप जैसे लोग ही इस्लाम का नाम बदनाम कर रहे हो।

इस्लाम की दुनिया ने कहा…

बढे चलो

इस्लाम की दुनिया ने कहा…

लखनऊ ब्लोगर एसोसियेशन के केरान्वी, असलम कासमी , सलीम खान, एजाज इदरीसी, जमाल, जीशान सभी हराम की औलादें हैं, ये हरामी किसी नये दंगे की पृष्ठभूमि बना रहे हैं, हिन्दू- देवताओं को गाली बकते हैं ,

इस्लाम की दुनिया ने कहा…

सेकुलर मीडिया केरान्वी, असलम कासमी , सलीम खान, एजाज इदरीसी, जमाल, अयाज, जीशान जैसे हराम की औलादों का साथ देता है,

सुनील दत्त ने कहा…

@
इस्लाम की दुनिया

आप की सब बातों से हम सहमत हैं।हम समझते हैं कि ये लोग अलगाव पैदा कर देश के साथ गद्दारी कर रहे हैं।अगर आपकी बातों के भवार्थ पर जायें तो जो भी देश के साथ गद्दारी करे उसे ऐसा कहा जा सकता है फिर भी अगर आप थोड़ा सा संयम से अपनी बात कहें तो हमें खुशी होगी

शंकर फुलारा ने कहा…

आपके उठाये प्रश्न वास्तव में गंभीर हैं, पर ; उनके लिए जो निष्पक्ष मानवता वादी सोच रखते हों | और "ये" 'मार्क्सवादी और कठमुल्ला वादी सोच' वाले मानवतावादी हो ही नहीं सकते | "बिच्छू" को कितना ही प्यार करो वह "डंक" ही मार कर (उत्तर) प्यार करेगा |